• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

चूतो का समुंदर



मदन- मैने उसका इंतज़ाम भी कर लिया है...

आज़ाद- वो कैसे..??

मदन- मैने सुभाष को आकृति की फोटो दिखा दी है और उसे अपनी बेटी पसंद है....

अली- वाह...अब बस बिटिया से पूछ लो..

मदन- ह्म्म..और हाँ...वो कुछ दिन बाद यहाँ आ रहे है...तब लड़का-लड़की को एक-दूसरे से आमने-सामने भी मिलवा देगे..और सब ठीक हुआ तो आगे का काम भी कर लेगे...ओके

आज़ाद- वाह...ये सही किया...बहुत अच्छे...

मदन- तो भाभी जी ...आप आकृति को फोटो दिखा देना...और मुझे बता देना...फिर उनके आने का प्रोग्राम फिक्स करते है...

रुक्मणी- अच्छा भाई साब....आज ही बता दूगी....

आज़ाद- अरे अब बैठी क्यो हो...सबका मुँह मीठा करवाओ....बेटी के लिए रिश्ता आया है...

रुक्मणी(खुश हो कर)- अभी लाई जी...

फिर सबने मुँह मीठा किया और थोड़ी देर बाते करने के बाद अली और मदन अपने-2 घर निकल गये....

आज़ाद ने मदन को बोल दिया कि वो आज शाम तक उसे आकृति की मर्ज़ी बता देगा....

सबके जाने के बाद आज़ाद और रुक्मणी एक-दूसरे को देख कर मुस्कुराने लगे...

आज़ाद - भगवान ने तुम्हारी सुन ली रुक्मणी....

रुक्मणी- सही कहा...अच्छा रिश्ता मिल गया..अब बस आकृति को लड़का पसंद आ जाए...

आज़ाद- आ जाएगा....लड़का सच मे अच्छा है....तुम फोटो दिखाओ...और पता करो....उसके दिल की बात...

रुक्मणी- ठीक है...अभी जाती हूँ....

रुक्मणी लड़के की फोटो ले कर आकृति के रूम मे चली गई....

आकृति अपने रूम मे लेटी हुई थी...जबसे उसने अपनी शादी की बात सुनी थी...तभी से उसका दिल मचलने लगा था...

अब उसके मन मे क्या चल रहा है...ये बताना तो मुस्किल है...पर जो भी चल रहा था ..उसका असर उसके चेहरे पर सॉफ दिख रहा था...

वो अपने आप मे कुछ सोच- सोच कर मंद-मंद मुश्कुरा रही थी...जैसे अपने सपनो मे अपने राजकुमार को याद कर रही हो.....

रुक्मणी(आकृति के रूम मे आते ही)- आकृति...

आकृति जल्दी से बैठ गई और शरमाते हुए अपनी नज़रे झुका ली...

रुक्मणी आकर आकृति के बाजू मे बैठ गई और उसके सिर पर हाथ फिरते हुए बोली...

रुक्मणी- बेटी...तूने तो सब सुन लिया है ना ..अब जल्दी से मुझे अपनी मर्ज़ी भी बता दे ....ताकि मैं मदन भाई साब को जवाब दे सकूँ...

आकृति(चुप-चाप ...सिर झुकाए बैठी रही...)

रुक्मणी- ये ले...लड़के की फोटो...और बता ...वैसे हम सब को तो पसंद आया...पर तुझे पसंद आए तभी हम आगे सोचेगे...

आकृति(वैसे ही चुप बैठी रही)

रुक्मणी- ह्म्म..तो अपनी माँ से शरमा रही है ....हाँ

आकृति(नीचे देखते हुए )- माँ...वो...

रुक्मणी- कोई बात नही...मैं समझती हूँ...आख़िर माँ हूँ तेरी....ये ले ..ये फोटो रख के जा रही हूँ....देख लेना ....और जब मैं वापस आउ तो बताना...ठीक..

रुक्मणी फोटो रख कर रूम से निकल गई....और रुक्मणी के जाते ही आकृति ने जल्दी से फोटो उठाई और उसे देखते हुए लेट गई...

आकृति के मन मे क्या चल रहा था...ये तो भगवान जाने...पर इस समय उसे अकेला छोड़ देते है...फोटो के साथ....

वहाँ दूसरी तरफ...आज़ाद के घर से वापिस आने के बाद मदन के घर....

मदन रेस्ट करने लेट गया और सरिता..घर के पीछे बने स्विम्मिंग पूल के पास परेसान बैठी थी....

सरिता बिकनी पहने पूल मे थी पर उसका माइंड यही सोच रहा था कि कैसे भी कर के आकृति इस शादी के लिए मान जाए....

सरिता(मन मे)- एक बार ये शादी सेट हो जाए....फिर सारे पत्ते भी मेरे होंगे...और चाल भी मेरी होगी...और दाव पर लगेगा मल्होत्रा परिवार.....

आख़िर क्या था सरिता का प्लान...क्यो वो ये शादी हर हाल मे करवाना ही चाहती थी......????????

इधर आज़ाद के घर....

आकृति अपने बेड पर उल्टी लेटी हुई सुभाष की फोटो को निहार रही थी...और मंद-मंद मुश्कं दे रही थी...

अचानक उसके हाथ से किसी ने फोटो झटक ली और आकृति की तो जैसे जान ही निकल गई.....

आकृति एक दम से पलटी और...

आकृति- कककक....तू...छुटकी की बच्ची...मैं तुझे....ला..वापिस दे...

आरती- नही दुगी...मैं भी तो देखु...कि किस के ख्यालो मे खोई हुई है मेरी दीदी...

आकृति(बैठ कर)- सीधे से दे दे...वरना...

आरती- वरना क्या....मैं नही देती जाओ. .

आकृति बेड से उठी और आरती को पकड़ने झपटी...पर आरती फोटो ले कर रूम से बाहर भाग गई...

आकृति- रुक जा...छुटकी...मैने कहा ..रुक जा....

आरती- मैं नही रुकती...दम है तो पकड़ लो...

आकृति- हाथ मे आ...फिर बताती हूँ...छुटकी की बच्ची...

आरती चिड़ाते हुए आगे-आगे भाग रही थी और आकृति उसके पीछे-पीछे...

दोनो बहने पूरे गलियारे मे भागती रही...फिर आरती नीचे उतर आई और पीछे-पीछे आकृति भी आ गई...

आरती सीधे अपने पापा के पास पहुच गई...

आरती- पापा...बचाओ...दीदी मार रही है...

आरती चिल्लाते हुए आज़ाद के पास खड़ी हो गई....आज़ाद को देख कर आकृति रुक गई और नज़रे झुका कर खड़ी हो गई...

आरती- देखो पापा ..दीदी मुझे ये फोटो नही दिखा रही....वैसे ये है कौन...??

आज़ाद- बेटा...अपनी दीदी को परेशान नही करते...और ये फोटो ...ह्म्म्मी...तुम्हारे मदन अंकल इसका रिश्ता ले कर आए है तुम्हारी दीदी के लिए...

रुक्मणी(पीछे से आती हुई)- आरती...मैने सब बताया था ना...फिर से क्यो पूछ रही हो...

आज़ाद(आरती के कान को पकड़ कर)- अच्छा...तो सब जान कर भी अंजान बन रही है....ह्म्म..

आरती- सॉरी पापा ...सॉरी...

आज़ाद(आरती के कान के पास मुँह कर के)- ह्म्म..अब चलो..अपनी दीदी से माफी माग़ो...और उनसे पूछ कर आओ कि ये लड़का पसंद है कि नही...

