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चूतो का समुंदर



कुछ देर बाद मैं रेडी हुआ और पहुँच गया अपने सीक्रेट हाउस पर....

सीक्रेट हाउस पर........

हाउस मे आते ही मैं अपने आदमी के साथ एक रूम मे पहुँचा और रूम मे खड़े बंदे को घूर्ने लगा.....

मैं- उठ जा....और खुश भी हो जा...

सामने- क्क..क्यो...

मैं- तेरी बीवी मेरे घर आ गई है...

सामने- मेरी बीवी....पर..नही...वो यहाँ नही आ सकती....

मैं- कोई नही...बहुत जल्दी तेरे सामने लाउन्गा...तब मान जायगा....तब तक तुम सोच लो....किसका साथ देना है...मेरा या तेरी बीवी का...ओके...

और उस रूम से निकल कर मैं दूसरे रूम मे पहुँचा...वहाँ बहादुर था...

मैं- तो बहादुर जी...कोई न्यूज़...

बहादुर- न्यूज़ तो यही है कि मेरा परिवार मेरे पास आ गया...थॅंक यू बेटा...

बहादुर की बीवी और बेटी को मैने यही बुलवा लिया था...क्योकि उसे उस गाँव मे ख़तरा हो सकता था...

मैं उन लोगो से बात ही कर रहा था कि पीछे से एक आवाज़ आई...

"" अब मेरे लिए क्या ऑर्डर है अंकित...""

मैं(पीछे देख कर)- अपने रूम मे चलो...वही बताता हूँ...और हाँ...आज मुझे मसाज की ज़रूरत है...कई दिन हो गये...

"" ह्म्म...मैं तैयार हूँ....""

उसके बाद मैने मस्त बॉडी मसाज करवाया और घर आ गया....और शाम तक पारूल के साथ ही रहा.....

साम को मैं पहुँच गया धूम नाइट क्लब...क्योकि कुछ दिन से शीला से मिला नही था....

जब मैं क्लब मे पहुँचा तो मुझे शीला नही दिखाई दी...उसके बाद मैने 2-3 घंटे वेट भी किया...पर शीला नही आई...

मैं(मन मे)- बड़ी मुस्किल से थोड़ा लाइन पर आई थी और अब...ये रश्मि की मौत ने तो शीला को भी छीन लिया....चलो...कल देखेगे....

मैं निराश हो कर घर आ गया...

घर आते ही सविता ने एक बॉम्ब फोड़ दिया....

सविता- अंकित...ये सुजाता तो बड़ी कमीनी औरत है...

मैं- क्या...क्या हो गया...

सविता- अरे...अभी ये बड़े सर के रूम के बाहर उनसे चिपक रही थी.....

मैं- क्या...सच मे...और डॅड...वो क्या कर रहे थे...

सविता- वो तो मना कर रहे थे...पर है तो मर्द ही ना...तो...

मैं- तो क्या...क्या डॅड ने कुछ...

सविता- नही...ऐसा कुछ नही हुआ...मैं ये बोल रही थी कि ऐसी औरत को देख कर कोई भी मर्द बहक सकता है....कहीं बड़े सर बहक गये तो...

मैं- ओह्ह्ह...डोंट वरी...डॅड नही बहकने वाले ...आप रेस्ट करो...बाकी मुझ पर छोड़ दो...

उस रात कुछ खास नही हुआ...और नेक्स्ट डे भी पूरा का पूरा...सुजाता , सविया और पारूल के साथ निकल गया....

और शाम को मैं फिर से क्लब चला गया ...इस उम्मीद मे कि आज शीला मिल जाएगी....

आज फिर मैं ड्रिंक करते हुए शीला का वेट करता रहा...पर वो नही आई....

निराश हो कर मैं जा ही रहा था की एक औरत मेरे सामने आ गई...

अओरत- एक्सक्यूज मी ....आप अंकित हो ना..

मैं- यस...कहिए...

अओरत- ये लीजिए...ये शीला ने आपको देने को कहा था...

मैं- शीला ने...पर वो है कहाँ...

औरत- वो थोड़ा बीमार है...2-3 दिन से आई नही...और आप भी नही आए...

मैं- ओह..बट मैं कल आया था...

औरत- ह्म..बट कल मैं नही आ पाई...

मैं- ओहक..थॅंक्स...

औरत- इस अड्रेस पर रात 8 के बाद ही जाना...

वो औरत मुझे एक कार्ड दे गई थी...शीला का कार्ड...

"" मारिया हिल.....बंगलोव नंबर. 12 ""

मैं- ह्म्म..शीला...आइ म कमिंग बेबी....

रात को 9 बजे के करीब मैं मारिया हिल इलाक़े मे बंग्लो नंबर. 12 के सामने खड़ा था...

मैं(नेम प्लेट देख कर)- ह्म्म..वर्मा हाउस....नाइस...

थोड़ी देर बाद मैं शीला के साथ उसके बेडरूम मे था...

उसके उपेर नही....बल्कि दूर-दूर....

मैं- तो...मुझे यहाँ क्यो बुलाया.....

शीला- तुम गायब जो हो गये थे...मुझे लगा कि कभी मिलोगे भी या नही...

मैं- ह्म..मैं आउट ऑफ टाउन गया था...बट तुम मुझे कॉल कर सकती थी ना....

शीला- तुम्हारा कार्ड खो गया था...इसलिए अपना कार्ड छोड़ दिया था....

मैं- ओके...वैसे अब कैसी हो...

शीला(मुस्कुरा कर)- कल क्लब मे होंगे इस वक़्त...हहहे....

मैं- गुड....अच्छा तुम्हारे हज़्बेंड...कहाँ है वो....

शीला(निराश हो कर)- पता नही...कही होंगे....पैसो के पीछे...मेरी परवाह थोड़े ही है उन्हे....बस पैसा चाहिए...

मैं- ओह्ह...सॉरी...

शीला- कोई नही...उसे छोड़ो...बोलो...क्या खातिर करू...1स्टी टाइम आए हो मेरे घर....

मैं- उम्म्म..तुम ठीक हो जाओ...फिर खातिर भी करवा लेगे...अभी कुछ नही...रेस्ट करो...

शीला(मुस्कुरा कर)- ह्म..वेरी स्मार्ट...वेल...ड्रिंक तो लेना ही होगा...

फिर शीला की सेरवेंट ने मुझे ड्रिंक दी और कुछ देर रुक कर मैं वापिस अपने घर निकल आया....

 
रिचा के घर........

रिया- बट मोम...आख़िर मुझे भेज क्यो रही हो आप...??

( रिया , रिचा की बेटी है....)

रिचा- कुछ नही बेटू....बस मैं चाहती हूँ कि तू कुछ दिन घूम कर आए....

रिया- ओके...बट इतने अर्जेंट मे क्यो...???

रिचा- अरे बेटा...अच्छे काम मे देरी की....तुम आराम से घूमो और दुनिया देखो...यही तो मैं चाहती हूँ...

रिया- ओके मोम...बट मैं अकेली..आप भी चलिए ना....

रिचा- नही बेटू...मैं नही चल सकती...यहाँ जॉब है ना मेरी...और तू अकेली कहाँ है....तेरी फ्रेंड को भी भेज रही हूँ ना साथ मे...

रिया- ओके...वैसे वो कहाँ है...यहाँ आयगी या उसके घर जाना होगा...

रिचा- वो आ रही है...अब तुम रेडी हो जाओ..ट्रेन का टाइम होने वाला है...

रिया- ओके मोम..

रिया रेडी होने लगी...

रिचा- अब तुझे क्या बताऊ बेटू...तुम यहाँ रहोगी तो मैं खुल कर कुछ नही कर पाउन्गी....तू मेरी कमज़ोरी जो है...इसलिए तुझे दूर भेज रही हूँ...

थोड़ी देर बाद रिया अपनी फ्रेंड के साथ टॅक्सी मे बैठी और स्टेशन निकल गई....और रिचा चैन की साँस ले कर अंदर चली आई.....

"" भाई....रिचा की बेटी स्टेशन जा रही है...""

""ओके भाई....हम पीछे ही है....अभी लाते है...""

एक गुंडे टाइप के आदमी ने किसी से बात की और टॅक्सी के पीछे हो लिया...

जब टॅक्सी सुनसान रास्ते पर पहुँची तो गुणडो ने उसे रोक लिया ...

गुंडे टॅक्सी के पास पहुँचे और स्प्रे डाल कर ड्राइवर को बेहोश कर दिया....

रिया और उसकी फ्रेंड की जान ही निकल गई...दोनो डर के मारे चिल्लाने लगी कि तभी गुण्डों ने टॅक्सी का गेट खोला और उन दोनो को भी बेहोश कर फोया...और फिर दूसरी कार मे ले कर निकल गये......

