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खेल खिलाड़ी का compleet

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खेल खिलाड़ी का पार्ट--45

गतान्क से आगे............-

अजीत प्रधान के बंगल के सारे स्टाफ से पुच्छ चुका था.आमतौर पे किडनॅपिंग केसस मे सबसे पहला शक़ परिवार वालो & करीबी लोगो पे ही जाता है.नीना & मुकुल भी श्लोक के साथ वाहा मौजूद थे.अजीत ने उनसे भी बात की थी मगर उसे यहा कुच्छ गड़बड़ नही लगी थी.

"सर,वो लोक विकास की राम्या सेन आई हैं.कहती हैं कि अंजलि जी से बिना मिले नही जाएँगी."

"अरे,उन्हे समझाओ ना!",अजीत हवलदार पे झल्लाया,"..जिस मा के हाथो से बच्चे को छिना गया है उसका क्या हाल होगा!"

"मैं अच्छे से जानती हू,ऑफीसर.",राम्या हवलदार के पीछे हॉल तक आ गयी थी,"..मैं भी 1 माँ हू."

हा..",अजीत ने सांस भरी,"..ठीक है,आप प्रधान जी से मिल लीजिए फिर जैसा वो चाहें."

"ओके.",उन्हे अंदर जानेकी ज़रूरत नही पड़ी जसजीत वही आ गया था.

"नमस्ते,प्रधान जी.मैं जानती हू कि इस मुश्किल वक़्त मे मैं बस आपको अपने लफ़ज़ो से ही सहारा दे सकती हू."

"राम्या जी,इनका सहारा भी कोई कम नही होता है."

"प्रधान साहब,नारी उत्थान समिति के सिलसिले मे ही अंजलि जी & हमारी जान-पहचान गहरी हुई & मैं इस वक़्त उनका दर्द बहुत अच्छे से समझती हू."

"जी,राम्या जी.बहुत परेशान है वो.खुद को ज़िम्मेदार समझ रही है इस हादसे का.कहती है कि उसने अपने हाथो से अपने बच्चे को उन दरिंदो के हवाले कैसे कर दिया..बड़ी मुश्किल से डॉक्टर्स ने उसे दवा देके शांत किया है..वरना मैं आपको मिलवा देता उनसे."

"कोई बात नही,प्रधान जी.अगर मैं आपके किसी काम आ सकु तो ज़रूर याद करें."

"शुक्रिया,राम्या जी."

"सर,CM साहब आ रहे हैं.",राम्या के जाते ही प्रधान का पीए & अजीत के कॉन्स्टेबल ने 1 साथ दोनो को खबर दी.अजीत 1 कोने मे खड़ा हो गया.

"प्रधान साहब,मैने कमिशनर से खुद बात की है & पल-2 की खबर ले रहा हू..",CM मधुकर अत्रे सेक्रेटरी अवस्थी के साथ हॉल मे आया,"..हिम्मत रखिए बहुत जल्द ही अनीश हमारे साथ होगा.",तीनो बाते करने लगे तो अजीत के मन मे 1 ख़याल आया.वो हाल से बाहर आया & उसे बाहर ही सतपाल खड़ा मिल गया.

"सतपाल."

"साहब."

"CM साहब शाम को 6 बजे कहा थे?",सतपाल ने सर झुका लिया & खामोश हो गया.

"जी.."

"झिझको मत सतपाल.बोलो."

"जी..ग्लोरीया अपार्टमेंट."

"हूँ..ठीक है."

अजीत बंगले के लॉन मे आ गया & 1 सिगरेट सुलगा ली.उसके ज़हन मे 2 दिन पहले मुर्शिद से की गयी पुच्छ-ताछ घूम रही थी,"देखो,मुर्शिद.मैं जानता हू कि तुम अभी भी कुच्छ च्छूपा रहे हो."

"साहब,मैने सब बता दिया है आपको.",मुर्शिद गिड़गिडया.

"देखो,मैं समझता हू तुम्हारी मुश्किल इसलिए मैं बस सवाल करूँगा & तुम बस हा या ना मे सर हिलाना.इस तरह ना तुम्हे कुच्छ बोलना पड़ेगा ना कोई मुश्किल होगी. ठीक है?",मुर्शिद ने हां मे सर हिलाया.

"मुर्शिद,वो जो टेंटवल्ला & आर्म्स डीलर के साथ तुम्हारी मीटिंग थी वो तुम आनेवाले एलेक्षन्स के किसी काम के सिलसिले मे कर रहे थे?",मुर्शिद ने हा मे सर हिलाया.

"तुमसे सबसे पहले कॉंटॅक्ट किया टेंटवल्ले ने?",सर फिर हा मे हिला.

"लेकिन तुमने उसे मना कर दिया क्यूकी तुम्हे उसपे यकीन नही था?",फिर से हां.

"तो उसने 1 ऐसे शख्स का नाम लिया जिसे सुन तुम्हारी आँखे हैरत से ज़रूर फैली होंगी?",उस वक़्त का तो पता नही लेकिन हवालात मे अजीत के सामने मुर्शिद की आँखे ज़रूर फैल गयी थी अचंभे से.उसने हा मे सर हिलाया.

"उसने तुम्हे किसी तरह भरोसा दिलाया कि वो ताक़तवर शख्स ही ये काम करवाना चाहता है?",जवाब हा था.

"तुम्हे काम पता था क्या है?",उसने सर इनकार मे हिलाया.

"तो उस दिन की मीटिंग के बाद पता चलता?",जवाब 1 बार फिर से हां था.

"वो ताक़तवर शख्स कौन है मुर्शिद.कोई पोलिसेवला?",इनकार मे सर हिला.

"कोई सरकारी अफ़सर?",फिर से ना.

"कोई व्यापारी,बिज़्नेसमॅन?",1 बार फिर ना.

"कोई नेता?",बहुत धीरे से मुर्शिद ने हां मे सर हिलाया.

"कितना बड़ा,मुनिसिपल कॉर्पोरेशन के दर्जे का?",जवाब ना था.

"तो डिस्ट्रिक्ट लेवेल का?",फिर से ना.

"राज्य के लेवेल का?",मुर्शिद थोड़ी देर ऐसे ही बैठा रहा फिर उसने हा मे सर हिलाया.

"राजाइया मे कितना ऊँचा?क्या वो सरकार मे है?",जवाब हा था.

"कैसा मिनिस्टर है?छ्होटा-मोटा?",जवाब ना था.

"तगड़ा?",जवाब हा था.

"कितना तगड़ा?उपर से कौन से दर्जे पे रखें उसे?तीसरे?",जवाब ना था.

"दूसरे?",फिर से ना.

"पहले?सबसे ऊँचा?",बहुत हल्के से मुर्शिद ने हा मे सर हिलाया.

"शुक्रिया,मुर्शिद.अब तुम यहा महफूज़ हो."

हो ना हो CM अत्रे का इस आपहरण से कोई ना कोई लिंक तो है..वो सिगरेट का आख़िरी कश ले रहा था..अत्रे के पास वजह भी माकूल थी..क्या उसे वेर्मा साहब को सब बता देना चाहिए लेकिन अगर वो ज़रा भी ग़लत हुआ तो उसका करियर चौपट हो जाएगा..लेकिन फिर आज अत्रे ग्लोरीया क्यू गया था?..नही इस वक़्त उसे अत्रे पे खुद ही नज़र रखनी होगी & ठोस सबूत हाथ लगते ही वेर्मा साहब को इत्तिला देनी होगी.उसने सिगरेट लॉन की घास पे फेंक उसे मसला & वापस अंदर चला गया.

"बोलो अजिंक्या..",जेसीपी सिंग अपनी कुर्सी पे पीछे आड़ के बैठे थे,तनाव & थकान अब उनके चेहरे पे सॉफ झलक रहे थे,"..क्या शर्तें हैं तुम्हारी?"

"सबसे पहले तो मुझे अभी तक की सारी जानकारी चाहिए ना केवल अपहरण के बारे मे बल्कि बच्चे के स्कूल,उसके दोस्त & सबसे ज़रूरी उसके मा-बाप के बारे मे."

"मा-बाप तो माशूर हस्ती हैं,अजिंक्या.उनके बारे मे क्या जानना चाहते हो?"

"सर,हर इंसान के कुच्छ राज़ होते हैं & हो सकता है कि मा-बाप की किसी ग़लती की सज़ा बेचारा बच्चा भुगत रहा हो तो जैसे ही आपके लोगो को उनके बारे मे कुच्छ भी पता चले,मुझे ज़रूर बताएँ.मुझसे कुच्छ भी ना च्छुपाएँ."

"ओके.तुम्हे पूरे प्रधान परिवार के पिच्छले 2 से 3 महीने तक की मूव्मेंट्स & आने-जाने वकली जगहो,उनके करीबी लोग & बाकी जानकारी की फाइल दे दी जाएगी.और क्या चाहिए?"

"अभी तक अगवा करने वालो ने कोई फोन किया है या नही?"

"नही.ये तो हम सब अच्छे से जानते हैं कि जब तक मा-बाप पूरी तरह परेशान ना हो जाएँ,वो फोन करके अपनी माँग सामने नही रखेंगे."

"ह्म्म..मैं ये चाहता हू,सर की आप अभी सारे न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बार वालो से बात करें कि वो इस केस के बारे मे बस रिपोर्ट करें अपनी अटकले ना लगाएँ.वो लोग टीवी & अख़बार के ज़रिए हमारी खबर ले रहे होंगे या फिर घर का कोई करीबी अगर मिला है तो उस से.ऐसे मे 1 छ्होटी सी अफवाह भी बच्चे के लिए ख़तरनाक हो सकती है."

"अजिंक्या,कमिशनर साहब ने पहले इस बारे मे सोच लिया था & अभी वो अपने दफ़्तर मे बैठे उन्ही लोगो को फोन कर रहे हैं."

"गुड,सर.मैं चाहता हू कि आप मुझे & मेरे साथियो को 1 ऐसे घर मे रखें जिसका पता कोई ना जानता हो.1 फोन नंबर मुझे दीजिए जिसकी 5-6 लाइन्स हो ताकि कोई भी कॉल करे तो नंबर मिल जाए."

"मगर क्यू,अजिंक्या?किडनॅपर्स प्रधान साहब के घर पे फोन करे तो क्या हर्ज़ है?"

"सर,उनका अपना खून मुसीबत मे है.वो नीच लोग जो भी कहेंगे वो मान लेंगे & उसके बाद भी उसके बचने की गॅरेंटी कितनी है हम अच्छे से जानते हैं..",सभी खामोश हो गये,बात बिल्कुल सही थी.अपनी जान बचाने के लिए वो बच्चे की जान लेने मे हिचकते तो बिल्कुल नही,"..इसलिए बेहतर होगा कि ये काम उनकी नज़रो से दूर हो & अगर कोई घर का आदमी इस गुनाह के पीछे है तो वो भी हमारी खबर उन तक नही पहुँचा सकता.."

"..आप बस नंबर को सारे न्यूज़ चॅनेल्स & अख़बारो मे दे दीजिए.टीवी वाले लगातार उस नंबर को दिखाएँगे & उसके बारे मे बताएँगे कि किडनॅपर्स उस नंबर पे बात करें.यही काम हर अख़बार के पहले पन्ने पे होगा."

"ओके लेकिन इस बारे मे 1 बार कमिशनर साहब से पुच्छना होगा &.."

"& क्या सर?"

"बच्चे के पिता से भी तो पुच्छना ही होगा ना."

"सर,मैं ये काम तब तक नही करूँगा जब तक कि जसजीत प्रधान मुझे इसकी इजाज़त खुद ना दें.मेरी अगली शर्त यही होने वाली थी."

"ठीक है तो तुम यहा से सीधा वाहा जाओ."

"2 शर्तें और हैं सर."

"बोलो."

"मैं एसीपी दिव्या माथुर को अच्छी तरह से जानता हू & चाहता हू कि आप उन्ही को मेरे साथ रखें."

"ठीक है."

"सर,मेरा काम बस बच्चे को सही सलामत वापस लाना है.उसके लिए मैं कुच्छ भी करू,उन किडनॅपर्स की जो भी बात मानु,उसपे कोई सवाल नही उठेंगे."

"मगर..",कमरे मे 1 और सीनियर अफ़सर बैठा था & उसने सवाल उठाया ही था मगर जेसीपी साहब ने उसे रोक दिया.

"मेरी जासूसी नही की जाएगी & मैं जो मांगू मिलेगा & हमारे अलावा किसी को भी पता नही चलना चाहिए कि मैं ये काम कर रहा हू."

"ठीक है."

"तो मैं काम शुरू करता हू,सर ."

"गुड लक,अजिंक्या.",दोनो ने हाथ मिलाया.

"थॅंक यू,सर.",वो जानता था कि इस शुभकामना की उसे बहुत ज़रूरत थी.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--45

gataank se aage............-

Ajit pradhan ke bungle ke sare staff se puchh chuka tha.aamtaur pe kidnapping cases me sabse pehla shaq parivar valo & karibi logo pe hi jata hai.Nina & Mukul bhi Shlok ke sath vaha maujood the.ajit ne unse bhi baat ki thi magar use yaha kuchh gadbad nahi lagi thi.

"sir,vo Lok vikas ki Ramya Sen aayi hain.kehit hain ki anjali ji se bina mile nahi jayengi."

"are,unhe samjhao na!",ajit hawaldar pe jhallaya,"..jis maa ke hatho se bachche ko chhina gaya hai uska kya haal hoga!"

"main achhe se janti hu,officer.",ramya hawaldar ke peechhe hall tak aa gayi thi,"..main bhi 1 maan hu."

huh..",ajit ne sans bhari,"..thik hai,aap pradhan ji se mil lijiye fir jaisa vo chahen."

"ok.",unhe andar janek kiz arurat nahi padi jasjit vahi aa gaya tha.

"namaste,pradhan ji.main janti hu ki is mushkil waqt me main bas main bas aapko apne lafzo se hi sahar de sakti hu."

"ramya ji,inka sahara bhi koi kam nahi hota hai."

"pradhan sahab,Nari Utthan Samiti ke silsile me hi anjali ji & humari jaan-pehchan gehri hui & main is waqt unka dard bahut achhe se samajhti hu."

"ji,ramya ji.bahut pareshan hai vo.khud ko zimmedar samajh rahi hai is hadse ka.kehti hai ki usne apne hatho se apne bachche ko un darindo ke hawale kaise kar diya..badi mushkil se doctors ne use dawa deke shant kiya hai..varna main aapko milwa deta unse."

"koi baat nahi,pradhan ji.agar main aapke kisi kaam aa saku to zarur yaad karen."

"shukriya,ramya ji."

"sir,CM sahab aa rahe hain.",ramya ke jate hi pradhan ka PA & ajit ke constable ne 1 sath dono ko khabar di.ajit 1 kone me khada ho gaya.

"pradhan sahab,maine commissioner se khud baat ki hai & pal-2 ki khabar le raha hu..",CM Madhukar Atre secretary Awasthi ke sath hall me aaya,"..himmat rakhiye bahut jald hi anish humare sath hoga.",teeno baate karne lage to ajit ke man me 1 khayal aaya.vo haal se bahar aaya & use bahar hi Satpal khada mil gaya.

"Satpal."

"sahab."

"CM sahab sham ko 6 baje kaha the?",satpal ne sar jhuka liya & khamosh ho gaya.

"ji.."

"jhijhko mat satpal.bolo."

"ji..gloria Apartment."

"hun..thik hai."

Ajit bungle ke lawn me aa gaya & 1 cigarette sulga li.uske zehan me 2 din pehle Murshid se ki gayi puchh-tachh ghum rahi thi,"dekho,murshid.main janta hu ki tum abhi bhi kuchh chhupa rahe ho."

"sahab,maine sab bata diya hai aapko.",murshid gidgidaya.

"dekho,main samajhta hu tumhari mushkil isliye main bas sawal karunga & tum bas haa ya naa me sar hilana.is tarah na tumhe kuchh bolna padega na koi mushkil hogi. thik hai?",murshid ne aahn me sar hilaya.

"murshid,vo jo tentwalla & arms dealer ke sath tum,hari meeting thi vo tum aanevale elections ke kisi kaam ke silsile me kar rahe the?",murshid ne haa me sar hilaya.

"tumse sabse pehle contact kiya tentwalle ne?",sar fir haa me hila.

"lekin tumne use mana kar diya kyuki tumhe uspe yakin nahi tha?",fir se haan.

"to usne 1 aise shakhs ka naam liya jise sun tumhari aankhe hairat se zarur faili hongi?",us waqt ka to pata nahi lekin hawalat me ajit ke samne murshid ki aankhe zarur fail gayi thi achambhe se.usne haa me sar hilaya.

"usne tumhe kisi tarah bharosa dilaya ki vo taqatwar shakhs hi ye kaam karwana chahta hai?",jawab haa tha.

"tumhe kaam pata tha kya hai?",usne sar inkar me hilaya.

"to us din ki meeting ke baad pata chalta?",jawab 1 baar fir se haan tha.

"vo taqatwar shakhs kaun hai murshid.koi policewala?",inkar me sar hila.

"koi sarkari afsar?",fir se naa.

"koi vyapari,businessman?",1 baar fir naa.

"koi neta?",bahut dhire se murshid ne haan me sar hilaya.

"kitna bada,municipal corporation ke darje ka?",jawab na tha.

"to district level ka?",fir se naa.

"rajya ke level ka?",murshid thodi der aise hi baitha raha fir usne haa me sar hilaya.

"rajya me kitna ooncha?kya vo sarkar me hai?",jawab haa tha.

"kaisa minister hai?chhota-mota?",jawab na tha.

"tagda?",jawab haa tha.

"kitna tagda?upar se kaun se darje pe rakhen use?teesre?",jawab na tha.

"dusre?",fir se naa.

"pehle?sabse ooncha?",bahut halke se murshid ne haa me sar hilaya.

"shukriya,murshid.ab tum yaha mehfuz ho."

ho na ho CM Atre ka is apharan se koi na koi link to hai..vo cigarette ka aakhiri kash le raha tha..atre ke baad vajah bhi makul thi..kya use Verma sahab ko sab bata dena chhaiye lekin agar vo zara bhi galat hua to uska career chaupat ho jayega..lekin fir aaj atre gloria kyu gaya tha?..nahi is waqt use atre pe khud hi nazar rakhni hogi & thos saboot hath lagte hi verma sahab ko ittila deni hogi.usne cigarette lawn ki ghas pe fenk use masla & vapas andar chala gaya.

"Bolo Ajinkya..",JCP Singh apni kursi pe peechhe ad ke baithe the,tanav & thakan ab unke chehre pe saaf jhalak rahe the,"..kya sharten hain tumhari?"

"sabse pehle to mujhe abhi tak ki sari jankari chahiye na kewal apharan ke bare me balki bachche ke school,uske dost & sabse zaruri uske maa-baap ke bare me."

"maa-baap to mashoor hasti hain,ajinkya.unke bare me kya jaanana chahte ho?"

"sir,har insan ke kuchh raaz hote hain & ho sakta hai ki maa-baap ki kisi galti ki saza bechara bachcha bhugat raha ho to jaise hi aapke logo ko unke bare me kuchh bhi pata chale,mujhe zarur batayen.mujhse kuchh bhi na chhupayen."

"ok.tumhe pure Pradhan parivar ke pichhle 2 se 3 mahine tak ki movements & aane-jane vakli jagaho,unke karibi log & baki jankari ki file de di jayegi.aur kya chahiye?"

"abhi tak agwa karne valo ne koi fone kiya hai ya nahi?"

"nahi.ye to hum sab achhe se jante hain ki jab tak maa-baap puri tarah pareshan na ho jayen,vo fone karke apni mang samne nahi rakhenge."

"hmm..main ye chahta hu,sir ki aap abhi sare news channels & akhbar valo se baat karen ki vo is case ke bare me bas report karen apni atkale na lagayen.vo log tv & akhbar ke zariye humari khabar le rahe honge ya fir ghar ka koi karibi agar mila hai to us se.aise me 1 chhoti si afwah bhi bachche ke liye khatarnak ho sakti hai."

"ajinkya,commissioner sahab ne pehle is bare me soch liya tha & abhi vo apne daftar me baithe unhi logo ko fone kar rahe hain."

"good,sir.main chahta hu ki aap mujhe & mere sathiyo ko 1 aise ghar me rakhen jiska pata koi na janta ho.1 fone number mujhe dijiye jiski 5-6 lines ho taki koi bhi call kare to number mil jaye."

"magar kyu,ajinkya?kidnappers pradhan sahab ke ghar pe fone kare to kya harz hai?"

"sir,unka apna khun musibat me hai.vo neech log jo bhi kahenge vo maan lenge & uske baad bhi uske bachne ki guarantee kitni hai hum achhe se jante hain..",sabhi khamosh ho gaye,baat bilkul sahi thi.apni jaan bachane ke liye vo bachche ki jaan lene me hichakte to bilkul nahi,"..isliye behtar hoga ki ye kaam unki nazaro se door ho & agar koi ghar ka aadmi is gunah ke peechhe hai to vo bhi humari khabar un tak nahi pahuncha sakta.."

"..aap bas number ko sare news channels & akhbaro me de dijiye.tv vale lagatar us number ko dikhayenge & uske bare me batayenge ki kidnappers us number pe baat karen.yehi kaam har akhbar ke pehle panne pe hoga."

"ok lekin is bare me 1 baar commissioner sahab se puchhna hoga &.."

"& kya sir?"

"bachche ke pita se bhi to puchhna hi hoga na."

"sir,main ye kaam tab tak nahi karunga jab tak ki Jasjit Pradhan mujhe iski ijazat khud na den.meri agli shart yehi hone wali thi."

"thik hai to tum yaha se seedha vaha jao."

"2 sharten aur hain sir."

"bolo."

"main ACP Divya Mathur ko achhi tarah se janta hu & chahta hu ki aap unhi ko mere sath rakhen."

"thik hai."

"sir,mera kaam bas bachche ko sahi salamat vapas lana hai.uske liye main kuchh bhi karu,un kidnappers ki jo bhi baat manu,uspe koi sawal nahi uthenge."

"magar..",kamre me 1 aur senior afsar baitha tha & usne sawal uthaya hi tha magar JCP sahab ne use rok diya.

"meri jasusi nahi ki jayegi & main jo mangu milega & humare alawa kisi ko bhi pata nahi chalna chahiye ki main ye kaam kar raha hu."

"thik hai."

"to main kaam shuru karta hu,sir ."

"good luck,ajinkya.",dono ne hath milaya.

"thank you,sir.",vo janta tha ki is shubhkamna ki use bahut zarurat thi.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........
 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--46

गतान्क से आगे............-

"बी,तुम आज रात आराम करो.",ए ने बी को उसका कमरा दिखाया,"..सी & डी,तुम दोनो अभी पहरे पे रहो.4 घंटे बाद मैं & ए तुम्हारी जगह आ जाएँगे."

"ओक,ए",डी ने बोला & उस कमरे के बाहर जिसमे अनीश क़ैद था 1 मेज़ & 2 कुर्सिया लगा के ताश की गद्दी,सिगरेट के पॅकेट्स & पानी की बॉटल रख के सी के साथ बैठ गया.

ए बेसमेंट से उपर आया & अपने कमरे मे दाखिल हो दरवाज़ा बंद कर लिया.उसकी उम्र कोई 30 बरस के आस-पास थी मगर शक्ल-सूरत से वो 24-25 से ज़्यादा का नही लगता था.उसका 6'2" लंबा जिस्म कसरती था & उसकी फुर्ती का नमूना कुच्छ ही देर पहले वरुण ने देखा था जब पूरे गॅंग ने अनीश को उस से छ्चीना था.

कमरे मे घुसते ही ए के होंठो पे मुस्कान फैल गयी.ए जिसका नक़ली नाम शोभा & असली दीप्ति था,अपने कपड़े उतार रही थी.उसकी नंगी पीठ ए की ओर थी & वो अपनी जीन्स उतार रही थी.आहट होने पे उसने गर्दन घुमाई & वो मुस्कुरा दी.दीप्ति का कद 5'3"था & वो बहुत गोरी नही थी लेकिन उसका रंग कम भी नही था.उसकी सूरत भी कोई बहुत ज़्यादा हसीन नही थी मगर 1 अजीब सी कशिश थी उसके चेहरे ,उसकी आँखो मे जो मर्दो को अपना दीवाना बना लेती थी.उसका बदन तो जैसे साँचे मे ढला था.24 बरस का जवान जिस्म बिल्कुल कसा हुआ था.ए की नज़रे तो उसकी काली पॅंटी मे क़ैद 36 इंच की गंद से हट ही नही रही थी & वो अपने कपड़े उतारता बस उसी अंग को घुरे जा रहा था.26 इंच पतली कमर के नीचे चौड़ी गंद देख के तो शायद कोई नमर्द भी जोश से भर उठता.

"यहा भी ए ही बुलाऊं तुम्हे?",दीप्ति घूमी & अपनी 36सी साइज़ की छातियाँ जिनपे भूरे निपल्स थे ए के सामने कर दी.

"तो और क्या बुलाना चाहती हो?,पूरी तरह से नंगा ए पॅंटी उतारती डिप्टी के करीब आया & उसके हाथो से पॅंटी लेके उसे सूँघा & फिर उसे परे उच्छल दिया & उसकी कमर को पकड़ उसका जिस्म अपने जिस्म से सटा लिया & उसकी गंद को अपने हाथो तले मसलते हुए उसके चेहरे को चूमने लगा.

"जुंगली..ज़ालिम..वहशी....ये बुलाना चाहती हू..आहह..हा...हा..!",दीप्ति उसकी बाहो मे कसमसाते हुए हँसने लगी.उसकी इस अदा ने ए को और जोश से भर दिया.वो उसकी गंद को & ज़ोर से भींचते हुए उसकी गर्दन चूमने लगा.

"ओह..अरशद..",यही नाम था उसका,"..आहह..उनह..",दीप्ति भी अपने आशिक़ की हर्कतो से गरम होने लगी थी.अरशद का 8 इंच लंबा लंड दोनो जिस्मो के बीच दबा हुआ था & उसके पेट पे उसका गरम एहसास उसे पागल कर रहा था.अरशद ने सर झुका के उसकी कसी चूचियो को अपने मुँह का निशाना बनाया तो दीप्ति के बदन मे बिजली दौड़ने लगी.उसकी आहें और मस्त हो गयी & वो अरशद के बालो को नोचने लगी.उसकी चूत मे कसक उठने लगी थी & थोड़ा-2 पानी भी रिसने लगा था.

"उम्म....यहा कितने दिन रहना होगा हमे..ऊव्ववव..!",अरशद ने उसके बाए निपल को दांतो से काट लिया था.

"अगर सब ठीक रहा तो 10 दीनो के अंदर ही काम निपटा के हम यहा से निकल जाएँगे.",उसने उसकी बाई चूची को दाए हाथ मे भर के ज़ोर से दबाया & फिर अपनी मुट्ठी से निकले उसके भूरे निपल पे जीभ चलाने लगा.

"..उउन्न्ह....मोहन लाल की दुकान लूटने के बाद इतनी जल्दी यहा आना क्या ठीक है?..उम्म..",उसने दाए हाथ को नीचे ले जा अरशद के लंड को पकड़ लिया & उसे प्यार से सहलाने लगी.

"ख़तरा तो है जानेमन मगर इस बार बहुत मोटा माल हाथ आने वाला है.इसके बाद चाहे तो काफ़ी दीनो तक ऐश कर सकते हैं.",अरशद ने उसकी चूचिया छ्चोड़ी & उसे घुमा दिया तो दीप्ति दीवार पे दोनो हाथ जमा के खड़ी हो गयी.अरशद अपने पंजो पे बैठ गया & दीप्ति की मखमली जाँघो को फैलाया & उन्हे सहलाते हुए पीछे से अपनी जीभ उसकी चूत मे फिरा दी.

"आहह....ऊहह....!",दीप्ति आहे भरती हुई अपने आशिक़ की जीभ की हर्कतो से मस्ती मे खो गयी & उसकी चूत से रस की धारा बहने लगी.कयि पलो तक अरशद उसकी चूत चाटता रहा & जैसे ही झड़ती हुई दीप्ति का जिस्म आकड़ा & वो दीवार छ्चोड़ ज़मीन पे गिरने लगी अरशद उठ खड़ा हुआ & उसकी कमर को थाम उसे बाई तरफ घुमाया तो उसने अपने हाथ वाहा रखे शेल्फ पे जमा दिए & अपनी गंद निकालते हुए झुक गयी.

अरशद ने प्यार से उसकी गंद को सहलाया & उसकी कमर पकड़ 1 ही झटके मे अपना लंड पीछे से उसकी नाज़ुक चूत मे घुसा दिया.

"एयैयीईयीयी..!",दीप्ति चीखी मगर उसके होंठो पे मुस्कान फैल गयी.अरशद का मोटा लंड हर बार उसे जिस्मानी खुशी की नयी-2 मंज़िलो से वाकिफ़ कराता था.अरशद खड़ा उसकी जाँघो & गंद की फांको को सहलाता उसे चोद रहा था.

"अब यहा दर्द तो नही होता?",दीप्ति की गंद की दाई फाँक पे 1 टॅटू बना हुआ था-1 फन काढ़े साँप का.

"उउन्न्ञन्...नही..जानू...आहह...!",अरशद आगे झुका & अपने हाथ दीप्ति के हाथो के उपर जमा दिए & उसके दाए कंधे को चूमने लगा.

"तुम्हे तो बहुत दर्द हुआ होगा ना?..ऊन्नह..!",उसने अरशद की दाई कलाई को सहलाया & उसपे लगे रिस्ट बॅंड को उतार दिया.उसकी कलाई के गिर्द वैसा ही टॅटू बना था,लगता था साँप उसकी कलाई पे लिपटा बैठा है.

"हां,थोड़ा सा.",वो फिर से उठ खड़ा हुआ था & उसके हाथ दीप्ति की मखमली पीठ से फिसलते हुए उसकी बगलो को सहलाते हुए उसकी मोटी चूचियो को मसल रहे थे.

"जानू....हम सबने ये टॅटू क्यू बनवाया हुआ है?",अरशद का दाया हाथ उसकी चूचियो को दबोच रहा था & बाया उसकी गंद की बाई फाँक & कमर की बगल मे गोलाई मे घूम रहा था.

"बस ऐसे ही मेरी जान.बी के गले पे देख मुझे ये बहुत अच्छा लगा तो मैने भी बनवा लिया & फिर मुझे ख़याल आया कि क्यू ना हम सब ये अपनी मर्ज़ी की जगह पे बनवा लें.पर तुम 1 बात बताओ?",अरशद के धक्के बहुत तेज़ हो गये थे & दीप्ति अब मस्ती मे चिल्ला रही थी,"..ऊव्ववव....आआअहह.....!",शेल्फ पे उसने अपने नखुनो के निशान छ्चोड़ दिए,उसकी चूत मे उठ रही कसक अब अपने चरम पे पहुँच गयी थी & उसका जिस्म मस्ती से सराबोर हो चुका था.अरशद के गहरे धक्के पे उसकी चूत के सब्र का बाँध टूट गया & वो झाड़ गयी & उसकी चूत से रस की नदी बहने लगी.

अरशद ने लंड बाहर खींचा & दीप्ति को बाहो मे उठा लिया & बिस्तर पे ले गया.बिस्तर पे लेटते ही दीप्ति ने अपनी टाँगे & बाहे फैला दी.अरशद उसकी टाँगो के बीच आया & लंड की नोकको उसकी चूत की दरार पे रखा.दीप्ति ने हाथ आगे बढ़ा के लंड को पकड़ उसका सूपड़ा अपनी चूत मे डाला,"क्या पुच्छ रहे थे?"

"कि तुमने ये टॅटू अपनी गंद पे क्यू बनवाया?",अरशद ने लंड बस आधा अंदर धकेला.

"उम्म...क्यूकी तुम्हे मेरी गंद कुच्छ ज़्यादा ही पसंद है.",दीप्ति का दिलकश चेहरा मस्ती की खुमारी मे और भी हसीन लग रहा था.अरशद ने कुच्छ हल्के धक्के लगाए तो लंड फिसल के चूत से बाहर आ गया,"..ऑफ ओह..!",दीप्ति झल्ला गयी.

"और अपने बाल क्यू छ्होटे करवा लिए तुमने?",अरशद का इशारा दीप्ति के गर्दन से उपर तक कटे बालो पे था.

"तुम्ही ने तो कहा था कि हुलिया बदलना है!",दीप्ति ने लंड को पकड़ दोबारा अपनी चूत का रास्ता दिखाया & इस बार उसने पूरे लंड को चूत मे घुसा कर ही अपना हाथ उसपे से हटाया,"..अब ये बेकार की बाते छ्चोड़ो..",उसने अरशद की बाँह पकड़ उसे अपने उपर लिटा लिया & अपनी नर्म बाहे & सुडोल टाँगो मे उसके जिस्म को क़ियड कर लिया,"..& मुझे जम के चोदो.",अरशद मुस्कुराया & अपनी महबूबा के होंठो से अपने होंठ सटा दिए & धक्के लगाते हुए उसकी चुदाई करने लगा.

वरुण पोलीस कॉलोनी मे घुस तो गया था मगर अब उसकी समझ मे नही आ रहा था कि आगे क्या करे.शुरू मे 4 मंज़िले क्वॉर्टर्स बने थे जिनमे दाखिल होना तो बहुत ही मुश्किल दिखाई दे रहा था.वो रास्ते पे आगे बढ़ा तो उसे अब 1 मंज़िल के एबीसीडी क्वॉर्टर्स दिखाई देने लगे.इन सभी क्वॉर्टर्स के आगे छ्होटा सा लॉन & पीछे की तरफ 1 गॅरेज & 1 कमरे का सर्वेंट क्वॉर्टर बना था.यहा उसे कुच्छ उम्मीद नज़र आई मगर ख़तरा बहुत ज़्यादा था.1 ज़रा सी ग़लती उसे सीधा सलाखो के पीछे पहुँचा सकती थी.

हर क्वॉर्टर के लगभग सारे कमरो की बत्तियाँ जली दिख रही थी यानी सभी के अंदर पूरा का पूरा परिवार मौजूद था.वो छिपता-छिपाता सभी क्वॉर्टर्स को देखता रहा कि तभी उसके कानो मे आवाज़ आई,"मैं जा रहा हू,मेम्साब.दरवाज़ा बंद कर लीजिए."

क्वॉर्टर के मैन दरवाज़े से 1 आदमी निकल रहा था जो देखने से अरदली लग रहा था.वो निकला & पीछे बने सर्वेंट क्वॉर्टर मे जाने लगा.लॉन के किनारो पे उगी ऊँची झाड़ियो के पीछे खड़ा वरुण ये सब देख रहा था कि तभी 1 लड़की आई & उसने दरवाज़ा बंद कर दिया.

मेघना ने बहादुर के जाते ही दरवाज़ा बंद किया & फिर अपने कमरे से अटॅच्ड बाथरूम मे चली गयी.अजीत ने फोन कर दिया था कि आज रात वो घर नही लौटेगा,वो प्रधान किडनॅपिंग केस मे बिज़ी था.मेघना ने लंबी ढीली स्कर्ट & टॉप पहना हुआ था.उसने टॉप निकाला & वॉशबेसिन पे खड़े हो मुँह धोने लगी.ठीक उसी वक़्त वरुण 1 खुली खिड़की से घर के अंदर दाखिल हुआ.

"मोना.",आवाज़ सुन झुक के मुँह धोती मेघना चौंकी....इस नाम से तो बस आज तक 1 ही शख्स ने उसे बुलाया था,"..वरुण..!",हैरत से मेघना की आँखे फॅट गयी & उसका हाथ उसके मुँह पे चला गया.उसके दिमाग़ मे उथल-पुथल मच गयी थी....सारी दुनिया के लिए मेघना हो तुम मगर मेरे लिए मेरी मोना....वरुण के अल्फ़ाज़ उसके ज़हन मे गूँज रहे थे....& तुम मेरे वरुण....दोनो ही की आँखे नम हो गयी थी.

"तुम यहा कैसे ?",भर्राए गले से बस इतनी ही आवाज़ निकल पाई मेघना के.

"तुम चेंज कर लो फिर बताता हू.",वरुण की नज़रे 1 पल को सफेद ब्रा मे से झाँकते मेघना के दूधिया क्लीवेज पे पड़ी & वो फिर पलट के बाहर चला गया.मेघना को तब अपने हाल का एहसास हुआ & उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया.उसने बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर दिया & उस से पीठ लगा के आँखे मींच खड़ी हो गयी.

....दिल मे जो जज़्बातो की ऊहापोह थी वो आँखो के रास्ते बहने लगी.मेगना ने नल तेज़ कर दिया & सुबकने लगी.जब सारा गुबार निकल गया तो उसने मुँह धोया & कपड़े बदलने लगी....वरुण ने उसे ब्रा मे देखा तो क्या उसे वो बीते दिन याद आए होंगे?..उसे कली से फूल वरुण ने ही तो बनाया था...कितना नशा,कितना मज़ा था उसकी चुदाई मे.उसके जिस्म का तो दीवाना था वो..तो क्या आज भी..नही!अब वो 1 शादीशुदा औरत थी..अब नही!उसने विश्वास भरी नज़रो से खुद को शीशे मे देखा & बाथरूम से बाहर आई.

वरुण बिस्तर के कोने पे बैठा था.मेघना को बाहर आता देख वो उठ खड़ा हुआ,"तुम मुझे देख के हैरान हो & परेशान भी."वरुण के होंठो पे उदास सी मुस्कान थी,"..मगर मैं मजबूरी मे तुम्हारे पास आया हू,मोना.",& उसने अपने जैल से छूटने से लेके अभी तक की सारी दास्तान सुना दी.

"तुम पागल हो क्या वरुण?!",मेघना की भवे सिकुड़ी हुई थी,"..पहले तो तुम अपराधी नही थे मगर अब बनने जा रहे थे!"

"तो क्या करता?!",वरुण की आवाज़ तेज़ हो गयी,"..मुझे जो सज़ा मिली वो क्या सही थी?..तो फिर क्या ग़लत कर रहा था मैं जो प्रधान को उसके किए की सज़ा दे रहा था!"

"तो अब यू च्छुपते क्यू फिर रहे हो?!",मेघना ने धिक्कार भरी हँसी हँसी,"..जाओ & सीधा प्रधान के घर मे घुस के उसको मार दो या फिर उसका 1 और बेटा है उसका किडनॅप कर लो!"

"तुम्हे मेरी मदद नही करनी तो मत करो मगर यू मेरी बेइज़्ज़ती ना करो.",वरुण कमरे से बाहर जाने लगा तो मेघना ने आगे बढ़ के उसकी दाई बाँह थम ली & उसे अपनी ओर घुमाया.

"अपनी बेइज़्ज़ती तुम खुद कर रहे हो,वरुण.",वरुण ने देखा तो उसे वही पहले की उसके साथ कॉलेज जाने वाली उसकी गर्लफ्रेंड मोना नज़र आई,"माना की तुम्हारे साथ नाइंसाफी हुई मगर उसके बाद तुम उस नाइंसाफी का बदला ऐसे ले रहे हो 1 कायर की तरह!वरुण अवस्थी जोकि हर मुश्किल का सामना सीना ताने करता था आज 1 मासूम को किडनॅप कर रहा था ताकि उसके बाप से बदला ले सके?!",ये सवाल तो वरुण के ज़हन मे भी उठता था मगर हर बार वरुण उसे दबा देता था.आज मोना उसकी अंतरात्मा बन उसके सामने खड़ी थी & वो इस सवाल से किनारा नही कर सकता था.

"वरुण,1 बात बताओ ऐसा करने से तुम मे & प्रधान मे क्या फ़र्क रह जाता?..मानती हू कि क़ानून के रास्ते अदालत का दरवाज़ा खटखटाते तो पता नही कितना वक़्त लगता मगर वरुण उस लड़ाई के बाद मिली जीत का स्वाद इस जीत से तो कही ज़्यादा मीठा होता.",वरुण सर झुकाए खड़ा था.मोना की बातो की सच्चाई ने उसे शर्मिंदा कर दिया था,"..& वरुण उस लड़ाई मे मदद के लिए मैं खुद तुम्हारे साथ खड़ी हो जाती.",वरुण ने चौंक के उपर देखा.

"हां..शादीशुदा हू तो क्या हुआ मैं भी इंसान हू & किसी के साथ नाइंसाफी होते तो मैं भी बर्दाश्त नही कर सकती.जब तुम जैल मे थे तो मैने पापा से कहा की हमे तुम्हारी मदद करनी चाहिए मगर वो तो लड़की के पिता थे!",मेघना ने उदास सी हँसी हँसी,"..उन्हे तो उल्टा ये डर लग गया कि कही इस चक्कर मे मेरी शादी ही ना हो & फिर परिवार की इज़्ज़त का क्या होता!",मेघना खामोश हो गयी.वरुण ने उसे देखा तो उसे एहसास हुआ कि वो इधर कितना स्वार्थी हो गया था,उसे अपना गम सबसे बड़ा लगता था.मोना ने भी तो झेला था ना उसके चलते.उसने अपना बाया हाथ मेघना के कंधे पे रखा तो वो घूमी.

"अब क्या करोगे?"

"मुझे च्छूपने की जगह चाहिए फिर 1 आदमी है उसके पास मदद के लिए जाऊँगा.",वो मूसा के बारे मे सोच रहा था जोकि 2-3 दिनो मे जैल से बाहर आने वाला था.

"वो भी कोई ज़ारायंपेशा ही होगा?"

