फिर मैं रूम मे चला गया और जूही को देख कर खड़ा रह गया....वो बेड पर लेटी हुई थी...एक हाथ मे प्लास्टर...एक पैर मे प्लास्टर, माथे पर पट्टी...हाथ-पैर मे छिल्ने के निशान...कुल मिला कर बहुत बुरी हालत थी उसकी...
उसकी हालत देख कर ही मेरा मन बुझ सा गया....मैं जूही को देख कर यही सोच रहा था कि ये सब मेरी वजह से ही हुआ है....इसका ज़िम्मेदार सिर्फ़ मैं ही हूँ....
तभी जूही ने मेरी हालत देख कर मुझे स्माइल कर दी...और आँखो से रिलॅक्स रहने का इशारा कर दिया.....
मैं भी चुपचाप जूही के बेड के साइड मे बैठ गया और उसका हाथ पकड़ कर उसकी आँखो मे देखने लगा....और थोड़ी देर के लिए हम एक-दूसरे की आँखो मे खो गये....
जूही- अब कुछ बोलोगे भी या...
मैं- हुह...क्या कहूँ....तुम ठीक तो हो ना...ह्म...
जूही- ह्म...अब ठीक हूँ...बिल्कुल ठीक ...
मैं- सॉरी जूही...
जूही- आप क्यो सॉरी बोल रहे...इसमे आपकी क्या ग़लती....
मैं- ग़लती है...मुझे तुमको खुद छोड़ने जाना चाहिए था...सॉरी....
जूही- छोड़िए ना....जो होना था हो गया...सब किस्मत का खेल है....ह्म..
जूही ने अपना दूसरा हाथ मेरे हाथ पर रखा और प्यार से सहलाने लगी...
जूही- अब आप ऐसे मायूस ना हो...स्माइल प्लीज़...आइ एम फाइन...प्ल्ज़ स्माइल...
जूही मुस्कुराते हुए मुझे स्माइल करने को बोल रही थी...उसकी इस अदा पर मैं सच मे मुस्कुरा उठा और झुक कर उसके माथे पर किस कर दिया...
मैं- तुम सच मे बहुत स्वीट हो और स्ट्रॉंग भी...सच मे....अब तुम रेस्ट करो...मैं अकरम को कॉल कर दूं...तुम्हारे घरवालो को तो नही बोल सकता..वो परेशान होंगे...पर अकरम को बता देता हूँ ...ओके..
जूही- सुनो...
मैं- हा...
जूही- ये आक्सिडेंट नही था...
मैं(हैरानी से)- क्या...मतलब...
जूही- मतलब ये कि ये आक्सिडेंट नही था...एक हमला था...
मैं- हमला...क्या बोल रही हो...
जूही- ह्म्म...ये सोचा-समझा हमला था...सच मे...
मैं- पर..पर तुम ये इतने कॉन्फिडेंट से कैसे कह सकती हो...
जूही- बताती हूँ...आप खुद ही डिसाइड करना...
आपसे कार ले कर मैं और मेरी सहेली बाते करते हुए आराम से जा ही रहे थे कि चोराहे के बीचो -बीच कार के सामने एक आदमी आ गया...जो साइकल से था....और कार के सामने ही फिसल कर गिर पड़ा...
मैने ब्रेक मारी और उसके उठने का वेट करने लगी...
तभी मुझे अहसास हुआ कि एक ट्रक साइड से हमारी तरफ बढ़ रहा है...मैने उसे देखा...वो फुल स्पीड मे था...
मैं घबरा गई ....ज़ोर से चिल्लाने लगी...और इससे पहले कि मैं कुछ सोच पाती...एक जोरदार टक्कर से मैं हिल गई...
मैने अपने आप को हवा मे घूमता हुआ महसूस किया...क्योकि आँखे तो मेरी बंद ही हो चुकी थी....
जब मेरी आँखे खुली तो मैं उल्टी पड़ी थी...ध्यान दिया तो पाया कि कार ही उल्टी पड़ी है...मेरी फ्रेंड को देखा तो वो बेहोश पड़ी थी...और साइड मे देखा तो वो ट्रक खड़ा था...और फिर थोड़ी देर बाद मेरी आँखे बंद हो गई...
मैं- ह्म्म...पर ये भी तो हो सकता है कि ट्रक का ब्रेक फैल हो गया हो...हाँ...
जूही- नही...मैने आँखे बंद होने से पहले उस ट्रक को कार के साइड से जाते हुए देखा...और उसने बीच मे ब्रेक भी मारा था...
मैं(मन मे)- तो ये बात है...दामिनी ने सही कहा था...कुछ बड़ा होने वाला है....हो ना हो..ये हमला मेरे लिए था...या फिर...कही डॅड के लिए तो नही...
