सादिया- मैं...मैं क्या बोलू...मुझे तो कुछ समझ ही नही आ रहा....
अकरम- ह्म्म...समझ कैसे आएगा....आप तो बस कहानी सुना लेती हो...वेल नाइस स्टोरी ..हाँ...
सादिया- कहानी...कैसी कहानी...
अकरम- अरे...ये कहानी नही तो क्या है...आपने एक ऐसे करेक्टर के बारे मे बताया जिसका कोई बाजूद ही नही..तो इसे क्या कहेगे...ये तो एक कहानी ही हो सकती है....
सादिया- मतलब...मैने क्या बोला...तुम किसकी बात कर रहे हो....
अकरम- वही..मेरी खाला ..जिसे आप गुल की मोम बता रही है....असल मे उसका तो कोई बाजूद ही नही है...
सादिया- ये क्या बकवास है....तुम ये कहना चाहते हो कि गुल की मोम है ही नही...तो क्या वो आसमान से टपकी...
अकरम- नही...गुल वैसे ही टपकी है जैसे हर इंसान टपकता है...मैं तो बस ये बोल रहा हूँ कि आप जिसे गुल की मोम बता रही है उस औरत का कोई बाजूद ही नही है....
सादिया(झल्ला कर)- आख़िर कहना क्या चाहते हो तुम...
सादिया ने ज़ोर से बात की तो अकरम को भी गुस्सा आ गया और वो गुस्से मे चिल्लाते हुए बोला......
अकरम- सच...और सच ये है कि मेरी कोई दूसरी खाला नही ...तुम्हारे अलावा....दूसरा सच ये कि गुल आपकी बेटी है...समझी..आपकी बेटी...
सादिया(सकपका कर)- क्क़..क्या...नही..ये सब...
अकरम(बीच मे)- दूसरा सच...आपके पति कही नही गये...ना दुबई और ना कही और...और ना ही वो आपसे अलग हुए है...असल मे वो अब इस दुनिया मे ही नही है...मर चुके है...
सादिया(घबरा गई)- आ...अकरम..तुम ये....
अकरम(बीच मे)- और सबसे बड़ा सच ये कि गुल आपकी बेटी है पर आपके पति की नही...असल मे वो आपके नाजायज़ रिश्ते की निशानी है....
सादिया(गुस्से मे)- अकरम...
अकरम- हाँ..गुल आपके नाजायज़ रिस्ते का नतीजा है और उसका बाप कोई और नही....वसीम ख़ान है...या ये कहूँ कि सरफ़राज़ ख़ान....हाँ...
अकरम की आख़िरी लाइन सुनकर तो सादिया सन्न रह गई और धम्म से बेड पर बैठ गई....उसका सिर झुका हुआ था और वो पर्ची को हाथो मे लिए सुबकने लगी....और अकरम गुस्से से भरी अपनी लाल आँखो से उसे घूरता हुआ खड़ा रहा....
सादिया, अकरम की बातें सुन कर रोने लगी थी...और अकरम उसे रोता हुआ देख रहा था...पर अकरम से ये ज़्यादा देर तक देखा नही गया....
अकरम ने आगे बढ़ कर उसे चुप कराने की कोसिस की...और सादिया रोती हुई अकरम के गले लग गई....
अकरम- आंटी...आंटी प्ल्ज़...मैं आपको रुलाना नही चाहता था...मैं बस सच जानना चाहता था...पर आपने जब झूठ पर झूठ बोला तो मुझे गुस्सा आ गया और मैं ये सब बोल गया....प्ल्ज़ आंटी...रोइए मत...प्ल्ज़....
सादिया कुछ नही बोली बस सुबक्ती रही...पर अकरम की बात सुन कर उसने अकरम को और ज़्यादा कस कर गले लगा लिया....
दोनो बेड पर आजू-बाजू मे बैठे थे...और इस समय सादिया , अकरम से ऐसे चिपकी थी कि जैसे चंदन के पेड़ से साँप....
अकरम अभी भी सादिया की पीठ सहलाते हुए उसे चुप करा रशा था....और सादिया उसे बाहों मे भरे दुबक रही थी...दोनो के दिल मे कोई ग़लत ख्याल नही था...
पर जैसे ही अकरम को अपने सीने पर सादिया के बड़े बूब्स का अहसाह होता गया...वैसे -वैसे अकरम गरम होता गया और उसका हाथ सादिया की पीठ पर तेज़ी से घूमने लगा....
अकरम ने अपने हाथ का दबाब बढ़ा कर सादिया को सहलाना जारी रखा और साथ मे वो खुद सादिया से कस कर चिपक गया .....और अपनी गर्म साँसे सादिया के गले के पास छोड़ने लगा...
सादिया भी एक खेली हुई औरत थी....वो अकरम के हाथ का दबाब पा कर अच्छा महसूस करने लगी...और इसी लिए वो भी चुपचाप उसी पोज़ीशन मे बैठी रही....
जब अकरम को लगा कि सादिया चुप हो गई है तो उसने बात करना ठीक समझा ...पर वो सादिया से अलग नही हुआ...उस्र अब मज़ा आ रहा था....इसलिए उसने वैसे ही सादिया को सहलाते हुए बात करनी सुरू कर दी......
अकरम- आंटी...अब बताइए...क्या ये सब सच है...
सादिया- हुह...तुम जानते थे...फिर क्यो पूछा....
अकरम- क्योकि मैं श्योर नही था...मुझे लगा कि शायद मुझे ग़लत न्यूज़ मिली है...
सादिया- पर तुम्हे बोला किसने...और ये पर्ची...कहाँ से मिली ये......
अकरम- आप ये छोड़ो...और मुझे सब सच बताओ...आख़िर ये सब हुआ कैसे...सुरू से बताओ...सब सच...ओके...
सादिया- ह्म्म्मह....बताती हूँ....पर पहले मुझे चेंज कर लेने दो...तुम बैठो ...मैं आई....
अकरम- ओके...आप फ्रेश हो जाओ...मैं आपके लिए कॉफी बना कर लाता हूँ...ओके...
फिर सादिया अकरम से अलग हुई और बाथरूम मे चली गई......और अकरम कॉफी बनाने चला गया.......
सुजाता ने स्टम पेपर्स टेबल पर पटकते हुए बोला.....( इस समय मैं और सुजाता मेरे कॅबिन मे आमने-सामने बैठे हुए थे...)
मैं- ये सब क्या है आंटी....