"हां,पर तुम ही बताओ मोना कि अब मैं क्या करू!ऐसी मुसीबत मे तो मुझे ऐसे ही लोगो का सहारा लेना पड़ेगा ना.अभी पोलीस के पास जाऊं तो वो ये जानते हुए भी कि मैं बेकसूर हू मेरी हालत ख़स्ता कर देंगे & फिर कही कुच्छ गड़बड़ हो गयी तो मुझे बलि का बकरा बना देंगे."

"सब पोलीस वाले ऐसे नही होते.",वरुण समझ गया कि वो अपने पति के बारे मे कह रही है.उसके दिल मे टीस सी उठी.

"माना की सभी ऐसे नही होते मगर ज़्यादातर ऐसे ही होते हैं & कही मेरा पाला ऐसे किसी से पड़ गया तो फिर.."

"हूँ.तुम्हे कितने दिनो के लिए च्छूपना है?"

"3 दिन."

"ठीक है.तुम यहा रहो."

"नही,मोना.मैं तुम्हे किसी ख़तरे मे नही डाल सकता & फिर.."

"& फिर?"

"तुम्हारी शादी हो चुकी है,मोना.तुम्हारे पति को पता चला तो..",वरुण ने जल्दी से बात ख़तम की,"..नही मोना मैं तुम्हारी खुशल ज़िंदगी मे ज़हर नही घोल सकता."

"कह लिया तो अब मेरी सुनो.इस क्वॉर्टर की छत पे 1 कमरा है जिसे हम स्टोर की तरह इस्तेमाल करते हैं.साल मे बस 1 बार दीवाली के मौके पे उसकी सफाई होती है.तुम वाहा रह सकते हो."

"मगर.."

"अगर-मगर छ्चोड़ो."

"मोना,तुम्हारे पति कहा पोस्टेड हैं?"

"छ्चोड़ो ना तुम्हे क्या करना उस से.",मोना ने बात टालने की कोशिश की.

"बताओ,मोना."

"क्राइम ब्रांच & वो इस केस को देख रहे हैं."

"मोना,अब मैं..-"

"-..तुम्हे मेरी कसम..",मोना ने उसकी बात काटी,"..तुम 3 दिन यहा रहोगे फिर चाहे जहा जाओ.",उसकी आँखो मे जो निश्चय था उसके सामने और सवाल करने की गुंजाइश अब रह नही गयी थी.वरुण ने सर झुका लिया.

"कुच्छ खाया है?",उसने इनकार मे सर हिलाया.

"बैठो.मैं कुच्छ लाती हू.",मोना घर की सभी खिड़किया बंद करने के बाद रसोई मे चली गयी.

...............................................

"आख़िर वो लड़का था कौन?",अरशद बिस्तर पे पाँव फैलाए उसके हेडबोर्ड से टेक लगाए बैठा टीवी पे न्यूज़ देख रहा था.

"हां,यही बात तो मेरी भी समझ मे नही आ रही कि आख़िर वो था कौन जोकि हमारी तरह ही इस बच्चे को उठाना चाहता था.",दीप्ति अरशद के बाई तरफ लेटी उसका लंड चूस रही थी.सवाल सुन उसने लंड को मुँह से तो निकाल लिया मगर उसे हिलाते ही रही.

"इसके बारे मे पता करना तो ज़रूरी है..",अरशद ने उसका मुँह वापस अपने लंड पे झुकाया,"..पर 1 बात अच्छी हुई है कि अभी पोलीस इस छोकरे को ढूँढने मे लगी है."

"मगर अरशद..",दीप्ति ने दोबारा उसके लंड को चूसना छ्चोड़ा,"..वाहा जो भी मौजूद था,उसने ये देखा होगा कि हमने लड़के को उस से छ्चीन लिया.तो हम ख़तरे से पूरी तरह बाहर तो नही हैं."

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--46

gataank se aage............-

"B,tum aaj raat aaram karo.",A ne B ko uska kamra dikhaya,"..C & D,tum dono abhi pehre pe raho.4 ghante baad main & E tumhari jagah aa jayenge."

"ok,A",D ne bola & us kamre ke bahar jisme Anish qaid tha 1 mez & 2 kursiya laga ke tash ki gaddi,cigarette ke packets & pani ki bottle rakh ke C ke sath baith gaya.

A basement se upar aaya & apne kamre me dakhil ho darwaza band kar liya.uski umra koi 30 baras ke aas-paas thi magar shakl-surat se vo 24-25 se zyada ka nahi lagta tha.uska 6'2" lamba jism kasrati tha & uski furti ka namuna kuchh hi der pehle varun ne dekha tha jab pure gang ne anish ko us se chheena tha.

kamre me ghuste hi A ke hotho pe muskan fail gayi.E jiska naqli naam Shobha & asli Dipti tha,apne kapde utar rahi thi.uski nangi pith A ki or thi & vo apni jeans utar rahi thi.aahat hone pe usne gardan ghumai & vo muskura di.dipti ka kad 5'3"tha & vo bahut gori nahi thi lekin uska rang kam bhi nahi tha.uski surat bhi koi bahut zyada hseen nahi thi magar 1 ajib si kashish thi uske chehre ,uski aankho me jo mardo ko apna deewana bana leti thi.uska badan to jaise sanche me dhala tha.24 baras ka jawan jism bilkul kasa hua tha.A ki nazre to uski kali panty me qaid 36 inch ki gand se hat hi nahi rahi thi & vo apne kapde utrata bas usi ang ko ghure ja raha tha.26 inch patli kamar ke neeche chaudi gand dekh ke to shayad koi namard bhi josh se bhar uthata.

"yaha bhi A hi bulaoon tumhe?",dipti ghumi & apni 36C size ki chhatiya jinpe bhure nipples the A ke samne kar diye.

"to aur kya bulana chahti ho?,puri tarah se nanga A panty utarti dipti ke karib aaya & uske hatho se panty leke use sungha & fir use pare uchhal diya & uski kamar ko pakad uska jism apne jism se sata liya & uski gand ko apne hatho tale maslate hue uske chehre ko chumne laga.

"jungli..zalim..vehshi....ye bulana chahti hu..aahh..haa...haa..!",dipti uski baaho me kasmasate hue hansne lagi.uski is ada ne A ko aur josh se bhar diya.vo uski gand ko & zor se bhinchte hue uski gardan chumne laga.

"oh..Arshad..",yehi naam tha uska,"..aahhhh..unhhhh..",dipti bhi apne aashiq ki harkato se garam hone lagi thi.arshad ka 8 icnh lumba lund dono jismo ke beech daba hua tha & uske pet pe uska garam ehsas use pagal kar raha tha.arshad ne sar jhuka ke uski kasi chhatiyo ko apne munh ka nishana banaya to dipti ke badan me bijli daudne lagi.uski aahen aur mast ho gayi & vo arshad ke baalo ko nochne lagi.uski chut me kasak uthne lagi thi & thoda-2 pani bhi risne laga tha.

"umm....yaha kitne din rehna hoga hume..oowwww..!",arshad ne uske baye nipple ko danto se kaat liya tha.

"agar sab thik raha to 10 dino ke andar hi kaam nipta ke hum yaha se nikal jayenge.",usne uski bayi choochi ko daye hath me bhar ke zor se dabaya & fir apni mutthi se nikle uske bhure nipple pe jibh chalane laga.

"..uunnhhhh....Mohan Lal ki dukan lootne ke baad itni jaldi yaha aana kya thik hai?..umm..",usne daye hath ko neeche le ja arshad ke lund ko pakad liya & use pyar se sehlane lagi.

"khatra to hai janeman magar is baar bahut mota maal hath aane vala hai.iske baad chahe to kafi dino tak aish kar sakte hain.",arshad ne uski choochiya chhodi & use ghuma diya to dipti deewar pe dono hath jama ke khadi ho gayi.arshad apne panjo pe baith gaya & dipti ki makhmali jangho ko failaya & unhe sehlate hue peechhe se apni jibh uksi chut me fira di.

"aahhh....oohhhh....!",dipti aahe bharti hui apne aashiq ki jibh ki harkato se masti me kho gayi & uski chut se ras ki dhara behne lagi.kayi palo tak arshad uski chut chatata raha & jaise hi jhadti hui dipti ka jism akda & vo deewar chhod zamin pe girne lagi arshad uth khada hua & uski kamar ko tham use baayi taraf ghumaya to usne apne hath vaha rakhe shelf pe jama diye & apni gand nikalte hue jhuk gayi.

arshad ne pyar se uski gand ko sehlaya & uski kamar pakad 1 hi jhatke me apna lund peechhe se uski nazuk chut me ghusa diya.

"aiyyeeee..!",dipti chikhi magar uske hotho pe muskan fail gayi.arshad ka mota lund har baar use jismani khushi ki nayi-2 manzilo se vakif karata tha.arshad khada uski jangho & gand ki fanko ko sehlata use chod raha tha.

"ab yaha dard to nahi hota?",dipti ki gand ki dayi fank pe 1 tattoo bana hua tha-1 fan kadhe sanp ka.

"uunnnn...nahi..janu...aahhhhh...!",arshad aage jhuka & apne hath dipti ke hatho ke upar jama diye & uske daye kandhe ko chumne laga.

"tumhe to bahut dard hua hoga na?..oonnhhhh..!",usne arshad ki dayi kalai ko sehlaya & uspe lage wrist band ko utar diya.uski kalai ke gird vaisa hi tattoo bana tha,lagta tha sanp uski kalai pe lipta baitha hai.

"haan,thoda sa.",vo fir se uth khada hua tha & uske hath dipti ki makhmali pith se fisalte hue uski baglo ko sehlate hue uski moti choochiyo ko masal rahe the.

"janu....hum sabne ye tattoo kyu banwaya hua hai?",arshad ka daya hath uski choochiyo ko daboch raha tha & baya uski gand ki bayi fank & kamar ki bagal me golai me ghum raha tha.

"bas aise hi meri jaan.B ke gale pe dekh mujhe ye bahut achha laga to maine bhi banwa liya & fir mujhe khayal aaya ki kyu na hum sab ye apni marzi ki jagah pe banwa len.par tum 1 baat batao?",arshad ke dhakke bahut tez ho gaye the & dipti ab masti me chilla rahi thi,"..oowwww....aaaaahhhhh.....!",shelf pe usne apne nakhuno ke nishan chhod diye,uski chut me uth rahi kasak ab apne charam pe pahunch gayi thi & uska jism masti se sarabor ho chuka tha.arshad ke gehre dhakke pe uski chut ke sabr ka bandh tut gaya & vo jhad gayi & uski chut se ras ki nadi behne lagi.

arshad ne lund bahar khincha & dipti ko baaho me utha liya & bistar pe le gaya.bistar pe letate hi dipti ne apni tange & baahe faila di.arshad uski tango ke beech aaya & lund ki nok uski chut ki darar pe rakha.dipti ne hath aage badha ke lund ko pakad uska supada apni chut me dala,"kya puchh rahe the?"

"ki tumne ye tattoo apmni gand pe kyu banwaya?",arshad ne lund bas aadaha andar dhakela.

"umm...kyuki tumhe meri gand kuchh zyada hi pasand hai.",dipti ka dilkash chehra masti ki khumari me aur bhi haseen lag raha tha.arshad ne kuchh halke dhakke lagaye to lund fisal ke chut se bahar aa gaya,"..off oh..!",dipti jhalla gayi.

"aur apne baal kyu chhote karwa liye tumne?",arshad ka ishara dipti ke gardan se upar tak kate baalo pe tha.

"tumhi ne to kaha tha ki huliya badalna hai!",dipti ne lund ko pakad dobara apni chut ka rasta dikhaya & is baar usne pure lund ko chut me ghusa kar hi apna hath uspe se hataya,"..ab ye bekar ki baate chhodo..",usne arshad ki banh pakad use pane upar lita liya & apni narm baahe & sudol tango me uske jism ko qiad kar liya,"..& mujhe jum ke chodo.",arshad muskuraya & apni mehbooba ke hotho se apne honth sata diye & dhakke lagate hue uski chudai karne laga.

Varun police colony me ghus to gaya tha magar ab uski samajh me nahi aa raha tha ki aage kya kare.shuru me 4 manzile quarters bane the jinme dakhil hona to bahut hi mushkil dikhayi de raha tha.vo raste pe aage badha to use ab 1 manzil ke abde quarters dikhayi dene lage.in sabhi quarters ke aage chhota sa lawn & peechhe ki taraf 1 garage & 1 kamre ka servant quarter bana tha.yaha use kuchh umeed nazar aayi magar khatra bahut zyada tha.1 zara si galti use seedha salakho ke peechhe pahuncha sakti thi.

har quarter ke lagbhag sare kamro ki battiyan jali dikh rahi thi yani sabhji ke andar pura ka pura parivar maujood tha.vo chhipta-chhipaata sabhi quarters ko dekhta raha ki tabhi uske kano me aavaz aayi,"main ja raha hu,memsaab.darwaza band kar lijiye."

quarter ke main darwaze se 1 aadmi nikal raha tha jo dekhne se ardali lag raha tha.vo nikla & peechhe bane servant quarter me jane laga.lawn ke kinaro pe ugi oonchi jhadiyo ke peechhe khada varun ye sab dekh raha tha ki tabhi 1 ladki aayi & usne darwaza band kar diya.

Meghna ne bahadur ke jate hi darwaza band kiya & fir apne kamre se attached bathroom me chali gayi.Ajit ne fone kar diya tha ki aaj raat vo ghar nahi lautega,vo Pradhan kidnapping case me busy tha.meghna ne lambhi dhili skirt & taop pehna hua tha.usne top nikala & washbasin pe khade ho munh dhone lagi.thik usi waqt varun 1 khuli khidki se ghar ke andar dakhil hua.

"Mona.",aavaz sun jhuk ke munh dhoti meghna chaunki....is naam se to bas aaj tak 1 hi shakhs ne use bulaya tha,"..varun..!",hairat se meghna ki aankhe phat gayi & uska hath uske munh pe chala gaya.uske dimagh me uthal-puthal mach gayi thi....sari duniya ke liye meghna ho tum magar mere liye meri mona....varun ke alfaz uske zehan me gunj rahe the....& tum mere varun....dono hi ki aankhe nam ho gayi thi.

"tum yaha kaise ?",bharraye gale se bas itni hi aavaz nikal payi meghna ke.

"tum change kar lo fir batata hu.",varun ki nazre 1 pal ko safed bra me se jhankte meghna ke doodhiya cleavage pe padi & vo fir palat ke bahar chala gaya.meghna ko tab apne haal ka ehsas hua & uska chehra sharm se laa ho gaya.usne bathroom ka darwaza band kar diya & us se pitha laga ke aankhe meench khadi ho gayi.

....dil me jo jazbato ki oohapoh thi vo aankho ke raste behne lagi.megna ne nal tez kar diya & subakne lagi.jab sara gubar nikal gaya to usne munh dhoya & kapde badalne lagi....varun ne use bra me dekha to kya use vo beete din yaad aaye honge?..use kali se phool varun ne hi to banaya tha...kitna nasha,kitna maza tha uski chudai me.uske jism ka to deewana tha vo..to kya aaj bhi..nahi!ab vo 1 shadishuda aurat thi..ab nahi!usne vishwas bhari nazro se khud ko shishe me dekha & bathroom se bahar aayi.

varun bistar ke kone pe baitha tha.meghna ko bahar aata dekh vo uth khada hua,"tum mujhe dekh ke hairan ho & pareshan bhi."mvarun ke hotho pe udas si muskan thi,"..magar main majburi me tumhare paas aaya hu,mona.",& usne apne jail se chhutne se leke abhi tak ki sario dastan suna di.

"tum pagal ho kya varun?!",meghna ki bhave sikudi hui thi,"..pehle to tum apradhi nahi the magar ab banane ja rahe the!"

"to kya karta?!",varun ki aavaz tez ho gayi,"..mujhe jo saza mili vo kya sahi thi?..to fir kya galat kar raha tha main jo pradhan ko uske kiye ki saza de raha tha!"

"to ab yu chhupte kyu fir rahe ho?!",meghna ne dhikkar bhari hansi hansi,"..jao & seedha pradhan ke ghar me ghus ke usko maar do ya fir uska 1 aur beta hai uska kidnap kar lo!"

"tumhe meri madad nahi karni to mat karo magar yu meri beizzati na karo.",varun kamre se bahar jane laga to meghna ne aage badh ke uski dayi banh tham li & use apni or ghumaya.

"apni beizzati tum khud kar rahe ho,varun.",varun ne dekha to use vahi pehle ki uske sath college jane wali uski girlfriend mona nazar aayi,"mana ki tumhare sath nainsafi hui magar uske baad tum us nainsafi ka badla aise le rahe ho 1 kayar ki tarah!Varun Awasthi joki har mushkil ka samna seena tane karta tha aaj 1 masoom ko kidnap kar raha tha taki uske baap se badla le sake?!",ye sawal to varun ke zehan me bhi uthata tha magar har baar varun use daba deta tha.aaj mona uski antaratma ban uske samne khjadi thi & vo is sawal se kinara nahi kar sakta tha.

"varun,1 baat batao aisa karne se tum me & pradhan me kya fark reh jata?..manti hu ki kanoon ke raste adalat ka darwaza khatkhatate to pata nahi kitna waqt lagta magar varun us ladai ke baad mili jeeta ka swad is jeet se to kahi zyada meetha hota.",varun sar jhukaye khada tha.mona ki baato ki sachchai ne use sharminda kar diya tha,"..& varun us ladai me mada ke liye main khud tumhare sath khadi ho jati.",varun ne chaunk ke upar dekha.

"haan..shadishuda hu to kya hua main bhi insan hu & kisi ke sath nainsafi hote to main bhi bardasht nahi kar sakti.jab tum jail me the to maine papa se kaha ki hume tumhari madad karni chahiye magar vo to ladki ke pita the!",meghna ne udas si hansi hansi,"..unhe to ulta ye darr lag gaya ki kahi is chakkar me meri shadi hi na ho & fir parivar ki izzat ka kya hota!",meghna khamosh ho gayi.varun ne use dekha to use ehsas hua ki vo idhar kitna swarthi ho gaya tha,use apna ghum sabse bada lagta tha.mona ne bhi to jhela tha na uske chalte.usne apna baya hath meghna ke kandhe pe rakha to vo ghumi.

"ab kya karoge?"

"mujhe chhupne ki jagah chahiye fir 1 aadmi hai uske paas madad ke liye jaoonga.",vo Musa ke bare me soch raha tha joki 2-3 dino me jail se bahar aane vala tha.

"vo bhi koi zarayampesha hi hoga?"

"haan,par tum hi batao mona ki ab main kya karu!aisi musibat me to mujhe aise hi logo ka sahara lena padega na.abhi police ke paas jaoon to vo ye jante hue bhi ki main bekasur hu meri halat khasta kar denge & fir kahi kuchh gadbad ho gayi to mujhe bali ka bakra bana denge."

"sab police vale aise nahi hote.",varun samajh gaya ki vo apne pati ke bare me keh rahi hai.uske dil me tees si uthi.

"maana ki sabhi aise nahi hote magar zyadatar aise hi hote hain & kahi mera pala aise kisi se pad gaya to fir.."

"hun.tumhe kitne dino ke liye chhupna hai?"

"3 din."

"thik hai.tum yaha raho."

"nahi,mona.main tumhe kisi khatre me nahi dal sakta & fir.."

"& fir?"

"tumhari shadi ho chuki hai,mona.tumhare pati ko pata chala to..",varun ne jaldi se baat khjatn ki,"..nahi mona main tumhari khushal zindagi me zehar nahi ghol sakta."

"keh liya to ab meri suno.is quarter ki chhat pe 1 kamra hai jise hum store ki tarah istemal karte hain.saal me bas 1 baar diwali ke mauke pe uski safai hoti hai.tum vaha reh sakte ho."

"magar.."

"agar-magar chhodo."

"mona,tumhare pati kaha posted hain?"

"chhodo na tumhe kya karna us se.",mona ne baat talne ki koshish ki.

"batao,mona."

"crime branch & vo is case ko dekh rahe hain."

"mona,ab main..-"

"-..tumhe meri kasam..",mona ne uski baat kati,"..tum 3 din yaha rahoge fir chahe jaha jao.",uski aankho me jo nishchay tha uske samne aur sawal karne ki gunjaish ab reh nahi gayi thi.varun ne sar jhuka liya.

"kuchh khaya hai?",usne inkar me sar hilaya.

"baitho.main kuchh lati hu.",mona ghar ki sabhi khidkiya band karne ke baad rasoi me chali gayi.

"Aakhir vo ladka tha kaun?",Arshad bistar pe panv failaye uske headboard se tek lagaye baitha tv pe news dekh raha tha.

"haan,yehi baat to meri bhi samajh me nahi aa rahi ki aakhir vo tha kaun joki humari tarah hi is bachche ko uthana chata tha.",Dipti arshad ke bayio taraf leti uska lund chus rahi thi.sawal sun usne lund ko munh se to nikal liya magar use hilate hi rahi.

"iske bare me pata karna to zaruri hai..",arshad ne uska munh vapas apne lund pe jhukaya,"..par 1 baat achhi hui hai ki abhi police is chokre ko dhundane me lagi hai."

"magar arshad..",dipti ne dobara uske lund ko chusna chhoda,"..vaha jo bhi maujood tha,usne ye dekha hoga ki humne ladke ko us se chheen liya.to hum khatre se puri tarah bahar to nahi hain."

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--47

गतान्क से आगे............-

"हां,मेरी जान.",अरशद झुका & अपनी महबूबा के भरे-2 होंठो को चूम लिया,"..मगर पोलीस के पास उस लड़के को छ्चोड़ & कोई सुराग नही है.इस वक़्त उनका प्लान होगा कि उस लड़के को ढूंडे & उस से ये जाने कि हम कौन थे..कही हमारी उसकी दुश्मनी तो नही & इसमे वक़्त लगेगा जोकि हमारे लिए अच्छा होगा."

"बच्चे के घर पे फोन कब करोगे?",दीप्ति की उंगलिया अरशद के आंडो को सहला रही थी.

"परसो.उसने ऐसा ही करने को कहा है.अब प्लान मे कुच्छ चेंज होता है तो और बात है."

"तुम्हे वो अजीब नही लगता?",दीप्ति ने अरशद के लंड के सुपडे पे जीभ फिराई तो अरशद उसकी गंद को दबाने लगा.

"हमारे धंधे मे सभी अजीब होते हैं,डार्लिंग.",तभी उसकी नज़र घड़ी पे पड़ी,"..अरे,4 घंटे हो गये.चलो,सी & डी को उनकी ड्यूटी से आराम दें.",दोनो बिस्तर से उतर के कपड़े पहनने लगे.

ए,बी,सी,डी & ई-ये पाँचो बिल्कुल अलग किस्म के लोग थे मगर जुर्म या फिर प्यार या दोस्ती ने इन सब को 1 साथ 1 गेंग बनाके रखा हुआ था.इन सब मे सबसे ज़्यादा उम्र वाला था बी यानी बालू.फौज से निकलने के बाद बालू के जुए की लत ने उसे जुर्म का सहारा लेने पे मजबूर कर दिया.वो हथियारो का एक्सपर्ट था & बहुत ही दिलेर भी.उसकी कोई कमज़ोरी थी तो वो थी पत्ते.ताश देखते ही वो पागल हो जाता था & जुआ अब उसके खून के साथ बह रहा था.

इस बी की मुलाकात ए से 1 जुएखाने मे ही हुई थी.ए यानी अरशद इस गॅंग का लीडर था.ए 1 बड़े अच्छे ख़ानदान से था मगर उसके वालिद की मौत के बाद परिवार थोड़ा बिखर सा गया.उस वक़्त ए बस 14 साल का था.उसकी मा जब अपने खाविंद की मौत के गम से उबरी तो उसे ये नयी आज़ाद ज़िंदगी बड़ी रास आई & वो अपने यारो मे खो अपने बच्चे से बेरूख़् हो गयी.अरशद को पढ़ने का बड़ा शौक था & वो बड़े अच्छे नंबर्स से स्कूल पास करने के बाद कॉलेज मे दाखिल हुआ जहा कि अपने दोस्तो की पैसे की मुश्किलो को सुलझाने के लिए पहले उसने छ्होटी-मोटी धोखाधड़ी की & फिर धीरे-2 संगीन जुर्म करने लगा.

यही उसकी मुलाकात डी यानी देव से हुई.देव & बालू लगभग 1 ही उम्र के थे मगर देव पेशेवर अपराधी था.पैसो के लिए वो क़त्ल छ्चोड़ कोई भी काम कर सकता था.अरशद ने उसके साथ मिलके काम करना शुरू किया तो दोनो को बहुत फ़ायदा हुआ.अरशद का तेज़ दिमाग़ & नयी सोच & देव का तजुर्बा जब मिले तो दोनो पे पैसो की बारिश होने लगी & फिर जब उनके साथ बालू आया तब तो फिर उनकी कामयाबी और ज़्यादा बढ़ गयी!

और फिर अरशद 1 क्लब मे दीप्ति से टकराया.दीप्ति की कहानी भी उसी के जैसी थी & दोनो को 1 दूसरे के करीब आते,1 दूसरे के दिलो मे जगह बनाते कोई ज़्यादा वक़्त नही लगा.दीप्ति दिलेर भी थी & पैसो के लिए अपना जिस्म इस्तेमाल करने से उसे परहेज़ भी नही था.उसके आने के बाद तो गॅंग के लिए ख़तरा और भी कम हो गया.दीप्ति के रूप के जाल मे फँसा शिकार जब उसके जिस्म मे उतरने को तैय्यार होता तभी ये तीनो उसपे हमला कर देते.बेचारा शिकार बदनामी के डर से बात दबा जाता था & इस तरह से उनका गॅंग क़ानून के शिकंजे से बचा हुआ था.

इस गॅंग का सबसे कम उम्र का मेंबर सी यानी चार्ली 1 अनाथ था जोकि बड़ी छ्होटी उम्र मे ही इस दुनिया की कड़वी अछाईयो से वाकिफ़ हो गया था.उसी ने अरशद का ध्यान इस ओर दिलाया था कि सभी के नाम अँग्रेज़ी के आल्फबेट के पहले 4 लेटर्स से शुरू हो रहे हैं.जब इस किडनॅपिंग के दौरान कोड नामे रखने की बात आई तो सभी ने चार्ली की बात मान ए,बी,सी,डी नाम रखे & दीप्ति ने खुद को ई बना लिया क्यूकी डी नाम देव का था.

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"क्या?!!",जसजीत प्रधान गुस्से से भरा हुआ था,"जेसीपी साहब,आप मेरे बच्चे की ज़िंदगी 1 अंजान आदमी के हाथो मे कैसे दे सकते हैं?!"

"मिस्टर.प्रधान,प्रोफेसर अजिंक्या दीक्षित को आप कोई ऐरा-ग़ैरा मत समझिए.वो बहुत काम का आदमी है.",दोनो प्रधान के बुंगले की स्टडी मे थे.

"है तो वो 1 राइटर ना!..उसे क्या पता क्या ख़तरा है इसमे..उसे पता है क्या कि जब असलियत मे गोली चलती है तो क्या होता है?!",प्रधान की आवाज़ मे गुस्सा & बच्चे की चिंता झलक रही थी.

"जी हां,प्रधान साहब,अजिंक्या दीक्षित जानता है कि गोली जब लगती है तो उस वक़्त कैसा दर्द होता है..",जेसीपी सिंग & प्रधान चौंक गये,दरवाज़ा खोल प्रोफेसर अंदर दाखिल हो रहा था,"..शुरू मे लगता है जैसे कोई चीज़ चुभि मगर उसके बाद बहुत ही तेज़ दर्द होता है & अपने खून की गर्मी का एहसास जब अपनी ही स्किन पे होता है तो दिल मे ख़ौफ़ भर जाता है."

"माफी चाहत हू यू इस तरह दाखिल हुआ.मैं ही हू अजिंक्या दीक्षित.",प्रधान ने बस सर हिलाया,"..सर,आप बुरा ना माने तो मैं बस इनसे अकेले मे बात करू?"

"ज़रूर,अजिंक्या.",सिंग साहब को उसके आने से राहत हुई थी.वो उठे & स्टडी से बाहर चले गये.

"सवाल आपके बच्चे का है मिस्टर.प्रधान & आपका हक़ बनता है कि आप मेरे बारे मे सब जाने.",प्रोफेसर ने अपने बारे मे बताना शुरू किया & प्रधान की आँखे हैरत से फट गयी.

"आइ'एम सॉरी,प्रोफेसर.",प्रोफेसर ने जब अपनी दास्तान कह ली तो कुच्छ पलो की चुप्पी के बाद जसजीत बोला,"मैने बिना जाने आपके उपर सवाल उठाए....पर मैं बहुत परेशान हू..अनीश कहा है किस हाल मे..ये सोच-2 के मेरा दिमाग़ फटा जा रहा है."

"यकीन मानिए,मैं समझ सकता हू.म्र्स.प्रधान कैसी हैं?"

"अभी तो डॉक्टर ने उसे नींद की गोली देके सुलाया है.वो खुद को इस बात का ज़िम्मेदार मान रही है."

"हूँ.मिस्टर.प्रधान मुझे अनीश के बारे मे बताइए.",स्टडी टेबल पे अंजलि & दोनो बच्चो की रखी तस्वीरो की तरफ प्रोफेसर ने देखा.

"अनीश हमारी पहली औलाद है,प्रोफेसर & सभी की आँखो का तारा है.उसकी पैदाइश यही डेवाले मे हुई थी..",& प्रधान ने अनीश के बारे मे पुच्छे प्रोफेसर के हर सवाल का जवाब दिया.

"थॅंक यू,मिस्टर.प्रधान.मैं आपके बच्चे को वापस लाने मे कोई कसर नही छ्चोड़ूँगा पर उसे इस मुश्किल मे डालने वालो को पकड़ना मेरी ज़िम्मेदारी नही है."

"ठीक है,प्रोफेसर.उन्हे तो मैं खुद देख लूँगा.",जसजीत की आवाज़ मे जो कठोरता थी उसने प्रोफेसर को चौंका दिया..औलाद का प्यार इंसान को क्या से क्या बना देता था.

"जी.",प्रोफेसर स्टडी से बाहर निकल आया.जेसीपी सिंग,डीसीपी वेर्मा,दिव्या,अजीत समेत लगभग पूरा का पूरा क्राइम ब्रांच वाहा मौजूद था.

"मुझे अब आपलोगो से आख़िरी बार सारी बाते सॉफ करनी है.",प्रोफेसर जेसीपी साहब से मुखातिब था.

"वो घर & फोन लाइन कहा दे रहे हैं मुझे?"

"लोहिया पार्क मे 1 कोने का बुंगला है जिसमे 4 कमरे हैं.वाहा तुम,एसीपी दिव्या माथुर & 1 और अफ़सर तुम्हारे साथ रहेगा.फोन नंबर की 10 लाइन्स को पोलीस के ऑपरेटर्स कल सवेरे 10 बजे से हॅंडल करना शुरू करेंगे.उनकी हर कॉल को कोई ना कोई एसीपी रंक का अफ़सर वही क्राइम ब्रांच मे सुनता रहेगा & जैसे ही कोई काम की कॉल लगेगी उसे तुम्हारे बंगल के फोन पे फॉर्वर्ड कर दिया जाएगा."

"..तुम्हारे घर की सिक्यॉरटी कड़ी रहेगी मगर इस तरह से की आस-पास रहने वालो को ज़रा भी शक़ ना हो की वाहा पोलीस के लोग हैं."

"सर,जब भी किडनॅपर्स कॉंटॅक्ट करेंगे तो आप उनकी कॉल ट्रेस करने की कोशिश करेंगे मगर आप उन्हे पकड़ने की कोशिश नही करेंगे."

"व्हाट?",जेसीपी साहब चौंके.

"सर,अजिंक्या किडनॅपर्स को ये यकीन दिलाना चाहता है कि वो उनसे सौदा करने को तैय्यार है & पोलीस उन्हे कोई नुकसान नही पहुचाएगी.",डीसीपी वेर्मा ने अपने सीनियर अफ़सर को समझाया.

"मगर वेर्मा ?"

"सर,मैने पहले कहा था कि मैं अपनी शर्तो पे काम करूँगा & मेरा मक़सद बस बच्चे को सही-सलामत वापस लाना है."

"ओके.",सिंग साहब को ये बात बिल्कुल पसंद नही आई थी.

"मैं सवेरे 7 बजे तक उस बंगल मे शिफ्ट हो जाऊँगा,सर."

"ओके,अजिंक्या.बेस्ट ऑफ लक."

"थॅंक यू,सर."

"मोना,प्लीज़..मैं तुम्हारे कमरे मे कैसे सो सकता हू?"

"तो दूसरे कमरे मे सोके खुद को & मुझे,दोनो को उलझन मे डालो.",मेघना ने बिस्तर की चादर ठीक की.वरुण खामोश खड़ा रहा,"सवेरे-2 मैं तुम्हे उपर स्टोर मे च्छूपा दूँगी लेकिन तब तक तुम्हे यही रहना होगा."

"पर अगर किसी दूसरे कमरे मे सोऊ तो क्या हर्ज़ है?"

"हर्ज़ ये है कि उस कमरे मे चलते एसी या जली बत्ती देख अगर किसी को ये शक़ हो गया कि मेरे अलावा भी घर मे कोई है तो मेरी इज़्ज़त का क्या होगा?",बात तो मोना ने ठीक कही थी.

"ठीक है मगर मैं यहा फर्श पे सोउँगा."

"ठीक है.",मेघना ने चादर उठाई & वरुण का बिस्तर बेड के बगल मे फर्श पे लगाने लगी.

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नीना अपने पति & बेटे के साथ अपने जेठ के घर पे ही थी.उसे भी समझ नही आ रहा था कि आख़िर उसके जैसे & कौन सोच रहा था.तभी उसका मोबाइल बजा,महेश अरोरा उसे फोन कर रहा था,"हेलो."

'सब गड़बड़ हो गया."

"नही,कुच्छ भी गड़बड़ नही हुआ है.",नीना हल्के से मुस्कुराइ.दरअसल महेश का प्लान अनीश को नही अंजलि को किडनॅप करने का था.नीना ने हीरा को अपने हुस्न के जाल मे फँसा के उस से ये राज़ उगलवा ही लिया था.महेश & नीना ने अनीश को अगवा करने का तय किया था & महेश का इस तरह से उस से छिपा के प्लान बदलने से उसने उसपे भरोसा करना अब छ्चोड़ दिया था.

"क्या बक रही हो?",महेश की खिज सॉफ झलक रही थी.

"देखो,हमे बच्चे के अगवा होने से मतलब था ना.",नीना ने आसपास देखा कि कोई उसे सुन तो नही रहा था,"..तो वो हो गया.अब जसजीत परेशान रहेगा & हमारा रास्ता सॉफ रहेगा."

"हूँ..वो तो है..मैने हीरा & उसके साथी को कुच्छ पैसे पकड़ा दिए हैं मगर अब करें क्या?!"

"कुच्छ नही..1-2 दिन देखते हैं क्या होता है फिर सोचते हैं."

"ओके.",फोन काट गया.

अब जो करना है मुझे करना है..तुम अब किसी काम के नही महेश अरोरा..तुमने मुझे धोखा देने की सोची भी कैसे?..तुम्हे तो बाद मे देखूँगी..अभी तो मैं बस इस मौके का फ़ायदा उठा लू.

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अंधेरे कमरे मे मेघना बिस्तर पे & वरुण फर्श पे खामोश लेटे थे.दोनो की आँखो से नींद कोसो दूर थी & दोनो बीते दीनो की याद मे खोए थे....वक़्त भी क्या-2 खेल खेलता है!..1 वक़्त वो था जब दोनो ऐसी तन्हाई के लिए तरसते थे & आज जब तन्हाई थी तो दोनो के बीच ऐसी दूरियाँ आ गयी थी जो शायद ही कभी कम होती.

अरसे बाद वरुण को अपनी टाँगो के बीच हरकत होती महसूस हो रही थी.बाथरूम मे उसकी निगाह मेघना के सीने पे गयी थी & अभी उसके ज़हन मे वही कटाव घूम रहा था.मेघना वक़्त के साथ और खूबसूरत हो गयी थी.

मेघना को भी बीती बातें याद आ रही थी.उसकी चूचियो को चूस्ते हुए वरुण पागल हो जाता था.अपने मुँह मे 1 चूची को भर वो तब तक चूस्ता जब तक उसकी सांस उसे इजाज़त देती & मेघना का जोश के मारे बुरा हाल हो जाता.दिल ने वो रंगीन लम्हा याद किया तो जिस्म मे कसक सी उठी उसने करवट ले अपनी कसमसाती चूत को जाँघो के बीच भींच उसे शांत करने की कोशिश की & आँखे बंद कर सोने की कोशिश करने लगी.

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"सर,क्या हम प्रोफेसर की सारी शर्ते सच मे मान रहे हैं?",डीसीपी वेर्मा ने अपने बॉस से पुचछा,"नही ना?"

"आप खुद समझदार हैं,वेर्मा साहब.",जेसीपी सिंग मुस्कुराए.

"ओक,सर.लोहिया पार्क वाले मकान मे तो वैसे अभी हमारे आदमी बग्स लगा रहे हैं मगर मैं एसीपी नामित भट्ट को भी कह दूँगा कि वो मकान की हर बात के बारे मे हमे इनफॉर्म करता रहे & प्रोफेसर जो भी कहे कॉल ट्रेस होते ही हम अपने आदमी उन गुणडो के पीछे लगा देंगे."

"गुड."

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ठीक सवेरे 5 बजे प्रोफेसर अजिंक्या दीक्षित बंगल पे पहुँच गया था.पोलीस वालो ने ये सोचा ही नही था क्यूकी उसने 7 बजे का वक़्त दिया था.बंगल के अंदर प्रोफेसर ने अपने कमरे के जायज़ा लिया & अपने बेड के उपर लगी पैंटिंग को देख के मुस्कुराया,वो जानता था की उसकी बाते सुनने के लिए पोलीस वालो ने कमरा क्या घर भर मे बग्स लगाए होंगे.उसके पीछे-2 1 पोलीस वाला कमरे मे उसका सूटकेस लिए आ गया था.प्रोफेसर ने उसे आँख के कोने से देखा & बाथरूम मे घुस गया.

उस कॉन्स्टेबल के कमरे से बाहर जाते ही प्रोफेसर बाहर आया & उस पैंटिंग को उठा के देखा,वाहा 1 बिजली का पॉइंट था जोकि गोल प्लास्टिक कवर से ढका था.प्रोफेसर ने फ़ौरन जेब से 1 स्विस नाइफ निकाली & उसके स्क्रु ड्राइवर से उस कवर के पेंच को खोल उसके पीछे देखा तो उसे बग सॉफ नज़र आया.उसने बग को बिना छेड़े कवर को वापस लगाया & उसके उपर पैंटिंग टांग दी.

कांमरे मे रखे फोन को उठा के भी उसने खोला तो वाहा भी 1 बग था.कमरे मे तीसरा बग कमरे के शेल्फ पे रखे प्लास्टिक के फूलो के गुलदस्ते मे छिपा था.अब प्रोफेसर को पता था कि बग कहा लगे हैं & उनकी संख्या से उसने उनकी रेंज का भी पता लगा लिया था.

7.30 बजे दिव्या अपना समान लिए वाहा पहुँची तो प्रोफेसर उसे घर की छत पे ले गया,"क्या बात है?"

"तुमसे कुच्छ बाते करनी हैं.",छत पे उनकी बातें सुने जाने का कोई ख़तरा नही था मगर प्रोफेसर जानता था कि अभी कोई ना कोई उपर ज़रूर आएगा.जब कंट्रोल रूम मे बैठे उनकी बाते सुनने की कोशिश करते लोग ये कहेंगे कि घर मे प्रोफेसर & दिव्या की बातो की कोई आवाज़ नही आ रही है तो फिर कोई ना कोई चेक करने तो उपर आएगा ही.प्रोफेसर को इस बात से कोई ऐतराज़ नही था,आख़िर पोलीस वाले अपना काम ही कर रहे थे मगर उन्हे पता नही था कि थोड़ी सी जल्दबाज़ी या 1 ग़लत कदम बच्चे की जान को ख़तरे मे डाल सकता था.

"देखो,नीचे मेरे कमरे मे बग्स लगे हैं,तुम्हारे कमरे मे भी ज़रूर होंगे."

"क्या?मगर क्यू?के डिपार्टमेंट को मुझपे भरोसा नही?",दिव्या गुस्से से बोली.

"वो बात नही है.वो बेचारे सिर्फ़ अपना काम कर रहे हैं.मैने तो तुम्हे बस बताया है."

'हूँ.",दिव्या को ये बात बहुत नागवार गुज़री थी.

"मुझे तुम्हे कुच्छ और भी बताना था."

"क्या?"

"तुम जानती हो कि मुझे ही इस काम के लिए क्यू चुना गया है?",दिव्या ने इनकार मे सर हिलाया.

"दिव्या,मैं भी तुम्हारी तरह 1 पोलीस अफ़सर था."

"क्या?!",दिव्या चौंक पड़ी.

"हां,मैने भी पोलीस फोर्स जाय्न की थी.घर मे पैसे की कोई कमी नही थी लेकिन मुझे ये काम बड़ा रोमांचक लगता था फिर मुझे कॉलेज के दीनो से ही अपराधियो की सोच मे बड़ा इंटेरेस्ट था.मुझे बड़ा आश्चर्या होता था कि आख़िर वो क्या बता थी जो 1 अपराधी को अपराध करने को उकसाती थी.."

