• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

किस्मत का खेल

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
किस्मत का खेल पार्ट --97

गतान्क से आगे.......

पोस्ट मार्टम रिपोर्ट सब की आ चुकी थी, पंचनमा हो चुका था. आइ विटनेस तीनो हॉस्पाइटलाइस्ड थे और कभी भी कोई भी आड्वोकेट और जॅयैपर के मेयर आ सकते थे और आरके वो भी तो आ सकता था. वैसे आरके को मेस्सेज मिल चुका था कि इन्स रवि मारा गया है और बाकी सब गिरफ्तार हो चुके है. इसीलिए उसने अपने बचाव मे पहले से ही तैयारी कर ली थी . पोस्ट मार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि आरके के दोनो आदमियो को च्छुरे से मारा गया था, क्यूकी मर्डर का वेपन मिल चुका था. इन्स रवि की सर्विस रिवॉल्वोर भी मिली थी और उसमे फिंगर प्रिंट पर रवि के ही निशान थे. जब कि च्छुरे पर निशान बिरजू के साबित हो चुके थे. क्यूकी बेहोशी की हालत मे ही नीशी और बिरजू के फिंगरप्रिंट लिए जा चुके थे. तो कुल मिला के बिरजू का केस बिल्कुल वीक था. जय के बारे मे अभी कुछ नही कहा जा सकता था. लेकिन नीशी के भी फिंगरप्रिंट छ्हुरे के फिंगरप्रिंट से मिल जाते थे. इसका मतलब रवि का खून नीशी ने किया था. धीरे धीरे मिस्टर. सिन्हा के सामने चित्र नज़र आ रहा था. लेकिन फिर भी बॅंक लूट के बारे मे अभी भी कुछ हासिल नही हो पा रहा था. ये सब कहानी तो उस लड़की निशा के आसपास की ही थी. लेकिन असली फिल्म तो साजन और जय के मूह से ही जानी जा सकती है ऐसा मिस्टर. सिन्हा को महसूस हो रहा था.

आख़िर मिस्टर. सिन्हा ने एक जुगाड़ खेलने की कोशिश की और वो उठकर साजन के पास गये. साजन उसे देखकर ही खड़ा हुवा और कहा,’’सर आप कहाँ गायब हो जाते हो ? प्लीज़ मुझे निशा से मिलाओ या निशा को यहाँ बुलाओ. मैं उसे देखना चाहता हू.’’

मिस्टर. सिन्हा थोड़ी देर खड़े रहे फिर बोले,’’चलो मेरे साथ.’’

साजन ने पुछा,’’कहाँ ?’’

मिस्टर. सिन्हा ने इशारा किया और साजन पिछे पिछे चल पड़ा. पोलीस जीप मे ट्रॅफिक चीरती हुई पोलीस वॅन हॉस्पिटल के पास अटकी तो साजन ने तुरंत कुछ शंका पड़ते हुए पुच्छ लिया,’’सर निशा को कुछ हुवा है क्या ?’’

इस बार भी मिस्टर. सिन्हा चुप रहे तो साजन को कुछ दाल मे काला महसूस हुवा और वो जल्दी जल्दी मिस्टर. सिन्हा के साथ चलने लगा. साजन ने मिस्टर. सिन्हा का चेहरा देखकर महसूस कर लिया कि ज़रूर कुछ अनहोनी हुई है और उसे जब सच्चाई का सामना कराया गया तब…..

साजन निशा की लाश देखकर स्तब्ध हो गया और पास मे उसकी मा की लाश देखकर बस शुन्य सा हो गया. मिस्टर. सिन्हा बिल्कुल साजन के चेहरे का अभ्यास कर रहे थे. लेकिन साजन के चेहरे की रेखाए बता रही थी कि उसको गहरा सदमा पहुचा है. पाँच मिनिट के बाद साजन ने सिर्फ़ इतना पुछा,’’सर मेरे दोस्त सब कहाँ है ?’’

मिस्टर. सिन्हा ने कहा,’’हॉस्पिटल मे.’’

साजन ने चेहरा उठाकर मिस्टर. सिन्हा के सामने देखा और फिर मिस्टर. सिन्हा ने सिर्फ़ इतना कहा,’’जान ना चाहोगे इसकी मौत कैसे हुई ? (निशा की तरफ उंगली दिखाते हुए).’’

साजन सिर्फ़ देखता रहा और मिस्टर. सिन्हा आगे बोले,’’ये रिपोर्ट देख लो और जान लो कि इस लड़की पर बलात्कार हुवा है.’’

ये सुनते ही साजन की आँखे बंद हुई और चेहरा कुछ समय के लिए तंग हुवा जैसे वो सदमे को सहन करना सीख रहा था. फिर वो आँखे खोलकर बोला,’’सर आप ने वादा नही निभाया. अगर आप मुझे ले जाते तो ये नौबत तक नही आती और ये लड़की अभी तक ज़िंदा होती.’’

मिस्टर. सिन्हा ने तुरंत पलटकर तेज़ आँखो से साजन की ओर देखा और कहा,’’नही बच्चे इसकी जान तुम सब दोस्तो ने मिलकर ली है. अगर पहले से सबकुछ बता देते तो इसका ये हाल नही होता.’’

साजन कुछ नही बोला और मिस्टर. सिन्हा ने कहा,’’अभी भी वक़्त है सबकुछ बता दो वरना फिर बहुत पछ्ताओगे.’’

तीन चार बार उकसाने के बाद साजन अचानक बोला,’’सर मुझे इसका अंतिम संस्कार करना है.’’ और अपनी आँखे वेधक बनाकर मिस्टर. सिन्हा के सामने देखा. साजन की आँखे देखकर मिस्टर. सिन्हा ने कुछ नही कहा और साजन को निशा की डेड बॉडी को अंतिम संस्कार के लिए अनुमति मिल गयी.

दोपहर के 1 बजे साजन ने नज़दीक के स्मशन्गृह मे अपनी होनेवाली पत्नी का अंतिम संस्कार किया और पोलीस उसे लॉकप रूम मे वापस ले गयी और क्रांतिकारियो का एक चॅप्टर हमेशा के लिए क्लोज़ हो चुका था.

इतने समय मे मिस्टर. सिन्हा ने बॅंक लूट की वीडियो कॅसेट फिर एक बार देख ली थी. और अब उसने तहकीकात शुरू की . साजन स्मशन्गृह से वापस आए इसके पहेले नागपुर कॉलेज मे साजन और उसके दोस्तो का पूरा लिस्ट फिर से एक बार कन्फर्म किया था और मिस्टर. सिन्हा ने उदयन और मुनीश के बारे मे तहकीकात शुरू कर दी थी.

शाम तक साजन शोक्मग्न है तब तक ये दोनो मिल जाने चाहिए थे वरना अगर पॉलिटिशियन्स या आड्वोकेट्स बीच मे आए तो पोलीस का खेल ख़त्म हो सकता था. लेकिन मिस्टर. सिन्हा का नसीब ज़ोर कर रहा था कि नीशी अभी भी कमजोर होकर बेहोश थी, बिरजू की हालत और भी सीरीयस हो रही थी. जे कुछ बोलने को तैयार नही था और साजन शुन्य हो चुका था.

 


मिस्टर. सिन्हा ने टाइयर के निशान से तहकीकात शुरू कर के आगे देल्ही तक इंक्वाइरी करवाई थी और जहाँ जहाँ फ्रेश होने के लिए या पेट्रोल के लिए गाड़ी रोकी थी उसका भी पता किया था. उदयन और मुनीश के स्क्रॅच भी निकालकर जहाँ जहाँ भी ये दोनो जा सकते थे वहाँ वहाँ के सारे एरिया की पोलीस स्टेशन मे तस्वीरे पहुचाई गयी थी. और आख़िर मे उस चार दिनो के बाद पता चला था कि ये दोनो बाइक से देल्ही तक पहुचे थे और देल्ही से बाइ प्लेन बागड़ोगरा पहुचे थे और वहाँ से बाइ बस दार्जीलिंग के लिए रवाना हुए थे. दार्जीलिंग से दो दिन गंगटोक (सिक्किम) और वहाँ से वापस बाइ बस जलपागुरी और बागड़ोगरा और फिर कॅल्कटा और वहाँ से बाइ प्लेन कन्याकुमारी. ये सफ़र केवल चार दिनो मे तय कर के दोनो वापस आए थे.

और आख़िर पाँचवे दिन शक के आधार पर कन्याकुमारी के पोलीस ऑफीसर ने उदयन के घर से ही दोनो को एकसाथ गिरफ्तार किया और इसी के साथ क्रांतिकारियो की गिरफ्तारी सम्पुर्न हो चुकी थी.

दोनो को जॅयैपर लाया गया और साजन से दूर एक अलग रूम मे दोनो को बंदी बनाकर रखा गया था. इन चार दिनो मे मिस्टर. सिन्हा ने रणवीरसींह और खेंगरसिंह पर भी नज़र रखी थी. लेकिन उसमे से किसी ने कुछ हलचल नही की थी. लेकिन मिस्टर. सिन्हा जानते थे कि ये उसकी बाहरी शांति है. अंदर तो आग लग चुकी थी. क्यूकी मिस्टर. सिन्हा को केस से हटवाने के लिए तजवीज़ चालू हो चुकी थी.

