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चूतो का समुंदर



अगली सुबह फिर से मेरी आँख अनु के जगाने से खुली....अनु ने मुझे जगाया और प्यारा सा किस करके निकल गई....

मैं भी रेडी हो कर नीचे आ गया....

आज सब नाश्ता कर चुके थे क्योकि मैं लेट जगा था...

नाश्ता करने के बाद मैं आंटी को बोलकर पारूल के साथ अपने घर निकल गया....

हम जैसे ही घर मे आए तो सविता अपने बेटे के साथ कहीं जा रही थी...साथ मे रश्मि भी जा रही थी....

मैं- कहाँ जाने की तैयारी है...???

सविता- वो...वो बेटा ..एक पहचान वाले के घर कथा है..वही जा रहे है...

मैं- तो इसमे इतना हड़बड़ाने की क्या बात है ..जाइए ...और रश्मि तुम भी जा रही हो ...???

रश्मि- जी सर...

मैं- ओके...रेखा कहाँ है...?

सविता- वो यही है...आप अचानक कैसे...कोई काम है क्या...??

मैं- क्यो..अब मैं अपने घर मे काम से ही आउगा क्या...

ये बात मैने गुस्से से बोल दी...और सब सहम गये....तभी अंदर से रेखा आ गई...

रेखा- अरे नही सर...आपका घर है...कुछ भी कर सकते है आप...

सविता- हाँ बेटा ..मेरा मतलब वो नही था...मैं तो ये कह रही थी कि आपके आने का पता होता तो हम जाना केन्सिल कर देते...

मैं- कोई नही..आप जाओ...रेखा है ना यहाँ..और पारूल भी है मेरे साथ....

सविता- ओके...हम जल्दी आते है...

और सविता, रश्मि और अपने बेटे के साथ निकल गई...हरी भी उनके साथ गया....

रेखा- सर...कॉफी पिएगे या कुछ और प्लान है...और मुस्कुरा दी...

मैं- ह्म्म्मम...अभी कॉफी पिलाओ...और एक पार्सल आया था...वो लाओ...

रेखा- हाँ..वो उस रूम मे है...लाती हूँ..

मैं- रूको....पारूल तुम जाओ उस रूम मे और उसमे रखी हुई ड्रेस ट्राइ कर लो...कोई प्रॉब्लम हो तो बताना....रेखा तुम कॉफी बनाओ....

पारूल ड्रेस ट्राइ करने रूम मे गई और रेखा खिचन मे...और मैं कॉफी का वेट करने लगा....

थोड़ी देर बाद कॉफी आई और ख़त्म कर के मैने रेखा को बोल दिया कि तुम पारूल के साथ रहना...खाना बनाओ...और मुझे कोई डिस्टर्ब नही करेगा....

मैं रेखा को समझाकर अपने रूम मे आ गया और मैने रूम लॉक करके डाइयरी ली और बेड पर आ गया....

जैसे ही मैं डायरी ओपन करने वाला था तो मेरा फ़ोन रिंग होने लगा....

मैने देखा कि ये तो अननोन नंबर. है...फिर मैने कॉल पिक की...

(कॉल पर )

मैं- हेलो....कौन...???

अननोन- हाई...हाउ आर यू ???

ये आवाज़ एक लड़की की थी पर कौन हो सकती है ???

मैं- आइ एम फाइन...बॅट सॉरी मैने आपको पहचाना नही...

अननोन- अरे...तो पहचानो....अब तो काफ़ी टाइम हो गया...???

मैं- टाइम हो गया...कैसा टाइम...सॉफ- सॉफ बोलो...

अननोन- ह्म्म..तो मैं कह रही थी कि लास्ट टाइम भी आपने मुझे नही पहचाना था...और आज भी नही....

मैं- तो बताइए ना कि कौन हो आप..??

अननोन- नही...आप जब तक पहचान नही पाते तब तक मैं नही बताउन्गी...

मैं- ओके..तो रखो...दिमाग़ मत खाओ...

(मुझे डाइयरी पढ़ के अपनी फॅमिली के बारे मे जानना था और ये बता नही रही थी कि कौन है...तो मुझे गुस्सा आ गया)

अननोन- गुस्सा मत करो...याद करो...आप हम से मिले हो...बात भी की...और हम ने कुछ कुछ भी किया था...जिसका अन्सर भी माँगा था...

मैं- ओके..याद करूगा...याद आएगा तो बता दूँगा...

अननोन- ओके...पर इस बार आपके पास सिर्फ़ 4 दिन है...वरना उसके बाद मैं आपसे कभी बात नही करूगी...और ना आपको मिलुगी...बब्यए

मैं- ओके बाइ...

मेरे बाइ बोलने के पहले ही उसने गुस्से से फ़ोन कट कर दिया....

और अब एक न्यू टेन्षन दे दी....कि कौन हो सकती है ये..??

उसकी बात सोच कर मुझे याद आया कि एक बार पहले भी इस का कॉल आया था...और तब भी मैं इसे पहचान नही पाया था ...

पर ऐसा कौन है जिससे मैने बात की...कोई कुछ पूछा ..और आन्स भी माँगा....आख़िर कौन है...

इस कॉल के बाद मैं डाइयरी को भूल कर उस अंजान लड़की के बारे मे सोचने लगा...कि ये कहाँ से आ गई....

थोड़ी देर सोचने के बाद भी मुझे कुछ याद नही आया और मैने गुस्से से हाथ झटका....

 
मेरा हाथ झटकने से डाइयरी मेरी गोद से बेड पर गिर गई और मेरा ध्यान डाइयरी पर वापिस आ गया....

फिर मैने उस लड़की के बारे मे बाद मे सोचने का फ़ैसला किया और फोकस अपनी डाइयरी पर किया और डाइयरी को उठाकर खोला...

फिर मैने डाइयरी पढ़ना सुरू किया...जहाँ से उस दिन छोड़ दी थी..........

चलो सबसे पहले मैं अपनी असलियत तुम्हे बताता हूँ……

मेरा नाम है मोहन..

और मैं तुम्हारी फॅमिली के काफ़ी करीब हूँ....मैं तुम्हारे दादाजी के घर काम करता था...फिर उन्होने मुझे तुम्हारे डॅड का ड्राइवर बना दिया था....

मैं तुम्हारे डॅड के साथ बहुत समय तक रहा हूँ....जब वो कॉलेज मे पढ़ते थे...तब भी मैं उन्ही के साथ सहर मे रहता था....

सबसे पहले मैं तुम्हे तुम्हारी फॅमिली से इंट्रोड्यूस कराता हूँ....

तुम्हारी फॅमिली ***** गाओं मे रहती थी....( यहाँ मैं गाओं के नाम की जगह गाओं लिखुगा)

मिस्टर. आज़ाद मल्होत्रा (तुम्हारे दादाजी)- आज़ाद गाओं के जाने- माने रहीस लोगो मे से एक है....पैसा होने की वजह से इनकी जान- पहचान बड़े-2 नेताओ और बिज़्नेस मॅन के साथ थी....

आज़ाद ने गाओं के विकास के लिए हमेशा काम किया था...और एक फॅक्टरी भी खोली..जिससे गाओं के लोगो को रोज़गार मिल गया....उनके नेक और अच्छे कामो की वजह से गाओं के लोग उन्हे बहुत मानते थे और पूजते भी थे....

