• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

चीते का दुश्मन complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
इससे पूर्व कि विजय कुछ जवाब दे, विकास बोला-“अब ना मुझे सबसे बडा जासूस बनना है बेटे और ना ही तुम्हारे इस यान को प्राप्त करना है । अब तो मुझे तुमसे बदला लेना है । याद रखना, मौका मिलते ही मैं घनुषटंकार की मौत का अचानक बदला लूगा I"

"अगर मैं धनुषटंकार को जिंदा कर दूं?" अजीब ढंग से लहराता हुआ टुम्बकटू बोला ।

"क्या मतलब है?” खूनी निगाहों से उसे घूरते हुए बिकास गुर्राया ।

"मतलब ये है बापूजान कि मेरे पास एक ऐसी वस्तु है जिससे मैं किसी मी मृत प्राणी को पुन: जिंदा कर सकता हूं।"

"अबे कार्टून प्यारे, बच्चे को क्या उल्टा-सीधा पाठ पढा रहे हो?" बिजय आश्चर्य के साथ बोला--“वस्तु ना हो गई, मिशातुल्का की बजरबट्टू हो गई ।

“मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं प्यारे झकझक्रिए I" टुम्बकटू ने कहा…“मैं उसी वस्तु की बात कर रहा हूं जिसके लिए मैंने कहा था कि उसके मिलने पर मानव ईश्वर पर भी विजय प्राप्त कर लेगा । अर्थात् उससे भी महान बन जाएगा । किसी भी मृत जीव को अगर वह तीन बार सुंधा दी जाए तो वह जीवित हो जाता हे । अब जरा तुम ही सोचो कि क्या ऐसी कामयाब वस्तु की प्राप्ति पर मानव ईश्वर पर विजय प्राप्त नहीं कर लेगा । एक मौत ही ऐसी वस्तु है जिस पर दुनिया काबू नहीं पा सकी है । हर आदमी जानता है क्रि उसे मरना है । इंसानों के देखते-ही…देखते इंसान मर जाता है किन्तु मानव कुछ नहीं कर पाता । ईश्वर का सिद्धांत है कि हर आदमी को मरना है किंतु इस वस्तु की प्राप्ति पर इंसान भगवान के इस सिद्धांत पर बिजय पा सकता है, मानवता भगवान से ऊंची हो सकती है I”

"प्यारे कार्दून भाई...कहीँ ये कोई लम्बी-चौडी गप्प तो नही है I"

"टुम्बकटू की जुबान से निकला हुआ एक-एक शब्द सत्य होता है झकझकिए प्यारे, अगर तुम इस बात को अब भी नहीं समझे हो तो निश्चय ही तुम धरती के सबसे बड़े मूर्ख हो I” टुम्बकटू ने कहा…“मेरी फिल्म बिलकुल सत्य थी । आज तक मेरी जुबान से झूठ निकला ही नहीं हे I”

"हां बेटे, सत्यवादी राजा हरित्रचंद्र के बाद एक तुम्ही तो पैदा हुए हो?” विजय बोला…"चलो खैर. . .हम तुम्हारी इस गप्प पर भी विश्वास कर लेते हैं I” विजय इस प्रकार बोला मानो उस पर कोई बहुत बड़ा एहसान कर रहा हो-'लेकिन अब तुम हमे उस वस्तु के दर्शन तो करवाओ ।"

'उस वस्तु के दर्शन सबसे पहले बापूजान कर सकते हैं ।" लहराते हुए टुम्बकटू ने कहा

"क्यों प्यारे.. .ऐसे अपने दिलजले में क्या सुर्खाब के पर लगे हुए हैं?"

“सुर्खाब के पर तो नहीं लगे हैं लेकिन "चीते का दुश्मन" क्योंकि बापूजान हैं, अत: कायदे के मुताबिक चीते से टकराने का हक भी उन्हीं को जाता है । ओर इससे पहले भी बडी मुसीबत तो ये है कि वह वस्तु भी इसी चीते कै दाएं कान कै अंदर हे I”

"अमां मियां. . .तुम बक क्या रहे हो. . .?” विजय बोखलाया ।

"बक नहीं रहा हू हुजूर, फर्मा रहा हू I” टुम्बकटू अदब के साथ बोला…“अगर बापू इस चीते को परास्त कर देंगे तो सारे संकट ही दूर हो जाएंगे यानी कि बापू सबसे बडे जासूस भी बन जाएंगे. . दुनिया का यह सबसे बडा खजाना भी उन्हें प्राप्त हो जाएगा. . . । बंदा उनका गुलाम भी बन जाएगा और इनकी शान में सबसे ज्यादा खुशी की बात तो ये होगी कि ये बंदर मियां भी उठ बैठेंगे । साथ ही भगवान पर भी ये बिजय प्राप्त कर लेगे I”

बिकास ने सुना. . और सुनकर उसके चेहरे पर अजीब-सी कठोरता उभर आई बोला…“मैं तैयार हूं I”

"किस बात के लिए बे दिलजले.. .?" एकदम गुर्राया बिजय ।

"बीच में मत बोलो गुरु I” खूंखार स्वर में चीखा विकास…“टुम्बकटू...मैं चीते से टकराने कै लिए तैयार हू. . . I"

"अबे ओ अफ़लातून की औलाद !" विजय बुरी तरह बौखला गया था---"ये तू क्या बक रहा है?”

"अब वार-बार कह दिया गुरु कि बीच में मत बोलो I” बिजय की ओर पलटकर खूनी ढंग से गुर्राया लड़का---""तुम जानते हो कि बिकास एक बार जो कह देता है वो पत्थर की लकीर होती हे । धनुषटंकार अगर जिंदा हो सकता है तो उसके लिए मैं चीते से टकराऊंगा ।"

"अबे मिया, तुम्हारा दिमाग खराब हो क्या है I" विजय बोला…"मर वो सकता नहीं और उसके जीते-जी तुम "चंद्रवटी" हासिल नहीं कर सकते. . .इसका साफ मतलब हुआ कि बंदर को जिंदा करने के चक्कर में तुम्हारी भी रामनाम सत्य हो जाएगी ।"

"मौत से टकराने वाले मौत से डरा नहीं करते गुरु ।" विकास का स्वर पत्थर की भांति सख्त था…“यह सिद्धांत तुम्ही ने मुझे बताया है. . .ये तुम भी जानते हो गुरु कि मेरा निश्चय अडिग है ।। आपके शिष्य की बहादुरी को ललकारा जा रहा है, गुरु. ..इस ललकार को ठीक दिखाना आपके चरणों की तौहीन होगी । आपके चरणों की कसम गुरु, मेरे दिल में झांको , मुझसे पूछो गुरु कि आपकी इज्जत क्या है? मेरे जीते-जी आपका अपमान नहीं हो सकता l”

“अबे मियां होने दो साले अपमान को. . .हमारा साला क्या बिगाड लेगा?"

"ये आप नहीं गुरु, आपका प्यार बोल रहा है ।" विकास ने बिजय की आंखों-मे-आंखें डालकर कहा-“मैं जानता हू कि आपको मुझसे कितना प्यार हे . . . लेकिन आप ये आज तक नही जान पाए गुरु कि बिकास की नजरों में आप क्या हैं? आपको याद होगा गुरु कि मैंने कहा था…गुरु, विकास के जिस्म का जर्रा-जर्रा, खून की एक…एक बूंद, आपकी और सिर्फ आपकी है, आज मैं आपकी शान पर मिट जाऊंगा । आपका चेला हूं आपके नाम पर कोई धब्बा नहीं आने दूगा ।” कहने के एकदम बाद उसने धनुषटंकार की लाश उसके सामने कर दी-"इसे देखो गुरु इसे देखो. . .इस लाश को देखकर क्या तुम्हारी आंखों मेँ पानी नहीं आता? क्या तुम्हारे दिल मेँ कोई टीस नहीं उठती गुरु? ये वो बदनसीब है अंकल जिसे आदमी होते हुए भी बंदर का जिस्म मिल गया l जरा वो एक…एक घटना याद करो गुरु. ..जब से हमारे साथ रहा है ।" कहते-कहते लडके की आंखें भर आई-“अगर इसकी लाश को देखकर तुम्हारा दिल नहीं फटता तो गुरु मुझे यकीन है…विकास की लाश क्रो देखकर भी तुम्हारे आंख से एक आंसू तक नहीं गिरेगा । तुम तो एक जासूस हो ना गुरु. . .पत्थर दिल. . .तुम्हें किसी से प्यार नहीं. . .फिर विकास की मौत से क्यों डरते हो. . .तुमने तो उसी दिन अपने दिल के स्थान पर पत्थर का टुकडा रख लिया था गुरु जिस दिन तुम जासूस बने. . .तुम क्या जानो कि जब कोई धनुषटंकार जैसा दिल का प्यारा मरता है तो दिल पर क्या गुजरती है? तुम्हारे दिल के स्थान पर रखा वो पत्थर का टुकड़ा विकास की मौत पर तुम्हें रोने भी कहां देगा?”

