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चूतो का समुंदर



मैं रूही की गान्ड पर थप्पड़ मारते हुए उसकी चुदाई करने लगा...और रूही भी गान्ड उछाल कर लंड का मज़ा लेने लगी....

रूही-आअहह….माअर……मार…ज़ोर से…आहह... आअहह…ज़ोर से…आअहह..ऊहह..ऊहह..

त्ततप्प…त्तप्प्प…आअहह…आहह..त्त्थप्प…त्ततप्प्प्प

मैं-यस…फाड़ता हूँ …ये ले…येस्स..येस्स...

रूही-आआहह..आहह..आह…आ..आह..आह..ज्जूओर्र..सससे..उउउम्म्म्ममम…हमम्म…आअहह...

थोड़ी देर की जोरदार चुदाई के बाद रूही झड़ने लगी…..

रूही-आअहह…अहहह..उउउंम…ऊहह..ऊहह..ऊहह..

ऊहह…ज्ज्ज्ूओर्र…सीई…म्म्मारईंन...आाऐययईईई….

उूउउंम्म…आहह…आहह…आह….

रूही के झाड़ते ही मैने चुदाई रोक दी...

रूही- बस...अब नही...आअहह...थक गई...आआहह...

मैं- चुप कर...अभी मेरा नही हुआ....

रूही- मैं तुम्हे ठंडा करती हूँ...

और रूही घुटनो पर बैठ गई और मैं भी उसके सामने खड़ा हो गया...

रूही ने जल्दी से मेरे लंड को मूह मे भरा और चूसना सुरू कर दिया....

रूही- सस्रररुउउप्प्प....सस्स्रररुउप्प्प...आअहह...उउउम्म्म्म ....

मैं- ओह्ह...जल्दी कर अब...

रूही-सस्स्स्सुउउउप्प्प…ऊओंम्म….उउउंम्म….सस्स्रर्र्र्र्रप्प्प्प....

मैं-आआहह…….क्कक्या चूस्ति हो….ऑर तेज,…हहाअ …ऐसे ही

रूही-सस्स्स्र्र्ररुउउप्प्प…..ऊओंम्म….उउउंम्म…सस्स्रररुउउप्प

मैं-आअहह…..ऐसे ही….ऑर तेज…मेरी रानी…आअहह…

रूही-सस्रररुउुउउप्प्प्प्प्प….सस्स्स्र्र्ररुउुउउप्प्प…..उूुउउम्म्म्ममनममम….सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प

मैने फिर रूही का सिर पकड़ कर उसका मूह चोदना सुरू कर दिया....

रूही- क्क्हुउऊंम..उउंम...उउंम...क्क्हूम्म....उउम्म्म्म..

मैं- ओह्ह....येस्स....यीहह..यईह..यईह

रूही- उउंम्म...क्क्हुऊंम्म...क्क्हुऊंम....

मैं- ओह्ह.. मैं आया….डाल दूं अंदर…

रूही- उउंम..उउंम..उउउम्म्म्म...

और मैं रूही के मूह मे झड गया....और रूही मेरा लंड रस गटकने लगी.....

मेरा लंड खाली होते ही मैने लंड रूही के मूह से निकाल लिया...और मैं उसके साथ वही नीचे बैठ गया....

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यहाँ तो हम सब सुबह से मस्ती मे बिज़ी थे ..पर हमसे कही दूर एक औरत बहुत ही परेसान हो रही थी...

सुबह से जागने के साथ ही वो उस आदमी से दूसरे आदमी के पास चलने को बोल रही थी..जिससे आज़ाद का पता चल सके....

औरत- और कितनी देर...??

आदमी- बस मेडम..थोड़ी देर और..अभी वो जगा नही होगा...

औरत- क्यो..राक्षस है क्या...दोपहर होने आई और वो जगा नही होगा...

आदमी- अरे मेडम..राक्षस नही पर राक्षस से कम भी नही...पूरी रात शराब और सवाब मे डूबा रहता है...इसलिए देर से जागता है...बस कुछ देर और इंतज़ार कीजिए...

औरत- ह्म्न..ठीक है...इतना इंतज़ार किया तो थोड़ा और...

आदमी- वैसे मेडम..आपका नाम क्या है...??

औरत- तुम्हे नाम से क्या...अपने काम से काम रखो बस..

आदमी- जी मेडम...

फिर दोनो थोड़ा इंतज़ार करते रहे...और थोड़ी देर बाद एक बड़े से घर के सामने पहुच गये...

आदमी- मेडम..ये है उसका घर...जिसका नाम है रघु...ये आपको आज़ाद के बारे मे बता सकता है..

औरत- तो खड़े क्या हो...चलो अंदर...

जैसे ही दोनो गेट पर पहुचे तो गार्ड ने उन्हे रोक लिया....

तब उस आदमी ने गार्ड को कुछ कहा जिससे गार्ड अंदर गया और बाहर आते ही दोनो को अंदर कर दिया....

जैसे ही दोनो घर के अंदर आए तो एक नोकर मिल गया....

नौकर ने उन दोनो को बैठने को बोला और खुद उपेर चला गया....

थोड़ी देर बाद नौकर वापिस आया और सिर्फ़ उस औरत को उपर एक रूम मे छोड़ आया...

रूम मे एंटर होते ही औरत के सामने एक बड़ा सा ...मूछो वाला हॅटा-कट्ता मर्द आ गया...जो रघु था...

औरत- आप ही रघु है...

औरत के इतना बोलते ही रघु ने अपनी नशीली आँखो से औरत को घूर के देखा...

औरत- सॉरी...मैं तो बस पूछ रही थी...आप ही रघु...

रघु(बीच मे)- बंद करो....

औरत- क्या..??

रघु- गेट बंद करो...

औरत ने गेट लगाया और फिर से सवाल किया...

औरत- आप ही रघु है..??

रघु- तुम कौन हो...??

औरत- मैं...मेरा नाम दामिनी है...

रघु- यहाँ क्यो आई...??

दामिनी- मैं आज़ाद मल्होत्रा को ढूंड रही हूँ...किसी ने बताया कि तुम...

रघु(बीच मे)- तुम आज़ाद को कैसे जानती हो...

दामिनी- बस..जानती हूँ...

रघु- मैने कहाँ कैसे जानती हो...

दामिनी- इससे तुम्हे क्या...तुम सिर्फ़ ये बताओ कि वो है कहाँ...

रघु दामिनी की बात सुन कर गुस्से मे खड़ा हो गया और दाँत पीसते हुए दामिनी के पास आ गया...

रघु- ओये...जितना पुच्छू ना..उतना ही बोलने का....और मुझे ना कहने की ग़लती तो करना ना...समझी...

दामिनी(डरते हुए)- जी..ठीक है...

रघु- अब बोल ..कैसे जानती है तू आज़ाद को...??

दामिनी- वो..आज़ाद मेरे रिश्तेदार है...

रघु- हाहाहा...रिश्तेदार....

दामिनी- तुम हंस क्यो रहे हो...

रघु- आज़ाद का कोई रिश्तेदार उसे यहाँ ढूँढने नही आयगा..समझी...अब सच बोलो...

दामिनी- वो...मैं..आज़ाद...वो..