तुम्हारे दादाजी बहुत ही सरल स्वाभाव के थे....पर उनका एक रूप और था....जिसमे वो काफ़ी आय्याश और आसिक मिज़ाज थे....

फिर भी वो गाओं के लोगो के लिए मसीहा थे....

मिसेज़. रुक्मणी(दादीजी)- ये बहुत सरल और सुशील महिला थी...इन्होने भी गाओं के विकास मे अपने पति के साथ हाथ बँटाया...पर भगवान ने इन्हे वक़्त के पहले ही अपने पास बुला लिया....ये अब इस दुनिया मे नही रही...

आकाश मल्होत्रा(डॅड)- इन्हे तो तुम जानते हो...पर इनके भी कई राज है..जो तुम्हे नही पता....इनके बारे मे कुछ राज मुझे भी पता है....जो इस डाइयरी से पता चल जाएगा.....

अलका मल्होत्रा(मोम)- इनके बारे मे तुम्हे मैं नही बता पाउन्गा..हाँ पर उस सख्स का नाम बताउन्गा जिस से तुम अपनी मोम के बारे मे जान पाओगे...

अरविंद मल्होत्रा(तुम्हारे चाचा जी)- इनकी ख्वाहिसे ज़यादा नही है..ये ज़्यादा सोचते भी नही....किसी भी बात को बिना सोचे समझे मान जाते है...और किसी के बारे मे जो राय कायम कर ली उसी पर टिके रहते है.....

ये अपने आप मे कुछ नही करते बस अपने पिता के काम मे ही हाथ बटा देते है...या यू कहूँ कि अपने पिता की परछाई मे जीते है....

ये भी अपने पिता की तरह रंगीन मिज़ाज है..पर डरते ज़्यादा है...

सुजाता मल्होत्रा (तुम्हारी चाची)- ये गाओं की लड़की थी....बहुत ही भोली दिखती है...पर है नही....

इनके बारे मे अगर ये कहूँ कि ये चालू है तो भी कम होगा...

एक बात इनकी खास है कि ये मर्दो को अपने काबू मे करना बहुत अच्छी तरह से जानती है....

आकृति मल्होत्रा(तुम्हारी बड़ी बुआ)- ये घर की बड़ी बेटी है...बहुत गंभीर स्वाभाव की ....

इनके बारे मे ये खुद ही बता सकती है और कोई नही....इनके दिल मे कई राज छिपे हुए है.....(ये रेणु दी की मम्मी है)

सुभाष(तुम्हारे फूफा जी)- इनके बारे मे कुछ ज़यादा पता नही....लोग कहते है कि ये आक्सिडेंट मे मर चुके है...पर कुछ कहते है कि गायब हो गये है...इनके बारे मे किसी को कुछ पता नही....इनकी लाश भी नही मिली थी...

आरती मल्होत्रा (तुम्हारी छोटी बुआ)- ये घर की सबसे छोटी बेटी है...सबकी प्यारी...

खास कर तुम्हारे डॅड की लाडली थी....ये काफ़ी भोली और ज़िद्दी थी...और बेहद खूबसूरत....

धर्मेश(तुम्हारे छोटे फूफा जी)- ये तुम्हारे डॅड के बेस्ट फ्रेंड भी थे....काफ़ी रंगीन मिज़ाज ...

तुम्हारे छोटे फूफा जी और छोटी बुआ अब इस दुनिया मे नही रहे....इनकी मौत के बारे मे बताने के किए मैं सही सक्श नही हू.....आपको इंतज़ार करना होगा....

इसके अलावा भी कुछ सदस्य है तुम्हारे परिवार मे...लेकिन वो मैं नही बता सकता...उनके बारे मे आपको...आपका कोई फॅमिली मेंबर ही बता पाएगा...

आप सोच रहे होगे कि मैने आपसे कुछ बाते क्यो छिपाई है....पर मैं मजबूर हूँ....

हो सकता है कि आपको सुनकर झटका लगे ...और मैं नही चाहता कि आपको इस टाइम कोई भी झटका लगे.....

अब आप थोड़ा तो अपनी फॅमिली के लोगो को समझ गये होगे....पर एक बाद याद रखिए कि आपके फॅमिली मेंबर्ज़ के दूसरे रूप भी है...और हर किसी के साथ कुछ ना कुछ राज़ जुड़ा हुआ है....

उन्ही की वजह से आज आपके बहुत से दुश्मन है....जिनमे कुछ आपको बर्बाद करने को घूम रहे है....और कुछ आपको मिटाने का....

आपकी लाइफ को कुछ टाइम तक खतरा नही होगा...इसका भी एक रीज़न है.....

लेकिन आपके पास टाइम कम है....

इस टाइम मे आपको ना सिर्फ़ अपने दुश्मनो को पहचान के उनसे निपटना है...बल्कि अपनी फॅमिली और अपने दाद की दूरी का पता भी करना है....

आप सोच रहे होगे कि दूरी कैसी..???

तो इसका अन्सर आपको खुद से मिल जाएगा...बस एक सवाल का जवाब दे कर....

आप ये बताइए कि किसी इंसान के घर मे अगर उसके माँ- पिता...भाई- बेहन की फोटो ही ना हो तो इसका क्या मतलब होता है....

क्या आपने कभी सोचा कि आपके घर आपके दादा- दादी की भी फोटो क्यो नही...???

आपकी बुआ की फोटो क्यो नही...और क्यो आपकी बुआ...आपके पिता से बात भी नही करती....क्यो आपकी बुआ आपसे भी बात नही करती....????

क्यो आपके डॅड आपके ननिहाल नही जाते और ना ही उन सब से बात करते है...जबकि आप तो पूरी छुट्टियाँ वहाँ बिताते है ?????

क्यो आपके डॅड कभी आपसे अपने मोम- डॅड की बात नही करते ?????

और पेज ख़त्म हो गया.....

(इतने सारे प्रश्न पढ़ के मेरा माइंड सच मे हिल गया....

मैं सोचने लगा की इस इंसान ने जो लिखा है वो सब सच है....ये सब मैने कभी क्यो नही सोचा...???

पर ये इंसान ये सब कैसे जानता है...और जानता है तो रीज़न भी जानता होगा....शायद आगे लिखा हो...)

और मैने पेज पलटा कर डाइयरी का दूसरा पेज पढ़ने लगा....

अंकित, मुझे पता है कि तुम्हे झटका लगा होगा..पर मेरी एक बात मानना कि अपने डॅड से इस बारे मे कुछ मत पूछना....वो काफ़ी मुस्किल से संभले हुए है....फिर से टूट सकते है...

और तुम भी अभी अपनी फॅमिली के बारे मे ज़्यादा मत सोचना...बस सही टाइम का वेट करना.....

अभी तुम्हारे सामने सबसे बड़ी प्राब्लम है तुम्हारे दुश्मन.....

जिनमे से मैं कुछ को जानता हूँ पर सब को नही....

मुझे ऐसा लगता है कि तुम्हारे सारे दुश्मन एक साथ हो गये है....और तुम्हारे खिलाफ साज़िश कर रहे है....

पर इन सबका मास्टर माइंड या कहूँ कि लीडर....इसका पता नही चल पाया....

