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चूतो का समुंदर

dil1857 wrote: हेलो दोस्तो

मेरे को पता चला है की जोनपुर भाई को RSS पर बॅन किया गया है

बिना किसी कारण से हम अडमिनिस्ट्रेसन से रिक्वेस्ट करते है की जोनपुर भाई पर से ब्लॉक हटाया जाए

dil1857
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फ्रेंड्स ये पोस्ट मुझे दुबारा पोस्ट करनी पड़ रही है

आकाश अपने लंड को हाथ मे पकड़े दूबिधा मे खड़ा था...और तभी डेना ने अपनी ब्रा निकाल दी..

डेना के बूब्स देख कर आकाश के लंड ने झटका मार दिया...

फिर डेना ने अपनी पैंटी भी निकाल दी और आकाश के सामने नंगी खड़ी हो गई....

डेना- इतने मस्त हथियार को ऐसे वेस्ट मत करो....मैं हूँ ना...

आकाश के मूह से एक शब्द नही निकल रहा था...वो बस अपना खड़ा लंड हाथ मे ले कर शान्ती से खड़ा हुआ था...

डेना आकाश के पास गई और घुटनो पर बैठ गई...

फिर उसने आकाश के हाथ से लंड निकाल के अपने हाथ मे ले लिया और बिना देर किए मूह मे भर लिया...

दयना- उउंम..सस्स्ररुउउप्प..आहह...टेस्टी है...उउंम..

डेना प्यार से आकाश का लंड चूसने लगी...

आकाश अभी भी सकते मे था कि ये क्या हो गया...पर डेना के मूह की गर्मी ने उसे झकझोर दिया...और वो भी मस्ती मे सिसकने लगा...

आकाश- उउंम..आहह...ऐसे ही...आअहह...

डेना- सस्ररुउपप...सस्रररुउउप्प्प...सस्स्ररुउपप...उउंम..उम्म..उम्म..

आकाश- ओह..यस...आहह..आहह...ज़ोर से..यस...

डेना पूरी मस्ती मे लंड चूस रही थी...कभी गले मे भर के चूस्ति तो कभी सुपाडे को ..तो कभी बॉल्स को हाथो से सहलाते हुए...

कुछ देर बाद आकाश को लगा कि वो झड़ने वाला है तो वो लंड को आगे-पीछे करने लगा..

डेना भी खेली हुई खिलाड़ी थी...तो उसने जल्दी से लंड को मूह से बाहर निकाल दिया...

डेना- आहह...ऐसे नही...रूम मे चलो...

और डेना आकाश को पकड़ कर रूम मे ले गई...

डेना आगे गान्ड मटकाती हुई जा रही थी...

जिससे आकाश का सब्र का बाँध टूटने लगा और उसने डेना को पकड़ के बेड पर कुतिया बनाया...और लंड सेट कर लिया...

डेना- आहह..आराम से डालना...

आकाश- ह्म्म..

और आकाश ने एक धक्का मारा और सुपाडा चूत के अंदर.....

डेना- ओह्ह गॉड...आराम से...ये मोटा है...

आकाश- ह्म्म्मड..

और आकाश से 3 धक्को मे लंड को चूत मे उतार दिया....

डेना- ओह माइ...आहह..चला गया..कि बाकी है...

आकाश- चला गया...

डेना- ह्म्म्मड...तो सुरू कर दो...

डेना के कहते ही आकाश ने तेज धक्के मारते हुए चुदाई सुरू कर दी....

डेना- उफ़फ्फ़...एस्स..आहह..आ...ज़ोर से...मस्त...

आकाश- यस आंटी....एस..एस्स..एसस्स..

डेना- मज़ा एयेए..गया...ओह...तेजज..और तेज..

आकाश- यह...यह..यह..यह..आहह...

आकाश तो कई दिनो से भूखा था तो वो पूरी स्पीड मे डेना की चुदाई करने लगा...

आकाश के जोरदार धक्को से डेना का सिर बेड पर झुक गया...और वो जोरो से सिसकने लगी.....

डेना- क्या लंड है...आहह...मज़ा आ गया...ज़ोर से मार...आहह...आहह..

आकाश- ये लो आंटी...और तेजज..एस्स..एस्स...

करीब 10 मिनिट की चुदाई के बाद डेना झड़ने लगी...

डेना- ओह्ह...कोँम्मिंग...एस्स...कोँम्मिंग...आहह..आहह..आहह...

आकाश भी डेना के साथ ही झड़ने लगा.....

 


आकाश- मैं भी....ओह..एस्स..यह..यीह...यीह...

डेना- ओह्ह...फिल इट...एसस्स...डीपर...ओह्ह माइ...ओह माइ...आअहह..

आकाश- यीह....ये लो फिर....यीहह...यीहह...

दमदार चुदाई के बाद आकाश ने लंड बाहर निकाला और बेड पर लेट गया....

डेना भी मस्त हो कर लेट गई...और दोनो रेस्ट करने लगे......

थोड़ी देर बाद जब दोनो नॉर्मल हुए तो आकाश उठ कर जाने लगा....पर डेना ने उसका हाथ पकड़ लिया....

आकाश- क्या हुआ आंटी ...??

डेना- कहाँ जा रहे हो...

आकाश- बाहर...अब जो होना था वो तो हो गया ना...

डेना- अभी नही....अभी तो शुरुआत हुई है....ऐसा हथियार हो तो दिन-रात मज़े करूगी...

आकाश- पर आंटी...कोई आ गया तो...

डेना- कोई नही आयगा...चलो एक बार और करते है...

आकाश- पर..आंटी...

डेना- पर-बार कुछ नही...यहाँ आओ...

डेना ने खींच कर आकाश को बेड पर लिटा दिया और उसका लंड चाटने लगी...

आकाश का भी चुदाई के लिए मन था पर वो डर रहा था कि कहीं उसे पहले जैसी आदत ना पड़ जाए...

पर जैसे ही डेना के गरम होंठ आकाश के लंड को लगे तो वो भी गरम होना सुरू हो गया...और सोचने लगा कि अब जो रहा है...होने दो...

डेना प्यार से आकाश के लंड को चाट रही थी...बॉल्स से लेकर सुपाडे तक जीभ फिराते हुए उसने आकाश का लंड खड़ा कर दिया...

थोड़ी देर चाटने के बाद डेना ने लंड का सुपाडा मूह मे भर लिया और ज़ोर से चूसने लगी...

आकाश- ओह्ह..आंटी...पूरा भर लो....आहह..

डेना ने लंड को आधा मूह मे भरा और चूसना सुरू कर दिया....और आकाश मस्ती मे आहें भरने लगा....

आकाश- कम ऑन आंटी...ज़ूर से चूसो...आप तो एक्सपर्ट हो...ओह...एस..

डेना- उउंम..उउंम..उउंम..आहह..सस्ररुउपप..सस्ररुउपप...

डेना ने चूस-चाट के आकाश का लंड रेडी कर दिया और खुद अपने पैर खोल कर आकाश के लंड पर बैठ गई...

डेना ने अपने हाथ से लंड को चूत मे सेट किया और बैठ गई...पूरा लंड चूत के अंदर....

फिर उसने गान्ड उछाल-उछाल चुदना सुरू कर दिया....