आरती(आज़ाद के कान मे )- पापा...अगर पसंद है तो...

आज़ाद- तो फिर इन्हे तुम्हारा जीजाजी बना दूँगा...

आरती- ह्म्म..तो अब मैं पूछ कर ही वापिस आउगि...

आरती फोटो ले कर वहाँ से आगे आई और आकृति के सामने आ कर बोली...

आरती- अब पकडो दीदी...आ जाओ...

और आरती खिलखिलाते हुए उपेर भाग गई और आकृति भी उसके पीछे भाग गई....

आज़ाद- ये छुटकी भी ना...हाहाहा...

आकृति के रूम मे...

आरती- बताओ ना दीदी...आपको पसंद है ना...

आकृति- (चुप रही)

आरती- बोलो ना दीदी...

आकृति- अच्छा..तू बता ..तुझे पसंद है...

आरती- ह्म्म..देखने मे तो....ज़्यादा अच्छे नही...पर चलेगा...

आकृति- छुटकी की बच्ची...तू नही सुधरेगी...

आरती- ओह हो...बुराई नही सुनी जा रही है...ह्म्म

आकृति(शरमाते हुए)- छुटकी...बता ना...परेसान मत कर....

आरती- ठीक है...बताती हूँ...ह्म्म..मुझे तो पसंद है...अब आप बताओ..

आकृति ने भी हाँ मे गर्दन हिला दी और शरमा गई...

आरती जल्दी से भागती हुई आज़ाद के पास आई और बता दिया कि दीदी की हाँ है...

 


आज़ाद और रुक्मणी की खुशी का ठिकाना नही रहा...

आज़ाद ने आरती को प्यार से चूम लिया और रुक्मणी ने आकृति को गले लगा लिया...जो आरती के पीछे-पीछे आ गई थी...

तभी अरविंद भी आ गया और रुक्मणी ने उसे भी खुशख़बरी दे दी...

आकृति की हां सुनकर पूरा घर खुश था...

रुक्मणी- अब आप मदन भाई साब को फ़ोन करके बता दीजिए...और उनको लाने का भी बोल देना...

आज़ाद- हां...अब जल्दी से लड़के वालो को बुलाने को कहता हूँ...

आज़ाद ने मदन को कॉल कर के बता दिया और ये खबर सुनकर मदन खुश हो गया और उसने कह दिया कि अब जल्दी से प्रोग्राम सेट करता हूँ...

आज़ाद का पूरा घर खुशी मना रहा था कि तभी रुक्मणी की आँखो से आँसू बहने लगे...

आज़ाद- रुक्मणी...तुम्हे क्या हुआ...

रुक्मणी- कुछ नही जी...ये तो खुशी के आँसू है...आप आकाश को भी बता दीजिए...और उसे आने का भी बोल देना...

आज़ाद- ह्म्म..अभी फ़ोन करता हूँ...

आज़ाद ने आकाश को कॉल किया पर आकाश नही मिला...मोहन ने फ़ोन उठाया और बाद मे कॉल करने का बोल दिया....

आज़ाद ने अली को भी कॉल करके सब बता दिया तो अली भी बेहद खुश हो गया....

----------------------

 
यहाँ मदन के घर...

मदन- अरे सरिता...सुनती हो...कहाँ हो यार ...

सरिता- मैं यहाँ हूँ पूल पर...स्विम्मिंग करने जा रही थी...

( सरिता शहर की लड़की थी...और उसे स्विम्मिंग का बहुत शौक था ...इसीलिए मदन ने गाओं होते हुए भी सरिता की खातिर पूल बनवा दिया था...क्योकि वो सच मे सरिता को बहुत प्यार करता था...)

मदन- ओह...तो यहाँ हो...स्विम्मिंग बाद मे पहले मेरी बात सुनो...

सरिता- क्या हुआ...बड़े खुश दिख रहे हो...???

मदन- अरे खुशी की बात है...अपनी आकृति बेटी ने हां कर दी...अब सुभाष और आकृति की शादी पक्की समझो....

सरिता( खुश हो कर)- सच मे...ये तो ...सच मे खुशी वाली बात है...

और सरिता मदन के गले लग गई....सरिता बिकनी मे थी....और उसकी बॉडी की गर्मी मदन को गरम करने लगी...

मदन- ओह..मेरी जान..तुम्हे छु कर तो मूड बन गया...

सरिता- तो रोका किसने है...

मदन- रोका तो नही..पर मुझे अभी शहर जाना होगा...

सरिता- पर आप तो कल जाने वाले थे...??

मदन- हाँ...पर अब सुभाष के घर भी जाना होगा...तो अभी निकलना होगा...ताकि जल्दी से उनको ले कर आ सकूँ...

सरिता- ओह हो...तो आप जाइए...ये शादी जितनी जल्दी हो जाए..उतना ही अच्छा है...मूड का क्या है....लौट कर भी बन सकता है...वैसे भी आप कुछ ज़्यादा ही खुश है...

मदन- सही कहा सरिता..मैं आकृति को अपनी बेटी ही मानता हूँ...काश अपना भी कोई...

सरिता- आप चिंता मत करो...भगवान सबकी सुनता है...

मदन- ह्म्म..उसी के भरोसे तो हूँ...

सरिता- आप दिल छोटा मत करो...इस बार जो दवा लाई हूँ...उसका असर ज़रूर होगा...मेरी सहेली को 12 साल बाद इसी दवा से फ़ायदा हुआ ...

( यहाँ मैं आपको बता दूं कि मदन को औलाद नही है...और सरिता को डॉक्टर ने बताया है कि कमी मदन मे ही है...इसलिए सरिता ने किसी आयुर्वादिक दवा का सहारा लिया...)

मदन- सच...तब तो मैं जल्दी आउन्गा...और फिर अपने बच्चे की प्लानिंग...है ना..

सरिता(शरमा कर)- आप भी ना...जाना नही अब...

मदन- ओके तो मैं रेडी होता हूँ ...तुम चाइ बनाओ...

सरिता ने मदन को चाइ पिलाकर रवाना कर दिया और सोचने लगी....

सरिता(मन मे)- अब कोई प्राब्लम नही...ये शादी जल्द से जल्द होगी....और फिर मैं दिखाउन्गि अपना गेम....हहेहहे..

फिर कुछ देर तक सरिता अपने माँ बनने के बारे मे सोचने लगी और मन ही मन खुश होती रही...थोड़ी देर बाद...

सरिता(अपने आप से)- अब मदन निकल गये होंगे गाओं से...अब टाइम है खुशी मनाने का .....ह्म्म्मे...यही ठीक रहेगा...

सरिता ने धर्मेश को कॉल कर के घर बुला लिया और नौकर से बोल दिया कि धर्मेश को सीधा पूल पर पहुचा देना...

फिर सरिता ने वाइन की बॉटल और सिगरेट ली (जो मदन अपने लिए रखता था) और पूल पर धर्मेश का वेट करने लगी.....

---------------------------

धर्मेश अपने घर मे अपनी मौसी की गान्ड मार रहा था ...तभी सरिता का कॉल आया था...फ़ोन रख कर...

मौसी- कौन था...??

धर्मेश- वही ...सरिता रंडी...

मौसी- ह्म्म..क्या कहा उसने...

धर्मेश- घर बुला रही है...

मौसी- ह्म्म..संभाल के रहना...मुझे उस पर शक है थोड़ा...