मैं इस सहर मे इसी लिए आया था कि तुम्हारे सारे दुश्मनो को पहचान कर तुम्हे बता दूं...और फिर हम साथ मिल कर उन्हे पकड़ सके....पर ऐसा नही हो पाया.....

अब मैं यही उम्मीद करूगा कि तुम जल्द से जल्द अपने सारे दुश्मनो को पहचान लो....

तुम ये सोच रहे होगे कि तुमने जब कुछ किया नही तो तुम्हारे दुश्मन कैसे बन गये....

तो मैं बताता हूँ.....लोग कहते है कि अपने पुर्वजो के कारनामो की सज़ा हमे भुगतनी पड़ती है...वैसा ही तुम्हारे साथ हुआ है...

अभी शायद तुम समझ नही पाए होगे...पर आगे-2 समझ जाओगे...

अब मैं कुछ लोगो के बारे मे बताने जा रहा हूँ...जिन पर मुझे शक है...और कुछ पर शक कन्फर्म भी हो गया है.....

आपके दुश्मनो मे सिर्फ़ मर्द ही नही बल्कि औरते भी है....और सब के अपने-2 साथी भी है...

इनमे से एक प्यादा है दीपा....इसके बारे मे मुझे अभी पता चला....जिसे मैने दो लोगो से पैसे लेते हुए देखा और उनकी बाते भी सुनी...

( ये उसी दिन की बात है जब मैने दीपा को दो नकाबपोस से पैसे लेते हुए देखा था)

( अब उनकी बाते उन्ही की ज़ुबानी...यहाँ नकाबपोस मर्द और औरत को मैं न न्ड फ लिख रहा हू...)

दीपा- आ गये तुम लोग...कितनी देर कर दी...

म- वो छोड़....ये बता क़ी बुलाया क्यो...??

दीपा- पैसा और क्या...

फ- फिर से...तू काम तो करती नही..बस पैसा मांगती रहती है....

दीपा- देखो...मुझे जो काम करने कहा था वो कर दिया...उसके साथ चुदाई तक कर ली...ताकि उसका भरोशा जीत पाऊ....

म- चुदाई तो तू किसी से भी करवा लेती है...साली रंडी...

दीपा- चुप कर...अगर मैं रंडी तो तू कौन जो साला मेरी चूत के दम पर उसे फसाना चाहता है...

म- तेरी तो..

फ(बीच मे)- बस...चुप रहो....दीपा तू अपना काम पूरा कब करेगी...???

दीपा- जल्द से जल्द...बस थोड़ा टाइम और दो...उसके बाद उसे उसके बाप के खिलाफ करना सुरू कर दूगी...मेरी उंगलियो पर नचाउन्गी...

फ- ओके...तो अभी जाओ....15 मिनट मे चौपाटी पर हम पैसे लेकर आ जाएगे...और याद रखना...हमारे पास टाइम कम है...उसे अपना गुलाम बना....वैसे भी..मैने दूसरो को भी इसी काम मे लगा रखा है...पर तुझसे ज़्यादा उम्मीद है....बस भरोशा मत तोड़ना....

दीपा- डोंट वरी....काम हो जाएगा...बस पैसे दे जाना...ओके...अब मैं चलती हूँ...चौपाटी पर मिलती हूँ....

दीपा वहाँ से चली गई तो उसके बाद....

म- तुमने मुझे रोका क्यो...साली कितना बोलने लगी है ....

फ- बोलने दो...बस हमारा काम हो जाए फिर इसे निपटा देगे...यही बॉस का आदेश है...अब चलो...उसे पैसे देने है....

थोड़ी देर बाद वो दोनो चौपाटी पर आ कर दीपा को पैसे दे कर निकल गये.....

............. ............ ............. .............

 
पेज ख़त्म हो गया और गुस्से से मेरी आँखे लाल हो गई....

दीपा का नाम पढ़ते ही मेरा खून खौलने लगा था..जो मेरी आँखो मे झलकने लगा....

मैने गुस्से मे अपने कवर्ड से पिस्टल निकाली और दो लोगो को कॉल किया और घर से निकल गया....

मैं गुस्से मे कार ड्राइव करके सहर के बाहर नदी पर बने पुराने पुल पर पहुच गया....

थोड़ी देर मे वहाँ एक और कार रुकी और दीपा नीचे उतरी....

दीपा- यहाँ क्यो बुलाया ...इतना अर्जेंट....

मैं(दीपा की तरफ आँखे दिखाते हुए)- साली...मेरे खिलाफ काम करेगी...मेरे दुश्मनो से मिलकर मुझे नुकसान पहुचाएगी.....आज मैं तुझे ख़त्म कर दूगा...

दीपा मेरी आँखे और मेरे हाथ मे गन देख कर डर गई और मेरी बात सुनकर सब समझ गई कि मुझे उसके बारे मे पता चल गया है.. .

दीपा ने पलक झपकते ही अपने पर्स से पिस्टल निकाल ली...

मैने अपनी गन उस पर तान दी और दीपा ने अपनी गन अपनी कनपटी पर रख ली....

मैं- ये क्या कर रही है...पहले मेरे सवालो का जवाब दो...

दीपा- न्णकन्न्...नही..एम्म...नही बचूगी...मैं...कुछ नही बोल सकती....मजबूर हूँ प्ल्ज़्ज़.....

मैं- देखो...मुझे सब बता दो...मैं सब संभाल लूगा...बिलिव मी....

दीपा- नही...मैं जिनके लिए काम करती हूँ वो बहुत ख़तरनाक है....नही छोड़ेंगे मुझे...और तुम्हे भी....

मैं- नही ...कुछ नही होगा...मेरी बात सुनो....

दीपा और मैं बाते करते हुए अपनी जगह से मूव हो गये थे...और दीपा अब पुल के एंड पॉइंट पर थी...नीचे भरी हुई नदी बह रही थी....

दीपा- हमारी डील हुई थी...."नो लूस एंड्स"....सॉरी.......

मैं- नही..नही...नहियिइ.........

और गोली चलने की आवाज़ के साथ चीखने की आवाज़ गूज़ गई....

दीपा- आआआआहहााआ.......

मैं- द्दीईप्प्प्प्पाआ........

और दीपा चीखते हुए पुल से नीचे नदी मे गिर गई.............

जब मैं वापिस अपने घर आया तो मुझे हॉल मे पारूल मिल गई...और मुझे देखते ही बोली....

पारूल- भैया....आप कहाँ गये थे...???

मैं(पारूल की आँखो मे देखते हुए)- वो..मैं....थोड़ा काम था....मुझे नीद आ रही है सोने जा रहा हूँ.....

पारूल- भैया....कोई परेशानी है क्या...???

मैं- ना..नही तो....बस नीद आ रही है....

पारूल- पर आपकी आँखे....

मैं(बीच मे ही बोल पड़ा)- सोने जा रहा हू...कोई डिस्टर्ब ना करे...समझी...

पारूल- ह्म्म्मो..

और मैं तेज़ी से अपने रूम मे आ गया और बेड पर लेट गया....वहाँ नीचे पारूल मेरी हालत देख कर सोच मे पड़ गई....

पारूल(मन मे)- भैया की आँखो से लग रहा था कि इन्हे कोई बड़ी टेन्षन है...पर मैं कैसे पुच्छू....थोड़ा रेस्ट कर लेने दो..फिर बात करूगी......