अंकित के घर.........

लगभग आधी रात को मैं घर आया तो मैने सुजाता को उपेर से आते हुए देखा....

सुजाता बड़े गुस्से मे दिख रही थी...पर उसका जिस्म...बड़ा ही खुशाल लग रहा था...

उसकी पतली सी नाइटी मे मचलता बदन उसके हर कदम के साथ थिरक रहा था....और उसके बड़े-बड़े बूब्स तो जैसे डॅन्स कर रहे थे...

पर सुजाता ने मुझे सामने देखा तो उसके होश उड़ गये....चेहरे पर एक डर सा छा गया.....

सुजाता- अरे अंकित...तुम यहाँ हो....

मैं- जी..क्या हुआ...

सुजाता- वो मैं....मैं तुम्हारे रूम मे गई थी...तुम्हे देखने...

मैं- ओह..कोई काम था क्या...

सुजाता- नही...वो बस नीद नही आ रही थी...सोचा कि अपने न्यू फ्रेंड के साथ कुछ टाइम गुज़ार लू...

मैं- ओह..चलिए फिर...आइए...

सुजाता भी ना नही बोल पाई....मेरे साथ मेरे रूम मे आ गई....

मैं- आंटी...आप ड्रिंक लेती हो...

सुजाता- हाँ...थोड़ी बहुत..

मैं- तो आज एक जाम अपनी दोस्ती के नाम...क्यो...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- क्यो नही...अब तुम्हे मना तो कर नही सकती...दोस्त जो हो...

मैं- ओके...चियर्स...

हम दोनो एक-एक पेग गटक गये...और फिर मैने अपनी टी-शर्ट निकाल फेकि और दूसरा पेग बना लिया...

मेरा कसरती बदन सुजाता की आँखो मे चमक ले आया...वो आँखे फेड मेरे जिस्म को निहार रही थी...

मैं(पेग पकड़ा कर)- लीजिए आंटी..

सुजाता- हूँ..हाँ...वैसे तूने बॉडी मस्त बनाई है...ह्म्म..

मैं- जी ...वो थोड़ी बहुत...

सुजाता- तेरी गर्लफ्रेंड तो खुश होगी....वैसे कितनी गर्लफ्रेंड है तेरी...

मैं- आंटी...मैं गर्लफ्रेंड नही बनाता...

सुजाता- क्या...इतना तगड़ा बदन है और गर्लफ्रेंड नही...हो ही नही सकता....

मैं- तगड़ा बदन गर्लफ्रेंड बनाने मे कौन वेस्ट करे...मैं तो इससे अच्छा काम करता हूँ...

सुजाता(सीप मार कर )- कैसा काम...

मैं(आँख मार कर)- जो मिली...वो एक रात की बीवी...बस...

मेरी बात सुन कर सुजाता की आँखे बड़ी हो गई...शायद उसे ऐसी बात की उम्मीद नही थी...पर बोली कुछ नही...

2 पेग ख़त्म कर के सुजाता अपने रूम मे निकल गई और मैं सोने लगा....

अगले दिन मैं सुबह कॉफी पी रहा था की तभी एक कॉल आया....

मैं स्क्रीन देख कर मुस्कुरा दिया और कॉल लेते ही सामने से पहली लाइन सुन कर मेरा माइंड झटका मार गया....

सामने- ""हेलो अंकित.....मैं मनोज की बेहन बोल रही हूँ....""

ये लाइन सुन कर मेरे मुँह से एक ही वर्ड निकला...

मैं- क्या........???????????????

जब मैने सुना कि सामने वाली अपने आप को मनोज की बेहन बोल रही है तो मेरा माइंड घूम गया....

मुझे समझ नही आ रहा था कि इससे बोलू क्या....क्योकि मैने तो ये सपनो के सपनो मे भी नही सोचा था कि ये मनोज की बेहन निकलेगी....

लेकिन जब ये कह रही है तो सच ही होगा....इसे झूठ बोलने की क्या ज़रूरत...और सबसे बड़ी बात कि इसे कैसे पता चलता कि मैं किसी मनोज की बेहन के इंतज़ार मे हूँ....

हां...ये सही है...यही है मनोज की बेहन...मनु....

मनु- हेलो अंकित...सुन रहे हो ना...

मनु की आवाज़ मुझे वापिस ख़यालो से बाहर ले आई....

मैं- हूँ...हाँ मनु...बोलो...

मनु- ये सच है अंकित....मैं ही मनोज की बेहन हूँ...

मैं- ह्म्म...मैं समझ गया....तुम सही हो...पर तुम कैसे....आइ मीन...

मनु(बीच मे)- मैं जब मिलुगी तो सारे सवालो के जवाब दुगी...अभी मुझे सिर्फ़ एक बात बताओ...

मैं- हाँ बोलो...

मनु- मेरा भाई कहाँ है...क्या वो तुमसे मिला था...

मैं- हाँ ...मिला था...और उसके बाद...

मनु- उसके बाद...चुप क्यो हो गये...बोलो ना...

मैं- मनु...वो तुम्हारा भाई...अब...अब इस दुनिया मे नही रहा....

मेरी बात सुनकर मनु चुप रही...काफ़ी देर तक मुझे सिर्फ़ सिसकियों की आवाज़ आती रही...मैं समझ गया कि वो रो रही है...पर मैने उसे टोका नही...मैने सोचा कि उसे रोने देना ही सही रहेगा अभी....

 


थोड़ी देर बाद मनु रोते हुए बोली...

मनु- कैसे....कब...क्या हुआ था ...बोलो अंकित....

मैं- मनु...वो मेरे ही सामने....और मेरी ही गोद मे उसने दम तोड़ा था....

मनु(ज़ोर से रोते हुए)- पर हुआ क्या था....कैसे भैया .....हुहुहू...

मैं- मनु...प्ल्ज़ चुप हो जाओ....मैं जानता हूँ कि तुम दुखी हो...पर प्ल्ज़...थोड़ी हिम्मत से काम लो मनु...प्ल्ज़ चुप हो जाओ...

मनु(कुछ देर बाद)- ये कैसे हुआ था...

मैं- एक...एक आक्सिडेंट....उसे ट्रक से उड़ा दिया था....और वो उसी वक़्त....

मेरी बात पूरी होती उससे पहले ही मनु और ज़ोर से रोने लगी.....

कुछ देर तक मनु रोती रही और मैं उसे समझाता रहा....

काफ़ी रोने के बाद मनु ने सम्भल कर बात की...

मनु- अंकित...मैं तुमसे जल्दी ही मिलूगी....ऐसा बहुत कुछ है जो तुम्हे जानना ज़रूरी है...

मैं- तो बोलो ना....अभी बोलो...

मनु- नही...मैं मिल कर ही बताउन्गी...थोड़ा इंतज़ार करो...

मैं- तो मैं तुम्हारे घर आ जाता हूँ....अभी...

मनु- नही अंकित...मैं सहर मे नही हूँ...बाहर हूँ...और जब मैं वापिस आउगि...तब तुमसे मिलूगी...और हाँ...मेरा फ़ोन ट्राइ मत करना...ये बंद रहेगा....बाइ....

और मेरे कुछ कहने से पहले ही मनु ने कॉल कट कर दी ...और फिर उसका नंबर बंद आने लगा....

मैं(मन मे)- मनु ने ऐसा क्यो किया....वो भी अचानक से....मनोज ने कहा था कि उसकी बेहन खुद आयगी मेरे पास...

पर ये तो माइंड हिला कर निकल गई...अब पता नही कहाँ गई...और कब आयगी....और ये ऐसा क्या बताने वाली है जो मेरे लिए ज़रूरी है...

मैं अपने ख़यालो मे सवालो के जवाब ढूँढने की नाकाम कोसिस कर ही रहा था कि एक सुरीली आवाज़ ने मेरा ध्यान तोड़ दिया....ये सुजाता की आवाज़ थी...

सुजाता- मैने कहा गुड मॉर्निंग अंकित बेटा...

मैं- ओह ...गुड मॉर्निंग आंटी...आइए...

सुजाता- क्या बात है...कहाँ खोया था...किस के ख्यालो मे...हाँ...

सुजाता ने मेरे पास बैठते हुए मुझे कंधा मारा और हँसने लगी...मैने भी थोड़ा ओपन होने का सोचा लिया....

मैं(मुस्कुरा कर)- बस आंटी ...आपके ख्यालो मे ही खोया था...

सुजाता- अच्छा...मेरे ख़यालो मे...हट झूठे...

