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चुदासी माँ और गान्डू भाई

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मैंने माँ की गाण्ड अपनी गोद में रख रखी थी और अपने छोटे भाई अजय को माँ की चूत पूरी फैलाकर दिखा रहा था। चूत का गहरा और बिल्कुल लाल सुराख ठीक अजय की आँखों के सामने था। वो बड़े चाव से चूत पर झुका हुआ उसे देख रहा था।

विजय- “ले मुन्ना अब ठीक से देख। तेरे भैया इसी के दीवाने थे। असली मजा तो इसी में है। देख अपनी माँ की चूत कितनी मस्त है। ठीक से अंदर तक देख। इसे छू, इसे सहला, इसे प्यार कर, इसे चाट, इसमें अंगुली । घुसाकर देख। देख माँ की चूत कितनी गदराई हुई है। इसे एक बार चोद लेगा ना तो फिर गाण्ड मरवाना भूल जाएगा। देख तेरे लिए मैंने माँ की चूत चौड़ी कर दी है। अब पूरी मस्ती ले इसकी...”

तभी अजय ने अपनी लंबी सी जीभ निकालकर चूत के अंदर डाल दी और वो अपनी जीभ चूत के छेद में चारों ओर फिराने लगा। उसने अपने दोनों हाथ चूत पर रख दिए और चूत को फैलाते हुए मस्त होकर उसे चाटने लगा। अजय बार-बार उस विशाल चूत को पूरी अपने मुँह में भरने की कोशिश कर रहा था। तभी मैंने माँ को खींचकर अपनी गोद में सीधा बैठा लिया और माँ की दोनों चूचियां अपने हाथों में भर ली। माँ के होंठ अपने होंठों में ले लिए और चूचियां दबाते हुए उसके होंठ चूसने लगा। उधर मुन्ना चूत का रसपान कर रहा था।

मैं- “माँ आज तो तू एक साथ दोनों भाइयों की बीवी बन गई हो और देखो तुम्हारे साथ तेरे 6 फूट के दो-दो बेटे एक साथ सुहागरात मना रहे हैं। तेरी तो इस उमर में आकर तकदीर खुल गई है। अब से तुझे दो-दो जवान लण्डों का एक साथ मजा मिलेगा। अब तेरी चूत और गाण्ड को लण्ड की कमी नहीं खलेगी। देखो तुम कैसे एक बेटे की गोद में बैठकर अपनी चूची मसलवा रही हो और दूसरे बेटे से अपनी चूत चटवा रही हो...” मैं गोद में बैठी माँ की टाँगें कुछ ऊपर उठा अजय के लिए माँ की चूत फैला रहा था, जिससे की वो भीतर तक चाटकर मजा ले सके।

माँ- “जब मेरे दो-दो जवान गान्डू बेटे मेरे लिए बहुएं लाने की वजाय आपस में ही गाण्ड मारा मारी करने लगे तो मैं क्या करती? जब तुम दोनों को ही आपस में शर्म नहीं है तो मैं फिर शर्म क्यों करूं? जब तुम दोनों खुलकर गाण्ड मारा मारी और लण्ड चूसा चूसी का खेल खेलते हो तो मैं फिर चूत और गाण्ड वाली होकर तुम दोनों गान्डुओं और चूतियों से मजा क्यों ना लँ? छोटे वमैंले को देखो कैसा भुक्कड़ की तरह मेरी चूत पर पिला हुआ है।

और जब तू अपनी माँ को नंगी करके अपनी गोद में खड़े लण्ड पर बैठा सकता है तो मुझे तुमसे चुदने में और गाण्ड मराने में कैसा परहेज? बड़ा वाला मादारचोद चूतिया है तो छोटे वाला भोसड़ी का गान्डू.."

मैं- “मुन्ना तूने माँ की बात सुनी, हम दोनों को गान्डू और चूतिया बोल रही है। देख बहन की लौड़ी हमें कैसी गालियां दे रही है। आज इसकी सारी गर्मी निकाल देनी है। इसकी चूत और गाण्ड में बहुत गर्मी है। इसे आज एक रंडी की तरह चोदना है। साली बहुत नमकीन है.”

फिर मैंने माँ की ठुड्डी पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठा लिया और उसकी आँखों में देखते हुये कहा- “अरे माँ मैं तो तेरे जैसी बेशर्म और खुलकर बात करने वाली औरत का पक्का रसिया हूँ। तभी तो मैंने तुझे पटाया है। तेरे लिए मुन्ना को भी राजी किया है। अब हम दोनों भाई तेरी मस्त जवानी को खुलकर भोगेंगे। अब से तुम हमारी साझे की बीवी हो। हम दोनों तुम्हारे पति हैं..." यह कहकर मैंने माँ को गोद से उतार दिया और खड़ा हो गया।

फिर मैंने अजय को खड़ा किया और उसके सारे कपड़े उतारने शुरू किए साथ ही अजय भी मेरे कपड़े उतारने

लगा। देखते-देखते हम दोनों भाइयों ने एक दूसरे को पूरा नंगा कर दिया। अब हम तीनों के शरीर पर वस्त्र नाम की कोई चीज नहीं थी। अजय का 10” का लण्ड पूरा तना हुआ था।

मैंने अजय का लण्ड पकड़कर माँ को दिखाते हुए कहा- “माँ अपने छोटे बेटे का लण्ड देख। मुन्ना का देख कितना प्यारा ‘मुन्ना' है। जब इससे चुदाएगी ना पूरी मस्त हो जाएगी...”

तभी अजय ने भी मेरा लण्ड पकड़ लिया, और कहा- “और माँ यह देख भैया का मूसल सा हलब्बी लौड़ा। मैं तो इसे आराम से पूरा का पूरा ले लेता हूँ, पर तू तो भीतर जाते ही हाय हाय करने लगेगी। तेरी तो चूत को फाड़कर भैया भोसड़ी बना देंगे। हम चूतिए हैं तो तेरी मस्त चूत के लिए हैं, और गान्डू हैं तो तेरी फूली-फूली गाण्ड के लिए हैं। मैं तो भैया के हलब्बी लौड़े से आराम से गाण्ड मरा लेता हूँ पर तू अपनी सोच। भैया जब हुमच कर तेरे

में पेलेंगे तब तेरी यह कतरनी सी जुबान बाहर आ जाएगी...”

तभी मैं माँ के पीछे चिपक गया और अजय माँ के आगे चिपक गया। हम दोनों मर्दाने भाइयों के बीच माँ पिसी जा रही थी। मैंने माँ की चूचियां हाथों में समा ली और अजय माँ के होंठ चूसने लगा। मैं माँ की गाण्ड की गर्मी लेते हुए उसकी गाण्ड पर लण्ड रगड़ रहा था और अजय उसकी चूत से अपना लण्ड टकरा रहा था।

 
मैं- "माँ अब बता पहले किससे चुदवाएगी? अपने बड़े बेटे से या छोटे बेटे से?”