ईसलिए मिस्टर. सिन्हा के पास बहुत कम वक़्त था. लेकिन इन पाँच दिनो मे ना तो साजन ने मूह खोला था और ना तो जय तैयार हो रहा था कुछ बोलने के लिए. लेकिन अब जय उतावला हो रहा था. उसे शक हो रहा था कि उसको साजन से क्यू नही मिलने दिया जा रहा है. नीशी और बिरजू कहाँ है ? उदयन और मुनीश उसकी राह देख रहे होंगे. लेकिन पोलीस का इतना कड़ा बन्दोबश्त था कि कोई भी दोस्त हिल नही पा रहे थे. सिर्फ़ देख रहे थे कि क्या हो रहा है ? उस तरफ नीशी स्वस्थ हो चुकी थी. लेकिन बिरजू की हालत बहुत खराब होती जा रही थी. उदयन को निशा की मौत के समाचार दे दिए गये थे लेकिन वो तो पहले से ही वे जानते थे लेकिन जब वातया गया कि सब लोग गिरफ्तार हो चुके है ता कि वो कुछ बोल दे. क्यूकी वो सब से कमजोर कड़ी था.

मिस्टर. सिन्हा का ये पासा भी फैल हो गया क्यूकी उदयन समाचार सुनते ही मानसिक तौर पर पहले से ही टूट चुका था. लेकिन गिरफ्तारी के समाचार सुनते ही पागल जैसा हो गया. उसे और भी झूठ बताया गया था कि साजन ने सबकुछ कबूल कर लिया है. आक्च्युयली नीशी, जय और मुनीश को भी बारी बारी ये ही बताया गया था कि साजन ने सबकुछ इकरार कर लिया है. लेकिन एक भी दोस्त किसी ना किसी वजह से आगे कुछ बोलने को तैयार नही था और ज़िद लेकर बैठा था कि एकदुसरे को मिले बिना कुछ नही बोलेंगे.

और एक आखरी दाव मिस्टर. सिन्हा ने खेलना चाहा. उसने छटे दिन सब दोस्तो की एक मीटिंग रखी. वहाँ सीसी- कैमरा रखे गये और माइक्रोफोन भी रखा गया ता कि दोस्तो मे जो बातचीत हो वो जाना जा सके. आख़िर सब को बताया गया कि साउंड प्रूफ रूम मे सब को मिलने की इज़ाज़त दे दी गयी है. लेकिन एक काम मिस्टर. सिन्हा ने एक पोलीस ऑफीसर के नाते और केस सॉल्व करने के इरादे किया कि साजन को रूम मे जाने से पहले बताया गया कि निशा पर रेप उसके दोस्तो मे से ही किसी ने किया है और उसके साथ उस दिन की पूरी जंगल वाली कहानी भी बताई गयी. ता कि मानसिक संतुलन खोकर शायद कोई कुछ बोल दे और सरकारी विटनेस बन ने को तैयार हो जाए.

क्रमशः……………………….

 


PM report sab ki aa chuki thi, panchnama ho chuka tha. Eye witness tino hospitelised the aur kabhi bhi koi bhi advocate aur Jaipur ke mayor aa sakte the aur RK vo bhi to aa sakta tha. Vaise Rk ko messege mil chuka tha ki Ins Ravi mara gaya hai aur baki sab giraftar ho chuke hai. Isiliye usne apane bachav me pehle se hi taiyari kar lit hi. PM report se pata chala tha ki RK ke dono aadamiyo ko chhure se mara gaya tha, kyuki murder ka weapon mil chuka tha. Ins Ravi ki service revolvore bhi mili thi aur usme finger print par Ravi ke hi nishan the. Jab ki chhure par nishan Birju ke sabit ho chuke the. Kyuki behoshi ki halat me hi Nishi aur Birju ke fingerprint liye ja chuke the. To kul mila ke Birju ka case bilkul week tha. Jay ke bare me abhi kuch nahi kaha ja sakta tha. Lekin Nishi ke bhi fingerprint Chhure ke fingerprint se mil jate the. Iska matlab Ravi ka khun Nishi ne kiya tha. Dhire dhire Mr. Sinha ke samne chitra najar aa raha tha. Lekin fir bhi bank lut ke bare me abhi bhi kuch hasil nahi ho pa raha tha. Ye sab kahani to us ladki Nisha ke aaspas ki hi thi. Lekin asali film to Sajan aur Jay ke muh se hi jani ja sakti hai aisa Mr. sinha ko mehsus ho raha tha.

Akhir Mr. sinha ne ek jugar khelne ki koshish ki aur vo uthkar Sajan ke pas gaye. Sajan use dekhkar hi khada huva aur kaha,’’Sir aap kaha gayab ho jate ho ? Please mujhe Nisha se milao ya Nisha ko yahan bulao. Main use dekhana chahta hu.’’

Mr. Sinha thodi der khade rahe fir bole,’’Chalo mere sath.’’

Sajan ne puchha,’’Kaha ?’’

Mr. Sinha ne ishara kiya aur Sajan pichhe pichhe chal pada. Police jeep me traffic chirati huyi police van hospital ke pas ataki to Sajan ne turant kuch shanka padate huye puchh liya,’’Sir Nisha ko kuch huva hai kya ?’’

Is bar bhi Mr. Sinha chhup rahe to Sajan ko kuch dal me kala mehsus huva aur vo jaldi jaldi Mr. Sinha ke sath chalne laga. Sajan ne Mr. Sinha ka chehra dekhkar mehsus kar liya ki jarur kuch anhoni huyi hai aur use jab sachchai ka samna karaya gaya tab…..

Sajan Nisha ki lash dekhkar stabdh ho gaya aur pas me uski ma ki lash dekhkar bas shunya sa ho gaya. Mr. Sinha bilkul Sajan ke chehre ka abhyas kar rahe the. Lekin Sajan ke chehre ki rekhaye bata rahi thi ki usko gehra sadama pahucha hai. Panch minute ke bad Sajan ne sirf itana puchha,’’Sir mere dost sab kaha hai ?’’

Mr. Sinha ne kaha,’’Hospital me.’’

Sajan ne chehra uthakar Mr. Sinha ke samne dekha aur fir Mr. Sinha ne sirf itana kaha,’’Jan na chahoge iski maut kaise huyi ? (Nisha ki taraf ungali dikhate huye).’’

Sajan sirf dekhata raha aur Mr. Sinha aage bole,’’Ye report dekh lo aur jan lo ki is ladki par balatkar huva hai.’’

Ye sunte hi Sajan ki ankhe bandh huyi aur chehra kuch samay ke liye tang huva jaise vo sadme ko sahan karna sikh raha tha. Fir vo ankhe kholkar bola,’’Sir aap ne vada nahi nibhaya. Agar aap mujhe le jate to ye naubat tak nahi aati aur ye ladki abhi tak zinda hoti.’’

Mr. Sinha ne turant palatkar tez ankho se Sajan ki aur dekha aur kaha,’’Nahi bachche iski jan tum sab dosto ne milkar li hai. Agar pehle se sabkuch bata dete to iska ye hal nahi hota.’’

Sajan kuch nahi bola aur Mr. Sinha ne kaha,’’Abhi bhi waqt hai sabkuch bata do varna fir bahut pachhtaoge.’’

Tinchar bar ukasane ke bad Sajan achanak bola,’’Sir mujhe iska antim sanskar karna hai.’’ Aur apani ankhe vedhak banakar Mr. Sinha ke samne dekha. Sajan ki ankhe dekhkar Mr. Sinha ne kuch nahi kaha aur Sajan ko Nisha ke dead body ko antim sanskar ke liye anumati mil gayi.

Dopahar ke 1 baje Sajan ne najdik ke smashangruh me apani honewali patini ka antim sanskar kiya aur police use lockup room me vapas le gayi aur krantikariyo ka ek chapter hamesha ke liye close ho chuka tha.

Itane samay me Mr. Sinha ne bank lut ki video cassette fir ek bar dekh lit hi. Aur ab usne tahkikat shuru kit hi. Sajan smashangruh se vapas aye iske pahele Nagpur college me Sajan aur uske dosto ka pura list fir se ek bar confirm kiya tha aur Mr. Sinha ne Udayan aur Munish ke bare me tahkikat shuru kar di thi.

Jan tak Sajan shokmagna hai tab tak ye dono mil jane chahiye the varna agar politicians ya advocates bich me aye to police ka khel khatm ho sakta tha. Lekin Mr. Sinha ka naseeb jor kar raha tha ki Nishi abhi bhi kamjor hokar behosh thi, Birju ki halat aur bhi serious ho rahi thi. Jay kuch bolne ko taiyar nahi tha aur Sajan shunya ho chuka tha.

Mr. Sinha ne tyre ke nishan se tahkikat shuru kar ke aage Delhi tak inquiry karvayi thi aur jaha jaha fresh hone ke liye ya petrol ke liye gadi roki thi uska bhi pata kiya tha. Udayan aur Munish ke scratch bhi nikalkar jaha jaha bhi ye dono ja sakte the vaha vaha ke sare area ki police station me tasveere pahuchai gayi thi. Aur akhir me us char dino ke bad pata chala tha ki ye dono bike me Delhi tak pahuche the aur Delhi se by plane bagdogara pahuche the aur vaha se by bus Darjeeling ke liye ravana huye the. Darjeeling se do din Gangtok (Sikkim) aur vaha se vapas by bus jalpaiguri aur bagdogra aur fir Calcutta aur vaha se by plane kanyakumari. Ye safar keval char dino me tay kar ke dono vapas aye the.

Aur akhir panchave din shak ke adhar par Kanyakumari ke police officer ne Udayan ke ghar se hi dono ko eksath giraftar kiya aur isi ke sath krantikariyo ki giraftari sampurna ho chuki thi.