"अबे दिलजले, बात को समझो ।" बिजय पूरी तरह झुंझला उठा था ।

"बात को समझने की जरूरत तुम्हें है, गुरु I" विकास बोला…“कार्दून बेटे . . .मैं चीते से टकराने के लिए तैयार हू I”

"ये बात हुई ना I” खुश होकर बोला टुम्बकटू-----" अब बने हो तुम चीते के दुश्मन ।"

इसके पश्चात विजय ने विकास क्रो समझाया हर ढंग से ।

किन्तु. ..उसे न मानना था और न ही माना ।

उसका दुढ़ निश्चय था कि वह चीते से टकराएगा ।

बिजय विकास को इस मुसीबत से बचा सके । उसके लिए हर पल तेजी से सोच रहा था ।

फिनिश

बिजय ने अपने दिमाग को हर ढंग से घुमाया किंतु. . . व्यर्थ. . . ।

वह कुछ भी नहीं कर सका और विकास और चीते की टक्कर का प्रबंध कर दिया गया ।
 
वह यान का सबसे लम्बा-चोड़ा विशाल हॉल था । एक कोने में विजय को उसी ढंग से कैद कर दिया गया था जिस ढंग से वह पहले कैद था यानी जिस्म का गर्दन तक का सम्पूर्ण भाग सोने के फर्श के नीचे दबा हुआ था और केवल चेहरा बाहर था l

अत: वह हाल का दृश्य बडी सरलता से देख सकता था ।

एक तरफ़ बिकास खड़ा था ।

दूसरी ओर टुम्बकटू ।

वहाँ कोई भी जानवर नहीँ था ।

हाँल चारों ओर से बंद कर दिया गया था । इस समय हाँल के अंदर केवल तीन ही व्यक्ति थे ।

टुम्बकटू विकास की ओर देखकर मुस्कराया ओर बोला…“कहिए बापूजान. . .तैयार हो?”

"एकदम तैयार हू बेटे ।" विकास अपने गुलाबी होंठों पर मुस्कान बिखेरता हुआ बोला…“लेकिन लगता है अभी तुम्हारा चीता तैयार नहीं है I”

"चीता तो अपने दुश्मन से टकराने के लिए तैयार है मेरी जान I” टुम्बकटू ने कहा “लेकिन मैँ तुम्हारे साथ इतनी बेइंसाफी नहीं करूंगा I मैं जानता हू कि तुम्हारी जेब

मेँ रिवॉल्वर पड़ा है र्कितु ये भी जानता हू कि रिवाल्वर कौ गोलियों का चीते पर कोई प्रभाव नहीं होगा इसलिए मैँ तुम्हें ये हथियार देता हू I” कहते हुए टुम्बकटू ने हाल की दीवार पर टंगा एक अजीब-सा हथियार उतार लिया ।

विजय और विकास ने देखा…वह हथियार क्या था? सोने की एक दो गज लम्बी मोटी मजबूत जंजीर में बंधा सोने का ही एक ग्लोब था । ठीक एक फुटबाल जैसा । ग्लोब को उतारकर टुम्बकटू ने जंजीर का अंतिम किनारा पकडा और बिकास को जंजीर के अंदर लगा हुआ बटन दिखाता हुआ बोला--"ये देखो, ये एक बटन है । अब इसको मैं दबा देता हूं।” कहते हुए टुम्बकटू ने बटन दबा दिया I बटन दबते ही नीचे ग्लोब में चारों ओर लगभग दस चाकू कै फल बाहर आ गए । ये चाकू के चमकीले फल एक-एक फुट लम्बे थे l चाकुओं के बाहर निकलते ही सारा ग्लोब हीटर कै तारों की भांति एकदम लाल सुर्ख होता चला गया । बाहर निकले हुए दस चाकू भी दहक उठे । अब ये हथियार अजीब-सा लग रहा था ।

"लो, शायद इस हथियार के सहारे तुम थोडी…बहुत देर चीते का मुकाबला कर सक्रो!"

“मुझे किसी हथियार की जरूरत नहीं है कार्टून बेटे।" बिकास सपाट स्वर में बोला…“तुम चीते को सामने लाओ I"

"अवे ले ले दिलजले l” फर्श पर धंसा हुआ विजय बोला…"ज्यादा बहादुरी मूर्खता होती है ।"

टुम्बकटू ने एक बार और विकास से हथियार लेने कै लिए कहा किन्तु उसने इंकार कर दिया I बड़े विचित्र ढंग से मुस्कराया टुम्बकटू उसे उसी प्रकार साधारण स्थिति में लाकर, उसी प्रकार दोबार पर टांगता हुआ बोला…"खैर तुम्हारी इच्छा लेकिन जब तुम्हे` लडाई कै ब्रीच इसकी जरुरत पडे तो ले सकते हो I”

उत्तर में विकास ने कुछ बोलने की आवश्यकता नहीं समझी ।

"अब तैयार हो जाओ बापूजान ।" कहते हुए दुम्बकटू ने दीवार में लगा एक बटन दबा दिया । हाल के फर्श का एक लम्बाचौड़ा दुकड़ा ऊपर उठता चला गया l इससे फ़र्श में वह रिक्त स्थान बन गया । गोल्ड की दो मोटी रोंडों पर फ़र्श का वह दुकड़ा छत की ओर ऊपर उठता जा रहा था l कुछ ही देर बाद रिक्त स्थान से ऊपर आते हुए उस लाल हाथी रूपी चीते की विशाल पीठ दिखाई दी । विकास पूरी तरह सतर्क हो गया। उसके जिस्म में एक अजीब-सा तनाव आ गया । घीरे-धीरे चीते का जिस्म ऊपर आता जा रहा था । ठीक उस समय उसका सारा जिस्म हॉल में आ गया जब फर्श के टुकडे का हाल की छत से जाकर स्पर्श हो गया l विजय और विकास ने देखा…चीता ऊपर वाले जैसे ही एक विशाल सोने के दुकड़े पर बैठा था । यह टुकडा भी बिल्कुल फ़र्श में बने रिक्त स्थान के बराबर था यानी क्षेत्रफल की दृष्टि से उसी टुकड़े के बराबर था जो फर्श को रिक्त करके छत से जा चिपका था । किंतु उसकी कमी उसी जैसे नीचे के टुकड़े ने बराबर कर दी । फिर उस दुकड़े ने फर्श के रिक्त स्थान मेँ पूरी तरह फिक्स होकर ऊपर वाले टुकड़े की पूर्ति कर दी थी । ये दोनों टुकड़े दो मोटी-मोटी सोने की रॉडों से सम्बंधित थे । यानी इस समय दो सोने की रार्डे हाल के फ़र्श से छत तक तनी हुई थीं ।

चीते ने अपनी कटोरे जैसी बडी-बडी आंखें हाल में चारों तरफ घुमाकर हाँल का दृश्य देखा और. . . ।

उसके कंठ से एक ऐसो भयानक गर्जना निकली कि एक बार पुन: यान का जर्रा-जर्रा कांप उठा I

चीता इस गर्जना के साथ ही खड़ा हो गया । बिकास संभलकर दो कदम पीछे हो गया ।

लहराता हुआ गन्ने जैसा टुम्बकटू चीते कै सामने आया I चीते ने ऊपर उठो हुई सूंड सम्मान के साथ नीचे झुका दी । टुम्बकटू ने अपनी अजीबो गरीब भाषा मेँ न जाने क्या कहा?

इस भाषा को बिजय अथवा विकास मेँ से कोई नहीं समझा । अलबत्ता उन्होंने इतना अवश्य देखा कि चीते से बात करते-करते टुम्बकटू ने बिकास की ओर संकेत किया ।

विजय और बिकास चुपचाप उसे देखते रहे ।

कुछ ही देर बाद टुम्बकटू चीते के सामने से हटा। उस समय विकास ने देखा…चीता अपनी कटोरे जैसी आंखों से उसी को घूर रहा था ।

मुस्कराता हुआ टुम्बकटू उसके सामने आया और बोला…“मैंने चीते को समझा दिया है कि तुम उसके दुश्मन हो । वह बहुत दिन से अपने किसी दुश्मन की प्रतीक्षा मेँ था । तुम्हें अपने दुश्मन के रूप में देखकर वो मुझ पर नाराज हो रहा है । कहता है, दुश्मन ऐसा तो लाते जो उसके सामने कुछ देर ठहर पाता । वैसे उसे मैंने तुम्हारा परिचय दे दिया है I उससे कह दिया है कि इस दुनिया के सबसे खतरनाक आदमी तुम हो । अन्य सब तुमसे... ।"

"मैं बेकार की बकवास में समय नहीं खोना चाहता ।" बीच ही में वोला विकास--"वैसे तैयार है वो?”