मैने देखा कि सुजाता तो बिल्कुल ओपन है...तो मैं क्यो पीछे रहूं ...

मैं- हाँ आंटी...झूट नही...सच मे...मैं तो कल रात से आपको ही देख रहा हूँ...सोते-जागते...बस आप ही नज़र आ रही है...

सुजाता मेरी बात से कुछ शरमाई...और हंस कर बोली...

सुजाता- सच मे...तो बता...क्या देख रहा था सोते-जागते....कुछ खास...ह्म्म्म..

मैं- आंटी..क्या कहूँ...आप तो पूरी की पूरी खास हो...उपेर से नीचे तक...

सुजाता(शर्मा कर)- हट पागल...मुझ मे क्या खास दिखेगा तुझे...

मैं- बहुत कुछ आंटी...उपेर..नीचे...सब खास लगा मुझे तो....

सुजाता(आँखे बड़ी कर के)- बदमास...झूट बोल रहा है...तुझ जैसे जवान मर्द को भला मेरे जैसी औरत मे क्या खास लगेगा...झूठा....

सुजाता इतरा-इतरा का और मुँह बना कर बातें कर रही थी...जो उन्हे और भी कामुक बना रहा था...

मैं- नही आंटी...मुझे तो आप जैसी ही पसंद आती है...

सुजाता(मुस्कुरा कर)- अच्छा...तो बता..मेरी जैसी से मतलब क्या है तेरा...और क्या पसंद आता है तुझे...

मैं- आपके जैसी मतलब...थोड़ी भरी हुई औरतें...और पसंद तो ...वो...

सुजाता- वो क्या...बोल ना..रुक क्यो गया...

मैं- नही...आप गुस्सा करोगी...

सुजाता- नही बेटा...भूल गया...हम फ्रेंड है..तो गुस्सा कैसा...खुल के बता...जल्दी..

मैं- वो...बड़े-बड़े....

तभी सविता नाश्ता ले कर आ गई और पूरा मूड ही खराब कर दिया...मेरा भी और सुजाता का भी...क्योकि मुझसे ज़्यादा मज़ा तो उसे आ रहा था....

सुजाता(नाश्ता करते हुए)- अच्छा..अब बाकी रात मे बताना...ह्म्म..

मैं(सुजाता को देख कर)- ओके आंटी...

सुजाता- अच्छा ये बता कि ये लड़की कौन है...वो जो ज़ख्मी है...

मैं- मेरी छोटी बेहन है...

सुजाता- पर आकाश की तो ...

मैं(बीच मे)- मैं लाया...अपनी बेहन बना कर....ओके...

सुजाता मेरी टोन से समझ गई कि मैं पारूल के बारे मे कुछ बुरा नही सुन सकता ...इसलिए वो चुपचाप नाश्ता करने लगी...

नाश्ते के बाद सुजाता डॅड के साथ ऑफीस निकल गई...और मैं कामिनी के घर पहुँच गया....

आज मेरे साथ रॉनी भी था...क्योकि आज मैं दामिनी के चेकप के बहाने बात करना चाहता था....

हमे देखते ही पिछली बार की तरह नर्स और नौकरानी सकते मे आ गई...पर बोली कुछ नही...चुपचाप बाहर निकल गई....

रॉनी ने अपना कमाल दिखा कर माइस आंड कॅमरास हॅंग किए और दामिनी इशारा पाते ही बोल पड़ी...

दामिनी- अच्छा हुआ की तुम्हे याद आया कि मैं ठीक हूँ...कब्से तुमसे बात करने का सोच रही थी....

मैं- ह्म्म..कोई खास बात है क्या...

दामिनी- है तो...मैने कुछ ऐसा सुना है जो शायद तुम सुनना पसंद करोगे...

मैं- तो बोलो ना....टाइम वेस्ट मत करो....

दामिनी- हाँ...एक दिन मैने रिचा को फ़ोन पर बात करते सुना था ...वो शायद उस बॉस से ही बात कर रही थी...वही सरफ़राज़....

मैं- ह्म्म...तो उसमे नया क्या है...वो तो मैं भी जानता हूँ....कि वो बॉस से बात करती है...

दामिनी- हाँ..पर उसने जो बोला ..मुझे उस पर डाउट है...

मैं- ऐसा क्या बोल दिया उसने...

दामिनी- उसने बोला था कि..."" तुम कुछ भी करो...पर चिप कर..नही तो तुम्हारी फॅमिली भी तुम्हारे खिलाफ हो जाएगी....बहुत प्यारा है उन्हे अंकित...""

मैं- क्या...उसने ऐसा बोला...

दामिनी- हाँ...और ये भी बोला कि...""मैं ही हूँ जो तुम्हारे नकाब के पीछे छिपा चेहरा जानती हूँ...तो मुझसे होशियारी मत करना....और मेरी बात पर डाउट भी मत करना....

मैं- ओह...तो रिचा उसे पहचानती है...

दामिनी- हाँ...और वो कोई ऐसा है जो तुम्हारे करीब है...मुझे तो यही लगा...

मैं- ह्म्म...अब रुकना बेवकूफी होगी....

दामिनी- तुम कुछ भी करो...पर याद है ना कि मेरी फॅमिली...

मैं- डोंट वरी....किसी को कुछ नही होगा...रिलॅक्स...सिर्फ़ वो मारेंगे जो ग़लत है...ओके....

 
तभी साला किसी ने गेट पर नॉक कर दिया...ये वही दोनो कमीनी होगी...

मैने गुस्से मे बोला और गेट खोल दिया...जब तक दामिनी और रोनी अपना काम निपटा चुके थे...सब नॉर्मल था...

नर्स- वो दबा का टाइम हो गया...

मैं- एक दिन तुम दोनो को इंजेक्षन लगाउन्गा...वो भी बढ़ा वाला...

और मैं गुस्से मे बाहर निकल आया ..इससे पहले कि वो दोनो मेरी बात समझ पाती...

मैने दामिनी के रूम से तो गुस्से मे निकला पर हॉल मे आते ही मेरा गुस्सा ठंडा पड़ गया....

सामने इतनी हॉट लड़की जो आ गई थी....मेरे सामने काजल थी...जो मुझे देख कर ही मुस्कुराने लगी...

मैं- रॉनी...तुम चलो...मैं आता हूँ...

रॉनी निकल गया और मैं काजल के पास पहुँचा...

काजल- हाई...आज भी हाल पूछना भूल गये थे ...

मैं- नही तो...मैं तो तुम्हारे ही पास आ रहा था कि...

काजल(बीच मे)- बस ..तुम्हे झूठ बोलना नही आता....

मैं- अच्छा...काफ़ी कुछ जानती हो मेरे बारे मे....

काजल- जी हाँ...बहुत कुछ...

मैं- तो फिर हमे भी जान ना होगा...तुम्हे...है ना...

काजल- हाँ...पूछो क्या जान ना है...

मैं- उउंम..यहाँ नही...रूम मे चलो...बिल्कुल अकेले मे...जहाँ सिर्फ़ हम दोनो हो...

काजल(नज़रे झुका कर)- रूम मे...ऐसा क्या जान ना है तुम्हे...

मैं- चलो फिर बताता हूँ...

और मैं काजल का हाथ पकड़ कर उसे रूम मे ले गया...रूम मे आते ही मैने रूम लॉक किया तो काजल सहम गई...

काजल- ये...गेट क्यो..

मैं- स्शहीए...

काजल- पर कोई देखेगा तो क्या कहेगा...

मैं- बोला ना...चुप रहो...बिल्कुल चुप....बहुत बोलती हो...

काजल- पर ये तो ब्ब्ब्बुउुउउम्म्म्मम....

काजल के बोलते ही मैने उसके होंठो पर होंठ रख दिए और चूसने लगा...

थोड़ी देर नखरे करने जे बाद काजल ने भी मस्त रेस्पोन्स दिया और हम होंठो का रास्पान करने लगे...

होंठ चूस्ते हुए मेरे हाथ काजल के बूब्स की तरफ बड़े ही थे कि कोई गेट पर आ गया....ये साली सुषमा थी...

मैं- उउउम्मह...बहुत चलते है ये होंठ...उउउंम..बट रास्ती है...

मेरी बात सुन कर काजल शरमा गई और सुषमा ने फिर से गेट नॉक किया...

मैं- अब बाकी की जान-पहचान बाद मे...

और मैने गेट खोला और सुषमा से मिलकर वहाँ से निकल आया...और काजल अपने रूम मे ही शरमाती रही.....

 


रिचा के घर........

सुबह-सुबह रिचा कॉफी पीते हुए पेपर पढ़ रही थी...