"..मैने अपनी थीसिस भी इसी टॉपिक पे तैय्यार की थी फिर जब पोलीस अफ़सर बना तो अपने पढ़े हुए को अपने काम मे इस्तेमाल करने की कोशिश करने लगा.मेरी शुरुआती पोस्टिंग 1 देहात मे हुई & वाहा कुच्छ महीनो बाद ही गाँव की मुखिया की छ्होटी सी बेटी को 1 घायल डाकू ने अगवा कर लिया.एनकाउंटर हुआ था जिसमे उसके साथी मारे गये थे मगर वो बच गया था & अपनी जान बचाने के लिए उसने उस नन्ही जान को अपनी ढाल बना लिया.."

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--47

gataank se aage............-

"haan,meri jaan.",arshad jhuka & apni mehbooba ke bhare-2 hontho ko chum liya,"..magar police ke paas us ladke ko chhod & koi surag nahi hai.is waqt unka plan hoga ki us ladke ko dhoonde & us se ye jaane ki hum kaun the..kahi humari uski dushmani to nahi & isme waqt lagega joki humare liye achha hoga."

"bachche ke ghar pe fone kab karoge?",dipti ki ungliya arshad ke ando ko sehla rahi thi.

"parso.usne aisa hi karne ko kaha hai.ab plan me kuchh change hota hai to aur baat hai."

"tumhe vo ajeeb nahi lagta?",dipti ne arshad ke lund ke supade pe jibh firayi to arshad uski gand ko dabane laga.

"huamre dhandhe me sabhi ajeeb hote hain,darling.",tabhi uski nazar ghadi pe padi,"..are,4 ghante ho gaye.chalo,C & D ko unki duty se aaram den.",dono bistar se utar ke kapde pehanane lage.

A,B,C,D & E-ye pancho bilkul alag kism ke log the magar jurm ya fir pyar ya dosti ne in sab ko 1 sath 1 ganag banake rakha hua tha.in sab me sabse zyada umra vala tha B yani Balu.fauj se nikalne ke baad balu ke jue ki lat ne use jurm ka sahara lene pe majboor kar diya.vo hathyaro ka expert tha & bahut hi diler bhi.uski koi kamzori thi to vo thi patte.tash dekhte hi vo pagal ho jata tha & jua ab uske khun ke sath beh raha tha.

is B ki mulakat A se 1 juekhane me hi hui thi.a yani arshad is gang ka leader tha.a 1 bade achhe khandan se tha magar uske valid ki maut ke baad parivar thoda bikhar sa gaya.us waqt a bas 14 saal ka tha.uski maa jab apne khawind ki maut ke ghum se ubri to use ye nayi azad zindagi badi raas aayi & vo apne yaaroe me kho apne bachche se berukh ho gayi.arshad ko padhne ka bada shauk tha & vo bade achhe numbers se school paas karne ke baad college me dakhil hua jaha ki apne dosto ki paise ki mushkilo ko suiljhane ke liye pehle usne chhoti-moti dhokhadhadi ki & fir dhire-2 sangin jurm karne laga.

yehi uski mulakat D yani Deva se hui.deva & balu lagbhag 1 hi umra ke the magar deva peshevar apradhi tha.paiso ke liye vo qatl chhod koi bhi kaam kar sakta tha.arshad ne uske sath milke kaam karna shuru kiya to dono ko bahut fayda hua.arshad ka tez dimagh & nayi soch & deva ka tajurba jab mile to dono pe paiso ki barish hone lagi & fir jab unke sath balu aaya tab to fir unki kamyabi aur zyada badh gayi!

aur fir arshad 1 club me dipti se takraya.dipti ki klahani bhi usi ke jaisi thi & dono ko 1 dusre ke karib aate,1 dusre ke dilo me jagah banate koi zyada waqt nahi laga.dipti diler bhi thi & paiso ke liye apna jism istemal karne se use parhez bhi nahi tha.uske aane ke baad to gang ke liye khatra aur bhi kam ho gaya.dipti ke roop ke jaal me fansa shikar jab uske jism me utarne ko taiyyar hota tabhi ye teeno uspe humla kar dete.bechara shikar badnami ke darr se baat daba jata tha & is tarah se unka gang kanoon ke shikanje se bacha hua tha.

is gang ka sabse kam umra ka member C yani Charlie 1 anath tha joki badi chhoti umra me hi is duniya ki kadvi achaiyo se vakif ho gaya tha.usi ne arshad ka dhyan is or dilaya tha ki sabhi ke naam angrezi ke alphabet ke pehle 4 letters se shuru ho rahe hain.jab is kidnapping ke dauran code name rakhne ki baat aayi to sabhi ne charlie ki baat maan a,b,c,d naam rakhe & dipti ne khud ko e bana liya kyuki d naam deva ka tha.

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"kya?!!",Jasjit Pradhan gusse se bhara hua tha,"JCP sahab,aap mere bachche ki zindagi 1 anjan aadmi ke hatho me kaise de sakte hain?!"

"Mr.Pradhan,Professor Ajinkya Dixit ko aap koi aira-gaira mat samajhiye.vo bahut kaam ka aadmi hai.",dono pradhan ke bungle ki study me the.

"hai to vo 1 writer na!..use kya pata kya khatra hai isme..use pata hai kya ki jab asliyat me goli chalti hai to kya hota hai?!",pradhan ki aavaz me gussa & bachche ki chinta jhalak rahi thi.

"ji haan,pradhan sahab,ajinkya dixit janta hai ki goli jab lagti hai to us waqt kaisa dard hota hai..",JCP singh & pradhan chaunk gaye,darwaza khol professor andar dakhil ho raha tha,"..shuru me lagta hai jaise koi chiz chubhi magar uske baad bahut hi tez dard hota hai & apne khun ki garmi ka ehsas jab apne hi skin pe hota hai to dil me khauf bhar jata hai."

"mafi chahat hu yu is tarah dakhil hua.main hi hu ajinkya dixit.",pradhan ne bas sar hilaya,"..sir,aap bura na mane to main bas inse akele me baat karu?"

"zarur,ajinkya.",singh sahab ko uske aane se rahat hui thi.vo uthe & study se bahar chale gaye.

"sawal aapke bachche ka hai mr.pradhan & aapka haq banta hai ki aap mere bare me sab jane.",professor ne apne bare me batana shuru kiya & pradhan ki aankhe hairat se fat gayi.

"i'm sorry,professor.",professor ne jab apni dastan keh li to kuchh palo ki chuppi ke baad jasjit bola,"maine biona jane aapke upar sawal uthaye....par main bahut pareshan hu..Anish kaha hai kis haal me..ye soch-2 ke mera dimagh fata ja raha hai."

"yakin maniye,main samajh sakta hu.Mrs.Pradhan kaisi hain?"

"abhi to doctor ne use nind ki goli deke sulaya hai.vo khud ko is baat ka zimmedar maan rahi hai."

"hun.mr.pradhan mujhe anish ke bare me bataiye.",study table pe Anjali & dono bachco ki rakhi tasviro ki taraf professor ne dekha.

"anish humari pehli aulad hai,professor & sabhi ki aankho ka tara hai.uski paidaish yehi Devalay me hui thi..",& pradhan ne anish ke bare me puchhe professor ke har sawal ka jawab diya.

"thank you,mr.pradhan.main aapke bachche ko vapas lane me koi kasar nahi chhodunga par use is mushkil me dalne valo ko pakadna meri zimmedari nahi hai."

"thik hai,professor.unhe to main khud dekh lunga.",jasjit ki aavaz me jo kathorta thi usne professor ko chaunka diya..aulad ka pyar insan ko kya se kya bana deta tha.

"ji.",professor study se bahar nikal aaya.JCP singh,DCP Verma,Divya,Ajit samet lagbhag pura ka pura crime branch vaha maujood tha.

"mujhe ab aaplogo se aakhiri baar sari bate saaf karni hai.",professor JCP sahab se mukhatib tha.

"vo ghar & fone line kaha de rahe hain mujhe?"

"Lohia Park me 1 kone ka bungla hai jisme 4 kamre hain.vaha tum,ACP Divya Mathur & 1 aur afsar tumhare sath rahega.fone number ki 10 lines ko police ke operators kal savere 10 baje se handle karna shuru karenge.unki har call ko koi na koi ACP rank ka afsar vahi crime branch me sunta rahega & jaise hi koi kaam ki call lagegi use tumhare bungle ke fone pe forward kar diya jayega."

"..tumhare ghar ki securtiy kadi rahegi magar is tarah se ki aas-paas rehne valo ko zara bhi shaq na ho ki vaha police ke log hain."

"sir,jab bhi kidnappers contact karenge to aap unki call trace karne ki koshish karenge magar aap unhe pakadne ki koshish nahi karenge."

"what?",JCP sahab chaunke.

"sir,ajinkya kidnappers ko ye yakin dilana chahta hai ki vo unse sauda karne ko taiyyar hai & police unhe koi nuksan nahi pahuchayegi.",DCP verma ne apne senior afsar ko samjhaya.

"magar verma ?"

"sir,maine pehle kaha tha ki main apni sharto pe kaam karunga & mera maqsad bas bachche ko sahi-salamat vapas lana hai."

"ok.",singh sahab ko ye baat bilkul pasand nahi aayi thi.

"main savere 7 baje tak us bungle me shift ho jaoonga,sir."

"ok,ajinkya.best of luck."

"thank you,sir."

"Mona,please..main tumhare kamre me kaise so sakta hu?"

"to dusre kamre me soke khud ko & mujhe,dono ko uljhan me dalo.",Meghna ne bistar ki chadar thik ki.Varum khamosh khada raha,"savere-2 main tumhe upar store me chhupa dungi lekin tab tak tumhe yahi rehna hoga."

"par agar kisi dusre kamre me soun to kya harz hai?"

"harz ye hai ki us kamre me chalte AC ya jali batti dekh agar kisi ko ye shaq ho gaya ki mere alawa bhi ghar me koi hai to meri izzat ka kya hoga?",baat to mona ne thik kahi thi.

"thik hai magar main yaha farsh pe sounga."

"thik hai.",meghna ne chadar uthai & varun ka bistar bed ke bagal me farsh pe lagane lagi.

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Nina apne pati & bete ke sath apne jeth ke ghar pe hi thi.use bhi samajh nahi aa raha tha ki aakhir uske jaise & kaun soch raha tha.tabhi uska mobile baja,Mahesh Arora use fone kar raha tha,"hello."

'sab gadbad ho gaya."

"nahi,kuchh bhi gadbad nahi hua hai.",nina halke se muskurayi.darasal mahesh ka plan Anish ko nahi Anjali ko kidnap karne ka tha.nina ne Hira ko apne husn ke jaal me phansa ke us se ye raaz ugalwa hi liya tha.mahesh & nina ne anish ko agwa karne tay kiya tha & mahesh ka is tarah se us se chhipa ke plan badalne se usne uspe bharosa karna ab chhod diya tha.

"kya bak rahi ho?",mahesh ki khij saaf jhalak rahi thi.

"dekho,hume bachche ke agwa hone se matlab tha na.",nina ne aaspaas dekha ki koi use sun to nahi raha tha,"..to vo ho gaya.ab Jasjit pareshan rahega & humara rasta saaf rahega."

"hun..vo to hai..maine hira & uske sathi ko kuchh paise pakda diye hain magar ab karen kya?!"

"kuchh nahi..1-2 din dekhte hain kya hota hai fir sochte hain."

"ok.",fone kat gaya.

ab jo karna hai mujhe karna hai..tum ab kisi kaam ke nahi mahesh arora..tumne mujhe dhokha dene ki sochi bhi kaise?..tumhe to baad me dekhungi..abhi to main bas is mauke ka fayda utha lu.

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andhere kamre me meghna bistar pe & varun farsh pe khamosh lete the.dono ki aankho se nind koso door thi & dono beete dino ki yaad me khoye the....waqt bhi kya-2 khel khelta hai!..1 waqt vo tha jab dono aisi tanhayi ke liye tarste the & aaj jab tanhayi thi to dono ke beech aisi dooriyan aa gayi thi jo shayad hi kabhi kam hoti.

arse baad varun ko apni tango ke beech harkat hoti mehsus ho rahi thi.bathroom me uski nigah meghna ke seene pe gayi thi & abhi uske zehan me vahi katav ghum raha tha.meghna waqt ke sath aur khubsurat ho gayi thi.

meghna ko bhi beeti baaten yaad aa rahi thi.uski chhatiyo ko chuste hue varun pagal ho jata tha.apne munh me 1 chhati ko bhar vo tab tak chusta jab tak uski sans use ijazat deti & meghna ka josh ke mare bura haal ho jata.dil ne vo rangin lamha yaad kiya to jism me kasak si uthi usne karwat le apni kasmasati chut ko jangho ke beech bhinch use shant karne ki koshish ki & aankhe band kar sone ki koshish karne lagi.

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"sir,kya hum Professor ki sari sharte sach me maan rahe hain?",DCP Verma ne apne boss se puchha,"nahi na?"

"aap khud samajhdar hain,Verma sahab.",JCP Singh muskuraye.

"ok,sir.Lohia Park vale makan me to vaise abhi humare aadmi bugs laga rahe hain magar main ACP Namit Bhatt ko bhi keh dunga ki vo makan ki har baat ke bare me hume inform karta rahe & professor jo bhi kahe call trace hote hi hum apne aadmi un gundo ke peechhe laga denge."

"good."

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thik savere 5 baje Professor Ajinkya Dixit bungle pe pahunch gaya tha.police valo ne ye socha hi nahi tha kyuki usne 7 baje ka waqt diya tha.bungle ke andar professor ne apne kamre ke jayza liya & apne bed ke upar lagi painting ko dekh ke muskuraya,vo janta tha ki uski baate sunane ke liye police valo ne kamer kya ghar bhar me bugs lagaye honge.uske peechhe-2 1 policevala kamre me uska suitcase liye aa gaya tha.professor ne use aankh ke kone se dekha & bathroom me ghus gaya.

us constable ke kamre se bahar jate hi professor bahar aaya & us painting ko utha ke dekha,vaha 1 bijli ka point tha joki gol plastic cover se dhaka tha.professor ne fauran jeb se 1 swiss knife nikali & uske scerw driver se us cover ke pench ko khol uske peechhe dekha to use bug saaf nazar aaya.usne bug ko bina chhede cover ko vapas lagaya & uske upar painting tang di.

kanmre me rakhe fone ko utha ke bhi usne khola to vaha bhi 1 bug tha.kamre me teesra bug kamre ke shelf pe rakhe plastic ke phoolo ke guldaste me chhipa tha.ab professor ko pata tha ki bug kaha lage hain & unki sankhya se usne unki range ka bhi pata laga liya tha.

7.30 baje Divya apna saman liye vaha pahunchi to professor use ghar ki chhat pe le gaya,"kya bata hai?"

"tumse kuchh baate karni hain.",chhat pe unki baaten sune jane ka koi khatra nahi tha magar professor janta tha ki abhi koi na koi upar zarur aayega.jab control room me baithe unki baate sunane ki koshish karte log ye kahenge ki ghar me professor & divya ki baato ki koi aavaz nahi aa rahi hai to fir koi na koi check karne to upar aayega hi.professor ko is baat se koi aitraz nahi tha,aakhir police vale apna kaam hi kar rahe the magar unhe pata nahi tha ki thodi si jaldbazi ya 1 galat kadam bachche ki jaan ko khatre me daal sakta tha.

"dekho,neeche mere kamer me bugs lage hain,tumhare kamre me bhi zarur honge."

"kya?magar kyu?kay department ko mujhpe bharosa nahi?",divya gusse se boli.

"vo baat nahi hai.vo bechare sirf apna kaam kar rahe hain.maine to tumhe bas bataya hai."

'hun.",divya ko ye baat bahut nagawar guzri thi.

"mujhe tumhe kuchh aur bhi batana tha."

"kya?"

"tum janti ho ki mujhe hi is kaam ke liye kyu chuna gaya hai?",divya ne inkar me sar hilaya.

"divya,main bhi tumhari tarah 1 police afsar tha."

"kya?!",divya chaunk padi.

"haan,maine bhi police force join ki thi.ghar me paise ki koi kami nahi thi lekin mujhe ye kaam bada romanchak lagta tha fir mujhe college ke dino se hi apradhiyo ki soch me bada interest tha.mujhe bada aashcharya hota tha ki aakhir vo kya bata thi jo 1 apradhi ko apradh karne ko uksati thi.."

"..maine apni thesis bhi isi topic pe taiyyar ki thi fir jab police afsar bana to apne padhe hue ko apne kaam me istemal karne ki koshish karne laga.meri shuruati posting 1 dehat me hui & vaha kuchh mahino baad hi ganv ki mukhiya ki chhoti si beti ko 1 ghayal dacoit ne agwa kar liya.encounter hua tha jisme uske sathi mare gaye the magar vo bach gaya tha & apni jaan bachane ke liye usne us nahi jaan ko apna dhal bana liya.."

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--48

गतान्क से आगे............-

"..वाहा उस वक़्त मैं ही सबसे सीनियर अफ़सर था.नज़दीक के बड़े थाने से जब तक मदद आती तब तक वो डाकू ना जाने कर क्या देता.तो मैने उस से बात करनी शुरू की & कोई 6 घंटे की कोशिश के बाद उस डाकू ने ना केवल उस बच्ची को छ्चोड़ा बल्कि आत्म-समर्पण भी कर दिया.इसके बाद मेरी पोस्टिंग शहर मे हुई & इत्तेफ़ाक़ देखो कि फिर 1 ऐसी ही स्थिति वाहा भी आ गयी & उस से भी मुझे ही निपटना पड़ा.इस बार 1 बॅंक मे करीब 25 लोगो को 1 डकेट ने बंधक बना लिया.मैने उस से भी कोई 3 घंटे तक बात की होगी & वो धीरे-2 करके लोगो को छ्चोड़ने लगा.जब केवल 5 मर्द उसके क़ब्ज़े मे थे तब पोलीस अंदर घुसी & उसे मार गिराया.."

"..इन 2 वाकयो के बाद मुझे ऐसे मामलो का एक्सपर्ट समझा जाने लगा.मुझे भी इस बात की खुशी थी मगर फिर कुच्छ ऐसा हुआ जिसने मेरी ज़िंदगी ही बदल दी.",प्रोफेसर ने दिव्या की आँखो मे झाँका,"..तुम्हे लगता है ना कि मैने कभी शादी क्यू नही की?..मेरे घर मे मेरा बेडरूम ऐसा क्यू लगता है जैसे उसमे उस रात जब हम दोनो वाहा थे,उस से पहले शायद ही कभी कोई आया हो?",दिव्या ने बस हां मे सर हिलाया.

"..तो सुनो,दिव्या.उसका नाम दीपाली था.मेरी जान,मेरी ज़िंदगी थी वो..",प्रोफेसर की आवाज़ मे नर्मी & उस नर्मी के पीछे च्छूपा दर्द दिव्या से च्छूपा नही रहा,"..हम दोनो शादी करने वाले थे.सब कितने खुश थे..वो..मैं..हमारे परिवार वाले..कि 1 दिन उसका अफ़रन हो गया."

"क्या?!",दिव्या चौंक पड़ी.

"हां,उसके पिता 1 जाने-माने नेता थे & उनके किसी दुश्मन ने ऐसा करवाया था.मामला बहुत नाज़ुक था & उसके पिता के रसुख के चलते पोलीस बहुत फूँक-2 के कदम उठा रही थी.जब किडनॅपर्स से बात करने का मुद्दा खड़ा हुआ तो पोलीस कमिशनर ने मुझे खुद बुलाके ऐसा करने को कहा.मैं तो अजीब दुविधा मे था.अपने जज़्बातो की वजह से मुझे नही लगता था कि मैं ये काम कर पाऊँगा लेकिन फिर लगता था कि मैं खुद ही क्यू ना अपनी जान से प्यारी दीपाली को बचाऊँ."

"..मैने हाँ कर दी & काम शुरू किया.सब कुच्छ बिल्कुल ठीक जा रहा था.फिरौती की रकम तय हो गयी,उन्होने हमे यकीन दिलाया कि दीपाली को उन्होने कोई नुकसान नही पहुचाया है & पैसे मिलते ही वो उसे सही-सलामत हमारे हवाले कर देंगे.वो जगह तय हुई जहा पैसो & दीपाली की अदला-बदली होनी थी.हम वाहा पहुँचे.."

"..जंगल के बीच मे मैं पैसो से भरा बॅग लेके वाहा पहुँचा.पोलीवे वाले बड़ी दूरी से सब देख रहे थे.सबको सख़्त हिदायत थी कि जब तक दीपाली हमारे पास आ नही जाती कोई कुछ नही करेगा.जैसा तय हुआ था वैसे ही मैं आगे बढ़ा & तय जगह पे बने 1 कपड़े के गोल घेरे मे बॅग रख के पलट के वापस आ खड़ा हुअ. उसमे 1 नक़ाबपोश खड़ा था.वो आया बॅग उठाके पैसे चेक किए फिर मेरी ओर देख सर हिलाया & वापस अपनी जगह पे चला गया.वाहा से दीपाली जिसकी आँखो पे पट्टी बँधी थी,उसे उसने चलने को कहा.दीपाली धीरे-2 आगे बढ़ रही थी & पीछे सॉफ दिख रहा था कि किडनॅपर्स भागने की तैय्यारि कर रहे हैं.उनका काम हो गया था.."

"..मलाल तो मुझे भी हो रहा था कि उन कमिनो को मैं अपने हाथो से सज़ा नही दे पाऊँगा मगरा मैं मजबूर था.सब ठीक चल रहा था कि पता नही कैसे 1 नर्वस पोलीस वाले ने भागते हुए किडनॅपर्स पे गोली चला दी & उसके बाद तो वाहा कोहराम मच गया.वो बदमाश भी गोलिया चलाने लगे.मैं ज़मीन पे गिर अपने को गोलियो से बचाने लगा & चिल्ला-2 के फाइरिंग रोकने को कहने लगा.केवल 5-7 मिनिट तक ही गोलिया चली होंगी मगर उन 7 मिनिट्स मे मेरी दुनिया उजड़ चुकी थी.किडनॅपर्स की 1 गोली मेरी दीपाली के सीने के पार हो गयी थी.",प्रोफेसर खामोश हो गया.

"..उसके बाद मैने नौकरी छोड़ दी & विदेश चला गया.क्रिमिनल साइकॉलजी पे रिसर्च की & वापस मुल्क आके वही नॉवेल्स लिखने लगा.ये शहर मेरा घर है मगर मैं यहा रहना नही चाहता था क्यूकी वो दर्दनाक यादें यहा मुझे चैन से जीने नही देती थी.इस दौरान ना जाने कितनी लड़कियो के साथ मेरे ताल्लुक़ात हुए मगर कही भी मुझे वो सुकून नही मिला जिसे मैं तलाश रहा था.फिर मुझे लगा कि अब वो यादें मुझे परेशान नही करेंगी तो मैं यहा वापस आ गया.."

"..फिर तुम मिली & मैं अपने अतीत के घूम से सच मे बाहर आ गया,दिव्या.पर उपरवाले का खेल देखो,उसने फिर से वही उलझन मेरे सामने ला खड़ी की है.",प्रोफेसर फीकी सी हँसी हंसा.

"मगर इस बार नतीजा दूसरा होगा.",दिव्या की बात जिस भरोसे से कही गयी थी उसने प्रोफेसर को भी विश्वास पहुचेया.तभी 1 कॉन्स्टेबल छत पे आ गया.

"सर,चाइ तैय्यार है."

"ठीक है,चलो."

................................

नीना ने सोच लिया था कि अब उसे क्या करना है.जसजीत की परेशानी से अब वो शायद ही अपने कॅंपेन पे ध्यान दे पता.हां,ये ज़रूर था कि उसे सिंपती वोट्स मिलने के चान्सस बढ़ गये थे लेकिन अगर वो इस हादसे से परेशान हो ऐसे ही बेरूख़् रहा तो क्या पता जाने हार भी आ सकती है & ऐसे मे लोक विकास को फ़ायदा होता & उस से भी ज़्यादा फ़ायदा होता बलदेव काबरा उर्फ भाय्या जी को.नीना का अगला निशाना अब वही था.

नीना ने सोच लिया था कि भाय्या जी से कहा मिलना है & क्या करना है.भाय्या जी हर रोज़ सवेरे सैर करने पार्क जाते थे & नीना ने वही उनसे मिलने का सोचा था.भाय्या जी ट्रॅक सूट पहने टहल रहे थे.पार्क मे सवेरे सैर करने वालो की भीड़ थी.भाय्या जी अकेले टहलते थे & उस बड़े पार्क का 1 पूरा चक्कर लगाते थे.पार्क के दूर के हिस्से मे थोड़ी कम भीड़ थी.

वो चले जा रहे थे कि तभी पीछे से कोई उनसे आ टकराया,"अफ!",पीछे से आ रही जॉगिंग करती नीना जानबूझ के भाय्या जी से टकराई थी.टकरा के वो लड़खड़ा के गिरने लगी तो भाय्या जी ने उसका बाया बाज़ू थाम लिया.

नीना ने काले रंग की टी-शर्ट & ट्रॅक पॅंट पहनी थी.उसके नर्म बाज़ू की च्छुअन ने भाय्या जी के जिस्म मे झुरजुरी दौड़ा दी.नीना ने उठाते हुए अपनी बाई छाती भी उनसे सटा दी थी भाय्या जी ने भी मौके का फ़ायदा उठाते हुए उसकी पीठ पे हाथ रख दिया.नीना समझ गयी कि उसके जिस्म का असर उसपे हो चुका है,"आइ'एम सॉरी.",वो बड़ी नज़ाकत से बोली.

"कोई बात नही.आपको कही लगी तो नही?",भाय्या जी का 1 हाथ उसके बाज़ू & दूसरा अभी भी उसकी पीठ पे था.

"नही.",नीना ने भी ऐसा नही जताया कि पराए मर्द के हाथो से उसे को तकलीफ़ है,"ओह माइ गॉड!",उसने हैरान होने का नाटक किया,"आप भाय्या जी है ना?"

"जी!",भाय्या जी हँसे.पीछे से कोई जॉगिंग करता आ रहा था,"..क्यू ना वाहा चल के बैठ के बात करें?",भाय्या जी ने थोड़ी दूर पे रखी बेंच की ओर इशारा किया.इस खूबसूरत औरत के बारे मे जाने बिना उसे जाने नही देना चाहते थे.

"ज़रूर.",दोनो बेंच की ओर चले गये.

"वैसे आप मुझे बलदेव कह सकती हैं.आपकी तारीफ जान सकता हू?"

"मेरा नाम नीना है नीना प्रधान.",प्रधान नाम से भाय्या जी की भवे 1 पल को सिकुड़ी.

"जी..थोड़ा अजीब लग रहा है पर आपने शायद समझ ही लिया होगा मैं जसजीत जी के छ्होटे भाई की बीवी हू."

"बड़ी खुशी हुई आपसे मिलके."

"ये बात आप दिल से कह रहे हैं या बस रस्म निभा रहे हैं.",नीना की बात मे हल्की सी शोखी थी.अब भाय्या जी को उसके अंदाज़ से ये समझ मे नही आया कि वो उन्हे छेड़ रही थी या फिर सच मे सवाल कर रही थी.इस बात ने उनके दिल मे नीना के बारे मे और जानने की ख्वाहिश को और मज़बूत कर दिया.

"बड़ा दुख हुआ कि आपको लगा कि मैं बस रस्मी तौर पे ऐसा कह रहा हू..",भाय्या जी ने उसकी आँखो मे झाँका तो नीना ने भी अपनी पलके बिल्कुल नही झपकाई,"..आपसे मिलके भला किसे खुशी नही होगी!"

"शुक्रिया.",नीना दिलकश अंदाज़ मे हँसी & अपना बदन थोड़ा सा उनकी ओर घुमा दिया ताकि उसकी चूचियाँ उनकी नज़र मे आती रहें,"..मुझे तो लगा था कि आप मुझे दुश्मन ही समझेंगे."

"आपके जैसा दुश्मन भी हो तो अपने को खुश किस्मत समझूंगा.वैसे ये बेकार बाते हैं,नीना जी.हम अलग-2 दलो मे हैं इसका ये मतलब तो नही कि हम दुश्मन हैं."

"कितनी अच्छी सोच है आपकी!",नीना ने 1 लंबी सांस भारी & अपनी बाँहो को अपने सीने के नीचे क्रॉस कर दाए हाथ से बाए & बाए हाथ से दाए बाज़ू को सहलाया.ऐसा करने से उसकी मोटी चूचियाँ थोड़ा और उभर आई.भाय्या जी की निगाहे तो उसकी गोलाईयो से चिपक ही गयी थी.उन्होने अपने ट्रॅक पॅंट मे अपने खड़े होते लंड को शांत रहने को कहा मगर वो तो नीना के हुस्न & उसकी करीबी से बावला हो रहा था!

"आप थोड़ा परेशान दिख रही हैं..ओह्ह..",फिर जैसे उन्हे कुच्छ याद आया,"..जसजीत जी के बच्चे की किडनॅपिंग से परेशान है ना आप?"

"जी वो तो है ही मगर..",नीना ने बात अधूरी छ्चोड़ भाय्या जी को थोड़ा और उलझाया.

"मगर क्या?"

"छ्चोड़िए,बलदेव जी..अब ऐसे मौके पे ऐसी बात करूँगी तो आप ना जाने क्या समझें."

"यकीन कीजिए ग़लत तो नही ही समझूंगा.",बलदेव जी मुस्कुराए & उसके कंधे पे हाथ रखा.हाथ रखते हुए उन्होने टी-शर्ट के गले मे से नुमाया उसके बाए कंधे के हिस्से को च्छू लिया & वाहा की नर्मी ने उनके लंड को और पागल कर दिया.

"बलदेव जी,जो भी हुआ बहुत बुरा हुआ & शायद सबसे बड़ी सज़ा अंजलि भाभी भुगत रही हैं.",उस वक़्त जो भी नीना को सुनता,यही सोचता कि उसे कितना लगाव था अपने जेठ के परिवार से!

"मगर ये हुआ क्यू?",वो अब बिल्कुल घूम गयी थी & उसका बाया घुटना भाय्या जी के दाए घुटने से च्छू रहा था,"..मैं थोड़ी फ़लसफ़े की बात कर रही हू,बलदेव जी."

"मैं सुन रहा हू,नीना जी.",बलदेव जी ने उसके घुटने के उपर उसकी जाँघ को थपथपाया.नीना सब देख रही थी & मन ही मन खुश हो रही थी.जैसा उसने सोचा था सब उस से कही ज़्यादा तेज़ी से हो रहा था.

"इंसान अपने मतलब,अपने स्वार्थ मे सब भूल जाता है & फिर उसकी ग़लतियो की सज़ा उसके करीबियो को भुगतनी पड़ती हैं.",नीना बिल्कुल संजीदा थी.

"हूँ.आपका इशारा शायद आपके जेठ की ओर है?"

"जी..",उसने लंबी सांस ली & बेंच पे पीछे पीठ टीका दी & सर पीछे झुका दिया जैसे बड़ी परेशान हो.भाय्या जी की नज़र उसकी गोरी गर्दन पे पड़ी तो उनक दिल किया की अभी उसे बाहो मे भर उसकी चूचियो को अपने सीने से दबा के उसकी नर्म गर्दन को चूम लें,"..भाय्या तो बस अपने काम,अपनी हसरातो को पूरा करने मे डूबे रहे & अब देखिए क्या हो गया!"

"..आप तो जानते ही होंगे कि मेरे पति बद्डल से चुनाव लड़ रहे हैं?"

"जी हां."

"सोचिए,भाय्या के होते उन्हे इनडिपेंडेंट खड़ा होना पड़ रहा है.अब इस मौके पे ऐसी बात करूँगी तो आप सोचेंगे कि कितनी मतलबी औरत है.ऐसे मौके पे भी जेठ की बुराई & अपनी परेशानियो का दुखड़ा रो रही है."

"जी नही बल्कि मैं तो ये सोच रहा हू कि आपने मुझे इस काबिल समझा की अपना दुख मुझसे बाँट रही हैं.",नीना की आख़िरी बात ने भाय्या जी के दिमाग़ मे 1 नया ख़याल पैदा किया था.वो सोच रहे थे अगर उनके सबसे बड़े दुश्मन का अपना भाई उनके साथ हो जाए & साथ मे ये हसीना भी अगर मेहेरबान हो उनके बिस्तर की शोभा बनाना मंज़ूर कर ले तो कितना अच्छा हो!

"आप सच मे 1 बहुत भले इंसान हैं,बलदेव जी.",नीना ने आँखो मे थोड़ा सा पानी लाया.

"अरे..ये क्या..आप तो जज़्बाती हो गयीं?",भाय्या जी ने मौका देख अपना बाया हाथ नीना की पीठ को सहलाने मे लगा दिया,"..वैसे अगर आपको बुरा ना लगे तो 1 पेशकश करू."

"ज़रूर बेझिझक कहिए",नीना ने घड़ियाली आँसू पोन्छे & सीधे होके बैठ गयी मगर इस तरह से उसकी बाई जाँघ का काफ़ी हिस्सा भाय्या जी की दाई जाँघ से सटा रहे.वो समझ गयी थी कि भाय्या जी का अब 1 ही मक़सद है-उसके जिस्म को हासिल करना.

"आप अपने पति को लेके चिंतित लगती हैं.मैं ये कह रहा था कि अगर आप कहें तो मैं उनकी मदद कर सकता हू."

"सच!मगर कैसे?",नीना ने उनका बाया हाथ पकड़ लिया तो भाय्या जी का लंड उनके अंडरवेर मे और जद्दोजेहद करने लगा.उस वक़्त सच मे उनके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था.कभी-2 समझदार से समझदार इंसान ग़लती कर बैठता है.भाय्या जी को 1 पल के लिए भी ये एहसास नही हुआ कि आख़िर नीना अपने घर से इतनी दूर जॉगिंग करने क्यू आई थी.वैसे नीना के पास इसका जवाब तैय्यार था कि वो जेठ के घर ठहरी थी इसलिए यहा आ गयी थी मगर कोई उस से ये पुच्छ ता कि ये लिबास भी वो क्या कल अपने साथ लेके आई थी?..नही,रात भर मे उसने ये प्लान बनाया था.उसे पता था की बलदेव काबरा इसी पार्क मे सैर के लिए आता था & उसे शीशे मे उतारने के लिए वो सवेरे-2 अपने घर गयी थी & वाहा से कपड़े बदल सीधा यहा आई थी.

"देखिए,ये बाते यहा करना ठीक नही लगता.हम कही और मिल सकते हैं?"

"हां,लेकिन.."

"लेकिन क्या नीना जी?"

"देखिए,हम सियासी तौर पे तो दुश्मन है ना.ऐसे मे हमारी मुलाकात होते किसी ने देख लिया तो आप तो आजकल के मेडियावालो को जानते ही हैं."

"हूँ..आप मेरे सरकारी बंगल पे क्यू नही आ जाती.मैं वाहा अकेला ही होता हू.",भाय्या जी ने अकेला लफ्ज़ पे थोड़ा ज़ोर दिया.उनका हाथ नीना की पीठ से उसकी दाई उपरी बाँह पे आ गया था.

"ठीक है.कुच्छ बाते तन्हाई मे ही हो तो अच्छा रहता है.",नीना ने फिर वोही हल्की सी शोख मुस्कान दे भाय्या जी के दिल मे उलझन पैदा कर दी & उनसे उनके बुंगले का पता & मिलने का वक़्त लेके वाहा से निकल गयी.भाय्या जी सैर से लौटते पूरे रास्ते यही अटकल लगताए रहे कि नीना की आख़िरी बात मासूमियत से कही गयी थी या फिर उनकी बातो मे छिपे उनके बुलावे का जवाब था.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--48

gataank se aage............-

"..vaha us waqt main hi sabse senior afsar tha.nazdik ke bade thane se jab tak madad aati tab tak vo dacoit na jane kar kya deta.to maine us se baat karni shuru ki & koi 6 ghante ki koshish ke baad us dacoit ne na kewal us bachchi ko chhoda balki aatm-samarpan bhi kar diya.iske baad merio postin shehar me hui & ittefaq dekho ki fir 1 aisi hi sthiti vaha bhi aa gayi & us se bhi mujhe hi nipatna pada.is baar 1 bank me karib 25 logo ko 1 dacoit ne bandhak bana liya.maine us se bhi koi 3 ghante tak baat ki hogi & vo dhire-2 karke logo ko chhodne laga.jab keval 5 mard uske kabze me the tab police andar ghusi & use maar giraya.."

"..in 2 vakyo ke baad mujhe aise mamlo ka expert samjha jane laga.mujhe bhi is baat ki khushi thi magar fir kuchh aisa hua jisne meri zindagi hi badal di.",professor ne divya ki aankho me jhanka,"..tumhe lagta hai na ki maine kabhi shadi kyu nahi ki?..mere ghar me mera bedroom aisa kyu lagta hai jaise usme us raat jab hum dono vaha the,us se pehle shayad hi kabhi koi aaya ho?",divya ne bas haan me sar hilaya.

"..to suno,divya.uska naam Deepali tha.meri jaan,meri zindagi thi vo..",professor ki aavaz me narmi & us narmi ke peechhe chhupa dard divya se chhupa nahi raha,"..hum dono shadi karne vale the.sab kitne khush the..vo..main..humare parivar wale..ki 1 din uska apharan ho gaya."

"kya?!",divya chaunk padi.

"haan,uske pita 1 jane-mane neta the & unke kisi dushman ne aisa karwaya tha.mamla bahut nazuk tha & uske pita ke rasukh ke chalte police bahut phunk-2 ke kadam utha rahi thi.jab kidnappers se baat karne ka mudda khada hua to police commissioner ne mujhe khud bulake aisa karne ko kaha.main to ajib duvidha me tha.apne jazbato ki vajah se mujhe nahi lagta tha ki main ye kaam kar paoonga lekin fir lagta tha ki main khud hi kyu na apni jaan se pyari deepali ko bachaoon."

"..maine haan kar di & kaam shuru kiya.sab kuchh bilkul thik ja raha tha.firauti ki rakam tay ho gayi,unhone hume yakin dilaya ki deepali ko unhone koi nuksan nahi pahuchaya hai & paise milte hi vo use sahi-salamat humare hawale kar denge.vo jagah tay hui jaha paiso & deepali ki adla-badli honi thi.hum vaha pahunche.."

"..jungle ke beech me main paiso se bhara bag leke vaha pahuncha.polive vale badi doori se sab dekh rahe the.sabko sakht hidayat thi ki jab tak deepali huamre paas aa nahi jati koi kuch nahi karega.jaisa tay hua tha vaise hi main aage badha & tay jagah pe bane 1 kapde ke gol ghere me bag rakh ke palat ke vapas aa khada hua.asmen 1 naqabposh khada tha.vo aaya bag uthake paise check kiye fir meri or dekh sar hilaya & vapas apni jagah pe chala gaya.vaha se deepali jiski aankho pe pattyi bandhi thi,use usne chalne ko kaha.deepali dhire-2 aage badh rahi thi & peechhe saaf dikh raha tha ki kidnappers bhagne ki taiyyari kar rahe hain.unka kaam ho gaya tha.."

"..malal to mujhe bhi ho raha tha ki un kamino ko main apne hatho se saza nahi de paoonga magara main majboor tha.sab thik chal raha tha ki pata nahi kaise 1 nervous policevale ne bhagte hue kidnappers pe goli chala di & uske baad to vaha kohram mach gaya.vo budmash bhi goliya chalane lage.main zamin pe gir apne ko goliyo se bachane laga & chilla-2 ke firing rokne ko kehne laga.keval 5-7 minute tak hi goliya chali hongi magar un 7 minutes me meri duniya ujad chuki thi.kidnappers ki 1 goli meri deepali ke seene ke paar ho gayi thi.",professor khamosh ho gaya.

"..uske baad maine naukri chod di & videsh chala gaya.criminal psychology pe research ki & vapas mulk aake vahi novels likhne laga.ye shehar mera ghar hai magar main yaha rehna nahi chahta tha kyuki vo dardnak yaaden yaha mujhe chain se jine nahi deti thi.iis dauran na jane kitni ladkiyo ke sath mere tallukat hue magar kahi bhi mujhe vo sukun nahi mila jise main talash raha tha.fir mujhe laga ki ab vo yaaden mujhe pareshan nahi karengi to main yaha vapas aa gaya.."

"..fir tum mili & main apne atit ke ghum se sach me bahar aa gaya,divya.par uparwale ka khel dekho,usne fir se vahi uljhan mere samne la khadi ki hai.",professor fiki si hansi hansa.

"magar is baar natija dusra hoga.",divya ki baat jis bharose se kahi gayi thi usne professor ko bhi vishwas pahuchaya.tabhi 1 constable chhat pe aa gaya.

"sir,chai taiyyar hai."

"thik hai,chalo."

