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Guest
बात उस वक्त की है जब शोफर ने लिमोजीन उस बिल्डिंग की पार्किग में पार्क कीं जिसमेँ गजाला का फ्लैट था और बिजय क्रो लेने लिफ्ट की तरफ चला गया ।
अलफांसे मानो किसी ऐसे ही मौके की तलाश में वहां पहले से छुपा हुआ था ।
मोका लगते ही वह लिमोजीन की पिछली सीट के पीछे जा छुपा ।
पुराने ओर 'घिसे हुए' पाठक जानते हैँ कि अंतर्राष्टीय शातिर कै लिए ऐसे काम चुटकी बजाने जितने आसान होते हैँ । लिमोजीन के ताले की बिसात क्या थी, दुनिया के किसी भी ताले को खोल देने वाली मास्टर की हमेशा उसकी जेब में रहती है ।
करीब सात मिनट बाद शोफर विजय को उठाए लिमोजीन तक आया । उसे पिछली सीट पर बैठाया और गाडी आगे बढाई ।
विजय उठकर शोफर की बगल वाली सीट पर जा बैठा और बातों बातों में उससे कइ काम की बात निकलवाने क्री काशिश करता रहा पर शोफर था कि यह कहने के बाद चुप हो गया कि उसके मालिकों ने किसी भी सवाल का जवाब न देने का हुक्म दिया हे और तब, जब लिमोजीन कुतुबमीनार जेसी इमारत के पोर्च में रुकी, अलफासे रोमांचित हो उठा क्योंकि जानता था कि यह इमारत हाजी गल्ला का हेडक्वार्टर हे । बही हेडक्वाटर जिसका जिक्र उसने विजय से किया या । जिसके बारे में कहा था कि परिंदे ने भी घुसने की कोशिश की तो पंख जला बैठेगा।
........................
शोफर विजय को लेकर इमारत कै अंदर चला गया । अलफांसे ने काफी देर वाद खुलकर अंगडाई ली क्योंकि एक पोज में पडे पडे जिस्म अकड गया था,,,,,
.....बल्कि सीट की पुश्त कें पीछे से निकलकर सीट पर बैठ गया क्योंकि काले कांच के कारण वह भले ही गाडी से बाहर का नजारा कर सकता हो परंतु बाहर से उसे कोइ नहीं देख सकता था । गाडी कै आसपास और दूर दूर तक सशस्त्र गार्डस तैनात थे-इतने ज्यादा कि उनकी नजरों से छुपकर वाहर निकलना नामुमकिन था और उनमे से किसी कै द्वारा देख लिए जाने का मतलब था-राम नाम सत्य ।
अपने एक्सपीरिएंस कै आधार पर अलफांसे जानता था कि विजय क्रो अब इमारत से बाहर निकालकर नहीं लाया जाएगा जबकि कुछ ही देर बाद शोफर का आना निश्चित हे ।
वह लिमोजीन को यहां से हटाएगा ।
इमारत की वाऊंड्री वाल से वाहर भी ले जा सकता है ।
ऐसा हो गया तो...उसका छुपकर यहा तक आना बेकार हो जाएगा ।
अत: शोफर के आने से पहले गाडी से निकलकर कहीं और छुप जाना ज़रूरी था परंतु ऐसा होना असंभव नज़र आ रहा था।
ओर...असंभव ही साबित हुआ क्याकि भरपूर दिमाग लगाने के बावजूद अलफांसे शोफर के लौटने तक भी कोई तरकीब न सोच सका ।
जेसा कि था…शौफर आते ही अपनी सीट पर बेठा, गाडी स्टार्ट की और वेक करनी शुरू कर दी।
शोफर कें गाडी में आने से पहले ही अलफासे पुरानी जगह पर उकडूं होकर छूप चुका था ।
थोडी वेक होने कै वाद गाडी सामने की तरफ बढी और कुतुबमीनार जेसी इमारत का चक्कर लगाकर उसके पीछे की त्तरफ पहुच गइ ।
