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गुलबदन और गुलनार की मस्ती compleet

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गुलबदन और गुलनार की मस्ती

फ्रेंड्स कहानी कहानी कुछ हद तक तैयार है जैसा कि मैने पहले कहा था अगली कहानी मुस्लिम गर्ल की होगी दोस्तो आपने मेरी पहली कहानी -कलयुग की सीता ( एक छिनार ) को पसन्द किया था आइ होप आपको ये कहानी भी पसंद आएगी
 


कहानी के कुछ अंश....................................................

जय के हाथ से मम्मे ऐसे दबवाने से गुलनार को दर्द हुआ लेकिन मजा भी आया। असल में गुलनार यह सब नाटक कमरे में जाके, अपनी माँ का परदाफाश करके उसके सामने ही जय से चुदवाना चाहती थी।

जय का हाथ सीने से हटाके वो बोली- “मै क्यों रोड पे जाऊँगी… मै तो अंदर जा के माँ को बोल दूंगी कि तू उसके बारे में कैसी गंदी बात कर रहा है और मुझे कैसे नंगी करके, लंड चुसवाके अभी हम माँ बेटी को एक दूसरे के सामने चोदने की बात कर रहा है। चल साले, देख राज चाचा क्या हाल करेगा तेरा…”

 
दोस्तो शाम के 8 :45 हो चुके हैं रेलवे स्टेशन पर शांति छाई हुई है 15 मिनट बाद एक ट्रेन उस छोटे से स्टेशन पे जब रुक गयी तो रात के 9:00 बजे थे। लॉन्ग स्टॉप का यह रुट असल में शाम को 4:00 बजे आता था। पर ट्रेन लेट होने से इतना टाइम लगा। जिस स्टेशन पे ट्रेन रुकी वो गॉव इतना बड़ा नहीं था। पर वो स्टेशन इंडस्ट्रियल एरिया से २० किमी दूर होने से काफी ट्रेन वहांपर रूकती थी. जब ट्रेन रुकी तो 30-40 लोग उतर गये।

उन लोगों में प्लेटफार्म पे एक 40-42 साल की औरत उसकी 20 साल की बेटी के साथ उतर गयी । जो लोग ट्रेन से उतरे, वो जल्दी जल्दी निकल गये और सिर्फ 3-4 लोग ही, थे अब प्लेटफार्म । गुलबदन जो अपनी बेटी गुलनार के साथ उतरी वो अपने पति से मिलने आइ थी। गुलबदन का पति , उस इंडस्ट्रियल एरिया में काफी अच्छी पोस्ट पे था और आज 4 महीने हो गये थे, वो एक प्रोजेक्ट पे था। इन 4 महीने में ना ही वो घर आ सका था और ना गुलबदन उससे मिल सकी थी। प्रोजेक्ट कंपनी के लिए बड़ा इम्पोर्टेन्ट था और गुलबदन का पति प्रोजेक्ट मैनेजर होने से अपने लिए वक़्त ही नहीं दे पा रहा था। अब गुलनार के कालेज की छुट्टियां होने से उसने अपनी बीवी और बेटी को अपने पास बुला लिया था।

गुलबदन ने यहां वहाँ देखा पर उसका पति कहीं नजर नहीं आ रहा था। उसका पति उसे लेने आने वाला था, पर वो अभी तक आया नहीं था और इस लिए गुलबदन और उसकी बेटी अकेली खड़ी थी प्लेटफार्म पे। जिस ट्रेन से वो आई थी, वो ट्रेन भी धीरे-धीरे करके स्टेशन से निकल गयी थी। गुलबदन ने शिफॉन की लाल साड़ी और ब्लाउज पहना था। स्लीवलेस ब्लाउज से उसके गोरे आर्म्स सेक्सी लग रहे थे। ब्लाउज टाईट होने से, अंदर की ब्रा का आउटलाइन साफ नजर रहा था।

गुलनार ने शार्ट जींस स्कर्ट और टाईट शार्ट टी शर्ट पहना था। टी शर्ट इतना टाईट था की उसकी चूंचियां उभरी उभरी दिखाई दे रही थी और टी शर्ट शार्ट होने से काफी बार उसका बेल्ली बटन भी दीखता था। दोनों माँ बेटी, एकदम सेक्सी दिख रही थी और अब ऐसी जगह खड़ी थी जहां के लोगों ने कभी इतनी सुंदर औरते देखी नहीं थीं।