रूम मे आकर मैं लेट तो गया पर मेरी आँखो मे अभी भी गुस्सा भरा हुआ था....मैं सोच कर परेशान था कि आख़िर दीपा ने ऐसा क्यो किया....???

मैने तो दीपा का कुछ बुरा नही किया...चुदाई के लिए भी वही मेरे पास आई थी.....फिर क्यो....???

कहीं ऐसा तो नही कि जो डाइयरी मे लिखा है वो ही सच है ...कि मैं अपनी फॅमिली वालो की वजह से इस मुसीबत मे फसा हूँ...

कुछ भी हो पर ये पक्का हो गया कि ये डाइयरी लिखने वाले का इन्फ़ॉर्मेशन झूठा नही है.....इसकी दीपा के बारे मे सोच सही निकली...मतलब आगे भी जो लिखा है वो सच ही होगा....

यही सोच कर मैने डाइयरी पढ़ने का डिसाइड किया...और मैने फिर से डाइयरी ओपन की और आगे पढ़ने लगा.....




डाइयरी मे आगे.....

तो जैसा कि तुमने पढ़ा कि किस तरह मैने दीपा के बारे मे जाना....

इन बातों से एक बात तो सॉफ है कि दीपा सिर्फ़ पैसो के लिए काम कर रही थी....पर असली दुश्मन कोई और ही है....

मैने उन दोनो नकाबपोसो को देखा नही...शायद उनमे से कोई मैन दुश्मन हो...या ये भी हो सकता है कि वो भी दीपा की तरह किसी के लिए काम कर रहे हो....

वेल जो भी हो...तुम्हे हर एक को बेनकाब करना होगा....तब ही तुम्हे मैन मास्टरमाइंड मिलेगा.....

मुझे हर एक सक्श पर डाउट है जो आपके करीब है..और जो आपके करीब होते जा रहे है....

वो चाहे संजू की फॅमिली हो या कामिनी की या वो जिनके साथ आपके रीलेशन है...

बस इतना समझ लो कि आप किसी पर भरोसा नही कर सकते....

आपके पास अपने दुश्मन ढूड़ने का सबसे बेस्ट तरीका यही है कि जो चल रहा है वो चलने दो...बस सतर्क हो कर.....

क्योकि सफाई करने के लिए खुद के हाथ कीचड़ मे डालने ही पड़ते है.....

अब मेरा दूसरा सबसे ज़्यादा शक है कामिनी पर....हाँ वही कामिनी जिसके घर आप शादी मे गये थे....

आप खुद ही सोचिए कि बिना किसी पहचान के ही कामिनी आपके पास चुदाई करने क्यो आई...???

आज की दुनिया मे बिना किसी फ़ायदे के कोई कुछ नही करता...इसलिए मेरा शक ज़्यादा घहरा हुआ कामिनी पर....

 


आप सोच रहे होगे कि मुझे कामिनी के साथ चुदाई का कैसे पता चला तो आपको बता दूं कि मेरे भी कुछ प्यादे है जो आपके चारो तरफ फैले हुए है...और आप की हर हरकत पर नज़र रखते है....

अब जबकि मैं दुनिया मे नही रहा तो वो सब प्यादे मेरी बेहन को सब बताएँगे....

अब आप मेरी बेहन के बारे मे मत सोचना....वो सही टाइम पर आपके सामने आ जायगी...तब तक वो आपके उपर नज़र रखेगी....

यहाँ मेरी एक अड्वाइज़ है...मेरे शक के हिसाब से आपको कामिनी की असलियत पता करनी चाहिए और उसके लिए आपको उसके और करीब जाना चाहिए.....

उसके लिए बेस्ट ऑप्षन है उसके घर की लड़कियाँ....वो दिल से भोली है और शायद कामिनी के इरादो से अंजान है...तो उन्हे अपने बस मे करो....

अब मैं आपको आपकी फॅमिली की वो कहानी सुनाता हूँ जब मैं उस फॅमिली मे शामिल हुआ था.....

पेज एंड.....





जैसे ही मैने पेज पलटने का सोचा तो रूम के गेट पर नॉक हुई....

मैं- कौन है...???

पारूल- मैं हू भैया....

मैं- कुछ काम था क्या....

पारूल- जी भैया....क्या थोड़ी देर के लिए मैं आ जाउ अंदर...???

मैं डाइयरी पढ़ना चाहता था...पर पारूल को मना भी नही करना चाहता था....वैसे भी मैं थोड़ी देर पहले उससे बड़े अजीब ढंग से बात की थी...शायद वो मेरी हालत देख कर टेन्षन मे होगी....

यही सोच कर मैने डाइयरी छिपा दी और और गेट खोल दिया....

फिर मैं और पारूल बेड पर बैठ गये....

मैं- क्या हुआ बेटा...???

पारूल- वो..भैया....आप ठीक हो ना...???

मैं- हाँ...पर तू ऐसे क्यो पूछ रही है....??

पारूल- भैया आपकी आँखो को देख कर....

मैं- मेरी आँखो मे क्या है...???

पारूल- वो भैया...मुझे लगा कि....

मैं- चुप क्यो हो गई....बोलो...क्या दिखा मेरी आँखो मे...???

पारूल- भैया...आपको कोई टेन्षन है...

मैं- ह्म्म..तो तुझे टेन्षन दिख रही है..मेरी आँखो मे...???

पारूल- ह्म्म...

मैं- हाँ...कुछ टेन्षन तो है...पर तू टेन्षन मत ले....

मैं(मन मे)- ये मेरी आँखो से मुझे समझ गई...मेरे दिल का हाल जान गई....इस से मिले अभी टाइम ही कितना हुआ...पर ऐसा लगता है कि ये मुझे सालो से जानती है...

मैं सोचते हुए पारूल को एक तक देख रहा था...मुझे ऐसे घूरते हुए देख कर पारूल ने मेरे सामने चुटकी बजा कर बोला....

पारूल- भैया...भैया....क्या हुआ. .

मैं- हूउ...कुछ नही....अब तू जा....

पारूल- भैया..क्या टेन्षन है...मुझे बताइए....

मैं(मन मे)- तुझे नही बता सकता बेटा...ये मेरी प्राब्लम है...मुझे ही सॉल्व करनी होगी....

मैं(थोड़ा तेज आवाज़ मे)- बोला ना जा यहाँ से....

मेरी आवाज़ सुनते ही पारूल डर गई और उठ कर खड़ी हो गई...और अपना चेहरा दूसरी तरफ कर के बोली...

पारूल- ओके भैया....आपकी सग़ी नही हूँ ना....मैं कौन होती हूँ पूछने वाली...माफ़ कर देना....

और जैसे ही पारूल जाने लगी तो पता नही क्यो मैने उसका हाथ पकड़ लिया....

मैं- सॉरी बेटा....मैं पता नही कैसे...पर मुझे ऐसे नही बोलना चाहिए था...

पारूल-(बस सुबकने लगी)

मैं- सॉरी बेटा...तू भले ही मेरी सग़ी ना हो....पर तू मुझे उससे भी ज़्यादा प्यारी है...

मैने पारूल को अपने साइड खींच कर अपनी गोद मे बैठा लिया और जैसे ही उसका चेहरा अपनी तरफ किया तो वो ज़ोर से रोने लगी ....उसके आँसू उसके गाल से नीचे तक जा रहे थे और मुझे ये देख कर अपने आप पर गुस्सा आ रहा था.....

