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जसजीत प्रधान को खबर भी नही थी & 1-1 करके उसके दुश्मन उसके खिलाफ साज़िशो की शुरुआत कर रहे थे लेकिन इन सभी मे से जो उस से सबसे ज़्यादा नफ़रत करता था वो शख्स अभी थोड़ा परेशान था.उसके पास इतने पैसे तो थे कि वो 1 पुरानी वॅन खरीद ले लेकिन मुश्किल ये थी कि उस वन को वो रखेगा कहा.वो खुद तो किसी तरह उस बंद पड़े बंगल मे छिपा था लेकिन वाहा भी ज़्यादा दिन रहना ख़तरे से खाली नही था & वाहा 1 गाड़ी रखना तो नामुमकिन था.
वो इन्ही ख़यालो मे गुम बाज़ार से गुज़र रहा था कि तभी उसकी निगाह 1 दुकान मे खड़ी 1 लड़की पे पड़ी....मोना!..उसके गमगीन चेहरे पे बरसो मे पहली बार मुस्कान आई & उसके कदम दुकान की ओर बढ़ गये.अभी 4 कदम ही चला था कि वो ठिठक गया.दुकान के कॅश काउंटर से बाकी पैसे अपने पर्स मे डालती मोना घूमी तो उसकी नज़र उसकी माँग मे चमक रहे सिंदूर & गले मे पड़े मंगलसूत्र पे पड़ी.
वो फ़ौरन दुकान मे घुसने के बजाय फुर्ती से बाई तरफ घुमा & 1 दुकान मे घुस गया.ठीक उसी वक़्त मोना ने अपना सर उपर उठाया & अपना पर्स बंद करती हुई दुकान से बाहर निकल गयी.वो भी उसके थोड़ा आगे बढ़ने पे बाहर निकल आया & मोना के पीछे चल पड़ा.उसका दिमाग़ उसे झकझोर रहा था कि वो क्यू उसके पीछे चल रहा था?..वो अब किसी और की हो चुकी थी..वो नशीला बदन जो पहले केवल उसकी मिल्कियत थी अब उसके नाख़ून को भी वो छुने का हक़ नही रखता था..लेकिन इंसान के दिल ने कब तर्क से काम लिया है.वो वैसे ही अपनी महबूबा के पीछे चलता रहा.
कुच्छ और दुकानो का चक्कर लगाने के बाद मोना 1 कॉफी शॉप मे घुस गयी,"हाई!भाभी.",वो 1 औरत के साथ बैठ के कॉफी पीने लगी.
वो दोनो की नज़र बचा के कॉफी शॉप के अंदर गया & मोना की ओर पीठ कर बैठ गया & वेटर के आने पे इशारे से 1 कॉफी का ऑर्डर दे दिया.वो उस औरत को देखते ही पहचान गया था,वो उसकी महबूबा के बड़े भाई की बीवी थी & यही पास मे ही किसी दफ़्तर मे काम करती थी.उसने घड़ी देखी 3 बज रहे थे.अभी लंच ब्रेक मे वो अपनी ननद से मिलने बाहर आई थी,ऐसा लगता था.
"क्या भाभी!मैं अभी-2 आई & आपलोग जा रहे हो!ये अच्छी बात नही है."
"मोना,मुझे अच्छा लग रहा है ऐसे जाना!लेकिन क्या करू,तेरे भाय्या कितने परेशान थे तुझे पता है ना!..अब इतनी मुश्किल से ये मौका हाथ लगा है..फिर 3 महीनो की तो बात है....हम यू गये & यू आए!"
"भाभी,विदेश जा रही हो बगल के सिनिमा मे फिल्म देखने नही!",दोनो औरते हंस पड़ी.
"तू वैसे तो बड़ी शिकायत कर रही है लेकिन जब पिच्छले सनडे बुलाया तो क्यू नही आई थी?मैं अच्छे से जानती हू मुझे कह रही है कि मेरे बिना बोर हो जाएगी जबकि तू अभी तक हनिमून मना रही है!क्या किया पूरे एतवार?..अच्छा वो तो मुझे पता है क्या किया ये बता की कैसे किया?"
"क्या भाभी!..जगह का तो ख़याल करो!",मोना की आवाज़ मे शर्म & खुशी & बनावटी गुस्से की लराज़ थी.उसके दिल मे टीस सी उठी..मोना खुश थी उस दूसरे मर्द के साथ..उसने अपनी कॉफी का लूंबा घूँट भरा..लेकिन वो क्यू दुखी हो रहा था?..क्या उसका इश्क़ इतना मतलबी था?..पहले तो कभी वो मोना की खुशी से दुखी नही हुआ & वो क्या चाहता था कि मोना उसका इंतेज़ार करती रहती..1 सज़ायाफ़्ता मुजरिम का?..उसने अपनी ज़िंदगी की कड़वी सचाई को मान लिया था & अब उसे इस सचाई को भी मान लेना होगा कि मोना अब उसकी नही थी.
"..किराए का ही सही मगर मुझे तो अपना घर वही मकान लगता था भाभी."
"हां,मोना.कितनी यादें जुड़ी हैं ना उस घर से?तुझे याद है पीछे वाले मूरती साहब?"
"जिनके पीछे 1 बार गली के कुत्ते पड़ गये थे!",1 बार फिर दोनो औरतो की हँसी गूँज उठी.वो जानता था मोना अपने घर की बात कर रही थी.वोही घर जिस से कुच्छ दूरी पे वो उसे हर रोज़ उतरता था & जब तक वो अपने गुलाबी लबो से उसे 1 गुडबाइ किस नही दे देती वो उसे जाने नही देता था.