Nina ne soch liya tha ki ab use kya karna hai.Jasjit ki pareshani se ab vo shayad hi apne campaign pe dhyan de pata.haan,ye zarur tha ki use sympathy votes milne ke chances badh gaye the lekin agar vo is hadse se pareshan ho aise hi berukh raha to kya pata Jan Hit haar bhi askti hai & aise me Lok Vikas ko fayda hota & us se bhi zyada fayda hota Baldev Kabra urf Bhaiyya ji ko.nina ka agla nishana ab vahi tha.

nina ne soch liya tha ki bhaiyya ji se kaha milna hai & kya karna hai.bhaiyya ji har roz savere sair karne park jate the & nina ne vahi unse milne ka socha tha.bhaiyya ji track suit pehne tehal rahe the.park me savere sair karne valo ki bhid thi.bhaiyya ji akele tehalte the & us bade park ka 1 pura chakkar lagate the.park ke door ke hisse me thodi kam bheed thi.

vo chale ja rahe the ki tabhi peechhe se koi unse aa takraya,"uff!",peechhe se aa rahi jogging karti nina jaanbujh ke bhaiyya ji se takrayi thi.takra ke vo ladkhada ke girne lagi to bhaiyya ji ne uska baya bazu tham liya.

nina ne kale rang ki t-shirt & track pant pehni thi.uske narm bazu ki chhuan ne bhaiyya ji ke jism me jhurjhuri dauda di.nina ne uthate hue apni baayi chhati bhi unse sata di tio bhaiyya ji ne bhi mauke ka fayda uthate hue uski pith pe hath rakh diya.nina samajh gayi ki uske jism ka asar uspe ho chuka hai,"i'm sorry.",vo badi nazakat se boli.

"koi baat nahi.aapko kahi lagi to nahi?",bhaiyya ji ka 1 hath uske bazu & dusra abhi bhi uski pith pe tha.

"nahi.",nina ne bhi aisa nahi jatay ki paraye mard ke hatho se use ko taklif hai,"oh my god!",usne hairan hone ka natak kiya,"aap bhaiyya ji hai na?"

"ji!",bhaiyya ji hanse.peechhe se koi jogging karta aa raha tha,"..kyu na vaha chal ke baith ke baat karen?",bhaiyya ji ne thodi door pe rakhi bench ki or ishara kiya.is khubsurat aurat ke bare me jane bina use jane nahi dena chahte the.

"zarur.",dono becnh ki or chale gaye.

"vaise aap mujhe baldev keh sakti hain.aapki tarif jaan sakta hu?"

"mera naam nina hai Nina Pradhan.",pradhan naam se bhaiyya ji ki bhave 1 pal ko sikudi.

"ji..thoda ajib lag raha hai par aapne shayad samajh hi liya hoga main jasjit ji ke chhote bhai ki biwi hu."

"badi khushi hui aapse milke."

"ye baat aap dil se keh rahe hain ya bas rasm nibha rahe hain.",nina ki baat me halki si shokhi thi.ab bhaiyya ji ko uske andaz se ye samajh me nahi aaya ki vo unhe chhed rahi thi ya fir sach me sawal kar rahi thi.is baat ne unke dil me nina ke bare me aur jaanane ki khwahish ko aur mazbut kar diya.

"bada dukh hua ki aapko laga ki main bas rasmi taur pe aisa keh raha hu..",bhaiyya ji ne uski aankho me jhanka to nina ne bhi apni palke bilkul nahi jhapkayi,"..aapse milke bhala kise khushi nahi hogi!"

"shukriya.",nina dilkash andaz me hansi & apna badan thoda sa unki or ghuma diya taki uski chhatiya unki nazar me aati rahen,"..mujhe to laga tha ki aap mujhe dushman hi samjhenge."

"aapke jaisa dushman bhi ho to apne ko khush kismat samjhunga.vaise ye bekar baate hain,nina ji.hum alag-2 dalo me hain iska ye matlab to nahi ki hum dushman hain."

"kitni achhi soch hai aapki!",nina ne 1 lumbi sans bhari & apni baho ko apne seene ke neeche cross kar daye hath se baye & baye hath se daye bazu ko sehlaya.aisa karne se uski moti chhatiya thoda aur ubhar aayi.bhaiyya ji ki nigahe to uski golaiyo se chipak hi gayi thi.unhone apne track pant me apne khade hote lund ko shant rehne ko kaha magar vo to nina ke husn & uski karibi se bawla ho raha tha!

"aap thoda pareshan dikh rahi hain..ohh..",fir jaise unhe kuchh yaad aaya,"..jasjit ji ke bachche ki kidnapping se pareshan hai na aap?"

"ji vo to hai hi magar..",nina ne baat adhuri chhod bhaiyya ji ko thoda aur uljhaya.

"magar kya?"

"chhodiye,baldev ji..ab aise mauke pe aisi baat karungi to aap na jane kya samjhen."

"yakin kijiye galat to nahi hi samjhunga.",baldev ji muskuraye & uske kandhe pe hath rakha.hath rakhte hue unhone t-shirt ke gale me se numaya uske baye kandhe ke hisse ko chhu liya & vaha ki narmi ne unke lund ko aur pagal kar diya.

"baldev ji,jo bhi hua bahut bura hua & shayad sabse badi saza Anjali bhabhi bhugat rahi hain.",us waqt jo bhi nina ko sunta,yehi sochta ki use kitna lagav tha apne jeth ke parivar se!

"magar ye hua kyu?",vo ab bilkul ghum gayi thi & uska baya ghutna bhaiyya ji ke daye ghutne se chhu raha tha,"..main thodi falsafe ki baat kar rahi hu,baldev ji."

"main sun raha hu,nina ji.",baldev ji ne uske ghutne ke upar uski jangh ko thapthapaya.nina sab dekh rahi thi & man hi man khush ho rahi thi.jaisa usne socha tha sab us se kahi zyada tezi se ho raha tha.

"insan apne matlab,apne swarth me sab bhul jata hai & fir uski galtiyo ki saza uske karibiyo ko bhugatni padti hain.",nina bilkul sanjida thi.

"hun.aapka ishara shayad aapke jeth ki or hai?"

"ji..",usne lumbi sans li & bench pe peechhe pith tika di & sar peechhe jhuka diya jaise badi pareshan ho.bhaiyya ji ki nazar uski gori gardan pe padi to unak dil kiya ki abhi use baaho me bhar uski choochiyo ko apne seene se dabake uski narm gardan ko chum len,"..bhaiyya to bas apne kaam,apni hasrato ko pura karne me dube rahe & ab dekhiye kya ho gaya!"

"..aap to jante hi honge ki mere pati Baddal se chunav lad rahe hain?"

"ji haan."

"sochiye,bhaiyya ke hote unhe independent khada hona pad raha hai.ab is mauke pe aisi baat karungi to aap sochenge ki kitni matlabi aurat hai.aise mauke pe bhi jeth ki burai & apni pareshaniyo ka dukhda ro rahi hai."

"Ji nahi balki main to ye soch raha hu ki aapne mujhe is kabil samjha ki apna dukh mujhse bant rahi hain.",Nina ki aakhiri baat ne Bhaiyya ji ke dimagh me 1 naya khayal paida kiya tha.vo soch rahe agar unke sabse bade dushman ka apna bhai unke sath ho jaye & sath me ye haseena bhi agar meherban ho unke bistar ki shobha banana manzur kar le to kitna achha ho!

"aap sach me 1 bahut bhale insan hain,baldev ji.",nina ne aankho me thoda sa pani laya.

"are..ye kya..ap to jazbati ho gayin?",bhaiyya ji ne mauka dekh apna baya hath nina ki pith ko sehlane me laga diya,"..vaise agar aapko bura na lage to 1 peshakash karu."

"zarur bejhijhak kahiye",nina ne ghadiyali aansu ponchhe & seedhe hoke baith gayi magar is tarah se uski bayi jangh ka kafi hissa bhaiyya ji ki dayi jangh se sata rahe.vo samajh gayi thi ki bhaiyya ji ka ab 1 hi maqsad hai-uske jism ko hasil karna.

"aap apne pati ko leke chintit lagti hain.main ye keh raha tha ki agar aap kahen to main unki madad kar sakta hu."

"sach!magar kaise?",nina ne unka baya hath pakad liya to bhaiyya ji ka lund unke underwear me aur jaddojehad karne laga.us waqt sach me unke dimagh ne kaam karna band kar diya tha.kabhi-2 samajhdar se samajhdar insan galti kar baithata hai.bhaiyya ji ko 1 pal ke liye bhi ye ehsas nahi hua ki aakhir nina apne ghar se itni dur jogging karne kyu aayi thi.vaise nina ke paas iska jawab taiyyar tha ki vo jeth ke ghar thehri thi isliye yaha aa gayi thi magar koi us se ye puchh ta ki ye libas bhi vo kya kal apne sath leke aayi thi?..nahi,raat bhar me usne ye plan banaya tha.use pata tha ki Baldev Kabra isi park me sair ke liye aata tha & use shishe me utarne ke liye vo savere-2 apne ghar gayi thi & vaha se kapde badal seedha yaha aayi thi.

"dekhiye,ye baate yaha karna thik nahi lagta.hum kahi aur mil sakte hain?"

"haan,lekin.."

"lekin kya nina ji?"

"dekhiye,hum siyasi taur pe to dushman hai na.aise me humari mulakat hote kisi ne dekh liya to aap to aajkal ke mediawalo ko jante hi hain."

"hun..aap mere sarkari bungle pe kyu nahi aa jati.main vaha akela hi hota hu.",bhaiyya ji ne akela lafz pe thoda zor diya.unka hath nina ki pith se uski dayi upri banh pe aa gaya tha.

"thik hai.kuchh baate tanhai me hi ho to achha rehta hai.",nina ne fir vohi halki si shokh muskan de bhaiyya ji ke dil me uljhan paida kar di & unse unke bungle ka pata & milne ka waqt leke vaha se nikal gayi.bhaiyya ji sair se lautate pure raste yehi atkal lagatae rahe ki nina ki aakhiri baat masumiyat se kahi gayi thi ya fir unki baato me chhipe unke bulawe ka jawab tha.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--49

गतान्क से आगे............-

"सारे शहर मे हमारे आदमी फैले हैं मगर अभी तक नही पता चला कि उस लड़के को कौन उठा ले गया है!",बल्लू ने गुस्से से बिस्तर पे मुक्का मारा.ये शायद उसकी अब तक की सबसे बड़ी नाकामयाबी थी & वो इस बात को हाज़ाम नही कर पा रहा था.

"साले,इतना परेशान क्यू होता है?",रानो ने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया & उसके सीने को सहलाने लगी,"..अभी तो 1 दिन भी नही हुआ है.पता चल जाएगा.",रानो को भी उतना ही गुस्सा & खिज हो रही थी मगर वो जानती थी कि उसे जताने से इस वक़्त कोई फ़ायदा नही.वैसे भी उसके बाबा तो एमएलए बनाने ही वाले थे,अब लड़का चाहे जहा हो.

"तू समझ नही रही,रानो.उस लड़के का हमारे हाथो मे आना कितना ज़रूरी है.",उसने सीने पे फिरते रानो के हाथो को थाम के चूम लिया तो रानो सामने आ उसके दोनो तरफ बिस्तर पे घुटने जमा उसकी गोद मे बैठ गयी.बल्लू ने महसूस किया कि सलवार के पतले कपड़े के नीचे रानो ने पॅंटी नही पहनी है & इस एहसास से उसका लंड जागने लगा.

"तू फिर बकवास कर रहा है!",रानो ने उसके गाल पे चपत लगाई,"..बाबा एमएलए बन ही जाएँगे अब लड़का जाए भाड़ मे!"

"यही तो तू ग़लत सोच रही है.",बल्लू के हाथ रानो की कमीज़ मे घुस उसकी मखमली पीठ पे चलने लगे,"..जसजीत प्रधान का हारना बहुत ज़रूरी है,रानो नही तो बाबा का एमएलए बनाने का कोई फ़ायदा नही.जसजीत की सरकार बन गयी तो बाबा एमएलए बन के क्या उखाड़ लेंगे!",हाथ आगे ला उसने सलवार की डोर को ढीला किया & फिर पीछे ले जा रानो की गंद को मसल्ने लगा.

"मगर जसजीत तो अभी भी हारेगा?"

"और अगर बच्चा चुनाव से पहले मिल गया तो?..फिर तो जसजीत दोगुने हौसले के साथ प्रचार करेगा.लोगो की सहानुभूति भी उसके साथ होगी & फिर क्या होगा?",रानो ने खुद ही अपनी कमीज़ उपर कर अपनी चूचिया अपने आशिक़ के प्यासे होंठो से लगा दी थी,"..इसलिए बच्चा हमारे क़ब्ज़े मे होना बहुत ज़रूरी है.",बल्लू ने अपने मुँह से 1 पल को उसकी छाती मुँह से निकली & बात पूरी कर फिर से भर ली.

"तू फ़िक्र मत कर..बात मेरी समझ मे आ गयी है.अब कुच्छ और रास्ता भी सोचना ही पड़ेगा.",रानो ने आँखे बंद की & अपने परेशान आशिक़ को सुकून पहुचाने लगी.

सुबह हुई मगर अंजलि की ज़िंदगी मे तो अभी भी रात चल रही थी.अब तो आँसू भी सुख गये थे मगर दिल का दर्द था की कम ही नही हो रहा था.जसजीत ने उसे बताया कि अनीश को छुड़ाने के लिए क्या-2 कोशिशें की जा रही हैं लेकिन उस बेचारी को तो तभी चैन मिलता जब उसके जिगर का टुकड़ा उसकी आँखो के सामने होता.कल रात से उसने अपने दूसरे बेटे अंकुर को 1 पल के लिए भी खुद से जुदा नही किया था.

"मिस्टर.प्रधान,आप समझ ही सकते हैं कि उन्हे बहुत गहरा सदमा पहुँचा है,उपर से वो खुद को दोषी मान रही हैं..",साइकिट्रिस्ट ड्र.माल जसजीत को समझा रहे थे,"..मैं हर रोज़ उनसे मिलूँगा.ज़रूरत पड़ी तो दिन भर यही रहूँगा मगर 1 बात को प्लीज़ समझिए,ऐसे हाल मे प्रोग्रेस बहुत धीरे होती है.मेरी आपसे रिक्वेस्ट है कि प्लीज़,आप उनके सामने अपना हौसला मत खोइएगा."

"आप बेफ़िक्र रहें,डॉक्टर.",ड्र.माल शहर के जाने-माने साइकिट्रिस्ट थे & इंसानी दिमाग़ के सोचने के तरीके को बड़ी गहराई से समझते थे.वो जानते थे कि प्रधान को भी उनकी मदद की ज़रूरत थी मगर प्रधान जैसे नेता का अहम उसे ये मानने को तैय्यार नही होने देगा सो वो बस बातचीत के ज़रिए प्रधान के दिल की थाह ले उसे भी समझा रहे थे.

"अरे,कहा चली गयी थी सुबह-2?",मुकुल ने नीना को घर मे दाखिल होते देखा तो पुचछा.वो थोड़ी दूरी पे खड़ा अपने भाई & डॉक्टर को बाते करता देख रहा था.

"जॉगिंग.",नीना उसके करीब आई,"..मैने नौकरो को नाश्ते मे कुच्छ हल्का बनाने के लिए कह दिया है.ज़रा अपने भाय्या से बोल के अंकुर को तो भाभी के पास से ले आओ.वो बच्चा है,उसपे भी तो इन सब बातो का असर पड़ेगा.",मुकुल की हैरानी का ठिकाना ही नही था..नीना को उसके भाई-भाभी-भतीजे की परवाह हो रही थी,"..अब ऐसे क्या देख रहे हो?..बोलो ना!..ओफ्फो..अब मैं ही बात करती हू.",नीना आगे बढ़ी फिर जैसे कुच्छ याद आया तो घूमी,"..& सुनो मैं नाश्ते के बाद ज़रा बाहर जाऊंगी..कुच्छ काम है..लंच तक वापस आ जाऊंगी."

"ओके.",मुकुल को बहुत खुशी हुई थी.वो नीना को अपने भाई & डॉक्टर से बाते करते देख रहा था.उस बेचारे को अगर ये पता होता कि उसकी बीवी किस लिए दिन मे जाने वाली है तो शायद उसके जज़्बात बिल्कुल उलट होते.

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"बलदेव,मैं तो अपने सारे आदमियो का इस्तेमाल कर रहा हू लेकिन..",भाय्या जी कान से मोबाइल लगाए अपने सरकारी बंगल के बेडरूम मे खड़े थे.उन्होने दीवार घड़ी की ओर देखा,11 बजने ही वाले थे & नीना अब आने ही वाली थी.चुनाव के चलते उन्हे सांस लेने की भी फ़ुर्सत नही थी मगर नीना के हुस्न ने उन्हे मजबूर कर दिया था कि वो आज अपने सारे कामो को टाल दें.

"लेकिन क्या रघु?"

"बलदेव,मेरे पोलीस मे कयि सोर्सस हैं मगर ये मामला बहुत ज़्यादा नाज़ुक है.अब अगर उन्हे लगा कि मैं इस मामले मे कुच्छ ज़्यादा दिलचस्पी ले रहा हू तो कही उन्हे शक़ ना हो जाए."

"तो तुम चाहते हो कि पोलीस को जो भी पता चले वो जानकारी मैं तुम तक पहुँचा दू?"

"मान गये,बलदेव.",रघु कुम्भात हंसा,"..तुम्हारा दिमाग़ तो दिन बा दिन & पैना हो रहा है."

"तुमसे ज़्यादा नही रघु.",भाय्या जी भी हँसे,"..फ़िक्र मत करो,तुम्हे पोलीस की हर बात की खबर मिलती रहेगी.",उन्होने फोन काट दिया.

"साहब,ये मेम्साब आई हैं.",1 नौकर ने उसे नीना का कार्ड दिया.

"उन्हे अंदर भेजो.",नौकरो को सख़्त ताकीद थी कि कोई भी उन्हे डिस्टर्ब ना करे.

"हेलो,बलदेव जी.",नीना कमरे मे आई तो भाय्या जी की जैसे सांस ही अटक गयी.नीना ने 1 लाल & काले प्रिंट्स की सारी पहनी थी जिसके झीने आँचल से उसके स्लीव्ले ब्लाउस मे से झाँकट हल्का सा क्लीवेज दिख रहा था.झीनी सारी मे से उसका गोरा पेट & गहरी नाभि भी झलक रहे थे.वो बहुत सोच-समझ के ऐसे तैय्यार हुई थी ताकि 1 तरफ तो भाय्या जी उसके हुस्न का अच्छे से दीदार कर पाएँ मगर दूसरी ओर उन्हे ये ना लगे की नीना उनकी बाहो मे गिरने को तैय्यार है.

"हेलो,नीना जी.",आगे बढ़ उन्होने उसका नाज़ुक हाथ थाम के दबा दिया & उसकी आँखो मे झाँका,"..आइए बैठिए.",नीना कमरे मे लगे सोफे पे बैठ गयी.उसने गौर किया कि भैया जी ने उसे सीधा अपने बेडरूम मे मिलने को बुलाया है यानी की उनके इरादे बिल्कुल भी नेक नही थे.

"बताइए,बलदेव जी.कैसे मदद कर सकते हैं आप हमारी?"

"देखिए,नीना जी.मुझे बस इतना करना है कि मैं बद्डल से 1 कमज़ोर उम्मीदवार खड़ा कर दू फिर मुकुल जी जीत जाएँगे.उसके बाद यहा विधान सभा मे जो अलग-2 कोँमिटीस बनती हैं,उनमे उन्हे शामिल करना तो मेरे लिए कोई बड़ी बात नही मगर.."

"मगर क्या ?",भाय्या जी सोफे पे उसके साथ ही बैठे थे & नीना ने भी मौका पाते अपना दाया हाथ उनकी बाई जाँघ पे रख दिया.भाय्या जी का जिस्म उस एहसास से सुलगने लगा.

"मगर नीना जी..",उन्होने अपना बाया हाथ उसके हाथ के उपर रखा,"..इसके लिए मुझे अपने पार्टी वर्कर्स की नाराज़गी झेलनी पड़ेगी."

"तो आप ये काम नही करेंगे?",नीना बनावटी मायूसी से बोली & इसके असर से भाय्या जी अछूते नही रहे.मुसीबत मे फँसी लड़की को देख मर्द ना केवल उसकी मदद करना चाहता है बल्कि उसके जिस्म मे इस बात से जोश भी भर जाता है.ऐसा ही भाय्या जी के साथ भी हुआ.

"मैना ऐसा तो नही कहा.",भैया जी ने अपना हाथ नीना के हाथ से उठाया & उसकी पीठ पे रख दिया.ब्लाउस का बॅक भी गहरा था & उनका हाथ नीना की नंगी पीठ से लगा तो उस पल दोनो के ही जिस्मो मे हरारत पैदा हो गयी,"..मैं तो बस इतना कह रहा था..",भैया जी जानते थे कि ये बहुत नाज़ुक मोड़ है.अभी तक तो ऐसा लग रहा था कि नीना उनकी बात मान जाएगी मगर कही ऐसा नही हुआ तो बहुत फ़ज़ीहत भी हो सकती थी,"..कि नीना जी मैं इसके बदले मे कुच्छ चाहता हू."

"क्या बलदेव जी?",नीना ने हाथ बहुत हल्के से उनकी जाँघ पे दबाया.

"कि आप हमसे इसी तरह कभी-कभार मिल लिया करें.",नीना खामोश हो गयी & अपना हाथ उनकी जाँघ से खिच लिया.भैया जी को लगा की सब चौपट हो गया जबकि ये सब नीना की चाल का हिस्सा था.उसे बहुत मज़ा आ रहा था वो भैया जी जैसे ताक़तवर इंसान को अपनी उंगली पे नचा रही थी.

"क्या हुआ नीनाज़ी?मेरी बात अच्छी नही लगी आपको?",भैया जी उस से और सॅट गये.

"बलदेव जी..",नीना उठ गयी & थोड़ी दूर पे उनकी ओर पीठ कर खड़ी हो गयी,"..मुझसे मिलके क्या फ़ायदा होगा आपको?",नीना घबराने का नाटक कर रही थी.

"मैं 1 तन्हा इंसान हू,नीना जी.आज आपसे मिला तो लगा जैसे आप मेरी तन्हाई दूर करने मे मददगार साबित हो सकती हैं.",वो उसके पीछे आ गये & उसके कंधो पे अपने हाथ रख दिए,"..मैं तो बस ये चाहता हू कि जब भी कभी फ़ुर्सत हो & आपकी मर्ज़ी तो हम दोनो कुच्छ वक़्त साथ गुज़ार लें.अब अगर मैं ही आपको पसंद नही तो.."

"नही-2 ऐसी बात नही है.",नीना घूमी & अपना हाथ उनके होंठो पे रख दिया & फिर शर्मा के ऐसे खींच लिया जैसे उस से अंजाने मे ये हो गया हो,"..आप तो बहुत ही अच्छे इंसान हैं & दिलचस्प भी.",वो हल्के से मुस्कुराइ & मगर अगले पल फिर परेशान सूरत बनाके फिर से घूम गयी,"..लेकिन मैं 1 औरत हू,बलदेव जी.दुनिया तो नही समझेगी ना हमारी दोस्ती को.अगर कल को किसी को भनक लग गयी तो मेरा क्या होगा?",भैया जी की खुशी का ठिकाना नही था.नीना को पता चल जाने का डर था,उनसे मिलने पे ऐतराज़ नही!अब वक़्त आ गया था उनके अगले कदम का.

"आप उसकी फ़िक्र मत कीजिए.मेरे होते आप पे कभी कोई उंगली नही उठेगी.",उसने नीना के कंधे पकड़े & उसे अपनी ओर घुमाया,"..बस इतना बोलिए की आपको मेरी दोस्ती कबूल है?",उन्होने उसके कंधे पकड़ के बेचैनी से कहा.

"हाँ.",नीना अगर फ़िल्मो मे चली जाती तो वाहा राज कर रही होती.सर बाई तरफ घुमा,शर्म से नज़रें नीची कर बहुत धीरे से उसने हा कहा तो भैया जी ने उसे खींच के अपने सीने से लगा लिया.

"बलदेव जी..प्लीज़.",नीना छूटने के लिए कसमसाने लगी तो बलदेव जी उसके चेहरे को चूमने लगे.उनकी खुद समझ मे नही आ रहा था कि उनके जैसा धीरज वाला इंसान इस औरत के लिए ऐसे क्यू पागल हो रहा था.नीना के चेहरे को उन्होने अपनी किस्सस से ढँक दिया & फिर उसे बाहो मे भर अपने सीने से लगा लिया.

"बलदेव जी..",नीना ने उनके सीने से सर उठाके अपने हाथ वाहा पे लगा दिए मानो उन्हे अलग करना चाहती हो,"..प्लीज़ मुझे डर लग रहा है.",नीना मर्दो की फ़ितरत से अच्छी तरह वाकिफ़ थी.उसे पता था कि उसकी ऐसी च्छुई-मुई वाली हरकतें आग मे घी का काम करेंगी.

"हमारे होते हुए डर कैसा!",उन्होने बाए हाथ से नीना की पतली कमर को कसा & दाए से उसके चेहरे को पकड़ उसके होंठो से अपने होंठ लगा दिए.कुच्छ पॅलो तक उसके गुलाबी होंठो को चूमने के बाद उन्होने अपनी ज़ुबान उनपे फिराई तो नीना फिर से छूटने को च्चटपटाने लगी मगर भैया जी उसे जकड़े हुए उसके होंठो से खेलते रहे.वो कोशिश कर रहे थे कि नीना अपने होंठ खोले ताकि वो अपनी ज़ुबान से उसके मुँह का स्वाद चख सकें मगर नीना ने अपने होंठ बंद कर रखे थे.वो 1 पल को भी उन्हे ये एहसास नही होने देना चाहती थी कि वो भी उनसे चुदने को पागल हो रही थी.जब से भैया जी का मोटा लंड उसके पेट से सटा था तब से उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ना शुरू कर दिया था.

भैया जी ने देखा कि नीना अपने होंठ नही खोल रही है तो उनका ध्यान उसके बाकी जिस्म की ओर गया.उन्होने दाया हाथ नीचे नीना के बाए कंधे पे किया & उसके पल्लू को वाहा से सरका दिया फिर उसके होंठो को छ्चोड़ नीचे उसके क्लीवेज को चूमने लगे.

"उन्न....!",नीना ने उन्हे धकेला & उनसे दूर हो अपने हाथो से अपने सीने को ढँके उनकी ओर पीठ कर खड़ी हो गयी.उसका पल्लू अब नीचे ज़मीन पे गिरा था.भाय्या जी की तरफ अब उसकी लगभग नंगी पीठ & कमर थी.उन्होने मुस्कुराते हुए अपना कुर्ता उतारा & अपने सीने को सहलाते नीना के पीछे आ खड़े हुए.वो अपने पंजो पे बैठ गये & नीना की मांसल कमर की बगलो को पकड़ उसकी पीठ चूमने लगे.

"उम्म...आह...छ्चोड़िए..ना....उन्न..प्लीज़...!",नीना की मादक आवाज़ें उनके जोश को बढ़ाए जा रही थी.उन्होने उसकी कमर को बाँहो मे जकड़ा & सामने होते हुए उसके चिकने पेट को चूमने लगे.नीना अब हवा मे उड़ रही थी मगर अभी भी उसका नाटक जारी था.वो भैया जी के बालो को पकड़ उनके सर को अपने पेट से अलग करने की कोशिश करने लगी मगर वो अब कहा मानने वाले थे.उनकी ज़ुबान ने उसके मखमली पेट को तर कर दिया & फिर उसकी नाभि की थाह लेने लगी.नीना की चूत मे तो इस से प्यारी सी कसक हो रही थी & रोम-2 खुशी से नाच रहा था.राज्य का इतना बड़ा नेता उसके सामने घुटनो पे बैठा उसके हुस्न की पूजा कर रहा था!कौन लड़की ऐसी बात से मस्त ना हो जाती!

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--49

gataank se aage............-

"sare shehar me humare aadmi faile hain magar abhi tak nahi pata chala ki us ladke ko akun utha le gaya hai!",Ballu ne gusse se bistar pe mukka mara.ye shayad uski ab tak ki sabse badi nakamyabi thi & vo is baat ko hazam nahi kar pa raha tha.

"sale,itna pareshan kyu hota hai?",Rano ne use peechhe se baaho me bhar liya & uske seene ko sehlane lagi,"..abhi to 1 din bhi nahi hua hai.pata chal jayega.",rano ko bhi utna hi gussa & khij ho rahi thi magar vo janti thi ki use jatane se is waqt koi fayda nahi.vaise bhi uske Baba to MLA banane hi wale the,ab ladka chahe jaha ho.

"tu samajh nahi rahi,rano.us ladke ka huamre hatho me aana kitna zaruri hai.",usne seene pe firte rano ke hatho ko tham ke chum liya to rano samne aa uske dono taraf bistar pe ghutne jama uski god me baith gayi.ballu ne mehsus kiya ki salwar ke patle kapde ke neeche rano ne panty nahi pehni hai & is ehsas se uska lund jagne laga.

"tu fir bakwas kar raha hai!",rano ne uske gaal pe chapat lagayi,"..baba MLA ban hi jayenge ab ladka jaye bhad me!"

"yehi to tu galat soch rahi hai.",ballu ke hath rano ki kamiz me ghus uski makhmali pith pe chalne lage,"..Jasjit Pradhan ka harna bahut zaruri hai,rano nahi to baba ka MLA banane ka koi fayda nahi.jasjit ki sarkar ban gayi to baba MLA ban ke kya ukhad lenge!",hath aage la usne salwar ki dor ko dhila kiya & fir peechhe le ja rano ki gand ko masalne laga.

"magar jasjit to abhi bhi harega?"

"aur agar bachcha chunav se pehle mil gaya to?..fir to jasjit dogune hausle ke sath prachar karega.logo ki sahanubhuti bhi uske sath hogi & fir kya hoga?",rano ne khud hi apni kamiz upar kar apni chhatiya apne aashiq ke pyase hotho se laga di thi,"..isliye bachcha humare kabze me hona bahut zaruri hai.",ballu ne apne munh se 1 pal ko uski chhati munh se nikali & baat puri kar fir se bhar li.

"tu fikr mat kar..baat meri samajh me aa gayi hai.ab kuchh aur rasta bhi scohna hi padega.",rano ne aankhe band ki & apne pareshan aashiq ko sukun pahuchane lagi.

Subah hui magar Anjali ki zindagi me to abhi bhi rat chal rahi thi.ab to ansu bhi sukh gaye the magar dil ka dard tha ki kam hi nahi ho raha tha.Jasjit ne use bataya ki Anish ko chhudane ke liye kya-2 koshishen ki ja rahi hain lekin us bechari ko to tabhi chain milta jab uske jigar ka tukda uski ankho ke samne hota.kal raat se usne apne dusre bete Ankur ko 1 pal ke liye bhi khud se juda nahi kiya tha.

"Mr.Pradhan,aap samajh hi sakte hain ki unhe bahut gehra sadma pahuncha hai,upar se vo khud ko doshi maan rahi hain..",psychiatrist Dr.Mall jasjit ko samjha rahe the,"..main har roz unse milunga.zarurat padi to din bhar yehi rahunga magar 1 bat ko please samajhiye,aise haal me progress bahut dhire hoti hai.meri aapse request hai ki please,ap unke samne apna hausla mat khoiyega."

"aap befikr rahen,doctor.",dr.mall shehar ke jane-mane psychiatrist the & insani dimagh ke sochne ke tarike ko badi gehrayi se samajhte the.vo jante the ki pradhan ko bhi unki madad ki zarurat thi magar pradhan jaise neta ka aham use ye manane ko taiyyar nahi hone dega so vo bas batchit ke zariye pradhan ke dil ki thah le use bhi samjha rahe the.

"are,kaha chali gayi thi subah-2?",Mukul ne Nina ko ghar me dakhil hote dekha to puchha.vo thodi dori pe khada apne bhai & doctor ko bate karta dekh raha tha.

"jogging.",nina uske karib aayi,"..maine naukro ko nashte me kuchh halka banane ke liye keh diya hai.zara apne bhaiyya se bol ke ankur ko to bhabhi ke paas se le ao.vo bachcha hai,uspe bhi to in sab bato ka asar padega.",mukul ki hairani ka thikana hi nahi tha..nina ko uske bhai-bhabhi-bhatije ki parvah ho rahi thi,"..ab aise kya dekh rahe ho?..bolo na!..offoh..ab main hi bat karti hu.",nina age badhi fir jaise kuchh yaad aya to ghumi,"..& suno main nashte ke bad zara bahar jaoongi..kuchh kam hai..lunch tak vapas aa jaoongi."

"ok.",mukul ko bahut khushi hui thi.vo nina ko apne bhai & doctor se bate karte dekh raha tha.us bechare ko agar ye pata hota ki uski biwi kis liye din me jane wali hai to shayad uske jazbat bilkul ulat hote.

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"Baldev,main to apne sare aadmiyo ka istemal kar raha hu lekin..",Bhaiyya ji kan se mobile lagaye apne sarkari bungle ke bedroom me khade the.unhone deewar ghadi ki or dekha,11 bajne hi vale the & nina ab aane hi vali thi.chunav ke chalte unhe sans lene ki bhi fursat nahi thi magar nina ke husn ne unhe majboor kar diya tha ki vo aaj apne sare kaamo ko tal den.

"lekin kya Raghu?"

"baldev,mere police me kayi sources hain magar ye mamla bahut zyada nazuk hai.ab agar unhe laga ki main is mamle me kuchh zyada dilchaspi le raha hu to kahi unhe shaq na ho jaye."

"to tum chahte ho ki police ko jo bhi pata chale vo jankari main tum tak pahuncha du?"

"maan gaye,baldev.",Raghu Kumbhat hansa,"..tumhara dimagh to din ba din & paina ho raha hai."

"tumse zyada nahi raghu.",bhaiyya ji bhi hanse,"..fikr mat karo,tumhe police ki har bat ki khabar milti rahegi.",unhone fone kat diya.

"sahab,ye memsaab aayi hain.",1 naukar ne use nina ka card diya.

"unhe andar bhejo.",naukro ko sakht takeed thi ki koi bhi unhe disturb na kare.

"hello,baldev ji.",nina kamre me ayi to bhaiyya ji ki jaise sans hi atak gayi.nina ne 1 laal & kale prints ki sari pehni thi jiske jhine aanchal se uske sleeveless blouse me se jhankat halka sa cleavage dikh raha tha.jhini sari me se uska gora pet & gehri nabhi bhi jhalak rahe the.vo bahut soch-samajh ke aise taiyyar hui thi taki 1 taraf to bhaiyya ji uske husn ka achhe se deedar kar payen magar dusri or unhe ye na lage ki nina unki baho me girne ko taiyyar hai.

"hello,nina ji.",aage badh unhone uska nazuk hath tham ke daba diya & uski ankho me jhanka,"..aaiye baithiye.",nina kamre me lage sofe pe baith gayi.usne gaur kiya ki bhaiya ji ne use seedha apne bedroom me milne ko bulaya hai yani ki unke irade bilkul bhi nek nahi the.

"bataiye,baldev ji.kaise madad kar sakte hain aap humari?"

"dekhiye,nina ji.mujhe bas itna karna hai ki main Baddal se 1 kamzor umeedvar khada kar du fir mukul ji jeet jayenge.uske bad yaha vidhan sabha me jo alag-2 commitees banti hain,unme unhe shamil karna to mere liye koi badi bat nahi magar.."

"magar kya ?",bhaiyya ji sofe pe uske sath hi baithe the & nina ne bhi mauka pate apna daya hath unki bayi jangh pe rakh diya.bhaiyya ji ka jism us ehsas se sulagne laga.

"magar nina ji..",unhone apna baya hath uske hath ke upar rakha,"..iske liye mujhe apne party workers ki narazgi jhelni padegi."

"to aap ye kaam nahi karenge?",nina banawati mayusi se boli & iske asar se bhaiyya ji achhute nahi rahe.musibat me phansi ladki ko dekh mard na keval uski madad karna chahta hai balki uske jism me is baat se josh bhi bhar jata hai.aisa hi bhaiyya ji ke sath bhi hua.

"maina aisa to nahi kaha.",bhaiya ji ne apna hath nina ke hath se uthaya & uski pith pe rakh diya.blouse ka back bhi gehra tha & unka hath nina ki nangi pith se laga to us pal dono ke hi jismo me hararat paida ho gayi,"..main to bas itna keh raha tha..",bhaiya ji jante the ki ye bahut nazuk mod hai.abhi tak to aisa lag raha tha ki nina unki baat man jayegi magar kahi aisa nahi hua to bahut fajihat bhi ho sakti thi,"..ki nina ji main iske badle me kuchh chahta hu."

"kya baldev ji?",nina ne hath bahuty halke se unki jangh pe dabaya.

"ki aap humse isi tarah kabhi-kabhar mil liya karen.",nina khamosh ho gayi & apna hath unki jangh se khicnh liya.bhaiya ji ko laga ki sab chaupat ho gaya jabki ye sab nina ki chal ka hissa tha.use bahut maza a raha tha vo bhaiya ji jaise taqatwar insan ko apni ungli pe nacha rahi thi.

"kya hua ninaji?meri bat achhai nahi lagi aapko?",bhaiya ji us se aur sat gaye.

"baldev ji..",nina uth gayi & thodi dur pe unki or pith kar khadi ho gayi,"..mujhse milke kya fayda hoga apko?",nina ghabrane ka natak kar rahi thi.

"main 1 tanha insan hu,nina ji.aj apse mila to laga jaise aap meri tanhai door karne me madadgar sabit ho sakti hain.",vo uske peechhe a gaye & uske kandho pe apne hath rakh diye,"..main to bas ye chahta hu ki jab bhi kabhi fursat ho & apki marzi to hum dono kuchh waqt sath guzar len.ab agar main hi aapko pasand nahi to.."

"nahi-2 aisi baat nahi hai.",nina ghumi & apna hath unke hotho pe rakh diya & fir sharma ke aise khinch liya jaise us se anjane me ye ho gaya ho,"..aap to bahut hi achhe insan hain & dilchasp bhi.",vo halke se muskurayi & magar agle pal fir pareshan surat banake fir se ghum gayi,"..lekin main 1 aurat hu,baldev ji.duniya to nahi samjhegi na humari dosti ko.agar kal ko kisi ko bhanak lag gayi to mera kya hoga?",bhaiya ji ki khushi ka thikana nahi tha.nina ko pata chal jane ka darr tha,unse milne pe aitraz nahi!ab waqt a gaya tha unke agle kadam ka.

"aap uski fikr mat kijiye.mere hote aap pe kabhi koi ungli nahi uthegi.",usne nina ke kandhe pakde & use pani or ghumaya,"..bas itna boliye ki apko meri dosti kabul hai?",unhone uske kandhe pakad ke bechaini se kaha.

"han.",nina agar filmo me chali jati to vaha raj kar rahi hoti.sar bayi taraf ghuma,sharm se nazren neechi kar bahut dhire se usne haa kaha to bhaiya ji ne use khinch ke apne seene se laga liya.

"baldev ji..please.",nina chhutne ke liye kasmasane lagi to baldev ji uske chehre ko chumne lage.unki khud samajh me nahi a raha tha ki unke jaisa dhiraj vala insan is aurat ke liye aise kyu pagal ho raha tha.nina ke chehre ko unhone apni kisses se dhank diya & fir use baaho me bhar apne seene se laga liya.

"baldev ji..",nina ne unke seene se sar uthake apne hath vaha pe laga diye mano unhe alag karna chahti ho,"..please mujhe darr lag raha hai.",nina mardo ki fitrat se achhi tarah vakif thi.use pata tha ki uski aisi chhui-mui vali harkaten aag me ghee ka kam karengi.

"humare hote hue darr kaisa!",unhone baye hath se nina ki patli kamar ko kasa & daye se uske chehre ko pakad uske hotho se apne honth laha diye.kuchh palo tak uske gulabi hotho ko chumne ke baad unhone apni zuban unpe firayi to nina fir se chhutne ko chhatpatane lagi magar bhaiya ji use jakde hue uske hotho se khelte rahe.vo koshish kar rahe the ki nina apne honth khole taki vo apni zuban se uske munh ka swad chakh saken magar nina ne apne honth band kar rakhe the.vo 1 pal ko bhi unhe ye ehsas nahi hone dena chahti thi ki vo bhi unse chudne ko pagal ho rahi thi.jab se bhaiya ji ka mota lund uske pet se sata tha tab se uski chut ne pani chhodna shuru kar diya tha.

bhaiya ji ne dekha ki nina apne honth nahi khol rahi hai to unka dhyan uske baki jism ki or gaya.unhone daya hath neeche nina ke baye kandhe pe kiya & uske pallu ko vaha se sarka diya fir uske hotho ko chhod neeche uske cleavage ko chumne lage.

"unn....!",nina ne unhe dhakela & unse door ho apne hatho se apne seene ko dhanke unki or pith kar khadi ho gayi.uska pallu ab neeche zamin pe gira tha.bhaiyya ji ki taraf ab uski lagbhag nangi pith & kamar the.unhone muskurate hue apna kurta utara & apne seene ko sehlate nina ke peechhe a khade hue.vo apne panjo pe baith gaye & nina ki mansal kamar ki baglo ko pakad uski pith chumne lage.

"umm...ahhh...chhodiye..naa....unn..please...!",nina ki madak aavazen unke josh ko badahye ja rahi thi.unhone uski kamar ko baho me jakda & samne hote hue uske chikne pet ko chumne lage.nina ab hawa me ud rahi thi magar abhi bhi uska natak jari tha.vo bhaiya ji ke balo ko pakad unke sar ko apne pet se laga karne ki koshish karne lagi magar vo ab kaha manane vale the.unki zuban ne uske makhmali pet ko tar kar diya & fir uski nabhi ki thah lene lagi.nina ki chut me to asb pyari si kasak ho rahi thi & rom-2 khushi se nach raha tha.rajya ka itna bada neta uske samne ghutno pe baitha uske husn ki puja kar raha tha!kaun ladki aisi bat se mast na ho jati!

