आकाश ने डेना को साइड मे लिटाया और उसके सामने खड़े होकर लंड रस की पिचकारी मार दी...
कुछ रस डेना के मूह मे गया और बाकी उसके बूब्स और पेट पर...
डेना ने हाथ से लंड रस को चाटना सुरू कर दिया...
डेना- उम्म..सो गुड...उम्म...
फिर दोनो थोड़ा रेस्ट करने के बाद फ्रेश हुए और कपड़े पहन कर बाहर आ गये ....
पर उन्हे नही पता था कि कोई उनकी पूरी चुदाई को देख कर गया है...और उसने अपने फ़ायदे के लिए अपने मन मे 1 प्लान भी बना लिया है...
देखते है..कौन है ये और क्या प्लान किया है इसने....??????????
थोड़ी देर बाद डेना और आकाश हॉल मे कॉफी पी रहे थे...
डेना ने देखा कि आकाश किसी सोच मे डूबा हुआ है....
डेना- क्या हुआ आकाश...क्या सोच रहे हो...??
आकाश- हूंम्म..सीसी...कुछ नही आंटी..
डेना- देखो...मुझसे झूठ मत बोलो...जहा तक मैं समझ रही हूँ..तुम अपने बीच हुई घटना के बारे मे सोच रहे हो...राइट..??
आकाश(डेना को देख कर)- आपको...हाँ...वही सोच रहा हूँ...
डेना- ह्म्म..पर सोच क्या रहे हो...आइ मीन अच्छा या बुरा..??
आकाश- आंटी..वो मैं...यही सोच रहा हूँ कि मैने ग़लत किया कि......
डेना(बीच मे)- तुमने कुछ ग़लत नही किया....सब सही हुआ...
आकाश- पर आंटी...मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा....
डेना काफ़ी खेली हुई औरत थी...इसलिए वो समझ गई कि आकाश के मन मे क्या है...उसने आकाश को रिलॅक्स करने का सोच लिया....
डेना- ह्म्म..तुम ये बताओ कि तुम्हे किस बात का बुरा लग रहा है...सच बोलना...
आकाश- देखो आंटी...अंकल(डेना के पति) और मेरे पापा दोस्त जैसे है...तो आप मेरी फॅमिली मेंबर के जैसे हुई...और इस तरह आपके साथ ये सब...सही नही है...
डेना- ह्म्म..अच्छा ये बताओ कि तुमने मेरे साथ कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती की है...???
आकाश- नही तो...
डेना- मैने खुद अपनी मर्ज़ी से तुम्हारे साथ ये सब किया है..??
आकाश- ह्म्म..
डेना- तो तुम कहाँ से ग़लत हो गये...
आकाश - ओके..तो मैं सही हूँ ना..???
डेना- बिल्कुल सही...तुमने कोई ग़लती नही की...उल्टा मुझे खुशी दी है....और अब मैं इस ख़ुसी को बार-बार फील करना चाहती हूँ...
डेना की बात सुन कर आकाश का मन हल्का तो हुआ पर उसके मन मे एक सवाल और आ गया...
आकाश- आंटी...एक सवाल पुछू...
डेना- हाँ पूछो...
आकाश- मान लो आंटी...मैं आपके साथ ये सब करता रहूं और 1-2 साल बाद मैं इस सब के लिए मना कर दूं तो आपको कैसा लगेगा और आप क्या सोचेगी...
डेना- ह्म्म..बुरा लगेगा...गुस्सा भी आयगा...
आकाश- तो क्या आप मुझसे बदला लेगी...??
डेना- हहहे...नही बेटा...उसमे बदला लेने की क्या बात है...मैने खुद ये रास्ता चुना...तुमने मुझे फोर्स नही किया...ऐसे मे अगर तुम मुझे छोड़ दोगे तो इसमे गुस्सा आ सकती है...पर बदला लेना ...ये तो कोई बात ही नही ..
आकाश- फिर भी..गुस्से मे आपने ऐसा सोच लिया तो...
डेना- हो सकता है कि मैं गुस्से मे बोल दूं...पर गुस्सा शांत होने पर मैं समझ जाउन्गी कि तुम्हारी ग़लती नही है...और मैं इस बात को भूल जाउन्गी...बस...और फिर किसी दूसरे को ढूँढ लूगी.....