Dono ko Jaipur laya gaya aur Sajan se dur ek alag room me dono ko bandi banakar rakha gaya tha. In char dino me Mr. Sinha ne Ranveersinh aur Khengarsinh par bhi najar rakhi thi. Lekin usme se kisi ne kuch halchal nahi kit hi. Lekin Mr. Sinha jante the ki ye uski bahari shanti hai. Andar to aag lag chuki thi. Kyuki Mr. sinha ko case se hatvane ke liye tajvij chalu ho chuki thi.

Iisliye Mr. sinha ke pas bahut kam waqt tha. Lekin in panch dino me na to Sajan ne muh khola tha aur na to Jay taiyar ho raha tha kuch bolne ke liye. Lekin Ab Jay utavala ho raha tha. Use shak ho raha tha ki usko Sajan se kyu nahi milne diya ja raha hai. Nishi aur Bijru kaha hai ? Udayan aur Munish uski rah dekh rahe honge. Lekin police ka itana kada bandobasht tha ki koi bhi dost hil nahi pa rahe the. Sirf dekh rahe the ki kya ho raha hai ? Us taraf Nishi svasth ho chuki thi. Lekin Birju ki halat bahut kharab hoti ja rahi thi. Udayan ko Nisha ki maut ke samachar de diye gaye the lekin vo to pehle se hi ve jante the lekin jab vataya gaya ki sab log giraftar ho chuke hai ta ki vo kuch bol de. Kyuki vo sab se kamjor kadi tha.

Mr. Sinha ka ye pasa bhi fail gaya kyuki Udayan samachar sunte hi mansik taur par pehle se hi tut chuka tha. Lekin giraftari ke samachar sunte hi pagal jaisa ho gaya. Use aur bhi juth bataya gaya tha ki Sajan ne sabkuch Kabul kar liya hai. Actually Nishi, Jay aur Munish ko bhi bari bari ye hi bataya gaya tha ki Sajan ne sabkuch ikrar kar liya hai. Lekin ek bhi dost kisi na kisi vajah se aage kuch bolne ko taiyar nahi tha aur zid lekar baitha tha ki ekdusre ko mile bina kuch nahi bolenge.

Aur ek akhari dav Mr. Sinha ne khelna chaha. Usne chatte din sab dosto ki ek meeting rakhi. Vaha cc- camaras rakhe gaye aur microphone bhi rakha gaya ta ki dosto me jo batchit ho vo jana ja sake. Akhir sab ko bataya gaya ki sound proof room me sab ko milne ki izajat de di gayi hai. Lekin ek kam Mr. Sinha ne ek police officer ke nate aur case solve karne ke irade kiya ki Sajan ko room me jane se pehle bataya gaya ki Nisha par rape uske dosto me se hi kisi ne kiya hai aur uske sath us din ki puri jungle wali kahani bhi batayi gayi. Ta ki mansik santulan khokar shayad koi kuch bol de aur govt witness ban ne ko taiyar ho jaye.

kramashah……………………….

 
किस्मत का खेल पार्ट --98



गतान्क से आगे.......

और आख़िर वो दिन आ पहुचा कि सब क्रांतिकारियो को बारी बारी उस रूम मे ले जाया गया. मिस्टर. सिन्हा चौकन्ने होकर हेडफोन लगाकर ही बैठे थे. सीसी-कैमरो के स्विच ऑन कर दिए गये थे. एक तरफ मिस्टर. सिन्हा उत्तेजित थे और दूसरे तरफ सब क्रांतिकारी गिरफ्तार होकर पहली बार मिल रहे थे और वो भी पाँच पाँच दिनो के बाद. पता नही था कि कौन जाने क्या होनेवाला था

मिस्टर. सिन्हा के लिए धीरे धीरे परिस्थिति और भी गंभीर रूप पकड़ रही थी. एक ओर से खेंगरसिंह और रणवीरसींह ने अपनी ओर से बॅक डोर से प्रयास शुरू कर दिए थे कि मिस्टर. सिन्हा को जल्द से जल्द ट्रान्स्फर किया जाए. क्यूकी अगर उसने इस केस मे सक्सेस पा लिया तो अंतिम समय पर इन दोनो पर ही वार हो सकता था. लेकिन दूसरी ओर अभी भी क्रांतिकारियो की अरेस्ट के बारे मे ना तो पब्लिक जानती थी और ना तो उसके पेरेंट्स. हाँ उदयन के घर से दोनो को गिरफ्तार ज़रूर किया गया था लेकिन वो भी कॅष्यूयली किया गया था. जैसे कोई दोस्त ले जा रहा हो ऐसे उसे ले जाया गया था. और ऐसे ऑर्डर भी मिस्टर. सिन्हा ने कन्याकुमारी के पोलीस स्टाफ को दिए थे. इसीलिए अब तक एक भी दोस्तो के पेरेंट्स तक को पता नही था कि वे लोग गिरफ्तार हो चुके है. दूसरी और जिन जिन के लॉकर्स टूटे थे और उसके माल से आरके ने उसको ब्लॅक मैनल करवाया था वो सब पार्टीस की पहुच भी देल्ही तक थी और वे लोग प्रेशर ला रहे थे कि जल्द ही जल्द कुछ पकड़ा जाए ता कि वे लोग हमेशा के लिए किसी ब्लॅक मैंलेर्स से मुक्त हो जाए. लेकिन उन लोगो को भी अंदाज़ा नही था कि बॅंक रॉबरर्स आर अरेस्टेड.

लेकिन मिस्टर. सिन्हा कब तक छुपा सकते थे. हाला कि आरके भी किसी को बोल नही सकता था कि ये लोग गिरफ्तार हो चुके है, वरना वे ही लोग मुसीबत मे आ सकते थे. लेकिन पूरा दारोमदार सिर्फ़ साजन पर था. आरके को विश्वास था कि जो डील उसकी साजन और स्वामी के साथ हुई है उसके बाद साजन ज़रूर इस केस से रिहा हो जाएगा और कुछ आगे हिलचल नही होगी.

मिस्टर. सिन्हा ने दोस्तो की मीटिंग से पहले एक और बढ़िया काम भी किया था कि जिस जिस के लॉकर्स टूटे थे उसकी लिस्ट उसने ले ली थी और उसकी विज़िट करनेवाले थे, क्यूकी उसके प्रेशर से ही उसकी पोस्टिंग फिर जॅयैपर मे हुई थी. इसीलिए उसके लिए पहला आदेश था कि ब्लाकक्मैंलेर्स और रॉबरर्स को पकड़ना और माल कहाँ है, कॅश कहाँ है वो ढूँढना. इसीलिए जब कुछ भी नही हो सका तो उसने सब दोस्तो की मीटिंग करवाई और लाइव रेकॉर्डिंग भी कर लिया. लेकिन दोस्तो की लैंग्वेज वो समझ पाते इसके पहले उसके सामने अभी तक की सब से बड़ी मुसीबत आन पड़ी थी.

निशा की मृत्यु हुई तो उसकी मा साथ मे ही चल बसी थी और साजन ने अंतिम संस्कार कर दिए थे तो मामला वही ख़त्म हो गया था. लेकिन बिरजू की मौत से मिस्टर. सिन्हा की इंक्वाइरी मे सब से बड़ा ब्रेक आ गया. क्यूकी बिरजू आख़िर एक आड्वोकेट का ही बेटा था. साथ मे उदयन मानसिक तौर पे बिल्कुल ख़त्म हो चुका था. इसीलिए उसे तुरंत मेंटल हॉस्पिटल मे शिफ्ट करवाया गया.

मिस्टर. सिन्हा ने सब से पहले बारी बारी सब दोस्तो को बिरजू की मृत्यु के समाचार दिए और बाद मे बिरजू के घरवालो को इनफॉर्म कर दिया और दूसरे दिन बिरजू की बॉडी पोस्ट मार्टम होने के बाद उनकी मदर को सौप दी गयी. रिलेटिव्स उसकी डेड बॉडी लेकर वहाँ से रवाना हो गये. सारे दोस्तो को अंतिम बार मिलने का मौका दिया था. लेकिन बिरजू की मदर और सिस्टर को सारी बात से इनफॉर्म कर दिया गया था और बिरजू की मौत के बाद वे लोग और ज़्यादा कुछ नही कर सकते थे. इसीलिए सब मौन बनाकर चल दिए और हमेशा के लिए दोस्तो के दिल मे एक घाव दे गये थे.

लेकिन कुछ रिपोर्टर्स ने छान बीन के आधार पर आख़िर बात निकाल ही ली और मिस्टर. सिन्हा के आश्चर्या मे दूसरे दिन जॅयैपर के दो लीडिंग न्यूज़ पेपर्स मे हेडलाइन थी. “बॅंक रॉबरर्स आर अरेस्टेड बाइ देल्ही पोलीस ऑफीसर मिस्टर. सिन्हा’’

और सुबह 9 बजे तक हिन्दुस्तान के लीडिंग न्यूज़ पेपर्स के रिपोर्टर्स जॅयैपर पोलीस स्टेशन मे आ डेरा डाल दिया था. मिस्टर. सिन्हा को मजबूरत कुछ कहानी तो बतानी ही पड़ी कि एक लड़की किडनॅप हुई थी और बचाने के लिए कुछ दोस्त गये थे और उस लड़की पर बलात्कार हुवा और मर्डर हुवा. साथ मे दो और आदमियो का मर्डर हुवा. एक दोस्त घायल हुवा और सेपटिक की वजह से उसकी भी डेत हो गयी. एक दोस्त पागल जैसी स्थिति मे है. मेयर का बेटा भी शामिल है. लेकिन अभी नीशी के बारे मे कुछ भी रिपोर्टर्स को नही बताया गया था और ना तो रॉबरी की वीडियो कॅसेट के बारे मे बताया गया था. एक और बात मिस्टर. सिन्हा ने सब रिपोर्टर्स से छिपाई थी वो थी दोस्तो की मीटिंग और उसके लाइव रेकॉर्डिंग की बात.