" वो तो मेरा आदेश मानता है I"

"ठीक है ।" कहने कै एकदम बाद बिकास ने अपनी दृष्टि टुम्बकटू से हटाकर चीते पर गडा दी । चीता पहले ही अपनी कटोरे जैसी आँखों से घूर रहा था I आंख मिलते ही बिकास के जिस्म में एक अजीब-सी सिहरन दौड गई ।

विजय को अपना गला सूखता हुआ-सा महसूस हुआ । टुम्बकटू एक तरफ़ हटकर बिजय के समीप ही क्रोने मे जाकर खड़ा हो गया था । इस समय उसके होठों पर ऐसी मुस्कान थी मानो सारे जहां में उससे अघिक सीधा व्यक्ति नहीं होगा I

इयर विकास चीते की ओर बढा ।

चीता बिकास की और ।

लड़कै के दिमाग में अपने वो सारे दांव घूम रहे थे जो उसने आज तक की अपनी सारी जिंदगी में सीखे थे । अभी वह ठीक से निश्चय नहीं कर पाया था कि वह इस चीते को किस प्रकार परास्त करेगा? उधर चीते ने अपनी सूड हवा में लहराकर दहाड मारी ।

बिकास को लगा जैसे वह उसकी दहाड की हवा में उड़ जाएगा ।

उसी क्षण, बडी तेजी से चीते की सूंड चली, किंतु. . .

वो खतरनाक लडका तो उस समय अपनी समस्त इंद्रियों के साथ सतर्क था । किसी दक्ष नट की भांति उसका जिस्म हवा मेँ कलावाजियां खाता हुआ सीधा चीते की विशाल पीठ पर जाकर गिरा।

अभी बिकास उसकी पीठ पर खड़ा हुआ ही था कि जैसे उसे एकदम किसी अत्यंत लम्बे सर्प ने अपने जिस्म में लपेट लिया हो, चीते ने पलक झपकते ही उसे अपनी लम्बी सूड में लपेटा और सूड में लपेटे-ही-लपेटे अपनी कमर पर ही पटक दिया ।

बिकास के कंठ से एक चीख निकल गई । बिजय तड़प उठा I

"इतनी जल्दी नहीं बापू ।" टुम्बकटू अपने स्थान से चीखा ।

इधर इस एक ही पटकी से विकास के जिस्म की हड्डियां जेसे चरमरा गई थी ।

लेकिन वह विकास था । वह जानता या कि इस चीते से टकराने का मतलब क्या है?

अगली पटकी देने के लिए चीते ने उसे अपनी पूंछ मेँ लपेटे-ही-लपेटे पुन: हवा मेँ उठाया था । उस एक ही पल मेँ बिकास समझ गया था कि अगर चीते ने उसे एक पटकी और मार दी तो निश्चित रूप से उसके जिस्म की दो-चार हड्डियां उसका साथ छोड़ देंगीं । बस, यही सोचकर इस एक ही क्षण में उसने अपने दिमाग को चेतन किया । उस पल वह चीते की पूंछ में लिपटा हुआ हवा में था । चीता उसे तेजी से अपनी कमर पर पटकने के लिए वापस ला ही रहा था कि…

झपटकर विकास ने अपने समीप वाली गोल्ड की वह मजबूत रॉड पकड़ ली ।
 
चीते ने उसे कमर पर पकडना चाहा । लेकिन विकास के दोनों हाथों की पकड़ गोल्ड की राॅड पर मजबूत हो गई ।

एक तीव्र झटका लगा, किन्तु चीता विकास को अपनी कमर पर पटकी देने में सफ़ल नहीं हो सका ।

कदाचित इस स्थिति मे चीता भी चकराया ।

उसने पुन: अपनी पूंछ को एक झटका दिया । किंतु विकास की पकड सोने की रांड पर शिकंजे की भांति थी ।

चीता अपने इरादे में सफल नहीँ हो सका । इधर विकास भी ऐसी स्थिति में नहीं था जिसे उसके हित में कहा जा सके l उसने राड पकड तो रखी थी परंतु चीते द्धारा दिए गए झटकों से उसे लगा था कि उसकी दोनो कलाइयां जोड पर से टूटने वाली हैं ।

यह वह समझ चुका था कि वह चीते के और अधिक झटके सहन नहीं कर सकेगा ।

तभी उसकी नजर चीते की पूंछ के अंतिम सिरे पर पडी । वह सर्प कै फन की भांति इधर-उधर लहरा रहा था ।

इधर धड़कते दिल से विजय बिकास को देख रहा था ।

और तब, जबकि उसने बिकास का एक मौत को दहला देने वाला कारनामा देखा । विजय के जिस्म का रोंया रोंया खडा हो गया । उसे लगा अब विकास को कोई नहीँ बचा सकेगा । उसने देखा था, विकास ने अपनी दोनों टांगें गोल्ड रांड में कैची की तरह फंसा दी । गोल्ड की वह रांड विकास की टांगों के बीच में फसी हुई थी । उसी क्षण चीते ने एक और झटका दिया l विकास के जिस्म का पोर’-पोर हिंलकर रह गया लेकिन उसकी टांगों की पक्रड़ राँड पर से हल्कीन्सी भी कमजोर न पडी । अलबत्ता वह अपने हाथों से चीते की पूंछ के अंतिम सिरे की सोने की रांड पर लपेटने मेँ सफल हो गया था । उसी समय चीते ने बुरी तरह चिंघाड़कर एक और झटका दिया मगर इस झटके को सहन करते हुए विकास ने पूंछ के अंतिम सिरे की गांठ राड पर लगा दी । इसके बाद उसने पुन: रांड को पैरों से छोडकर हाथों की गिरफ्त में ले लिया । विकास अपने जिस्म पर लिपटी पूंछ को देखकर यह पता लगाने का प्रयास कर रहा कि वह पूंछ में दाएं से बाएं लिपटा है अथवा बाएं से दाएं?

चीता इस विचित्र-सी परिस्थिति में परेशान हो गया था ।

उसने एक झटका और दिया, किंतु परिणाम कुछ नहीं निकला । एक झटके से विकास को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं हुई क्योंकि ये झटका गोल्ड की रांड में लगा था और रांड का टस…से-मस होने का प्रश्न ही नहीं उठता था ।

विकास के पास अब अच्छा अवसर था, चीते की पूंछ का अंतिम सिरा क्योंकि वह गोल्ड की रॉड पर बांध चुका था, इसलिए उसका झटका रांड को सहन करना था ।

रांड झटका सहन करने में सक्षम भी थी । बस, उचित अवसर का सदुपयोग करने हेतु विकास रांड पर तेजी के साथ चार-पांच बार बाएं से दाएं घूम गया, उसके जिस्म पर पूंछ के लपेटे क्योंकि दाएं से बाएं थे इसलिए हर घूम के साथ लपेटे उसके जिस्म से निकलकर गोल्ड की रांड के चारों ओर लिपटने लगे ।

दुम्बकटु जैसा व्यक्ति आश्चर्य के साथ उसे देख रहा था I विजय प्रसन्नता से चीख रहा था-“वाह. . .वाह...प्यारे दिलजले. . .साले का पपीता बना दो I”

लेकिन बिकास का थ्यान न तो टुम्बकटू के आश्चर्य की ओर था और न ही विजय की चीख…चिल्लाहट पर । इस समय वह रॉड पर ही चिपका हुआ था । चीता बराबर झटके-से दे रहा था । विकास पूंछ से आजाद होकर रॉड से चिपका हुआ सोच रहा था । उसे क्या करना चाहिए?

अगले ही पल उसने अपना निश्चय कर लिया, नटों की भांति ही उसका जिस्म कलाबाजियां खाता हुआ फर्श पर आया । बिजली की-सी तेजी के साथ वह दीवार पर लटके उस बिचित्र हथियार की ओर लपका, हथियार संभालकर उसने बही बटन दबाया।

चाकू बाहर आ गए और ग्लोब दहकने लगा । उसे सम्भालकर बिकास ने पुन: हवा मैं जम्प लगाई और सीधा चीते की पीठ’ पर पहुंचा ।

अगले ही पल वह पागलों की भांति बेतहाशा घुमा घूमाकर ग्लोब चीते के सिर में बजा रहा था । चीते की चमडी वेहद सख्त थी लेकिन विकास भी हर बार में अपनी पूरी शक्ति का प्रयोग कर रहा था । चीते के सिर से हल्का- हल्का-सा खून बहने लगा था ।

वो विकास का लगभग पच्चीसवां वार था जब अचानक चीते ने ग्लोब को अपनी सूंड मेँ फंसाकर एक तेज झटका दिया । किसी भी कीमत पर विकास में चीते से अधिक शक्ति नहीं थी ।

एक ही झटके मेँ वह हथियार और बिकास, दोनों ही चीते की मोटी मूड में लिपटे नजर आए । उस समय विकास को छटी का दूध याद आ गया जब खुद को उसने चीते को सूंड में लिपटे उसके भयानक मुह के सामने लहराते पाया । उसी समय चीते ने एक भयंकर दहाड मारी ।

"दिलज़ले...दिलजले. . . ।" विजय पूरी शक्ति से चीखा-"इसकी आंख ।"

"अबे I” टुम्बकटू एकदम बोला-“प्यारे झकझकिए, तुम्हें बोलने की इजाजत किसने दी?” कहने के साथ ही टुम्बकटू ने एक जोरदार चपत उसके सिर पर मारी ।

आतिशबाजी का कमाल विजय ने उसी समय अपनी आखों के सामने देखा ।

खुद को सम्भांलने की उसने भरपूर चेष्टा की किन्तु सम्भाल नहीं सका ।

और उस बेचारे के न चाहते हुए भी एक गाढा काला पदार्थ उसकी आंखों कै सामने खिंचता चला गया ।

उसकी गर्दन एक तरफ को लुढक गई । वह बेहोश हो गया र्कितु . .