धर्मेश- डोंट वरी...वो कुछ भी सोचे...लास्ट मे मारेगी तो उसकी ही...मैं प्लॅनिंग मे उसका बाप हूँ...ईएहह..

मौसी- आऐईयईई.....स्सााअलीई.....उसका गुस्सा ..मुझ पर क्यो...आहह...

( धर्मेश ने गुस्से मे एक ही बार मे पूरा लंड मौसी की गान्ड मे डाल दिया था...)

धर्मेश- हाहाहा...मज़ा करो मौसी...और जल्दी करो...अभी उस रंडी को भी चोदना है.....

----------------------------

वहाँ मदन घर से निकल कर आज़ाद के घर गया...अली भी वहाँ अपनी फॅमिली के साथ आ चुका था...

मदन ने अली और आज़ाद के साथ कुछ लेन-देन के बारे मे बात की और शहर निकल गया...

आज़ाद और अली ने अपनी खुशी का जश्न मनाने की लिए गाओं के सरपंच की पत्नी और बहू को चोदने का प्लान बना लिया...

आज़ाद के घर एक तरफ बड़े बैठ कर आगे की प्लॅनिंग मे बिज़ी थे...वही बच्चे अपनी मस्ती मे बिज़ी थे....

तभी आकाश का कॉल आ गया....

आज़ाद- हेलो...बेटा...

आकाश- हा पापा...कहिए...आपने कॉल किया था ..??

आज़ाद- हाँ बेटा...कहाँ था तू...??

आकाश- वो ..पापा..मैं थोड़ा बाहर घूम रहा था ..(असल मे आकाश , डेना की चुदाई कर रहा था)

आज़ाद- ह्म्म..बेटा एक खुशख़बरी है...

आकाश- क्या पापा...

आज़ाद ने फिर आकृति के रिश्ते की पूरी बात आकाश को बता दी...जिसे सुन कर आकाश भी खुश हो गया.....

आज़ाद- तो बेटा...जैसे ही उन लोगो के आने का दिन फिक्स होता है तो मैं कॉल कर दूँगा...आ जाना...

तभी आरती ने आज़ाद से फ़ोन ले लिया...

आरती- हेलो भैया...

आकाश- हाँ मेरी गुड़िया...कैसी है तू...

आरती- गुस्सा हूँ आपसे...

आकाश- क्यो बेटा...मैने क्या ग़लती कर दी.....

आरती- आपकी ग़लती ये है कि आपने जाने के बाद मुझे एक फ़ोन नही किया ...

आकाश- सॉरी बेटा...यहाँ नया महॉल है ना...तो पूरा टाइम निकल जाता है...सॉरी ...देख मैं अपने कान पकड़ता हूँ.....

आरती- ह्म्म..एक शर्त पर माफ़ करूगी...

आकाश- बोल ..क्या चाहिए...

आरती- मैं आपको कल लिस्ट बना के बताउन्गी...

आकाश- ठीक है..और सुन...बाकी सबसे भी पूछ लेना....सबकी लिस्ट बना के देना...

आरती- ओके भैया...कल बताती हूँ...लो पापा से बात करो..

आज़ाद ने फ़ोन ले लिया....

आज़ाद- ठीक है बेटा...जब कहूँ तो आ जाना...

आकाश- बिल्कुल पापा...आप कहे तो परसो ही आ जाउ...

आज़ाद- नही...मैं बताउन्गा जल्दी...जब तक तू मन लगा कर अपना काम कर..ठीक है...

आकाश - जी पापा..

फ़ोन कट होने के बाद आकाश खुद से बोला.....काम तो मैं मन लगा कर कर रहा हूँ..और तन भी....

और आकाश फिर से डेना के बेडरूम मे चला गया.....

-------------------------------------

 


वहाँ सरिता के घर.....

करीब 40 मिनट बाद धर्मेश, सरिता के सामने था....सरिता एक हाथ मे वाइन का पेग लिए और एक हाथ से सिगरेट का कस मारते हुए बोली...

सरिता- आ गया हीरो...

धर्मेश- क्या बात है...बहुत खुश दिखाई दे रही हो...???

सरिता- ह्म्म..बात तो है खुशी की...

धर्मेश- तो बताओ...??

सरिता- ऐसे नही ..पहले मुझे खुश करो...फिर बताउन्गी....

धर्मेश- ह्म्म...अभी करता हूँ ....

धर्मेश सरिता के साथ बैठ गया और सरिता ने धमेश को भी एक पेग बना दिया ...

धर्मेश(मन मे)- साली ...तू क्या सोचती है कि सब तेरी मर्ज़ी से नाचेगे....तू कितना भी प्लान कर...मैं तेरा ऐसा यूज़ करूगा कि जिसे देख तेरी गान्ड फट जायगी....हाहाहा

सरिता(मन मे)- तू सोचता ही रह जाएगा...पर मेरा प्लान नही समझ सकता...और जब तक तुझे समझ आएगा...तब तक तो मैं इतने आगे निकल जाउन्गी कि तू चाह कर भी कुछ नही कर पायगा....बेचारा...दोस्ती तो निभानी ही पड़ेगी ना...हहहे...

फिर दोनो ने एक दूसरे को स्माइल दी...

सरिता- अपने मक़सद के नाम...

धर्मेश- ह्म्म...मक़सद के नाम...

कककचीईईररर्ररर्सस्स्स्स्स्स्सस्स.......

यहाँ धमेश ने सरिता की चुदाई शुरू कर दी....

आज सरिता दिल खोल के धर्मेश से चुदवा रही थी...

सरिता आज बहुत खुश थी और उसने धर्मेश के सामने अपनी गान्ड भी खोल दी...

सरिता- लो धर्मेश...इस खुशी के मौके पर मेरी गान्ड मार लो...

धर्मेश खुश हो गया और सरिता की गान्ड मारने मे जुट गया....

वहाँ शहर मे आकाश भी खुश था कि उसकी दीदी की शादी सेट होने वाली है...

वो भी खुश हो कर डेना की गान्ड मार रहा था...

और आज भी एक शक्स आकाश और डेना की चुदाई देख कर अपना प्लान बना रहा था.....

आज़ाद भी आज बहुत खुश था...और वो भी इस खुशी को किसी को चोद कर बढ़ाना चाहता था ...

उसने रात के लिए अली के साथ प्लान बनाया लिया था ..पर उसे अभी किसी को चोदना था...

पर आज राखी गाओं मे थी नही और रिचा भी आरती के साथ बिज़ी थी...

इसलिए आज़ाद ने तय किया कि आज वो अपने खेतो के रखवाले की बीवी को चोदेगा.....उसका नाम सलोनी था...

( सलोनी 32 साल की थी...और काटीले बदन की मालकिन थी...उसकी ** साल की बेटी भी थी..फिर भी वो जवान दिखती थी...

आज़ाद ने सलोनी को 5 महीने पहले ही पटाया था और उसके साथ-साथ उसकी बेटी सविता की सील भी तोड़ चुका था...

सविता ने एक बार सलोनी और आज़ाद को चुदाई करते हुए पकड़ लिया था...तो सलोनी ने अपनी बेटी को फुसला कर आज़ाद से चुदवा दिया था...जिससे उसका राज छिपा रहे...पर आज़ाद ने सविता को सिर्फ़ 2 बार ही चोदा था....)

आज़ाद अपने फार्म पर पहुचा तो वहाँ पता चल कि सलोनी अपने भाई के साथ अपने गाओं जा रही है...

आज़ाद- ये क्या...मैं आया और तुम लोग जा रहे हो...

