• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

चूतो का समुंदर



आज़ाद खेला हुआ बंदा था...उसने आमीन की आँखो मे पढ़ लिया कि वो गुस्सा नही हुई....और आमीन ने कुछ बोला भी नही..तो आज़ाद ने उसके बूब्स को ज़ोर से मसल दिया....

आमीन- आआहह......

आज़ाद- आमीन...तुम सच मे बहुत मस्त हो....उूुउउम्म्म्म...

और आज़ाद ने झुक कर आमीन के होंठ चूम लिए....आमीन अब भी शांत खड़ी थी...सिर्फ़ उसकी आँखे बंद हो गई....

आज़ाद समझ गया कि आमीन को कोई दिक्कत नही...

तो आज़ाद ने आमीन के चेहरे को पकड़ कर अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए और किस करने लगा....

कुछ देर तक आमीन शांत रही...पर फिर उसने भी आज़ाद का साथ देना सुरू किया और दोनो एक -दूसरे को किस करने लगे....

आज़ाद- उउउंम्म...आमीन....उूउउम्म्म्म...

आमीन- उउउंम्म....आआहह....उूउउम्म्म्म...

थोड़ी देर बाद आज़ाद ने आमीन को कस के बाहों मे भर लिया और उसका चेहरा और होंठ चूमने लगा....

आमीन भी आज़ाद की बाहों मे समा गई...और सिसकियाँ लेने लगी....

आज़ाद- उउंम...उऊँ..सस्ररुउपप...उउंम..उऊँ..उउंम..उउम्म्मह...

आमीन-उउउम्म्म्म.....आअहह...आअहह....उूउउंम्म...आओउउंम्म..

किस करते हुए दोनो के जिस्म आपस मे चिपके हुए थे...और आमीन के बूब्स आज़ाद के सीने मे और आज़ाद का लंड आमीन की चूत मे चुभने लगा था....

करीब 5 मिनिट तक चूमने चाटने के बाद आज़ाद ने आमीन की आँखो मे देखा तो वो शर्मा गई...

ये आज़ाद के लिए आगे बढ़ने का इशारा था....आज़ाद ने आमीन को गोद मे उठाया और बेड पर लिटा दिया...

आज़ाद ने फिर जल्दी से अपने कपड़े निकाले....जो आमीन आँखे फाडे देखती रही...और आज़ाद का लंड निकलते ही आमीन शर्मा गई...

आज़ाद अपने हाथ से लंड हिलाते हुए आमीन को दिखाता रहा और उसके पैरों के पास बैठ गया....

आमीन ने बिना कुछ कहे अपने पैर फैला दिए और आज़ाद के लिए अपनी चूत खोल दी...

आज़ाद- उउंम्म...क्या मस्त चूत है आमीन....सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प.....

आमीन- आज़ाद......उूउउम्म्म्म..

आमीन के मुँह से अपना नाम सुन कर आज़ाद एक्शिटेड हो गया और तेज़ी से चूत चूसने लगा.....

आज़ाद - सस्स्र्र्ररुउउप्प्प्प ....सस्स्रररुउउप्प्प....सस्स्र्र्ररुउउप्प्प्प.....

आमीन- आअहह.....उउउंम्म...आज़ाद....आअह्ह्ह्ह...

आमीन ने मस्त हो कर आज़ाद का सिर अपनी चूत पर दबा दिया...और आज़ाद ने चूत को मुँह मे भर के चूसना सुरू कर दिया......

आज़ाद- उूुउउंम्म...उउउम्म्म्मम ...उउउंम्म....उउउंम्म....उउउंम्म...

आमीन- आआहह....आअहह...उउउम्म्म्म...आआज़ाअद्दद्ड.....उूउउंम्म...

थोड़ी देर की चूत चुसाइ से आमीन झड़ने लगी और आज़ाद चूत रस पीने लगा....

आमीन- ऊओह...ओह्ह...आआअहह....म्माऐईन्न....उूउउंम्म...

आज़ाद- उूउउंम्म..उउउंम्म...उउंम..सस्स्ररुउप्प्प...सस्ररुउउप्प....

आज़ाद ने बड़े प्यार से आमीन का चूत रस पिया और फिर आमीन को देख कर एक चटकारा मारा...तो आमीन शर्म से लाल हो गई...

आज़ाद- उउउंम्म...बहुत अच्छा स्वाद है...उउउंम्म...

फिर आज़ाद खड़ा हुआ और अपना लंड हिलाने लगा....आमीन ने आज़ाद की आँखो मे देखा तो वो मुस्कुरा दिया...और आमीन उसका इशारा समझ गई...

आमीन घुटनो के बल बैठी और आज़ाद का लंड पकड़ कर देखने लगी...

आज़ाद- कैसा है..

आमीन(शर्मा गई...और लंड को चूम लिया)

आज़ाद- आअहह....अब देर ना करो जान...

आमीन समझ गई और लंड का सुपाडा चूसने लगी....

देखते ही देखते आमीन ने आधा लंड मुँह मे भर लिया और अब पूरी मस्ती मे लंड चूसने लगी....

आमीन- सस्स्रररुउउप्प्प्प...स्स्सल्लुउउउप्प्प...उउउंम्म...उउउंम...स्स्सल्लुउउप्प्प....

आज़ाद- ओह....ऐसे ही आमीन...ज़ोर से....आअहह....

आमीन- स्स्सल्ल्लूउउप्प्प्प...स्स्सल्ल्ल्लूउप्प्प...उउउंम्म...उूउउंम...उउउंम्म.....

आज़ाद- आअहह....मस्त हो...करती रहो....उउउंम्म...

आमीन ने पूरा दिल लगा कर लंड चूसा और अब आज़ाद चुदाई के लिए रेडी था...

आज़ाद ने आमीन को रोका और उसे बेड पर लिटा दिया...

आमीन ने भी अपनी एक टाँग उठा कर आज़ाद को आगे बढ़ने का इशारा कर दिया...

आज़ाद ने लंड सेट किया और जोरदार धक्का मार कर आधा लंड आमीन की चूत मे उतार दिया....

आमीन- आअलल्ल्लाअहह.....उूउउम्म्म्म...

आज़ाद- बस थोड़ा सा और ...

और दूसरे धक्के मे लंड पूरा चूत मे चला गया और आमीन के आँसू निकल गये....

आमीन- आअलल्ल्ल्लाअहहाअ....म्म्माीअरर....उउउंम्म....आआहह...

आज़ाद ने आमीन के बूब्स सहलाते हुए उसे नॉर्मल किया और धीरे से चुदाई सुरू कर दी...

कुछ देर बाद आमीन नॉर्मल हुई और अपनी गान्ड हिलाने लगी..

फिर आज़ाद ने आमीन की टाँग उठा कर जोरदार चुदाई सुरू कर दी...

आमीन- आअहह...आअहह...आअहह....उउउंम्म...

आज़ाद- यीहह....ईएहह....ईीई.....यईीई...

आमीन- ऊहह..ज़ोर से....आअहह....आअहह...आअहह...

आज़ाद- ये लो....ईएह...यीहह...ईएह...

आमीन- आअहह..आहह...आहह..ज्ज़ोर से...ज़ोर से ..उूउउंम्म...

आज़ाद पूरी मस्ती मे चुदाई करता रहा और कुछ देर बाद आमीन फिर से झड गई....

आमीन- आआहह...आआज़ाद....मैं...आअहह...गाऐयइ....उउउम्म्म्म...ऊओ..ययईईए....आअहह...आअहह...

