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मैंने कम्बल खींच के अलग हटा दिया, मेरा लण्ड मेरी जाँघ पर थोड़ा मुर्झाया हुआ लेटा पड़ा था।
दीदी उसको देखते हुए बोली, ''वॉव…,'' दीदी की नजरों को अपनी तरफ़ निहारते हुए देख मेरे लण्ड में भी हलचल शुरु हो गयी, और वो खड़ा होने लगा। दीदी मेरे मुर्झाये लण्ड को इस तरह तन कर मोटा और लम्बा होकर खड़ा होता देख अचम्भित हो रही थी।
मैं इसको छू लूँ?" गिफ़्टी दीदी ने पूछा, वो अपने छोटे भाई विशाल के विशाल लण्ड से नजर हटा ही नहीं पा रही थी।
''छू लो…,'' मैंने कहा। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं दीदी को इस तरह अपना लण्ड खड़ा करके दिखा रहा था।
दीदी ने झुक कर मेरे खड़े लण्ड को अपने हाथ में ले लिया। उसने लण्ड को जड़ से अपनी मुट्ठी में लेने की कोशिश की, वो मेर लण्ड की मोटाई और लम्बाई देख कर अचम्भित हो रही थी। वो मेरे लण्द को दोनों हाथों में भरकर उसके सुपाड़े को निहारने लगी।
''तुम्हारा लण्ड तो अजय के लण्ड से बहुत बड़ा हैम विशाल,'' दीदी मेरे लण्ड की प्रशंसा करते हुए फ़ुसफ़ुसाई।
''थैन्क्स, दीदी,'' मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या बोलूं।
''गुड़िया को बहुत मजा आता होगा, इसको चाटने में और इससे चुदने में।''
''ओह दीदी ऐसा कुछ नहीं है मेरे और गुड़िया के बीच,'' मैंने झूठ बोला।
''झूठ मत बोलो विशाल, मैं तुम दोनों को देख चुकी हूँ। इस से तो कोई भी लड़की चुदने को तैयार हो जायेगी। जो इसको इस तरह एक बार पकड़ ले, अपने आप इसको अपनी चूत में घुसाने को बेताब हो जायेगी।''
'' गुड़िया ने इसको हिलाकर औए चूसकर इसका पानी निकाला है, मैने उसको चोदा कभी नहीं है,'' मैं गुर्राते हुए बोला, क्योंकि दीदी ने मेरे लण्ड को ऊपर नीचे करते हुए हिलाना शुरू कर दिया था। मैं अपनी बड़ी बहन को मेरे लण्ड को मुठियाते हुए देख रहा था।
''विशाल अगर तुम मेरे भाई नहीं होते, और मैं गुड़िया की जगह होती तो ना जाने कब का इसे अपनी चूत में ले चुकी होती। ऐसे मोटे लण्ड से चुदने में तो बहुत मजा आयेगा। अजय का लण्ड तो इसके सामने कुछ भी नहीं है।''
''आप भी अगर मेरी बहन ना होतीं दीदी, तो ना जाने कब क आप को चोद चुका होता, क्या मस्त चूँचियाँ है आपकी, मैं तो बस इनको हमेशा दबाता ही रहता।'' मेरी दीदी अपनी चूँचियों की तारीफ़ सुनकर थोड़ा शर्मा गयीं। उनके निप्पल खड़े हो गये थे, और टी-शर्ट में से साफ़ उभरे हुए दिखाई दे रहे थे। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में पकड़े हुए थोड़ा और झुक गयीं, और ये भूलते हुए कि मैं उनका छोटा भाई हूँ, वो शायद थोड़ा और आगे बढने लगीं।
''अब अगर तुमने मुझे छुने दिया है, तो तुम भी मुझे छू सकते हो।'' दीदी हंसते हुए बोलीं और फ़िर अपनी टी-शर्ट अपने गले में से ऊपर कर के निकाल दी। दीदी की मस्त गोल गोल बड़ी बड़ी चूँचियाँ पिन्क ब्रा में कैद बहुत सुंदर लग रही थीं। उन्होने अपने हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया। दीदी ने अपनी चूँचियों की गोलाइयों को अपनी दोनों हथेलियों में भर लिया, और मेरी आँखों से निकल रही आग को देखने लगीं। फ़िर खड़े होकर, थोड़ा आगे झुकते हुए अपनी बाँहों में से ब्रा के दोनों स्ट्रैप्स बाहर निकाल दिये।