और दोपहर 12 बजे तक तो पूरे जॅयैपर मे हलचल मच गयी. जॅयैपर के कई लोगो ये नज़ारा देखने के लिए पोलीस स्टेशन को घेर लिया था. बड़ा हंगामा मचा हुवा था. मिस्टर. सिन्हा खुद मुश्किल मे थे कि क्या करे. आख़िर उसने पूरा पोलीस बंदोबस्त कर के क्लियर्ली एक प्रेस मीडीया से कॉन्फ्रेंस की और अपनी ओर से कुछ कुछ चिपका कर पूरी कहानी को दोहराया और करीब दोपहर 2 बजे के बाद प्रेस रिपोर्टर्स रवाना हुए. लेकिन एक भी रिपोर्टर्स को क्रांतिकारियो से मिलने नही दिया गया था. मिस्टर. सिन्हा ने तापस करवाई थी लेकिन मेयर इंग्लेंड थे और तुरंत वापिस आ रहे थे. लेकिन मेयर विक्रम सोहनी ने नीशी के पिताजी आड्वोकेट तपन सेन को मिस्टर. सिन्हा के पास भेज दिया था. मिस्टर. सेन अपनी बेटी को लॉकप रूम मे देखकर ही चौक उठे और खुद बहुत नाराज़ हुए नीशी से.

फिर भी उन्होने लगातार चार घंटे तक बारी बारी साजन और नीशी को मिले और पूरी कहानी समझ ली. बाद मे बैल करवानी चाही, लेकिन मिस्टर. सिन्हा ने उसको समझाया कि अभी क्रांतिकारियो के खिलाफ कोर्ट मे चार्जेशेट अड्मिट नही की गयी है और अगर ये पता बाहर लग जाएगा तो लड़की बदनाम हो सकती है. अभी बाहर किसी के नाम या चेहरे नही गये है. अगर आज उसको ले गये तो बाहर सब रिपोर्टर्स और सब पब्लिक को पता चल जाएगा. और अगर मिस्टर. सेन ज़बरदस्ती करेंगे तो मजबूरन सब के सामने चार्जेशेट फाइल कर के कोर्ट से रेमंड माँगी जाएगी. और नीशी के फादर को मजबूरन उस दिन तो ऐसे ही वापस आना पड़ा.

दूसरे दिन अख़बरो मे बॅंक रॉबरर्स के अरेस्ट की सन सनी खेज खबर छप चुकी थी और विक्रम कुछ घंटे लेट हो चुका था. आक्च्युयली ये मिस्टर. सिन्हा का विक्रम और आड्वोकेट सेन को चुप कराने का मास्टर स्ट्रोक था कि उसने सब रिपोर्टर्स को साजन के बारे मे बता दिया था और नीशी के बारे मे नही बोलकर एमोशनली सेन को खरीद के रखा था. लेकिन वो जानते थे कि ये मास्टर स्ट्रोक भी ज़्यादा घंटे काम नही आएगा. क्यूकी देल्ही से बहुत जल्द या तो उसके ट्रान्स्फर ऑर्डर आएँगे या तो पूरा केस वीक कर दिया जाएगा. मिस्टर. सिन्हा को ये भी अंदेशा था कि शायद खेंगरसिंह और रणवीरसींह तक ये केस पहुच सकता है और वे लोग अपने आप को बचाने के लिए कुछ भी कर सकते थे. ईसलिए इस केस मे ज़्यादा देर करना पूरे केस की शक्ल बदल सकता था.

 


गिरफ्तारी का आज सातवा दिन था. अब तक मिस्टर. सिन्हा ने दोस्तो की जो लाइव रेकॉर्डिंग बनाई थी वो कई बार देख चुके थे. लेकिन सब से पहले तो भाषा समझ मे ही नही आ रही थी. फिर भी मिस्टर. सिन्हा ने हर एक के दोस्त के एक एक सेंटेन्स और पूरी क्रिया का गहन अभ्यास शुरू किया. फिर उसने देखा कि शायद नीशी और साजन के बीच झगड़ा हुवा था. इसीलिए मिस्टर. सिन्हा ने बारी बारी नीशी और साजन से मिलकर पूरी बात निकालने की कोशिश की. खास कर के साजन से मिलकर मिस्टर. सिन्हा ने वादा याद दिलाया कि देल्ही मे साजन तैयार था सब बात बताने को और अब क्यू नही तो साजन ने जवाब दिया था कि वो सिर्फ़ निशा को ज़िंदा देखने के लिए तैयार हुवा था. लेकिन अब महॉल चेंज हो चुका है और वो अपने डॅडी और वकील से बात कर के ही आगे कुछ बताएगा. मिस्टर. सिन्हा जल्दबाज़ी मे हाथ उठाना नही चाहते थे क्यूकी शायद साजन पर हाथ उठाने से या टर्चर करने से पूरा केस और वीक हो सकता था. पॉलिटिक्स मे सब से बड़ी शक्ति है धैर्य. और इस शक्ति का ही अब तक उपयोग करते आए थे मिस्टर. सिन्हा.

मिस्टर. सिन्हा ने आखरी रात तो जय और मुनीश को भी मानसिक तौर पे टर्चर किया लेकिन वे लोग अपने आप को निर्दोष ही बता रहे थे. खास कर के उदयन और मुनीश तो गंगटोक तक जा के आए थे तो शायद बॅंक लूट का माल उसी के पास होना चाहिए था. इसीलिए मिस्टर. सिन्हा ने आकाश पाताल एक किया लेकिन कुछ भी इन लड़को या नीशी के मूह से नही उगलवा पाए. आख़िर उसका धैर्या टूटा और उसने सब से पहले मुनीश और जय पर लास्ट नाइट थर्ड डिग्री का प्रयोग शुरू करने का फ़ैसला किया.

मिस्टर. सिन्हा ने मजबूरन उस रात को सब से पहले जय को रेमंड मे लिया. पहले उसे बहुत समझाया लेकिन जय बोलने को तैयार ही नही था. फिर दो हवलदार ने मिलकर घुसे और लात की बारिश जय पर की. लेकिन जय हस्ता रहा. हाला कि उसकी हालत अभी अभी ही सुधरी थी इसीलिए चोट भी उसे सारी जगह फिर से पहुच रही थी. लेकिन ना जाने क्यू उसने अपने दिमाग़ मे मिली और अपनी मा राजेश्वरिदेवी को बिठा लिया और मार ख़ाता रहा. आधे घंटे की धुलाई के बाद खुद मिस्टर. सिन्हा लॉक अप रूम मे आए और जय के सिर के बाल को पकड़ कर उठाया और कहा,’’बच्चे अभी भी वक़्त है. इसके पहले कि तेरे रुवे काप उठे सब कुछ बता दे कि कैसे बॅंक लूटा और किसके कहने पर लूटा गया था. अगर सही सही बताते हो तो ठीक है वरना कम से कम तेरा अंजाम तो बहुत बुरा होगा. तेरी विधवा मा ऐसे ही मर जाएगी याद रखना.’’

लेकिन जय खामोश रहा और धीरे धीरे हस्ता रहा. ऐसी कई धमकिया मिस्टर. सिन्हा ने जय को दी लेकिन सारी कोशिश बेकार गयी. जय ने बॅंक लूट, माल कहाँ है, निशा के बारे मे, अपने दोस्तो के बारे मे कुछ भी नही बताया. लेकिन आख़िर आदमी था मार खाते खाते बेहोश हो गया. मिस्टर. सिन्हा ने थर्ड डिग्री के तीन डोज दिए जय को, लेकिन कुछ भी सफलता नही मिली. उल्टा जय की हालत इतनी गंभीर हो गयी कि रात को हॉस्पीटलाइस्ड करना पड़ा.

दूसरे दिन सुबह ही विक्रम सोहनी और आड्वोकेट तापस सेन 8 बजे ही पोलीस स्टेशन मे आ गये. विक्रम ने आते ही हवलदार से कहा कि वो मिस्टर.सिन्हा से मिलना चाहता है. हवलदार तो पहचानता था अपने मेयर को. इसीलिए उसने विक्रम को बिताया और खुद जाकर मिस्टर. सिन्हा को इनफॉर्म किया. मिस्टर. सिन्हा ने अपनी ऑफीस मे विक्रम को बुला लिया. विक्रम ने वुडन डोर के दोनो बाजुओ को धक्का देकर अंदर प्रवेश किया आड्वोकेट तापस सेन के साथ. मिस्टर. सिन्हा ने उचे उठकर देखा तो सामने ब्ल्यूयिश कलर सूट पहनकर आँखो पर छ्होटे ग्लास के चश्मे उठाता हुवा गोरा चिटा और मुस्कुराता चेहरा पाया और मिस्टर. सिन्हा मुस्कुराते खड़े हुवे और दोनो को देखते रहे.

विक्रम बोला,’’हेलो मिस्टर. सिन्हा आइ आम विक्रम सोहनी, फादर ऑफ साजन आंड मेयर ऑफ जॅयैपर.’’ और अपना हाथ आगे बढ़ाया.

मिस्टर. सिन्हा ने स्माइल देकर कहा,’’सॉरी सर अभी शाक़हन्ड का वक़्त नही है. बोलिए मैं आप की क्या सेवा कर सकता हू.’’

विक्रम ने अपना हाथ वापस ले लिया लेकिन उसे ये ज़रूर समझ मे आ गया था कि ऑफीसर है अलग मिट्टी का बोलने मे पूरा ध्यान रखना पड़ेगा. कुछ पल के बाद विक्रम बोला,’’सर मुझे साजन से मिलना है.’’