आज वो कुछ थकि हुई सी थी...पर इस समय नाइटी मे उसका गदराया जिस्म मस्त दिख रहा था....

तभी उसकी डोरबेल बज उठी...

रिचा- उफ़फ्फ़...ये सुबह से कौन आ गया...

गेट खोलते ही सामने वाले को देख कर रिचा भड़क उठी...

रिचा- तुम...सुबह-सुबह....कोई काम नही है क्या...

सामने- है तो...और वही करने आया हूँ...

उस सक्श ने रिचा को बाहों मे भरना चाहा पर रिचा ने उसे अंदर खीच कर गेट लगा दिया...

रिचा- क्या है...गेट तो लगाने दो...मेरी व्हाट लगवा दोगे तुम तो...

सामने- ओके...सॉरी...अब आजा मेरी जान...आज तेरी गान्ड मारने का मन है...

रिचा- नही...आज नही...गान्ड तो बिल्कुल नही...

सामने- मुझे मना करेगी...ह्म्म..

रिचा- अरे यार...समझो तो...कल उस सरफ़राज़ ने रात भर गान्ड मारी...सूजा दी साले ने...और उपर से...

सामने- उपर से क्या...

रूचा- क्क्क...कुछ नही...वो उसने चूत भी फाडी ना...

सामने- तो अब हम भी फाड़ेंगे....हाहाहा...

रिचा- तुम मनोगे नही ना...

सामने- नही ना जानेमन...अब आ भी जाओ....

और उसके बाद रिचा की जोरदार चुदाई हुई और चुदाई करके वो सक्श घर निकल गया....

रिचा गेट लॉक कर के रेस्ट करने लेटी ही थी कि फिर से डोरबेल बज उठी....

रिचा(गुस्से मे)- अब क्या है...साले जा मन नही भरता क्या...इसकी तो...

रिचा गुस्से मे गेट खोलते हुए बोली....

रिचा- तुम्हारा मन नही भरा...फिर सीईई.......

रिचा सामने खड़े सक्श को देख कर सुन्न पड़ गई....उसके सब्द मुँह मे ही रह गये....

सामने- हेलो जानेमन...क्या हाल है...

रिचा(घबरा कर)- त्त्त्त...तुम...

सामने- हाँ..हम...स्वागत नही करोगी हमारा..........?????????

रिचा अपने घर मे मुझे देख कर बुत बन गई थी...और उसकी वजह ये थी कि उसे लगा कि मैने उसके दूसरे बॉस को देख लिया शायद...या फिर मुझे कुछ सच्चाई हाथ लग गई....

असलियत भी यही थी कि मैं आज रिचा से फेस तो फेस सब बाते करने आया था.....

मैं- क्या हुआ डार्लिंग....स्वागत नही किया...कोई नही...अब क्या अंदर भी नही बुलाओगी....ह्म्म...

रिचा- नही...मतलब..क्यो नही...आओ...अंदर आओ...पर ये लोग....

मैं- ये लोग...डरो मत...ये मेरे बॉडी गार्ड है....डोंट वरी.....

रिचा मुझे नॉर्मली बात करते देख कर कुछ सम्भल गई और मुस्कुराते हुए मुझे अंदर ले आई...

रिचा- तो...आज सुबह -सुबह मेरी याद कैसे आ गई...

मैं(बैठते हुए)- सब बताउन्गा...पहले एक कॉफी हो जाए....

रिचा- क्यो नही...अभी लाई...

रोका थोड़ी देर मे कॉफी ले कर आ गई और हम बातें करने लगे....

रिचा- तो अब बताओ...आज मेरी याद कैसे आ गई...

मैं(कॉफी की सीप मार कर)- उउंम..मैने सोचा कि आज रिचा के साथ कुछ गेम खेला जाए...तुम्हे पसंद है ना गेम खेलना....

रिचा(हड़बड़ा कर)- गेम...कैसा गेम...

मैं- कैसा गेम....ये पूछ कर तो तुमने मेरा दिल ही तोड़ दिया...तुम्हे तो समझ जाना चाहिए था...हाँ...

रिचा(शॉक्ड )- क्या मतलब....तुम कहना क्या चाहते हो...मैं भला कब गेम खेलती हूँ....कब देख लिया तुमने...हाँ...

मैं- यही तो...थोड़ा लेट हो गया...पर कोई नही...देर आए, दुरुस्त आए...हाँ...

रिचा(हैरानी से)- मतलब...क्या कह रहो ...मैं समझी नही...

मैं(पॉकेट से ताश की गद्दी निकल कर)- ये...प्लेयिंग कार्ड्स...ये गेम खेलते है...ह्म्म..

रिचा मेरे हाथ मे प्लेयिंग कार्ड देख कर हैरान थी...पर अपनी हैरानी छिपा कर उसने एक झूठी मुस्कान बिखेर दी...

रिचा- ओह्ह...प्लेयिंग कार्ड....चलो...खेलते है...पर खेलना क्या है...फ्लश या तीन पत्ति...

मैं- दोनो ही नही...कुछ और...

रिचा- पर 2 लोगो मे तो यही खेल सकते है ना...और कोई ऑप्षन भी नही...

मैं- नही....मेरे पास एक तीसरा ऑप्षन भी है....

रिचा(रिलॅक्स हो कर)- अच्छा....तो वो क्या है...ह्म्म..

मैं- मज़ेदार गेम है....पर ...उसके पहले एक और गेम खेल ले....

रिचा(चौंक कर)- और कौन सा....

मैं(मुस्कुरा कर)- तुम्हारी दिलकश जवानी का गेम...हाहाहा....

रिचा(मन मे)- क्या किस्मत है मेरी....कल रात से रंडी से ज़्यादा चुद रही हूँ...और अब ये भी...क्या करूँ...मानेगा तो ये भी नही...चलो...एक बार और सही....ये खुश रहे तो मेरे लिए अच्छा ही होगा....

मैं- इतना क्या सोच रही हो...नही करना तो मना कर दो...

रिचा(मुस्कुरा कर)- तुम्हे ना थोड़े कह सकती हू...ह्म्म..पर क्या अपने बॉडी गार्ड के सामने ही...

मैं- नही..अंदर चलो....

फिर मैं बॉडीगार्ड को वही रोक कर रिचा के साथ उसके बेड रूम मे चला गया.....

और सुरू हुआ चुदाई का खेल........

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आकाश के ऑफीस मे.........

सुजाता , आकाश के साथ उसके ऑफीस आई थी...दोनो उसके ऑफीस मे थे....और कुछ फाइल्स देख रहे थे.....

सुजाता- तो..इन फाइल्स मे तो कुछ भी नही...प्रॉपर्टी की कोई जानकारी नही ..हाँ...

आकाश- हाँ...होगी ना...इन मे नही तो और कोई फाइल्स मे होगी...शायद छिपा के रखी हो ...देखते है...

सुजाता- क्या देखते है...और देखे कहा ...

आकाश- वो...मुझे...पता नही...देखते है यही ...

सुजाता- तुम तो डफर के डफर रहोगे....एक काम करो...वो जो ये फाइल्स संभालता है ना...उसे बुलाओ...

आकाश- कौन...अच्छा...आकाउंटटेंट के लिए बोल रही हो क्या.....

सुजाता- हाँ वही...बुलाओ उसे....

आकाश- ठीक है...

थोड़ी देर बाद अकाउंटटेंट आ गया....

ए/सी- जी सर...कहिए...

सुजाता- सुनो...इस ऑफीस के पेपर्स लाओ...और आकाश की प्रॉपर्टी के भी...जल्दी...

ए/सी- आप कौन है ये फाइल्स मागने वाली...

सुजाता- मैं कोई भी हूँ...तू लायगा कि नही...

ए/सी- जी नही...मैं आपकी कोई बात नही मान सकता...और प्ल्ज़...बीच मे मत बोलना.. ..सर ..आप कहिए...

सुजाता(गुस्से से)- इतनी हिम्मत...रुक जाओ...कुछ दिन बाद तुम्हे सबक सिखाउन्गी...

आकाश(सुजाता से)- चुप रहो...मैं बात कर रहा हूँ ना....तुम शांत बैठी रहो......

सुजाता को गुस्सा तो बहुत आया पर वो चुप रही और आकाश को घूर्ने लगी....

ए/सी- सर...मेरे लिए क्या ऑर्डर है...

आकाश- हां...तुम वो फाइल्स ले आओ..जो इन्होने कही....

ए/सी- पर सर....

सुजाता(बीच मे)- अब क्या अपने मालिक की भी नही सुनोगे...

ए/सी- क्यो नही....

और आक्कौंटेंट सुजाता को घूरते हुए निकल गया...उसके जाते ही आकाश , सुजाता पर भड़क उठा.....

