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इससे पूर्व कि विजय कुछ जवाब दे, विकास बोला-“अब ना मुझे सबसे बडा जासूस बनना है बेटे और ना ही तुम्हारे इस यान को प्राप्त करना है । अब तो मुझे तुमसे बदला लेना है । याद रखना, मौका मिलते ही मैं घनुषटंकार की मौत का अचानक बदला लूगा I"
"अगर मैं धनुषटंकार को जिंदा कर दूं?" अजीब ढंग से लहराता हुआ टुम्बकटू बोला ।
"क्या मतलब है?” खूनी निगाहों से उसे घूरते हुए बिकास गुर्राया ।
"मतलब ये है बापूजान कि मेरे पास एक ऐसी वस्तु है जिससे मैं किसी मी मृत प्राणी को पुन: जिंदा कर सकता हूं।"
"अबे कार्टून प्यारे, बच्चे को क्या उल्टा-सीधा पाठ पढा रहे हो?" बिजय आश्चर्य के साथ बोला--“वस्तु ना हो गई, मिशातुल्का की बजरबट्टू हो गई ।
“मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं प्यारे झकझक्रिए I" टुम्बकटू ने कहा…“मैं उसी वस्तु की बात कर रहा हूं जिसके लिए मैंने कहा था कि उसके मिलने पर मानव ईश्वर पर भी विजय प्राप्त कर लेगा । अर्थात् उससे भी महान बन जाएगा । किसी भी मृत जीव को अगर वह तीन बार सुंधा दी जाए तो वह जीवित हो जाता हे । अब जरा तुम ही सोचो कि क्या ऐसी कामयाब वस्तु की प्राप्ति पर मानव ईश्वर पर विजय प्राप्त नहीं कर लेगा । एक मौत ही ऐसी वस्तु है जिस पर दुनिया काबू नहीं पा सकी है । हर आदमी जानता है क्रि उसे मरना है । इंसानों के देखते-ही…देखते इंसान मर जाता है किन्तु मानव कुछ नहीं कर पाता । ईश्वर का सिद्धांत है कि हर आदमी को मरना है किंतु इस वस्तु की प्राप्ति पर इंसान भगवान के इस सिद्धांत पर बिजय पा सकता है, मानवता भगवान से ऊंची हो सकती है I”
"प्यारे कार्दून भाई...कहीँ ये कोई लम्बी-चौडी गप्प तो नही है I"
"टुम्बकटू की जुबान से निकला हुआ एक-एक शब्द सत्य होता है झकझकिए प्यारे, अगर तुम इस बात को अब भी नहीं समझे हो तो निश्चय ही तुम धरती के सबसे बड़े मूर्ख हो I” टुम्बकटू ने कहा…“मेरी फिल्म बिलकुल सत्य थी । आज तक मेरी जुबान से झूठ निकला ही नहीं हे I”
"हां बेटे, सत्यवादी राजा हरित्रचंद्र के बाद एक तुम्ही तो पैदा हुए हो?” विजय बोला…"चलो खैर. . .हम तुम्हारी इस गप्प पर भी विश्वास कर लेते हैं I” विजय इस प्रकार बोला मानो उस पर कोई बहुत बड़ा एहसान कर रहा हो-'लेकिन अब तुम हमे उस वस्तु के दर्शन तो करवाओ ।"
'उस वस्तु के दर्शन सबसे पहले बापूजान कर सकते हैं ।" लहराते हुए टुम्बकटू ने कहा
"क्यों प्यारे.. .ऐसे अपने दिलजले में क्या सुर्खाब के पर लगे हुए हैं?"