जूही- आप कहाँ खो गये...
मैं- क्क़..कुछ नही...तुम ये बताओ कि तुमने पोलीस से क्या कहा...
जूही- मैने उन्हे कुछ नही बताया...बोल दिया कि अचानक सब हो गया...कुछ याद नही...
मैं- ह्म...(मन मे)- ये सही किया...अब पोलीस को इससे दूर ही रखते है...पर मैं रिचा को नही छोड़ूँगा...आज उसको एक तोहफा भेजने का टाइम आ गया....ह्म्म..ऐसा तोहफा...जो उसकी रूह हिला देगा...
जूही- आप फिर से...कहाँ खो जाते हो ..
मैं- कही नही..मैं यही हूँ...तुम्हारे पास...
मैने एक हाथ से जूही का सिर सहलाना सुरू किया और जूही ने आँखे बंद कर ली...
जूही- मेरे पास ही रहना...हमेशा......
थोड़ी देर तक जूही आँखे बंद किए लेटी रही और मैं उसका सिर सहलाता रहा...तभी नर्स आई और मुझे डॉक्टर से मिलने का बोला..
मैं जूही को रेस्ट करता छोड़ कर डॉक्टर के पास चला गया....
डॉक्टर से जूही का हाल जानने के बाद मैने अपने आदमी को कॉल किया और काम समझा दिया......
रिचा ने जैसे ही बॉक्स खोला तो डर के मारे उसकी आँखे फट गई और खून से लत्फथ कपड़े देख कर वो दहाड़ मार कर रोने लगी...
ये वही कपड़े थे जो रिया ने पहने हुए थे...जब उसका किडनॅप हुआ था...
रिचा की आँखो के सामने एक दर्दनाक मंज़र था....रिया के खून से सने कपड़े...और कपड़ो के नीचे दिखता हुआ इंसान के माँस का लोथला...
रिचा इस कल्पना मात्र से काँप जाती थी कि उसकी बेटी का कुछ बुरा हुआ...और आज अपनी बेटी की ऐसी हालत देख कर तो उसका कलेजा मूह मे आ गया...
रिचा की सोचने समझने की सकती ख़त्म हो चुकी थी...वो बस अपनी बेटी को याद कर -कर के दहाड़े मार रही थी...
रिचा- आआहन्न्न...मेरी बच्ची...ये तूने क्या किया भवाँ....आआहह.न...मुझे भी उठा ले...आआहंणन्न्....
रिचा रोती रही पर उसकी इतनी हिम्मत नही हुई कि वो बॉक्स को दुबारा देखे...और उसमे रखे कपड़ो को उठा कर चेक करे....
रिचा ने तो बस खून मे सने कपड़े देख कर ही अपनी बेटी को मरा मान लिया और उसके गम मे अपने आप को और भगवान को कोस्ति हुई रोती रही...और जब दर्द की इंतहा हो गई तो वो बॉक्स के पास ही बेहोश हो गई....
""हहहे ....क्या हुआ रिचा...आज बहुत दुखी हो...हाँ....आज तुम्हे रोना भी आ रहा है...अच्छा है....
आज तुझे पता चला होगा कि आपको को तकलीफ़ होती है तो दिल पर क्या गुजरती है...है ना....
आज तूने जाना होगा...कि बुरे करमो का फल हमेशा बुरा ही होता है ...है ना...
आज तू सोच रही होगी कि अगर तू ग़लत ना करती तो शायद तेरे बेटी को खरॉच भी आती...है ना...
पर अब ये सोच कर क्या फ़ायदा....वक़्त अपना काम कर चुका है...तेरी बेटी जा चुकी है....और तू...तू कुछ नही कर सकती सिबाए उसके गम मे आँसू बहाने के...है ना....
देख रिचा...आज अपनी आँखो से अपनी करनी का नतीजा देख ले...
ग़लती की तूने...भुगता तेरी बेटी ने...वो भी बिना किसी कसूर के...
तू...तू हमेशा से ग़लती करती आई...अरे ग़लती क्या...तू गुनाह करती आई है...पर तुझे कुछ नही हुआ...और सारे गुनाहो की सज़ा तेरी मासूम बच्ची को मिल गई...
बचपन से ही तूने ग़लत काम किए...और अपने गुनाहो पर खुश भी होती रही ...हाँ...
याद कर रिचा...याद कर...तूने क्या-क्या गुनाह किए...कितनो के विश्वास को छला...कितनो को चोट पहुँचाई...कितनो की मौत की वजह बनी ...कितने परिवरो को तोड़ा....और कितनो को मारा...