सलोनी- मालिक..मेरी माँ की तवियत ठीक नही तो जाना पड़ेगा ना..

आज़ाद- ओह हो...कोई नही...ये कुछ पैसे रख लो...और जाओ....

सलोनी- जी मालिक..पर आप बैठिए तो ..मैं चाइ लाती हूँ...

आज़ाद- अरे नही...अब मैं चलता हूँ...वैसे भी मैं...चलो चलता हूँ...

सलोनी- अरे मालिक...आए है तो फसल तो देखते जाइए...मेरे पति खेतो मे है और हाँ...सविता भी है...वो आपको फसल दिखा देगी...

सलोनी ने आज़ाद को देख कर स्माइल कर दी ...

आज़ाद(मुस्कुरा कर)- ह्म्म..सविता फसल दिखाएगी तो ज़रूर देखुगा...कहाँ है वो...

सलोनी- आप चाइ पीजिए...फिर मैं ले कर आती हूँ....

थोड़ी देर बाद आज़ाद ने चाइ ख़त्म की और सलोनी , सविता को ले कर आ गई...

सविता को देख कर आज़ाद ने स्माइल दे दी और सविता शरमा गई....

फिर सलोनी अपने भाई के साथ निकल गई और सविता आज़ाद को ले कर खेतो मे आ गई...

सविता- मालिक...कहाँ चले...

आज़ाद(सविता को पास खीच कर)- तू जहाँ बोले...वही चलते है...

सविता ने एक फ्रोक पहनी हुई थी...आज़ाद ने सविता की फ्रोक को उपेर किया और उसजी गान्ड पर हाथ फिराने लगा...

आज़ाद- ह्म्म..बड़ी हो गई है...हाँ..

सविता- आहह...यहाँ नही...मालिक...कोई देख लेगा....

आज़ाद- तो क्या....मैं हूँ ना...तू फ़िक्र मत कर....

सविता- किसी ने देख लिया तो...फिर सब मुझे बदनाम कर देगे...और मेरी शादी नही होगी.....

आज़ाद- तू चिंता मत कर...तुझे मैं अपनी बीवी की तरह रखूँगा...जिंदगी भर...

सविता- सच मे...पर आप तो बड़े है ना...

आज़ाद- तो क्या हुआ...मेरी बन के रहेगी तो ऐश करेगी...बोल..बनेगी मेरी रखेल..

सविता ने मासूमियत से हाँ बोल दिया...और आज़ाद मुस्कुराते हुए उसके अंगो को मसल्ने लगा...

थोड़ी देर बाद किसी की आहट हुई और आज़ाद ने सविता को छोड़ दिया....सामने से सविता का बापू आ गया...

सविता का बापू- अरे मालिक आप...क्या हुकुम है....

आज़ाद- अरे कुछ नही...बस घूमने आ गया...उसी बहाने फसल भी देख लुगा...

सविता का बापू- चलिए मालिक...

आज़ाद- अरे...तुम थके हुए लग रहे हो...जाओ आराम करो...मैं सविता के साथ जाता हूँ...

सविता का बापू- जो हुकुम मालिक...(सविता को देख कर)- जाओ बिटिया मालिक को पूरी फसल दिखा देना....और ध्यान रखना...मालिक खुश हो जाए फसल देख कर...समझी.....

सविता- ह्म्म्म..

सविता के बापू को क्या पता था कि आज़ाद तो उसकी उगाई फसल को देखने जा रहा था....

यहाँ सविता भी मुस्कुराने लगी ये सोच कर...कि उसका बापू ही उसे अंजाने मे चुदने को भेज रहा है....और साथ ही कह रहा है कि मालिक को खुश रखना....

फिर आज़ाद , सविता के साथ खेतो मे निकल गया....

सविता- देखो मालिक...उस जगह चलते है...वहाँ से चारो तरफ देख सकते है....

सविता खेतो के बीच बने उँचे छज्जे की बात कर रही थी...जो उचाई पर होता है और वहाँ से पूरे खेतों पर नज़र रखी जा सकती थी...( लाइक आ ट्री हाउस)

 
सविता उस छज्जे के पास आकर चढ़ने लगी...और आज़ाद के सामने सविता की गान्ड आ गई...

आज़ाद ने हाथ बढ़ा कर सविता की गान्ड पकड़ ली और सहलाना चालू कर दिया.....

सविता- आहह..मालिक...उपर चलिए ना...

आज़ाद- ह्म्म..चलते है...रुक तो...

आज़ाद काफ़ी देर से सविता की गान्ड दबा रहा था जिससे सविता भी गरम हो गई थी और अब उसकी चूत पानी बहाना शुरू कर चुकी थी....

सविता- आहह...मालिक..चलिए ना...

आज़ाद ने सविता की गान्ड छोड़ दी और सविता के साथ उपर चला आया...

उपर आते ही आज़ाद ने सविता को बाहों मे दबोच लिया...क्योकि अब वो भी गरम हो चुका था....

सविता- आओऊउककच्छ...अंदर चलो ना...

आज़ाद- चुप...आज यही चोदुन्गा...खुले आसमान के नीचे...

और आज़ाद ने सविता की फ्रोक को उपेर तक उठा लिया...सविता ब्रा नही पहनती थी..तो उसके कड़क बूब्स आज़ाद के सामने आ गये...

आज़ाद ने एक हाथ से सविता के बूब्स को पकड़ा और दूसरे हाथ से उसकी चूत को पैंटी के उपर से सहलाने लगा...

सविता भी गरम हो गई थी और उसने मुँह घुमा का आज़ाद के होंठो पर होंठ रख दिए...

सविता- उउंम्म..आहह...मालिक...ज़ोर से...उउउम्म्म्म...

आज़ाद- उम्म..सस्ररुउप्प्प..हा मेरी रानी...ये ले...उउंम्म....

सविता- उउंम..उउंम्म..आआहह...ऐसे ही मसलो मालिक...हम्म...

आज़ाद जोरो से सविता के बूब्स मसल रहा था और साथ मे उसकी चूत को सहलाए जा रहा था...

फिर आज़ाद ने अपना हाथ सविता की पैंटी मे डाल दिया और आज़ाद का हाथ चूत मे लगते ही सविता मचल उठी...

सविता- उउंम..मालिक...आअहह..आआहह...कुछ हो रहा है ....आऐईयईई...

आज़ाद ने फिर से सविता को किस करना शुरू कर दिया और साथ मे एक उंगली चूत की दरार ने रगड़ने लगा...

आज़ाद का दूसरा हाथ भी सविता के बूब्स मसल रहा था...

अब सविता पूरी गरम थी और आज़ाद भी चुदाई को रेडी था...

आज़ाद ने अपना हाथ सविता की पैंटी से निकाल लिया जो कि उसकी चूत के पानी से सना हुआ था...

आज़ाद ने उंगली को मुँह मे भरा और बोला...

आज़ाद- उउंम..तेरी चूत तो जायकेदार है...

सविता(शरमा कर)- ये क्यो चखा मालिक...ये गान्ड है..

आज़ाद- अरे गान्ड नही मेरी रानी...असली माल यही है..ले तू भी चख ले...

आज़ाद ने अपनी एक उंगली सविता के मुँह मे डाल दी...

सविता- उउंम..इसमे क्या खास है मालिक...

आज़ाद- ह्म्म्म..तू मेरा पानी पीना...वो तुझे मस्त लगेगा...

सविता - ह्म..

आज़ाद- अब चल मेरे लंड को चिकना कर दे...फिर तेरी चूत मारता हूँ...