गुलबदन उसके सामान के साथ खड़ी थी तो एक कुली उसका सामान उठाने के लिए आते हुए बोला- “मेमसाब, कुली चाहिए मैं सामान उठाऊँ आपका…”

गुलबदन ने उस कुली के कपड़े देखते हुए नजरें दिखाते कहा- “कैसे-कैसे गंदे कुली रखे हैं रेलवे ने स्टेशन पे। नहीं हमें कुली नहीं चाहिए। हमारे पास इतना सामान नहीं, है ना गुलनार कि कुली चाहिए ”

गुलनार ने भी उस कुली को देखते ना कहा।

 


उस कुली ने उन माँ-बेटी को ऊपर से नीचे तक देखते, और आहें भरते कहा- “क्यों मेमसाब… क्या हम इतने गंदे है…

अरे मेमसाब, आजमा के देखो तो समझ ना मेमसाब कि कैसे कुली है हम… कहो तो आप दोनो को एक साथ उठाऊँ…” दोनो को उठाने की बात करते वक़्त उस कुली की नजर में क्या फीलिंग्स थी, वो गुलबदन की नजर से छुपी नहीं थी।

पर इस अंजान जगह पर गुलबदन कुछ बोल भी नहीं सकती थी। प्लेटफार्म अब पूरा खाली हो गया था स्टेशन मास्टर और उसका असिस्टेंट और इन तीन के सिवा और कोई नहीं था वहाँ। गुलबदन ने अपनी नजर में गुस्सा दिखाते पर आवाज में वही नरमी रखते कहा- “सामान उठाने की बात जाने दो, यह बताओ, यहां से गॉव और वो इंडस्ट्रियल एरिया कितने दूर हैं गॉव में कोई अच्छा होटेल है क्या… और इसके बाद कोई ट्रेन हैं क्या …”

वो कुली गुलनार के एकदम पास खड़े होके बोला- “कल सुबह अगली ट्रेन आएगी, अब तो मेमसाब, गॉव स्टेशन से 3 किमी दूर है और वो एरिया तो 20 किमी दूर है। मेमसाब, हमारा गॉव इतना छोटा है कि कोई ढंग का लॉज भी नहीं है उसमे। और जो लॉज है एकदम गंदा और बदनाम है, जहां आप जैसे परिवार एक मिनट भी नहीं रह सकते। वैसे मेमसाब, आप रात को कहाँ ठहरोगी…”

उस कुली, को एक बार देखते ही गुलबदन को लगा कि उसे कुछ सुना डाले पर वो कुछ नहीं बोल सकी उसने इधर-उधर अपने पति को खोजते हुए कहा- “हमको तो यही रुकना है। हमारे पति हमें लेने आने वाले हैं। हमारे पति उस इंडस्ट्रियल एरिया में काम करते हैं और हम उनसे मिलने आये हैं। हम वेटिंग रूम में उनका वेट करेंगे गुलनार…”

गुलनार उसके बैग उठाते नाराजी से बोली,- “मम्मी, देखा अब्बू कैसे हैं… उनको मालूम है कि हम दोनों यहां अजनबी हैं लेकिन फिर भी हमको लेने नहीं आये…”

गुलबदन ने अपनी हैंड बैग उठाके उस कुली की तरफ देखते हुए जवाब दिया- “पता नहीं उनको कुछ काम आ गया होगा बेटा। चल हम वेटिंग रूम में उनकी राह देखते हैं और तू उनको फोन लगा। वैसे भी प्लेटफार्म पे लाइट बहुत कम है और कोई आदमी भी नहीं दिख रहे…”

जैसे ही गुलबदन वेटिंग रूम की तरफ जाने लगी तो उस कुली ने बिना बोले उनका बाकि सामान उठाके वेटिंग रूम में ले जाके रखते हुए गुलबदन के सीने की तरफ देखते कहा- “ठीक है मेमसाब, जैसी आपकी मर्जी । वैसे मैं यहां बाहर ही सोया हूँ कुछ लगे तो मुझे बुलाना। मेरा नाम राज है। मेमसाब, मेरा घर यहाँ, बाजू में है, अगर आप चाहे तो हमारे घर रुक सकती हो आपकी बेटी के साथ। यहां वेटिंग रूम में कोई नहीं होता है रात में …”

गुलबदन राज की इस बात पे कोई जवाब नहीं देती तो राज बाहर जाके, वेटिंग रूम के एकदम सामने, प्लेटफार्म पे एक कपड़ा बिछा के, गुलबदन की तरफ पैर करके लेट गया। गुलबदन ने अपने पति को मोबाइल लगाया। जब उसके पति ने फोन उठाया तो गुलबदन ने उनसे पूछा कि वो स्टेशन क्यों नहीं आये उनको लेने।

