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चूतो का समुंदर

फिर बारी आई लेटर्स की...आंटी ने कहा कि ये लेटर्स उन्होने लिखे....पर केवल लिखावट उनकी है...शब्द तुम्हारी माँ के दिल से निकले हुए है...

मैने एक-एक करके सारे लेटर्स पढ़ डाले...और उन्हे पढ़ते हुए मेरी आँखो से बराबर आँसू टपकते रहे...

हर एक लेटर मे मेरी माँ ने अपना प्यार मुझ पर बर्षा दिया था....

लेटर्स को पढ़ कर मुझे पहली बार ये लगा कि मैने क्या खोया है...ऐसा नही था कि मुझे माँ की कमी महसूस नही हुई ....पर अब लग रहा था कि मैने जिंदगी की सबसे प्यारी खुशी खो दी है...ये खुशी वोही समझ सकते है जिनकी माँ होती है...

लेटर्स पढ़ते हुए मैने 17 लेटर्स पढ़ डाले...अब सिर्फ़ आख़िरी लेटर बाकी था...जिस पर लिखा था कि ये बहुत ख़ास है...

जब मैने वो लेटर उठाया तो आंटी बोल उठी...

आंटी- बेटा...ये खास लेटर है...इसमे वो बाते लिखी है जो तुम्हारी माँ तुम्हे बढ़ा होने पर ही बताने वाली थी....

मैं(रोते हुए)- ऐसा क्या है इसमे आंटी...??

आंटी- ये तुम्हे ही पढ़ना है...फिर सोचना कि ये बाते तुम्हारे लिए कितनी खास है....

आंटी मुझे समझा ही रही थी कि उनका कॉल आ गया....फ़ोन पर बात करने के बाद आंटी बोली....

रजनी- अब मुझे जाना होगा बेटा...तुम्हारे अंकल को कुछ काम है...

मैं(आँखे सॉफ कर के )- चलिए...मैं आपको ड्रॉप कर देता हूँ...

रजनी- नही बेटा...तुम अभी रेस्ट करो...मैं चली जाउन्गी...

और आंटी मुझे रेस्ट करने का बोलकर घर निकल गई....

आंटी के जाने के बाद ..मैं अपनी माँ को याद करते हुए लेट गया और सपनो की दुनिया मे निकल गया.....

सीक्रेट हाउस पर......

मेरा आदमी किसी सक्श के साथ बैठा हुआ था....वो सक्श गहरी सोच मे लग रहा था....

स- क्या हुआ....क्या सोच रहे हो...

आदमी- कुछ नही...बस कुछ याद आ गया....

स(पेग बनाते हुए)- अच्छा....हार्ड लोगे या सॉफ्ट ...

आदमी- नही...मैने काफ़ी पहले छोड़ दी...

स- कमाल है...तुमने ड्रिंक करना छोड़ दिया...क्यो....??

आदमी- तुम जानते हो क्यो...याद है ना...उसे ये पसंद नही था....

स- ह्म्म...पर अब शुरू कर दो...ये ज़रूरी है अब...और इसकी वजह तुम भी जानते हो...

आदमी- ह्म्म..तो बनाओ....

फिर स ने पेग बनाए और दोनो ने जाम टकरा कर पीना शुरू कर दिया....

आदमी(पेग ख़त्म कर के)- आहह...बहुत अजीब है...

स- ह्म्म...काफ़ी टाइम बाद ली ना...इसलिए...

आदमी- वैसे एक बात पुच्छू....तुमने मुझसे ये सब क्यो छिपाया...मुझे बता देते तो अब तक....

स(बीच मे)- अब तक क्या....तुम्हारा गुस्सा सब गड़बड़ कर देता....

आदमी- अच्छा....पर अंकित तो सेफ रहता....

स- वो अब भी सेफ है...और हाँ...वो ठंडे दिमाग़ से काम लेता है...सब आराम से कर देगा...

और इसी बीच फिर से पेग बन गया और दोनो ने पेग ख़त्म भी कर दिया....

आदमी- तो...तुमने अंकित को बताया कि तुम हो कौन और उसके साथ क्यों हो...ह्म्म..

स- नही...अभी नही....

आदमी- ह्म्म..उसे पता चल गया तो वो नफ़रत करेगा तुमसे...पता है ना...

स- नही...वो नही करेगा....वो मेरी बात सुनेगा...सब तेरी तरह घमंडी नही होते जो सिर्फ़ अपनी बात को सच समझते है...

आदमी- अच्छा...मैं घमंडी...

स- हाँ..तू घमंडी ...पैसो का तूबाब दिखाने वाला...याद है ना...खैर..छोड़ो...

इस बात-चीत के दौरान महॉल थोड़ा गरम सा हो गया था...दोनो ही एक-दूसरे को गुस्से से देखने लगे...पर बोला कोई भी कुछ नही....

फिर दोनो अपने -अपने माइंड मे आए गुस्से को शांत करते हुए पेग लगाने लगे...और महॉल मे शांति छा गई...

कामिनी के घर मे.......

एक रूम मे दामिनी और कमल बैठे हुए बाते कर रहे थे...

दामिनी ने कमल को सब बता दिया कि , कामिनी ने दीपा का भूत समझ कर किसी को सब कुछ बता दिया है...और अब काजल भी अपना माइंड यूज़ कर रही है अंकित को फसाने के लिए....

कमल- क्या...काजल...वो क्या कर लेगी...पागल है क्या...

दामिनी- वैसे काजल अपना जादू ज़रूर चला देगी...मैं जानती हूँ...

कमल- पर अगर अंकित को या फिर आकाश को ज़रा सी भी भनक लग गई..तो पता है ना क्या होगा...बदला तो छोड़ो...हम रास्ते पर आ जाएँगे...

दामिनी- ऐसा कुछ नही होगा....

कमल- अच्छा..चलो मान लिया...पर अगर आकाश को कुछ पता चला और उसने काजल को पूरी कहानी सुना दी तो...कही काजल पलट गई तो...

दामिनी- ह्म्म..तब तो कामिनी के मज़े है..पर अपना क्या...और मेरा बदला...

कमल- ह्म्म..वैसे एक आइडिया है...अगर सब ठीक रहा तो अंकित सीधा जैल जायगा...

दामिनी- अगर ऐसा हुआ तब तो अपना काम बढ़ा ईज़ी हो जायगा...आकाश टूट जायगा...पर ऐसा होगा कैसे...

कमल- आइडिया तो है...पर सवाल ये है कि तुम अपने मक़सद के लिए किस हद तक जा सकती हो...

दामिनी ने कमल की आँखो मे देखा और बड़े कॉन्फिडेंट से बोली...

दामिनी- तुम प्लान बताओ...मैं कोई भी हद पार कर जाउन्गा...

फिर कमल ने दामिनी को प्लान बताया और दामिनी के होंठो पर कातिल मुस्कान फैल गई...

दामिनी(रोता हुआ मुँह बना कर )- सॉरी कामिनी.......और कोई रास्ता नही

और फिर दामिनी और कमल ने एक -दूसरे को देखा और ठहाका मार कर हँसने लगे.....

अंकित के घर पर.....

अपनी माँ के लेटर्स पढ़ कर मैं उनके ख्यालो मे खोया हुआ कब सो गया ..ये पता ही नही चला....

मेरी माँ ने हर एक लेटर्स मे अपना प्यार उडेल कर रख दिया था...साथ ही साथ मुझे जिंदगी के सही रास्ते भी दिखाए थे....

उनके हर एक लेटर मे जीवेन मे काम आने वाली इम्पोर्टेंट बाते लिखी हुई थी...जिसे पढ़ कर मुझे दुख हो रहा था कि अगर मेरी माँ होती तो मैं ऐसा कभी ना होता....

मैं सपनो मे अपनी माँ को ही याद कर रहा था...तभी मेरे रूम के गेट पर आहट हुई...

ये पारूल थी...जो मुझे जगाने के लिए आवाज़ दिए जा रही थी...

थोड़ी ही देर मे मेरी नीद टूट गई और जब मुझे समझ आया कि ये पारूल है...

तो मैने सारा सामान इकठ्ठा कर के कॉवर्ड मे रखा और अपने आप को ठीक कर के गेट खोल दिया...

गेट खुलते ही पारूल मेरे चेहरे को बड़ी गौर से देखने लगी...

मैं- अरे...गुड़िया...आओ-आओ..

पारूल- भैया...आप...

मैं- आप क्या...अरे वो मैं सो रहा था...

पारूल- सो रहे थे या रो रहे थे...

पारूल की बात सुन कर मैं चौंक गया...मैने तो अपने आप को ठीक कर लिया था ..पर इसे कैसे पता चला...

मैं- न..नही तो..मैं क्यो रोने लगा...

पारूल- भैया...मैं आपकी आँखे पढ़ सकती हूँ...पता नही कैसे...पर मुझे सॉफ नज़र आ रहा है कि आप रो रहे थे...

मैं(नज़रे चुराते हुए)- ये तेरा वहम है...ऐसा...ऐसा कुछ नही...

पारूल- ह्म्म..तो खाइए मेरी कसम...

मैं- कसम...क्यो...तू बोल ना क्यो आई थी...

पारूल- मुझे जवाब मिल गया...

मैं- क्या...

पारूल- कुछ नही...मैं आपके लिए खाना लाती हूँ...आप फ्रेश हो जाइए...

और पारूल बिना कुछ सुने नीचे निकल गई...और मैं सोचने लगा कि इसे आख़िर पता कैसे चला...

फिर मैने सोचना बंद किया और फ्रेश हो कर पारूल के साथ खाना खाया...

 
खाना खाने के बाद मैने फ़ोन चेक किया तो उसमे सिनम के कई मिस्स्कल्ल और मसेज थे...

मुझे याद आया कि आज तो मुझे सोनम से मिलना था ..पर अब क्या...टाइम तो गया...

फिर मैने सोनम को झूठा मसेज कर दिया कि मुझे फीवर था तो सो गया था...कल मिलेगे..

सोनम का 10 मिनट बाद ही रिप्लाइ आ गया और उसने कहा की ठीक होते ही मिलना......

फिर मैने पारूल को सोने का बहाना कर के भेज दिया और माँ का आख़िरी लेटर पढ़ने लगा....

मेरे प्यारे बेटे....जन्मदिन की बहुत-बहुत सूभकामनाए....

मेरा प्यारा बच्चा...भगवान तुझे हर खुशी दे...उूुउउम्म्म्ममह

बेटा, आज तुम्हारी जिंदगी का बहुत बड़ा दिन है...आज तुम बड़े हो गये हो...

मेरे लिए तो तुम आज भी मेरी गोद मे रहने वाले छोटे से बच्चे हो...पर दुनिया के लिए आज तुम सही मायने मे बड़े हो गये हो...

बेटा..ये समय जिंदगी का सबसे बदलाब भरा समय होता है...और बड़ा ही नाज़ुक भी...

एक तरफ बच्चे ये सोच कर खुश होते है की अब वो बड़े हो गये...कॉलेज मे पढ़ेगे...मस्ती करेंगे...

और इसकी वजह ये है की स्कूल की तरह कॉलेज मे पाबंदी नही होती...वहाँ थोड़ी आज़ादी होती है...