याद कर साली...याद कर....सबसे पहले तूने अपने बाप को धोखा दिया....अपनी माँ की अयाशी को उससे छिपा कर...
फिर तू खुद ही अपनी भूख मिटाने के लिए मर्द के नीचे लेट गई...और लंड से भूख मिटाने लगी...
तेरा मन तब भी नही भरा...तुझे दौलत की भूख भी लग गई...
तूने दौलत पाना चाही...पर तुझे नही मिली....तेरे मन की नही हुई तो तूने लंड का सहारा लिया...जिससे दौलत भी मिल सके....
और सीने मे पाल ली एक नफ़रत....वो नफ़रत...जिसकी वजह कोई था ही नही...ये तेरी पैदा की गई नफ़रत थी...जिसमे तू जल रही थी...
तूने उस नफ़रत की आग मे 2 परिवारों को जला डाला....एक का तो लगभग नाम-ओ-निशान ही मिटा दिया...
तेरे किए गये एक करम ने कितनो की जान ली...ये याद है तुझे...याद है ना...
पर तू तब भी नही रुकी ...अपनी चाहत के चक्कर मे तूने कितनो को अपने उपेर चढ़ाया....बुड्ढे , जवान और बच्चे...सबको...छी...
और इसी के दम पर तू दौलतमंद हो गई....पर उससे क्या....तू तब भी नही मानी...
तूने बेचारे अंकित के खिलाफ भी कदम उठा लिया..और अब तू 2 तरफ से उसकी जान के पीछे पड़ गई...और यहाँ भी तू धोखा ही दे रही है...
जिन 2 के साथ तू मिली हुई है....उनको तो तेरी नफ़रत का अंदाज़ा भी नही....और तू दोनो के सहारे अपनी नफ़रत की आग बुझाने चली है...जो आग तूने खुद लगाई है...
ये सब तो कुछ नही...तूने इससे भी बढ़ कर काम कर दिया...वो काम जिसके बारे मे बड़े-बड़े सूरमा भी सोच कर ही थर्रा जाते है...पर तूने तो चुटकियों मे कर दिया...है ना....
मर्डर....हाँ..मर्डर...तूने तो मर्डर भी कर डाला...वो भी 1 नही...2-2....
हाँ रिचा...तूने 2 जाने तो अपने हाथो से ली है...और कितनी ही जाने तेरी वजह से गई सी..याद कर....याद कर रिचा...
याद आया ना....तो अब समझी...कि तेरे गुनाहो की ही सज़ा तेरी बेटी को अपनी जान देकर भुगतनी पड़ी....समझी....
अब तू खाती रह ये दौलत...और मिटाती रह अपनी भूख.....पर याद रखना...तू ही तेरी बेटी की चिता का आधार है...हहहे.....
अपनी अंतर-आत्मा की बात सुन कर रिचा होश मे आई और हड़बड़ा कर उठ गई और चीखने लगी....और अचानक उसकी चीख उसके गले मे चुप हो गई...जब उसे अहसास हुआ कि कोई उसके सामने खड़ा हुआ है......
रिचा की चीख उसके गले मे घुट कर रह गई और उसने सामने खड़े सक्श को देखने के लिए गर्दन उपेर ही की थी....कि एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके गाल पर पड़ा और चटाक़ की आवाज़ रूम मे गूँज उठी...
रिचा थप्पड़ की मार से संभाल पाती उसके पहले ही एक हाथ ने उसके बालों को पकड़ा और उसे उपेर उठाते हुए खड़ा कर दिया....
रिचा- आ...अंकित...ये सब....
""चाआत्त्ताआअक्कककककककक....""
रिचा के कुछ बोलने से पहले ही मैने उसे एक और जोरदार थप्पड़ खीच दिया.....और उसके बालों को मजबूती से पकड़े हुए उसके सिर को हिला दिया....
मैं- क्यो...क्यो....(एक थप्पड़ मार कर) अब बोल कि क्यो...हाँ...बोल....(और फिर एक थप्पड़ खीच दिया....)
रिचा बिलखती हुई और दर्द से कराहती हुई रो रही थी और बार -बार अपनी बेटी का नाम पुकार रही थी....और मैं उसको बालों से पकड़े हुए उसके गालों पर थप्पड़ मारे जा रहा था....
जब मेरा गुस्सा थोड़ा कम हुआ तो मैने रिचा को ज़मीन पर पटक दिया और एक चेयर डाल कर उसके पास बैठ गया...
मैं- अब भी पूछेगी कि क्यो....हाँ....पूछ...पूछ ना....(चटाक़...)
मैं- हाँ...थी वो मासूम...पर उसकी ग़लती ये थी कि वो तेरी गंदी कोख से पैदा हुई थी...बस....उसे इसी ग़लती की सज़ा मिली....समझी....समझी कि नही...