सशस्त्र गाड वहा भी तैनात थे । अलफासे ने उचककर देखा…लिमोजीन एक गेराज के शटर की तरफ मुंह किए खडी थी । शोफर ने गाडी कै डेशबोड पर पड़ा रिमोट उठाकर कोई बटन दबाया ।
शटर ऊपर उठ गया ।
शोफर गाडी को गैराज में ले गया ।
रिमोट से शटर वापस बंद किया ।
अब सूर्य की किरणे गैराज के अंदर नहीं आ रही थीं परंतु वहां एक बल्ब रोशन था ।
शोफर बाहर निकला ।
गाडी लाक की और गेराज में माजूद एक अन्य दरवाजे की तरफ बढ़ गया ।
जेब से चाबी निकालकर दरवाजे का लाक खोला तथा दूसरी तरफ चला गया ।
उसके तुरंत बाद, दूसरी तरफ से लाक में चाबी घूमी यानी...लाक वापस लाक हो गया था । गेराज को रोशन करता एकमात्र बल्ब आफ ।
अंधेरा छा गया वहां.......मगर हमारा अंतरर्राष्ट्रीय शातिर खुशी की ज्यादती के कारण बल्लियों उछल रहा था क्योंकि गाडी को बाऊड्री वाल से बाहर नहीं ले जाया गया था ।
उसे यह समझते देर न लगी थ्री कि सुरक्षा कारणों से शोफर कै रेजिडेंस का दरवाजा इसी गैराज से दिया गया है और वह कुतुबमीनार जेसी इमारत के अंदर ही हे ।
अब वह 'एक्शन' कर सकता था । मगर उसके ख्याल से किसी भी एक्शन के लिए अभी उचित समय न था............अत: आराम से पिछली सीट पर लेट गया और रात होने का इंतजार करने लगा ।
कुछ देर बाद जेब से पिंग पिंग की आवाज़ आइ । उसने वह यंत्र निकालकर देखा जिसे बिजय ने गजाला कें फ्लेट की खिडकी से बाहर फेंका था ।
उसकी छोटी सी स्क्रीन पर कुछ लिखा था ।
उसे पढकर अलफासे के होठों पर बडी ही बिचित्र मुस्कान उभरी ।
यंत्र पर कुछ टाइप किया ओर पुन: आराम से लेट गया । रेडियम डायल रिस्टवाच ने जब बारह बजाए तो आहिस्ता से दरवाजा खोलकर लिमोजीन से बाहर आया ।
जेब से पेंसिल टार्च निकालकर आन की और उस दरवाजे के करीब पहुंचा जिसके पीछे शौफ़र गुम हुआ था ।
अगले पल उसने मास्टर की से लाक रब्रोल लिया था मगर इस तरह से कि ज़रा भी आवाज़ न हो । किवाड़ खोलने पर उसने खुद क्रो एक गेलरी में पाया ।
गेलरी तीन फुट चोडी और करीब दस फुट लंबी थी । टार्च हाथ में लिए, उसकी कमजोर रोशनी की मदद से दबे पांव आगे बढा ।
गेलरी एक छोटी सी लावी मेँ खत्म हुइ । लाबी के एक तरफ दो दरवाजे थे, दूसरी त्तरफ़ एक ।
सामने की तरफ पांच फुट चौडी गेलरी थी । गेलरी के अंतिम छोर पर दरवाजा ।
वह अंदर की तरफ से बंद था ।
अलफांसे को समझते देर न लगी कि वह इस छोटे से फ्लैट का मुख्यद्वार है । दाई तरफ कें बंद दरवाजे के पीछे से किसी के खर्राटों की आवाज आ रही थी ।
अलफासें ने अनुमान लगाया कि खर्राटे शोफर की नाक से निकल रहे हें ।
दबे पांव दरवाजे के नजदीक पहुंचा ।
किवाढ़ को धक्का देकर खोलने की कोशिश क्री मगर वह अंदर से बंद था ।
अब. . रिस्क लेने का वक्त आ गया था और आप तो जानते ही हैं…अलफासे नाम ही उसका है जिसे रिस्क लेने में मजा आता है।
अत: बंद दरवाजे पर हौले से दस्तक दी ।
पहली और इतनी हल्की दस्तक से कुछ न हुआ । वह तीसरी और जोर से दी गई दस्तक थी जिसके बाद अंदर से थोडी झल्लाईं हुईं आवाज आई…“कौन है?"
