• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
S

StoryPublisher

Guest
कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास

लेखक-राजेश सरहदी

जिस्म की प्यास जब जागती है तो अच्छे अच्छों के दिमाग़ घास चरने चले जाते हैं. ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ.

मैं एक सीधी सादी लड़की बस अपने फॅशन डिज़ाइनिंग कोर्स में ही मस्त रहती थी. फॅशन की दुनिया में अपना नाम बनाना चाहती थी, बस दिन रात नये नये डिज़ाइन सोचा करती थी और उनकी ड्रॉयिंग बनाया करती थी.

एक दिन ऐसा कुछ हुआ कि मेरा जिंदगी के बारे में सोचने का नज़रिया ही बदल गया. इस से पहले कि मैं अपनी कहानी आपको सुनाऊ मैं अपने परिवार के बारे में आपको बताती हूँ :

रमेश केपर - 49 य्र्स हेवी बिल्ट बॉडी - एक नंबर के चोदु - बस चूत पसंद आनी चाहिए फिर नही बच ती. अपना बिज़्नेस चला रहे हैं. पैसे की पूरी रेल पेल है.

कामया - 44 साल लगती है 30 साल की - 38-30-38 - हाउसवाइफ

विमल : 24 साल मेरा बड़ा भाई - एमबीए कर रहा है हॉस्टिल में रहता है. हफ्ते में एक बार घर ज़रूर आता है. एक दम हीरो के माफिक पर्सनॅलिटी, लड़कियाँ देख कर ही आँहें भरने लगती हैं.

मैं : राम्या - 20 साल 34-24-30 मुझे देखते ही सबके लंड खड़े हो जाते हैं. फॅशन डिज़ाइनिंग का कोर्स कर रही हूँ.

रिया : मेरी छोटी बहन 18 साल - 30-22-30 एक दम पटाका, नटखट चुलबुली, ज़ुबान कैंची की तरहा चलती रहती है अभी एमबीबीएस में अड्मिशन लिया है , जितना खूबसूरत जिस्म उतना ही तेज़ दिमाग़.

और लोग जैसे जसी जुड़ते जाएँगे उनके बारे में बताती रहूंगी .

तो क्या बताना शुरू करूँ कैसे भड़की मेरे जिस्म की प्यास , साथ देते रहना और अपने कॉमेंट्स भी ताकि मुझे पता चलता रहे कि मेरी ये कहानी आपको कितनी अच्छी लग रही है


लीजिए कहानी कुछ इस तरह है ............................................................



घर से इन्स्टिट्यूट और इन्स्टिट्यूट से घर , यही थी मेरी जिंदगी. अपने सपनो की ही दुनिया में खोई रहती थी. एक जनुन सवार था मुझ पे. बहुत बड़ी फॅशन डिज़ाइनर बनने का. माँ और भाई भी मेरा पूरा साथ देते थे. भाई तो जब भी घर आता, घंटो मेरे साथ बैठ के मेरे डिज़ाइन डिसकस करता, कुछ को अच्छा कहता, कुछ को बहुत बढ़िया और कुछ में तो इतनी कामिया निकालता कि मुझे हैरानी होती, उसे डिज़ाइन्स के बारे में इतनी पहचान कैसे है. वो मार्केटिंग में स्पेशलाइज़ कर रहा था.

MBBएस की पड़ाई में इतना ज़ोर होता है पर फिर भी मेरी छोटी बहन रिया सनडे को मेरे डिज़ाइन पकड़ के बैठ जाती और अपनी राय देती, कई बार तो उसकी राय बिल्कुल किसी प्रोफेशनल डिज़ाइनर की तारह होती.

माँ मुझे किचन में बिल्कुल काम नही करने देती थी, बस रोज सुबह की चाइ बनाना मेरी ड्यूटी थी, क्यूंकी पापा सुबह मेरे हाथ की चाइ पीना पसंद करते थे. कहते हैं दिन अच्छा निकलता है और मुझे भी बहुत खुशी होती.

मेरी सारी फ्रेंड्स अपने बॉय फ्रेंड्स के साथ ज़यादा वक़्त गुज़ारा करती थी, पर मैं लड़कों से हमेशा दूर रही. मुझे इस बात से कोई फरक नही पड़ता था कि मेरा कोई बॉय फ्रेंड नही. मुझे तो जो भी वक़्त मिलता नये नये डिज़ाइन्स सोचने में ही निकल जाता. घर से निकलती तो लड़कों की चुभती हुई नज़रें मेरा पीछा करती, मेरा जिस्म है ही इतना मस्त कि देखनेवाले जलते रहते थे पर कोई मेरे पास फटकने की कोशिश नही करता था. मेरे पापा और भाई का डर सब के दिलों में रहता था. इन्सिटुट में भी लड़के मेरे आगे पीछे रहते पर मैं कोई भाव नही देती.

बस अपनी दो फ्रेंड्स के साथ ही ज़यादा टाइम गुजरती. क्यूंकी हमे ग्रूप प्रॉजेक्ट्स मिलते हैं तो ग्रूप में एक दो लड़के भी होते हैं. मैं उनसे सिर्फ़ प्रॉजेक्ट के बारे में ही बात करती थी और उनको भी पता था कि अगर कोई ज़यादा आगे बढ़ने की कोशिश करेगा तो मैं ग्रूप ही छोड़ दूँगी.. इस लिए इन दो लड़कों से मेरे दोस्ती बस काम तक ही थी,ना वो आगे बढ़े ना मैने कोई मोका दिया. धीरे धीरे गली के लड़के भी मेरी इज़्ज़त करने लगे और उनकी आँखों से वासना भरी नज़रें गायब हो गई. पर इन्स्टिट्यूट के लड़के मुझे देख कर आँहें भरते थे, बहुत कोशिश करते थे कि मेरे से दोस्ती बढ़ाए पर मेरा सख़्त रवईया उन्हे दूर ही रखता था.

