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Guest
फिर बारी आई लेटर्स की...आंटी ने कहा कि ये लेटर्स उन्होने लिखे....पर केवल लिखावट उनकी है...शब्द तुम्हारी माँ के दिल से निकले हुए है...
मैने एक-एक करके सारे लेटर्स पढ़ डाले...और उन्हे पढ़ते हुए मेरी आँखो से बराबर आँसू टपकते रहे...
हर एक लेटर मे मेरी माँ ने अपना प्यार मुझ पर बर्षा दिया था....
लेटर्स को पढ़ कर मुझे पहली बार ये लगा कि मैने क्या खोया है...ऐसा नही था कि मुझे माँ की कमी महसूस नही हुई ....पर अब लग रहा था कि मैने जिंदगी की सबसे प्यारी खुशी खो दी है...ये खुशी वोही समझ सकते है जिनकी माँ होती है...
लेटर्स पढ़ते हुए मैने 17 लेटर्स पढ़ डाले...अब सिर्फ़ आख़िरी लेटर बाकी था...जिस पर लिखा था कि ये बहुत ख़ास है...
जब मैने वो लेटर उठाया तो आंटी बोल उठी...
आंटी- बेटा...ये खास लेटर है...इसमे वो बाते लिखी है जो तुम्हारी माँ तुम्हे बढ़ा होने पर ही बताने वाली थी....
मैं(रोते हुए)- ऐसा क्या है इसमे आंटी...??
आंटी- ये तुम्हे ही पढ़ना है...फिर सोचना कि ये बाते तुम्हारे लिए कितनी खास है....
आंटी मुझे समझा ही रही थी कि उनका कॉल आ गया....फ़ोन पर बात करने के बाद आंटी बोली....
रजनी- अब मुझे जाना होगा बेटा...तुम्हारे अंकल को कुछ काम है...
मैं(आँखे सॉफ कर के )- चलिए...मैं आपको ड्रॉप कर देता हूँ...
रजनी- नही बेटा...तुम अभी रेस्ट करो...मैं चली जाउन्गी...
और आंटी मुझे रेस्ट करने का बोलकर घर निकल गई....
आंटी के जाने के बाद ..मैं अपनी माँ को याद करते हुए लेट गया और सपनो की दुनिया मे निकल गया.....
सीक्रेट हाउस पर......
मेरा आदमी किसी सक्श के साथ बैठा हुआ था....वो सक्श गहरी सोच मे लग रहा था....
स- क्या हुआ....क्या सोच रहे हो...
आदमी- कुछ नही...बस कुछ याद आ गया....
स(पेग बनाते हुए)- अच्छा....हार्ड लोगे या सॉफ्ट ...
आदमी- नही...मैने काफ़ी पहले छोड़ दी...
स- कमाल है...तुमने ड्रिंक करना छोड़ दिया...क्यो....??
आदमी- तुम जानते हो क्यो...याद है ना...उसे ये पसंद नही था....
स- ह्म्म...पर अब शुरू कर दो...ये ज़रूरी है अब...और इसकी वजह तुम भी जानते हो...
आदमी- ह्म्म..तो बनाओ....
फिर स ने पेग बनाए और दोनो ने जाम टकरा कर पीना शुरू कर दिया....
आदमी(पेग ख़त्म कर के)- आहह...बहुत अजीब है...
स- ह्म्म...काफ़ी टाइम बाद ली ना...इसलिए...
आदमी- वैसे एक बात पुच्छू....तुमने मुझसे ये सब क्यो छिपाया...मुझे बता देते तो अब तक....
स(बीच मे)- अब तक क्या....तुम्हारा गुस्सा सब गड़बड़ कर देता....
आदमी- अच्छा....पर अंकित तो सेफ रहता....
स- वो अब भी सेफ है...और हाँ...वो ठंडे दिमाग़ से काम लेता है...सब आराम से कर देगा...
और इसी बीच फिर से पेग बन गया और दोनो ने पेग ख़त्म भी कर दिया....
आदमी- तो...तुमने अंकित को बताया कि तुम हो कौन और उसके साथ क्यों हो...ह्म्म..
स- नही...अभी नही....
आदमी- ह्म्म..उसे पता चल गया तो वो नफ़रत करेगा तुमसे...पता है ना...
स- नही...वो नही करेगा....वो मेरी बात सुनेगा...सब तेरी तरह घमंडी नही होते जो सिर्फ़ अपनी बात को सच समझते है...
आदमी- अच्छा...मैं घमंडी...
स- हाँ..तू घमंडी ...पैसो का तूबाब दिखाने वाला...याद है ना...खैर..छोड़ो...
इस बात-चीत के दौरान महॉल थोड़ा गरम सा हो गया था...दोनो ही एक-दूसरे को गुस्से से देखने लगे...पर बोला कोई भी कुछ नही....
