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किस्मत का खेल पार्ट --97
गतान्क से आगे.......
पोस्ट मार्टम रिपोर्ट सब की आ चुकी थी, पंचनमा हो चुका था. आइ विटनेस तीनो हॉस्पाइटलाइस्ड थे और कभी भी कोई भी आड्वोकेट और जॅयैपर के मेयर आ सकते थे और आरके वो भी तो आ सकता था. वैसे आरके को मेस्सेज मिल चुका था कि इन्स रवि मारा गया है और बाकी सब गिरफ्तार हो चुके है. इसीलिए उसने अपने बचाव मे पहले से ही तैयारी कर ली थी . पोस्ट मार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि आरके के दोनो आदमियो को च्छुरे से मारा गया था, क्यूकी मर्डर का वेपन मिल चुका था. इन्स रवि की सर्विस रिवॉल्वोर भी मिली थी और उसमे फिंगर प्रिंट पर रवि के ही निशान थे. जब कि च्छुरे पर निशान बिरजू के साबित हो चुके थे. क्यूकी बेहोशी की हालत मे ही नीशी और बिरजू के फिंगरप्रिंट लिए जा चुके थे. तो कुल मिला के बिरजू का केस बिल्कुल वीक था. जय के बारे मे अभी कुछ नही कहा जा सकता था. लेकिन नीशी के भी फिंगरप्रिंट छ्हुरे के फिंगरप्रिंट से मिल जाते थे. इसका मतलब रवि का खून नीशी ने किया था. धीरे धीरे मिस्टर. सिन्हा के सामने चित्र नज़र आ रहा था. लेकिन फिर भी बॅंक लूट के बारे मे अभी भी कुछ हासिल नही हो पा रहा था. ये सब कहानी तो उस लड़की निशा के आसपास की ही थी. लेकिन असली फिल्म तो साजन और जय के मूह से ही जानी जा सकती है ऐसा मिस्टर. सिन्हा को महसूस हो रहा था.
आख़िर मिस्टर. सिन्हा ने एक जुगाड़ खेलने की कोशिश की और वो उठकर साजन के पास गये. साजन उसे देखकर ही खड़ा हुवा और कहा,’’सर आप कहाँ गायब हो जाते हो ? प्लीज़ मुझे निशा से मिलाओ या निशा को यहाँ बुलाओ. मैं उसे देखना चाहता हू.’’
मिस्टर. सिन्हा थोड़ी देर खड़े रहे फिर बोले,’’चलो मेरे साथ.’’
साजन ने पुछा,’’कहाँ ?’’
मिस्टर. सिन्हा ने इशारा किया और साजन पिछे पिछे चल पड़ा. पोलीस जीप मे ट्रॅफिक चीरती हुई पोलीस वॅन हॉस्पिटल के पास अटकी तो साजन ने तुरंत कुछ शंका पड़ते हुए पुच्छ लिया,’’सर निशा को कुछ हुवा है क्या ?’’
इस बार भी मिस्टर. सिन्हा चुप रहे तो साजन को कुछ दाल मे काला महसूस हुवा और वो जल्दी जल्दी मिस्टर. सिन्हा के साथ चलने लगा. साजन ने मिस्टर. सिन्हा का चेहरा देखकर महसूस कर लिया कि ज़रूर कुछ अनहोनी हुई है और उसे जब सच्चाई का सामना कराया गया तब…..
साजन निशा की लाश देखकर स्तब्ध हो गया और पास मे उसकी मा की लाश देखकर बस शुन्य सा हो गया. मिस्टर. सिन्हा बिल्कुल साजन के चेहरे का अभ्यास कर रहे थे. लेकिन साजन के चेहरे की रेखाए बता रही थी कि उसको गहरा सदमा पहुचा है. पाँच मिनिट के बाद साजन ने सिर्फ़ इतना पुछा,’’सर मेरे दोस्त सब कहाँ है ?’’
मिस्टर. सिन्हा ने कहा,’’हॉस्पिटल मे.’’
साजन ने चेहरा उठाकर मिस्टर. सिन्हा के सामने देखा और फिर मिस्टर. सिन्हा ने सिर्फ़ इतना कहा,’’जान ना चाहोगे इसकी मौत कैसे हुई ? (निशा की तरफ उंगली दिखाते हुए).’’
साजन सिर्फ़ देखता रहा और मिस्टर. सिन्हा आगे बोले,’’ये रिपोर्ट देख लो और जान लो कि इस लड़की पर बलात्कार हुवा है.’’
ये सुनते ही साजन की आँखे बंद हुई और चेहरा कुछ समय के लिए तंग हुवा जैसे वो सदमे को सहन करना सीख रहा था. फिर वो आँखे खोलकर बोला,’’सर आप ने वादा नही निभाया. अगर आप मुझे ले जाते तो ये नौबत तक नही आती और ये लड़की अभी तक ज़िंदा होती.’’