मेरे ऊपर वासना का नशा चढ चुका था। दीदी की हर लिहाज से परफ़ैक्ट चूँचियाँ मेरी आँखों के सामने थीं। मैंने हाथ बढाकर दोनों चूँचियों को अपनी हथेलियों में भर लिया। मेरे दोनों हाथों में दीदी की बड़ी बड़ी चूँचियाँ भरी हुई थीं, और मैं विस्मित था कि दीदी की चूँचियाँ इतनी मुलायम होने के साथ साथ इतनी कड़क कैसे हो सकती हैं। मेरी हथेली पर दीदी के निप्पल मूँगफ़ली के दानों जैसे लग रहे थे। मैं उनकी दोनों चूँचियों को दबा रहा था, और उनको मसलते हुए दीदी के चेहरे पर आ रहे रिएक्शन को देख रहा था। जैसे ही मैने दीदी के निप्पल को अँगुठे और उंगली के बीच लेकर हल्का सा मींजा, दीदी चिहुंक उठी। मैंने सोचा शायद दीदी को दर्द हुआ है, लेकिन जब मैंने उनके चेहरे को देखा तो वो अपने होंठों को जीभ फ़िराते हुए चूस रहीं थीं। जब मैंने और जोर से उनके निप्पल को मींजना शुरू किया तो दीदी के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी। एक बार जब थोड़ा ज्यादा जोर से उनके निप्पल दबाये तो वो अपना बैलेन्स को सही कर मेरे ऊपर आ गयीं।
दीदी के मेरे ऊपर आते ही मेरा लण्ड उनकी चूत पर जॉगिंग पैण्ट के ऊपर से ही दस्तक मारने लगा। दीदी की चूँचियाँ मेरे चेहरे के ठीक सामने थीं, मैंने जीभ निकालकर उनके निप्पल को चाटना शुरू कर दिया। दीदी के पूरे बदन में करंट सा दौड़ गया। उनको अपने छोटे भाई से अपनी चूँची चटवाते हुए मजा आ रहा था। दीदी की तरफ़ से कोई आपत्ती होते हुए ना देख, मैं थोड़ा और निडर हो गया, और मैंने दीदी का उभरा हुआ खड़ा निप्पल अपने मुँह में ले लिया, और उसको जोर जोर से दबाते हुए चूसने लगा। जितना ज्यादा से ज्याद मेरे मुँह में निप्पल जा सकता था, उसको उतना ज्यादा अपने मुँह में भरने की कोशिश करने लगा। दीदी कराहते हुए सिसकारियाँ भर रही थी, और उसने फ़िर से अपने हाथों में मेरे लण्ड को पकड़ लिया। मैं भी मस्त होकर कराहने लगा और मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
तभी गिफ़्टी दीदी मेरी गोद से उठकर दूर हटकर बैठ गयीं।
''चलो अब मेरे सामने मुट्ठ मारो,'' उन्होने साफ़ शब्दों में कहा।
''क्या?" मैंने पूछा, मैं कुछ समझ नहीं पाया, कि ये कहाँ से शुरु हुआ था।
''तुमने सुना नहीं, मैंने कहा कि अपने लण्ड की मुट्ठ मारो, मैं तुम्हारा पानी निकलते हुए देखना चाहती हूँ।''
''दीदी, पता नहीं लेकिन हम दोनों शायद वैसे ही कुछ ज्यादा ही आगे बढ चुके हैं,'' मैंने जो कुछ हो रहा था उसके बार में सोचते हुए कहा।
''ओह, विशाल, कम ऑन, मुझे पता है कि मैं अगर चली भी गयी तो भी तुम मुट्ठ तो मारने ही वाले हो, तो फ़िर मेरे सामने क्यों नहीं।''
"और मुझे क्या फ़ायदा होगा?" मैने यकायक पूछा, ऐसा पूछते हुए मेरी आँखों में एक चमक थी।
"मैं मम्मी को तुम्हारे मेरी पैण्टी में मुट्ठ मारने के बारे में कुछ नहीं बताऊँगी… और शायद फ़िर कभी तुमको मेरी चूँचियों को चूसने का मौका दे दूँगी।'' दीदी की ये बात सुनकर मेरी आँखों की चमक दुगनी हो गयी।
''अगर तुम मुझे अपने वीर्य का पानी अपनी चूँचियों पर निकालने दो, तो मैं तुम्हारे सामने मुट्ठ मारूँगा, ठीक है,'' मैंने कहा। गिफ़्टी एक सैकण्ड को सोच में पड़ गयी, उसको मेरे ऐसे किसी प्रस्ताव की उम्मीद नहीं थी। लेकिन फ़िर एक सैकण्ड के बार वो इसके लिये तैयार हो गयी।
