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चाचा बड़े जालिम हो तुम compleet

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Guest
चाचा बड़े जालिम हो तुम--1

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त राज शर्मा आपके लिए एक और नई कहानी लेकर आया हूँ दोस्तो वैसे तो आपको मेरी सभी कहानियाँ आप सब को पसंद आती है लेकिन मेरा दावा है ये कहानी आपको बहुत पसंद आएगी . दोस्तो ये कहानी एक ऐसी औरत की है जो अपना वंश चलाने के लिए अपनी बहू को एक सब्जी वाले से ही चुदवा देती है . तो दोस्तो कहानी कुछ इस तरह से है............रज़िया शाह 28 साल की एक शादी शुदा जवान महिला थी उसकी शादी रहमान के साथ 6 साल पहले हुई थी . लेकिन अभी तक उनके कोई बच्चा नही हुआ था . डॉक्टर से जाँच कराने पर रज़िया की रिपोर्ट तो नॉर्मल निकली लेकिन रहमान की रिपोर्ट मे उसके शुक्राणु बहुत कम थे . रज़िया की सास रेहाना बी 60 साल की थी उनके पति 15 साल पहले गुजर चुके थे . जब उनके बेटे की शादी हुई तो रेहाना बी बहुत खुश थी लेकिन शादी के कुछ साल बाद भी जब उनकी बहू के कोई बच्चा पैदा नही हुआ तो उनको चिंता होने लगी . रेहाना बी की चिंता उस दिन और बढ़ गई जब एक दिन उन्होने अपने बेटे की रिपोर्ट पढ़ ली . रेहाना पूरी तरह से नर्वस हो गई कि उनका बेटा कभी बाप नही बन पाएगा . रेहाना बी ने इस मामले को अपने हाथ मे ले लिया उन्होने सारी रिपोर्ट रज़िया को दिखाई . वो किसी भी हाल मे अपने पोते का मुँह देखना चाहती थी चाहे उसके लिए कुछ भी क्यो ना करना पड़े

हरी सिंग एक सब्जी बेचने वाला था . वह पिछले 8-10 साल से रेहाना बी के बंगले के आस पास ही सब्जी बेचता था . हरी सींग की उम्र 40 साल थी वह रेहाना बी को बहन जी बोलता था और रेहाना बी उसे हरी भाई बोलती थी मुहल्ले बाकी सब लोग हरी को हरी चाचा कहते थे हरी देखने मे हॅटा केटा और सुंदर था वो अपने काम के समय शर्ट और धोती पहनता था . दोपहर को हरी रेहाना बी के बंगले के वरांडे मे सीडियो के पास बैठकर ही खाना खाता था रेहाना बी भी उसे अक्सर ठंडा पानी दे दिया करती थी . रेहाना बी ने हरी सिंग से बात करने की शोची लेकिन सवाल ये भी था की अगर हरी मान भी जाता है तो क्या रज़िया एक सब्जी वाले के साथ सोने को तैयार हो पाएगी . फिर रेहाना बी ने सोचा की पहले हरी से बात कर ले फिर वो रज़िया से बात करेंगी

अगले दिन रेहाना बी ने रज़िया को बताया की वो किसी काम से बाहर जा रही है आधे घंटे मे वापस आ जाएँगी दोपहर का समय था काफ़ी लोग रोड पर आ जा रहे थे . रेहाना बी ने सोचा इस समय वो हरी से फ्री होकर बात कर सकेंगी . रज़िया पिशाब के लिए फर्स्ट फ्लोर पर बाथरूम गई . उसने देखा उसकी सास हरी सिंग से बात कर रही है जब 15 मिनट बाद रज़िया वापस आई तो उसने देखा रेहाना बी अभी तक हरी सिंग से बात कर रही थी . ये ठीक नही था वो जानती थी कि जब भी रेहाना बी सब्जी खरीदने हरी सिंग के पास आती तो अक्सर बात करती थी . रज़िया बालकोनी मे आई और वहाँ से दोनो को देखने लगी हरी का मुँह उसकी तरफ था और रेहाना बी की पीठ उसकी तरफ थी

रेहाना बी हरी की छोटी सी दुकान पर गई . हरी ने उनको नमस्ते किया . रेहाना बी ने रोड के इधर उधर देखा और कहा , "हरी भाई मुझे तुमसे एक काम है. काम बड़ा नाज़ुक है, किसी और को मालूम हुआ तो मेरी बड़ी बदनामी होगी. क्या मैं तुमपे भरोसा कर सकती हूँ?"

हरी ने अपनी आँखो ही आँखो मे भरोसा दिलाया और कहा, "कैसी बात करती हो बेहन?आप जो कुछ बोलेंगी वो जान जाने तक किसी को नही पता चलेगा , यहा तक कि आपके बेटे या बहू को भी नही ."

रेहाना बी थोड़ी नर्वस हुई लेकिन फिर उन्होने मन ही मन कुछ सोचा , "हरी देख काम कुछ ग़लत है,कोई भी सास या मा ये काम करने को किसी गैर मर्द को नही बोलेगी. हरी तू जानता है की रहमान की शादी को 6 साल हो गये और अभी उससे औलाद नही हुई. इसमे रज़िया का कोई दोष नही, पूरा दोष रहमान मे है. हरी मुझे मालूम है तूने मेरी बचपन की दोस्त शांति बेन की बहू की मदद की थी,मैं चाहती हूँ वैसे ही मदद तू मेरी बहू की कर और मुझे एक प्यारा सा नाती दे दे उन्होने एक साँस मे ही सारी बात कह दी और हरी के चेहरे की तरफ देखने लगी .
 