आकाश- तुम्हारा दिमाग़ तो खराब नही....तुम ये मत भूलो कि मेरे वफ़ादार है ..तुम्हारे नही...

सुजाता(घूर कर)- तुम्हारे वफ़ादार ..ह्म्म..

आकाश- मतलब...आकाश के...अब चुपचाप फाइल्स देखना...मुँह मत चलाना...

 
थोड़ी देर बाज़ सुजाता और आकाश , प्रॉपर्टीस की फाइल्स पढ़ रहे थे.....

सुजाता(फाइल्स पटक कर)- ये क्या बकवास है...सारी प्रॉपर्टी अंकित के नाम...और उसे कुछ हुआ तो सारी की सारी अलका चेरिटी ट्रस्ट के नाम...क्या बकवास है....

आकाश- हाँ...अजीब है ना..

सुजाता- पर तुमने तो पेपर पर साइन लिए थे....उसका क्या हुआ....

अक्ष- लिए तो थे..मुझे भी समझ नही आ रहा....शायद अकाउंटटेंट ने गड़बड़ की हो...या फिर अंकित ने....

सुजाता- ज़रा उस अक्कौंटेंट को बुलाओ तो..और पूछो उससे...क्या है ये सब...

अक्कौंटेंट आया और उसने बताया कि ये सब अंकित सर के कहने पर किया था.....

अंकित का नाम सुन कर सुजाता का पारा चढ़ गया ..पर अक्कौंटेंट के सामने चुप रही....और उसके जाते ही भड़क उठी.......

सुजाता- तुमसे एक काम ठीक से नही होता...किसी काम के नही तुम...

आकाश- मेरी क्या ग़लती...मैने तो साइन ले लिए थे....पता नही ये अंकित ने कैसे....बड़ा दिमाग़ चला गया लड़का....

सुजाता- ह्म्म...पर अब मेरी बारी...मैं इतनी आसानी से ये सब हाथ से नही जाने दूगी.....

आकाश- तो अब तुम क्या करोगी..हाँ...

सुजाता- कुछ खास नही...अंकित की कमज़ोरी का फ़ायदा उठाकर सब अपने मन का करवाउन्गी....

आकाश- पर कैसे...वो बहुत तेज दिमाग़ वाला है...आसानी से नही मानेगा...

सुजाता(मन मे)- बड़े से बड़े दिमाग़...औरत के सामने मंद पड़ जाते है...फिर ये तो बच्चा है...हहहे....

और सुजाता कुटिल मुस्कान बिखेरने लगी...जो आकाश की समझ मे नही आया.....

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रिचा के घर.........

रिचा की दमदार चुदाई कर के हम फिर से बाहर वाले रूम मे बैठ गये...

रिचा की गान्ड इस कदर घायल थी कि वो ठीक से बैठ भी नही पा रही थी....

मैं- तो अब...अब खेलते है रियल गेम....ओके

रिचा- हाँ...खेलो...पर है क्या....???

मैं- ह्म्म..गेसिंग दा ट्रूथ...

रिचा- ये क्या है...मैने तो नही सुना...

मैं- हो सकता है...वैसे भी हर चीज़ कभी ना कभी 1स्ट टाइम होती है...तो आज ये 1स्ट टाइम खेल लो...फिर समझ जाओगी...ओके..

रिचा- ओके..तो सुरू करे...और ये बताओ कि करना क्या है...

मैं- बढ़ा सिंपल है...मैं एक कार्ड दिखाउन्गा...तुम्हे उसका ट्रूथ बताना है..कि वो क्या है...ओके...

रिचा- ओके...इसमे कोई बड़ी बात नही...सुरू करो...

मैं(कॉफी ख़त्म कर के)- ह्म्म...तो फिर सुरू करते है...ट्रूथ ऑर लाइ...

फिर मैने कार्ड को फेंटा और उसमे से बेगम के कार्ड्स को अलग किया और टेबल पर रख दिए....

मैं- तो बोलो...ये क्या है ...??

रिचा- ये...ये तो बेगम है...

मैं- ह्म्म..4 बेगम....

रिचा- हाँ..4 बेगम...पर इसमे क्या...

मैं- रूको तो ...सब समझ जाओगी....

रिचा- ओके...

फिर मैने 2 गुलाल...और 1 बादशाह भी टेबल पर रख दिए....

मैं- अब बोलो.....

रिचा- इसमे क्या बोलना...2 गुलाम और 1 बादशाह....इसमे गेम क्या है...ये तो बकवास है...अगर क्लोज़ करके पूछते तो गेम होता...तुम तो ओपन करके पूछ रहे हो...इसमे क्या मज़ा....

मैं- गुड....बस थोड़ा और...फिर गेम का मतलब भी समझ जाओगी और मज़ा भी आएगा...

फिर मैने 1 दुक्की रख दी...और एक जोकर...जोकर के नीचे एक पत्ता छिपा कर रख दिया....

मैं- ह्म्म...तो अब गेम सुरू होता है...ये तुम्हे अब इंटरेस्टिंग लगेगा...

रिचा(झुक कर कार्ड्स देखते हुए)- ह्म्म..तो अब करना क्या है...ये एक दुक्की रख दी और एक जोकर....मैं कुछ समझ नही पा रही...

मैं- रूको तो...सब समझ जाओगी...ये गेम तुम्हारी जिंदगी का सबसे इम्पोर्टेंट गेम होने वाला है.....

रिचा मुझे देखने लगी...और मैने एक शरारती मुस्कान बिखेर दी...जिसे देख कर रिचा बोली कुछ नही...पर मेरे बोलने का इंतज़ार करने लगी...

मैं- 4 बेगम....कामिनी, दामिनी, रजनी और रिचा....

अब रिचा का माथा ठनका....उसके चेहरे का रंग बदलने लगा...पर वो अपने आपको काबू करते हुए बोली...

रिचा- हम सहेलियाँ...बेगम...गुड...

मैं- हाँ जी....कामिनी ईंट की , रजनी पान की...दामिनी हुकुम की और तुम चिड़ी की...ठीक है...

रिचा- ओके...

मैं- अब ये 2 गुलाम...हुकुम का और चिड़ी का....

रिचा- इसका क्या...

मैं- हुकुम का छोड़ो...ये चिड़ी की बेगम का गुलाम है...क्या था...हाँ...रफ़्तार सिंग....सही है ना...

रिचा(सकपका कर)- र्ररर...रफ़्तार सिंग...इसका क्या मतलब...??

मैं- सब समझाउन्गा...थोड़ा रूको तो...अब किसकी बारी...तुम बोलो..अब कौन आएगा...

रिचा(हैरानी और डर से)- म्म..मुझे क्या पता...तुम ही बोलो....

मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...और ये आया बादशाह...जो इन बेगमो को कंट्रोल करता है....क्या था वो...हाँ...सरफ़राज़.....ठीक कहा था....

सटफ़राज़ का नाम सुनते ही रिचा की फट गई...उसे समझ आ गया कि मैं क्या बोल रहा हूँ...अब उसके चेहरे का रंग उड़ चुका था....पर अब भी वो बुत बनी मेरे बोलने का इंतजार करने लगी....

मैं- तो अब...बोलो भी...

रिचा- मैं क्या बोलू...मुझे कुछ समझ नही आ रहा...

मैं- लगता है कि नज़र कमजोर है तुम्हारी....देखो...ये बादशाह भी चिड़ी का है .....और तुम चिड़ी की बेगम...मतलब तुम सब जानती हो उस बादशाह के बारे मे...मतलब सरफ़राज़ के बारे मे....अब बोलो...

मेरी आवाज़ मे कठोरता थी..जिससे रिचा और भी सहम गई...फिर भी एक अच्छे खिलाड़ी की तरह बोली....

रिचा- तुम ये क्या बकवास कर रहे हो..मुझे कुछ समझ नही आ रहा...कैसा बादशाह...कैसा गुलाम...और कैसी बेगम...

मैं- रुक जाओ...ये देखो...ये है जोकर...जो इन बादशाह , बेगम और गुलाम की नज़रों मे बेवकूफ़ है...है ना...ये जोकर मैं हूँ...ओके...

रिचा- ये तुम क्या बके जा रहे हो...तुम और जोकर...क्या है ये....

मैं- वो भी समझ आ जायगा...पहले इस दुक्की को तो समझ लो...ये है चिड़ी की दुक्की...जो चिड़ी की बेगम के करीब है...है ना...

रिचा- मतलब...??

मैं- मतलब ये कि दुक्की बड़े कमाल की चीज़ है...सबका गेम करवा देगी...ये दुक्की है...ह्म्म्म..क्या थी...हाँ....रिया...