अलफांसे पहचान गया…आबाज़ शोफर की ही थी मगर मुंह से जवाब देने की जगह पुन: दस्तक दी ।
"बोलता क्यों नहीँ, कौन है?" ज्यादा झल्लाकर कहा गया ।
अलफांसे बोला अब भी कुछ नहीं, बस दस्तक दे दी ।
जाहिर अंदर वाले की झल्लाहट चर्म पर पहुंच गई । उसने भन्नाए हुए अंदाज में दरवाजा खोला और...खोलते ही कुछ और ज्यादा भन्ना उठा क्योकि एक रिवाल्वर की नाल अपनी कनपटी पर महसूस की थी ।
इस वक्त उसके चेहरे पर हवाइयां उड़नी चाहिए थीं मगर उसकी जगह होठों पर अजीब सी मुस्कान नजर आई ।
इस मुस्कान पर उसने अलफांसे की नजर नहीं पड़ने दी थी ।
जिस्म पर केंवल अंडरवियर और बनियान था ।
अलफांसे ने रिवाल्वर से टोहते हुए कहा-“अंदर चल ।"
वह बेक गेयर में डल गया ।
कमरे कै अंदर पहुंचते ही अलफांसे ने दरवाजा वापस बंद कर लिया और बोला-"ज्यादा हैरान होने की ज़रूरत नहीं है । मैँ उस शख्स का साथी हूजिसे आज दिन में तूयहा लाया था ।"
"प पर तुम यहां कैसे पहुच गए ? "
"तुम्हारी लिमोजीन की पिछली सीट के पीछे छुपकर ।"
शोफर चुप ।
"मेरे ख्याल से तूसमझ गया होगा कि यदि तूने मेरा कहा नहीं माना तो मैँ तुझे मार डालूँगा ।"
उसके चेहरे पर कत्थक करती मौत साफ नजर आ रही थी । ऐसा लगा जैसे बडी मुश्किल से पूछ सका हो-“क्या चाहते हो ?"
“मुझें मेरे साथी कै पास ले चल ।"
"य ये कैसे हो सकता हे ! ”
"रास्ता तुझे निकालना होगा ।"
“रास्ता तो मालुम है मगर...
"मगर ? "
"र रास्ते में अनेक गार्ड तैनात हैं । वे मुझे तो जाने दे सकते हैँ मगर तुम्हें नहीं । तुम्हारे साथ मैं भी पकड़ा जाऊंगा ।”
“कोइ तरीका निकाल ।"
"ऐसा कोई तरीका नहीं है ।”
“तो मरने कै लिए तैयार हो जा ।”
“ज.....जी ! "
"क्या तू अभी नहीं समझा कि या तो मेरे साथी के पास ले जाएगा या मेरे रिवॉल्वर की गोली से मारा जाएगा ! दोनों में से एक काम होना निश्चित हे ।"
उसे बुरी तरह डरा देने वाले लहजे में कहा था ओर...वह बेचारा डर भी गया ।
चेहरे पर मंडराते खाफ कें साए साफ नज़र आरहे थे । बुरी तरह हकलाती आवाज में कहता चला गया-"म मुझे नहीं मालूम आप कौन हें मगर मुझ पर रहम कीजिए । कोशिश कीजिए समझने कौ कि अगर मैें आपको वहां ले जा सकता तो ज़रूर ले जाता । जब मेरे हाथ में ही कुछ नहीं है तो...प्लीज, मुझे मत मारिए ।"
उसे डराने कै लिए अगली धमकी देता-देता अलफांसे खुद ही रुक गया । कारण गार्डं की वह वर्दी थी जो दीवार में गढी कील में लटकें हैंगर मेँ लटक रही थी ।
उस पर नजरें टिकाए अलफांसे ने पूछा-"वो किसकी है ?'"
“मेरे रूम पार्टनर की ।"
"इस वक्त कहां हे ?'
"डूयूटी पर ।"
"तो वर्दी यहां क्यों है ? "
"दो जोडी होती हैं न !"
“गुड ।” अलफांसे के दिमाग ने तेजी से काम किया…"मैं इसे पहनकर चलूंगा । शोफर वाली वर्दी कहां है?”
“अलमारी में ।"
"तूउसे पहन ले । "
शोफर का चेहरा ऐसा नज़र आने लगा जैसे किसी ने हल्दी पोत दी हो । बोला…"स समझने की कोशिश कीजिए । रास्ते में तैनात कोई न कोइ गार्ड पहचान लेगा कि आप असलम नहीं हो ।"
अलफांसे समझ गया वर्दी असलम माम के शख्स की हे परंतु बोला…“बिल्डिंग में इतने सारे गार्ड तैनात हें कि यह मुमकिन ही नहीं हे कि सभी एक दूसरे को जानते पहचानते हों ।”
"ये तो ठीक हे मगर. . .