अपना काम वह कर चुका था l

जो कुछ उसने कहा था विकास ने सुन लिया था । इस समय वह चीते की सूड में कैद उसके चेहरे के सामने ही मंडरा रहा था । वह अपने बहुत निकट चीते की कटोरे जैसी आंखे देख रहा था । बस अब यही एक रास्ता रह गया था ।

गजब की तेजी से मूड में लिपटे हुए विकास ने अपनी जेब से रिबॉंत्वर निकाला। एक भी पल गवाना वह अपनी जिंदगी के लिए घातक समझता था । उसने एकदम रिवॉल्वर सीधा किया और. . .

"धांय . . .धांय . . . !"

हल्के से अंतराल के साथ उसका रिवॉल्वर दो बार गर्जां ।

दोनों गोलियां एकदम चीते की आंखों में लर्गी । असह्य पीड़ा से चीता बुरी तरह चिंघाड़ उठा ।

उसकी दोनों आंखें फट गई । दोनों आंखों से गाढे खून का फव्वारा उछला, इस खून ने विकास को भी लहुलुहान कर दिया ।

झुंझलाकर चीते ने सूंड से लिपटे विकास को दे मारा I किसी हल्के…से गुडूडे की भांति विकास हवा में लहराकर हाँल की एक चमकदार दीवार से टकराया । उसे लगा जैसे उसकी सारी हड्डियां चरमरा उठी हैं । किंतु इस समय उसमे शिथिलता आई तो उसकी सफलता असफ्तता में बदल जाएगी अत: अपनी पीड़ा की चिंता किए बिना वह उछलकर खडा हो गया ।

उसने देखा…पूंछ बंधी हुई थी । दोनों आंखों में ढेर सारा खून बह रहा था, खून इतना गाढा था कि उसका लाल रंग अपनी हद तक पहुचकर हत्का हल्का-सा काला हो गया था । चीता भयानक पीड़ा से रह-रहकर डकरा रहा था, दहाड-दहाड़कर झुंझलाता हुआ झटके मार रहा था और उसकी शक्ति के सामने घुटने टेककर गोल्ड की रांड भी हिलने लगी थी । बिकास ने स्थिति का भली-भांति निरीक्षण किया और फर्श पर एक तरफ़ पड़ा अपना रिवॉल्वर उठा लिया । रिवॉल्वर उठाकर वह धीरे-धीरे चीते की ओर बढा ।
 
शांत खड़ा हुआ टुम्बकटू विकास के करतब देख रहा था इस युद्ध मेँ वह बिल्कुल भी हस्तक्षेप करने का प्रयास नही कर रहा था ।

अब चीते को अपना दुश्मन दीख भी नहीँ रहा था । विकास के लिए चीते की यही कमजोरी जैसे वरदान बन गई थी ।

वह चीते के ठीक सामने पहुचा और रिवॉल्वर की नाल उसकी सूंड के एक छेद में डालकर तीन फायर किए ।

चीते की सूंड फ़ट गई ।

जबर्दस्त भयानक पीड़ा से वह चिंधाड़ उठा । उछलकर विकास उससे दूर हुआ । रिवॉल्वर जेब में डालकर फ़र्श पर पडा वह पत्र उठाया और इससे पूर्व कि वह अपना आगे का कोई जौहर दिखा सकै चीते कै झटके सहन न करती हुई राड टूट गई ओर गोल्ड का वह काला टुकडा जो छत से सटा हुआ था हवा में लहराकर धड़ाम से चीते फे ऊपर आ गिरा ।

गोल्ड का ये टुकडा अत्यंत भारी था । चीते का विशाल जिस्म कई स्थानों से घायल हो गया । अचानक पीडा से चीता मचल उठा। भाग्यवश यह विकास के पक्ष में ही हुआ था ।

चोट इतनी सख्त लगी थी कि चीता घुटनों के बल बैठ गया था ।

कुछ ही देर में डकराकर चीता शांत हो गया ।

बिकास ने पलटकर टुम्बकटू की ओर देखा l

"तुम्हारा दुश्मन बेहोश हो गया है बापूजान I” अपने स्थान पर लहराता हुआ टुम्बकटू बोला ।

"युद्ध के मैदान मेँ जो मुकाबला करने की शक्ति खो देता है, परास्त माना जाता है I" टुम्बकटू क्रो घूरते हुए विकास ने कहा ।

"मैं आपकी बात से सहमत हू l” टुम्बकटू बोला-"निश्चित रूप से आपने चीते को पराजित कर दिया है ।"

“अपना वादा याद हे ना I”

"टुम्बकटू न तो कभी अपना वादा भूलता है और न ही झूठा वादा करता है I” वह बोला…"तुम चीते के कान से चंद्रवटी निकाल सकते हो I”

बिकास इजाजत मिलते ही चीते की ओर बढा । समीप पहुंचकर उसके कान में हाथ डाल दिया और वापस आया तो उसके हाथ में एक अजीब गंदी-सीं गोल वस्तु दबी हुई थी । देखने मेँ वह वस्तु बहुत ही गंदी लग रही थी और जिस समय उसमें से निकलने वाली तीव्र दुर्गध बिकास के नथुनों में से घुसकर भेजे में प्रविष्ट हुई तो उसका दिल चाहा कि इस वस्तु को वह दूर फेंक दे । उससे निकलने वाली बदूबू इतनी तीव्र थी कि विकास क्रो अपना भेजा सड़ा हुआ-सा महसूस हुआ ! उसमें से ऐसी बदूवू उठ रही थी जैसे सडी हुईं लाश मैं से उठती है

"क्या यही वो चंद्रवटी हैं?” उसकी वदूबू को भूलकर विकास ने टुम्बकटू से पूछा l

"इस बंदर को सुधाकर देखो, मालिक ।" टुम्बकटू ने बेहोश विजय कै पास ही खडे धनुषटंकार के मृत जिस्म की ओर संकेत करते हुए कहा-“आपको इसका उत्तर खुद ही प्राप्त हो जाएगा ।"

चंद्रवटी को लेकर तेजी से वह घनुषटंकार की ओर बढा,

उसे सुंघाया ।।

आश्वर्या महान आश्चर्या!

टुम्बकटू का कथन एकदम सत्य था ।

धनुषटंकार के जिस्म में चमत्कृत कर देने वाले ढंग से हृरकत हुई l तीन मिनट पश्चात ही वह इस प्रकार उठकर खडा हो गया मानो वह मृत नही बेहोश था । विकास की आंखें खुशी से चमक रही थीं । घनुषटंकार उसके गले में बांहें डालकर झूल गया ।

“अब तुम मेरे गुलाम हो ।” विकास ने टुम्बकटू से कहा ।

"मैँ तो निसंकोच खुद को आपका गुलाम स्वीकार करता हूं।” दुम्बकटू ने कहा-“अब ये यान आप ही का है ।"

फिनिश

बिजय भी होश में आ चुका था । उसे कैद से मुक्त कर दिया गया था । इस समय विकास, धनुषटंकार, बिजय और टुम्बकटू यान के ऐसे कक्ष में बैठे थे जो देखने में टुम्बकटू की प्रयोगशाला-सी लगती थी । टुम्बकटू वास्तव में इस समय ऐसे काम कर रहा था मानो इस समय वह वास्तव मेँ विकास का गुलाम हो I विकास को अपना मानकर प्रत्येक रहस्य बता चुका था I

इस समय टुम्बकटू ने उसे एक बिचित्र-सा टी.वी. जैसा यंत्र खोलकर दिखाया था । यंत्र में एक टीबी. जैसी ही कांच की प्लेट थी । उस कांच पर यान के बाहर के दृश्य उभर रहे थे । सबकी निगाहें उसी यंत्र पर गडी हुई थी कि अचानक वे तीनों हल्के-से चौंक पड़े । उन्होंने साफ़ देखा था, पानी में एक पनडुब्बी चकरा रही थी । कुछ देर तक सब उसे देखते रहे थे, फिर विकास ने प्रश्न किया-“कार्टून मियां, ये क्या है?"

