खेल खिलाड़ी का पार्ट--27
गतान्क से आगे ......
"बस तस्वीरे ही हैं हमारे पास.",फोरेन्सिक लॅब के टेक्नीशियन ने सेठ मोहन लाल के मोबाइल के म्मस से शोभा की फोटो निकाल ली थी & दिव्या उस फोटो & 2 लुटेरो के स्केचस को देख रही थी,"..कोई ऐसा सुराग नही मिल रहा कि जिस से इन लुटेरो को पकड़ने का कोई रास्ता नज़र आए."
"वो भी मिल जाएगा.परेशान क्यू होती है,दिव्या जी.",प्रोफेसर दीक्षित ने कहा.
"मगर कैसे,प्रोफेसर?"
"मुझे तो उन ज़ेवरो से उमीद है.कोई तो उनमे से कुच्छ भी बेचेगा."
"लेकिन कब,प्रोफेसर कब?",दिव्या बेचैनी से बोली,"डकेटी पैसो के लिए होती है & लूट का माल भी डाकेत जल्द से जल्द ठिकाने लगाना चाहते हैं लेकिन यहा तो वो ऐसे खामोश बैठे हैं जैसे उन्होने शौक के लिए दुकान लूटी थी!"
"आप सेठ के काले धन को भूल गयी,दिव्या जी?",प्रोफेसर मुस्कुराया,"वो पैसे वो खर्च करेंगे तो हमे कैसे पता चलेगा?रही बात गहनो की तो मैं आपकी बात मानता हू.मुझे भी अजीब लग रहा है कि आख़िर वो उन्हे ठिकाने क्यू नही लगा रहे."
"क्यूकी वो बहुत शातिर हैं,प्रोफेसर.",प्रोफेसर ने सवालिया अंदाज़ मे अपनी भवे उपर की.
"वो इंतेज़ार कर रहे हैं,प्रोफेसर.",दिव्या उठके कमरे की खिड़की पे चली गयी & बाहर देखने लगी,"वो जानते हैं कि उपर से सब शांत दिख रहा है लेकिन पोलीस उनके पीछे पड़ी है.जैसे ही हम दोनो सेठ मोहन लाल की दुकान पे गये,शोभा वाहा से गायब हो गयी.अब वो होशियार हो गये हैं,प्रोफेसर & जब तक उनमे से कोई 1 ग़लती ना करे हम उन तक नही पहुँच सकते."
"शोभा जहा रहती थी,हम वाहा जाके देखें?"
"चलिए,ये भी कर लेते हैं."
"अबे रॉनी!क्यू इतनी मेहनत कर रहा है!",वरुण ने साथ के नेट मे बॅटिंग करते लड़के से कहा जो अभी तक 1 भी गेंद बल्ले के बीच नही ले पाया था,"तुझे कल खिलाएँगे तो है नही फिर क्यू इन स्कूल के छोकरो से भी अपनी हँसी उड़वा रहा है.",वरुण अपनी राज्य की टीम के साथ रणजी ट्रोफी मॅच के लिए प्रॅक्टीस कर रहा था & वाहा नेट प्रॅक्टीस के लिए लोकल स्कूल प्लेयर्स बोलिंग के लिए भेजे गये थे.
"वरुण बेटे,कल मैं तो खेलूँगा तू अपनी फ़िक्र कर.टीम के 15 मे आना & मॅच खेलने वाले 11 मे आना 2 अलग बाते हैं.मेरी मान,तू मेहनत ना कर क्यूकी कल तू नही मैं खेलूँगा."
"देखेंगे,भाई.",वरुण बॅटिंग करने लगा..साला!सपने देख रहा है,बॅट पकड़ना तो आता नही,रणजी खेलेगा..हुंग!
अगली सुबह वरुण बड़ा खुश हो ग्राउंड पे पहुँचा,आख़िर आज वो पहली बार अपने राज्य के लिए खेलने वाला था.वॉर्म-अप से पहले कॅप्टन ने सभी को ड्रेसिंग रूम मे इकट्ठा किया & मॅच खेलने वाले खिलाड़ियो का नाम लेने लगा.वरुण को अपने कानो पे भरोसा नही हो रहा था,रॉनी टीम मे था & वो नही.
"सर..",उसने कॅप्टन को रोका,"..सर,म-मैं क्यू नही..",उसका गला भर आया था & वो इतना ही बोल सका.
"वरुण..",कॅप्टन ने उसके कंधे पे हाथ रखा & ड्रेसिंग रूम से बाहर 1 कोने मे ले गया,"..रॉनी यहा क्या स्कूल क्रिकेट खेलने के लायक नही है,मगर.."