चुदाई का तूफान आमीन के झड़ते ही थम गया...आज़ाद ने लंड बाहर निकाला और आमीन के बाजू लेट कर उसे बाहों मे भर लिया...

आज़ाद(आमीन की गान्ड दबाते हुए)- पता है आमीन...मैने तुम्हे खेत मे नंगा देखा था...बस तभी से तुम आँखो मे छा गई...

आमीन- क्या...आपने देख लिया था...

आज़ाद- ह्म्म्म्...और आज मेरी तमन्ना पूरी हुई...ये शानदार जिस्म मुझे हासिल हो गया...

आमीन(शरमा कर)- मैने भी आपको कितना याद किया...जबसे आपको ऑफीस मे उस औरत की गान्ड मारते देखा...

आज़ाद(गान्ड मसल कर)- बदमाश....तुमने सब देखा था..

आमीन- ह्म्म..और तबसे वो सीन भूल नही पाई...

आज़ाद- तो तुम्हारी तमन्ना गान्ड मरवाने की है...हाँ...

आमीन(सिर हिला कर)- ह्म्म्म ...पर आपका बड़ा है...

आज़ाद- कोई नही...तुम्हारी गान्ड को इसके लिए खोल दूँगा...चलो आओ...थोड़ा इसे चूस दो...फिर गान्ड मारु तुम्हारी...

आमीन और आज़ाद पूरे खुल चुके थे...आज़ाद के कहते ही आमीन ने लंड चूस के चिकना कर दिया और कुतिया बन गई...

 
आज़ाद ने थूक लगा कर आमीन की गान्ड चिकनी की और 3 धक्को मे लंड को गान्ड मे डाल दिया...

इस बार भी आमीन दर्द से तड़प गई...और आँसू बहा दिए...पर जल्दी ही नॉर्मल हुई और गान्ड चुदाई जोरो से होने लगी....

आमीन- हाँ आज़ाद...ज़ोर से...आअहह...फाड़ दो अब....आअहह...

आज़ाद- ये लो मेरी जान...अब रोज फाड़ुँगा ...यीहह...

आमीन- आअहह...जररूर्र....बहुत तडपी हूँ मैं...ज़ोर से मारो...आअहह...

आज़ाद- अब चिंता मत करो...इसका ख्याल मैं रखुगा...ईएह...यीहह...

आमीन- ओह आज़ाद....ज़ोर से...ज़ोर से...आअहह..आअहह...आहह..आहह...

रूम मे गान्ड चुदाई की आवाज़े तेज हो गई...आमीन की गान्ड पर आज़ाद की जाघे टकरा रही थी..और आमीन के बूब्स हवा मे झूल रहे थे....

दोनो ही चुदाई के रंग मे रंग चुके थे...और थोड़ी देर की दमदार गान्ड चुदाई से आमीन अपनी चूत मसल्ते हुए झड़ने लगी....

आमीन- आअहह...आज़ाद....मैं गई...आअहह...आअहह...आअहह...उउउंम्म...

आज़ाद- मैं भी आया....कहा डालु जान...मुँह मे लोगि...

आमीन- आअहह...हाँ...पिला दो...आअहह...

आज़ाद ने लंड को गान्ड से निकाला और आमीन को पलटा कर उसके मुँह मे लंडरस छोड़ दिया...

आमीन ने लंड रस को गले मे उतार लिया और दोनो रेस्ट करने लगे..

आमीन- अगर इन्हे(अली को) पता चला तो..

आज़ाद(आमीन को किस कर के)- उऊँ..कभी नही चलेगा...मैं हूँ ना..उउउंम्म..

और फिर उस दिन आज़ाद ने अली के आने तक आमीन की चूत और गान्ड को जमकर चोदा...

और उसके बाद ये सिलसिला चल पड़ा...

टाइम मिलते ही आज़ाद और आमीन एक दूसरे मे समा जाते थे...

पर कहते है कि ग़लत काम एक ना एक दिन पकड़ा ही जाता है...देर सही पर पकड़ता ज़रूर है...

इनके साथ भी वही हुआ.............

एक दिन अली अपने बेटे से मिलने शहर निकला तो आमीन ने आज़ाद को बुला लिया....

अभी 1 घंटा ही हुआ था...आमीन के बेडरूम मे आज़ाद उसकी गान्ड मार रहा था...

कि तभी अली घर आ गया....उसकी कार खराब हो गई थी तो उसने जाना केंसिल कर दिया था...

अली ने डोरबेल बजाई...पर लाइट नही थी तो वो बाजी नही...फिर उसने गेट नॉक किया...पर चुदाई के रंग मे रंगी आमीन को कुछ सुनाई ही नही दिया...

अली- शायद आमीन सो रही होगी...बेडरूम की खिड़की...हाँ..वही से जागता हूँ...

अली बेडरूम की खिड़की पर पहुँचा तो वो खुली मिली...

उसने खिड़की खोली तो चुदाई की आवाज़े सुन कर उसका माथा ठनका..

और जब उसने अंदर का नज़ारा देखा तो उसके होश उड़ गये...

अंदर उसका खास दोस्त उसकी बीवी पर चढ़ कर उसकी गान्ड मे लंड पेल रहा था...और उसकी मासूम दिखने वाली बीवी उसके दोस्त का लंड गान्ड मे लेते हुए...और तेज- और तेज चिल्ला रही थी...

ये नज़ारा किसी भी पति से बर्दास्त नही होता....अली के साथ भी ऐसा ही हुआ...

अली के जिश्म का खून खौल गया और आँखो मे उतर आया....

वो गुस्से से भरा मेन गेट पर आया...

अपनी बीवी से ज़्यादा गुस्सा अली को अपने दोस्त पर था...क्योकि उसने अपने दोस्त को सबसे बढ़ कर माना था......

अली(मन मे)-इतना बढ़ा धोखा...एक मेरा खास दोस्त और एक मेरी बीवी....मैं इन्हे छोड़ूँगा नही....

अब देखो तुम दोनो...मैं तुम दोनो का क्या हाल करता हूँ.....??????????

अली ने गुस्से मे अपनी टाँग उठाई और उसे गेट पर मारने ही वाला था कि अचानक रुक गया.....

अली(मन मे)- ये क्या कर रहा हू मैं...अगर मैने आमीन को रंगे हाथो पकड़ भी लिया तो क्या होगा....

वो बेचारी इस सदमे को सह नही पायगी...और अपनी जान दे देगी...हाँ...मैं जानता हूँ...वो कमजोर दिल वाली है...और मेरी नज़रों मे गिरते ही वो अपने आपको मिटा लेगी...

और आज़ाद...वो तो अयाश है ही...उसे क्या फ़र्क पड़ेगा...फ़र्क पड़ेगा तो सिर्फ़ आमीन को...मुझे...मेरे बच्चो को....

नही-नही...अगर आमीन ने कुछ कर लिया तो मेरे बच्चो का क्या होगा...क्या कहुगा मैं उन्हे....वो तो टूट ही जाएँगे....और आमिर...वो तो अपनी अम्मी के बिना मर ही जायगा..उसे क्या समझाउन्गा....

नही...मैं आमीन को कुछ नही होने दूँगा....पर आज़ाद ...उसे मैं छोड़ूँगा नही...उसने मेरी दोस्ती का कत्ल किया है...मेरी पीठ मे चुरा घोपा है...उसे मैं नही छोड़ूँगा....

पर ये वक़्त यहाँ रुकने का नही...अभी यहाँ से जाना चाहिए...कही आमीन को मेरी भनक भी लग गई तो अभी मार जाएगी....अभी यहाँ से जाना ही होगा....

