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खेल खिलाड़ी का पार्ट--45
गतान्क से आगे............-
अजीत प्रधान के बंगल के सारे स्टाफ से पुच्छ चुका था.आमतौर पे किडनॅपिंग केसस मे सबसे पहला शक़ परिवार वालो & करीबी लोगो पे ही जाता है.नीना & मुकुल भी श्लोक के साथ वाहा मौजूद थे.अजीत ने उनसे भी बात की थी मगर उसे यहा कुच्छ गड़बड़ नही लगी थी.
"सर,वो लोक विकास की राम्या सेन आई हैं.कहती हैं कि अंजलि जी से बिना मिले नही जाएँगी."
"अरे,उन्हे समझाओ ना!",अजीत हवलदार पे झल्लाया,"..जिस मा के हाथो से बच्चे को छिना गया है उसका क्या हाल होगा!"
"मैं अच्छे से जानती हू,ऑफीसर.",राम्या हवलदार के पीछे हॉल तक आ गयी थी,"..मैं भी 1 माँ हू."
हा..",अजीत ने सांस भरी,"..ठीक है,आप प्रधान जी से मिल लीजिए फिर जैसा वो चाहें."
"ओके.",उन्हे अंदर जानेकी ज़रूरत नही पड़ी जसजीत वही आ गया था.
"नमस्ते,प्रधान जी.मैं जानती हू कि इस मुश्किल वक़्त मे मैं बस आपको अपने लफ़ज़ो से ही सहारा दे सकती हू."
"राम्या जी,इनका सहारा भी कोई कम नही होता है."
"प्रधान साहब,नारी उत्थान समिति के सिलसिले मे ही अंजलि जी & हमारी जान-पहचान गहरी हुई & मैं इस वक़्त उनका दर्द बहुत अच्छे से समझती हू."
"जी,राम्या जी.बहुत परेशान है वो.खुद को ज़िम्मेदार समझ रही है इस हादसे का.कहती है कि उसने अपने हाथो से अपने बच्चे को उन दरिंदो के हवाले कैसे कर दिया..बड़ी मुश्किल से डॉक्टर्स ने उसे दवा देके शांत किया है..वरना मैं आपको मिलवा देता उनसे."
"कोई बात नही,प्रधान जी.अगर मैं आपके किसी काम आ सकु तो ज़रूर याद करें."
"शुक्रिया,राम्या जी."
"सर,CM साहब आ रहे हैं.",राम्या के जाते ही प्रधान का पीए & अजीत के कॉन्स्टेबल ने 1 साथ दोनो को खबर दी.अजीत 1 कोने मे खड़ा हो गया.
"प्रधान साहब,मैने कमिशनर से खुद बात की है & पल-2 की खबर ले रहा हू..",CM मधुकर अत्रे सेक्रेटरी अवस्थी के साथ हॉल मे आया,"..हिम्मत रखिए बहुत जल्द ही अनीश हमारे साथ होगा.",तीनो बाते करने लगे तो अजीत के मन मे 1 ख़याल आया.वो हाल से बाहर आया & उसे बाहर ही सतपाल खड़ा मिल गया.
"सतपाल."
"साहब."
"CM साहब शाम को 6 बजे कहा थे?",सतपाल ने सर झुका लिया & खामोश हो गया.
"जी.."
"झिझको मत सतपाल.बोलो."
"जी..ग्लोरीया अपार्टमेंट."
"हूँ..ठीक है."
अजीत बंगले के लॉन मे आ गया & 1 सिगरेट सुलगा ली.उसके ज़हन मे 2 दिन पहले मुर्शिद से की गयी पुच्छ-ताछ घूम रही थी,"देखो,मुर्शिद.मैं जानता हू कि तुम अभी भी कुच्छ च्छूपा रहे हो."
"साहब,मैने सब बता दिया है आपको.",मुर्शिद गिड़गिडया.
"देखो,मैं समझता हू तुम्हारी मुश्किल इसलिए मैं बस सवाल करूँगा & तुम बस हा या ना मे सर हिलाना.इस तरह ना तुम्हे कुच्छ बोलना पड़ेगा ना कोई मुश्किल होगी. ठीक है?",मुर्शिद ने हां मे सर हिलाया.
"मुर्शिद,वो जो टेंटवल्ला & आर्म्स डीलर के साथ तुम्हारी मीटिंग थी वो तुम आनेवाले एलेक्षन्स के किसी काम के सिलसिले मे कर रहे थे?",मुर्शिद ने हा मे सर हिलाया.
"तुमसे सबसे पहले कॉंटॅक्ट किया टेंटवल्ले ने?",सर फिर हा मे हिला.
"लेकिन तुमने उसे मना कर दिया क्यूकी तुम्हे उसपे यकीन नही था?",फिर से हां.
"तो उसने 1 ऐसे शख्स का नाम लिया जिसे सुन तुम्हारी आँखे हैरत से ज़रूर फैली होंगी?",उस वक़्त का तो पता नही लेकिन हवालात मे अजीत के सामने मुर्शिद की आँखे ज़रूर फैल गयी थी अचंभे से.उसने हा मे सर हिलाया.
"उसने तुम्हे किसी तरह भरोसा दिलाया कि वो ताक़तवर शख्स ही ये काम करवाना चाहता है?",जवाब हा था.
"तुम्हे काम पता था क्या है?",उसने सर इनकार मे हिलाया.
"तो उस दिन की मीटिंग के बाद पता चलता?",जवाब 1 बार फिर से हां था.
"वो ताक़तवर शख्स कौन है मुर्शिद.कोई पोलिसेवला?",इनकार मे सर हिला.
"कोई सरकारी अफ़सर?",फिर से ना.
"कोई व्यापारी,बिज़्नेसमॅन?",1 बार फिर ना.