सुजाता- क्या...बोला था ना कि सवाल नही...बस वही करो जो मैं कहती हूँ...साइन कर....
मैं- नही...मैं नही करूगा...
सुजाता(गुस्से मे)- नही करेगा...तो रुक..मैं अभी तेरे बाप को तेरी करतूत बताती हूँ...फिर देखना....
मैं- ठीक है...बता दो...ज़्यादा से ज़्यादा क्या होगा...वो मुझसे गुस्सा होंगे...मारेंगे....पर ये साइन कर के मैं उनको नुकसान नही पहुचाउन्गा....
मेरी बात सुनकर सुजाता की प्लानिंग फैल होने लगी....वो सोच रही थी कि वो आसानी से मुझे डरा कर साइन ले लेगी...पर यहाँ तो बाजी उल्टी पड़ रही है...
सुजाता(संभालते हुए)- नुकसान...नुकसान कैसा बेटा...
मैं- नुकसान ही तो है...ये हमारे ऑफीस के पेपर्स है...मेरे साइन करने पर ये तुम्हारे नाम हो जाएँगे....तो नुकसान तो डॅड का ही हुआ ना....
सुजाता(मुस्कुरा कर)- अरे नही...ये सब तुम्हारे डॅड के नाम होगा...मतलब फिलहाल सारे अधिकार जो तुम्हारे हाथ मे है...वो तुम्हारे डॅड के पास पहुँच जाएँगे...तुमने पढ़ा ही नही...एक बार पढ़ लो फिर बोलना....
मैने सुजाता की बात सुनकर पेपर्स को पढ़ना सुरू किया और पढ़ने के बाद सुजाता को घूर्ने लगा......
सुजाता- क्या हुआ...घूर क्यो रहा है....
मैं- आख़िर इस सब की ज़रूरत क्या है....वैसे भी यहाँ डॅड का ही ऑर्डर चलता है....
सुजाता- हाँ ...पर मैं चाहती हूँ कि मैं और तुम्हारे डॅड पार्ट्नर्स बन जाए...और इसके लिए सब कुछ तुम्हारे डॅड के नाम होना ज़रूरी है....समझे ना...
सुजाता- मेरा फ़ायदा...कुछ नही...बस मैं ये पार्ट्नरशिप चाहती हूँ...जिसके लिए तुम्हारा साइन करना ज़रूरी है...बस..और कोई बात नही....
मैं- पक्का ना...
सुजाता- पक्का...और तुम ये साइन कर दो तो तुम्हे भी फ़ायदा होगा....समझे...
सुजाता ने अपनी आँख दबा कर मुस्कुरा दिया और मैने भी मुस्कुरा कर साइन कर दिए....
सुजाता(मन मे)- बस बेटा...अब तू देख...कैसे ये सब मेरे पास आता है...उसके बाद यहाँ तू मरेगा और वहाँ तेरा बाप...हहहे....
मैं(मन मे)- अब देखता हूँ कि कब तक ये नाटक करेगी....जल्दी से अपनी औकात पर तो आए...फिर बताता हूँ कि अंकित से टकराना कितना महगा पड़ सकता है....
मैने साइन किए और पेपर्स सुजाता को दे दिए....सुजाता की आँखे खुशी से चमक उठी और वो पेपर्स ले कर उठी और मुझे गाल पर किस कर के गान्ड मटकाती हुई कॅबिन से निकल गई....
सुजाता के जाने के बाद मैं उसके बारे मे कुछ सोच ही रहा था कि डॅड मेरे पास आ गये....
आकाश(चिल्ला कर)- अंकित...ये क्या किया तुमने....साइन क्यो कर दिए...तुम आख़िर...आख़िर करना क्या चाहते हो...
मैं- डॅड...आप बहुत परेशान दिख रहे है...प्ल्ज़...पहले बैठ जाइए...मैं सब बताता हूँ..लीजिए डॅड...पानी पीजिए......
मैने डॅड को पानी दिया और थोड़ी देर तक उन्हे रेस्ट करने दिया....थोड़ी देर तक डॅड आँखे बंद किए हुए बैठे रहे और फिर बोले....
आकाश- बेटा..आख़िर तुम कर क्या रहे हो...कम से कम मुझे तो बताओ..और तुमने ये साइन...जानते हो कि इससे क्या हो सकता है....
मैं- जानता हूँ डॅड...ट्रस्ट मी....जैसा आप अंदाज़ा लगा रहे है...वैसा कुछ नही होगा...आप बस मुझ पर भरोशा रखिए....ओके डॅड....
आकाश- ह्म्म...पर अभी क्या करूँ...वो मेरे कॅबिन मे बैठी है...मेरे साइन लेने....
मैं- ह्म्म..आप साइन कर दो...
आकाश- क्या...पागल हो क्या...जानते हो ना कि साइन करने के बाद क्या होगा....
मैं- ह्म...जानता हूँ...साइन करने के बाद सुजाता झक मार कर मेरे पास आयगी...पक्का....
आकाश- पर वो किसलिए...आइ मीन क्यो आयगी ...
मैं- वो थोड़ी ही देर मे आपका वकील बता देगा....
आकाश- ह्म्म..बेटा..आइ ट्रस्ट यू...बट जो भी करना...सोच -समझ कर करना...और हाँ...कोसिस यही करना कि तुम किसी अच्छे सक्श का बुरा ना करो...ओके...
मैं(डॅड के हाथ थामकर)- जी डॅड...मैं आपको निराश नही करूगा...
आकाश- ह्म्म्मथ...तो मैं जा कर साइन करता हूँ...टेक केर...
फिर डॅड चले गये और मैं इंतज़ार करने लगा सुजाता का...मुझे पता था....वो ज़रूर आयगी....
लेकिन सुजाता के आने के पहले मेरा फ़ोन आ गया...ये काजल का फ़ोन था....कॉल पिक करते ही मुझे एक और झटका लग गया....काजल घबराई हुई थी हाँफती हुई बोल रही थी ......
काजल- अंकित...प्ल्ज़ तुम घर आ जाओ...वो मौसी...पता नही उन्हे क्या हो गया...वो बस तुम्हारे डॅड का नाम ले कर चिल्ला रही है..प्ल्ज़ तुम अभी आ जाओ...प्ल्ज़....
मैं- ओके...ओके..रिलॅक्स...आइ म कमिंग.....
मैं तुरंत ऑफीस से निकला और काजल के घर की तरफ कार दौड़ा दी.....ड्राइव करते हुए बस मेरे माइंड मे एक ही बात चल रही थी...