हरी को अपने कानो पर विश्वास नही हुआ कि रेहाना बी अपनी बहू रज़िया को चोदने के लिए कह रही है क्या ये एक सपना है या सच मे उन्होने ऐसा ही कहा है . हाँ ये सच था कि उसने शांति बेन की बहू को चोदा था . आज उसके एक बेटा था . और वो अपने परिवार मे खुश थी . हरी रेहाना बी के मुँह से दुबारा सुन कर कानो पर विश्वास करना चाहता था . हरी ने रेहाना बी को देखा और कहा "बेहन आपको पोता चाहिए और इसलिए आप चाहती है मैं रज़िया के साथ कुछ करू? मैं हिंदू हूँ और आप मुसलमान, फिर भी आप यह चाहती है? माजी मुझे उसमे कोई दिक्कत नही पर ग़लती से किसी को पता चला तो क्या होगा आप सोच लो. क्योंकि मैं एक हिंदू हूँ और आप एक मुसलमान .

हरी ने रेहाना बी को जाबाब देने के बाद हरी ने देखा कि रज़िया बाल्कनी से उन दोनो को ही देख रही थी

रेहाना बी ने अपने मन मे काफ़ी सोचा फिर बोली , "देख हरी, मेरा ये काम करने के तुम्हे मैं 25000 देने को तैयार हूँ. पर किसी भी तरह बात बाहर नही जानी चाहिए ये देखना तेरा काम है. रही बात हिंदू-मुसलमान की तो तुम तो हमारी मुश्किल जानते हो. मुझे अब तो बस नाती का मुँह देखना है, भले वो पोता मेरे लड़के से हुआ हो या किसी और से. बिना पोते का मुँह देखके मर गयी तो उपर जाके रहमान के अब्बू को क्या मुँह दिखाउन्गि. ये लो 5000 अड्वान्स मे और अब आगे का काम कैसे करना है ये तुम जानो. तुम दोनो को सहूलियत देने के लिए मैं तेरे बोलने पे 15-20 दिन के लिए बेटी के घर जाउन्गि, जब तक मैं वापस आउ तुम काम कर देना मेरा."

हरी ने सोचा आज का दिन कितना शुभ है उसे 5000 रुपये भी मिल रहे है और एक सेक्सी औरत भी . वह कभी पैसो को देखता कभी रेहाना बी को और कभी रज़िया को . उसने रज़िया को छोटी सी स्माइल दी और रेहाना बी से बोला , "वाह बेहन, पैसा भी और बहू भी, मॅज़ा आएगा. ठीक है बेहन मैं आपको पोता दूँगा पर आगे कुछ गड़बड़ हुई तो मुझे मत फँसाना. गड़बड़ मतलब आपका पोता मेरे जैसा दिखे और रहमान ने शक किया और डर की वजह से रज़िया ने अगर आपके लड़के को सब बताया तो वो मुझे मार डालेगा."

रेहाना मुस्कुराइ और बोली, "अरे हरी, रहमान मे अगर मारने का दम होता तो क्या मुझे पोता नही देता. उसकी फिकर मत कर, मैं संभाल लूँगी. पर हां, कोई ज़ोर जबर्जस्ति नही समझे ना? जो भी हो सब राज़ी-खुशी का मामला होना चाहिए ये याद रखना."

हरी , "उसकी चिंता आप छोड़ो, मैं बड़े प्यार से रज़िया को मनाउन्गा. बस आप मुझे 8-10 दिन का वक़्त देना और फिर जब मैं आपसे कहु आप 10-15 दिन के लिए बेटी के घर चली जाना. जब बेटी के घर से आप आओगी तो रज़िया आपको खुश खबरी देगी ये मेरा वादा है बेहन.

हरी ने रज़िया को देखा और बोला , "बेहन अब आप जाओ, पर पीछे मत देखना. पिछले 10मिनिट से रज़िया वाहा खड़ी होके हमे गौर से देख रही है." रेहाना बी घर की तरफ मूडी तो हरी ने रज़िया को स्माइल दी रज़िया ने भी ये जाने बगैर इन दोनो के बीच क्या बात हुई हैं औपचारिकता वश हरी को स्माइल वापस दी
 