रिचा- प्प...पर...उसे क्यो....मेरी बचहिईीई....
मैं- अब कैसी बच्ची...कौन सी बच्ची....अब वो एक सरीर है बस...उसकी जान तो गई....मर गई वो...और सुन...ठीक ही मर गई....कहीं उसे तेरा असली चेहरा पता चल जाता तो वो रोज मारती....हर दिन...हर पल....
रिचा- क्यो....क्यो किया तुमने ऐसा...क्यो...क्यो...
मैं- क्यो...हाँ...क्यो का जवाब चाहिए ना....तो पूछ इस माँस के लोथडे से....शायद ये जवाब दे दे ...पूछ इससे....मैने बताया था इसे...इसकी जान निकलने से पहले....
रूचा- न्न्ंहिि.....मेरी बच्ची...आअहंणन्न्.....
मैं- अब क्यो रोती है...तुझे उसकी ज़रा भी परवाह होती ना...तो तू ऐसी ना होती...समझी....
रिचा कुछ नही बोली...बस सुबक्ती रही....मैने भी उसे रोता छोड़ा और वहाँ से निकल गया.....
मैं(जाते हुए)- अब रोती रह...और बता अपनी बेटी को कि उसे किसके करमो की कीमत चुकानी पड़ी...फिर मैं बताउन्गा की क्यो....साली..बड़ा काम करना था ना.. ..कुछ बड़ा....ले ..हो गया बड़ा...
अकरम और सादिया अचानक आई आवाज़ सुन कर चौंक गये...पर इससे पहले कि दोनो सम्भल पाते....ज़िया रूम मे आ चुकी थी....
ज़िया के सामने अकरम और सादिया दोनो नंगे थे....सादिया नंगी बेड पर लेटी थी और अकरम उसकी जाघो के बीच मूह लगाए हुए था...और उसका लंड फुल फॉर्म मे तना हुआ था...
ज़िया को देखते ही अकरम ने सादिया की चूत से मूह हटा लिया और सादिया ने भी अपनी जाघो से अपनी चूत को छिपा लिया और हाथो से अपने बड़े बूब्स छिपाने की नाकाम कोशिश करने लगी....
जहाँ सादिया और अकरम ज़िया को अचानक देख कर शॉक्ड थे...वही ज़िया भी शॉक्ड थी....पर वजह अलग थी...
ज़िया इसलिए शोक्ड नही थी कि उसका भाई उसकी मौसी की चूत चूस रहा है....वो शोक्ड थी अकरम का तगड़ा लंड देख कर...जो अभी भी हवा मे झूल रहा था....
थोड़ी देर तक रूम मे खामोशी छाइ रही...किसी को समझ ही नही आ रहा था कि क्या बोले....सबसे ज़्यादा खराब हालत तो अकरम की थी...क्योकि उसे ये डर खा रहा था कि उसकी बेहन ने उसे इस हालत मे देख लिया....वो भी उसकी मौसी के साथ......
पर इसी भीच सादिया की आँखो मे एक चमक उठी और उसके होंठो पर मुस्कान तैर गई....
अकरम ने जब सादिया को मुस्कुराता पाया तो वो और ज़्यादा हैरान हो गया...पर बोला कुछ नही...
पर ज़िया को तो जैसे लकवा मार गया था...उसकी नज़रें अपने भाई के लंड पर ही टिकी थी....और उसका मूह खुला हुआ था...
जब अकरम ने ज़िया को चुपचाप देखा तो उसने ज़िया की नज़रों का पीछा किया और जैसे ही उसे अहसास हुआ कि वो बेहन के सामने पूरा नंगा है तो उसने अपने दोनो हाथो से अपना लंड छिपा लिया...
लंड छुपाते ही ज़िया का ध्यान टूटा और वो हक्की बक्की हो गई...और लड़खड़ाते हुए बोली...
ज़िया- त्त..तुझे मोम...मोम बुला रही...
और ज़िया बिजली की स्पीड से रूम से निकल गई.....
ज़िया के जाते ही अकरम ने सादिया को देख कर आँखो से इशारा किया कि अब क्या....मारे गये....
सादिया ने जवाब मे एक मुस्कान बिखेर दी और अकरम को रिलॅक्स रहने का बोला...
आक्सिडेंट की सच्चाई........स्माल फ्लॅशबॅक...........
असल मे कुछ दिन पहले बॉस को ये पता चला कि एक लड़की अंकित को दिल-ओ-जान से प्यार करती है...और उसके मूह से ये भी सुना कि अंकित भी उसे हद से ज़्यादा प्यार करता है.......