"ये तुम्हारे जासूस साथी हैं जो मेरे यान को तलाश कर रहे हैं I”

"इन्हें यहां का पता किसने दिया?" विकास ने अगला प्रश्न किया ।

जवाब मेँ टुम्बकटू ने सारी बात सच…सच बयान कर दो । इधर टुम्बकटू उसे सारी बात बता रहा था उधर बिजय धीरे-धीरे अपना हाथ एक बटन की ओर बढा रहा था । किसी का भी ध्यान उसकी ओर नहीं था I

और उसने बटन दबा दिया ।

टुम्बकटू के नीचे का फर्श एकदम हटा । टुम्बकटू का गन्ने जैसा जिस्म एकदम नीचे गिरा और बिजय ने एकदम बटन से अपना हाथ हटा लिया । फ़र्श जिस तेजी से हटा था पुन: उसी तेजी से जुड गया ।

टुम्बकटू का बाकी जिस्म तो नीचे चता गया र्कितु गर्दन ऊपर ही कही रह गई ।

उसको स्थिति इस समय ठीक ऐसी थी जेसी हाल में विजय की थी । बिजय ने उसे भी उसी ढंग से फर्श में कैद कर दिया था ।

"अबे, झकझकिए! ये क्या?" टुम्बकटू एकदम बौखलाकर बोला ।

एकदम चौंककर विकास मैं भी प्रश्न किया----"इसका क्या मतलब?"

"अगर तुम इसका मतलब भी नहीं समझे प्यारे दिलजले तो तुम्हारी आधी जिंदगी बेकार है ।" विजय बोला-"इस कार्टून को पालना खतरनाक है, अब जबकि इसके सारे रहस्य ही खुल चुके हैं तो इसे ही जिंदा क्यों छोडा जाए?”

"मैँ अब भी आपका मतलब नहीं समझा, गुरु?"

"तब तो तुम्हारी पूरी जिंदगी बेकार हो गई प्यारे दिलजले I” बिजय बोला-"अबे मियां, अंतर्राष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस का उद्देश्य ही ये है कि विश्व को परेशान करने वाले हर अपराधी का अंत कर दिया जाए । ये तुम्हारा गुलाम जरूर बन गया है, लेकिन है साला कुत्ते की दुम I”

"सोच तो मैं भी यही रहा था गुरु, लम्बु अंकल का अंत ही विश्व कै हित में है I"

"तो फिर सोच क्या रहे हो बेटे, कर दो साले का अंत ।"

बिजय बोला । बेचारा टुम्बकटू इस समय कुछ भी कर सकने की स्थिति में नहीं था लेकिन बोलने की स्थिति में जरूर था ।

सो बोला…“ये तो हमारे साथ बहुत नाइंसाफी की बात है बापूज़ान, हमने आपकी गुलामी स्वीकार की और हमारा ये अंजाम I”
 
"हमारी भाषा में गुलाम रहने से मर जाना अच्छा है, लम्बू अंकल I” विकास बोला-" बैसे . . ।"

बिकास अभी आगे भी कुछ कहना चाहता था कि बिजय बोला-"अब इसकी बातों में समय व्यर्थ मत गबांओ मियां

दिलजले, अगर विश्व के जासूस यहां पहुच गए तो समझ लो विश्व तबाह हो जाएगा I”

"मैं आपका मतलब फिर नहीं समझा, गुरु?"

"मतलब फुर्सत में समझना चेले, पहले वो करो जो मैं कह रहा हूं।” बिजय बोला…"मैं और अपने धनुषटंकार मियां चंद्रवटीं लेकर उसी रास्ते से फूट रहे हैं, जिससे ये कार्टून हमें यहां लाया था I ये बता ही चुका है कि जिस विमान से यह मास्को से यहां आया था वह टापू कहां है । हम दोनों उसी विमान से भारत के लिए रवाना हो जाएंगे । तुम्हारा केस खत्म हो चुका हे । सबसे बड़े जासूस तुम बन गए हो । तुम चाहते थे कि इस फेस में मैं तुम्हारी कोई मदद न करूं और इस कार्टून ने परिस्थितियां ही ऐसी बना दीं कि चाहकर भी मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सका । मेरा व धनुषटंकार का जासूसों के सामने आना विश्व राजनीति के हिसाब से ठीक नहीँ हैं । इसलिए हम फूटते हैं । जिस रास्ते से तुम आए हो उसी रास्ते से निकलकर तुम जासूसों से मिल जाओ और उन्हे बताओ कि टुम्बकटू के रहस्यों तक पहुंचकर तुम सबसे बडे जासूस बन चुके हो I"

"और गुरु, टुम्बकटू का ये यान और खजाना?"

"जासूसों की पनडुब्बी में पहुंचते ही तुम इस यान को नष्ट कर दो I” विजय ने जैसे धमाका किया ।

""क्या?" बुरी तरह उछल पड़ा विकास-""ये आप क्या कह रहे हैं, गुरु? इतनी दौलत और आप कह रहे हैं सब कुछ नष्ट कर दो l”

"यहीँ तो गुरु और चेले कै दिमाग का अंतर है, दिलजले I"

विजय नें कहा…“तुम यें तरकीब सोच रहे हो कि टुम्बकटू के इस खजाने को कैसे विश्व तक पहुचाया जा सके और मैं सोच रहा हू कि अगर ये खजाना विश्व में पहुच गया तो विश्व तबाह हो जाएगा । तुम्हारा ये अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है दिलजले । अगर दुनिया को बचाना चाहते हो तो किसी भी प्रकार विश्व तक इस खजाने को पहुचने मत देना । इसीलिए मैँ कह रहा था कि अगर जासूस यहां पहुच गए तो संसार तबाह हो जाएगा क्योंकि वे भी इस खजाने को दुनिया में ले जाना चाहेंगे और ये खजाना दुनिया में पहुचते ही, विश्व उलट-पलट हो जाएगा ।

"आपकी ये उल्टी बात मेरी समझ में नहीं आ रही हैं, गुरु।” विकास बुरी तरह विजय की पेचीदा बातों में उलझ गया था ।

"ये बड्री ऊंची बात है बेटे । सबके सामने कहने लायक नहीं है I” विजय बोला…"कान इधर लाओ I”

इसके बाद, विजय लगातार दस मिनट तक बिकास के कान में न जाने क्या-क्या कहता रहा? दस मिनट पश्चात जब बिजय ने अपना मुह उसके कानों कै समीप से हटाया तो न जाने क्यों विकास की आंखों मेँ आश्चर्य झांक रहा था, बोला-"'मान गए गुरु, बडी ऊंची बात सोची है ।"

सुनकर विजय अकड गया, बोला…“हमारा नाम विजय दो ग्रेट है, प्यारे t”

"तो फिर जल्दी करो गुरु r"

"बिल्कुल जल्दी करो प्यारे ।” विजय बोला…"लेकिन ये तो तुम समझ ही गए होगे कि इस खजाने का दुनिया में पहुचना दुनिया के लिए खतरनाक है l अन्य देश के सभी जासूस इसे विश्व तक पहुंचाना चाहेंगे, किन्तु तुम्हें हर हालत मे यह खजाना

नष्ट कर देना है I”

"अब मैं आपका मतलब समझ गया हूं गुरु I" बिकास ने कहा-“इस समय मैं अंतरराष्ट्रीय सीक्रेट सर्विस के एजेंट की हैसियत से काम कर रहा हू । सारा विश्व मेरे लिए भारत है l जिस तरह मुझे भारत से बेहद प्यार है उसी तरह दुनिया से इस समय मुझे वेहद प्यार है । मेरे जीते जी इस खजाने को संसार की कोई भी ताकत दुनिया तक नहीं पहुंचा सकती । अंतर्राष्टीय सीक्रेट सर्विस का एजेंट होने के नाते विश्व का हित सोचना मेरा धर्म है I"

“तुम्हारे बच्चे जिएं दिलजले l” विजय स्क्रीन की ओर देखकर तेजी से बोला…"किसी भी क्षण ये जासूस यान में आ सकते हैं । हमें जल्दी से सब काम करना चाहिए, हम चलते हैं , हमेँ उम्मीद है कि अब हमेँ यही खबर मिलेगी कि हमारा प्यारा चेला अंतर्राष्टीय सीक्रेट सर्विस का चीफ है ।"

“आप चिंता न करें, गुरु ।"' कहते हुए विकास ने विजय के चरण स्पर्श किए l घनुषटंकार ने विकास के चरण छूए और फर्श में धंसे टुम्बकटू के सिर पर दो-तीन चपत जमाए बिना बाज नही आया । टुम्बकटू निरंतर अपनी टें-टें करता रहा था किंतु किसी ने उसकी नहीं सुनी ।

थोडी सी मस्ती टुम्बकटू से लेने के बाद बिकास उस और बढा जिधर से वह यान में प्रविष्ट हुआ था और विजय और धनुष्टंकार उस तरफ बढे जिधर से टुम्बकटू उन्हें लाया था ।

टुम्बकटू बेचारा अपनी शराफ़त में मारा गया था ।

उसने यान कै प्रत्येक गुप्त दरवाजे का रहस्य उन्हें बता दिया था । अपने पंखों वाले सारे विचित्र जानवरों को उसने यान के एक कक्ष में बंद कर दिया था । बिजय और धनुषटंकार का रास्ता एकदम साफ़ था । धनुषटंकार विजय के कंघे पर बैठा हुआ था । विजय तेजी से लगभग भागता हुआ इस समय बंद बॉक्स में से होता हुआ टापू की ओर बढ रहा था ।

टापू पर विमान कहां खड़ा है, यह टुम्बकटू उसे बता ही चुका था ।

फिनिश

पैंतालीस मिनट बाद वे टापू पर खडे विमान में सुरक्षित पहुच चुके थे । धनुष्टंकार ने चालक-सीट पर बैठकर यान स्टार्ट किया और कुछ ही देर बाद यान हवा में उठता चला गया । यात्री-कक्ष की एक सीट पर बैठा हुआ विजय आराम से चंद्रवटीं को घुमा-घुमाकर देख रहा था और झकझकियों में व्यस्त था । यान को हवा में यात्रा करते तीस मिनट गुजर गए थे ।

बिजय अब खुद को बिल्कुल सुरक्षित समझ रहा था किंतु वह क्या जानता था कि एक शैतान की नजर बराबर उस पर है ।

उस समय वह चंद्रवटी को सूंघने मेँ व्यस्त था कि उसके पीछे से एक इंसानी साया उस पर झपटा । इस समय विजय को क्योकि किसी भी खतरे की आशंका नहीं थी इसलिए वह असावधान था । इसी असावधानी का परिणाम ये हुआ कि चंद्रवटी उसके हाथ से निकलकर किसी और के हाथ में पहुच गई । अपनी पूरी फुर्ती के साथ बिजय पलटा । सामने देखते ही वह दंग रह गया । उसके मुंह से एकदम निकला…"अबे लूमड़ मियां, तुम?"