रघु- घबरा मत..सॉफ-सॉफ बोल...

दामिनी- ठीक है...मेरा कुछ हिसाब बाकी है उससे..

रघु- तो ऐसा बोल ना कि दुश्मनी है..

दामिनी- हाँ..है दुश्मनी...अब बताओगे कि वो कहाँ है...

रघु- ह्म्म...दुश्मनी...अच्छा है...

दामिनी- तो बताओ फिर..ताकि मैं जल्दी से अपना हिसाब पूरा कर सकूँ...

रघु- मुझे नही पता की आज़ाद अभी कहाँ है...

दामिनी- तो तुम किस काम के...मेरा टाइम बर्बाद कर दिया...

दामिनी गुस्से मे वहाँ से जाने लगी पर रघु ने उसे रोक लिया...

रघु- ओह..रुक...

दामिनी- यहाँ रुक कर मुझे क्या मिलेगा...

रघु- मुझे आज़ाद का पता नही...पर उस इंसान का पता है जो हमे आज़ाद तक पहुचा सकता है...

दामिनी- ह्म्म..तो बताओ..कौन है वो...??

रघु- तुम्हे मिलवा ही दूँगा...

दामिनी- चलो फिर...

रघु- आज नही...कल चलेगे....आज रात तो मुझे कीमत बसूलनी है तुमसे...

दामिनी- कैसी कीमत..??

रघु- आज़ाद तक पहुचने की कीमत....

और रघु ने एक कमीनी मुस्कान दे दी...दामिनी भी उसका मतलब समझ गई और मुस्कुराने लगी.....

 


यहाँ महल मे....

थोड़ी देर बाद मैं और रूही कपड़े पहन कर रेडी हुए और वापिस आगन मे आ गये....

वहाँ मैने देखा की वो बुड्ढ़ा मुझे अभी भी घूर रहा था...

मैने उससे बात करने का तय किया क्योकि उसका घूर्ना मुझे परेसान कर रहा था....

मैने रूही को अकरम के पास जाने को बोला और कह दिया कि अकरम को बोल देना कि मैं थोड़ी देर से आ रहा हूँ...

रूही अकरम के पास निकल गई और मैं बुड्ढे की तरफ बढ़ने लगा...

लेकिन मुझे आते देख बुड्ढ़ा महल के उपेर वाले हिस्से मे चढ़ने लगा...

मैं भी उसके पीछे जाने लगा...

धीरे-2 बुड्ढे की स्पीड तेज होती गई और मैं भी उसका तेज़ी से पीछा करता रहा...

आगे जाकर बुड्ढ़ा एक रूम मे एंटर हो गया...

जब मैं उस रूम का गेट खोल कर अंदर गया तो देखा कि वो कोई रूम नही था बल्कि एक रास्ता था...

मैने देखा कि बुड्ढ़ा आगे जा रहा है...तो मैं भी पीछे चल दिया....

धीरे-धीरे इस जगह रोशनी कम होती रही और वहाँ सिर्फ़ मशालों की रोशनी आ रही थी...

थोड़ी देर तक उस बुड्ढे का पीछा करते हुए अचानक फिर से रोशनी दिखाई देने लगी ...

और थोड़ी देर बाद मैने अपने आप को महल के पिछले हिस्से मे खड़ा पाया....

मैं एक खुली जगह मे खड़ा था...पर वो बुड्ढ़ा नज़र नही आ रहा था....

मुझे पक्का यकीन हो गया था कि उस बुड्ढे का मुझसे कुछ तो लेना देना है...

और अगले ही पल मैं समझ गया कि ये तो एक ट्रॅप था...उसने मुझे जानबूझ कर यहाँ तक पहुँचाया...ज़रूर यहाँ कुछ है...

मैं सोच ही रहा था कि मुझे सामने से एक आदमी आता हुआ दिखा...

वो आदमी मेरी ही हाइट का था लेकिन डोले-सोले कुछ ज़्यादा ही थे....

चेहरे पर बड़ी मून्छे उसको ख़तरनाक दिखा रही थी..

और उसके हाथ मे एक बड़ी सी तलवार थी...जिसे देख कर मेरा दिल धड़कने लगा...

अब मुझे थोडा-2 डर लगने लगा था...

पर मैने सोचा कि डरने से काम नही होगा...मुझे इससे बात करनी चाहिए....हाँ..यही ठीक रहेगा...

मैं- हेलो...तुम कौन हो...और वो बुड्ढ़ा कहाँ गया....

उस आदमी ने मेरी बात को पूरी तरह इग्नोर किया और आगे बढ़ता रहा...

अब मेरा डर भी बढ़ गया था...

मैने उसे 2-3 बार टोका पर वो कुछ नही बोला...बस आगे बढ़ने रहा....

अचानक से वो रुका और अपनी तलवार को हाथ मे घुमाते हुए घात लगाने लगा....

वो मेरी तरफ बढ़ने लगा और मैं एक साइड पीछे की तरफ...

अचानक से मेरी नज़र एक पत्थर पर पड़ी और मैने लपक कर उस पत्थर को उठा लिया...

वो आदमी अभी भी आगे बढ़ता रहा...और मैं उसकी अगली चाल का इंतज़ार करते हुए उससे दूर होता रहा....

मैने सोच लिया कि अब तो ये रुकने वाला है नही तो क्यो ना इसका मुकाबला ही कर लिया जाए...

शायद आज के लिए ही मैने जिम मे पसीना बहाया था और कराते सीखा था...

पर उसके हाथ मे तलवार के होते हुए ये आसान नही था...तभी..

मैं(उस आदमी के पीछे देख कर)- ओये बुड्ढे...ये कौन है...

जैसे ही उस आदमी ने अपने पीछे देखा तो मैने पूरा ज़ोर लगा कर पत्थर मार दिया...

आदमी- आआहह....

और पत्थर उस आदमी के हाथ मे लगा...ठीक निशाने पर और तलवार उसके हाथ से छूट गई.....

और तलवार गिरते ही मैने भाग कर उस पर जंप मार दी..

और हम दोनो आपस मे लिपटे हुए ज़मीन पर जा गिरे...

उस आदमी ने सम्भल्ते ही मुक्के बरसाने सुरू कर दिए...और मैने भी...

हम दोनो ही लड़ते हुए खड़े हो गये और एक-दूसरे को मारते रहे...

थोड़ी देर बाद ही हम दोनो के मूह मुक्के खा कर लाल पड़ गये थे और उसके एक मुक्के ने तो मेरे मूह से खून निकाल दिया....

उसने फिर से मुक्का मारना चाहा तो मैने करते किक का जादू दिखा दिया और 2 किक मे वो ज़मीन पर जा गिरा...

मैं उसे पकड़ने आगे बढ़ा तो उसने पलट कर ज़मीन की धूल मेरी आँखो मे डाल दी..

अब मुझे कुछ दिखाई नही दे रहा था की...मैं आखे मलते हुए इधर-उधर घूम रहा था ...

तभी मुझे अहसास हुआ कि कुछ मेरी तरफ बड़ी तेज़ी से आ रहा है...

मैं कुछ सोच पता उससे पहले ही तलवार मेरे हाथ को ज़ख्मी करके निकल गई...

