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ऋतु नंगी बैठी अपने कमरे में भूनबुना रही थी. कॉफी पीते पीते उसने कप
यूँ ही रख दिया और नंगी ही रमण के कमरे में जा कर वाइन की बॉटल उठा लिए और बॉटल से ही पीने बैठ गयी.
उधर रवि भी सोच रहा था अपने कमरे में कि उसने ऋतु को नाराज़ क्यूँ किया क्यूँ उसके साथ बेरूख़ी दिखाई, प्यार से भी तो उसे समझा सकता था – क्या मैने रखती है वो उसके लिए.
कुछ देर बाद रवि ऋतु के कमरे में आता है और ऋतु को वाइन पीते हुए देख के हिल जाता है.
‘ऋतु!’
ऋतु कोई जवाब नही देती.
‘ऋतु मुझे कुछ कहना है’
ऋतु गुस्से के मारे मुँह मोड़ लेती है और गतगत वाइन पीने लगती है. आधी बॉटल वो चढ़ा चुकी थी और उसका सर घूमने लग गया था.
‘ऋतु प्लीज़ एक बार मेरी बात सुन ले – फिर कभी कुछ नही कहूँगा’
रवि की आवाज़ में एक तड़प थी, एक इल्तिजा थी, जो ऋतु को अंदर तक हिला के रख देती है.
ऋतु रवि की तरफ देखती है – उसका चेहरा आँसुओ से भीगा हुआ था.
रवि सब कुछ बर्दाश्त कर सकता था पर ऋतु की आँखों में आँसू नही.
वो तड़प के ऋतु के पास जाता है उसके हाथ से वाइन की बॉटल छीन कर साइड में रख देता है और उसे अपने सीने से लगा लेता है.
‘मुझे माफ़ कर दे गुड़िया – मुझ से बर्दाश्त नही होता – तू किसी और के पास जाए – चाहे वो पापा ही क्यूँ ना हों – मैं तुझे किसी के साथ नही बाँट सकता और ना ही मैं तुझे छोड़ के किसी और को देख सकता हूँ - - मैने कभी कोई गर्लफ्रेंड नही बनाई क्यूंकी तेरे अलावा कोई दिखता ही नही था – मेरी आँखों मे – मेरे दिल में – सिर्फ़ तू ही तू है – मेरी जिंदगी में और कोई नही आ सकता’
ऋतु तड़प जाती है रवि की बात सुन कर- सारा नशा काफूर हो जाता है.
‘रवि?’
‘याद है जब हम पहली बार करीब आए थे मैने तुझ से क्या वादा किया था – वो वादा हमेशा कायम रहेगा – तूने कहा था – मैं माँ के साथ---- नही ये कभी नही हो सकता – मैं माँ की पूजा करता हूँ – वो मेरी देवी है और देवी के बारे में मेरे ऐसे ख़याल सोचने से पहले मैं मर जाउन्गा’
ऋतु ज़ोर से रवि के साथ चिपक जाती है.
‘मुझे माफ़ कर दे रवि मैं सोचती थी ये सिर्फ़ जिस्म की प्यास मिटाने का खेल है जब तक शादी नही होती’
सही कहा है दोस्तो खेल जिस्म की प्यास से शुरू होता है रिश्तों के बीच- लेकिन कब – भावनाएँ बीच में आ जाती हैं – ये कोई जान नही पाता – जो हाल सुनीता का विमल के लिए हो रहा था वही हाल रवि का ऋतु के लिए हो गया – देखते हैं ये कहानी हमे क्या क्या रंग दिखाएगी
अब ऋतु के लिए अपने अंदर दबे हुए तूफान और राज़ को और छुपाना मुश्किल हो गया था. वो रवि के सामने सब कुछ उगल देती है –
1. उसकी और राम्या की बातें – कि जिस्म की प्यास घर में ही मिटाओ
2. रमण ने सुनीता को कितना प्रताड़ित किया था जब उसने गान्ड नही दी थी
3. किस तरहा रमण से चुदने पे उसने उसके पोरुश को धराशाई किया था
4. और आज उसपे रहम खा कर चुद गई – क्यूंकी रमण एक सही आदमी था – वो बाहर मुँह नही मारता था – उसके अंदर भी चूत के लिए एक तड़प थी – क्यूंकी सुनीता यहाँ नही थी.
पर वो एक बात छुपा जाती है – दो लंड के साथ चुदने की चाहत.
ऋतु की बातें सुनते सुनते रवि का खून खोलने लग गया उसे अपने बाप से नफ़रत होने लग गयी. उसकी देवी को प्रताड़ित करना – चाहे वो कोई भी हो उसके लिए असेहनीय था.
रवि : मुझ से वादा कर अब तू ……
आगे रवि बोल ही नही पाया क्यूंकी ऋतु के होंठ उसके होंठों से जुड़ चुके थे.