पर बेटा..ये आज़ादी सिर्फ़ देखने मे अच्छी लगती है...असल मे हम जिंदगी का सबसे अनमोल हिस्सा खो चुके होते है...वो है हमारा बचपन...

खैर...अब तुम बड़े हो गये...परिवार से लेकर समाज की नज़रों मे भी...

पर बड़े होने से तुम्हे आज़ादी के साथ-साथ ज़िम्मेदारियाँ भी मिली है...

अब परिवार मे तुम्हारी हरक़तों को बच्चे का बच्पना नही समझा जायगा...बल्कि हर एक हरक़त पर यूँही कोई ना कोई प्रतिक्रिया मिलेगी...अच्छी हरक़त पर अच्छी और बुरी पर बुरी....

सिर्फ़ परिवार मे ही नही...अब समाज मे भी तुम्हारे द्वारा किया गया हर काम या तो तारीफ करवाएगा या बुराई...

अब तुम परिवार से ले कर समाज की बातों मे हिस्सेदार हो बेटा...

अब तुम परिवारिक बातों मे अपनी बात कह सकते हो और समाज को संभालने वाली सरकार को भी चुन सकते हो....

वैसे तो तुम मेरे लिए हमेशा बच्चे ही रहोगे...पर यही वक़्त होता है जब माँ-बाप बच्चो को एक दोस्त की तरह ट्रीट करते है...

आज मैं भी तुम्हे अपना दोस्त समझ कर कुछ बाते बताने जा रही हूँ...कुछ ऐसी बातें जो तुम्हे जानना ज़रूरी है...

ये बाते मेरी, तुम्हारे डॅड की, हमारे परिवार की और खास कर तुम्हारी जिंदगी से जुड़ी हुई खास बाते है...

बेटा...शायद तुम्हे पता चल ही गया होगा कि मेरी और तुम्हारे डॅड की लव मेरिज थी...

जब हमारी शादी हुई तो हमारे परिवार मे से वहाँ कोई भी नही था..सिर्फ़ तुम्हारे नाना को छोड़ कर...

तुम्हारे दादाजी इस शादी से खुश नही थे...क्योकि उन्होने किसी और को बचन दिया था कि उसकी लड़की से तुम्हारे डॅड की शादी करवाएँगे...

दूसरी तरफ मेरे बड़े भाई ने भी अपने दोस्त को मेरे लिए पसंद किया हुआ था...

पर हमारी किस्मत को कुछ और ही मंजूर था..और हम सबके खिलाफ आ कर एक हो गये....

उसके बाद हम सबसे दूर इस सहर मे आ गये...यहाँ तुम्हारे डॅड ने दिन-रात मेहनत कर के ये छोटा सा घर और कारोबार खड़ा किया....

अब तक तुम्हे लग रहा होगा कि हम सब ख़ुसनसीब है जो हम खुश है...पर ये आधी सच्चाई है...

शादी के बाद कुछ लोगो ने तुम्हारे डॅड और मुझे बहुत परेशान करने की कोसिस की...

पर मेरे कहने पर तुम्हारे डॅड ने कभी कोई पलटवार नही किया....बस उन्हे समझा दिया...और इसमे हमारी मदद की तुम्हारे दादाजी के दोस्त अली ख़ान ने....

खैर ..वो लोग अभी तो शांत हो गये...पर शायद आगे चल कर कोई कुछ कर ना दे...इसलिए तुझे अपना ख्याल रखना होगा...क्योकि हमे चोट पहुचाने के लिए वो लोग तुम्हे ही टारगेट बनाने की सोचेगे....

और हाँ...अब मैं तुझे एक खास बात बताने वाली हूँ...तुम्हारे डॅड के बारे मे ...और मैं चाहती हूँ की ये बात सुन कर ना ही तुम बुरा फील करना और ना ही अपने डॅड की तरह बनना....

ये तुम्हारे डॅड की अयाशी वाली लाइफ के बारे मे है बेटा....

बेटा...एक समय तुम्हारे डॅड बहुत अयाश थे...और अयाशी का ये गुण उन्हे अपने पिता से मिला हुआ था...

तुम्हारे दादाजी की तरह ही तुम्हारे डॅड को भी लड़कियों और औरतों मे खास दिलचस्पी थी...उनके कई लड़कियों और औरतों से संबंध थे....

तुम सोच रहे होगे कि मैं तुम्हे ये क्यो बता रही हूँ...वो इसलिए की मैं चाहती हूँ कि तुम इस रास्ते पर कभी मत चलना...

मुझे हमेशा से ये डर रहा है..क्योकि तुम्हारी रगो मे खून तो वही है ना...

बेटा...मुझसे मिलने के बाद तुम्हारे डॅड तो बदल गये पर उनकी अयाशी ने उनके कई दुश्मन बना दिए....

इसलिए बच कर रहना...इस रास्ते कभी मत चलना...और दुनियावालो को प्यार से हॅंडल करना...

दूसरी बात...जो मैं तुम्हे बताने वाली हूँ...उसे सुनकर शॉक्ड मत होना और पूरी बात जाने बिना कोई राय कायम मत करना...

तुम्हारे डॅड पर अपनी ही लाडली बेहन, बहनोई और एक आंटी के मर्डर का दाग लगा हुआ है...और तो और उनका छोटा बहनोई उनका ही खास दोस्त था...

मैं जानती हूँ कि उन्होने वो सब नही किया...पर फिर भी वो सबकी नज़रों मे गुनहगार है...

बेटा...ये बात मैने इसलिए बताई कि कहीं तुम्हे किसी से ये सुनने को मिले तो प्लीज़ अपने डॅड को बुरा मत समझना...

तुम्हारे डॅड हालात की वजह से बदनाम हुए...वो कभी ऐसा सोच भी नही सकते...सच बेटा...

एक और खास बात बेटा....कहीं ना कहीं इस दुश्मनी की वजह मैं भी हूँ.....अगर मैं तुम्हारे डॅड की जिंदगी मे ना आती तो शायद सब ठीक होता...

इतना लेटर पढ़ने के बाद ही मेरी आँखो मे आँसू आ गये पर साथ ही साथ मुझे अपनी माँ पर गर्व हुआ...

उन्होने कितनी आसानी से अपनी बात समझा दी...और अपने दिल मे छिपे राज़ भी बता दिए...

लेकिन मैं ये सोच कर हैरान था कि अगर मोम को दुश्मनो के बारे मे पता था तो डॅड को भी होगा....फिर डॅड चुप क्यो रहे...क्या कोई मजबूरी थी...

दूसरी बात ये कि मोम ने अपने आपको भी कहीं ना कहीं इस सब का ज़िम्मेदार माना...आख़िर क्यो...??

क्या ये सब मोम-डॅड की लव मेरिज की वजह से शुरू हुआ...नही...पर कुछ तो है जो उनकी शादी की वजह से हुआ....

रजनी आंटी ने मुझे जो बताया और डाइयरी मे मैने जो पढ़ा...उसमे तो ऐसा कोई ज़िक्र था ही नही कि मेरे मोम-डॅड की शादी से किसी को कोई नुकसान हुआ....

पर हो ना हो...कुछ तो है..जो शायद मोम को ही पता हो...शायद कोई और भी हमारा दुश्मन हो...शायद नही भी...

 


ऐसे ही सवालो ने मुझे फिर से परेशान कर दिया...पर मैने उस टाइम सब कुछ भूल कर दिल से अपनी मोम से माफी मागी...

मैं(मन मे)- सॉरी मोम...मैं उसी रास्ते पर चल निकला हूँ जो दादाजी से ले कर डॅड का रास्ता था...और अब शायद मेरा रुकना आसान नही है...

बट मैं प्रोमिस करता हूँ...एक बार मैं हमारे सारे दुश्मनो को सबक सीखा दूं...फिर आपके बताए रास्ते पर ही चलूँगा...

मैं अपनो को हमेशा खुश रखने की पूरी कोसिस करूगा...प्रोमिस मोम...प्रोमिस....

और बात रही डॅड की...तो मैं उन सारे मर्डर की सच्चाई पता कर के ही दम लूँगा...और जिन्होने मेरे डॅड को गुनहगार समझा...उनके सामने अपने डॅड को बेगुनाह साबित करूगा...ये एक बेटे का वादा है आपसे...

मैं अपने ख़यालो मे ही था कि मेरा फ़ोन बज उठा....

( कॉल पर )

मैं(आँसू पोन्छ कर)- हेलो...

स- क्या हुआ...सो रहे थे क्या...

मैं- नही तो..बस सोने वाला था...

स- ह्म्म...तुम्हे भी झूठ बोलना नही आता...

मैं- मुझे भी मतलब...

स- कुछ नही...मेरी बात सुनो...

मैं- हाँ...बोलिए...

स- कल तुम्हारे डॅड आ रहे है...

मैं- ह्म्म...तो अब क्या करना है...

स- काफ़ी कुछ...जैसे कामिनी का सच पता करो...उसी हिसाब से हम अगला कदम बढ़ाएँगे...और हो सके तो रजनी के बारे मे सब बता देना...

मैं- अभी रजनी आंटी को रहने देते है...वो मैं संभाल लूँगा..मैं कामिनी और दामिनी के बारे मे भी पूछुगा...

स- हाँ..दामिनी भी तो है...

मैं- और वो ऑफीस वाली बात...

स- वो अभी रहने दो...उन्हे पता चल ही जायगा...

मैं- ह्म्म..अच्छा ..वो बहादुर के घर पर आदमी पहुचा दिए..

स- हाँ...और एक खास आदमी पकड़ मे आया है...असल मे डोवारा पकड़ा गया...

मैं- क्या...डोवारा...कौन है वो...

स- सोनी...साला भागने की कोसिस मे था...ट्रॅवेल एजेंट के यहाँ से पकड़ा...बिदेश भागने की तैयारी मे था साला...

मैं- अच्छा...और उसके पास पैसे कहाँ से आए...

स- तुम्हारे डॅड को धोखा दे कर...साले ने धोखे से साइन करवा कर 2 करोड़ जोड़ लिए है...2 हाथ पड़ते ही सब भोंक दिया साले ने...ये तो तेरे ऑफीस की नीलामी करने वाला था...इतना कर्ज़ा उठा लिया तेरे डॅड के नाम से...

मैं- क्या...इतना बढ़ा धोखा...अब इसको सज़ा मिलनी ही चाहिए...ये मेरे डॅड की इज़्ज़त को नीलाम करने वाला था...अब इसकी इज़्ज़त को मैं उतारूँगा...इसकी आँखो के सामने...

स- कूल..कूल...दिल से नही दिमाग़ से काम करो...

मैं- ह्म्म...वैसे भी आप है ना दिमाग़ लगाने को...

स- हाहाहा...तू भी ना...अच्छा...सो जा अब...कल अपने डॅड से बात कर ही लेना...ओके...

मैं- ह्म्म्मा..पक्का...गुड'नाइट...

और फ़ोन रख कर मैं सोचने लगा कि मुझे डॅड से कल क्या और कैसे बात करनी है....

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रेणु के घर....आज के ही दिन....

रेणु बॉस से मिलने के बाद सीधा घर पहुचि ..तो बड़े गुस्से मे थी...

रेणु को देख कर आकृति को टेन्षन हो गई...

आकृति- बेटी..क्या हुआ...इतनी गुस्सा किस बात की...

रेणु- कुछ नही..जो मैं चाहती हूँ...वो होता नही तो गुस्सा आता है...