जैसे हर दोपहर हरी राज़ी के बंगल के वारंडे मे खाना खाने आता था, आज भी आया पर आज सिर्फ़ खाने का मक़सद नही था. आज से रज़िया को पटाने की कोशिश भी करनी थी. रज़िया को पटाके चोद्के उसकी सास को पोता भी देना था हरी को. उस दिन से हरी रज़िया से ज़्यादा बाते करने लगा. बाते करते-करते वो रज़िया का बदन भी देखता.28 साल की रज़िया का बदन कसा हुआ था, गोल चहेरा, बड़ी आँखे, सीने के हिसाब से पतली कमर, पीछे काफ़ी टाइट गांद और सीने पे सबका ध्यान आकर्षित करते मम्मे. रज़िया का रूप निखारते थे. जब हरी रज़िया को घूरते देखता पहले तो रज़िया को अजीब लगता था पर हर्दिन उसे ठंडा पानी देने का काम करना पड़ता. 3-4 दिन नाखुशी से पानी देने के बाद अब रज़िया की शर्म कम हुई. उसने सोचा मर्द औरत को नही देखेगा तो कौन देखेगा? वैसे भी हरी सिर्फ़ उसे देखता था तो देखने दो. उसे अपने रूप पे नाज़ भी था. अब तो पानी देने के बाद रज़िया हॉल मे बैठके हरी से यहा-वाहा की बाते भी करने लगी. ऐसा करते 10-15 दिन बीत गये और अब उन दोनो मे काफ़ी फ्रीनेस आया था. यहाँ तक कि अब हरी से बात करते वक़्त रज़िया के कपड़े कैसे भी होते तो वो शरमाती नही.कई बार पानी देते वक़्त पल्लू ढलता उसका. पहले-पहले जब पल्लू ढलता तो रज़िया शरमाती थी पर अब पानी की बॉटल रखने के बाद टर्न किए बिना, हरी के सामने रज़िया अपना पल्लू ठीक करती. उसे डर इस बात का रहता कि कही रेहानाबी उसे यह सब करते ना देखे. पर अब रेहानाबी खाना खाने के बाद सोने जाती तो रूम से शाम को ही बाहर आती. हरी का घूर्ना रज़िया को अच्छा लगने लगा था. जब हरी उसके पूरे जिस्म पे नज़र घुमाता तो एक बिजली से दौड़ जाती रज़िया के जिस्म मे. अब तो बात यहा तक पहुँच चुकी थी कि रज़िया जब घर मे काम ना हो तो आके बाल्कनी मे खड़ी होके हरी को देखती. हरी भी उसे देखके स्माइल करता. कई बार दोनो मे हसी मज़ाक होती थी और 1-2 बार तो किसी बात पे दोनो ने एक दूसरे को ताली भी दी थी. अपने मुलायम हाथ पे हरी का बड़ा कड़क हाथ एक अजीब से फीलिंग छोड़ जाता रज़िया के. हरी अब ओपन्ली रज़िया की गांद, सीना और चूत देखता और इस बात से रज़िया किसी भी तरह उसे नही रोकती थी सब चलता था. इन सब बातो की रिपोर्ट हरी रेहानाबी को देता और हरी की बात सुनके रेहानाबी को अच्छा भी लगता.

अब 20-25 दिन हो गये इस बात को. एक हिसाब से रज़िया हर दोपहर को हरी के लिए रुकती. यह सब अब तो हरी को भी साँझ आ गया और उसने रेहाना को बेटी के घर जाने कोबोला. उस शाम को रेहाना ने हरी को और 5000 रुपये दिए और रात को खाने के वक़्त अपना बेटी के घर जाने का प्लान रहमान को बताया. प्लान सुनके रज़िया को अच्छा लगा क्योंकि अब वो हरी के साथ और फ्रीली बात कर सकती थी. रज़िया की खुशी रेहाना की आँखो से नही छुपी और उसे अपना प्लान क़यमाब होता नज़र आया. रहमान के सामने हरी तो ग़रीब ज़रूर था पर शायद जिस बात मे मर्द अच्छा होना चाहिए उस बात मे वो अच्छा होगा ऐसा अंदाज़ा रज़िया ने लगाया. दूसरे दिन रेहाना बेटी के घर चली गये. रेहाना बी के जाने के बाद हरी ने 1-2 दिन ऐसे ही जाने दिए. उसके बाद की एक दोपहर को जब तो खाना खाने गया उस्दिन रज़िया ने सिंपल पिंक कलर की कॉटन की सारी और स्लीवेलेस्स ब्लाउस पहना था,ब्लाउस डीप नेकड था, गले मे मंगलसूत्र और पैरो मे पायल थी. यह उसका हर्दिन का पहनावा था पर आज ना जाने क्यों वो हरी को ज़्यादा अच्छी लग रही थी.
 


सच मे हरी को एरेक्षन का मतलब नही मालूम था. पर रहमान मे कुछ प्राब्लम है और उस वजह से रज़िया मा नही बन सकती यह बात वो समझा. रज़िया के पास खड़े होते उसका गोरा सीना देखते वो बोला, "बेटी डॉक्टरी जहा काम नही करती वाहा तजुर्बा काम आता है, कई बार जब डॉक्टरो ने हार मानी तजुर्बे ने जीत दिलवाई है. और यह तू एरेक….. एलेक्षन क्या बोली? मैं समझा नही, ज़रा मुझे ठीक से बता."

हरी के सवाल से शरमाते रज़िया बोली, "कुछ नही चाचा.****का अर्थ तो मुझे भी मालूम नही. डॉक्टर से मैने पूछा था पर उन्होने भी यही बताया था कि मुझे वो जानने की ज़रूरत नही. और चाचा बोहुत सारे तजुर्बेदार लोगो से इस इलाज का पूछा है लेकिन सभी ने हाथ उपर कर दिए, इसलिए अब उप्परवाले पे छोड़ दो."

