आकाश सहर जाकर टूट सा गया था...वो अपनी माँ की मौत से दुखी था...और आख़िरी बार ना मिल पाने की वजह से अपने आपको गुनहगार समझ रहा था.....
ऐसे बुरे वक़्त मे आकाश को उसके प्यार का सहारा मिला...
टाइम अपनी गति से गुज़रता रहा और टाइम गुज़रते हुए 4 महीने निकल गये....
अब आकाश थोड़ा नॉर्मल था..पर अभी भी सरिता से बदला लेने के बारे मे सोचता रहता था...
अली और धर्मेश लगातार आकाश के कॉंटॅक्ट मे थे....दोनो ने ये भी देखा कि आकाश अपनी प्रेमिका के साथ सम्भल चुका है....वो प्रेमिका अलका थी....
आकाश और अलका का प्यार देख कर अली ने उनकी शादी करने का सोच लिया...वो जानता था कि शादी हो जाने से आकाश अपने पुराने दुखो को भूल कर नई जिंदगी मे बिज़ी हो जायगा...और यही उसके लिए सही रहेगा....
यहाँ गाओं मे आज़ाद भी दुख से उबर चुका था पर अब उसे आकाश की कमी खलने लगी थी...
गुस्सा दूर होते ही...उसे भी यही लगने लगा कि उसका बेटा ग़लत नही कर सकता...पर मदन की वजह से वो सरिता से कुछ नही बोल सकता था...इसलिए चुप रहा....
आज़ाद की लाइफ काम और चुदाई मे बिज़ी रहती थी....
आकृति अपने पति के घर पर चली गई थी...पर आरती और अरविंद की खातिर वो दोनो गाओं मे ही रहने लगे और सुभाष , आज़ाद के साथ फॅक्टरी का काम देखने लगा....
आरती भी अपनी माँ और भाई के चले जाने से दुखी थी...वो भी अपने भाई को निर्दोष मानती थी...पर अपने मन की बात अपने पापा से नही कह पाती थी...
धर्मेश भी आज़ाद की फॅक्टरी मे काम करने लगा और अपने दोस्त के परिवार का ख्याल रखने लगा...साथ ही साथ अब उसने चुदाई करना छोड़ दिया था...बिल्कुल सरीफ़ हो गया था....
आमिर का पूरा ध्यान आरती को खुश रखने पर था...दोनो स्कूल मे साथ रहते और मस्ती करते...जिससे आरती सारे दुख भूल कर लाइफ को एंजोई करती ...
रिचा की लाइफ भी स्कूल और आज़ाद से चुदाई करवा कर निकल रही थी...
एक दिन रिचा ने अपनी शादी करने की बात की तो आज़ाद भड़क गया और उसे काफ़ी जलील किया....पर रिचा कुछ नही कर सकती थी...चुप रही और चुदाई करवाती रही....
अरविंद भी आकाश को याद करता था..पर अपने पापा की वजह से चुपचाप अपनी लाइफ जी रहा था......
ऐसे ही वक़्त गुज़रते हुए रुक्मणी की मौत को 6-7 महीने निकल गये और फिर अली ने आकाश की शादी की बात अलका के घरवालो से चला दी....
अली ने आज़ाद को इस शादी के लिए मना लिया था...पर गाओं वालो को पता ना चले इसलिए आज़ाद शहर नही गया और अली के ज़रिए आकाश को शादी की रज़ामंदी दे दी....
आज़ाद बहुत खुश था की आकाश की शादी ही रही है पर वो ये भी जानता था कि आकाश पर बलात्कार करने का आरोप लगा है और इस टाइम उसकी शादी मे शामिल हुआ तो गाओं वाले उसके खिलाफ हो जायगे...
आज़ाद ना ही आकाश की शादी मे गया और ना ही परिवार मे से किसी को जाने दिया..
आज़ाद ने अली को एक खत लिख कर दिया...जो आकाश के लिए था...