फिर दोनो अपने -अपने माइंड मे आए गुस्से को शांत करते हुए पेग लगाने लगे...और महॉल मे शांति छा गई...
कामिनी के घर मे.......
एक रूम मे दामिनी और कमल बैठे हुए बाते कर रहे थे...
दामिनी ने कमल को सब बता दिया कि , कामिनी ने दीपा का भूत समझ कर किसी को सब कुछ बता दिया है...और अब काजल भी अपना माइंड यूज़ कर रही है अंकित को फसाने के लिए....
कमल- क्या...काजल...वो क्या कर लेगी...पागल है क्या...
दामिनी- वैसे काजल अपना जादू ज़रूर चला देगी...मैं जानती हूँ...
कमल- पर अगर अंकित को या फिर आकाश को ज़रा सी भी भनक लग गई..तो पता है ना क्या होगा...बदला तो छोड़ो...हम रास्ते पर आ जाएँगे...
दामिनी- ऐसा कुछ नही होगा....
कमल- अच्छा..चलो मान लिया...पर अगर आकाश को कुछ पता चला और उसने काजल को पूरी कहानी सुना दी तो...कही काजल पलट गई तो...
दामिनी- ह्म्म..तब तो कामिनी के मज़े है..पर अपना क्या...और मेरा बदला...
कमल- ह्म्म..वैसे एक आइडिया है...अगर सब ठीक रहा तो अंकित सीधा जैल जायगा...
दामिनी- अगर ऐसा हुआ तब तो अपना काम बढ़ा ईज़ी हो जायगा...आकाश टूट जायगा...पर ऐसा होगा कैसे...
कमल- आइडिया तो है...पर सवाल ये है कि तुम अपने मक़सद के लिए किस हद तक जा सकती हो...
दामिनी ने कमल की आँखो मे देखा और बड़े कॉन्फिडेंट से बोली...
दामिनी- तुम प्लान बताओ...मैं कोई भी हद पार कर जाउन्गा...
फिर कमल ने दामिनी को प्लान बताया और दामिनी के होंठो पर कातिल मुस्कान फैल गई...
दामिनी(रोता हुआ मुँह बना कर )- सॉरी कामिनी.......और कोई रास्ता नही
और फिर दामिनी और कमल ने एक -दूसरे को देखा और ठहाका मार कर हँसने लगे.....
अंकित के घर पर.....
अपनी माँ के लेटर्स पढ़ कर मैं उनके ख्यालो मे खोया हुआ कब सो गया ..ये पता ही नही चला....
मेरी माँ ने हर एक लेटर्स मे अपना प्यार उडेल कर रख दिया था...साथ ही साथ मुझे जिंदगी के सही रास्ते भी दिखाए थे....
उनके हर एक लेटर मे जीवेन मे काम आने वाली इम्पोर्टेंट बाते लिखी हुई थी...जिसे पढ़ कर मुझे दुख हो रहा था कि अगर मेरी माँ होती तो मैं ऐसा कभी ना होता....
मैं सपनो मे अपनी माँ को ही याद कर रहा था...तभी मेरे रूम के गेट पर आहट हुई...
ये पारूल थी...जो मुझे जगाने के लिए आवाज़ दिए जा रही थी...
थोड़ी ही देर मे मेरी नीद टूट गई और जब मुझे समझ आया कि ये पारूल है...
तो मैने सारा सामान इकठ्ठा कर के कॉवर्ड मे रखा और अपने आप को ठीक कर के गेट खोल दिया...
गेट खुलते ही पारूल मेरे चेहरे को बड़ी गौर से देखने लगी...
मैं- अरे...गुड़िया...आओ-आओ..
पारूल- भैया...आप...
मैं- आप क्या...अरे वो मैं सो रहा था...
पारूल- सो रहे थे या रो रहे थे...
पारूल की बात सुन कर मैं चौंक गया...मैने तो अपने आप को ठीक कर लिया था ..पर इसे कैसे पता चला...
मैं- न..नही तो..मैं क्यो रोने लगा...
पारूल- भैया...मैं आपकी आँखे पढ़ सकती हूँ...पता नही कैसे...पर मुझे सॉफ नज़र आ रहा है कि आप रो रहे थे...
मैं(नज़रे चुराते हुए)- ये तेरा वहम है...ऐसा...ऐसा कुछ नही...
पारूल- ह्म्म..तो खाइए मेरी कसम...
मैं- कसम...क्यो...तू बोल ना क्यो आई थी...
पारूल- मुझे जवाब मिल गया...
मैं- क्या...
पारूल- कुछ नही...मैं आपके लिए खाना लाती हूँ...आप फ्रेश हो जाइए...
और पारूल बिना कुछ सुने नीचे निकल गई...और मैं सोचने लगा कि इसे आख़िर पता कैसे चला...