तभी अजय बोल पड़ा- “नहीं भैया, माँ पर पहला हक आपका है। माँ से व्याह आपने किया है, सुहागरात आपकी है, मैं पहले कहाँ से आ गया? चलिए अब अपनी चुदासी माँ की चूत की प्यास बुझाइये...”

मैंने माँ की चूत में अंगुली डालते हुए कहा- “क्यों माँ तैयार हो ना अपनी इस मस्त चीज का स्वाद चखाने के लिए?”

राधा- “मेरे लिए तो तुम दोनों एक जैसे हो कोई भी पहले आ जाओ, मुझे क्या फर्क पड़ता है? तुम लोग चाहो तो दोनों एक साथ आ जाओ, दोनों को भी झेल लँगी। विजय बेटे, मेरी चूत का तुम लोगों को स्वाद चखाने के लिए ही तो नंगी हुई हूँ। मुझे जी भर के चोदो, मेरे से जी भरके मस्ती करो। दो-दो पूरे नंगे बेटों के बीच नंगी होने में मुझे बहुत मजा आ रहा है। दो-दो खड़े लण्ड एक साथ देखकर मैं वासना से जल रही हूँ, मुझे खुलकर भोगो मेरे प्यारों, मैं बिल्कुल तैयार हूँ..”

माँ की बात सुनकर मैं माँ को बिस्तर पर खींच लाया और उसे चित्त लेटा दिया। उसकी गाण्ड के नीचे एक बड़ा सा तकिया लगा दिया और उसके घुटने मोड़कर चूत को उभार दिया।

मैं- “मुन्ना माँ की झाँट भरी मस्त चूत देख... कैसी खुलकर मुझे दावत दे रही है? देख भीतर से कैसी चिकनी है? इसमें तो तेरी गाण्ड जैसे वैसेलीन लगाने की भी दरकार नहीं है...” मैं माँ की चूत पर झुक गया और उसे

चाटने लगा।

मुन्ना ने मेरे लण्ड को अपने मुँह में ले लिया और उसे अपने थूक से तर करते हुए चूसने लगा। कुछ देर चूत चाटने के बाद मैंने माँ की टाँगों के बीच अपना आसन जमा लिया। मेरा लण्ड माँ की चूत के ठीक सामने था। अजय मेरे सामने माँ की ठीक बगल में बैठा हुआ था। उसने मेरा लण्ड पकड़ा और माँ की चूत के छेद से भिड़ा दिया। फिर उसने दोनों हाथों से चूत फैला दी ताकी मेरा विशाल लण्ड उसमें आराम से जा सके। मैंने धीरे से धक्का दिया तो माँ की लसलासी चूत में लण्ड का सुपाड़ा घुस गया। फिर धीरे-धीरे लण्ड अंदर ठेलने लगा और कुछ देर में मेरा आधा लण्ड माँ की चूत में समा गया। अब मैं आधे लण्ड से ही माँ को चोदने लगा।

अजय- “भैया अभी तो आपका आधा ही भीतर गया है। क्या आपका पूरा इसमें नहीं जाएगा? जोर लगाकर ठेलिए। आज इसकी चूत फाड़कर भाड़ सा भोसड़ा बना दीजिए...”

अजय की बात सुन मैंने तीन-चार करारे शाट माँ की चूत में मारे और मेरा लण्ड जड़ तक चूत में समा गया। अब मैं माँ पर झुक गया और उसके होंठ चूसने लगा। उधर तीन चौथाई लण्ड बाहर निकालता और एक धक्के में वापस पूरा पेल देता। अभी धक्कों की स्पीड बहुत धीमी थी।

राधा- “अजय यह माँ की चूत है। ऐसे तो दो लण्ड एक साथ भीतर ले लँ। ठीक से देख भैया का मूसल मेरी चूत में कितने आराम से जा रहा है? देख औरत की चूत को मर्द कैसे चोदते हैं? ठीक से देख ले और सीख ले,

आखिरकार तुझे भी तो चोदनी है। तेरे भैया को मेरी जैसी बड़ी सी चूत चाहिए तो मुझे भी भैया के जैसा हलब्बी लौड़ा चाहिए। छोटी मोटी नूनी तो किसी कोने में ही अटक के रह जाएगी। ऐसे मस्ताने लण्ड की ही तो मैं पूरी शौकीन हैं। इसीलिए जब तूने मेरी भैया से शादी की बात छेड़ी तो मैं फौरन तैयार हो गई। मैं बहुत खुश हूँ की तूने मुझे ऐसे लण्ड की दुल्हन बना दिया है। तेरा यह अहसान मैं कभी नहीं भूलूंगी। आ तेरा लण्ड चूस देती हूँ। ला इसे मेरे मुँह में दे दे...”

माँ की बात सुनकर मैं पूरा गरम हो गया था और अब चूत में लण्ड दनादन पेल रहा था। मेरे धक्कों की स्पीड बहुत ज्यादा बढ़ गई थी और चूत फचा-फच चुद रही थी। इधर अजय ने माँ की छाती के दोनों ओर अपने घुटने जमा दिए और माँ के मुँह के सामने उसका लण्ड लहराने लगा। माँ अजय के लण्ड के सुपाड़े पर अपनी जीभ फिराने लगी।

राधा- “वाह... मेरे छोटे बेटे का लण्ड तो उसके जैसा ही मक्खन सा चिकना और प्यारा है। यह सुपाड़ा तो रसगुल्ले जैसा है। इसे तो अब रोज आइसक्रीम की कैंडी की तरह चूसूंगी। बड़ा बेटा तो मुझे बाजार की कैंडी खिला के लेता है पर अब से मैं तो यह घर की ही कैंडी चूसूंगी...” यह कहकर माँ मुन्ने का लण्ड अपने मुँह में लेने लगी। उसने आधा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और बाहर-भीतर करते हुए थूक से तर करने लगी। माँ अजय की गोटियों को हाथों से धीरे-धीरे दबा रही थी।

मैंने माँ की दोनों चूचियां हाथों में ले ली और माँ को कस के चोदने लगा, और कहा- “मुन्ना इस लण्ड खोरनी माँ के मुँह में अपना पूरा लौड़ा पेल दे। पूरा भीतर तेल दे जिससे की इसे ठीक से साँस भी नहीं आए। इसे भी। थोड़ा पता तो चले की दो-दो लण्डों की क्या ताकत होती है? देख मैं इसे कैसे कस-कस के चोद रहा हूँ और यह गाण्ड उछाल-उछालकर चुदवा रही है। अपनी माँ पक्की चुदक्कड़ है। इसकी चूत में बहुत खाज है, पर मैं इसकी चुदाई की आज सारी खाज मिटा दूंगा..."