''ओके, ठीक है,'' उसने जवाब दिया, और मेरे सामने झुक कर बैठ गयी, और मुझे अपनी पैण्टी वो उठा कर पकड़ा दी जिसमें मैं कुछ समय पहले मुट्ठ मार रहा था।
मैंने दीदी की वो पैण्टी लेकर एक बार फ़िर अपने लण्ड के गिर्द लपेट ली, जो किसी ज्वालामुखी की तरह फ़टने को तैयार बैठा था। पैण्टी के कपड़े को अपने लण्ड के ऊपर से नीचे तक घिसते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जब मैं मुट्ठ मार रहा था तभी दीदी ने अपने एक मम्मे को हाथ में लेकर मेरी आँखों के सामने मसलना शुरू कर दिया, और उसके निप्पल को मींजने लगी, और वो अपने मम्मों को मेरे सामने वीर्य का पानी गिराने के लिये प्रस्तुत कर रही थी।
मैंने सड़का मारते हुए जैसे ही चरम के करीब पहुंचा, मैंने अपने लण्ड का निशाना दीदी के क्लीवेज की तरफ़ कर दिया। और फ़िर वीर्य की पहली पिचकारी दीदी के लैफ़्ट चूँची पर और फ़िर राईट चूँची पर निकाल दी। और फ़िर लन्ड को थोड़ा ऊपर उठाते हुए एक छोटी सी पिचकारी दीदी के गाल पर निकाल दी।
''छी, गंदा!" दीदी ने जो पैण्टी मुट्ठ मारने के लिये दी थी, उस से अपने गाल और चूँचियों को पोंछते हुए दीदी बोली। ''चलो थैण्क्स, हम ऐसा करते रहेंगे, अब मैं कपड़े चेन्ज कर लेती हूँ, मम्मी पापा आते ही होंगे,'' दीदी अपने कपड़ों को सही करते हुए, मेरे रूम से बाहर निकलते हुए हँसकर बोली। दीदी बाहर निकलते हुए कनखियों से मेरे मुर्झा कर सिंकुड़ते हुए लण्ड को देख रही थी।
अगले दिन कॉलेज से लौट कर जब मैं अपने कमरे में अपने बैड पर लेट कर थोड़ा आराम कर रहा था, तभी दीदी ऑफ़िस से लौट कर सीधे मेरे रूम में आ गयी। मम्मी पापा दोनों को ऑफ़िस से लौटने में अभी काफ़ी टाईम था। दीदी आकर मेरे से चिपक कर मेरे बैड पर लेट गयी। मुट्ठ मारते हुए पकड़े जाने पर, जोश जोश में दीदी की चूँचियों पर वीर्य का पानी निकालना, या फ़िर छुप कर दीदी को जीजू का लण्ड चूसते हुए देखाना अलग बात थी। लेकिन इस तरह दोपहर चार बजे दीदी का अपनी टाँगे मेरी टाँगों पर घिसना, और अपनी चूँचियों को मेरी छाती की साईड से दबाना मुझे थोड़ा अजीब लगा।
''दीदी, क्या ये सब सही है… जो कुछ हमने कल किया, हमको शायद नहीं करना चाहिये था,'' जैसे ही मैंने य बात कही, दीदी भौंचक्की होकर मुझे देखने लगी।
''क्या? मुझे तो लगा कि तुमको मजा आया होगा?" दीदी ने पूछा।
''मजा तो बहुत आया था, लेकिन आप मेरी बड़ी बहन हो, और ये ठीक नहीं है।''
''और इसीलिये तुम्हारा ये लण्ड खड़ा हो रहा है?'' दीदी ने मेरे बॉक्सर में बन रहे तम्बू की तरफ़ इशार करते हुए पूछा।
''दीदी, मजा आना अलग बात है, लेकिन ये ठीक नहीं है।''
''देखो, मेरा सोचना तो इस तरह है,'' दीदी ने कहा, ''मैं तुमसे शादी तो कर नहीं रही हूँ, ना ही मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ, मुझे तुम्हारा मस्त मोटा लंबा लन्ड अच्छा लगता है, अजय भी हर दो तीन महीने में आते हैं, तो फ़िर इसमें बुराई क्या है।''
''लेकिन फ़िर भी दीदी…''
''ज्यादा मत सोचा करो,'' दीदी ने मुझे चिढाते हुए कहा, और फ़िर अपनी एक उँगली अपने मुँह में लेजाकर चूसने लगी, ''और अगर मैं कहूँ कि मैं तुम्हारा लण्ड चूसना चाहती हूँ फ़िर?"
