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रमेश का मोबाइल बजने लगता है, और दोनो को अलग होना पड़ता है. कामया पूछ रही थी, कितना टाइम और लगेगा, तो रमेश जवाब देता है, तुम होटेल चली जाना, टाइम लगेगा, क्यूंकी तुम्हारी बेटी को फोटो सेशन से ही फ़ुर्सत नही है.
अब इससे पहले रमेश फिर से सोनी को पकड़ता वो नीचे उतरना शुरू कर देती है और मजबूरन रमेश को भी पीछे पीछे चलना ही पड़ता है.
उतरते हुए रमेश सोच रहा था कि अभी जो हुआ वो क्या था, क्या वो सोनी के साथ आगे बढ़ सकता है. ये सोच ही उसके लंड में तुफ्फान मचा देती है.
और सोनी सोच रही थी, कि रमेश को कामया से अलग करने के लिए से रमेश को अपने साथ रखना पड़ेगा, तभी विमल को मोका मिलेगा कामया को चोदने के लिए.
सोनी तो पहले ही तय कर चुकी थी,कि पहले विमल और फिर रमेश, और जब उसने देखा कि विमल कामया के लिए तड़पने लगा है, उसका इरादा और भी पक्का हो गया रमेश को अपनी ज़ुल्फो के जाल में लपेटने का और आजउसकी शुरुआत हो गई.
एक चुंबन ने वो रास्ता खोल दिया था जिसपे चल के रमेश उसकी तरफ बढ़ता चला आएगा.
रमेश से मोबाइल पे बात करने के बाद कामया घोड़े वाले को आगे बढ़ने के लिए बोल देती है.
करीब एक घंटा पैदल चलने के बाद सोनी और रमेश उस जगह पहुँचते हैं जहाँ उनका घोड़ा इंतेज़ार कर रहा था.
दोनो घोड़े पे बैठ जाते हैं और वो धीमी गति से नीचे उतरने लगते है.
सोनी जैसे ही घोड़े पे बैठती है उसे रमेश का खड़ा लंड अपनी गान्ड पे महसूस होता है और वो मन ही मन मुस्कुराने लगती है.
घोड़े की चाल ही रमेश के लंड को सोनी की गान्ड पे घिसने लगती है और रमेश बढ़ी मुश्किल से खुद पे काबू रखता है, कहीं झाड़ ना जाए,सोनी अपनी गान्ड पे रमेश के लंड की घिसाई का मज़ा लेती रहती है और बीच बीच में जान भुज कर अपनी गान्ड का दबाव उसके लंड पे डालती रहती है.
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