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--50

गतान्क से आगे............-

उसकी नाभि चाटते हुए भैया जी का दाया हाथ आगे आया & उसकी कमर मे खोंसि सारी को खिच दिया,"ओवव..ये क्या कर रहे हैं!..नहीइ....",वो झुक के उन्हे रोकने लगी मगर भैया जी उसकी नाभि को चाटते रहे & उसकी सारी को उसके जिस्म से अलग करते रहे.भैया जी सारी उतरने के बाद पेटिकोट के उपर से ही उसकी कसी गंद को दबाते हुए उसके पेट को चूमते रहे.नीना का अब मस्ती से बुरा हाल था.उसकी चूत अब और बर्दाश्त करने की हालत मे नही थी & वो जानती थी कि अब वो बस झड़ने ही वाली है.उसकी टाँगो मे जैसे जान ही नही थी & जैसे ही भैया जी की ज़ुबान ने 1 बार फिर उसकी नाभि को चॅटा उसने बहुत ज़ोर की आह भरी & गिरने लगी.

भैया जी फ़ौरन खड़े हुए & उसे बाँहो मे संभाल लिया & उसके दिलकश चेहरे को चूमने लगे.मदहोश नीना ने अपने हाथ उनके नंगे सीने पे जमा दिए मानो अभी भी वो पूरी तरह से तैय्यार ना हो जबकि सच्चाई ये थी कि भैया जी के बालो भरे चौड़े सीने को देख वो खुशी से पागल हो गयी थी & उसका दिल कर रहा था कि अपनी ज़ुबान से उनके निपल्स को चूसे & पेट पे सटे उनके पाजामे मे क़ैद लंड को दबोच ले.भैया जी के होठ उसके गालो से होते हुए उसके लबो पे आए & इस बार उसकी मस्ती का फ़ायदा उठाके उन्होने उसके नर्म लबो के पार अपनी जीभ घुसा ही दी & उसकी ज़ुबान से लड़ा ही दी.जब नीना ने उनकी ज़ुबान अपनी ज़ुबान पे महसूस की तो पहले तो उसने कुच्छ नही किया मगर थोड़ी देर बाद वो उनका साथ देने लगी लेकिन जैसे ही किस की शिदत बढ़ी उसने किस तोड़ दी & उन्हे परे धकेलने लगी मानो ये जता रही को वो इतनी मस्ती बर्दाश्त नही कर पा रही है.

इस बार भैया जी ने अपना बाया हाथ उसकी पीठ के गिर्द बाँधा & दाए को उसकी मोटी गंद के नीचे लगाते हुए उसकी दाई जाँघ को पकड़ते हुए उसे गोद मे उठा लिया & उसके होंठो को चूमते हुए उसे 4 पोस्टर बेड पे ले गये.बिस्तर पे लेटते ही उसके मुड़े घुटनो के कारण नीना का पेटिकोट घुटनो के उपर से ढालाक गया & उसकी जाँघो का हिस्सा नुमाया हो गया.उसकी तेज़ सांसो से उपर-नीचे होता उसका सीना भैया जी की भी धड़कने बढ़ा रहा था.

वो बिस्तर पे चढ़ गये & उसके नंगे घुटने पे हाथ रख उसे उसकी जाँघ पे चलाते हुए उसके पेटिकोट को उसकी कमर तक ले जाने लगे.नीना का हाथ उनके हाथो पे आ लगा & उन्हे रोकने की कोशिश करने लगा.भैया जी ने उसकी आँखो मे अपनी आँखे डाल दी & अपने हाथ को आगे बढ़ाते रहे.नीना की आँखो मे मस्ती & घबराहट का वो अनूठा मिलन था जोकि मर्दो को पागल कर देता है & भैया जी की आँखो मे बस वासना थी जो नीना के दिल को और धड़का रही थी.

उसे देखते हुए उन्होने अपने दोनो हाथो से उसकी संगमरमरी जाँघो पे अपने हाथ रगड़ना शुरू कर दिया.नीना का जिस्म मस्ती मे पूरी तरह डूब चुका था.वो उन्हे रोकने की कोशिश कर रही थी मगर वो उसकी अनसुनी करते हुए उसकी जाँघो को रगड़ते हुए उसकी पॅंटी तक आ पहुँचे थे.उन्होने हाथ पेटिकोट मे घुसा उसकी पॅंटी खींचनी चाही तो नीना उनके हाथ पकड़ने लगी मगर उसकी पॅंटी का भी वही हश्र हुआ जो उसकी सारी का हुआ था.उसके रस से लिसदी पॅंटी बाहर आई तो भैया जी ने उसे चूम लिया.

ये देख नीना ने शर्म से आँखे बंद कर ली & अपने हाथो से अपने पेटिकोट को नीचे कर अपनी नंगी चूत को ढँकने लगी.भैया जी ने पॅंटी को उच्छाल दिया & उसके हाथो को उसके पेटिकोट से हटा दिया & उसकी टाँगो को पकड़ के हवा मे उठा दिया.अब नीना चाहती भी तो अपने पेटिकोट से अपनी चूत को नही ढँक रही थी.भैया जी ने नज़र नीचे झुका के उसकी गुलाबी,गीली चूत को देखा तो उनकी सनसनाहट और बढ़ गयी & चेहरा जोश की इंतेहा से तमतमा गया.नीना ने उनकी ये हालत देख अपनी आँखे ऐसे मूंद ली मानो उसे बहुत ज़्यादा शर्म आ रही हो & अपने हाथो को अपने सर के बगल मे रख तकिये को पकड़ लिया.

भैया जी ने उसकी टाँगो को हवा मे ही छ्चोड़ दिया & अपना सर पेटिकोट मे घुसा दिया,"..नही....ऊहह...क्या कर रहे हैं?...प्लीज़...छ्चोड़िए...हाईईइ.........ऊओनह....!",नीना ने पेटिकोट के उपर से उनके सर को पकड़ उन्हे हटाना चाहा मगर उनकी ज़ुबान मे नीना की चूत का रस लग चुका था & जिस तरह आदमख़ोर शेर इंसानी खून का स्वाद लगने के बाद कुच्छ और नही ख़ाता भैया जी भी अब उसकी चूत से रस की नयी धार छुड़वा के उसे पिए बिना नही मानने वाले थे.

नीना मस्ती & खुशी मे पागल हो अपने लाल पेटिकोट को उपर-नीचे होते देख रही थी.उसके अंदर छुपा सर उसकी चूत की गहराइयो मे अपनी ज़ुबान से उधम मचा रहा था.नीना कभी तकिये को पकड़ती तो कभी भैया जी के सर को.उसकी आहें अब चीखो की शक्ल इकतियार कर चुकी थी मगर भैया जी थे कि रुक होई नही रहे थे.उन्हे उसकी चूत चाटने मे बहुत मज़ा आ रहा था.उसके दाने को अपने अंगूठे & 1 उंगली से मसल के जब वो उसकी चूत मे ज़ुबान फिरते तो नीना अपनी कमर उचकते हुए उनके सर को अपनी जाँघो मे भींच लेती तो उनका दिल & मस्त हो जाता.

कयि पॅलो बाद जब उन्होने नीना की चूत को जी भर के चाट लिया & नीना भी ना जाने कितनी बार झाड़ चुकी तो उन्होने उसके पेटिकोट से सर बाहर निकाला.नीना की खुमारी भरी आँखो मे देखते हुए उन्होने अपने होंठो पे अपनी ज़ुबान फिराके वाहा लगे उसके रस को जब चटा तो नीना ने फिर से शर्मा के आँखे मूंद ली.उसने सोचा की उम्र मे चाहे ये आदमी बड़ा हो मगर इसका जिस्म & इसका जोश किसी भी जवान को शर्म सकते थे.तभी उसे अपने जिस्म पे फिर से अपने इस नये आशिक़ के हाथ महसूस हुए तो उसने आधी पलके खोलिए & देखा की अब उसका पेटिकोट भी उसके जिस्म से अलग हो रहा है.

नीना ने फिर शरमाने का नाटक किया & अपनी जाँघो को भींच अपनी नंगी चूत छिपाने लगी.भैया ने उसकी टाँगो को पकड़ उसे पलट दिया & फिर उसकी उठी हुई मोटी गंद को चूमने लगे.नीना अपनी कोहोनियो पे उचक सर को पीछे फेंकते हुए फिर से आहे भरने लगी.भैया जी उसकी जाँघो के पिच्छले हिस्सो & गंद की फांको को चूम,चूस & हौले-2 काट रहे थे.उसकी चूत की कसक का तो अब बुरा हाल था.अब तो उसे बस उनके लंड का इंतेज़ार था जो अपने वीर्य से उसकी प्यास बुझाता.

भैया जी उसकी गंद को चूमते हुए उपर उसकी कमर & फिर पीठ पे आए & फिर उनके हाथो ने उसके ब्लाउस & ब्रा के हुक्स खोल दिए.उसकी पीठ पे बेसब्री से हाथ फिराते हुए उन्होने उसे अपने गर्म होंठो से चूम-2 के बहाल कर दिया.जब उन्होने नीना की बाहे पलट उसे फिर से उसकी पीठ पे लिटाया & उसकी बाहो से उसकी ना-नुकर के बावजूद उसके ब्लाउस & ब्रा को खींच लिया तो नीना ने अपनी बाहो को अपने सीने पे क्रॉस कर अपनी चूचियों छुपा लिया मगर ऐसा करने से उसकी चूचियो का उपरी हिस्सा & उभर के उसकी बाँहो के उपर से छलक्ने को बेताब हो उठा.भैया जी ने उसकी बाँहो को पकड़ के उसके सीने से उठाया & जब उसके शहद के रंग वाले निपल्स से सजी 36 साइज़ की चूचियाँ देखी तो उनका दिलखुशी से झूम उठा.

"ग़ज़ब का हुस्न है तुम्हारा!कौन कहेगा कि तुम 1 बच्चे की मा हो!",उन्होने उसकी चूचियो को हेल से दबाया,"..कितनी कसी हैं ये अभी भी?तुम हुस्न की मल्लिका हो नीना!",& वो उसके बाई तरफ लेट के उसकी चूचियो चूसने मे लग गये.नीना की आहे कमरे मे गूँज रही थी & गूँज रही थी भैया जी की ज़ुबान की आवाज़ जोकि ऐसा लग रहा था जैसे नीना की मोटी छातियो का सारा का सारा रस आज ही पी जाना चाहती हो!

नीना उनके बालो को नोचती अपना सीना बिस्तर से उचकाती अपने नये प्रेमी के मुँह मे भरती ज़ोर-2 से आहे भर रही थी.भैया जी का बाया हाथ उसकी चूत से जा लगा था.बहुत देर तक भैया जी उसके नाज़ुक अंगो से ऐसे ही खेलते रहे.नीना 1 बार और झाड़ गयी थी & भैया जी ने उसकी चूत से अपनी गीली उंगलिया निकाली & उन्हे उसे दिखाते हुए चाट लिया.

अब भैया जी उसके जिस्म मे उतरना चाहते थे.उसे देखते हुए उन्होने अपना पाजामा उतार अपना 8 इंच का लंबा,मोटा प्रेकुं से भीगा लंड निकाला & उसके घुटने फैला उसकी टांगो के बीच बैठ गये.नीना ने उनके लंड को देख अपना निचला होंठ दाँत से काटा & घबराई शक्ल बना ली.

"क्या हुआ?",भैया जी ने अपना लंड हिलाया.

"डर लग रहा है."

"क्यू?",वो मुस्कुराए & उसकी चूत पे हाथ फेरा.

"आपका बहुत बड़ा है.",उसने अपना सर दाई तरफ घुमा अपने दाए हाथ मे मुँह च्छूपा लिया जैसे उसे बहुत शर्म आ रही हो.

"तो क्या हुआ?"

"दर्द होगा मुझे बहुत.",नीना वैसे ही रही.

"तो आप इस से दोस्ती क्यू नही कर लेती.डर भाग जाएगा.",वो उसके बाई तरफ उसके सर के बगल मे बैठ गये & अपना लंड उसकी आँखो के सामने हिलाने लगे & उसे पकड़ने का इशारा करने लगे.जब नीना सकुचाती दिखी तो उन्होने उसका बाया हाथ पकड़ा & लंड उसमे दे दिया & जब तक उसने खुद उसे हिलाना नही शुरू किया उन्होने उसका हाथ नही छ्चोड़ा.नीना ने शर्म से दाए हाथ मे चेहरा च्छूपा सर दाई तरफ घुमा लिया & लंड हिलाने लगी.उसके नाटक से तो भैया जी पागल ही हो गये थे.उन्होने लंड उसके हाथ से लिया & फिर उसका चेहरा घुमा के अपना लंड उसके होंठो से च्छुआ दिया.

"नही..",नीना फिर से ना-नुकर करने लगी मगर भैया जी ने इसरार कर आख़िर कर अपना लंड उसके मुँह मे दे ही दिया.

"हो गया..",थोड़ी देर बाद ही नीना ने लंड मुँह से निकाला & शर्म से मुस्कुराती हुई बोली तो भैया जी ने 1 बार फिर उसके मुँह मे लंड दे दिया & उसकी मोटी चूचिया दबाने लगे.जब नीना ने लंड पूरा गीला कर दिया तो उन्होने उसके मुँह को आराम दिया & 1 बार फिर उसकी फैली जाँघो के बीच मे घुटनो पे बैठ लंड उसकी गीली चूत पे टीका के धक्का दिया.

"ओईई...",भैया जी लंड अंदर पेलने लगे & नीना चीखने लगी,"..ओईइ मानणन...हैई रामम्म्मम...बहुत बड़ा है....ऊऊव्व्वव...!",उसने दर्द के मारे आँखे मिंच ली & छट-पटाने लगी.भैया जी उसके उपर लेट गये & उसे बाँहो मे भर लिया & उसे चूमते हुए चोदने लगे.नीना की चूत बहुत ज़्यादा कसी हुई थी,राम्या से भी ज़्यादा.उपर से उसकी जवान लड़कियो जैसी शरमाने वाली हर्कतो ने उन्हे और पागल कर दिया था.वो तेज़ धक्के लगा के उसे चोदने लगे तो नीना अपने तकिये को पकड़े छटपटाती आहे भरने लगी.

उनके लंड ने जल्द ही कमाल दिखाया & वो फ़ौरन ही झाड़ गयी.झाड़ते हुए नीना बिल्कुल पागल हो गयी & बिस्तर से उचक के उनके सीने को चूमते हुए अपना दाए हाथ के नाख़ून उनकी गंद मे & बाए के उनकी पीठ मे धंसा दिए.उसकी ये गर्मजोशी भी भैया जी को बहुत भाई & जब झड़ने की खुमारी उतरी & नीना ने शर्मा के फिर से तकिये मे मुँह च्छुपाया तब तो वो उसके बिल्कुल मुरीद हो गये.

उन्होने लंड उसकी चूत से निकाला & उसे खींच के उठा लिया.घुटनो पे खड़े हो उन्होने उसे बाँहो मे भर के चूमा तो इस बार नीना ने भी उनका साथ दिया.उन्होने उसे कुच्छ देर चूमा & फिर उसे बिस्तर के दूसरी ओर पेट के बल लिटा दिया & उसकी गंद को हवा मे उठा दिया फिर वो उसकी चूत को पीछे से चाटने लगे.नीना बिस्तर मे मुँह च्छुपाए फिर से आहे भरने लगी तो उन्होने पीछे से उसकी चूत मे फिर से लंड घुसा दिया & उसे चोदने लगे.

उसकी कमर थामे वो उसे चोद रहे थे.बीच-2 मे उनके हाथ नीना की चौड़ी गंद & नर्म पीठ को सहला रहे थे.जैसे-2 नीना का जोश बढ़ा वैसे-2 वो बिस्तर से सर उठाके बाल झटक-2 के आहे भरने लगी.उसका जोश पल-2 बढ़ता जा रहा था.उसने सामने बिस्तर के कोने पे लगे बेड पोस्टर को दोनो हाथो से थाम लिया & भैया जी के धक्को के जवाब मे अपनी गंद आगे-पीछे हिलाने लगी.

खुमारी कुच्छ और बढ़ी तो उसने पोस्टर को थाम अपने होंठ उस से लगा दिए & उसपे अपने गाल ऐसे रगड़ने लगी मानो वो भैया जी का चौड़ा सीना हो.उसकी इन मस्तानी हर्कतो को देख भैया जी भी जोश से पागल हो गये & उनके धक्के और तेज़ हो गये.इस पोज़िशन मे उनका लंड नीना की चूत की दीवारो से बुरी तरह रगड़ रहा था & नीना उस से बहाल हो पोस्टर को थामे 1 बार और झाड़ गयी.

भैया जी ने उसके कंधे पकड़ उसे पीछे खींचा & बिस्तर पे उसकी बाई करवट पे लिटा दिया तो नीना ने मुँह बिस्तर मे च्छूपा लिया.भैया जी उसकी गंद पे प्यार से हाथ फेरते अपनी बाई कोहनी पे उठाके उसकी चूत चोदने मे लग गये.गंद से हाथ आगे आ नीना की चूचियो से लगे & उन्हे मसल्ने लगे.नीना अब मस्ती की 1 और लहर पे सवार हो गयी थी बस फ़र्क इंतहा था कि इस बार भैया जी भी उसके साथ अपने सफ़र को अंजाम देने को तैय्यार थे.

उसकी दाई बाँह पकड़ उन्होने उसके जिस्म को अपने से सताया & फिर उसकी चूत के दाने को रगड़ते हुए उसके दाए कान मे जीभ फिराते हुए बहुत तेज़ धक्के लगाने लगे.नीना ने हाथ पीछे ले जाके उनके चेहरे को सहलाया & अपनी कमर हिलाने लगी.चूत के दाने के रगडे जाने से वो बहुत ज़्यादा मस्त हो गयी थी.तभी भैया जी ने उसके जिस्म मे अकड़न महसूस की,वो समझ गये की नीना झड़ने वाली है.उन्होने उसके पेट पे अपना दाया हाथ कसा & बाए को उसकी गर्दन से निकाल अपनी 2 उंगलिया उसके मुँह मे डाल दी जिन्हे नीना बड़े मस्ताने अंदाज़ मे चूसने लगी.धक्के अब बहुत तेज़ हो गये थे & भैया जी के आंडो मे हो रहा मीठा दर्द भी.नीना की चूत की कसक भी बहुत बढ़ गयी थी.

उसने मुँह से उंगलिया निकाल अपना बाया गाल बिस्तर पे बेचैनी से रगड़ते हुए ज़ोर से आह भरी,वो झड़ने लगी थी.भैया जी ने भी अपना बाया गाल उसके दाए से लगा दिया & वो भी आहें भरने लगा.उनका जिस्म झटके खा रहा था & नीना ने महसूस किया कि उसकी रस बहाती चूत उनके गर्म वीर्य से भर रही है.भैया जी झड़ते हुए उसके जिस्म को सहला रहे थे & उसके नाम को ले आहे भर रहे थे.नीना हौले से मुस्कुराइ,उसने इस ताक़तवर इंसान को शीशे मे उतार ही लिया था.

मोना उसकी बाहो मे थी & वरुण उसके गोरे गालो को चूम रहा था.मोना की छातियो उसके सीने पे दबी थी & वो तो बस खुशी से पागल था.मोना ने झुक के उसके बालो भरे सीने को चूमना शुरू किया तो वो और मस्त हो गया..वरुण..वरुण..मोना उसका नाम ले रही थी..उसने धीरे से आँखे खोली.."वरुण..वरुण..उठो."

वरुण हड़बड़ा के उठ बैठा"हुंग..क्या हुआ?"

"कुच्छ नही.उजाला होने से पहले तुम स्टोर मे छिप जाओ.",मेघना ने फर्श से उसका बिस्तर उठाना शुरू किया.उसके चेहरे का भी रंग बदला हुआ था.1 पल मे क्या से क्या हो जाता है!जब वरुण ने आँखे खोली थी तो वो अपने सपने की खुमारी मे ही था & उसकी आँखो मे जो प्यार & दीवानगी थी वो उसके उपर झुकी मेघना की आँखो से छुपि ना रह सकती थी & अब मेघना के दिल की उथल-पुथल और बढ़ गयी थी.

उसे कल रात से लेके अभी तक मे पहली बार ये एहसास हुआ कि वो अपने पुराने प्रेमी के साथ घर मे अकेली थी & दोनो ने पूरी रात 1 ही कमरे मे बिताई थी.जहा इस बात ने उसके दिल की धड़कनो को तेज़ किया वही उसके जिस्म मे भी कसक उठने लगी.

"मैं चाइ बनाती हू.तब तक तुम फ्रेश हो लो.",बिना वरुण की ओर देखे वो कमरे से निकल गयी.

"..पोलीस को जिस वॅन की तलाश थी वो उन्हे रेलवे स्टेशन की पार्किंग से मिल गयी है मगर हमारे सूत्रों के मुताबिक अभी तक पोलीस के हाथ कोई ठोस सुराग नही लगा है..",वरुण & मोना छाई पीते हुए टीवी पे खबरें देख रहे थे..तो उसकी वॅन ढूंड ली गयी थी..अब तो बस मूसा ही कुच्छ कर सकता था..2 रातें और फिर तो वो इस शहर से ही दूर चला जाएगा..

"चाइ पी ली?"

हां."

"तो चलो.",वरुण ने घड़ी देखी सवेरे के 5 बजने वाले थे.दोनो छत पे चले आए.मेघना ने कमरा खोला & दोनो अंदर दाखिल हुए.

"गंदा है और समान भी बिखरा पड़ा है.थोड़ा वक़्त होता तो सब ठीक कर देती."

"इस वक़्त ये कमरा मेरे लिए किसी 5-स्टार होटेल के कमरे से भी बढ़ के है.",वरुण ने हंसते हुए मेघना के कंधे पे हाथ रखा तो उसे एहसास हुआ की नाइटी के स्ट्रॅप के नीचे ब्रा का स्ट्रॅप नही है.मोना की नंगी छातियो की तस्वीर उसके ज़हन मे कौंध गयी & उसका लंड जागने लगा,"..ज़्यादा परेशान मत होना & मेरे खाने की फ़िक्र भी मत करना,मोना.मुझे अब ऐसे हलातो की आदत हो गयी है.",वरुण ने 1 कोने मे धूल झाड़ के मोना की दी चादर बिच्छाई & आँखे बंद कर लेट गया.

वरुण का हाथ कंधे पे पड़ते ही मेघना कांप उठी थी.कुच्छ पल वो वरुण को देखते रही फिर कमरे के दरवाज़े पे बाहर से ताला लगा के वापस घर मे चली गयी.

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फोन लाइन शुरू करने से ठीक पहले जेसीपी सिंग ने 1 मीटिंग बुलाई जिसमे प्रोफेसर दीक्षित,दिव्या,अजीत समेत लगभग क्राइम ब्रच के सभी अफ़सर मौजूद थे.

"..वॅन हमे मिल गयी है मगर कोई सुराग नही.जो भी जानकारी अभी तक उस वॅन के बारे मे है,वो ये है कि उसे 1 सेकेंड-हॅंड कार डीलर से खरीदा गया था.1 टीम अभी उस डीलर के पास जा रही है.देखते हैं उस से क्या पता चलता है मगर..",डीसीपी वेर्मा बोलते हुए प्रोफेसर से मुखातिब हुए,"..तो हमारी सारी उमीदे इस वक़्त इस बात पे टिकी हैं कि वो किडनॅपर्स हमसे कॉंटॅक्ट करें & फिर हम बातचीत के ज़रिए बच्चे को वापस लाने की कोशिश करें.

प्रोफेसर को झल्लाहट हो रही थी,इस ज़रा सी बात के लिए उसे बुंगले से यहा बुलाया गया था...नही बात कुच्छ और थी..बग्स तो लगे थे फिर & क्या करना चाह रहे थे ये ..हां!वो मुस्कुराया,"मैने पहले भी कहा है कि मैं पूरी कोशिश करूँगा बशर्ते मेरी बातो को आपलोग माने.",प्रोफेसर कुर्सी से उठ खड़ा हुआ,"..अब बुरा ना माने तो मैं फोन लाइन शुरू होने से पहले बंगल पे पहुँच थोड़ा आराम करना चाहता हू क्यूकी मुझे नही लगता उसके बाद मुझे आराम का ज़रा भी मौका मिलेगा.",प्रोफेसर ने सबको नमस्ते किया & फुर्ती से वाहा से निकल गया.उसके पीछे दिव्या & नामित भट्ट जोकि 1 बिकुल नया अफ़सर था लगभग भागते हुए वाहा से निकले.

बंगल पे पहुँचते ही प्रोफेसर सीधा अपने कमरे मे गया & उसे बंद कर लिया.वो अपने कपड़े बदलने लगा मगर उसकी निगाहें कमरे की दीवारो को टटोल रही थी & कुच्छ पलो बड़ा उन्होने उसे ढूंड ही लिया जिसकी उन्हे तलाश थी.कमरे की 1 दीवार पे 1 लॅंप लगा था जोकि जलता नही था.उस लॅंप के होल्डर के लकड़ी के फेम मे प्रोफेसर को छ्होटा सा सुराख दिखा & वो समझ गया कि यही पे ख़ुफ़िया कॅमरा लगा है.वो मन ही मन हंसा..1 तरफ तो उसे बुलाते हैं काम करने के लिए दूसरी तरफ उन्हे खुद ही उसपे भरोसा नही!इतने दिमाग़ दार लोग & ऐसी बेवकूफी!प्रोफेसर हंसता हुआ बाथरूम मे घुस गया.बंगल के बेसमेंट मे बैठी पोलीस की टीम जोकि उस फुटेज को क्राइम ब्रांच मे बने कंट्रोल रूम तक पहुँचा रही थी ने जब प्रोफेसर को हंसते हुए देखा तो यही सोचा कि किस पागल को ऐसा नाज़ुक काम पकड़ा दिया उनके अफसरो ने!

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--50

gataank se aage............-

uski nabhi chatate hue bhaiya ji ka daya hath aage aya & uski kamar me khonsi sari ko khicnh diya,"oww..ye kya kar rahe hain!..nahiii....",vo jhuk ke unhe rokne lagi magar bhaiya ji uski nabhi ko chatate rahe & uski sari ko uske jism se alag karte rahe.bhaiya ji sari utarne ke bad petticaot ke upar se hi uski kasi gand ko dabate hue uske pet ko chumte rahe.nina ka ab masti se bura hal tha.uski chut ab aur bardasht karne ki halat me nahi thi & vo janti thi ki ab vo bas jhadne hi vali hai.uski tango me jaise jan hi nahi thi & jaise hi bhaiya ji ki zuban ne 1 bar fir uski nabhi ko chata usne bahut zor ki aah bhari & girne lagi.

bhaiya ji fauran khade hue & use baho me sambhal liya & uske dilkash chehre ko chumne lage.madhosh nina ne apne hath unke nange seene pe jama diye mano abhi bhi vo puri tarah se taiyyar na ho jabki sachchai ye thi ki bhaiya ji ke baalo bhare chaude seene ko dekh vo khushi se pagal ho gayi thi & uska dil kar raha tha ki apni zubans e unke nipples ko chuse & pet pe sate unke pajame me qaid lund ko daboch le.bhaiya ji ke hoth uske galo se hote hue uske labo pe aye & is bar uski masti ka fayda uthake unhone uske narm labo ke paar apni jibh ghusa hi di & uski zuban se lada hi di.jab nina ne unki zuban apni zuban pe mehsus ki to pehle to usne kuchh nahi kiya magar thodi der bad vo unka sath dene lagi lekin jaise hi kiss ki shidat badhi usne kiss tod di & unhe pare dhakelne lagi mano ye jata rahi ko vo itni masti bardasht nahi kar pa rahi hai.

is bar bhaiya ji ne apna baya hath uski pith ke gird bandha & daye ko uski moti gand ke neeche lagte hue uski dayi jangh ko pakadte hue use god me utha liya & uske hotho ko chumte hue use 4 poster bed pe le gaye.bistar pe letate hi uske mude ghutno ke karan nina ka petticoat ghutno ke upar se dhalak gaya & uski jangho ka hissa numaya ho gaya.uski tez sanso se upar-neeche hota uska seena bhaiya ji ki bhi dhadkane badha raha tha.

vo bistar pe chadh gaye & uske nange ghutne pe hath rakh use uski jangh pe chalate hue uske petticoat ko uski kamar tak le jane lage.nina ka hath unke hatho pe aa laga & unhe rokne ki koshish karne laga.bhaiya ji ne uski ankho me apni ankhe dal di & apne hath ko age badhate rahe.nina ki ankho me masti & ghabrahat ka vo anutha milan tha joki mardo ko pagal kar deta hai & bhaiya ji ki ankho me bas vasna thi jo nina ke dil ko aur dhadka rahi thi.

use dekhte hue unhone pane dono hatho se uski sangmarmari jangho pe apne hath ragadna shuru kar diya.nina ka jism masti me puri tarah doob chuka tha.vo unhe rokne ki koshish kar rahi thi magar vo uski ansuni karte hue uski jangho ko ragadte hue uski panty tak aa pahunche the.unhone hath petticoat me ghusa uski panty khinchani chahi to nina unke hath pakadne lagi magar uski panty ka bhi vahi hashr hua jo uski sari ka hua tha.uske ras se lisdi panty bahar ayi to bhaiya ji ne use chum liya.

ye dekh nina ne sharm se ankhe band kar li & apne hatho se apne petticoat ko neeche kar apni nangi chut ko dhankne lagi.bhaiya ji ne panty ko uchhal diya & uske hatho uske petticoat se hata diya & uski tango ko pakad ke hawa me utha diya.ab nina chahti bhi to apne petticoat se apni chut ko nahi dhank rahi thi.bhaiya ji ne nazar neeche jhuka ke uski gulabi,gili chut ko dekha to unki san aur badh gayi & chehra josh ki inteha se tamtama gaya.nina ne unki ye halat dekh apni aankhe aise mund li mano use bahut zyada sharm aa rahi ho & apne hatho ko apne sar ke bagal me rakh takiye ko pakad liya.

bhaiya ji ne uski tango ko hawa me hi chhod diya & apna sar petticoat me ghusa diya,"..nahi....oohhh...kya kar rahe hain?...please...chhodiye...haiiii.........ooonhhhhhh....!",nina ne petticoat ke upar se unke sar ko pakad unhe hatana chaha magar unki zuban me nina ki chut ka ras lag chuka tha & jis tarah aadamkhor sher insani khun ka swad lagne ke bad kuchh aur nahi khata bhaiya ji bhi ab uski chut se ras ki nayi dhar chhudwa ke use piye bina nahi maanane wale the.

nina masti & khushi me pagal ho apne laal petticaot ko upar-neeche hote dekh rahi thi.uske andar chhupa sar uski chut ki gehraiyo me apni zuban se udham macha raha tha.nina kabhi takiye ko pakadti to kabhi bhaiya ji ke sar ko.uski ahen ab chikho ki shakl ikhtiyatr kar chuki thi magar bhaiya ji the ki ruk hoi nahi rahe the.unhe uski chut chatane me bahut maza a raha tha.uske dane ko apne anguthe & 1 ungli se masal ke jab vo uski chut me zuban firate to nina apni kamar uchkate hue unke sar ko apni jangho me bhinch leti to unka dil & mast ho jata.

kayi palo bad jab unhone nina ki chut ko ji bhar ke chat liya & nina bhi na jane kitni bar jhad chuki to unhone uske petticoat se sar bahar nikala.nina ki khumari bhari aankho me dekhte hue unhone apne hotho pe apni zuban firake vaha lage uske ras ko jab chata to nina ne fir se sharma ke ankhe mund li.usne socha ki umra me chahe ye aadmi bada ho magar iska jism & iska josh kisi bhi jawan ko sharm sakte the.tabhi use apne jism pe fir se apne is naye aashiq ke hath mehsus hue to usne aadhi palke kholie & dekha ki ab uska petticoat bhi uske jism se alag ho raha hai.

nina ne fir sharmane ka natak kiya & apni jangho ko bhinch apni nangi chut chhipane lagi.bhaiya ne uski tango ko pakad use pakat diya & fir uski uthi hui moti gand ko chumne lage.nina apni kohoniyo pe uchak sar ko peechhe fenkte hue fir se ahe bharne lagi.bhaiya ji uski jangho ke pichhle hisso & gand ki fanko ko chum,chus & haule-2 kat rahe the.uski chut ki kasak ka to ab buar hal tha.ab to us ebas unkelund ka intezar tha jo apne virya se uski pyas bujhata.

bhaiya ji uski gand ko chumte hue upar uski kamar & fir pith pe aye & fir unke hatho ne uske blouse & bra ke hooks khol diye.uski pith pe besabri se hath firate hue unhone use apne garm hotho se chum-2 ke behal kar diya.jab unhone nina ki bahe palat use fir se uski pith pe litaya & uski baaho se uski na-nukar ke bavjud uske blouse & bra ko khinch liya to nina ne apni baaho ko apne seene pe cross kar apni chhatiya chhupa li magar aisa karne se uski chhatiyo ka upri hissa & ubhar ke uski baho ke upar se chhalakne ko betab ho utha.bhaiya ji ne uski baho ko pakad ke uske seene se uthaya & jab uske shehad ke rang vale nipples se saji 36 size ki chhatiya dekhi to unka dilkhushi se jhum utha.

"gazab ka husn hai tumhara!kaun kahega ki tum 1 bachche ki maa ho!",unhone uski choochiyo ko hale se dabaya,"..kitni kasi hain ye abhi bhi?tum husn ki mallika ho nina!",& vo uske bayi taraf let ke uski choochiy chusne me lag gaye.nina ki ahe kamre me gunj rahi thi & gunj rahi thi bhaiya ji ki zuban ki aavaz joki aisa lag raha tha jaise nina ki moti chhatiyo ka sara ka sara ras aaj hi pi jana chahti ho!

nina unke baalo ko nochti apna seena bistar se uchkati apne naye premi ke munh me bharti zor-2 se ahe bhar rahi thi.bhaiya ji ka baya hath uski chut se ja laga tha.bahut der tak bhaiya ji uske nazuk ango se aise hi khelte rahe.nina 1 bar aur jhad gayi thi & bhaiya ji ne uski chut se apni gili ungliya nikali & unhe use dikhate hue chat liya.

ab bhaiya ji uske jism me utarna chahte the.use dekhte hue unhone apna pajama utar apna 8 inch kalumba,mota precum se bhiga lund nikala & uske ghutne faila uski tango ke beech baith gaye.nina ne unke lund ko dekh apna nichla honth dant se kata & ghabrayi shakl bana li.

"kya hua?",bhaiya ji ne apna lund hilaya.

"darr lag raha hai."

"kyu?",vo muskuraye & uski chut pe hath fera.

"apka bahut bada hai.",usne apna sar dayi taraf ghuma apne daye hath me munh chhupa liya jaise use bahut sharm a rahi ho.

"to kya hua?"

"dard hoga mujhe bahut.",nina vaise hi rahi.

"top is se dosti kyu nahi kar leti.darr bhag jayega.",vo uske bayi taraf uske sar ke bagal me baith gaye & apna lund uski ankho ke samne hilane lage & use pakadne ka ishara karne lage.jab nina sakuchati diki to unhone uska baya hath pakda & lund usme de diya & jab tak usne khud sue hilana nahi shurur kiya unhone uska hath nahi chhoda.nina ne sharm se daye hath me chehra chhupa sar dayi taraf ghuma liya & lund hilane lagi.uske natak se to bhaiya ji pagal hi ho gaye the.unhone lund uske hath se liya & fir uska chehra ghuma ke apna lund uske hothos e chhua diya.

"nahi..",nina fir se na-nukar karne lagi magar bhaiya ji ne israr kar akhir kar apna lund uske munh me de hi diya.

"ho gaya..",thodi der bad hi nina ne lund munh se nikala & sharm se muskurati hui boli to bhaiya ji ne 1 bar fir uske munh me lund de diya & uski moti choochiya dabane lage.jab nina ne lund pura gila kar diya to unhone uske munh ko aram diya & 1 bar fir uski faili janghjo ke beech me ghutno pe baith lund uski gili chut pe tika ke dhakka diya.

"ouiiiii...",bhaiya ji lund andar pelne lage & nina chikhne lagi,"..ouiiii maannn...haiii raammmmm...bahut bada hai....oooowwww...!",usne dard ke mare aankhe minch li & chhatpatane lagi.bhaiya ji uske uapr let gaye & use baho me bhar liya & use chumte hue chodne lage.nina ki chut bahut zyada kasi hui thi,Ramya se bhi zyada.upar se uski jawan ladkiyo jaisi sharmane wali harkato ne unhe aur pagal kar diya tha.vo tez dhakke laga ke use chodne lage to nina apne takiye ko pakde chhatapatati aahe bharne lagi.

unke lund ne jald hi kamal dikhaya & vo fauran hi jhad gayi.jhadte hue nina bilkul pagal ho gayi & bistar se uchak ke unke seene ko chumte hue apna daye hath ke nakhun unki gand me & baye ke unki pith me dhansa diye.uski ye garmjoshi bhi bhaiya ji ko bahut bhayi & jab jhadne ki khumari utri & nina ne sharma ke fir se takiye me munh chhupaya tab to vo uske bilkul murid ho gaye.

unhone lund uski chut se nikala & use khinch ke utha liya.ghutno pe khade ho unhone use baho em bhar ke chuma to is bar nina ne bhio unka sath diya.unhone use kuchh der chuma & fir use bistar ke dusri or pet ke bal lita diya & uski gand ko hawa me uthadiya fir vo uski chut ko peechhe se chatne lage.nina bistar me munh chhupaye fir se aahe bharne lagi to unhone peechhe se uski chut me fir se lund ghusa diya & use chodne lage.

uski kamar thame vo use chod rahe the.beech-2 me unke hath nina ki chaudi gand & narm pith ko sehla rahe the.jaise-2 nina ka josh badha vaise-2 vo bistar se sar uthake bal jhatak-2 ke aahe bharne lagi.uska josh pal-2 badhta ja raha tha.usne samne bistar ke kone pe lage bed poster ko dono hatho se tham liya & bhaiya ji ke dhako ke jawab me apni gand aage-peechhe hilane lagi.

khumari kuchh aur badhi to usne poster ko tham apne honth us se laga diye & uspe apne gal aise ragadne lagi mano vo bhaiya ji ka chauda seena ho.uski in mastani harkato ko dekh bhaiya ji bhi josh se pagal ho gaye & unke dhake aur tez ho gaye.is position me unka lund nina ki chut ki deewaro se buri tarah ragad raha tha & nina us se behal ho poster ko thame 1 bar aur jhad gayi.

bhaiya ji ne uske kandhe pakad use peechhe khincha & bistar pe uski bayi karwat pe lita diya to nina ne munh me bsitar me chhupa liya.bhaiya ji uski gand pe pyar se hath ferte apni bayi kohni pe uchke uski chut chodne me lag gaye.gand se hath age a nina ki chochiyo se lage & unhe masalne lage.nina ab masti ki 1 aur lehar pe sawar ho gayi thi bas fark itnha tha ki is baar bhaiya ji bhi uske sath apne safar ko anjam dene ko taiyyar the.

uski dayi banh pakad unhone uske jism ko apne se sataya & fir uski chut ke dane ko ragadte hue uske daye kaan me jiobh firate hue bahut tez dhakke lagane lage.nina ne hath peechhe le jake unke chehre ko sehlaya & apni kamar hilane lagi.chut ke daen ke ragde jane se vo bahut zyada mast ho gayi thi.tabhi bhaiya ji ne uske jism me akdan mehsus ki,vo samajh gaye ki nina jhadne wali hai.unhone uske pet pe apna daya hath kasa & baye ko uski gardan se nikal apni 2 ungliya uske munh me daal di jinhew nina bade mastane andaz me chusne lagi.dhakke ab bahut tez ho gaye the & bhaiya ji ke ando me ho raha mitha dard bhi.nina ki chut ki kasak bhi bahut badh gayi thi.

usne munh se ungliya nikal apna baya gal bistar pe bechaini se ragadte hue zor se ah bhari,vo jhadne lagi thi.bhaiya ji ne bhi apna baya gal uske daye se laga di & vo bhi ahen bharne laga.unka jism jhatke kha raha tha & nina ne mehsus kiya ki uski ras bahati chut unke garm virya se bhar rahi hai.bhaiya ji jahdte hue uske jism ko sehla rahe the & uske naam ko le aahe bhar rahe the.nina haule se muskuaryi,usne is taqatwar insan ko shishe me utar hi liya tha.

Mona uski baaho me thi & Varun uske gore galo ko chum raha tha.mona ki chhatiya uske seene pe dabi thi & vo to bas khushi se pagal tha.mona ne jhuk ke uske balo bhare seene ko chumna shuru kiya to vo aur mast ho gaya..varun..varun..mona uska naam le rahi thi..usne dhire se aankhe kholi.."varun..varun..utho."

varun hadbada ke uth baitha"hunh..kya hua?"

"kuchh nahi.ujala hone se pehle tum store me chhip jao.",Meghna ne farsh se uska bistar uthana shuru kiya.uske chehre ka bhi rang badla hua tha.1 pal me kya se kya ho jata hai!jab varun ne aankhe kholi thi to vo apne sapne ki khumari me hi tha & uski aankho me jo pyar & deewangi thi vo uske upar jhuki meghna ki aankho se chhupi na reh sakti thi & ab meghna ke dil ki uthal-puthal aur badh gayi thi.

use kal raat se leke abhi tak me pehli baar ye ehsas hua ki vo apne purane premi ke sath ghar me akeli thi & dono ne puri raat 1 hi kamre me bitayi thi.jaha is baat ne uske dil ki dhadkano ko tez kiya vahi uske jism me bhi kasak uthne lagi.