 
मेरी बात सुनकर अजय माँ के मुँह में लण्ड ठेलने लगा और उधर माँ भी पूरा मुँह खोलकर अपने छोटे बेटे का लण्ड मुँह में लेने लगी। थोड़ी ही देर में मुन्ना ने अपना लण्ड जड़ तक माँ के मुँह में दे दिया। अब वो लण्ड । बाहर-भीतर करते हुए माँ के मुँह को चोदने लगा। माँ भी मुँह आगे-पीछे करते हुए पूरी तन्मय होकर लण्ड चूस रही थी। माँ ने अजय के दोनों चूतड़ों पर अपने हाथ जमा दिए और वो उन्हें अपनी ओर दबाने लगी। अब वो पूरा लण्ड मुँह में भरकर बड़े आराम से चूस रही थी।

अजय- “भैया, माँ पक्की चुदक्कड़ तो है ही साथ ही पक्की लण्ड खोरनी भी है। देखो मेरा पूरा लण्ड मुँह में लेकर कितने आराम से चूस रही है। भैया माँ को लण्ड चुसवाकर तो मजा आ गया। जब इसको लण्ड चुसाने में इतना मजा है तो इसको चोदने में और इसकी गाण्ड मारने में कितना मजा आएगा?”

मैं माँ को कस-कस के चोद रहा था। अब मैं झड़ने के बहुत करीब था- “अरे बहुत गरम माल है यह। यह हम । दोनों भाइयों को खुलकर मस्ती कराएगी। मैं तेरे को कहता था ना की एक बार इसे पटा लेने दो फिर यह घर में ही हमें इतनी मस्ती देगी की हमें कभी भी बाहर की ओर मुँह करने की जरूरत ही नहीं होगी। भाई मैं तो झड़ने जा रहा हूँ। मैं अपने गाढ़े रस से इसकी चूत लबालब भर दूंगा। इसके पेट में अपना बीज डालूंगा और इसे अपने बच्चे की माँ बनाऊँगा। हाँ भाई मैं झड़ रहा हूँ। हाय, मेरा माल माँ की चूत में बह रहा है। ओह्ह... ओहह... मैं झड़ रहा हूँ। यह चुदक्कड़ औरत मेरा रहा सारा रस निचोड़ रही है। हाय... मुन्ना में माँऽऽ की चूत में झड़ रहा हूँ...” यह कहते-कहते में झड़ने लगा।

मेरे लण्ड से रस की धार माँ की चूत में बहने लगी। मैंने माँ की चूचियां अपनी मुट्ठी में जकड़ ली और आखिरी के धक्के बहुत तेजी से मारते हुए झड़ रहा था। तभी माँ ने भी खूब जोर-जोर से अपनी गाण्ड ऊपर उछालनी शुरू कर दी। उसने अपनी मुठियां अजय की गाण्ड पर कस ली और बहुत तेजी से मुँह आगे-पीछे करते हुए लण्ड को चूसने लगी। माँ भी मेरे साथ झड़ रही थी, पर अजय का लण्ड मुँह में होने की वजह से कुछ भी बोल नहीं पा रही थी।

अजय- “भैया मेरा भी माँ के मुँह में निकल रहा है। ले माँss मेरा सारा माल गटक जा। हाय मेरी राधा भाऽभीऽs तेरे मुँह में झड़कर तो बहुत मजा आ रहा है। हाय मेरे भाई की जोरू... हाय मेरी प्यारी भाभिऽs मैं झड़ रहा हूँ..”

मैं- “मुन्ना लण्ड बाहर मत निकालना। सारा माल माँ के मुँह में ही झाड़ दे। अपना रस इसको पिला। देख मैंने इसकी चूत अपने रस से भर दी, अब तू इसका मुँह अपने रस से भर दे। इसको रस से सराबोर कर दे...”

हम तीनों लगभग एक ही समय पर झड़ रहे थे। धीरे-धीरे बारी-बारी से हम तीनों शिथिल पड़ते गये। अजय ने। माँ के मुँह से लण्ड निकाल लिया और माँ के बगल में ही बिस्तर पर लेट गया। मैं भी मुरझाए लण्ड को चूत में ही डाले माँ पर ही निढाल हो गया। उधर माँ ने भी शरीर को ढीला छोड़ दिया और आँखें बंद कर ली। हम करीब आधा घंटा इसी तरह पड़े रहे।

फिर सबसे पहले माँ उठी और उसने अपनी पैंटी पहन ली। उसने अपने बाकी के सारे कपड़े और गहने लिए और अपने रूम में चली गई। फिर मैं उठा और बाथरूम में फ्रेश होने के लिए घुस गया। बाथरूम से वापस आया तो अजय वैसे ही सोया पड़ा था और मैं भी उसकी बगल में रोज की तरह सो गया। दूसरे दिन स्टोर जाते समय सब कुछ स्वाभाविक था और रात की घटना की कोई चर्चा नहीं थी।

इसके दूसरे दिन रात के खाने का काम समाप्त होने पर माँ नहाने के लिए बाथरूम में चली गई और मैं मुन्ना

के साथ बाइक पर सैर को निकल गया। मैं मुन्ना को लेकर उसी पार्क में आ गया जहाँ कभी माँ को लेकर गया था और जहाँ नौजवान जोड़े मस्ती के लिए आते थे। हमने पार्क के दो चक्कर लगाए और मैं अजय को मस्ती करते हुए जोड़े दिखा रहा था। हमने फव्वारों का भी कुछ देर आनंद लिया। फिर हमने आइसक्रीम के 3 कप और 3 कैंडी ली और 10:00 बजे के करीब वापस घर पहुँच गये।

माँ ने दरवाजा खोला। माँ पूरी खिली हुई थी और महक रही थी। उसने आज सेक्सी गाउन पहन रखा था। हम तीनों मेरे कमरे में आ गये। कमरे में आते ही मैंने माँ की कमर में हाथ डाल दिया और अपना हाथ उसकी पीठ से फिराते हुए उसकी गाण्ड तक ले आया।

मैं- “मुन्ना माँ को छूकर देख... इसने इस गाउन के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा है। गाउन के नीचे पट्टी पूरी नंगी है। देखो कितनी समझदार है की पहले से ही नीचे कुछ नहीं पहन रखा है...” मेरी बात सुनकर अजय भी। गाउन के ऊपर से माँ की पीठ और गाण्ड पर हाथ फेरते हुए अनुभव करने की कोशिश करने लगा की सचमुच में इसने नीचे कुछ पहन रखा है या नहीं?