मैं- बस बेटा...चुप हो जा...सॉरी...

और मैने पारूल को अपने गले से लगा लिया.....और पारूल और तेज सुबकने लगी...

मैं(पारूल के सिर पर हाथ फिराते हुए)- बस बेटा चुप...बस....

पारूल- मैं आपसे गुस्सा नही...बस आपको टेन्षन मे नही देख पाई....सॉरी मुझे कहना चाहिए...मैने ही ग़लत टाइम पर आपसे सवाल किया...

मैं- तू चुप हो जा बस....तेरी ग़लती नही...मैं ही टेन्षन मे ज़्यादा बोल गया....

थोड़ी देर तक मैं पारूल को गले लगा कर उसे शांत करता रहा और पारूल चुप हो कर मेरी बाहों मे खो गई...

मैं- पारूल...पारूल....

पारूल- ह्म्म्मप...

मैं- अब मुझे कॉफी मिलेगी...मेरा सिर दर्द हो रहा है....

पारूल- ह्म्म..अभी लाई और आपका सिर दर्द भी मिटा दुगी ओके....

और पारूल अपना चेहरा सॉफ कर के नीचे चली गई और मैं फिर से डाइयरी मे लिखी हुई बातों के बारे मे सोचने लगा....

डाइयरी के हिसाब से मेरा नेक्स्ट टारगेट कामिनी है...मुझे पहले उसके और करीब जाना होगा और फिर पता करना होगा कि उसकी दुश्मनी मुझसे क्यो है...और उसका प्लान क्या है....वो चाहती क्या है मुझसे...???

पर इस सब के लिए मुझे किसी ऐसे सक्श को देखना है जिसके सहारे मैं कामिनी की फॅमिली मे सबके करीब हो जाउ...किस से शुरुआत करूँ ...???
 
मैं काफ़ी देर सोचता रहा पर अभी तक कोई फाइनल आइडिया नही आया....तभी पारूल कॉफी और आयिल ले कर आ गई....

पारूल- लीजिए भैया...कॉफी...

मैं- ह्म्म...पर ये आयिल क्यो लाई....

पारूल- आपके सिर की मालिश करने....

मैं- वो क्यो???

पारूल- इससे आपका सिर दर्द छु हो जाएगा....

मैं- ओक...मैं कॉफी पी लूँ...फिर मालिश करना....

उसके बाद मैने कॉफी ख़त्म की और लेट गया.....

इसके बाद पारूल ने मेरे सिर की मालिश की जिससे मेरा सिर हल्का हो गया था...और अब मैं टेन्षन फ्री सा फील कर रहा था....

मैने उठ कर पारूल को किस करना सुरू कर दिया....पारूल ने भी पूरा रेस्पोन्स दिया....जब किस ख़त्म किया तो पारूल बोली...

पारूल- भैया प्यार करने का मन है क्या ???

मैं- मन तो है ..पर अभी मुझे नीद की ज़रूरत है...उसके बाद प्यार करूगा....

पारूल- तो आइए आपको सुला दूं....

और पारूल ने अपनी बाहें खोल दी....मैं जल्दी से उसकी बाहों मे समा गया और हम दोनो लेट गये....

अब मेरा सिर पारूल के सीने पर था और पारूल मेरा सिर सहला रही थी....

पारूल के इस तरह के प्यार को देख कर मेरा दिल भर आया...आज उसकी आँखो से बहते आँसुओं मे सच्चाई थी...उसे सिर्फ़ मेरी टेन्षन थी और मेरे प्यार की वजह से ही वो ये जानना चाहती थी कि मुझे टेन्षन क्या है....

उसकी आँख से बहते आँसुओं मे मुझे अपने लिए उसका सच्चा प्यार दिख रहा था....वो प्यार जो जिस्म का मोहताज़ नही था....वो वासना नही...सच्चा प्यार था....

पारूल अभी भी पूरे प्यार से मेरे सिर को सहलाए जा रही थी और उसके पाए हाथो के जादू से मैं कब सो गया ..मुझे पता ही नही चला....

मुझे नही पता कि मैं पारूल के सीने पर कब तक सोता रहा .....

मेरी नीद तब खुली जब पारूल ने मुझे जगाया....

पारूल- भैया..भैया...रजनी आंटी का कॉल है ....वो टेन्षन मे है....

मैने पारूल की बात सुनते ही फ़ोन हाथ मे लिया और हेलो बोला....

(कॉल पर )

मैं- हाँ आंटी ..क्या है..

आंटी-(रोते हुए)- बेटा ...कहाँ है...जल्दी घर आ जा....

मैं- आंटी...क्या हुआ...रो क्यो रही हो....???

आंटी-तू बस जल्दी आजा...सब बता दूँगी...हमम्म..हमम्म

और आंटी ने रोते हुए फ़ोन रख दिया....

मैं पहले से परेशान था....बड़ी मुस्किल से हल्का फील कर रहा था...और अब आंटी....

ऐसा क्या हो गया की आंटी रो रही थी...कहीं घर मे किसी को कुछ.....नही- नही....

जल्दी से जल्दी आंटी के पास पहुचना होगा.....

और मैं पारूल को अपने घर छोड़ कर अकेला ही संजू के घर निकल गया.....

मैं रास्ते भर यही सोच रहा था था कि अचानक आंटी को क्या हो गया ..वो इस तरह से क्यो रो रही थी....

कुछ तो बड़ा हुआ है संजू के घर....क्या हो सकता है ???

कही संजू की चाची ने संजू के डॅड को मेरा और आंटी का सच तो नही बता दिया...????

या फिर कही संजू के घर मे किसी के साथ दुर्घटना हो गई ???

पूरे रास्ते मे मेरे माइंड मे बुरे-बुरे ख़याल ही आते रहे....और हर ख्याल के साथ मेरी टेन्षन बढ़ती जा रही थी....

मैं तेज़ी से कार चला कर संजू के घर पहुचा और कार से निकल कर अंदर की तरफ भागा....

जैसे ही मैं अंदर पहुचा तो मेरी नज़र के सामने संजू के सारे फॅमिली मेंबर थे.....

उन्हे देख कर मुझे थोड़ा सुकून मिला कि चलो संजू के घरवाले सब ठीक है....फिर क्या हुआ होगा ???

मैने देखा कि सामने आंटी सोफे पर बैठे रो रही है और मेघा आंटी उन्हे शांत करने मे लगी थी....

सारे फॅमिली मेंबर भी दुखी दिखाई दे रहे थे लेकिन रो नही रहे थे....

मुझे शक हुआ कि अगर संजू की फॅमिली मे सब ठीक है और सिर्फ़ आंटी ही टूट कर रो रही है तो इसका मतलब ..आंटी के किसी रिलेटिव के साथ कुछ हुआ है....

मैं खड़े हुए सोचता रहा कि आख़िर आंटी ने मुझे क्यो बुलाया....और इस का जवाब माँगने मैं आंटी के पास पहुच गया...

मैं- आंटी...क्या हुआ...???

आंटी(सिर उपेर उठा कर)- बेटा...वो...

और आंटी रोते हुए खड़ी हुई और मेरे गले लग गई ...