मिस्टर. सिन्हा,’’शुवर आप मिल सकते है. चलिए मेरे साथ.’’

विक्रम और सेन मिस्टर. सिन्हा के साथ चल दिए और जहा साजन को रखा था उस कमरे की ओर आके खड़े रहे. बड़ी बड़ी सलाखो के पिछे साजन आराम कर रहा था. साजन को एक साफ सुथरा बेड दिया गया था उसके उपर आराम से सोया था. सलाखे खोलने की आवाज़ आई तो खड़ा हुवा और अपने पिताजी को देखा. और वही खामोश खड़ा रहा. मिस्टर. सिन्हा को बड़ा अजीब लगा कि अपने बाप को देखकर तो ये बच्चा उससे लिपट जाएगा और जल्द ही रिहाई के लिए रोएगा. लेकिन उल्टा विक्रम और साजन दोनो एक दूसरे की ओर तेज़ नज़र से देख रहे थे और आख़िर विक्रम ने आँखो से कुछ इशारा किया और दोनो के चेहरे पर मुस्कुराहट आई और साजन ने हस्ते हुए आगे आकर अपने बाप से शाकहन्ड किया. विक्रम ने धीरे से उसे गले लगाया और फिर बोले,’’मिस्टर. सिन्हा मैं अपने बेटे से अकेले मे मिलना चाहता हू.’’

मिस्टर. सिन्हा ने कहा,’’सॉरी सर मैने आप के बेटे को एक गंभीर गुनाह के जुर्म के शक के आधार पर गिरफ्तार किया है और आप को जो भी बाते करनी है मेरे सामने ही करेंगे.’’

विक्रम ने तीखी नज़र से मूड के मिस्टर. सिन्हा की ओर देखा और कहा,’’मिस्टर. सिन्हा आप जानते है आप किस से बात कर रहे है और क्या कह रहे है.’’

मिस्टर. सिन्हा ने धीरे से हस्ते हुवे कहा,’’वेल मिस्टर. सोहनी आइ आम वेल अवेर अबाउट ऑल थिंग्स.’’

इस एक सेंटेन्स के जवाब ने विक्रम को बहुत कुछ समझा दिया था फिर उसने अचानक करवट बदली और बिल्कुल माइल्ड आवाज़ मे कहा,’’ओ.के. सर क्या मैं इतनी रिक्वेस्ट कर सकता हू कि मैं अपने बेटे के लिए मिस्टर. तापस सेन को आड्वोकेट के रूप मे लाया हू तो क्या वो मेरे बेटे से अकेले मे बात कर सकते है ?’’

क्रमशः……………………….

 


Aur akhir vo din aa pahucha ki sab krantikariyo ko bari bari us room me le jaya gaya. Mr. Sinha chaukanne hokar headphone lagakar hi baithe the. Cc-camaras ki switch on kar di gayi thi. Ek taraf Mr. Sinha uttejit the aur dusre taraf sab krantikari giraftar hokar pahalibar mil rahe the aur vo bhi panch panch dino ke bat. Pata nahi tha ki kaun jaane kya honewala tha

Mr. Sinha ke liye dhire dhire paristhiti aur bhi gambhir rup pakad rahi thi. Ek aur se Khengarsinh aur Ranveersinh ne apani aur se back door se prayas shuru kar diye the ki Mr. sinha ko jald se jald transfer kiya jaye. Kyuki agar usne is case me success pa liya to antim samay par in dono par hi var ho sakta tha. Lekin dusri aur abhi bhi krantikariyo ki arrest ke bare me na to public janti thi aur na to uske parents. Ha Udayan ke ghar se dono ko giraftar jarur kiya gaya tha lekin vo bhi casually kiya gaya tha. Jaise koi dost le ja raha ho aise use le jaya gaya tha. Aur aise order bhi Mr. Sinha ne Kanyakumari ke police staff ko diye the. Isiliye ab tak ek bhi dosto ke parents tak ko pata nahi tha ki ve log giraftar ho chuke hai. Dusri aur jin jin ke lockers tute the aur uske mal se RK ne usko black mainl karvaya tha vo sab parties ki pahuch bhi Delhi tak thi aur ve log pressure la rahe the ki jald hi jald kuch pakada jaye ta ki ve log hamesha ke liye kisi black mainlers se mukt ho jaye. Lekin un logo ko bhi andaja nahi tha ki bank robbers are arrested.

Lekin Mr. Sinha kab tak chhupa sakte the. Hala ki RK bhi kisi ko bol nahi sakta tha ki ye log giraftar ho chuke hai, varna ve hi log musibat me aa sakte the. Lekin pura daromdar sirf Sajan par tha. Rk ko vishvas tha ki jo deal uski Sajan aur Swami ke sath huyi hai uske bad Sajan jarur is case se riha ho jayega aur kuch aage hilchal nahi hogi.

Mr. Sinha ne dosto ki meeting se pehle ek aur badiya kam bhi kiya tha ki jis jis ke lockers tute the uski list usne le li thi aur uski visit karnewale the, kyuki uske pressure se hi uski posting fir Jaipur me huyi thi. Isiliye uske liye pehla aadesh tha ki blackmainlers aur robbers ko pakadana aur mal kaha hai, cash kaha hai vo dhundhana. Isiliye jab kuch bhi nahi ho saka to usne sab dosto ki meeting karvayi aur live recording bhi kar liya. Lekin dosto ki languaage vo samaj pate iske pehle uske samne abhi tak ki sab se badi musibat aan padi thi.

Nisha ki mrityu huyi to uski ma sath me hi chal basi thi aur Sajan ne antim sanskar kar diye the to mamla vahi khatm ho gaya tha. Lekin Birju ki maut se Mr. Sinha ki inquiry me sab se bada break aa gaya. Kyuki Birju akhir ek advocate ka hi beta tha. Sath me Udayan mansik taur pe bilkul khatm ho chuka tha. Isiliye use turant mental hospital me shift karvaya gaya.

Mr. Sinha ne sab se pehle bari bari sab dosto ko Birju ki mrityu ke samachar diye aur bad me birju ke gharwalo ko inform kar diya aur dusre din Birju ki body pm hone ke bad unki mother ko saup di gayi. Relatives uska dead body lekar vaha se ravana ho gaye. Sare dosto ko antim bar milne ka mauka diya tha. Lekin Birju ki mother aur sister ko sari bat se inform kar diya gaya tha aur Birju ki maut ke bad ve log aur jyada kuch nahi kar sakte the. Isiliye sab maun banakar chal diye aur hamesha ke liye dosto ke dil me ek ghav de gaye the.

Lekin kuch reporters ne chhanbin ke adhar par akhir bat nikal hi li aur mr. Sinha ke ashcharya me dusre din Jaipur ke do leading news papers me headline thi. “Bank robbers are arrested by Delhi Police Officer Mr. sinha’’

Aur subah 9 baje tak Hindustan ke leading news papers ke reporters Jaipur Police Station me aa dera dal diya tha. Mr. Sinha ko majburat kuch kahani to batani hi padi ki ek ladki kidnap huyi thi aur bachane ke liye kuch dost gaye the aur us ladki par balatkar huva aur murder huva. Sath me do aur aadamiyo ka murder huva. Ek dost ghayal huva aur septic ki vajah se uski bhi death ho gayi. Ek dost pagal jaisi sthiti me hai. Mayor ka beta bhi shamil hai. Lekin abhi Nishi ke bare me kuch bhi reporters ko nahi bataya gaya tha aur na to robbery ki video cassette ke bare me bataya gaya tha. Ek aur bat Mr. Sinha ne sab reporters se chhipayi thi vo thi dosto ki meeting aur uske live recording ki bat.

Aur dopahar 12 baje tak to pure Jaipur me halchal mach gayi. Jaipur ke kai log ye najara dekhane ke liye police station ko gher liya tha. Bada hangama macha huva tha. Mr. Sinha khud mushkil me the ki kya kare. Akhir usne pura police bandobast kar ke clearly ek press media se conferrence ki aur apani aur se kuch kuch chhipakar puri kahani ko doharaya aur karib dopahar 2 baje ke bad press reporters ravana huye. Lekin ek bhi reporters ko krantikariyo se milne nahi diya gaya tha. Mr. Sinha ne tapas karvayi thi lekin Mayor England the aur turant vapis aa rahe the. Lekin Mayor Vikram Sohni ne Nishi ke pitaji advocate Tapan Sen ko Mr. Sinha ke pas bhej diya tha. Mr. Sen apani beti ko lockup room me dekhkar hi chauk uthe aur khud bahut naraj huye Nishi se.

Fir bhi unhone lagatar char ghante tak bari bari Sajan aur Nishi ko mile aur puri kahani samaj li. Bad me Bail karvani chahi, lekin Mr. Sinha ne usko samajaya ki abhi krantikariyo ke khilaf court me chargesheet admit nahi ki gayi hai aur agar ye pata bahar lag jayega to ladki badnam ho sakti hai. Abhi bahar kisi ke nam ya chehre nahi gaye hai. Agar aaj usko le gaye to bahar sab reporters aur sab public ko pata chal jayega. Aur agar Mr. Sen jabardasti karenge to majburan sab ke samne chargesheet file kar ke court se remand mangi jayegi. Aur Nishi ke father ko majburan us din to aise hi vapas ana pada.
 