अपनी बीवी की बात सुनके उसका पति एकदम सन्न रह गया। गुलबदन का पति काम के सिलसिले में दो दिन बाहर गया था और वो यह बात भूल ही गया था कि उसकी बीवी और बेटी आने वाले थे। उनका कोई स्टाफ भी नहीं था जिसको वो बोलते कि जाके उनकी बीवी और बेटी को ले आये। आख़िर में गुलबदन के पति ने उनको कल रात का वक़्त किसी लॉज में निकालने को कहा और यह भी कहा कि वो परसों सुबह उनको लेने आएँगे। गुलबदन ने फोन कट किया और सोचने लगी कि परसो सुबह तक का वक़्त कैसे निकाला जाए। उसने गुलनार को इसके बारे में कुछ नहीं बताया।

वेटिंग रूम में काफी लाइट्स थी। उन दोनों के सिवा उस रूम में और कोई नहीं था। गुलबदन एक चेयर पे बैठी और सामने के टेबल पे अपने पैर रखे। ऐसा करने से उसकी साड़ी जरा ऊपर की तरफ उसके घुटने तक उठ गयी। गुलबदन ने साड़ी नीचे नहीं की। जब उसकी नजर बाहर लेटे राज की तरफ गयी तो उसने देखा कि राज की लुंगी घुटने के ऊपर उठी हुई थी। अचानक गुलबदन ने जो देखा उसे धक्का लगा। वेटिंग रूम की लाइट राज की ओपन लुंगी में रोशनी डाल रही, थी जिसमें गुलबदन को राज का लंड साफ दिख रहा था। राज बेखबर होके लेटा था। गुलबदन की नजर बार-बार उसके उस लंड की तरफ पहुच रही थी। गुलबदन ने गुलनार को देखा तो गुलनार एक मैगजीन पढ़ रही थी।

 
गुलबदन भी अपने पास की किताब उठाके पढ़ने का बहाना करते हुए उसके पीछे से राज का लंड देखने लगी। इधर राज प्लेटफार्म पे लेटा था, पैर गुलबदन की तरफ करके और गुलबदन को देख रहा था। गुलबदन और गुलनार के जिस्म के बारे में सोचके उसका लंड खड़ा हुआ था। अब तो गुलबदन के घुटने तक के नंगे पैर देखके उसे और भी अच्छा लग रहा था। अपने लंड की तरफ देखते हुए उसने एक बार गुलबदन को देखा और बेशर्म बनके, अपना लंड सहलाते हुए वो बोला- “क्या हुआ मेमसाब, आये क्या आपके पति…”

राज के सवाल से थोड़ा शरमाते हुए गुलबदन ने कोई जवाब नहीं दिया। बुक पे पीछे अपनी नजर डालते गुलबदन सोचने लगी कि राज का लंड कितना मोटा है। और कितने झांट के बाल भी है उसके लंड पे। आज इतने महीने पति से दूर रहके गुजारने से गुलबदन बेहाल थी। उसे लगा था कि आज रात पति के साथ खूब मस्ती करुँगी

पर अब परसो तक उसका पति नहीं आनेवाला था। इतने दिन भूखे रहने से गुलबदन लंड के लिए तड़प रही थी और अब राज का काला मोटा लंड देखके उसके जिस्म में आग लगने लगी थी। गुलबदन इसी सोच में डूबी थी जब गुलनार ने उससे कहा कि वो यहां बैठके बोर हो गयी है और जरा प्लेटफार्म पे चक्कर लगाने जा रही है। गुलबदन ने उसे रोका नहीं और बुक पढ़ने का नाटक करने लगी। जैसे ही गुलनार उसके सामने से निकल गयी, गुलबदन चुपके से राज को देखने लगी।

इधर गुलनार को रूम से बाहर आते देखकर राज ने सोचा, कि बेटी को विश्वास में ले लू तो माँ हाथ आ ही जाएगी इसलिए उसने अपना ध्यान गुलबदन से हटाके बाहर आ रही गुलनार पे लगाया। गुलनार रूम के बाहर आई। उसने देखा कि वो कुली सो रहा है। गुलनार उसके पास आके खड़ी हुई। गुलनार राज के इतने पास खड़ी थी कि राज को नीचे से, गुलनार की स्कर्ट के नीचे से उसकी गोरी गोरी टांगे दिखने लगी। गुलनार की पैंटी, भी राज को दिख रही थी और नीचे सोते हुए उसे गुलनार के बड़े मम्मे भी नजर आ रहे थे। यह सब देखके राज का लौड़ा और टाईट हो गया।