फिर मैने सोचना बंद किया और फ्रेश हो कर पारूल के साथ खाना खाया...
मैने एक-एक करके सारे लेटर्स पढ़ डाले...और उन्हे पढ़ते हुए मेरी आँखो से बराबर आँसू टपकते रहे...
हर एक लेटर मे मेरी माँ ने अपना प्यार मुझ पर बर्षा दिया था....
लेटर्स को पढ़ कर मुझे पहली बार ये लगा कि मैने क्या खोया है...ऐसा नही था कि मुझे माँ की कमी महसूस नही हुई ....पर अब लग रहा था कि मैने जिंदगी की सबसे प्यारी खुशी खो दी है...ये खुशी वोही समझ सकते है जिनकी माँ होती है...
लेटर्स पढ़ते हुए मैने 17 लेटर्स पढ़ डाले...अब सिर्फ़ आख़िरी लेटर बाकी था...जिस पर लिखा था कि ये बहुत ख़ास है...
जब मैने वो लेटर उठाया तो आंटी बोल उठी...
आंटी- बेटा...ये खास लेटर है...इसमे वो बाते लिखी है जो तुम्हारी माँ तुम्हे बढ़ा होने पर ही बताने वाली थी....
मैं(रोते हुए)- ऐसा क्या है इसमे आंटी...??
आंटी- ये तुम्हे ही पढ़ना है...फिर सोचना कि ये बाते तुम्हारे लिए कितनी खास है....
आंटी मुझे समझा ही रही थी कि उनका कॉल आ गया....फ़ोन पर बात करने के बाद आंटी बोली....
रजनी- अब मुझे जाना होगा बेटा...तुम्हारे अंकल को कुछ काम है...
मैं(आँखे सॉफ कर के )- चलिए...मैं आपको ड्रॉप कर देता हूँ...
रजनी- नही बेटा...तुम अभी रेस्ट करो...मैं चली जाउन्गी...
और आंटी मुझे रेस्ट करने का बोलकर घर निकल गई....
आंटी के जाने के बाद ..मैं अपनी माँ को याद करते हुए लेट गया और सपनो की दुनिया मे निकल गया.....
सीक्रेट हाउस पर......
मेरा आदमी किसी सक्श के साथ बैठा हुआ था....वो सक्श गहरी सोच मे लग रहा था....
स- क्या हुआ....क्या सोच रहे हो...
आदमी- कुछ नही...बस कुछ याद आ गया....
स(पेग बनाते हुए)- अच्छा....हार्ड लोगे या सॉफ्ट ...
आदमी- नही...मैने काफ़ी पहले छोड़ दी...
स- कमाल है...तुमने ड्रिंक करना छोड़ दिया...क्यो....??
आदमी- तुम जानते हो क्यो...याद है ना...उसे ये पसंद नही था....
स- ह्म्म...पर अब शुरू कर दो...ये ज़रूरी है अब...और इसकी वजह तुम भी जानते हो...
आदमी- ह्म्म..तो बनाओ....
फिर स ने पेग बनाए और दोनो ने जाम टकरा कर पीना शुरू कर दिया....
आदमी(पेग ख़त्म कर के)- आहह...बहुत अजीब है...
स- ह्म्म...काफ़ी टाइम बाद ली ना...इसलिए...
आदमी- वैसे एक बात पुच्छू....तुमने मुझसे ये सब क्यो छिपाया...मुझे बता देते तो अब तक....
स(बीच मे)- अब तक क्या....तुम्हारा गुस्सा सब गड़बड़ कर देता....
आदमी- अच्छा....पर अंकित तो सेफ रहता....
स- वो अब भी सेफ है...और हाँ...वो ठंडे दिमाग़ से काम लेता है...सब आराम से कर देगा...
और इसी बीच फिर से पेग बन गया और दोनो ने पेग ख़त्म भी कर दिया....
आदमी- तो...तुमने अंकित को बताया कि तुम हो कौन और उसके साथ क्यों हो...ह्म्म..
स- नही...अभी नही....
आदमी- ह्म्म..उसे पता चल गया तो वो नफ़रत करेगा तुमसे...पता है ना...
स- नही...वो नही करेगा....वो मेरी बात सुनेगा...सब तेरी तरह घमंडी नही होते जो सिर्फ़ अपनी बात को सच समझते है...
आदमी- अच्छा...मैं घमंडी...
स- हाँ..तू घमंडी ...पैसो का तूबाब दिखाने वाला...याद है ना...खैर..छोड़ो...
इस बात-चीत के दौरान महॉल थोड़ा गरम सा हो गया था...दोनो ही एक-दूसरे को गुस्से से देखने लगे...पर बोला कोई भी कुछ नही....
फिर दोनो अपने -अपने माइंड मे आए गुस्से को शांत करते हुए पेग लगाने लगे...और महॉल मे शांति छा गई...