बॉस ने ये जानकार अंकित को दर्द देने के लिए एक प्लान बनाया और ये खूसखबरी देने रिचा को कॉल किया....
( कॉल पर )
बॉस- कैसी है मेरी जान....
रिचा- ठीक हूँ...तुम बताओ...आज फ़ोन कैसे किया...वो भी इस वक़्त...
( रिचा इस समय दामिनी के घर पर थी...और बात करने बाहर आ गई...पर जहाँ वो खड़ी थी...वहाँ से उसकी बात बाथरूम मे खड़ा इंसान सुन सकता था....और बाथरूम मे दामिनी आई थी...पर लास्ट मे)
बॉस- क्यो...इस वक़्त क्या गान्ड मरवा रही है...
रिचा- नही...छोड़ो...बताओ क्या हुआ...
बॉस- असल मे मैने तुम्हे खूसखबरी देने को कॉल किया था....और वो ये है कि मैं अंकित को एक झटका देने वाला हूँ...
रिचा- झटका...पर कैसे...क्या झटका...
बॉस- डीटेल बाद मे...बस ये समझ ले कि कुछ बड़ा होगा....बड़ा...ओके...चल बाइ...
रिचा- पर...सुनो तो...ओह्ह...साले ने कॉल ही काट दिया...अब पता कैसे चलेगा कि ये करने क्या वाला है....
रिचा ने कुछ सोचा और बॉस2 को कॉल कर के सब बता दिया....और जब वो उस बड़े काम का बता रही थी...तभी उसकी बात दामिनी ने सुन ली और फिर दामिनी ने सब अंकित को बता दिया....
यहाँ बॉस ने अपने आदमी को अंकित पर नज़र रखने बोला और ये भी बोल दिया कि जो भी लड़की अंकित से मिले...उस पर नज़र रखो...और मेरे कहते ही उसे उड़ा देना...
आदमी- पर बॉस...अगर छोकरे को दर्द देना है तो उसके बाप को उड़ा दूं...
बॉस- नही...उसके बाप को जिंदा रहना है अभी...तुम बस उतना करो जितना बोला गया...समझे...
आदमी- ओके...बट पैसा ज़्यादा लगेगा..मामला खून का है...
बॉस- मिल जायगा...बस काम करो...अब जाओ...
बॉस के आदमी ने अंकित का पीछा सुरू ही किया था कि उन्हे जूही दिखाई दी...जो अंकित से गले मिली और फिर उसकी कार ले कर निकल गई....
आदमी ने जूही और अंकित की बात सुन कर जूही का नाम पता कर लिया...और बॉस को सब बता दिया कि लड़की मिल गई है और अभी कहीं जा रही है....
बॉस ने लड़की ख़त्म करने का हुकुम दे डाला और आदमी ने वैसा ही किया....
उसने एक ट्रक हाइयर किया और जूही को कार समेत उड़ा दिया......
रिचा को रोता हुआ छोड़ कर मैं हॉस्पिटल गया...वहाँ जूही सो रही थी तो मैने उसे डिस्टर्ब ना कर के डॉक्टर से बात करने लगा.....
डॉक्टर ने जूही को सुबह डिसचार्ज करने का बोला....तो मैं उसका ख्याल रखने का बोल कर घर आ गया.....
घर आने पर देखा कि सब लोग मेरा वेट कर रहे है...सब बहुत परेशान थे...पर मैने उस टाइम सबको रेस्ट करने का बोला और बाकी बातें बाद मे बताने का बोल कर अपने रूम मे आ गया...
रूम मे बैठा मैं आज की घटनाओ के बारे मे सोच ही रहा था कि मुझे याद आया कि जूही की खबर तो उसके घरवालो को देना ही भूल गया...
मैं- शिट...अब साला अकरम ज़रूर गुस्सा होगा...लेट कर दिया...
पर इससे पहले कि मैं कॉल करता ...मेरे पास एक लॅंडलाइन से कॉल आ गया....पिक करने पर पता चला कि वो फ़ोन हॉस्पिटल से था...
और फिर डॉक्टर की बात सुन कर मैं सन्न रह गया...अजीब सा डर मेरी आँखो मे छाने लगा और परेशानी से मेरा पसीना निकलने लगा....
डॉक्टर- हेलो..हेलो अंकित...सुन रहे हो ना...
मैं-ह..हाँ...पर जूही गायब कैसे हो सकती है....कहाँ गई वो.....????????????
डॉक्टर की बात सुनते ही मेरे माइंड मे कई तरह के ख्याल आने लगे थे....और सारे ख्याल ही ग़लत होने का आभास करा रहे थे......
कही जूही किडनेप तो नही हो गई....पर उसे किडनॅप कौन कर सकता है...और किसलिए. ...