आकृति- पर ऐसा क्या नही हुआ...तुम तो बोल रही थी कि अब आकाश को सज़ा मिलने ही वाली है...

रेणु- हाँ...पर वो तो होगा तब होगा ...अभी मुझे एक इंसान के बारे मे पता लगाना है...

आकृति- कौन इंसान...

रेणु- सम्राट सिंग...

आकृति- सम्राट सिंग...ये नाम तो...

रेणु- क्या...आप जानती है क्या..

आकृति- नही..पर ये नाम सुना हुआ लगता है...

रेणु- सच...कहाँ सुना...किससे सुना..

आकृति- याद नही...पर सुना ज़रूर है...

रेणु- ह्म्म..तब तो समझ आ गया कि इसने अंकित पर हमला क्यो करवाया....शायद आज़ाद का कोई दुश्मन ही होगा..कोई पुराना दुश्मन...

आकृति- क्या...अंकित पर हमला...पर तूने कहा था कि उसे कुछ नही...

रेणु(बीच मे)- उसे कुछ नही होगा...जब तक मैं हूँ..उसे कोई कुछ नही कर पायगा...जो करूगि...वो मैं ही करूगी...

आकृति- उसे कुछ मत करना बेटी...इस सब मे उसकी क्या ग़लती..

रेणु- ह्म्म..सही कहा...उसे कुछ नही होगा...ट्रस्ट मी...और अब सम्राट की खबर लेने जाती हूँ...

आकृति- पर कहाँ...

रेणु- मुझे उसका महल और गाओं पता है...अगर मिल गया तो सब समझ आ जायगा...शायद अपने काम का ही निकले..

आकृति- ह्म्म..जो भी करना...सोच-समझ कर...ये लड़ाई सिर्फ़ तुम्हारी नही...ठीक है...

रेणु- हाँ...अब आप खाना खिला दो....फिर मैं निकालती हूँ...ओके...मैं फ्रेश हो कर आई...

और रेणु खाना खा कर सम्राट सिंग का सच जानने उसके महल की तरफ निकल गई....

आरती(मन मे)- भगवान करे कि तुम अपने काम मे सफल हो कर वापिस आओ...तुम्हारी कामयाबी से ही मेरे पति, मेरी बहन, उसके पति और तुम्हारे माँ-बाप की आत्मा को शांति मिलेगी....

एक अंधेरे कमरे मे दो चेयर पर दो लोग बढ़े हुए थे...

एक पर अंकित और दूसरी पर सोनू के पापा(सुषमा का पति)...

तभी वहाँ काजल भी आ गई और सोनम को भी पकड़ लाई...काजल के हाथ मे एक गन थी...

दूसरी तरफ रश्मि भी एक गन ले कर आ गई...

 
थोड़ी देर मे ही रश्मि ने वो गन सोनू के बाप पर तान दी..और काजल ने अपने सामने सोनम को किया और साइड से गन को अंकित पर तान दिया...

रश्मि- तो क्या सोचा सोनू...अपने बाप की जान बचानी है कि नही...

सोनू- रश्मि...मेरी बात...

रश्मि(बीच मे )- हां या ना...??

सोनू- हाँ...हाँ...मेरे पापा को छोड़ दो..प्लज़्ज़्ज़...

रश्मि- तो गन उठाओ और मार डालो अंकित को....

सोनम- नही भाई...ऐसा मत करना...अंकित ने क्या बिगाड़ा हमारा...

काजल(सोनम के बाल खीच कर)- चुप कर साली...तेरा नही तो मेरा तो बिगाड़ा है ना...अब देख...मैं इसे मारूगी और इल्ज़ाम तुझ पर आएगा.. समझी..

सोनम- आअहह..नही काजल..ऐसा मत कर...छोड़ दो पल्लज़्ज़्ज़....

रश्मि- सोनू...मार दे अंकित को वरना तेरा बाप जायगा...

और रश्मि ने गन के ट्रिग्गर पर उंगली रख ली...

सोनू- नही...रश्मि प्ल्ज़्ज़..मेरे पापा को कुछ मत करो..प्ल्ज़्ज़..

काजल- तो मार उसे..वरना सोनम भी जाएगी...तेरे बाप के साथ ..

मैं- काजल..सोनम को छोड़ दो..प्ल्ज़ काजल...

काजल- तो मार अंकित को...और बचा ले अपने बाप और बेहन को...मार...

रश्मि- हाँ सोनू...एक जान के लिए दो जान कुर्वान मत कर...मार डाल अंकित को...

अंकित- सोनू...मैने तेरा क्या बिगाड़ा दोस्त...

सोनू परेशान था...उसके माथे से पसीना बह रहा था और पूरा बदन काँप रहा था...उसे समझ नही आ रहा था कि क्या करे...

काजल- मार जल्दी...वरना...

रश्मि- मार डाल अंकित को...बचा ले अपनो को..

सोनू(रोते हुए)- हे भगवान...मैं क्या करूँ...बचाओ मुझे...

तभी वहाँ एक साया आया और बोला...

इससे नही होगा...मैं ही करता हूँ..""

और उस साए ने दो गोली अंकित को मार दी...और फिर सोनू के पापा को और फिर सोनम को..

पूरे रूम मे चीखे गूँज उठी और पलक झपकते ही सन्नाटा च्छा गया....

सोनू- नही....नही...ऐसा मत करो...पापा...

सोनम- भाई..भाई...क्या हुआ...क्या हुआ भाई.....

सोनू ने सोनम को सामने देखा तो उसको गले लगा कर रोने लगा...

सोनू का बदन काँप रहा था और उसका रोम-रोम डर के मारे खड़ा हो कर पसीने मे भीग चुका था...

सोनम- भाई...कोई सपना देखा क्या...

सोनू- हाँ..हाँ..बहुत..बहुत बुरा सपना..

सोनम- रिलॅक्स भाई...सपना तो सपना होता है..भूल जाओ...

थोड़ी देर तक सोनम ने सोनू का सिर सहलाया और उसे नॉर्मल कर ने लगी...

थोड़ी देर बाद सोनू नॉर्मल हो गया...तो सोनम ने उसे अपने से अलग किया...

सोनम- आप फ्रेश हो जाइए...मैं चाइ लाती हूँ...

सोनम तो चली गई पर सोनू अभी भी सपने के बारे मे सोच रहा था...

सोनू(मन मे)- अब तुझे कैसे बताऊ..कि सपने मे वही देखते है जो आस-पास चलता रहता है. .

और ये सपना तो...सपना नही सच्चाई है...या तो अंकित बचेगा या मेरे पापा...

मुझे कुछ करना ही होगा...मैं अपने जीते जी ये सब नही होने दूँगा...

और सोनू बाथरूम मे चला गया....और रेडी होने के बाद उसने एक मसेज किया...

मुझे तुमसे बात करनी है...पर अकेले मे....ये बात हमारे अलावा किसी को भी पता नही चलनी चाहिए...बहुत खास है...ये किसी की जिंदगी का सवाल है...आज मुझे होटेल **** मे मिलो...रूम नंबर. मैं सेंड कर दूँगा...टाइम तुम बता देना...पर आना ज़रूर...और बिल्कुल अकेले...""

और मसेज कर के सोनू घर से निकल गया.....

सोनू कुछ ही आगे जा पाया था कि एक कार उसे ओवर्टेक कर के खड़ी हो गई...

सोनू- अब ये कौन है साला...

सोनू ताव मे कार से निकला ही था कि आगे वाली कार से रश्मि निकल कर सामने आ गई...

सोनू(गुस्से मे)- तुम..यहाँ कैसे...और ये सब क्या है...??

रश्मि- ओह...सोनू को गुस्सा आ रहा है....ह्म्म...कहाँ जा रहे थे...

सोनू- तुझसे मतलब...चल रास्ता छोड़...

रश्मि- हहहे...इतना गुस्सा....ओये...मैं जो पूछ रही हूँ उसका जवाब दे....भले ही तुझे हमसे मतलब ना हो...पर अपने डॅड से तो है...

डॅड की बात आते ही सोनू का गुस्सा फुर हो गया और वो टेन्षन मे आ गया....

सोनू- ओके...बोलो...क्यो आई हो...क्या करना है मुझे....

रश्मि- ह्म्म..बहुत शातिर हो...अंकित से मिलने की जल्दी है क्या....

सोनू(चौंक कर)- आ..अंकित...नही तो..मैं तो बस...

रश्मि(बीच मे)- बस...तुम्हते फ़ोन से कोई भी मेसेज या कॉल जाता है ना..तो हमे पता चल जाता है...समझे....अब भी बोलोगे कि अंकित से नही मिलना था...

रश्मि की बात सुन कर सोनू का 440 बोल्ट का झटका लग गया...अब वो अपने डॅड के लिए परेशान होने लगा...

रश्मि- बोलो यार...चुप क्यो हो...

सोनू- देखो...मैं तो ..बस...आइ एम सॉरी...ग़लती हो गई...मेरे डॅड को...

रश्मि(बीच मे)- कुछ नही होगा तुम्हारे डॅड को....ये पहली ग़लती थी..इसलिए माफ़ किया...बट दुबारा ऐसा हुआ...तो तुम्हारे डॅड का...समझ गये ना...

सोनू- हाँ...समझ गया...ऐसा फिर नही होगा...प्लीज़ डॅड को कुछ मत करना...

रश्मि- ह्म्म..अब अंकित को मेसेज करो कि पहले वाला मसेज ग़लती से सेंड हो गया था...वो किसी और के लिए था...तुम्हे उससे कोई काम नही...ओके...अभी करो..

फिर सोनू ने रश्मि के कहे अनुसार अंकित को मसेज कर दिया और चुप-चाप घर वापिस आ गया....

अंकित के घर............

सुबह-सुबह एक टॅक्सी आ कर गेट पर रुकी और उससे मेरे डॅड नीचे उतरे ...

 


मेरे डॅड को देखते ही गार्ड और ड्राइवर हरी, जो गप मार रहे थे, दोनो टॅक्सी के पास पहुच गये....

गौरड़- सलाम साब...

हरी- सलाम साब...

आकाश- ह्म्म..सामान ले आओ...

हरी- सर ..आप टॅक्सी मे क्यो...आप कॉल कर देते ..हमेशा की तरह मैं एरपोर्ट आ जाता...

आकाश- क्यो..मैं टॅक्सी से आ गया तो ग़लती हो गई...या तुझसे पूछ कर आता..हा...

हरी- सॉरी सर...मैं तो बस...

आकाश- कोई नही...चलो टॅक्सी वाले का हिसाब करो और सामान ले आओ...

अंदर आते ही आकाश को सविता , रेखा और रश्मि मिल गई...

सविता- अरे सर आप ...आ गये...बैठिए मैं कॉफी लाती हूँ...

आकाश- कॉफी...नही..मुझे चाइ चाहिए...

सविता- पर आप तो हमेशा कॉफी पीते है ना. .

आकाश- तो...अब से चाइ पिउगा...कोई प्राब्लम...

सविता- नही सर...अभी लाई...

सविता तो किचन मे चली गई पर रेखा और रश्मि , आकाश की बातें सुन कर सहम गई....और आँखे फेड आकाश को देखने लगी...

आकाश- अब तुम दोनो को क्या हुआ...कोई काम नही क्या...जाओ...काम करो अपना...