मैं आंटी के इस तरह गले लगने से डरने लगा...कि कही सबको शक ना ही जाए.....मैने सबको देखा पर उस समय सब लोग आंटी के गम मे शामिल थे...कोई ध्यान नही दे रहा था कि आंटी मुझसे क्यो चिपकी हुई है....

मैं- आंटी...प्ल्ज़...रो मत....हुआ क्या...???

आंटी(सुबक्ते हुए)- वो बेटा...वो दीपा....

और आंटी ज़ोर से रोने लगी...

 


दीपा का नाम सुनते ही मेरा माइंड सन्न हो गया....मैं सोचने लगा कि इतनी जल्दी आंटी को दीपा के बारे मे कैसे पता चल गया....

मैं- दीपा आंटी का क्या...क्या हुआ...???

आंटी- वो हमें छोड़ के.....हुमहूमहूँ...

और आंटी की आँखो से आँसुओ की बारिश होने लगी...

मैने आंटी को वैसे ही सोफे पर बैठा दिया बट आंटी मेरे गले ही लगी रही....

मैं बार- बार संजू के पापा को देख रहा था कि वो क्या सोच रहे होगे हमारे बारे मे....

पर इस समय आंटी को किसी की परवाह नही थी वो दीपा के गम मे अपने प्रेमी को बाहों मे भरे हुए बैठी थी.....

मैं- आंटी...प्ल्ज़ चुप हो जाइए...और मुझे पूरी बात बताओ....अनु तुम पानी ले कर आओ...

अनु- जी भैया...

अनु पानी लेकर आई और मैने आंटी को पानी पिलाया और चुप करा दिया....

कुछ देर पूरा घर मे शांति छाई रही....जब तक आंटी नॉर्मल हो गई...

मैं- अब बताइए...क्या हुआ ???

आंटी(भरे हुए गले से)- बेटा वो दीपा थी ना मेरी फ्रेंड...

मैं- हाँ ये मैं जानता हू ..आप ये बताओ कि हुआ क्या...???

आंटी- वो हमें छोड़ कर चली गई...

मैं- कहाँ गई....??

आंटी- बेटा वो मर गई...

मैं- क्या...???...कब...??...कैसे...???

मुझे ऐसा शो करना पड़ा..तभी रियल लगता....

आंटी- पता नही कैसे...बस इतना पता है कि वो नदी मे वह गई....

मैं- नदी मे...पर कैसे...??

आंटी- ये भी नही पता..बस इतना पता है कि वो नदी मे बह गई....

मैं- पर आपको कैसे पता चला ....मतलब किसने कहा आपसे...???

आंटी- उसके घर से फ़ोन आया था...किसी ने बताया है उनको...

मैं- किसने बताया...मतलब...ऐसे ही किसी ने बोल दिया और उसके घरवालो ने मान लिया....

आंटी- नही बेटा...वो इनस्पेक्टर दीपा का मोबाइल और उसकी ड्रेस का टुकड़ा लाया था...जो पुल पर मिला था....

मैं- मतलब...दीपा ने सुसाइड की है ???

आंटी- नही...वो ऐसी नही थी...वो सुसाइड कर ही नही सकती....ज़रूर कुछ हुआ होगा उसके साथ....

आंटी की बात सुनकर मेरा माइंड झटका...कि आंटी को इतना सब इतनी जल्दी कैसे पता चल गया और आंटी का कॉन्फिडेंट भी बहुत था कि दीपा सुसाइड नही कर सकती... ये बात सुनकर तो मुझे डर लगने लगा था...

मैने ही वो मोबाइल और दीपा की ड्रेस पुल पर छोड़ दी थी...जिससे ऐसा लगे कि दीपा ने सुसाइड की.....

आंटी- चल बेटा मुझे दीपा के घर जाना है....

संजू डॅड- हाँ अंकित तुम हमें ले चलो...मैं भी आता हूँ साथ मे....

संजू के डॅड को ड्राइविंग ठीक से नही आती थी....इसलिए मैं संजू के मोम- डॅड को ले कर दीपा के घर चला गया....

जैसे ही हम दीपा के घर पहुचते तो वहाँ पर लोगो का ताँता लगा हुआ था....दीपा के पति एक इज़्ज़तदार इंसान थे और उनकी जान- पहचान भी बहुत थी...

और फिर दीपा की जान- पहचान भी बहुत थी...पता नही साली ने कितनो के लंड ठंडे किए थे....

जैसे ही हम अंदर पहुचे तो वहाँ पर मेरी जान- पहचान के लोग दिख गये....

वहाँ पर मनु, रिचा सुषमा सब थी और उन्ही के साथ कामिनी भी थी...

कामिनी को देखते ही मुझे डाइयरी की बात याद आ गई और मुझे गुस्सा आने लगा...

पर इस महॉल मे शांत रहना ही अच्छा था इसलिए मैं दाँत पीस कर रह गया और उनके साथ जा कर खड़ा हो गया....

आंटी तो अपनी फ्रेंड को देख कर रोने लगी और सब फ्रेंड भी आंटी के साथ मिलकर रोने लगी....

जहाँ एक तरफ सब रो रहे थे वही मनु अपना चेहरा उदास रखे हुए शांत थी...वो रोई नही....

संजू के डॅड दीपा के पति के पास खड़े थे....और कुछ बाते हो रही थी...

तभी वहाँ पोलीस इनस्पेक्टर भी आ गया....

और मैं पोलीस को देख कर दीपा के पति के पास पहुच गया...ताकि उनकी बाते सुन सकूँ....और उनकी बाते सुनने लगा...

(दीपा के पति मिस्टर.प्रदीप राय है जिन्हे मैं राय लिख रहा हूँ...और ये इनस्पेक्टर है मिस्टर.आलोक खरे ...इनको यहाँ इनस्पेक्टर लुखुगा)

इनस्पेक्टर- माफ़ कीजिए मिस्टर.राय आपको इस समय तकलीफ़ दे रहा हूँ...पर ये ज़रूरी है...

राय-कोई नही..मैं समझता हूँ...कहिए क्या बात है...

इनस्पेक्टर- देखिए मिस्टर.राय आपकी वाइफ की मौत का रीज़न अभी पूरी तरह क्लियर नही है...हो सकता है ये मर्डर हो...

राय- ये आप कैसे कह सकते है...उसने सुसाइड की है...

इनस्पेक्टर- आप इतने कॉन्फिडेंट से कैसे कह सकते है ???

राय- ये रहा सबूत...ये लेटर मुझे बेडरूम मे मिला...सुसाइड लेटर...

( मेरा तीर निशाने पर लगा...ये लेटर मैने ही रखवाया था)

इनस्पेक्टर- ये तो कंप्यूटर से लिखा गया है...हो सकता है..किसी और ने टाइप किया हो...

राय- हा हो सकता है...पर दीपा का मर्डर कोई क्यो करेगा...उसकी किसी से क्या दुश्मनी और फिर मेरी भी किसी से खास दुश्मनी नही...

इनस्पेक्टर- ह्म्म्मं...पर वो सुसाइड क्यो करेगी...???

राय- इसकी वजह आप खुद ही पढ़ सकते है...

( दीपा की सुसाइड की वजह उसके नाजायज़ रीलेशन लिखवाए थे)

इनस्पेक्टर(लेटर पढ़ने के बाद)- हो सकता है ये सुसाइड हो...पर जब तक हमें डेड्बॉडी नही मिल जाती...ये केस ओपन ही रहेगा...