“सुर्खाब के पर तो नहीं लगे हैं लेकिन "चीते का दुश्मन" क्योंकि बापूजान हैं, अत: कायदे के मुताबिक चीते से टकराने का हक भी उन्हीं को जाता है । ओर इससे पहले भी बडी मुसीबत तो ये है कि वह वस्तु भी इसी चीते कै दाएं कान कै अंदर हे I”
"अमां मियां. . .तुम बक क्या रहे हो. . .?” विजय बोखलाया ।
"बक नहीं रहा हू हुजूर, फर्मा रहा हू I” टुम्बकटू अदब के साथ बोला…“अगर बापू इस चीते को परास्त कर देंगे तो सारे संकट ही दूर हो जाएंगे यानी कि बापू सबसे बडे जासूस भी बन जाएंगे. . दुनिया का यह सबसे बडा खजाना भी उन्हें प्राप्त हो जाएगा. . . । बंदा उनका गुलाम भी बन जाएगा और इनकी शान में सबसे ज्यादा खुशी की बात तो ये होगी कि ये बंदर मियां भी उठ बैठेंगे । साथ ही भगवान पर भी ये बिजय प्राप्त कर लेगे I”
बिकास ने सुना. . और सुनकर उसके चेहरे पर अजीब-सी कठोरता उभर आई बोला…“मैं तैयार हूं I”
"किस बात के लिए बे दिलजले.. .?" एकदम गुर्राया बिजय ।
"बीच में मत बोलो गुरु I” खूंखार स्वर में चीखा विकास…“टुम्बकटू...मैं चीते से टकराने कै लिए तैयार हू. . . I"
"अबे ओ अफ़लातून की औलाद !" विजय बुरी तरह बौखला गया था---"ये तू क्या बक रहा है?”
"अब वार-बार कह दिया गुरु कि बीच में मत बोलो I” बिजय की ओर पलटकर खूनी ढंग से गुर्राया लड़का---""तुम जानते हो कि बिकास एक बार जो कह देता है वो पत्थर की लकीर होती हे । धनुषटंकार अगर जिंदा हो सकता है तो उसके लिए मैं चीते से टकराऊंगा ।"
"अबे मिया, तुम्हारा दिमाग खराब हो क्या है I" विजय बोला…"मर वो सकता नहीं और उसके जीते-जी तुम "चंद्रवटी" हासिल नहीं कर सकते. . .इसका साफ मतलब हुआ कि बंदर को जिंदा करने के चक्कर में तुम्हारी भी रामनाम सत्य हो जाएगी ।"
"मौत से टकराने वाले मौत से डरा नहीं करते गुरु ।" विकास का स्वर पत्थर की भांति सख्त था…“यह सिद्धांत तुम्ही ने मुझे बताया है. . .ये तुम भी जानते हो गुरु कि मेरा निश्चय अडिग है ।। आपके शिष्य की बहादुरी को ललकारा जा रहा है, गुरु. ..इस ललकार को ठीक दिखाना आपके चरणों की तौहीन होगी । आपके चरणों की कसम गुरु, मेरे दिल में झांको , मुझसे पूछो गुरु कि आपकी इज्जत क्या है? मेरे जीते-जी आपका अपमान नहीं हो सकता l”
“अबे मियां होने दो साले अपमान को. . .हमारा साला क्या बिगाड लेगा?"