आकाश के कहते ही दोनो वहाँ से चुप-चाप निकल गई...

तभी पारूल हॉल मे आ गई...

पारूल- नमस्ते अंकल...

आकाश- ह्म्म..नमस्ते...जाओ देखो छाई बनी कि नही...

पारूल- जी...जी अभी देखती हूँ...

थोड़ी देर बाद पारूल के साथ सविता चाइ- नाश्ता ले कर आ गई...

आकाश(चाइ की सीप मार कर)- अंकित कहाँ है...

पारूल- भैया सो रहे होंगे..हहहे...

आकाश- तो इसमे हँसने की क्या बात है..हाँ...

पारूल भी आकाश की बात सुनकर चुप हो गई...

आकाश- जाओ...उठाओ उसे...साला ये कोई टाइम है सोने का...इंसान है या जानवर....

सविता को तो विश्वास ही नही हुआ कि जो इंसान ये कहता था कि अभी सोने दो अंकित को..वो आज उसके सोने पर इतना गुस्सा...

पर सविता ने सोचा कि शायद कोई टेन्षन होगी इसलिए...तो उसने पारूल को पहुचा दिया अंकित को जगाने के लिए....

आकाश(चाइ ख़त्म कर के)- मैं अपने रूम मे हूँ...अंकित से कहना कि फ्रेश हो कर मुझसे मिले...

आकाश अपने रूम मे चला गया और सविता भी अंकित को जगाने पहुच गई...

अंकित के जागते ही सविता और पारूल ने आकाश की सारी बाते अंकित को बता दी...

अंकित- क्या बात कर रही हो..डॅड ने चाइ मागी...

सविता- हाँ बेटा..और काफ़ी चिड़े हुए दिख रहे थे....घर भी टॅक्सी कर के आ गये...हमेशा की तरह हरी को नही बुलाया...

मैं- ह्म्म्मा..शायद कोई टेन्षन होगी...अब कहाँ है...

सविता- अभी अपने रूम मे ही है..और तुझे बुलाया है...

मैं- ओके..मैं देखता हूँ...आप कॉफी पिलाओ जल्दी से...

सविता नीचे चली गई पर पारूल मुँह लटकाए वही खड़ी थी...

मैं- अब मेरी गुड़िया को क्या हुआ....

पारूल- वो...अंकल ने...

मैं- अंकल ने क्या बोला...

पारूल(मुँह बना कर)- मुझसे गुस्से से बोले ....

मैं- बस...इतनी सी बात...अरे गुड़िया...तू मुँह मत बनाया कर...तेरा खिला चेहरा ही अच्छा लगता है...उम्म्म..

और मैने पारूल का माथा चूम लिया...

मैं- अब जा और मेरे लिए कुछ नाश्ता बनवा दे...मैं आता हूँ...

पारूल भी मुस्कुरा उठी और नीचे चली गई....

थोड़ी देर बाद मैं नाश्ता ख़त्म कर के डॅड के रूम मे पहुचा...

मैं- डॅड...

आकाश- ओह..जाग गये बेटा...आओ...कैसे हो...

मैं- बहुत अच्छा...आप बताओ....

आकाश- ह्म्म..अच्छा हूँ...बहुत खुश...

मैं- तो अब कुछ बात करे...

आकाश- हाँ बेटा...बोलो...

मैं- आपको पता है कि हमारा एक ऑफीस जल चुका है...

आकाश- ह्म्म...मुझे मसेज मिल गया था...

मैं- तो अब क्या सोचा...आइ मीन उस ऑफीस के एंप्लायी...

आकाश- उम्म...कुछ करता हूँ...पहले जा कर देखुगा फिर एंप्लायीस से बात करता हूँ...

मैं- ओके...अब आप ये फाइल देखिए...

और मैने फाइल आगे बढ़ा दी...जिसे देख कर आकाश ने कोई रिएक्ट नही किया...

पर जब उसे पढ़ना स्टार्ट किया तो शॉक्ड रह गया...

आकाश- ये फाइल...तुम्हे कैसे मिली...

मैं- वो ..बस मिल गई...और मैने इसमे जो देखा...वो देख कर मेरा दिमाग़ हिला हुआ है...

आकाश- ऐसी क्या बात है बेटा..

मैं- अब तक तो आप समझ ही गये होंगे...

आकाश(अपनी चेयर से उठ कर)- ह्म्म...तो तुम कामिनी की बात कर रहे हो...

मैं- जी...कौन है ये कामिनी...और कामिनी के नाम पर 30% शेयर....क्यो डॅड...??

आकाश अपने फ़ोन पर कुछ चेक करता रहा पर बोला कुछ नही....

मैं भी अपनी चेयर से उठ गया...

मैं- बोलिए डॅड...कौन है ये कामिनी...कौन लगती है आपकी...क्या आपका और कामिनी का कोई...

आकाश(बीच मे)- बस बेटा...कोई भी अंदाज़ा मत लगाओ...जब तक पूरी बात पता ना कर लो तब तक कुछ भी ग़लत नही सोचना चाहिए....

मैं- ह्म्म..नही सोचता ..अब आप ही बताइए...क्या रिस्ता है आपका कामिनी से...???

आकाश(एक ठंडी साँस ले कर)- बैठो..बताता हूँ...

मैं- जी...अब बताइए...

आकाश- बेटा कामिनी कौन है ..ये जानने के पहले ये जान लो की मैने उसके नाम शेयर क्यो किए...

मैं- जी..सुन रहा हूँ..

आकाश- बेटा...ये एक तरह से पश्चाताप था...एक ऐसी ग़लती का जो मैने नही की...पर कीमत मैने चुकाई...

 
मैं- तो ...किसकी ग़लती थी...और ग़लती थी क्या...

आकाश- ये ग़लती मेरे पापा की थी...मतलब तुम्हारे दादाजी ने...बस उसी की कीमत चुकाने की कोसिस की मैने...

मैं- दादाजी की ग़लती...क्या किया था दादाजी ने...

आकाश- शायद ये बात तुमसे नही करनी चाहिए...पर अब हालात ऐसे है कि तुम्हे सब बताना ही होगा...

मैं- अब मैं बढ़ा हो चुका हूँ दस ..प्लीज़...बताइए...

आकाश- ह्म्म...तो सुनो.....तुम्हारे दादाजी बहुत अयाश इंसान थे बेटा...बहुत ही ज़्यादा...

नई-नई लड़कियों और औरतो के साथ संबंध बनाना उनका शौक था...

पर एक बात अच्छी थी उनके अंदर...वो किसी को फोर्स कर के अपना नही बनाते थे...

पूरे गाओं मे और आस-पास के इलाक़ों मे उनका नाम चलता था...पैसा भी बहुत था और बॉडी भी मस्त ..

यही वजह थी कि वो आसानी से औरत को आकर्षित कर लेते थे...

एक बार पापा के एक दोस्त ने उनसे कुछ उधार लिया...पर चुका नही पाए...

तब उनकी बीवी सामने से पापा के पास आई और उनसे संबंध बनाने की पेशकश की...

वो औरत पापा की रखेल बन गई और अपने पति को पापा से और पैसा भी दिलवा दिया...और हमेशा के लिए डॅड की रखेल बन कर रह गई...

आकाश बोलते-बोलते खड़ा हो गये और पलट कर चुप हो गया...

मैं- ह्म्म...पर इससे कामिनी का क्या मतलब...

आकाश- वो औरत कामिनी की माँ है...

मैं- व्हाट..मतलब कामिनी ...दादाजी की बेटी..आपकी बेहन..

आकाश- पता नही...ये बात मुझे काफ़ी टाइम के बाद पता चली...और जब मुझे ये पता लगा तो मैने कामिनी की हेल्प करके पश्चाताप करने की सोची...

मैं- पश्चाताप...किस बात का...आपने क्या किया....

आकाश- मैने कुछ नही किया...पर मुझे पता लगा कि कामिनी के माँ-बाप नही रहे...और फिर मेरे पापा की अयाशी की कीमत तो चुकानी ही थी...

तो मैने कामिनी को अपना समझ कर उसकी हेल्प करना चाही...पर वो तो पापा का नाम सुनकर ही भड़क गई और हेल्प के लिए सॉफ मना कर दिया...

फिर भी मैने उसके पति के बिज़्नेस मे हेल्प की कामिनी को पता चले बिना...अब शायद पता हो...नही जानता...

मैं- ह्म्म..और ये शेयर...

आकाश- ये भी इसलिए ही कामिनी के नाम किए कि उसकी थोड़ी सो हेल्प हो जाएगी...और शायद मेरे पापा का गुनाह कम हो जाए...

मैं- तो कामिनी आपकी नाजायज़ बेहन है....???

आकाश- हाँ...शायद...

मैं- शायद...??

आकाश- ह्म्म..मैने कहा ना की ये बात मुझे बाद मे पता चली...तो शायद...यही सच हो...

मैं- ह्म्म..और दामिनी के बारे मे आप क्या कहेगे...

आकाश- दामिनी...कौन दामिनी...??

मैं- आप दामिनी को नही जानते...वो कामिनी की बड़ी बेहन है...

आकाश- क्या...पर मुझे तो इसके बाते मे कुछ पता नही...इनफॅक्ट मैं पहली बार उसका नाम सुन रहा हूँ...

मैं(मन मे)- डॅड को दामिनी का नही पता...तो शायद इनसे काफ़ी कुछ छिपाया गया होगा...हो सकता है कि कामिनी की सच्चाई भी कुछ और हो...चलो...बाकी सच कामिनी बताएगी...

आकाश- बस...यही वजह थी कि मैने कुछ शेयर कामिनी के नाम किए थे....

मैं(मन मे)- तो डॅड को अभी कुछ बताना ठीक नही...चुप रहना ही अच्छा होगा...

आकाश- क्या हुआ...कहाँ खो गये...क्या मुझ पर ट्रस्ट नही...

मैं- आप पर तो सबसे ज़्यादा ट्रस्ट है डॅड...थॅंक्स...मेरे दिल का बोझ हल्का करने के लिए...

और मैं डॅड के गले लग गया और डॅड ने भी मेरे सिर पर हाथ फेर कर प्यार दिया...

मैं फिर डॅड की कही बातों को सोचते हुए अपने रूम मे आ गया...

बेड पर बैठते ही मेरी नज़र तकिये के नीचे पड़े लेटर पर पड़ी...

ये तो मोम का लास्ट लेटर था..जो पढ़ते-2 मैं सो गया था...

मैने गेट लॉक किया और लेटर का बाकी का हिस्सा पढ़ने लगा...

मेरी माँ के शब्द.......

बेटा....अब मैं तुझे एक बहुत ज़रूरी इंसान के बारे मे बताने जा रही हूँ...

ये इंसान तुम्हारी मदद के लिए हमेशा तैयार मिलेगा...

तुम्हे उसकी तस्वीर और अड्रेस मेरी पुरानी ड्रेसिंग टेबल के पीछे बने ड्रॉयर मे मिलेगी...

कभी भी कोई मुसीबत हो...तुम इससे मिल लेगा...और मेरा नाम बता देना..बस...

अब और कुछ नही...खुश रहो और खुशियाँ बाँट ते रहो...

जुग-जुग जियो बेटा....उूउउम्म्म्महा

तुम्हारी माँ.....अलका.....