क्या इस काम मे उसी सक्श का हाथ है जिसने आक्सिडेंट कराया......हो सकता है....
पर क्या रिचा भी इसमे शामिल है...नही ...ये नही हो सकता...मैने अभी-अभी रिचा की जो हालत की है...उसके बाद तो उसका कुछ सोचना भी इंपॉसिबल है...
पर उस रंडी का क्या भरोशा....इतनी आसानी से सुधर गई होगी...ये भी नही कह सकता....
डॉक्टर- हेलो...मिस्टर.अंकित....आर यू देयर....
मैं अपने माइंड मे इतनी जल्दी पता नही क्या -क्या सोच गया.....फिर डॉक्टर के चिल्लाने से मैं सोच से बाहर आया....
डॉक्टर- मिस्टर.अंकित....
मैं- ह..हाँ...डॉक्टर...
डॉक्टर- सॉरी मिस्टर.अंकित....आइ एम वेरी सॉरी सर...हम....
मैं(बीच मे)- चुप्प्प....सॉरी डाल अपनी....मेरी बात सुन...अगर उसे कुछ हो गया ना...तो ना तू रहेगा और ना तेरा हॉस्पिटल....समझा....
डॉक्टर- स...सर...आइ एम्म...सॉरी...
मैं- तेरी सॉरी तो मैं वहाँ आकर देखता हूँ....रुक वही...मैं अभी आया....
मैने फ़ोन कट किया और गुस्से से भरा हुआ तेज़ी से घर से निकला और कार ले कर गेट तक पहुँचा ही था कि गेट के बाहर एक कार आ कर रुक गई ...
मैं- ये साला कौन आ गया....वो भी इस वक़्त....
मैने 2-4 बार हॉर्न मारा पर वो कार टस के मस नही हुई....मेरा गुस्सा और ज़्यादा बढ़ गया और मैने कार से निकलकर कुछ बोलना ही चाहा था कि उससे पहले ही सामने वाले को देख कर मेरी बोलती बंद हो गई....
मेरे सामने और कोई नही बल्कि खुद जूही ही थी ....जो अपनी सहेली के सहारे कार से निकलने की कोसिस कर रही थी....
ये वही सहेली थी जो आक्सिडेंट के वक़्त जूही के साथ थी...उसको ज़्यादा चोट नही आई थी...बस मामूली खरोच थी...क्योकि उसने शीतबेल्ट बाँधी हुई थी....
जूही को सामने देख कर एक पल तो मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा ...पर दूसरे ही पल मेरी आँखो मे गुस्सा आग बनकर दहकने लगा....
इस बीच जूही अपनी फ्रेंड और एक बैसाखी के सहारे कार के बाहर खड़ी हो गई थी....
मैं तेज़ी से जूही की तरफ लपका और उसे थप्पड़ मारने को मेरा हाथ उठा ही था की जूही ने अपनी आँखे बंद कर ली पर चेहरे को बिल्कुल हिलाया भी नही....
थोड़ी देर बाद जूही ने आँखे खोली तो अपने चेहरे के पास मेरा हाथ देख कर उसने स्माइल कर दी....जिससे मेरा गुस्सा और बढ़ गया...
मैं गुस्से से भरा हुआ था...पर कुछ बोल नही पाया...पता नही क्यो....मेरे मूह से सिर्फ़ एक लाइन निकली...
मैं(चिल्ला कर)- कहाँ थी तू....
जूही चुप रही पर उसकी सहेली बोल पड़ी....
सहेली- असल मे ..वो..जूही को...कोई..
जूही(बीच मे)- बस...क्या हम बाकी बातें अंदर करे....अकेले मे....
मैं कुछ समझ नही पा रहा था पर ये तो समझ गया कि कुछ खास बात ही होगी....इसलिए मैने कुछ नही कहा बस जूही के सामने से अलग हो गया....
जूही अपनी सहेली के साथ हॉल मे आ गई और मैं बाहर खड़ा अपना गुस्सा शांत करता रहा....
थोड़ी देर बाद जूही की सहेली बाहर आई और बोली...
सहेली- अंकित जी....जूही की बात सुन कर ही गुस्सा करना ...इट्स आ रिक्वेस्ट ...प्ल्ज़्ज़...गुड नाइट...
मैने भी बिना कोई बहस किए उसे बाइ बोल कर विदा किया और घर मे आ गया...जहा जूही सोफे पर लेटी हुई थी....और मुझे देख कर ही वो उठने लगी...
मैं- लेटी रहो....और बिल्कुल चुप ...समझी....