ये सुनकर मैं बैड से उठते हुए फ़िर से बैड पर बैठ गया। दीदी खिलखिला कर हँस पड़ी, और वोली, ''अच्छा बच्चू, अब क्यों बैठ गये?"
"दीदी क्या आप सचमुच मेरा लण्ड चूसोगी?" मैंने पूछा।
''ओह हाँ, मैं तुम्हारे उस बड़े मोटे लण्ड को चूसूँगी चाटूँगी, लेकिन तुमको भी मेरी चाटनी होगी।''
''होह…''
''सिम्पल है, मैं चूसकर तुम्हारे लण्ड का पानी निकालूँगी और बदले में तुम मेरी चूत चाटकर मेरा पानी निकालकर मुझे संतुष्ट कर देना।
''ओह,'' मैंने जवाब दिया। मैंने कभी किसी लड़की की चूत नहीं चाटी थी, और मुझे डर था कहीं दीदी मेरा अनाड़ीपना देख कर कहीं हँसने ना लगे। मैंने सोचा दीदी को ये बात बता ही देता हूँ, ''दीदी मैंने ऐसा पहले कभी नहीं किया है, मुझे जो कुछ पता है वो बस पॉर्न वीडियोज देखकर ही पता है… लेकिन फ़िर भी मैं ट्राई करना चाहूँगा…''
दीदी उसको देखते हुए बोली, ''वॉव…,'' दीदी की नजरों को अपनी तरफ़ निहारते हुए देख मेरे लण्ड में भी हलचल शुरु हो गयी, और वो खड़ा होने लगा। दीदी मेरे मुर्झाये लण्ड को इस तरह तन कर मोटा और लम्बा होकर खड़ा होता देख अचम्भित हो रही थी।
मैं इसको छू लूँ?" गिफ़्टी दीदी ने पूछा, वो अपने छोटे भाई विशाल के विशाल लण्ड से नजर हटा ही नहीं पा रही थी।
''छू लो…,'' मैंने कहा। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं दीदी को इस तरह अपना लण्ड खड़ा करके दिखा रहा था।
दीदी ने झुक कर मेरे खड़े लण्ड को अपने हाथ में ले लिया। उसने लण्ड को जड़ से अपनी मुट्ठी में लेने की कोशिश की, वो मेर लण्ड की मोटाई और लम्बाई देख कर अचम्भित हो रही थी। वो मेरे लण्द को दोनों हाथों में भरकर उसके सुपाड़े को निहारने लगी।
''तुम्हारा लण्ड तो अजय के लण्ड से बहुत बड़ा हैम विशाल,'' दीदी मेरे लण्ड की प्रशंसा करते हुए फ़ुसफ़ुसाई।
''थैन्क्स, दीदी,'' मुझे कुछ समझ नहीं आया कि क्या बोलूं।
''गुड़िया को बहुत मजा आता होगा, इसको चाटने में और इससे चुदने में।''
''ओह दीदी ऐसा कुछ नहीं है मेरे और गुड़िया के बीच,'' मैंने झूठ बोला।
''झूठ मत बोलो विशाल, मैं तुम दोनों को देख चुकी हूँ। इस से तो कोई भी लड़की चुदने को तैयार हो जायेगी। जो इसको इस तरह एक बार पकड़ ले, अपने आप इसको अपनी चूत में घुसाने को बेताब हो जायेगी।''
'' गुड़िया ने इसको हिलाकर औए चूसकर इसका पानी निकाला है, मैने उसको चोदा कभी नहीं है,'' मैं गुर्राते हुए बोला, क्योंकि दीदी ने मेरे लण्ड को ऊपर नीचे करते हुए हिलाना शुरू कर दिया था। मैं अपनी बड़ी बहन को मेरे लण्ड को मुठियाते हुए देख रहा था।
''विशाल अगर तुम मेरे भाई नहीं होते, और मैं गुड़िया की जगह होती तो ना जाने कब का इसे अपनी चूत में ले चुकी होती। ऐसे मोटे लण्ड से चुदने में तो बहुत मजा आयेगा। अजय का लण्ड तो इसके सामने कुछ भी नहीं है।''