डेना- ओह..यस...क्या लौडा है ..आहह...मस्त...एस...एस्स...एसस्स..

आकाश- आप भी मस्त हो आंटी...जोर्र से...एस्स...एस्स...

डेना- यस..एस्स..फक..फक..फक...ऊहह..ओह माइ गोस्स्स..फक..फक...

आकाश- जोऱ से आंटी...यस...वाह...आपकी गान्ड भी...मस्त...जोर्र से...

आकाश हाथो से डेना की गान्ड मसल्ने लगा और डेना पूरी स्पीड मे उछलने लगी....

करीब 5-6 मिनिट की चुदाई के बाद डेना झड़ने लगी...

डेना- ओह माइ...कमिंग..एस..ओह..ओह...एस..आहह..आहह...

डेना चीखते हुए झड गई और आकाश के उपेर लेट गई...

दोनो किस करने लगे और साथ मे आकाश नीचे से धीरे-धीरे धक्के मारने लगा....

आकाश - अब आप पलट जाओ...आपकी गान्ड मेरी तरफ करके...

डेना- ह्म्म..पर क्यो...गान्ड मारनी है क्या...

आकाश- मारूगा...पर अभी नही...आप पलट जाओ बस...

डेना उठी और पलट के बैठ गई और लंड को चूत मे डाल दिया....

आकाश ने डेना को जाघो से पकड़ा और उसे अपने लंड पर उछालने लगा.....

डेना- ओह माइ...यू आर टू गुड...आहह...फक बेबी फक...ओह्ह्ह..

आकाश- यह...ये लो..ये लो..ये लो...यीहह...यीहह...

डेना- एस्स..एस्स..एस..आअहह..ओह माइ..ओह माइ...फक..फक...फास्ट बेबी फास्ट...

आकाश- यह..टेक इट..टेक इट...एस्स..एस्स..एस्स..

आकाश पूरी स्पीड से डेना को उछाल-उछाल के चोद रहा था....और डेना भी मज़े से चुदवा रही थी...

करीब 10 मिनिट की जोरदार चुदाई के बाद दयना फिर से झड़ने लगी...

डेना- ओह..ओह बेबी...आइ एम कोँमिंग..येस ...एस्स..एसड..आआहह..आहह

डेना के झाड़ते ही उसका चूत रस आकाश की जाघो पर आने लगा...आकाश भी झड़ने के करीब आ गया था...

आकाश- आंटी मैं भी आया...यह...यह...

डेना- यहाँ नही.. मुझे पिलाओ...कम ऑन..

 


आकाश ने डेना को साइड मे लिटाया और उसके सामने खड़े होकर लंड रस की पिचकारी मार दी...

कुछ रस डेना के मूह मे गया और बाकी उसके बूब्स और पेट पर...

डेना ने हाथ से लंड रस को चाटना सुरू कर दिया...

डेना- उम्म..सो गुड...उम्म...

फिर दोनो थोड़ा रेस्ट करने के बाद फ्रेश हुए और कपड़े पहन कर बाहर आ गये ....

पर उन्हे नही पता था कि कोई उनकी पूरी चुदाई को देख कर गया है...और उसने अपने फ़ायदे के लिए अपने मन मे 1 प्लान भी बना लिया है...

देखते है..कौन है ये और क्या प्लान किया है इसने....??????????

थोड़ी देर बाद डेना और आकाश हॉल मे कॉफी पी रहे थे...

डेना ने देखा कि आकाश किसी सोच मे डूबा हुआ है....

डेना- क्या हुआ आकाश...क्या सोच रहे हो...??

आकाश- हूंम्म..सीसी...कुछ नही आंटी..

डेना- देखो...मुझसे झूठ मत बोलो...जहा तक मैं समझ रही हूँ..तुम अपने बीच हुई घटना के बारे मे सोच रहे हो...राइट..??

आकाश(डेना को देख कर)- आपको...हाँ...वही सोच रहा हूँ...

डेना- ह्म्म..पर सोच क्या रहे हो...आइ मीन अच्छा या बुरा..??

आकाश- आंटी..वो मैं...यही सोच रहा हूँ कि मैने ग़लत किया कि......

डेना(बीच मे)- तुमने कुछ ग़लत नही किया....सब सही हुआ...

आकाश- पर आंटी...मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा....

डेना काफ़ी खेली हुई औरत थी...इसलिए वो समझ गई कि आकाश के मन मे क्या है...उसने आकाश को रिलॅक्स करने का सोच लिया....

डेना- ह्म्म..तुम ये बताओ कि तुम्हे किस बात का बुरा लग रहा है...सच बोलना...

आकाश- देखो आंटी...अंकल(डेना के पति) और मेरे पापा दोस्त जैसे है...तो आप मेरी फॅमिली मेंबर के जैसे हुई...और इस तरह आपके साथ ये सब...सही नही है...

डेना- ह्म्म..अच्छा ये बताओ कि तुमने मेरे साथ कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती की है...???

आकाश- नही तो...

डेना- मैने खुद अपनी मर्ज़ी से तुम्हारे साथ ये सब किया है..??

आकाश- ह्म्म..

डेना- तो तुम कहाँ से ग़लत हो गये...

आकाश - ओके..तो मैं सही हूँ ना..???

डेना- बिल्कुल सही...तुमने कोई ग़लती नही की...उल्टा मुझे खुशी दी है....और अब मैं इस ख़ुसी को बार-बार फील करना चाहती हूँ...

डेना की बात सुन कर आकाश का मन हल्का तो हुआ पर उसके मन मे एक सवाल और आ गया...

आकाश- आंटी...एक सवाल पुछू...

डेना- हाँ पूछो...

आकाश- मान लो आंटी...मैं आपके साथ ये सब करता रहूं और 1-2 साल बाद मैं इस सब के लिए मना कर दूं तो आपको कैसा लगेगा और आप क्या सोचेगी...

डेना- ह्म्म..बुरा लगेगा...गुस्सा भी आयगा...

आकाश- तो क्या आप मुझसे बदला लेगी...??

डेना- हहहे...नही बेटा...उसमे बदला लेने की क्या बात है...मैने खुद ये रास्ता चुना...तुमने मुझे फोर्स नही किया...ऐसे मे अगर तुम मुझे छोड़ दोगे तो इसमे गुस्सा आ सकती है...पर बदला लेना ...ये तो कोई बात ही नही ..

आकाश- फिर भी..गुस्से मे आपने ऐसा सोच लिया तो...

डेना- हो सकता है कि मैं गुस्से मे बोल दूं...पर गुस्सा शांत होने पर मैं समझ जाउन्गी कि तुम्हारी ग़लती नही है...और मैं इस बात को भूल जाउन्गी...बस...और फिर किसी दूसरे को ढूँढ लूगी.....

आकाश- ह्म्म..थॅंक्स आंटी..

डेना- ऑल्वेज़ वेलकम...पर ये क्यो पूछ रहे हो..अभी तो शुरुआत हुई है ..और हाँ बॅक साइड बाकी है ...हहहे..

आकाश(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...उसे भी देख लूँगा...

डेना- ओके..अब मैं चलती हूँ...रात को मिलुगी...ओके...

आकाश- ओके...