"बहुत देर से मैं इसी मौके की तलाश में था, जासूस बेटे i” सामने खडा अलफांसे मुस्कराता हुआ बोला । " टुम्बकटू कै खजाने की ये सबसे नायाब चीज तुम्हारे पास शोभा नहीं देती, ये मेरे काफी काम की है I”

इस भयानक खतरे को बिजय भांप चुका था l फिर भी वह अपनी ही टोन में बोला…“अबे, लाओ भी लूमड़ मियां, क्यों मजाक करते हो ।"

"मैं इस चंद्रवटीं का पूरा रहस्य जानता हू बेटे ।” अलफासे जेब से रिवॉल्वर निकालता हुआ बोला…“अब अगर तुम आगे बढने की कोशिश करोगे तो मैँ निसंक्रोच तुम्हें गोली मार दूंगा । ऐसी कीमती वस्तुओं की तो मुझे तलाश रहती है i”

खतरे को बिजय पूरी तरह मांप चुका था, इसीलिए वह अलफांसे की और बढता हुआ बोला…"ऐसा तो नहीं हो सकता प्यारे लूमड़ भाई कि कढी पकाएं हम और खाओ तुम, चंद्रवटीं तो हमारे पास ही रहेगी l”
 
"वहीँ रुक जाओं बिजय, वरना मैं गोली मार दूंगां ।" अलफांसे ने चेतावनी दी ।

“शायद भूल गए हो लूमड़ मियां क्रि ये तमंचा विजय दी ग्रेट पर असर नहीं करता l” कहते हुए बिजय ने अलफांसे पर जम्प लगा दी । अलफांसे का रिवॉल्वर एक बार गर्जा भी किंतु संग आर्ट का माहिर विजय न केवल खुद क्रो बचा गया बल्कि वह सीधा अलफांसे पर गिरा । दोनों एक-दूसरे से उलझ गए ।

फायर की आवाज चालक-कक्ष में विमान चलाते हुए धनुषटंकार ने भी सुनी और वह बुरी तरह चोंक पड़ा । उसकी समझ में नहीं आया कि इतनी देर बाद ये नई मुसीबत कहां से पैदा हो गई ???

उसने विमान को यूं ही हवा में छोड़ा ।

बिमान हवा मे लहरा उठा ।

किंतु इसकी परवाह न करके वह एक ही जम्प मे यात्री-हाॅल मे आया, उसने देखा बिजय और अलफांसे एक-दूसरे से बुरी तरह गुंथे हुए थे । बिना चलाक के बिमान बुरी तरह लड़खड़ा रहा था ।

अभी धनुषटंकार कुछ करना ही चाहता था कि अलफांसे से गुंथा हुआ विजय चीखा-“अवे बंदर मियां, तुम बिमान सम्भालो I" बंदर शब्द सुनकर घनुषटंकार क्रो ताव तो ऐसा आया कि वह मी बिजय से ही लिपट जाए पर मौके की नजाकत को समझते हुए घनुषटंकार चालक-कक्ष मेँ पहुंचकर अपनी सीट पर ही जम गया । इधर विजय और अलफांसे खूनी सांडों की भांति एक-दूसरे से लिपटे हुए थे I चंद्रवटी अभी तक अलफांसे के हाथ में थी । विजय उसी को कब्जाने कै चक्कर में था । लगभग पंद्रह मिनट तक उनकी ये लड़ाई यात्री सीटों के बीच में होती रही ।

पंद्रह , मिनट बाद अचानक चंद्रवटी बिजय के हाथ में आ गई । एक झटके कै साथ वह अलफांसे से अलग हुआ । इससे पहले कि अलफांसै उस पर पुन: झपटे विजय ने जोर से चंद्रवटी खींचकर एक शीशे में मारी । शीशा टूटा और चंद्रवटी विमान से बाहर हवा में गुम हो गई ।

बिजय पर जम्प लगाने का प्रयास करता हुआ अलफांसे एकदम ठिठक गया, बोला…“ये तुमने क्या किया?"

"तुम जैसे शेतान कै हाथ में पहुंचाने से तो अच्छा ही किया लुमड भाई I” विजय बोला ।

"लेकिन अब तो वो तुम पर भी नहीं रही ।"

"अच्छा ही हुआ प्यारे, ऐसी खतरनाक वस्तु दुनिया के किसी भी व्यक्ति के हाथ में रहनी ठीक नहीं है।" विजय बोला--“भगवान पर विजय पाना अच्छी बात नहीं है । ऐसी खतरनाक चीजें दुनिया मे न ही रहे तो अच्छा है I"

"अजीब सनकी हो यार तुम?" अलफांसे बोला…“इतनी महत्वपूर्ण चीज तुमने इतनी सरलता से समाप्त कर दी?”

“महत्त्वपूर्ण नहीं प्यारे लूमड़खान, खतरनाक कहो ।” विजय बोला…“ये वस्तु जिसके पास भी रहती वह खुद को खुदा का बाप समझता । ऐसी चीजों का खत्म हो जाना ही दुनिया के हित में होता है । लेकिन प्यारे अब मैं तुम्हें नही छोडूंगा ।"

"मेरा क्या करोगे?"

"अपने चांद से प्यारे देश की किसी जेल में रखूंगा l” कहते हुए बिजय ने उस पर जम्प लगा दी ।

फिनिश

इस बार बिकास उस कक्ष के चक्कर में नहीं आया जिसका गुरुत्वाकर्षण छत में था ।

टुम्बकटू ने यान से निकलने का उसे दूसरा रास्ता बता दिया था ।

उसी रास्ते से वह यान से बाहर सागर में आ गया । उसके जिस्म पर अपनी वही गोताखोरी की पोशाक थी ।

सागर में तैरता हुआ वह पनडुब्बी क्रो तलाश करने की चेष्टा कर रहा था ।

बीस मिनट के प्रयास के पश्चात उसे सागर में मंडराती हुई पनडुब्बी चमकी । वह तेजी से पनडुब्बी की ओर बढा ।

कदाचित पनडुब्बी पर मौजूद जासूसों ने भी उसे देख तिया था । इसी कारण पनडुब्बी का रुख भी उसी ओर था ।

दस मिनट पश्चात ही ।

विकास पनडुब्बी में पहुंच गया । सबसे पहले उसका हाथ पकडकर बागारोफ़ ने खींचा ।

इसके बाद उसने बागारोफ़ के पास ही खड़े जेम्सबांड, माईक क्रो देखा । दोनों की आंखें उसे इस प्रकार घूर रही थीं जैसे उसे खा जाने का इरादा रखते हो ।

"तू कहां था बे हरामी के पिल्ले ।” बागारोफ़ ने उससे चीखकर कहा था I

"मैं टुम्बकटू कै सारे रहस्य जान चुका हूं ग्रांड अंकल I" गेस मास्क उतारते हुए विकास ने कहा-“उसके चीते को भी मै परास्त कर चुका हू I"

"इसका मतलब ये हुआ प्यारे छदूंदर कि तुम सबसे बडे जासूस बन गए I" बागारोफ़ बोला ।

" वो तो ठीक है ग्रांड अंकल लेकिन पहले टुम्बकटू के उस यान क्रो नष्ट करना है l”

"क्या वक रहे हो?” जेम्सबांड बोला…“क्या यान में वो दौलत नहीं जिसके बारे में टुम्बकटू कहा करता था I”

"सब है, बांड मियां, वास्तव मेँ यान में संसार से दस गुना ज्यादा धन हे l"

"अबे तो तेरा दिमाग खराब हो गया है ऊंटनी के ।" बागारोफ़ एकदम चढ दोड़ा-“उसे नष्ट करने से क्या मतलब?"