मैने दुक्की को आगे खिसका कर बोला...और रिया का नाम आते ही रिचा की पूरी तरह से फट गई....

अब वो कुछ कहने के लायक नही थी..बस मुझे देखते हुए उसका चेहरा उतरता जा रहा था.....

 


मैं- तो अब तुम क्या चाहती हो...बेगम मुँह खोलेगी या दुक्की को जोकर ख़त्म कर दे...हाँ...

रिचा(डरी हुई)- ये..ये सब क्या है अंकित...

मैं- सीधे शब्दों मे बोलता हू...रिया मेरे पास है...और वो ठीक है..पर...अगर मुझे इस बादशाह का पता नही चला तो तुम्हारी दुक्की गई समझो...अब बोलो....

रिचा- अंकित...मैं...मुझे कुछ नही पता...सच मे....

मैं- अच्छा...देखो रिचा...तुम जिसे जोकर समझती हो...उसका असली चेहरा देख लो...कि वो कौन है...उठाओ उस जोकर को और देखो...

रिचा ने जोकर को हटाया और नीचे वाला पत्ता देख कर बोली...

रिचा- हुकुम का इक्का...

मैं- ह्म्म..अब बोलो...सरफ़राज़ कौन है और कहाँ है...

रिचा- पर मैं किसी सरफ़राज़ को नही जानती...सच मे...

मैं- तुमने दामिनी के सामने सब कबूला है...फ़ोन पर बात भी की है...याद करो...

रिचा- मैने कब...ओह माइ गॉड...मतलब दामिनी...

मैं- वो ठीक है...बिल्कुल ठीक...अब तुम बताओ...बोलोगि या फिर इस लड़की का मैं बुरा हाल करूँ...

मैने अपना मोबाइल निकाला और रिया का वीडियो रिचा को दिखा दिया...जिससे रिचा को कन्फर्म हो गया कि रिया मेरे कब्ज़े मे है...

मैं- बताओ जल्दी...क्या करना है...बोलना है या रिया को ...

रिचा(बीच मे चीख कर)- न्ंहिी...मेरी बेटी को कुछ मत करना...मैं बताती हूँ...बताती हूँ...

मैं- तो बोलो...कौन है सरफ़राज़....

रिचा- वसीम ख़ान...

मैं- कौन वसीम ख़ान...सही बोलो...

रिचा- तुम्हारे दोस्त अकरम का बाप....वसीम ख़ान..उर्फ सरफ़राज़ ख़ान....

वसीम का नाम सुनते ही मुझे झटका लगा और आँखो मे गुस्सा उतर आया....

मैं- क्या बक रही हो तुम...होश मे तो हो....??

रिचा- हाँ...पूरे होश मे....वसीम ही वो इंसान है जो हम सबको अपने इशारे पर नचा रहा है...वही है असली दुश्मन...हम सबका बॉस....

मैं रिचा की बात सुन कर चुप रह गया....मेरे दिमाग़ मे एक हलचल सी मच गई थी...कुछ समझ ही नही आ रहा था कि बोलू क्या....

रिचा(मन मे)- मैं जानती हूँ कि अब तुम मुझसे वो वजह भी पुछोगे कि क्यो वसीम ऐसा कर रहा है...पर अफ़सोस...मैं ये नही बताने वाली....

मैं काफ़ी देर तक चुप चाप रिचा को देखता रहा...शायद उसकी आँखो मे कुछ पढ़ने की कोसिस कर रहा था...पर मेरे हाथ कुछ नही लगा....

रिचा- क्या हुआ...सच सुन कर चुप क्यो हो गये....

मैं- सच...क्या तुम्हे अब भी लगता है कि मैं जोकर हूँ...नही...मैं हूँ इक्का...सबका बाप...अब जल्दी से सच बोल वरना तेरी और तेरी बेटी की तो...

रिचा(घबरा कर)- नही...मैं...मैं सच बोल रही हूँ...एक-एक शब्द सच है...अपनी बेटी की कसम....

मैं- ओके..मान लिया...पर वसीम से मेरी क्या दुश्मनी...वो ये सब क्यो करेगा....

रिचा- दुश्मनी तुम्हारी नही...तुम्हारे खानदान से है उसकी...और वो तुम सबको ख़त्म करना चाहता है....

मैं- बको मत...वसीम की मेरे परिवार से क्या दुश्मनी....अरे मैं तक तो जानता नही कि मेरा परिवार कहाँ है...तो वसीम का उनसे क्या लेना -देना....

रिचा- लेना, देना है...और बहुत करीबी लेना-देना....

मैं-अच्छा....तुझे पता है...तो बता...क्या दुश्मनी है उसकी मुझसे ....

रिचा(मन मे)- अब क्या बोलू...क्या इसे सच बता दूं...बता ही देती हूँ....वरना ये मेरी बेटी को छोड़ेगा नही....सॉरी वसीम...मुझे सच बोलना ही होगा....

मैं- अब ताला क्यो लग गया तेरे मुँह को...बता...क्या दुश्मनी है वसीम की हमसे....मैं नही मानता कि वसीम मेरी फॅमिली को जानता भी है...

रिचा- जानता है...यही सच है...वो तुम्हारे परिवार के हर सक्श को जानता है...बहुत पहले से....समझे....

मैं- अच्छा...तो फिर ये बता कि अपनी बात को साबित करने का कोई प्रूफ है तेरे पास....ह्म्म...

रिचा- प्रूफ...प्रूफ क्या दूं...प्रूफ तो..

मैं(बीच मे)- फस गई...अपने ही झूठ के जाल मे..ह्म्म्मन..देख रिचा...झूठ तो कभी ना कभी पकड़ा ही जाता है...इसलिए बेहतर होगा कि अब सच बोलो...वरना तुम सोच नही सकती कि तुम्हारी बेटी का मैं क्या हाल करूगा....

रिचा- प्ल्ज़...ट्रस्ट मी....मैं सच बोल रही हूँ...सच मे....मेरी बेटी की कसम....उससे बढ़कर कोई नही मेरे लिए....

मैं- ह्म्म..ये तो मानता हूँ कि तेरी बेटी ही तेरे लिए सब कुछ है...पर सवाल ये है कि सबूत कहाँ है....क्या तुम अपनी बात को साबित कर सकती हो...हाँ...

रिचा(कुछ सोचकर)- हाँ...याद आया...मैं तुम्हे कुछ दिखाती हूँ .फिर तुम खुद ही समझ जाओगे कि वसीम कौन है और तुम्हारी फॅमिली से कैसे लिंक्ड है....मैं अभी लाती हूँ....

 


मैं- ओके...पर ...रूको...तुम अकेले कही नही जाओगी...मेरा आदमी साथ जायगा....

फिर मैने अपने आदमी को रिचा के साथ जाने को कहा...वो दोनो रूम के अंदर गये और कुछ देर बाद रिचा कुछ फोटो ले कर वापिस आ गई...

मैं- ये क्या है...

रिचा- ये वसीम की फॅमिली पिक है...देख लो...

मैं लगभग झपट ते हुए रिचा के हाथ से पिक ली...उस पिक को देखने पर पता चला कि रिचा सही है....

उस पिक मे वसीम था...पर उसके साथ 1 लड़का और एक मर्द-औरत थे...जिन्हे मैं नही जानता था...और कोई भी उसकी फॅमिली का मेंबर उस पिक मे नही था...जिसे मैं जानता था....

मैं- ये ...ये है कौन...मतलब...वसीम के साथ...और ये तो बहुत पुरानी पिक है...देखो...इसमे वसीम यंग दिख रहा है...

रिचा- बताती हूँ....ये वसीम की फॅमिली है...उसके माँ-बाप और उसका भाई...

मैं- अच्छा...पर इससे साबित क्या होता है...???

रिचा- साबित भी कर देती हूँ....ये दूसरी पिक देखो....

मैने दूसरी पिक हाथ मे ली तो चौंक ही गया....उस पिक मे मेरे दादाजी थे...बिल्कुल मेरे डॅड की तरह दिख रहे थे....

इस पिक मे उनके साथ 2 और आदमी थे ...एक तो वसीम का बाप...जो रिचा ने पहली पिक मे दिखाया ...और दूसरे को मैं जानता नही था....

मैं- ये पिक...तुम्हे कहाँ से मिली...ये तो मेरे.....मेरे दादाजी है...

रिचा- जानती हूँ...ये पिक मैने वसीम से चुराई थी...उसने ही मुझे बताया था कि उसका बाप तुम्हारे दादाजी का दोस्त था....अली ख़ान...हाँ...यही नाम था वसीम के पिता का....