डेना निकल गई और आकाश सोचने लगा कि सरिता ने भी गुस्से मे उससे बोला होगा..पर अब उसे समझ आ गया होगा...चलो ठीक है...वो मुझसे गुस्सा नही होगी...और हो सकता है उसने किसी को ढूँढ भी लिया हो...

आकाश, सरिता की तरफ से बेफिकर हो गया...इस बात से अंजान कि दूर कहीं सरिता उसे फसाने के लिए उसके ही खास दोस्त का इस्तेमाल कर रही है.....

 
वहाँ धमेश के घर पर धर्मेश अपनी मौसी और सरिता की चुदाई कर रहा था ...

उसका लंड सरिता की चूत मे था और वो सरिता को पीछे से चोद रहा था....

धमेश की मौसी झड़ने के बाद अपनी चूत खोल कर सरिता के सामने लेटी थी और सरिता उसका चूत रस चाट रही थी....

थोड़ी देर बाद सरिता और धर्मेश भी झड गये औड तीनो बेड पर लेट गये...थोड़ी देर बाद...

धर्मेश- मज़ा आ गया ..है ना...

सरिता- हाँ..अब काम की बात करे...

धर्मेश- अरे बोल तो दिया कि तुम्हारे पास आकाश को लाउन्गा वो भी बिना उसे बताए...

सरिता- हाँ वो तो हो गया...मैं तुम्हारी माँ और दीदी की बात कर रही थी...उनका क्या सोचा...??

धर्मेश - अभी तक तो कुछ नही...तुम बताओ...तुमने कुछ सोचा...

सरिता- हाँ..सोच लिया...एक काम हो सकता है...

धर्मेश- पर आकाश तो है नही...

सरिता- मुझे 2 दिन दो...मैं आकाश को बुलाने का इंतज़ाम कर दूगी और तुम अपनी दीदी और माँ को भी बुला लो...

धर्मेश- और फिर...

सरिता- फिर...तो सुनो मेरा प्लान....$$$$$$$$$$$$$$$$$$$%%....

धर्मेश- ह्म्म..ये हो सकता है...पर फिर वही सवाल...आकाश कहाँ है...वो यहाँ आयगा ऐसे...

सरिता- आयगा...जब उसके पापा बुलाएगे तो ज़रूर आयगा...

धर्मेश- पर अंकल क्यो बुलाने लगे....??

सरिता- बोला ना ..2 दिन दो...मैं इंतज़ाम कर दूगी....ओके

धर्मेश- ओके...

सरिता- अब मैं चलती हूँ बाइ...

धर्मेश- बाइ...

इसके बाद सरिता अपने घर आ गई और आते ही अपने पति को कॉल किया और कुछ बात की....उसके पति को भी उसकी बात सुनकर खुशी हुई और उसने बोल दिया कि वो अभी बात करता है और 2 दिन बाद उनके साथ ही आयगा....

सरिता ने कॉल कट की और उसके चेहरे पर एक कमीनी मुस्कान फैल गई...जैसे उसकी जीत हो गई हो....

आख़िर सरिता ने अपने पति से क्या बात की जो इतनी खुश थी...क्या ये आकाश के बुरे वक़्त की शुरुआत थी...या फिर ये चाल सरिता पर ही भारी पड़ेगी....??????

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( देखते है आज़ाद ने क्या किया आज.....)

आज़ाद नाश्ता करके अपनी फॅक्टरी मे पहुच गया और कॅबिन मे बैठे हुए उस दिन हुई बातों के बारे मे सोचने लगा कि कैसे उसे कमला मिली...

( उस दिन दामोदर के जाने के कुछ देर बाद ही कमला आ गई थी...और बातों- बातों मे कमला ने कहा...

कमला- आज़ाद जी...अब आप चाहे तो आपका फ़ायदा हो सकता है....

आज़ाद- वो कैसे....???

कमला- वो ऐसे कि आप मेरे पति को अपने **** गाओं वाले प्रॉजेक्ट मे लगा दीजिए ...जिससे उन्हे पैसा चुकाने का टाइम मिल जायगा...

आज़ाद- ह्म्म..पर मेरा फ़ायदा क्या है इसमे....???

कमला- फ़ायदा ये है..कि मेरे पति इतनी दूर काम मे बिज़ी रहेगे और मैं अपने बेडरूम मे अकेली....समझ गये ना...

आज़ाद(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..तो मैं कब आ जाउ...

कमला(मुस्कुरा कर)- आप मेरे पति को भेज दो...बस...मेरा कॉल आ जायगा...

आज़ाद- ओके...समझो हो गया...

कमला- तो मैं चलती हूँ...बाइ...

आज़ाद- इंतज़ार रहेगा आपके कॉल का...बाइ...

कमला ने मूड कर स्माइल की और निकल गई....)

आज़ाद कमला के बारे मे सोच- सोच कर अपना लंड मसले जा रहा था..

अचानक किसी ने गेट पर नॉक किया तो आज़ाद होश मे आया और फिर बाहर निकल कर फॅक्टरी का काम चेक करने लगा....

थोड़ी देर काम देखने के बाद आज़ाद अपने कॅबिन मे वापिस आया और फाइल्स देखने लगा और फिर सारे काम निपटा कर यहाँ-वहाँ घूमने लगा....

वो किसी बात से परेसान था या फिर उसे किसी बात का इंतज़ार था....

थक कर वो चेयर पर बैठ गया..और आँखे बंद करके फिर से कमला के बारे मे सोचने लगा....

अचानक उसका फ़ोन बजने लगा...और जैसे ही आज़ाद ने फ़ोन रिसीव किया तो वो खुश हो गया....

आज़ाद- ह्म्म..बड़ा इंतज़ार करवाया....अभी आता हूँ.....

और आज़ाद फॅक्टरी से निकल गया.....

आज़ाद फॅक्टरी से घर आया और रुक्मणी से अपना बॅग लगाने को कहा...आज़ाद रुक्मणी को बोल गया कि वो काम से पास के गाओं जा रहा है और कल शाम तक आयगा....

घर से निकल कर आज़ाद मेन रोड पर आ गया...और कार की पिछली शीट पर बैठा हुआ...आगे की सोचकर मन ही मन खुश होने लगा.....

करीब 2 घंटे के सफ़र के बाद आज़ाद एक गाओं मे बनी शानदार हवेली के सामने पहुच गया....

आज़ाद कार से उतरा और हवेली देख कर मुस्कुराने लगा....

आज़ाद(मन मे)- वाह...कारीगरी का शानदार नमूना है ये हवेली....कब्से नज़र थी इस पर....अब जा कर ख्वाहिश पूरी हुई है....

आज़ाद अपनी सोच मे खुश हो रहा था और तभी उसे आवाज़ आई.....

(ये आवाज़ कमला की थी)

कमला- यही खड़े मुस्कुराते रहेगे या अंदर भी चलेगे...

आज़ाद(कमला को देख कर)- क्यो नही..अंदर ही आने के लिए आए है...अभी तो बहुत कुछ देखना है...

आज़ाद ने बड़ी ही कामुकता भरी मुस्कान के साथ अपनी बात ख़त्म की और उसकी मुस्कान देख कर कमला शरमा गई...

कमला( शरमाते हुए)- आप भी...आइए ना...अंदर तो चलिए...

आज़ाद कमला के साथ अंदर हॉल मे आ गया...