"भाभी,तुम्हारे इस नये घर का तो मुझे पता भी नही याद.1 बार बताओ लिख लू.",मोना पता लिख रही थी & उसका दिमाग़ 1 बार फिर अपने मक़सद के बारे मे सोचने लगा था.जब तक मोना ने पता लिखा वो अपना बिल अदा कर कॉफी शॉप से बाहर निकल चुका था.मोना के भाय्या के नये घर से उसे 1 बात सूझ गयी थी.
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क्रमशः...........
वो इन्ही ख़यालो मे गुम बाज़ार से गुज़र रहा था कि तभी उसकी निगाह 1 दुकान मे खड़ी 1 लड़की पे पड़ी....मोना!..उसके गमगीन चेहरे पे बरसो मे पहली बार मुस्कान आई & उसके कदम दुकान की ओर बढ़ गये.अभी 4 कदम ही चला था कि वो ठिठक गया.दुकान के कॅश काउंटर से बाकी पैसे अपने पर्स मे डालती मोना घूमी तो उसकी नज़र उसकी माँग मे चमक रहे सिंदूर & गले मे पड़े मंगलसूत्र पे पड़ी.
वो फ़ौरन दुकान मे घुसने के बजाय फुर्ती से बाई तरफ घुमा & 1 दुकान मे घुस गया.ठीक उसी वक़्त मोना ने अपना सर उपर उठाया & अपना पर्स बंद करती हुई दुकान से बाहर निकल गयी.वो भी उसके थोड़ा आगे बढ़ने पे बाहर निकल आया & मोना के पीछे चल पड़ा.उसका दिमाग़ उसे झकझोर रहा था कि वो क्यू उसके पीछे चल रहा था?..वो अब किसी और की हो चुकी थी..वो नशीला बदन जो पहले केवल उसकी मिल्कियत थी अब उसके नाख़ून को भी वो छुने का हक़ नही रखता था..लेकिन इंसान के दिल ने कब तर्क से काम लिया है.वो वैसे ही अपनी महबूबा के पीछे चलता रहा.
कुच्छ और दुकानो का चक्कर लगाने के बाद मोना 1 कॉफी शॉप मे घुस गयी,"हाई!भाभी.",वो 1 औरत के साथ बैठ के कॉफी पीने लगी.
वो दोनो की नज़र बचा के कॉफी शॉप के अंदर गया & मोना की ओर पीठ कर बैठ गया & वेटर के आने पे इशारे से 1 कॉफी का ऑर्डर दे दिया.वो उस औरत को देखते ही पहचान गया था,वो उसकी महबूबा के बड़े भाई की बीवी थी & यही पास मे ही किसी दफ़्तर मे काम करती थी.उसने घड़ी देखी 3 बज रहे थे.अभी लंच ब्रेक मे वो अपनी ननद से मिलने बाहर आई थी,ऐसा लगता था.
"क्या भाभी!मैं अभी-2 आई & आपलोग जा रहे हो!ये अच्छी बात नही है."
"मोना,मुझे अच्छा लग रहा है ऐसे जाना!लेकिन क्या करू,तेरे भाय्या कितने परेशान थे तुझे पता है ना!..अब इतनी मुश्किल से ये मौका हाथ लगा है..फिर 3 महीनो की तो बात है....हम यू गये & यू आए!"
"भाभी,विदेश जा रही हो बगल के सिनिमा मे फिल्म देखने नही!",दोनो औरते हंस पड़ी.
"तू वैसे तो बड़ी शिकायत कर रही है लेकिन जब पिच्छले सनडे बुलाया तो क्यू नही आई थी?मैं अच्छे से जानती हू मुझे कह रही है कि मेरे बिना बोर हो जाएगी जबकि तू अभी तक हनिमून मना रही है!क्या किया पूरे एतवार?..अच्छा वो तो मुझे पता है क्या किया ये बता की कैसे किया?"
"क्या भाभी!..जगह का तो ख़याल करो!",मोना की आवाज़ मे शर्म & खुशी & बनावटी गुस्से की लराज़ थी.उसके दिल मे टीस सी उठी..मोना खुश थी उस दूसरे मर्द के साथ..उसने अपनी कॉफी का लूंबा घूँट भरा..लेकिन वो क्यू दुखी हो रहा था?..क्या उसका इश्क़ इतना मतलबी था?..पहले तो कभी वो मोना की खुशी से दुखी नही हुआ & वो क्या चाहता था कि मोना उसका इंतेज़ार करती रहती..1 सज़ायाफ़्ता मुजरिम का?..उसने अपनी ज़िंदगी की कड़वी सचाई को मान लिया था & अब उसे इस सचाई को भी मान लेना होगा कि मोना अब उसकी नही थी.
"..किराए का ही सही मगर मुझे तो अपना घर वही मकान लगता था भाभी."
"हां,मोना.कितनी यादें जुड़ी हैं ना उस घर से?तुझे याद है पीछे वाले मूरती साहब?"
"जिनके पीछे 1 बार गली के कुत्ते पड़ गये थे!",1 बार फिर दोनो औरतो की हँसी गूँज उठी.वो जानता था मोना अपने घर की बात कर रही थी.वोही घर जिस से कुच्छ दूरी पे वो उसे हर रोज़ उतरता था & जब तक वो अपने गुलाबी लबो से उसे 1 गुडबाइ किस नही दे देती वो उसे जाने नही देता था.
"भाभी,तुम्हारे इस नये घर का तो मुझे पता भी नही याद.1 बार बताओ लिख लू.",मोना पता लिख रही थी & उसका दिमाग़ 1 बार फिर अपने मक़सद के बारे मे सोचने लगा था.जब तक मोना ने पता लिखा वो अपना बिल अदा कर कॉफी शॉप से बाहर निकल चुका था.मोना के भाय्या के नये घर से उसे 1 बात सूझ गयी थी.
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