रज़िया यह कहते पल्लू से छेड़खानी करती है जिससे अब हरी को उसके लो कट ब्लाउस की नेक से एक चौथाई मम्मा दिखता है. ब्रा का एक स्ट्रॅप पूरा ब्लाउस के बाहर था और उस ब्रा कप से एक निपल तन के ब्लाउस पे अपनी छाप दिखा रहा था. बींदास वो निपल देखते हरी बोला, " अरे बेटी यह आजकल के डॉक्टर पैसे देके सीखे है. इनको क्या मालूम, बड़े - बड़े शब्द इस्तामाल करके सामने वाले को घबरा देते है. तू चिंता मत कर, देख मेरे पास इसका इलाज़ है, पर उसके लिए तेरा साथ चाहाए. मेरे पास इलाज़ भी है और तजुर्बा भी, वो बाजुवाले बिल्डिंग मे जागृति का इलाज़ भी मैने किया था और देख उसको अब 2 बच्चे है."

क्रमशः.......

 
Raj-Sharma-stories

चाचा बड़े जालिम हो तुम--2

गतान्क से आगे......

हरी की यह बात सुनके रज़िया कुछ सोचके बोली, "मैं कुछ समझी नही चाचा.जागृति का इलाज आपने किया? मुझे तो सुनाई आया कि किसी डॉक्टर ने किया उसका इलाज. मुझे बताओ ना कैसा इलाज़ किया आपने उसका? " रज़िया का पल्लू सारी से खिसक गया था, उसे फिर अपनी पोज़िशन पे लाते रज़िया बोली, "चाचा मुझे बड़ी नींद आ रही है." रज़िया ने एक मस्त अंगड़ाई ली जिससे नीचे से कमर पे बँधा पल्लू निकलता है और नीचे से ब्लाउस भी थोड़ा उपर चला जाता है. नशीली आँखो से हरी को देखते रज़िया बोली, "चाचा क्यूँ ना हम कल इसके बारे मे बात करे. दोपहर काफ़ी हो चुकी है..या आप कहो तो रात को बात करते है. क्या कहते हो चाचा?"

रज़िया जब अंगड़ाई लेती है तब पूरा जिस्म देखके हरी का लंड खड़ा हुआ, ब्लाउस के नीचे से ज़रा मम्मे बाहर आते है, कमर टाइट होती है, पॅंटी की आउटलाइन दिखती है, नवल दिखता है, सब आराम से देखके बनियान से अपना नंगा सीना और रगड़ते पोछते वो बोला, "ठीक है बेटी, तू कहे तो रात को आके समझाता हूँ कि जागृति का इलाज कैसे किया और ठीक वैसे ही इलाज तेरा भी कर डालूँगा. वैसे भी मेरा टाइम हो गया है, तू आराम कर, रात को समझाने मैं बहुत वक़्त लगेगा." अपनी उमर का फ़ायदा उठाके रज़िया के आधे नंगे कंधे पे ब्रा स्ट्रॅप पे हाथ रखते हरी ने बोला, "पर बेटी रात मे तेरा मिया रहेगा घर मे, फिर कैसे समझा सकता हूँ?"

रज़िया को हरी के कड़क हाथ का अहसास होता है. उसके हाथ को ब्रा स्ट्रॅप से खेलते देख वो बोली, "चाचा आज से एक हफ्ते तक मैं अकेली हूँ..मैं अकेली हूँ चाचा." रज़िया 'अकेली' शब्द पे स्ट्रेस करके कहती है.

रज़िया के ब्रा स्ट्रॅप सहलाते उसमे उंगली डालते हरी बोला, "वाह यह अछी बात है, हम दोनो अकले है, मैं आता हूँ रात को, तू चाहे तो मेरे लिए खाना बना,खाना ख़ाके हम बात करंगे."

अब रज़िया हरी का हाथ पकड़के, उसे हटाते, उसकी आँखो मे देखते ब्रा स्टाप ब्लाउस मे डालते बोली, "पर चाचा, हम नोन - वेज खाते है और घर मे नोन वेज पकते भी है, क्या आप ख़यांगे नोन – वेज?"

जवाब मे हरी ने उसका पल्लू कंधे पे ठीक करते कहा, " आरे बेटी तू जो बनाएगी वोही खा लूँगा, अगर मैं खाना बनाने बैठा तो रात के 11 बज़ेंगे और फिर तुझे नींद आएगी."

दो कदम पीछे होते हुए रज़िया कुछ सोचके स्माइल करते बोली, "हां चाचा,ठीक है. लेकिन चाचा मे खाना जल्दी खाती हूँ और पकाती भी थोड़ा हूँ. हमारे घर मे बसी खाना नही चलता इसलिए थोड़ा ही पकाते है. तो अगर आपको आधा पेट खाना मिला तो मुझे माफ़ करना. अगर आपको रात को भूक लगी तो खाने कुछ नही मिलेगा पर हां सिर्फ़ रात को दूध पीने मिल सकता है."
 


रज़िया के जवाब सुनके खुश होते उसकी वोही दूध की बात पकड़ते हरी बोला, " अरे कोई बात नही बेटी, देख मैं खाना तो 10 बजे ख़ाता हूँ. तू ऐसा कर, खाना खा ले, मैं आके खाना खाउन्गा 10 बजे, उसके बाद भूक लगी तो तो तेरा दूध..... मेरा मतलब तू मुझे दूध दे देना, ठीक है? दूध तो रहे गा ना घर मे?"

घर मे बोलते वक़्त हरी की नज़र मम्मो पे थी. हरी का इशारा समझते रज़िया भी मस्ती से बोली, "हां दूध तो काफ़ी है घर मे चाचा पर पीने वाला कोई नही. आज रात हम मिलके दूध पियन्गे. और चाचा आप जल्दी आओ ना, 10 बजे आओगे तो बात कब करेंगे? मैं तो 10.30 को सो जाती हूँ."