और अली ने अपने आप को संभाल कर अपनी टाँग वापिस ज़मीन पर रखी और सोचने लगा कि अब क्या किया जाए.....

अली के दिल मे एक तूफान उठ चुका था...उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे .....

उसके सामने जो नज़ारा आज आया...उसने उसकी दुनिया ही ख़त्म कर दी....

एक तरफ उसकी जान से भी प्यारा दोस्त ..और दूसरी तरफ उसकी प्यारी बीवी....दोनो ने ही अली को धोके की चक्की मे पीस दिया था....

अली अपने घर पर आज़ाद और आमीन का नंगा खेल देखने के बाद वहाँ से चुप चाप निकल गया...जैसे कि वो यहाँ आया ही ना हो....

फिर वो गईं कि बाहर तालाब के किनारे बैठ कर आगे का सोचता रहा....

 


यहाँ अली के घर...आज़ाद ने आमीन को अंधेरा होने तक छोड़ा और फिर अपने घर निकल गया....

शाम को अली घर आया तो उसे आमीन के स्वाभाव मे कोई फ़र्क नज़र नही आया...फिर वो आज़ाद से मिला...पर आज़ाद भी नॉर्मल था....

अली ने सोच लिया था कि आज़ाद से डाइरेक्ट टक्कर लेना तो बेवकूफी होगी...

उसने पास पैसा और पवर बहुत है...साथ मे गाँव वाले भी उसे पूजते है....इस सूरत मे सामने से आज़ाद को कुछ करना आसान काम नही था....

अली ने सोच लिया था कि वो आज़ाद को तभी सज़ा दे सकता है...जब वो आज़ाद को सबकी नज़रों के सामने गिरा दे....पर सवाल था कि कैसे.....

दिन गुज़रते गये और अली अपने साथ हुए धोखे की आग मे जलता रहा....पर इन दिनो मे उसे आज़ाद के खिलाफ कुछ करने का कोई आइडिया नही आया.....

पर इन दिनो उसका आज़ाद के साथ घूमना कम हो गया था....वो कोई ना कोई बहाना कर के आज़ाद से दूरी बनाता रहा.....

फिर एक दिन ऐसा आया जब अली को आज़ाद पर वार करने का मौका मिल गया....

वो दिन था...आकाश की गाँव मे वापिसी का दिन....

उस दिन आकाश अपनी बेहन और बहनोई से मिलने आया....और पता नही उस घर मे क्या हुआ कि आकाश की बेहन ने सुसाइड कर ली....उसका पति भी मारा गया....

गाँव वाले सोच ही रहे थे कि क्या हुआ होगा...तभी अली ने अपने कुछ खास आदमियों से कह कर पूरे गाँव मे हल्ला कर दिया कि आकाश ने अपनी बेहन और बहनोई को मार डाला....

जिससे पूरा गाँव आकाश के पीछे पड़ गया...और मजबूरी मे अपनी जान बचाने के लिए आकाश को गाँव से भागना पड़ा....

आज़ाद का बेटा गया...बेटी मर गई...दामाद भी मर गया....यही सोच कर अली काफ़ी खुश था....

अली बिना आज़ाद की नज़रों मे आए उस पर बार करता रहा....उसने आज़ाद की पटाई हुई कई औरतों को उससे दूर कर दिया....और उसकी फॅक्टरी मे भी अपने आदमी मिला कर गड़बड़ करने लगा....

पर उसका मेन टारगेट था आज़ाद और उसकी फॅमिली का ख़ात्मा....और अब वो अगले मौके की तलाश मे रहने लगा....

पर फिर एक दिन ऐसा आया ...जिस दिन अली के मंसूबो पर पानी फिर गया...और उसकी दुनिया उजड़ गई.....

एक दिन हर हफ्ते की तरह अली फिर से अपने बेटे से मिलने जाने वाला था....

उस दिन आमीन ने अपने बेटे के लिए उसके मनपसंद लड्डू बनाए...पर अली के जाने के टाइम पर वो उसे देना भूल गई...

नौकरानी- मेम्साब...मैं चलती हूँ...

आमीन- हाँ...और ये क्या...ये लड्डू यही है...तुमने साब को दिए नही...

नौरानी- सॉरी मेम्साब ...याद नही रहा...

आमीन(गुस्से मे)- तेरी याद भी ना...चलो...जो हुआ सो हुआ...तुम जाओ.अब...

यहाँ नौकरानी गई और वहाँ आमीन ने आज़ाद को बुला लिया...और सुरू हो गया चुदाई का नंगा नाच....

आज़ाद(आमीन को चोदते हुए)- अब तो तेरी प्यास कुछ ज़्यादा ही बढ़ रही है...हा...

आमीन- हाईए...आपके लंड ने बढ़ा दी...आअहह ...

आज़ाद- बेचारा अली....ऐसा माल पास होते हुए भी मज़ा नही लूट पाता....

आमीन- आहह....ये माल आपके लिए बचाया था उसने...ज़ोर से करो ना...आअहह...

आज़ाद- ह्म्म..सही कहा मेरी जान....हाहाहा....

और दोनो ठहाका मार कर चुदाई मे लगे रहे....

हर बार की तरह दिन भर अपनी चूत और गान्ड मरवा के आमीन रेडी हुई और अली के लिए नौकरानी के साथ मिल कर खाना बनाने लगी.....

तभी नौकरानी की नज़र उन लड्डू के डिब्बे पर पड़ी....

नौकरानी- मेम्साब...ये लड्डू...आपने दिए नही साब को....

आमीन- कब देती...तू ही भूल गई थी ना...क्या अब ये भी भूल गई....

नोकरणी- तो दुबारा दे देती....साब(अली ) वापिस भी तो आए थे....

आमीन(हैरानी से)- वापिस ...कब आए थे...

नौकरानी- जाने के 1 घंटे बाद ...मैं दूसरे घर से काम निपटा कर लौटी थी...तब देखा था मैने उन्हे....

आमीन(सवालिया नज़रों से)- कब की बात कर रही है तू...और कहाँ देखा था....

नौकरानी- अरे मेम्साब...जब साब गये...उसके 1 घंटे के बाद ही देखा था...वो वहाँ पीछे खड़े थे...वो आपके बेडरूम की खिड़की है ना...वहाँ....

नौकरानी की बात सुनकर आमीन का चेहरा फक्क पड़ गया....उसका जिस्म पसीना छोड़ने लगा...

आमीन(डरती हुई)- तू सच बोल रही है...

नौकरानी- जी मेम्साब...और मैने तो कई बार साब को वहाँ खड़े देखा है...

आमीन- क्क्..कब...

नौकरानी- जब भी साब सहर जाते है...तो उसके 1 घंटे के बाद...क्या है कि मैं उस टाइम दूसरे घर का काम निपटा कर निकलती हूँ....तो...

नौकरानी की बात सुनकर आमीन की सिट्टी-पिटी गुम हो गई...

आमीन जल्दी से बेडरूम मे भागी और खिड़की चेक की...जो खुली हुई थी...सिर्फ़ लटकी थी..लॉक नही...

आमीन को पलक झपकते ही सब बातें क्लियर हो गई....कि अली यहाँ 1 घंटे बाद क्यो आते है और यहाँ खड़े क्या देखते है...

 


आमीन का शक ये याद कर के और गहरा गया कि जिस दिन से उसने आज़ाद के साथ चुदाई सुरू की उसके कुछ दिन बाद से अली का व्यवहार बदल गया था....