"ज्यादा हुज्जत की तो गोली मार दूंगा ।" अलफांसे उसकी बात पूरी होने से पहले ही गुर्राया…"'अगर मगर की कोई गुंजाइश नहीं है । अपनी वर्दी पहन । मैं गार्ड की वर्दी पहनता हूं ।'"
अलफांसे मानो किसी ऐसे ही मौके की तलाश में वहां पहले से छुपा हुआ था ।
मोका लगते ही वह लिमोजीन की पिछली सीट के पीछे जा छुपा ।
पुराने ओर 'घिसे हुए' पाठक जानते हैँ कि अंतर्राष्टीय शातिर कै लिए ऐसे काम चुटकी बजाने जितने आसान होते हैँ । लिमोजीन के ताले की बिसात क्या थी, दुनिया के किसी भी ताले को खोल देने वाली मास्टर की हमेशा उसकी जेब में रहती है ।
करीब सात मिनट बाद शोफर विजय को उठाए लिमोजीन तक आया । उसे पिछली सीट पर बैठाया और गाडी आगे बढाई ।
विजय उठकर शोफर की बगल वाली सीट पर जा बैठा और बातों बातों में उससे कइ काम की बात निकलवाने क्री काशिश करता रहा पर शोफर था कि यह कहने के बाद चुप हो गया कि उसके मालिकों ने किसी भी सवाल का जवाब न देने का हुक्म दिया हे और तब, जब लिमोजीन कुतुबमीनार जेसी इमारत के पोर्च में रुकी, अलफासे रोमांचित हो उठा क्योंकि जानता था कि यह इमारत हाजी गल्ला का हेडक्वार्टर हे । बही हेडक्वाटर जिसका जिक्र उसने विजय से किया या । जिसके बारे में कहा था कि परिंदे ने भी घुसने की कोशिश की तो पंख जला बैठेगा।
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शोफर विजय को लेकर इमारत कै अंदर चला गया । अलफांसे ने काफी देर वाद खुलकर अंगडाई ली क्योंकि एक पोज में पडे पडे जिस्म अकड गया था,,,,,
.....बल्कि सीट की पुश्त कें पीछे से निकलकर सीट पर बैठ गया क्योंकि काले कांच के कारण वह भले ही गाडी से बाहर का नजारा कर सकता हो परंतु बाहर से उसे कोइ नहीं देख सकता था । गाडी कै आसपास और दूर दूर तक सशस्त्र गार्डस तैनात थे-इतने ज्यादा कि उनकी नजरों से छुपकर वाहर निकलना नामुमकिन था और उनमे से किसी कै द्वारा देख लिए जाने का मतलब था-राम नाम सत्य ।
अपने एक्सपीरिएंस कै आधार पर अलफांसे जानता था कि विजय क्रो अब इमारत से बाहर निकालकर नहीं लाया जाएगा जबकि कुछ ही देर बाद शोफर का आना निश्चित हे ।
वह लिमोजीन को यहां से हटाएगा ।
इमारत की वाऊंड्री वाल से वाहर भी ले जा सकता है ।
ऐसा हो गया तो...उसका छुपकर यहा तक आना बेकार हो जाएगा ।
अत: शोफर के आने से पहले गाडी से निकलकर कहीं और छुप जाना ज़रूरी था परंतु ऐसा होना असंभव नज़र आ रहा था।
ओर...असंभव ही साबित हुआ क्याकि भरपूर दिमाग लगाने के बावजूद अलफांसे शोफर के लौटने तक भी कोई तरकीब न सोच सका ।
जेसा कि था…शौफर आते ही अपनी सीट पर बेठा, गाडी स्टार्ट की और वेक करनी शुरू कर दी।
शोफर कें गाडी में आने से पहले ही अलफासे पुरानी जगह पर उकडूं होकर छूप चुका था ।
थोडी वेक होने कै वाद गाडी सामने की तरफ बढी और कुतुबमीनार जेसी इमारत का चक्कर लगाकर उसके पीछे की त्तरफ पहुच गइ ।
