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सोनू- हाँ तो इसमें गलत क्या बोला.. साली नहीं आती तो गोली का असर लौड़े पर होता.. साला फट ही जाता लौड़ा.. तो अब खाऊँगा.. लो तुम दोनों भी खा लो.. मज़ा आएगा।
तीनों ने गोली खा ली और दीपाली के इन्तजार में बैठ गए।
उधर दीपाली ने चारों तरफ़ ध्यान से देखा और कमरे की तरफ़ चलने लगी। कमरे के पास जाकर रफ्तार से उसने दरवाजा खोला और अन्दर चली गई।
दीपक- लो आ गई हुस्न की मलिका. जी भर के देख लो. आज तक स्कूल ड्रेस में देखा है तुमने.. आज सेक्सी कपड़ों में देख लो।
सोनू- कसम से यार दीपाली, बहुत सुंदर लग रही हो.. एकदम गुड़िया की तरह..
मैडी- हाँ दीपाली, तुम्हारी जितनी तारीफ की जाए कम है.. तुम तो रूप की परी हो परी…
दीपाली- अच्छा परी हूँ.. तो ऐसा करो मैं यहाँ बैठ जाती हूँ. मेरी पूजा करो.. और उसके बाद मैं चली जाती हूँ. कोई भी मुझे टच नहीं करेगा।
इतना सुनते ही सोनू की तो गाण्ड फट गई.. ये तो आई नहीं कि जाने का नाम ले रही है।
सोनू- अरे न.. नहीं नहीं.. काहे की परी.. ये तो कुछ भी बोल दिया. हम दोस्त है सब..
सोनू के बोलने का अंदाज ऐसा था कि दीपक और मैडी की हँसी निकल गई.. दीपाली भी मुस्कुराने लगी।
दीपक- साला फट्टू.. कहीं का.. फट गई ना तेरी भोसड़ी के. ये परी ही है। मगर काम की परी.. समझे…
सोनू- यार ये बोली.. मेरी पूजा करो फिर चली जाऊँगी.. इसका क्या मतलब हुआ?
दीपक- हाँ ये एकदम सही बोली.. ये काम-वासना की परी है.. इसकी पूजा लौड़े से करो और चुदवा कर ये चली जाएगी.. समझे चूतिये…
दीपक की बात सुनकर मैडी और सोनू चौंक से गए कि दीपाली के सामने कैसे लौड़े और चुदाई की बात दीपक ने आसानी से कह दी.. उनको अभी तक भरोसा नहीं हो रहा था कि कल दीपक ने सच में दीपाली की ठुकाई की थी?
तीनों ने गोली खा ली और दीपाली के इन्तजार में बैठ गए।
उधर दीपाली ने चारों तरफ़ ध्यान से देखा और कमरे की तरफ़ चलने लगी। कमरे के पास जाकर रफ्तार से उसने दरवाजा खोला और अन्दर चली गई।
दीपक- लो आ गई हुस्न की मलिका. जी भर के देख लो. आज तक स्कूल ड्रेस में देखा है तुमने.. आज सेक्सी कपड़ों में देख लो।
सोनू- कसम से यार दीपाली, बहुत सुंदर लग रही हो.. एकदम गुड़िया की तरह..
मैडी- हाँ दीपाली, तुम्हारी जितनी तारीफ की जाए कम है.. तुम तो रूप की परी हो परी…
दीपाली- अच्छा परी हूँ.. तो ऐसा करो मैं यहाँ बैठ जाती हूँ. मेरी पूजा करो.. और उसके बाद मैं चली जाती हूँ. कोई भी मुझे टच नहीं करेगा।
इतना सुनते ही सोनू की तो गाण्ड फट गई.. ये तो आई नहीं कि जाने का नाम ले रही है।
सोनू- अरे न.. नहीं नहीं.. काहे की परी.. ये तो कुछ भी बोल दिया. हम दोस्त है सब..
सोनू के बोलने का अंदाज ऐसा था कि दीपक और मैडी की हँसी निकल गई.. दीपाली भी मुस्कुराने लगी।
दीपक- साला फट्टू.. कहीं का.. फट गई ना तेरी भोसड़ी के. ये परी ही है। मगर काम की परी.. समझे…
सोनू- यार ये बोली.. मेरी पूजा करो फिर चली जाऊँगी.. इसका क्या मतलब हुआ?
दीपक- हाँ ये एकदम सही बोली.. ये काम-वासना की परी है.. इसकी पूजा लौड़े से करो और चुदवा कर ये चली जाएगी.. समझे चूतिये…
दीपक की बात सुनकर मैडी और सोनू चौंक से गए कि दीपाली के सामने कैसे लौड़े और चुदाई की बात दीपक ने आसानी से कह दी.. उनको अभी तक भरोसा नहीं हो रहा था कि कल दीपक ने सच में दीपाली की ठुकाई की थी?