राय- मैं भी यही चाहूगा कि मुझे सच पता चले...वैसे आपने बॉडी सर्च की ....???

इनस्पेक्टर- जी..पर अभी तक सर्चिंग मे कुछ नही मिला...हम आगे भी देख रहे है...पर वहाँ पानी का बहाव ज़्यादा है..शायद बॉडी बह कर आगे निकल गई होगी....

राय- आप अपना काम करे....मुझसे जो भी कहेगे..मैं हेल्प के लिए रेडी हूँ...

इनस्पेक्टर- ओके...वी विल ट्राइ और बेस्ट ...अभी मैं चलता हूँ...फिर मिलते है...

राय- ओके....

इनस्पेक्टर- वैसे मिस्टर.राय आपके बच्चे कहाँ है...???

राय- मेरे बच्चे...नही-नही...मेरे कोई बच्चे नही है...

इनस्पेक्टर- ओह..सॉरी...मैं चलता हूँ...

राय- ह्म्म...

पोलीस के जाने के बाद सब लोग फिर से दीपा के पति को संतावना देने लगे और महॉल गमगीन हो गया....

जैसे-जैसे टाइम निकलता गया...लोग कम होते गये....अब वहाँ काफ़ी कम लोग थे...

तभी मुझे ख्याल आया कि अब कामिनी से बात कर सकता हूँ और मैने कामिनी को इशारे से अपने पास साइड मे बुलाया..

जैसे ही कामिनी आई तो उसने अपने आसू पोछे और स्माइल की...

कामिनी- ह्म्म...तो आपको मैं याद हूँ???

मैं- हाँ जी...आप को भूला ही नही...

कामिनी- तो मुझे याद क्यों नही किया ???

मैं- बस थोड़ा एग्ज़ॅम मे बिज़ी था...अब याद किया ना...

कामिनी- यहाँ...??...यहाँ कुछ नही हो सकता....

मैं- तो जहाँ हो सकता है वहाँ मिल लेगे....

कामिनी- ह्म्म...आज रात मेरे घर पर...

मैं(मन मे)- साला ये औरत भी कमाल की आइटम बनाई है...अभी रो रही थी और अब चुदने का प्लान बना रही है....इस साली को पक्का दीपा के जाने का कोई गम नही...साली मगरमच्छ के आँसू बहा रही थी...

कामिनी- हेलो...क्या हुआ...टाइम नही है क्या..???

मैं- तुम्हारे लिए तो टाइम ही टाइम ही टाइम है....आज रात तेरी चूत और गान्ड फाडुन्गा...पूरी रात...

कामिनी- मैं भी रेडी हूँ...जबसे तुमसे मिली..मैने दूसरा लंड नही लिया....

मैं- गुड...तो आज रात सारी कमी पूरी हो जायगी...

कामिनी- ओके...मैं कॉल करूगी ...अभी मुझे जाना चाहिए....

और फिर से कामिनी ने नकली रोना शुरू किया और सबके साथ बैठ गई...

कामिनी से बात करने के बाद मुझे कन्फर्म हो गया कि ये सच मे कमीनी है...अब इसको जल्द से जल्द काबू मे कर के पता करना होगा कि आख़िर इसके दिल मे क्या है....

 
ऐसे ही शाम हो गई और हम सब अपने घर जाने लगे....

इतनी देर तक मुझे देख कर सबने स्माइल की पर सिर्फ़ मनु ही ऐसी थी जिसने मुझे देखते ही नज़रे फिरा ली....

मनु की ये बेरूख़ी मेरे दिल को घायल कर गई...और इस वजह से उसे पाने की चाहत भी बाद गई....

फिर सब अपने घर निकल गये ..और संजू के पापा भी शॉप पर निकल गये....बंद करने का टाइम जो था....और मैं आंटी को ले कर घर निकल आया....

कार मे भी आंटी गम मे थी पर अब रोना बंद था....

मैं- आंटी आप ठीक हो ना...???

आंटी- ह्म्म...

मैं- आंटी जो हो गया सो हो गया...अब आओ रो मत...प्लज़्ज़्ज़

आंटी- हाँ बेटा....हम होनी को नही बदल सकते ...पर दुख तो होता ही है ना...

मैं- हाँ..वो तो है...वैसे आंटी दीपा के बच्चे कहाँ है....

आंटी(चौंकते हुए)- दीपा के बच्चे...नही...उसके तो बच्चे है ही नही...

मैं- ओह्ह...कोई नही...आप अब रीना मत...

आंटी- ह्म्म..पर दुख कम नही हो रहा...

मैं-वो मैं कम कर दूँगा. ..

आंटी- कैसे...??

मैं- ये है ना...ऐसे...

मैने आंटी का हाथ अपने लंड पर रख दिया...और आंटी हँसने लगी...

आंटी- तू ना...ये तो हर मर्ज़ की दवा है....

मैं- तो चलो...दवा खिलाता हूँ घर मे...

आंटी- ह्म्‍म्म

इसके बाद आंटी हँसते हुए बाते करती रही और हम संजू के घर आ गये....

हम अंदर आने लगे तो मेरा फ़ोन आ गया.. .

मैं- आंटी...मैं आता हूँ...आप चलो...

मैने कॉल पिक की...

(यहाँ सामने वाले को मैं स लिख रहा हुँ)

(कॉल पर)

मैं- हाँ...बोलो

स- कहाँ हो...

मैं- संजू के घर

स- ओक...कामिनी के साथ कुछ हुआ...??

मैं- आज रात को शुरुआत होगी..

स- और दीपा के घर सब ठीक था ना...??

मैं- बहुत अच्छा था ..तुम ये बताओ कि कुछ पता चला...??

स- कुछ क्या..बहुत कुछ पता चला...

मैं- ओके...तो बताओ...

स- अभी नही...मैं बिज़ी हूँ थोड़ा....बाद मे मिल...वही पर...

मैं- ओके...कल पेपर देने के बाद मिलता हूँ...बस याद रखना कि किसी को भनक ना लगे....

स- ट्रस्ट मी...किसी को कुछ पता नही चलेगा....तू टेन्षन ना ले..बस आगे बढ़ ..मैं तेरे साथ हूँ...

मैं- ओके...कल मिलते है..बाइ

स- बाइ..

कॉल रखने के बाद मैं सोचने लगा कि अगर इसकी इन्फर्मेशन मेरे काम आ गई तो मेरा काम जल्द ही पूरा हो जाएगा...और आज रात कामिनी का गेम हो जाय तो सोने पे सुहागा....

और यही सोचते हुए मैं अंदर चला आया....

कॉल रखने के बाद मैं सोचने लगा कि अगर इसकी इन्फर्मेशन मेरे काम आ गई तो मेरा काम जल्द ही पूरा हो जाएगा...और आज रात कामिनी का गेम हो जाय तो सोने पे सुहागा....

और यही सोचते हुए मैं अंदर चल आया....

जैसे ही मैं अंदर आया तो मेरी नज़र रूबी पर पड़ी....वो अब ठीक दिख रही थी....रात को जो उसकी पहली चुदाई हुई , उसका दर्द कही नही दिखा...उल्टा वो पहले से ज़्यादा खिली हुई थी....