"ये आप नहीं गुरु, आपका प्यार बोल रहा है ।" विकास ने बिजय की आंखों-मे-आंखें डालकर कहा-“मैं जानता हू कि आपको मुझसे कितना प्यार हे . . . लेकिन आप ये आज तक नही जान पाए गुरु कि बिकास की नजरों में आप क्या हैं? आपको याद होगा गुरु कि मैंने कहा था…गुरु, विकास के जिस्म का जर्रा-जर्रा, खून की एक…एक बूंद, आपकी और सिर्फ आपकी है, आज मैं आपकी शान पर मिट जाऊंगा । आपका चेला हूं आपके नाम पर कोई धब्बा नहीं आने दूगा ।” कहने के एकदम बाद उसने धनुषटंकार की लाश उसके सामने कर दी-"इसे देखो गुरु इसे देखो. . .इस लाश को देखकर क्या तुम्हारी आंखों मेँ पानी नहीं आता? क्या तुम्हारे दिल मेँ कोई टीस नहीं उठती गुरु? ये वो बदनसीब है अंकल जिसे आदमी होते हुए भी बंदर का जिस्म मिल गया l जरा वो एक…एक घटना याद करो गुरु. ..जब से हमारे साथ रहा है ।" कहते-कहते लडके की आंखें भर आई-“अगर इसकी लाश को देखकर तुम्हारा दिल नहीं फटता तो गुरु मुझे यकीन है…विकास की लाश क्रो देखकर भी तुम्हारे आंख से एक आंसू तक नहीं गिरेगा । तुम तो एक जासूस हो ना गुरु. . .पत्थर दिल. . .तुम्हें किसी से प्यार नहीं. . .फिर विकास की मौत से क्यों डरते हो. . .तुमने तो उसी दिन अपने दिल के स्थान पर पत्थर का टुकडा रख लिया था गुरु जिस दिन तुम जासूस बने. . .तुम क्या जानो कि जब कोई धनुषटंकार जैसा दिल का प्यारा मरता है तो दिल पर क्या गुजरती है? तुम्हारे दिल के स्थान पर रखा वो पत्थर का टुकड़ा विकास की मौत पर तुम्हें रोने भी कहां देगा?”
"अबे दिलजले, बात को समझो ।" बिजय पूरी तरह झुंझला उठा था ।
"बात को समझने की जरूरत तुम्हें है, गुरु I" विकास बोला…“कार्दून बेटे . . .मैं चीते से टकराने के लिए तैयार हू I”
"ये बात हुई ना I” खुश होकर बोला टुम्बकटू-----" अब बने हो तुम चीते के दुश्मन ।"
इसके पश्चात विजय ने विकास क्रो समझाया हर ढंग से ।
किन्तु. ..उसे न मानना था और न ही माना ।
उसका दुढ़ निश्चय था कि वह चीते से टकराएगा ।
बिजय विकास को इस मुसीबत से बचा सके । उसके लिए हर पल तेजी से सोच रहा था ।
फिनिश
बिजय ने अपने दिमाग को हर ढंग से घुमाया किंतु. . . व्यर्थ. . . ।
वह कुछ भी नहीं कर सका और विकास और चीते की टक्कर का प्रबंध कर दिया गया ।
"अगर मैं धनुषटंकार को जिंदा कर दूं?" अजीब ढंग से लहराता हुआ टुम्बकटू बोला ।
"क्या मतलब है?” खूनी निगाहों से उसे घूरते हुए बिकास गुर्राया ।
"मतलब ये है बापूजान कि मेरे पास एक ऐसी वस्तु है जिससे मैं किसी मी मृत प्राणी को पुन: जिंदा कर सकता हूं।"
"अबे कार्टून प्यारे, बच्चे को क्या उल्टा-सीधा पाठ पढा रहे हो?" बिजय आश्चर्य के साथ बोला--“वस्तु ना हो गई, मिशातुल्का की बजरबट्टू हो गई ।
“मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं प्यारे झकझक्रिए I" टुम्बकटू ने कहा…“मैं उसी वस्तु की बात कर रहा हूं जिसके लिए मैंने कहा था कि उसके मिलने पर मानव ईश्वर पर भी विजय प्राप्त कर लेगा । अर्थात् उससे भी महान बन जाएगा । किसी भी मृत जीव को अगर वह तीन बार सुंधा दी जाए तो वह जीवित हो जाता हे । अब जरा तुम ही सोचो कि क्या ऐसी कामयाब वस्तु की प्राप्ति पर मानव ईश्वर पर विजय प्राप्त नहीं कर लेगा । एक मौत ही ऐसी वस्तु है जिस पर दुनिया काबू नहीं पा सकी है । हर आदमी जानता है क्रि उसे मरना है । इंसानों के देखते-ही…देखते इंसान मर जाता है किन्तु मानव कुछ नहीं कर पाता । ईश्वर का सिद्धांत है कि हर आदमी को मरना है किंतु इस वस्तु की प्राप्ति पर इंसान भगवान के इस सिद्धांत पर बिजय पा सकता है, मानवता भगवान से ऊंची हो सकती है I”