कमला ने आज़ाद को चाइ- नाश्ता करवाया और फिर बैठ कर बातें करने लगी....

कमला- तो बताइए...क्या सेवा कर सकती हूँ आपकी...

आज़ाद- अब आपको ये भी बताना पड़ेगा क्या...

कमला(मुस्कुरा कर)- बताइए ना...क्या चाहिए आपको...

आज़ाद- जो भी आप प्यार से देगी...हम ले लेगे....

आज़ाद ने ये बात आहें भरते हुए बोली...जिसे देख कर कमला शरमा गई...

आज़ाद- तो बताइए...क्या देगी...

कमला- चलिए अंदर चलते है....

आज़ाद- ह्म्म..चलिए...

आज़ाद , कमला के साथ उपेर उसके बेडरूम मे आ गया....

( कमला का बेडरूम बहुत सुंदर था...रॉयल बेड...बड़ा सा सोफा...एक तरफ डाइनिंग टेबल और आत्तेच बाथरूम....)

कमला- आप बैठिए...मैं अभी आई...

ये कह कर कमला बाथरूम मे चली गई और आज़ाद सोफे पर बैठ कर रेस्ट करने लगा...

आज़ाद अपनी सोच मे डूबा हुआ था कि तभी बाथरूम का गेट खुला और आज़ाद की नज़र सीधे बाथरूम के गेट पर पड़ी....

सामने कमला एक नाइटी मे खड़ी हुई शरमा रही थी....

आज़ाद ने कमला को ऐसे देखा तो वो पागल सा हो गया...

उसने जल्दी से उठ कर कमला को बाहों मे कस लिया और उसे चूमने लगा....

कमला भी आज़ाद का पूरा साथ दे रही थी...

 


थोड़ी देर बाद आज़ाद बे कमला की नाइटी निकाल के उसके बूब्स निकाल दिए...

आज़ाद- आहह ...क्या बूब्स है तेरे...मज़ा आयगा चूसने मे...

कमला- तो चूस लो ना....ये आपके लिए ही है ..

आज़ाद- तो फिर आजा मेरी जान...

आज़ाद ने कमला के बूब्स को बारी- बारी चूसना सुरू कर दिया...

कमला- ओह्ह ...माँ....आराम से...अओउक्च्छ .....

आज़ाद- उउंण...सस्स्ररुउप्प्प्प...उउंम..उउंम्म...

कमला- ओह्ह..ओह्ह..चूस लो...आहह..आऐईयईई.....

थोड़ी देर तक जोरो से बूब्स चूसने के बाद आज़ाद ने कमला को नीचे बैठा दिया और अपना लंड उसके सामने निकाल लिया.....

कमला(लंड हाथ मे ले कर)- ओह्ह..ये तो...उम्म्म..मज़ा आयगा.....

आज़ाद- पसंद आया...अब इसे तैयार कर फिर तुझे मसलता हूँ....

कमला ने आज़ाद के लंड को चूसना सुरू कर दिया.. .

कमला- ह्म्म..सस्स्रररुउउप्प्प...सस्स्ररुउप्प्प...उउंम..उउंम...

आज़ाद- ओह्ह..आहह...चूस ले रंडी...आहह..अच्छा चूस्ति है...

कमला- उउंम..उउंम..सस्स्ररुउपप..सस्ररुउपप..सस्स्रररुउपप...उूुउउम्मह..

आज़ाद- ओह...क्या बात है...तू सच मे रंडी के जैसे चूस्ति है...तेज कर...और तेजज़्ज़्ज.....

कमला- उउंम..उउउंम..ख़्हूओंम्म..क्क्हुऊंम्म...

कमला लंड को गले तक भर कर चूसे जा रही थी....

थोड़ी देर के बाद आज़ाद का लंड तैयार हो गया तो आज़ाद ने कमला को रोका और उसे बेड पर लिटा दिया और कमला की टांगे खोल कर उसकी चूत देखने लगा....

आज़ाद- आहह...ये है मेरी मंज़िल....मुउहह...

आज़ाद ने चूत पर किस किया और फिर अपनी जीभ फिराते हुए...चूत चाटने लगा....

कमला- ओह्ह..ये क्या किया....आऐईइ...माआ.....

आज़ाद- सस्स्रररुउपप..सस्ररुउपप...सस्ररुउपप...आहह...मज़ा आया ना...

कमला- हाँ..पर आज तक मेरी चूत पर जीभ नही लगी....

आज़ाद- आज से हमेश लगेगी...आगे-आगे बहुत कुछ होगा....देखती जा...

और आज़ाद ने अपना काम फिर से सुरू कर दिया......

आज़ाद- उउंम्म..सस्ररुउपप..सस्ररुउपप...सस्ररुउपप..

कमला- आहह..माँ...मज़ा ..आहह..करी...ओह्ह्ह माआ....उउफफफ्फ़..

थोड़ी देर तक आज़ाद ने कमला की चूत चाट-चाट कर गीली कर दी और कमला लंड के लिए तड़पने लगी....

कमला- ओह्ह ...अब तड़पाना छोड़ो ...डाल भी दो...

आज़ाद- क्या डालु...

कमला- अपना बड़ा हथियार...

आआज़ाद- और डाल के क्या करूँ...

कमला- मुझे अपना बना लो ...फाड़ दो मेरी ...आहह...जल्दी...

आज़ाद- तो फिर ये ले...

आज़ाद ने चूत पर लंड सेट किया....और...

और तभी फ़ोन की घंटी बजने लगी....

फ़ोन की रिंग से आज़ाद होश मे आया और अपने आप को अपने कॅबिन मे देख कर शॉक्ड हो गया ....

आज़ाद(मन मे)- ये मैं...ये तो...हे भगवान...मैं तो अपने कॅबिन मे हूँ...पर मैं तो कमला की हवेली मे उसके बेडरूम मे....

ओह्ह...मैं ये क्या सोच रहा था...दिन मे ही सपने देखने लगा...ये क्या हो गया मुझे...इस कमला ने तो मुझे पागल कर दिया ....

तभी फ़ोन की रिंग दुबारा बजने लगी....

आज़ाद- कौन...मदन...हाँ बोल यार...

मदन- तेरे लिए एक गुड न्यूज़ है...

आज़ाद- क्या..??

मदन- अभी पूरा काम नही हुआ...काम हो जाने दे फिर बताउन्गा...

आज़ाद- ठीक है...कर ले पूरा...वैसे कब बतायगा.. ??

मदन- बस 1-2 दिन मे खुश खबरी के साथ आउगा..ओके ...

आज़ाद- ओके...

मदन- वैसे कहाँ बिज़ी था...किसे चोद रहा था...??

आज़ाद- किसी को नही रे....तू आजा फिर चोदेगे...ओके...

मदन - ओके...बाइ....

आज़ाद- चल बाइ...

फ़ोन रखने के बाद आज़ाद अपने आप से शर्मिंदा होने लगा कि कैसे वो दिन मे सपने देखने लगा...क्या हो गया उसे...

पर उसका लंड चुदाई के लिए तड़पने लगा....और आज़ाद ने राखी को आश्रम मे फ़ोन किया...

पर उसे पता चला कि राखी किसी काम से घर निकल गई...