"कोई नेता?",बहुत धीरे से मुर्शिद ने हां मे सर हिलाया.
"कितना बड़ा,मुनिसिपल कॉर्पोरेशन के दर्जे का?",जवाब ना था.
"तो डिस्ट्रिक्ट लेवेल का?",फिर से ना.
"राज्य के लेवेल का?",मुर्शिद थोड़ी देर ऐसे ही बैठा रहा फिर उसने हा मे सर हिलाया.
"राजाइया मे कितना ऊँचा?क्या वो सरकार मे है?",जवाब हा था.
"कैसा मिनिस्टर है?छ्होटा-मोटा?",जवाब ना था.
"तगड़ा?",जवाब हा था.
"कितना तगड़ा?उपर से कौन से दर्जे पे रखें उसे?तीसरे?",जवाब ना था.
"दूसरे?",फिर से ना.
"पहले?सबसे ऊँचा?",बहुत हल्के से मुर्शिद ने हा मे सर हिलाया.
"शुक्रिया,मुर्शिद.अब तुम यहा महफूज़ हो."
हो ना हो CM अत्रे का इस आपहरण से कोई ना कोई लिंक तो है..वो सिगरेट का आख़िरी कश ले रहा था..अत्रे के पास वजह भी माकूल थी..क्या उसे वेर्मा साहब को सब बता देना चाहिए लेकिन अगर वो ज़रा भी ग़लत हुआ तो उसका करियर चौपट हो जाएगा..लेकिन फिर आज अत्रे ग्लोरीया क्यू गया था?..नही इस वक़्त उसे अत्रे पे खुद ही नज़र रखनी होगी & ठोस सबूत हाथ लगते ही वेर्मा साहब को इत्तिला देनी होगी.उसने सिगरेट लॉन की घास पे फेंक उसे मसला & वापस अंदर चला गया.
"बोलो अजिंक्या..",जेसीपी सिंग अपनी कुर्सी पे पीछे आड़ के बैठे थे,तनाव & थकान अब उनके चेहरे पे सॉफ झलक रहे थे,"..क्या शर्तें हैं तुम्हारी?"
"सबसे पहले तो मुझे अभी तक की सारी जानकारी चाहिए ना केवल अपहरण के बारे मे बल्कि बच्चे के स्कूल,उसके दोस्त & सबसे ज़रूरी उसके मा-बाप के बारे मे."
"मा-बाप तो माशूर हस्ती हैं,अजिंक्या.उनके बारे मे क्या जानना चाहते हो?"
"सर,हर इंसान के कुच्छ राज़ होते हैं & हो सकता है कि मा-बाप की किसी ग़लती की सज़ा बेचारा बच्चा भुगत रहा हो तो जैसे ही आपके लोगो को उनके बारे मे कुच्छ भी पता चले,मुझे ज़रूर बताएँ.मुझसे कुच्छ भी ना च्छुपाएँ."
"ओके.तुम्हे पूरे प्रधान परिवार के पिच्छले 2 से 3 महीने तक की मूव्मेंट्स & आने-जाने वकली जगहो,उनके करीबी लोग & बाकी जानकारी की फाइल दे दी जाएगी.और क्या चाहिए?"
"अभी तक अगवा करने वालो ने कोई फोन किया है या नही?"
"नही.ये तो हम सब अच्छे से जानते हैं कि जब तक मा-बाप पूरी तरह परेशान ना हो जाएँ,वो फोन करके अपनी माँग सामने नही रखेंगे."
"ह्म्म..मैं ये चाहता हू,सर की आप अभी सारे न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बार वालो से बात करें कि वो इस केस के बारे मे बस रिपोर्ट करें अपनी अटकले ना लगाएँ.वो लोग टीवी & अख़बार के ज़रिए हमारी खबर ले रहे होंगे या फिर घर का कोई करीबी अगर मिला है तो उस से.ऐसे मे 1 छ्होटी सी अफवाह भी बच्चे के लिए ख़तरनाक हो सकती है."
"अजिंक्या,कमिशनर साहब ने पहले इस बारे मे सोच लिया था & अभी वो अपने दफ़्तर मे बैठे उन्ही लोगो को फोन कर रहे हैं."
"गुड,सर.मैं चाहता हू कि आप मुझे & मेरे साथियो को 1 ऐसे घर मे रखें जिसका पता कोई ना जानता हो.1 फोन नंबर मुझे दीजिए जिसकी 5-6 लाइन्स हो ताकि कोई भी कॉल करे तो नंबर मिल जाए."
"मगर क्यू,अजिंक्या?किडनॅपर्स प्रधान साहब के घर पे फोन करे तो क्या हर्ज़ है?"
"सर,उनका अपना खून मुसीबत मे है.वो नीच लोग जो भी कहेंगे वो मान लेंगे & उसके बाद भी उसके बचने की गॅरेंटी कितनी है हम अच्छे से जानते हैं..",सभी खामोश हो गये,बात बिल्कुल सही थी.अपनी जान बचाने के लिए वो बच्चे की जान लेने मे हिचकते तो बिल्कुल नही,"..इसलिए बेहतर होगा कि ये काम उनकी नज़रो से दूर हो & अगर कोई घर का आदमी इस गुनाह के पीछे है तो वो भी हमारी खबर उन तक नही पहुँचा सकता.."
"..आप बस नंबर को सारे न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बारो मे दे दीजिए.टीवी वाले लगातार उस नंबर को दिखाएँगे & उसके बारे मे बताएँगे कि किडनॅपर्स उस नंबर पे बात करें.यही काम हर अख़बार के पहले पन्ने पे होगा."
"ओके लेकिन इस बारे मे 1 बार कमिशनर साहब से पुच्छना होगा &.."
"& क्या सर?"
"बच्चे के पिता से भी तो पुच्छना ही होगा ना."