गुलनार का ध्यान उसपे नहीं है, यह देखके राज ने गुलबदन की तरफ देखते हुए अपना लंड मसलते एक स्माइल देते हुए अपनी जीभ को होंठों पे घुमाया। राज के इस इशारे को देखते ही गुलबदन समझी कि उसका इशारा उसकी जवान बेटी गुलनार की तरफ है। राज का यह इशारा देख कर गुलबदन ने कुछ सोचके गुलनार को अंदर बुलाया। गुलनार जब राज की तरफ पीठ करके, अपना बैग खोलने लगी, तो गुलबदन ने राज को देखते हुए अपना मुँह बनाते हुए उसे अपनी नाराज़गी दिखाई।

 


भले गुलबदन ने राज को देखते मुँह बिगाड़ा था, पर अब उसकी चूत भी गर्म हो रही थी।

गुलबदन को देखते, स्माइल करते हुए राज लुंगी में हाथ डाल के लंड सहलाने लगा। गुलबदन की नजर अपने लंड पे है देख के राज ने अपना लंड इतना बाहर निकला कि गुलबदन को उसके लंड का काला हेड नजर आये और अब राज गुलबदन के सामने अपना आधा नंगा लौड़ा सहलाते बार-बार गुलबदन को ओर झुकी हुई गुलनार की गांड को देखने लगा। गुलबदन समझी कि राज गुलनार को भी देख रहा है, पर वो राज का लंड देखके इतनी बेबस हुई थी कि गुलनार को कुछ बोल भी नहीं पा रही थी।

राज के आधे नंगे लंड से नजर हटाके गुलबदन ने घड़ी देखी तो रात के 10:30 बज गये थे। उसके पति का फोन भी नहीं लग रहा था। कुछ सोचके गुलबदन ने गुलनार को कहा- “बेटी, उस कुली को बुलाके लाओ। हम लोग तो रात भर यहां रुक नहीं सकते। उसने बोला है तो उसके घर चलेंगे। दिखने में तो भला आदमी लगता है और इस अंजान जगह हम माँ-बेटी कब तक अकेले रुक सकते हैं… वैसे भी तेरे अब्बू तो नहीं आएँगे, परसो सुबह तक। तो तू जाके उस कुली को बुला…”

राज के घर रुकने की असली वजह गुलबदन ने गुलनार को नहीं बताई, पर राज का लंड देखके उससे रहा भी नहीं जा रहा था।

राज को गुलबदन ने क्या कहा यह सुनाई नहीं आया, पर जैसे ही उसने गुलनार को गुलबदन की तरफ टर्न करते देखा, उसने अपना लंड लुंगी में डाला। गुलनार की टाईट गांड, गोरी टांगे और साइड से मम्मे राज देख रहा था और साथ-साथ गुलबदन का पूरा भरा सीना भी दिख रहा था। गुलबदन ने अब अपनी एक टाँग दूसरी टाँग पे ली थी जिससे उसकी गोरी गोरी टांगे उसे दिख रही थी।

गुलनार बाहर आके, राज के पास खड़ी होके उसे आवाज देने लगी।

सोने का नाटक कर रहे राज ने एक बार फिर नीचे से सीने तक गुलनार की जवानी को देखते हुए आँखे खोली। गुलनार बोली- “सुनो, चलो, तुम्हे मम्मी बुला रही हैं…”

गुलनार के सामने आराम से उठते, खड़े होके, लंड एडजस्ट करके राज रूम में गया। गुलनार बाहर ही खड़ी थी। गुलबदन के पास जाके, अपना लंड सहलाते राज बोला- “क्या है मेमसाब… क्यों बुलाया मुझे…” फिर स्माइल करते आगे बोला- “तुम दोनो में से किसको उठाना है, मेरा मतलब किसका सामान उठाना है, या तुम दोनों को एक साथ उठाना है क्या…”

गुलबदन ने राज का इशारा समझा और बोली- “देखो स्टेशन से बाहर तक छोड़ दो, यहां काफी अंधेरा है और अब कोई भी नहीं है यहां…”

गुलनार को बुलाते गुलबदन बोली- “गुलनार, तुम आगे जाके किसी टैक्सी को रोको मैं इस कुली के साथ अपना सामान लेकर आती हूँ…”