मैं कभी किसी से ज़्यादा बात नही करती थी बस दो टुक मतलब की बात. मेरी सहेलियाँ भी जब अपने बाय्फरेंड्स के बारे में बाते करती तो मैं उठ के चली जाती.

यूँही चल रही थी मेरी जिंदगी की एक तुफ्फान आया और मेरे जीने की राह बदल गयी.
 
आज मम्मी पापा सुबह ही पापा के दोस्त के यहाँ चले गये. उनके दोस्त की बेटी की शादी होने वाली थी तो तैयारियों में उनकी मदद करनी थी. दोपहर तक मैं भी अपने इन्स्टिट्यूट से वापस आ गई. और कुछ खा पी कर थोड़ी देर आराम किया. धोबी आ कर प्रेस किए हुए कपड़े दे गया तो मैने सोचा कि सबके कपड़े उनकी अलमारी में लगा देती हूँ.

मम्मी के कपड़े लगा रही थी एक बॉक्स दिखा जो बिल्कुल पीछे रक्खा हुआ था. मैने पहले ऐसा बॉक्स मम्मी के पास नही देखा था, अपनी जिग्यासा शांत करने के लिए मैने वो बॉक्स खोल लिया तो देखा की दुनिया भर की डीवीडी पड़ी हुई हैं. मुझे ताज्जुब हुआ कि मम्मी ये डीवीडी अपनी अलमारी में क्यूँ रखती है. उनमे से एक डीवीडी पे गोआ लिखा हुआ था. मैने सोचा शायद गोआ की साइटसीयिंग के उपर होगी. मैने कपड़े लगाए और वो डीवीडी ले कर अपने रूम में आ गई.

डीवीडी अपने लॅपटॉप पे लगाया और पहले सीन को देखते ही मेरी आँखें फटी की फटी रह गई. ये एक पॉर्न डीवीडी थी पर इस में जो दिख रहा था वो मेरे वजूद को हिला बैठा. ये डीवीडी शायद उस वक़्त की थी जब हम पैदा भी नही हुए थे.

हां डीवीडी में मेरे पापा, मम्मी और चाचा चाची एक दम नंगे एक दूसरे के जिस्म के साथ खेल रहे थे. मम्मी नीचे बैठ चाचा का लंड चूस रही थी और चाची मम्मी की चूत चूस रही थी और पापा चाची की चूत में अपना लंड डाल के चोद रहे थे. मम्मी ने चूस चूस कर चाचा का लंड खड़ा कर दिया. फिर पापा ने अपना लंड चाची की चूत में से निकाल लिया.

चाचा बिस्तर पे पीठ के बल लेट गये और चाची उठ कर चाचा के लंड पे बैठती चली गई, जब चाचा का पूरा लंड चाची की चूत में समा गया तो चाची ने अपनी गंद इस तरह उठाई कि उसका छेद सॉफ सॉफ दिख रहा था, पापा चाची के पीछे चले गये और अपना लंड चाची की गंद में घुसा दिया. अब दोनो मिलके चाची को चोद रहे चाची की सिसकिया गूँज रही थी. मम्मी जो खाली हो गई थी वो चाचा के पास आ गई और चाची की तरफ मुँह करके चाचा मे मुँह पे बैठ गई.

चाचा नीचे से धक्के मार कर चाची की चूत में अपना लंड पेल रहे थे और मम्मी के अपने मुँह पे बैठने के बाद चाचा ने मम्मी की चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया शायद अपनी जीब मम्मी की चूत में घुसा दी होगी क्यूंकी मम्मी ने ज़ोर की सिसकी मारी और चाची को पकड़ लिए.

मम्मी और चाची ने एक दूसरे के बूब्स पकड़े और दबाने लगी, दोनो के होंठ आपस में जुड़ गये. मम्मी की तो सिर्फ़ चूत चूसी जा रही थी पर चाची की तो दोनो तरफ से चुदाई हो रही थी. पापा ज़ोर ज़ोर से चाची की गंद मार रहे थे. पापा के धक्के के साथ चाची आगे होती और चाचा का लंड चाची की चूत में अंदर तक घुस जाता और जब पापा अपना लंड बाहर निकालते तो चाची अपनी गंद पीछे करती जिससे चाचा का लंड चाची की चूत से बाहर निकलता.

फिर पापा के धक्के के साथ चाचा का लंड चाची की चूत में घुस जाता. पापा ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और ज़ोर ज़ोर से चाची की गंद मारने लगे. नीचे से चाचा ने भी अपनी कमर उछालनी शुरू कर दी और अब तो मम्मी भी अपनी गंद चाचा के मुँह पे उपर नीचे करती हुई चाची की जीब को अपनी चूत में ले रही थी. पूरे कमरे में एक तुफ्फान आया हुआ था और ये तुफ्फान मेरे सर चढ़ रहा था. मैने पहले कभी कोई ब्लू फिल्म नही देखी थी और आज देखी भी तो उसमे सब मेरे घर के लोग ही थे. पापा के धक्के और तेज़ हो गये और थोड़ी देर में पापा अहह भरते हुए चाची की गंद में झड़ने लगे और चाचा भी तेज़ी से अपनी कमर उछलते हुए चाची की चूत में झड़ने लगे, चाची का तो बुरा हाल था, चाचा के लंड पे इतना रस छोड़ रही थी जो चाचा के लंड से होता हुआ नीचे बिस्तर पे तालाब बना रहा था. इधर मम्मी भी चाचा के मुँह पे झड गई और चाचा गपगाप मम्मी की चूत का सारा रस पी गये. चारों ही हान्फते हुए बिस्तर पे निढाल पड़ गये और अपनी साँसे संभालने लगे.