मैं- आआहह...म्म्म्मा आआ.....

तभी एक आवाज़ आई...

नाआहहिईीईईईईईईईई....र्र्ररुउउक्कककूऊऊओ....

और उसके बाद मेरे सिर पर एक जोरदार टक्कर लगी और मैं गिर गया....

 


जब मेरी आँख खुली तो मैने अपने आप को एक गाओं के छोटे से क्लिनिक मे बेड पर लेटा हुआ पाया....

मैने देखा कि मेरे चारो तरफ सब लोग (जो मेरे साथ ट्रिप पर थे) खड़े हुए है...

और उनमे से कुछ की आँखो मे परेसानि थी तो कुछ की आँखो मे आँसू भी...

मैने उठने की कोशिस की तब मुझे हाथ मे लगे तलवार के घाव की याद आई...

और मेरे मूह से ज़ोर से चीख निकल गई....

तभी जूही आगे बढ़ी और मुझे सहारा दिया और दूसरी तरफ से संजू और अकरम भी आ गये...

अकरम- भाई...ये किसने किया..तू बस नाम बोल...

अकरम की आँखो मे गुस्सा सॉफ-सॉफ दिख रहा था ..जो आसू बनता जा रहा था...

मैं- कोई नही यार...मैं गिर गया था...और बेहोश हो गया...फिर कुछ याद नही..

अकरम- क्या कहा...गिर गया था...साले ये हाथ पर घाव देख.. ये गिरने से नही होता....किसी हथ्यार से ही होता है....

मैं- अरे ये...ये तो वो उपेर लोहे का गेट था ना..वही लग गया था...

अकरम- साले फिर से...

अकरम की बात पूरी होने के पहले ही मैने उसे आँखे दिखा दी...जिसका मतलब वो समझ गया...

अकरम- ह्म्म...थॅंक गॉड..तू ठीक है...चल रेस्ट कर...

अकरम संजू को साथ ले कर बाहर निकल गया. .

बाकी सब भी धीरे-2 बाहर निकल गये...बस जूही रुकी रही...

सबके जाते ही जूही मेरे पास आई और मेरा हाथ पकड़ कर रोने लगी...

मैं- अब रोती ही रहोगी...हाल-चाल नही पुछोगी..

जूही चुपचाप मुझे देखते हुए रोती रही...

मैं- अब चुप हो भी हो जाओ...मैं ठीक हूँ...

जूही- पर ये सब...

मैं(बीच मे)- सस्शह...एक दम चुप...बाकी बातें घर पर...ओके..

उसके बाद हम सब फार्महाउस पर वापिस आ गये....

पूरे रास्ते मे, मैं यही सोचता रहा कि आख़िर वो था कौन...और मुझ पर हमला क्यो किया...

अगर वो मुझे मारने आया था तो जिंदा क्यो छोड़ दिया...

क्या इसी ख़तरे की बात कर रही थी रजनी आंटी...??

यहाँ से जाने के पहले इस महल मे एक बार तो आना ही पड़ेगा...शायद कुछ पता चले...

और यही सोचते हुए मैं सो गया...

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महल मे हमले के वक़्त..

जब वो हमलावर और मैं आपस मे लड़ रहे थे...तो वो बुड्ढ़ा दूर से छिप कर हमे देख रहा था...

तभी बुड्ढे के पास कॉल आया..

(कॉल पर)

बुड्ढ़ा- जी मालिक...

सामने- आदमी पहुच गया...??

बुद्धा- जी मालिक...काम भी सुरू कर दिया...

सामने- अकेला है या दो है...

बूडिया- एक ही आदमी है..

सामने- साले से कहा था कि 2 लोग जाना...आकाश कमजोर नही है..

बुड्ढ़ा- क्या मालिक...** साल के लड़के के लिए 1 ही काफ़ी है..

सामने- क्या...क्या बक रहा है...आकाश ** साल का नही..पूरा मर्द है...

बुड्ढ़ा- पर यहाँ तो एक लड़का ही है...**साल का...

सामने- साले...किस पर हमला करवा फिया...वो आकाश नही हो सकता...

बुड्ढ़ा- पर मालिक..मैने फोटो देखी थी आकाश की...ये वैसा ही लगा...

सामने- वैसा ही लगा...साले...वो बच्चा नही मर्द है...तूने किस बच्चे पर हमला करवा दिया मादर्चोद...

बुड्ढ़ा- मालिक...वो..वो..मैं तो..

सामने- अबे साले रोक उसे...कहीं मासूम बच्चा ना मारा जाए...रोक उसे..

बुड्ढ़ा जब तक रोकता उससे पहले ही अंकित का हाथ ज़ख्मी हो चुका था...

बुड्ढ़ा(भागते हुए)- रुक जा...भाई रुक..ये वो नही है..

बुड्ढ़ा- न्न्न्ना आहहिईिइ....र्ररुउउउक्कक्कूव...

उस आदमी ने गर्दन उड़ाने को तलवार उठा ली यही...पर बूढ़े के रोकते ही वो रुक गया....

और तलवार पलटा कर तलवार की मूठ अंकित के सिर पर मार दी...जिससे अंकित बेहोश हो गया....

और फिर बुड्ढ़ा और वो आदमी..उस गुप्त दरवाजे को बंद कर के भाग गये...

बाकी सब को जब अंकित नही मिला तो सबने मिलकर उसे ढूँढा और पास के गाओं के क्लिनिक ले गये.....

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फार्महाउस पर.....

वापिस आते ही मैने अपने आदमी को उस महल मे हुई पूरी बारदात बता दी थी...

और उससे पता करने का बोला कि उस महल से मेरा या मेरे दुश्मनो का कोई रीलेशन है क्या...

मैं जानना चाहता था कि इस अटॅक के पीछे कौन है और उसका मक़सद क्या था...

फिर रात को डिन्नर के बाद मैं अपने रूम मे रेस्ट कर रहा था...तभी संजू और अकरम मेरे रूम मे आए और आते ही रूम लॉक कर दिया....

अकरम- अब जल्दी से बोल...क्या हुआ था वहाँ....

मैं- पहले बैठ ..और संजू तू ड्रिंक बना फिर सब बताता हूँ...

फिर हमने ड्रिंक लिए और बैठ गये...

मैं( ड्रिंक की सीप मार कर)- ह्म्म..अब बोल..क्या पूछ रहा था...

अकरम- साले...वहाँ चुप हो गया था...अब यहाँ नही होने वाला..बोल..

संजू- हाँ भाई..सच बात तो बता...

मैं- ओके...बताता हूँ...

फिर मैने उन दोनो को उस बुड्ढे और हमले के बारे मे सब कुछ बता दिया...

मेरी बात ख़त्म होते ही दोनो गुस्से मे खड़े हो गये...

अकरम- क्या..उस बुड्ढे ने...मादर्चोद को छोड़ुगा नही...चल संजू..

संजू- हाँ भाई..अभी उड़ा देते है साले को..चल...

मेरे दोनो जिगरी दोस्त पूरे गुस्से मे उन बुड्ढे को मारने जाने लगे..

मैं- कहीं भी जाने के पहले ये याद रखना कि अभी कहीं गये तो मुझसे कभी बात मत करना...