"सर,मैं ये काम तब तक नही करूँगा जब तक कि जसजीत प्रधान मुझे इसकी इजाज़त खुद ना दें.मेरी अगली शर्त यही होने वाली थी."
"ठीक है तो तुम यहा से सीधा वाहा जाओ."
"2 शर्तें और हैं सर."
"बोलो."
"मैं एसीपी दिव्या माथुर को अच्छी तरह से जानता हू & चाहता हू कि आप उन्ही को मेरे साथ रखें."
"ठीक है."
"सर,मेरा काम बस बच्चे को सही सलामत वापस लाना है.उसके लिए मैं कुच्छ भी करू,उन किडनॅपर्स की जो भी बात मानु,उसपे कोई सवाल नही उठेंगे."
"मगर..",कमरे मे 1 और सीनियर अफ़सर बैठा था & उसने सवाल उठाया ही था मगर जेसीपी साहब ने उसे रोक दिया.
"मेरी जासूसी नही की जाएगी & मैं जो मांगू मिलेगा & हमारे अलावा किसी को भी पता नही चलना चाहिए कि मैं ये काम कर रहा हू."
"ठीक है."
"तो मैं काम शुरू करता हू,सर ."
"गुड लक,अजिंक्या.",दोनो ने हाथ मिलाया.
"थॅंक यू,सर.",वो जानता था कि इस शुभकामना की उसे बहुत ज़रूरत थी.
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कामुक कहानियाँ
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क्रमशः........
KHEL KHILADI KA paart--45
gataank se aage............-
Ajit pradhan ke bungle ke sare staff se puchh chuka tha.aamtaur pe kidnapping cases me sabse pehla shaq parivar valo & karibi logo pe hi jata hai.Nina & Mukul bhi Shlok ke sath vaha maujood the.ajit ne unse bhi baat ki thi magar use yaha kuchh gadbad nahi lagi thi.
"sir,vo Lok vikas ki Ramya Sen aayi hain.kehit hain ki anjali ji se bina mile nahi jayengi."
"are,unhe samjhao na!",ajit hawaldar pe jhallaya,"..jis maa ke hatho se bachche ko chhina gaya hai uska kya haal hoga!"
"main achhe se janti hu,officer.",ramya hawaldar ke peechhe hall tak aa gayi thi,"..main bhi 1 maan hu."
huh..",ajit ne sans bhari,"..thik hai,aap pradhan ji se mil lijiye fir jaisa vo chahen."
"ok.",unhe andar janek kiz arurat nahi padi jasjit vahi aa gaya tha.
"namaste,pradhan ji.main janti hu ki is mushkil waqt me main bas main bas aapko apne lafzo se hi sahar de sakti hu."
"ramya ji,inka sahara bhi koi kam nahi hota hai."
"pradhan sahab,Nari Utthan Samiti ke silsile me hi anjali ji & humari jaan-pehchan gehri hui & main is waqt unka dard bahut achhe se samajhti hu."
"ji,ramya ji.bahut pareshan hai vo.khud ko zimmedar samajh rahi hai is hadse ka.kehti hai ki usne apne hatho se apne bachche ko un darindo ke hawale kaise kar diya..badi mushkil se doctors ne use dawa deke shant kiya hai..varna main aapko milwa deta unse."
"koi baat nahi,pradhan ji.agar main aapke kisi kaam aa saku to zarur yaad karen."
"shukriya,ramya ji."
"sir,CM sahab aa rahe hain.",ramya ke jate hi pradhan ka PA & ajit ke constable ne 1 sath dono ko khabar di.ajit 1 kone me khada ho gaya.
"pradhan sahab,maine commissioner se khud baat ki hai & pal-2 ki khabar le raha hu..",CM Madhukar Atre secretary Awasthi ke sath hall me aaya,"..himmat rakhiye bahut jald hi anish humare sath hoga.",teeno baate karne lage to ajit ke man me 1 khayal aaya.vo haal se bahar aaya & use bahar hi Satpal khada mil gaya.
"Satpal."
"sahab."
"CM sahab sham ko 6 baje kaha the?",satpal ne sar jhuka liya & khamosh ho gaya.
"ji.."
"jhijhko mat satpal.bolo."
"ji..gloria Apartment."
"hun..thik hai."
Ajit bungle ke lawn me aa gaya & 1 cigarette sulga li.uske zehan me 2 din pehle Murshid se ki gayi puchh-tachh ghum rahi thi,"dekho,murshid.main janta hu ki tum abhi bhi kuchh chhupa rahe ho."
"sahab,maine sab bata diya hai aapko.",murshid gidgidaya.
"dekho,main samajhta hu tumhari mushkil isliye main bas sawal karunga & tum bas haa ya naa me sar hilana.is tarah na tumhe kuchh bolna padega na koi mushkil hogi. thik hai?",murshid ne aahn me sar hilaya.
"murshid,vo jo tentwalla & arms dealer ke sath tum,hari meeting thi vo tum aanevale elections ke kisi kaam ke silsile me kar rahe the?",murshid ne haa me sar hilaya.
"tumse sabse pehle contact kiya tentwalle ne?",sar fir haa me hila.
"lekin tumne use mana kar diya kyuki tumhe uspe yakin nahi tha?",fir se haan.
"to usne 1 aise shakhs ka naam liya jise sun tumhari aankhe hairat se zarur faili hongi?",us waqt ka to pata nahi lekin hawalat me ajit ke samne murshid ki aankhe zarur fail gayi thi achambhe se.usne haa me sar hilaya.
"usne tumhe kisi tarah bharosa dilaya ki vo taqatwar shakhs hi ye kaam karwana chahta hai?",jawab haa tha.
"tumhe kaam pata tha kya hai?",usne sar inkar me hilaya.
"to us din ki meeting ke baad pata chalta?",jawab 1 baar fir se haan tha.