"मगर क्या,सर?",वरुण की आँखो से आँसू छलक पड़े.
"मगर बेटा जब उपर से दबाव पड़े तो हम क्या कर सकते हैं.",उसने स्टेडियम के VईP बॉक्स मे बैठ रहे लोगो की ओर इशारा किया.वरुण को वाहा अपने राज्य के क्रिकेट असोसियेशन का प्रेसीडेंट जसजीत प्रधान बैठा नज़र आया,"..खुद प्रधान साहब ने मुझे फोन करके कहा था उसे रखने को."
वरुण की आँसू भरी निगाहो मे अंगारे दहक रहे थे.उसने आँसू पोन्छे तो कॅप्टन वाहा से चला गया.उसके पीछे-2 टीम मैदान मे जा रही थी,रॉनी भी उसमे शामिल था.उसने वरुण को देखा & गर्व से मुस्कुराया.
"आइए,वरुण जी,आइए!कैसा रहा देबूत आपका?",रॉनी ने अपने दोस्तो के साथ ठहाका लगाया.स्टेडियम के क्लब हाउस मे वरुण के कदम रखते ही रॉनी ने उसे छेड़ा था,"बच्चे,तुम बस मैदान मे खेलना जानते हो उसके बाहर नही.",रॉनी ने उसके कंधे पे हाथ रखा,"कहो तो तुम्हे भी टीम मे घुस्वा दू?मेरे लिए तो बाए हाथ का काम है!",वरुण ने उसका हाथ झटका & अपने दोस्त के साथ कोने की 1 मेज़ पे बैठ गया.
"यार,रॉनी के पापा कितने बड़े बिज़्नेसमॅन है तू तो जानता ही है.प्रधान की पार्टी को हमेशा चंदा देते रहते हैं."
"तो प्रधान प्रेसीडेंट क्यू बना है?अपने यारो के लड़को को टीम मे घुसाने के लिए?"
"वो मैं नही जानता लेकिन हम बेबस हैं."
"प्रधान जैसो को तो उल्टा टांग देना चाहिए!लोग उसे ईमानदार समझते हैं..समझते हैं कि वो हमारा नेता बनेगा तो बहुत कुच्छ सुधारेगा लेकिन ये तो औरो जैसा ही है.मैं इसके बारे मे ज़रूर लोगो को बताउन्गा.",उसने मेज़ पे मुक्का मारा.
"वरुण,प्लीज़ यार.ये ताक़तवर लोग हैं,क्यू इनसे टकरा रहा है.रॉनी का शौक पूरा हो गया है,अब अगला मॅच तो तू ही खेलेगा."
"नही,मैं तो ये करूँगा ही."
"अच्छा,छ्चोड़ ये बातें.मैं तेरा मूड ठीक करता हू,चल मेरे साथ."
"कहा?"
"अरे चल तो.",उसका दोस्त उसे खीच वाहा से ले गया.वो उसे 1 पब ले गया जहा अपना गम भूलने के लिए वरुण ने जम के पी.उसी नशे की हालत मे जब वो घर लौट रहा था तो उसका सामना 1 बार फिर रॉनी से हुआ जिसने उसे फिर से चिड़ाया.इस बार वरुण ने उसे नज़रअंदाज़ नही किया और उस से उलझ गया & उसके बाद उसे कुच्छ होश नही था.
जब होश आया तो वो लॉक-अप मे था.रॉनी को उसने इतना मारा था की वो हॉस्पिटल मे था & उसकी हालत भी नाज़ुक थी.जब उसे सुनवाई के लिए अदालत ले जया गया तो वाहा उसने सब बोल दिया की कैसे प्रधान के कहने पे उसकी जगह रॉनी को टीम मे रखा गया था & वो बहुत परेशान था & उसका गुस्सा ऐसे निकला.
प्रधान का नाम आते ही प्रेस की निगाह केस पे पड़ गयी & इसी बीच 1 बहुत बुरी बात हो गयी-रॉनी को लकवा मार गया.अब तो प्रेस ने उसे दरिन्दा करार दे दिया.उसने भी मना था की उसने रॉनी को पीटा था,उसके मा-बाप उसकी मदद कर रहे थे लेकिन उनकी आँखो मे उसे भी सॉफ दिखता था कि उन्हे शर्म आती थी की वो उनका बेटा है.उसके पिता ने तो उसे जम के लताड़ा भी था.कोई भी उसे समझ नही रहा था सिवाय मोना के.वो 2 ही बार उस से मिलने आ सकी थी लेकिन उसने उसपे पूरा भरोसा जताया था.रॉनी के पिता तो अपने रसुख का इस्तेमाल कर ही रहे थे.