मेरी बात सुन कर दोनो के पैर थम गये...मैं जानता था कि यही होगा ..

अकरम(गुस्से मे)- आख़िर तू चाहता क्या है...हम चुपचाप बैठे रहे...

मैं- नही..बस अभी मत जाओ...हम कल चलेगे..पक्का..

संजू- ह्म्म..ओके ..आज की रात तेरी बात मान ली..कल तू मानेगा..समझा..

मैं- पक्का..अब आ जाओ सालो...ड्रिंक करते है...

फिर हमने ड्रिंक की और वो दोनो अपने रूम मे चले गये...

थोड़ी देर बाद मेरे आदमी का कॉल आ गया ..

(कॉल पर)

मैं- हाँ बोलो...पता चला ..

स- ह्म्म..बहुत कुछ पता चला...

मैं- तो बोलो..

स- वो महल सम्राट सिंग का है...

मैं- वो मैं जानता हूँ...पर उससे मेरा क्या लेना-देना..

स- है यार...वो तेरे डॅड का दुश्मन है...

मैं- डॅड का दुश्मन...पर क्यो...किस लिए...??

स- वो अभी पता नही चला..पर एक ऐसी बात पता चली है...जो शायद तेरे घरवालों को भी पता नही होगी...

मैं- ऐसी कौन सी बात है..??

और फिर मेरे आदमी की बात सुन कर मुझे झटका लगा...

झटका इसलिए की ये बात मेरे घर मे किसी को भी नही पता थी...जो मानना इम्पॉसिबल था....

क्क्कय्य्ाआआअ.....ये कैसे हो सकता है कि कोई नही जानता.....नो...इट्स इंपॉसिबल....

मैं अपने आदमी की बात सुनकर शॉक्ड था...मुझे उसकी बात बिल्कुल भी सही नही लग रही थी...

स- मुझे यही पता चला है...शायद यही सच हो...

मैं- देखो...मुझे आप पर पूरा भरोसा है...पर और किसी पर नही...

स- ह्म्म..तो क्या करें..ये बोलो...

मैं- आप खुद पर्सनाली इस बात की तह तक जाओ...तभी मैं सच मान सकता हूँ..

स- ओके..वैसे अभी ये बात ज़्यादा इम्पोर्टेंट नही है...अभी हमारा फोकस कामिनी के उपेर है...

मैं- ह्म्म....सही कहा..फिर भी पता करो कि इस बात मे कितनी सच्चाई है...मैं भी महल जा कर आता हूँ...

स- महल...किस लिए...मेरे हिसाब से वहाँ कुछ नही मिलेगा...

मैं- जानता हूँ...पर शायद कुछ मिल जाए...

स- ओके...देख आओ...मैं रात को कामिनी को देखता हूँ....

मैं- ह्म्म..पर इतना ही देखना कि मरे ना वो...

स- हाहाहा...डोंट वरी...यू टेक केर...बाइ...

मैं- ओके..बाइ...

फ़ोन रखने के बाद मैं अपने आदमी की बताई बात के बारे मे सोचने लगा...

मुझे उसकी खबर मे कोई सच्चाई नज़र नही आ रही थी...इसलिए मैने उसे इग्नोर कर दिया....और रेस्ट करने लगा...

करीब 20 मिनिट बाद मुझे हल्की-2 नीद आने लगी...तभी मेरे रूम का गेट ओपन हुआ...

मैने आवाज़ सुनकर गेट की तरफ देखा तो सामने जूही खड़ी हुई थी...

जूही के चेहरे से सॉफ पता चल रहा था कि वो बड़ी उदास है...

और ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी-2 रो कर आ रही है..

मैं- उउंम...जूही...तुम..इस वक़्त...आओ...

जूही आकर बेड पर ही मेरे साइड मे बैठ गई...

थोड़ी देर मुझे चुपचाप देखने के बाद जूही ने मेरे हाथ को अपने हाथ मे लिया और दूसरे हाथ से मेरे हाथ को सहलाने लगी...

मैने गौर किया तो पाया कि जूही सिर झुकाए रो रही थी...

मैं- जूही...क्या हुआ...तुम..तुम रो रही हो...

मेरे बोलते ही जूही की आँखो मे क़ैद आँसू उसकी आँखो से बाहर निकलने लगे...

मैं- क्या बात हुई यार...रो क्यो रही हो...

जूही ने फिर भी कुछ नही बोला बस मेरे हाथ को उपर उठा कर अपने नरम होंठो से चूमने लगी और आँसू बहाने लगी...

जूही के आँसुओं को मैं अपने हाथ पर महसूस कर रहा था...और इन आसुओं की वजह मुझे पता करनी ही थी...

मैं- जूही...कुछ तो बोलो यार..हुआ क्या...

जूही फिर भी नही बोली बस आँसू बहती रही...अब मुझसे उसका रोना देखा नही जा रहा था...

मैं- तुम्हे मेरी कसम..जल्दी बोलो...

जूही(सुबक्ते हुए)- तुम ठीक हो ना...

मैं- हाँ..मुझे क्या हुआ...

जूही- क्या हुआ...तुम्हे पता नही...मेरी तो जान निकल गई थी...थॅंक गॉड तुम ठीक हो...

मैं- ओह्ह...तो ये आँसू इसलिए वेस्ट किए जा रहे है ...

जूही(मेरे हाथ पर हल्की थपकी मार कर)- चुप रहो...कोई वेस्ट नही हो रहे है...समझे..

मैं- ह्म्म...कुछ-2 समझा...

जूही- कुछ-कुछ...??

मैं- ह्म्म...मुझे इतनी सी चोट लगी और तुमने इतने कीमती आँसू बहा दिए..हाँ..

जूही- तुमसे कीमती कुछ नही है...समझे...

मैं- ओह्ह...अच्छा ये बताओ...इतनी सी चोट मे ये हाल है...तो अगर मैं मर जाता....

इससे आगे बोलने के पहले ही जूही को जूरदार हाथ मेरे गाल पर पड़ा...

जूही- चुप रहो...तुम..तुम...

और जूही रोती हुई मेरे सीने से लग गई..

मुझे उसका प्यार देख कर बहुत खुशी भी हो रही थी और बुरा भी लग रहा था...

बुरा इसलिए की मुझे लगता था कि मैं जूही के प्यार के काबिल नही....

मैं- आअहह...इतना तेज थप्पड़ ...आअहह..

जूही(सुबक्ते हुए)- सॉरी...पर तुम ऐसी बात मत करना कभी....नही तो मुझसे बुरा कोई नही होगा...

मैं- तुमसे बुरा कोई है भी नही...

जूही(मुझे देख कर)- क्या...मैं इतनी बुरी हूँ...

मैं- और नही तो क्या...देखो कैसे बच्चो की तरह रोती हो...

जूही- सिर्फ़ तुम्हारे लिए...

मैं- अच्छा...मेरे लिए...पर क्यो..??

जूही(शरमाते हुए)- एक लड़की एक लड़के के लिए क्यो रोती है..इतना भी नही जानते ..पागल...

मैं- नही....मुझे कैसे पता होगा...कभी कोई रोया ही नही मेरे लिए...

जूही- तो क्या हुआ...पता तो होगा ही...