पहले अली हफ्ते मे 1 बार तो चुदाई कर लेता था...पर कुछ हफ़्तो से उसने आमीन को छुआ भी नही था...

आमीन को सब समझ आ गया कि हो ना हो अली को सब पता है...और वो इस गम के साथ घुट-घुट के जी रहा है....

आमीन(मन मे)- ये मैने क्या किया...मेरे पति को धोखा दिया...वो भी इतने अच्छे पति को...

मुझे क्या हो गया था....इस सेक्स की तड़प ने मुझसे कैसा गुनाह करवा दिया...या अल्लाह ...

आमीन काफ़ी देर तक कमरे मे बैठी रोती रही....और नौकरानी अपना काम करती रही....

जब अली घर आया तो सीधा बेडरूम मे गया...और वहाँ जाते ही चीख उठा....

अली- आमम्मीईएन्न्णेणन्.......न्न्ंहिईीई...

आमीन ने अपने आपको मिटा दिया था ...उसकी बॉडी पंखे से झूल रही थी...

अली ये नज़ारा देख कर टूट गया....उसकी चीख सुनकर नौकरानी और आमिर भी वहाँ आ गये...और मस्त का महॉल छा गया.....

तभी अली को एक कागज दिखाई दिया...जो सुसाइड नोट था ...उसमे लिखा था कि....

""मैं ख़ुसनसीब थी कि मुझे आप जैसे शौहर मिले ...सरफ़राज़ और आमिर जैसे बच्चे मिले....

पर मैने अपने जिस्म की आग मिटाने को वो गुनाह कर दिया...जो मुझे नही करना चाहिए था....

आज तक मैं आपको धोखा देकर खुश होती थी...पर आज पता चला कि आप सब कुछ जान कर भी मुझे खुशियाँ देते रहे....

अब मैं अपनी गुनहगार आखो से आपकी आँखो मे नही देख सकती...इसलिए ये आँखे सदा के लिए बंद कर रही हूँ....

आप अपने बच्चो का ख्याल रखना...और हो सके तो मेरे मरने के बाद मेरे गुनाहो को माफ़ कर देना....

आपकी - आमीन....."'

ये पढ़ते ही अली फुट -फुट कर रो पड़ा...आमिर भी अली को देख कर रो रहा था....अली की दुनिया उजड़ चुकी थी....

थोड़ी देर बाद अली उठा और गुस्से मे आज़ाद के पास पहुँचा...और उसे वो लेटर पढ़ा दिया...

आज़ाद- ये सब क्या है भाई..

अली- भाई मत बोल हराम्जादे...वरना तेरी जान ले लूँगा...

आज़ाद- क्या हो गया तुझे अली..बात क्या है...

अली- धोखेबाज...अब मुझसे पूछता है....ये सब तेरी वजह से हुआ...तेरी वजह से वो मर गई...तेरी वजह से..

आज़ाद(गुस्से मे)- अली...क्या बक रहा है...मैने क्या किया...

अली- साले...तूने मेरी पीठ पीछे ..मेरी ही बीवी को अपनी रखेल बना डाला...मेरी दोस्ती को तमाचा मारा...और अब पूछता है कि क्या किया मैने...हाँ...

अली की बात सुनकर आज़ाद सकपका गया ..पर संभाल कर बोला...

आज़ाद- क्या बक रहा है तू...ज़रूर कोई ग़लतफहमी...

अली(बीच मे)- ग़लतफहमी नही...सब सच है...मैने अपनी आँखो से देखा....और अपनी फॅमिली के खातिर कड़वा घूट पी कर रह गया...पर अब नही...अब मैं तेरी जान ले लूँगा...तुझे सबके सामने नंगा कर दूँगा...धोखेबाज....

अली की आवाज़ सुन कर के सभी गाँव वाले इकट्ठा हो गये थे...जिससे आज़ाद और भी घबरा गया....

आज़ाद- अली...मेरी बात सुन...ज़रूर कोई...

आज़ाद ने अली को हाथ लगाया तो अली ने उसे धक्का दे दिया...

अली- दूर रह धोखेबाज....अब और नही...अब मैं तुझे सबके सामने नंगा करूगा...तेरे किए हर कांड के बारे मे सबको बताउन्गा...तू जिनके साथ मज़े लेता है ना...उनके मुँह से खुद कहलवाउँगा...और हाँ...मैने काफ़ी सारे सबूत इकट्ठा किए है..सब मेरे घर मे है....वो सबको बता दूगा....आज़ाद...अब तू गया...बस थोड़ा रुक जा...मेरी बीवी को दफ़ना दूं...फिर तुझे जिंदा गाढ दूँगा...समझा...

अली धमकी दे कर चला गया....और अपनी बीवी का अंतिम काम किया...मतलब दफ़नाया.....

कुछ दिन बाद....एक दिन आमिर रूम मे सो रहा था और अली आमीन की याद मे खोया हुआ था..कि तभी उसे आग की लपटें दिखाई दी...जो घर के बाहर से आ रही थी...

जब तक अली कुछ करता वो लपटें तेज हो गई ...अली ने भाग कर गेट देखा तो वो बाहर से लॉक था...

अली ने आमिर को उठाया और आग से बचाने की कोशिस मे लग गया...पर रास्ता कोई भी नही था....

धीरे-धीरे आग बढ़ती गई और देखते-देखते घर जलने लगा...सिर्फ़ चीखे सुनाई दे रही थी....

चीखे सुन कर लोग भागे...पानी डाला ..पर सब बेकार...

 


कुछ देर बाद चीखे शांत हो गई ...और उसके कुछ देर बाद आग पर काबू पा लिया गया...पोलीस भी आ गई...

पर अंदर से मिली 2 लाशे....अली और उसकी गोद मे लिपटा हुआ आमिर....और दोनो ही बुरी तरह जले हुए......बाकी सब खाक हो चुका था....

मैं- बस..बस...बस करो...अब मैं और नही सुन सकता.....

रिचा- क्यो नही सुन सकते...सच सुनने का शौक है ना तुम्हे....

मैं- हाँ है...पर अभी नही...मेरा सिर फट रहा है....अभी और नही...

रिचा- अब और कुछ बचा भी नही ..

मैं- मतलब...अभी सरफ़राज़ की बात तो आई नही...

रिचा- हाँ...आ ही गई थी...सुनो...बस थोड़ा और....

ये खबर सुनकर सरफ़राज़ गाँव आया...पर उसे यही बताया गया कि आग अपने आप लग गई थी...और वो भी ये मान गया था.....

पर गाँव मे दबी ज़ुबान ये बात चल पड़ी कि इसके पीछे आज़ाद का हाथ है...पर कोई आज़ाद के सामने ये बात नही बोल पाया....

आज़ाद ने पोलीस से मिल कर ये केस बंद करा दिया और चैन की साँस ली...क्योकि असलियत यही थी कि ये सब आज़ाद ने अपने गुनाह छिपाने को किया था....

फिर एक दिन अली के खास आदमी ने सरफ़राज़ को अली और आज़ाद के बीच हुई बहस के बारे मे बता दिया...और ये भी बता दिया कि उसके कुछ दिन बाद ही ये आग लगी ..मतलब सॉफ है...ये आज़ाद ने किया...

बस...तभी से सुरू हो गई सरफ़राज़ की दुश्मनी...तुम्हारे दादाजी की वजह से उसकी पूरी फॅमिली मारी गई...इसलिए वो भी तुम्हारी पूरी फॅमिली मिटाना चाहता है...बस...यही बात है....

मैं- क्या ये सब सच था....

रिचा- हर एक बात सच है...