Dusre din akhabaro me bank robbers ke arrest ki san sani khej khabar chhap chuki thi aur Vikram kuch ghante late ho chuka tha. Actually ye Mr. sinha ka Vikram aur Advocate Sen ko chup karane ka master stroke tha ki usne sab reporters ko Sajan ke bare me bata diya tha aur Nishi ke bare me nahi bolkar emotionally Sen ko kharid ke rakha tha. Lekin vo jante the ki ye master stroke bhi jyada ghante kam nahi ayega. Kyuki Delhi se bahut jald ya to uske transfer order ayenge ya to pura case weak kar diya jayega. Mr. Sinha ko ye bhi andesha tha ki shayad Khengarsinh aur Ranveersinh tak ye case pahuch sakta hai aur ve log apane aap ko bachane ke liye kuch bhi kar sakte the. Iisliye is case me jyada der karna pure case ki shakl badal sakta tha.

Giraftari ka aaj satva din tha. Ab tak Mr. Sinha ne dosto ki jo live recording banayi thi vo kai bar dekh chuke the. Lekin sab se pehle to bhasha samaj me hi nahi aa rahi thi. Fir bhi Mr. Sinha ne har ek ke dost ke ek ek sentence aur puri kriya ka gahan abhyas shuru kiya. Fir usne dekha ki shayad Nishi aur Sajan ke bich jagada huva tha. Isiliye Mr. Sinha ne bari bari Nishi aur Sajan se milkar puri bat nikalane ki koshish ki. Khas kar ke Sajan se milkar Mr. Sinha ne vada yad dilaya ki Delhi me Sajan taiyar tha sab bat batane ko aur ab kyu nahi to Sajan ne jawab diya tha ki vo sirf Nisha ko zinda dekhane ke liye taiyar huva tha. Lekin ab mahol change ho chuka hai aur vo apane daddy aur vakil se bat kar ke hi aage kuch batayega. Mr. Sinha jaldbaji me hath uthana nahi chahte the kyuki shayad Sajan par hath uthane se ya tourcher karne se pura case aur weak ho sakta tha. Politics me sab se badi shakti hai dhairya. Aur is shakti ka hi ab tak upyog karte aye the Mr. Sinha.

Mr. Sinha ne akhari rat to Jay aur Munish ko bhi mansik taur pe tourcher kiya lekin ve log apane aap ko nirdosh hi bata rahe the. Khas kar ke Udayan aur Munish to Gangtok tak ja ke aye the to shayad bank lut ka mal usi ke pas hona chahiye tha. Isiliye Mr. Sinha ne akash patal ek kiya lekin kuch bhi in ladko ya Nishi ke muh se nahi ugalava paye. Akhir uska dhairya tuta aur usne sab se pehle Munish aur Jay par last night third degree ka prayog shuru karne ka faisla kiya.

Mr. Sinha ne majburan us rat ko sab se pehle Jay ko remand me liya. Pehle use bahut samajaya lekin Jay bolne ko taiyar hi nahi tha. Fir do hawaldar ne milkar ghuse aur lat ki barish Jay par ki. Lekin Jay hasta raha. Hala ki uski halat abhi abhi hi sudhari thi isiliye chaut bhi use sari jagah fir se pahuch rahi thi. Lekin na jane kyu usne apane dimag me Mili aur apani ma Rajeshvaridevi ko bitha liya aur mar khata raha. Adhe ghante ki dhulai ke bad khud Mr. Sinha lock up room me aye aur Jay ke sir ke bal ko pakad kar uthaya aur kaha,’’Bachche abhi bhi waqt hai. Iske pehle ki tere ruve kap uthe sab kuch bata de ki kaise bank luta aur kiske kehne par luta gaya tha. Agar sahi sahi batate ho to thik hai varna kam se kam tera anjam to bahut bura hoga. Teri vidhava ma aise hi mar jayegi yad rakhana.’’

Lekin Jay khamosh raha aur dhire dhire hasta raha. Aisi kai dhamakiya Mr. sinha ne Jay ko di lekin sari koshish bekar gayi. Jay ne bank lut, mal kaha hai, Nisha ke bare me, apane dosto ke bare me kuch bhi nahi bataya. Lekin akhir aadami tha mar khate khate behosh ho gaya. Mr. Sinha ne third degree ke tin dosaage diye Jay ko, lekin kuch bhi safalata nahi mili. Ulta Jay ki halat itani gambhir ho gayi ki rat ko hospitalised karna pada.

Dusre din subah hi vikram Sohni aur advocate Tapas Sen 8 baje hi Police station me aa gaye. Vikram ne aate hi hawaldar se kaha ki vo Mr.Sinha se milna chahta hai. Hawaldar to pahechanta tha apane Mayor ko. Isiliye usne Vikram ko bithaya aur khud jakar Mr. sinha ko inform kiya. Mr. Sinha ne apani office me Vikram ko bula liya. Vikram ne Wooden door ke dono bajuo ko dhakka dekar andar pravesh kiya advocate Tapas Sen ke sath. Mr. Sinha ne uche uthkar dekha to samne bluish colour suit pahankar ankho par chhote glass ke chashme uthata huva gora chitta aur muskurata chehra paya aur mr. Sinha muskurate khade huve aur dono ko dekhate rahe.

Vikram bola,’’Hello Mr. Sinha I am Vikram Sohni, father of Sajan and mayor of Jaipur.’’ Aur apana hath aage badhaya.

Mr. Sinha ne smile dekar kaha,’’Sorry sir abhi shakehand ka waqt nahi hai. Boliye main aap ki kya seva kar sakta hu.’’

Vikram ne apana hath vapas le liya lekin use ye jarur samaj me aa gaya tha ki officer hai alag mitti ka bolne me pura dhyan rakhana padega. Kuch pal ke bad Vikram bola,’’Sir mujhe Sajan se milna hai.’’

Mr. Sinha,’’Sure aap mil sakte hai. Chaliye mere sath.’’

Vikram aur Sen Mr. Sinha ke sath chal diye aur jaha Sajan ko rakha tha us kamare ki aur aake khade rahe. Badi badi salakho ke pichhe Sajan aram kar raha tha. Sajan ko ek saf suthara bed diya gaya tha uske par aram se soya tha. Salakhe kholne ki awaz ayi to khada huva aur apane pitaji ko dekha. Aur vahi khamosh khada raha. Mr. Sinha ko bada ajib laga ki apane bap ko dekhkar to ye bachcha use lipat jayega aur jald hi rihai ke liye royega. Lekin ultu Vikram aur Sajan dono ek dusre ki aur tez najar se dekh rahe the aur akhir Vikram ne ankho se kuch ishara kiya aur dono ke chehre par muskurahat ayi aur Sajan ne haste huye aage aakar apane bap se shakehand kiya. Vikram ne dhire se use gale lagaya aur fir bole,’’Mr. Sinha main apane bete se akele me milna chahta hu.’’

Mr. Sinha ne kaha,’’Sorry sir maine aap ke bete ko ek gambhir gunha ke jurm ke shak ke adhar par giraftar kiya hai aur aap ko jo bhi bate karni hai mere samne hi karenge.’’

Vikram ne tikhi najar se mud ke Mr. Sinha ki aur dekha aur kaha,’’Mr. Sinha aap jante hai aap kis se bat kar rahe hai aur kya kah rahe hai.’’

Mr. Sinha ne dhire se haste huve kaha,’’Well Mr. Sohni I am well aware about all things.’’

Is ek sentence ke jawab ne Vikram ko bahut kuch samaja diya tha fir usne achanak karvat badali aur bilkul mild awaz me kaha,’’O.k. Sir kya main itani request kar sakta hu ki main apane bete ke liye Mr. Tapas Sen ko advocate ke rup me laya hu to kya vo mere bete se akele me bat kar sakte hai ?’’

kramashah……………………….

 
किस्मत का खेल पार्ट --99

गतान्क से आगे.......

अब मिस्टर. सिन्हा लाचार थे क्यूकी क़ानून वकील और साजन को अकेले मे मिलने से मना नही करता था. मजबूरन मिस्टर. सिन्हा ने हाँ बोलकर विक्रम के साथ वापस जाना पड़ा. दोनो जाकर चेंबर मे बैठ गये और मिस्टर. सिन्हा ने चाय मंगाई. दोनो कैज्युअलि बातो मे खोए हुवे थे उस वक़्त तक तापस सेन ने साजन, नीशी और मुनीश से मिल लिया. और तीनो को बहुत कुछ समझा दिया. लेकिन तीनो को अकेले मे बारी बारी मिले थे. मुनीश कुछ नही बोला लेकिन नीशी अपने डॅडी से सख़्त नाराज़ हो गयी और चिल्लाई भी. आख़िर मजबूरन तापस सेन ने कुछ और आइडिया किया और जाकर फिर से मुनीश और साजन को बारी बारी समझाया और करीब एक घंटे के बाद मिस्टर. सिन्हा की चेंबर मे वापस आए. मिस्टर. सिन्हा ने उसके लिए भी चाय मँगवाई और तब तक मिस्टर. सिन्हा विक्रम के मूह से उसके बारे मे और स्वामी के बारे मे काफ़ी कुछ जान चुके थे. फिर सेन ने कहा,’’सर साजन विल को-ऑप यू प्लीज़ डॉन’ट हर्ट हिम आंड ऑल्सो माइ डॉटर नीशी. दोनो नादान है और उसको किसी ने फसाया हुवा है. क्या उसकी बैल हो जाएगी ?’’

मिस्टर. सिन्हा ने कहा,’’जब तक मैं अपनी तरह से पूर्णतः संतुष्ट नही हो जाता तब तक तो नही. आप प्लीज़ मुझे और 24 घंटे का वक़्त दीजिए मैं कुछ करता हू. बाद मे जो आप चाहो हो सकता है.’’

विक्रम ने हस्कर कहा,’’ठीक है सर आंड थॅंक्स तो को-ऑप माइ सोन ऐज ही हैज नो कंप्लेंट अबाउट पोलीस न यू ऑल्सो.’’