"vo taqatwar shakhs kaun hai murshid.koi policewala?",inkar me sar hila.
"koi sarkari afsar?",fir se naa.
"koi vyapari,businessman?",1 baar fir naa.
"koi neta?",bahut dhire se murshid ne haan me sar hilaya.
"kitna bada,municipal corporation ke darje ka?",jawab na tha.
"to district level ka?",fir se naa.
"rajya ke level ka?",murshid thodi der aise hi baitha raha fir usne haa me sar hilaya.
"rajya me kitna ooncha?kya vo sarkar me hai?",jawab haa tha.
"kaisa minister hai?chhota-mota?",jawab na tha.
"tagda?",jawab haa tha.
"kitna tagda?upar se kaun se darje pe rakhen use?teesre?",jawab na tha.
"dusre?",fir se naa.
"pehle?sabse ooncha?",bahut halke se murshid ne haa me sar hilaya.
"shukriya,murshid.ab tum yaha mehfuz ho."
ho na ho CM Atre ka is apharan se koi na koi link to hai..vo cigarette ka aakhiri kash le raha tha..atre ke baad vajah bhi makul thi..kya use Verma sahab ko sab bata dena chhaiye lekin agar vo zara bhi galat hua to uska career chaupat ho jayega..lekin fir aaj atre gloria kyu gaya tha?..nahi is waqt use atre pe khud hi nazar rakhni hogi & thos saboot hath lagte hi verma sahab ko ittila deni hogi.usne cigarette lawn ki ghas pe fenk use masla & vapas andar chala gaya.
"Bolo Ajinkya..",JCP Singh apni kursi pe peechhe ad ke baithe the,tanav & thakan ab unke chehre pe saaf jhalak rahe the,"..kya sharten hain tumhari?"
"sabse pehle to mujhe abhi tak ki sari jankari chahiye na kewal apharan ke bare me balki bachche ke school,uske dost & sabse zaruri uske maa-baap ke bare me."
"maa-baap to mashoor hasti hain,ajinkya.unke bare me kya jaanana chahte ho?"
"sir,har insan ke kuchh raaz hote hain & ho sakta hai ki maa-baap ki kisi galti ki saza bechara bachcha bhugat raha ho to jaise hi aapke logo ko unke bare me kuchh bhi pata chale,mujhe zarur batayen.mujhse kuchh bhi na chhupayen."
"ok.tumhe pure Pradhan parivar ke pichhle 2 se 3 mahine tak ki movements & aane-jane vakli jagaho,unke karibi log & baki jankari ki file de di jayegi.aur kya chahiye?"
"abhi tak agwa karne valo ne koi fone kiya hai ya nahi?"
"nahi.ye to hum sab achhe se jante hain ki jab tak maa-baap puri tarah pareshan na ho jayen,vo fone karke apni mang samne nahi rakhenge."
"hmm..main ye chahta hu,sir ki aap abhi sare news channels & akhbar valo se baat karen ki vo is case ke bare me bas report karen apni atkale na lagayen.vo log tv & akhbar ke zariye humari khabar le rahe honge ya fir ghar ka koi karibi agar mila hai to us se.aise me 1 chhoti si afwah bhi bachche ke liye khatarnak ho sakti hai."
"ajinkya,commissioner sahab ne pehle is bare me soch liya tha & abhi vo apne daftar me baithe unhi logo ko fone kar rahe hain."
"good,sir.main chahta hu ki aap mujhe & mere sathiyo ko 1 aise ghar me rakhen jiska pata koi na janta ho.1 fone number mujhe dijiye jiski 5-6 lines ho taki koi bhi call kare to number mil jaye."
"magar kyu,ajinkya?kidnappers pradhan sahab ke ghar pe fone kare to kya harz hai?"
"sir,unka apna khun musibat me hai.vo neech log jo bhi kahenge vo maan lenge & uske baad bhi uske bachne ki guarantee kitni hai hum achhe se jante hain..",sabhi khamosh ho gaye,baat bilkul sahi thi.apni jaan bachane ke liye vo bachche ki jaan lene me hichakte to bilkul nahi,"..isliye behtar hoga ki ye kaam unki nazaro se door ho & agar koi ghar ka aadmi is gunah ke peechhe hai to vo bhi humari khabar un tak nahi pahuncha sakta.."
"..aap bas number ko sare news channels & akhbaro me de dijiye.tv vale lagatar us number ko dikhayenge & uske bare me batayenge ki kidnappers us number pe baat karen.yehi kaam har akhbar ke pehle panne pe hoga."
"ok lekin is bare me 1 baar commissioner sahab se puchhna hoga &.."
"& kya sir?"
"bachche ke pita se bhi to puchhna hi hoga na."
"sir,main ye kaam tab tak nahi karunga jab tak ki Jasjit Pradhan mujhe iski ijazat khud na den.meri agli shart yehi hone wali thi."
"thik hai to tum yaha se seedha vaha jao."
"2 sharten aur hain sir."
"bolo."
"main ACP Divya Mathur ko achhi tarah se janta hu & chahta hu ki aap unhi ko mere sath rakhen."
"thik hai."
"sir,mera kaam bas bachche ko sahi salamat vapas lana hai.uske liye main kuchh bhi karu,un kidnappers ki jo bhi baat manu,uspe koi sawal nahi uthenge."
"magar..",kamre me 1 aur senior afsar baitha tha & usne sawal uthaya hi tha magar JCP sahab ne use rok diya.
"meri jasusi nahi ki jayegi & main jo mangu milega & humare alawa kisi ko bhi pata nahi chalna chahiye ki main ye kaam kar raha hu."
"thik hai."
"to main kaam shuru karta hu,sir ."
"good luck,ajinkya.",dono ne hath milaya.
"thank you,sir.",vo janta tha ki is shubhkamna ki use bahut zarurat thi.