गुलनार ने अपनी हैंड बैग उठाई और स्टेशन के बाहर चल पड़ी। अपनी तरफ ऊँगली और जाती हुई गुलनार की तरफ इशारा करते गुलबदन आगे बोली- “कितना किराया लोगे यह सब माल समान उठाने का…” फिर राज की लुंगी की तरफ, उसके लंड को देखते गुलबदन बोली- “मेरा नाम गुलबदन है और यह मेरी बेटी गुलनार है…”

गुलबदन की आँख में चमक और हवस साफ दिख रही थी। गुलबदन की गोरी टाँग और सीने को देखते राज बोला- “मेमसाब, आप अभी इस अंधेरे में कहां जाओगी… गॉव यहां से काफी दूर है और गॉव में कोई लॉज भी नहीं है…” गुलबदन को देखते अपना लंड बेफिक्री से सहलाते राज आगे बोला- “मेमसाब, सब माल समान उठाने का भाड़ा अगर देखो तो आप इतनी बड़ी हैं और आपकी जवान बेटी, मतलब कम-से-कम पूरी रात और एक ज्यादा मर्द लगेगा तुम दोनों को उठाने में …” गुलबदन को आँख मारते राज आगे बोला- “वैसे वो माल सामान उठाना पड़ा तो बहुत मजा आएगा हमको, इतना जवान और कसा माल है। खूब मस्ती से उठाऊँगा उसे पूरी रात। वैसे तुम भी कुछ कम नहीं हो, शादीशुदा हो तो तुम्हारे साथ भी बड़ा मजा आएगा, क्यों सच कह रहा हूँ ना मैं मेमसाब…”

 
गुलबदन समझती है कि राज भी वही चाहता है जो उसके दिल में है और गुलबदन बोली- “तुम फ़िक्र मत करो, वो आगे देखूँगी, पहले टैक्सी तो मिलने दो। तुम वो सब मुझपे छोड़ दो। वो माल मिले ना मिले यह माल जरूर मिलेगा तुमको…” यह कहते गुलबदन ने अपनी तरफ इशारा किया और आगे कहा- “राज, वैसे वो माल अभी कमसिन है ना इसलिए उसका मत सोचो, मैं हूँ ना, ठीक है…”

गुलबदन के जवाब से खुश होके, राज ने नीचे झुकके सब सामान उठाया। सामान लेके खड़े होते उसने गुलबदन को एक बार पूरी तरह देखते कहा- “कोई बात नहीं अगर हमें यह माल भी मिला तो। ठीक है मेमसाब, आपकी बेटी टैक्सी लाने तक हम वहाँ चले क्या… वैसे मेमसाब, कितनी उमर है इस माल की और उस माल की… आप दोनों माँ बेटी नहीं बल्कि बहन लगती हैं इसलिए पूछ रहा हूँ। और मेमसाब, आप रात में कहाँ रुकोगे…”

राज के सामने झुकके, अपनी बैग उठाते, उसे अपना क्लीवेज दिखाते गुलबदन बोली- “पहले यहां से बाहर तो चलो, फिर सोचेंगे कहां रात गुजारनी है। एक बात बता, तुम मेरी बेटी को ऐसे घूर-घूर के क्यों देख रहे हो…”

गुलबदन का क्लीवेज देखके, होठों पे जीभ घुमाते हुए राज बोला- “मेमसाब वो माल मस्त है आपका, एकदम कमसिन और फ्रेश, सच्ची बोलू मेमसाब… आपकी बेटी मस्त जवानी से भरी है, बिलकुल आप जैसे , इसलिए मैं उसे घूर घूर के देख रहा था। वो भी कैसे मस्त दिखा रही थी अपना बदन…” यह कहते राज ने आँख मारी

अपने चहेरे पे गुस्सा दिखाते हुए पर दिल में खुश होके गुलबदन बोली- “क्या बोलता है तू राज…” जब लड़की की माँ उसे इतना बढ़ावा दे रही, थी तो राज क्या पीछे रहता। सब सामान अपने कंधे पे लटकाते, दोनों हाथ खुले रखते राज बोला- “सच्ची मेमसाब, देखा नहीं आपकी बेटी के मम्मे कैसे उभरे हुये हैं बिलकुल एक औरत जैसे है और उसकी गोरी गोरी टांगे मुझे दीवाना कर रही है। कसम से, आपकी बेटी को तो रात भर उठाना पड़े तो उसको खूब मजा दूंगा। उससे दिखा दूंगा कि असल मर्द क्या होता है। मेमसाब आपकी बेटी माल और उस इस माल बनी माँ की उमर क्या है…”