सविता- यहाँ...बापू आ गया तो...???

आज़ाद- मैं हूँ ना..तू शुरू हो जा...

सविता आज़ाद की बात मानकर घुटनो पर आ गई और आज़ाद का पेंट नीचे कर के लंड को मुँह मे भर लिया..

सविता- सस्ररुउउप्प...सस्स्ररुउप्प्प...सस्स्रररुउप्प्प...सस्रररुउउप्प्प...

आज़ाद- आअहह...ऐसे ही मेरी रानी...ज़ोर से....

सविता- सस्र्र्ररुउउप्प...सस्ररुउपप...उउंम..उउंम..उउंम..उउंम्म..

आज़ाद- और तेज...आअहह...ज़ोर से....हा...आहह..

सविता पूरी स्पीड से मुँह आगे- पीछे करके आज़ाद का लंड चूस रही थी...

आज़ाद ने झुक कर सविता की फ्रोंक को निकाल दिया और फिर से लंड सविता के मुँह मे भर दिया..

सविता- उउंम..उउंम..उउंम..उउंम..आहह..उउंम्म....उउंम...

आज़ाद- हाँ...ऐसे ही...ज़ोर से...तुझे तो अपनी रखेल बनाउन्गा....ज़ोर से चूस....

सविता- उउंम..सस्ररुउप्प्प...सस्रररुउपप...उउंम.उउंम..उउंम..उउंम..

सविता सिर्फ़ पैंटी पहने हुए आज़ाद का लंड चूस रही थी....

चूत की गर्मी मे उसे ये होश भी नही रहा कि वो इतनी उचाई पर ..खुले मे है....उसका बाप भी देख सकता है...

सविता- उउंम..उउंम..उउंम..उउंम..उउंम...

आज़ाद- हाँ मेरी रंडी...गले मे भर ले...चूस...ज़ोर से....ज़ोर से....

थोड़ी देर बाद आज़ाद का लंड सविता के थूक से तर-बतर हो गया और चूत माँगने लगा....

आज़ाद ने सविता को खड़ा किया और कुतिया बनने को बोला....

सविता- मालिक..यहाँ...बापू आ गया तो...??

आज़ाद- तो क्या ..तुझे मेरी रखेल बनना है ना....

सविता- ह्म्म..(मासूमियत मे हाँ बोल दिया)

आज़ाद- तो फिर नंगी होकर कुतिया बन जा...

सविता ने आज़ाद की बात मान ली और नगी होकर कुतिया बन गई...

जैसे ही सविता ने गान्ड उपेर उठाई तो आज़ाद के मुँह मे पानी आ गया...

और आज़ाद ने सविता के दोनो तरफ पैर डाले और लंड को चूत पर सेट किया....

सविता- मालिक...जल्दी करो कही बापू आ गया तूऊऊऊऊऊओ........

सविता की बात ख़त्म होने से पहले ही आज़ाद ने धक्का मारा और आधा लंड अंदर...

सविता- आअहह....म्म्म्मा आअ......

आज़ाद ने दूसरे धक्के मे पूरा लंड डाल दिया...और धीरे-धीरे चोदने लगा.

सविता- आहह....आराम से मालिक...ऊहह....ऊओह....

आज़ाद- मज़ा आया.....

सविता- उम्म्म...ऐसे ही..मालिक...जल्दी करो...आअहह...

आज़ाद ने थोड़ी देर आराम से चोदने के बाद अपनी स्पीड बढ़ा दी....

सविता- आहह..आहह..आअहह...ज़ोर से...आहह...ज़ोर से मालिक ...

आज़ाद- अब मज़ा आया...हाँ .....ये ले...ये ले....यह...यहह...

सविता- आहह..आहह..ज्ज्ज्जोर्र..ससी...आअहह..आहह..आहह ....

आज़ाद- हाँ...ये ले...यह....तुझे तो जिंदगी भर चोदुन्गा...यह..

सविता- आहह...हाँ ..मालिक...हाँ..ज़ोर से...ज़ोर सीए...आअहह...आहह...

करीब 5-6 मिनट बाद ही सविता सिसकते हुए झड़ने लगी...

सविता- आहह...मालिक...आहह...आअहह..माँ...ओह्ह्ह...मेरा पानी...आअहह

सविता के झड़ने के बाद भी आज़ाद उसे चोदता रहा....जब तक की सविता थक कर पसर नही गई...

फिर आज़ाद ने लंड निकाला और सविता को नीचे आने को कहा....

सविता- मालिक..अंदर चलो ना...बापू आ गया तो...

आज़ाद- नही...आज तुझे खुले मे ही छोड़ुगा...चल आ जा..

फिर दोनो नीचे आ गये और आज़ाद ने सविता को गोद मे पकड़ा और लंड डाल के चोदने लगा....

 
सविता- आहह...उउंम..मालिक...आहह...अच्छा लग रहा..उउंम...

आज़ाद- ह्म..मेरी रंडी...तुझे जीवन भर मज़े कराउन्गा....

सविता- ह्म्म..ऐसे ही करो मालिक...

आज़ाद- तुझे लंड पसंद है ना...

सविता- ह्म्म्मड...बहुत...आहह. .

फिर सविता दोबारा गरम हो गई और अपनी गान्ड उछालने लगी...

सविता- आहह...मालिक...ज़ोर से...आहह..आहह..

आज़ाद- ह्म्म..ये ले मेरी रानी...ज़ोर से..यईएहह...

थोड़ी देर बाद आज़ाद ने सविता को नीचे लिटा दिया और उसकी टांगे फैला कर लंड डाल दिया ...सविता की गान्ड हवा मे लटक गई और आज़ाद जोरो से चुदाई करने लगा....

सविता- आहह ...आहह...आहह ....आहह...

आज़ाद- अब मुझे मज़ा आया...ऐसे ही फाडुन्गा तेरी...यहह...

सविता- ऊहह..माआ...हाअ...ज़ोर से...आहह...

आज़ाद- येह्ह्ह...आज तुझे लंड रस चखाउन्गा हू....

सविता- हाँ मालिक....हाँ...आहह..आहह...आहह...

थोड़ी देर की दमदार चुदाई मे सविता फिर से झड़ने लगी...

सविता- ओह्ह..माँ...माईंन..आहह...मेरा...आअहह..आअहह...

सविता के झाड़ते ही आज़ाद ने चुदाई बंद कर दी और सविता के सामने खड़ा हो गया...

सविता ने लंड को पकड़ा और हिला कर चूसने लगी...

आज़ाद- हाँ मेरी रानी..ज़ोर से...रस आने वाला है ....हाअ...

सविता- उऊँ..उउंम..उउंम्म..उउंम्म..

थोड़ी देर बाद ही आज़ाद सविता के मुँह मे झड़ने लगा और सविता लंड रस को गटाकने लगी...

जब आज़ाद झाड़ चुका तो सविता ने लंड चाट सॉफ कर दिया...

आज़ाद- कैसा लगा मेरा रस...

सविता- उम्म..अच्छा है मालिक...

आज़ाद- अब जिंदगी भर पिलाउन्गा...

सविता- ह्म..

फिर दोनो ने कपड़े पहने और सविता को उसके बाप के पास छोड़ कर आज़ाद घर की तरफ निकल आया....

रास्ते मे आज़ाद को उसका एक दोस्त मिल गया...जो पास के गाओं मे रहता था...

दोस्त- अरे आज़ाद...कैसा है यार...