"main chai banati hu.tab tak tum fresh ho lo.",bina varun ki or dekhe vo kamre se nikal gayi.

"..police ko jis van ki talash thi vo unhe railway station ki parking se mil gayi hai magar humare sutron ke mutabik abhi tak police ke hath koi thos surag nahi laga hai..",varun & mona chai peete hue tv pe khabren dekh rahe the..to uski van dhoond li gayi thi..ab to bas Musa hi kuchh kar sakta tha..2 raaten aur fir to vo is shehar se hi door chala jayega..

"chai pi li?"

haan."

"to chalo.",varun ne ghadi dekhi savere ke 5 bajne vale the.dono chhat pe chale aaye.meghna ne kamra khola & dono andar dakhil hue.

"ganda hai aur saman bhi bikhra pada hai.thoda waqt hota to sab thik kar deti."

"is waqt ye kamra mere liye kisi 5-star hotel ke kamre se bhi badh ke hai.",varun ne hanste hue meghna ke kandhe pe hath rakha to use ehsas hua ki nighty ke strap ke neeche bra ka strap nahi hai.mona ki nangi chhatiyo ki tasvir uske zehan me kaundh gayi & uska lund jagne laga,"..zyada pareshan mat hona & mere khane ki fikr bhi matkarna,mona.mujhe ab aise halaato ki aadat ho gayi hai.",varun ne 1 kone me dhool jhad ke mona ki di chadar bichhayi & aankhe band kar let gaya.

varun ka hath kandhe pe padte hi meghna kanp uthi thi.kuchh pal vo varun ko dekhte rahi fir kamre ke darwaze pe bahar se tala laga ke vapas ghar me chali gayi.

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fone line shuru karne se thik pehle JCP Singh ne 1 meeting bulai jisme Professor Dixit,Divya,Ajit samet lagbhag crime brach ke sabhi afsar maujood the.

"..van hume mil gayi hai magar koi surag nahi.jo bhi jankari abhi tak us van ke bare me hai,vo ye hai ki use 1 second-hand car dealer se kharida gaya tha.1 team abhi us dealer ke paas ja rahi hai.dekhte hain us se kya pata chalta hai magar..",DCP Verma bolte hue professor se mukhatib hue,"..to humari sari umeede is waqt is baat pe tiki hain ki vo kidnappers humse contact karen & fir hum baatchit ke zariye bachche ko vapas lane ki koshish karen.

professor ko jhallahat ho rahi thi,is zara si baat ke liye use bungle se yaha bulaya gaya tha...nahi baat kuchh aur thi..bugs to lage the fir & kya karna chah rahe the ye ..haan!vo muskuraya,"maine pehle bhi kaha hai ki main puri koshish karunga basharte meri baato ko aaplog maane.",professor kursi se uth khada hua,"..ab bura na mane to main fone line shuru hone se pehle bungle pe pahunch thoda aaram karna chahta hu kyuki mujhe nahi lagta uske baad mujhe aaram ka zara bhi mauka milega.",professor ne sabko namaste kiya & furti se vaha se nikal gaya.uske peechhe divya & Namit Bhatt joki 1 bikul naya afsar tha lagbhag bhagte hue vaha se nikle.

bungle pe pahunchte hie professor seedha apne kamre me gaya & use band kar liya.vo apne kapde badalne laga magar uski nigahen kamre ki deewaro ko tatol rahi thi & kuchh palo bada unhone use dhoond hi liya jiski unhe talash thi.kamre ki 1 deewar pe 1 lamp laga tha joki jalta nahi tha.us lamp ke holder ke lakdi ke fame me professor ko chhota sa surakh dikha & vo samajh gaya ki yehi pe khufiya camera laga hai.vo man hi man hansa..1 taraf to use bulate hain kaam karne ke liye dusri taraf unhe khud hi uspe bharosa nahi!itne dimaghdar log & aisi bevkufi!professor hansta hua bathroom me ghus gaya.bungle ke basement me baithi police ki team joki us footage ko crime branch me bane control room tak pahuncha rahi thi ne jab professor ko hanste hue dekha to yehi socha ki kis pagal ko aisa nazuk kaam pakda diya unke afsaro ne!

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--51

गतान्क से आगे............-

"साहब,अब मैं क्या जानू..",वो किसान झल्ला गया,"..1 तो मेरा नुकसान हो गया उपर से आप मुझपे ही शक़ कर रहे हैं."

"भाई,तो तुम्हारे खेत मे,तुम्हारे झोंपड़े मे ऐसी महँगी गाड़ी जलेगी तो हम क्या तुम्हारे पड़ोसी से पुछेन्गे!",पोलिसेवाले ने भी उसी के अंदाज़ मे जवाब दिया.

"तो मैं आपको खुद क्यू खबर देता साहब इसके बारे मे?",अब पोलीस वाला खामोश था.वैसे भी उसके दिमाग़ मे कुच्छ चल रहा था.कल ही जसजीत प्रधान का बेटा किडनॅप हुआ था & पोलीस को आज तड़के वो वॅन भी मिल गयी थी जिसकी वो तलाश कर रहे थे मगर कल देर रात वाइर्ले से ये खबर भी आई थी कि किडनॅपिंग की जगह से उस वॅन के अलावा 2 और भारी गाडिया भी निकली थी जैसे कोई सुव.

"हूँ.",उसने अपने रिजिस्टर पे कुच्छ लिखा & अपनी जीप की ओर बढ़ गया.

"पेट्रोल 756 टू कंट्रोल रूम..",अपने जीप के वाइर्ले को उसने हाथो मे लिया.

"कंट्रोल रूम,बोलिए 756.."

"मेरी पोज़िशन है..",& उस पोलिसेवाले ने सारी जानकारी कंट्रोल रूम को दे दी.

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दीप्ति अरशद की गोद मे बैठी उसे चूम रही थी.अरशद के हाथ तो उसकी टाइट जीन्स मे कसी गंद से जैसे चिपक ही गये थे!दोनो बेसमेंट मे अनीश के कमरे के बाहर पहरे पे थे.तभी दोनो के कानो मे किसी के रोने की आवाज़ आई.

"लगता है उठ गया.",दोनो के होंठ जुदा हुए & अरशद ने जल्दी से अपना मास्क पहन लिया.अरशद ने 1 वाइटबोर्ड उठाया & कमरे का दरवाज़ा खोल अंदर दाखिल हुआ & उस वाइट बोर्ड को दीवार से टीका के उसपे ब्लॅक मार्कर से लिखने लगा.

"घबराव मत.तुम बस यहा थोड़े दिन रहोगे.वो बाल्टी तुम्हारे टाय्लेट के लिए है.",अनीश रोना छोड़ बोर्ड पढ़ने लगा.उसने देखा 1 प्लास्टिक की बाल्टी वही रखी थी,"वो पानी की बॉटल मे पीने का पानी है.थोड़ी देर मे तुम्हे खाना मिलेगा.",जब अरशद ने देखा कि अनीश ने सब पढ़ लिया है तो उसने बोर्ड उठाया & बाहर चला गया.

अनीश ने सुबक्ते हुए पानी पिया.वो बच्चा था मगर इतना भी छ्होटा नही कि ये ना समझे कि उसे अगवा कर लिया गया है.पानी पीते ही उसे पेशाब लगा & उसने पहले बंद दरवाज़े को देखा.दरवाज़े मे 1 छ्होटा सा स्लॉट जैसा बना था लेकिन वाहा से अभी कोई देख नही रहा था.उसने पॅंट खोली & बाल्टी मे पेशाब करने लगा.उस स्लॉट मे लगे काले शीशे के दूसरे तरफ से अरशद सब देख रहा था.

उसे थोड़ा बुरा लगा अनीश के मासूम चेहरे को देख के मगर यही उसका काम था.वो वाहा से घुमा तो देखा कि दीप्ति 1 ट्रे लेके आ रही है.उसने उस से ट्रे लिया & दरवाज़ा खोल वापस अंदर गया.गद्दे पे बैठा बहुत सहमा अनीश उसे देख रहा था.उसने ट्रे अनीश के पास रखी & उसकी बाल्टी उठाके बाहर गया फिर 1 दूसरी बाल्टी अंदर रखी & साथ मे पानी की 1 भरी बॉटल भी.वो दरवाज़े के पास आया & बोर्ड उठाके उसपे लिखा,"खा लो.",& उसे अनीश को दिखा के फिर से दरवाज़ा बंद कर दिया.

अनीश ने ट्रे पे से कवर उठाया तो गरम खाने की खुश्बू उसकी नाक से टकराई.ट्रे मे 1 हॉर्लिक्स का मग,मक्खन लगे टोस्ट,2 उबले अंडे,2 गुलाब जामुन,4 स्लाइस फ्रूट केक & 1 सेब रखा था.खाना देखते ही अनीश की भूख जाग गयी.उसे उम्मीद नही थी कि ये बुरे लोग उसे इतना बढ़िया खाना देंगे.

"थॅंक यू.",उसने दरवाज़े की ओर देखा & नाश्ता करने लगा.उस मासूम ने अपने क़ैद करने वालो की गुलामी मंज़ूर कर ली थी.

स्लॉट के शीशे से झँकते अरशद & दीप्ति को कुच्छ ग़लत लग रहा था मगर दोनो ने अपने दिल का एहसास अपने साथी से नही बाँटा & जब 1 दूसरे की ओर देखा तो मुस्कुरा दिए.अरशद ने अपनी महबूबा को बाहो मे भरा & कुर्सी पे बैठ उसे अपनी गोद मे बिठा लिया & दोनो 1 बार फिर 1 दूसरे के नाज़ुक अंगो से खेलने लगे.

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"ऊव्ववव...क्या करते हैं?..छ्चोड़िए ना...हाईईइ..मेरा ब्लाउस तो दीजिए...उन..हुंग....!",नीना का 1 शर्मीली,च्छुईमुई होने का नाटक भैया जी को पागल किए जा रहा था.चुदाई के बाद उसने अपना ब्रा पहन ब्लाउस डालने की कोशिश की तो भैया जी ने ब्लाउस को छ्चीन लिया था & 1 बार फिर उसके ब्रा को नीचे करने लगे थे.

"बहुत देर हो गयी है..ओह्ह्ह्ह..!",वो उसकी चूचियो को चूस रहे थे.नीना का दिल तो कर रहा था कि अभी और थोड़ी देर अपने इस नये प्रेमी की हर्कतो का लुत्फ़ उठाए मगर अब सच मे देर हो चुकी थी & फिर थोड़ा सा तड़पाना भी तो ज़रूरी था तभी तो भैया जी उसके काबू मे रहते.

उसने उनके सर को अपने सीने से अलग किया,"फिर तो मिलूंगी ना!",उसने उनके गालो पे प्यार से चूमा,"..थोड़ा तो सब्र रखिए.",वो बिस्तर से उतर गयी & अपने कपड़े पहनने लगी.भैया जी को भी काम था.वो बिस्तर पे लेटे-2 अपने लंड को सहलाते हुए उस हसीना को कपड़े पहनते देखने लगे.

नीना ने उन्हे देखते पाया तो शर्मा के उनकी ओर पीठ कर ली & अपने ब्लाउस को बाहो मे डालने लगी.ऐसा करने से उसकी मस्त गंद भैया जी की निगाहो के सामने आ गयी.भैया जी ने तय कर लिया था कि नीना को वो अपनी रानी बना के रखेंगे & इसकी जो भी कीमत अदा करनी पड़े करेंगे.उन्होने अपना मोबाइल उठाया & 1 नंबर मिलाया.

"मैं जो कहता हू करो..उसे मैं समझा लूँगा.....कोई बात नही..उसे शाम को मेरे पास भेज देना..हां..नमस्कार.",नीना उनकी बातो को समझने की कोशिश करती हुई सारी कमर मे अटका रही थी की उन्होने उसे पीछे से बाहो मे भर लिया.

"तुम्हार काम हो गया,जानेमन!",उन्होने उसके पेट को दबाते हुए उसके बाए कान पे काटा तो नीना चिहुनक उठी,"..अब तुम्हारा पति बद्डल से ज़रूर जीतेगा."

"मगर 1 मुश्किल तो अभी भी है.",नीना घूमी.उसके चेहरे पे परेशानी साफ झलक रही थी.भैया जी के सीने के बालो से खेलते हुए उसने चेहरा नीचे कर लिया.

"कैसी मुश्किल मेरी रानी?",भैया जी ने उसकी ठुड्डी पकड़ उसका चेहरा उपर किया.

"मुकुल जीत भी गया तो क्या होगा सरकार तो जेठ जी की ही बनेगी.वो उसे कभी भी आगे नही बढ़ने देंगे.",मायूस नीना भैया जी को & भी प्यारी लगी.उन्होने उसे अपने आगोश मे भर लिया & उसके सर को चूम लिया.

"नही जीतेगा,नीना.",उन्होने अपना पाजामा उठा के उसमे पैर डाले तो नीना ने उनके हाथो से डोरी ले उसे बाँध दिया.उसकी इस हरकत से भैया जी और खुश हो गये.

"लेकिन कैसे?",नीना ने उनके जिस्म को बाहो मे बाँधा & उनके सीने पे सर टिका के उपर देखा.

"वो तुम मुझपे छ्चोड़ दो.",उन्होने अपना कुर्ता पहना & नीना के साथ बाहर आ गये.खाली हॉल मे वो काफ़ी देर उसे बाहो मे भींच चूमते रहे & उसके नाज़ुक अंगो को कपड़ो के उपर से ही छेड़ते रहे.

"अब बस कीजिए ना!",नीना उनके आगोश से निकल घर से बाहर आ गयी & अपनी कार मे बैठ गयी & एंजिन स्टार्ट किया.

"मैं रात 12 बजे फोन करूँगा."

"ओके.",नीना ने कार गियर मे डाली & वाहा से निकल गयी.

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ठीक 10 बजे सवेरे से सारे न्यूज़ चॅनेल्स पे प्रोफेसर का कहे मुताबिक फोन नंबर फ्लश होना शुरू हुआ & एंकर्स जसजीत प्रधान की ओर से 1 अपील पढ़ने लगे,"..अनीश प्रधान जिनके भी पास है वो इस नंबर पे फोन कर के अपनी माँग बताएँ.प्रधान जी यकीन दिलाते हैं कि उनकी माँगे पूरी करने की हर मुमकिन कोशिश करेंगे.उनकी दरखास्त है कि अनीश को कोई नुकसान ना पहुचाया जाए & स्क्रीन पे आ रहे नंबर पे बात करें.उस नंबर पे आनी वाली कॉल्स की जानकारी गुप्त रहेगी & कॉल करने वाले को कोई नुकसान नही पहुचाया जाएगा.ये भरोसा प्रधान जी उन्हे देना चाहते हैं.."

उसके 1 घंटे बाद तक तो कुच्छ नही हुआ मगर फिर 11 बजे से जो वो फोन बजना शुरू हुआ तो फिर रात के 12 बजे तक बजता ही रहा.उसकी दसो लाइन्स की सभी ऑपरेटर्स का बुरा हाल था.लगता था मानो पूरा डेवाले जानता था कि अनीश कहा है बस पोलीस को ही नही पता था!प्रोफेसर बंगल मे बैठा हर काल गौर से सुनता था & जैसे ही उसे लगता था कि काम की कॉल है वो अपना फोन उठा के कॉलर से बात करता था.पूरे दिन मे प्रोफेसर ने 15 बार अपना फोन उठाया मगर किसी भी बार असली किडनॅपर्स ने फोन नही किया था.

खबर मिलते ही दिव्या अजीत के साथ डेवाले के बाहर उस खेत मे जा पहुँची थी जहा वो जली हुई सुव मिली थी.प्रोफेसर के साथ नामित भट्ट बैठा था.फोरेन्सिक लॅब वाले इलाक़े की छनबीन कर चुके थे & उनके हाथ कुच्छ नही लगा था.जली हुई कार के ढाँचे को उठाके उन्ही के लॅब ले जाने की तैय्यारि हो रही थी.

"अंजलि प्रधान ने कहा था कि उस लड़के ने अनीश को कार से खींच के उसके मुँह पे अपना हाथ दबाया & फिर वॅन की ओर भागा फिर और लोग आ गये & उन्होने बच्चे को सुव मे खींच लिया & दोनो गाड़िया वाहा से निकल गयी.",अजीत जली कार को 1 रिकवरी ट्रक से बँधे जाता देख रहा था.

"कुच्छ गड़बड़ लगती है ना अजीत कि उस लड़के का चेहरा वाहा अंजलि,कॉंप्लेक्स के गार्ड & 1-2 लोगो ने देखा मगर वो 2 लोग चेहरा ढँके हुए थे."

"हूँ....यार ऐसे किडनॅप कौन करेगा?"

"मुझे कुच्छ और ही लगता है."

"क्या?"

"मुझे लगता है कि वो लड़का अनीश को किडनॅप कर रहा था जब किसी और ने उसे उस से छ्चीन लिया."

"यानी कि 2 लोग या 2 ग्रूप 1 ही बच्चे को शिकार करने 1 ही दिन 1 ही वक़्त पे आए थे?",अजीत हैरत से बोला.

"हां."

"दिव्या,ये बड़ी नामुमकिन सी बात लगती है."

"तो तुम्ही बताओ कि क्या हुआ होगा?"

"मेरी कुच्छ समझ मे नही आया.मैं तो बस ये चाहता हू कि 1 बार किडनॅपर्स कॉंटॅक्ट कर लें फिर कुच्छ तो रास्ता समझ मे आ ही जाएगा."

"मेरी बात मानो अजीत..",दिव्या जीप मे बैठ गयी तो अजीत ड्राइविंग सीट पे आ बैठा "कार स्टार्ट की,"..अगर कुच्छ ऐसा हुआ हो जो मुमकिन नही लगता तब नामुमकिन ही हुआ होगा."

"वाउ!राइटर के साथ रह के तुम भी राइटर जैसे बात करने लगी.",गाड़ी चलाता अजीत हंसा.अजीत ने मज़ाक किया था मगर दिव्या के चेहरे पे शर्म की लाली फैल गयी..क्या सचमुच प्रोफेसर दीक्षित का असर उसपे होने लगा था?..वो खिड़की से बाहर देखने लगी.उसे पता नही था पर उसके होंठो पे हल्की सी मुस्कान खेलने लगी थी.

अजीत ने देखा & उस पल अजीत समझ गया कि उसकी प्रेमिका प्रोफेसर के प्यार पे पड़ चुकी है.उसे बुरा लगा & प्रोफेसर से जलन भी हुई मगर अगले ही पल उसने खुद को संभाल लिया..आख़िर दिव्या उसकी बीवी नही थी की उसे केवल उसके साथ ही रिश्ता रखना था!उसने फिर से अपनी प्रेमिका को देखा & उसके हुस्न ने उसके दिल के सोए अरमानो को जगा दिया.वो सवेरे 6 बजे घर गया था & कुच्छ देर सोने के बाद 10 बजे के पहले वापस दफ़्तर आ गया था.अभी यहा आने से पहले भी उसे काफ़ी नींद आ रही थी मगर अब ऐसा कुच्छ नही था.

उसने जीप 1 पगडंडी पे उतार दी,"इधर कहा जा रहे हो?",उसने जीप पेड़ो के झुर्मूते के पीछे रोकी & दिव्या को बाहो मे खींच लिया & उसके चेहरे पे किस्सस की बौछार कर दी.

"पागल हो गये हो अजीत!",दिव्या छट-पटाई मगर उस से चिपकी रही,"..यहा कोई भी आ सकता है..ऊन्न्ह्ह..",अजीत ने उसकी कमीज़ उठाके उसकी पीठ & कमर को सहलाना शुरू कर दिया था & उसके गले को चूम रहा था.

"बस 1 बार करने दो दिव्या फिर ना जाने कब मौका मिले!",अजीत ने हाथ आगे लाके उसके शर्ट के बटन्स खोलने चाहे तो दिव्या ने उसके हाथ पकड़ लिए & आगे बढ़ उसके होंठो पे चूम लिया.कुच्छ देर तक वो उसकी ज़ुबान से अपनी ज़ुबान लड़ाती रही.

"अजीत,अभी नही.समझने की कोशिश करो.ना ये जगह ठीक है ना मौका.हम जल्द ही मिलेंगे.हूँ?",अजीत ने हाँ मे सर हिलाया & 1 बार फिर अपनी महबूबा को चूमा & फिर गाड़ी स्टार्ट कर वापस डेवाले की ओर मोड़ दी.

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"ये देखा तुमने ए?",बालू ने टीवी की ओर इशारा किया.सभी साथ बैठे टीवी देख रहे थे & सभी ने दस्ताने पहन रखे थे.अरशद की सख़्त हिदायत थी कि अपने कमरे & बाथरूम को छ्चोड़ & खाते वक़्त हर वक़्त सभी को दस्ताने पहनने थे ताकि काम ख़त्म होने के बाद जाने से पहले उंगलियो के निशान मिटाने मे उन्हे ज़्यादा तकलीफ़ ना हो.

अरशद ने केवल हां मे सर हिलाया.

"तो उसने तो हमने कहा था कि किडनॅप करने के बाद हम 1 दिन इंतेज़ार करेंगे & फिर बच्चे के घर पे उसके बाप को फोन करेंगे फिरौती के लिए मगर अब क्या करना है?"

"बच्चा क्या कर रहा है ई?"

"सो रहा है."

"मुझे शाम 5 बजे उस से मिलना है.देखता हू क्या बोलता है.सबने खाना खा लिया?",सभी ने हां मे जवाब दिया,"..ठीक है..अभी बेसमेंट मे बी & डी बैठ जाएँगे.मैं ई & सी आराम कर लेते हैं.2 घंटे बाद ई & सी की ड्यूटी होगी,बी & डी आराम करेंगे & मैं उस से मिलने जाऊँगा.",अरशद उठा & अपने कमरे मे चला गया.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--51

gataank se aage............-

"Sahab,ab main kya janu..",vo kisan jhalla gaya,"..1 to mera nuksan ho gaya upar se aap mujhpe hi shaq kar rahe hain."

"bhai,to tumhare khet me,tumhare jhonpde me aisi mehangi gadi jalegi to hum kya tumhare padosi se puchhenge!",policevale ne bhi usi ke andaz me jawab diya.

"to main aapko khud kyu khabar deta sahab iske bare me?",ab policevala khamosh tha.vaise bhi uske dimagh me kuchh chal raha tha.kal hi Jasjit Pradhan ka beta kidnap hua tha & police ko aaj tadke vo van bhi nil gayi thi jiski vo talash kar rahe the magar kal der raat wireless se ye khabar bhi aayi thi ki kidnapping ki jagah se us van ke alawe 2 aur bhari gadiya bhi nikli thi jaise koi SUV.

"hun.",usne apne register pe kuchh likha & apni jeep ki or badh gaya.

"patrol 756 to control room..",apne jeep ke wireless ko usne hatho me liya.

"control room,boliye 756.."

"meri position hai..",& us policevale ne sari jankari control room ko de di.

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Dipti Arshad ke god me baithi use choom rahi thi.arshad ke hath to uski tight jeans me kasi gand se jaise chipak hi gaye the!dono basement me Anish ke kamre ke bahar pehre pe the.tabhi dono ke kano me kisi ke rone ki aavaz aayi.

"lagta hai uth gaya.",dono ke honth juda hue & arshad ne jaldi se apna mask pehan liya.arshad ne 1 whiteboard uthaya & kamre ka darwaza khol andar dakhil hua & us white board ko deewar se tika ke uspe black marker se likhne laga.

"GHABRAO MAT.TUM BAS YAHA THODE DIN RAHOGE.VO BALTI TUMHARE TOILET KE LIYE HAI.",anish rona chhod board padhne laga.usne dekha 1 plastic ki balti vahi rakhi thi,"VO PANI KI BOTTLE ME PINE KA PANI HAI.THODI DER ME TUMHE KHANA MILEGA.",jab arshad ne dekha ki anish ne sab padh liya hai to usne board uthaya & bahar chala gaya.

anish ne subakte hue pani piya.vo bachcha tha magar itna bhi chhota nahi ki ye na samjhe ki use agwa kar liya gaya hai.pani pite hi use peshab laga & usne pehle band darwaze ko dekha.darwaze me 1 chhota sa slot jaisa bana tha lekin vaha se abhi koi dekh nahi raha tha.usne pant kholi & balti me peshab karne laga.us slot me lage kale shishe ke dusre taraf se arshad sab dekh raha tha.

use thoda bura laga anish ke masoom chehre ko dekh ke magar yehi uska kaam tha.vo vaha se ghuma to dekha ki dipti 1 tray leke aa rahi hai.usne us se tray liya & darwaza khol vapas andar gaya.gadde pe baitha bahut sehma anish use dekh raha tha.usne tray anish ke paas rakhi & uski balti uthake bahar gaya fir 1 dusri balti andar rakhi & sath me pani ki 1 bhari bottle bhi.vo darwaze ke paas aaya & board uthake uspe likha,"KHA LO.",& use anish ko dikhake fir se darwaza band kar diya.

anish ne tray pe se cover uthaya to garam khane ki khushbu uski naak se takrayi.tray me 1 horlicks ka mug,makkhan lage toast,2 uble ande,2 gulab jamun,4 slice fruit cake & 1 seb rakha tha.khana dekhte hi anish ki bhukh jag gayi.use umeed nahi thi ki ye bure log use itna badhiya khana denge.

"thank you.",usne darwaze ki or dekha & nashta karne laga.us masoom ne apne qaid karne walo ki ghulami manzoor kar li thi.

slot ke shishe se jhankte arshad & dipti ko kuchh galat lag raha tha magar dono ne apne dil ka ehsas apne sathi se nahi banta & jab 1 dusre ki or dekha to muskura diye.arshad ne apni mehbooba ko baaho me bhara & kursi pe baith use apni god me bitha liya & dono 1 baar fir 1 dusre ke nazuk ango se khelne lage.

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"oowwww...kya krte hain?..chhodiye na...haiiii..mera blouse to dijiye...un..hunh....!",Nina ka 1 sharmili,chhuimui hone ka natak Bhaiya ji ko pagal kiye ja raha tha.chudai ke baad usne apna bra pehan blouse dalne ki koshish ki to bhaiya ji ne blouse ko chheen liya tha & 1 baar fir uske bra ko neeche karne lage the.

"bahut der ho gayi hai..ohhhh..!",vo uski chhatiyo ko chus rahe the.nina ka dil to kar raha tha ki abhi aur thodi der apne is naye premi ki harkato ka lutf uthaye magar ab sach me der ho chuki thi & fir thoda sa tadpana bhi to zaruri tha tabhi to bhaiya ji uske kabu me rehte.

usne unke sar ko apne seene se alag kiya,"fir to milungi na!",usne unke gaalo pe pyar se chuma,"..thoda to sabr rakhiye.",vo bistar se utar gayi & apne kapde pehanane lagi.bhaiya ji ko bhi kaam tha.vo bistar pe lete-2 apne lund ko sehlate hue us haseena ko kapde pehante dekhne lage.

nina ne unhe dekhte paya to sharma ke unki or pith kar li & apne blouse ko baaho me dalne lagi.aisa krne se uski mast gand bhaiya ji ki nigaho ke samne aa gayi.bhaiya ji ne tay kar liya tha ki nina ko vo apni rani bana ke rakhenge & iski jo bhi keemat ada karni pade karenge.unhone apna mobile uthaya & 1 number milaya.

"main jo kehta hu karo..use main samjha lunga.....koi baat nahi..use sham ko mere paas bhej dena..haan..namaskar.",nina unki baato ko samjhne ki koshish karti hui sari kamar me atka rahi thi ki unhone use peechhe se baaho me bhar liya.

"tumhar kaam ho gaya,janeman!",unhone uske pet ko dabate hue uske baye kaan pe kata to nina chihunk uthi,"..ab tumhara pati Baddal se zarur jeetega."

"magar 1 mushkil to abhi bhi hai.",nina ghumi.uske chehre pe pareshani saaf jhalak rahi thi.bhaiya ji ke seene ke baalo se khelte hue usne chehra neeche kar liya.

"kaisi mushkil meri rani?",bhiya ji ne uski thuddi pakad uska chehra upar kiya.

"Mukul jeet bhi gaya to kya hoga sarkar to jeth ji ki hi banegi.vo use kabhi bhi aage nahi badhne denge.",mayus nina bhaiya ji ko & bhi payri lagi.unhone use apne agosh me bhar liya & uske sar ko chum liya.

"nahi jeetega,nina.",unhone apna pajama utha ke usme pair dale to nina ne unke hatho se dori le use bandh diya.uski is harkat se bhaiya ji aur khush ho gaye.

"lekin kaise?",nina ne unke jism ko baaho me bandha & unke seene pe sar tika ke upar dekha.

"vo tum mujhpe chhod do.",unhone apna kurta pehna & nina ke sath bahar aa gaye.khali hall me vo kafi der use baaho me bhinch chumte rahe & uske nazuk ango ko kapdo ke upar se hi chhedte rahe.

"ab bas kijiye na!",nina unke agosh se nikal ghar se bahar aa gayi & apni car me baith gayi & engine start kiya.

"main raat 12 baje fone karunga."

"ok.",nina ne car gear me dali & vaha se nikal gayi.

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thik 10 baje savere se sare news channels pe professor ka kahe mutabik fone number flash hona shuru hua & anchors Jasjit Pradhan ki or se 1 appeal padhne lage,"..Anish Pradhan jinke bhi paas hai vo is number pe fone kar ke apni mang batayen.pradhan ji yakin dilate hain ki unki mange puri karne ki har mumkin koshish karenge.unki darkhast hai ki anish ko koi nuksan na pahuchaya jaye & screen pe aa rahe number pe baat karen.us number pe aani vali calls ki jankari gupt rahegi & call karne vale ko koi nuksan nahi pahuchaya jayega.ye bharosa pradhan ji unhe dena chahte hain.."

uske 1 ghante baad tak to kuchh nahi hua magar fir 11 baje se jo vo fone bajna shuru hua to fir raat ke 12 baje tak bajta hi raha.uski daso lines ki sabhi operators ka bura haal tha.lagta tha mano pura Devalay janta tha ki anish kaha hai bas police ko hi nahi pata tha!professor bungle me baitha har caal gaur se sunta tha & jaise hi use lagta tha ki kaam ki call hai vo apna fone utha ke caller se baat karta tha.pure din me professor ne 15 baar apna fone uthaya magar kisi bhi baar asli kidnappers ne fone nahi kiya tha.

Khabar milte hi Divya Ajit ke sath Devalay ke bahar us khet me ja pahunchi thi jaha vo jali hui SUV mili thi.professor ke sath Namit Bhatt baitha tha.forensic lab vale ilake ki chhanbeen kar chuke the & unke hath kuchh nahi laga tha.jali hui car ke dhanche ko uthake unhi ke lab le jane ki taiyyari ho rahi thi.

"Anjali Pradhan ne kaha tha ki us ladke ne Anish ko car se khinch ke uske munh pe apna hath dabaya & fir van ki or bhaga fir aur log aa gaye & unhone bachche ko SUV me khinch liya & dono gaadiya vaha se nikal gayi.",ajit jali car ko 1 recovery truck se bandhe jata dekh raha tha.

"kuchh gadbad lagti hai na ajit ki us ladke ka chehra vaha anjali,complex ke guard & 1-2 logo ne dekha magar vo 2 log chehra dhanke hue the."

"hun....yaar aise kidnap kaun karega?"

"mujhe kuchh aur hi lagta hai."

"kya?"

"mujhe lagta hai ki vo ladka anish ko kidnap kar raha tha jab kisi aur ne use us se chheen liya."

"yani ki 2 log ya 2 group 1 hi bachche ko shikar karne 1 hi din 1 hi waqt pe aaye the?",ajit hairat se bola.

"haan."

"divya,ye badi namumkin si baat lagti hai."

"to tumhi batao ki kya hua hoga?"

"meri kuchh samajh me nahi aaya.main to bas ye chahta hu ki 1 baar kidnappers contact kar len fir kuchh to rasta samajh me aa hi jayega."

"meri baat mano ajit..",divya jeep me baith gayi to ajit driving seat pe aa baitha "car start ki,"..agar kuchh aisa hua ho jo mumkin nahi lagta tab namumkin hi hua hoga."

"wow!writer ke sath reh ke tum bhi writer jaise baat karne lagi.",gadi chalata ajit hansa.ajit ne mazak kiya tha magar divya ke chehre pe sharm ki lali fail gayi..kya sachmuch Professor Dixit ka asar uspe hone laga tha?..vo khidki se bahar dekhne lagi.use pata nahi tha par uske hotho pe halki si muskan khelne lagi thi.

ajit ne dekha & us pal ajit samajh gaya ki uski premika professor ke pyar pe pad chuki hai.use bura laga & professor se jalan bhi hui magar agle hi pal usne khud ko sambhal liya..aakhir divya uski biwi nahi thi ki use keval uske sath hi rishta rakhna tha!usne fir se apni premika ko dekha & uske husn ne uske dil ke soye armano ko jaga diya.vo savere 6 baje ghar gaya tha & kuchh der sone ke baad 10 baje ke pehle vapas daftar aa gaya tha.abhi yaha aane se pehle bhi use kafi nind aa rahi thi magar ab aisa kuchh nahi tha.

usne jeep 1 pagdandi pe utar di,"idhar kaha ja rahe ho?",usne jeep pedo ke jhurmute ke peechhe roki & divya ko baaho me khinch liya & uske chehre pe kisses ki bauchhar kar di.

"pagal ho gaye ho ajit!",divya chhatpatayi magar us se chipki rahi,"..yaha koi bhi aa sakta hai..oonnhh..",ajit ne uski kamiz uthake uski pith & kamar ko sehlana shuru kar diya tha & uske gale ko chum raha tha.

"bas 1 baar karne do divya fir na jane kab mauka mile!",ajit ne hath aage lake uske shirt ke buttons kholne chahe to divya ne uske hath pakad liye & aage badh uske hotho pe chum liya.kuchh der tak vo uski zuban se apni zuban ladati rahi.

"ajit,abhi nahi.samajhne ki koshish karo.na ye jagah thik hai na mauka.hum jald hi milenge.hun?",ajit ne haan me sar hilaya & 1 baar fir apni mehbooba ko chuma & fir gadi start kar vapas Devalay ki or mod di.

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"ye dekha tumne A?",Balu ne tv ki or ishara kiya.sabhi sath baithe tv dekh rahe the & sabhi ne dastane pehan rakhe the.Arshad ki sakht hidayat thi ki apne kamre & bathroom ko chhod & khate waqt har waqt sabhi ko dastane pehanane the taki kaam khatm hone ke baad jane se pehle ungliyo ke nishan mitane me unhe zyada taklif na ho.

arshad ne keval haan me sar hilaya.

"to usne to hume kaha tha ki kidnap karne ke baad hum 1 din intezar karenge & fir bachche ke ghar pe uske baap ko fone karenge firauti ke liye magar ab kya karna hai?"

"bachcha kya kar raha hai E?"

"so raha hai."

"mujhe sham 5 baje us se milna hai.dekhta hu kya bolta hai.sabne khana kha liya?",sabhi ne haan me jawab diya,"..thik hai..abhi basement me B & D baith jayenge.main E & C aaram kar lete hain.2 ghante baad E & C ki duty hogi,B & D aaram karenge & main us se milne jaoonga.",arshad utha & apne kamre me chala gaya.

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--52

गतान्क से आगे............-

"सीयेम साहब,अब जसजीत प्रधान अपने बच्चे की फ़िक्र मे डूबा रहेगा..",अवस्थी ने मधुकर अत्रे को ड्रिंक बना के दी,"..& आप बड़े आराम से अपनी पोज़िशन & मज़बूत कर सकते हैं."

"बात तो सही है अवस्थी जी.",अत्रे ने 1 घूँट भरा,"..बस बच्चा चुनाव के बाद मिले ताकि प्रधान अपने प्रचार पे बिल्कुल भी ध्यान ना दे पाए."

"अब ये तो आप ही के हाथ मे है,सर.",अवस्थी की बात पे दोनो हँसने लगे & शराब के घूँट भरने लगे.

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अजीत ने दिव्या को लोहिया पार्क के बुंगले पे छ्चोड़ा & घर की ओर बढ़ गया.दिव्या की कही बात उसके दिमाग़ मे अभी भी घूम रही थी....क्या ऐसा इत्तेफ़ाक़ हो सकता है कि 2 लोग 1 ही दिन,1 ही समय पे 1 ही बच्चे को अगवा करना चाहें?..चलो मान लिया ऐसा ही हुआ है तो क्या जिसने अनीश को अगवा किया क्या उसे उस लड़के के बारे मे पता था..वो लड़का तो पक्का नौसीखिया था..1 आम जेबकतरा भी उस से ज़्यादा अच्छी प्लॅनिंग करता!..लेकिन पता चला कैसे जबकि वो लड़का तो ऐसा लगता है कि अकेला काम कर रहा था....पोलीस इंटेलिजेन्स का कहना है कि उन्हे इस बाबत कुच्छ नही पता था मगर उस डिपार्टमेंट का हेड तो सीयेम के काफ़ी करीब है..

दिमाग़ मे ये ख़याल कौंधते ही अजीत का विश्वास & मज़बूत हो गया कि हो ना हो ये काम सीयेम का ही किया-कराया है.उसने तय कर लिया कि वो अब इस मामले की तह तक जा के रहेगा.

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अरशद डेवाले के सरोजिनी पार्क मे खड़ा था.काफ़ी बड़े इलाक़े मे फैले ये पार्क काफ़ी खूबसूरत था & शाम के वक़्त प्रेमी जोड़ो के अलावा मा-बाप के साथ बच्चे & सैर करने वाले बूज़रगो से भरा रहता था.अरशद के चेहरे पे नक़ली दाढ़ी & मूँछ थी & आँखो पे चश्मा.पार्क मे 1 आर्टिफिशियल झील भी बनी थी जिसमे बत्तखें भी थी.ये बत्तखें झील के 1 किनारे पे इकट्ठी रहती थी जहा पे लोग उन्हे डबल रोटी खिलाते थे.अरशद ने भी ब्रेड खरीदी & बत्तखो को खिलाने लगा.

"काम अच्छा किया.",उसके बगल मे 1 40-45 बरस का फ्रेंच कट दाढ़ी वाला 5'3" कद का शख्स भी बत्तखो को खाना दे रहा था.

"थॅंक्स.",अरशद ने दबी आआज़ मे जवाब दिया.दोनो इतनी सफाई से दबी आवाज़ मे बात कर रहे थे कि वाहा मुजूद और लोगो को उनकी बात चीत का पता भी ना चला,"मगर ये फोन नंबर वाला क्या चक्कर है?",अरशद ने ब्रेड के आख़िरी टुकड़े पन्छियो को डाले & हाथ झाड़ने लगा.

"हूँ..थोड़ा तफ़सील से बात करनी होगी.",उस शख्स ने भी ब्रेड डालना बंद किया & वाहा से निकल जाके 1 बेंच पे बैठ गया.अरशद उस बेंच की पीठ से लगी दूसरी बेंच पे उसकी ओर पीठ कर के बैठ गया.

"हालात थोड़ा बदल गये हैं.फोन नंबर का मतलब है इन्होने किसी पेशेवर को हमसे डील करने के लिए लगाया है."

"पेशेवर?"

'हाँ.साउत अमेरिका के देशो मे तो किडनॅपिंग बहुत बड़ी इंडस्ट्री है & वाहा ऐसे मामलो मे शिकार के परिवार वाले ऐसे प्रोफेशनल्स को लाते हैं जो किडनॅपर्स से डील करते हैं.अब तुम्हे ये करना है कि कल के बजाय परसो फोन करो & सीधा उस पेशेवर शख्स से बात करने को कहे.माँगे वही रहेंगी जो पहले थी.अगली मुलाकात फोन करने के अगले दिन होगी.और कुच्छ?"

"नही.",दोनो अलग-2 रस्तो से वाहा से निकल लिए.अगर अजीत वाहा मौजूद होता तो उस फ्रेंच कट दाढ़ी वाले को फ़ौरन गिरफ्तार कर लेता क्यूकी वो कोई और नही वही हथियारो का सौदागर था.

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रात 12 बजे प्रोफेसर दीक्षित बंगल के हॉल मे उठ खड़ा हुआ,अच्छा भाई,गुड नाइट.",दिव्या & नामित ने उसे जवाब दिया & वो भी अपने-2 कमरो मे चले गये.नामित ने ताज़ा-2 पोलीस फोर्स जाय्न की थी & बिल्कुल जोश से भरा हुआ था & प्रोफेसर की हर बात सुन तुरंत काम करने लगता था.

प्रोफेसर कमरे मे गया & कपड़े बदले फिर उसने बत्तिया बुझाई & खिड़कियो के पर्दे बराबर किए & बिस्तर पे लेट गया.

"चलो भाई,काम ख़त्म हुआ.",बुंगले के बेसमेंट मे बैठे दोनो पोलीस वालो ने मॉनिटर से आँखे हटाई & अपने हेडफोन उतारे.वैसे भी उनकी शिफ्ट ख़त्म ही होने वाली थी & रात की शिफ्ट वाले बंदे आने वाले थे.प्रोफेसर ने दिन मे ही ये भाँप लिया था कि 12-12 घंटो की 2 शिफ्ट्स मे बेसमेंट मे काम हो रहा है.उसने 12 बजे 1 कार को गेट पे रुकते देखा था.उसमे से 2 आदमी उतरे थे जिन्होने गार्ड से बात की फिर प्रोफेसर के साथ लगाया गया 1 कॉन्स्टेबल उस कार मे बैठ के चला गया मगर वो 2 आदमी उसके साथ नही लौटे.उपरी मंज़िल पे चाइ की चुस्की लेते प्रोफेसर ने सब देखा & अंदाज़ लगा लिया.