मिस्टर. सिन्हा ने अब हॅस्कर कहा,’’नो इट’स इन माइ ड्यूटी. मैं किसी निर्दोष पे वार नही करता. मैं जानता हू ये सब निर्दोष है लेकिन मैं असली जड़ तक पहुचना चाहता हू.’’

और शाकहन्ड कर के सब अलग हुए.

जय हॉस्पीटलाइस्ड था इसीलिए तापस सेन ने उसका विज़िट नही लिया. लेकिन विक्रम और सेन को पक्का विश्वास था कि अब इस केस मे अहम कार्य मुनीश करेगा क्यूकी उसको अच्छी तरह से समझाया गया था.

मिस्टर. सिन्हा ने तुरंत साजन, नीशी से मुलाकात की लेकिन उन लोगो ने बोल दिया कि जो कुछ कहना है कोर्ट मे ही कहेंगे. मिस्टर. सिन्हा अब थके थे इन दोस्तो से. उन्होने फिर दोस्तो की मुलाकात की वीडियो देख ली और फिर बॅंक रॉबरी के वक़्त की वीडियो भी फिर एक बार अभ्यास के लिए देख ली. तब तक बिरजू की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आई थी उसका भी अभ्यास कर लिया लेकिन अब वो रिपोर्ट पोलीस के लिए इस केस के लिए बिल्कुल बेकार थी. और आख़िर उसने हार कर मुनीश को मिलने का फ़ैसला किया क्यूकी अब उदयन के फादर से भी उनकी जल्द मुलाकात होनेवाली थी.

**********

उसी रात को मिस्टर.सिन्हा ने हिम्मत ना हारकर मुनीश की रेमंड शुरू की लेकिन शुरू शुरू मे मुनीश ने कुछ जवाब नही दिया. आख़िरकार मिस्टर. सिन्हा ने थर्ड डिग्री शुरू करवाई और मुनीश केवल 10 मीं मे टूट गया. मुनीश रो पड़ा और मिस्टर. सिन्हा के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गयी. मुनीश को तुरंत मिस्टर. सिन्हा के सामने पेश किया गया. मिस्टर. सिन्हा ने टेप रेकॉर्डर चालू किया और एक हवलदार को सूचना दी कि मुनीश जो बोले उसको लिखा जाए. और मुनीश बोलने लगा. स्वामी रामानंद से लेकर, साजन ने क्या प्लान किया था से लेकर बॅंक रॉबरी तक बहुत कुछ बता दिया. लेकिन कुछ कुछ बात खास तरीके से उसने छुपा ली थी. जैसे:

मास्टर प्लान किसका था ? साजन तो केवल किसी का प्यादा था . मुनीश ने झूठ बोल दिया कि मास्टर प्लान कोई दो अंजान आदमियो का था जिसका नाम आनंदभाई और संजयभाई था.

लूट का माल आरके के पास पहुचा दिया था लेकिन जो साजन ने डॉक्युमेंट्स दिए थे उसका क्या हुवा वो मुनीश ने नही बताया. वैसे भी अभी पोलीस उसके बारे मे कुछ नही जानती थी.

नीशी इस रॉबरी मे इन्वॉल्व थी ही नही ऐसा मुनीश ने बता दिया और अगर वो साथ है तो उसको शायद आरके ने मजबूर कर दिया था. यू किया था उसके बारे मे नीशी पर आरके और रवि ने जो अत्याचार किए थे वो बता दिया.

खुद मुनीश और उदयन बिल्कुल निर्दोष है.

दोस्तो की भाषा उसे नही आती है और वो कुछ नही जानता है

वो केमिकल लाइन का स्टूडेंट था इसीलिए उसे फसाया गया था

उदयन केवल दोस्ती की खातिर इसमे उतरा था वरना वो बिल्कुल बेकसूर था.

साजन को भी किसी ने ब्लॅकमेल कर के इसमे शामिल किया था ऐसा मुनीश ने झूठ बोला था.

निशा इस केस के बारे मे बहुत कुछ जानती थी और साजन की फियांसी थी. इसीलिए साजन को चुप कराने के लिए रणवीरसींह ने निशा को किडनॅप करवाया था और उस पर रेप भी किए गये थे. क्यूकी निशा, साजन, नीशी और जय की उनकी अपनी भाषा थी तो कभी भी मुनीश और उदयन की समझ मे नही आई थी.

बॅंक लूट मे सब से ज़्यादा अहम पार्ट निशा ने निभाया था. नीशी को तो सिर्फ़ माल पहुचाने का कार्य दिया गया था. रॉबरी के वक़्त नीशी साथ मे नही थी. और निशा ने ही बॅंक के एक गार्ड को मार दिया था. निशा बहुत ख़तरनाक थी और साजन से भी खेल रही थी ऐसा मुनीश ने बता दिया था. निशा एक पक्की मतलबी लड़की थी ऐसा भी मुनीश ने बता दिया था. ता कि सारा इल्ज़ाम मरी हुई निशा पे आए और बाकी के सब बच जाए.

निशा से बिरजू प्यार करता था इसीलिए बिरजू भी शामिल हुवा और बिरजू और साजन की कभी नही बनती थी. इसीलिए बिरजू ने निशा को भगाने का प्लान किया था और इसीलिए पूरी टीम को बिरजू ने उकसाया और सब को तैयार किया था ता कि सब मिलकर निशा को छुड़ाए और बाद मे बिरजू और निशा अकेले भाग जानेवाले थे और साजन को अकेला छोड़ देनेवाले थे.

लेकिन उदयन और मुनीश पक्के दोस्त थे साजन के इसीलिए उसने अलग रहकर साजन को बचाने की कोशिश की. लेकिन साजन नही भागा और मजबूरन मुनीश और उदयन को इन सब दोस्तो के पिछे भागना पड़ा था. लेकिन रास्ते मे वे कही नही मिले थे क्यूकी जहाँ जहाँ वे पहुचे या तो दोस्त पिछे रह गये थे या तो काम तमाम हो चुका था.

उदयन और मुनीश को दोस्तो के बारे मे पता लग चुका था इसीलिए इन सब से भागने के लिए वे लोग यात्रा मे निकल पड़े और दोस्त उसको पकड़ ना पाए इसीलिए कन्याकुमारी से लेकर अलग अलग जगह पर एंजाय करने चले गये थे.
 
बॅंक लूटने के बाद भी दोस्त एक दूसरे को कभी नही मिले थे और आरके ने उसको ब्लॅकमेल करने की कई बार कोशिश की थी.

स्वामी रामानंद का नाम कही भी मुनीश ने नही लिया था. सिर्फ़ स्वामी ही बोला था. रामानंद नही बोला उसने और कह दिया कि वो किसी स्वामी को नही जानता था बल्कि दोस्तो के मूह से सुना हुवा था.

मिस्टर. सिन्हा जानते थे कि मुनीश आधा सच और आधा झूठ बोल रहा है. लेकिन उसे खुशी इस बात की थी कि आख़िर कुछ तो मूह खुला क्रांति करियो के बारे मे और ये भी उसे पता लग गया कि यही दोस्त सब क्रांतिकारी थे जो साल भर पहले पोस्टर्स चिपकाकर हीरो बने हुए थे. अब उसने तुरंत संजय और आनंद नाम के दो आदमियो की तलाश शुरू की. लेकिन उसे पता नही था कि ये दोनो का पता किसी कीमत पर नही मिलनेवाला था और ना तो पोलीस ये जान ने वाली थी कि ये दो आदमी समाधि ट्रस्ट के आदमी थे.

कुल मिलाकर अभी भी मिस्टर. सिन्हा 1+1=2 नही कर पा रहे थे. उसे इंतेज़ार था साजन और जय के मूह खुलने का. वैसे मुनीश के मूह से भी मिस्टर. सिन्हा ने जान लिया था कि मोस्ट ऑफ लीडरशिप जय ने की है. इसीलिए मिस्टर. सिन्हा जो आज तक केवल साजन के मूह का इंतेज़ार कर रहे थे वो अब जय के मूह खुलने का इंतेज़ार करने लागे. उसी रात मिस्टर. सिन्हा ने फाइनल टाइम दोस्तो की मुलाकात वाली रेकॉर्डिंग कॉन्स्टेंट तीन घंटे बहुत अच्छी तरह सुनी और देखी और अचानक उसे वो भाषा समझ मे आई.

कुछ नही था. हर एक शब्द के आगे के अक्षर की ग्रामर की सारी मात्राएँ छ्चोड़कर उस अक्षर पर मिंदी लगाई जाती थी और पहले और दूसरे अक्षर के बीच ‘फ’ लगा दिया जाता था और पहले अक्षर की सारी मात्राए इस ‘फ’ के साथ जोड़ी जा रही थी. मिस्टर. सिन्हा ने बार बार वो रेकॉर्डिंग सुनकर आख़िर कुछ कुछ दास्तान को कॅच अप कर लिया. और इस नतीजे पर पहुचे थे कि नीशी और साजन के बीच फाइटिंग हुई थी वो इसीलिए कि दोस्तो मे से सब से पहले सरेंडर साजन ने किया था. लेकिन इन दोस्तो की बातो से सिर्फ़ एक ही बात और पता लगी थी और वो ये कि मरनेवाली लड़की से साजन शादी करना चाहता था और उस लड़की को किडनॅप कर लिया था और उसे बचाने के लिए पोलीस और साजन पहुचे उसके पहले जय और उसके साथी पहुच चुके थे और मिस्टर. सिन्हा को याद आया कि साजन कह रहा था कि उसे भाग जाने का एक बार मौका मिला था. इसका मतलब जय & कॉ. ने पूरी कोशिश की थी कि मरनेवाली लड़की निशा को भी बचा ले और पोलीस लॉक अप रूम से आसानी से साजन को भगाकर सब नौ दो ग्यारह हो जाए. लेकिन जो जय साजन को देल्ही की दास्तान बता रहा था उसे पकड़ नही पाया क्यूकी जय बहुत फास्ट बोल रहा था. बार बार भी सुन ने पर वो ज़्यादा समझ नही पाए. वैसे पूरी बातचीत मे जय ने सिर्फ़ स्वामी स्वामी ऐसा ही कहा था. रामानंद नाम नही लिया था.