कामिनी के घर मे.......
एक रूम मे दामिनी और कमल बैठे हुए बाते कर रहे थे...
दामिनी ने कमल को सब बता दिया कि , कामिनी ने दीपा का भूत समझ कर किसी को सब कुछ बता दिया है...और अब काजल भी अपना माइंड यूज़ कर रही है अंकित को फसाने के लिए....
कमल- क्या...काजल...वो क्या कर लेगी...पागल है क्या...
दामिनी- वैसे काजल अपना जादू ज़रूर चला देगी...मैं जानती हूँ...
कमल- पर अगर अंकित को या फिर आकाश को ज़रा सी भी भनक लग गई..तो पता है ना क्या होगा...बदला तो छोड़ो...हम रास्ते पर आ जाएँगे...
दामिनी- ऐसा कुछ नही होगा....
कमल- अच्छा..चलो मान लिया...पर अगर आकाश को कुछ पता चला और उसने काजल को पूरी कहानी सुना दी तो...कही काजल पलट गई तो...
दामिनी- ह्म्म..तब तो कामिनी के मज़े है..पर अपना क्या...और मेरा बदला...
कमल- ह्म्म..वैसे एक आइडिया है...अगर सब ठीक रहा तो अंकित सीधा जैल जायगा...
दामिनी- अगर ऐसा हुआ तब तो अपना काम बढ़ा ईज़ी हो जायगा...आकाश टूट जायगा...पर ऐसा होगा कैसे...
कमल- आइडिया तो है...पर सवाल ये है कि तुम अपने मक़सद के लिए किस हद तक जा सकती हो...
दामिनी ने कमल की आँखो मे देखा और बड़े कॉन्फिडेंट से बोली...
दामिनी- तुम प्लान बताओ...मैं कोई भी हद पार कर जाउन्गा...
फिर कमल ने दामिनी को प्लान बताया और दामिनी के होंठो पर कातिल मुस्कान फैल गई...
दामिनी(रोता हुआ मुँह बना कर )- सॉरी कामिनी.......और कोई रास्ता नही
और फिर दामिनी और कमल ने एक -दूसरे को देखा और ठहाका मार कर हँसने लगे.....
अंकित के घर पर.....
अपनी माँ के लेटर्स पढ़ कर मैं उनके ख्यालो मे खोया हुआ कब सो गया ..ये पता ही नही चला....
मेरी माँ ने हर एक लेटर्स मे अपना प्यार उडेल कर रख दिया था...साथ ही साथ मुझे जिंदगी के सही रास्ते भी दिखाए थे....
उनके हर एक लेटर मे जीवेन मे काम आने वाली इम्पोर्टेंट बाते लिखी हुई थी...जिसे पढ़ कर मुझे दुख हो रहा था कि अगर मेरी माँ होती तो मैं ऐसा कभी ना होता....
मैं सपनो मे अपनी माँ को ही याद कर रहा था...तभी मेरे रूम के गेट पर आहट हुई...
ये पारूल थी...जो मुझे जगाने के लिए आवाज़ दिए जा रही थी...
थोड़ी ही देर मे मेरी नीद टूट गई और जब मुझे समझ आया कि ये पारूल है...
तो मैने सारा सामान इकठ्ठा कर के कॉवर्ड मे रखा और अपने आप को ठीक कर के गेट खोल दिया...
गेट खुलते ही पारूल मेरे चेहरे को बड़ी गौर से देखने लगी...
मैं- अरे...गुड़िया...आओ-आओ..
पारूल- भैया...आप...
मैं- आप क्या...अरे वो मैं सो रहा था...
पारूल- सो रहे थे या रो रहे थे...
पारूल की बात सुन कर मैं चौंक गया...मैने तो अपने आप को ठीक कर लिया था ..पर इसे कैसे पता चला...
मैं- न..नही तो..मैं क्यो रोने लगा...
पारूल- भैया...मैं आपकी आँखे पढ़ सकती हूँ...पता नही कैसे...पर मुझे सॉफ नज़र आ रहा है कि आप रो रहे थे...
मैं(नज़रे चुराते हुए)- ये तेरा वहम है...ऐसा...ऐसा कुछ नही...
पारूल- ह्म्म..तो खाइए मेरी कसम...
मैं- कसम...क्यो...तू बोल ना क्यो आई थी...
पारूल- मुझे जवाब मिल गया...
मैं- क्या...
पारूल- कुछ नही...मैं आपके लिए खाना लाती हूँ...आप फ्रेश हो जाइए...
और पारूल बिना कुछ सुने नीचे निकल गई...और मैं सोचने लगा कि इसे आख़िर पता कैसे चला...
फिर मैने सोचना बंद किया और फ्रेश हो कर पारूल के साथ खाना खाया...