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kaamuk kahaaniyaan
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kramashah........
गतान्क से आगे............-
अजीत प्रधान के बंगल के सारे स्टाफ से पुच्छ चुका था.आमतौर पे किडनॅपिंग केसस मे सबसे पहला शक़ परिवार वालो & करीबी लोगो पे ही जाता है.नीना & मुकुल भी श्लोक के साथ वाहा मौजूद थे.अजीत ने उनसे भी बात की थी मगर उसे यहा कुच्छ गड़बड़ नही लगी थी.
"सर,वो लोक विकास की राम्या सेन आई हैं.कहती हैं कि अंजलि जी से बिना मिले नही जाएँगी."
"अरे,उन्हे समझाओ ना!",अजीत हवलदार पे झल्लाया,"..जिस मा के हाथो से बच्चे को छिना गया है उसका क्या हाल होगा!"
"मैं अच्छे से जानती हू,ऑफीसर.",राम्या हवलदार के पीछे हॉल तक आ गयी थी,"..मैं भी 1 माँ हू."
हा..",अजीत ने सांस भरी,"..ठीक है,आप प्रधान जी से मिल लीजिए फिर जैसा वो चाहें."
"ओके.",उन्हे अंदर जानेकी ज़रूरत नही पड़ी जसजीत वही आ गया था.
"नमस्ते,प्रधान जी.मैं जानती हू कि इस मुश्किल वक़्त मे मैं बस आपको अपने लफ़ज़ो से ही सहारा दे सकती हू."
"राम्या जी,इनका सहारा भी कोई कम नही होता है."
"प्रधान साहब,नारी उत्थान समिति के सिलसिले मे ही अंजलि जी & हमारी जान-पहचान गहरी हुई & मैं इस वक़्त उनका दर्द बहुत अच्छे से समझती हू."
"जी,राम्या जी.बहुत परेशान है वो.खुद को ज़िम्मेदार समझ रही है इस हादसे का.कहती है कि उसने अपने हाथो से अपने बच्चे को उन दरिंदो के हवाले कैसे कर दिया..बड़ी मुश्किल से डॉक्टर्स ने उसे दवा देके शांत किया है..वरना मैं आपको मिलवा देता उनसे."
"कोई बात नही,प्रधान जी.अगर मैं आपके किसी काम आ सकु तो ज़रूर याद करें."
"शुक्रिया,राम्या जी."
"सर,CM साहब आ रहे हैं.",राम्या के जाते ही प्रधान का पीए & अजीत के कॉन्स्टेबल ने 1 साथ दोनो को खबर दी.अजीत 1 कोने मे खड़ा हो गया.
"प्रधान साहब,मैने कमिशनर से खुद बात की है & पल-2 की खबर ले रहा हू..",CM मधुकर अत्रे सेक्रेटरी अवस्थी के साथ हॉल मे आया,"..हिम्मत रखिए बहुत जल्द ही अनीश हमारे साथ होगा.",तीनो बाते करने लगे तो अजीत के मन मे 1 ख़याल आया.वो हाल से बाहर आया & उसे बाहर ही सतपाल खड़ा मिल गया.
"सतपाल."
"साहब."
"CM साहब शाम को 6 बजे कहा थे?",सतपाल ने सर झुका लिया & खामोश हो गया.
"जी.."
"झिझको मत सतपाल.बोलो."
"जी..ग्लोरीया अपार्टमेंट."
"हूँ..ठीक है."
अजीत बंगले के लॉन मे आ गया & 1 सिगरेट सुलगा ली.उसके ज़हन मे 2 दिन पहले मुर्शिद से की गयी पुच्छ-ताछ घूम रही थी,"देखो,मुर्शिद.मैं जानता हू कि तुम अभी भी कुच्छ च्छूपा रहे हो."
"साहब,मैने सब बता दिया है आपको.",मुर्शिद गिड़गिडया.
"देखो,मैं समझता हू तुम्हारी मुश्किल इसलिए मैं बस सवाल करूँगा & तुम बस हा या ना मे सर हिलाना.इस तरह ना तुम्हे कुच्छ बोलना पड़ेगा ना कोई मुश्किल होगी. ठीक है?",मुर्शिद ने हां मे सर हिलाया.
"मुर्शिद,वो जो टेंटवल्ला & आर्म्स डीलर के साथ तुम्हारी मीटिंग थी वो तुम आनेवाले एलेक्षन्स के किसी काम के सिलसिले मे कर रहे थे?",मुर्शिद ने हा मे सर हिलाया.
"तुमसे सबसे पहले कॉंटॅक्ट किया टेंटवल्ले ने?",सर फिर हा मे हिला.
"लेकिन तुमने उसे मना कर दिया क्यूकी तुम्हे उसपे यकीन नही था?",फिर से हां.
"तो उसने 1 ऐसे शख्स का नाम लिया जिसे सुन तुम्हारी आँखे हैरत से ज़रूर फैली होंगी?",उस वक़्त का तो पता नही लेकिन हवालात मे अजीत के सामने मुर्शिद की आँखे ज़रूर फैल गयी थी अचंभे से.उसने हा मे सर हिलाया.
"उसने तुम्हे किसी तरह भरोसा दिलाया कि वो ताक़तवर शख्स ही ये काम करवाना चाहता है?",जवाब हा था.
"तुम्हे काम पता था क्या है?",उसने सर इनकार मे हिलाया.
"तो उस दिन की मीटिंग के बाद पता चलता?",जवाब 1 बार फिर से हां था.
"वो ताक़तवर शख्स कौन है मुर्शिद.कोई पोलिसेवला?",इनकार मे सर हिला.
"कोई सरकारी अफ़सर?",फिर से ना.
"कोई व्यापारी,बिज़्नेसमॅन?",1 बार फिर ना.
"कोई नेता?",बहुत धीरे से मुर्शिद ने हां मे सर हिलाया.