""दामिनी तो अच्छी भली थी....अब अचानक से क्या हो गया इसे...कही किसी ने उसे कुछ कर तो नही दिया......क्या रिचा ने....?????""
अकरम के घर..........
सादिया जब बाथरूम से निकली तो उसके बदन पर सिर्फ़ एक नाइटी थी...जो उसकी जाघो तक आ रही थी...और उसके गले से उसके बूब्स भी काफ़ी दिख रहे थे....
सादिया टवल से चेहरा सॉफ करते हुए रूम मे आई और जैसे ही उसने अपने सिर की झटक कर बाल पीछे किए तो उसकी नज़र सामने खड़े अकरम पर पड़ी....जो अपने हाथो मे कॉफी का मग लिए सादिया को ही घूर रहा था....
फिर दोनो आमने-सामने बैठ कर कॉफी पीने लगे....सादिया अपनी एक जाघ दूसरी जाघ पर चड़ा कर बैठी हुई थी...जिससे अकरम को सादिया की चिकनी जाघे कुछ ज़्यादा ही दिख रही थी...
अकरम बार-बार उस नज़ारे को अवाय्ड करने की कोसिस करता पर क्या करे...जवान लड़के के सामने ऐसा सीन हो तो वो कब तक खुद को रोक पायगा...
कॉफी ख़त्म होने तक अकरम की बॉडी सादिया की जाघे देखते हुए गरम होने लगी थी...उसकी नज़र अब चाह कर भी जाघो से हट नही रही थी...
सादिया ने भी ये बात नोटीस की...पर वो भी चुप रही...सिर्फ़ अपने पैरों को सीधा कर के बैठ गई....
सादिया के सीधे होते ही अकरम सकपका गया और जल्दी से अपनी कॉफी ख़त्म कर के बैठ गया.....
थोड़ी देर तक दोनो की बीच खामोशी छाई रही...शायद दोनो ही कस्मकस मे थे....फिर सादिया ने उस खामोशी को तोड़ा....
सादिया- हाँ...अब बताओ...तुम्हे ये पर्ची किसने दी...
अकरम- हुह...बताउन्गा आंटी....पर पहले मेरे सवाल का जवाब दो...
सादिया- कौन सा सवाल....
अकरम- वही सवाल....गुल के बारे मे...आख़िर गुल की असलियत सबसे क्यो छिपाई...और बाकी सब...सब सुरू से बताओ....
सादिया- बाकी सब....मतलब....
अकरम- आप समझ रही हो...कि मैं क्या पूछ रहा हूँ....आपके इस नाजायज़ रिस्ते की सच्चाई....प्ल्ज़ ..अब सच बताइए....
सादिया(हैरानी से)- पर बेटा...मैं तुमसे इस तरह की बातें कैसे...नही बेटा...ये मुझसे नही होगा....
अकरम- आंटी...आप भी..मैं अब बच्चा नही रहा..मैं ये बातें कह भी सकता हूँ सुन भी सकता हूँ...
सादिया- पर बेटा...
अकरम उठकर सादिया के बाजू मे बैठ गया और उसके कंधे को पकड़ कर बोला.....
अकरम- आंटी...अब हम इन बातों को शेयर कर सकते है....प्ल्ज़...बताइए ना...
अकरम ने ये बार बोलते वक़्त सादिया के खांडे को दबा दिया और साथ मे दूसरा हाथ उसकी जाघ पर फेर दिया.....
सादिया(मुस्कुराइ और गहरी सास ले कर)- हमम्म्मम...ओके...बताती हूँ..सब बताती हूँ....
सादिया ने अपनी बात कहनी सुरू की...सबसे पहले उसने वो बातें बताई जो मैं पहले से जान चुका था....
जैसे फॅमिली मेंबर्ज़ के बारे मे....सबनम और सादिया की शादी...एट्सेटरा...
फिर सादिया पॉइंट पर आई...जो मैं सुनना चाहता था....
सादिया- असल मे मेरी शादी के पहले मेरा एक बाय्फ्रेंड था...जिसके साथ मेरे जिस्मानी संबंध भी थे....
पर सकील से शादी होने के बाद मैं सिर्फ़ उसी की थी....हमारी लाइफ भी अच्छी चल रही थी...पर मेरी सेक्षुयल डिज़ाइर कुछ ज़्यादा ही थी....मुझे अलग -अलग तरह से सेक्स करने का शौक था...पर सकील सिंपल सेक्स करते थे....तो मैं इस रुटीन सेक्स से बोर होने लगी थी...
पर मैने अपने आप को समझा कर हालातों से समझोता कर लिया...क्योकि मैं किसी हाल मे घरवालो की बदनामी का चान्स नही लेना चाहती थी...इसलिए मैने अपने एक्स-बाय्फ्रेंड से भी कभी कॉन्टेक्ट नही रखा...और लाइफ को सकील के साथ जीने लगी....
पर फिर एक और प्राब्लम आ गई...सकील को दुबई जाना पड़ा....फिर तो मेरी सेक्स लाइफ ना के बराबर रह गई ...वो मंत मे 2 दिन के लिए आता और बाकी के दिन मैं सेक्स के लिए तड़पति हुई निकलती....पर मैने अभी भी कोई ग़लत कदम नही उठाया ...और मन को समझा लिया....
पर फिर एक बार मैं सबनम के घर रहने गई तो वहाँ से मेरी लाइफ मे एक नया मोड़ आ गया...और उस दिन के बाद से मैं सेक्स लाइफ को खुल कर एंजाय करने लगी......
उस रात मैं सबनम के बाजू वाले रूम मे लेटी थी...पर मुझे नीद नही आ रही थी...मेरी चूत मे आग लगी हुई थी...पर मेरे पास उंगली के अलावा कोई चारा नही था...
मैं लेटी हुई अपने मस्ती के दिनो को याद करते हुए चूत सहला रही थी कि मुझे कुछ आवाज़े सुनाई देने लगी...
आवाज़ तेज नही थी फिर भी ये समझ आ रहा था कि ये चुदाई की आवाज़े है...जिन्हे सुनकर मेरे कान खड़े हो गये....और दिल मे एक अजीब सी हलचल होने लगी.....
मैं जल्दी से बेड से उठी और दीवार के नज़दीक पहुँच कर अपना कान दीवार से चिपका लिया....
अब मेरे कानो मे चुदाई की आवाज़े तेज होने लगी थी..और मेरे बदन मे आग भी लगने लगी थी....