उस खत के मध्यम से आज़ाद ने अपनी खुशी ज़ाहिर की और आकाश को आशीर्वाद भी पहुचा दिया...
आकाश ने भुजे मन से शादी कर ली...उसकी शादी मे धर्मेश की फॅमिली और अली की फॅमिली समिल हुई...
शादी के बाद भी आकाश ने अपनी पढ़ाई चालू रखी.....
टाइम निकलता गया और आकाश फिर से खुश रहने लगा..पर अभी भी वो बदले के बारे मे भूला नही था...
फिर आकाश के घर एक बेटा पैदा हुआ...जिससे उसकी लाइफ मे और भी खुशियाँ आ गई....
आज़ाद को जब ये खबर मिली तो वो आकाश से मिलने पहुच गया...पर सिर्फ़ अपने पोते से मिलकर वापिस आ गया...किसी से कोई बात नही की...
आकाश अपने पिता के आने से खुश था..पर बात ना करने से वो दुखी भी हुआ....
आरती , आकृति और अरविंद भी अपने भाई के लिए खुश थे...पर वो भी मजबूर थे और कोई भी आकाश से मिलने नही गया....
आरती एक खास मौके का वेट कर रही थी...उसे बहुत कुछ बताना था अपने भाई को...कुछ ऐसा जो अभी तक सिर्फ़ उसके परिवार वाले और धर्मेश ही जानता था....
कुछ टाइम और निकल गया...तभी आकृति ने खूसखबरी दी....वो माँ बन गई थी...
शादी के बाद काफ़ी इंतज़ार के बाद वो माँ बनी थी...कुछ मेडिकल इश्यू हो गये थे....
ये बात भी आकाश को अली ने बताई थी....और साथ मे आकाश को समझा दिया कि अभी गाओं ना आए...सही टाइम आने दो..फिर आना..
आकाश ने अपनी बहिन के लिए गिफ्ट भेज दिए.....
सुभाष भी आकृति से शादी करने के बाद सुधर गया था और सरिता से दूर रहता था...
सुभाष समझ चुका था कि सरिता ने आकाश को क्यो फसाया...और अब सरिता आकृति का ईस्तमाल कर के आज़ाद को चोट देना चाह रही थी. .
इसी बीच सरिता की करीबी आकृति से बढ़ने लगी थी...पर सुभाष आकृति को कुछ नही बता पा रहा था कि सरिता कैसी है.....
सुभाष ने सब कुछ टाइम पर छोड़ दिया कि सही टाइम पर वो आकृति को सरिता का सच बता देगा...जब तक वो सरिता पर नज़र रखेगा कि वो आकृति के साथ कुछ ग़लत ना कर सके....
रुक्मणी की मौत को 2 साल निकल गये थे....
लेकिन आकाश अभी भी बदला लेने की सोच मे था...इसलिए अलका ने आकाश को कहीं दूर ले जाने का फ़ैसला किया....
अलका ने अली से इस बारे मे बात की...अली ने भी यही ठीक समझा..
अलका के घर वालो ने भी अलका का साथ दिया...
अलका ने फिर आकाश को अपने बेटे की कसम देकर चलने को मजबूर कर दिया....
आकाश एक नये सहर मे चला आया...वहाँ उसने पैसे लगा कर छोटा सा बिज़्नेस स्टार्ट कर दिया...
आकाश ने मनोज और उसकी बहिन को भी अपने साथ रखा...
अब आकाश अली और धर्मेश की पहुच से भी दूर रहने लगा था...ये सब करके अलका को दुख तो हुआ पर उसे यही सही लगा.....नही तो आकाश सरिता के साथ कुछ भी कर सकता था....
आकाश अपने गाओं से अंजान अपने काम और अपनी फॅमिली मे बिज़ी था..और खुश भी था...
पर उसकी खुशी को फिर किसी की नज़र लग गई....