अजय- “हाँ... भैया, माँ चुदवाने के लिए और मरवाने के लिए बहुत उतावली दिखती है, इसे कपड़ा उतारने की भी देर बर्दास्त नहीं है। माँ, तू तो भैया की एक ही चुदाई में चुदाने के लिए इतनी बेचैन हो गई, फिर तूने गाँव में 15 साल बिना चुदाए कैसे निकाल दिए? मेरे को कहती थी ना की मैं गाँव में दोस्तों के सक्करकंदा लेता हूँ तो तू क्या अपनी चूत में बैगन और खीरे डालती थी? बता ना माँ तूने गाँव में कितने यार पाल रखे थे? तेरे जैसी चुदक्कड़ औरत बिना लण्ड के कैसे रह सकती है?”

इधर अजय माँ को छेड़ रहा था। तभी मैंने ब्रीफ को छोड़कर मेरे सारे कपड़े निकाल दिए। मैंने पास खड़ी माँ के गाउन के स्ट्रैप्स खोल दिए और गाउन उसके शरीर से निकालकर उसे मादरजात नंगी कर लिया। में सोफे पर। बैठ गया।

राधा- “यह तू नहीं बोल रहा है बल्कि तेरे भैया का जो इंजेक्सन तेरे पिछवाड़े में लगा था ना, उसका असर बोल रहा है। मैं तो अब अपने बड़े बेटे के हलब्बी लौड़े से चुदूंगी, उससे गाण्ड मरवाऊँगी, मोटे-मोटे सक्करकंदा तो। बैठकर तू अपनी गाण्ड में पेलते रहना। मैंने तो गाँव में एक भी यार नहीं पाल रखा था, पर तू गाँव के मुस्टंडों के आगे अपनी पैंट नीची करते फिरता रहता था। उनसे गाण्ड मरवा-मरवा कर ही तो तेरी गाण्ड इतनी फूल गई है। तू तो एक नंबर का गान्डू है...”

विजय- “आओ मेरी राधा रानी नाराज मत हो, आओ मेरी गोद में बैठो..." यह कहते हुए मैंने माँ को अपनी गोद में खींच लिया। फिर कहा- “देखा मुन्ना कितना बदमाश हो गया है। अपनी प्यारी-प्यारी माँ से कैसी बेशर्मी की बातें कर रहा है। तू तो गोद में बैठाकर प्यार करने की चीज है। तू इस छोटे के ज्यादा मुँह मत लगा करो। तू तो मेरे पास आ जाया करो। मैं तुझे अपनी गोद में नंगी करके बिठाऊँगा और धीरे-धीरे तुझे पेलूंगा। मुन्ना, माँ में अभी भी थोड़ी लाज शर्म बाकी है, तभी तो इसने अपने शरीर पर गाउन डाल लिया। नहीं तो देख यह नंगी कितनी मस्त लग रही है। अरे यह तो नंगी करके गोद में बिठाकर खिलाने की चीज है। हाय.. तेरे में से कैसी मीठी-मीठी मदहोश कर देनेवाली खुश्बू आ रही है। तो मेरी राधा जानू तू अपने बेटों से चुदने के लिए तैयार होकर आई हो? तो क्या हुआ, अब घर में दो-दो जवान लण्डों के होते हुए तू क्या जिंदगी भर अपनी चूत में खीरे और बैगन पेलती रहेगी? मुन्ना को अभी पूरी समझ नहीं आई है। ला मुन्ना, माँ के लिए कैंडी लेकर आया है ना वो निकाल, माँ को कैंडी चुसवा। माँ कितने मन से तैयार होकर आई थी और तूने इसका मजाक बना दिया...”

अजय- “भैया कौन सी कैंडी

मैं- “चल बदमाश कहीं का। अरे कल वाली नहीं आज वाली निकाल...”

 
साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
अजय- “भैया कौन सी कैंडी

मैं- “चल बदमाश कहीं का। अरे कल वाली नहीं आज वाली निकाल...”

मेरी बात सुनकर अजय ने आइसक्रीम का पैकेट खोला और तीनों कैंडियां निकाल ली। उसने एक-एक कैंडी खोलकर मुझे और माँ को दे दी और एक खुद ले ली। माँ पूरी नंगी मेरी गोद में बैठी हुई अजय को दिखादिखाकर लण्ड की तरह कैंडी चूसने लगी। वो पूरा मुँह गोल बनाकर आधे से ज्यादा कैंडी मुँह में ले लेती और जैसे लण्ड को मुँह से बाहर-भीतर करते हुए चूसा जाता है वैसे ही अजय को दिखा-दिखाकर चूसने लगी।

इसके बाद तो माँ ने हद ही कर दी। उसने कैंडी अपनी नंगी चूत के फाटक पर फेरी और वापस चटखारे लेकर उसे चूसने लगी। माँ की यह हरकत देखकर अजय सोफे के सामने जमीन पर बैठ गया और कैंडी के रस से

मीठी हुई चूत चाटने लगा। उसने फिर अपनी वाली कैंडी थोड़ी सी माँ की चूत में डाली और वापस चूत चाटने लगा। इस प्रकार कैंडी से मीठी कर-करके वो माँ की मस्त चूत चाटने लगा।

इधर मैं कभी माँ वाली कैंडी चूस लेता तो कभी अपनी वाली माँ को चुसा देता। कई बार मैंने अपनी ठंडी कैंडी

माँ के निपल से लगाई और निपल चूसकर कैंडी का दूध उसपर से साफ किया। इस प्रकार हम तीनों ने आइसक्रीम कैंडियां खतम की।

मैं- “मुन्ना आज तो आइसक्रीम कैंडी का मजा आ गया। चल कप्स का भी मजा ले लेते हैं, नहीं तो आइसक्रीम गल जाएगी, तब मजा नहीं आएगा। पहले अपने सारे कपड़े निकाल दे...”

मेरी बात सुनकर अजय भी पूरा नंगा हो गया और मैंने भी सोफे से उठकर अपना ब्रीफ निकाल दिया। मैं और माँ बेड के किनारे पर बैठ गये। अजय ने तीनों आइसक्रीम के कप एक-एक के हाथ में दे दिए। मैं माँ को दिखाकर जैसे चूत चाटी जाती है वैसे कप में जीभ फिरा-फिराकर आइसक्रीम का स्वाद लेने लगा।

मेरी देखा देखी अजय ने अपनी लंबी सी पूरी जीभ बाहर निकाल ली और कप में नीचे से ऊपर तक जीभ घसीटकर बहुत ही सेक्सी मुद्रा में माँ को दिखाकर आइसक्रीम चाटने लगा। अजय पलंग के पास खड़ा था और उसका लण्ड माँ के पास ही पूरा तना हुआ था।

माँ ने एकाएक कप में से अंगुली की सहायता से बड़ा सा आइसक्रीम का ढेला निकाल लिया और वो ठीक से अजय के लण्ड पर चुपड़ दिया। फिर माँ नीचे झुकी और आइसक्रीम से चुपड़े मीठे और ठंडे लण्ड को मुँह में भरकर चूसने लगी। तभी मैं माँ की चूत पर झुक गया और कप में से थोड़ी आइसक्रीम माँ की चूत के छेद में डाल दी और वो मीठी चूत चाटने लगा। माँ ने जब लण्ड चूसना बंद किया तो अजय ने भी माँ की चूत में आइसक्रीम डालकर माँ की चूत चाटी। आखिरकार, आइसक्रीम खाने का बहुत ही कामुक दौर समाप्त हुआ।

मैं- “देखा मुन्ना माँ के साथ मस्ती करने का मजा? देखो, माँ कितनी खुलकर मस्ती करवाती है। चलो हम तीनों साथ-साथ नहाते हैं। आइसक्रीम से बदन चिपचिपा हो गया है.”