मेरी आवाज़ मे मेरा गुस्सा सॉफ नज़र आ रहा था...जिससे जूही की आँखो मे डर के भाव आ गये पर वो चुपचाप पड़ी रही....
मैं(थोड़ी देर बाद)- तुम यहाँ क्यो आई....
जूही- मैं...असल मे वो...वहाँ मुझे डर लग रहा था....
मैं- डर...किस बात का डर....और डर लगा था तो कॉल कर सकती थी....(चिल्ला कर)- वहाँ से भागी क्यो....
जूही- स...सॉरी...
मैं(चिल्ला कर)- सॉरी माइ फुट....व्हाट डू यू थिंक...हू आर यू....जो मन मे आया कर दिया....हाँ....
जूही-ज्ज्ज...जूही...
जूही के इस आन्सर ने मेरे गुस्सा को और बढ़ा दिया...
मैं- शट उप.....बड़ी आई जूही ..जूही मतलब क्या....कोई महारानी है क्या...हाअ...
जूही- मेरी बात तो...
तभी सुजाता की आवाज़ आई जो अपने रूम से निकल कर मटकती हुई हमारे पास ही आ रही थी...
सुजाता- क्या हुआ बेटा....और ये लड़की...कौन है ये...??
मैं(गुस्से से)- कोई हो..तुझे क्या....अपनी लिमिट मे रह...और मेरे बीच मे मत आया कर....गेस्ट है ना...तो गेस्ट जैसी रह...जा यहाँ से....
मेरा गुस्सा देखकर सुजाता उल्टे पैर रूम मे भाग गई...साली की गान्ड भागते हुए ज़्यादा ही मटक रही थी....मूड मे होता ना तो अभी गान्ड मार लेता....
जूही- आप प्ल्ज़ शांत हो जाइए...
मैं- तू भी चुप कर....बिल्कुल चुप...
थोड़ी देर तक हॉल मे शांति छाइ रही....इस बीच सविता भी हॉल मे आ गई थी पर चुपचाप खड़ी हुई थी...थोड़ी देर बाद मैं फिर से चिल्लाया....
मैं- आख़िर तू वहाँ से भागी क्यो...बोलेगी अब...
जूही- ववव...वहाँ कोई आया था...
जूही की इस बात ने मेरे माइंड को फिर हिला दिया...मेरा शक़ कुछ-कुछ सही हो रहा था....अभी भी वो जूही के पीछे पड़ा हुआ है...
जूही- मैं वहाँ लेटी थी तो देखा कि....
मैं(बीच मे)- बस ..चुप हो जाओ...अभी तुम्हे रेस्ट की ज़रूरत है...और मुझे कॉफी की...
मैने सविता की एक नज़र देखा तो वो किचन मे चली गई और मैने जूही को अपनी बाहों मे उठाया और उपर अपने रूम मे चला आया....
थोड़ी देर बाद मैं कॉफी पी रहा था और जूही चुपचाप मुझे देखती हुई बेड पर लेटी थी....
मैं(कॉफी ख़त्म कर के)- कौन था वो....
जूही- हुह..वो...पता नही...
मैं- मतलब...तुमने देखा नही क्या....
जूही- देखा....मतलब नही...मतलब...वो सिर ढक कर आया था....
मैं- ह्म्म्मक...तो तुमने कॉल क्यो नही किया....
जूही- मोबाइल ऑफ है...
मैं- तो तेरी सहेली...
जूही(बीच मे)- इत्तेफ़ाक़ से वो खुद मिलने आई थी...
मैं- ओके...बट डॉक्टर को बोल कर आती ना...या नर्स से...
जूही- वहाँ कोई नही था....गार्ड भी नही था....
मैं- व्हाट...पर ऐसा कैसे हो सकता है...हॉस्पिटल है वो....
जूही- पता नही....इसलिए मुझे ज़्यादा डर लगा और मैं...
मैं(बीच मे)- समझ गया....अब तुम रेस्ट करो....कल बात करेंगे....गुड नाइट....
जूही- आप भी सो जाइए....आप मेरी वजह से बहुत परेशान हो गये....
मैं- ह्म्म...तुम रेस्ट करो....मैं थोड़ी देर मे आता हूँ...ओके...और हाँ...यहा डरने की कोई बात नही...
जूही- आप साथ हो तो कोई डर नही...
मैं(जूही को देख कर)- अब सो जाओ...
और फिर मैं रूम से बाहर आ गया और अपने आदमी को कॉल लगाया....और थोड़ी देर बाद रूम मे आ गया......
जूही- अब सो जाइए....
मैं- ह्म्म..मैं सोफे पर....
जूही(बीच मे)- सोफे पर क्यो...मैं आपको खा जाउन्गी क्या....
मैं- नही...पर मैं तुम्हे खा गया तो....