मिस्टर. सिन्हा ने तुरंत पलटकर तेज़ आँखो से साजन की ओर देखा और कहा,’’नही बच्चे इसकी जान तुम सब दोस्तो ने मिलकर ली है. अगर पहले से सबकुछ बता देते तो इसका ये हाल नही होता.’’
साजन कुछ नही बोला और मिस्टर. सिन्हा ने कहा,’’अभी भी वक़्त है सबकुछ बता दो वरना फिर बहुत पछ्ताओगे.’’
तीन चार बार उकसाने के बाद साजन अचानक बोला,’’सर मुझे इसका अंतिम संस्कार करना है.’’ और अपनी आँखे वेधक बनाकर मिस्टर. सिन्हा के सामने देखा. साजन की आँखे देखकर मिस्टर. सिन्हा ने कुछ नही कहा और साजन को निशा की डेड बॉडी को अंतिम संस्कार के लिए अनुमति मिल गयी.
दोपहर के 1 बजे साजन ने नज़दीक के स्मशन्गृह मे अपनी होनेवाली पत्नी का अंतिम संस्कार किया और पोलीस उसे लॉकप रूम मे वापस ले गयी और क्रांतिकारियो का एक चॅप्टर हमेशा के लिए क्लोज़ हो चुका था.
इतने समय मे मिस्टर. सिन्हा ने बॅंक लूट की वीडियो कॅसेट फिर एक बार देख ली थी. और अब उसने तहकीकात शुरू की . साजन स्मशन्गृह से वापस आए इसके पहेले नागपुर कॉलेज मे साजन और उसके दोस्तो का पूरा लिस्ट फिर से एक बार कन्फर्म किया था और मिस्टर. सिन्हा ने उदयन और मुनीश के बारे मे तहकीकात शुरू कर दी थी.
शाम तक साजन शोक्मग्न है तब तक ये दोनो मिल जाने चाहिए थे वरना अगर पॉलिटिशियन्स या आड्वोकेट्स बीच मे आए तो पोलीस का खेल ख़त्म हो सकता था. लेकिन मिस्टर. सिन्हा का नसीब ज़ोर कर रहा था कि नीशी अभी भी कमजोर होकर बेहोश थी, बिरजू की हालत और भी सीरीयस हो रही थी. जे कुछ बोलने को तैयार नही था और साजन शुन्य हो चुका था.
गतान्क से आगे.......
पोस्ट मार्टम रिपोर्ट सब की आ चुकी थी, पंचनमा हो चुका था. आइ विटनेस तीनो हॉस्पाइटलाइस्ड थे और कभी भी कोई भी आड्वोकेट और जॅयैपर के मेयर आ सकते थे और आरके वो भी तो आ सकता था. वैसे आरके को मेस्सेज मिल चुका था कि इन्स रवि मारा गया है और बाकी सब गिरफ्तार हो चुके है. इसीलिए उसने अपने बचाव मे पहले से ही तैयारी कर ली थी . पोस्ट मार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि आरके के दोनो आदमियो को च्छुरे से मारा गया था, क्यूकी मर्डर का वेपन मिल चुका था. इन्स रवि की सर्विस रिवॉल्वोर भी मिली थी और उसमे फिंगर प्रिंट पर रवि के ही निशान थे. जब कि च्छुरे पर निशान बिरजू के साबित हो चुके थे. क्यूकी बेहोशी की हालत मे ही नीशी और बिरजू के फिंगरप्रिंट लिए जा चुके थे. तो कुल मिला के बिरजू का केस बिल्कुल वीक था. जय के बारे मे अभी कुछ नही कहा जा सकता था. लेकिन नीशी के भी फिंगरप्रिंट छ्हुरे के फिंगरप्रिंट से मिल जाते थे. इसका मतलब रवि का खून नीशी ने किया था. धीरे धीरे मिस्टर. सिन्हा के सामने चित्र नज़र आ रहा था. लेकिन फिर भी बॅंक लूट के बारे मे अभी भी कुछ हासिल नही हो पा रहा था. ये सब कहानी तो उस लड़की निशा के आसपास की ही थी. लेकिन असली फिल्म तो साजन और जय के मूह से ही जानी जा सकती है ऐसा मिस्टर. सिन्हा को महसूस हो रहा था.
आख़िर मिस्टर. सिन्हा ने एक जुगाड़ खेलने की कोशिश की और वो उठकर साजन के पास गये. साजन उसे देखकर ही खड़ा हुवा और कहा,’’सर आप कहाँ गायब हो जाते हो ? प्लीज़ मुझे निशा से मिलाओ या निशा को यहाँ बुलाओ. मैं उसे देखना चाहता हू.’’
मिस्टर. सिन्हा थोड़ी देर खड़े रहे फिर बोले,’’चलो मेरे साथ.’’