कुछ देर तक आवाज़ सुनकर मेरा मन और ज़्यादा मचल गया...अब मेरा मन चुदाई देखने का कर रहा था...पर कैसे...फिर मुझे याद आया की शायद गेट से कोई रास्ता मिल जाए...
मैं जल्दी से रूम से बाहर आई और सबनम के रूम के गेट के कीहोल से देखने लगी...
मेरा दिल अंदर का सीन देख जर धक्क रह गया...
अंदर अनवर , सबनम को उल्टी कुतिया बना कर चोद रहा था....
क्या मस्त सीन था....सीन देखते ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया...
अनवर का तगड़ा लंड सतसट सबनम की चूत मे आ-जा रहा था और सबनम भी मस्ती मे अपनी गान्ड को आगे कर -कर के लंड का मज़ा ले रही थी....
ये सीन देख कर मेरे अरमान फिर से जागने लगे ....अलग तरीके से चुदने के अरमान....
मैं ये नज़ारा देख -देख कर अपनी नाइटी के उपेर से ही चूत रगड़ने लगी....
थोड़ी देर बाद सबनम झड गई और अनवर ने सबनम को उठा कर खड़े-खड़े उसे 69 के पोज़ मे कर लिया और दोनो एक-दूसरे के अंगो को चूसने-चाटने लगे....
मैं फिर से गरम हो गई थी और इतनी जल्दी दुबारा झड़ने वाली थी...
जैसे ही सबनम , अनवर का लंड गले तक ले जाती और फिर उसे बाहर निकलती तो मेरी चूत झटका मार देती....
थोड़ी देर बाद अनवर ने सबनम को अपनी कमर पर टाँगा और जोरदार चुदाई सुरू कर दी...
और सबनम की चीख सुनते ही मैं झड गई...पर मैं लगातार चूत मसल्ति रही...
अंदर का नज़ारा देख कर मैं इतनी बहक गई थी कि मैने अपने बूब्स नाइटी से बाहर निकाल लिए और नीचे से नाइटी को उपेर चढ़ा कर एक उंगली अपनी चूत मे डाल ली और खुल कर अपनी बॉडी को रगड़ने लगी...
अंदर अभी भी जोरदार चुदाई चालू थी...सबनम एक बार फिर से झड गई थी...
और फिर अनवर ने सबनम को कुतिया बनाया और उसकी टांगे उठा कर पीछे से लंड पेलने लगा....
सबनम की टांगे हवा मे थी...वो सिर्फ़ हाथो के सहारे पर थी...और पीछे से अनवर ताबड़तोड़ चुदाई करता रहा...
इस सीन को देखते हुए मैं एक बार फिर से झड गई...पर मैने उंगली चलाना जारी रखा...
अंदर थोड़ी देर बाद सबनम फिर से झड गई...और अनवर भी झड़ने वाला था...
अनवर ने सबनम को सामने घुटनो पर बैठाया और अपने तगड़े लंड से पिचकारियाँ मारना चालू कर दिया....
मैं तो उसका लंड देख कर ही फिदा हो गई थी और उसकी पिचकारी...इतनी तेज...सीधा सबनम के मुँह मे जा रही थी और इतना रस निकला जितना आज तक शकील और मेरे बाय्फ्रेंड का कभी नही निकला था....
उसके लंड से निकलते रस को देखते हुए मैं फिर से झड गई....
अंदर चुदाई ख़त्म हो गई थी और मैं भी उठ कर अपने बेड पर आ गई...
उस दिन मैं इतना झड़ी जितना मैने सोचा भी नही था...
फिर पूरी रात मेरे माइंड मे वही सब सोचती रही....और सुबह होते-होते मेरे मन मे ये ख्याल आ गया कि मैं अपनी तड़प अनवर से मिटवाउन्गी....इस तरह बात घर मे रहेगी...बदनामी भी नही होगी और मेरी तड़प भी मिट जाएगी....
पर मेरा इरादा पूरा ना हो सका....क्योकि अनवर बड़े सरीफ़ थे....उसने मुझे लाइन नही दी....
पर मैं रोज-रोज उसकी चुदाई देख कर अपनी प्यास बुझाती रही...
पर एक दिन अनवर ने मुझे वहाँ देख लिया पता नही कैसे और फिर वो अपने रूम से कोई बहाना कर के बाहर आ गया....मैं नंगी पकड़ी गई...और उपेर से प्यासी....
पता ही नही चला कि मैं कब अनवर के साथ चिपक गई...अनवर ने मुझे रूम मे भेजा और फिर सबनम के सोने के बाद रूम मे आ गया....
और रात भर अनवर ने मुझे जम कर चोदा...
फिर ये सिलसिला चल पड़ा...अनवर रोज सबनम को चोदता और उसे सुला कर मुझे पूरी रात चोदता और मैं भी मज़े से चुदवाती...
एक दिन मुझे पता चल की मैं प्रेगनेंट हूँ...मैने फिर एक प्लान बनाया..जिससे मैं ये बच्चा सकील का बता सकूँ....
मैं संतुष्ट थी और खुश भी...पर तभी हमारी लाइफ मे एक बड़ा हादसा हो गया...
मेरे सोहर और मेरे और अनवर के मोम-डॅड गुजर गये...और अनवर से किए गये वादे की वजह से सबनम ने सरफ़राज़ से शादी कर ली.....
थोड़े दिन बाद मेरे प्रेगनेंट होने की बात सबको पता चल गई...तो सरफ़राज़ ने आगे आ कर मेरे बच्चे को अपना नाम दिया...वही है मेरी बेटी गुल....
पर हम ये बात तुम सब को नही बता सकते थे...ज़िया भी समझदार थी तो हमने एक मौसी की कहानी बना ली...पर गुल के बड़ा होते ही उसे सब बता दिया और उसे समझा भी दिया...
इस तरह गुल समझ गई...पर अब ये बात ज़िया भी जानती है....
और हाँ....अनवर के बाद से मैं और सबनम सरफ़राज़ से ही अपनी प्यास भुजाते रहे...
और तुम सब बच्चो को सरफ़राज़ का नाम दिया......
सादिया(आह भर कर)- तो ये थी पूरी सच्चाई....गुल तुम्हारे डॅड अनवर की ही बेटी है..बस उसकी माँ अलग है...यानी कि मैं...
अकरम उस कहानी को सुनते हुए गरम हो चला था..उसका एक हाथ सादिया की गान्ड पर और दूसरा उसकी नंगी जाघ पर था...