मैं- ओके...मुझे अभी जाना होगा...

रिचा- और मेरी बेटी...

मैं- उसे ले कर ही आउगा....वेट करो...

फिर मैं वहाँ से उठा और अपनी कार से निकल गया....

मेरे जाने के बाद रिचा रिलॅक्स हो गई....और अपनी बेटी का इंतज़ार करने लगी....

लगभग 2ह्र के बाद रिचा की डोर बेल फिर से बजी...

रिचा खुश हो गई ..ये सोच कर कि उसकी बेटी आ गई...

पर गेट खोलते ही उसके गाल पर एक जोरदार थप्पड़ पड़ा और वो ज़मीन पर गिर गई...

रिचा ने संभाल कर गेट की तरफ देखा तो वो सहम गई...और डरते हुए बोली...

रिचा- त्त्त...तुम...पर...मारा क्यो....????????????????

इतना बोलते ही रिचा के गाल पर एक और थप्पड़ पड़ा और रूम मे थप्पड़ की आवाज़ गूँज उठी....

""कककचहााआटततटत्त्ताआआक्कककककककक.......""

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

रिचा के मुँह से फ्लॅशबॅक सुन कर मेरा माइंड गरम हो चुका था....

मेरा दिल ये मानने को तैयार ही नही था कि मेरे दादाजी इतनी जॅलील हरक़त कर सकते है....

जहाँ तक अली की बीवी का सवाल था....उसमे तो उसकी भी बराबर ग़लती थी...जितनी मेरे दादाजी की....

माना कि दोस्त की बीवी के साथ सेक्स करना ग़लत था...पर आमीन ने ही उनको इसमे आगे बढ़ने पर मजबूर किया....

क्योकि बिना औरत की मर्ज़ी के उसे कोई हाथ भी नही लगा सकता....हाँ...रेप ज़रूर कर सकता है...पर यहाँ तो सब उसकी मर्ज़ी से हुआ था....

अब दादाजी भी क्या करते....मर्द तो औरत का नंगा जिस्म देख कर लालची हो ही जाता है...उपेर से औरत की हाँ हो तो फिर कैसे रुक पायगा...

पर मेरा दिल ये मानने को तैयार नही था कि मेरे दादाजी ने अपने दोस्त और उसके बेटे को जिंदा जला डाला....

और इसी सवाल को दिल मे लिए मैं अपने सीक्रेट हाउस पहुँच गया....अपने सवाल का जवाब लेने....

सीक्रेट हाउस पर.........

जैसे ही मैं हाउस मे एंटर हुआ तो मेरे सामने मेरा आदमी एस आ गया...

मैं- आप यहाँ....इस वक़्त...

स- हाँ...फ्री था तो सोचा एक राउंड मार लूँ...

मैं- ओके...

स- क्या बात है...बड़े परेशान दिख रहे हो...

मैं- नही...ऐसा तो कुछ नही...

स- क्या हुआ...कहाँ से आ रहे हो...

मैं- रिचा के घर से....

स- ओह..तो ये बात है...उसी की किसी बात से मूड खराब है....वैसे क्या बका उसने...

मैं- जो भी बका...वो बहुत बुरा है....बहुत ही बुरा...

स- पहले बैठो...और मुझे पूरी बात बताओ....आओ बैठो...

फिर मैने स को सारी बात बता दी....जिसे सुनकर उसे भी हैरानी हुई...और उसने यही बोला कि पूरी सच्चाई जाने बिना किसी रिज़ल्ट पर मत पहुँचना....

मैं- यही जानने तो आया हूँ...उस बहादुर को कुछ पता होगा...

स- ह्म्म्म ...तुम बात करो...मैं निकलता हूँ...बाद मे बताना....और हाँ...अगर रिचा की बात थोड़ी सी भी ग़लत निकले...तो छोड़ना मत साली को...ओके

मैं- ह्म्म...

और फिर स निकल गया और मैं पहुँचा बहादुर के रूम मे...

बहादुर- अरे...छोटे मालिक...आप...

मैं- मुझे अंकित ही कहो तो अच्छा लगेगा मुझे ...वैसे आप कैसे हो...

बहादुर- बस कृपा है आपकी....मैं और मेरा परिवार ...दोनो सुरक्षित है....अरे..बैठिए ना...

मैं- नही...मैं बैठने नही आया...मुझे कुछ सवालो के जवाब चाहिए...

बहादुर- तो पूछिए ना....मुझे पता होगा तो ज़रूर बताउन्गा....

मैं- ह्म्म..तुम अली को तो जानते ही होगे...उसके बारे मे जो भी जानते हो..बताओ...

बहादुर- अली...हाँ ...अली तो आज़ाद साब के खास दोस्त थे...बहुत ही नेक स्वाभाव के....सीधे -सादे इंसान....

मैं- ह्म्म..और उनकी फॅमिली...

बहादुर- उसकी फॅमिली मे पत्नी और 2 बेटे थे....उनकी पत्नी भी उन्ही की तरह नेक दिल थी...बहुत ही सुलझी हुई...और छोटा बेटा भी अपने माँ-बाप की तरह था....जो भी उससे मिलता ..वो उसे पसंद ही करता था....हाँ...उनके बड़े बेटे को नही जानता...वो सहर मे रहता था...कभी-कभी देखा तो था...पर ज़्यादा नही पता....

मैं- अच्छा ये बताओ...की मेरे दादाजी और अली के बीच कोई दुश्मनी हुई थी क्या....

बहादुर- दुश्मनी....नही बेटा...वो दोनो तो एक दूसरे की जान थे...अली तो हमेशा तुम्हारे दादाजी के भले के लिए ही सोचते रहे....दुश्मनी तो दूर की बात थी....

मैं- जैसे कि....

बहादुर- तुम जानते हो बेटा...जब तुम्हारे पिता गाँव से चले गये ...तो अली ही थे जिन्होने उनका ख्याल रखा...और तुम्हारे माँ-बाप की शादी भी करवाई...और आज़ाद साब को भी मना लिया...कि वो अपने बेटे को माफ़ कर दे...

मैं- अच्छा...और जब मेरे डॅड बापिस गाँव आए....जब वो घटना हुई...जिसमे मेरी बुआ मारी गई...तब अली ने क्या किया ....

बहादुर- करते तो तब...जब वो वहाँ होते बेटा....

मैं- मतलब...वो कहाँ थे...

बहादुर- बेटा...उस घटना के कुछ समय पहले एक दुर्घटना मे अली अपनी बीवी और बेटे के साथ दुनिया से चल बसे थे....

मैं- क्या....कैसे...कब...???

बहादुर- तुम्हारे डॅड की शादी के बाद...एक दिन आज़ाद साब घर पर आराम कर रहे थे तभी एक आदमी भागता हुआ आया...और उसने बताया कि अली के घर मे आग लग गई है....

आज़ाद साब तुरंत अली के घर भागे...पर वहाँ जा कर देखा तो पूरा घर तेज लपटों से जल रहा था....

आज़ाद साब ने आग भुजवाने की हर कोसिस की...पर आग बुझते-बुझते देरी हो गई थी....

आग बुझने पर घर मे सिर्फ़ 3 जली हुई लाषे थी...अली, उनकी बीवी और बेटे की....सब खाक हो चुका था...आज़ाद साब की दोस्ती भी....

मैं- तो..तो क्या अली की बीवी भी अली के साथ ही मरी थी....

बहादुर- हाँ बेटा...एक ही दिन मे मियाँ-बीवी और बच्चा....सब एक साथ चले गये.....