प्लान तो अच्च्छा था लेकिन इन्स. रवि ने बीच मे उस लड़की पर बलात्कार किया था ऐसा दोस्तो की बातचीत से पता चलता था. लेकिन अब क्या हो सकता था क्यूकी लड़की की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट मे बलात्कार हुवा था वो साबित हो चुका था लेकिन वो रवि ने ही किया है वो कैसे साबित हो सकता था. क्यूकी इन्स रवि की लाश को भी अग्निसंस्कार हो चुके थे. अब मिस्टर. सिन्हा को ये भी याद आया कि उस दिन रवि क्यू छुट्टी पर था. मिस्टर. सिन्हा को ये बात भी याद आई कि उसने रवि को रणवीरसींह के साथ भी देखा हुवा है. और मिस्टर. सिन्हा ने अब रणवीरसींह को मिलने का फ़ैसला किया. लेकिन उसके पास अब वक़्त बिल्कुल नही था. क्यूकी नेक्स्ट डे उसे उदयन के फादर से मिलना था क्यूकी वे कन्याकुमारी से निकल चुके थे और दूसरा अब रिपोर्टर्स भी चुप रहेनेवालो मे से नही थे. फिर उस के ट्रान्स्फर पर भी पोलिटिकल ज़ोर ज़रूर आएगा ही. इसीलिए मिस्टर.सिन्हा को जल्द से जल्द अदालत मे चार्जेशेट फाइल कर के और रेमंड लेने ज़रूरी थे. लेकिन उसके पहले चार्जेशेट के लिए भी सब कड़िया मिलाना ज़रूरी था. अब ये भी तो ढूँढना था कि बॅंक के लूटे हुए लॉकर्स का माल कहाँ है और वो कौन ब्लाकक्मैंलेर्स है जो सब लॉकर्स के मालिको को ब्लॅकमेल कर के दौलत माँग रहे थे.

बड़ी सोच मे मिस्टर. सिन्हा रात को 10 बजे तक बैठे रहे और फिर उसने आरके को फोन किया तो पता लगा कि आरके जॅयैपर मे था ही नही. मिस्टर. सिन्हा ने फार्महाउस के फोन का कॉल किया तो आरके वहाँ भी नही था. आख़िर थककर मिस्टर. सिन्हा ने सोच लिया कि ज़रूर वे लोग देल्ही पहुच चुके है और उसके अंतिम अवर्स चालू हो चुके है.

थक कर मिस्टर. सिन्हा ने अपनी ऑफीस की रिवॉल्विंग चेर पर अपना शरीर लंबा किया और उसे चाय की ज़रूरत महसूस हुई और उसने हवलदार से चाय मंगाई. कुछ ही देर मे चाय आई तब तक कुछ बिना सोचे मिस्टर. सिन्हा ने अपना दिमाग़ चलाना बंद कर दिया था और आँखे मीच के बैठे हुए थे. चाय आई तो उसने पी ली और अपनी फॅवुरेट सिगार जलाई और एक लंबा सास लेकर धुआ को छ्चोड़ दिया और उसके दिमाग़ की बत्ती जली और उसे याद आया कि साजन और उसने मिलकर तय किया था कि मरनेवाली लड़की निशा को बचाएँगे. और उस वक़्त उसने इन्स. त्यागी को जय को अरेस्ट करने के लिए भेजा था लेकिन जय भाग निकला था. इसका मतलब जय जानता था कि साजन और पोलीस ने मिलकर ये फ़ैसला लिया है कि निशा की जान बचा ले.

अगर ये सही है तो वो कौन है जिसने कुछ ही घंटे मे जय को बता दिया था कि वे लोग जॅयैपर जानेवाले थे और जय उसके पहले जॅयैपर पहुच गया. इसका मतलब इन्स. त्यागी ने सबकुछ सुन लिया था. इसका एक और भी मतलब था कि या तो जय उस वक़्त पोलीस स्टेशन मे हाजिर था. लेकिन फिर जय भाग नही सकता था. इसका मतलब कोई ऐसी भी शक्शियत है जो जय और इन्स. त्यागी के बीच कड़ी बनकर सबकुछ जान चुका था. और उसे रेकॉर्डिंग मे जय के मूह से नाम याद आया. 'मिली'. और उसने देल्ही घंटी बजा दी कि मिली नाम की लड़की को ढुंढ़ो.

लेकिन ये तो अंधेरे मे तीर चलाने वाली बात थी. मिली कौन थी ये तो ये दोस्त लोग ही बता सकते थे. आख़िर मिस्टर. सिन्हा ने दूसरे दिन पहले उदयन के पिताजी से मिलने का फ़ैसला किया.

 


फिर से बात मिली पर ही अटक चुकी थी. लेकिन इस वक़्त मिली कहाँ थी. क्या देल्ही मे थी या कोई अरब के पास पहुच चुकी थी. साजन अब क्यू खामोश था ? तापस सेन ने मुनीश को ऐसा करने को क्यू कहा ? नीशी क्यू अपने बाप के खिलाफ होकर चिल्लाई थी ? आख़िर साजन क्यू जय के खिलाफ जा रहा था ? विक्रम सोहनी क्यू आराम से मिस्टर. सिन्हा को को-ऑप कर रहे थे ? साजन का दिया हुवा माल उदयन और मुनीश ने कहाँ च्छुपाया था ?

इन सब सवालो से तो सब दोस्त लोग भी परेशान थे. लेकिन इसका अंजाम सिर्फ़ जय अकेला भुगतने वाला था. और ये बात अब तक जय भी नही जानता था. क्यूकी इस वक़्त वो अपने घाव को देख रहा था. लेकिन कुदरत उसे अब ऐसा घाव देनेवाली थी जो ज़िंदगीभर वो भूलनेवाला नही था...

दूसरे दिन सुबह से ही मिस्टर. सिन्हा के लिए कयामत आ चुकी थी. उदयन के फादर से मुलाकात हुई और उसे सबकुछ समझाया गया. लेकिन वो तो ये सब सुनकर हैरान रह गये. क्यूकी उसका बेटा इतनी हद तक जा सकता था ये उसे खुद मालूम नही था. उदयन के फादर ने तुरंत विक्रम से मिलने का फ़ैसला किया. क्यूकी दोनो समाधि ट्रस्ट मे अच्छे कार्यकर्ता थे. और विक्रम से मुलाकात के बाद उसने फ़ैसला किया कि उदयन के वकील भी मिस्टर. तापस सेन ही होंगे. लेकिन विक्रम, तापस सेन और उदयन के पिताजी तीनो ने अब मिस्टर. सिन्हा पर प्रेशर किया कि अगर गिरफ्तार किया है तो तुरंत या तो पोलीस करवाई शुरू करे या फिर बैल के लिए हाँ बोल दे.

दूसरी तरफ मिस्टर. सिन्हा पर अब राजकीय दबाव कल रात से बढ़ा हुवा था कि अब तक वे गिरफ्तार हुए दोस्तो के मूह से कुछ क्यू नही उगलवा सके है. या फिर कोर्ट मे चार्जेशेट दाखिल करे. जो होगा वो देखा जाएगा. हाला कि मिस्टर. सिन्हा की इच्छा यही थी कि जब तक पूरे केस के बारे मे जान ना ले तब तक वो ऐसे ही रेमंड लेते रहेंगे. लेकिन आख़िर ये क़ानून के खिलाफ था. दूसरी और बचे हुए साथी मे से नीशी और साजन पे वो हाथ नही उठा सकते थे. और मुनीश ने जो कहना था वो रेकॉर्ड पर आ चुका था और सख़्त मार खाने के बाद भी जय ने अपना मूह नही खोला था.

तीसरी ओर रेपॉर्टेस ने मिस्टर. सिन्हा पर सवालो की झड़ी बरसाई थी. ये समाचार अब देश के कोने कोने तक पहुच चुके थे. लॉकर्स के ओनर्स जो अब तक चुप बैठे थे वो भी अब बारी बारी पोलीस स्टेशन मे आकर मिस्टर. सिन्हा को परेशान करने लगे थे. लेकिन इस से भी ज़्यादा परेशानी की बात ये थी कि वे लोग ने पोलिटिकल प्रेशर इतना बढ़ाया था कि ना चाहते हुवे भी देल्ही से प्रेशर राजस्थान के होम मिनिस्टर खेंगरसिंह पर आया था कि जल्द से जल्द केस मे प्रोग्रेस की करवाई करे. मजबूरन खेंगरसिंह ने मिस्टर.सिन्हा को फोन किया कि आज ही आज मुजरिमो के खिलाफ चार्जेशेट फाइल करे और उसकी कॉपी उसके टेबल तक शाम तक आ जानी चाहिए. मजबूर होकर मिस्टर. सिन्हा ने खेंगरसिंह के पास केवल तीन घंटे का वक़्त माँगा और कहा कि शाम के 5 बजे से पहले सब के सामने चार्जेशेट दाखिल हो जाएगी.

क्रमशः……………………….
 
Back
Top