माँ की आख़िरी बात पढ़ कर मैने जल्दी से पुरानी ड्रेसिंग टेबल चेक की , जो मेरे रूम मे ही रखी हुई थी...

मुझे वो ड्रॉयर मिला और उसमे से एक डायरी मिली...

मैने डाइयरी के पन्ने पलते तो एक तस्वीर नीचे गिर गई...जिसका अगला भाग फर्श की तरफ था..

मैने देखा की फोटो के पीछे कोई अड्रेस आंड फ़ोन नंबर. लिखा हुआ था...जो मुझे समझ नही आया...

पर जैसे ही मैने फोटो पलटी तो सामने वाले को देख कर मेरी आँखे फटी की फटी रह गई.....

ययययईईई.........?????????????????

फोटो देख कर मेरा दिमाग़ घूमने सा लगा था....

मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि मैं क्या करूँ...मैं बार-बार उस फोटो को देखता और उस सख्स के चेहरे से मिलता....

कभी लगता की ये वही चेहरा है जिसे मैं जानता हूँ और कभी ये सोचता कि मैं ग़लत सोच रहा हूँ...ये वो नही है हो सकता.....

काफ़ी देर तक मेरे दिमाग़ मे कस्मकस चलती रही पर मुझे कोई सल्यूशन नही मिला...

फाइनली मैने डिसाइड किया कि ऐसे सोचने से कुछ नही होगा...मुझे इस मामले की तह तक पहुचना होगा...

मुझे याद आया कि रजनी आंटी मेरी माँ को काफ़ी पहले से जानती है...शायद उन्हे कुछ पता हो...

यही सोच कर मैं रजनी आंटी से मिलने रूम से निकला ही था कि हाल मे मुझे डॅड मिल गये....

आकाश- कहाँ जा रहे हो बेटा...

मैं- डॅड..मैं आता हूँ...थोड़ा संजू के घर जा रहा हूँ...

आकाश- ह्म्म्म ..जल्दी आ जाना...ओके

मैं- ह्म...

थोड़ी देर बाद मैं संजू के घर पहुच गया...पर रजनी आंटी घर पर नही थी ...

मैं उनका वेट कर ही रहा था कि पारूल का कॉल आ गया.....

पारूल ने मुझे बताया कि वही पोलीस वाला घर आया है जो उस दिन आया था...उसके साथ कुछ लोग भी है...

मैं पारूल की बात से समझ गया कि ये रफ़्तार सिंग ही होगा...

मैने संजू के घर से स्पीड मे घर आ गया...

घर आते ही मेरी नज़र रफ़्तार सिंग पर गई...

रफ़्तार- आओ-आओ...साबजादे...तुम्हारा ही इंतज़ार था...

मैं- तुम यहाँ क्या कर रहे हो...??

रफ़्तार- ह्म्म..मैं यहाँ...अबे तेरे बाप को लेने आया हूँ...

मैं- जवान संभाल कर...तुम उन्हे हाथ भी नही लगा सकते...समझे...

रफ़्तार- हाथ..अबे कंप्लेन है इसके खिलाफ...ले के तो जाना ही होगा...

मैं- अच्छा...ये केस इनस्पेक्टर आलोक हॅंडल कर रहे है ..समझे...

रफ़्तार- हाहाहा...ये दूसरा केस है बेटा...समझा...इसमे आलोक भी कुछ नही कर सकता...

मैं- अभी पता चल जायगा...

रफ़्तार- ह्म्म..चल पता कर ले...तब तक मैं यही बैठा हूँ...

थोड़ी देर बाद ही इनस्पेक्टर आलोक आ गये...मैने उन्हे संजू के घर पर ही कॉल कर दिया था...

आलोक- रफ़्तार...क्या केस है...

रफ़्तार- कोई नही...वही केस है...मैं तो बस इन लोगो के साथ आ गया...कि कही कुछ हाथा-पाई ना हो...और ये अमीर लोग इन बेचारो को कुछ ना करे.....

आलोक- ह्म्म..तो तुम्हे लगता है की मिस्टर.आकाश इन्हे कुछ करेंगे...??

रफ़्तार- हो सकता है...पैसो के दम पर कुछ भी कर लेगे...आख़िर पैसा जो बचना है...

मैं- मतलब...??

रफ़्तार- मतलब ये कि आग लगने पर जो सब बेरोज़गार हो गये...उनका पैसा....जो शेयर होल्डर है उनका पैसा...

मैं- सब मिल जायगा...

रफ़्तार- तो दे दे...हम चले जाएँगे...

आलोक- रफ़्तार...तुम्हे किसने कहा कि तुम यहाँ से आओ...हाँ

रफ़्तार- एमएलए साब ने पहुचाया...उन्ही ने बहाल करवाया...और अब तो आप सस्पेंड भी नही कर पाएँगे...

आलोक- ह्म्म..लेकिन यहाँ से बाहर ज़रूर करवा दूँगा...चलो जाओ...आगे मैं देख लूगा...

फिर रफ़्तार अपने चेहरे पर विजयी मुस्कान लिए अकड़ता हुआ निकल गया...

बाकी के लोग भी चुपचाप निकल गये....

आलोक- सॉरी...अब आगे कोई प्राब्लम नही होगी...अभी मैं चलता हूँ...मुझे रफ़्तार की खबर लेनी है...

और फिर आलोक भी निकल गया...और मैं डॅड से आकर बोला...

मैं- डॅड...आपको इन्षुरेन्स ऑफीस जाना है...आज ही...

आकाश- ह्म्म..अभी जाता हूँ...

डॅड इन्षुरेन्स ऑफीस निकल गये और मैं गुस्से से अपने रूम मे चला आया...

मैं(मन मे)- ये साला रफ़्तार सिंग...इसे कुछ ज़्यादा ही पड़ी है लोगो की ....

सला रिचा के कहने पर ही सब कर रहा होगा ...बीसी..

एक बार इन्षुरेन्स का पैसा आ जाए....तो सबका हिसाब कर के देखता हूँ इस रफ़्तार के बच्चे को....

 
एक तो मुझे रजनी आंटी नही मिली...तो मेरे माइंड मे उस फोटो की वजह से टेन्षन थी...और उपेर से ये रफ़्तार टेन्षन दे गया....

मैने टेन्षन कम करने के लिए 2-3 पेग लगा लिए और फिर सोच मे डूब गया...

करीब 1घंटे बाद मेरे आदमी का कॉल आ गया..

( कॉल पर )

मैं- हेलो...

स- हेलो...कुछ टेन्षन मे हो क्या....

मैं- ह्म..हाँ...थोड़ी टेन्षन तो है...

स- मुझे बताओ...अभी दूर करता हूँ...

मैं- ह्म..कुछ खास नही...ये रफ़्तार सिंग का पता करो...कौन है इसके पीछे...

स- मैने पता करवाया है...ये सब वो रिचा के कहने पर कर रहा है...साले से ऑफीस मे कुछ नही हो पाया तो खुन्नस निकाल रहा है....उसने तुम्हारे ऑफीस मे काम करने वाले कुछ लोगो को साथ मिला लिया और अब तुम्हारे पिता पर प्रेशर डाल रहा है...

मैं- वो मैं जानता हूँ...कुछ शेर होल्डर्स भी उसके साथ है...पर ये वापिस ड्यूटी पर कैसे आ गया...

स- ह्म्म..मुझे पता चला है कि एमएलए साब की मेहरवानी है उसके उपेर...उसी का चमचा है ये रफ़्तार....और मज़े की बात ये है...कि एमएलए की तेरे डॅड से जमती नही...

मैं- मतलब...उसे क्या प्राब्लम है...

स- वो भी पता कर लिया...एक बार एमएलए ने तेरे डॅड से पार्टी फंड के नाम पर मोटी रकम मागी थी...उन्होने मना कर दिया...थोड़ी बहस भी हुई...बस तबसे वो इसी फिराक़ मे है कि तेरे डॅड को नीचा दिखा दे...

मैं- ओह्ह...तो ये बात है...लगता है इससे मुझे ही निपटना होगा...

स- ह्म्म्मह..मैने आदमी लगा दिए है...जल्दी ही इसकी कुंडली मिल जाएगी...

मैं- ओके...और हाँ...इस रफ़्तार की कुंडली भी चाहिए...साले को सबक तो सिखाना ही होगा...

स- उसकी तो मिल भी गई...उसकी कमज़ोरी है उसकी बेटी...वो काबू मे आ जाए तो रफ़्तार कुत्ता बना घूमेगा...

मैं- ह्म..तब तो काम हो गया...

स- कैसे...

मैं- जल्दी ही बताउन्गा....आप एमएलए की कुंडली निकालो...मैं रफ़्तार को कुत्ता बनाने की तैयारी करता हूँ...ओके..

स- ओके...शाम तक या कल तक मिल जाएगी...

मैं- ओके...बाइ...

और मैने कॉल कट कर के रजनी आंटी को कॉल किया...

मैं- हेलो आंटी...

रजनी- हाँ बेटा...तू घर आया था...कोई काम था क्या...

मैं- ह्म्म..आप कहा हो अभी...

रजनी- घर पर...आजा...

मैं- अभी आया...मुझे आपसे ज़रूरी काम है..जाना मत...ओके..

रजनी- ह्म्म्मा...

और फिर मैं रजनी आंटी के घर पहुच गया....

संजू के घर..........

रजनी- हाँ अब बोल...

मैं- पहले ये बताओ कि घर मे कौन-कौन है....

रजनी- अनु और रक्षा...पर दोनो सो रही है....पूनम , मेघा के साथ मार्केट गई है...और संजू का तो आज कल कोई ठिकाना ही नही...पता नही क्या करता है...

मैं- ह्म्म. .मैं देखता ही उसे...अभी आपसे ज़रूरी बात करनी है...

रजनी- हाँ...पर इतना घबराया सा क्यो है...कोई प्राब्लम...

मैं- नही...मुझे बस आपकी सहेली के बारे मे जानना है...

रजनी- सहेली...कौन सी...??

मैं- कुसुम...वो रफ़्तार की पत्नी है ना...

रजनी- हाँ...तुझे याद है वो...

मैं- अरे आंटी...ऐसा टिप-टॉप माल कोई कैसे भूल सकता है...

रजनी(मेरे सिर पर थपकी मार कर)- बदमाश...तू नही सुधरेगा...

मैं(मुस्कुरा कर)- सुधर गया तो आपका क्या होगा..हाँ...अब बोलो भी...

रजनी- अच्छा...पर क्या बोलू...ये तो बता...

मैं- ये बताओ कि उसे मेरे नीचे लाने मे आप हेल्प करोगी...

रजनी- तू कहता है तो ज़रूर करूगी...पर मुस्किल होगी...

मैं- अच्छा..वो क्यो..??

रजनी- उसका पति बहुत खाबसी है...वो तो डर के मारे किसी गैर मर्द से बात भी नही करती...ऐसे मे उसे तेरे पास लाना...मुस्किल होगा..

मैं- ह्म्म्मउ...लेकिन अगर पति आस-पास ना हो...मतलब सहर से बाहर हो तो...

रजनी- तब काम बन सकता है...असल मे वो भी सेक्स लाइफ से खुश नही है...और मज़े के लिए तरसती है...पर उसका पति...