''आप भी अगर मेरी बहन ना होतीं दीदी, तो ना जाने कब क आप को चोद चुका होता, क्या मस्त चूँचियाँ है आपकी, मैं तो बस इनको हमेशा दबाता ही रहता।'' मेरी दीदी अपनी चूँचियों की तारीफ़ सुनकर थोड़ा शर्मा गयीं। उनके निप्पल खड़े हो गये थे, और टी-शर्ट में से साफ़ उभरे हुए दिखाई दे रहे थे। वो मेरे लण्ड को अपने हाथ में पकड़े हुए थोड़ा और झुक गयीं, और ये भूलते हुए कि मैं उनका छोटा भाई हूँ, वो शायद थोड़ा और आगे बढने लगीं।
''अब अगर तुमने मुझे छुने दिया है, तो तुम भी मुझे छू सकते हो।'' दीदी हंसते हुए बोलीं और फ़िर अपनी टी-शर्ट अपने गले में से ऊपर कर के निकाल दी। दीदी की मस्त गोल गोल बड़ी बड़ी चूँचियाँ पिन्क ब्रा में कैद बहुत सुंदर लग रही थीं। उन्होने अपने हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया। दीदी ने अपनी चूँचियों की गोलाइयों को अपनी दोनों हथेलियों में भर लिया, और मेरी आँखों से निकल रही आग को देखने लगीं। फ़िर खड़े होकर, थोड़ा आगे झुकते हुए अपनी बाँहों में से ब्रा के दोनों स्ट्रैप्स बाहर निकाल दिये।
मेरे ऊपर वासना का नशा चढ चुका था। दीदी की हर लिहाज से परफ़ैक्ट चूँचियाँ मेरी आँखों के सामने थीं। मैंने हाथ बढाकर दोनों चूँचियों को अपनी हथेलियों में भर लिया। मेरे दोनों हाथों में दीदी की बड़ी बड़ी चूँचियाँ भरी हुई थीं, और मैं विस्मित था कि दीदी की चूँचियाँ इतनी मुलायम होने के साथ साथ इतनी कड़क कैसे हो सकती हैं। मेरी हथेली पर दीदी के निप्पल मूँगफ़ली के दानों जैसे लग रहे थे। मैं उनकी दोनों चूँचियों को दबा रहा था, और उनको मसलते हुए दीदी के चेहरे पर आ रहे रिएक्शन को देख रहा था। जैसे ही मैने दीदी के निप्पल को अँगुठे और उंगली के बीच लेकर हल्का सा मींजा, दीदी चिहुंक उठी। मैंने सोचा शायद दीदी को दर्द हुआ है, लेकिन जब मैंने उनके चेहरे को देखा तो वो अपने होंठों को जीभ फ़िराते हुए चूस रहीं थीं। जब मैंने और जोर से उनके निप्पल को मींजना शुरू किया तो दीदी के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी। एक बार जब थोड़ा ज्यादा जोर से उनके निप्पल दबाये तो वो अपना बैलेन्स को सही कर मेरे ऊपर आ गयीं।
दीदी के मेरे ऊपर आते ही मेरा लण्ड उनकी चूत पर जॉगिंग पैण्ट के ऊपर से ही दस्तक मारने लगा। दीदी की चूँचियाँ मेरे चेहरे के ठीक सामने थीं, मैंने जीभ निकालकर उनके निप्पल को चाटना शुरू कर दिया। दीदी के पूरे बदन में करंट सा दौड़ गया। उनको अपने छोटे भाई से अपनी चूँची चटवाते हुए मजा आ रहा था। दीदी की तरफ़ से कोई आपत्ती होते हुए ना देख, मैं थोड़ा और निडर हो गया, और मैंने दीदी का उभरा हुआ खड़ा निप्पल अपने मुँह में ले लिया, और उसको जोर जोर से दबाते हुए चूसने लगा। जितना ज्यादा से ज्याद मेरे मुँह में निप्पल जा सकता था, उसको उतना ज्यादा अपने मुँह में भरने की कोशिश करने लगा। दीदी कराहते हुए सिसकारियाँ भर रही थी, और उसने फ़िर से अपने हाथों में मेरे लण्ड को पकड़ लिया। मैं भी मस्त होकर कराहने लगा और मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