अपना बनियान पहनते हरी हस्ते हुए बोला, " आरे बेटी, आज मैं हूँ ना, तो तेरा सब दूध पी जायूंगा. आज तेरे पास जितना दूध है मुझे दे देना और देख जैसे पी डालता हूँ पूरा दूध. रही बात तुझे नींद आती है तो बेटी आज मेरी बातो से तुझे नींद नही आएगी यह मेरा वादा है, बहुत बाते करंगे, तेरा दूध पियन्गे और मैं भीतेरा इलाज़ करूँगा."

रज़िया अब रुकना नही चाहती थी. उसने सोचा कि चाचा को प्यार से जल्दी आने कहूँगी. वो चाहती थी कि चाचा समझे कि उसके लिए वो शाह खानदान के रूल्स तोड़ने तय्यार है. पल्लू से खेलते जानबूझके पल्लू को एक मम्मे से हटाते वो बोली,"ओके चाचा, ठीक है, लेकिन आप जल्दी आना. पर किसी को पता चला तो मेरी तो शामत आ जाएगी. चाचा 9 से लेट नही करना क्यूंकी इतना लेट करोगे तो फिर दूध कब पियोगे?"

वो मम्मा देखते हरी होंठो पे जीब फेरते बोला, "ठीक है बेटी, तू हमारा खाना बना, मैं जल्दी आउन्गा और हम साथ मे खाना खाएँगे और तेरा इलाज़ करते - करते तेरा यह दूध भी पियुंगा." दूध पीने की बात करते वो मम्मो की तरफ इशारा करते बोला, "बेटी कोई अच्छी नाइटी हो तो वो पहनना रात को, अब मैं जाउ?"

सेक्सी नाइटी की बात सुनते रज़िया, हरी को चिढ़ाने वाले अंदाज मे बोली, "नही रे बाबा, सेक्सी नाइटी क्यूँ? हमारे घर मे नाइटी नही पहनी जाती. आपकी वजह से एक नियम तो तोड़ रही हूँ दूसरा तोड़ूँगी तो शामत आ जाएगी. चाचा हमारे यहाँ गाय का दूध बड़ा अछा होता है, आप को पसंद है ना गाय का दूध?"

रज़िया का हाथ पकड़ते दरवाज़े तक जाते हरी बोला, " आरे अब 1 नियम तोड़ा तो 1 और सही बेटी. इलाज़ के लिए नाइटी होना ज़रूरी है, इससे तक़लीफ़ नही होती समझी? वैसे बेटी, हमे तो गाय पसंद है, हम तो गाय की पूजा भी करते है और गाय का दूध भी पीते है. और अगर गाय तेरी जैसे औरत है तो और अच्छा होता है, बहुत अच्छे से इलाज़ करता हूँ मैं."
 


अपना हाथ छुड़ाते रज़िया बोली, "ठीक है चाचा, नाइटी का सोचूँगी, अब आप जाओ." यह कहते हरी को घर से रज़िया रवाना करती है. रज़िया को मालूम था हरी कौन्से इलाज की बात कर रहा था, और यह भी पता था कि आज कैसा इलाज होनेवाला है उसका. रज़िया भी हरी से इलाज करवाने तय्यार थी. हरी के जाने के बाद रज़िया 1 घंटा सोई. शाम को उठके हरी के आने से पहले उसने अपना घर एकदम सॉफ सुथरा किया. सॉफ सफाई करते-करते पसीने से रज़िया की हालत काफ़ी खराब हो गयी, मानो पसीने से वो नहा गयी हो. सॉफ सफाई होने के बाद उसने खाना बनाके और ख़ाके हरी की थाली टेबल पे लगाई. इतने गड़बड़ मे 9 कब बजे उससे पता नही चला. रज़िया ने जान बुझ के इतना काम लिया क्योकि आज वो जो करने जा रही थी उसके बारे मे ज़्यादा सोचके उसे अब पीछे नही हटना था. शादी के बाद पहली बार वो पराए मर्द के सामने नंगी होके सोनेवाली थी,सिर्फ़ एक औलाद पाने के लिए और उसे उसके इस फ़ैसले के अच्छे - बुरे के बारे मे ज़्यादा सोचके अब रुकना नही था.

बराबर 9 बजे हरी आया. हरी सॉफ लूँगी बनियान मे था. सामने पसीने से भरी रज़िया की हालत देखके उसे अच्छा लगा. पसीने से ब्लाउस गीला होके निपल दिख रहा था क्योकि रज़िया ने ब्रा जो नही पहनी थी. हरी को देखते ही पल्लू से माथे और सीने का पसीना बिंदास पोछते रज़िया बोली, "अर्रे चाचा आप आ गये? मुझे तो वक़्त का पता तक नहीं चला घर की सॉफ सफाई करते - करते."

स्माइल करते हरी बोला, "हां आ गया बेटी, आरे कितना पसीना पसीना हुई है तू, आओ मैं पोंछ दूं? नही तो जैसा मैं करता हूँ वैसा कर पसीना आने पे, चाहे तो पल्लू नीचे करके हवा ले."