आज़ाद- मस्त हूँ यार...तू बता ...यहाँ कैसे...??

दोस्त- बस एक काम से आया था...

आज़ाद- ह्म्म..हो गया काम..

दोस्त- हाँ...और तुझे देख कर कुछ याद भी आ गया...

आज़ाद- अच्छा...क्या..??

दोस्त- भाई...तेरे बेटे के लिए एक रिश्ता है...

आज़ाद- क्या...आकाश के लिए...किसका...??

दोस्त- अरे मेरे दोस्त है...तुम्हारी ही बिरादरी के...उनकी बच्ची बड़ी ही सुंदर और सुशील है...बस उसी के लिए बात करनी थी...

आज़ाद- ये तो बड़ी अच्छी बात है...पर अभी मेरी बेटी की शादी होनी है पहले...

दोस्त- इसी लिए तो मैने उन्हे आने को मना किया था...पर तू मिल गया तो बता दिया..

आज़ाद- ह्म्म..तो उनका क्या कहना है..

दोस्त- तू पहले बिटिया की शादी कर...फिर उन्हे भेज दूँगा...वो इंतजार करने को तैयार है...

आज़ाद-वाह...फिर तो ठीक है...तू ले आना...पर बेटी की शादी पर...

दोस्त- हाँ बिल्कुल...चल अब चलता हूँ...

आज़ाद- घर तो चल पहले..

दोस्त- आज नही...फिर आउन्गा..

आज़ाद- ठीक है...चल फिर..

आज़ाद का दोस्त निकल गया और आज़ाद भी खुशी-खुशी घर आ गया.....

यहाँ सरिता की चुदाई करके धर्मेश अपने घर आ गया...और सरिता की बातों के बारे मे सोचने लगा...

धर्मेश को सरिता पर डाउट तो हो रहा था ..फिर भी कही ना कही उसने सरिता का साथ देना ही ठीक समझा...

क्योकि वो जानता था कि सरिता के ज़रिए उसे अपनी मंज़िल जल्दी हासिल होगी...अगर सरिता आकाश को चुदाई के लिए मना लेगी तो आकाश , धर्मेश की मोम और दीदी को भी छोड़ लेगा..और धर्मेश का रास्ता खुल जाएगा...

धर्मेश का इरादा आकाश या उसकी फॅमिली को कोई भी नुकसान पहुचना नही था...

वो तो बस अपनी माँ और दीदी का दीवाना था....

पर दूसरी तरफ सरिता सिर्फ़ यही सोच रही थी कि आकाश ने उसका अपमान किया और इसी लिए उसने ऐसा प्लान बना रखा था जो ना सिर्फ़ आकाश को बल्कि उसकी पूरी फॅमिली को गहरी चोट देगा.....

 


जहाँ एक तरफ धर्मेश और सरिता अपने-अपने काम के लिए आकाश को यूज़ करने का सोच कर खुश थे...वही दूसरी तरफ आज़ाद भी बहुत खुश था...

आज़ाद की खुशी की वजह ये थी कि एक तरफ उसकी बड़ी बेटी को घर बैठे अच्छा रिस्ता मिल गया था और आज उसे अपने चहेते बेटे आकाश के लिए भी सामने से रिस्ता मिल गया.....

लेकिन आज़ाद ने अभी ये बात किसी को नही बताई...वो सोच रहा था कि जिस दिन उसकी बेटी की शादी पक्की होगी ...तभी वो सबको आकाश के रिस्ते की बात बातायगा...

कुछ दिन यूँ ही निकल गये और फिर वो दिन आ गया जब सुभाष अपनी मामी के साथ आकृति को देखने आने वाला था....

आज़ाद के घर मे बहुत चहल- पहल थी...सारे लोग महमानो के इंतज़ार मे थे और उनकी खातिरदारी की तैयारिया हो रही थी....

आज़ाद ने अपने नौकरों को भी खेतो और फॅक्टरी से बुला लिया था....वो सब घर को सजाने के काम मे लगे हुए थे...

मदन ने पहले ही आज़ाद को बोल दिया था कि आज लड़का-लड़की के हाँ बोलते ही सगाई की रसम पूरी कर लेगे...

आकाश भी घर आ चुका था..और पूरे परिवार के लिए गिफ्ट लाया था...

उसके गिफ्ट ने सबका दिल जीत लिया और सब बेहद खुश थे...

आरती भी अपने भैया के आने से बहुत खुश थी...

धर्मेश भी अपने दोस्त का हाथ बताने आ चुका था....साथ मे उसकी दीदी, और माँ भी आई हुई थी...

अली की फॅमिली भी आज़ाद के घर पर थी...

सब औरते मेहमानो के लिए पकवान बनाने मे बिज़ी थी...

आरती और रिचा , आकृति को सज़ा रही थी...आमिर भी आकाश और धर्मेश के साथ काम मे हाथ बता रहा था..

आज़ाद, अली के साथ बैठा हुआ मेहमानो का वेट कर रहा था और साथ मे सगाई की रसम की प्लॅनिंग भी हो रही थी...

दोपहर तक मदन , सरिता, सुभाष और सुभाष की फॅमिली आज़ाद के घर पहुच गई...

सुभाष के साथ उसकी मामी और उसकी बहेन थी....

मदन- लो आज़ाद ...ले आया तेरे मेहमानो को ....

आज़ाद- अरे..हाहाहा ....आइए- आइए...

आज़ाद ने सबका स्वागत किया...रुक्मणी भी बाहर आ गई और सुभाष की मामी का स्वागत किया...

आकाश भी सुभाष से गर्मजोशी से मिला...उसे भी सुभाष पसंद आ गया....

यहाँ एक तरफ सरिता , आकाश को देख कर उसे उकसा रही थी तो दूसरी तरफ रागिनी( धर्मेश की दीदी) भी आकाश को हसरत भरी निगाहों से देख रही थी..

पर आकाश , सरिता से दूरी बनाए हुए था...वो नही चाहता था कि उनके बीच का रिश्ता फिर से बन जाए....

फिर चाइ-नाश्ता होने के बाद आकृति को नीचे बुलाया गया....

आकृति सज-सबर कर नीचे आ रही थी और सब की निगाहे उसे देख कर खुश हो रही थी....

आकृति के साथ आरती भी थी...उसने अपने भैया की लाई हुई ड्रेस पहनी थी...एक लाइट ब्लू सूट...

आकाश की निगाहे अपनी छोटी बेहन को देख कर उस पर ठहर गई थी...

आकाश को आज अपनी छोटी बेहन अचानक से बड़ी लगने लगी थी ..

आरती के खुले हुए बाल...चमकते इयररिंग...गले मे डिज़ाइनर हार...होंठो पर लिपस्टिक...

आज पहली बार आरती इतनी सजी हुई थी...जिसे देख कर आकाश खो सा गया था ....

आकाश की आँखो के अलावा भी चार आँखे थी जो आरती की खूबसूरती मे खो गई थी....

जहाँ आकाश की आँखो मे अपनी बहेन के लिए भाई-बेहन वाला प्यार था वही बाकी दो लोग उसे प्रेमी की नज़र से देख रहे थे...

आकृति और आरती नीचे आकर सबके साथ बैठ गई...

फिर सब लड़का-लड़की की तारीफ़ कर रहे थे और सुभाष तो बस आकृति मे खोया हुआ था. ...

थोड़ी देर बाद मदन ने सुभाष से और सरिता ने आकृति से उनकी मर्ज़ी पूछ ली....