मैं- ओह्ह...और उनके बड़े बेटे का क्या हुआ...वो कहाँ गया....

बहादुर- वो गाँव आया था...पर आज़ाद साब से बात भी नही की...साब ने उसे अपने साथ रहने को बोला...पर वो वहाँ से निकल गया....कहाँ गया...पता नही...पर सुना था कि वो अपने परिवार के लोगो की मौत को हत्या समझता है....

मैं- और आप क्या समझते है...ये हादसा था या हत्या....

बहादुर- हादसा ही था बेटा...और वजह सॉफ है...एक तो अली की किसी से दुश्मनी नही...और फिर आज़ाद साब के दोस्त....जिन्हे पूरा गाँव मानता था...तो उनके दोस्त को कौन नुकसान पहुँचायगा....ये हादसा ही था...

मैं- पर हादसे की कोई वजह तो होगी ही....

बहादुर- पोलीस के हिसाब से...उनके घर मे रखी पेट्रोल की कॅन से ये आग लगी...वही पास मे अनाज पड़ा था...तो आग फैल गई...फिर लाइट के तारों से पूरा घर जलने लगा....

मैं- पर अली को इतना सब होने पर ये पता क्यो नही चला...

बहादुर- अंदाज़ा ये था कि दोपहर को सब सो रहे होंगे...और जब तक नीद खुली...तब तक देर हो गई थी....

मैं- ओह माइ गॉड....ये बात बिल्कुल सही है ना...

बहदिर- हाँ..पर अचानक ये बात ...

मैं(बीच मे)- कुछ नही...आराम करो....वैसे आपकी बीवी और बेटी कहाँ है...

बहादुर- वो यही खेत मे है...आ रही होगी...आप बैठो मैं बुलाता हूँ...

मैं- नही..अभी मैं जल्दी मे हूँ..बाद मे मिलूँगा...आप भी आराम करो...

बहादुर की बात सुन कर मुझे रिचा पर बहुत गुस्सा आ रहा था....साली ने झूठ बोला मुझसे....सब झूठ...अब बताया हूँ रंडी को....आज तो तू गई रिचा ...

और मैने कार रिचा के घर पर दौड़ा दी....

 
रिचा के घर.........

जैसे ही रिचा ने गेट खोला तो मैने एक करारा थप्पड़ जड़ दिया उसे.....

रिचा- त्त्त...तुम...पर...मारा क्यो....????????????????

इतना बोलते ही रिचा के गाल पर एक और थप्पड़ पड़ा और रूम मे थप्पड़ की आवाज़ गूँज उठी....

""कककचहााआटततटत्त्ताआआक्कककककककक.......""

रिचा थप्पड़ खा कर डर तो गई थी...फिर भी गुस्सा दिखाते हुए बोल पड़ी....

रिचा- तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे हाथ लगाने की...हाअ...

इतना बोलते ही रिचा के गालो पर 3-4 थप्पड़ और पड़ गये ....और फिर रिचा रोते हुए गिडगिडाने लगी.....

रिचा- बस करो...प्ल्ज़....बस करो अंकित....प्ल्ज़....

मैं- अब अकड़ कम हुई कि नही....

रिचा- मुझे क्यो मार रहे हो...मैने क्या कर दिया...सब तो बता दिया....

मैं- अभी भी नही समझी....लगता है थोड़ी और मार चाहिए तुझे....

फिर मैने हाथ उठाया ही था तो रिचा लगभग पैरों मे गिरते हुए गिडगिडाने लगी....

रिचा- नही अंकित...प्लीज़...मारना मत...पर ये तो बता दो कि मैने किया क्या है...प्लज़्ज़्ज़्ज़.....

मैं- तो तू मेरे मुँह से ही सुनना चाहती है...हाँ...

रिचा- प्ल्ज़....बताओ ना...क्या ग़लती कि मैने....

मैं- तेरी ग़लती तो तुझे बताउन्गा ही...उससे पहले तू सरफ़राज़ को कॉल करेगी....वो भी मेरे सामने....अभी...

रिचा(डरते हुए)- क्क़..क्या...नही-नही...ऐसा मत बोलो....उसे ज़रा भी शक हो गया तो वो मुझे छोड़ेगा नही....

मैं- अच्छा....और अगर तूने मेरी बात नही मानी ...तो तेरे साथ तेरी बेटी को भी नही छोड़ूँगा....अब सोच ले....तू अकेले जाएगी या बेटी को ले कर....

रिचा- न...नही..मेरी बेटी को कुछ मत करना...उसकी तो कोई ग़लती भी नही...वो तो कुछ जानती भी नही...

मैं- ह्म्म..तो अब कॉल कर....

रिचा- अगर उसे शक हुआ तो...

मैं- तो तेरी बेटी बच जाएगी...तू अकेले मरना....अब कॉल कर....जल्दी...और जो मैं कहता हूँ...वो बोल...

फिर मैने रिचा को सब समझा दिया कि उसे क्या बात करनी है...और फिर ...मेरे कहने पर रिचा ने लाउड स्पीकर ऑन कर के सरफ़राज़ को कॉल किया....

( कॉल पर )

सरफ़राज़- हेलो....

रिचा- ह..हेलो ...कहाँ हो...

सरफ़राज़- इससे तुझे क्या....तू ये बता कि मेरे मना करने पर भी तूने कॉल क्यो किया....

रिचा- वो...वो मुझे ज़रूरी काम था...

सरफ़राज़- अच्छा...तो बोल..क्या काम आ पड़ा ..

रिचा- वो...वो अंकित...

सरफ़राज़(चौंक कर)- अंकित...अंकित का क्या हुआ....

रिचा- कुछ नही...पर वो यहाँ आया था...

सरफ़राज़- तेरे घर...पर किस लिए...कहीं कुछ गड़बड़ तो नही हुई ना...

रिचा- नही...गड़बड़ नही...वो तो बस...

सरफ़राज़- रुक क्यो गई...बस क्या...किस लिए आया था...

रिचा(मुस्कुरा कर)- मेरे हुश्न के दीदार के लिए...हहहे....

सरफ़राज़- ओह...तू तो है ही ऐसी चीज़..जिसके मुँह लग जाए वो पीछा नही छोड़ता...पर इसमे कॉल करने की क्या ज़रूरत थी....

रिचा- अरे नही...कॉल तो इसलिए किया...क्योकि मुझे लग रहा है कि उसे कुछ शक हो गया...शायद तुम पर...

सरफ़राज़- क्या मतलब...मुझ पर कैसे होगा...ऐसा क्यो लगा तुम्हे...बोलो...

रिचा- ज़्यादा तो कुछ नही बोला...पर बोल रहा था कि उस ट्रिप पर सम्राट ने जो हमला करवाया....उसमे किसी अपने का हाथ था...ट्रिप मे जो उसके साथ थे...उनमे से कोई...

सरफ़राज़- क्या बकती हो...वो तुमसे क्यो कहेगा...

रिचा- क्योकि वो मुझे अपना मानता है...इसलिए...

सरफ़राज़- अच्छा...पर तुझे तो पता है ना कि उस हमले से मेरा कोई लेना देना...

रिचा- सच बोलो...मुझसे तो झूट मत बोलो...

सरफ़राज़- झूठ...मैं झूठ क्यो बोलने लगा....अगर मैं उसे मारना चाहता तो कब का मार देता...पर सिर्फ़ उसकी दौलत हथियाने के लिए उसे और उसके बाप को जिंदा छोड़ रखा है...तू जानती तो है...

रिचा- ह्म्म...दौलत ले कर क्या करोगे...हाँ...