सशस्त्र गाड वहा भी तैनात थे । अलफासे ने उचककर देखा…लिमोजीन एक गेराज के शटर की तरफ मुंह किए खडी थी । शोफर ने गाडी कै डेशबोड पर पड़ा रिमोट उठाकर कोई बटन दबाया ।
शटर ऊपर उठ गया ।
शोफर गाडी को गैराज में ले गया ।
रिमोट से शटर वापस बंद किया ।
अब सूर्य की किरणे गैराज के अंदर नहीं आ रही थीं परंतु वहां एक बल्ब रोशन था ।
शोफर बाहर निकला ।
गाडी लाक की और गेराज में माजूद एक अन्य दरवाजे की तरफ बढ़ गया ।
जेब से चाबी निकालकर दरवाजे का लाक खोला तथा दूसरी तरफ चला गया ।
उसके तुरंत बाद, दूसरी तरफ से लाक में चाबी घूमी यानी...लाक वापस लाक हो गया था । गेराज को रोशन करता एकमात्र बल्ब आफ ।
अंधेरा छा गया वहां.......मगर हमारा अंतरर्राष्ट्रीय शातिर खुशी की ज्यादती के कारण बल्लियों उछल रहा था क्योंकि गाडी को बाऊड्री वाल से बाहर नहीं ले जाया गया था ।
उसे यह समझते देर न लगी थ्री कि सुरक्षा कारणों से शोफर कै रेजिडेंस का दरवाजा इसी गैराज से दिया गया है और वह कुतुबमीनार जेसी इमारत के अंदर ही हे ।
अब वह 'एक्शन' कर सकता था । मगर उसके ख्याल से किसी भी एक्शन के लिए अभी उचित समय न था............अत: आराम से पिछली सीट पर लेट गया और रात होने का इंतजार करने लगा ।
कुछ देर बाद जेब से पिंग पिंग की आवाज़ आइ । उसने वह यंत्र निकालकर देखा जिसे बिजय ने गजाला कें फ्लेट की खिडकी से बाहर फेंका था ।
उसकी छोटी सी स्क्रीन पर कुछ लिखा था ।
उसे पढकर अलफासे के होठों पर बडी ही बिचित्र मुस्कान उभरी ।
यंत्र पर कुछ टाइप किया ओर पुन: आराम से लेट गया । रेडियम डायल रिस्टवाच ने जब बारह बजाए तो आहिस्ता से दरवाजा खोलकर लिमोजीन से बाहर आया ।
जेब से पेंसिल टार्च निकालकर आन की और उस दरवाजे के करीब पहुंचा जिसके पीछे शौफ़र गुम हुआ था ।
अगले पल उसने मास्टर की से लाक रब्रोल लिया था मगर इस तरह से कि ज़रा भी आवाज़ न हो । किवाड़ खोलने पर उसने खुद क्रो एक गेलरी में पाया ।
गेलरी तीन फुट चोडी और करीब दस फुट लंबी थी । टार्च हाथ में लिए, उसकी कमजोर रोशनी की मदद से दबे पांव आगे बढा ।
गेलरी एक छोटी सी लावी मेँ खत्म हुइ । लाबी के एक तरफ दो दरवाजे थे, दूसरी त्तरफ़ एक ।
सामने की तरफ पांच फुट चौडी गेलरी थी । गेलरी के अंतिम छोर पर दरवाजा ।
वह अंदर की तरफ से बंद था ।
अलफांसे को समझते देर न लगी कि वह इस छोटे से फ्लैट का मुख्यद्वार है । दाई तरफ कें बंद दरवाजे के पीछे से किसी के खर्राटों की आवाज आ रही थी ।
अलफासें ने अनुमान लगाया कि खर्राटे शोफर की नाक से निकल रहे हें ।
दबे पांव दरवाजे के नजदीक पहुंचा ।
किवाढ़ को धक्का देकर खोलने की कोशिश क्री मगर वह अंदर से बंद था ।
अब. . रिस्क लेने का वक्त आ गया था और आप तो जानते ही हैं…अलफासे नाम ही उसका है जिसे रिस्क लेने में मजा आता है।
अत: बंद दरवाजे पर हौले से दस्तक दी ।
पहली और इतनी हल्की दस्तक से कुछ न हुआ । वह तीसरी और जोर से दी गई दस्तक थी जिसके बाद अंदर से थोडी झल्लाईं हुईं आवाज आई…“कौन है?"