"कितना बड़ा,मुनिसिपल कॉर्पोरेशन के दर्जे का?",जवाब ना था.
"तो डिस्ट्रिक्ट लेवेल का?",फिर से ना.
"राज्य के लेवेल का?",मुर्शिद थोड़ी देर ऐसे ही बैठा रहा फिर उसने हा मे सर हिलाया.
"राजाइया मे कितना ऊँचा?क्या वो सरकार मे है?",जवाब हा था.
"कैसा मिनिस्टर है?छ्होटा-मोटा?",जवाब ना था.
"तगड़ा?",जवाब हा था.
"कितना तगड़ा?उपर से कौन से दर्जे पे रखें उसे?तीसरे?",जवाब ना था.
"दूसरे?",फिर से ना.
"पहले?सबसे ऊँचा?",बहुत हल्के से मुर्शिद ने हा मे सर हिलाया.
"शुक्रिया,मुर्शिद.अब तुम यहा महफूज़ हो."
हो ना हो CM अत्रे का इस आपहरण से कोई ना कोई लिंक तो है..वो सिगरेट का आख़िरी कश ले रहा था..अत्रे के पास वजह भी माकूल थी..क्या उसे वेर्मा साहब को सब बता देना चाहिए लेकिन अगर वो ज़रा भी ग़लत हुआ तो उसका करियर चौपट हो जाएगा..लेकिन फिर आज अत्रे ग्लोरीया क्यू गया था?..नही इस वक़्त उसे अत्रे पे खुद ही नज़र रखनी होगी & ठोस सबूत हाथ लगते ही वेर्मा साहब को इत्तिला देनी होगी.उसने सिगरेट लॉन की घास पे फेंक उसे मसला & वापस अंदर चला गया.
"बोलो अजिंक्या..",जेसीपी सिंग अपनी कुर्सी पे पीछे आड़ के बैठे थे,तनाव & थकान अब उनके चेहरे पे सॉफ झलक रहे थे,"..क्या शर्तें हैं तुम्हारी?"
"सबसे पहले तो मुझे अभी तक की सारी जानकारी चाहिए ना केवल अपहरण के बारे मे बल्कि बच्चे के स्कूल,उसके दोस्त & सबसे ज़रूरी उसके मा-बाप के बारे मे."
"मा-बाप तो माशूर हस्ती हैं,अजिंक्या.उनके बारे मे क्या जानना चाहते हो?"
"सर,हर इंसान के कुच्छ राज़ होते हैं & हो सकता है कि मा-बाप की किसी ग़लती की सज़ा बेचारा बच्चा भुगत रहा हो तो जैसे ही आपके लोगो को उनके बारे मे कुच्छ भी पता चले,मुझे ज़रूर बताएँ.मुझसे कुच्छ भी ना च्छुपाएँ."
"ओके.तुम्हे पूरे प्रधान परिवार के पिच्छले 2 से 3 महीने तक की मूव्मेंट्स & आने-जाने वकली जगहो,उनके करीबी लोग & बाकी जानकारी की फाइल दे दी जाएगी.और क्या चाहिए?"
"अभी तक अगवा करने वालो ने कोई फोन किया है या नही?"
"नही.ये तो हम सब अच्छे से जानते हैं कि जब तक मा-बाप पूरी तरह परेशान ना हो जाएँ,वो फोन करके अपनी माँग सामने नही रखेंगे."
"ह्म्म..मैं ये चाहता हू,सर की आप अभी सारे न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बार वालो से बात करें कि वो इस केस के बारे मे बस रिपोर्ट करें अपनी अटकले ना लगाएँ.वो लोग टीवी & अख़बार के ज़रिए हमारी खबर ले रहे होंगे या फिर घर का कोई करीबी अगर मिला है तो उस से.ऐसे मे 1 छ्होटी सी अफवाह भी बच्चे के लिए ख़तरनाक हो सकती है."
"अजिंक्या,कमिशनर साहब ने पहले इस बारे मे सोच लिया था & अभी वो अपने दफ़्तर मे बैठे उन्ही लोगो को फोन कर रहे हैं."
"गुड,सर.मैं चाहता हू कि आप मुझे & मेरे साथियो को 1 ऐसे घर मे रखें जिसका पता कोई ना जानता हो.1 फोन नंबर मुझे दीजिए जिसकी 5-6 लाइन्स हो ताकि कोई भी कॉल करे तो नंबर मिल जाए."
"मगर क्यू,अजिंक्या?किडनॅपर्स प्रधान साहब के घर पे फोन करे तो क्या हर्ज़ है?"
"सर,उनका अपना खून मुसीबत मे है.वो नीच लोग जो भी कहेंगे वो मान लेंगे & उसके बाद भी उसके बचने की गॅरेंटी कितनी है हम अच्छे से जानते हैं..",सभी खामोश हो गये,बात बिल्कुल सही थी.अपनी जान बचाने के लिए वो बच्चे की जान लेने मे हिचकते तो बिल्कुल नही,"..इसलिए बेहतर होगा कि ये काम उनकी नज़रो से दूर हो & अगर कोई घर का आदमी इस गुनाह के पीछे है तो वो भी हमारी खबर उन तक नही पहुँचा सकता.."
"..आप बस नंबर को सारे न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बारो मे दे दीजिए.टीवी वाले लगातार उस नंबर को दिखाएँगे & उसके बारे मे बताएँगे कि किडनॅपर्स उस नंबर पे बात करें.यही काम हर अख़बार के पहले पन्ने पे होगा."
"ओके लेकिन इस बारे मे 1 बार कमिशनर साहब से पुच्छना होगा &.."
"& क्या सर?"
"बच्चे के पिता से भी तो पुच्छना ही होगा ना."