"आप पनडुब्बी उधर की तरफ़ ले चलो I” बिकास ने कहा I

वे चारों पनडुब्बी में ऊपर पहुंच गए । पनडुब्बी बरगेन शा चला रहा था । बिकास के बताए हुए रास्ते पर पनडुब्बी चलने लगी । सभी धड़कते दिल से यान के दर्शन करने के लिए बेचैन थे ।

और तब जबकि यान चमका ।

"वो रहा यान ।" बिकास चीखा और तेजी से पनडुब्बी के एक तरफ को भाग लिया ।

उसकी इस हरफ्त पर किसी ने ध्यान नहीं दिया । सबका ध्यान यान की ओर था ।

बांड, माईक, बागारोफ़ और बरगेन शॉ ही ये पनडुब्बी लेकर सागर के गर्भ मे आए थे ।

बाकी जासूस सागर की छाती पर मस्त हाथी की भांति झूमते जलपोत में थे ।

उन चारों का ध्यान पूरी तरह यान पर केंद्रित था । वे सब यान की बनावट को बड़े ध्यान से देख रहे थे ।

"अबे, मूतनी! के जल्दी यान की तरफ़ चल ।" बागारोफ़ ने चीखकर बरगेन शॉ से कहा ।

वरगेन शॉ ने पनडुब्बी का रुख उसी ओर कर दिया । इधर पनडुब्बी क्षण-प्रतिक्षण यान की ओर बढ़ रही थी, उधर दोड़ता हुआ विकास पनडुब्बी के युद्ध-कक्ष में पहुंच चुका था ।
 
उसने एक तारपीडों छोडने का यंत्र सम्भाल लिया और यान का निशाना लेने लगा ।

पनडुब्बी निरंतर यान के करीब पहुंचती जा रही थी । बिकास के ज़बड़े एक-दूसरे पर जमते जा रहे थे ।

और तब जब उसने मोका उपयुक्त पाया ।

एक साथ दस…बारह तारपीडों उसके यंत्र से निकले ।

एक अत्यंत भयानक विस्फोट ।

टुम्बकटू का यान खील-खील होकर बिखर गया । सागर मे जलते हुए शोले चमके । सब कुछ क्षण भर मे समाप्त हो गया ।

यह दृश्य बागारोफ़, माईक, बांड और बरगेन शॉ ने भी देखा ।

देखते ही वे इस प्रकार उछल पड़े मानो उन्होंने संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य देखा हो ।

बागारोफ, माईक और बांड के दिमाग में जेसे एकदम सब कुछ आ गया हो । सबसे पहले चालक-कक्ष में बांड भागा । दौडता हुआ वह युद्ध-कक्ष मे पहुंचा । विकास कै हाथ में तारपीडो छोड़ने वाला यंत्र था ।

"ये क्या बेवकूफी है?" बांड एकदम चीख पड़ा ।

“इसे बेवकूफी नहीं, बांड बेटे! बुद्धिमानी कहते हैं l” बिकास आराम से बोला ।

"तुमने दुनिया का सबसे बड़ा खजाना नष्ट कर दिया I" बांड चीखा-'"मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगा I" कहते हुए बांड ने बिकास पर जम्प लगा दी ।

विकास भी इसके लिए तैयार था, उसकी लम्बी टांग बडी तेजी से उछली और सीधी बांड के जबड़े पर पडी । बांड कराहकर दूर जा गिरा । अभी वह उछलकर खड़ा हुआ ही था कि…“अबे ये क्या कर रहे हो भूतनी वालों?" माईक कै साथ बागारोफ प्रविष्ट होता हुआ चीखा ।

"यान को इसने नष्ट किया है, चचा ।" क्रोध में बांड चीखा ।

"क्यों बे ऊंटनी के?" बागारोफ दहाड़ा-"ये क्या हरकत हुई ?"

"मैँने जो किया है, ठीक किया है बांड अंकल l” विकास बोला ।

"अबे क्या घंतू की जड़ ठीक किया है हरामी के पिल्ले ।" बागारोफ दहाड़ा…""दुनिया का सबसे बड़ा खजाना तुमने यूं ही मिट्टी में मिला दिया । साले लोगबाग तो खजाने के लिए अपनी जान तक लड़ा देते हैं ।"

"ये बातों से नहीं समझेगा, चचा ।" पूरी स्थिति समझकर माईक भी गुर्राया-"इसने विश्व के साथ गद्दारी की है

हीरे पन्नो से भरा दुनिया का सबसे बडा खजाना नष्ट किया हे । ये काम इसने विश्व के अहित मे किया है । इसे मैं जिंदा नहीं छोडूगा l”

कहता हुआ माईक विकास की और बढा किंतु बागारोफ पीछे से उसका कालर पक्रड़कर वापस खींचता हुआ बोला……'"अबे रुक चटनी के । अगर उसे जिंदा नही छोड़ेगा तो विश्व…अदालत तुझे नहीं छोड़ेगी । इसका इलाज ये नहीं है, इलाज ये है कि हम इसके विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय अदालत में केस करेगे । इसने दुनिया का एक महान खजाना नष्ट करके विश्व का नुकसान किया है I”

बांड और माईक को विकास पर ताव आ रहा था । उनका दिल चाह रहा था कि विकास को यहीं मार डाले लेकिन बागारोफ़ उन्हें ऐसा नही करने दे रहा था ।

चाहकर भी माईक और बांड अपने इरादे मेँ सफल नहीं हो सके I हालांकि बागारोफ़ भी विकास की इस ऊटपटांग हरकत पर उसके विरूद्ध था किंतु उसने ये सोचा था कि विश्व-अदालत मेँ वह सब जासूसों की और से विकास के खिलाफ मुकदमा दायर करेगा!

फिनिश

विश्व अदालत हेग में!

दुनिया के सब जासूसों ने मिलकर विकास के विरुद्ध मुकदमा दायर कर दिया l सारे जासूस हेग में उपस्थित थे l

भारत में भी घटना की खबर दे दी गई थी I इस मुकदमे मे विश्व-अदालत की ओर से हिंदुस्तान को ये सहूलियत दी गई थी कि हिंदुस्तान का कोई भी व्यक्ति विकास की ओर से मुकदमा लड़ सकता है ।

भारत की ओर से यह मुकदमा लडने के लिए बिजय को हेग भेजा गया था । पांच जजों की बेच बैठ चुकी थी । लगभग हर देश का जासूस अदालत-कक्ष मे उपस्थित था । बिकास मुजरिम वाले कटघरे में खड़ा था I

बिजय का विरोधी वकील चीख रहा था-""ज्यूरी आँफ वर्ल्ड! कदाचित ये केस विश्व-अदालत के लिए सबसे अजीब केस है । ये व्यक्ति जो मुजरिम के कटघरे में खड़ा है । ये भारतीय है और भारत का ये सबसे बड़ा जासूस है । विश्व के सारे जासूस एक खजाने की तलाश मेँ निकले थे । बो खजाना चंद्रमा से आए अपराधी टुम्बकटू का खजाना था । भारत का ये जासूस विकास उस खजाने तक सबसे पहले पहुच गया I वह खजाना विश्व का सबसे बड़ा खजाना था । इसमें इतना धन था कि पूरे विश्व का घन भी उस खजाने के धन के सामने केवल एक बटा दस है । सारे जासूस उस खजाने तक पहुच चुके थे । जासूस लोग बडी सरलता से उस खजाने को ला सकते थे, किंतु मुजरिम बिकास ने उसे तारपीडों से नष्ट कर दिया I मि. विकास का ये कार्य साफ ढंग से चिश्वद्रोही है । मैं ज्यूरी को समझाना चाहता हूं कि मि. विकास पर ये इल्जाम है कि उन्होंने विश्व की सम्पत्ति को खाक में मिला दिया है । माईक, बागारोफ और बांड जैसे जासूस मि. बिकास को रोकते ही रह गए किंतु मि. बिकास ने देखते-ही-देखते विश्व की इतनी बडी सम्पत्ति को नष्ट कर दिया I”

वकील के इन शब्दों के बाद अदालत में एकदम सग्नाटा छा गया I

“मि. बिकास I” पांच मे से एक जज बोला…-“क्या आपने वास्तव मे यह खजाना नष्ट किया है?”

"जी हां ।" बिकास ने संक्षिप्त-सा उत्तर दिया ।

"मिस्टर विजय ।" दूसरे जज ने बिजय से कहा-“क्या आप मिस्टर बिकास पर लगाए गए अभियोग के विषय में कुछ बोलना चाहते हैं?”

“जूरी आँफ़ वर्ल्ड!" अपने स्थान पर खडा होकर विजय बोला-“मैं जरा माईक, बांड और बागारोफ के बयान लेना चाहता हूं l"

ज्यूरी ने इजाजत दी और सबसे पहले जेन्सबांड को बुलाया गया l

"मिस्टर जेम्सबांड I" विजय बोला……'"टुम्बकटू के खजाने में दौलत किस रूप मेँ थी?"