अभी डीवीडी में और भी बहुत कुछ बाकी था. मैने वो डीवीडी अपनी अलमारी में छुपा दी और बाथरूम भाग गई. अपने कपड़े उतारे और शवर के नीचे खड़ी हो गई. चारों की चुदाई का सीन अब भी मेरी आँखों के सामने घूम रहा था. मेरे जिस्म में एक आग सी लग गई थी. मेरी चूत में हज़ारों चिन्टिया जैसे रेंग रही थी. मेरा बुरा हाल हो रहा था पर इस आग को कैसे शांत करूँ ये समझ में नही आ रहा था, मेरा हाथ अपने आप मेरी चूत पे चला गया और मैं उसपे ज़ुल्म ढाने लगी, मेरी उंगली मेरी चूत में घुस गई और मेरी एक चीख निकल पड़ी, पहली बार अपनी चूत में मेने उंगली डाली थी. फिर अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगी और तब तक करती रही जब तक मेरी चूत ने अपना रस नही छोड़ दिया और मुझे थोड़ा सकुन मिला.

इस डीवीडी ने मेरे जिस्म की प्यास जगा दी थी. एक तुफ्फान मेरे दिलो दिमाग़ में खलबली मचा रहा था.
 
बाथरूम से आने के बाद सबसे पहले मैने वो डीवीडी अपने लॅपटॉप पे डाउनलोड करी और फिर जल्दी से उसे उसकी जगह पे रख दिया.

बार बार वही नज़ारे मेरी आँखों के सामने तैर रहे थे. मम्मी पापा ये सब सिर्फ़ चाचा चाची के साथ करते हैं या और लोग भी शामिल हैं? क्या ये सिर्फ़ एक बार हुआ था या अब भी होता है? अब मैं बच्ची तो थी नही कि सेक्स के बारे मे ना जानती हूँ.मैं अपनी सारी बातें मम्मी से किया करती थी, मम्मी मेरे लिए सबसे बड़ी दोस्त है.क्या मैं इस के बारे में भी मम्मी से पूछ सकती हूँ? शायद नही, मम्मी मेरे सामने लज्जित हो जाएगी.

फिर सच्चाई का कैसे पता करूँ. वो डीवीडी आगे देखने की मेरी हिम्मत नही हो रही थी और अब तो मम्मी पापा किसी भी वक़्त आ सकते थे.

मैने किचन में जा कर रात का खाना तैयार किया, ताकि मम्मी को आ कर किचन में कम ना करना पड़े. करीब एक घंटे बाद मम्मी पापा आ गये और मम्मी काफ़ी हैरान हुई कि मैने खाना तैयार कर रखा है और खुश भी बहुत हुई, क्यूंकी वो काफ़ी थक चुकी थी.

रात को खाना खा कर सब सोने चल दिए. मैं अपने कमरे में बिस्तर पे लेटी सोचती रही कि सच का कैसे पता करूँ और जो आग मेरे जिस्म में लग चुकी थी उसे कैसे शांत करूँ. दिल किया कोई बाय्फ्रेंड बना लेती हूँ, इतने तो पीछे पड़े हैं. पर बदनामी के डर से इस रास्ते पे जाने की हिम्मत ना हुई.

एक ही रास्ता दिख रहा था विमल मेरा बड़ा भाई. अगर मैं उसको पटा लेती हूँ तो घर की बात घर में रहेगी. उसका भी काम हो जाएगा और मेरा भी. वो तो लड़का है क्या पता बाहर कितनी लड़कियाँ फसा रखी हो.

रात भर मैं सो ना सकी. अभी भाई के आने में 3 दिन बाकी पड़े थे , इन तीन दिनो में मुझे कुछ ऐसा प्लान करना था कि भाई मेरे पीछे पड़े और ये ना लगे कि मैं भाई के पीछे पड़ी हूँ.

किसी भी लड़के को अपनी तरफ खींचना हो तो उसे अपनी झलकियाँ दिखा कर तरसाओ वो पके आम की तरहा तुम्हारी गोद में आ गिरेगा.

मैने भी कुछ ऐसा ही सोचा. सोचते सोचते ना जाने कब मेरी आँख लग गई.

रात भर नींद तो नही आई और सुबह मैं अपनी सवालों भरी नज़र से माँ को नही देखना चाहती थी, मैं बिना कुछ खाए पिए घर से चली गई. मेरी एक ही खास सहेली है कविता मैं उसके घर आ गई .

वहाँ पहुच कर पता चला कि वो और उसके डॅड ही घर पे थे, उसकी माँ और भाई दोनो माँ के मैके गये हुए थे. दिन बातों बातों में कब गुजरा पता ही ना चला और रात को मैं उसके साथ ही उसके कमरे में सो गई.