पर अब तो उसने भी किसी और से शादी कर ली थी.वरुण अपने ख़यालो से बाहर आया & उस वीरान इमारत से बाहर मोना के भाई के फ्लॅट वाले अपार्टमेंट बिल्डिंग की ओर देखने लगा..कल वो अपने भाय्या-भाभी से मिलने आई थी.उसका रूप और निखर आया था & इस बात से भी उसे तकलीफ़ पहुँची थी क्यूकी अब वो उस हुस्न का लुत्फ़ नही उठा सकता था.मोना के भाई-भाभी आज सवेरे ही दुबई चले गये थे.अब उसका रास्ता सॉफ था.इस इमारत के अलावा उसके पास 1 और फ्लॅट था जहा से वो अपना काम कर सकता था.
उसने बॉटल उठा पानी का 1 घूँट भरा & अपनी कलाई पे बँधी घड़ी को देखा,अभी 12 ही बजे थे.1 बजे के बाद वो किसी ना किसी तरह वाहा का जयजा लेगा.केस अदालत मे पहुँचने के बाद उसकी सारी उम्मीद उसके कॅप्टन पे थी क्यूकी उसी ने उसे प्रधान वाली बात बताई थी मगर अदालत मे वो अपनी बात से सॉफ मुकर गया.अब वो झूठा,बद्दिमाग & 1 गुंडा साबित हो चुका था.उसे 2 बरस की जैल हो गयी.उसके पिता का कमज़ोर दिल अपने इकलौते बेटे की बर्बादी झेल नही पाया & वो चल बसे.मा ने उसकी बेहन की शादी करवाई & उसके बाद वो भी उसकी याद मे घुलती इस दुनिया से रुखसत हो गयी.
उसे गुस्सा तो सभी पे आया था,रॉनी पे,उसके पिता पे,अपने कॅप्टन पे लेकिन उसका ये मानना था कि अगर प्रधान ने रॉनी के पिता की ग़लत बात नही मानी होती तो ये सब नही होता फिर उसके कॅप्टन पे अदालत मे झूठ बोलने का दबाव भी बेशाक़ प्रधान से ही आया होगा.इस सब का असल कारण प्रधान था & उसे इस बात की सज़ा मिलनी ही चाहिए थी!उसने 1 बार फिर घड़ी देखी & वाहा से निकल गया.
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"1 बात समझ नही आई.",लोक विकास पार्टी के दफ़्तर मे राम्या भाय्या जी के सामने की कुर्सी पे बैठी थी.उसने अपना बाया पैर उठाया & भाय्या जी की गोद मे रख दिया,"..आप मुझे अंजलि प्रधान से मेल-जोल बढ़ाने को क्यू कर रहे हैं?",उसका पाँव भाय्या जी के कुर्ते के नीचे घुस उनके पाजामे के अंदर बंद उनके लंड को दबाने लगा.
"आज तुम्हारे सवाल का जवाब दूँगा लेकिन पहले ये बताओ कि तुम मे & प्रधान की बीवी मे कितनी जान-पहचान हुई है?",भाय्या जी दाए हाथ से हल्के-2 उसके लंड दबाते पाँव के उपर टखने के पास सहला रहे थे.राम्या ने पाँव की उंगलियो से पाजामे की डोर खींच उसे ढीला किया & फिर पैर के अंगूठे से उनके अंडरवेर को नीचे कर उनके लंड को थोड़ा सा नुमाया किया & उसे अपने अंगूठे & पहली उंगली के बीच फँसा लिया & उपर-नीचे करने लगी.
"अच्छी ख़ासी पहचान हो गयी है हमारी.",भाय्या जी ने बैठे-2 ही अपना पाजामा & अंडरवेर नीचे सरका दिया की राम्या आसानी से उनके लंड को हिला सके फिर उसकी सारी को थोड़ा उपर सरका उसके बाए घुटने के नीचे से उसकी टांग सहलाने लगे,"मैं इधर उस से कभी शॉपिंग करते हुए तो कभी किसी रेस्टोरेंट मे टकरा गयी.वो समिति वाली बात तो मैने आपको बताई थी,तो अब हम इधर-उधर की बाते के अलावा घर-परिवार की भी बाते करने लगे हैं."