नये सहर मे आने के करीब एक साल बाद उसे अपने गाओं का एक इंसान मिला...
जिसने आकाश को पहचान लिया और आकाश को उसकी फॅमिली के बारे मे बता दिया...
आकाश ने सबके हाल चल पूछे पर आरती के बारे मे सुनते ही उसके चेहरे पर गुस्सा आ गया...
अब वो अपने आप को रोक नही पाया...वो गुस्से मे घर गया और अपनी पिस्टल ले कर गाओं निकल गया...
अलका उस समय पड़ोसी के साथ मार्केट गई हुई थी....
आकाश ने अलका को बिना बताए गाओं जाने का फ़ैसला किया....
गाओं आते ही आकाश का सामना आज़ाद से हुआ...पर उसने उससे कोई बात नही की...
आकाश सीधा धर्मेश के घर पहुच गया....
जहा पर धर्मेश और आरती मौजूद थे.....
आकाश के कदम रखते ही धर्मेश के चेहरे का रंग उड़ गया....
आरती(चौुक्ते हुए)- भैया आप....
आकाश की आँखे गुस्से मे लाल हो रही थी...उसने आरती की बात को सुना भी नही....
आकाश को देखते ही धर्मेश समझ गया कि आकाश गुस्सा क्यो है...और धर्मेश , आकाश से बात करने को आगे आया....
धर्मेश के आगे आते ही आकाश ने उसे एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया....
आकाश(गुस्से मे)- साले...आस्तीन के साप...
और फिर आकाश ने धर्मेश को एक के बाद एक थप्पड़ मारना चालू रखा और गालियाँ बकता रहा... और मारते - मारते उसे अंदर रूम मे ले गया.....
आरती पीछे से जा कर आकाश को रोकने लगी पर आकाश ने उसे भी धक्का दे कर पीछे कर दिया और धर्मेश को मारने लगा...
धर्मेश कुछ कहना चाहता था पर उसे आकाश की मार से कोई मौका नही मिल रहा था...
तभी आरती पीछे से आई और पूरी ताक़त के साथ आकाश को धकेल दिया और धर्मेश के सीने से चिपक गई....
आरती(गुस्से मे)- बस भैया...अब एक भी हाथ मत उठाना मेरे पति पर...नही तो मैं भूल जाउन्गी कि आप मेरे भाई हो....
आकाश- मर गया तेरा भाई....उसी दिन जिस दिन तूने इस इंसान से शादी कर ली...साला कमीना...
आरती- बस...एक शब्द नही ....ये मेरे पति है..मेरी बच्ची के पिता...मैं इनके बारे मे कुछ भी नही सुनना चाहती.....
आकाश- क्या कहा...बेटी....तूने ..मुझे बताए बिना शादी भी कर ली और बेटी....
आरती- हाँ..बेटी...मैने सोचा था कि आप मेरी शादी से खुश होगे पर आप तो मेरे पति को मारने ही आ गये...
आकाश- तुम जानती नही ..ये कितना कमीना है...ग़लती की तुमने...
आरती- सब जानती हूँ...अगर ये कमीने है तो आप भी हो...और आपने तो एक औरत का रेप भी किया है...बलात्कारी हो आप....
आकाश- ये ग़लत है....मैने कुछ नही किया...मैं आज इसे नही छोड़ुगा...
आकाश फिर से धर्मेश को मारने बढ़ा पर आरती ने फिर से आकाश को धकेल दिया...
आरती- बस...जाइए यहाँ से....क्यो आए यहाँ...मेरी जिंदगी खराब करने....
आकाश- नही...तुम्हे समझाने...ये इंसान सही नही...
आरती- ग़लत आप हो...और किस हक़ से आप इन्हे मार रहे हो...
आकाश- तेरे भाई के हक़ से...
आरती- अगर ऐसा है तो जाओ...मेरे लिए मर गया मेरा भाई...