राज के जवाब से गुलबदन को यकीं हुआ कि उसने आज रात राज के घर गुजारने का फैसला करके कोई गलती नहीं की थी। जो मर्द एक माँ के सामने उसकी बेटी को रात भर चोदने की बात कर सकता है, वो गुलबदन जैसी अनुभवी औरत को कितना मजा दे सकता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। दोनों प्लेटफार्म से उतर के एक ऐसी जगह आये थे जहां लाइट कम थी और जमीन पे पानी था। गुलबदन चलते-चलते जरा लड़खड़ाई तो राज ने उसे पकड़ा।

अपने आपको संभालते गुलबदन बोली- "जिसे तू बेटी की माल माँ बोल रहा है वो मैं 42 साल की हूँ और इस माल माँ की बेटी 20 की है। राज तुझे शर्म नहीं आती एक माँ के सामने उसकी बेटी के बारे में ऐसी गन्दी बात करते…”

गुलबदन की कमर में हाथ डालते, उससे संभालते राज बोला- “मेमसाब संभल के चलो, वहाँ कीचड़ है। क्या मेमसाब, मजाक करती हो… आप तो 35 साल का माल लगती हो और उस माल की उमर 16-17 से ज्यादा नहीं लगती। आप दोनो माँ बेटी नहीं बहन लगती हो…”
 
राज का हाथ अपनी कमर से हटाके, गुलबदन ने अब कीचड़ से बचने के लिए अपनी साड़ी घुटनों के ऊपर उठाई। इससे अब राज को गुलबदन के घुटनो के ऊपर तक के नंगे पैर साफ दिखने लगे। अपना लंड सहलाते राज आगे बोला- “यकीं नहीं आता कि वो 20 साल की है, 16-17 साल का मस्त तैयार माल लगती है तेरी बेटी। वैसे मेमसाब, अगर आप बुरा ना मानो तो हमारे घर रुक सकती हो रात भर। बोलो क्या आप तैयार हो पूरी रात हमारे घर में गुजारने के लिए… पूरी रात तुम माँ-बेटी को आराम से रखूँगा मैं। आपकी बेटी अकेली गयी है, यहां के लोग बहुत हरामी है, कोई उठाके ले गया उस माल को और रात भर ऐश की आपकी बेटी के साथ तो… आपकी बेटी मस्त है, एकदम गरम माल है और उसका बदन भरा हुआ है, तो कोई हरामी मर्द अपनी गर्मी उतारने को ले जा सकता है उसे। चलो जल्दी मेमसाब…” यह कहते राज ने गुलबदन की गांड पे हाथ घुमाया।

गुलनार के बारे में कह गयी बात सुनके गुलबदन को अच्छा लगा। राज सच ही बोल रहा था। उसकी बेटी थी ही इतनी मस्त कि मर्द का दिल आ ही जाता उसपे और गुलनार ने जो कपड़े पहने थे उसमे तो किसी भी मर्द को उसे चोदने की इच्छा ज़रूर होती आज की रात तो राज के साथ गुजारनी थी, पर पहली बार उसका हाथ एकदम ओपन्ली अपनी गांड पे लगते ही गुलबदन को अच्छा लगा। कितना मादक और गर्म हाथ था उसका। गुलबदन ने अपनी गांड पे घूम रहे राज के हाथ को बिना हटाए कहा- “क्या मतलब है तेरा… तुम्हारी बेटी जैसी है वो राज, 21 की उमर है उसकी पर तुम यह सब क्यों पूछ रहे हो…”

गुलबदन की तरफ से कोई रुकावट ना देखते, राज ने अब बिंदास उसकी गांड मसलते कहा- “बस ऐसी ही पूछ रहा हूँ तेरी बेटी के बारे में। माँ कसम मेमसाब, आपकी बेटी एकदम मस्त लगती है इसलिए पूछा मैंने यह सब। क्या आपकी बेटी को कोई मसलता है क्या … नहीं उसका सीना तुम्हारे इतना ही उभरा हुआ और तुम्हारे इतने ही बड़े मम्मे हैं इसलिए पूछा मैंने। और मेमसाब, मुझे तो बेटी है ही नहीं और अगर ऐसी बेटी होती तो ना जाने मैं क्या करता, इसमें क्या बेशर्मी मेमसाब… अब मेरी बात छोड़ो, यह बोलो, तुम मेरी पैंट की ओर खास कर मेरी कमर के नीचे की तरफ क्या देख रही थी स्टेशन पे…”