थोड़ी देर बाद मेरी नीद खुली तो देखा कविता गायब है, सोचा बाथरूम गई होगी आ जाएगी जब कुछ देर और वो नही आई तो मैं कमरे से बाहर निकली और देखा कि उसके डॅड के कमरे की लाइट जल रही है मेरे कदम उस तरफ बढ़ चले और जो देखा उसने मुझे हिला के रख दिया.

 


कविता नीचे बैठी अपने डॅड का लंड चूस रही थी और उसके डॅड ने उसके चेहरे को पकड़ रखा था और अपनी कमर आगे पीछे कर रहे थे.कविता फिर ज़ोर ज़ोर से अपने डॅड का लंड चूसने लगी और थोड़ी देर में उसके डॅड झड गये और कविता ने सारा रस पी लिया. फिर वो अपने डॅड के लंड को चाट चाट कर सॉफ करने लगी और उठ के खड़ी हो गई. उसे डॅड ने उसे अपने पास खींचा और उसके होंठों पे अपने होंठ रख दिए.

दोनो एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे और उसके डॅड ने अपने हाथ कविता के बूब्स पर रख दिए और दबाने लगे. कितनी ही देर दोनो एक दूसरे को चूमते रहे.फिर दोनो ने एक दूसरे के कपड़े उतार डाले और बिस्तर पे लेट गये. कविता अपने डॅड के लंड को सहलाने लगी और वो उसके निपल को चूसने लगे,

कविता की सिसकियाँ निकलने लगी, आह आह उफ़ उफ़ ओह डॅड पी जाओ मेरा दूध आह उफ़ एम्म है . वो कभी एक निपल को चूस्ते तो कभी दूसरे को और कविता सिसकती रही.

यह देख मेरा बुरा हाल हो रहा था मेरी आँखो के सामने वो डीवीडी घूमने लगी, अगर बाप बेटी चुदाई कर सकते हैं तो मम्मी पापा ने कौन सा पाप किया. पापा भी तो उस वक़्त चाची को चोद रहे थे चाचा के सामने.

मेरा गुस्सा मम्मी पापा के उपर से हट गया. कविता के ज़ोर से चिल्लाने की आवाज़ आई तो मेरा ध्यान फिर अंदर गया देखा कविता कुतिया बनी हुई है और उसके डॅड ने अपना लंड उसकी गंद मे डाल रखा है.

पहले तो कविता दर्द से चिल्ला रही थी फिर उसे मज़ा आने लगा आह आह फाड़ दो मेरी गंद आह आह चोदो और चोदो उफ्फ अफ हाँ हाँ और ज़ोर से और ज़ोर से आह आह आह आह बेटी चोद और चोद आह आह उम्म्म उफफफफफ्फ़ .

‘साली रंडी आज तेरा बुरा हाल कर दूँगा आह आह ले मेरा लंड ले ले साली कुतिया ले ‘

“चोद साले बेह्न्चोद और चोद आाआईयईईई”

मैं हैरान खड़ी देख रही थी दोनो एक दूसरे को गालियाँ दे रहे थे.

‘मादरचोद मेरी चूत कौन चोदेगा तेरा बाप’

उसके डॅड ने अपना लंड उसकी गंद से निकाला और एक झटके में उसकी चूत में घुसा दिया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगे कविता भी उन्हे और उकसाती रही.

मुझ से और देखा ना गया, मैं कमरे में जा कर अपनी चूत में उंगल करने लगी, मेरी आँखों के सामने मेरे भाई का चेहरा घूमने लगा, क्या हॅंडसम पर्सनॅलिटी है उसकी,जो भी उसकी गर्लफ्रेंड होगी वो तो मज़े लेती होगी.रात को पता नही कविता कब मेरे पास आ कर सो गई.

 


सुबह मैने उस से कुछ नही कहा और अपने घर चली आई, माँ ने मुझ से बात करने की कोशिश करी पर मैं माँ को अवाय्ड कर अपने कमरे मे चली गई.

अपने कमरे में आ कर मैं लेट गई और अपनी जिंदगी में आए इस तुफ्फान के बारे में सोचने लगी. इंसान ने चाहे कितनी भी तरक्की कर ली है, रहा वही जानवर का जानवर ही.बस कपड़े पहनना शुरू कर्दिया, नये नये आविष्कार कर लिए, और एक समाज की स्थापना करली, पर जो पूर्वजों के जीन्स हमारे अंदर कब से चले आ रहे हैं, वो कभी ना कभी कहीं ना कहीं तो सर उठाते ही हैं. फ़र्क बस इतना आ गया है, पहले कोई बंधन नही होता था, जिसको चाहा चोद लिया, और जिससे चाहा चुदवा लिया. अब लोग बंद कमरों में अपनी दबी हुई इच्छाओ को पूरा करते हैं.

जैसे मेरे माँ बाप और चाचा चाची कर रहे थे या अब भी कर रहे हैं. पर कल रात जो देखा वो अब तक मैं समझ नही पा रही हूँ एक बाप और बेटी अपनी वासना में लिप्त. अगर बाप बेटी इतना आगे बड़े हुए हैं तो ज़रूर माँ बेटे भी होंगे, ऐसा तो हो नही सकता कि ये दोनो छुप कर ही करते होंगे और मा बेटे को कुछ पता नही होगा. पता नही सच क्या है. पर मुझे उनके सच से क्या लेना देना.

मुझे तो अपने घर का सच जानना है और उसके लिए मुझे माँ के बहुत करीब जाना होगा.

