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StoryPublisher
Guest
कुछ देर बाद मैं रेडी हुआ और पहुँच गया अपने सीक्रेट हाउस पर....
सीक्रेट हाउस पर........
हाउस मे आते ही मैं अपने आदमी के साथ एक रूम मे पहुँचा और रूम मे खड़े बंदे को घूर्ने लगा.....
मैं- उठ जा....और खुश भी हो जा...
सामने- क्क..क्यो...
मैं- तेरी बीवी मेरे घर आ गई है...
सामने- मेरी बीवी....पर..नही...वो यहाँ नही आ सकती....
मैं- कोई नही...बहुत जल्दी तेरे सामने लाउन्गा...तब मान जायगा....तब तक तुम सोच लो....किसका साथ देना है...मेरा या तेरी बीवी का...ओके...
और उस रूम से निकल कर मैं दूसरे रूम मे पहुँचा...वहाँ बहादुर था...
मैं- तो बहादुर जी...कोई न्यूज़...
बहादुर- न्यूज़ तो यही है कि मेरा परिवार मेरे पास आ गया...थॅंक यू बेटा...
बहादुर की बीवी और बेटी को मैने यही बुलवा लिया था...क्योकि उसे उस गाँव मे ख़तरा हो सकता था...
मैं उन लोगो से बात ही कर रहा था कि पीछे से एक आवाज़ आई...
"" अब मेरे लिए क्या ऑर्डर है अंकित...""
मैं(पीछे देख कर)- अपने रूम मे चलो...वही बताता हूँ...और हाँ...आज मुझे मसाज की ज़रूरत है...कई दिन हो गये...
"" ह्म्म...मैं तैयार हूँ....""
उसके बाद मैने मस्त बॉडी मसाज करवाया और घर आ गया....और शाम तक पारूल के साथ ही रहा.....
साम को मैं पहुँच गया धूम नाइट क्लब...क्योकि कुछ दिन से शीला से मिला नही था....
जब मैं क्लब मे पहुँचा तो मुझे शीला नही दिखाई दी...उसके बाद मैने 2-3 घंटे वेट भी किया...पर शीला नही आई...
मैं(मन मे)- बड़ी मुस्किल से थोड़ा लाइन पर आई थी और अब...ये रश्मि की मौत ने तो शीला को भी छीन लिया....चलो...कल देखेगे....
मैं निराश हो कर घर आ गया...
घर आते ही सविता ने एक बॉम्ब फोड़ दिया....
सविता- अंकित...ये सुजाता तो बड़ी कमीनी औरत है...
मैं- क्या...क्या हो गया...
सविता- अरे...अभी ये बड़े सर के रूम के बाहर उनसे चिपक रही थी.....
मैं- क्या...सच मे...और डॅड...वो क्या कर रहे थे...
सविता- वो तो मना कर रहे थे...पर है तो मर्द ही ना...तो...
मैं- तो क्या...क्या डॅड ने कुछ...
सविता- नही...ऐसा कुछ नही हुआ...मैं ये बोल रही थी कि ऐसी औरत को देख कर कोई भी मर्द बहक सकता है....कहीं बड़े सर बहक गये तो...
मैं- ओह्ह्ह...डोंट वरी...डॅड नही बहकने वाले ...आप रेस्ट करो...बाकी मुझ पर छोड़ दो...
उस रात कुछ खास नही हुआ...और नेक्स्ट डे भी पूरा का पूरा...सुजाता , सविया और पारूल के साथ निकल गया....
और शाम को मैं फिर से क्लब चला गया ...इस उम्मीद मे कि आज शीला मिल जाएगी....
आज फिर मैं ड्रिंक करते हुए शीला का वेट करता रहा...पर वो नही आई....
निराश हो कर मैं जा ही रहा था की एक औरत मेरे सामने आ गई...
अओरत- एक्सक्यूज मी ....आप अंकित हो ना..
मैं- यस...कहिए...
अओरत- ये लीजिए...ये शीला ने आपको देने को कहा था...
मैं- शीला ने...पर वो है कहाँ...
औरत- वो थोड़ा बीमार है...2-3 दिन से आई नही...और आप भी नही आए...
मैं- ओह..बट मैं कल आया था...
औरत- ह्म..बट कल मैं नही आ पाई...
मैं- ओहक..थॅंक्स...
औरत- इस अड्रेस पर रात 8 के बाद ही जाना...
वो औरत मुझे एक कार्ड दे गई थी...शीला का कार्ड...
"" मारिया हिल.....बंगलोव नंबर. 12 ""
मैं- ह्म्म..शीला...आइ म कमिंग बेबी....
रात को 9 बजे के करीब मैं मारिया हिल इलाक़े मे बंग्लो नंबर. 12 के सामने खड़ा था...
मैं(नेम प्लेट देख कर)- ह्म्म..वर्मा हाउस....नाइस...
थोड़ी देर बाद मैं शीला के साथ उसके बेडरूम मे था...
उसके उपेर नही....बल्कि दूर-दूर....
मैं- तो...मुझे यहाँ क्यो बुलाया.....
शीला- तुम गायब जो हो गये थे...मुझे लगा कि कभी मिलोगे भी या नही...
मैं- ह्म..मैं आउट ऑफ टाउन गया था...बट तुम मुझे कॉल कर सकती थी ना....
शीला- तुम्हारा कार्ड खो गया था...इसलिए अपना कार्ड छोड़ दिया था....
मैं- ओके...वैसे अब कैसी हो...
शीला(मुस्कुरा कर)- कल क्लब मे होंगे इस वक़्त...हहहे....
मैं- गुड....अच्छा तुम्हारे हज़्बेंड...कहाँ है वो....
शीला(निराश हो कर)- पता नही...कही होंगे....पैसो के पीछे...मेरी परवाह थोड़े ही है उन्हे....बस पैसा चाहिए...
मैं- ओह्ह...सॉरी...
शीला- कोई नही...उसे छोड़ो...बोलो...क्या खातिर करू...1स्टी टाइम आए हो मेरे घर....
मैं- उम्म्म..तुम ठीक हो जाओ...फिर खातिर भी करवा लेगे...अभी कुछ नही...रेस्ट करो...
शीला(मुस्कुरा कर)- ह्म..वेरी स्मार्ट...वेल...ड्रिंक तो लेना ही होगा...
फिर शीला की सेरवेंट ने मुझे ड्रिंक दी और कुछ देर रुक कर मैं वापिस अपने घर निकल आया....