यह कहकर हम सब मेरे बड़े बाथरूम में आ गये। हम तीनों शावर के नीचे थे। तभी मैंने फुल फोर्स में शावर खोल दिया। ठंडे पानी की तेज धार हम तीनों के नंगे बदन पर पड़ने लगी। हम दोनों भाइयों ने माँ को हमारे बीच में लेकर बाँहों में जकड़ लिया। मैंने अपना लण्ड माँ की गाण्ड से भिड़ा रखा था और अजय ने झांटदार चूत से। हम कसमसाते हुए शावर में नहा रहे थे। तभी मैंने एक बड़ी सी शैम्पू की बोतल ली और ढेर सारा शैम्पू माँ के, अजय के और मेरे माथे पर गिरा दिया और शावर बंद कर दिया। मैं माँ के घने बालों को रगड़-रगड़ शैम्पू का झाग पैदा करने लगा, माँ अजय के सिर पर और अजय मेरे सिर पर।

 
यह बहुत ही फोम पैदा करनेवाला शैम्पू था, इसलिए हम तीनों के सिर, चेहरा और पूरा बदन फोम से भर गया। अब हम तीनों आपस में एक दूसरे के बदन रगड़ रहे थे। माँ मेरा लण्ड, गोटियां और झाँटें रगड़ रही थी, मैं अजय का लण्ड और उसकी गाण्ड रगड़ रहा था और अजय माँ की चूत, चूचियां और गाण्ड रगड़ रहा था। हम एक दूसरे को रगड़-रगड़कर काफी देर नहलाते रहे। फिर मैंने वापस शावर खोल दिया और काफी देर फिर शावर के नीचे गुत्थम गुत्था होते हुए नहाते रहे। कुछ देर बाद मैंने शावर बंद कर दिया। हमारे बदन से पानी चू रहा था। अजय बाथरूम के टाइल लगे फर्श पर बैठ गया और मेरे खड़े लण्ड को मुँह में ले चूसने लगा। उसकी देखा देखी माँ भी नीचे बैठ गई और मेरी गोटियों से खेलने लगी। माँ ने भी मेरे लण्ड पर मुँह लगा दिया। कभी अजय उसे मुँह में ले लेता और कभी माँ। माँ मेरी गाण्ड दबा रही थी।

तभी मुझे पेशाब करने की शंका महसूस हुई और मन में एक शरारत भरा खयाल आया। माँ के मूतने का दृश्य मेरी आँखों के आगे आने लगा। मैंने सोचा की क्यों ना आज माँ के मुँह में मूटत की धार छोड़ दें। अभी यह पूरी मस्त है और एक बार इसके मुँह में मेरे मूत की धार चली गई तो यह भी बिना हिचक के अपना मूत्रपान हम दोनों भाइयों को करवाएगी। यह सोचकर मैंने अपना लण्ड माँ के मुँह में पूरा ठेल दिया और मूतने के लिए जोर लगाया। जोर लगाते ही हल्की-हल्की मूत्र-धार निकलकर माँ के हलक में गिरने लगी।

पहले तो पूरी भीगी हुई माँ की समझ में ही नहीं आया की क्या हो रहा है? पर फिर उसने मेरा लण्ड मुँह से बाहर निकाल दिया। अब मेरे मूत्र का वेग बढ़ गया था और मोटी धार के रूप में लण्ड से फोर्स के साथ निकल रहा था। माँ ने ओर अजय दोनों ने देखा की मैं मूत रहा हूँ।

अजय यह देखकर पूरे जोश में आ गया और उसने मेरे लण्ड को झट से अपने मुँह में ले लिया और वो मेरा मूत गटागट पीने लगा। थोड़ा मूत अजय को पिलाकर मैंने लण्ड अजय के मुँह से निकाल लिया और मूत्र धार छोड़ते हुए लण्ड को माँ के बंद होंठों से छुवाकर लण्ड मुँह में देने के लिए जोर लगाने लगा। मेरा मूत माँ के होंठों और पूरे चेहरे को तर कर रहा था। मैंने माँ का चेहरा पकड़कर उसे अपने लण्ड पर दबा दिया और माँ ने मुँह खोल दिया। मैंने माँ के मुँह में लण्ड दे दिया और तब तक माँ के मुँह में मूतता रहा जब तक की मेरा मूत रुक नहीं गया और माँ ने भी मेरे मूत की एक भी बूंद व्यर्थ नहीं जाने दी।

मैं- “माँ कैसा लगा अपने बेटे के मूत का स्वाद? माँ चलो अब तुम खड़ी हो जाओ और आज हम दोनों बेटों के सामने खड़ी-खड़ी मूतो। माँ मैं तेरी झांटदार चूत से मूत की धार बहती हुई देखना चाहता हूँ। मुन्ना ने तो कई बार तुझे मूतते हुए देखा है, पर मैंने तो आज तक किसी औरत को ही मूतते हुए नहीं देखा..."

राधा- “तुम बहुत शरारती हो। माँ को चोद तो तूने कल ही लिया था और आज अपना मूत पिलाकर उसे अपनी रंडी बना लिया। जब तुम लोगों ने मुझे अपनी रंडी बना ही लिया है तो मैं खुद भी रंडी बनकर पूरा मजा क्यों ना हूँ। मुझे तुम दोनों से प्यार है, तुम दोनों के लण्डों से प्यार है, तुम्हारे वीर्य को चूत में झड़ाने से प्यार है। और सच कहूँ तो तेरा मूत भी मुझे बहुत मजेदार लगा। उसे पीकर तो मैं पूरी मस्त हो गई हूँ। मैं एक रंडी बन गई हूँ, एक ऐसी रंडी जो पूरी बेशर्म होकर चुदवाना चाहती है, तुम लोगों से गाण्ड मरवाना चाहती है, तुम लोगों का मूत पीना चाहती है। तो तू मुझे मूतते हुए देखना चाहता है। अब मैं मूतकर खाली दिखाऊँगी नहीं बल्कि तुम दोनों के खुले मुँह में मूतूंगी। यह सोचकर ही मुझे पेशाब करने की बहुत जोर से हाजत लग गई है..." यह कहकर माँ खड़ी हो गई।

विजय और अजय फर्श पर घुटनों के बल बैठ गये और माँ की चूत पर अपनी आँखें गड़ा दी। मैंने माँ की चूत

थोड़ी चौड़ी कर ली और चूत के छेद के ऊपर बने पेशाब के छेद को अजय को दिखाते हुए कहा- “मुन्ना देख यह माँ का पेशाब करने का छेद है। माँ के मूत का झरना यहीं से बहेगा...”