यही सोच कर मैं नीचे गई और देखा कि पापा नाश्ता कर रहे हैं, आज मैं उनके पास ही जा के बैठ गई,मैने बहुत टाइट टॉप पहना हुआ था, मेरे उरोज़ पहाड़ की चोटी की तरहा खड़े थे.

पापा की नज़रें बार बार मेरे उरोजो पे आ के टिक जाती और सर झटक फिर अपना ध्यान खाने में लगा देते. मैं कनखियों से सब देख रही थी. पापा पहले भी शायद मेरे उरोजो को देखते होंगे पर मेरा ध्यान कभी नही गया, शायद कल जो तुफ्फान आया उसने मेरी छठी इंद्री को जागृत कर दिया और मुझे गढ़ती हुई नज़रों का ज़्यादा आभास होने लगा. मम्मी भी मेरे सामने आ के बैठ गई और बहुत रोकते हुए भी मेरे पैनी नज़रें माँ पे गढ़ गई.

पापा : तेरा कोर्स कैसा चल चल रहा है बेटा , कुछ चाहिए तो नही.

मैने अपने ख़यालों की दुनिया से वापस आई ‘ हां पापा सब ठीक चल रहा है, पापा इस बार कहीं घुमाने ले चलो, बहुत बोरियत हो रही है.’

पापा : ‘बेटा अपनी माँ और भाई बहन के साथ मिल के प्रोग्राम फाइनल कर लो और मुझे बता देना’

मैं : ‘भाई की छुट्टियाँ तो बहुत दूर हैं, हम सिर्फ़ वीकेंड पे क्यूँ नही चलते, बस दो दिन के लिए, थोड़ा चेंज हो जाएगा’

पापा : ठीक है, विमल और रिया इस बार जब आएँगे तो अगले हफ्ते का प्रोग्राम फाइनल कर लेना, मैं भी तब तक कुछ ज़रूरी काम निपटा लूँगा.

मैं : पापा के गले लगते हुए, ‘थॅंक यू पापा आप बहुत अच्छे हो’ मैने जान भुज कर अपने उरोज़ पापा की बाँह पे रगडे, और उसका असर एकदम हुआ.

पापा चिहुक पड़े और मुझे अलग कर फटाफट बाथरूम चले गये. मेरी नज़रों ने उनकी पॅंट के अंदर बने तंबू को देख लिया था. यानी पापा मेरे से गरम हो रहे थे.

अब मुझे सोचना ये था किस के साथ आगे बढ़ुँ, किसको अपने जाल में लपेटु पहले पापा या भाई. फिर सोचा क्यूँ ना अपनी सील भाई से ही तुड़वाऊ – मज़ा आएगा इस चॅलेंज को पूरा करने मे, हम दोनो जवान हैं, चुदाई भी ज़्यादा दम दार होगी, पापा को बाद में देखूँगी, बस अब उनको थोड़ा थोडा टीज़ करती रहूंगी.

बाथरूम से निकल पापा बाइ करते हुए चले गये और घर में रह गये मैं और माँ.

मैं जा के माँ के गले लग गई. ‘ माँ चलो थोड़ा बाहर घूम के आते हैं, आज दोपहर को बाहर ही खाएँगे’

माँ : मेरे सर पे हाथ फेरते हुए ‘ आज इन्स्टिट्यूट नही जाना क्या – तूने आज तक अपनी कोई क्लास नही मिस की, ये आज क्या हो रहा है तुझे’

अब माँ को क्या समझाऊ चूत में खुजली बढ़ गई है, उसका भी तो इंतेज़ाम करना है.

मैं : ‘ना माँ आज कोई ज़रूरी क्लास नही है, चलो ना प्लीज़.’ मैं माँ से और भी चिपक गई और अपने उरोज़ माँ की पीठ में गढ़ाने लगी.

माँ : अच्छा मुझे कुछ काम ख़तम करने दे फिर चलते हैं

मैं खुशी से चिल्लाते हुए ‘ ठीक है माँ, एक घंटे मे जो करना है कर लो, मैं तब तक तैयार होती हूँ’ और मैं भागती हुई अपने कमरे में चली गई.

एक घंटे बाद हम लोग चाणक्या पूरी के लिए निकल पड़े, वहाँ एक इंग्लीश फिल्म चल रही थी, मैने ज़िद करी तो माँ मान गयी. फिल्म में कुछ उत्तेजक सीन्स ज़्यादा थे, मेरी हालत बिगड़ने लगी मैं बार बार कनखियों से माँ को देख रही थी, कि उनपे क्या असर होता है, मुझे लगा कि माँ भी कुछ गरम हो रही है, क्यूंकी वो बार बार अपनी सीट पे हिल रही थी और अपनी टाँगें बींच रखी थी.

मूवी के बाद हम लोग मौर्या शेरेटन में लंच के लिए चले गये. मैने हिम्मत करते हुए माँ से पूछा. ‘माँ कभी बियर पी है क्या’

मा चोन्कते हुए ‘ नही , ये क्या बक रही है तू, चुप चाप लंच करते हैं और घर चलते हैं’

मैं : ‘माँ अब मैं बड़ी हो चुकी हूँ, और बड़ी लड़कियों के लिए माँ सबसे अच्छी दोस्त होती है, और दोस्त से कुछ छुपाया नही जाता’ मेरा चेहरा उतर चुका था.