साजन ने पुछा,’’कहाँ ?’’
मिस्टर. सिन्हा ने इशारा किया और साजन पिछे पिछे चल पड़ा. पोलीस जीप मे ट्रॅफिक चीरती हुई पोलीस वॅन हॉस्पिटल के पास अटकी तो साजन ने तुरंत कुछ शंका पड़ते हुए पुच्छ लिया,’’सर निशा को कुछ हुवा है क्या ?’’
इस बार भी मिस्टर. सिन्हा चुप रहे तो साजन को कुछ दाल मे काला महसूस हुवा और वो जल्दी जल्दी मिस्टर. सिन्हा के साथ चलने लगा. साजन ने मिस्टर. सिन्हा का चेहरा देखकर महसूस कर लिया कि ज़रूर कुछ अनहोनी हुई है और उसे जब सच्चाई का सामना कराया गया तब…..
साजन निशा की लाश देखकर स्तब्ध हो गया और पास मे उसकी मा की लाश देखकर बस शुन्य सा हो गया. मिस्टर. सिन्हा बिल्कुल साजन के चेहरे का अभ्यास कर रहे थे. लेकिन साजन के चेहरे की रेखाए बता रही थी कि उसको गहरा सदमा पहुचा है. पाँच मिनिट के बाद साजन ने सिर्फ़ इतना पुछा,’’सर मेरे दोस्त सब कहाँ है ?’’
मिस्टर. सिन्हा ने कहा,’’हॉस्पिटल मे.’’
साजन ने चेहरा उठाकर मिस्टर. सिन्हा के सामने देखा और फिर मिस्टर. सिन्हा ने सिर्फ़ इतना कहा,’’जान ना चाहोगे इसकी मौत कैसे हुई ? (निशा की तरफ उंगली दिखाते हुए).’’
साजन सिर्फ़ देखता रहा और मिस्टर. सिन्हा आगे बोले,’’ये रिपोर्ट देख लो और जान लो कि इस लड़की पर बलात्कार हुवा है.’’
ये सुनते ही साजन की आँखे बंद हुई और चेहरा कुछ समय के लिए तंग हुवा जैसे वो सदमे को सहन करना सीख रहा था. फिर वो आँखे खोलकर बोला,’’सर आप ने वादा नही निभाया. अगर आप मुझे ले जाते तो ये नौबत तक नही आती और ये लड़की अभी तक ज़िंदा होती.’’
मिस्टर. सिन्हा ने तुरंत पलटकर तेज़ आँखो से साजन की ओर देखा और कहा,’’नही बच्चे इसकी जान तुम सब दोस्तो ने मिलकर ली है. अगर पहले से सबकुछ बता देते तो इसका ये हाल नही होता.’’
साजन कुछ नही बोला और मिस्टर. सिन्हा ने कहा,’’अभी भी वक़्त है सबकुछ बता दो वरना फिर बहुत पछ्ताओगे.’’
तीन चार बार उकसाने के बाद साजन अचानक बोला,’’सर मुझे इसका अंतिम संस्कार करना है.’’ और अपनी आँखे वेधक बनाकर मिस्टर. सिन्हा के सामने देखा. साजन की आँखे देखकर मिस्टर. सिन्हा ने कुछ नही कहा और साजन को निशा की डेड बॉडी को अंतिम संस्कार के लिए अनुमति मिल गयी.
दोपहर के 1 बजे साजन ने नज़दीक के स्मशन्गृह मे अपनी होनेवाली पत्नी का अंतिम संस्कार किया और पोलीस उसे लॉकप रूम मे वापस ले गयी और क्रांतिकारियो का एक चॅप्टर हमेशा के लिए क्लोज़ हो चुका था.
इतने समय मे मिस्टर. सिन्हा ने बॅंक लूट की वीडियो कॅसेट फिर एक बार देख ली थी. और अब उसने तहकीकात शुरू की . साजन स्मशन्गृह से वापस आए इसके पहेले नागपुर कॉलेज मे साजन और उसके दोस्तो का पूरा लिस्ट फिर से एक बार कन्फर्म किया था और मिस्टर. सिन्हा ने उदयन और मुनीश के बारे मे तहकीकात शुरू कर दी थी.
शाम तक साजन शोक्मग्न है तब तक ये दोनो मिल जाने चाहिए थे वरना अगर पॉलिटिशियन्स या आड्वोकेट्स बीच मे आए तो पोलीस का खेल ख़त्म हो सकता था. लेकिन मिस्टर. सिन्हा का नसीब ज़ोर कर रहा था कि नीशी अभी भी कमजोर होकर बेहोश थी, बिरजू की हालत और भी सीरीयस हो रही थी. जे कुछ बोलने को तैयार नही था और साजन शुन्य हो चुका था.