तभी गिफ़्टी दीदी मेरी गोद से उठकर दूर हटकर बैठ गयीं।
''चलो अब मेरे सामने मुट्ठ मारो,'' उन्होने साफ़ शब्दों में कहा।
''क्या?" मैंने पूछा, मैं कुछ समझ नहीं पाया, कि ये कहाँ से शुरु हुआ था।
''तुमने सुना नहीं, मैंने कहा कि अपने लण्ड की मुट्ठ मारो, मैं तुम्हारा पानी निकलते हुए देखना चाहती हूँ।''
''दीदी, पता नहीं लेकिन हम दोनों शायद वैसे ही कुछ ज्यादा ही आगे बढ चुके हैं,'' मैंने जो कुछ हो रहा था उसके बार में सोचते हुए कहा।
''ओह, विशाल, कम ऑन, मुझे पता है कि मैं अगर चली भी गयी तो भी तुम मुट्ठ तो मारने ही वाले हो, तो फ़िर मेरे सामने क्यों नहीं।''
"और मुझे क्या फ़ायदा होगा?" मैने यकायक पूछा, ऐसा पूछते हुए मेरी आँखों में एक चमक थी।
"मैं मम्मी को तुम्हारे मेरी पैण्टी में मुट्ठ मारने के बारे में कुछ नहीं बताऊँगी… और शायद फ़िर कभी तुमको मेरी चूँचियों को चूसने का मौका दे दूँगी।'' दीदी की ये बात सुनकर मेरी आँखों की चमक दुगनी हो गयी।
''अगर तुम मुझे अपने वीर्य का पानी अपनी चूँचियों पर निकालने दो, तो मैं तुम्हारे सामने मुट्ठ मारूँगा, ठीक है,'' मैंने कहा। गिफ़्टी एक सैकण्ड को सोच में पड़ गयी, उसको मेरे ऐसे किसी प्रस्ताव की उम्मीद नहीं थी। लेकिन फ़िर एक सैकण्ड के बार वो इसके लिये तैयार हो गयी।
''ओके, ठीक है,'' उसने जवाब दिया, और मेरे सामने झुक कर बैठ गयी, और मुझे अपनी पैण्टी वो उठा कर पकड़ा दी जिसमें मैं कुछ समय पहले मुट्ठ मार रहा था।
मैंने दीदी की वो पैण्टी लेकर एक बार फ़िर अपने लण्ड के गिर्द लपेट ली, जो किसी ज्वालामुखी की तरह फ़टने को तैयार बैठा था। पैण्टी के कपड़े को अपने लण्ड के ऊपर से नीचे तक घिसते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। जब मैं मुट्ठ मार रहा था तभी दीदी ने अपने एक मम्मे को हाथ में लेकर मेरी आँखों के सामने मसलना शुरू कर दिया, और उसके निप्पल को मींजने लगी, और वो अपने मम्मों को मेरे सामने वीर्य का पानी गिराने के लिये प्रस्तुत कर रही थी।
मैंने सड़का मारते हुए जैसे ही चरम के करीब पहुंचा, मैंने अपने लण्ड का निशाना दीदी के क्लीवेज की तरफ़ कर दिया। और फ़िर वीर्य की पहली पिचकारी दीदी के लैफ़्ट चूँची पर और फ़िर राईट चूँची पर निकाल दी। और फ़िर लन्ड को थोड़ा ऊपर उठाते हुए एक छोटी सी पिचकारी दीदी के गाल पर निकाल दी।