मैं- मुझे तो यही पता है कि एक लड़की एक लड़के के लिए सिर्फ़ बेड पर रोती है...खास कर गोलडेन नाइट पर...ह्म्म

मैने अपनी बात कही और आँखो से जूही को इशारा करते हुए मुस्कुराने लगा.....

जूही(मुस्कुरा कर)- तुम बहुत बेकार हो...मैं जा रही हूँ...

जूही ने जाने का नाटक किया पर मैने उसका हाथ नही छोड़ा...

मैं- मुझे छोड़ के जाओगी...

जूही(बिना पलटे)- कभी नही...

मैं- तो आज की रात मेरे नाम कर दो...

जूही(पलट कर मेरी आँखो मे देखती हुई)- आज रात नही...मेरी सारी राते तुम्हारे नाम कर दी है...

और फिर जूही मेरे सीने मे सिर छुपा कर शरमाने लगी...

मैने जूही को अपने पास ही लिटा लिया और अपनी बाहों मे कस लिया....

फिर हम ऐसे ही चिपके हुए लेटे रहे और नीद की आगोश मे चले गये.....

आज का दिन मेरे लिए काफ़ी शॉकिंग और ख़तरनाक था....पर रात का अंत प्यार भरा रहा ...

मुझसे कहीं दूर कामिनी के दिन की शुरुआत इससे भी बुरी हुई थी.....

 


सहर मे कामिनी के घर....आज सुबह....

सुबह-सुबह कामिनी की नौकरानी चाइ लेकर कामिनी के रूम तक आई...

नौकरानी ने 2-3 बार कामिनी को आवाज़ दे कर नॉक किया ..बट कोई रेस्पोन्स नही मिला...

थोड़ी देर बाद नौकरानी को टेन्षन होने लगी तो उसने गेट खोल कर अंदर जाने का तय किया....

(कामिनी के आक्सिडेंट के बाद से ही कामिनी रूम को लॉक नही करती थी.)

नौकरानी ने अंदर आ कर कामिनी को देखा तो चाइ उसके हाथ से गिर गई और मूह से जूरदार चीख निकल गई...

नौकरानी की आवाज़ सुनते ही घर के बाकी लोग भी वही आ गये....

सामने कामिनी बेड के नीचे बेहोश पड़ी हुई थी...हालाकी कोई चोट नही दिखाई दे रही थी...

सुषमा ने तुरंत नौकरों की मदद से कामिनी को बेड पर लिटाया और पानी डाल कर उसे होश मे ले आई...

होश मे आते ही कामिनी डरते हुए बोलने लगी...

कामिनी- नही...मेरी बेटी को कुछ मत करना...प्लीज़ ..

काजल(कामिनी की बेटी)- मोम...क्या हुआ...प्लीज़ शांत हो जाइए...

कामिनी(काजल का हाथ पकड़ कर)- बेटी...तू ..तू ठीक है ना..हाँ...बोल ना..

काजल- येस मोम..मैं बिल्कुल ठीक हूँ...आप डरी हुई क्यो है...प्लीज़ आप शांत हो जाइए...

कामिनी - बेटा..तू यही रहना...मेरे पास...हाँ बेटा...

काजल- मैं यही हूँ मोम...आप बस शांत हो जाओ...मैं यही हूँ...

काजल ने कामिनी को पानी पिला कर लिटा दिया...

कामिनी के लेट ते ही काजल ने बाकी सब को वहाँ से जाने को बोला और सिर्फ़ सुषमा और काजल ही रूम मे बैठी रही....

थोड़ी देर तक कामिनी आँख बंद किए लेटी रही और फिर उसने आँख खोली तो वो थोड़ा रिलॅक्स लग रही थी....

सुषमा- कामिनी...अब ठीक हो ...तुम नीचे कैसे ..

काजल(बीच मे)- अभी नही आंटी...अभी मोम को रेस्ट करने दीजिए...

कामिनी- कोई बात नही बेटा ..मैं अब ठीक हूँ...तू टेन्षन मत ले...

काजल- पर मोम..

कामिनी- तू जा कर फ्रेश हो जा...मैं ठीक हूँ...सुषमा है ना यहाँ...

काजल- ओके मोम..मैं अभी आती हूँ...आप रेस्ट करो ..

कामिनी , काजल को समझा कर भेज देती है...काजल के जाते ही सुषमा कामिनी से सवाल करने वाली ही थी..

तो कामिनी ने उसे रोक दिया और रजनी, रिचा और मनु को बुलाने को कहा....

करीब 1 घंटे के बाद कामिनी के रूम मे कामिनी , सुषमा , रजनी , रिचा और मनु बैठे थे.....

सब के सब पिछले 10 मिनट से चुपचाप एक-दूसरे को देखते हुए बैठे थे...सिर्फ़ कामिनी अपनी नज़रे नीचे किए हुए किसी सोच मे डूबी हुई थी....

रजनी- कामिनी...

कामिनी- हूँ..हाँ...क्या कहा...??

रजनी- कहा कुछ नही...तुम किस सोच मे डूबी हो ..और इतनी परेसानि किस बात की है....??

कामिनी- परेसानि ...

रिचा- हाँ ..क्या हुआ जो हमे इतना अर्जेंट बुला लिया...??

रजनी- हां....और तू बेहोश क्यो हो गई थी...हुआ क्या था...

कामिनी- वो ..मुझे कल ...कल एक फ़ोन आया था ....

रजनी- फ़ोन...किसका...??

कामिनी- वो...दीपा का...

दीपा का नाम आते ही सबके माथे पर परेसानि छा गई....

रजनी- दीपा का फ़ोन...नही...ये नही हो सकता...

रिचा- तू पागल हो गई क्या...कोई मरने के बाद कॉल करता है क्या...

कामिनी- पर मैं सच...

रिचा- ओह्ह.. प्लीज़ ...अपनी बकवास को सच मत बोल...

रजनी- एक मिनट रिचा...उसकी पूरी बात तो सुन ले...कामिनी तू बता...क्या हुआ था...

फिर कामिनी रात की पूरी बात बताने लगी...

उसने बताया कि दीपा ने उससे कहा कि वो उसकी बेटी को मार देगी...और तभी पीछे से कुछ आवाज़ आई तो मैं चीख उठी...और फिर सुबह ही होश आया....

रिचा- तुझे कैसे पता कि वो दीपा का कॉल है...??

कामिनी(ज़ोर से)- क्योकि मैं उसको अच्छे से जानती हूँ...और उसकी आवाज़ भी..

रिचा- हां ...पर हो सकता है कोई मज़ाक कर रहा हो...

कामिनी- मज़ाक....नही...आक्सिडेंट के टाइम मैने उसे देखा था और अब ये कॉल...ये कोई इत्तेफ़ाक़ नही हो सकता...

रजनी- तो तू कहना चाहती है कि दीपा ज़िंदा है...

कामिनी- नही. .मुझे लगता है कि ये दीपा का भूत..

रिचा(बीच मे)- व्हट नॉनसेन्स यार...भूत-बूत कुछ नही होता ...समझी...

कामिनी- जब भगवान है तो भूत भी है..समझी..

रिचा- तू अंधविश्वासी है और कुछ नही ...