अजय- “भैया मैं तो सोचता था की जैसे हम लोगों के लण्ड में झड़ने का और मूतने का एक ही छेद है वैसे ही माँ का भी चोदने का और मूतने का एक ही छेद होगा पर माँ के तो अलग-अलग हैं...”

मैं- “अरे माँ के हर छेद का अपना-अपना स्वाद है। तू देखता जा तुझे माँ के एक-एक छेद की मस्ती करवाता हूँ। माँ चलो अब मूतो ना...”

मेरी बात सुनकर माँ ने जोर लगाया और मूत्र-छिद्र से छुर छुर्रर की आवाज से मूत्र की तीव्र धार बह निकली। मूत्र का रंग बिल्कुल पानी जैसा ही था। मैंने फौरन पूरा मुँह खोलकर एक कप की तरह वहाँ जड़ दिया और माँ का वो अमृतमय मूत गटागट पीने लगा।

तभी अजय ने कहा- “भैया सारा अकेले मत पी जाना, थोड़ा मेरे लिए भी छोना..."

अजय की बात सुनते ही मैंने उस बहते झरने से मुँह हटाकर मुन्ना का मुँह वहाँ लगा दिया। मुन्ना भी पूरा मस्त होकर माँ का मूत पीने लगा। फिर मैंने अजय का मुँह वहाँ से हटा दिया और उस मूत्र धार को अपने चेहरे पर गिरने दिया, बीच-बीच में अजय भी उसके सामने अपना चेहरा ले आता। हम दोनों भाई उस मादक मूत्रस्नान का तब तक मजा लेते रहे जब तक मूत की धार पूरी तरह से बंद नहीं हो गई।

माँ के मूत का स्नान खतम होते ही मैंने वापस शावर खोल दिया और काफी देर हम फिर शावर के नीचे नहाते रहे। इसके बाद मैंने किंग साइज का तौलिया एक साथ हम तीनों के शरीर पर लपेट लिए और उस विशाल तौलिया के अंदर घुसे हुए हम तीनों हिल-हिल कर अपनी पीठ, छाती, कमर, गाण्ड उस तौलिया पर रगड़ते हुए पोंछने लगे। अपने बदन से पानी को सूखाकर हम वापस कमरे में आ गये।

 
राधा- “ठंडे पानी से नहाने के बावजूद भी मेरा शरीर तो जला जा रहा है। पूरे शरीर में जैसे आग सी लग गई है। विजय बेटे, तेरे मूत में ऐसा क्या मिला हुआ था की जब से उसे पिया है तब से एकाएक मेरे शरीर में जलन होने लगी है। देखो ना मेरी चूत में चींटियां सी रेंग रही हैं। पूरी चूत भीतर से जल रही है। तुम लोग खड़े-खड़े देख क्या रहे हो? मेरा कोई इलाज करो ना... नहीं तो मैं जलकर राख हो जाऊँगी..." ऐसा कहकर माँ ने मेरे होंठ अपने मुँह में ले लिए और उनपर हल्के दाँत गड़ाती हुई अत्यंत कामातूर होकर मेरे होंठ चूसने लगी। काफी देर मेरे होंठ चूसने के बाद माँ अजय के भी होंठ उसी तरह चूसने लगी।

विजय- "माँ वही हालत मेरी हो रही है। तेरे मूत का स्वाद चखने के बाद तो ऐसी मस्ती चढ़ी है जैसी की आज तक नहीं चढ़ी। मैं तो आज तेरी गाण्ड मारूंगा। आज मुन्ने की बारी है चूत चोदने की। वो जिंदगी में पहली बार एक औरत की चूत चोदेगा और वो भी अपनी माँ की। माँ मुन्ने को अपनी चूत बहुत मस्त होकर देना। उसको चूत का ऐसा चस्का लगा दे की चूत का कीड़ा बन जाय। क्यों मुन्ना माँ की चूत लेगा ना? खूब मस्त होकर माँ को चोदना। तू बहुत नशीब वाला है की जिंदगी की पहली चूत तू अपनी माँ की चोदने जा रहा है...”

अजय- “हाँ भैया... आप दोनों का मूत पीने से जो मस्ती चढ़ी है, वैसी तो आज तक नहीं चढ़ी। मेरे लण्ड की नसें फट रही हैं। आज तो खूब मस्ती करते हुए, मजा लेते हुए मैं अपनी इस मस्तानी माँ को चोदूंगा। इसको जब मैं खेतों में मूतते हुए देखता था, तब इसे चोदने की इच्छा नहीं हुई। लेकिन इस साली का मूत पीकर तो ऐसी इच्छा हो रही है की एक झटके में ही पूरा लण्ड इसकी चूत में जड़ तक पेल दें, इसे एक रंडी की तरह चोदूं और चोद-चोदकर इसकी चूत का भोसड़ा बना हूँ..” यह बोलकर अजय माँ की चूत के सामने घुटनों के बाल बैठ गया और उसमें पूरी जीभ घुसाकर उसे चाटने लगा। माँ की चूत का दाना जो पूरा तना हुआ था, उसपर दाँत गड़ाने लगा।

राधा- “हाँ... मैं अपने इस देवर राजा को खूब प्यार से अपनी चूत देंगी, इससे खूब मजा ले लेकर चुदवाऊँगी। अपने इस देवर को मेरे पर बोल-बोलकर चढ़ाऊँगी। आ जा मेरे देवर राजा तू जब कहेगा तेरे लिए टाँगें चौड़ी करके तेरे लण्ड के लिए चूत का फाटक खोल देंगी। तेरी जब इच्छा हो मेरी साड़ी ऊपर उठा दिया करो, मेरी चूत

में अंगुली दे दिया करो, मेरी टाँग उठाकर अपना लण्ड मेरे में पेल दिया करो, तेरे लिए कोई रोक नहीं है। देख मेरी चूत ठीक से देख। ये तेरे लण्ड के लिए तरस रही है। तू पहली बार चूत चोदने जा रहा है ना तो तू भी क्या याद रखेगा की औरत के टाँगों बीच वाले इस छेद का क्या मजा होता है? आ मेरे राजा आ... मुझे मनचाहे ढंग से चोद, खूब गंदी-गंदी बातें करते हुए चोद, मुझे हुमच-हुमच कर चोद...”