दोनो ने एक-दूसरे को पसंद कर लिया और सब इस बात से बेहद खुश थे...खास कर सरिता...

फिर आज़ाद ने पंडित जी से सगाई की बात की और तय हुआ कि कल का मुहूरत सगाई के लिए बढ़िया था...

फिर खाना-पीना हुआ और सुभाष अपनी मामी के साथ सरिता के घर चला गया....

जबकि सुभाष की बेहन धर्मेश की दीदी के साथ धर्मेश के घर चली गई ......

( धर्मेश की दीदी और सुभाष की बहेन की दोस्ती सरिता के ज़रिए हुई थी...क्योकि जिस शहर मे सुभाष रहता था वही पर रागिनी भी पढ़ाई करती थी...दोनो पड़ोसी थी और फिर सरिता की वजह से वो दोनो अच्छी फ्रेंड बन गई....और अब तो दोनो ज़्यादा ही क्लोज़ थी. .)

मेहमानों के जाने के बाद मदन,अली और आज़ाद बैठ के ड्रिंक करने लगे और दूसरी तरफ आकाश और धर्मेश भी बैठ कर गप्पे करने लगे....

आमिर भी आरती और आकृति के साथ बाते कर रहा था...

यहाँ कोई किसी के प्यार के ख्यालो मे डूबा था तो कोई जल कर खाक हुआ जा रहा था....

यहाँ आज़ाद ने अपने दोस्तो से आकाश के लिए आए रिस्ते के बारे मे बताया...जिसे सुनकर मदन और अली खुश हो गये...

पर दोनो ने आज़ाद को बोला कि आकृति की शादी तक चुप रहो फिर सबको बताना...ताकि अभी सब लोग सिर्फ़ आकृति की शादी की तैयारी मे लगे रहे...और आकाश भी पढ़ाई पर ध्यान दे पाए....

आज़ाद को भी अपने दोस्तो की बात ठीक लगी और तय हुआ की आकृति की शादी के बाद ही आकाश की शादी के बारे मे सोचेगे...

फिर सभी ने कल के फंक्षन की प्लॅनिंग की और अपने-2 घर चले गये ...

----------------------------------

 


पर सरिता अपने घर नही गई थी....आज़ाद के घर से निकल कर सरिता ने सुभाष और उसकी मामी को अपने घर तक छोड़ा और वहाँ से सीधा धर्मेश के घर पहुचि और रागिनी से बात करने लगी.....

रागिनी- अरे आंटी आप...

सरिता- क्यो ..मैं नही आ सकती क्या...

रागिनी- अरे ..मेरा मतलब ये था कि इतनी रात मे अचानक...

सरिता- हाँ...कुछ काम था..

रागिनी- ओह्ह..मैं माँ को बुलाती हूँ...

इस समय रागिनी की माँ उपेर अपनी बेहन के साथ थी....

सरिता- नही-नही...मुझे असल मे तुमसे ही काम था...बैठो...

रागिनी- जी आंटी...कहिए...

सरिता- देखो रागिनी...ये तुम्हारे फ़ायदे की ही बात है...

रागिनी(असमंजस मे)- ऐसी क्या बात है..??

सरिता- देखो रागिनी...मेरी बात मनोगी तो कल तुम्हे आकाश मिल जाएगा...

रागिनी- क्या मतलब...??

सरिता- मतलब ये कि तुम आकाश के साथ चुदाई कर पाओगी...

रागिनी(हड़बड़ा कर) - ये...आंटी ...ये आप कैसी बाते कर रही है...

सरिता- देखो ...मेरे सामने नाटक मत करो...मैं सब जानती हूँ...और मैं भी वही चाहती हूँ , जो तुम...

रागिनी समझ गई कि ज़रूर इसे किसी ने बता दिया है...अब यही अच्छा होगा कि इसकी बात सुन लूँ...

रागिनी- आंटी...आपको कैसे पता ..??

सतिता- सब बताउन्गी..पर बाद मे..अब बोलो...मेरे साथ हो...???

रागिनी- ठीक है...पर आप कैसे मदद कर पाएगी...??

सरिता- मैं कल आकाश को तुम्हारे घर भेज दूगी...बाकी काम तुम्हे करना है...

रागिनी- ठीक है..मैं कोशिश करूगी...

सरिता- गुड...और फिर सूमी भी तो है साथ मे...दोनो उसको मिलकर पटा लेना .ओके..

( सूमी, सुभाष की बेहन का नाम है..)

रागिनी- ह्म्म..

सरिता- तो अब मुझे चाइ तो पिलाओ..

रागिनी- ओह्ह..अभी लाई...

रागिनी किचेन मे चली गई और सरिता सूमी से बाते करने लगी...

सरिता- सूमी..अब तुम सुनो..कि तुम्हे क्या करना है...

फिर सरिता ने सूमी को कुछ बताया और उसे सुनकर सूमी चौंक गई...और बोली...

सूमी- आंटी..इसकी क्या ज़रूरत है...

सरिता- ज़रूरत है...तभी कह रही हूँ...

सूमी- पर हम उसे पटा लेगे और आपके लिए भी रेडी कर लेगे....

सरिता- इतना आसान नही है...और मेरा नाम सुनते ही बो मना कर देगा और तुम दोनो को भी छोड़ देगा...समझी...

सूमी- पर...

सरिता(बीच मे)- बस...जितना कहा...उतना ही करो ...

सूमी- ठीक है...पर कोई प्राब्लम तो नही होगा ना...

सरिता- नही...मैं सब संभाल लूगी...तुम बस अपना काम करो...

सूमी- ओके..

सरिता- और हाँ..अपने बीच की बात रागिनी को पता ना चले...

सूमी- ह्म्म..एक बात पुच्छू..

सरिता- हाँ..क्यो नही...

सूमी- आप असल मे करने क्या वाली है...

सरिता(सूमी के सिर पर हाथ फेरते हुए)- कुछ खास नही बेटा ....बस चूत की भूख मिटाने वाली हूँ...

सरिता की बात सुन कर सूमी हँसने लगी और फिर रागिनी भी आ गई....

सरिता चाइ पी कर अपने घर आ गई...

रात मे मदन के सो जाने के बाद सरिता रूम से बाहर आई...और सुभाष के रूम मे चली गई...

सुभाष तो सरिता के इंतज़ार मे ही था...उसने सरिता को बाहों मे भर लिया...

सुभाष- सच मे आंटी...कब्से सोच रहा था कि एक दिन आपको मसल के रख दूं...आज वो दिन आ ही गया..

सरिता(मुस्कुरा कर)- तो मसल देना...पर मेरी बात सुनने के बाद...

सुभाष- हाँ तो कहिए..

सरिता- देखो..कल तुम्हारी सगाई मे शामिल होने को तुम्हारे दोस्त आ रहे है....तो उनसे कुछ समान मगा लो...

सुभाष- हुकुम करो..सब आ जाएगा...

सरिता ने कुछ समान बताए ..जिसे सुनकर सुभाष सकपका गया...

सुभाष- आपको ये सब क्यो चाहिए...

सरिता- सुनो...$$$$$$$$$$$$$

सुभाष- पर आंटी...आप ये सब क्यो करवा रही है...

सरिता(सुभाष के होंटो पर उंगली रख कर)- सस्शह...इस बात को यही ख़त्म करो...नही तो सबको बता दूगी कि कैसे तू अपनी ही बहेन को अपनी रखेल बना कर रखता है ..फिर शादी तो छोड़...आज़ाद तुझे गोली मार देगा..