सादिया भी अपने पुराने दिन याद करते हुए बहक गई थी...उसे अकरम की हर्कतो ने और भी गरम कर दिया था...
अब दोनो एक दूसरे की आँखो मे देखने लगे पर अकरम के हाथ बराबर चल रहे थे...और सादिया को पसंद भी आ रहे थे...
सादिया- अकरम...तुम...
अकरम- आंटी...आप..आप कितनी..हॉट...
अकरम ने अपना चेहरा आगे किया तो सादिया ने भी अपनी आँखे बंद कर के अपने होंठो को खोल दिया....
अकरम को इतना इशारा काफ़ी था और उसने आगे बढ़ कर अपने होंठ सादिया के होंठो पर टिका दिए....और देखते ही देखते दोनो एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे....
कामिनी के घर..........
मैं ऑफीस से निकला पर साला मेरी कार पन्चर मिली तो मैने डॅड की कार ली और सीधा कामिनी के घर पहुँचा तो पता चला कि काजल जो कह रही थी वो सच था....दामिनी ज़ोर -ज़ोर से चीखते हुए मेरे डॅड का नाम ले रही थी...
मुझे कुछ समझ नही आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है...क्या दामिनी को सच मे कुछ हुआ है या फिर ये उसका कोई नाटक है...
मैने भी आगे बढ़ कर दामिनी को शांत करने की कोसिस की पर वो नही संभली....
थोड़ी देर बाद वहाँ रॉनी भी आ गया...उसे मैने ही कॉल किया था....
रॉनी- क्या हुआ सर...
मैं- रॉनी...दामिनी का चेकप करो...जल्दी...
फिर मेरे कहने पर सब लोग रूम से निकल गये और मैने गेट लॉक कर दिया और जैसे ही पलटा तो दामिनी को देख कर खुश हो गया...पर साथ मे गुस्सा भी बहुत आया....इतने टाइम मे रॉनी ने सिग्नल जाम कर दिए थे....
मैं(बेड के पास आ कर)- ये सब क्या था...
दामिनी- तू बैठ तो...सब बताती हूँ...
मैने गुस्सा दिखाते हुए दामिनी के बाल पकड़े और उसके गाल पर एक चपत लगा दी....
मैं- क्या है ये...ये नाटक किस लिए...
दामिनी- हाए...इसी बहाने हाथ तो लगाया तूने...
मैं- तो तूने हाथ लगवाने को यहा बुलाया था....
दामिनी- नही...कुछ बताने के लिए..कुछ खास...कुछ ऐसा जिसके लिए मैं वेट नही कर सकती थी...इसलिए ये सब नाटक किया....
मैने दामिनी की बात सुन कर उसके बाद छोड़े और बेड पर उसके सामने बैठ गया....
मैं- ऐसी क्या खास बात है...ज़रा मैं भी तो सुनू....
दामिनी- देखो अंकित...ये मज़ाक नही...मेरी बात ध्यान से सुनो...
मैं- हाँ...बोलो तो...मैं सुन रहा हूँ....
दामिनी- पूरी बात तो नही पता...पर इतना जानती हूँ कि कुछ बड़ा होने वाला है..कुछ ख़तरनाक....
मैं(सीरीयस हो कर)- बड़ा...पर क्या...ये तो बोलो....
दामिनी- मुझे पूरी बात नही पता पर मैने जितना सुना...उसे सुन कर यही लगा की कुछ बड़ा होने वाला है....
मैं- ओके..तुमने क्या सुना...और किससे सुना...
दामिनी- वो रिचा आई थी...और उसका फ़ोन बजा तो वो बाहर जा कर बात करने लगी...पर मैं बाथरूम मे चली गई और वहाँ से उसकी बात सुनाई दी....
मैं- ह्म्म्मँ...तो क्या सुना.....
दामिनी- बस इतना ही कि...""इस बार बचना नही चाहिए....बस उसे ठिकाने लगा दो फिर सब ठीक हो जायगा.....""
मैं(मन मे)- तो रिचा नही सुधरेगी...साली इसे तो अपनी बेटी की भी परवाह नही है...कमीनी कही की....इसे तो मैं देखता हूँ....
दामिनी- तो तुम सम्भल कर रहना ...ओके....
मैं- ठीक है...और तुम भी बस कुछ दिन और झेल लो...फिर सब ठीक कर दूँगा...
फिर मैं थोड़ी देर तक वहाँ रुका और घर निकल आया...
रास्ते मे मुझे जूही दिख गई...वो किसी फ्रेंड के साथ खड़ी हुई थी...
मैने पूछा तो पता चला कि उसे ट्यूशन जाना था...पर गाड़ी खराब हो गई...
तो मैने जबर्जस्ति कर के उन दोनो को अपनी कार दे दी और मैं टॅक्सी ले कर घर आ गया...
घर आ कर मैने सविता को कॉफी लाने का बोला और बैठा ही था कि एक कॉल आ गया ....
मैं- हेलो...
सामने- अंकित सर....आकाश सर का आक्सिडेंट हो गया...आप जल्दी आइए....
डॅड के आक्सिडेंट की खबर सुनते ही मेरे हाथ से फ़ोन गिर गया और पूरा जिस्म थर्रा गया....
पर मैने अपने आप को संभाला और बाहर की तरफ दौड़ लगा दी...........
मैं डॅड के आक्सिडेंट की खबर सुन कर मैं पागलो की तरह घर से भाग निकला....
घर की बौंड्री मे 3 कार्स रखी थी पर मुझे ये होश ही नही था...मैं घर से निकल कर सीधा ऑफीस की तरफ भागा.....
मैं फ़ोन करने वाले से ये भी नही पूछ पाया कि आक्सिडेंट कब और कहाँ हुआ....बस मैं तो भागता रहा...
भागते हुए मैं सहर के ट्रफ़िक से भी टकराया पर फिर सम्भल कर भागता रहा....
मेरी दौड़ तब जा कर ख़त्म हुई ...जब एक कार मेरे ठीक सामने आ कर रुक गई और मैं उससे टकरा कर गिर गया....
मैं तुरंत उठ कर संभला और उठने की कोसिस की पर मेरे पैर मे चोट आ गई थी...फिर भी मैं उठा...और भागने की सोच कर सिर उठाया ही था कि मुझे एक झटका लगा.....
ये झटका मेरे लिए खुशी ले कर आया था....मैने सामने देखा तो सामने मेरे डॅड और सुजाता खड़े हुए थे....