हरी के कहने के मुताबिक रज़िया पल्लू से हवा लेने लगी.इससे उसकी साफ आर्म्पाइट हरी को दिखती है और ब्लाउस मे मम्मो की हल्की हलचल. हवा लेते रज़िया बोली,"आहह चाचा, अब अच्छा लग रहा है.मैं अब आप ही का इंतेज़ार कर रही थी. चाचा मैं अभी नहाने जा रही हूँ कुछ चाहिए तो ले लेना. अपना ही घर समझना चाचा, मैं 10 मिनिट मैं आई नहा के."

"रूको बेटी, पहले पसीना तो पोछने दे मुझे तेरा." इतना कहते हरी रज़िया के पल्लू से उसका पसीना पोछने लगा. पीठ, नेक, फेस और फिर हल्के से सीना पोछते वो बोला, "अब क्यो नहा रही हो? इलाज के बाद मे नहा लेना. तुम सामने रहोगी तो ही खाना खाउन्गा मैं, यह क्या मेहमान को बुला के बोलना कि खाना ख़ालो और खुद नहाने चली जाओ.क्या यह अच्छी बात है?"

हरी के हाथ रज़िया के नंगे सीने पे है और गरम सासे उसके फेस पे छोड़ रहा था.रज़िया कैसे भी करके हरी के हाथ हटा के बाथरूम मे जाते बोली, "रहने दो चाचा, प्लीज़ खा लो जो मैने प्यार से बनाया है.इलाज के बाद चाहो तो फिर नहा लेंगे."

हरी बाथरूम के पास आके बोला, "ठीक है बेटी पर अच्छे से नहा ले, एकदम रगड़ के नहा लेना, बाद मे बहुत पसीना आनेवाला है तुझे बेटी. नहाने के बाद आके मुझे खाना परोसना, आज तेरे हाथ से पहले खाना और बाद मे दूध पियुंगा समझी?"

हरी किचन मे वैसे ही नीचे ज़मीन पे बैठ जाता है, बनियान निकालके लूँगी उप्पर करके. उधर से रज़िया बोली, "ओके चाचा तो रूको, मैं नाहके आके खाना परोसती हूँ आपको. और हां एकदम रगड़ के नहाउंगी, बहुत पसीना है. ये बाद मे क्यों बहुत पसीना आनेवाला है मुझे चाचा?"

बाथरूम की तरफ देखते हरी बोला,"वो तू खुद समझेगी बेटी, हां पर नहाने के बाद अब ज़्यादा टाइट कपड़े मत पहनना, ज़रा नरम और हल्के कपड़े पहनो."
 


"मतलब कैसे चाचा? समझाओ तो सही. नही तो ऐसा करो, बेडरूम मे अलमारी मे जो कपड़े है उनमे से जैसे कपड़े चाहते हो निकालके रखो मेरे लिए, ठीक है चाचा."

रज़िया ने जानबूझके 1-2 ही नाइटी रखी थी अलमारी मे जो उसके हिसाब से सेक्सी थी. हरी रज़िया के बेडरूम जाके, उसका कपबोर्ड खोलता है. उसमे से 2-3 नाइटी देख के एक निकालता है जो घुटनो तक है और एकदम ट्रॅन्स्परेंट है, उसकी नेक बड़े नही यह देखके हरी उसके 2 हुक्स तोड़ कर बिस्तर पे वो नाइटी रख कर बाहर आके बोला, "बेटी मैने तेरे बिस्तर पे नाइटी रखी है, वो पहन लेना, इससे तुझे आराम पड़ेगा और पसीना भी नही आएगा समझी?"

रज़िया हां बोलती है. हरी जाके किचन मे बैठता है. बाथरूम से टवल लपेटे रज़िया बाहर आके हरी के सामने से बेडरूम मे आके हरी से निकलवा कर रखी काली नाइटी पहनती है जो ट्रॅन्स्परेंट है. लेकिन काली है इसके अंदर कुछ पहना है या नही उसका पता नही चलता. अपने आपको आईने मे रज़िया देखती है. पहली बार ऐसी नाइटी पहनने से उसे ज़रा शर्म आती है. उप्पर से बटन भी टूटे देखके वो समझ जाती है कि यह हरी का ही कारनामा है. जब वो नाइटी पहनती है तो आधे से ज़्यादा नंगा सीना खुला देखके वो थोड़ा झिझकति है पर फिर सारी शर्म छोड़ कर वैसे ही गीले बालो से वो किचन मे आके हरी के सामने खड़ी होती है. एक बार उप्पर से नीचे तक रज़िया को देखते हरी बोला, "आहा बेटी, अब तो एकदम मस्त लगती है. देखा यह नाइटी कैसे जच रही है तुझे? लगता है चाचा की बात मान कर एकदम रगड़ रगड़ कर नहाई हो इसलिए तुम्हारा बदन इतना चमक रहा है." हरी नीचे बैठा है इसलिए नाइटी के अंदर तक नज़र जाती है उसकी. उप्पर की तरफ देखते वो बोला, "रज़िया, चल अब खाना परोस मुझे, बड़ी भूक लगी है, अब खाना नही परोसा तो तुझे ही खा डालूँगा मैं समझी?"

क्रमशः.......

 
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चाचा बड़े जालिम हो तुम--3

गतान्क से आगे......