आकाश- ह्म्म..थॅंक्स आंटी..
डेना- ऑल्वेज़ वेलकम...पर ये क्यो पूछ रहे हो..अभी तो शुरुआत हुई है ..और हाँ बॅक साइड बाकी है ...हहहे..
आकाश(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...उसे भी देख लूँगा...
डेना- ओके..अब मैं चलती हूँ...रात को मिलुगी...ओके...
आकाश- ओके...
डेना निकल गई और आकाश सोचने लगा कि सरिता ने भी गुस्से मे उससे बोला होगा..पर अब उसे समझ आ गया होगा...चलो ठीक है...वो मुझसे गुस्सा नही होगी...और हो सकता है उसने किसी को ढूँढ भी लिया हो...
आकाश, सरिता की तरफ से बेफिकर हो गया...इस बात से अंजान कि दूर कहीं सरिता उसे फसाने के लिए उसके ही खास दोस्त का इस्तेमाल कर रही है.....
धर्मेश- ह्म्म..ये हो सकता है...पर फिर वही सवाल...आकाश कहाँ है...वो यहाँ आयगा ऐसे...
सरिता- आयगा...जब उसके पापा बुलाएगे तो ज़रूर आयगा...
धर्मेश- पर अंकल क्यो बुलाने लगे....??
सरिता- बोला ना ..2 दिन दो...मैं इंतज़ाम कर दूगी....ओके
धर्मेश- ओके...
सरिता- अब मैं चलती हूँ बाइ...
धर्मेश- बाइ...
इसके बाद सरिता अपने घर आ गई और आते ही अपने पति को कॉल किया और कुछ बात की....उसके पति को भी उसकी बात सुनकर खुशी हुई और उसने बोल दिया कि वो अभी बात करता है और 2 दिन बाद उनके साथ ही आयगा....
सरिता ने कॉल कट की और उसके चेहरे पर एक कमीनी मुस्कान फैल गई...जैसे उसकी जीत हो गई हो....
आख़िर सरिता ने अपने पति से क्या बात की जो इतनी खुश थी...क्या ये आकाश के बुरे वक़्त की शुरुआत थी...या फिर ये चाल सरिता पर ही भारी पड़ेगी....??????
रिचा- ओह्ह अंकल...ज़ोर से...मेरा होने वाला है....आअहह...फास्ट...फास्ट...
आज़ाद- यस...येस्स..एस्स...यह..यह..यह...
दमदार चुदाई से रिचा की चूत अपना रस बहाने लगी.....
रिचा- मैं आईईइ....ओह....आहह..आअहह...उउउन्नकककल्लीए...ऊहह...
रिचा झाड़ते ही ढीली पड़ गई पर आज़ाद उसे चोदता रहा....आज़ाद के लंड ने रिचा की चूत को फिर से गरम करना शुरू कर दिया और चूत की गर्मी से आज़ाद झड़ने के करीब आ गया......
सुबह-सुबह आज़ाद अपनी पत्नी, बेटे और दोनो बेटियों के साथ नाश्ता करने बैठा था....
आज छुट्टी का दिन था इसलिए किसी को कहीं नही जाना था...उस वजह से सब रिलॅक्स होकर गप्पे मारते हुए नाश्ता कर रहे थे.....
आज़ाद- और बच्चो...आज क्या करने का सोचा....आज तो तुम्हारा स्कूल बंद है ना...
अरविंद- पापा जी ..मैं तो अपने दोस्तो के साथ नदी पर जाने वाला हूँ....
आज़ाद- ह्म्म..पर कोई शैतानी नही...ओके...
आरती- और मैं तो आज सहेली के घर जाउन्गी...उसको मेहदी लगाना सीखना है...
आज़ाद-ह्म्म..और आकृति तुम..??
आज़ाद की बात सुनकर आकृति कुछ नही बोली...बस ना मैं सिर हिला दिया और उठ कर चली गई....
थोड़ी देर बाद आरती और अरविंद भी अपने- अपने रास्ते निकल गये.....फिर..
आज़ाद(रुक्मणी से)- क्या हुआ इसे...