विजय- “आज हम दोनों भाई तुझे एक साथ दो-दो लण्डों का स्वाद चखाएंगे। चल मुझे अपनी मस्त गाण्ड दिखा।

मैं तेरी गाण्ड का बाजा बजाऊँगा और मुन्ना तेरी चूत का कबाड़ा करेगा...”

राधा- “आज तो इतनी मस्ती चढ़ी हुई है की मैं एक साथ दो-दो ऐसे मस्ताने लण्ड भी झेल लँगी। तू तो गाण्डों का दीवाना ज्यादा है। तुझे गाण्ड ही पसंद है तो देख मेरी फूली-फूली गाण्ड देख। मेरी गाण्ड का गोल छेद देख...”

यह कहते-कहते माँ ने एक पैर सिंगल सीटर सोफे पर रख दिया और सोफे पर झुक कर अपनी विशाल गाण्ड पीछे उभार दी। उसने अपने दोनों हाथ अपनी गाण्ड पर रख लिए और बहुत ही सेक्सी पोज में गाण्ड के छेद को फैलाते हुए अपनी गाण्ड दिखाने लगी। तभी वो अपनी एक अंगुली से अपनी गाण्ड खुद खोदने लगी और मुझे न्योता देने लगी की देख इसी छेद का तू दीवाना है, तू अपना लण्ड इसी में देना चाहता है।

राधा- “ले चाट इसे। ठीक से चिकनी कर ले इसे। खूब वैसेलीन चुपड़ के मस्त होकर मेरी गाण्ड मारना। तेरे लण्ड पर यह मस्तानी गाण्ड पटक पटक के तुझसे मरवाऊँगी..."

माँ की बात सुनकर मैं माँ की गाण्ड पर झुक गया और उसकी गाण्ड के गोल छेद पर अपनी जीभ फिराने लगा। जीभ की नोक से उसपर सुरसुरी देने लगा। धीरे-धीरे माँ की गाण्ड का गुलाबी भूरा छेद खुलने लगा और उस छेद में जहाँ तक जीभ जा सकती थी वहाँ तक घुसाकर कामवासना से जलती हुई उसकी गाण्ड को चाटने लगा।

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साथ बने रहने के लिए शुक्रिया दोस्तो
 
तभी माँ ने अजय को अपने सामने सोफे पर बैठा लिया और बोली- “ले तू मेरी चूत देख। देख कैसी काले-काले बालों से भरती है? ले मेरी चूत की फाँक चौड़ी करके देख। देख भीतर से कितनी गहरी और पूरी लाल है? ले। इसमें अंगुली डालकर देख। भीतर से कितनी गरम है? जब तुम इसमें अपना लण्ड डालेगा तो यह तेरे लण्ड को सेंक देगी। यह मैं माँ ही हूँ जो तुझे इतने प्यार से चूत दिखा रही हूँ और इतने ही प्यार से तेरा लण्ड इसमें डलवाऊँगी। देख तेरा बड़ा भाई तो मेरे पिछवाड़े पर पिला हुआ है पर मैं अपने राजा छोटे बेटे को आज अपनी चूत चखाऊँगी...”

माँ की बात सुनकर अजय भी पूरा मस्त हो गया और वो चूत में पूरी जीभ घुसा-घुसाकर उसे चाटने लगा। तभी मैंने अपने लण्ड पर कंडोम चढ़ा ली और सोफे पर पैर रखकर झुकी हुई माँ की गाण्ड पर और अपने लण्ड पर। अच्छी तरह से वैसेलीन मल ली। मैं अजय के चोदने के कुछ देर पहले माँ की गाण्ड मारना चाहता था की जिसे देखकर अजय और मस्त हो जाय और मेरे झड़ने के बाद भी अजय काफी देर तक माँ को चोदता रहे।

माँ की गाण्ड को अच्छी तरह से चिकनी करकर मैंने खड़े-खड़े माँ की गाण्ड से अपना सुपाड़ा भिड़ा दिया। सोफे पर बैठे हुए अजय ने दोनों हाथों के जोर से माँ की गाण्ड का छेद कस के फैला दिया और मैंने जोर लगाकर लण्ड माँ की गाण्ड में ठेला। पूरे कई लण्ड का सुपाड़ा उस खुली गाण्ड के छेद में एक ही बार में समा गया। मैंने 3-4 बार सुपाड़ा निकाला और वापस गाण्ड में डाला जिससे गाण्ड अंदर से अच्छी तरह से चिकनी हो गई।

फिर मैं अपना लण्ड धीरे-धीरे अंदर ठेलने लगा। जब तीन चौथाई लण्ड अंदर चला गया तब मैंने माँ की चूचियां कस के पकड़ ली और उन्हें दबाते हुए बहुत तेजी से अपना लण्ड गाण्ड के बाहर-भीतर करने लगा। कुछ ही धक्कों के बाद पूरी चिकनी गाण्ड में लण्ड जड़ तक जाने लगा। माँ और ज्यादा झुक गई और अपनी गाण्ड पीछे ठेल-ठेलकर मुझसे मस्त होकर मरवाने लगी। मैं इस पोज में काफी देर गाण्ड मारता रहा।

विजय- “मेरी राधा रानी तेरी गाण्ड अभी भी बहुत टाइट है। इसे मारने में तो किसी कुंवारी लड़की को चोदने जैसा मजा आता है। चल अब पलंग पर चल और अपने छोटे बेटे के ऊपर चढ़ और उसका लण्ड चूत में ले। साथ ही में तेरी गाण्ड भी मारूंगा...”

मेरी बात खतम होते ही हम तीनों किंग साइज पलंग पर आ गये। अजय चिटत्त लेट गया और माँ ने घुटनों के बल उसकी जांघों के दोनों ओर आसन जमा लिया। मैंने नीचे झुक के अजय के लण्ड का सुपाड़ा माँ की चूत के छेद से सटा दिया और माँ धीरे-धीरे उसपर बैठकर अपने शरीर का बोझ लण्ड पर डालने लगी। माँ की रस छोड़ती चूत में अजय का लण्ड धीरे-धीरे समा रहा था। माँ की हौदे सी गाण्ड पीछे उभरी हुई थी और मैं माँ पर पीछे से चढ़ गया। मैंने गाण्ड के खुले छेद से अपना लौड़ा भिड़ाया और एक ही झटके में आधा लण्ड उसमें पेल दिया।

इस झटके से अजय का पूरा तना हुआ लण्ड फच्छ से माँ की चूत में पूरा समा गया। माँ छोटे बेटे का पूरा लण्ड अपनी चूत में समाए उससे चिपकी रही और इधर मैं ताबड़तोड़ उसकी गाण्ड में करारे शाट मारने लगा। मेरा लण्ड वापस गाण्ड में जड़ तक जाने लग गया था।

राधा- “हाँ... कस-कस के मार मेरी गाण्ड। देखो अब मैं अपने इस छोटे बेटे को कैसे चोदती हैं। इसका पूरा लण्ड मैंने अपनी चूत में पिलवा लिया है। इसका लौड़ा भी तेरे वाले से किसी भी मायने में कम नहीं है। अरे मैं तो दोदो ऐसे मस्त लण्ड पाकर निहाल हो गई। तुम लोगों के लिए मेरे सब छेद गाण्ड, चूत और मुँह हरदम खुले हैं। जब भी तुम्हारे लण्ड खड़े हों मेरे किसी भी छेद में दे दिया करो...”