यह बोलते स्माइल करके हरी रूपा की टाँग पकड़के जाँघ खाने का एक्शन करता है. डरने की आक्टिंग करके फिर रज़िया अपने पैर छुड़ाते बोली, "हां हां बाबा, परोसती हूँ आपको खाना. क्या पता सच मे मेरी जाँघ खा जाओगे तुम." अब रज़िया बारी - बारी 1-1 चीज़ प्लॅटफॉर्म से उतार कर हरी की थाली मे परोसने लगी. नीचे झुकने और कपड़ा ढीला होने की वजह से हरी को अंदर का काफ़ी हिस्सा दिखाई देता है.

हरी रज़िया की जाँघ सहलाते बोला, "आरे रज़िया, सब नीचे ले, बार - बार झुकेगी तो थक जाएगी. यही नीचे बैठके परोस मुझे खाना, तो तुझे देखते खाना खा सकता हूँ और बात भी कर सकता हूँ तुमसे.थक जाएगी तो इलाज कैसे लोगि?"

अपनी जाँघ बिना छुड़ाए रज़िया बोली, "नही - नही चाचा नीचे फर्श गंदा होगा. और मुझे प्लॅटफॉर्म सॉफ करना बाकी है. चाचा खाते हुए आप मेरे को क्यूँ छूते हो? खाना खाओ ना आप इतमीनान से. और अब मुझे इस लिबास और आपके इलाज़ के बीच का रीलेशन समझाओ."

इस बार हरी रज़िया का हाथ पकड़के खिचता है, रज़िया आधी झुकी जिससे उसके ओपन नेक से मम्मे साफ दिखते है. रज़िया हाथ हरी के नंगे सीने पे रखती है. फिर कमर मे हाथ डालके हरी उसे पास खिचता है जिससे अब रज़िया का सीना एकदम उसके मूह के पास आता है. होंठो पे जीब फेरते हरी बोला, “आरे रज़िया, क्यों हर बात को मना करती है? चाचा की बात मान और नीचे बैठ मेरे साथ, तेरा काम करने और दूध पीने के बाद हम पूरा किचन सॉफ करंगे." हरी झुकी रज़िया को और ज़रा खिचता है जिससे रज़िया एकदम हरी की गोदी मे आके बैठती है. हरी की इस हरकत से उसके मम्मे उछलते है. रज़िया की कमर मे हाथ डालते हरी बोला, "हां यह ठीक है बेटी, तू मेरी गोदी मे बैठ के मुझे खाना खिला और मैं तुझे बताउन्गा कि तेरे इस लिबास और तेरे इलाज़ का क्या संबंध है."

मस्ती से हरी की गोदी मे बैठने से रज़िया की नाइटी उपर चली जाती है और हरी की गोदी मे उसकी गांद हरी के लंड को छूती है. हरी की गोद से उठने का कोई प्रयास ना करते रज़िया अब ज़रा नखरे से बोली, "अब आपको खाना खिलाना इतना ही तो बाकी था. खा लो ना आप ही आपके हाथ से खाना चाचा. इतने बड़े हो गये हो लेकिन बच्चे जैसे हो, पहले बोला दूध पिलाना और अब बोलते हो खाना खिलाओ."

कमर मे हाथ डालके रज़िया के पेट पे हाथ रखके हरी अपनी उंगली मम्मो तक लाता है. नाइटी उपर होने से आधी गांद नंगी है, दूसरे हाथ से रज़िया का हाथ पकड़के उसमे नीवाला लेके मूह मे डलवाते समय रज़िया की उंगली चाट कर हरी बोला, "आरे बेटी हर मर्द मे एक बच्चा छुपा होता है जो अपना बचपना कभी नही भूलता. मौका आने पे वो दूध और खाना माँगता है. और रज़िया, तू एक भूके को खाना खिलाएगी और दूध पिलाएगी तो तुझे पुण्या भी मिलेगा ना?"

रज़िया बिना कहे मंडी हां मे हिलाते दूसरा नीवाला अपने आप उठाके हरी को खिलाते बोली, "चाचा वो इलाज और यह नाइटी के संबंध के बारे मे बताओ ना अब जो मैने आपकी बात मान के आपको खाना खिलाने लगी हूँ."

हरी अब नाइटी का एक और हुक खोलते हाथ मम्मे पे रखते बोला, "हां बेटी बताता हूँ, पर उसके लिए तुझे बेशरम होके मेरी बातो का जवाब देना होगा, तू तय्यार है ना?"

"बेशर्म मतलब क्या? और कैसी बातो का? कौनसी बातो का जवाब देना पड़ेगा मुझे चाचा?" यह पूछ ते वक़्त रज़िया का ध्यान नही देती कि हरी उसके बूब्स पे हाथ रखा है और रज़िया की इस बेफिक्री का फ़ायदा उठाके हरी बाकी बचा लास्ट हुक भी खोलता है.सब हुक्स खोलके हरी हल्के से एक मम्मे से नाइटी हटा के उसे नंगा करते बोला, ”मैं तेरे पति और तेरे संबंध के बारे मे अब तुझसे पूछूँगा. तूने ठीक जवाब नही दिया तो इलाज़ ठीक नही होगा समझी?"

रज़िया अब ज़रा शरम से अपने मम्मे पे नाइटी ओढ़ते बोली, "हां चाचा ठीक से बिना शरमाये एकदम साफ-साफ लफ्जो मे जवाब दूँगी, पर उसका मेरे कपड़ो से क्या वास्ता चाचा?

 


हरी फिर मम्मा नंगा करते उसे टटोलते बोला, "अच्छी बात है, यह बता रज़िया तुम हफ्ते मे कितनी बार मस्ती करती हो? मस्ती समझी ना? बिस्तर मे कपड़े उतार के एक दूसरे की प्यास बुझाते हो ना?