माँ कुछ पलों तक मुझे देखती रही फिर ‘ अरे तू उदास क्यूँ हो गई, ऐसा नही करते, चल आज से हम पक्के दोस्त’ और माँ ने मेरे साथ शेक हॅंड किया, मेरे चेहरे पे मुस्कान दौड़ गयी.

मैने फिर सवालिया नज़रों से माँ को देखा तो इस बार माँ बोल पड़ी ‘ हां कभी कभी तेरे पापा के साथ पी लेती हूँ जब वो ज़्यादा ज़िद करते हैं’

मैं : ‘माँ मैं भी आज ट्राइ कर लूँ थोड़ी सी प्लीज़’

 
शायद माँ चाहती थी कि मैं उनसे और खुलु तो इसलिए मान गई. एक माँ के दिल में हमेशा ये डर बना रहता है, कि जवान बेटी कहीं ग़लत रास्ते पे ना निकल पड़े.

हम ने एक बियर की बॉटल मँगवाई माँ ने आधी खुद ली और आधी मुझे दी. मैं घुट भरा तो बहुत कड़वी लगी और मेरा मुँह बन गया, माँ खिलखिला के हंस पड़ी

माँ : ‘शुरू शुरू में कड़वी ही लगती है, नही पी जा रही तो रहने दे’

अब मैं पीछे कैसे रहती, मुझे तो माँ के और करीब जाना था. मन कड़ा करते हुए धीरे धीरे पी गई तीन चार घूँट लेने के बाद उतनी कड़वी नही लग रही थी.

फिर हम ने लंच ख़तम किया और घर आ गये. ये आधी बॉटल भी मेरे सर चढ़ रही थी, मैं अपने कमरे में जा कर सो गई.

राम्या नीचे गई और माँ के पास किचन में चली गई.

‘माँ मैं कुछ मदद करूँ’

‘नही बेटा तुम टेबल पर बैठो- मैं बस अभी आई, सब तैयार हो चुका है’

राम्या टेबल पर जा के बैठी ही थी कि उसका सेल बजता है. कॉल रिसीव करती है तो

‘ववओूऊऊऊओवव्वव सिमिरन कितने दिनो बाद फोन कर रही है’

सिमिरन : और तू जैसे मुझे फोन करती रहती है. अच्छा सुन मैं परसों आ रही हूँ, तेरे ही इन्स्टिट्यूट में अड्मिशन लेने. बाकी लोग भी कुछ दिनो में आ जाएँगे. पापा का ट्रान्स्फर देल्ही हो रहा है.

राम्या : अरे वाह , फिर तो मज़ा आ जाएगा, अकेले बोर हो जाती हूँ मैं,तेरी कंपनी मिल जाएगी तो सच में बहुत मज़ा आएगा.

सिमिरन : अच्छा मैं रख रही हूँ, तुझे फ्लाइट डीटेल्स एसएमएस कर दूँगी, एरपोर्ट पर मिलना. बाइ टेक केअर

राम्या :टेक केअर

 


राम्या : माँ ! माँ!

मा : अरे क्यूँ चिल्ला रही है, आ रही हूँ बस

माँ खाने की प्लेट्स ले के टेबल तक आती है, राम्या प्लेट्स ले कर टेबल पे रखती है.

‘हां बोल क्यूँ चिल्ला रही थी’

‘सिमिरन आ रही है माँ, मज़ा आ जाएगा’

माँ : हां पता है तेरे मामा का देल्ही ट्रान्स्फर हो गया है. पहले सिमिरन आ रही है फिर कुछ दिनो में बाकी सब भी आ जाएँगे.

राम्या : कयययययययाआआअ आपको मालूम है और मुझे बताया भी नही.

माँ : अरे बेटी कल रात ही तो फोन आया था तेरे मामा का. सारा दिन तू मुझे घूमती रही तो दिमाग़ से निकल गया.

दोनो खाना ख़तम कर के किचन संभालती हैं और सोने की तैयारी करती हैं.

राम्या : माँ आज मैं आपके पास सो जो.

मा : जा कपड़े बदल के आजा.

राम्या भागती हुई जाती है और उसका ये अल्हाड़पन देख माँ हंस पड़ती है और अपने कमरे में जा कर अपनी नाइट ड्रेस निकाल के पहन लेती है.

नाइट ड्रेस ज़्यादा तो नही पर कुछ ट्रॅन्स्परेंट थी और माँ का खूबसूरत जिस्म उसमे से झलक रहा था.

राम्या भी अपनी नाइटी पहन के आ जाती है. और दोनो बिस्तर पे लेटी हुई राम्या के मामा और उसके परिवार के बारे में बातें करती रहती हैं. राम्या की नींद तो कोसो दूर थी. बातें करते करते वो अपनी माँ से चिपक जाती है और जब दोनो के उरोज़ आपस में टकराते हैं तो दोनो के जिस्म में एक लहर दौड़ जाती है.

राम्या अपने उरोज़ अपनी माँ के उरोजो से रगड़ने लगती है और माँ चाहते हुए भी उसे रोक नही पाती.

माँ की बाँहें भी राम्या के इर्द गिर्द कस जाती हैं और वो राम्या की पीठ सहलाने लगती है. राम्या अपनी माँ की गर्दन चूमने लगी और धीरे धीरे गालों को चूमने लगी.

 


दोनो के होंठ कब आपस में मिले पता ही ना चला और माँ ने राम्या के होंठ चूसने शुरू कर दिए. राम्या के जिस्म में आग भड़क उठी और वो अपनी माँ से अमरबेल की तरहा चिपक गई.