 


यह कहते-कहते माँ हुमच-हमच कर अजय को चोदने लगी और फलस्वरूप साथ-साथ मेरे से उसकी गाण्ड भी । मरवा रही थी। माँ पीछे होते हुए जब अजय का लण्ड अपनी चूत से निकालती उस समय मेरा पूरा लण्ड उसकी गाण्ड में चला जाता और फिर एक झटके से माँ आगे होकर अजय का पूरा लण्ड वापस अपनी चूत में ले लेती।

मैं माँ की चूचियां मसल रहा था और मुन्ना माँ के रसीले होंठों का पान कर रहा था। अब मैं झड़ने की बिल्कुल कगार पर था और मैंने अपना लण्ड माँ की गाण्ड से निकाल लिया और कंडोम भी निकाल दी। मेरे नीचे उतरते ही अजय ने माँ को चित कर दिया और खुद उसके ऊपर आ गया। ऊपर आ उसने एक ऐसा करारा शाट चूत में मारा की उसका लण्ड जड़ तक अंदर चला गया। इस भीषण धक्के से माँ कराह के हाय हाय करने लगी। यह एक धक्का मारकर अजय रुका नहीं और उसी प्रकार के जोरदार धक्के मार-मार माँ को कस के चोदने लगा।

अजय- “ले झेल मेरे धक्के। तेरे में बहुत गर्मी है ना, तेरी चूत में बहुत ताकत है ना, आज मैं तेरी सारी गर्मी झाड़ दूंगा, चोद-चोदकर तेरी चूत छितरा दूंगा। तू बहुत चुदसी है ना तो ले चुदा अब अपनी भैया से मारी हुई गाण्ड उछाल-उछाल के...” अजय प्रचंड तरीके से माँ को चोद रहा था।

मैंने अजय का ऐसा जोश पहले नहीं देखा। वो जिंदगी में पहली बार चूत चोद रहा था और आज उसके जोश के सबर का सारा बाँध टूट गया था और उसका जोश उफान मारते हुए माँ को चोद रहा था। माँ ने दोनों हाथ कस के अजय की पीठ पर जकड़ रखे थे और अपनी गाण्ड उछाल-उछालकर अजय के धक्कों से ताल मिला रही थी। अजय माँ के होंठ भी चूस रहा था और फचा-फछ फचा-फछ चूत चोदे जा रहा था।

तभी मैंने अपना लण्ड माँ और अजय दोनों के होंठों से लगा दिया। अजय ने मेरा सुपाड़ा मुँह में ले लिया और

माँ मेरे लण्ड की जड़ को और गोटियों को चूसने लगी। कुछ देर ऐसे लण्ड चूसने से मैं झड़ने के बिल्कुल कगार पर आ गया।

विजय- “चूस मुन्ना, भैया का लण्ड रस छोड़ने वाला है। मेरे लण्ड का रस पूरा पीकर ताकत वाला बन जा और इस रंडी माँ की चूत के परखच्चे उड़ा डाल। मेरा रस पीकर इसे दुगुने जोश से चोदना। ले मेरा रस पी। हाय... मैं

झड़ रहा हूँ। देख आज मेरा लण्ड कितना रस छोड़ रहा है...” यह कहते-कहते मैं मुन्ना के मुँह में झड़ने लगा।

मेरे लण्ड से गाढ़ा वीर्य तूल तूल करता बह रहा था। अजय के मुँह से चू चू कर मेरा वीर्य माँ के मुँह को भी पूरा लपेट रहा था। तभी अजय जीभ से माँ के गाल और होंठ पर पड़े मेरे रस को चाटने लगा। मेरे लण्ड से अभी भी रुक-रुक कर वीर्य टपक रहा था जिसे मैं कभी माँ के चेहरे पर गिर रहा था और कभी मुन्ना के चेहरे पर। उधर माँ भी अजय के चेहरे पर गिरे हुए मेरे रस को चाटने लगी। थोड़ी ही देर में मैं पूरा खलास हो गया और अजय की गाण्ड के नीचे आकर अजय का लण्ड माँ की चूत में पिस्टन की तरह जाते हुए देखने लगा। बीच-बीच में मैं माँ की चुदती चूत पर जीभ भी फिरा रहा था।

राधा- “हाय अजय, तूने तो पहली ही बार में मेरी नस-नस ढीली करके रख दी। उन्ह... मुझसे और बर्दास्त नहीं हो रहा है। चोद मुझे... खूब चोद रे... मैं भी झड़ रही हूँ। मेरी चूत से कुछ बह रहा है। हाय मेरे प्यारे देवर राजा अपनी इस मस्त भाभी को चोद। मैं तेरे भैया की लुगाई तो हूँ ही अबसे तेरी भी जोरू बन गई हूँ..” यह कहतेकहते माँ कुछ ढीली पड़ने लगी।

पर अजय बिल्कुल नहीं रुका और वो उसी प्रचंड तरीके से माँ को चोद रहा था। अब वो पूरा लण्ड चूत से निकाल कर एक ही धक्के में जड़ तक वापस पेल रहा था। माँ में उसके धक्कों को बर्दास्त करने की और ताकत नहीं । बची थी। वो अजय की पीठ को जकड़ी हुई निश्चल पड़ी थी। अजय उसे करीब 5 मिनट तक और चोदता रहा

और वो भी झड़ने लगा।

अजय- “माँ मेरा रस तेरी चूत में गिर रहा है। माँ तूने मुझे झड़ा दिया। भैया ऐसा मजा तो मुझे आज तक नहीं

आया। मैं तो लोगों को लण्ड चुसा चुसा और उनसे मुट्ठी मरवाकर आज तक अपना माल बर्बाद कर रहा था। माँ की चूत में झड़कर तो बहुत मजा आ रहा है। माँ ले अपने छोटे बेटे का रस। हाय मेरी रानी। अब मैं तेरी चूत में ही अपना रस छोडूंगा। तू तो मेरी भी बीवी हो गई। तू हम दोनों भाइयों की लुगाई है। देख इस उमर में तुझे दोदो जवान पति मिल गये हैं...”

 
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