फ़ोन रख कर आज़ाद ने कुछ सोचा और उसके चेहरे पर कमीनी मुस्कान आ गई....

आज़ाद(अपने आप से)- राखी आश्रम मे नही तो ना सही....मेरे लंड की आग तो बुझ कर ही रहेगी...

और आज़ाद फॅक्टरी से निकल गया....

आज़ाद फॅक्टरी से निकल कर सीधा राखी के घर पहुचा...उसे अपने लंड को शांत जो करना था....

पर जैसे ही वो राखी के घर पहुचा तो उसे ये सुन कर झटका लगा कि राखी अपने पति के साथ कहीं गई हुई है...

पर उसे खुशी भी हुई...क्योकि अब वो अपनी छोटी रखेल के साथ चुदाई कर सकता था...

उसकी छोटी रखेल थी रखी की बेटी रिचा...

रिचा तो आज़ाद को देख कर खुशी से उछल पड़ी और जल्दी से गेट लॉक कर के आज़ाद के गले लग गई...

रिचा- ओह अंकल...कितने दिनो बाद मेरी याद आई..हाँ..

आज़ाद- अरे मेरी जान...आज तो आ गया ना...

और आज़ाद ने रिचा को उठा लिया और रिचा ने भी अपनी टांगे आज़ाद की कमर मे और हाथ उसके गले मे डाल लिए और किस करने लगी...

रिचा- उउम्मह....क्यो नही आए इतने दिन..??

आज़ाद- क्या करूँ...तेरी माँ आने ही नही देती...हाहाहा..

रिचा- ह्म्म...माँ तो पूरी रंडी है ...खुद लंड खाती रहती है और बेटी के बारे मे नही सोचती...

आज़ाद- अरे गुस्सा छोड़...अब आ गया हूँ ना...

रिचा- ह्म्म...आहह

 
आज़ाद ने रिचा की गान्ड को ज़ोर से मसल दिया...

आज़ाद- क्यो साली..मेरे घर पर बहुत गान्ड मटका रही थी..हाँ..

रिचा- हाँ..आपको याद जो दिलाना था कि कहीं आग लगी हुई है...

आज़ाद- अगर घरवाले ना होते तो वही नंगा करके गान्ड मार लेता...

रिचा- तो आज मार लो ना...मैं तैयार हूँ...

आज़ाद- ह्म्म..वैसे तेरी माँ कहाँ है...

रिचा- आप उसे छोड़ो...आपकी छोटी रखेल है ना आपकी खातिर करने...

आज़ाद- ह्म्म..तो पहले कॉफी पीला..फिर तुझे आराम से साम तक चोदुगा...और ऐसा चोदुगा कि 2 दिन बेड से नही उठ पायगी...

रिचा- तो फाड़ दो ना...ऐसा चोदो कि 2 क्या 4 दिन बेड पर डाली रहूं..क्योकि फिर आप अपनी बड़ी रखेल के साथ बिज़ी हो जाओगे...

आज़ाद- बड़ी चुड़दकड़ हो गई...चल कॉफी बना..फिर तेरी गर्मी मिटाता हूँ...

रिचा- ह्म्म..आपने ही तो बनाया...अब आप ही झेलो....हहहे..

आज़ाद- ओके..चल कॉफी ला..

रिचा कॉफी बनाने निकल गई और आज़ाद ने कोट निकाला और रेस्ट करने लगा...

कॉफी पीने के बाद आज़ाद ने रिचा को अपनी गोद मे खीच लिया....

रिचा- आहह...बेडरूम मे चले अंकल...

आज़ाद- उउंम..नही...आज यही तेरी गान्ड मारूगा...

रिचा- ह्म्म्मन..तो मार लो ना...आहह..

आज़ाद , रिचा की गान्ड को मसलते हुए उसे किस करने लगा...और रिचा भी आज़ाद के होंठो को चूसने लगी...

आज़ाद ने पहले जी भर कर रिचा के होंठो को चूसा और फिर उसकी टी-शर्ट निकाल दी और ब्रा निकाल के उसके बूब्स मसल्ने लगा...

रिचा- आइी...आराम से अंकल...ऊहह...

आज़ाद- बहुत बड़े हो गये है...उउंम...

और आज़ाद ने बूब्स को मूह मे भर के चूसना सुरू कर दिया....

रिचा- ओह्ह्ह...आह...आपने ही बड़े कर दिए.. आअहह...और चूसिए....

आज़ाद- उउंम..उउउंम..उउंम..आअहह...अभी तो और बड़े करने है...तेरी माँ की तरह...उम्म्म्म...उउंम..

रिचा- आअहह....तो कर दो ना....बेटी को ही माँ की जगह लेनी है...ऊहह..ओह्ह..आहह..कतो मत ना...आऐईयईई...

आज़ाद पूरी मस्ती मे रिचा के बूब्स को प्यार करने लगा...कभी चूस्ता तो कभी काट ता...और कभी हाथ से मसलता....

रिचा अब गरम हो गई थी और उसकी चूत पानी छोड़ने लगी थी....

रिचा- ओह्ह..ऐसे ही...ज़ोर से...आहह..आहह..

आकाश का लंड अब बाहर आने को मचल रहा था....आज़ाद ने रिचा को गोद से उतारा और खड़ा हो गया ...और शर्ट निकाल दी...

रिचा समझ गई और उसने आज़ाद का पेंट और अंडरवर नीचे किया और उसके लंड को चाटने लगी....

रिचा- सस्स्रररुउउप्प....सस्रररुउउप्प्प...सस्स्रररुउप्प्प्प...

आज़ाद- हाँ मेरी रंडी...अब ठंडा कर इसे...आअहह...

रिचा कभी लंड पर जीभ फिरती तो कभी सुपाडे पर...और कभी लंड को अपनी जीभ पर थपथपाति.....

आज़ाद- ओह मेरी रंडी....अब चूस भी ले....भर ले मूह मे....

रिचा ने आज़ाद की बात सुनकर एक अच्छी रखेल की तरह आज़ाद का लंड मूह मे भर लिया और मूह चुदवाने लगी....

आज़ाद- आअहह...ऐसे ही...चूस मेरी जान ...जोर्र से....

रिचा- उउंम...उउंम्म..उउउंम्म..उउंम..उउंम...

आज़ाद- बिल्कुल अपनी माँ पर गई है...उसी की तरह पक्की रंडी है...ज़ोर से चूस .....

रिचा को अपनी माँ का नाम सुनते ही जोश आ गया और वो लंड को गले की गहराई तक ले जा कर चूसने लगी....

रिचा- सस्स्ररुउुऊउग़गग....सस्स्रररयउउऊउगगगगग....सस्स्रर्र्ररुउुुऊउगग़गग...उूुुउउम्म्म्मममम.....

आज़ाद- सबाश ...आअहह..ज़ोर से ...और तेजज्ज़...

रिचा- सस्स्स्रररुउउउग़गग.....सस्स्ररुउउउग़गग...उउंम..उउंम.... उउंम .... उउंम..

अब आज़ाद का लंड पूरा तैयार था...उसके रिचा को रोका और खड़ा कर के पलटा दिया....

फिर रिचा की पैंटी नीचे की और उसकी गान्ड चाटने लगा.....

रिचा- ओह्ह..अंकल...आप फिर गान्ड के पीछे पड़ गये....चूत का कुछ करो ना...