''छी, गंदा!" दीदी ने जो पैण्टी मुट्ठ मारने के लिये दी थी, उस से अपने गाल और चूँचियों को पोंछते हुए दीदी बोली। ''चलो थैण्क्स, हम ऐसा करते रहेंगे, अब मैं कपड़े चेन्ज कर लेती हूँ, मम्मी पापा आते ही होंगे,'' दीदी अपने कपड़ों को सही करते हुए, मेरे रूम से बाहर निकलते हुए हँसकर बोली। दीदी बाहर निकलते हुए कनखियों से मेरे मुर्झा कर सिंकुड़ते हुए लण्ड को देख रही थी।
अगले दिन कॉलेज से लौट कर जब मैं अपने कमरे में अपने बैड पर लेट कर थोड़ा आराम कर रहा था, तभी दीदी ऑफ़िस से लौट कर सीधे मेरे रूम में आ गयी। मम्मी पापा दोनों को ऑफ़िस से लौटने में अभी काफ़ी टाईम था। दीदी आकर मेरे से चिपक कर मेरे बैड पर लेट गयी। मुट्ठ मारते हुए पकड़े जाने पर, जोश जोश में दीदी की चूँचियों पर वीर्य का पानी निकालना, या फ़िर छुप कर दीदी को जीजू का लण्ड चूसते हुए देखाना अलग बात थी। लेकिन इस तरह दोपहर चार बजे दीदी का अपनी टाँगे मेरी टाँगों पर घिसना, और अपनी चूँचियों को मेरी छाती की साईड से दबाना मुझे थोड़ा अजीब लगा।
''दीदी, क्या ये सब सही है… जो कुछ हमने कल किया, हमको शायद नहीं करना चाहिये था,'' जैसे ही मैंने य बात कही, दीदी भौंचक्की होकर मुझे देखने लगी।
''क्या? मुझे तो लगा कि तुमको मजा आया होगा?" दीदी ने पूछा।
''मजा तो बहुत आया था, लेकिन आप मेरी बड़ी बहन हो, और ये ठीक नहीं है।''
''और इसीलिये तुम्हारा ये लण्ड खड़ा हो रहा है?'' दीदी ने मेरे बॉक्सर में बन रहे तम्बू की तरफ़ इशार करते हुए पूछा।
''दीदी, मजा आना अलग बात है, लेकिन ये ठीक नहीं है।''
''देखो, मेरा सोचना तो इस तरह है,'' दीदी ने कहा, ''मैं तुमसे शादी तो कर नहीं रही हूँ, ना ही मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ, मुझे तुम्हारा मस्त मोटा लंबा लन्ड अच्छा लगता है, अजय भी हर दो तीन महीने में आते हैं, तो फ़िर इसमें बुराई क्या है।''
''लेकिन फ़िर भी दीदी…''
''ज्यादा मत सोचा करो,'' दीदी ने मुझे चिढाते हुए कहा, और फ़िर अपनी एक उँगली अपने मुँह में लेजाकर चूसने लगी, ''और अगर मैं कहूँ कि मैं तुम्हारा लण्ड चूसना चाहती हूँ फ़िर?"
ये सुनकर मैं बैड से उठते हुए फ़िर से बैड पर बैठ गया। दीदी खिलखिला कर हँस पड़ी, और वोली, ''अच्छा बच्चू, अब क्यों बैठ गये?"
"दीदी क्या आप सचमुच मेरा लण्ड चूसोगी?" मैंने पूछा।
''ओह हाँ, मैं तुम्हारे उस बड़े मोटे लण्ड को चूसूँगी चाटूँगी, लेकिन तुमको भी मेरी चाटनी होगी।''
''होह…''
''सिम्पल है, मैं चूसकर तुम्हारे लण्ड का पानी निकालूँगी और बदले में तुम मेरी चूत चाटकर मेरा पानी निकालकर मुझे संतुष्ट कर देना।
''ओह,'' मैंने जवाब दिया। मैंने कभी किसी लड़की की चूत नहीं चाटी थी, और मुझे डर था कहीं दीदी मेरा अनाड़ीपना देख कर कहीं हँसने ना लगे। मैंने सोचा दीदी को ये बात बता ही देता हूँ, ''दीदी मैंने ऐसा पहले कभी नहीं किया है, मुझे जो कुछ पता है वो बस पॉर्न वीडियोज देखकर ही पता है… लेकिन फ़िर भी मैं ट्राई करना चाहूँगा…''