"सर,मैं ये काम तब तक नही करूँगा जब तक कि जसजीत प्रधान मुझे इसकी इजाज़त खुद ना दें.मेरी अगली शर्त यही होने वाली थी."
"ठीक है तो तुम यहा से सीधा वाहा जाओ."
"2 शर्तें और हैं सर."
"बोलो."
"मैं एसीपी दिव्या माथुर को अच्छी तरह से जानता हू & चाहता हू कि आप उन्ही को मेरे साथ रखें."
"ठीक है."
"सर,मेरा काम बस बच्चे को सही सलामत वापस लाना है.उसके लिए मैं कुच्छ भी करू,उन किडनॅपर्स की जो भी बात मानु,उसपे कोई सवाल नही उठेंगे."
"मगर..",कमरे मे 1 और सीनियर अफ़सर बैठा था & उसने सवाल उठाया ही था मगर जेसीपी साहब ने उसे रोक दिया.
"मेरी जासूसी नही की जाएगी & मैं जो मांगू मिलेगा & हमारे अलावा किसी को भी पता नही चलना चाहिए कि मैं ये काम कर रहा हू."
"ठीक है."
"तो मैं काम शुरू करता हू,सर ."
"गुड लक,अजिंक्या.",दोनो ने हाथ मिलाया.
"थॅंक यू,सर.",वो जानता था कि इस शुभकामना की उसे बहुत ज़रूरत थी.
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कामुक कहानियाँ
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क्रमशः........
KHEL KHILADI KA paart--45
gataank se aage............-
Ajit pradhan ke bungle ke sare staff se puchh chuka tha.aamtaur pe kidnapping cases me sabse pehla shaq parivar valo & karibi logo pe hi jata hai.Nina & Mukul bhi Shlok ke sath vaha maujood the.ajit ne unse bhi baat ki thi magar use yaha kuchh gadbad nahi lagi thi.
"sir,vo Lok vikas ki Ramya Sen aayi hain.kehit hain ki anjali ji se bina mile nahi jayengi."
"are,unhe samjhao na!",ajit hawaldar pe jhallaya,"..jis maa ke hatho se bachche ko chhina gaya hai uska kya haal hoga!"
"main achhe se janti hu,officer.",ramya hawaldar ke peechhe hall tak aa gayi thi,"..main bhi 1 maan hu."
huh..",ajit ne sans bhari,"..thik hai,aap pradhan ji se mil lijiye fir jaisa vo chahen."
"ok.",unhe andar janek kiz arurat nahi padi jasjit vahi aa gaya tha.
"namaste,pradhan ji.main janti hu ki is mushkil waqt me main bas main bas aapko apne lafzo se hi sahar de sakti hu."
"ramya ji,inka sahara bhi koi kam nahi hota hai."
"pradhan sahab,Nari Utthan Samiti ke silsile me hi anjali ji & humari jaan-pehchan gehri hui & main is waqt unka dard bahut achhe se samajhti hu."
"ji,ramya ji.bahut pareshan hai vo.khud ko zimmedar samajh rahi hai is hadse ka.kehti hai ki usne apne hatho se apne bachche ko un darindo ke hawale kaise kar diya..badi mushkil se doctors ne use dawa deke shant kiya hai..varna main aapko milwa deta unse."
"koi baat nahi,pradhan ji.agar main aapke kisi kaam aa saku to zarur yaad karen."
"shukriya,ramya ji."
"sir,CM sahab aa rahe hain.",ramya ke jate hi pradhan ka PA & ajit ke constable ne 1 sath dono ko khabar di.ajit 1 kone me khada ho gaya.
"pradhan sahab,maine commissioner se khud baat ki hai & pal-2 ki khabar le raha hu..",CM Madhukar Atre secretary Awasthi ke sath hall me aaya,"..himmat rakhiye bahut jald hi anish humare sath hoga.",teeno baate karne lage to ajit ke man me 1 khayal aaya.vo haal se bahar aaya & use bahar hi Satpal khada mil gaya.
"Satpal."
"sahab."
"CM sahab sham ko 6 baje kaha the?",satpal ne sar jhuka liya & khamosh ho gaya.
"ji.."
"jhijhko mat satpal.bolo."
"ji..gloria Apartment."
"hun..thik hai."
Ajit bungle ke lawn me aa gaya & 1 cigarette sulga li.uske zehan me 2 din pehle Murshid se ki gayi puchh-tachh ghum rahi thi,"dekho,murshid.main janta hu ki tum abhi bhi kuchh chhupa rahe ho."
"sahab,maine sab bata diya hai aapko.",murshid gidgidaya.
"dekho,main samajhta hu tumhari mushkil isliye main bas sawal karunga & tum bas haa ya naa me sar hilana.is tarah na tumhe kuchh bolna padega na koi mushkil hogi. thik hai?",murshid ne aahn me sar hilaya.
"murshid,vo jo tentwalla & arms dealer ke sath tum,hari meeting thi vo tum aanevale elections ke kisi kaam ke silsile me kar rahe the?",murshid ne haa me sar hilaya.
"tumse sabse pehle contact kiya tentwalle ne?",sar fir haa me hila.
"lekin tumne use mana kar diya kyuki tumhe uspe yakin nahi tha?",fir se haan.
"to usne 1 aise shakhs ka naam liya jise sun tumhari aankhe hairat se zarur faili hongi?",us waqt ka to pata nahi lekin hawalat me ajit ke samne murshid ki aankhe zarur fail gayi thi achambhe se.usne haa me sar hilaya.
"usne tumhe kisi tarah bharosa dilaya ki vo taqatwar shakhs hi ye kaam karwana chahta hai?",jawab haa tha.
"tumhe kaam pata tha kya hai?",usne sar inkar me hilaya.
"to us din ki meeting ke baad pata chalta?",jawab 1 baar fir se haan tha.
"vo taqatwar shakhs kaun hai murshid.koi policewala?",inkar me sar hila.