आज़ाद- सस्ररुउप्प्प...उउंम..आअहह...नही ...तेरी गान्ड ज़्यादा पसंद है...समझी....

रिचा- ह्म्म्म्म ...सब आपके लिए..आहह....जो चाहे करो...उउउंम्म..

आआज़ाद पूरी मस्ती मे रिचा की गान्ड को चाट रहा था और साथ मे उसकी चूत का दाना भी मसल रहा था...

रिचा- ओह्ह..अंकल...आअहह...क्यो तडपा रहे हो...आअहह....

आज़ाद- अस्स्रररुउउउप्प्प...सस्स्रररुउउप्प्प..सस्स्ररुउप्प्प...सस्ररुउउप्प्प्प....

रिचा- आअहह...अंकल...मेरी चूत...ओह्ह..ऊहह...माआ...

आज़ाद ने थोड़ी देर बाद रिचा को पलटा कर टेबल पर लिटा दिया और उसकी चूत चूसने लगा...

रिचा- ओह्ह...अब मज़ा आया...चूसो अंकल ..ज़ोर से....

आज़ाद- सस्स्ररुउप्प्प....सस्स्ररुउउप्प्प ....उउउंम...उउउम्म्म्म..

रिचा- आअहह...चवा जाओ....आऐईइ...ऊओह...माआ..

आज़ाद ने रिचा की चूत को चूस्ते हुए अपनी जीभ को उसकी चूत मे डाल दिया...और रिचा पूरी मस्त हो गई....

रिचा- ओह्ह..अंकल...ये...आअहह.....डाल दी...आअहह...

आज़ाद पूरी स्पीड से रिचा की चूत को जीभ से चोदने लगा और साथ मे एक उंगली उसकी गान्ड ने डाल दी....

रिचा- आऐईयईई...ओह्ह्ह..अंकल. .आहह....मज़ा आ गया...करते रहो....

थोड़ी देर बाद आज़ाद ने रिचा को छोड़ दिया और खड़ा कर के पलटा दिया...और उसकी गान्ड पर लंड सेट कर लिया....

रिचा- पहले चूत मारो ना...

आज़ाद- पहले तेरी गंद ...फिर चूत....बहुत दिखा रही थी ना गान्ड ..मटका- मटका कर...

रिचा- ठीक है तो आराम से माआआआआआआररर्र्र्र्र्र्ररर....

रिचा बोल पाती उसके पहले आज़ाद ने एक धक्का मारा और आधे से ज़्यादा लंड गान्ड के अंदर चला गया....

रिचा- उूउउइईईई...म्माआ...बता तो देतीईईई...

आज़ाद ने दूसरा धक्का मारा और पूरा लंड गान्ड मे उतार दिया....

आज़ाद- चुप कर...पहली बार नही मरवा रही...इतना मत चीख...

रिचा- आअहह...पर आपजा लंड चीख निकाल ही देता है...

आज़ाद- ह्म्म...अब मज़े कर... ते ले....

आज़ाद ने रिचा के हाथ पकड़ के खड़े - खड़े उसकी गान्ड मारना सुरू कर दिया...

रिचा- आहह..आहह. आहह..आहह. आअहह...आहह. .आहह.

आज़ाद- क्या टाइट गान्ड है साली....यह...यीहह...

रिचा- आअहह...माँ की भी ऐसी है ....आअहह..

आज़ाद- उसकी ऐसी कहा...उसकी तो खुली है.. तेरी मस्त है...कसी हुई...येस्स्स..एस्स..

रिचा- आहह..आहह...ज़ोर से अंकल...आअहह..

आज़ाद- हाँ मेरी रंडी...फाड़ देता हूँ..ये ले....ये ले...यीहह....

रिचा- आअहह ....आहह..फ़ाआद्ड...डूऊ...ऊओ..एस्स...एसड..आहह ...आहह..

आज़ाद पूरी स्पीड से रिचा की गान्ड मारता रहा...अब रिचा की चूत मे खुजली बढ़ गई थी...और वो पानी छोड़ रही थी....

रिचा- अंकल...मेरी चूत .. आहह...कुछ करो ना...उउउइइ...माआ...

आज़ाद- ह्म्म्म...तो ये ले...

और आज़ाद ने रिचा की फंड से लंड निकाला और रिचा को टेबल पर झुका कर उसकी चूत मे डाल दिया और तेज़ी से चोदने लगा.....

रिचा- आहह..आहह..ओह्ह...ज़ोर से अंकल...ज़ोर से.....

आज़ाद- हाँ मेरी रंडी....ये ले....एस्स...येस्स..एस्स...

रिचा- ओह्ह अंकल...ज़ोर से...मेरा होने वाला है....आअहह...फास्ट...फास्ट...

आज़ाद- यस...येस्स..एस्स...यह..यह..यह...

दमदार चुदाई से रिचा की चूत अपना रस बहाने लगी.....

रिचा- मैं आईईइ....ओह....आहह..आअहह...उउउन्नकककल्लीए...ऊहह...

रिचा झाड़ते ही ढीली पड़ गई पर आज़ाद उसे चोदता रहा....आज़ाद के लंड ने रिचा की चूत को फिर से गरम करना शुरू कर दिया और चूत की गर्मी से आज़ाद झड़ने के करीब आ गया......

येस..ईीस्स..ऊओह...यीस्स...ताआप्प्प..त्ताआप्प्प..एसस्स..यह..यईी...फ्फ़ूच्च..हह..फ्फक्च्छ...उउंम..उउंम..आहह...

ऐसी ही आवाज़ो के साथ आज़ाद भी झड़ने लगा...

आज़ाद- मैं आया...ले ..मुँह मे ले....

 


आज़ाद जल्दी से लंड निकाल के सोफे पर बैठ गया और रूचा ने आ कर उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया...

आज़ाद- आअहह...ये...आय्या. .ले....पी जा . ..यीहह...ईएहह.

आज़ाद रिचा के मुँह मे झड गया और रिचा आज़ाद का लंड रस पीने लगी....

फिर रिचा ने चाट- चाट कर आज़ाद का लंड सॉफ किया और उठ कर बाथरूम चली गई....

जब वो लौट कर आई तो आज़ाद के लंड को सहलाने लगी...

रिचा- मज़ा आया ना अंकल...

आज़ाद- अभी पूरा मज़ा नही आया...तेरी गान्ड मारनी है एक बार और...

रूचा- तो मार लो ना...मैं इसे तैयार करती हूँ.....

और रिचा ने फिर से आज़ाद का लंड चाटना शुरू कर दिया ...

थोड़ी देर मे ही लंड खड़ा होने लगा और रूचा ने लंड को मुँह मे भर लिया और पूरा तैयार करने मे लग गई...

जब आज़ाद का लंड खड़ा हो गया तो उसने रिचा को फर्श पर झुका दिया..जिससे उसकी गान्ड उपर आ गई...

और आज़ाद ने लंड सेट कर के एक बार मे ही गान्ड मे डाल दिया....

रिचा- आऐईयईईईई...मम्मी.....आआहह....

आज़ाद- तेरी माँ की भी ऐसे ही मारता हूँ....ये ले...

और आज़ाद ने तेज़ी से गान्ड मारना शुरू कर दिया.. .