एक तो अपनी बेटी और अपने बारे में राज के खयाल सुनके, अपनी गांड पे इतने बेफिक्री से हाथ घुमाने और अब उसके इस सवाल से गुलबदन एकदम हक्का बक्का रह गयी।

पहले उसने कुछ समझा नहीं कि क्या जवाब दे पर वो बोली- “तूने पैंट कहाँ पहनी है… यह तो लुंगी पहनी है तूने। हमारे यहां कुली लोग नार्मल पेंट या लहँगा पहनते है और उनके कपड़े काफी साफ सुथरे होते है, तुम्हारे जैसे गंदे नहीं…” यह कहते गुलबदन का ध्यान फिर राज के लंड पे गया।

गुलबदन के देखने पे राज दूसरे हाथ से अपना लंड मसलने लगा। चलते-चलते एक छोटे से पत्थर की वजह से गुलबदन आफ बैलेंस हो गयी और करीब करीब गिर ही गयी, पर राज ने पीछे से दोनों हाथ उसकी कमर में डालके उसे संभाला। गुलबदन को संभालते-संभालते, राज के हाथ उसके सीने तक गये और गुलबदन के दोनो मम्मे उसके हाथ में थे। गिरने से बचने के लिए

गुलबदन ने सपोर्ट के लिए हाथ पीछे लिया और राज की कमर पकड़ी। जब तक राज के हाथ उसके मम्मे पे गये, गुलबदन सम्भल चुकी थी, पर अब राज को अपनी तरफ से ग्रीन सिग्नल दिखाने के बहाने उसने बैलेंस के सपोर्ट ढूँढ़ते-ढूँढ़ते राज का लंड पकड़ा। लुंगी में बिना अंडरवेअर के राज के लंड को पकड़ते ही गुलबदन को अहसास हुआ कि राज का लंड एकदम कड़क और गर्म है जैसे कोई लोहे का रोड हो। “अरे-अरे मेमसाब संभाल के चलो…” गुलबदन के मम्मे जरा मस्ती से मसलते राज ने उसे खड़ी किया।

गुलबदन ने खड़ी होने के बाद राज का लंड छोड़ दिया पर राज ने अभी अपना हाथ मम्मे से बिना हटाए कहा- “आप ठीक हो ना मेमसाब…”

गुलबदन ने बिना बोले हाँ में सर हिलाया। राज अब उसके मम्मे बहुत मस्ती से दबाते, गांड पे लंड रगड़ने लगा। कुछ पल राज ने उसे ऐसे खड़े-खड़े ही रगड़ लिया। गुलबदन को भी बड़ा अच्छा लग रहा था राज के हाथ से मम्मे और लंड से गांड रगड़ने का स्वाद लेना चाहती थी इसलिए उसने राज को रोका नहीं।

 


गुलबदन के ब्लाउज में हाथ डालते हुए राज बोला- “आह, क्या मस्त माल है तू मेमसाब। आज की रात हमारे साथ आ, ऐसा मजा दूंगा कि ज़िन्दगी भर याद रखेगी हमारे लंड को। मेमसाब, सच बोलता हूँ, पूरी रात तुझे और तेरी कमसिन बेटी को चोदके बेहाल कर दूंगा…”

गुलबदन को यकीं था कि राज जो बोल रहा है, वैसा ही कर भी सकता है और गुलबदन उसी के लिए उसके साथ चल पड़ी थी। दोनो स्टेशन के एग्जिट के एकदम पास थे। अब बाहर जाने का वक़्त आया था तो गुलबदन ने राज को अपने से दूर किया और स्टेशन के बाहर चली गयी। राज उसके पीछे सामान लेकर था ही। गुलनार को वहाँ हैरान खड़ी देख, गुलबदन कुछ समझी नहीं।

गुलनार को टैक्सी नहीं मिली थी पर वहाँ के 3-4 तांगेवाले, गुलनार को अपने में घेरे हुए, उसे घूर-घूर के देख के गन्दी कमेंट्स पास कर रहे थे। गुलबदन ने वो नजारा देखा और जल्दी से गुलनार के पास गयी। अब तो रात को राज के घर रुकने का आईडिया उसने फिक्स ही कर दिया क्यूंकि अगर वो यहां और जरा टाइम रूकतीतो उसकी बेटी