मुझे देखते ही रूबी ने स्माइल कर दी और शर्म से आँखे झुका ली...रक्षा जो रूबी के साथ ही खड़ी थी...उसने रूबी को देख कर उसे कोहनी मार दी और मुस्कुरा दी....

वहाँ पर अभी पूनम दी, अनु संजू और मेघा आंटी भी थी....इसलिए मैने कुछ रिएक्ट नही किया...बस चुपचाप उन सब के पास आ गया....

मैं- अरे आंटी कहाँ गई ??

मेघा- वो शायद वॉशरूम गई होगी...तू बैठ ना...

मैं- ह्म्म...मुझे कॉफी मिलेगी आंटी..

मेघा- अरे ऐसे क्यो कह रहा है...तुझे इस घर मे सब मिलेगा जो तू चाहे...(और मुस्कुरा दी)

मैं(मन मे)- मैं समझ गया तू क्यो उछल रही है...अभी तू कॉफी तो पिला...एक दिन तुझे निचोड़ के पी जाउन्गा...

मेघा- क्या हुआ ???

मैं- क्क़..कुछ नही...आप फिलहाल कॉफी ही पिला दो...

मेघा- रुक....अभी लाई...

मेघा आंटी कॉफी लेने गई और बाकी सब मुझसे दीपा के घर का हाल पूछने लगे....

मैं सबको बता रहा था कि मॅटर क्या हुआ...वहाँ जो भी हुआ था मैने बता दिया...बट सच्चाई तो कुछ और ही है....

फिर आंटी सबके लिए कॉफी ले कर आई और ऐसे ही दीपा की बाते करते हुए हम कॉफी पीने लगे...रजनी आंटी भी आ गई थी....

कॉफी पीने के बाद पूनम दी अनु के साथ पढ़ने निकल गई...कल पेपर जो था...

मैं भी माइंड फ्रेश करने संजू के साथ उसके रूम मे आ गया....

जैसे ही मैं संजू के रूम मे गया तो फ्रेश हो कर बेड पर लेट गया और संजू पढ़ने बैठ गया....

मैं लेटे हुए अपने माइंड मे अपनी लाइफ मे हो रही घटनाओ के बारे मे सोच रहा था....कि थोड़े से समय मे कितना कुछ हो गया....

एक तो वो अंजान इन्फ़ॉर्मेशन मिला...जिसने मेरी लाइफ मे ट्विस्ट ला दिया...उसके बाद दीपा का नाम सामने आना...जिसने मेरे विश्वास को हिला दिया....और दूसरी तरफ अनु,रक्षा, और रूबी का मेरे करीब आना...इससे मुझे खुशी भी मिली...पर अब हर बात पर शक भी होता है....

और अब कामिनी का नाम आना...पता नही कामिनी को कैसे हॅंडल करूगा...पर करना तो पड़ेगा ही...मेरी लाइफ दाव पर लगी है.....

मुझे इस तरह सोच मे देख कर संजू बोला....

संजू- क्या हुआ भाई ..क्या सोच रहा है..???

मैं- हाँ ..कुछ नही...वो दीपा के बारे मे सोच रहा था कि अचानक क्या हो गया उसके साथ.....

मेरा अन्सर सुनने के बाद भी संजू नही माना....दोस्त होते ही ऐसे है कि वो आपको आपसे ज़्यादा समझते है....

संजू- ह्म्म...पर तू सच बता..तू क्या सोच रहा था....

मैं- सच मे यार ..मैं बस दीपा के बारे मे सोच रहा था...

संजू- मत बता...जब तुझे लगे कि मुझे बताना चाहिए तब बोलना ..ओके

संजू की बात का मैने कोई जवाब नही दिया बस चुप रह गया...संजू ने भी मुझे समझ लिया और अपनी पढ़ाई करने लगा....कुछ देर तक रूम मे शान्ती छाई रही....वो शांति मेघा आंटी के आने से टूटी....

मेघा- अरे बेटा...मैं अंदर आ सकती हूँ...

मैं- आंटी...आप ऐसे क्यो कह रही है...आइए ना...

मेघा- अरे बेटा...मैने सोचा कि तुम दोनो बिज़ी होगे...आख़िर 2 सच्चे दोस्त बैठे हो तो डिस्टर्ब नही करना चाहिए....

मैं- ऐसी कोई बात नही आंटी...कहिए...कुछ काम है क्या ??

मेघा- हाँ काम तो है...वो तुम आज रात को रूबी के घर रुक सकते हो क्या...??

मैं- क्या...मतलब क्यो...??

मेघा- आक्च्युयली उसकी फॅमिली बाहर गई है..एग्ज़ॅम की वजह से रूबी अकेली है....

मैं- हाँ उसने कल बताया था....तो उसे यही रुकने को बोल दो ना..

आंटी- उसका घर खाली रहेगा ना...इसलिए नही रुक सकती...

मैं- तो कल कैसे रुक गई थी...???

मेघा- कल उसकी नौकरानी थी...आज उसके गाओं मे किसी की डेथ हो गई तो उसे जाना पड़ा....

मैं- ओह्ह...लेकिन मैं अकेले रूबी के घर...कैसे...आइ मीन अच्छा नही रहेगा...

मेघा- वो टेन्षन मत लो...रक्षा साथ मे जाएगी ना...

मैं- ओह...तो ठीक है...

मेघा- तुझे कोई प्राब्लम तो नही ना...??

मैं- अरे नही आंटी...काम पर मैं काम ना आउ तो क्या मतलब...

मेघा- थॅंक्स बेटा...तुम लोग खाना खा कर चले जाना...मैं उनसे बोल देती हूँ कि तुम रेडी हो...अब मुझे भी टेन्षन नही होगी....

और आंटी उठ कर नीचे निकल गई और मैं सोचने लगा कि आंटी आपकी टेन्षन तो दूर हो गई...पर मेरा क्या...रात भर वो दोनो अपनी जवानी मुझसे लुटवायेन्गी तो मैं कल पेपर मे क्या लिखुगा.....

मैं(मन मे)- चलो कोई नही ये मिड टर्म है...फाइनल एग्ज़ॅम नही....आज रात को काटना ही है तो क्यो ना इस रात को यादगार बनाऊ....आज दोनो को तसल्ली से चोदुन्गा....और वो भी दारू के मज़े के साथ.....हाहाहा ...

मुझे मुस्कुराते हुए संजू बोला...

संजू- क्या हुआ बे...मस्का क्यो मार रहा है...

मैं(चौंकते हुए)- कुछ नही...वो मेरी किस्मत पर...कि पढ़ाई की नही और रात भी दूसरे के घर मे बितानी है...कल का पेपर तो गया....

संजू- अबे तेरी तैयारी तो पहले से ही है...तुझे क्या प्राब्लम ....

मैं-हमम्म...देखते है...और मैं बेड पर डाल गया. ..

थोड़ी देर मे मुझे रजनी आंटी का मेसेज आया कि छत पर मिलो....

 
casanova0025 wrote: please update

फिर क्या हुआ?

Bhaut mast

NICE UPDATE KEEP IT UP

कहानी कौ आगे बढाइएगा जल्द

जिंदगी मै सिर्फ़ दो ही नशा करना, जीने के लिए यार और मरने के लीये प्यार..

:) :) :ugeek: :ugeek: :ugeek: :lol: :lol: :lol: :lol:
 
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