रिचा- ओह्ह....अंकल....मेरी माँ का गुस्सा मुझ पर मत निकालो...असहह...

आज़ाद- क्यो नही....तेरी माँ होती तो तेरी गान्ड बच जाती...अब फाड़ दूँगा...यीह..यह...

रिचा- वो तो रंडी....आअहह...प्यार से मारो ना...ओह्ह..माँ...

आज़ाद- ऐसे ही मारूगा....ये ले...ये ले...

रिचा- ओह्ह्ह...एस्स..एस्स. .फाड़ दो...आअहह.. आआहह...

रिचा भी अब गरम हो कर गान्ड चुदाई का मज़ा ले रही थी.....

रिचा- ज़ोर से...येस्स...आहह. आशह...आअहह

आज़ाद जोरो से रिचा की गान्ड मारे जा रहा था जिससे रिचा का सिर फर्श से रगड़ का दर्द देने लगा...

रिचा- मेरा सिर...आअहह...

आज़ाद ने तुरंत रिचा को उठा कर सोफे पर लिटा दिया और उसकी गान्ड पर बैठ कर गान्ड मारने लगा...

रिचा- आअहह.. आहह..आहह..ज्जूओर्रर्र..ससी...आअहह ...

आज़ाद- एस्स..एस्स..एस्स...यीहह...यीहह...

रिचा ने अपना हाथ नीचे से अपनी चूत पर रखा और ज़ोर से मसल्ने लगी...

यहा आज़ाद पूरी स्पीड मे गान्ड मारने लगा .....

रिचा- ओह..अंकल...और तेजज..अशह...मैं एयेए रही...आअहह..

आज़ाद- कम ऑन...यह..यीह..

रिचा अपनी चूत मसल्ते हुए झाड़ गई और आज़ाद भी साथ मे झड़ने लगा....

रिचा- माआईंन्न..आहह..आआईयईईईई...ऊहह...मा...ईीस...एस्स...एसस्स...

आज़ाद- मैं भी आया...ये ले...यह..यीहह....

रिचा का चूत रस सोफे पर बहने लगा और आज़ाद ने अपने लंड रस से रिचा की गान्ड भर दी....

झड़ने के बाद आज़ाद साइड मे बैठ गया और दोनो रेस्ट करने लगे...

थोड़ी देर बाद दोनो फ्रेश हुए और बैठ गये....

रिचा- आज तो आप तो जल्दी झाड़ गये...

आज़ाद- हाँ मेरी छोटी रखेल...तेरी गान्ड का कमाल है...

रिचा- ह्म्म..मेरी गान्ड मेरी माँ से अच्छी हुई ना...

आज़ाद- ह्म्म..

रिचा- और चूत...

आज़ाद- तू पूरी अच्छी है...

रिचा - तो रोज क्यो नही मारते...

आज़ाद- तुझे रोज चोदुगा तो तेरे पति को क्या मिलेगा....चूत और गान्ड फटी मिलेगी...

रिचा- वो तो फट ही चुकी है ना...

आज़ाद- हाँ ...पर रोज मारने से भोसडा बन जाएगा...इसलिए कम ही चुदवा...ठीक...

रिचा- ह्म्म.. एक बात पुछू ..???

आज़ाद- हाँ मेरी छोटी रखेल...पूछ ना...

रिचा- मैं तो आपसे खुद चुदने आई थी...पर आप ये बताओ कि आपने मम्मी को कैसे फसाया था...

आज़ाद- हाहाहा...नही रे...उसने मुझे फसाया....मैने नही...

रिचा- सच मे...कैसे...??

आज़ाद- कभी बाद मे बताउन्गा....अभी टाइम नही....तू कॉफी पिला फिर मुझे जाना है...

रिचा- ह्म्म..

फिर आज़ाद कॉफी पी कर निकल गया और रिचा के मन मे सवाल उठने लगे कि उसकी मोम ने आज़ाद अंकल को कैसे फ़साया होगा...और क्यो....????

पूरे दिन के बाद सब लोग कल की प्लॅनिंग कर के अपनी-अपनी जगह सो गये.....

पर आने वाला दिन...आज़ाद की फॅमिली के लिए खास दिन होने वाला था....

ऐसा दिन जो आज़ाद के परिवार के लिए एक टर्निंग पॉइंट होने वाला था............

क्या होने वाला है कल............?????????????

 


सुबह-सुबह आज़ाद अपनी पत्नी, बेटे और दोनो बेटियों के साथ नाश्ता करने बैठा था....

आज छुट्टी का दिन था इसलिए किसी को कहीं नही जाना था...उस वजह से सब रिलॅक्स होकर गप्पे मारते हुए नाश्ता कर रहे थे.....

आज़ाद- और बच्चो...आज क्या करने का सोचा....आज तो तुम्हारा स्कूल बंद है ना...

अरविंद- पापा जी ..मैं तो अपने दोस्तो के साथ नदी पर जाने वाला हूँ....

आज़ाद- ह्म्म..पर कोई शैतानी नही...ओके...

आरती- और मैं तो आज सहेली के घर जाउन्गी...उसको मेहदी लगाना सीखना है...

आज़ाद-ह्म्म..और आकृति तुम..??

आज़ाद की बात सुनकर आकृति कुछ नही बोली...बस ना मैं सिर हिला दिया और उठ कर चली गई....

थोड़ी देर बाद आरती और अरविंद भी अपने- अपने रास्ते निकल गये.....फिर..

आज़ाद(रुक्मणी से)- क्या हुआ इसे...

रुक्मणी- आप तो जानते है कि बेचारी सारा दिन घर मे रहती है...इसलिए...

आज़ाद- जानता हूँ...वो जबसे फैल हुई तबसे उदास रहती है...उसने फिर से पढ़ाई भी नही की...मैं चाहता था कि वो आगे पढ़े इसलिए मैने गाओं मे कॉलेज बनवाया...बस शुरू होना बाकी है....अब तुम्ही बताओ मैं क्या करूँ..जिससे ये खुश हो जाए...

रुक्मणी- एक बात कहूँ....आप उसकी शादी करवा दो....

आज़ाद- क्या...हाहाहा...शादी...अभी से शादी...अरे बड़ा तो होने दो...

रुक्मणी- आपको तो वो हमेशा बच्ची ही लगेगी...आख़िर पिता है आप...

आज़ाद- मतलब...??

रुक्मणी- मतलब ये कि मेरी बेटी शादी लायक हो गई है...

आज़ाद- अच्छा...तुम कह रही हो तो...

रुक्मणी(बीच मे)- यही सही वक़्त है...आप बस अच्छा सा लड़का देखो...

आज़ाद- पर....

रुक्मणी(बीच मे...)- पर-बार कुछ नही...मैने कह दिया सो कह दिया...

आज़ाद- ठीक है रुक्मणी देवी...आपका हुकुम सिर आँखो पर...आज से ही एक अच्छा सा लड़का देखना शुरू कर देता हूँ...मेरी प्यारी बेटी के लिए...

रुक्मणी- ह्म्म..और जल्दी ढूँढना...अभी एक और बेटी भी है....और फिर मेरा लाड़ला आकाश...उसके लिए भी तो बहू देखनी है...