रजनी- प्लीज़ रिचा...ये लड़ने का टाइम नही...कामिनी ..तू बता ...दीपा ने कुछ और कहा था...

कामिनी- हाँ...उसने कहा था कि वो फिर आयगी...छोड़ेगी नही...

रजनी- ह्म्म..तू एक काम कर...थोड़ा इंतज़ार कर के देख...पता चल जायगा कि वो भूत है या इंसान..

कामिनी- पर वो आई तो...

तभी उन्हे कुछ आवाज़ सुनाई दी...

रिचा- ओह हो..अब ये किस चीज़ की आवाज़ है...

कामिनी- अरे...ये तो लाइट की फिटिंग चेक करने आए है...कल कुछ स्पारकिंग हो रही थी बाहर तो चेक करने बुलाया था...हाँ मैं कह रही थी कि दीपा फिर से आई तो...???

रिचा- तो दोनो मज़े कर लेना...हहहे...

रजनी- रिचा प्लीज़ यार....कामिनी तू बस वेट कर...आगे कुछ होगा तब देखेगे...ओके...हो सकता है कि ये किसी की सरारत हो...ह्म्म..

कामिनी- ओके रजनी...यही करती हूँ...वैसे मनु...तू क्यो चुप है...??

मनु- हाँ...कुछ नही यार...बस दिमाग़ चकरा गया. .

कामिनी- ह्म्म..तो स्ट्रॉंग कॉफी पीते है ...सबके दिमाग़ ठीक हो जाएगे...

फिर सबने कॉफी पी और अपने-2 घर निकल गई...

उनके जाने के बाद घर की नौकरानी आई जो अपने साथ अपनी बेहन को भी ले कर आई थी ..

 


जब कामिनी ने पूछा तो उसने बताया कि उसकी बेहन कामिनी की सेवा के लिए है..कुछ दिनो तक...असल मे कामिनी ने ही एक एक्सट्रा नौकरानी के लिए बोला था...

पूरे दिन कामिनी के घर मे हर तरफ लाइट की फिटिंग चेक होती रही..और सब सेट कर के वो लोग भी चले गये....

साम को कामिनी की पहचान वाले के घर कोई फंक्षन था...जिसमे कामिनी ने सुषमा और काजल को पहुचा दिया...

काजल तो मना कर रही थी..पर कामिनी ने उसे मना कर भेज दिया...

रात को कामिनी के घर कामिनी और कुछ नौकर-नौकरानी ही थे....

डिन्नर के बाद कामिनी सो गई और घर मे सन्नाटा छा गया....

कामिनी के घर से निकलने के बाद कामिनी की फरन्डस(रजनी, रिचा और मनु) भी दीपा की बात से परेसान थी....

देखते है इनकी क्या हालत थी ...

रजनी के घर.....

कामिनी के घर से निकल कर रजनी अपने घर पहुचि...और पहुचते ही विनोद को कॉल कर के घर बुला गया....

विनोद(रूम मे आते ही)- क्या हो जाता है तुम्हे...जब देखो जब...अर्जेंट मे बुलाती हो...

रजनी- बात ही ऐसी है...मैं क्या करूँ..

विनोद- अच्छा....अब कौन सा आसमान टूट पड़ा...

रजनी- अरे...तुम्हे पता भी है कि दीपा...

विनोद(बीच मे)- दीपा...उसका क्या...वो तो गई...

रजनी- नही...वो यही है..हमारे आस-पास...

विनोद- क्या बक रही हो...

रजनी- पहले सुनो...

फिर रजनी ने विनोद को सारी बात बता दी...

विनोद- क्या...सच मे ऐसा हुआ..

रजनी- हाँ...तभी तो मुझे टेन्षन है...

विनोद- टेन्षन कैसी...वो जिंदा हो या मरी हो...हमारा क्या बिगाड़ लेगी...

रजनी- बहुत कुछ...भूलो मत हमारा एक राज़ वो भी जानती है...अगर वो जिंदा है तो..

विनोद- तो क्या...जैसे पहले चुप रखा था ..फिर से कर देगे..डोंट वरी...

रजनी- ह्म्म...अब कुछ टेन्षन कम हुई...तुम जा सकते हो...

विनोद- अब ऐसे ही नही जाने वाला..आया हूँ तो कीमत वसूल कर के जाउन्गा..और अब तो अक भी बहुत दूर है....

इससे पहले की रजनी कुछ बोलती...विनोद ने उसे बाहों मे कस लिया और चूमना सुरू कर दिया....

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मनु के घर....

मनु भी कामिनी के घर से लौटने के बाद परेसान थी...पर उसकी परेसानि की वजह सिर्फ़ दीपा की न्यूज़ नही थी...

मनु बेड पर बैठी हुई किसी को बार-2 कॉल कर रही थी...पर शायद कॉल लग नही रहा था...

मनु(मन मे)- ये दीपा की बात ने एक ने टेन्षन दे दी...पहले ही क्या कम टेन्षन थी....

एक तो ये कॉल नही उठा रहा ....पता नही कहाँ है ....और अब ये दीपा....

एक बात तो पक्की है कि ये भूत नही हो सकता...या तो कोई नाटक कर रहा है...या फिर ये दीपा ही है...

अगर ये दीपा ही है..तो साली जिंदा कैसे बच गई....और बची भी तो अब ये गेम क्यो खेल रही है....

अगर कॉल उठा ले तो कुछ दीपा के बारे मे भी पता चल सकता है...

और ये कहते हुए मनु फिर से कॉल लगाने मे बिज़ी हो गई.....

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रिचा के घर......

रिचा , कामिनी के घर तो शेर बन रही थी...पर असल मे उसकी भी फट रही थी...

रूचा भी भूतो पर यकीन रखती थी...

रिचा ने घर आते ही बॉस को कॉल किया ..

(कॉल पर)

बॉस- मैने बोला था ना कि मुझे कॉल मत करना...

रिचा- वाह..ना ही ..ना हेलो...

बॉस- अभी मेरे पास फालतू टाइम नही है...तुमने कॉल क्यो किया...

रिचा- मुझे कोई शौक नही...कुछ ज़रूरी बात थी इसलिए...

बॉस- तो जल्दी से बोलो...

रिचा- ये दीपा के बारे मे है...

बॉस- दीपा ...वो तो मर चुकी है...फिर क्या टेन्षन...

रिचा- पता है...पर पूरी बात सुनो...समझ जाओगे...

बॉस- बोलो...

फिर रिचा ने कामिनी के साथ हुई सारी बातें बॉस को बता दी...

बॉस- हम्म...तो तुम्हे क्या लगता है...वो भूत है या फिर दीपा ही जिंदा बच गई....

रिचा- यही तो पता लगाना है...

बॉस- तो तुम पता करो...और अब कॉल मत करना मुझे ...

और रिचा कुछ बोल पाती उसके पहले ही कॉल कट हो गई....

रिचा(अपने आप से)- अब मैं क्या करूँ...कैसे पता करूँ...अगर वो सच मे भूत हुआ तो...मुऊम्म्मी...

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सहर मे कामिनी के घर

आधी रात के सन्नाटे के बीच धुआ उठने लगा और बढ़ते-2 धुआ कामिनी के घर की तरफ बढ़ने लगा. ..