"koi sarkari afsar?",fir se naa.
"koi vyapari,businessman?",1 baar fir naa.
"koi neta?",bahut dhire se murshid ne haan me sar hilaya.
"kitna bada,municipal corporation ke darje ka?",jawab na tha.
"to district level ka?",fir se naa.
"rajya ke level ka?",murshid thodi der aise hi baitha raha fir usne haa me sar hilaya.
"rajya me kitna ooncha?kya vo sarkar me hai?",jawab haa tha.
"kaisa minister hai?chhota-mota?",jawab na tha.
"tagda?",jawab haa tha.
"kitna tagda?upar se kaun se darje pe rakhen use?teesre?",jawab na tha.
"dusre?",fir se naa.
"pehle?sabse ooncha?",bahut halke se murshid ne haa me sar hilaya.
"shukriya,murshid.ab tum yaha mehfuz ho."
ho na ho CM Atre ka is apharan se koi na koi link to hai..vo cigarette ka aakhiri kash le raha tha..atre ke baad vajah bhi makul thi..kya use Verma sahab ko sab bata dena chhaiye lekin agar vo zara bhi galat hua to uska career chaupat ho jayega..lekin fir aaj atre gloria kyu gaya tha?..nahi is waqt use atre pe khud hi nazar rakhni hogi & thos saboot hath lagte hi verma sahab ko ittila deni hogi.usne cigarette lawn ki ghas pe fenk use masla & vapas andar chala gaya.
"Bolo Ajinkya..",JCP Singh apni kursi pe peechhe ad ke baithe the,tanav & thakan ab unke chehre pe saaf jhalak rahe the,"..kya sharten hain tumhari?"
"sabse pehle to mujhe abhi tak ki sari jankari chahiye na kewal apharan ke bare me balki bachche ke school,uske dost & sabse zaruri uske maa-baap ke bare me."
"maa-baap to mashoor hasti hain,ajinkya.unke bare me kya jaanana chahte ho?"
"sir,har insan ke kuchh raaz hote hain & ho sakta hai ki maa-baap ki kisi galti ki saza bechara bachcha bhugat raha ho to jaise hi aapke logo ko unke bare me kuchh bhi pata chale,mujhe zarur batayen.mujhse kuchh bhi na chhupayen."
"ok.tumhe pure Pradhan parivar ke pichhle 2 se 3 mahine tak ki movements & aane-jane vakli jagaho,unke karibi log & baki jankari ki file de di jayegi.aur kya chahiye?"
"abhi tak agwa karne valo ne koi fone kiya hai ya nahi?"
"nahi.ye to hum sab achhe se jante hain ki jab tak maa-baap puri tarah pareshan na ho jayen,vo fone karke apni mang samne nahi rakhenge."
"hmm..main ye chahta hu,sir ki aap abhi sare news channels & akhbar valo se baat karen ki vo is case ke bare me bas report karen apni atkale na lagayen.vo log tv & akhbar ke zariye humari khabar le rahe honge ya fir ghar ka koi karibi agar mila hai to us se.aise me 1 chhoti si afwah bhi bachche ke liye khatarnak ho sakti hai."
"ajinkya,commissioner sahab ne pehle is bare me soch liya tha & abhi vo apne daftar me baithe unhi logo ko fone kar rahe hain."
"good,sir.main chahta hu ki aap mujhe & mere sathiyo ko 1 aise ghar me rakhen jiska pata koi na janta ho.1 fone number mujhe dijiye jiski 5-6 lines ho taki koi bhi call kare to number mil jaye."
"magar kyu,ajinkya?kidnappers pradhan sahab ke ghar pe fone kare to kya harz hai?"
"sir,unka apna khun musibat me hai.vo neech log jo bhi kahenge vo maan lenge & uske baad bhi uske bachne ki guarantee kitni hai hum achhe se jante hain..",sabhi khamosh ho gaye,baat bilkul sahi thi.apni jaan bachane ke liye vo bachche ki jaan lene me hichakte to bilkul nahi,"..isliye behtar hoga ki ye kaam unki nazaro se door ho & agar koi ghar ka aadmi is gunah ke peechhe hai to vo bhi humari khabar un tak nahi pahuncha sakta.."
"..aap bas number ko sare news channels & akhbaro me de dijiye.tv vale lagatar us number ko dikhayenge & uske bare me batayenge ki kidnappers us number pe baat karen.yehi kaam har akhbar ke pehle panne pe hoga."
"ok lekin is bare me 1 baar commissioner sahab se puchhna hoga &.."
"& kya sir?"
"bachche ke pita se bhi to puchhna hi hoga na."
"sir,main ye kaam tab tak nahi karunga jab tak ki Jasjit Pradhan mujhe iski ijazat khud na den.meri agli shart yehi hone wali thi."
"thik hai to tum yaha se seedha vaha jao."
"2 sharten aur hain sir."
"bolo."
"main ACP Divya Mathur ko achhi tarah se janta hu & chahta hu ki aap unhi ko mere sath rakhen."
"thik hai."
"sir,mera kaam bas bachche ko sahi salamat vapas lana hai.uske liye main kuchh bhi karu,un kidnappers ki jo bhi baat manu,uspe koi sawal nahi uthenge."
"magar..",kamre me 1 aur senior afsar baitha tha & usne sawal uthaya hi tha magar JCP sahab ne use rok diya.
"meri jasusi nahi ki jayegi & main jo mangu milega & humare alawa kisi ko bhi pata nahi chalna chahiye ki main ye kaam kar raha hu."
"thik hai."
"to main kaam shuru karta hu,sir ."
"good luck,ajinkya.",dono ne hath milaya.
"thank you,sir.",vo janta tha ki is shubhkamna ki use bahut zarurat thi.
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kaamuk kahaaniyaan
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kramashah........