रुक्मणी- आप तो जानते है कि बेचारी सारा दिन घर मे रहती है...इसलिए...
आज़ाद- जानता हूँ...वो जबसे फैल हुई तबसे उदास रहती है...उसने फिर से पढ़ाई भी नही की...मैं चाहता था कि वो आगे पढ़े इसलिए मैने गाओं मे कॉलेज बनवाया...बस शुरू होना बाकी है....अब तुम्ही बताओ मैं क्या करूँ..जिससे ये खुश हो जाए...
रुक्मणी- एक बात कहूँ....आप उसकी शादी करवा दो....
आज़ाद- क्या...हाहाहा...शादी...अभी से शादी...अरे बड़ा तो होने दो...
रुक्मणी- आपको तो वो हमेशा बच्ची ही लगेगी...आख़िर पिता है आप...
आज़ाद- मतलब...??
रुक्मणी- मतलब ये कि मेरी बेटी शादी लायक हो गई है...
आज़ाद- अच्छा...तुम कह रही हो तो...
रुक्मणी(बीच मे)- यही सही वक़्त है...आप बस अच्छा सा लड़का देखो...
आज़ाद- पर....
रुक्मणी(बीच मे...)- पर-बार कुछ नही...मैने कह दिया सो कह दिया...
आज़ाद- ठीक है रुक्मणी देवी...आपका हुकुम सिर आँखो पर...आज से ही एक अच्छा सा लड़का देखना शुरू कर देता हूँ...मेरी प्यारी बेटी के लिए...
रुक्मणी- ह्म्म..और जल्दी ढूँढना...अभी एक और बेटी भी है....और फिर मेरा लाड़ला आकाश...उसके लिए भी तो बहू देखनी है...
आज़ाद- बस..बस...आप तो बहुत तेज जा रही है....पहले बेटी के लिए लड़का देख लूँ...वैसे भी आज कल अच्छा लड़का ढूँढना बहुत मुस्किल होता है...
तभी एक आवाज़ आई....तेरी मुस्किल तेरे यार पूरी करेंगे...आख़िर दोस्त कब काम आयगे.....
आज़ाद और रूमानी ने आवाज़ सुनते ही गेट की तरफ देखा और दोनो के चेहरे पर मुश्कान फैल गई...
आज़ाद- अबे..मदन, अली..तुम लोग...वो भी भाभियों के साथ...ऐसे बिना खबर दिए...
मदन- क्यो रे...हम बिना बताए नही आ सकते क्या...
अली- तुझे बुरा लगा हो तो हम जाते है...
आज़ाद- अबे साले...बुरा लगा के बच्चे...क्या बोला...
मदन- अब अंदर बुलायगा कि नही...
आज़ाद- आइए..आइए...दोनो भाभियों का स्वागत है...
अली- और हमारा...??
आज़ाद- तुम्हारा स्वागत करूँ क्या अच्छे से....चल अब आ भी जा...
फिर मदन और अली अंदर आए और आज़ाद के गले मिल कर बैठ गये....वाहा रुक्मणी भी दोनो की बीवियों को अंदर ले आई...
रुक्मणी- आप लोग बैठिए..मैं चाइ-नाश्ता ले कर आई....
मदन- नही भाभी....पहले मेरी बात सुनिए...फिर चाइ-नाश्ता होगा...चलिए बैठिए....
रुक्मणी(बैठते हुए)- जी कहिए..
आज़ाद- हाँ मदन..क्या कह रहा था तू...
मदन- मेरे यार...एक खुश खबरी लाया हूँ...
आज़ाद- ओह हाँ....तूने कल बताया था कि खुशख़बरी है....बता ना क्या हुआ...
मदन- ऐसी खबर है कि तू खुशी से उछलने लगेगा और तेरी टेन्षन भी दूर हो जायगी...
आज़ाद ने आमंजस मे अली की तरफ देखा...कि क्या बात है. .पर अली ने कंधे उचका कर बता दिया कि...मुझे नही पता...
आज़ाद- भाई अब और परेसान मत कर...बता ना...
मदन- भाई मेरे...मैने अपनी प्यारी आकृति के लिए लड़का ढूँढ लिया है...