अपनी प्यारी बेहन के मुँह से अपने बारे मे ऐसा सुन का आकाश की आँखो मे आँसू आ गये और वो वहाँ से आने लगा...धर्मेश उसे रोकने को बढ़ा तो आरती ने धर्मेश को रोक लिया...और बोली...
आरती- जाने दो इसे...जो भाई अपनी बेहन के प्यार को ग़लती समझता है...उससे मुझे कुछ मतलब नही...मर गया मेरा भाई...
अब आकाश आँसू बहता बाहर निकल गया..और गाओं से बाहर आ गया...
काफ़ी देर रोने के बाद जब आकाश का गुस्सा दूर हुआ तो वो आरती के बारे मे सोचने लगा....
आरती इस शादी से खुश थी और अब तो वो माँ भी बन गई...और आरती की ग़लती भी नही...
मैं खुद सबसे दूर रहा तो ग़लती मेरी भी है...
मैं अपनी बेहन से माफी माँगकर ही जाउन्गा....
और आकाश फिर से धर्मेश के घर पहुच गया.....
पर इस समय धमेश के घर के बाहर एक कार भी खड़ी थी...
आकाश आराम से धर्मेश के अंदर घुसा....
दूसरी तरफ आज़ाद को जैसे ही पता चला कि आकाश धर्मेश के घर आया है...तो वो समझ गया कि आकाश गुस्से मे होगा...इसलिए आज़ाद और अरविंद भी धर्मेश के घर निकल आए....
जैसे ही आज़ाद धर्मेश के घर के बाहर पहुचा तो उसे एक गोली चलने की आवाज़ आई...साथ मे एक चीख भी सुनाई दी...
आज़ाद ये आवाज़े सुनकर वही ठिठक का खड़ा हो गया....
इससे पहले की आज़ाद कुछ कर पाता...आरती दौड़ते हुए घर से बाहर आ गई...
आरती के हाथ मे पिस्टल थी और वो घबराई हुई थी...
आरती के पीछे-2 आकाश भी आ गया...उसके हाथ मे भी पिस्टल थी...
ये क्या...मेरे डॅड ने...अपनी सग़ी बेहन को भी...ओह माइ गॉड...क्यों...
मैं अपने डॅड की कहानी पढ़ कर दुखी हो रहा था...पर इस कहानी का अंत पढ़ कर तो मेरा माइंड ही सनक गया...
मेरे डॅड ने अपनी छोटी बेहन और दोनो बहनोई को मार दिया....
चलो सरिता को मारा वो ठीक किया...वो इसी लायक थी...पर...अपने सगो को मार दिया...उन्होने क्या किया था....
माना आरती बुआ की ग़लती थी कि उन्होने डॅड को बिना बताए धर्मेश से शादी कर ली...और फिर माँ बनने के बाद भी उन्हे नही बताया...
पर ये ग़लती इतनी बड़ी भी नही थी कि उन्हे मार दिया जाए..
और धर्मेश ...डॅड ने यही सोचा होगा कि उनके सबसे खास दोस्त ने उन्हे धोखा दिया...उनकी बेहन को फसा लिया...पर एक बार उनकी बात सुननी चाहिए थी डॅड को...
और सुभाष फूफा जी...उनकी क्या ग़लती थी...क्या उन्हे सरिता का साथ देने की सज़ा मिली....
इस टाइम मेरे माइंड मे ये सारी बातें घूम रही थी...मैं तय नही कर पा रहा था कि डॅड ने सही किया या ग़लत...
मैने सोचा कि डॅड ने सरिता के साथ तो सही किया बट आरती, धर्मेश और सुभाष के साथ ग़लत किया...डॅड को उनसे बात करनी चाहिए थी...उनकी बात सुननी चाहिए थी....
फिर मुझे अपनी दादी का ख्याल आया...उनकी मौत का दुख मेरी आँखो से आँसू बन कर निकल रहा था. .