"बहुत अच्छे.",भाय्या जी उसके घुटने के कोमल हिस्से को सहला रहे थे.उन्होने कुर्सी पे बैठे-2 अपनी कुर्सी को थोड़ा आगे सरकाया ताकि उनका हाथ राम्या की सारी के अंदर जा सके.अब वो बड़े आराम से उसकी मोटी जाँघो को सहलाते हुए उसकी चूत की ओर बढ़ रहे थे,"..दरअसल बात ये है,राम्या कि प्रधान को मैं बहुत बड़ी मुसीबत मे डालना चाहता हू.",राम्या की पॅंटी नीची कर वो उसकी चूत को अपनी उंगली से मार रहे थे.राम्या के चेहरे पे अब खुमारी की छाया दिख रही थी.उसकी आँखे नशे से बंद हो रही थी.
"प्रधान की कमज़ोरी उसका परिवार है & मैं उसे थोड़ा नुकसान पहुचाना चाहता हू..",उनकी उंगलिया राम्या की चूत के रस से गीली हो गयी थी & वो बेचैन जो अपनी कमर हिला रही थी लेकिन भाय्या जी के लंड को हिलाना उसने जारी रखा था.लंड से पाँव की उंगलियो को नीचे कर उसने उनके झांतो भरे आंडो को दबाया तो भाय्या जी की भी आह निकल गयी,"..आहह..बस इतना नुकसान कि वो थोड़ा परेशान हो जाए & इस चुनाव से उसका ध्यान हट जाए &..",उसी वक़्त उनकी उंगलियो ने कमाल दिखाया & राम्या चीख मार कमर हिलती कुर्सी के हत्थे पकड़े झाड़ गयी.उसने अपना पैर भी भाय्या जी की गोद से खींच लिया.
"..& मेरी जान तुम जीत जाओ.",भाय्या जी ने उसकी जाँघो मे फँसी पॅंटी को खींच के नीचे उतारा & कुर्सी से उठ खड़े हुए.राम्या ने अपनी टाँगे फैला के कुर्सी के हत्थो पे चढ़ा दी.भाय्या जी आगे आए & थोड़ा झुक के अपना लंड उसकी गीली चूत मे घुसाने लगे.
"उउम्म्म्मम..!",राम्या ने सर पीछे झुकाते हुए अपना बदन मोड़ अपनी चूचियाँ सामने उभार दी तो भाय्या जी के होंठ उसकी गोरी गर्दन से आ लगे,"..इसमे तो ख़तरा है..उउन्न्ह..?",राम्या ने उनके सर को अपने गले पे दबा लिया & हल्के-2 अपनी कमर हिलाने लगी.भाय्या जी धीमे मगर गहरे धक्के लगा रहे थे.वो लंड को सूपदे तक बाहर खींच फिर से बहुत धीमे अपनी प्रेमिका की चूत की गहराई मे उतार देते.
"ख़तरा है मगर वो हमे नही है.",उनके हाथ राम्या के ब्लाउस के हुक्स से उलझे थे.राम्या ने उनके हाथ अपने सीने से हटाए & उन्हे अपनी जाँघो पे रख दिया फिर खुद ही ब्लाउस के हुक्स खोल अपने ब्रा को उपर कर अपनी भारी-भरकम चूचियो को नुमाया कर दिया,"मैने इस काम के लिए आदमी लगा दिए हैं.वक़्त आने पे तुम्हे बस ये करना है कि प्रधान की बीवी से अपने मेल-जोल का इस्तेमाल कर उसके घर की खबर हमे पहुचानी है."
राम्या ने उनके सर को पकड़ उनके होंठो से अपने होंठ लगा दिए.भाय्या जी के धक्के अब तेज़ हो गये थे.प्रेमिका की ज़ुबान उनकी ज़ुबान से उलझी तो मानो उनका जोश दुगुना हो गया & उन्होने उसकी गंद को ज़ोर से भींच दिया.सिले होंठो से भी राम्या की कराह निकल ही गयी & उसने अपने हाथ उनके कुर्ते मे घुसा उनकी पीठ मे अपने नखुनो से खरोंचा & फिर आगे बढ़ उन्हे बाहो मे भर उनसे चिपक गयी.
भाय्या जी का मोटा लंड उसकी चूत की दीवारो को बुरी तरह रगड़ रहा था & वो मस्ती की ऊँचाइया च्छुने लगी थी.भाय्या जी के कुर्ते को पूरा उपर कर उन्हे बाहो मे भरे उसने उनके कंधो को थाम उनके दाए कान मे जीभ फिराई & बहुत तेज़ी से अपनी कमर हिलाने लगी-वो झाड़ रही थी.भाय्या जी ने उसकी गंद को पकड़ उसे कुर्सी से उठाया & अपने डेस्क पे लिटा दिया & खड़े-2 उसकी चुदाई करने लगे.
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क्रमशः...........