ठीक 12.10 पे रात की शिफ्ट के बंदे आके बैठ गये.नाइट विजन कॅमरा भी बहुत सॉफ नही दिखा रहा था पर कमरे के एसी की आवाज़ & प्रोफेसर की नींद मे ली जा रही सांसो की आवाज़ बग्स से सॉफ सुनाई दे रही थी.1 बजे जब नाइट ड्यूटी वालो ने ताश की गद्दी निकाली & ये कह के खेलना शुरू किया कि यार ये कोई मुजरिम तो है नही & ना ही अभी तक किडनॅपर्स का फोन आया है कि ये कुच्छ च्छुपाएगा तो हम क्यू बोर हों!ताश खेलते हैं.

ठीक उसी वक़्त प्रोफेसर उठा & कमेरे पे पहले अपनी कमीज़ डाली & फिर कमरे के बग्स की पवर सप्लाइ काट दी.5 मिनिट बाद दिव्या उसके कमरे मे दाखिल हुई & बिस्तर पे आ उसके साथ चादर के अंदर घुस गयी.प्रोफेसर के जिस्म पे हाथ फिराते ही उसे पता चल गया कि उसका महबूब उसके इंतेज़ार मे पूरी तैय्यारि के साथ लेटा था.उसके जिस्म पे 1 भी कपड़ा नही था.

दिव्या प्रोफेसर के बाई तरफ उस से सॅट के करवट से लेट गयी & बाया हाथ उसके सीने से लेके पेट तक फिराया,"इतनी देर से क्यू आने को कहा था?",उसके बाए कान मे जीभ फिराते हुए वो फुसफुसाई.

"ताकि तुम्हे फुसफुसाना ना पड़े.",प्रोफेसर का दाया हाथ उसकी नाइटी को उठा अंदर घुसा & उसकी छातियो से खेलने लगा.दिव्या ने अपने होंठ अपने प्रेमी के होंठो से लगा दिए.प्रोफेसर ने किस तोड़ने के बाद उसकी नाइटी निकाली & उसे बाते की कैसे उसने बग्स & कैमरे को बेकार कर दिया है.

"आज तो कोई फोन नही आया,अजिंक्या.",अपनी चूचियो को चूस्ते प्रोफेसर के बालो मे उसने अपनी उंगलिया फिराते हुए मज़े मे आँखे बंद कर ली.

"आज तो आना भी नही था.",प्रोफेसर का दाया हाथ उसकी चूत से जा लगा.

"उम्म्म्म....मतलब.",प्रोफेसर की उंगली ने जैसे ही उसकी चूत को कुरेदना शुरू किया दिव्या ने हल्के से अपनी कमर हिलाई.

"ऐसे मामलो मे फोन कभी 1 दिन बाद आता है,कभी 4 तो कभी 7..",प्रोफेसर उसकी मोटी चूचियों को बारी-2 से चूस रहा था,"..किडनॅपर्स शिकार के परिवार को बिल्कुल कमज़ोर कर देना चाहते हैं ताकि वो उनकी माँग मान ले & उसके बाद भी अगवा हुआ इंसान कब मिलेगा ये भी तभी पक्का होता है जब किडनॅपर्स को अपने ना पकड़े जाने का बिल्कुल यकीन हो जाए..",प्रोफेसर उसकी चूचियो को छ्चोड़ उसके पेट से होता हुआ उसकी चूत पे पहुँचा तो दिव्या ने थोड़ा बाए घूमते हुए उसके तगड़े लंड को अपने मुँह मे भर लिया,"..ये मामले लंबे खिंचते हैं.कभी 10-15 दिन तो कभी महीनो....ओह्ह्ह्ह..!",दिव्या ने उसके नड़ो को मुँह मे भर बहुत ज़ोर से चूस लिया था.प्रोफेसर ने भी अब केस की बातें छ्चोड़ी & पूरी तरह से दिव्या के उपर आ अपना मुँह उसकी चूत से लगाया & अपने लंड से उसका मुँह भर दिया.

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"क्या कर रही हो जानेमन?",भैया जी का फोन देख नीना मुस्कुराइ थी & सोते हुए मुकुल के बगल से उठ दूसरे कमरे मे जाके दरवाज़ा बंद कर बिस्तर पे लेट गयी थी.

"आप..?",उसने थोड़ा घबराने का नाटक किया.

"मैने कहा था ना जानेमन 12 बजे फोन करूँगा."

"हां..पर.."

"क्या हुआ?तुम्हारा पति वही है क्या?"

"हां."

"जगा है."

"नही.सो रहे हैं."

"तो फिर घबरा क्यू रही हो?बात करो ना!"

"नही,अभी नही..कही वो जाग गये तो ग़ज़ब हो जाएगा.",नीना ने फिर डरने का नाटक किया & भैया जी का लंड बिल्कुल तन गया.उन्होने उसे सहला के शांत किया.

"नही जागेगा जानेमन.तुम्हारे जैसी हसीना के होते वो सो रहा है..ऐसा बेवकूफ़ इंसान अभी नही जागेगा.वो छ्चोड़ो ये बताओ क्या कर रही थी?सोने से पहले उसने तुम्हे चोदा था क्या?"

"धत!",नीना ने शरमाने का नाटक किया.उसका दिल तो कर रहा था कि पेट पकड़ के ज़ोर-2 से हँसे.भैया जी जैसा आदमी भी वासना मे ऐसा बेवकूफ़ हो सकता था,उसे तो पता ही नही था!

"क्या हुआ?"

"कैसी बातें करते हैं?"

"तो क्या तुम चुदाई नही करती.आज दिन मे ही तो मेरा लंड तुम्हारी चूत मे था."

"ओफ्फो..मैं नही बात करती आपसे..कैसी गंदी बाते कर रहे हैं?"

"ये गंदी बाते हैं जानेमन मगर दिन मे तो तुम्हे काफ़ी मज़ा आया था."

"वो नही..आप जो अभी बोल रहे थे..वो लफ्ज़..छीयियी..!",अब तो भैया जी का लंड बिल्कुल बेचैन हो गया.नीना का शरमाना उन्हे बिल्कुल असली लगता था & दिन की चुदाई & उसकी अदाएँ याद आते ही उन्होने लंड को मज़बूती से पकड़ा & हिलाने लगे.

"क्यू?..तुम नही बोलती..ये सब..तुम्हारा पति नही बोलता ऐसे..तो तुम क्या बोलती हो..अपनी चूत को बताओ..!"

"प्लीज़..ऐसी बाते करेंगे तो मैं फोन काट दूँगी!"

"अच्छा बाबा नही करूँगा..चलो ये बताओ कल कितने बजे आ रही हो?",नीना ने तय कर लिया था कि अब वो कम से कम 3 दिन भैया जी से नही मिलेगी तो उसने बहाना बनाया.

"बलदेव जी,कल तो मैं नही मिल सकती.आप तो मेरे घर की हालत जानते ही हैं इस वक़्त.कल बहुत काम है..1 बार शॉपिंग भी जाना है फिर मेरे बेटे ने 1 स्कूल प्ले मे भाग ले लिया है तो उसकी कॉस्ट्यूम लेने कल होटेल महरजा मे 1 स्टोर है,वाहा जाना होगा..तो कल तो मुमकिन नही हो पाएगा.परसो देखेंगे."

"ठीक है..जैसा तुम कहो मगर इस वक़्त तो मेरी प्यास बुझा दो.दिल करता है तुम्हारी चूत मे अभी अपना लंड घुसा दूँ & सुबह तक चोद्ता रहू तुम्हे..!"

"ओफ्फो..आप फिर से वही सब बोलने लगे!",इस बार नीना की आवाज़ मे भैया जी को मस्ती की खनक भी सुनाई दी.

"तुम्हे देख के अब कुच्छ और बोलने का जी नही करता,मेरी रानी.तुम भी सोचो की मेरा लंड तुम्हारी चूत मे है....कैसा लग रहा है तुम्हे?",भैया जी ज़ोर-2 से लंड हिला रहे थे.

"अरे..लगता है उनकी नींद खुल गयी है..कल बात करेंगे..बाइ!",उसने फोन काट दिया & भैया जी तड़प्ते रह गये.नीना का हंसते-2 बुरा हाल था.उसने तो सपने मे भी नही सोचा था कि भैया जी को बुद्धू बनाना इतना आसान होगा.

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"सर,उस वॅन की फिंगरप्रिंट रिपोर्ट्स आ गयी हैं.",अजीत डीसीपी वेर्मा के कॅबिन मे दाखिल हुआ.

"किसी से मॅच करती हैं?"

"यस सर.",अजीत ने कुच्छ काग़ज़ अपने बॉस को थमाए,"..वरुण अवस्थी नाम का 1 लड़का था जोकि अभी-2 सज़ा काट के बाहर आया है.ये है उसकी डीटेल्स."

"गुड,अजीत.इसके पास तो वजह भी है प्रधान के बेटे को किडनॅप करने की."

"सर,अभी यहा आते हुए मैने उस कार डीलर को वरुण अवस्थी की तस्वीर भी दिखाई थी & उसने भी उसे पहचान लिया."

"ग्रेट!चलो,कुच्छ तो सुराग मिला.",दकप वेर्मा पिच्छले 3 दिनो मे पहली बार मुस्कुराए.

"मगर सर इस लड़के से तो बच्चे को और 2 लोगो ने ले लिया था."

"इसी के साथी होंगे वो?"

"सर,आपको दिव्या ने कुच्छ नही कहा?"

"नही.",अजीत ने उन्हे दिव्या की कही बात बताई.

"हूँ..",वेर्मा साहब सोच मे पड़ गये,"..उसकी बात भी ठीक लगती है & फिर इस लड़के ने खुद को छिपाने की कोशिश क्यू नही की?..खैर जो भी हो..अजीत इस लड़के को हमे अपनी हिरासत मे लेना ही है.उसी से कुच्छ आगे का सुराग मिल सकता है.इसकी फोटो सारे थानो मे सर्क्युलेट करवा दो & हां ..पोलीस आर्टिस्ट से इसके हुलिया बदलने के पासिबल स्केचस भी बनवा लेना."

"सर.",अजीत ने काग़ज़ उठाए & उनके हुक्म की तामील करने चला गया.

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महाराजा होटेल 1 5 स्टार होटेल था जिसकी लॉबी के साथ ही कुच्छ स्टोर्स बने थे.नीना उन्ही मे से 1 से श्लोक की कॉस्ट्यूम खरीद के निकली ही थी कि किसी ने उसका रास्ता रोक लिया.

"नमस्ते.",भैया जी उसके सामने मुस्कुराते खड़े थे.नीना चौक गयी थी.

"ना-नमस्ते..आप यहाँ?'

"जहाँ आप वाहा हम.",भैया जी धीरे से बोले & उसे लिफ्ट्स की ओर ले जाने लगे,"आइए."

"कहा ले जा रहे हैं?",नीना ने धीरे से कहा,"आज नही,प्लीज़.",लिफ्ट आ गयी & भैया जी उसे अंदर ले गये.लिफ्ट खाली थी.नीना ने आज कत्थई रंग की साड़ी & स्लीव्ले ब्लाउस पहना था जिसका गला & बॅक काफ़ी गहरे थे.भैया जी ने लिफ्ट मे दाखिल होते ही उसे बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे को चूमने लगे.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--52

gataank se aage............-

"CM sahab,ab Jasjit Pradhan apne bachche ki fikr me dooba rahega..",Awasthi ne Madhukar Atre ko drink bana ke di,"..& aap bade aaram se apni position & mazbut kar sakte hain."

"baat to sahi hai awasthi ji.",atre ne 1 ghunt bhara,"..bas bachcha chunav ke baad mile taki pradhan apne prachar pe bilkul bhi dhyan na de paye."

"ab ye to aap hi ke hath me hai,sir.",awasthi ki baat pe dono hansne lage & sharab ke ghunt bharne lage.

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Ajit ne Divya ko Lohia Park ke bungle pe chhoda & ghar ki or badh gaya.divya ki kahi baat uske dimagh me abhi bhi ghum rahi thi....kya aisa ittefaq ho sakta hai ki 2 log 1 hi din,1 hi samay pe 1 hi bachche ko agwa karna chahen?..chalo maan liya aisa hi hua hai to kya jisne Anish ko agwa kiya kya use us ladke ke bare me pata tha..vo ladka to pakka nausikhiya tha..1 aam jebkatra bhi us se zyada achhi planning karta!..lekin pata chala kaise jabki vo ladka to aisa lagta hai ki akela kaam kar raha tha....police intelligence ka kehna hia ki unhe is babat kuchh nahi pata tha magar us department ka head to CM ke kafi karib hai..

dimagh me ye khayal kaundhate hi ajit ka vishwas & mazbut ho gaya ki ho na ho ye kaam CM ka hi kiya-karaya hai.usne tay kar liya ki vo ab is mamle ki teh tak ja ke rahega.

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Arshad Devalay ke Sarojini Park me khada tha.kafi bade ilake me faile ye park kafi khubsurat tha & sham ke waqt premi jodo ke alawa maa-baap ke sath bachche & sair karne vale buzrugo se bhara rehta tha.arshad ke chehre pe naqli dadhi & moonchh thi & aankho pe chashma.park me 1 artificial jhil bhi bani thi jisme battakhen bhi thi.ye battakhen jhil ke 1 kinare pe ikkathi rehti thi jaha pe log unhe double roti khilate the.arshad ne bhi bread kharidi & battakho ko khilane laga.

"kaam achha kiya.",uske bagal me 1 40-45 baras ka french cut dadhi vala 5'3" kad ka shakhs bhi battakho ko khana de raha tha.

"thanx.",arshad ne dabi aaaz me jawab diya.dono itni safai se dabi aavaz me baat kar rahe the ki vaha mujood aur logo ko unki baat chit ka pata bhi na chala,"magar ye fone number vala kya chakkar hai?",arshad ne bread ke aakhiri tukde panchhiyo ko dale & hath jhaadne laga.

"hun..thoda tafsil se baat karni hogi.",us shakhs ne bhi bread dalna band kiya & vaha se nikal jake 1 bench pe baith gaya.arshad us bench ki pith se lagi dusri bench pe uski or pith kar ke baith gaya.

"halaat thoda badal gaye hain.fone number ka matlab hai inhone kisi peshevar ko humse deal karne ke liye lagaya hai."

"peshevar?"

'haan.South America ke desho me to kidnapping bahut badi industry hai & vaha ise mamlo me shikar ke parivar vale aise professionals ko laate hain jo kidnappers se deal karte hain.ab tumhe ye karna hai ki kal ke bajay parso fone karo & seedha us peshevar shakhs se baat karne ko kahe.maange vahi rahengi jo pehle thi.agli mulakat fone karne ke agle din hogi.aur kuchh?"

"nahi.",dono alag-2 rasto se vaha se nikal liye.agar ajit vaha maujood hota to us french cut dadhi vale ko fauran giraftar kar leta kyuki vo koi aur nahi vahi hathyaro ka saudagar tha.

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raat 12 baje Professor Dixit bungle ke hall me uth khada hua,achha bhai,good night.",divya & Namit ne use jawab diya & vo bhi apne-2 kamro me chale gaye.namit ne taza-2 police force join ki thi & bilkul josh se bhara hua tha & professor ki har baat sun turant kaam karne lagta tha.

professor kamre me gaya & kapde badle fir usne battiya bujhayi & khidkiyo ke parde barabar kiye & bsitar pe let gaya.

"chalo bhai,kaam khatm hua.",bungle ke basement me baithe dono police valo ne monitor se aankhe hatayi & apne headphone utare.vaise bhi unki shift khatm hi hone wali thi & raat ki shift vale bande aane vale the.professor ne din me hi ye bhanp liya tha ki 12-12 ghanto ki 2 shifts me basement me kaam ho raha hai.usne 12 baje 1 car ko gate pe rukte dekha tha.usme se 2 aadmi utre the jinhone guard se baat ki fir professor ke sath lagaya gaya 1 constable us car me baith ke chala gaya magar vo 2 aadmi uske sath nahi laute.upri manzil pe chai ki chuski lete professor ne sab dekha & andaz laga liya.

thik 12.10 pe raat ki shift ke bande aake baith gaye.night vision camera bhi bahut saaf nahi dikha raha tha par kamre ke AC ki aavaz & professor ki nind me li ja rahi sanso ki aavaz bugs se saaf sunai de rahi thi.1 baje jab night duty valo ne tash ki gaddi nikali & ye keh ke khelna shuru kiya ki yaar ye koi mujrim to hai nahi & naa hi abhi tak kidnappers ka fone aaya hai ki ye kuchh chhupayega to hum kyu bore hon!tash khelte hain.

thik usi waqt professor utha & camere pe pehle apni kamiz dali & fir kamnre ke bugs ki power supply kaat di.5 minute baad divya uske kamre me dakhil hui & bistar pe aa uske sath chadar ke andar ghus gayi.professor ke jism pe hath firate hi use pata chal gaya ki uska mehboob uske intezar me puri taiyyari ke sath leta tha.uske jism pe 1 bhi kapda nahi tha.

divya professor ke bayi taraf us se sat ke karwat se let gayi & baya hath uske seene se leke pet tak firaya,"itni der se kyu aane ko kaha tha?",uske baaye kaan me jibh firate hue vo phusphusayi.

"taki tumhe phusphusana na pade.",professor ka daya hath uski nighty ko utha andar ghusa & uski chhatiyo se khelne laga.divya ne apne honth apne premi ke hotho se laga diye.professor ne kiss todne ke baa uski nighty nikali & use batay ki kaise usne bugs & camere ko bekar kar diya hai.

"aaj to koi fone nahi aaya,Ajinkya.",apni chhatiyo ko chuste professor ke balo me usne apni ungliya firate hue maze me aankhe band kar li.

"aaj to aana bhi nahi tha.",professor ka daya hath uski chut se ja laga.

"ummmm....matlab.",professor ki ungli ne jaise hi uski chut ko kuredna shuru kiya divya ne halke se apni kamar hilayi.

"aise mamlo me fone kabhi 1 din baad aata hai,kabhi 4 to kabhi 7..",professor uski moti chhatiyo ko bari-2 se chus raha tha,"..kidnappers shikar ke parivar ko bilkul kamzor kar dena chahte hain taki vo unki mang maan le & uske baad bhi agwa hua insan kab milega ye bhi tabhi pakka hota hai jab kidnappers ko apne na pakde jane ka bilkul yakin ho jaye..",professor uski choochiyo ko chhod uske pet se hota hua uski chut pe pahuncha to divya ne thoda baye ghumte hue uske tagde lund ko apne munh me bhar liya,"..ye mamle lumbe khinchte hain.kabhi 10-15 din to kabhi mahino....ohhhh..!",divya ne uske nado ko munh me bhar bahut zor se chus liya tha.professor ne bhi ab case ki baaten chhodi & puri tarah se divya ke upar aa apna munh uski chut se lagaya & apne lund se uska munh bhar diya.

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"kya kar rahi ho janeman?",Bhaiya ji ka fone dekh Nina muskurayi thi & sote hue Mukul ke bagal se uth dusre kamre me jake darwaza band kar bistar pe let gayi thi.

"aap..?",usne thoda ghabrane ka natak kiya.

"maine kaha tha na janeman 12 baje fone karunga."

"haan..par.."

"kya hua?tumhara pati vahi hai kya?"

"haan."

"jaga hai."

"nahi.so rahe hain."

"to fir ghabra kyu rahi ho?baat karo na!"

"nahi,abhi nahi..kahi vo jag gaye to gazab ho jayega.",nina ne fir darne ka natak kiya & bhaiya ji ka lund bilkul tan gaya.unhone use sehla ke shant kiya.

"nahi jagega janeman.tumhare jaisi haseena ke hote vo so raha hai..aisa bevkuf insan abhi nahi jagega.vo chhodo ye batao kya kar rahi thi?sone se pehle usne tumhe choda tha kya?"

"dhat!",nina ne sharmane ka natak kiya.uska dil to kar raha tha ki pet pakad ke zor-2 se hanse.bhaiya ji jaisa aadmi bhi vasna me aisa bevkuf ho sakta tha,use to pata hi nahi tha!

"kya hua?"

"kaisi baaten karte hain?"

"to kya tum chudai nahi karti.aaj din me hi to mera lund tumhari chut me tha."

"offoh..main nahi baat karti aapse..kaisi gandi baate kar rahe hain?"

"ye gandi baate hain janeman magar din me to tumhe kafi maza aaya tha."

"vo nahi..aap jo abhi bol rahe the..vo lafz..chhiii..!",ab to bhaiya ji ka lund bilkul bechain ho gaya.nina ka sharmana unhe bilkul asli lagta tha & din ki chudai & uski adayen yaad aate hi unhone lund ko mazbuti se pakda & hilane lage.

"kyu?..tum nahi bolti..ye sab..tumhara pati nahi bolta aise..to tum kya bolti ho..apni chut ko batao..!"

"please..aisi baate karenge to main fone kaat dungi!"

"achha baba nahi karunga..chalo ye batao kal kitne baje aa rahi ho?",nina ne tay kar liya tha ki ab vo kam se kam 3 din bhaiya ji se nahi milegi to usne bahana banaya.

"baldev ji,kal to main nahi mil sakti.aap to mere ghar ki halat jante hi hain is waqt.kal bahut kaam hai..1 baar shopping bhi jana hai fir mere bete ne 1 school playe me bhag le liya hai to uski costume lene kal Hotel Mahraja me 1 store hai,vaha jana hoga..to kal to mumkin nahi ho payega.parso dekhenge."

"thik hai..jaisa tum kaho magar is waqt to meri pyas bujha do.dil karta hai tumhari chut me abhi apna lund ghusa doon & subah tak chodta rahu tumhe..!"

"offoh..aap fir se vahi sab bolne lage!",is baar nina ki aavaz me bhaiya ji ko masti ki khanak bhi sunai di.

"tumhe dekh ke ab kuchh aur bolne ka ji nahi karta,meri rani.tum bhi socho ki mera lund tumhari chut me hai....kaisa lag raha hai tumhe?",bhaiya ji zor-2 se lund hila rahe the.

"are..lagta hai unki nind khul gayi hai..kal baat krenge..bye!",usne fone kaat diya & bhaiya ji tadapte reh gaye.nina ka hanste-2 bura haal tha.usne to sapne me bhi nahi socha tha ki bhaiya ji ko buddhu banana itna aasan hoga.

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"sir,us van ki fingerprint reports aa gayi hain.",ajit DCP Verma ke cabin me dakhil hua.

"kisi se match karti hain?"

"yes sir.",ajit ne kuchh kagaz apne boss ko thamaye,"..Varun Awasthi naam ka 1 ladka tha joki abhi-2 saza kaat ke bahar aaya hai.ye hai uski details."

"good,ajit.iske paas to vajah bhi hai pradhan ke bete ko kidnap karne ki."

"sir,abhi yaha aate hue maine us car dealer ko varun awasthi ki tasvir bhi dikhayi thi & usne bhi use pehchan liya."

"great!chalo,kuchh to surag mila.",DCP verma pichhle 3 dino me pehli baar muskuraye.

"magar sir is ladke se to bachche ko aur 2 logo ne le liya tha."

"isi ke sathi honge vo?"

"sir,aapko divya ne kuchh nahi kaha?"

"nahi.",ajit ne unhe divya ki kahi baat batayi.

"hun..",verma sahab soch me pad gaye,"..uski baat bhi thik lagti hai & fir is ladke ne khud ko chhipane ki koshish kyu nahi ki?..khair jo bhi ho..ajit is ladke ko hume apni hirassat me lena hi hai.usi se kuchh aage ka surag mil sakta hai.iski foto sare thano me circulate karwa do & haan ..police artist se iske huliya badalne ke possible sketches bhi banwa lena."

"sir.",ajit ne kagaz uthaye & unke hukm ki taamil karne chala gaya.

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maharaja hotel 1 5 star hotel tha jiski lobby ke sath hi kuchh stores bane the.nina unhi me se 1 se Shlok ki costume kharid ke nikli hi thi ki kisi ne uska rasta rok liya.

"namaste.",bhaiya ji uske samne muskurate khade the.nina chauk gayi thi.

"na-namaste..aap yahan?'

"jahan aap vaha hum.",bhaiya ji dhire se bole & use lifts ki or le jane lage,"aaiye."

"kaha le ja rahe hain?",nina ne dhire se kaha,"aaj nahi,please.",lift aa gayi & bhaiya ji use andar le gaye.lift khali thi.nina ne aaj katthai rang ki sari & sleeveless blouse pehna tha jiska gala & back kafi gehre the.bhaiya ji ne lift me dakhil hote hi use baaho me bhar liya & uske chehre ko chumne lage.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--53

गतान्क से आगे............-

"छ्चोड़िए ना..प्लीज़....आहह..कोई आ जाएगा....ऊहह..नही..आज नही..मुझे देर हो जाएगी..ऊव्व..!",भैया जी उसे बाहो मे भरे पागलो की तरह चूम रहे थे.उनके हाथ नीना की लगभग नंगी पीठ पे चल रहे थे & होंठ उसके खूबसूरत चेहरे पे.तभी लिफ्ट का बीपेर बजा तो दोनो अलग हो गये.

तीसरी मंज़िल पे 1 वेटर चढ़ा & दोनो के आगे खड़ा हो गया.भैया जी नीना की गंद सहलाने लगे तो नीना ने घबराते हुए अर्ज़ी भरी निगाहो से उन्हे देखा.दिल ही दिल मे उसे बहुत अच्छा आ रहा था.भीया जी ने इस तरह होटेल आके उसे चौंका दिया था मगर अब उसे इस खेल मे बहुत मज़ा आ रहा था.

वेटर पाँचवी मंज़िल पे निकल गया तो भैया जी ने उसे फिर से दबोच लिया.छटी मंज़िल पे वो उसे लिफ्ट से बाहर ले आए & गलियारे मे आगे बढ़ने लगे,"प्लीज़ बलदेव जी..जाने दीजिए ना..!"

"बस थोड़ी देर की ही तो बात है,नीना.",भैया जी उसे गलियारे के आख़िर मे ले गये जहा 2 लिफ्ट्स थी.उन्होने बटन दबाया तो लिफ्ट खुल गयी.अंदर जाते ही उन्होने नीना को फिर से बाहो मे भर लिया & उसके होंठो को चूमने लगे.हाथो मे पॅकेट होने की वजह से नीना उन्हे अपने से अलग नही कर पा रही थी.

भैया जी की आतुर ज़ुबान उसके नर्म होंठो को मना रही थी की वो अपनी हया छ्चोड़ें & उसे अंदर आने दें ताकि वो उसकी ज़ुबान से मिल सके.नीना की ना-नुकर के बावजूद उन्होने उसके होंठो को मना ही लिया & उनके खुलते ही नीना की नर्म ज़ुबान को अपनी ज़ुबान से छेड़ने लगे.

तभी बीपेर बजा & दरवाज़ा खुल गया तो नीना घबरा के उनसे छिटकने लगी मगर उन्होने उसे जकड़े ही रहा & लिफ्ट से बाहर आए.लिफ्ट सीधा ए2 माले पे 1 प्राइवेट सूयीट मे खुली थी जहा दाखिल होते ही भैया जी ने उसके हाथो के बोझ को हल्का किया & उसे अपने सीने से लगा लिया.

उसकी मांसल कमर को मसल्ते हुए को उसके गुलाबी होंठो का रस पीने लगे,"उम्म..प्लीज़ समझिए ना!देर हो जाएगी तो मैं क्या जवाब दूँगी?",सैय्यद की क़ैद मे फँसी बुलबुल के जैसी नर्म आवाज़ मे बोलती नीना भैया जी के जोश को पल-2 बढ़ा रही थी.

"मेरी जान..",उन्होने उसके गाल चूमे,"..मेरी रानी..",उसकी ठुड्डी को चूमा,"..बेफ़िक्र रहो..तुम्हे क्या लगता है कि तुम्हे ख़तरे मे डाल मैं तुम्हे खोने की बेवकूफी करूँगा!कभी नही..बस सारी बदगुमानी भूल इस लम्हे का लुत्फ़ उठाओ & मुझे अपने हुस्न मे डूब जाने दो."

भैया जी ने उसकी कमर को सहलाते हुए उसकी गर्दन चूमते हुए उसके ब्लाउस से झाँक रहे बड़े से क्लीवेज पे जैसे ही होंठ रखे नीना उनसे छिटक के दूर जाने लगी की तभी जैसे किसी चीज़ ने उसे रोका.उसने गर्दन घुमाई तो देखा कि भैया जी के हाथो मे उसका आँचल है.

"छ्चोड़िए ना!",नीना उनकी ओर घूमी & दाए हाथ से आँचल को पकड़ के खींचा.उसका बाया हाथ उसकी सारी से ढँकी चूत के बिल्कुल उपर था.भैया जी ने उसे सर से पाँव तक निहारा,मस्ती से तमतमाया उसका चेहरा उन्हे शर्म से लाल लगा,सॅटिन के स्लीव्ले ब्लाउस से छलक रही उसकी छातियो को देख के उन्होने अपनी ज़ुबान को होंठो पे फिराया & जब उसके चिकने पेट पे उसकी गोल नाभि के नीचे उसका छ्होटा सा गोरा हाथ उसकी चूत पे रखा दिखा तो उनके कदम खुद बा खुद उसकी ओर बढ़ गये.

नीना की साँसे तेज़ हो गयी & उसका सीना बड़े ही पूर्कशिष अंदाज़ मे लहरो की तरह हिलोरे लेने लगा.उसने नज़रे नीची कर ली.भैया जी उसके आँचल को समेटते हुए उसके करीब आ रहे थे.उसके नज़दीक आ उन्होने बाए हाथ मे उसका आँचल को थामा दाया हाथ पकड़ा तो आँचल फर्श पे गिर गया.उन्होने दाए हाथ से नीना की ठुड्डी उपर की तो नीना ने शर्म का नाटक करते हुए आँखे बंद ही रखी.

भैया जी ने उसके आँचल को खींचा तो नीना को मजबूरन आगे आना पड़ा & उसका जिस्म अपने प्रेमी से सॅट गया.पेट पे उनके मोटे लंड का कडपन महसूस करते ही उसकी चूत कसमसाने लगी.भैया जी ने नीना की ठोडी थाम उसके होंठो को चूमना शुरू किया.उनका हाथ सरक के नीचे आया & उसकी कमर को लपेट वो उसे बड़ी शिद्दत के साथ चूमने लगे.इस बार नीना ने उनका साथ दिया & उनकी जीभ का थोड़ी गर्मजोशी के साथ इस्तेक्बाल किया.

उसकी इस हरकत से भैया जी खुशी से पागल हो उठे & उन्होने उसकी कमर मे अटकी सारी को निकालने की कोशिश की तो नीना ने उन्हे परे धकेला & उनकी ओर पीठ कर खड़ी हो गयी.भैया जी ने उसे पीछे से थाम लिया & उसके पेट को सहलाने लगे & उसकी गर्दन पे दाई तरफ चूमने लगे.नीना ने उनके हाथो पे अपने हाथ रख दिए मानो उन्हे रोकने की कोशिश कर रही हो.

भैया जी उसकी नाभि को कुरेदने लगे तो उसने दबी-2 आहें भरनी शुरू कर दी.भैया जी समझ गये कि अब वो मस्त हो रही है.उन्होने काफ़ी देर तक उसके पेट के साथ खिलवाड़ किया.नीना अब उनके जिस्म से अड़ के खड़ी थी & हाथ पीछे ले जा उनके बालो & चेहरे को सहला रही थी.उसकी मदहोशी का फ़ायदा उठाके भैया जी ने फ़ौरन उसकी कमर मे हाथ डाल उसकी सारी को निकाल दिया.नीना जैसे नींद से जागी & छिटक के थोड़ी दूर पर्दे के पास जा खड़ी हुई & भैया जी की तरफ शर्म,खुमारी & बनावटी गुस्से से देखा.

"क्या हुआ?",भैया जी मुस्कुराए.

"आप बड़े वो हैं..",ये घिसा-पिटा डाइलॉग बोलते वक़्त नीना ने कैसे खुद को हँसने से रोका ये वही जानती थी,"..मेरी सारी क्यू निकाली?"

"तो तुम भी हमारा कुर्ता निकाल दो.",वो उसके सामने खड़े हो गये & बाहे उपर कर दी,"लो.",नीना शर्मा के जाने लगी तो उन्होने रोक के इसरार किया.नीना ने शरमाते हुए नज़रे नीची रखते हुए उनका कुर्ता निकाल दिया.छ्होटे से कद की नीना जब पंजो पे उचक लंबे चौड़े भैया जी का कुर्ता निकाल रही थी तो उसकी छातियो को देख के ऐसा लग रहा था जैसे वो उसके ब्लाउस से निकलने को तड़प रही हैं.

कुर्ता निकलते ही भैया जी ने उसे सीने से लगा लिया & प्यार से उसकी पीठ पे हाथ फेरने लगे.उनके सीने पे हाथ जमाए नीना ने चेहरा बाई ओर घुमा गाल उनके जिस्म से सटा दिया तो भैया जी ने उसके हाथ पकड़ उन्हे अपनी कमर पे बाँधा & उसे अपने आगोश मे भर लिया.नीना ने शर्मीली लड़की के नाटक को जारी रखते हुए उनके बालो भरे चौड़े सीने मे चेहरा च्छूपा लिया.

"अब क्यू इतना शर्मा रही हो,मेरी रानी?",भैया जी ने उसके बालो को चूमा.

"तो क्या आपकी तरह बेशर्म बन जाऊं?",नीना ने उनके सीने मे चेहरा च्छुपाए हुए कहा.

"प्यार मे कैसी शर्म जानेमन!",भैया जी ने उसके पेटिकोट के हुक्स को 1 झटके मे खोला तो वो उसके कदमो के गिर्द फ्रश पे गिर गया.नीना ने सीने से सर उठाया & फिर गुस्से से देखा.

"आप समझते क्यू नही?बहुत देर हो जाएगी!",भैया जी मरून पॅंटी मे कसी उसकी गंद को दबा रहे थे.

"कोई देर-वेर नही होगी.",उन्होने उसकी पॅंटी मे हाथ घुसा के उसकी गंद को दबाया तो उसने उनके हाथ को पकड़ पॅंटी से निकाल दिया.

"सब जानती हू.1 बार शुरू हो जाएँगे तो फिर मुझे भी पागल कर देंगे!",नीना अपनी कही बात पे जैसे खुद ही शर्मा गयी & 1 बार फिर अपने आशिक़ के सीने मे चेहरा च्छूपा लिया.भैया जी हंसते हुए उसकी गंद सहलाने लगे.

उनके हाथ उपर आए & नीना के ब्लाउस & ब्रा के हुक्स खोलने लगे तो नीना ने उन्हे रोकना चाहा. वो सर झुका उसे चूमने लगे & उसके ब्लाउस & ब्रा को निकालने लगे.नीना की दाई बाँह तो उनके आगोश मे दबी थी मगर बाई को उसने मोड़ अपने कपड़ो को उतारने से रोकना चाहा तो भैया जी ने उसकी मनुहार करते हुए उसके गोरे गालो को चूमते हुए उसके क्लीवेज पे मुँह रख दिया.

चूचियो पे मर्दाने लबो की गर्माहट ने नीना के अरमानो को अब बिल्कुल जगा दिया & उसकी बाँह खुद बा खुद नीची हो गयी.भैया जी ने उसके कपड़े निकाले & उसकी चूचियो को चूमने लगे.नीना की आहे मस्त होने लगी.भैया जी ने बगल की मेज़ से 1 रिमोट उठाके उसे दबाया तो पीछे का परदा हट गया & 1 फ्लोर टू सीलिंग शीशे की दीवार दिखी जिस से बाहर का नज़ारा दिख रहा था.

नीना की पीठ उन्होने उस शीशे की दीवार से लगा दी & उसकी चूचियो को हाथो मे भर चूसने लगे.नीना के हाथ उन्हे रोकने की कोशिश करते-2 अब बेचैनी से खरोंछने लगे थे.भीया जी उसकी चूचियो को देख के अपना होश खो चुके थे & उन्हे दबा-2 के चूसे जा रहे थे.नीना बस गर्म हुए जा रही थी & अपनी गंद को शीशे पे दबाए जा रही थी.

भैया जी नीचे होते हुए उसकी नाभि चाट रहे थे.उसकी पॅंटी को हाथ लगाते ही नीना का हाथ उनका सर पे आ गया & उनके बाल खींच उठाने की कोशिश करने लगा.भैया जी ने उसकी पॅंटी ज़रा सी नीची की & उसकी चूत की दरार की बिल्कुल शुरुआत पे हल्के से चूमा.ऐसा करते ही नीना की परेशान चूत ने पानी छ्चोड़ दिया.

भैया जी ने फ़ौरन उसकी पॅंटी उतरी & झड़ती हुई नीना की चूत चाटने लगे.नीना की चूत से बह रहे पूरे रस को चाटने के बाद वो खड़े हुए & उसका हाथ अपने पाजामे पे रख दिया तो नीना ने हाथ खींच लिया & चेहरा बाई तरफ घुमा शीशे से लगा लिया.

"पकडो ना!",भैया जी ने खुद ही अपना पाजामा खोला & नीना का दाया हाथ थाम उसे लंड पे लपेट दिया & उसके दाए गाल को चूमने लगे.नीना धीरे-2 शर्म से आँखे बंद कर लंड को हिलाने लगी.भैया जी ने उसे बाहो मे भर लिया & उसके चेहरे को चूमने लगे.नीना के कोमल हाथो मे उनका लंड अब चूत मे घुसने को बेताब हो उठा.भैया जी ने नीना का हाथ लंड से हटाया & उसकी टाँगे फैलाई.

"यहा नही..",नीना ने शरमाते हुए आगे हो उनका बाया कंधा चूम लिया,"..उधर चलिए.",उसने बिस्तर की ओर इशारा किया.

"क्यू?यहा क्या बुराई है?",भैया जी ने टाँगे फैला उसकी चूत मे उंगली की.

"उम्म्म्मम.....लगता है सारा शहर हमे देख रहा है.",उसने नाटक करते हुए शीशे के पीछे दिख रहे डेवाले की ओर इशारा किया तो भैया जी हंस पड़े & उसकी दाई टांग उठा झुक के लंड उसकी चूत मे घुसा दिया.

"ऊव्वववव....आराम से कीजिए..आहह...आन्न्न्नह..उन्हुऊऊन्न्ह..!",भैया जी उसकी जाँघ थामे उसके चेहरे,होंठ & गर्दन चूमते धक्के लगाने लगे.

कुच्छ देर तो भाय्या जी नीना की दाई टांग उठाए खड़े-2 ही उसे चोद्ते रहे.नीना उनकी उपरी बाहे थामे उनसे चुद्ते हुए आहे भर रही थी.उसके बाद भैया जी ने उसकी जाँघो को थाम उसे उठा लिया & फिर खड़े हुए ही उसकी चुदाई करने लगे.नीना उनके गले के गिर्द बाहें डाले उनसे चिपटि उनके धक्को से मस्त हो हवा मे उड़ रही थी.

भैया जी को उसकी गंद को पकड़े उसे चूमते हुए झूलते हुए उसे चोदने मे बड़ा मज़ा आ रहा था.जब नीना के मुँह मे उन्होने अपनी जीभ घुसा तो जिस्म की मदहोशी से बहाल नीना ने भी बड़ी आतूरता से उनसे ज़ुबान लड़ाई.भैया जी का दिल इस बात से और मस्त हो उठा & उनके धक्के और तेज़ हो गये मगर अगले ही पल नीना की मस्ती इस कदर बढ़ गयी को वो उसे झेल नही पाई & उसने किस तोड़ दी & अपना सर उपर हवा मे उठाते हुए उनके बाल नोचते हुए उनकी बाहो मे ही उचकने लगी.

भैया जी समझ गये कि उनकी माशुका झाड़ रही है.उन्होने उसकी गर्दन से अपने तपते होंठ चिपकाए & उसे वैसे ही चोद्ते रहे.नीना जब झड़ने की खुमारी से बाहर आई तो वो उसे लेके सोफे पे बैठ गये & हाथो से उसकी गंद को पकड़ उसे उपर-नीचे करने लगे.

नीना ने फिर से शर्मीली लड़की का नक़ाब अपने चेहरे पे डाल लिया & आगे झुक के अपना चेहरा उनके दाए कंधे पे रख दिया मानो अपने प्रेमी का उसकी गंद को तोलना उसे भा तो रहा है मगर देखने मे उसे लाज आ रही है.भैया जी तो अब पूरी तरह से उसके जाल मे फँस चुके थे.उन्होने उसके गाल को चूमना शुरू कर दिया & उसी सोफे पे लेट गये.

"अब तुम चोदो हमे.",उन्होने नीना को सीधा बिठाया & उसकी चुचि मसली.जवाब मे नीना 1 हया भारी मुस्कान देते हुए उनके सीने पे झुक गयी & अपना चेहरा उनके चेहरे के दाई तरफ सटा के च्छूपा लिया.

"हिलाओ अपनी गंद.",उन्होने उसकी गंद की फांको को दबाते हुए उन्हे फैला दिया.

"मुझे शरम आती है.",नीना का नाटक जारी था.

"अपने पति के साथ ऐसे नही चुदी कभी?",भैया जी ने उसका दाया कान काटते हुए उसकी गंद की दरार पे उंगली फिराई तो नीना चिचुन्क उठी.