दोनो मुझे अजीब नज़रों से देख रहे थे...और कुछ बोल भी रहे थे...पर मेरे कानो तक उनकी कोई आवाज़ नही पहुँच रही थी....
मेरे चारो तरफ भीड़ जमा हो चुकी थी...सब लोग मुझे ही घूर रहे थे...
पर इस वक़्त मेरी आँखे सिर्फ़ मेरे डॅड को देख रही थी...उन्हे देख कर दिल मे इतनी खुशी जागी कि मेरी आँखे नम हो गई....
देखते ही देखते मेरे आँसू आँखो से निकल कर मेरे गाल पर बहने लगे और मैं झपट कर अपने डॅड के गले लग गया....
ये सब देख कर मेरे डॅड असमंजस मे थे...उन्हे कुछ भी समझ नही आ रहा था...वो बस मुझे गले लगाए हुए मेरे सिर पर हाथ घुमा रहे थे....
मैं- डॅड...डॅड...थॅंक गॉड...डॅड..
और मैं ये बोलते -बोलते रो पड़ा ...जिससे डॅड और ज़्यादा परेशान हो गये और मेरे सिर को सहलाते हुए मुझे चुप कराने लगे....
आकाश- अंकित...बेटा ...हुआ क्या...तू रो क्यो रहा है...अंकित....प्ल्ज़...चुप हो जा...
मैं- डॅड...आप...आअप ठीक हो...ओह गॉड...
आकाश- अंकित...क्या हुआ ..कुछ तो बोल..
डॅड ने परेशान हो कर मुझे झकझोर दिया और अपने से अलग कर के मुझे देखने लगे ...
आकाश- बोल बेटा..आख़िर बात क्या है..
मैं- डॅड...वो..फ़ोन...आक्सिडेंट....डॅड....
डॅड ने मेरे कंधे पकड़ कर मुझे ज़ोर से हिला दिया....
आकाश- अंकित ...होश मे आओ....क्या हुआ...बता मुझे.....
डॅड के हिलाने से और उनकी जोरदार आवाज़ से मैं होश मे आया और उन्हे देख कर फिर से उनके गले लग गया....
मैं- थॅंक गॉड डॅड...आप बिल्कुल सही सलामत है....
आकाश- हाँ बेटा...मैं बिल्कुल ठीक हूँ.. पर ये तो बता कि तुझे हुआ क्या....
मैं(डॅड से अलग हो कर)- डॅड...वो मुझे कॉल आया था...कि आपका...आपका आक्सिडेंट हो गया....
आकाश(शॉक्ड)- व्हाट....किसने बोला ...मुझे तो कुछ भी नही हुआ....हाँ...
मैं- वो...वो नही पता डॅड...बस कॉल आया और मैं भाग कर आपके पास आ रहा था ..और आप मिल गये बस...
आकाश- ओके...अपना फ़ोन दिखा...देखु तो कि कॉल किसने किया था....
मैं- हाँ...एक मिनट...अरे...मेरा फ़ोन...
मैं तुरंत जेब टटोलने लगा...पर मेरा फ़ोन जेब मे नही था...ये एक और झटका था...
आकाश- कोई नही...जस्ट रिलॅक्स...हम पता लगा लेगे कि ये घटिया मज़ाक किसने किया ....चल..घर चल..
मैं(याद कर के)- ओह्ह...मेरा फ़ोन घर मे ही रह गया ....चलिए घर चलते है....जल्दी...
मैं तुरंत डॅड के साथ घर निकल आया...
जब घर आया तो फ़ोन सोफे के पास ही पड़ा मिला....मैने तुरंत फ़ोन चेक किया...उस पर 2 मिसकाल थे...उसी नंबर से जिस नंबर से मुझे आक्सिडेंट वाला कॉल आया था....
मैं(गुस्से मे)- अभी देखता हूँ इसको...
और मैं कॉल लगाने ही वाला था कि उसी नंबर से कॉल आ गया....
सामने- सर...मैं आपके ऑफीस का एंप्लायी हूँ....आपको आक्सिडेंट के बारे मे बोला था...आप...
मैं(बीच मे, ज़ोर से)- चुप साले...कैसा आक्सिडेंट...तेरी हिम्मत कैसे हुई ये बोलने की...
सामने- सर...ये आप...छोड़िए.. अभी आप *** हॉस्पिटल आ जाइए....घायलो को वही ले गये है...
मैं- चुप कर ..चुप कर...कितना झूट बोलेगा...तू है कौन साले...नाम बता ..मैं तुझे छोड़ूँगा नही ..
सामने- सर...मैने क्या किया...मैने तो बस आपको आक्सिडेंट की खबर दी ...
मैं- आअहह ...फिर से...साले..एक और बार आक्सिडेंट की बात की तो अभी आ कर जान ले लूँगा....
सामने- क्या...पता नही आपको क्या हुआ...आप प्ल्ज़ जल्दी से *** हॉस्पिटल आ जाइए.....
मैं आगे कुछ बोलता उसके पहले ही कॉल कट हो गया...शायद वो मेरी गालियाँ नही सुनना चाहता था.....
कॉल कट होते ही मेरा पारा चढ़ गया और मैं गुस्से से बाहर निकल गया...डॅड ने मुझे आवाज़ दी पर मैने उन्हे इग्नोर किया और कार ले कर उस हॉस्पिटल की तरफ चल पड़ा.....
अकरम और सादिया एक दूसरे के होंठो को चूसने मे बिज़ी थे....ऐसा लग रहा था कि आज ये होंठो को चवा जाएँगे....
दोनो के अरमान उफान पर थे...जहा अकरम इस खेल का नया सौकीन था...वही सादिया पूरे एक्षपीरियँस के साथ अकरम को खुश कर रही थी...
असल मे अकरम को चुदाई का नया शौक लगा था...इसलिए वो कुछ ज़्यादा ही गरम था...दूसरी तरफ सादिया चुदाई की आदि हो चुकी थी...उसे नये-नये लंड खाने का चस्का था...इसलिए वो भी गरम हो कर अकरम को हासिल करना चाहती थी...
कुछ देर तक जोरदार किस करने के बाद दोनो अलग हुए और एक दूसरे को देखते हुए तेज साँसे लेने लगे.....पर अभी भी दोनो एक-दूसरे की बाहों मे थे और एक-दूसरे की आँखो मे देख रहे थे....