अली का नाम आते ही मुझे डाइयरी की बातें याद आ गई...उसमे अली का काफ़ी ज़िक्र था...पर लास्ट मे वो गायब था...और अली ही था जिन्होने मेरे पिता का मुसीबत मे साथ दिया था.....

रिचा- अब तो मानते हो कि मैं सच बोल रही हूँ...

मैं- नही...ये पिक दिखा कर क्या साबित करना चाहती हो....इसका मतलब क्या है...

रिचा- यही कि वसीम तुम्हारी फॅमिली को काफ़ी पहले से जानता है...और वही से शुरुआत होती है उसकी दुश्मनी की....

मैं- दुश्मनी...पर तुम तो कह रही हो कि ये अली ख़ान मेरे दादाजी के दोस्त थे...तो दुश्मनी कैसी....

रिचा- बताती हूँ....ये बात मैने भी वसीम से पूछी थी और उसने मुझे सब बताया था....

मैं(ज़ोर से)- तो बोल ना...किस बात का इंतज़ार है तुझे....बोल..

और फिर रिचा ने बताना सुरू किया .......

फ्लेसबक...........

आज़ाद और अली ख़ान के बीच काफ़ी अच्छी दोस्ती थी....

दोनो ही एक-दूसरे के लिए जान दे भी सकते थे और किसी की जान ले भी सकते थे....

वो दोनो आपस मे सब कुछ शेयर करते.....दुख, सुख और सारी बातें...

दोनो के परिवार भी एक-दूसरे के काफ़ी करीब थे....

आज़ाद एक बड़े रसूख् वाले इंसान थे....दौलत , शोहरत, पैसा और पॉवर...सब था उनके पास....

इसके ठीक उल्टा...अली एक मिड्ल क्लास मॅन थे...पर इतने काबिल थे कि अपनी फॅमिली की सारी ज़रूरते पूरी कर सके....

अली की फॅमिली मे 4 लोग थे ...उसकी बीवी अमीन और उसके 2 बेटे ...सरफ़राज़ और आमिर....

अली ने सपना देखा था कि उनके बेटे बड़े हो कर बहुत बड़े आदमी बने...इसलिए वो अपने बेटों को सहर मे पढ़ाना चाहते थे....

सरफ़राज़ तो पढ़ने चला गया...पर अली की वाइफ ने आमिर को नही जाने दिया....उसे अपने पास ही रखा....

सरफ़राज़ अपने पिता के सपनो को पूरा करने के लिए जी-जान से पढ़ाई करने लगा...और यहाँ गाँव मे अली अपनी फॅमिली और अपने दोस्त के साथ खुश था....

अली और आज़ाद हर काम मे साथी थे...कैसा भी काम हो...अच्छा या बुरा...अली ने आज़ाद का साथ कभी नही छोड़ा ....

पर सिर्फ़ एक काम ऐसा था ...जिसमे अली बहुत कम शामिल होता...वो था अयाशी...

आज़ाद को नई-नई औरतों और लड़कियों को चोदने का बड़ा शौक था....

उसमे कई औरतो और लड़कियों को पटा रखा था.....वो खुद भी उन्हे चोदता और अपने दोस्त से भी चुदवाता....

पर अली को ये ज़्यादा पसंद नही था...वो कभी -कभी ही आज़ाद का साथ देता...नही तो दूर ही बैठा रहता....

अब आते है असली बात पर.....

सब कुछ सही चल रहा था...पर अचानक कुछ ऐसा हुआ कि आज़ाद की बीवी की मौत हो गई...और उसके बड़े बेटे आकाश को गाँव छोड़ कर जाना पड़ा....

आकाश के जाने के बाद आज़ाद टूट सा गया था...पर अली ने उसे संभाला...उसे वापिस वैसा ही बनाया...जैसा वो था...

आज़ाद भी आकाश को खुश देख कर अपनी लाइफ मे रम गया...और फिर से वही सब करने लगा ...जो वो पहले करता था....

आज़ाद ने फिर से नई औरतों और लड़कियो को चोदना सुरू कर दिया....उसकी बेटियों की शादी भी कर दी और सब खुशहाली से जिंदगी बिताने लगे....

पर एक दिन कुछ ऐसा हुआ ..जो शायद ना होता तो अच्छा था....

आज़ाद अपने ऑफीस मे एक औरत को चोद रहा था....और अली ऑफीस के बाहर बैठा निगरानी रख रहा था.....इसी वजह से आज़ाद ने गेट लॉक भी नही किया था....

पर कहते है ना कि होनी बड़ी बलवान....अली को उसके बेटे का कॉल आ गया...और वो बेटे से बात करते हुए दूसरी तरफ निकल गया....तभी वहाँ अली की बीवी पहुँच गई...

असल मे वो अली को देखने आई थी...पर देखने कुछ और ही मिल गया....

गेट खोलते ही आमीन के सामने जोरदार चुदाई का सीन आ गया....

आमीन के सामने आज़ाद एक औरत को टेबल पर झुका कर उसकी गान्ड मार रहा था...पर दोनो का चेहरा दूसरी तरफ था...जिससे वो आमीन को नही देख पाए थे....

आमीन ये नज़ारा देख कर ठिठक गई...और आज़ाद का तगड़ा लंड उस औरत की गाड़ मे आते-जाते देखने लगी....

वैसे तो आमीन एक सरीफ़ औरत थी...पर थी तो औरत ही....और ऐसी जोरदार चुदाई देख कर वो भी गरम होने लगी....

आमीन ने लगभग 15-20 मिनट तक आज़ाद को गान्ड मारते देखा...और इसी बीच उसकी चूत ने पानी छोड़ने लगी.....

आमीन कुछ और देखती उससे पहले ही उसे किसी के आने की आहट हुई और उसने धीरे से गेट को वापिस बंद किया और वहाँ से निकल गई....

 
अली और आज़ाद इस घटना से पूरी तरह अंजान थे...पर आमीन की आँखो मे ये घटना घर कर चुकी थी.....

असल मे अली के दूसरे बेटे के जन्म के बाद से ही अली ने चुदाई बहुत कम कर दी थी...जिससे आमीन चुदाई के लिए प्यासी रहने लगी....

उपर से अली का लंड भी आज़ाद से छोटा था....तो ये बात भी आमीन की आँखो मे समा गई...

पर किसी तरह आमीन ने अपने दिल को संभाला और उस घटना को भूलने की कोसिस करने लगी....

पर कहते है ना...कि अगर कुछ भी होना होता है ...अच्छा या बुरा...तो हालात धीरे-धीरे उस मक़सद तक पहुँचा ही देते है....यहाँ भी वही हुआ...

एक दिन आज़ाद ने अपने फार्महाउस पर पार्टी रखी....दोस्त और उनकी फॅमिली के साथ.....

सब लोगो ने खूब एंजाय किया...खा-पी कर साम को सब खेतों मे टहलने लगे....सब अलग-अलग अपनी मस्ती मे घूम रहे थे.....

पर तभी अचानक बारिश हो गई....और जब बारिश हुई तो उस समय....आमीन चने के खेत मे थी....

आमीन वहाँ से भाग कर पेड़ के नीचे आती ...उससे पहले ही वो पूरी भीग चुकी थी....उसकी साड़ी बदन से चिपकी हुई थी और ब्लाउस के अंदर से ब्रा सॉफ नज़र आने लगी....साड़ी मे उसकी गान्ड भी सॉफ दिख रही थी....

आमीन ने अपनी हालत देखी और फिर आस-पास देखा...वहाँ कोई नही था....आमीन रिलॅक्स हो गई....

बारिश ज़्यादा तेज थी...इसलिए वो जा भी नही सकती थी...और उपेर से सर्द हवा उसके जिस्म को ठिठूरा रही थी..

आमीन(मन मे)- ऐसे ही खड़ी रही तो सर्दी बैठ जाएगी....और सीने मे सर्दी बैठ गई...तब तो मुसीबत हो जाएगी....

अब क्या करूँ...ये बारिश भी तेज है...जा भी नही सकती....

एक काम करती हूँ....कपड़े निचोड़ के पहन लेती हूँ...पर यहाँ...कोई देख ना ले...

आमीन काफ़ी देर सोचती रही कि बारिश रुक जाए...पर बारिश तो और तेज हो गई थी....और उसके जिस्म मे सर्दी भी बढ़ गई थी....

आमीन(मन मे)- अब मैं सर्दी नही सह सकती....कपड़े निचोड़ ही लेती हूँ...वैसे भी यहाँ कोई नही...पेड़ के पीछे से कर लेती हूँ...हां...

अमीन ने डिसाइड किया और पेड़ के पीछे आ गई....