सुभाष(डरते हुए)- ठीक है...जो करना है करो...मैं चुप रहुगा..

सरिता-- ये हुई ना बात...अब जल्दी से मेरी प्यास बुझा दे...

फिर सुभाष ने सरिता की चुदाई शुरू कर दी...

सरिता दो दिन बाद चुदाई करवा कर अपने रूम मे आ गई और मन ही मन खुश होने लगी....

सरिता(मन मे)- अब बस कल सब प्लान के मुताबिक हो जाय. .फिर देखती हूँ ...इस आकाश को और उसकी फॅमिली को....शादी के दिन आज़ाद के घर खुशाली नही होगी...बल्कि दुखो का तूफान आ जाएगा....हहेहहे

 


आज आज़ाद की बेटी की सगाई होने वाली थी...

सुबह से ही आज़ाद के घर उसके दोस्त और रिस्तेदार आने लगे थे...

आज़ाद ने अपने आदमियों से कह कर कल ही पूरे गईं मे और आस-पास के इलाक़े मे अपने खास लोगो को निमंत्रण भिजवा दिया था....

अली और धर्मेश का परिवार सुबह से ही आज़ाद के घर पर आ गया था....

आकाश खाने-पीने का काम देख रहा था...अरविंद का ज़िम्मा आने वेल मेहमानो की खातिरदारी करना था...

आयेमिर को टेंट का काम दिया गया था...और धर्मेश का काम था घर के सभी कमरो मे मेहमानो के रुकने की व्यवस्था करना और साथ ही साथ घर की सजावट की ज़िम्मेदारी थी....

रिचा, आरती, रागिनी...सभी आकृति के साथ थी....उनका काम था आकृति को अच्छे से तैयार करना...

अली की बीवी, धर्मेश की माँ ....मिलकर के रुक्मणी की हेल्प कर रही थी...इनके साथ मे आज रखी भी थी...

आज़ाद ने सलोनी और सविता को भी बुलवा लिया था ...वो लोग भी अंदर के काम देख रही थी...

आज़ाद , अली के साथ आने वेल मेहमानों का स्वागत करने बाहर बैठा था....

मदन और सरिता अभी भी अपने घर पर थे...वो सुभाष की तरफ से आने वालो का इंतज़ाम देख रहे थे....

आज़ाद के घर पर सगाई की सारी तैयारी हो गई थी...बस खाना बन रहा था और पंडित जी के आने की देर थी.....

--------------------

वहाँ सरिता के घर...

सुभाष ने सरिता को इशारे से अकेले मे बुलाया...

सरिता जैसे ही सुभाष के रूम मे आई...

सरिता- क्या हुआ...??

सुभाष- आपने जो समान मँगाया था ..वो आ गया...

सरिता- वाह...कहाँ है..??

सुभाष ने एक बेग सरिता को पकड़ा दिया...

सुभाष- सब इसमे है...

सरिता- ह्म्म..लाओ ...

सरिता ने सुभाष से बेग लिया और जाने लगी...

सुभाष- आपको ये इस्तेमाल करना आता है...??

सरिता- नही तो...

सुभाष- तो मगवाया क्यो...???

सरिता- अरे बेवकूफ़...मेरे पास ऐसा इंसान है जो इसके बारे मे सब जानता है...वही सब करेगा...

सुभाष- ओह्ह..तब ठीक...पर....

सरिता- अब क्या...??

सुभाष- आप जानती है ना कि आप क्या कर रही है...??

सरिता- बिल्कुल...तुम्हे कोई शक...

सुभाष- नही...पर ध्यान रखना...कुछ भी गड़बड़ हुई तो आपके साथ मैं भी मरूगा...

सरिता- टेन्षन मत लो...तुम्हे कुछ नही होगा...मरेगा तो बस आकाश और बर्बाद होगा उसका परिवार....

सरिता रूम से निकल जाती है और सुभाष अपने माथे पर आया पसीना पोछता है...

सरिता फिर मदन को ये बोलकर निकलती है कि वो आज़ाद के घर जा रही है....पर पहुच जाती है सीधे धर्मेश के घर...

धर्मेश के घर सिर्फ़ धर्मेश की मौसी और सूमी थी...

सरिता के साथ एक लड़का भी आया हुआ था..

सरिता , धमेश की मौसी को चाइ बनाने भेजती है और सूमी को समझा देती है कि आगे क्या करना है....

चाइ पीने के बाद सरिता, धर्मेश की मौसी को किसी बहाने से उपेर वाले कमरे मे ले आती है और नीचे सूमी उस लड़के के साथ काम पूरा करने लगते है...

जब काम पूरा हो गया तो सूमी सरिता को बुलाने गई और सरिता समझ गई कि काम निपट गया...

फिर सरिता उस लड़के के साथ निकल गई और लड़के को बीच मे ड्रॉप करके आज़ाद के घर पहुच गई....

---------------------

आज़ाद के घर.....

आकृति के कमरे मे लड़किया आकृति को सजाने मे लगी हुई थी और साथ मे गॅप-शॅप भी हो रही थी...

आरती- नही दीदी..ये वाली चूड़ियाँ पहनो...ये मैने पसंद की है...

आरती अपने हाथ मे चूड़ियाँ दिखाते हुए बोली.....

रिचा- नही दीदी ये वाली...ये ज़्यादा अच्छी लगेगी....

रिचा ने भी सबको चूड़िया दिखा दी...

आरती- नही...मेरी पसंद की पहनो दीदी...

रिचा- अरे इसमे पसंद की बात नही है....मेरी वाली ज़्यादा मॅच करेगी दीदी की शादी के साथ...

आरती- मैं कुछ नही जानती...दीदी यही पहनेगी...

रागिनी- बस...अब चुप हो जाओ...आकृति खुद बताएगी....

आकृति कुछ बोलती उससे पहले ही उसकी नज़र गेट पर खड़े आकाश पर पड़ी....वो किसी काम से आया हुआ था....

आकृति- भैया...

आकृति की आवाज़ सुनते ही सब आकाश को देखने लगे...

आरती- भैया...क्या हुआ...कुछ काम था क्या...

आकाश- हाँ..वो...मुझे ड्रवैिंग कलर चाहिए...मैं गेट पर कुछ ड्रॉयिंग होनी है...

आरती- अभी देती हुँ...

आरती ने जल्दी से अपने ड्रॉयिंग कलर आकाश को दे दिए...और आकाश जाने लगा

आरती- भैया...एक मिनट...

आकाश- क्या..???

आरती- भैया यहाँ आइए...और बताइए कि कौन सी चूड़ियाँ दीदी के हाथ पर अच्छी लगेगी....ये मैने सेलेक्ट की और ये रिचा ने...

आरती का सवाल सुनकर आकाश सोच मे पड़ गया....एक तरफ उसकी प्यारी बहेन की पसंद और एक तरफ बहेन की सहेली की पसंद...

रिचा- हाँ भैया...आप ही बता दो...वही फाइनल होगी...

आकाश धर्म संकट सा महसूस कर रहा था...कि किसका साथ दे...

ना आरती को गुस्सा कर सकता है और ना उसकी सहेली को...वरना सब कहेगे कि भाई ने बेहन का साथ दिया...

आरती- भैया...जल्दी बोलिए..दीदी इंतज़ार कर रही है...

आकाश कुछ देर सोचता रहा और फिर उसने दोनो की चूड़ियों को मिक्स कर के आकृति को दे दी...दोनो का मिक्सर ज़्यादा अच्छा लग रहा था....

 
Back
Top