को वो हरामी तांगेवाले ना जाने कैसे-कैसे चोदते।

गुलनार के पास जाके, उसका हाथ पकड़ते हुए हलकी आवाज़ में गुलबदन बोली- “गुलनार, हम ऐसा करते है, आज रात यह राज चाचा के घर रुकेंगे…” यह कहते गुलबदन ने साइड में खड़े राज को देखके स्माइल दिया जिससे राज समझा की गुलबदन आज रात उससे चुदवाने तैयार थी।

अपनी माँ को देखके गुलनार को भी अच्छा लगा और गुलनार ने हाँ में सर हिलाया।

गुलनार के मम्मे को देखते हुए राज बोला- “हाँ… क्यों नहीं मेमसाब, क्या कहती हो गुलनार बेटी…”

अपनी माँ को तैयार देख गुलनार भी हाँ बोली। राज को देखके वहाँ खड़े तांगेवाले वहाँ से निकल गये। गुलनार बैग लेने झुकी तो गुलबदन ने राज को आँख मारते कहा- “क्यों ना हम लोग एक तांगा ले, ताकि चलके जाने में और थक नहीं जायेंगे…”

गुलबदन की मारी आँख का इशारा समझते राज वहीँ एक साइड में खड़े टांगे के पास ले गया और बोला- “हाँ ठीक है मेमसाब, चलो ताँगे से चलते है हमारे घर। हमारे दोस्त जय का है तांगा है। अरे जय भाई, तांगा खली है क्या… सवारी है हमारे घर तक की…”

जय ने उन सेक्सी माँ बेटी को अच्छे से देखते कहा- “हाँ मेमसाब, तैयार हूँ ना मैं। आओ, आराम से चढ़ो ऊपर आप दोनों । चलो बैठो तो हमारे ताँगे में…” जय ने देखा की राज उससे गुलनार को दिखा के इशारा कर रहा था। राज का इशारा समझते जय बोला- “राज, छोटी मेमसाब को हमारे पास बैठा दे और तुम पीछे बैठो बड़ी मेमसाब के पास, ताकि हमारे घोड़े पे लोड ना आये, ठीक है…”

गुलबदन और राज ने हाँ में सर हलाया और गुलबदन बोली,- “गुलनार, तुम आगे बैठो, मैं यह समान ले के इसके साथ पीछे बैठती हूँ…”

गुलनार अपनी माँ की बात मान गयी और ताँगे में चढ़ने झुकी। इस झुकने से जय को गुलनार का पूरा क्लीवेज साफ दिख गया गुलनार को चढ़ने में मदद करने के बहाने, जय ने उसका एक हाथ पकड़ते हुए कहा- “राज, भाड़ा कौन देगा और यह लोग तुम्हारे घर कैसे आ रहे हैं…”

राज गुलनार के पीछे आके खड़े रहते बोला- “अरे जय, मैं भाड़ा दूंगा और यह मेमसाब से टिप भी मिलेगी तुझे। चल तो सही तू…”

गुलनार चढ़ नहीं पा रही यह देख के राज उसे मदद करने के बहाने, उसकी कमर पकड़ते हुए ऊपर चढ़ाते कहा- “आओ गुलनार, मैं तुमको जय के ऊपर चढ़ने में मदद करता

राज की डबल मीनिंग की बात गुलनार को छोड़के सब समझे पर कुछ नहीं बोले। गुलनार को चढ़ने में मदद करने के बहाने, जय ने उसके मम्मे मसल डाले तो गुलनार जरा अनकम्फर्टबल हुई यह देख के राज बोला- “अरे बेबी, क्या हुआ… तुमको तकलीफ हो रही है क्या मेरी मदद से… देख तेरी मम्मी को, कैसे मेरी मदद से अब ऊपर चढ़ जाएंगी…”

गुलनार जय के साथ बैठ गयी तो गुलबदन के पीछे खड़े होके, उसकी गांड मसलते राज बोला- “चलो मेमसाब, आपकी बेटी को आगे की तरफ जय के साथ चढ़ा दिया, अब आप हमारे साथ, ऊपर चढ़ जाओ, मेरी मदद से…”

राज की बात पे खुश होके, उसे आँखे मारते और उससे गांड मसलवाते, गुलबदन भी ऊपर आई। जब राज उसके पास बैठा तो गुलबदन ने हलके से उसका लंड दबाया। राज के बैठने के बाद गुलबदन ने देखा कि गुलनार आगे की तरफ देख रही थी और यह मौका देखके उसने राज के लंड को पकड़ा और राज ने एक हाथ गुलबदन की कमर में डालके, उसे पास खींचते दूसरे हाथ से उसकी चूची पकड़ते बोला- “चलो जय, आराम से चलना रोड खराब है…”

 
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