"उन..हुंग....वो तो बस उपर से ही करते हैं."

"कमाल है!तुम्हारे जैसी परी को वो अलग अंदाज़ मे नही चोद्ता.मैं तो तुम्हे हर रोज़ नये ढंग से चोद्ता.कभी उपर कभी नीचे..कभी आगे कभी पीछे..",उन्होने उसकी गंद के छेद मे उंगली घुसा दी तो नीना उठ बैठी & उनके उपर से हटने लगी."

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--53

gataank se aage............-

"Chhodiye na..please....aahhhh..koi aa jayega....oohhhh..nahi..aaj nahi..mujhe der ho jayegi..ooww..!",Bhaiya ji use baaho me bhare paglo ki tarah chum rahe the.unke hath nina ki lagbhag nangi pith pe chal rahe the & honth uske khubsurat chehre pe.tabhi lift ka beeper baja to dono alag ho gaye.

teesri manzil pe 1 waiter chadha & dono ke aage khada ho gaya.bhaiya ji nina ki gand sehlane lage to nina ne ghabrate hue arzi bhari nigaho se unhe dekha.dil hi dil me use bahut achha aa raha tha.bhiya ji ne is tarah hotel aake use chaunka diya tha magar ab use is khel me bahut maza aa raha tha.

waiter panchvi manzil pe nikal gaya to bhaiya ji ne use fir se daboch liya.chhathi manzil pe vo use lift se bahar le aaye & galiyare me aage badhne lage,"please Baldev ji..jane dijiye na..!"

"bas thodi der ki hi to baat hai,nina.",bhaiya ji use galiyare ke aakhir me le gaye jaha 2 lifts thi.unhone button dabaya to lift khul gayi.andar jate hi unhone nina ko fir se baaho me bhar liya & uske hotho ko chumne lage.hatho me packet hone ki vajah se nina unhe apne se alag nahi kar paa rahi thi.

bhaiya ji ki aatur zuban uske narm hotho ko mana rahi thi ki vo apni haya chhoden & use andar aane den taki vo uski zuban se mil sake.nina ki na-nukar ke bavjood unhone uske hotho ko mana hi liya & unke khulte hi nina ki narm suban ko apni zuban se chhedne lage.

tabhi beeper baja & darwaza khul gaya to nina ghabra ke unse chhitakne lagi magar unhone use jakde hi raha & lift se bahar aaye.lift seedha a2 maale pe 1 private suite me khuli thi jaha dakhil hote hi bhaiya ji ne uske hatho ke bojh ko halka kiya & use apne seene se laga liya.

uski mansala kamar ko masalte hue co uske gulabi hotho ka ras pine lage,"umm..please samajhiye na!der ho jayegi to main kya jawab dungi?",saiyyad ki qaid me phansi bulbul ke jaisi narm aavaz me bolti nina bhaiya ji ke josh ko pal-2 badha rahi thi.

"meri jaan..",unhone uske gaal chume,"..meri rani..",uski thuddi ko chuma,"..befikr raho..tumhe kya lagta hai ki tumhe khatre me daal main tumhe khone ki bevkufi karunga!kabhi nahi..bas sari badgumani bhul is lamhe ka lutf uthao & mujhe apne husn me doob jane do."

bhaiya ji ne uski kamar ko sehlate hue uski gardan chumte hue uske blouse se jhank rahe bade se cleavage pe jaise hi honth rakhe nina unse chhitak ke door jane lagi ki tabhi jaise kisi chiz ne use roka.usne gardan ghumai to dekha ki bhaiya ji ke hatho me uska aanchal hai.

"chhodiye na!",nina unki or ghumi & daye hath se aanchal ko pakad ke khincha.uska baya hath uski sari se dhanki chut ke bilkul upar tha.bhaiya ji ne use sar se panv tak nihara,masti se tamtamaya uska chehra unhe sharm se laal laga,satin ke sleeveless blouse se chhalak rahi uski chhatiyo ko dekh ke unhone apni zuban ko hotho pe firaya & jab uske chikne pet pe uski gol nabhi ke neeche uska chhota sa gora hath uski chut pe rakha dikha to unke kadam khud ba khud uski or badh gaye.

nina ki sanse tez ho gayi & uska seena bade hi purkashish andaz me lehro ki tarah hilore lene laga.usne nazre neechi kar li.bhaiya ji uske aanchal ko sametate hue uske karib aa rahe the.uske nazdik aa unhone baye hath me uska aanchal ko thama daya hath pakda to anachal farsh pe gir gaya.unhone daye hath se nina ki thuddi upar ki to nina ne sharm ka natak karte hue aankhe band hi rakhi.

bhaiya ji ne uske aanchal ko khincha to nina ko majburan aage aana pada & uska jism apne premi se sat gaya.pet pe unke mote lund ka kadapan mehsus karte hi uski chut kasmasane lagi.bhaiya ji ne nina ki thodi tham uske hotho ko chumna shuru kiya.unka hath sarak ke neeche aaya & uski kamar ko lapet vo use badi shiddat ke sath chumne lage.is baar nina ne unka sath diya & unki jibh ka thodi garmjoshi ke sath istekbal kiya.

uski is harkat se bhaiya ji khushi se pagal ho uthe & unhone uski kamar me atki sari ko nikalne ki koshish ki to nina ne unhe pare dhakela & unki or pith kar khadi ho gayi.bhaiya ji ne use peechhe se tham liya & uske pet ko sehlane lage & uski gardan pe dayi taraf chumne lage.nina ne unke hatho pe apne hath rakh diye mano unhe rokne ki koshish kar rahi ho.

bhaiya ji uski nabhi ko kuredne lage to usne dabi-2 aahen bharni shuru kar di.bhaiya ji samajh gaye ki ab vo mast ho rahi hai.unhone kafi der tak uske pet ke sath khilwad kiya.nina ab unke jism se ad ke khadi thi & hath peechhe le ja unke baalo & chehre ko sehla rahi thi.uski madhoshi ka fayda uthake bhaiya ji ne fauran uski kamar me hath daal uski sari ko nikal diya.nina jaise nind se jagi & chhitak ke thodi door parde ke paas ja khadi hui & bhaiya ji ki taraf sharm,khumari & banawati gusse se dekha.

"kya hua?",bhaiya ji muskuraye.

"aap bade vo hain..",ye ghisa-pita dialogue bolte waqt nina ne kaise khud ko hansne se roka ye vahi janti thi,"..meri sari kyu nikali?"

"to tum bhi humara kurta nikal do.",vo uske samne khade ho gaye & baahe upar kar di,"lo.",nina sharma ke jane lagi to unhone rok ke israr kiya.nina ne sharmate hue nazre neechi rakhte hue unka kurta nikal diya.chhote se kad ki nina jab panjo pe uchak lambe chaude bhaiya ji ka kurta nikaal rahi thi to uski chhatiyo ko dekh ke aisa lag raha tha jaise vo uske blouse se nikalne ko tadap rahi hain.

kurta nikalte hi bhaiya ji ne use seene se laga liya & pyar se uski pith pe hath ferne lage.unke seene pe hath jamaye nina ne chehra bayi or ghuma gaal unke jism se sata diya to bhaiya ji ne uske hath pakad unhe apni kamar pe bandha & use apne agosh me bhar liya.nina ne sharmili ladki ke natak ko jari rakhte hue unke baalo bhare chaude seene me chehra chhupa liya.

"ab kyu itna sharma rahi ho,meri rani?",bhaiya ji ne uske baalo ko chuma.

"to kya aapki tarah besharm ban jaoon?",nina ne unke seene me chehra chhupaye hue kaha.

"pyar me kaisi sharm janeman!",bhaiya ji ne uske petticaot ke hooks ko 1 jhatke me khola to vo uske kadmo ke gird frash pe gir gaya.nina ne seene se sar uthaya & fir gusse se dekha.

"aap samajhte kyu nahi?bahut der ho jayegi!",bhaiya ji maroon panty me kasi uski gand ko daba rahe the.

"koi der-wer nahi hogi.",unhone uski panty me hath ghusa ke uski gand ko dabaya to usne unke hath ko pakad panty se nikal diya.

"sab janti hu.1 baar shuru ho jayenge to fir mujhe bhi pagal kar denge!",nina apni kahi baat pe jaise khud hi sharma gayi & 1 baar fir apne aashiq ke seene me chehra chhupa liya.bhaiya ji hanste hue uski gand sehlane lage.

unke hath upar aaye & nina ke blouse & bra ke hooks kholne lage to nina ne unhe rokna chaha.vi sar jhuka use chumne lage & uske blouse & bra ko nikaalne lage.nina ne ki dayi banh to unke agosh me dabi thi magar bayi ko usne mod apne kapdo ko utarne se rokna chaha to bhaiya ji ne uski manuhar karte hue uske gore galo ko chumte hue uske cleavage pe munh rakh diya.

chhatiyo pe mardane labo ki garmahat ne nina ke armano ko ab bilkul jaga diya & uski banh khud ba khud neechi ho gayi.bhaiya ji ne uske kapde nikale & uski chhatiyo ko chumne lage.nina ki aahe mast hone lagi.bhaiya ji ne bagal ki mez se 1 remote uthake use dabaya to peechhe ka parda hat gaya & 1 floor to ceiling shishe ki deewar dikhi jis se bahar ka nazara dikh raha tha.

nina ki pith unhone us shishe ki deewar se laga di & uski choochiyo ko hatho me bhar chusne lage.nina ke hath unhe rokne ki koshish karte-2 ab bechaini se kharonchne lage the.bhiya ji uski choochiyo ko dekh ke apna hosh kho chuke the & unhe daba-2 ke chuse ja rahe the.nina bas garm hue ja rahi thi & apmni gand ko shishe pe dabaye ja rahi thi.

bhaiya ji neeche hote hue uski nabhi chaat rahe the.uski panty ko hath lagate hi nina ka hath unka sar pe aa gaya & unke baal khinch uthane ki koshish karne laga.bhaiya ji ne uski panty zara si neechi ki & uski chut ki darar ki bilkul shuruat pe halke se chuma.aisa karte hi nina ki pareshan chut ne pani chhod diya.

bhaiya ji ne fauran uski panty utari & jhadti hui nina ki chut chaatne lage.nina ki chut se beh rahe pure ras ko chaatne ke baad vo khade hue & uska hath apne pajame pe rakh diya to nina ne hath khinch liya & chehra bayi taraf ghuma shishe se laga liya.

"pakdo na!",bhaiya ji ne khud hi apna pajama khola & nina ka daya hath tham use lund pe lapet diya & uske daye gaal ko chumne lage.nina dhire-2 sharm se aankhe band kar lund ko hilane lagi.bhaiya ji ne use baaho me bhar liya & uske chehre ko chumne lage.nina ke komal hatho me unka lund ab chut me ghusne ko betab ho utha.bhaiya ji ne nina ka hath lund se hataya & uski tange failayi.

"yaha nahi..",nina ne sharmate hue aage ho unka baya kandha chum liya,"..udhar chaliye.",usne bistar ki or ishara kiya.

"kyu?yaha kya burai hai?",bhaiya ji ne tange faila uski chut me ungli ki.

"ummmmm.....lagta hai sara shehar hume dekh raha hai.",usne natak karte hue shishe ke peechhe dikh rahe Devalay ki or sihara kiya to bhaiya ji hans pade & uski dayi tang utha jhuk ke lund uski chut me ghusa diya.

"oowwwww....aaram se kijiye..aahhhh...aannnnhhhh..unhuuunnhhh..!",bhaiya ji uski jangh thame uske chehre,honth & gardan chumte dhakke lagane lage.

Kuchh der to Bhaiyya ji Nina ki dayi tang uthaye khade-2 hi use chodte rahe.Nina unki upri baahe thame unse chudte hue aahe bhar rahi thi.uske baad bhaiya ji ne uski jangho ko tham use utha liya & fir khade hue hi uski chudai karne lage.nina unke gale ke gird baahen dale unse chipti unke dhakko se mast ho hawa me ud rahi thi.

bhaiya ji ko uski gand ko pakde use chumte hue jhulate hue use chodne me bada maza aa raha tha.jab nina ke munh me unhone apni jibh ghusai to jism ki madhoshi se behal nina ne bhi badi aaturata se unse zuban ladai.bhaiya ji ka dil is baat se aur mast ho utha & unke dhakke aur tez ho gaye magar agle hi pal nina ki masti is kadar badh gayi ko vo use jhel nahi payi & usne kiss tod di & apna sar upar hawa me uthate hue unke baal nochte hue unki baaho me hi uchakne lagi.

bhaiya ji samajh gaye ki unki mashuka jhad rahi hai.unhone uski gardan se apne tapte honth chipkaye & use vaise hi chodte rahe.nina jab jhadne ki khumari se bahar aayi to vo use leke sofe pe baith gaye & hatho se uski gand ko pakad use upar-neeche karne lage.

nina ne fir se sharmili ladki ka naqab apne chehre pe daal liya & aage jhuk ke apna chehra unke daye kandhe pe rakh diya mano apne premi ka uski gand ko tolna use bha to raha hai magar dekhne me use laaj aa rahi hai.bhaiya ji to ab puri tarah se uske jaal me phans chuke the.unhone uske gaal ko chumna shuru kar diya & usi sofe pe let gaye.

"ab tum chodo hume.",unhone nina ko seedha bithaya & uski chhatiya masli.jawab me nina 1 haya bhari muskan dete hue unke seene pe jhuk gayi & apna chehra unke chehre ke dayi taraf sata ke chhupa liya.

"hilao apni gand.",unhone uski gand ki fanko ko dabate hue unhe faila diya.

"mujhe sharam aati hai.",nina ka natak jari tha.

"apne pati ke sath aise nahi chudi kabhi?",bhaiya ji ne uska daya kaan kaatate hue uski gand ki darar pe ungli firayi to nina chichunk uthi.

"un..hunh....vo to bas upar se hi karte hain."

"kamal hai!tumhare jaisi pari ko vo alag andaz me nahi chodta.main to tumhe har roz naye dhang se chodta.kabhi upar kabhi neeche..kabhi aage kabhi peechhe..",unhone uski gand ke chhed me ungli ghusa di to nina utha baithi & unke upar se hatne lagi."

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........
 
खेल खिलाड़ी का पार्ट--54

गतान्क से आगे............-

"अरे..तुम तो बुरा मान गयी!",उन्होने उसकी जंघे पकड़ उसे खुद से अलग होने से रोका,"..मैं तो बस छेड़ रहा था..चलो अब नाराज़गी छ्चोड़ो & शुरू करो..करो ना!",भैया जी के काफ़ी इसरार के बाद नीना ने अपनी कमर हिलाना शुरू किया.भैया जी आहे भरते उसकी तारीफ के कसीदे पढ़ते उसकी चूचियो से खेलने लगे.थोड़ी ही देर मे नीना की रफ़्तार बढ़ने लगी & उसकी खुमारी भी.

"उन्ह..उन्न्ह...ऊहह...आननह...!",तेज़ आहे भरते हुए वो अपने आशिक़ के लंड पे उसके सीने को मसल्ते हुए कूद रही थी.खुमारी कुच्छ और बढ़ी तो नीना सर झटकने लगी & भैया जी के सीने को खरोचने लगी.1 बार फिर वो उनके लंड से झाड़ रही थी.झाड़ते ही वो उनके सीने पे गिर गयी & लंबी- साँसे लेने लगी.भैया जी उसकी कमर को थाम नीचे से धक्के लगाने लगे.

"अब हो गया.अब जाने दीजिए ना..ऊव्ववव..!",नीना 1 बार फिर अपनी खुमारी से बाहर आई.

"अभी कैसे जानेमन!अभी तो तुम्हे & मस्त होना है.",भैया जी उचक के उसकी 1 मोटी चूची पीने लगे.

"प्लीज़..अब बहुत देर हो गयी है..मैं क्या जवाब दूँगी..आईययईई....घर पे...उफफफफफ्फ़..!",भैया जी को भी एहसास हुआ कि सच मे काफ़ी वक़्त हो गया था लेकिन वो मजबूर थे.नीना के जिस्म का उनपे अजीब सा नशा चढ़ गया था.चुनाव की वजह से वो बहुत ज़्यादा मसरूफ़ थे मगर फिर भी वो आज उस से मिलने से खुद को रोक नही पाए थे.उन्होने उसकी कमर थामते हुए उसे अपने साथ उठाया & बिस्तर पे ले गये.

अपने नीचे लिटाते हुए उन्होने उसकी चुदाई जारी रखी.जाने देने की मिन्नतो का नाटक करती नीना उनके धक्को से फिर से पागल होने लगी.इस बार उसने अपनी टाँगे उठाके उनकी कमर पे लपेट दी & बेचैनी से अपने हाथ उनकी पीठ पे चलाने लगी.भैया जी उसके मस्ती मे डूबे चेहरे को देखते हुए,चूमते हुए धक्के तेज़ कर रहे थे.उनके आंडो मे वही मीठा दर्द होने लगा जो कल भी नीना की चुदाई करते वक़्त हुआ था.उनके जिस्म मे खुशी के लहर दौड़ पड़ी & वो बहुत शदीद धक्के लगाने लगे.कमरे मे अब दोनो की आहो का शोर फैल गया.दोनो 1 दूसरे को चूम रहे थे,काट रहे थे.उनके हाथ 1 दूसरे के जिस्मो पे बेताबी से घूम रहे थे & नीना के नाख़ून उसके आशिक़ की गंद मे धँस गये थे.वो अब सूबक रही थी.

भाय्या जी ने उसकी गंद को दबोच लिया & अपना सर उठा लिया & आहे भरते हुए धक्के लगाने लगे.नीना भी सुबक्ते हुए कमर उचका रही थी की तभी वो बिस्तर से उठते हुए अपने प्रेमी से चिपक गयी & वो भी उसके उपर झटके खाते हुए झड़ने लगे.दोनो साथ-2 अपने सफ़र के अंजाम तक पहुँच गये थे.

झड़ने के थोड़ी देर बाद ही नीना ने भैया जी को अपने उपर से धकेला & करवट ले तकिये मे मुँह च्छूपा सिसकने लगी.

"अरे,क्या हो गया?",भैया जी उसकी बाँह पकड़ उसका चेहरा अपनी ओर करने की कोशिश करने लगे मगर नीना उनकी ना सुनते हुए सुबक्ते ही रही,"ओफ्फो!चुप हो जाओ,नीना.बताओ तो सही बात क्या है?",इस बार भैया जी ने उसे अपनी ओर घुमा ही लिया.

"कुच्छ नही.मुझे जाने दीजिए.",नीना बिस्तर से आँसू पोन्छ्ते उठने लगी.

"ऐसे कैसे जाने दू!",भैया जी ने नीना की बाँह पकड़ ली,"चलो,बताओ.",नीना रूठने का नाटक करती रही & कुच्छ देर बाद ही मानी.

"आपके लिए तो मैं बस 1 खिलोना हू..",नीना हाथो मे चेहरा च्छूपा सिसकने लगी,"..बस मुझसे खेल लिए.मैं जानती हू आप वो कभी नही करेंगे जिसका भरोसा आपने मुझे दिलाया है!",नीना गुस्से से बोली है.

"ऐसे क्यू सोच रही हो?",भैया जी उसके अचानक बदले रुख़ को समझ नही पा रहे थे & यही तो नीना की चाल थी.वो उन्हे हर वक़्त यू ही उलझाए रखना चाहती थी.

"कल से बस कह रहे हैं कि भैया यानी जेठ जी नही जीतेंगे मगर ऐसा नामुमकिन मुमकिन कैसे होगा ये तो बता नही रहे!"

"तुम जान के क्या करोगी!परेशान क्यू होती हो?..कहा ना हो जाएगा.",भैया जी ने उसे फिर से आगोश मे लेने की नाकाम कोशिश की.

"जाइए!छ्चोड़िए मुझे..समझूंगी कि मेरी बदक़िस्मती थी..लेकिन अब नही मिलूंगी आपसे.",नीना बिस्तर से उतरने लगी तो भैया जी ने उसे खींच के बिस्तर पे लिटा दिया.

"ये क्या हो गया है तुम्हे!",उन्होने उसके चेहरे को सहलाया.वो बहुत परेशान लग रहे थे.नीना को फिर ना च्छू पाने के ख़याल ने उन्हे पागल कर दिया था.

"अच्छा सुनो..",उन्होने उसके बाल सहलाए,"..जसजीत का बेटा अगर चुनाव से पहले मिल जाता है तो वोटर्स सिम्पेथि उसे मिल जाएगी इसलिए बेटा चुनाव के बाद मिले ये ज़रूरी है.मैं इस कोशिश मे लगा हू कि किसी तरह पोलीस से पहले बच्चा मेरे हाथ लग जाए.",भैया जी ने आजतक जो नही किया था वो 1 औरत के जिस्म की हवस मे आज कर दिया.

उनकी कामयाबी का 1 बहुत बड़ा राज़ ये था कि उनके दाए हाथ को नही पता होता था कि बाया क्या कर रहा है.आज तक ना जाने कितनी औरतो को उन्होने चोदा था.राम्या तो उनकी पार्टी की ही थी मगर उसे भी वो कुच्छ नही बताते थे.और तो और उनकी बीवी को कुच्छ नही पता चल पता था क्यूकी उनका नियम था कि अपनी चालें & राज़ किसी को भी ना बताना मगर नीना के जिस्म की वासना मे अंधे हो आज उन्होने अपना ये नियम आज तोड़ दिया था.

"..मैं पोलीस के अपने सूत्रो के ज़रिए ये पता लगाने की कोशिश कर रहा हू.",उन्होने उसकी चूचियो को सहलाया,"..वैसे अभी तक किडनॅपर्स का कुच्छ फोन नही आया ना?"

"नही,और आपने टीवी पे देखा नही क्या?"

"क्या?..वो फोन नंबर?"

"हां."

"हां,तो बात तो जसजीत ही करेगा ना?"

"नही,पोलीस ने किसी प्रोफेसर को ढूंड निकाला है जोकि शायद इस काम का एक्सपर्ट है."

"क्या?",भैया जी चौंक उठे.अपने पोलिसेवाले की खबर लेनी ही पड़ेगी उन्होने सोचा.हर महीने पैसे लेने मे सबसे आगे रहता है,ट्रान्स्फर रुकवाना हो तो दिन-रात उनके पैरो मे बैठा रहता है & इतनी बड़ी बात च्छुपाई!

"हूँ..तो अब तो बता दिया ना मैने कि मैं सब कुच्छ करूँगा उसे हराने के लिए.अब तो नाराज़ नही हो?",नीना ने इनकार मे सर हिलाया & उठ के अपने कपड़े पहनने लगी.भैया जी बिस्तर पे लेटे आगे के बारे मे सोचते रहे.

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अरशद ने अर्म्से डीलर के बताए दिन शाम को उसी नंबर पे फोन किया,"हेलो,मुझे उस आदमी से बात करनी है जो मुझसे डील करेगा.",कॉल लेने वाली ऑपरेटर को पसीना आ गया.वो समझ गयी थी कि सैकड़ो बकवास कॉल्स के बाद अब सही कॉल आई है.

"जी,आप लाइन पे रहिए.",उसने फ़ौरन कॉल फॉर्वर्ड की.

"हेलो.",दिव्या & नामित के साथ बैठ के शाम की चाइ पीते प्रोफेसर ने लपक के पहली ही घंटी पे फोन उठाया.

"अनीश प्रधान हमारे क़ब्ज़े मे है.उसकी सलामती चाह..-"

"1 मिनिट दोस्त,2 दिन से मैं बकवास कॉल्स सुन-2 के पागल हो गया हू.हर कोई कहता है कि उसे अनीश का पता मालूम है.तुम मुझे कल शाम तक इस सवाल का जवाब दे दो & अगर जवाब सही हुआ तो मैं तुम्हारी माँगे उसके पिता तक पहुँचा दूँगा.ओके",प्रोफेसर ने फोन रख दिया.

"आपने फोन रख दिया!",नामित की आँखे हैरत से फटी हुई थी.दिव्या का मुँह भी आश्चर्य से खुला था.

"हाँ,तो क्या तुम्हारी फोर्स के हिम्मती मगर कामकल लोगो से उसे डरा देता क्या!",प्रोफेसर अपनी चाइ ख़त्म करने मे जुट गया.कंट्रोल रूम मे बैठे पोलीस के एक्सपर्ट्स ने 8 सेकेंड के भीतर ही पकड़ लिया था कि कॉल कहाँ एक्सटेन्षन इलाक़े के 1 बूथ से की जा रही थी.15 सेकेंड होते-2 1 बाइक पे नज़दीकी थाने का 1 इनस्पेक्टर तेज़ी से उस बूथ की ओर बढ़ा & 35 सेकेंड होते हुए वाहा पहुँच गया मगर प्रोफेसर ने कॉल 30 सेकेंड मे ही काट दी थी & उन्ही 5 सेकेंड्स मे नकली दाढ़ी-मूँछ & चश्मे मे अरशद वाहा से निकल चुका था.

डीसीपी वेर्मा अपने दोस्त के तरीक़ो से अच्छी तरह से वाकिफ़ थे & अपने डिपार्टमेंट के बाकी लोगो के हैरत & खिज भरे कॉमेंट्स सुन बस मुस्कुरा रहे थे.

"वेर्मा जी,ये क्या बकवास कर रहा है अजिंक्या!",जेसीपी सिंग ने उन्हे अपने कॅबिन मे तलब किया.

"सर,आप परेशान मत होइए.ये उसका तरीका है."

"भाड़ मे गया उसका तरीका!मुझे उस से बात करनी है अभी इसी वक़्त!",वो गुस्से से दहाड़े.

"सर.",वेर्मा जी ने पीच्चे खड़े कॉन्स्टेबल को इशारा किया तो उसने बुंगले पे कॉल लगवाई.

"प्रोफेसर साहब,ज़रा हमे समझाने की तकलीफ़ करेंगे की आपने फोन क्यू काटा?"

"सर,मैं आपका गुस्सा समझ सकता हू मगर पहले आप मेरे 1 सवाल का जवाब दें.आपको बच्चा सही-सलामत चाहिए या नही?"

"हां."

"तो सर,आपको क्या लगता है कि जो आदमी फोन कर रहा था उसने अपने पकड़े जाने की सूरत नही सोची होगी?",अब सिंग साहब सोच मे पड़ गये.

"सर,उसे हम पकड़ लेते मगर शायद बच्चे को खो देते.हम ये ना भूलें तो बेहतर होगा सर की अपने को ख़तरे मे देख ये दरिंदे उस बच्चे की जान लेने मे 1 पल को भी ना हिचकचेंगे.आप परेशान ना हों,वो कल ज़रूर फोन करेगा."

"ठीक है,अजिंक्या.जैसा तुम कह रहे हो वैसा ही हो.",प्रोफेसर बहुत तेज़ दिमाग़ था,ये बात उन्हे माननी ही पड़ी.उसने 1 ही रात मे सारे बग्स नाकाम कर दिए थे & पोलीस को भनक भी नही लगी थी.अब आज बुंगले से बाहर निकला ही नही कि उन बग्स को ठीक किया जा सके.उन्हे हँसी भी आई.

"क्या हुआ,सर?",अपने सीनियर को चुप-चाप ऐसे हंसते देख वेर्मा साहब थोड़ा चिंतित हो गये.उन्होने काम के दबाव मे कयि लोगो को दिमागी बीमारियो से जूझते देखा था.

"हूँ..कुच्छ नही.यू मे गो नाउ."

"सर."

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अनीश का डर अब थोड़ा कम हो गया था.वो आदमी उस से कुच्छ नही बोलता था मगर हर बार खाना बहुत बढ़िया होता था.उसे पता नही था कि वाहा कितने लोग थे क्यूकी बस अरशद ही उसके कमरे मे आता था.उसने अभी तक बस सुना ही था किडनॅपिंग्स के बारे मे आज वो खुद 1 शिकार था.उसे पहले लगता था कि बहुत डर लगता होगा मगर नही डर से ज़्यादा उसे बोरियत हो रही थी.उसे पता था कि उसके पापा किडनॅपर्स की माँग पूरी कर उसे घर ले ही जाएँगे.

तभी दरवाज़ा खुला & वाइटबोर्ड लिए नक़ाबपोश अरशद अंदर आया,"तुम अंकुर से अपने चॉक्लेट्स कहा च्छूपाते हो?",अनीश को सवाल पढ़ के रोना आ गया.घर पे हर वक़्त वो अंकुर से लड़ता रहता था.उसे अपना बल्ला या कोई भी समान नही च्छुने देता था & पिच्छले 2 दिनो से वो मम्मी के साथ-2 सबसे ज़्यादा उसे ही मिस कर रहा था....पर अंकुर भी तो बहुत शरारती था..हमेशा उसके हिस्से के चॉक्लेट्स खा जाता था..तभी तो वो उन्हे.."अपने बाथरूम के सबसे उपर के शेल्फ पे शॅमपू & पॉडर की बॉटल्स के पीछे 1 डब्बे मे.",उसका जवाब सुन अरशद बाहर आया.

"बोल दिया उसने ?",दस्ताने पहने बी & डी ताश खेल रहे थे.

"हां.",उसने धीरे से कहा & बोर्ड रख दिया,"..1 घंटे मे आप दोनो फ्री हो जाएँगे.खाना खा के आराम कर लेना फिर 3 बजे से आप ही को जागना है."

"ठीक है."

"आपकी बाँह कैसी है अब?",जवाब मे बालू ने पूरी बाँह उपर उठा दी & मुस्कुराया तो अरशद भी मुस्कुरा के वाहा से चला गया.

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कामुक कहानियाँ

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क्रमशः........

KHEL KHILADI KA paart--54

gataank se aage............-

"are..tum to bura maan gayi!",unhone uski janghe pakad use khud se alag hone se roka,"..main to bas chhed raha tha..chalo ab narazgi chhodo & shuru karo..karo na!",bhaiya ji ke kafi israr ke bad nina ne apni kamar hilana shuru kiya.bhaiya ji aahe bharte uski tarif ke kaside padhte uski choochiyo se khelne lage.thodi hi der me nina ki raftar badhne lagi & uski khumari bhi.

"unhhh..unnhhh...oohh...aannhhhh...!",tez aahe bharte hue vo apne aashiq ke lund pe uske seene ko masalte hue kud rahi thi.khumari kuchh aur badhi to nina sar jhatakne lagi & bhaiya ji ke seene ko kharochne lagi.1 baar fir vo unke lund se jhad rahi thi.jhadte hie vo unke seene pe gir gayi & lumbi- sanse lene lagi.bhaiya ji uski kamar ko tham neeche se dhakke lagane lage.

"ab ho gaya.ab jane djiye na..oowwww..!",nina 1 baar fir apni khumari se bahar aayi.

"abhi kaise janeman!abhi to tumhe & mast hona hai.",bhaiya ji uchak ke uski 1 moti choochi peene lage.

"please..ab bahut der ho gayi hai..main kya jawab dungi..aaiyyyeeee....ghar pe...uffffff..!",bhaiya ji ko bhi ehsas hua ki sach me kafi waqt ho gaya tha lekin vo majbur the.nina ke jism ka unpe ajib sa nasha chadh gaya tha.chunav ki vajah se vo bahut zyada masruf the magar fir bhi vo aaj us se milne se khud ko rok nahi paye the.unhone uski kamar thamte hue use apne sath uthaya & bistar pe le gaye.

apne neeche litate hue unhone uski chudai jari rakhi.jane dene ki minnato ka natak karti nina unke dhakko se fir se pagal hone lagi.is baar usne apni tange uthake unki kamar pe lapet di & bechaini se apne hath unki pith pe chalane lagi.bhaiya ji uske masti me dube chehre ko dekhte hue,chumte hue dhakke tez kar rahe the.unke ando me vahi mitha dard hone laga jo kal bhi nina ki chudai karte waqt hua tha.unke jism me khushi ke lehar daud padi & vo bahut shadeed dhakke lagane lage.kamre me ab dono ki aaho ka shor fail gaya.dono 1 dusre ko chum rahe the,kaat rahe the.unke hath 1 dusre ke jismo pe betabi se ghum rahe the & nina ke nakhun uske aashiq ki gand me dhans gaye the.vo ab subak rahi thi.

bhaiyya ji ne uski gand ko daboch liya & apna sar utha liya & aahe bharte hue dhakke lagane lage.nina bhi subakte hue kamar uchaka rahi thi ki tabhi vo bistar se uthate hue apne premi se chipak gayi & vo bhi uske upar jhatke khate hue jhadne lage.dono sath-2 apne safar ke anjam tak pahunch gaye the.

Jhadne ke thodi der baad hi Nina ne Bhaiya ji ko apne upar se dhakela & karwat le takiye me munh chhupa sisakne lagi.

"are,kya ho gaya?",bhaiya ji uski banh pakad uska chehra apni or karne ki koshish karne lage magar nina unki na sunte hue subakte hi rahi,"offoh!chup ho jao,nina.batao to sahi baat kya hai?",is baar bhaiya ji ne use apni or ghuma hi liya.

"kuchh nahi.mujhe jane dijiye.",nina bistar se aansu ponchhte uthne lagi.

"aise kaise jane du!",bhaiya ji ne nina ki banh pakad li,"chalo,batao.",nina ruthne ka natak karti rahi & kuchh der baad hi mani.

"aapke liye to main bas 1 khilona hu..",nina hatho me chehra chhupa sisakne lagi,"..bas mujhse khleiye.main janti hu aap vo kabhi nahi karenge jiska bharosa aapne mujhe dilaya hai!",nina gusse se boli hai.

"aise kyu soch rahi ho?",bhaiya ji uske achanak badle rukh ko samajh nahi pa rahe the & yehi to nina ki chaal thi.vo unhe har waqt yu hi uljhaye rakhna chahti thi.

"kal se bas keh rahe hain ki bhaiya yani jeth ji nahi jitenge magar aisa namumkin mumkin kaise hoga ye to bata nahi rahe!"

"tum jaan ke kya karogi!pareshan kyu hoti ho?..kaha na ho jayega.",bhaiya ji ne use fir se agosh me lene ki nakam koshish ki.

"jaiye!chhodiye mujhe..samjhungi ki meri badkismati thi..lekin ab nahi milungi aapse.",nina bistar se utarne lagi to bhaiya ji ne use khinch ke bistar pe lita diya.

"ye kya ho gaya hai tumhe!",unhone uske chhere ko sehlaya.vo bahut pareshan lag rahe the.nina ko fir na chhu pane ke khayal ne unhe pagal kar diya tha.

"achha suno..",unhone uske baal sehlaye,"..Jasjit ka beta agar chunav se pehle mil jata hai to voters symapthy use mil jayegi isliye beta chunav ke baad mile ye zaruri hai.main is koshish me laga hu ki kisi tarah police se pehle bachcha mere hath lag jaye.",bhaiya ji ne aajtak jo nahi kiya tha vo 1 aurat ke jism ki hawas me aaj kar diya.

unki kamyabi ka 1 bahut bada raaz ye tha ki unke daye hath ko nahi pata hota tha ki baya kya kar raha hai.aaj tak na jane kitni aurato ko unhone choda tha.Ramya to unki party ki hi thi magar use bhi vo kuchh nahi batate the.aur to aur unki biwi ko kuchh nahi pata chal pata tha kyuki unka niyam tha ki apni chaalen & raaz kisi ko bhi na batana magar nina ke jism ki vasna me andhe ho aaj unhone apna ye niyam aaj tod diya tha.

"..main police ke apne sutro ke zariye ye pata lagane ki koshish kar raha hu.",unhone uski chhatiyo ko sehlaya,"..vaise abhi tak kidnappers ka kuchh fone nahi aya na?"

"nahi,aur aapne tv pe dekha nahi kya?"

"kya?..vo fone number?"

"haan."

"haan,to baat to jasjit hi karega na?"

"nahi,police ne kisi Professor ko dhund nikala hai joki shayad is kaam ka expert hai."

"kya?",bhaiya ji chaunk uthe.apne policevale ki khabar leni hi padegi unhone socha.har mahine paise lene me sabse aage rehta hai,transfer rukwana ho to din-raat unke pairo me baitha rehta hai & itni badi baat chhupai!

"hun..to ab to bata diya na maine ki main sab kuchh karunga use harane ke liye.ab to naraz nahi ho?",nina ne inkar me sar hilaya & uth ke apne kapde pehanane lagi.bhaiya ji bistar pe lete aage ke bare me sochte rahe.

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Arshad ne armse dealer ke bataye din sham ko usi number pe fone kiya,"hello,mujhe us aadmi se baat karni hai jo mujhse deal karega.",call lene vali operator ko paseena aa gaya.vo samajh gayi thi ki saikdo bakwas calls ke baad ab sahi call aayi hai.

"ji,aap line pe rahiye.",usne fauran call forward ki.

"hello.",Divya & namit ke sath baith ke sham ki chai peete professor ne lapak ke pehli hi ghanti pe fone uthaya.

"Anish Pradhan humare kabze me hai.uski salamti chah..-"

"1 minute dost,2 din se main bakwas calls sun-2 ke pagal ho gaya hu.har koi kehta hai ki use anish ka pata malum hai.tum mujhe kal sham tak is sawal ka jawab de do & agar jawab sahi hua to main tumhari mange uske pita tak phuncha dunga.ok",professor ne fone rakh diya.

"aapne fone rakh diya!",namit ki aankhe hairat se phati hui thi.divya ka munh bhi aashcharya se khula tha.

"haan,to kya tumhari force ke himmati magar kamakl logo se use dara deta kya!",professor apni chai khatm karne me jut gaya.control room me baithe police ke experts ne 8 second ke bhitar hi pakad liya tha ki call Kanha Extension ilake ke 1 booth se ki ja rahi thi.15 second hote-2 1 bike pe nazdiki thane ka 1 inspector tezoi se us booth ki or badha & 35 second hote hue vaha pahunch gaya magar professor ne call 30 second me hi kaat di thi & unhi 5 seconds me nakli dadhi-munchh & chashme me arshad vaha se nikal chuka tha.

DCP Verma apne dost ke tariko se achhi tarah se vakif the & apne department ke baki logo ke hairat & khij bhare comments sun bas muskura rahe the.

"Verma ji,ye kya bakwas kar raha hai Ajinkya!",JCP Singh ne unhe apne cabin me talab kiya.

"sir,aap pareshan mat hoiye.ye uska tarika hai."

"bhaad me gaya uska tarika!mujhe us se baat karni hai abhi isi waqt!",vo gusse se dahade.

"sir.",verma ji ne peechhe khade constable ko ishara kiya to usne bungle pe call lagwayi.

"professor sahab,zara hume samjhane ki taklif karenge ki aapne fone kyu kata?"

"sir,main aapka gussa samajh sakta hu magar pehle aap mere 1 sawal ka jawab den.aapko bachcha sahi-salamat chahiye ya nahi?"

"haan."

"to sir,aapko kya lagta hai ki jo aadmi fone kar raha tha usne apne pakde jane ki surat nahi sochi hogi?",ab singh sahab soch me pad gaye.

"sir,use hum pakad lete magar shayad bachche ko kho dete.hum ye na bhulen to behtar hoga sir ki apne ko khatre me dekh ye darinde us bachche ki jaan lene me 1 pal ko bhi na hichkchenge.aap pareshan na hon,vo kal zarur fone karega."

"thik hai,ajinkya.jaisa tum keh rahe ho vaisa hi ho.",professor bahut tez dimagh tha,ye baat unhe maanani hi padi.usne 1 hi raat me sare bugs nakaam kar diye the & police ko bhanak bhi nahi lagi thi.ab aaj bungle se bahar nikla hi nahi ki un bugs ko thik kiya ja sake.unhe hasni bhi aayi.

"kya hua,sir?",apne senior ko chup-chap aise hanste dekh verma sahab thoda chintit ho gaye.unhone kaam ke dabav me kayi logo ko dimaghi bimariyo se jujhte dekha tha.

"hun..kuchh nahi.you may go now."

"sir."

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anish ka darr ab thoda kam ho gaya tha.vo aadmi us se kuchh nahi bolta tha magar har baar khana bahut badhiya hota tha.use pata nahi tha ki vaha kitne log the kyuki bas arshad hi uske kamre me aata tha.usne abhi tak bas suna hi tha kidnappings ke bare me aaj vo khud 1 shikar tha.use pehle lagta tha ki bahut darr lagta hoga magar nahi darr se zyada use boriyat ho rahi thi.use pata tha ki uske papa kidnappers ki mang puri kar use ghar le hi jayenge.

tabhi darwaza khula & whiteboard liye naqabposh arshad andar aaya,"TUM ANKUR SE APNE CHOCOLATES KAHA CHHUPATE HO?",anish ko sawal padh ke rona aa gaya.ghar pe har waqt vo ankur se ladta rehta tha.use apna balla ya koi bhi saman nahi chhune deta tha & pichhle 2 dino se vo mummy ke sath-2 sabse zyada use hi miss kar raha tha....par ankur bhi to bahut shararati tha..humesha uske hisse ke chocolates kha jata tha..tabhi to vo unhe.."apne bathroom ke sabse upar ke shelf pe shampoo & poder ki bottles ke peechhe 1 dabbe me.",uska jawab sun arshad bahar aaya.

"bol diya usne ?",dastane pehne B & D tash khel rahe the.

"haan.",usne dhire se kaha & board rakh diya,"..1 ghante me aap dono free ho jayenge.khana kha ke aaram kar lena fir 3 baje se aap hi ko jagna hai."

"thik hai."

"aapki banh kaisi hai ab?",jawab me Balu ne puri banh upar utha di & muskuraya to arshad bhi muskura ke vaha se chala gaya.

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kaamuk kahaaniyaan

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kramashah........

 
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