आज़ाद- बस..बस...आप तो बहुत तेज जा रही है....पहले बेटी के लिए लड़का देख लूँ...वैसे भी आज कल अच्छा लड़का ढूँढना बहुत मुस्किल होता है...

तभी एक आवाज़ आई....तेरी मुस्किल तेरे यार पूरी करेंगे...आख़िर दोस्त कब काम आयगे.....

आज़ाद और रूमानी ने आवाज़ सुनते ही गेट की तरफ देखा और दोनो के चेहरे पर मुश्कान फैल गई...

आज़ाद- अबे..मदन, अली..तुम लोग...वो भी भाभियों के साथ...ऐसे बिना खबर दिए...

मदन- क्यो रे...हम बिना बताए नही आ सकते क्या...

अली- तुझे बुरा लगा हो तो हम जाते है...

आज़ाद- अबे साले...बुरा लगा के बच्चे...क्या बोला...

मदन- अब अंदर बुलायगा कि नही...

आज़ाद- आइए..आइए...दोनो भाभियों का स्वागत है...

अली- और हमारा...??

आज़ाद- तुम्हारा स्वागत करूँ क्या अच्छे से....चल अब आ भी जा...

फिर मदन और अली अंदर आए और आज़ाद के गले मिल कर बैठ गये....वाहा रुक्मणी भी दोनो की बीवियों को अंदर ले आई...

रुक्मणी- आप लोग बैठिए..मैं चाइ-नाश्ता ले कर आई....

मदन- नही भाभी....पहले मेरी बात सुनिए...फिर चाइ-नाश्ता होगा...चलिए बैठिए....

रुक्मणी(बैठते हुए)- जी कहिए..

आज़ाद- हाँ मदन..क्या कह रहा था तू...

मदन- मेरे यार...एक खुश खबरी लाया हूँ...

आज़ाद- ओह हाँ....तूने कल बताया था कि खुशख़बरी है....बता ना क्या हुआ...

मदन- ऐसी खबर है कि तू खुशी से उछलने लगेगा और तेरी टेन्षन भी दूर हो जायगी...

आज़ाद ने आमंजस मे अली की तरफ देखा...कि क्या बात है. .पर अली ने कंधे उचका कर बता दिया कि...मुझे नही पता...

आज़ाद- भाई अब और परेसान मत कर...बता ना...

मदन- भाई मेरे...मैने अपनी प्यारी आकृति के लिए लड़का ढूँढ लिया है...

मदन की बात सुनकर सब खुश हो गये....आज़ाद और रुक्मणी एक-दूसरे को देख कर ख़ुसी ज़ाहिर करने लगे...

मदन- अबे चौंक मत..मुँह बंद भी कर ले...ये सच है...मैने आकृति बिटिया के लिए लड़का ढूँढ लिया है....

आज़ाद- स..सच मे...रुक्मणी...तुमने सुना...ना...

रुक्मणी- जी....मुझे तो विश्वास ही नही हो रहा कि अभी-अभी हमने बात की और अभी ...

मदन- भाभी जी....अच्छे लोगो के साथ अच्छा ही होता है....

आज़ाद- धन्यवाद मदन...तूने तो मेरी प्राब्लम ही ख़त्म कर दी...

मदन- अबे ...धन्याबाद कैसा...वो मेरी बेटी नही क्या...??

आज़ाद- बिल्कुल है...

मदन- तो फिर...मैं जो कर रहा हूँ..अपनी बेटी के लिए...तेरे लिए नही...क्यो बेटी...

मदन ने सीडीयों पर खड़ी हुई आकृति की तरफ देख कर पूछा...

आकृति सकपका गई और शरमा कर रूम मे भाग गई...

(असल मे आकृति नीचे से आ रही आवाज़े सुनकर...नीचे आ रही थी कि तभी उसने अपनी शादी की बात सुनी तो वह सीडीयों पर खड़ी हो कर पूरी बात सुनने लगी थी....)

मदन- हाहाहा....शरमा गई....तो बता आज़ाद...खबर कैसी लगी...

आज़ाद- खबर तो अच्छी है..अच्छी क्या बहुत अच्छी...बस शादी का महूरत निकलवाते है...

मदन- अबे कुछ पूछ तो सही...कि कौन लड़का ..कहाँ का है...क्या करता है..डाइरेक्ट महूरत..

आज़ाद- अबे ..तूने सब पता कर लिया होगा...और तुझे अच्छा लगा तभी तू रिश्ता लाया...तो जानने के लिए क्या रह गया...

मदन- तुझे मुझ पर इतना भरोशा है...??

आज़ाद- तुझ पर नही...बल्कि तुम दोनो(मदन और अली) पर....अपने आप से भी ज़्यादा...

आज़ाद की बात सुनकर सब भाबुक से हो गये....सच मे इनकी दोस्ती थी ही इतनी अच्छी...

मदन- बस..बस...अब रुलायगा क्या...मेरी बात सुन..

आज़ाद- ह्म्म..बोल...

रुक्मणी- नही ....पहले चाइ- नाश्ता...बाकी बाते बाद मे...

आज़ाद- हाँ ..हाँ...जाओ...चाइ- नाश्ता ले आओ...

रुक्मणी चाइ-नाश्ता लाई और फिर नाश्ता होने के बाद.....

मदन- तो अब सुनो...लड़के के बारे मे....

और मदन सबको लड़के और उसकी फॅमिली के बारे मे बताने लगा...

लड़के का नाम सुभाष है...मेरे दूर का रिश्तेदार है...उसके माँ-बाप बहुत पहले एक आक्सिडेंट मे मारे गये थे...

उसके दादाजी ने उसे बड़ा किया...और हाँ...उसकी एक छोटी बहिन भी है...

उसके पास बहुत सी पुस्तैनि जायजाद है..और इसके अलावा भी वो थोक मे गारमेंट्स का बिज़्नेस करता है...और उसकी बहेन अभी स्कूल मे है...और अब वो अपनी मामी के साथ रहते है.....

मदन- तो बोलो कैसा रिश्ता है...और हाँ..ये रही लड़के की फोटो....

मदन ने सबको लड़के की फोटो दिखाई...जिसे देख कर सब खुश हुए...लड़का सबको पसंद आ गया...

आज़ाद- मदन...सच मे बहुत अच्छा रिश्ता लाया है तू...

मदन- अरे...मेरी बेटी के लिए तो अच्छा ही रिश्ता लाउन्गा ना...

अली- तो अब देर किस बात की बात आगे बढ़ाते है...

आज़ाद- ह्म्म...मैं आज ही पंडित जी को बुलाता हूँ...

मदन- ह्म्म..पर पहले आकृति को फोटो दिखाओ और उसकी राय लो..

सरिता(बीच मे)- अरे उससे पूछने की क्या ज़रूरत है...हम उसके लिए ग़लत फ़ैसला थोड़े ना लेगे...

मदन- हाँ..पर लड़की से पूछना सही होता है....समझी...

अली- सही कहा...लड़की की पसंद जानना ज़रूरी है...

आज़ाद- ह्म्म..मैं भी यही सोचता हूँ कि लड़का-लड़की एक-दूसरे को पसंद करे तभी बात आगे बढ़नी चाहिए...

( सबकी बात सुनकर सरिता चुप रह गई...और झूठी मुस्कान लिए बाते सुनने लगी..)

 
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