मैं- उसके पति को भूल जाओ...बस आप उसे मेरे करीब ले आओ...फिर उसे मज़े भी दूँगा और उसका डर भी ख़त्म कर दूँगा...

रजनी- वो कैसे...

मैं- वो मैं देख लूँगा...आप बस मेरे ऑर्डर का वेट करो...और तब तक उसकी प्यास को और भड़का दो...

रजनी- ह्म्म...मैं कल से ही उसको उकसाती हूँ...

मैं- गुड...मैं बाकी का इंतज़ाम करता हूँ....

रजनी- ह्म्म्मद...ऑर कुछ...

मैं - मतलब...और कुछ नही...

रजनी- अरे ...दूसरी बात क्या है..जो तू बताने आया था ...

मैं- दूसरी बात...नही...कुछ भी नही..

रजनी- मैं तुझे अच्छे से जानती हूँ...सिर्फ़ ये बात तुझे परेशान नही कर सकती थी...कोई और बात ज़रूर है...अब बोल भी दे...मुझ पर भरोशा रखो...

मैं- ओके...एक मिनट.....ये देखो...

फिर मैने वो फोटो आंटी को दिखा दी जो मुझे मोम की बताई जगह पर मिली थी...

रजनी- ये किसकी फोटो है...शायद मैने कहीं देखा है इसे...

मैं- ह्म...मुझे भी यही लगा...इसलिए आपसे पूछने आ गया...

रजनी- देखने दे...कुछ याद आ जाए शायद...

फिर रजनी आंटी फोटो को बड़े गौर से देखने लगी...पर उन्हे पूरा-पूरा याद नही आ रहा था...

तभी पूनम और मेघा मार्केट से आ गई और आंटी ने फोटो छिपा ली...

मैं भी पूनम और मेघा से मिला...फिर हमने कॉफी पी...

और तभी मुझे कॉल आ गया...तो मैं वो फोटो रजनी आंटी के पास छोड़ कर वहाँ से निकल आया...

मैने बोल दिया था कि अच्छे से याद कर के मुझे बता देना...

कॉल रिसिव करते ही मैं शॉक्ड हो गया...सामने सविता थी...जो बहुत परेशान थी...

मैं- क्या बक रही हो...

सविता- बेटा मैं सच बोल रही हू...तू जल्दी से आ जा...

मैं- पर ऐसा कैसे हो सकता है...आपको पता नही क्या...

सविता- पता है...तभी तो हैरान हूँ...तू जल्दी से आजा...और खुद देख ले...

मैं- आता हूँ..तब तक ख्याल रखना...

और मैने तेज़ी से कार को घर पर दौड़ा दिया....

जैसे ही मैं हॉल मे एंटर हुआ तो डॅड को देख कर हैरान हो गया....

सविता ने जो बोला था वो सच था ...सविता ने कहा था कि डॅड नशे मे धुत पड़े है..

पर मैने नही माना था...क्योकि डॅड तो कभी शराब को हाथ भी नही लगाते थे...मेरे सामने तो कभी नही पी थी....

पर जब मैने उन्हे इस हालत मे देखा तो मेरे भी होश उड़ गये...

घर मे बाकी लोग भी उन्हे ऐसे देख कर डरे हुए थे...

मैने पहले सबको शांत किया और फिर हरी की हेल्प से डॅड को उनके रूम तक पहुचाया...

फिर उन्हे लिटा कर मैं नीचे हाल मे आ गया....

यहाँ हॉल मे सब लोग इसी सोच मे पड़ गये की आख़िर मेरे डॅड को हुआ क्या है...

अचानक से इतना चेंज...कैसे...???

फिर मैने सबको सोच से बाहर निकाल कर रिलॅक्स किया...बोल दिया कि उनके दोस्त ने जबरन पिला दी.....

और फिर मैं अपने रूम मे निकल आया....

 


रूम मे आते ही मुझे सोनम का मेसेज आ गया...उसने मेरी तवियत के बारे मे पूछा था...

मसेज पढ़ कर मुझे याद आया कि सोनम से मिलना था...तो मैने रिप्लाइ मे कल मिलने को बोल दिया और फिर रेस्ट करने लगा...

रात को सबके साथ डिन्नर करते वक़्त भी सब लोग सहमे हुए थे...शायद डॅड की हालत देख कर...

डॅड अभी भी नशे मे सोए पड़े थे...

मैने महॉल को बातें कर के हल्का करने की कोसिस की...

मैं- उउंम..क्या मस्त बेंगन भरता है...मज़ा आ गया...किसने बनाया...

पारूल- रश्मि दीदी ने..

मैं- वाह रश्मि ..तुम्हारे हाथो मे तो जादू है...लाओ तो ज़रा चूम लूँ...

रश्मि ने हँसते हुए अपने हाथ आगे कर दिए...और उसकी उंगली मे चमकती रिंग देख कर मैं बोला.

मैं- वाउ....हीरे की अंगूठी...

रश्मि- न..नही तो...ये तो दिखने वाली है...असली हीरा हमारे नसीब मे कहाँ...

मैं- ओके..पर ये हाथ तो असली है ना...

और मैने रश्मि के हाथ चूम लिए...

ऐसे ही हसी-मज़ाक करते हुए हमारा डिन्नर ख़त्म हो गया...

फिर मैं रूम मे आया और अपने आदमी को एक पिक सेंड कर दी...तुरंत ही उसका कॉल आ गया...

( कॉल पर )

स- ये पिक क्यो भेजी..

मैं- इसके बारे मे पूरी जानकारी चाहिए...समझ गये...

स- ह्म्म..समझ गया...मैं आदमी लगता हूँ इस काम के लिए...वैसे मैं कॉल करने ही वाला था...

मैं- क्यो...कुछ काम था...

स- मुझे नही..तुम्हे...सोनी को भूल गये क्या...उसे छोड़ दूं...??

मैं- नही...अभी नही...ह्म्म्म ..एक काम करो..30 मिनट के बाद उसके घर पर मिलो....उसे साथ ले कर...

स- क्यो...क्या करने वाले हो..

मैं- बस...सोनी को सबक दे दूं कि अंकित के खिलाफ जाने पर क्या-क्या हो सकता है...आप बस 30 मिनट मे पहुच जाना...ओके

स- ओके...

फिर मैने कॉल कट की और घर से निकल गया...जाते-2 सबको डॅड का ख्याल रखने को बोल गया..

करीब 10 मिनट बाद मैं एक घर के सामने खड़ा था....

मैं(मन मे)- आज कितने दिनो बाद तुझे जी भर के चोदुन्गा...उउंम्म..

और मैने डोरबेल बजाई ही थी कि गेट खुल गया...और मुझे देख कर सामने वाले की धड़कने बढ़ गई...

मैं- और स्मिता ...क्या हाल है मेरी रानी...

स्मिता- त्त..तुम..यहाँ...इस वक़्त...

मैं- ह्म्म..मैं...इस वक़्त...

स्मिता- क्या हुआ...मतलब क्या काम था...

मैं- ह्म ...तुम्हारे पति से काम था...

स्मिता- पर वो तो है नही...

मैं- अरे ...कहाँ गये...

स्मिता- पता नही...कल से गये है...तबसे बस ये बोला कि जल्दी आउगा...और कुछ पता ही नही...

मैं- तब तो मैं सही वक़्त पर आया...ऐसी गरम बीवी ..घर मे अकेली छोड़ कर भाग गया...ह्म्म्मै..कदर ही नही...कोई नही...हम है ना...

स्मिता- क्या कर रहे हो...होश मे हो ना...

मैं(आगे बढ़ कर)- हाँ मेरी रानी...पूरे होश मे ...सिर्फ़ तुम्हारे हुश्न का नशा छा रहा है...

स्मिता(पीछे जाते हुए)- देखो...मेरे पति आ गये तो...तुम जाओ यहाँ से...

मैं- क्यो डर रही हो....

स्मिता- किसी ने देख लिया तो...जाओ ना...

मैं- ओह्ह..तो ये बात है...

और मैने गेट लॉक कर दिया...

मैं- अब तो कोई नही देखेगा...अब सिर्फ़ तुम और मैं...

स्मिता- नही..प्ल्ज़...

मैने स्मिता को अपने पास खीच लिया और उसके होंठो के करीब अपने होंठ ले गया...

मैं- क्या हुआ...डर लग रहा है...

स्मिता- हाँ...वो..मेरे पति...

मैं- तुम सब भूल गई क्या..कैसे मैने....हाँ...

स्मिता- नही..पर अभी...

मैं- अभी...क्या...ये गुलाबी होंठ भी...उउउंम्म

और मैने स्मिता के होंठो पर होंठ रख दिए. ..

स्मिता- उउउंम..नही ना...

मैं- थोड़ा सा...उउउंम्म...उउउंम्म...

स्मिता- उउउंम्म..तुम शैतान हो...उउउंम्म..

और अब स्मिता ने भी रेस्पोन्स देना शुरू कर दिया...

मैं- उउंम..हू तो...अब तुझे खाने वाला हूँ...उउउम्म्म्म...

और मैने अपने हाथो को ले जाकर उसकी गान्ड पर जमा दिया...और दबाने लगा...

स्मिता- उउउंम्म....तुम ना...उउउंम्म...जाओ...उउउंम्म...

मैं- अच्छा...उउउम्म्म्म..चला जाउ...उूउउम्म्म्म...उउंम

स्मिता- उउउंम्म...जाओ ना....चले जाओ...उउंम

मैने एक झटके मे स्मिता को छोड़ दिया....

मैं- सच मे...सोच लो...चला गया तो कभी नही आउगा...देखुगा भी नही...

स्मिता- ह्म...

और मैने भी स्मिता को छोड़ कर गेट की तरफ कदम बढ़ा दिया...

अचानक स्मिता ने भाग कर पीछे से मुझे बाहों मे भर लिया...

स्मिता- रुक जाओ...मत जाओ प्ल्ज़्ज़...

मैं- क्यो...मुझे क्या मिलेगा यहाँ...

स्मिता- सब कुछ...जो तुम चाहो...

मैं- ह्म..

और मैने पलट कर स्मिता को किस कर दिया...

मैं- तो फिर हटा दो ये कपड़े...और वो जिस्म दिखाओ...जो आज रात मेरी भूख मिटायगा...

स्मिता- पर मेरे पति...

मैं- डोंट वरी....आज की रात तेरे पति के सामने तुझे चोदुन्गा....

स्मिता- नही...ये नही हो सकता..

मैं- और तेरा पति खुद बोले तो...

स्मिता- पागल हो क्या...वो क्यो बोलेगा...

मैं- अगर बोला तो...

स्मिता- अगर बोला तो...तो फिर मैं उसी के सामने तुम्हे खुश कारूगी...

मैं- ह्म्म..तो जाओ...अंदर वेट करो.....अब मैं तुम्हे तभी टच करूगा...जब तेरा पति बोलेगा...ओके...

स्मिता- पर...

मैं- तुम बस तैयार रहना....तेरे पति से हाँ बुलवाना मेरा काम है...

स्मिता- अगर ऐसा हुआ तब तो मैं तुम्हारी रखेल बन जाउन्गी....

मैं- तो समझ लो कि आज से तुम मेरी रखेल हुई....जाओ और वेट करो...

स्मिता अपने बेडरूम मे चली गई और मैने कॉल कर के सोनी को बुलवा लिया..