“हीरों और पन्नो के रूप में I” बांड ने जवाब दिया…"टुम्बकटू का यान भी गोल्ड का था ।"

बस, यही सवाल उसने अलग अलग माईक और बागारोफ से किया । ज़वाब वही था जो बांड ने दिया ।

अंत मे विजय बोला…"ये साफ हो गया ज्यूरी आँफ़ वर्ल्ड कि टुम्बकटू के खजाने मेँ बेशुमार दौलत हीरों और पन्नो के रूप मेँ थी । अब मैं अपने काबिल दोस्त से यह प्रश्न करना चाहता हू कि विश्व में आखिर हीरों और पन्नों की इतनी वेल्यू क्यों है?"

"मेरे काबिल दोस्त ने बडा अजीब-सा प्रश्न किया है l" वकील बोला…“हीरों और पन्नों को घरती पर दौलत माना जाता है ।"

"मेरा सवाल ये है ज्यूरी आँफ़ वर्ल्ड कि आखिर हीरों और पन्नों में ही ऐसी क्या खास बात है जो दुनिया उसे खुदा मानती है?" विजय बोला “किसी अन्य वस्तु की भी तो इतनी वैल्यू हो सकती है । हीरों में ही आखिर वो क्या खासियत हे जो इन्हें इतना कीमती माना जाता है?”

"ये अजीब-सा प्रश्न मैं समझ नहीं पा रहा हूं । ज्यूरी आँफ वर्ल्ड" वकील बोला…“मुद्रा तो मुद्रा ही होती है I”

"दूसरे शब्दों में मेरा प्रश्न हैं ज्यूरी आँफ वर्ल्ड कि मुद्रा की कीमत कम होती है l मान लिया जाए कि किसी देश की मुद्रा डॉलर है !" बिजय अब एक-एक शब्द पर जोर देता हुआ बोला…"उस देश में डॉलर की कीमत उसी समय तक रहती है जब तक उस देश की सरकार डॉलर उतनी ही संख्या मेँ छापे जिससे देश ठीक चल सके । अगर वह डॉलर बेहिसाब छापता ही चला जाए तो क्या होगा?"

"शायद मेरे काबिल दोस्त यहां 'इकोनॉमिक्स' का सवाल उठा रहे हैं I" वकील बोला…“जरूस्त से ज्यादा कोई भी देश मुद्रा नहीं छाप सकता क्योकि इससे देश में मुद्रा की कीमत घट जाएगी और देश की सारी अर्थव्यवस्था गड़वड़ा जाएगी । देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ाने का मतलब होगा देश का विनाश । शायद मेरे काबिल दोस्त जानते हैं कि किसी देश में जब मुद्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है तो उसे मुद्रा स्फीति कहते हैं I”
 
"मैं उस मुद्रा स्फीति को ही ज्यूरी आँफ़ वर्ल्ड क्रो समझाना चाहता हूं।” विजय बोला…"मेरे काबिल दोस्त ये मानते हैं कि जब किसी देश में मुद्रा स्फीति हो जाती है तो उस देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाती है और देश विनाश की और बढ़ने लगता है । इस स्थिति मे उस देश की सरकार क्या करती है? में ये प्रश्न अपने काबिल दोस्त से करना चाहता हू I”

"इस मुसीबत से बचने के लिए कोई भी देश, देश की मुद्रा बदल देता है यानी उस मुद्रा को जो मुद्रा स्थिति है, वेल्यू खत्म करके दूसरी मुद्रा चला देता है । जो आवश्यकता के अनुसार तैयार की जाती है ।"

"बस, यही बात मैं इस अदालत को समझाना चाहता हू।" बिजय ठीक किसी वकील क्री भांति जोश में चीखकर बोला…“ये तो हुई किसी एक देश की बात । अब मैं ज्यूरी आँफ वर्ल्ड का ध्यान उस खजाने की ओर ले जाना चाहता हू। ये अदालत मेँ सिद्ध हो चुका है कि खजाने की सारी दौलत हीरों, पन्नों और गोल्ड के रूप में थी । ये तीनों ही चीजें पूरे विश्व मेँ मुद्रा का स्थान रखती हैं । ये भी सिद्ध हो चुका है कि उस खजाने मे पूरे विश्व की दौलत से दस गुना अधिक दौलत थी । जरा ज्यूरी आँफ वर्ल्ड इस बात पर ध्यान दें कि जितनी दौलत पूरे संसार में है अगर उससे दस गुनी दौलत विश्व में आ जाती तो विश्व की स्थिति क्या होती? क्या पूरे विश्व में मुद्रा स्फीति नहीं हो जाती? इतनी दौलत आने पर दुनिया में हीरों-पन्नों और गोल्ड की कीमत क्या रहती? क्या ये सब मिट्टी की भांति व्यर्थ नही हो जाते? क्या पूरा संसार एक साथ मुद्रा स्फीति के संकट मे नहीँ पड़ जाता? इस स्थिति मे क्या होता? क्या पूरे विश्व को अपनी मुद्रा नहीं बदलनी पडती?”

विजय के शब्द सुनकर सारी अदालत सन्नाटे की-सी अवस्था मेँ रह गई । एक जज ने प्रश्न किया-“आप कहना क्या चाहते हैं?"

"मैं कहना ये चाहता हूं ज्यूरी आँफ़ वर्ल्ड कि मि. बिकास के खजाने को नष्ट कर देना बिश्वद्रोही कार्य नहीं बल्कि विश्वहित में है । मि. विकास उस खजाने को नष्ट न करते और खजाना दुनिया में आ जाता तो संसार मुद्रा स्फीति के संकट में पड जाता । हीरों, पन्नो और गोल्ड का मूल्य समाप्त हो जाता । सारे विश्व को इन वस्तुओं का महत्व समाप्त कर देना पड़ता । इस भयानक संकट से मि. बिकास ने उस खजाने क्रो नष्ट करके विश्व को मुद्रा स्फीति के भयंकर संकट से बचा लिया है । विजय के शब्द सुनकर सारी अदालत विश्व-भर के जासूस-विरोधी वकील और ज्यूरी तक सोचने पर विवश हो गए ।

"टुम्बकटू नामक व्यक्ति I” विजय अपने एक…एक शब्द पर जोर देता हुआ आगे बोला…“यह अदालत जानती है कि वह चंद्रमा का निवासी था । चंद्रमा पर से ही वह इतना बड़ा खजाना लाया था I इस घटना के बाद वह मुझसे मिल चुका हे । उसने मुझें ये पत्र दिया I” एक पत्र अपनी जेब से निकालता हुआ बिजय चीखा…"इस पत्र मे उसने लिखा है कि पहले चंद्रमा पर भी हीरों और पन्नो को ही मुद्रा का महत्व दिया जाता था लेकिन एक बार वहां खुदाई में हीरों और पन्नों के पर्वत निकल आए । अत: वहां हीरों, पन्नों की भरमार हो गई I वहां मुद्रा स्फीति हुई और परिणामस्वरूप चंद्रमा पर हीरों और पन्नों के महत्त्व क्रो कम कर दिया गया । अब वहां हीरे और पन्ने धरती की मिट्टी से अधिक महत्व नहीं रखते । उन्हीं पर्वतों से वह हीरे…पन्ने भरकर यहां लाया था I अगर ये खजाना विश्व तक पहुच जाता तो घरती पर भी इनकी वेल्यू समाप्त हो जाती और विश्व खतरे में घिर जाता । मैँ अदालत को ये समझाना चाहता हूं कि ये खजाना विश्व के लिए वरदान नहीं, अभिशाप था । उसका नष्ट होना ही विश्व के हित में था ।"

इस प्रकार विजय के इस ठोस तर्क को विरोधी वकील नहीं काट सका । विरोधी वकील ही क्या, खुद पांचों जज उसके तर्कों से प्रभावित हुए और बिकास को बाइज्जत बरी किया गया । अदालत को यह मानना ही पड़ा कि विकास का ये काम विश्व के हित मेँ था । जब बिजय और विकास अकेले मेँ मिले तो विकास ने कहा…“क्यों गुरु, टुम्बकटु के लेटर का खूब गच्चा दिया?"

"गच्चा-बच्चा कुछ नहीं दिया प्यारे दिलजले…गच्चा हमें टुम्बकटू दे गया I"

"क्या मतलब? "

"मतलब ये प्यारे कार्टून कि वो कार्टून अभी जिंदा है और वास्तव में मुझे ये लेटर उसी ने दिया है I”

"लेकिन गुरु, वो जिंदा बच कैसे गया?"

"ये तो वही जाने I” विजय ने कहा…"और प्यारे, वो चंद्रवटी भी अपने हाथ से निकल गई I"

“कैसे?" एक बार बिकास और भी बुरी तरह चौंका ।

जवाब में विजय ने उसे सब कुछ बता दिया और नम्र स्वर में बोला-"इसके बाद हमने साले लूमड़ मियां का कचूमर निकाल दिया यानी बेहोश कर दिया । अब वह भारत की एक जेल में है ।"

"इसका मतलब ये हुआ गुरु कि कुछ हाथ नहीं लगा I"

"हाथ क्यों नहीं लगा प्यारे दिलजले ।" विजय बोला-“ये क्या कम है कि तुम अंतर्राष्टीय सीकेट सर्विस के चीफ बन गए हो I”

चीते का दुश्मन

समाप्त

THE END
 

Similar threads

Back
Top