मेरी दादी की मौत भले ही आत्महत्या थी पर उसकी असली गुनहगार सरिता थी...पर मेरे दादाजी और गाओं वालो ने मेरे डॅड पर इल्ज़ाम डाल दिया....
मेरे दादाजी के साथ मेरे चाचा और बुआ ने भी डॅड को ही दोषी माना...जिससे डॅड टूट गये थे....
लेकिन फिर भी डॅड ने ग़लत किया...उन्हे किसी को मारना नही चाहिए था...कम से कम अपनो को तो नही....
ये सारी बातें मेरे माइंड को फाड़ डालने लगी...और मुझे लगने लगा कि अभी मेरा सिर फट जायगा....
मैं उठा और जल्दी से एक पेग बनाया और एक ही साँस मे गटक गया ..फिर दूसरा पेग भी ऐसे ही गटक लिया और तीसरा पेग बना कर रूम मे घूमने लगा....
मैं तो घूम ही रहा था पर साथ-साथ मेरा माइंड भी घूम रहा था....
ऐसे ही घूमते हुए मैने तीसरा पेग भी ख़त्म कर लिया...फिर थोड़ी देर बाद ड्रिंक के सुरूर से मेरा माइंड हल्का होने लगा....
फिर मैं बेड पर बैठ गया और फिर से अपने डॅड के बारे मे सोचने लगा....
काफ़ी देर सोचने के बाद मैने डिसाइड किया कि सबसे पहले मुझे डॅड से पूरा सच जानना होगा....
उस दिन असल मे हुआ क्या था....और उसके बाद ही मैं जान पाउन्गा कि डॅड सही थे या ग़लत ....
इस पूरी कहानी को पढ़ कर मुझे सिर्फ़ अपनी दादी और आरती बुआ के लिए दुख था...
धर्मेश को इसलिए ग़लत मानता था कि वो डॅड का खास दोस्त था...उसे आरती बुआ से शादी करने से पहले डॅड को बोलना चाहिए था....
मेरा कोई फ्रेंड भी मेरे साथ ऐसा करता तो मैं भी गुस्सा होता उससे...
सुभाष फूफा जी की ये ग़लती थी कि उन्होने सब जान कर भी सरिता के बारे मे किसी को नही बताया और अंत तक सरिता का साथ देते रहे....
और सरिता...उसे अगर डॅड नही मरते तो मैं मार डालता....उसकी वजह से मेरी पूरी फॅमिली तहस-नहस हो गई....
अगर सरिता ना होती तो मेरे डॅड अपनी फॅमिली से दूर नही जाते...मेरी दादी जिंदा होती और तब आरती बुआ और धर्मेश भी उन्हे बता कर ही कुछ आक्षन लेते शादी के बारे मे....
तभी मुझे ख्याल आया कि अभी डाइयरी बाकी है...उससे ये तो पता चल जायगा कि आगे क्या हुआ....
अगर मेरे डॅड ने ही सबको मारा तो उन्हे सज़ा क्यो नही हुई...और अगर वो बाहर है तो वो खून किए किसने....
अंकित...मैं जानता हूँ की ये सब पढ़ कर तुम डिस्टर्ब हो गये होगे...
तुम्हारे मन मे कई सवाल घूम रहे होगे...
तुम अपने डॅड को ले कर भी परेसान होगे कि उन्होने सही किया या ग़लत...और उनके साथ आगे क्या हुआ...
तो चलो मैं कुछ सवालो के जवाब दे देता हूँ...जो भी मुझे पता है...
जिस दिन तुम्हारे डॅड के साथ ये हादशा हुआ उस दिन के बाद से हमारा उस गाँव से कॉंटॅक्ट ख़त्म हो गया था....
तुम्हारे डॅड ने वापिस आ कर मुझे और मेरी बेहन को अपने से अलग कर दिया था ....
मैं भी उस समय गाओं नही गया और जब गया तो वहाँ कोई नही था...
ना तुम्हारी फॅमिली ,ना अली की, ना मदन की और ना ही धर्मेश की....
