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अब महेश अरोरा,जिसकी फॅक्टरी उसकी फॅक्टरी के पास थी,जब अपना प्रपोज़ल लेके आया तो मुकुल को लालच आ गया लेकिन उसे 1 बार नीना से इस बारे मे बात करनी थी.उस से पुच्छे बिना वो वैसे भी कोई काम नही करता था.नीना-उसकी खूबसूरत बीवी.गोरे चेहरे पे बड़ी-2 काली आँखो वाली नीना जब अपनी धनुषकार भाव को थोड़ा टेढ़ा कर शोखी से मुस्कुराती तो आज भी,जब 36 बरस की हो चुकी थी,मर्द घायल हो जाते.
नीना अपने कमरे मे आई & बिस्तर पे लेट गयी.गुस्से से तमतमाया उसका गोरा चेहरा लाल हो गया था & वो और भी ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी.उसके गुस्से का कारण केवल उसका जेठ नही था बल्कि उसकी जेठानी भी थी.स्टेज पे बैठी कैसे इतरा रही थी?!..लेकिन इतराती भी क्यू ना?आख़िर उसका पति इतना कामयाब था....कैसा महसूस होता होगा उसे जब सब उसके आगे-पीछे करते होंगे..उसकी जी हुज़ूरी करते होंगे?....& 1 वो थी....आख़िर उसने इतनी बड़ी बेवकूफी कैसे कर ली थी?कॉलेज मे वो केवल उन लड़को से दोस्ती करती थी जो उसे ऊँचे स्टेटस वाले लगते थे बाकियो को तो वो अपने पास फटकने भी नही देती थी.
उसने करवट बदली & उसे वो दिन याद आया जब उसने मिस डेवाले का खिताब जीता था.सभी को लगा था कि उसके 5'4" कद के चलते उस से लंबी लड़किया बाज़ी मार ले जाएँगी मगर उन्हे पता नही था कि नीना को पता नही था कि हार किस चिड़िया का नाम है.वो खिताब जीत गयी & उसके बाद ही किसी जलसे मे वो मुकुल से मिली थी.कितना हॅंडसम था वो & कितने अच्छे ख़ानदान से भी!
जब मुकुल ने उसका हाथ माँगा तो उसने फ़ौरन हां कर दी मगर कुच्छ ही महीनो बाद उसे एहसास हो गया था कि जिस तरीके के इंसानो से वो हमेशा अपना दामन बचाती आई थी मुकुल बिल्कुल वैसा ही था & उपर से तुर्रा ये कि उसका बड़ा भाई उसकी बिल्कुल फ़िक्र नही करता था.ऐसा नही था कि नीना नही जानती थी कि जसजीत ने मुकुल की कितनी मदद की थी & उसने भी इसलिए उसे ऐसे छ्चोड़ा था की ताकि वो अपनी ज़िम्मेदारिया उठाना सीखे लेकिन गुरूर वाली नीना भला ये कैसे मानती कि मुकुल से शादी करना उसकी ग़लती थी उसे तो कोई बलि का बकरा चाहिए था तो मुकुल के साथ-2 उसने अपने जेठ-जेठानी को भी अपना दुश्मन मान लिया.
मजबूरी थी कि वो मुकुल को छ्चोड़ नही सकती थी..आख़िर कहा जाती वो उसे छ्चोड़ के?मुकुल अभी भी हॅंडसम था मगर वो अभी भी 1 लूज़र था पेशे मे,ज़िंदगी मे & बिस्तर मे!नीना के खूबसूरत जिस्म को पिघलाने का माद्दा नही था उसमे.नीना बिस्तर से उठी & अपना पल्लू नीचे गिरा दिया.काली सारी मे उसका गोरा बदन और चमक रहा था.अपने जिस्म का खास ख़याल रखती थी वो अभी भी 36-30-36 का फिगर बहुत ही दिलकश था.तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई तो उसने आँचल ठीक किया,"कम इन."
"हाई!मम्मी.",1 12 साल का लड़का कमरे मे आया.
"हाई!श्लोक बेटा.",नीना ने उस बच्चे को अपने सीने से लगा के चूम लिया.
"ये देखो मम्मी..",उसने 1 ट्रोफी अपनी मा को दी,"..आज डिबेट कॉंपिटेशन मे मुझे सेकेंड प्राइज़ मिला."
"वाउ!बेटा..",मा ने उसे फिर चूमा तो श्लोक थोड़ा सा झुनझूलाया,अब वो बड़ा हो गया था & मम्मी अभी भी उस से बच्चो जैसा बर्ताव करती थी!
"फर्स्ट कौन आया बेटा?"