सरफ़राज़- दौलत तो तुम सब के लिए है...मैं तो बस उसके खानदान के हर सख्श को एक साथ जला कर मारना चाहता हूँ...

रिचा- जला कर क्यो...??

सरफ़राज़- भूल गई क्या...मेरी फॅमिली जल-जल के मरी...मेरे अब्बू, अम्मी..भाई...सब जल गये....इसलिए आज़ाद की फॅमिली के बचे हुए लोग जल कर ही मरेगे...उसी तरह...

रिचा- ठीक है...जो करना है करो....बस संभाल कर करना...ओके...

सरफ़राज़- तू ज्ञान मत दे...और अब मुझे कॉल मत करना...और हाँ...अपने काम पर ध्यान दे...बाइ...

रिचा- बाइ...

कॉल कट होते ही रिचा ने मेरी तरफ देखा और बोली...

रिचा- सुन लिया....अब बोलो...मैने क्या ग़लत कहा था....मुझे क्यो मारा....

मैं- क्योकि मुझे लगा कि तुमने झूठ बोला है...

रिचा- अच्छा...अब तो सुन लिया ना....मैने जो कहा था...वो सब सच था....एक-एक बात सच थी...

मैं- ह्म...

रिचा- अब भी कोई शक है तो मार दो मुझे ...पर मेरी बेटी को कुछ मत करना....

मैं- ह्म्म ..कोई शक नही...मैं चलता हूँ....और तुम्हारी बेटी जल्दी आ जाएगी...डोंट वरी....

फिर मैं वहाँ से निकल गया....पर मेरे माइंड मे उथल-पुथल मच गई थी...

समझ मे नही आ रहा था कि किसकी बात को सच मानु....रिचा की, बहादुर की या सरफ़राज़ की....

रिचा कहती है कि मेरे दादाजी की वजह से अली की बीवी ने सुसाइड की...फिर मेरे दादाजी ने अली और उसके बेटे को जिंदा जला दिया....

सरफ़राज़ भी यही कहता है कि उसकी फॅमिली जल कर मरी...और उसका ज़िम्मेदार वो हमारी फॅमिली को मानता है...मतलब रिचा सच बोल रही है....

पर बहादुर ने बताया कि ऐसा कुछ हुआ ही नही...अली की फॅमिली तो मेरे डॅड के वापिस आने के पहले ही ख़त्म हो चुकी थी...पर उसने भी वजह आग ही बताई....

एक बात तो पक्की है कि अली की फॅमिली आग से मरी...पर क्या वो आग किसी ने लगाई थी...या अपने आप लग गई....

क्या मेरे दादाजी इतने गिरे हुए है कि अपने दोस्त की फॅमिली को जिंदा जला दिया...वो दोस्त जो उनको अपनी जान से बढ़ कर मानता था....या इस आग मे भी कोई राज है....

कुछ भी हो...पूरा सच जाने बिना मैं किसी को ज़िम्मेदार नही मान सकता....

पर पूरा सच पता कैसे चलेगा....कौन बता सकता है कि असल मे हुआ क्या था....कौन....?????

मैं अपनी सोच मे डूबा ड्राइविंग कर ही रहा था कि मेरा फ़ोन बजने लगा....ये रक्षा का कॉल था....

आज जबसे मैं रिचा के घर आया...तब से ले कर अब तक रक्षा के कम से कम 50 कॉल आ चुके थे...

मैं(मन मे)- इस साली को क्या हुआ...एक तो वैसे ही दिमाग़ घूम गया और उपेर से ये....

मैने कॉल कट कर दी...पर थोड़ी ही देर मे फिर से कॉल आ गया....

मैं(चिल्ला कर)- क्या है...क्यो परेशान हो..हाँ...

रक्षा- आप जल्दी से रूबी के घर आ जाओ भैया...बहुत ज़रूरी बात है...

इससे पहले कि मैं कुछ कहता ...कॉल कट हो गई...

मैं- इन दोनो को ज़्यादा ही गर्मी है...आज मैं ऐसा हाल करता हूँ कि फिर मुझे बुलाने से पहले 10 बार सोचेगी...

एक तो दिमाग़ भन्नाया हुआ है...और उपेर से ये दोनो....चलो...इनकी गान्ड मे सारा गुस्सा निकालता हूँ....

और मैने रूबी के घर की तरफ कार दौड़ा दी......

 


रिचा के घर.........

मेरे जाने के बाद रिचा के चेहरे पर एक अजीब सी चमक आ गई थी....जो उसकी कामयाबी की थी....

रिचा अपनी कामयाबी पर बेहद खुश थी....अब उसे यकीन हो गया था कि उसकी बेटी जल्दी ही सही-सलामत उसके पास आ जाएगी....

फिर रिचा ने एक कॉल लगाया...उसके दूसरे बॉस को....

( यहाँ दूसरे बॉस को बॉस 2 लिख रहा हूँ )

( कॉल पर )

बॉस2- कितनी बार कहा कि मुझे कॉल मत किया करो...समझ नही आता क्या....

रिचा- अरे...बहुत ज़रूरी बात थी...वरना मैं कभी नही करती...

बॉस2- हुह...तो बोलो...क्या ज़रूरी बात है...

रिचा- आज तुम्हारे जाने के बाद अंकित आया था...

बॉस2- अंकित....किस लिए....

रिचा- बताती हूँ...सुनो....

और रिचा ने अपने और अंकित के बीच हुई सारी बातें बता दी....रोया की किडनॅपिंग से ले कर अली के फ्लॅशबॅक तक ..सब कुछ....

बॉस2- ओह गॉड...ये अंकित इतना शातिर निकला....तेरी बेटी को ही उठा लिया....

रिचा- हाँ...हमने कभी सोचा भी नही था कि ये इतना ख़तरनाक निकलेगा...

बॉस2- ह्म्म..पर अब ये सोचो कि अगर उसे सच्चाई पता चली तो तेरी बेटी का क्या होगा...और फिर तेरा...हाँ ..

रिचा- ये डर तो मुझे भी था...पर सरफ़राज़ की बात सुनकर अंकित को कोई शक नही रहा....अब वो सिर्फ़ सरफ़राज़ के पीछे जायगा....

बॉस2- ये अच्छा हुआ...पर कहीं सरफ़राज़ ने मुँह खोल दिया तो...उसे तो तेरी सारी हिस्टरी पता है...बस वो पता नही जो मुझे है...हाहाहा....

रिचा- जानती हूँ....इसी बात का तो फ़ायदा उठाया तुमने...नही तो...

बॉस2- नही तो क्या...सुन...मेरे सामने झुक कर ही रहना...वरना मेरा मुँह खुल जायगा...और फिर अंकित के साथ-2 , सरफ़राज़ भी तेरे पीछे लग जायगा....जानती है ना...

रिचा - जानती हूँ....पर ये छोड़ो...मेरी बात सुनो....आज मुझे ये बताओ कि तुम अंकित के पीछे क्यो पड़े हो...

बॉस2- कितनी बार बोला की टाइम आने पर बताउन्गा....अभी नही...

रिचा- पर वो टाइम कब आएगा..

बॉस2- बहुत जल्दी...बस आकाश की प्रॉपर्टी मिलते ही सब सामने आ जायगा....कोई भी पर्दे के पीछे नही रह पायगा....ना सरफ़राज़...और ना मैं....

रिचा- फिर...उसके बाद क्या....

बॉस2- फिर...फिर अंकित की फॅमिली खल्लास और तेरे गले की हड्डी सरफ़राज़ और रेणु भी ख़त्म....ओके..