माँ को जैसे कुछ होश आया और वो राम्या से अलग हो गई और सीधी हो कर लेट गई.

पर राम्या अब कहाँ रुकने वाली थी. राम्या अपनी माँ के उपर आ गई और अपनी माँ के चेहरे को हाथों में पकड़ उसके होंठों को अपने होंठों में जाकड़ लिया.

माँ ने हिलने की कोशिस करी पर राम्या ने हिलने नही दिया और माँ के होंठ चुस्ती रही. धीरे धीरे माँ भी रंग में आने लगी और राम्या का साथ देने लगी.

अपने जिस्म की बढ़ती हुई प्यास से मजबूर हो कर राम्या की माँ उसके साथ आगे बढ़ने लगी. राम्या यही तो चाहती थी, कि सारे बंधन खुल जाएँ .

राम्या के हाथ अपनी माँ के उरोजो तक पहुँच गये और वो उन्हें सहलाने लगी. प्रत्युत्तर में माँ ने भी राम्या के उरोजो पर धावा बोल दिया.

अब दोनो एक दूसरे के होंठों को चूस रही थी और एक दूसरे के उरोजो का मर्दन कर रही थी.

जब साँस लेना भारी हो गया तो दोनो के होंठ अलग हुए और आँखों से आँखें मिली. दोनो ही हाँफ रही थी, पर उरोजो पे हाथ अब भी चल रहे थे. दोनो की आँखों में नशे की लाली उतर चुकी थी. माँ समझ गई कि बेटी अब उस दौर पे आ चुकी है, जहाँ उसे जिस्म की प्यास लगने लगी है, अगर अभी से उसे नही संभाला तो आगे क्या होगा ये कोई नही जान सकता, क्यूकी वो बहुत ही खूबसूरत है.

दोनो ही आँखों ही आँखों में बाते कर रही थी. माँ ने तब उठ कर अपने कपड़े उतार डाले और नग्न हो गई. राम्या के भी कपड़े उतार उसे नग्न कर दिया और उसे पीठ के बल बिस्तर पे लिटा कर उसके चेहरे को चूमने लगी और चूमते हुए उसकी गर्दन को चूमने चाटने लगी.

धीरे धीरे वो नीचे बड़ी और राम्या के निपल को चूसने लगी और दूसरे को अपने अंगूठे और उंगली के बीच ले कर मसल्ने लगी.

अहह म्म्म्मनममममाआआआआ उूुुुुउउइईईईईईई

राम्या की सिसकियाँ निकालने लगी और जिस्म में उत्तेजना बादने लगी . राम्या ने अपनी मा के सर को अपने उरोज़ पे दबा दिया और मा कभी एक निपल चुस्ती और कभी दूसरा. अची तरहा निपल चूसने के बाद मा उसके जिस्म को चूमते चाहते हुए उसकी छूट तका आ पहुँची और अपनी ज़ुबान उसकी छूट पे फेरने लगी.

अहह ककक्क्क्ययय्याआ कााआआ र्रर्राही हूऊऊ उफफफफफफफफफ्फ़ उउम्म्म्ममममम

जैसे ही माँ ने उसकी चूत पे अपनी ज़ुबान फेरनी शुरू की राम्या और भी ज़ोर से सिसकने लगी और खुद ही अपने उरोज़ दबाने लगी.

माँ ने राम्या की चूत की फांकौ को अलग किया और अपनी ज़ुबान बीच में घुसा दी, चूत की हालत देख कर माँ समझ गई थी कि बेटी ने उंगली करनी शुरू कर दी है.

जैसे ही राम्या की चूत में माँ की जीब घुसी उसका बाँध टूट गया और भरभराती हुई उसकी चूत ने अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया, माँ वो सारा रस पीती रही और अपनी ज़ुबान से राम्या की चूत को चोदने लग गई.

 
राम्या की कमर खुद बा खुद उपर उचकने लगी और वो अपनी चूत अपनी माँ के मुँह पे मारने लगी.

आधे घंटे तक माँ उसे अपनी जीब से चोदती रही और इस दोरान राम्या तीन बार झड गई. अब राम्या के जिस्म में ताक़त ही ना बची और वो निढाल पड़ गई. माँ भी हाँफती हुई उसके बगल में लेट गई.

थोड़ी देर में राम्या को होश आया और वो अपनी माँ के उरोज़ पर टूट पड़ी, अब राम्या की बारी थी अपनी माँ को खुश करने की.

राम्या अपनी माँ के निपल ऐसे चूस रही थी जैसे बहुत दिनो के भूके बच्चे को माँ का दूध नसीब हुआ हो. माँ की आँखों में में राम्या का बचपन घूमने लगा ऐसे ही ज़ोर ज़ोर से उसके निपल चूसा करती थी.

अहह माँ की सिसकी निकल जाती है और वो राम्या के सर को अपने उरोज़ पर दबा देती है. वो अपने देवरानी के साथ कई बार लेज़्बीयन कर चुकी थी पर आज बेटी का असर कुछ और ही पड़ रहा था, उसके जिस्म का पोर पोर मज़े की इंतेहा से खिल उठा था और उसकी उत्तेजना अपनी सारी सीमाएँ लाँघ रही थी.

राम्या अपनी माँ के दोनो उरोज़ एक के बाद एक चुस्ती रहती है और साथ साथ हल्के हल्के दाँत भी लगा देती थी.