अचानक से दोनो मुस्कुरा दिए और अकरम ने आगे बढ़ कर अपना मुँह सादिया के गले पर रख दिया और चूमने लगा....
सादिया- आअहह...अकरम...नही...ऊहह...मत करो...
अकरम- उउम्मह...उउउम्मह..क्यो नही आंटी...उउम्मह...यू आर सो हॉट...उउउम्मह...
अकरम- उउम्मह...ग़लत...हाँ...तुम ये ग़लती कर चुकी हो...उउउम्म्म्म...उउंम्म...
अकरम का जोश देख कर सादिया समझ गई कि अब अकरम को रोकना मुस्किल है...असल मे उसकी चूत भी चुदासी हो चुकी थी...इसलिए उसने भी अकरम के रंग मे रंगने का फ़ैसला कर लिया और ज़ोर से सिसकने लगी.....
सादिया की सिसकियों ने अकरम को आगे बढ़ने का हौसला दे दिया...और अकरम सादिया की बड़ी गान्ड को हाथो से मसल्ते हुए अपना मुँह उसके बूब्स पर ले गया...
अकरम ने सादिया के एक बूब को नाइटी के साथ ही मुँह मे भर लिया और तेज़ी से बूब चूस्ते हुए उसकी गान्ड मसल्ने लगा....
सादिया , अकरम की तड़प देख कर और ज़्यादा गरम हो गई और अपने हाथो से अकरम के सिर को अपने बूब्स पर दबाने लगी...
अकरम बारी-बारी बूब्स को चूस्ता रहा और साथ मे गान्ड भी मसलता रहा....
सादिया की नाइटी अकरम के थूक से गीली हो चुकी थी...और अब सादिया की चूत पानी बहा रही थी...और ज़ोर-ज़ोर से सिसक रही थी...
सादिया की सिसकियाँ सुन कर अकरम और ज़्यादा जोश मे आ गया और जल्दी से सादिया की नाइटी को निकाल फेका...
नाइटी निकलते ही सादिया के बड़े-बड़े बूब्स अकरम के सामने झूलने लगे...असल मे सादिया ने नाइटी के अंदर सिर्फ़ पैंटी पहनी हुई थी...ब्रा नही...
अकरम(जीभ पर होंठ फिरा कर)- उउउंम्म...सो नाइस आंटी...
सादिया कुछ बोलती उससे पहले ही सादिया का एक बूब अकरम के मुँह मे था और सादिया ज़ोर से सिसक उठी...
अकरम एक बूब दबाते हुए दूसरे को चूसने लगा और सादिया भी गरम हो कर अकरम की पेंट मे खड़ा लंड सहलाने लगी....
मैं पूरे गुस्से मे कार ले कर उस हॉस्पिटल की तरफ जा रहा था जो फ़ोन करने वाले ने बताया था...
ड्राइव करते हुए मैं बस यही सोच रहा था कि जिसने भी मेरे साथ ये घटिया मज़ाक किया है..मैं उसके हाथ-पैर तोड़ दूँगा ...
पर तभी...हॉस्पिटल के थोड़ी दूर पहले ही मुझे ट्रॅफिक जाम मिल गया...
मैने देखा कि लोग कार से निकल कर एक तरफ जा रहे है. .
मैं(गुस्से मे)- अब क्या हुआ...ये ट्रॅफिक भी साला अभी लगना था...
मैं गुस्से मे कार से निकला और उस तरफ जाने लगा जहा सब लोग जा रहे थे...
आयेज जाकर मैने देखा कि सब लोग एक जगह को घेर कर खड़े हुए है...
पूछने पर पता चला कि कोई आक्सिडेंट हुआ है..काफ़ी भयानक....
मैं- यहाँ भी आक्सिडेंट...ये आज जा दिन ही आक्सिडेंट ने खराब कर दिया..हह....
मैं गुर्राते हुए भीड़ को छोड़ कर आगे बढ़ता गया...मुझे भी आक्सिडेंट देखने की इक्षा जाग गई थी...
मैं सबको हटते हुए आयेज आया तो देखा की सामने एक कार उल्टी पड़ी हुई है...कार की हालत बहुत खराब थी और उसकी खिड़की से देखने पर पता चला कि कार मे बैठे इंसान का खून भी बह गया...
ये नज़ारा देखते ही मैं ज़ोर से चिल्ला पड़ा...
""ज्ज्ज्जुउुऊहहिईीईईईईईईईईईईईईईईईई""
डॅड की कार का हाल देख कर ही मेरे हलक से एक जोरदार चीख निकल गई ...वो चीख जूही के नाम की थी....
मेरी चीख सुन कर मेरे आस-पास खड़े लोग चौंक गये और बाकी के सारे लोग मुझे घूर्ने लगे ....
मैने चीखते ही अपने पैरों को कार की तरफ तेज़ी से बढ़ाया पर 2 पोलीस वालो ने मुझे रोक लिया...उन्होने मुझे आगे नही जाने दिया...बोले कि इन्वेस्टिगेशन जारी है...
मैने कुछ हाथ-पैर मारे कि मैं आगे जा सकूँ पर पोलीस वालों ने मुझे पीछे धकेल दिया....और मेरा दर्द गुस्सा बन कर भड़क उठा....
मैं(गुस्से से)- तुम्हारी ये हिम्मत...सालो मैं तुम्हे छोड़ूँगा नही ...दोनो की वॉट लगा दूँगा....
पोलीस- क्या ...साले...बहुत बड़ी तोप बनता है...अभी दिखाता हूँ....
मेरी बात सुनकर एक पोलीस वाला गुस्से से अपना डंडा घुमाता हुआ आगे बढ़ा......
पर इससे पहले कि वो अपना डंडा मुझ पर उठाता....उस भीड़ से निकल कर एक आदमी आगे आ गया और पोलीस वाले से मिन्नते करने लगा...
आदमी- सर..सिर..प्ल्ज़...इन्हे कुछ मत कीजिए...ये...ये बहुत दुखी है..तो ग़लती हो गई...प्ल्ज़ सर...
पोलीस- क्या...तू है कौन...और ये लड़का इतना क्यो उड़ रहा है...हाँ...
आदमी- सर..ये अंकित मलजोत्रा है...मेरे बॉस के बेटे...और ये सामने पड़ी कार इनके डॅड यानी मेरे बॉस आकाश की है...इसलिए ये गुस्से मे आ गये...प्ल्ज़ समझिए ना...प्ल्ज़ सर...