थोड़ी देर बाद ही सोनी के बेडरूम मे सोनी, स्मिता और मैं थे...

मैं- हाँ तो सोनी....क्या सोचा...

सोनी- क्क़..क्या...

मैं- देख सोनी...या तो मैं तुझे दुनिया के सामने नंगा कर दूं और जैल भिजवा दूं...या फिर इस बात को यही घर के अंदर ख़त्म कर दूं...

सोनी- नही...मुझे जैल नही जाना...और कोई सज़ा दे दो पर जैल नही...

मैं- ह्म्म..तो सज़ा आक्सेप्ट करोगे....

सोनी- हाँ...जो भी कहो...प्रोमिस...

मैं- सोच लो...फिर मुकरने नही दूँगा...

सोनी- नही...नही...मैं नही मुकुरुन्गा...बोलो...क्या चाहते हो...

मैं- तेरी बीवी...

मेरे बोलते ही स्मिता की आँखे बड़ी हो गई और सोनी की आँखे तो बाहर ही आ गई...

सोनी- क्क्क..क्या...

मैं- हाँ..तेरी बीवी...इसे मैं अपनी रखेल बनाउन्गा....

सोनी- नही...ऐसा मत करो ...प्ल्ज़्ज़...

मैं- ओके..तो जैल जाओ..मैं इसे देखुगा भी नही...ठीक है...

सोनी- नही जैल नही...और कोई रास्ता नही है..

मैं- रास्ते तो यही दो है...सोचना तुझे है कि तुझे किस रास्ते जाना है...

एक रास्ता तुझे जैल ले जायगा...जहाँ तन्हाई, बदनामी और कंगाली है...

और दूसरा रास्ता ये है...तेरी बीवी मेरी रखेल बन कर रहेगी...तू बदनामी से बच जायगा..और घर पर रह कर मस्त जिंदगी जिएगा...अब बोल..

सोनी- मेरे लिए तो दोनो रास्ते ही मुस्किल है...

मैं- ये तेरी प्राब्लम है...तू सोच...

सोनी- मेरी इज़्ज़त क्यो उतारना चाहते हो...

मैं(गुस्से मे)- साले...तू मेरे बाप की इज़्ज़त को सरे बाजार नीलाम करने निकला था ना...अब उसका हिसाब तो देना ही होगा...इज़्ज़त का बदला इज़्ज़त से...

सोनी सिर नीचे कर के रोने लगा...और मेरे पैरों पर आ गया...

सोनी- माफ़ कर दो सर...माफ़ कर दो...मेरी बीवी क्या सोचेगी...

 


स्मिता हमारी बातें सुनते हुए चुप चाप बैठी थी...उसे तो शायद सिर्फ़ सोनी के हाँ बोलने का इंतज़ार था...

मैं- देख सोनी...मैं किसी भी लड़की के जिस्म को जबरन हासिल नही करता...तू खुद सोच ले...तेरी बीवी से बात कर ले...फिर बताना...ओके...जो तू चाहेगा...वही रास्ता मैं तेरे लिए खोल दूँगा....अब तू अपनी बीवी से बात कर ले...

मैं तुझे कल तक का टाइम देता हूँ...कल इसी वक़्त मैं फिर आउगा...और इस बार मुझे फाइनल आन्सर चाहिए...वरना तेरे साथ इतना बुरा होगा जो तूने सपने मे भी ना सोचा होगा.....

सोनम के घर.....

सोनम और काजल एक रूम मे बैठी हुई थी...काजल ड्रिंक कर रही थी...

काजल(पेग ख़त्म कर के)- एक पेग और बना...और एक सिगरेट...ला दे तो...

सोनम- इतना क्यो पी रही है ...और जल्दी मे भी...रिलॅक्स...

काजल(सिगरेट जला कर)- फफफफूऊ.....आअहह..क्या करूँ...साला कुछ मन का नही होता तो दिमाग़ गरम हो जाता है...

सोनम- रिलॅक्स...सब ठीक होगा...ऐसे टेन्षन लेने से क्या होगा...

काजल- ह्म...पर कब...साला 2 दिन से टाल रहा है...यहाँ लड़की के बुलाने पर लोग उल्टे पैर भागते है और ये अंकित...साला बहुत नखरे है इसके...

सोनम- अरे नखरे कैसे...बीमार है वो...

काजल- तू उसकी वकालत बंद कर...झूठा है साला..कोई बीमार नही...

सोनम- वो क्यो झूठ बोलेगा...हाँ..

काजल- क्यो..हो सकता है उसे कुछ शक हो कि काजल ये सब नाटक कर रही है...ला पेग ला...

और काजल ने पेग गठलाना शुरू कर दिया...

सोनम- काजल...अरे वो सोनम से मिलने आएगा...काजल से नही...याद है ना...

काजल(पेग गटक कर)- अरे हाँ...बुलाया तो तूने ही है..मैं तो भूल ही गई थी...

सोनम- ह्म्म्मु...पर मिलेगी काजल...

और सोनम की आँखो मे फिर से उन्माद चहा गया ..पर उसने अपने आप को संभाले रखा...

काजल- एक बार बस आ जाए...फिर देख...क्या हाल करती हूँ मैं इसका...साला ..ना जी पायगा और ना मर पायगा...(और काजल ने सिगरेट का काश खीच कर हवा मे छल्ला बना डाला)

सोनम(मन मे)- सॉरी काजल...अब ये ग़मे तुम्हारा नही...मेरा है...अब तुम नचोगी और मैं बाज़ार बंद करूगी....

वही दूसरे कमरे मे सोनू भी अपने ही ख़यालो मे खोया हुआ था...

सोनू(मन मे)- ऐसा क्यो होता है कि अच्छे लोग ही हमेशा मुस्किल मे पड़ते है...

बचपन से यही सीखा कि अच्छे कर्म करो तो फल अच्छा मिलेगा...तो मैने किसका बुरा किया ..जो आज इस परेशानी मे फस गया...

आज मेरे सामने दो ही रास्ते है..या तो कुआँ या फिर खाई....

एक तरफ अंकित को मारने का काम और दूसरी तरफ अपने डॅड को बचाने का काम...

अंकित को छोड़ता हूँ तो डॅड नही बचेगे...और डॅड को बचाता हूँ तो ...बेचारा अंकित...

अंकित ने मेरा कुछ भी बुरा नही किया...फिर मेरे हाथो ही उसका बुरा क्रो करवाना चाहते हो...

ये कैसा न्याय है भगवान...कमीने लोग आगे बढ़ते जा रहे है ...और परेशानिया सिर्फ़ और सिर्फ़ अच्छे लोगो पर...

क्या करूँ भगवान कोई तो रास्ता दिखाओ...कोई चमत्कार करो कि मैं अंकित और दाद , दोनो को बचा लूँ...

सोनू मन ही मन भगवान से प्रथमा कर रहा था कि तभी उसके गेट पर नॉक हुई...

गेट खोलने पर सोनम सामने खड़ी हुई थी...

सोनू- अरे सोनम....क्या हुआ...और काजल कहाँ है...

सोनम- काजल तो टल्ली हो कर पड़ी है...मुझे आपसे ज़रूरी बात करनी है...

सोनू- अच्छा...आ अंदर आ...

सोनम- भाई...मैं अंकित को धोखा नही दे सकती...

सोनू- जानता हूँ.....पर करेगी क्या...काजल को ना बोलेगी क्या...

सोनम- नही...काजल जो चाहती है...वही होगा...पर मेरे हिसाब से...

सोनू- अच्छा...वो कैसे...तेरा फ़ोन तो काजल की निगरानी मे है और तू खुद अंकित से मिल नही पायगी...काजल बड़ी शातिर है...बताया था ना कि तुझ पर नज़र रखे हुए है...

सोनम- जानती हूँ...इसलिए एक प्लान है..ये काम करेगा...

सोनू- बता फिर...

फिर सोनम ने एक प्लान बताया और उसे सुन कर सोनू के चेहरे पर भी खुशी आ गई...उसे भी अपनी प्राब्लम का सल्यूशन दिखने लगा था...

सोनम- कैसा लगा...

सोनू- शानदार...एक काम कर ...तू जा...मैं तैयारी करता हूँ...आज रात को ही फिनिश करते है...

सोनम रूम से बाहर निकल गई...

सोनू(अपने आप से)- थॅंक यू गॉड...अब देखना...कल से मैं दूसरों के इशारे पर नही नाचुगा...और ना ही सोनम...

अब हमे नचाने वाले...खुद ही नाचेगे...दूसरे की उंगलियो पर...हाहहाहा......

अगले दिन सुबह मेरी आँख खुली तो मेरे गेट पर कोई हाथ ठोके जा रहा था....

मैने बंद आँखो के साथ ही गेट की तरफ चेहरा घुमाया कि तभी आवाज़ आई...

मेघा- अंकित...अब उठ भी जाओ...जिम का टाइम हो गया...

अचानक से मेघा की आवाज़ सुन कर मैं चौंक गया...पर जिम वाली बात से मुझे याद आ गया कि मेघा क्यो आई है...

मैं(आँखे बंद किए हुए)- ह्म्म...आया आंटी...आप जिम मे चलो...मैं फ्रेश हो कर आता हूँ...

फिर थोड़ी देर बाद मैं जिम मे पहुचा तो सामने देख कर खुश हो गया...

मैं(मन मे)- आज तो दिन की शुरुआत अच्छी हो गई...ह्म्म...देखता हूँ थोड़ा और...

सामने मेघा अपना ट्रॅक पेंट पहन रही थी...शायद कुछ ज़्यादा ही टाइट था...

पर ऐसे खुले मे क्यो...क्या बेवकूफ़ औरत है...कोई और आ जाता तो.....

फिर मैं गेट के साइड मे छिप कर देखने लगा कि आगे क्या होता है...

पर मुझे और कुछ खास देखने नही मिला...मेघा ने ट्रॅक पेंट पहना और वॉर्म-अप करने लगी...

मैं भी चुप चाप मेघा के पीछे आ कर खड़ा हो गया...असल मे मैं तो उसकी मस्त गान्ड देख रहा था....

मेघा को मेरे आने का अहसास तब हुआ जब वो आगे झुकी और उसकी गान्ड मेरे लंड को टच कर गई....

मेघा- एयेए...त्त..तुम..ओह..डरा ही दिया....

मैं- अरे...डरना कैसा...यहाँ मेरे अलावा कौन आएगा...खास कर कोई बाहर वाला तो आ नही सकता...

मेघा- जानती हूँ...पर अचानक आए ना...और बोले भी नही..

मैं- मैने तो बस देख रहा था कि आप कैसा कर रही है...

मेघा- ह्म..तो कैसा किया..अच्छा या बुरा...

मैं- ह्म..अच्छा तो है..पर आप नीचे तक नही झुक रही ...और आपके पैर भी नही खुल रहे...

मेघा- मतलब..कैसे....तुम बताओ ना...

मैं- ओके...पर मुझे आपको टच करना पड़ सकता है...आइ होप यू डोंट माइंड..हाँ...

मेघा- अरे...इसमे क्या...तुम मुझे सिखाने के लिए टच करोगे ना...मैं माइंड नही कारूगी...जैसे चाहो टच करो...

मैं(मन मे)- ह्म....खुल के बोल दे ना कि अभी चोद दो...मैं सब जानता हू....अब बताता हूँ....