हरी के हाथ पे हाथ रखते रज़िया बोली, "चाचा मेरे कपड़ो और आपके इलाज के बीच के संबंध मे मस्ती कहा से आई? उससे मेरे इलाज का क्या वास्ता?"

रज़िया का मम्मा हल्के हल्के दबाते हरी बोला, "देख तू ऐसे सवाल पूछेगी तो इलाज़ नही कर सकता? डॉक्टर के पास जाती है तो सब पूछता है ना वो? अब मुझे डॉक्टर समझके जवाब दे."

रज़िया हरी के हाथ मम्मे से हटा अपनी नंगी जाँघ पे रखते बोली, "हां लेकिन मेरे सवाल का जवाब पहले देता है और मुझे समझाता है फिर आगे सवाल करता है डॉक्टर."

जांघे सहलाते अब दूसरा हाथ नंगे मम्मे पे रखते हरी बोला, "मैं अलग किसम का डॉक्टर हूँ इस लिए पहले सब सवाल पूछके बाद मैं इलाज़ बताउन्गा. अब बता कितनी बार मस्ती करते हो तुम दोनो?"

रज़िया बोली,"महीने मैं एक दो बार,बस."

"क्या बोलती हो? बस 1-2 बार? क्यों ऐसा क्यो रज़िया? तुझे इच्छा नही होती और करने की या वो नही करना चाहता और मस्ती?

हरी की गले मे एक हाथ डालते रज़िया बोली,"वो महीना-महीना भर तो बाहर रहते है तो कैसे हम ज़्यादा मस्ती कर सकते है चाचा.और वैसे भी मुझे ही पहल करनी पड़ती है. रहमान बोलता है कि वो थक गया है और मस्ती नही करना चाहता."

हरी रज़िया को अब पूरी तरह गोद मे लिटाके उसके सिर के नीचे लंड रखता है.रज़िया के मम्मे नंगे करके गाउन कमर तक उप्पर करता है.रज़िया की चूत अब नंगी होती है. मम्मे मसल्ते निपल से खेलते चूत को देखते हरी बोला,"हां बेटी,बहुत मर्दो को वो काम करने के बाद यह काम करने की ताक़त नही रहती.जाने दे वो बात,अब यह कपड़े क्यों पहनने को कहा मैने यह बताता हूँ.देख बेटी,तुझे यह निघ्त्य इसलिए पहनाई क्योकि जब तेरा इलाज़ करू तब तेरे दिलो दिमाग़ मे वासना भरनी चाहिए.तुझे ऐसा लगे कि तेरा पति तेरे साथ खेल रहा है,तू इतनी उत्तजीत हो कि बेशर्म बनके बिना रोक टोक के इलाज़ करके ले.अच्छा अब यह बता बेटा कि तेरे पति का हथियार कितना लंबा और मोटा है?यह भी बता कि उसका हथियार तेरी जाँघो के बीच की दरार मे जाता है तो कितना टाइम लेता है पानी उगलने?बेटी बेशर्म होके मेरी बात का जवाब दे तो इलाज़ अच्छा होगा तेरा समझी?"

अपने सिर के नीचे गर्म लंड का टच,मम्मो पे हरी के कड़क हाथ और उसके सामने नीचे फैली नंगी चूत यह हाल रज़िया को अजीब लगा.एक पराए मर्द ने उसे करीब-करीब नंगी किया हुआ था और अब पर्सनल सवाल पूछ रहा था.जाँघो मे अपनी चूत छुपाते हरी की तरफ देखते रज़िया एकदम ही बेशर्मी से बोली, "पति खेल रहा है ऐसा लगना चाहिए ना चाचा? लेकिन कभी उसने खेला हो तब पता चले ना कि खेल किसे कहते है? वो तो बस कपड़े निकालके ज़रा चूमता है और घुसा देता है. रही बात रहमान के औज़ार की, तो होगा उसका औज़ार कोई 4-4.5" का. पानी छोड़ने की बात करते हो चाचा मेरे छेद मे जाने से पहले ही या तो हमारी रज़ाई या कंबल गीली हो जाती है तो मैं क्या करू? चाचा आपने यह सब पूछा और मैने जवाब दिया लेकिन ऐसी नाइटी से वासना कैसे बढ़ेगी यह तो बताओ ना?"

एक हाथ से मम्मे मसल्ते दूसरा हाथ रज़िया की नंगी जाँघ पे घूमते हरी बोला, "ओह अच्छा? मतलब वो क्या तुझे नंगी करके घुसाता है? तुझे नंगी करके, जिस्म मसलके, होत, सीना पेट नही चूमता? तेरे यह नोकिले निपल बच्चे जैसा नही चूस्ता? तेरी जाँघो के बीच की दरार सहला के कभी चाटता नही ? सिर्फ़ 4-4.5" का हथियार है उसका? तभी इतनी जल्दी पानी छोड़ देता है साला. अब रही बेटी इन कपड़ो की बात, रज़िया अब तू एक पराए हिंदू मर्द के सामने ऐसे आधी नंगी गाउन मे रहेगी तो तेरी वासना भड़केगी ना? तेरी वासना भड़की तो मुझे तेरा इलाज़ करने मे आसानी होगी क्योकि तू मेरी सब बाते मानेगी."
 

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