पोलीस वाले को उसकी बात समझ आ गई और वो नॉर्मल हो कर बोला कि इसे दूर रखो और हॉस्पिटल ले जाओ...ओके..
आदमी पोलीस वाले को समझा कर मेरे पास आया और बोला...
आदमी- सर...आप ठीक है ना...थॅंक गॉड आप आ गये...मैं आप का ही वेट कर रहा था....
मैं- क्या...तुम हो कौन...और मेरा वेट...किसलिए...
आदमी- सर...मैं आपके ऑफीस मे काम करता हूँ..मैने ही आपको आकाश सर के आक्सिडेंट की न्यूज़ दी थी...
इतना सुन कर ही मैने गुस्से से उस आदमी की कॉलर पकड़ ली ...
मैं- तो तू है साला...कमीने...तूने झूट क्यो बोला...मेरे डॅड के बारे मे...हाअ...
आदमी(डरते हुए)- ज्ज...झूट...नही सर..मैने तो सच कहा था...सर का आक्सिडेंट हो गया...
मैं(गुस्से मे)- चुप साले.. मेरे डॅड घर पर है..बिल्कुल ठीक...और तू...साले झूट क्यो बोला...हाँ.
आदमी- नही सर...मेरी बात तो सुनिए...ये देखिए...ये कार...आकाश सर की ही है...
मैं- जानता हूँ...तो क्या...हाँ...
आदमी- सर..जब मैं ऑफीस से निकला तो यहाँ इस कार को देखा...मैने सोचा कि आकाश सर की कार है तो शायद उनका ही आक्सिडेंट हो गया है..बस मैने आपको कॉल कर दिया..बस सर..
मैं- कोई नही...ये बता कि आक्सिडेंट के बाद क्या हुआ....कार मे बैठे लोगो का क्या हुआ ...जल्दी बोल....
आदमी- म्म..मैने बताया तो था...आप **** हॉस्पिटल पहुँच जाइए......वही ले गये है....
इतना सुनते ही मैने उसे झटके से छोड़ा और तेज़ी से हॉस्पिटल की तरफ भागने लगा...
मेरी कार ट्रॅफिक मे फसि थी...इसलिए मैं दौड़ कर हॉस्पिटल निकल गया....हिस्पिटल ज़्यादा दूर नही था...मैं 10-15 मिनट दौड़ कर ही हॉस्पिटल पहुँच गया और पूछते हुए एमर्जेन्सी वॉर्ड मे आ गया...
यहाँ फिर से पोलीस ने मुझे गेट पर रोक लिया...बोले कि अंदर इनस्पेक्टर ब्यान ले रहा है...
मैने अपने गुस्से को कंट्रोल किया और परेशानी मे गेट के बाहर ही घूमते हुए इनस्पेक्टर के निकलने का वेट करने लगा....
थोड़ी देर बाद गेट खुला और गेट खुलते ही सामने खड़े इनस्पेक्टर को देख कर मेरा गुस्सा फिर से बढ़ गया....सामने रफ़्तार सिंग था.....
रफ़्तार- ओह...तो तू यहाँ भी मिल गया...हाँ...अजीब बात है....जहाँ कही कुछ झमेला होता है वहाँ तू ज़रूर आ जाता है...
मैं(घूरते हुए)- सही कहा...मैं भी यही सोच रहा हूँ...कि जहाँ तू होता है..वही मेरे अपनो के साथ झमेला क्यो होता है....
रफ़्तार(गुस्से से)- क्या...क्या बका तूने...तेरे अपने....ह्म्म...तो ये चिकनी तेरी है क्या...
मैने रफ़्तार की बात सुनते ही उसका गला पकड़ लिया और खीच कर उसे दूसरी तताफ की दीवाल से चिपका दिया.....
मेरी पकड़ इतनी मजबूत थी कि रफ़्तार अपने दोनो हाथो से भी मेरे हाथ से अपनी गर्दन नही छुड़ा पाया....
रफ़्तार की हालत देख कर उसके थुल्लो ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और रफ़्तार को छुड़ाने लगे...पर वो भी कामयाब नही हो पाए....
रफ़्तार की बात सुनते ही एक थुल्ले ने मेरी पीठ पर घूसा मारा पर मैं मजबूती से रफ़्तार की गर्दन पकड़े रहा....फिर दूसरे थुल्ले ने अपना डंडा उठाया और घुमाया ही था कि डंडा पीछे से किसी ने पकड़ लिया और एक जोरदार आवाज़ गूँजी....ये आलोक की आवाज़ थी....
आलोक- अंकित...लीव हिम...पोलीस के उपेर हाथ मत डालो...लीव हिम नॉववव....
आलोक की आवाज़ सुन कर मुझे होश आया कि मैं एक पोलीस वाले का गला दबा रहा हूँ...मैने तुरंड रफ़्तार को झटक दिया...
मेरे छोड़ते ही रफ़्तार ज़ोर से साँसे लेने लगा और नॉर्मल होते ही मुझ पर झपटा....
रफ़्तार- हराम्खोर...मैं तेरी...
आलोक(बीच मे)- रफ़्तार...रुक जाओ...
रफ़्तार(गुस्से से दाँत पीस कर)- सर...इसने मुझ पर...
आलोक(बीच मे)- जानता हूँ..पर ये बताओ कि इसने ऐसा किया क्यो....तुमने ऐसा क्या किया था...या कुछ बोला था..हाँ....??
रफ़्तार के मूह ने एक शब्द ना निकला ...बस चुप चाप मुझे घूरता रहा...
आलोक- अंकित..तुम बोलो ..क्या हुआ था...
मैं(रफ़्तार को घूरते हुए)- इसने मेरी जूही की इन्सल्ट की सर...इसलिए मैने....आप ना आते तो इसकी बोलती बंद कर देता...
आलोक- अंकित...माइंड युवर लॅंग्वेज...ये मत भूलो कि तुम एक पोलीस वाले के लिए कुछ बोल रहे हो...ह्म्म..
मैं- जी सर...अगर ये याद नही होता तो अब तक तो...सॉरी सर...
आलोक- इट्स ओके...और रफ़्तार...तुम जा सकते हो...मैं तुमसे बाद मे बात करूगा...गो...
रफ़्तार अपने थुल्लो को साथ ले कर चला गया...और जाते हुए एक बार फिर से मुझे घूर गया...
मैं- सर...मैं जूही से मिल लूँ...
आलोक- ह्म...मिल लो...फिर स्टेशन आ जाना...वहाँ आक्सिडेंट की डीटेल मे बात करेंगे....