किसी भी गाओं वाले को इनका कुछ भी पता नही था और ना ही किसी ने ये बताया कि उस दिन हुआ क्या था...
तुम्हारे डॅड ने अपनी फॅक्टरी गाओं वालो को दे दी थी...
रिचा भी उस गाओं मे नही मिली...लोगो ने बताया कि उसके पापा नही रहे और वो अपनी माँ राखी के साथ गाओं छोड़ कर चली गई...
फिर एक दिन मुझे मेरी बेहन ने बताया कि कुछ लोग तुम्हारे और तुम्हारे डॅड से बदला लेने की फिराक मे है...
उस दिन से मैने अपनी बहेन के साथ मिलकर तुम्हारे दुश्मनो के बारे मे खबर जुटाई...
इनमे से कुछ को मैं जान चुका हूँ..और कुछ की पहचान अभी बाकी है...
तुम्हे मैने सबकी फोटो दी है...जिन्हे मैं जान गया..पर कुछ और भी लोग है..जिनके बारे मे कोई जानकारी नही...
और ना ही ये पता है कि वो किस बात का बदला ले रहे है...
अब तुम वो फोटो देखोगे तो समझ जाओगे कि कौन और क्यो तुम्हारे पीछे पड़ा है ...
ये सब तुम्हारे दादाजी और डॅड की दुश्मनी तुमसे भी निकालेगे...
अब तुम फोटो देखो...और हाँ उसमे मेरी बेहन की फोटो नही है...और ना ही मैं उसके बारे मे बताउन्गा....
लेकिन यकीन रखो...कुछ टाइम बाद वो तुम्हे सामने से कॉंटॅक्ट करेगी....
और हाँ...उसके पास तुम्हारे काम की कुछ इन्फर्मेशन भी है...जो वो मुझे बताने वाली थी...पर इसके लिए तुम्हे इंतज़ार करना होगा....
अब जैसे ही मैने पेज पलटा तो वो खाली था ...मैने आगे भी पेज पलट के देखा बट अब कुछ भी नही लिखा था...
मैने डाइयरी बंद की और फोटोस उठा के देखने लगा...
अब आपको बताता हूँ की मैने किस-किस की फोटो देखी और उनके बारे मे क्या जानकारी थी....
1 -रिचा- इसको दादाजी ने रखेल बनाया हुआ था ...शायद इसी बात का बदला ले रही होगी...और अगर कोई और बात भी है तो मैं खुद इससे उगलवा लूँगा....
2-दीपा- इसे तो हॅंडल कर लिया..हटाओ इसे...
3-कामिनी और दामिनी- इनका तो कहानी मे कोई ज़िक्र नही आया...फिर क्यो...हो सकता है डॅड के सहर आने के बाद कुछ हुआ हो....डॅड से बात करने पर कुछ पता चलेगा...नही तो मुझे ही हॅंडल करना होगा इन्हे...
4- रजनी- रजनी आंटी मेरे डॅड के खिलाफ है...बट इनका भी कहानी मे ज़िक्र नही था...और हां ये मेरी माँ को जानती है...शायद तभी कोई बात हुई हो...इनके बारे मे भी डॅड से बात करूगा....
5- अननोन- ये खाली पिक किस के लिए हो सकती है...कौन हो सकता है ये.. शायद मदन...हो भी सकता है...सरिता की मौत का बदला ले रहा हो...इसे ढूँढना मुस्किल होने वाला है....
6- अननोन- फिर से खाली पिक...अब ये कौन हो सकता है...या हो सकती है...कहानी मे तो ऐसा कोई भी नही दिखता...शायद डॅड की अययाशी का कोई नतीजा हो...देखना पड़ेगा...
7-अननोन- तेरी माँ की...फिर से खाली...अब ये कौन हो सकता है...कितने दुश्मन खड़े हो गये यार...कोई नही इसे भी देख लेगे...शुरुआत तो हो ही चुकी है...कभी ना कभी तो सामना होगा ही....
