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उधर रमेश के जाने के बाद रानी रिया के पास आकर बैठ जाती है – जाहिर था कि रिया चद्दर के अंदर बिल्कुल नंगी है .
रानी जैसी बहुत बार चुदि औरत ये जानती थी कि इस वक़्त रिया की क्या हालत होगी वो टाँगों की तरफ से चद्दर उठा कर देखती है तो हैरान हो जाती है कौमार्य भंग होने से रिया ने बहुत खून बहाया था और उसकी चूत बहुत सूज गई थी.
रानी एक कपड़ा गरम पानी में भिगो कर रिया की चूत सॉफ करने लगी और गरम पानी का सेक उसकी चूत को देने लगी.
नींद में ही रिया को सकुन मिलने लगा उसकी टाँगें अपने आप फैल गई और रानी को सफाई करने में और आसानी हो गई.
रिया को अच्छी तरहा सॉफ करने के बाद रानी अपने कमरे में चली गई और एक पेन किल्लर का पत्ता ले कर आ गई.
फिर किचन में जा कर उसने दूध गरम किया और उसमे कुछ मेवे डाल दिए.
ये सब करने के बाद वोई वापस रिया के पास आई और प्यार से उसके सर पे हाथ फेरते हुए उसे उठाने लगी.
रिया ने आँखें खोली तो सामने रानी को पाया और पिछली दिन हुई घटना उसकी आँखों के सामने घूमने लगी – रिया की आँखों में आँसू आ गये.
‘नही छोटी मालकिन रोते नही – जो होना था हो गया – ये दूध पी लो आपको आराम मिलेगा.’
रिया कुछ ना बोली चुप चाप रानी के हाथ से ग्लास पकड़ा और दूध पीने लगी.
दूध ख़तम करने के बाद रिया नज़रें झुकाए अढ़लेटी रही.
तब रानी ने उसे पेन किल्लर की दो गोलियाँ खिलाई और सहारा दे कर बाथ रूम में ले गई.
रिया ने उसे बाहर जाने को कहा और खुद गरम पानी से भरे टब में लेट गई.
गरम पानी उसके जिस्म को बहुत राहत पहुँचा रहा था.
जब तक रिया बाथरूम से बाहर निकलती रानी ने कमरा ठीक कर डाला, बिस्तर की चद्दर बदल दी और चुदाई के सारे निशान कमरे से मिटा दिए.
रानी बिस्तर के कोने में बैठ कर रिया का इंतेज़ार करने लगी तब उसे ध्यान आया कि रिया के पास बदलने के लिए कपड़े नही हैं फिर वो दूसरे कमरे में चली गई जहाँ पूरे परिवार के कुछ कपड़े एक अलमारी में रखे हुए थे. उनमें से रिया के लिए एक सलवार और कुर्ता ले आई.
रिया जब टवल लप्पेट कर बाथरूम से बाहर निकली तो उसके चेहरे पे एक निखार था बिल्कुल वैसे ही जैसे एक कली जब फूल बनती है तो देखने को मिलता है. चेहरे पे शर्म की लाली थी.
रानी कुछ नही कहती बस उसके कपड़े आगे कर देती है.
रिया बिना ब्रा और पैंटी के सलवार कुर्ता पहन लेती है, उसे रानी के सामने नग्न होने में अब कुछ शरम नही आ रही थी.
बस शरम अपने उस बर्ताव के उपर थी जो उसने कल किया था और किस तरहा रमेश को उकसाया था उसे चोदने के लिए.
रानी जब वहाँ से जाने लगी तो रिया ने हाथ पकड़ उसे रोक लिया.
‘पापा कहाँ है?’
‘छोटी मालकिन वो कुछ काम से गये हैं – थोड़ी देर में आ जाएँगे’
‘रानी……….’ रिया आयेज बोल नही पायी पर रानी उसकी बात समझ गई.
‘चिंता मत करो छोटी मालिकिन – किसी को कुछ नही पता चलेगा’
‘रानी तुम उम्र में बड़ी हो मुझ से – ये छोटी मालकिन कहना बंद करो मुझे मेरे नाम से बुलाया करो’
‘जी छोटी मालकिन’
‘फिर वही – अभी क्या कहा मैने’
‘जी जी रिया मेम्साब’
‘फिर मेम्साब कि दूं’
‘मुझ से नही होगा – कहाँ मैं एक नोकारानी कहाँ आप’
‘आज से तुम मेरी दोस्त हो और दोस्ती में नाम से पुकारा जाता है’
‘माफ़ करो मेम्साब मेरे बस का नही आप जो भी कहो मुझे सिर्फ़ नाम ले कर आपको नही ---- माफ़ करो ना मुझे क्यूँ सज़ा देना चाहती हो’
‘अच्छा बाबा अभी के लिए रिया बहन कह सकती हो – नो मालकिन – नो मेम्साब – वो सब मम्मी और दीदी के लिए’
‘हां रिया बहन बोल सकती हूँ’
दोनो के चेहरे पे मुस्कान आ गई.
रिया : कुछ खिला यार बहुत भूक लग रही है.
रानी : बस अभी लाई रिया बहन.
रानी किचन की तरफ चली गई और रिया बैठी बैठी सोचने लगी – जो उसने किया वो ठीक था या नही – पापा क्या सोचते होंगे.
रमेश देर रात वापस आता है, रिया उससे नज़रें नही मिला पा रही थी और ना ही रमेश उसे नज़रें मिला पा रहा था. कामया का फोन उसे आ चुका था की वो लोग देल्ही पहुँच चुके हैं.
रिया की छुट्टी में अभी एक दिन बाकी था. रमेश चुप चाप खाना ख़ाता है और दूसरे कमरे में जा कर दरवाजा बंद कर सोने की कोशिश करता है पर नींद उसकी आँखों से कोसो दूर थी, कभी उसकी आँखों के सामने राम्या का अर्ध नग्न जिस्म लहरा जाता तो कभी रिया का हुस्न उसे तड़पाने लगता.
वो बियर निकाल के बैठ गया और पीते पीते सोचने लगा कि उसे क्या करना चाहिए.
रिया ने रानी को अपने पास ही सोने के लिए कहा .
रानी ने रिया के जिस्म का मसाज किया और रिया को नींद आ गई. जब रिया सो गई तो रानी ने एक बार रमेश के कमरे के पास जा कर देखा कि लाइट जल रही है पर दरवाजा अंदर से बंद है, रानी चुप चाप अपने कमरे में चली गई जहाँ उसका पति उसका इंतेज़ार कर रहा था. कमरे में घुसते ही उसने रानी को दबोच लिया और मिया बीवी अपनी रस लीला में खो गये.
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