पर वो इस बात से अंजान थी कि उसी तरफ एक दूसरे पेड़ के पीछे आज़ाद भी बारिश से बच रहा था....जो आमीन को नही दिखा...पर आज़ाद को आमीन दिख रही थी....

आमीन मे पेड़ के पीछे आते ही अपनी साड़ी निकाल दी...वो ब्लाउस-पेटिकोट मे आ गई....

ये नज़ारा देख कर आज़ाद सकपका गया....हालाकी उसने कभी आमीन पर गंदी नज़र नही रखी थी...पर था तो वो अयाश...इसलिए आमीन को देख कर उसकी नज़रे ठहर गई....

आज़ाद(मन मे)- ये क्या...ये मेरे दोस्त की बीवी है...नही...ये ग़लत है...मुझे इसे नही देखना चाहिए...

आज़ाद ने अपने आपको समझाया और नज़रें हटा ली....पर उसके दिल मे चिंगारी सुलग चुकी थी...जो उसे वापिस देखने को मजबूर कर गई...

जब आज़ाद ने वापिस देखा तो आमीन अपनी साड़ी निचोड़ चुकी थी और साड़ी को अलग टाँगकर अपना ब्लाउस खोल रही थी...

आज़ाद के देखते ही देखते आमीन का ब्लाउस निकल गया और उसने ब्लाउस निचोड़ कर अलग टाँग दिया....

अब आमीन पेटिकोट-ब्रा मे खड़ी हुई थी....उसके बड़े बूब्स ब्रा से झाँक रहे थे...जो आज़ाद की आग भड़का रहे थे...

आज़ाद ना चाहते हुए भी वो नज़ारा देखता रहा और आमीन ने अपनी ब्रा भी निकाल दी....

आमीन के बड़े और गोरे बूब्स देख कर आज़ाद के तन मे आग लग गई...अब उसे इस सीन मे मज़ा आ रहा था....

फिर आमीन ने ब्रा निचोड़ के रखी और जल्दी से पेटिकोट निकाल दिया....

आमीन की गोरी, चिकनी जांघे देख कर आज़ाद सब भूलता गया ....अब उसके दिल मे हवस जाग चुकी थी...वो एक तक लगाए आमीन को घूर रहा था....

तभी आमीन ने अपने तन का आख़िरी कपड़ा...यानी उसकी पैंटी भी निकाल दी...और आज़ाद को अपनी चूत के दर्शन करा दिए....

चूत देखते ही आज़ाद होश खो बैठा...उसका मन आमीन की चूत पाने को होने लगा....वो ललचाई नज़रों से आमीन को घूर रहा था....

थोड़ी देर बाद आमीन ने अपने बदन को पोंछ कर सारे कपड़े वापिस पहन लिए...

पर आज़ाद तो सब देख चुका था...उसके दिल मे आमीन के लिए हवस जाग चुकी थी...

आमीन कपड़े पहन कर वापिस अपनी जगह आ गई...पर आज़ाद वैसा ही बैठा रहा...

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""इट्स माइ लाइफ...इट्स माइ लाइफ.....इट्स माइ लाइफ........""

अचानक मेरा फ़ोन बज उठा और रिंगटोन सुन कर मेरा ध्यान टूटा...ये रक्षा का कॉल था....

मैं(कॉल पर)- हेलो रक्षा...मैं बिज़ी हूँ..बाद मे बात करेंगे...

मैने कॉल कट कर के मोबाइल टेबल पर रख दिया और अपने हाथो से अपना सिर पकड़ लिया....

रिचा- क्या हुआ....

मैं- आहह ..सिर फटने लगा...

रिचा- सच सुनते ही सिर फटने लगा....अभी तो कुछ सुनाया ही नही...अभी तो कहानी सुरू हुई है...

मैं- नही...मैं सच सुनना ही पसंद करता हूँ...चाहे वो कितना भी कड़वा हो....

रिचा- तो आगे सुनो...

मैं(हाथ दिखा कर)- पहले एक स्ट्रॉंग कॉफी लाओ...फिर बोलना...

थोड़ी देर बाद मैने कॉफी ख़त्म की और रिचा को बोलने को कहा...

रिचा- तो आगे सुनो.....

फ्लेसबॅक......कंटिन्यू....

आमीन अपने कपड़े सूखा कर वापिस अपनी जगह आ गई थी...और आज़ाद , आमीन के जिस्म का दीदार करने के बाद हवस की आग मे जलता हुआ वही बैठा था.....

कुछ देर बाद बारिश थमी और सब फार्महाउस मे आ गये..

आज़ाद यहाँ भी आमीन को घूर रहा था...और ये बात आमीन ने भी नोटीस की...पर कहा कुछ नही...

कुछ दिन बाद ये घटना आई-गई हो गई...

आज़ाद भी होश मे आते ही अपने आपको धिक्कार रहा था..कि उसने अपने दोस्त की बीवी के बारे मे ऐसा सोचा क्यो....

आज़ाद ने ये बात अपने दिमाग़ मे दफ़न कर दी...और मन ही मन अली से माफी भी माग ली....

फिर से सब नॉर्मल चलने लगा ....पर कहते है ना...कि होनी को कौन टाल सकता है....

आमीन और आज़ाद के साथ भी वही हुआ....एक और घटना हुई...और उस घटना मे आमीन और आज़ाद, पहले हुई घटनाओ की याद मे बह गये.........

एक दिन आज़ाद फॅक्टरी मे एक औरत को चोदने का मूड बना ही रहा था कि उस औरत का पति आ गया और उसे किसी काम से घर ले गया...

आज़ाद का बना-बनाया मूड ऑफ हो गया....तो आज़ाद माइंड फ्रेश करने के लिए अली से मिलने उसके घर चला आया....

आज़ाद अली के घर पहुँचा तो गेट नौकरानी ने खोला....

आज़ाद ने बिना उससे पूछे ही अंदाज़ा लगाया कि अली इस वक़्त अपने बेडरूम मे रेस्ट कर रहा होगा...और वो बेडरूम.मे जाने लगा ....

असल मे अली के घर पर आज़ाद ऐसे ही आता-जाता रहता था...कभी कोई प्राब्लम नही हुई थी आज तक...

आज़ाद बेडरूम तक पहुँचा और एक झटके मे गेट खोल कर चिल्लाया..

आज़ाद- अली भाईईईईईईईईईईई.......

आज़ाद के शब्द अधूरे ही रह गये...जब उसने सामे आमीन को खड़ा पाया....

आमीन...जो अभी-अभी बाथरूम से निकली हुई थी ....और टवल को शायद खोल ही रही थी कि आज़ाद की आवाज़ सुन कर चौंक गई.....

आमीन आवाज़ सुनते ही पलट गई और सामने आज़ाद को देख कर शॉक्ड हो गई.....

आज़ाद भी आमीन को देख कर शॉक्ड हुआ....पर उसकी निगाहे आमीन पर गढ़ गई थी...

आमीन तो शॉक्ड के मारे हिल भी नही रही थी....उसे शायद इंतज़ार था कि आज़ाद बाहर चला जाए....

पर जब आमीन की नज़रें आज़ाद के पेंट मे बने तंबू पर पड़ी तो वो खुद ही होश खो बैठी...

जिस घटना को वो भुला रही थी...वो ताज़ा हो गई....उसे आज़ाद का मगा लंड गान्ड मे जाते हुए दिखाई देने लगा था....

दूसरी तरफ आज़ाद के सामने भी फार्महाउस पर हुई घटना घूमने लगी...और उसका लंड तनने लगा....

आमीन , आज़ाद के लंड पर निगाहे गढ़ाए हुई थी....उसे ये होश भी नही था कि उसकी टवल पलट ते ही नीचे गिर गई थी...और वो आज़ाद के सामने नगी खड़ी है...

आज़ाद के अंदर वासना का कीड़ा पैदा हो गया था...और आज़ाद ना चाहते हुए भी आमीन के पास पहुँच गया....

आज़ाद- आमीन...तुम बेहद खूबसूरत हो...

आमीन(चुप रही)

आज़ाद को इतने करीब देख कर आमीन की साँसे तेज हो गई...और तभी आज़ाद ने अपने हाथ आमीन के बूब्स पर रख दिए...

आज़ाद- आहह...कितने नरम है....उउउंम

आज़ाद के हाथ लगते ही आमीन को झटका लगा....उसे समझ आ गया कि वो नंगी खड़ी है...पर उसके मुँह से एक सिसकी निकल गई....

आमीन- आआहह...

आज़ाद- बुरा ना मानो तो...मैं...

आज़ाद बोलते-2 रुक गया और आमीन की आँखो मे देखने लगा....

 
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