अलफांसे पहचान गया…आबाज़ शोफर की ही थी मगर मुंह से जवाब देने की जगह पुन: दस्तक दी ।
"बोलता क्यों नहीँ, कौन है?" ज्यादा झल्लाकर कहा गया ।
अलफांसे बोला अब भी कुछ नहीं, बस दस्तक दे दी ।
जाहिर अंदर वाले की झल्लाहट चर्म पर पहुंच गई । उसने भन्नाए हुए अंदाज में दरवाजा खोला और...खोलते ही कुछ और ज्यादा भन्ना उठा क्योकि एक रिवाल्वर की नाल अपनी कनपटी पर महसूस की थी ।
इस वक्त उसके चेहरे पर हवाइयां उड़नी चाहिए थीं मगर उसकी जगह होठों पर अजीब सी मुस्कान नजर आई ।
इस मुस्कान पर उसने अलफांसे की नजर नहीं पड़ने दी थी ।
जिस्म पर केंवल अंडरवियर और बनियान था ।
अलफांसे ने रिवाल्वर से टोहते हुए कहा-“अंदर चल ।"
वह बेक गेयर में डल गया ।
कमरे कै अंदर पहुंचते ही अलफांसे ने दरवाजा वापस बंद कर लिया और बोला-"ज्यादा हैरान होने की ज़रूरत नहीं है । मैँ उस शख्स का साथी हूजिसे आज दिन में तूयहा लाया था ।"
"प पर तुम यहां कैसे पहुच गए ? "
"तुम्हारी लिमोजीन की पिछली सीट के पीछे छुपकर ।"
शोफर चुप ।
"मेरे ख्याल से तूसमझ गया होगा कि यदि तूने मेरा कहा नहीं माना तो मैँ तुझे मार डालूँगा ।"
उसके चेहरे पर कत्थक करती मौत साफ नजर आ रही थी । ऐसा लगा जैसे बडी मुश्किल से पूछ सका हो-“क्या चाहते हो ?"
“मुझें मेरे साथी कै पास ले चल ।"
"य ये कैसे हो सकता हे ! ”
"रास्ता तुझे निकालना होगा ।"
“रास्ता तो मालुम है मगर...
"मगर ? "
"र रास्ते में अनेक गार्ड तैनात हैं । वे मुझे तो जाने दे सकते हैँ मगर तुम्हें नहीं । तुम्हारे साथ मैं भी पकड़ा जाऊंगा ।”
“कोइ तरीका निकाल ।"
"ऐसा कोई तरीका नहीं है ।”
“तो मरने कै लिए तैयार हो जा ।”
“ज.....जी ! "
"क्या तू अभी नहीं समझा कि या तो मेरे साथी के पास ले जाएगा या मेरे रिवॉल्वर की गोली से मारा जाएगा ! दोनों में से एक काम होना निश्चित हे ।"
उसे बुरी तरह डरा देने वाले लहजे में कहा था ओर...वह बेचारा डर भी गया ।
चेहरे पर मंडराते खाफ कें साए साफ नज़र आरहे थे । बुरी तरह हकलाती आवाज में कहता चला गया-"म मुझे नहीं मालूम आप कौन हें मगर मुझ पर रहम कीजिए । कोशिश कीजिए समझने कौ कि अगर मैें आपको वहां ले जा सकता तो ज़रूर ले जाता । जब मेरे हाथ में ही कुछ नहीं है तो...प्लीज, मुझे मत मारिए ।"
उसे डराने कै लिए अगली धमकी देता-देता अलफांसे खुद ही रुक गया । कारण गार्डं की वह वर्दी थी जो दीवार में गढी कील में लटकें हैंगर मेँ लटक रही थी ।
उस पर नजरें टिकाए अलफांसे ने पूछा-"वो किसकी है ?'"
“मेरे रूम पार्टनर की ।"
"इस वक्त कहां हे ?'
"डूयूटी पर ।"
"तो वर्दी यहां क्यों है ? "
"दो जोडी होती हैं न !"
“गुड ।” अलफांसे के दिमाग ने तेजी से काम किया…"मैं इसे पहनकर चलूंगा । शोफर वाली वर्दी कहां है?”
“अलमारी में ।"
"तूउसे पहन ले । "
शोफर का चेहरा ऐसा नज़र आने लगा जैसे किसी ने हल्दी पोत दी हो । बोला…"स समझने की कोशिश कीजिए । रास्ते में तैनात कोई न कोइ गार्ड पहचान लेगा कि आप असलम नहीं हो ।"
अलफांसे समझ गया वर्दी असलम माम के शख्स की हे परंतु बोला…“बिल्डिंग में इतने सारे गार्ड तैनात हें कि यह मुमकिन ही नहीं हे कि सभी एक दूसरे को जानते पहचानते हों ।”
"ये तो ठीक हे मगर. . .
"ज्यादा हुज्जत की तो गोली मार दूंगा ।" अलफांसे उसकी बात पूरी होने से पहले ही गुर्राया…"'अगर मगर की कोई गुंजाइश नहीं है । अपनी वर्दी पहन । मैं गार्ड की वर्दी पहनता हूं ।'"