रिचा- ह्म्म्मत...पर मेरी बेटी के आने के पहले कुछ मत करना...प्ल्ज़्ज़...

बॉस2- डोंट वरी...मेरी एक्शन को अभी टाइम है....तब तक शायद अंकित या सरफ़राज़ मे से एक ही बचेगा...और उसे हम मिटा देगे...ओके...

रिचा- ओके....और सूनाओ...

बॉस2- और की बच्ची...अब फ़ोन रख...मुझे काम है...तेरी तरह फ्री नही बैठा...

रिचा- हाँ...तुम बड़ा काम करते हो...वो आदमी क्या देखने को लगाए हो..हुउः...चलो बाइ...

और रिचा कॉल कट कर के सोचने लगी कि कही उसकी सच्चाई अंकित या सरफ़राज़ को पता चल गई तो उसका क्या होगा......

 


रूबी के घर...........

मेरे कार रुकते ही रूबी का गेट खुल गया और गेट खोलते ही रक्षा मुझे खीच कर अंदर ले गई...

मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था...पर मैं कंट्रोल किए रहा...

मैं- अब बोलो...क्यो परेशान हो...

रक्षा- आपको तो हमारा ख्याल ही नही...एक तो हमे इसकी आदत डाल दी और अब देखते भी नही...

मैं- अच्छा...सब मेरा ही कसूर है...ये नही कहती कि तुम दोनो की चूत ही फड़फदा रही थी....

रक्षा(मेरे सीने से लग कर)- यही सही....पर अब आप ही हमारी चूत की तड़प मिटा सकते हो...

मैं(मन मे)- ह्म...आज ऐसी तड़प मिटाउन्गा की तड़पना भूल जाओगी...

रक्षा- भैया...अब प्यास भुजा भी दो ना...

मैं- ह्म्म..तो आओ..दोनो मुझे तैयार करो...फिर फाड़ता हूँ तुम दोनो की....

मेरे कहते ही रूबी भी मेरे पास आ गई और दोनो ने मिल कर मुझे नंगा कर दिया और मेरे लंड और बॉल्स को बारी-बारी चूस -चाट कर खड़ा करने लगी......

रक्षा-उउउम्म्म्म...उूुुउउम्म्म्मम...उूुउउंम्म...उूउउम्म्म्म....

रूबी- सस्स्रररुउउउप्प्प्प...सस्स्रररुउउउप्प्प...उूउउम्म्म्ममम...आहह...सस्स्रररुउउप्प्प....उूउउम्म्म्म.....

थोड़ी देर मे ही दोनो ने मेरे लंड को पूरा तैयार कर दिया......

मैं- अब ज़रा अपनी गान्ड तो दिखाओ...आज तुम दोनो की गान्ड फाड़ुँगा....जल्दी...

मेरे कहते ही दोनो नीचे से नंगी हो गई और कुतिया बन कर अपनी गान्ड दिखाने लगी...

मैं- ह्म्म्मर...तो पहले रूबी की फटेगी...इसकी थोड़ी छोटी लग रही है...आज रूबी....

रक्षा- हाँ भैया....फाड़ ही दो इसकी मरी जा रही थी कब्से....

मैं फिर रूबी के पीछे आया और दो धक्के मार कर लंड को रूबी की गान्ड मे डाल दिया...

रूबी- आआअम्म्म्मममिईीईईईईई.........आाऐययईईई....

रक्षा- अब चिल्ला....तेरी अम्मी आ गई तो उनकी भी ऐसे ही फटेगी...क्यो भैया....

मैं- ह्म्म..बुला ले अम्मी को....यही फाड़ दूँगा....

रूबी- आअहह....उनकी बाद मे....पहले मेरी....आआहह...

और मैने कमर पकड़ कर ज़ोर दार ठुकाई सुरू कर दी....

रूबी- आअहह...मम्मी...देखो कैसा तगड़ा लंड है....देखो...आऐईइ...

रक्षा- हाँ आंटी....आप को बहुत मज़ा आएगा.....मन भर के चुदवाओगी....हहहे ...

थोड़ी देर तक मैं रूबी की गान्ड मारता रहा और रक्षा उसकी चूत मसल्ति रही....जिससे रूबी झड़ने लगी....

रूबी के झाड़ते ही मैने रूबी को हटा कर रक्षा को कुतिया बनाया और उसकी गान्ड मे एक ही धक्के मे लंड उतार दिया....

रक्षा- आआआ...बभहाऐयय्य्ाआआअ .....

रूबी- अब पता चला साली....अब मज़ा ले...ह्म्म्मष...

रक्षा- भैया...आआहह...मार दिया आपने तो...आआहह....

मैं- रूबी....इसकी चूत चूस...मैं इसकी फाड़ता हूँ. .

और मैने रक्षा की जोरदार गान्ड चुदाई सुरू कर दी....

रक्षा- आअहह...भैया....उउउंम्म..आहह...आअहह....

थोड़ी देर बाद रक्षा भी झाड़ गई....तो मैने रूबी को लिटा कर एक बार फिर से उसकी गान्ड मारना सुरू कर दी...

रूबी- आअहह...अम्मी...देखो ना....कितना बढ़ा लौडा है...आअहह....मज़ा आ गया ...उउउंम्म...

रक्षा- तू चुद ले फिर आंटी भी ले लेगी...क्यो भैया...आंटी को चोदोगे....

मैं- अभी बुला दे....चोद दूँगा उसे भी ...ईएहह.....

थोड़ी देर बाद रूबी दुबार झड गई और मैं रक्षा की गान्ड मारने लगा.....

रक्षा- आहह...आज तो...आअपँे....आहह....क्या हुआ...आआहह...

मैं- चुपचाप मज़े ले....यीहह...यीहह...ईएहह..

थोड़ी देर बाद रक्षा फिर से झड गई....और मैं भी झड़ने वाला था...

मैने गान्ड से लंड निकाला तो दोनो मेरे सामने मुँह खोल कर बैठ गई और मैने लंड रस की पिचकारी मार कर दोनो की प्यास बुझा दी...

मैं- अब खुश हो...अब मैं चलूं...

रक्षा-नही...अभी नही....

मैं- क्यो...

रूबी- एक खास काम है आपसे...

और दोनो हँसने लगी....

मैं- तो जल्दी बोलो ना....

पर इससे पहले कि रक्षा कुछ बोलती....मेरा फ़ोन बज उठा....ये फ़ोन ऑफीस से आया था....

मैं- हेलो....क्या हुआ...

सामने- आप ऑफीस आ जाओ...ज़रूरी काम है...

मैं- ओके..आता हूँ...

रक्षा- भैया....पर हमारा काम...

मैं- ह्म..अगर जल्दी फ्री हुआ तो आज ही आउगा...वरना फिर कभी...ओके..

रूबी- आज ही आ जाना प्ल्ज़ ...

मैं- ओके...आइ विल ट्राइ....

थोड़ी देर बाद मैं रेडी हुआ और वहाँ से निकलने लगा....तभी मुझे ऐसा लगा कि कोई मुझे देख रहा है....

जब मैं पीछे मुड़ा तो वहाँ कोई नही था...पर मेरे सामने एक पिक्चर लटकी हुई थी...दूर, अंदर वाले रूम की दीवाल पर...

मुझे वो पिक्चर कुछ जानी-पहचानी लगी....मैं पास जा कर देखता...पर मुझे जाना था....

मैने सोचा कि बाद मे देख लूँगा और वहाँ से निकल गया.....

 
Back
Top