जब भी राम्या के दाँत निपल पे गढ़ते माँ की चूत में साथ साथ खलबली मचना शुरू हो जाती और उसकी जोरदार सिसकी निकल पड़ती उफफफफफफफफफफफफफफफफफफफ्फ़

अपनी माँ के उरोज़ अच्छी तरहा लाल सुर्ख कर राम्या अपनी माँ के नेवेल को चूमने लगी और अपनी जीब बीच में डाल कर गोल गोल घुमाने लगी.

नेवेल शायद माँ का सबसे वीक हिस्सा था, और उसे भी खुद आज ही पता चला क्यूंकी पहले किसी ने भी उसके नेवेल के साथ छेड़ खानी नही की थी. इधर राम्या की जीब नेवल में घूमती उधर माँ की चूत अपना रस छोड़ने लगती. माँ ने राम्या के सर को ज़ोर से दबा दिया ताकि उसकी हरकतें रुक जाएँ, पर राम्या लगी रही और माँ उत्तेजना में अपनी टाँगें पटाकने लगी.

राम्या धीरे धीरे चूमते हुए नीचे बढ़ती है और अपनी माँ की चूत पे अपनी ज़ुबान फेरने लगती है.

जैसे ही राम्या की ज़ुबान माँ की चूत को छूती है एक तरंग दोनो के जिस्म में दौड़ जाती है. राम्या आज पहली बार किसी चूत पे अपनी ज़ुबान चला रही थी वो भी अपनी माँ की और माँ पहली बार अपनी बेटी की ज़ुबान का असर अपनी चूत पे महसूस कर रही थी.

माँ राम्या को उपर खींचती है और दोनो 69 में आ जाती हैं. अब माँ राम्या की चूत पे फिर से अपनी ज़ुबान का कहर बरसाने लगती है और उधर राम्या अपनी माँ की चूत को पूरा मुँह में भर लेती है.

दोनो एक दूसरे के जिस्म को आपस में रगड़ते हुए एक दूसरे को अपनी टाँगों से भीच लेती है और ज़ोर ज़ोर से एक दूसरे की चूत चूसने लगती हैं.

 
राम्या की पूरी ज़ुबान माँ की चूत में घुस जाती है जबकि राम्या की चूत टाइट थी तो माँ की ज़ुबान थोड़ा ही अंदर घुस पाती है. दोनो एक दूसरे की चूत को चूस्ते हुए अपनी ज़ुबान से चोदने लग गई. दोनो की सिसकियाँ अंदर ही अंदर दम तोड़ने लगी. रूम में एक ज़लज़ला आ गया, एक ऐसा तूफान जो थमने का ना ही नही ले रहा था.

साँसे लेना दूभर होता जा रहा था पर ज़ुबानो का चलना नही . ये मंज़र कोई आदमी देख लेता तो बस एक ही दुआ माँगता, एक और लंड , ताकि वो दोनो को एक साथ चोद सके.

दोनो एक दूसरे को ज़ुबान से चोद रही थी, बीच बीच में अपने दाँत भी गाढ रही थी, एक अपने दाँत गढ़ाती तो बदला लेने के लिए दूसरी भी अपने दाँत गढ़ा देती.

दोनो की चूत रस बहा रही थी और दोनो ही उसे पीते हुए रुकने का नाम नही ले रही थी.

अपनी माँ की चूत को चूस्ते हुए राम्या सोच रही थी कि जब एक औरत के साथ इतना मज़ा आता है तो एक मर्द के साथ कितना आएगा. उसकी आँखों के सामने उसके भाई का चेहरा घूमने लगा और उसकी पकड़ अपनी माँ की चूत पे और भी सख़्त हो गई है.

आधे घंटे से दोनो एक दूसरे पे कहर ढा रही थी. और संवेदना सहती हुई दोनो चूत अपने चर्म पे पहुँच गई और दो बाँध एक साथ टूट पड़े. उफ्फ माँ का ज़्यादा बुरा हाल था इतना रस तो अपनी पूरी जिंदगी में नही बहाया था जितना आज बहा रही थी.

जिस्म से जान निकलती जा रही थी और वो सातवें आसमान पे कहीं उड़ने लगी . राम्या भी पीछे नही रही और अपनी माँ के साथ ताल में ताल मिलाती हुई आनंद की गहराइयों में सराबोर हो गई.

दोनो ने एक बूँद भी बर्बाद नही होने दी. और दोनो का पेट इतना भर गया कि सुबह नाश्ता करने की नौबत नही आने वाली.

हाँफती हुई दोनो अलग हुई और अपनी साँसे संभालने लगी.

रात भर दोनो एक दूसरे को नोचती खसोट्ती रही . मुस्किल से एक घंटा ही सोई होंगी. राम्या के नींद जैसे ही खुली वो फिर अपनी माँ पे चढ़ गई.

जिस्म की प्यास फिर भड़क गई और दोनो 69 पोज़ में आकर एक दूसरे की चूत चूसने लगी

आधे घंटे तक माँ बेटी एक दूसरे की चूत चुस्ती रहती है आंड मे दोनो एक साथ झड जाती हैं. राम्या आज फुल मस्ती के मूड में आ चुकी थी, वो अपनी माँ को बाथरूम में खींच के ले जाती है और दोनो बाथ टब में घुस एक एक दूसरे के जिस्म पर साबुन रगड़ने लगती हैं.

एक घंटे तक माँ बेटी एक दूसरे को रगड़ रगड़ कर नहलाती हैं. ऐसे लग रहा था जैसे जिंदगी में पहली बार नहा रही हों.

 
Back
Top