मेघा- हाँ तो...क्या कह रहे थे...कैसे करूँ...

मैं- ह्म..हाँ..बताता हूँ...

और मैने मेघा को अपने सामने घुमा दिया...उसकी गान्ड मेरे लंड के करीब थी...

फिर मैने उसके हाथो को अपने हाथो मे ले कर उपेर उठा दिया...

मैं- ये हाथ बिल्कुल सीधे रखना...और फिर नीचे तक ले जाना है...पैर के अंगूठे तक...ओके...

मेघा- ह्म..

और मेघा हाथ आगे तक ले गई...और उसकी गान्ड पीछे उभर कर मेरे लंड से टकरा गई...

मेघा- आहह...ये अंगूठे तक...उउउंम्म

मुझे समझ नही आ रहा था कि मेघा सिसक क्यो रही है...मेरे लंड के अहसास से या फिर हाथ नीचे ले जाने से...शायद झुक नही पा रही...

मैं- ह्म..क्या हुआ...

मेघा- वो...वो हाथ अंगूठे तक नही जा रहे...

मैं- रूको..मैं पहुचाता हूँ..

और मैने मेघा के उपेर झुक गया और उसके हाथो को अंगूठे से टच करने लगा...

अब मेरा लंड पूरा मेघा की गान्ड मे दबा हुआ था...और इस वजह से मेघा की सिसकी निकल गई...

मेघा- उउंम्म....नही..आअहह...

मैं- अरे..जायगा...थोड़ा रूको...पूरा जायगा...चलो झुको...हाँ..ऐसे ही...

मेघा- आअहह..नही गया...इतने मे ही ..आअहह...दर्द हो रहा है...

मैं- ह्म..अभी इसे रहने देते है...जल्दी ही आदत पड़ जाएगी...एक-दो दिन मे...चलो आगे करते है...

फिर थोड़ा वॉर्म-अप करवा कर मैने मेघा को एक्सरसाइज़ करने को कहा...

 


सबसे पहले मैने उसे लेट कर अप-डाउन करने को बोला...इससे पेट की चर्बी कम होती है...

पर मेघा से हो नही पा रहा था...

मेघा- अंकित...ये नही हो रहा...मेरे पैर भी उठ जाते है तो मैं आगे तक नही जा पाती...

मैं- ह्म..कोई नही...मैं देखता हूँ...

और फिर मैं मेघा की जाघो को हाथ से दबा लिया....

मैं- ह्म..अब करो...अब पैर नही उठेगे...

मेघा ने फिर से ट्राइ किया पर अभी भी नही हो रहा था...

फिर मैने आगे हाथ कर के मेघा की जाघो को चूत के पास पकड़ लिया...

मैं- अब ट्राइ करो...हाँ...कम ऑन...

मेघा- हाँ...कर रही हूँ...

मेघा ट्राइ कर रही थी..पर उसकी जाघो पर मेरी उंगलिया चलने लगी थी...

धीरे-धीरे मेरी उंगलियाँ मेघा की चूत तक पहुच गई...और मैने धीरे से एक उंगली दबा दी....

मेघा- आअहह...

मैं- यस...थोड़ा और....

मेघा- हाँ...थोड़ा और...

और मैने दोनो तरफ से उंगलियो से चूत दबाना शुरू कर दिया...

मेघा- आअहह...अंकित...उउउंम..

मैं जानता था कि मेघा को मुझसे चुदवाने मे कोई प्राब्लम नही होगी...उपेर से वो इतने दिनो से प्यासी थी..

पर मैं चाहता था कि वो खुद से आगे बढ़े ...इसलिए मैने उसे गरम करना जारी रखा...

थोड़ी देर मे मेघा थक कर आहें भरती हुई सीधी लेट गई...और मैने भी मौका पा कर उसके पैरो को खोल कर उसकी चूत पर हाथ जमा लिए..

मेघा- आआहह...अंकित...

मैं- अरे आंटी...यहाँ तो आग लगी हुई है...हाँ....

मेघा- आहह...

मैं- आप चाहे तो आग को ठंडा किया जा सकता है ...

मेघा चुप रही...

मैं- नही चाहती तो कोई नही...कुछ और करते है..चलो..

मैं उठने वाला ही था कि मेघा के मुँह से सिसकी निकल गई...

मेघा- आअहह...पल्लज़्ज़्ज़्ज़...

बस मेघा के इस वर्ड ने सब कुछ कर दिया था...

मैने भी कुछ नही बोला ..बस मेघा के उपेर आ कर झुक गया और उसके होंठो के उपेर होंठ कर दिए...अभी होंठ आपस मे टच नही हुए थे...

मेघा अभी आँखे बंद किए हुए लेटी थी...जब उसने मेरी तरफ से कोई हलचल नही देखी तो आँखे खोल दी और लपक कर मेरे होंठो को चूसने लगी...

मेघा पूरे जोश मे मुझे किस करने लगी...और मैने भी कोई कमी नही की...

मैने मेघा के बूब्स को मसलना शुरू कर दिया...और हम मस्ती मे डूबने लगे....

मैने गरम हो ही चुका था...तो मैने मेघा के दोनो बूब्स को आज़ाद कर लिया और जोरों से मसल्ने लगा....

मेघा- उूउउंम्म...आअहह...अंकित...येस्स...एस्स...

अब कोई परदा नही था हमारे बीच...अब हम दोनो ही चुदाई के लिए तैयार थे...

मैने तेज़ी से बूब्स मसलना और किस करना जारी रखा...

मैं मेघा को पूरा गरम करना चाहता था...जिससे चुदाई का मज़ा बढ़ जायगा...

पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था....

हमे किसी के आने की आहट सुनाई दी तो हम जल्दी से अलग हो गये...और मेघा ने अपनने बूब्स को जल्दी से अंदर डाल लिया....

मैं(मन मे)- काश गेट लॉक कर लेता....

सामने सविता थी...जियाने बताया की इन्षुरेन्स वाले मिलने आए है...

मैं- ह्म..आता हूँ...

फिर मैने मेघा को देखा तो वो शर्म से पानी हो रही थी...

मैं- अब बाकी का काम कल करेंगे...ओके आंटी...

और मैं मुस्कुरा कर नीचे चला आया...और मेघा भी चेंज करने निकल गई...

मैने नीचे जा कर इन्षुरेन्स का मामला निपटाया और रेडी हो गया...

रेडी होते ही मुझे सोनम का मसेज आ गया...उसने मुझे माल मे मिलने बुलाया था....

मैं भी जल्दी से माल निकल गया...क्योकि मुझे तो सोनम को हासिल करने की जल्दी थी...

पर जब मैं माल मे सोनम के सामने पहुचा तो उसका बात सुन कर शॉक्ड रह गया...

सोनम- अरे अंकित...आप यहाँ...कैसे...कुछ लेने आए थे क्या...

मुझे समझ नही आया कि मैं क्या बोलू...मुझे तो सोनम पर गुस्सा आने लगा...

पर तभी मेरी नज़र काजल पर पड़ी...और उसे देख कर मुझे उसकी और कामिनी की बातें याद आ गई...

मैं(मान मे)- साली...ये भी यही है...पहले इसे देख लूँ...

मैं- ओह...हाई

काजल - हाई...

सोनम- वैसे आपने बताया नही कि आप क्या लेने आए थे...ओह...ये लिया आपने..क्या है...ओह..सीडीज़...किसी मूवी की है...या गेम...

मुझे सोनम की कोई भी बात समझ नही आई...मैं कुछ पूछता उससे पहले उसने एक सीडी मेरे हाथ मे पकड़ा दी..

सोनम- ओके..तो देख कर बताना ज़रूर कि कैसी लगी...बाइ...चल काजल..

और सोनम के हाथ काजल भी मुझे बाइ कर के निकल गई...

काजल- सोनम...तूने ऐसे क्यो बात की...तूने ही बुलाया था ना इसे...??

सोनम- मेरा मोबाइल तेरे ही पास है...मसेज चेक कर ले...मैने ही बुलाया था...

काजल- हाँ..पर मुझसे मिलवाने...और अब...

सोनम- डोंट वरी...तू आज ही उससे मिलेगी...और तेरी मुलाक़ात मज़े दार होगी..बस..अभी तड़पने दे उसे...

काजल- ह्म्म..और वो सीडी...उसने आते ही शॉपिंग कर ली..

सोनम- यार..माल मे आ कर मन हो गया तो ले ली...छोड़ ना ...तू बस आज शाम को अपनी प्यारी मुलाक़ात के लिए तैयार रहना...

काजल- ओके...चल..

सोनम(मन मे)- बस...मेरे कॉल करने से पहले ही अंकित वो सीडी देख ले गॉड...प्लज़्ज़्ज़...

हमसे कही दूर ...एक गाओं मे......

रघु एक रूम मे बैठे साक्ष् से बात कर रहा था ...

रघु- सर...एक बात पता चली है...मैने सोचा आपको बता दूं...

क्या अपने मतलब की बात है...""...सामने वाले सक्श ने सिगरेट पीते हुए बोला....

रघु- ये तो आप खुद डिसाइड कर लेना. ...वैसे ये सम्राट सिंग से रिलेटेड है....

क्या...सम्राट सिंग.....क्या बात है बोलो...""...सामने वाले ने बड़ी ही उत्सुकता के साथ पूछा...

रघु- एक कोई लड़की है...जो पास के गाओं मे सम्राट सिंग को ढूँढ रही है...

लड़की....पर क्यो...क्या उसने बताया कि वो सम्राट को क्यो ढूँढ रही है...""

रघु- नही जानता....उसने कुछ नही बताया...लेकिन हाँ...जो भी उसे पता बतायगा...वो उसे कीमत देने को तैयार है...

ह्म्म्मय...कमाल की बात है...कीमत देने को तैयार है...कौन हो सकता है...या तो कोई दोस्त हो सकता है या कोई दुश्मन...."""

रघु- ये भी नही पता...क्या आदमी भेजे उसके पीछे....

ह्म्म...भेजो...पर मारना नही...हम उससे मिलना चाहेगे....""

रघु- ठीक है सर...

थोड़ी देर मे ही रघु कुछ आदमी ले कर रेणु के पास पहुच जाते है...जो सम्राट सिंग को ढूँढने आई थी...

रेणु- जी..कहिए...

रघु- सुना है तू सम्राट को ढूँढ रही है...

रेणु- हाँ...आप जानते हो क्या....

रघु- ह्म..पर तुम उसे कैसे जानती हूँ...दोस्त हो या दुश्मन...??

रेणु- इससे तुम्हे क्या....तुम पता बताओ....मैं कीमत देती हूँ..

रघु- ह्म...पर मेरी कीमत थोड़ी ज़्यादा है...

रेणु - कीमत बोलो...

रघु- तेरी गोरी चमड़ी...पूरी रात के लिए...

रेणु(गुस्से मे)- बकवास बंद करो... .रास्ता छोड़ो..मैं खुद ढूँढ लूगी...

रघु- ठीक है...बस थोड़ा पीछे देख लो..

रेणु ने पीछे देखा ही था कि उसकी आँखे बंद हो गई...

और जब उसे होश आया तो वो सामने वाले सक्श को देख कर बोली....

रेणु- पापा...आप.......??????????????

 
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