गेट पर धुआ छाते देख चौकीदार अपने कॅबिन से बाहर आया...इससे पहले कि वो कुछ देख पता वो गिर कर बेहोश हो गया....

धुआ अपनी गति से बढ़ता हुआ कामिनी के घर के अंदर पहुच गया....

अचानक कामिनी के रूम मे धीरे-2 से कोई कामिनी का नाम पुकारने लगा...पर कामिनी को कोई फ़र्क नही पड़ा ...वो आराम से सोती रही....

धीरे-2 आवाज़ तेज होने लगी...

कामिनी....जागो कामिनी...जागो...

देखो कामिनी...मैं आ गई ...जागो..

आँखे खोलो मेरी जान...देखो मैं आ गई...हहहे...

आवाज़ तेज होते ही कामिनी की नीद टूट गई...

जब कामिनी ने आँखे खोली तो रूम मे हल्का-हल्का धुआ छाया हुआ था...और लाइट ऑफ थी...

कामिनी ने आवाज़ सुनते ही बेड के बाजू मे रखे टेबल लॅंप को ऑन करने की कोशिस की ..पर वो ऑन नही हुआ...

कामिनी आवाज़ सुनकर डरने लगी...पर आज उसने हिम्मत बाँधे रखी....

कामिनी- क्क्क..कौन है.. सामने आओ...कौन है..

कामिनी ने ज़ोर-2 से चिल्ला कर कई बार पूछा पर कोई जवाब नही मिला...आवाज़ बंद हो गई...

कामिनी को लगा कि ये उसका वहम होगा...पर फिर से आवाज़ आई...

कामिनी ....उठो कामिनी...मैं आ गई ..

अब कामिनी का सब्र टूटने लगा और उसने ज़ोर से नौकरों को आवाज़ दी...पर कोई भी नही आया ...

कामिनी...कोई नही आयगा...आज सिर्फ़ तुम और मैं...हहहे...

कामिनी(डरते हुए)- त्त..तुम झूट बोल रही हो ...तुम दीपा नही हो सकती ...व्व..वो मर गई है...

अच्छा ...तो खुद देख लो...

और फिर तेज हवा के चलने की आवाज़ आने लगी और पूरे रूम मे धुआ बढ़ने लगा....

कामिनी आँखे टिकाए सब जगह देख रही थी...

कि अचानक बिजली के कडकने की आवाज़ आई और एक साया धुआ के बीच से सामने आ गया....

जिसे देख कर दीपा की चीख निकल गई.......

चुप...चिल्लाने से कुछ नही होगा...चुप रहने ने ही भलाई है ..वरना...

कामिनी- हहूहहुउऊ...त्त्त..तुम..क्यो आई यहाँ....

क्यो आई...भूल गई..तेरी वजह से मैं मरी हूँ....वो भी बिना वजह के...

कामिनी- तो मैं क्या करूँ...मैने मारा क्या ...

हाँ...तेरे मक़सद के लिए मैं बलि चढ़ गई...समझी(चिल्ला कर)

कामिनी- एयाया ...मुझे छोड़ दो...प्लीज़ ..

छोड़ दुगी.. तू बस ये बता कि तू अंकित के पीछे क्यो पड़ी है....

कामिनी- क्या...क्यो...मैं नही बताउन्गी...

नही बताएगी...तो मैं नही जाउन्गी...तुझे भी मार दूगी ....

कामिनी- क्क्क ..क्या कर लोगि...त्त्त..तुम कुछ न्नाही कर सकती...

कुछ नही कर सकती...तो देख फिर....आज से तेरी उल्टी गिनती चालू....हहेहहे...

और फिर रूम मे ज़ोर से बिजली गिरने की आवाज़ आई और दीपा का चेहरा लाल पड़ता गया...और एक धमाके की आवाज़ के साथ दीपा धुएँ मे गायब हो गई...

अचानक हुए धमाके से डरी हुई कामिनी कुछ ज़्यादा ही डर गई...और बेहोश हो गई....

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महल के हादसे के बाद.........

जब बुड्ढे को पता चला कि उसने ग़लत इंसान को पहचान लिया था तो वो घबरा गया...

और वहाँ से भाग कर सीधा सम्राट सिंग के पास पहुच गया...

बुड्ढ़ा- मालिक..मालिक...आप कहाँ हो....

सम्राट- ओये बुड्ढे...क्यो चिल्ला रहा है...

बुड्ढ़ा- मालिक..मालिक वो बच्चा...

सम्राट- अरे साँस तो ले ले...फिर बता...

बुड्ढ़ा- मालिक ..वो बच्चा मर गया...

सम्राट- क्या...मर गया..पर मैने तो मना कर दिया था ना...

बुड्ढ़ा- हाँ मालिक...पर थोड़ी देर हो गई...

सम्राट- ये तेरी ही ग़लती है...तूने ही कहा था कि वो आकाश है...

बुड्ढ़ा- ग़लती हो गई मालिक...

सम्राट- तो अब यहाँ क्यो आ गया...

बुड्ढ़ा- मुझे बचा लो मालिक...वो लोग मुझे नही छोड़ेगे...

सम्राट- ठीक है...तू बैठ ...मैं देखता हूँ...

फिर सम्राट ने महल कॉल करके पूछा और कॉल रख कर बोला...

सम्राट- बुड्ढे...तू बच गया...हाहाहा...

बुड्ढ़ा(शॉक्ड हो कर)- मालिक...

सम्राट- अबे...वो बच्चा बच गया...अब निसचिंत हो जा...वो ठीक है...

बुड्ढ़ा(सम्राट के पैर पकड़ कर)- धन्याबाद मालिक...धन्याबाद....

सम्राट- ह्म्म..बैठ और दारू पी...

दारू पीने के बाद सम्राट ने एक फोटो आल्बम उठाया और एक पिक्चर को देख कर बोला....

सम्राट- तू कहाँ छुपा है साले....एक बार तेरी खबर लग जाए फिर देखना.....

दारू के नशे मे वो फोटो आल्बम नीचे गिर गया...और उसमे लगी एक फोटो देख कर बुड्ढ़ा चौंक गया...और बोला...

बुड्ढ़ा- मालिक..ये...ये कौन है...???

सम्राट- ईए....ये उस साँप का सपोला है...आज़ाद का बारिश...आकाश का बेटा..

बुड्ढ़ा- मालिक...यही तो था...

सम्राट- क्या ..कौन था ...

बुड्ढ़ा- अरे मालिक..वो बच्चा यही तो था...

सम्राट- तुझे चढ़ गई क्या...फिर से ग़लत पहचान कर रहा है...

बुड्ढ़ा- नही मालिक...यही था...ग़लत निकलु तो गर्दन काट देना ...

बुड्ढे का कॉन्फिडेंट देख कर सम्राट भी सोच मे पड़ गया और उसने कॉल किया...

सम्राट(कॉल पा)- उस लड़के का एक फोटो ले कर आओ...डॉक्टर को मेरा बोल देना...

थोड़ी देर बाद एक आदमी अंकित की फोटो लेकर आ गया...जिसे देख कर सम्राट खुश हो गया...

सम्राट- आख़िरकार ..पता चल ही जायगा कि आकाश कहाँ है...अब मेरे बदला सुरू होगा...