"प्यारे कार्दून भाई...कहीँ ये कोई लम्बी-चौडी गप्प तो नही है I"
"टुम्बकटू की जुबान से निकला हुआ एक-एक शब्द सत्य होता है झकझकिए प्यारे, अगर तुम इस बात को अब भी नहीं समझे हो तो निश्चय ही तुम धरती के सबसे बड़े मूर्ख हो I” टुम्बकटू ने कहा…“मेरी फिल्म बिलकुल सत्य थी । आज तक मेरी जुबान से झूठ निकला ही नहीं हे I”
"हां बेटे, सत्यवादी राजा हरित्रचंद्र के बाद एक तुम्ही तो पैदा हुए हो?” विजय बोला…"चलो खैर. . .हम तुम्हारी इस गप्प पर भी विश्वास कर लेते हैं I” विजय इस प्रकार बोला मानो उस पर कोई बहुत बड़ा एहसान कर रहा हो-'लेकिन अब तुम हमे उस वस्तु के दर्शन तो करवाओ ।"
'उस वस्तु के दर्शन सबसे पहले बापूजान कर सकते हैं ।" लहराते हुए टुम्बकटू ने कहा
"क्यों प्यारे.. .ऐसे अपने दिलजले में क्या सुर्खाब के पर लगे हुए हैं?"
“सुर्खाब के पर तो नहीं लगे हैं लेकिन "चीते का दुश्मन" क्योंकि बापूजान हैं, अत: कायदे के मुताबिक चीते से टकराने का हक भी उन्हीं को जाता है । ओर इससे पहले भी बडी मुसीबत तो ये है कि वह वस्तु भी इसी चीते कै दाएं कान कै अंदर हे I”
"अमां मियां. . .तुम बक क्या रहे हो. . .?” विजय बोखलाया ।
"बक नहीं रहा हू हुजूर, फर्मा रहा हू I” टुम्बकटू अदब के साथ बोला…“अगर बापू इस चीते को परास्त कर देंगे तो सारे संकट ही दूर हो जाएंगे यानी कि बापू सबसे बडे जासूस भी बन जाएंगे. . दुनिया का यह सबसे बडा खजाना भी उन्हें प्राप्त हो जाएगा. . . । बंदा उनका गुलाम भी बन जाएगा और इनकी शान में सबसे ज्यादा खुशी की बात तो ये होगी कि ये बंदर मियां भी उठ बैठेंगे । साथ ही भगवान पर भी ये बिजय प्राप्त कर लेगे I”
बिकास ने सुना. . और सुनकर उसके चेहरे पर अजीब-सी कठोरता उभर आई बोला…“मैं तैयार हूं I”
"किस बात के लिए बे दिलजले.. .?" एकदम गुर्राया बिजय ।
"बीच में मत बोलो गुरु I” खूंखार स्वर में चीखा विकास…“टुम्बकटू...मैं चीते से टकराने कै लिए तैयार हू. . . I"
"अबे ओ अफ़लातून की औलाद !" विजय बुरी तरह बौखला गया था---"ये तू क्या बक रहा है?”
"अब वार-बार कह दिया गुरु कि बीच में मत बोलो I” बिजय की ओर पलटकर खूनी ढंग से गुर्राया लड़का---""तुम जानते हो कि बिकास एक बार जो कह देता है वो पत्थर की लकीर होती हे । धनुषटंकार अगर जिंदा हो सकता है तो उसके लिए मैं चीते से टकराऊंगा ।"
"अबे मिया, तुम्हारा दिमाग खराब हो क्या है I" विजय बोला…"मर वो सकता नहीं और उसके जीते-जी तुम "चंद्रवटी" हासिल नहीं कर सकते. . .इसका साफ मतलब हुआ कि बंदर को जिंदा करने के चक्कर में तुम्हारी भी रामनाम सत्य हो जाएगी ।"
"मौत से टकराने वाले मौत से डरा नहीं करते गुरु ।" विकास का स्वर पत्थर की भांति सख्त था…“यह सिद्धांत तुम्ही ने मुझे बताया है. . .ये तुम भी जानते हो गुरु कि मेरा निश्चय अडिग है ।। आपके शिष्य की बहादुरी को ललकारा जा रहा है, गुरु. ..इस ललकार को ठीक दिखाना आपके चरणों की तौहीन होगी । आपके चरणों की कसम गुरु, मेरे दिल में झांको , मुझसे पूछो गुरु कि आपकी इज्जत क्या है? मेरे जीते-जी आपका अपमान नहीं हो सकता l”
“अबे मियां होने दो साले अपमान को. . .हमारा साला क्या बिगाड लेगा?"