8-विनोद(संजू के चाचा)- ओह हो...तो ये यहाँ है...ये तो संजू के चाचा है...पर एक बात समझ नही आई...इनकी दुश्मनी कब हो गई ...लगता है इसका पंगा भी डॅड से हुआ है...बट क्या...???
पता लगाना पड़ेगा...मैं किसी को नही छोड़ने वाला.....
सब पिक्स देख कर मेरे माइंड मे यही ख्याल आया कि डॅड से बात करनी ही पड़ेगी...
उसके बाद ही मैं किसी नतीजे पर पहुच पाउन्गा..और मुझे इन ब्लॅंक पिक्स के बारे मे भी कोई क्लू मिलेगा....
अब मेरा माइंड थोड़ा बहुत शांत हो चुका था...पर मेरी आँखे अभी भी नम थी...
मुझे अपनो की मौत का दुख तो था ही...पर सबसे ज़्यादा दुख आरती बुआ का था...
वो मेरे डॅड की लाडली बेहन थी...उन दोनो का दिल तो एक-दूसरे को अच्छे से समझता था...
आरती बुआ तो बिना कहे ही डॅड के दिल की बात समझ जाती थी.....और उन्होने ही....नही-नही ...अभी ऐसा नही सोचुगा ...
डॅड से बात किए बिना मैं उनके बारे मे अच्छा या बुरा कुछ भी नही सोचुगा....
मैने पिक्स को साइड किया और फिर से एक पेग बनाया....और पीते हुए घूमने लगा....
मैने डाइयरी पढ़ने के पहले सोचा था...कि मुझे सारे सवालो के जवाब मिल जायगे...
मुझे पता चल जायगा कि मेरे और मेरे डॅड के पीछे पड़े लोगो की दुश्मनी का रीज़न क्या है...
पर ये तो उल्टा हो गया...जितने जवाब नही मिले उससे ज़्यादा सवाल सामने आ गये....
क्या करूँ...किस से पुछु...शुरुआत कहाँ से करू....ओह गॉड...
मैं परेसानि मे पेग पर पेग गटक रहा था .....पर मेरी परेसानि दूर नही हो रही थी....
मेरे दिमाग़ मे टेन्षन और आँखो मे आँसू थे...
आज मुझे रेणु दीदी की कमी महसूस हो रही थी....वो होती तो उनकी गोद मे सिर रख कर रो लेता....
आज मुझे पहली बार ऐसा लग रहा था कि मेरी माँ या मेरी बेहन होती तो मुझे संभाल लेती....पर कोई नही था मेरे पास....
मैं परेसानि मे रोता रहा और पेग लगाता रहा....तभी मेरे रूम पर नॉक हुई....
मैं नॉक होने से चौंक गया की इतनी रात कौन आया...
फिर मैने सब सामान छिपाया और मुँह सॉफ करके गेट खोला...
सामने पारूल खड़ी थी...वो नीद से जाग कर आई थी....
मैं- त्त..तुम..यहाँ...क्या हुआ..???
पारूल- आप सोए नही भैया...???
मैं- मैं...वो...असल मे एक सपना आया तो नीद खुल गई...तुम यहाँ कैसे ...??
पारूल- पता नही भैया...अचानक ऐसा लगा कि आप मुझे बुला रहे है...तो आ गई...
मैं- मैने बुलाया...नही तो...जाओ सो जाओ...
पारूल- नही...पहले आप को सुलाउन्गी...आप परेसान दिख रहे हो...
मैं- अरे ..कुछ नही...तुम सो जाओ...
पारूल- नही ना...आप रूको ..मैं आती हूँ...
पारूल नीचे चली गई और मैं सोचने लगा कि कैसे आज पारूल पूरे हक़ से बात कर रही थी...मुझे उसकी बात पसंद आई और मैं बेड पर बैठ गया...