सम्राट ने फिर से एक कॉल लगाया जो एक औरत ने उठाया....

(कॉल पर)

सम्राट- बेटी...एक खुशख़बरी है...

औरत- क्या पापा...

सम्राट- आकाश का पता चल गया बेटी...

औरत- वाह पापा...अब मज़ा आयगा...आगे क्या करना है...

सम्राट- कुछ दिन रुक...आकाश से निपट लूँ फिर आगे का काम तुझे ही करना है...तब तक तू अपना जादू आज़ाद के घर चलाती रह...

औरत- जी पापा...इसी दिन के लिए तो मैं यहाँ आई थी..आप जल्दी करो...आज़ाद की तबाही देखनी है मुझे...

सम्राट- हाँ बेटी...तबाही जल्दी ही होगी...अभी चुपचाप काम कर..ठीक है..

औरत- ठीक है पापा...

सम्राट ने पूरी बात लाउडस्पिकर ऑन कर के की थी..जिसे बुड्ढे ने भी सुन लिया था ...

बुड्ढ़ा- मालिक...ये कौन थी...आपकी बेटी..

सम्राट- ओह..तू यहीं था ..ओह हो...हाँ ये मेरी बेटी थी...

बुड्ढ़ा- पर आपकी बेटी है कहा...और आज़ाद के घर कैसे ..

सम्राट(बीच मे)- स्शह...ये बात कोई नही जानता..आज़ाद भी नही..पर तुझे बताता हूँ ..ह्म्म

बुड्ढ़ा- मालिक..

सम्राट उठा और घूमते हुए दीवाल के पास खड़ा हो कर बोला ..

सम्राट- मेरी बेटी कौन है..यही जानना चाहता है ना...

बुड्ढ़ा- जी मालिक..

सम्राट- मेरी बेटी..मेरे दुश्मन आज़ाद की बहू है..हाहाहा..

बुड्ढ़ा(आँखे बड़ी कर के)- क्या..मालिक..

इससे पहले की बुड्ढ़ा कुछ और कहता...सम्राट ने मूड कर तलवार से बुड्ढे की गर्दन काट दी...बुड्ढ़ा वही ढेर हो गया...

सम्राट- ओह हो...मर गया...क्या करूँ...ये राज जानने वाला तू अकेला ही था...तुझे कैसे छोड़ देता...साला बुड्ढ़ा...

सम्राट(पेग लगा कर)- आकाश ...अब तू मेरी पहुच से दूर नही...तेरे बेटे के ज़रिए मैं तेरे पास पहुचुगा...और फिर...

मल्होत्रा खानदान का सर्वनाश.....हाहहाहा...

और सम्राट की हसी पूरे घर मे गूंजने लगी......

फिर दारू पीते-पीते सम्राट सिंग दारू के नशे मे लूड़क गया.......और उसकी खामोशी, रात की खामोशी मे खो गई....

 


फार्महाउस पर...

रात के सन्नाटे को चीरती हुई पन्छियो के चाहचाने की आवाज़ से मेरे दिन की शुरुआत हुई....

आवाज़ सुनकर मैने आँख खोली तो याद आया कि कल खिड़की बंद करना ही भूल गया था...

सूरज की हल्की-हल्की किरणें मेरे रूम मे आ कर मुझे गुड मॉर्निंग कह रही थी...

तंभी मेरा ध्यान मेरे हाथ पर गया...तो पाया कि मेरा हाथ जूही अपने हाथ मे थाम कर लेटी हुई है...

जूही मेरा हाथ ऐसे ही पकड़ कर सोती रही...जैसे कि एक बच्चा अपना पसंदीदा खिलोना पकड़ के सो जाता है...

जूही की इस हरकत के बारे मे सोच कर मेरे चेहरे पर मुस्कान फैल गई....

मैने चेहरा घुमा कर जूही को देखा..जो मेरे सीने पर सिर रख कर सो रही थी..

उसके बाल उसके आधे चेहरे को छुपाए हुए थे..और आधे चेहरे से मासूमियत छलक रही थी...

सूरज की किर्ने उस के गालो पर पड़ कर उसकी खूबसूरती बढ़ा रही थी...उसके गाल सूरज की रोशनी मे दमकने लगे थे...

थोड़ी देर तक मैं जूही के मासूम चेहरे को देख कर खुश होता रहा...

पर मुझे याद आया कि इस टाइम कोई भी आ सकता है...क्योकि मैं चोटिल जो था...

इसलिए मैने जूही को उठाया...पर वो कसमसा कर मेरे सीने पर ही लेटी रही...उपेर से मेरे हाथ को अपने हाथ मे ज़ोर से दबा लिया...

मैने अपना दूसरा हाथ उसके गाल पर फिराया तो थोड़ी देर मे ही जूही ने आँखे खोल दी..

जूही के जागते ही वो अपने आप को मेरे सीने पर पाकर शरमा गई...

मैं- गुड मॉर्निंग डियर..

जूही(शरमाते हुए)- गुड'मॉर्निंग...

मैं- अब उठने का इरादा है या सबके आने के बाद उठोगी ...

मेरी बात सुनते ही जूही झट से उठ गई और बेड के नीचे खड़ी हो गई...

यहाँ जूही खड़ी हुई और सामने से गेट खोलते हुए अकरम आ गया...

अकरम-गुड'मर्न्निग......आहह..जूही..तुम यहाँ...सुबह-सुबह...

जूही- भाई..वो मैं...बस जगाने ही आई थी...सोचा कि देख लू कि चोट कैसी है..

मैं- ह्म्म..अब देख लिया हो तो एक कॉफी भी पिला दो..

अकरम- हां...एक मुझे भी...

जूही- ओके...अभी लाई..

आज मेरी किस्मत अच्छी रही...जूही टाइम पर उठ गई वरना अकरम को क्या बोलता...

जूही ने भी दिमाग़ का इस्तेमाल किया..बाल-बाल बचे....

अकरम- अब लेटा ही रहेगा क्या..उठ भी जा...

मैं- हाँ..हाँ..उठ ही रहा हूँ..वैसे तू इतनी सुबह...

अकरम- तू सुबह की बात कर रहा है..मैं तो रात को ही आ जाता...पर तेरी वजह से रुका रहा....

मैं- क्या...क्यो...और मेरी वजह से...

अकरम(बीच मे)- भूल गया...हमे महल चलना है...और आज तू कुछ मत बोलना...समझा...

मैं- ओके बाबा...मैं नही बोलुगा..तू जो कहे...पर रेडी होने देगा...

अकरम- ह्म्म...कॉफी पी ले फिर जाना...तब तक वो आलसी भी आ जायगा...

तभी रूम मे संजू की एंट्री हुई...

संजू- साले ..आलसी तू होगा..मैं नही..

अकरम- ओह..आ गया..रेडी..??

संजू- मैं तो रेडी हूँ...पर इन जनाब को देखो...

मैं- ओये ...होता हूँ रेडी...कॉफी तो आ जाय...

थोड़ी देर बाद जूही कॉफी ले कर रूम मे आ गई...

फिर कॉफी ख़त्म कर के मैं रेडी होने वॉशरूम मे चला गया....

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