मदन की बात सुनकर सब खुश हो गये....आज़ाद और रुक्मणी एक-दूसरे को देख कर ख़ुसी ज़ाहिर करने लगे...
मदन- अबे चौंक मत..मुँह बंद भी कर ले...ये सच है...मैने आकृति बिटिया के लिए लड़का ढूँढ लिया है....
आज़ाद- स..सच मे...रुक्मणी...तुमने सुना...ना...
रुक्मणी- जी....मुझे तो विश्वास ही नही हो रहा कि अभी-अभी हमने बात की और अभी ...
मदन- भाभी जी....अच्छे लोगो के साथ अच्छा ही होता है....
आज़ाद- धन्यवाद मदन...तूने तो मेरी प्राब्लम ही ख़त्म कर दी...
आज़ाद- खबर तो अच्छी है..अच्छी क्या बहुत अच्छी...बस शादी का महूरत निकलवाते है...
मदन- अबे कुछ पूछ तो सही...कि कौन लड़का ..कहाँ का है...क्या करता है..डाइरेक्ट महूरत..
आज़ाद- अबे ..तूने सब पता कर लिया होगा...और तुझे अच्छा लगा तभी तू रिश्ता लाया...तो जानने के लिए क्या रह गया...
मदन- तुझे मुझ पर इतना भरोशा है...??
आज़ाद- तुझ पर नही...बल्कि तुम दोनो(मदन और अली) पर....अपने आप से भी ज़्यादा...
आज़ाद की बात सुनकर सब भाबुक से हो गये....सच मे इनकी दोस्ती थी ही इतनी अच्छी...
मदन- बस..बस...अब रुलायगा क्या...मेरी बात सुन..
आज़ाद- ह्म्म..बोल...
रुक्मणी- नही ....पहले चाइ- नाश्ता...बाकी बाते बाद मे...
आज़ाद- हाँ ..हाँ...जाओ...चाइ- नाश्ता ले आओ...
रुक्मणी चाइ-नाश्ता लाई और फिर नाश्ता होने के बाद.....
मदन- तो अब सुनो...लड़के के बारे मे....
और मदन सबको लड़के और उसकी फॅमिली के बारे मे बताने लगा...
लड़के का नाम सुभाष है...मेरे दूर का रिश्तेदार है...उसके माँ-बाप बहुत पहले एक आक्सिडेंट मे मारे गये थे...
उसके दादाजी ने उसे बड़ा किया...और हाँ...उसकी एक छोटी बहिन भी है...
उसके पास बहुत सी पुस्तैनि जायजाद है..और इसके अलावा भी वो थोक मे गारमेंट्स का बिज़्नेस करता है...और उसकी बहेन अभी स्कूल मे है...और अब वो अपनी मामी के साथ रहते है.....
मदन- तो बोलो कैसा रिश्ता है...और हाँ..ये रही लड़के की फोटो....
मदन ने सबको लड़के की फोटो दिखाई...जिसे देख कर सब खुश हुए...लड़का सबको पसंद आ गया...
आज़ाद- मदन...सच मे बहुत अच्छा रिश्ता लाया है तू...
मदन- अरे...मेरी बेटी के लिए तो अच्छा ही रिश्ता लाउन्गा ना...
अली- तो अब देर किस बात की बात आगे बढ़ाते है...
आज़ाद- ह्म्म...मैं आज ही पंडित जी को बुलाता हूँ...
मदन- ह्म्म..पर पहले आकृति को फोटो दिखाओ और उसकी राय लो..
सरिता(बीच मे)- अरे उससे पूछने की क्या ज़रूरत है...हम उसके लिए ग़लत फ़ैसला थोड़े ना लेगे...
मदन- हाँ..पर लड़की से पूछना सही होता है....समझी...
अली- सही कहा...लड़की की पसंद जानना ज़रूरी है...
आज़ाद- ह्म्म..मैं भी यही सोचता हूँ कि लड़का-लड़की एक-दूसरे को पसंद करे तभी बात आगे बढ़नी चाहिए...
( सबकी बात सुनकर सरिता चुप रह गई...और झूठी मुस्कान लिए बाते सुनने लगी..)