"अनीश भैया.",जसजीत के बड़े बेटे का नाम सुन नीना का चेहरा फिर से सख़्त हो गया.पहले बाप ने मेरे पति को हर जगह दूसरे नंबर पे कर दिया & अब बेटा मेरे बेटे को..नही चाहे कुच्छ भी हो जाए..ऐसा नही होगा..अनीश को तो मैं?..नीना ने अपने बेटे को चूमा & अपने जज़्बात च्छूपाते हुए उस से बाते करने लगी.
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क्रमशः...........
नीना अपने कमरे मे आई & बिस्तर पे लेट गयी.गुस्से से तमतमाया उसका गोरा चेहरा लाल हो गया था & वो और भी ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी.उसके गुस्से का कारण केवल उसका जेठ नही था बल्कि उसकी जेठानी भी थी.स्टेज पे बैठी कैसे इतरा रही थी?!..लेकिन इतराती भी क्यू ना?आख़िर उसका पति इतना कामयाब था....कैसा महसूस होता होगा उसे जब सब उसके आगे-पीछे करते होंगे..उसकी जी हुज़ूरी करते होंगे?....& 1 वो थी....आख़िर उसने इतनी बड़ी बेवकूफी कैसे कर ली थी?कॉलेज मे वो केवल उन लड़को से दोस्ती करती थी जो उसे ऊँचे स्टेटस वाले लगते थे बाकियो को तो वो अपने पास फटकने भी नही देती थी.
उसने करवट बदली & उसे वो दिन याद आया जब उसने मिस डेवाले का खिताब जीता था.सभी को लगा था कि उसके 5'4" कद के चलते उस से लंबी लड़किया बाज़ी मार ले जाएँगी मगर उन्हे पता नही था कि नीना को पता नही था कि हार किस चिड़िया का नाम है.वो खिताब जीत गयी & उसके बाद ही किसी जलसे मे वो मुकुल से मिली थी.कितना हॅंडसम था वो & कितने अच्छे ख़ानदान से भी!
जब मुकुल ने उसका हाथ माँगा तो उसने फ़ौरन हां कर दी मगर कुच्छ ही महीनो बाद उसे एहसास हो गया था कि जिस तरीके के इंसानो से वो हमेशा अपना दामन बचाती आई थी मुकुल बिल्कुल वैसा ही था & उपर से तुर्रा ये कि उसका बड़ा भाई उसकी बिल्कुल फ़िक्र नही करता था.ऐसा नही था कि नीना नही जानती थी कि जसजीत ने मुकुल की कितनी मदद की थी & उसने भी इसलिए उसे ऐसे छ्चोड़ा था की ताकि वो अपनी ज़िम्मेदारिया उठाना सीखे लेकिन गुरूर वाली नीना भला ये कैसे मानती कि मुकुल से शादी करना उसकी ग़लती थी उसे तो कोई बलि का बकरा चाहिए था तो मुकुल के साथ-2 उसने अपने जेठ-जेठानी को भी अपना दुश्मन मान लिया.
मजबूरी थी कि वो मुकुल को छ्चोड़ नही सकती थी..आख़िर कहा जाती वो उसे छ्चोड़ के?मुकुल अभी भी हॅंडसम था मगर वो अभी भी 1 लूज़र था पेशे मे,ज़िंदगी मे & बिस्तर मे!नीना के खूबसूरत जिस्म को पिघलाने का माद्दा नही था उसमे.नीना बिस्तर से उठी & अपना पल्लू नीचे गिरा दिया.काली सारी मे उसका गोरा बदन और चमक रहा था.अपने जिस्म का खास ख़याल रखती थी वो अभी भी 36-30-36 का फिगर बहुत ही दिलकश था.तभी दरवाज़े पे दस्तक हुई तो उसने आँचल ठीक किया,"कम इन."
"हाई!मम्मी.",1 12 साल का लड़का कमरे मे आया.
"हाई!श्लोक बेटा.",नीना ने उस बच्चे को अपने सीने से लगा के चूम लिया.
"ये देखो मम्मी..",उसने 1 ट्रोफी अपनी मा को दी,"..आज डिबेट कॉंपिटेशन मे मुझे सेकेंड प्राइज़ मिला."
"वाउ!बेटा..",मा ने उसे फिर चूमा तो श्लोक थोड़ा सा झुनझूलाया,अब वो बड़ा हो गया था & मम्मी अभी भी उस से बच्चो जैसा बर्ताव करती थी!
"फर्स्ट कौन आया बेटा?"
"अनीश भैया.",जसजीत के बड़े बेटे का नाम सुन नीना का चेहरा फिर से सख़्त हो गया.पहले बाप ने मेरे पति को हर जगह दूसरे नंबर पे कर दिया & अब बेटा मेरे बेटे को..नही चाहे कुच्छ भी हो जाए..ऐसा नही होगा..अनीश को तो मैं?..नीना ने अपने बेटे को चूमा & अपने जज़्बात च्छूपाते हुए उस से बाते करने लगी.
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क्रमशः...........