"ये आप नहीं गुरु, आपका प्यार बोल रहा है ।" विकास ने बिजय की आंखों-मे-आंखें डालकर कहा-“मैं जानता हू कि आपको मुझसे कितना प्यार हे . . . लेकिन आप ये आज तक नही जान पाए गुरु कि बिकास की नजरों में आप क्या हैं? आपको याद होगा गुरु कि मैंने कहा था…गुरु, विकास के जिस्म का जर्रा-जर्रा, खून की एक…एक बूंद, आपकी और सिर्फ आपकी है, आज मैं आपकी शान पर मिट जाऊंगा । आपका चेला हूं आपके नाम पर कोई धब्बा नहीं आने दूगा ।” कहने के एकदम बाद उसने धनुषटंकार की लाश उसके सामने कर दी-"इसे देखो गुरु इसे देखो. . .इस लाश को देखकर क्या तुम्हारी आंखों मेँ पानी नहीं आता? क्या तुम्हारे दिल मेँ कोई टीस नहीं उठती गुरु? ये वो बदनसीब है अंकल जिसे आदमी होते हुए भी बंदर का जिस्म मिल गया l जरा वो एक…एक घटना याद करो गुरु. ..जब से हमारे साथ रहा है ।" कहते-कहते लडके की आंखें भर आई-“अगर इसकी लाश को देखकर तुम्हारा दिल नहीं फटता तो गुरु मुझे यकीन है…विकास की लाश क्रो देखकर भी तुम्हारे आंख से एक आंसू तक नहीं गिरेगा । तुम तो एक जासूस हो ना गुरु. . .पत्थर दिल. . .तुम्हें किसी से प्यार नहीं. . .फिर विकास की मौत से क्यों डरते हो. . .तुमने तो उसी दिन अपने दिल के स्थान पर पत्थर का टुकडा रख लिया था गुरु जिस दिन तुम जासूस बने. . .तुम क्या जानो कि जब कोई धनुषटंकार जैसा दिल का प्यारा मरता है तो दिल पर क्या गुजरती है? तुम्हारे दिल के स्थान पर रखा वो पत्थर का टुकड़ा विकास की मौत पर तुम्हें रोने भी कहां देगा?”
"अबे दिलजले, बात को समझो ।" बिजय पूरी तरह झुंझला उठा था ।
"बात को समझने की जरूरत तुम्हें है, गुरु I" विकास बोला…“कार्दून बेटे . . .मैं चीते से टकराने के लिए तैयार हू I”
"ये बात हुई ना I” खुश होकर बोला टुम्बकटू-----" अब बने हो तुम चीते के दुश्मन ।"
इसके पश्चात विजय ने विकास क्रो समझाया हर ढंग से ।
किन्तु. ..उसे न मानना था और न ही माना ।
उसका दुढ़ निश्चय था कि वह चीते से टकराएगा ।
बिजय विकास को इस मुसीबत से बचा सके । उसके लिए हर पल तेजी से सोच रहा था ।
फिनिश
बिजय ने अपने दिमाग को हर ढंग से घुमाया किंतु. . . व्यर्थ. . . ।
वह कुछ भी नहीं कर सका और विकास और चीते की टक्कर का प्रबंध कर दिया गया ।