जूही- तो क्या...खा जाना....
मैं(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...चलो फिर....देखते है तुम सुबह तक बाकी रहती हो या नही....
जूही कुछ नही बोली बस मुस्कुरा दी और मैं जूही के साथ लेट गया और थोड़ी देर बाद ही हम दोनो बातें करते हुए सो गये.....
मैने इस बीच जूही से सिर्फ़ नॉर्मल बातें की...ताकि उसे कोई टेन्षन ना हो...पर मेरे दिमाग़ मे चल रही टेन्षन को दूर करने के लिए मुझे इंतज़ार था अपने आदमी के कॉल का .....
सुबह जब मैं जगा तो घर मे काफ़ी आवाज़े आ रही थी....जैसे ही मैने आँखे खोली तो सामने का नज़ारा देख कर मुझे झटका लगा....
मेरे सामने रजनी, मेघा, रक्षा और अनु खड़ी हुई थी...और जूही मेरी बाहो मे सिर छिपाए सो रही थी....
मेरे सामने खड़े हर शक्स की आँखो मे कई सवाल थे...और वो सारे जवाब मुझे ही देने थे...
पर मुझे किसी की कोई फ़िक्र नही थी...सिर्फ़ अनु को छोड़ कर....बस एक वही थी...जिसे जवाब देना ज़रूरी था....
मैने अनु से नज़रे मिलाई तो मैं थोड़ा सहम सा गया...उसकी आँखो मे सवाल के साथ-साथ दर्द भी छिपा हुआ था...जो सिर्फ़ मुझे ही दिखाई दे रहा था....
मैं जूही को हटा कर बेड पर बैठा ही था कि सबने सवालो की बौछार कर दी....पर अनु बिल्कुल खामोश खड़ी रही....बिल्कुल चुप....पर उसकी आँखो मे छुपे आँसुओ ने सब कुछ कह दिया था....
मैं अनु से कुछ बोलता उसके पहले ही अनु वहाँ से निकल गई....और मैं कुछ नही कर पाया....
थोड़ी देर बाद जूही भी जाग गई और सविता की हेल्प से रेडी हो गई...मैं भी रेडी हो गया..और सब हॉल मे आ गये ....
हॉल मे मैने सबको कल की सारी बात बताई...कुछ सही और कुछ ग़लत...और सबके जाने के बाद मैं जूही को ले कर उसके घर निकलने लगा .....
तभी मेरी नज़र सीडीयों के उपेर खड़ी पारूल पर पड़ी ...जो मुझे खा जाने वाली नज़रों से घूर रही थी....
मैं समझ गया कि उसकी हालत ऐसी क्यो है...इसलिए मैने जूही को वही वेट करने छोड़ा और उपेर आ कर पारूल को रूम मे ले गया....
गेट लॉक होते ही पारूल रो पड़ी...उसके आँसू शायद बहुत देर से आँखो मे रुके हुए थे...और अब मुझ पर क़हर बनकर टूट रहे थे...
मैं- उफ्फ...ये क्या....अब रो क्यो रही है....मेरी बात...
पारूल(बीच मे)- मुझे कुछ नही सुनना...सिर्फ़ जवाब चाहिए...समझे आप...
मैं- ओके...समझ गया...तो सवाल पूछेगी या ऐसे ही जवाब चाहिए....
पारूल(आँसू पोछ कर)- मैं कौन हूँ...
मैं- क्या मतलब....
पारूल- मैं आपकी कौन हूँ...
मैं- ये क्या पूछ रही है..तू मेरी बेहन...
पारूल(बीच मे)- मेरा इस परिवार से कुछ लेना-देना है कि नही...
मैं- बिल्कुल बेटा....ये तुम्हारा भी परिवार है...पर ये सब...आख़िर हुआ क्या...किसी ने कुछ...
पारूल(बीच मे)- किसी ने नही...आप ने....सिर्फ़ आपने...
मैं- क्या...मैने क्या...मतलब...हुआ क्या...
पारूल- आपके साथ इतना बड़ा हादसा हो गया और आपने मुझे बताना भी ज़रूरी नही समझा...क्या सिर्फ़ नाम की बेहन हूँ मे....हा...
मैं- हादसा...मेरे साथ...नही तो...मुझे कुछ नही हुआ...
पारूल- झूट मत बोलिए.....मुझे सब पता है....कल आपका आक्सिडेंट हुआ है...
मैं- अरे यार...तुझे किसने बोला कि मेरा आक्सिडेंट हुआ....मैं बिल्कुल ठीक हूँ बेटा...देखो...100% परफेक्ट....फिट न्ड फाइन....देखो...
मैने अपने हाथ-पैर हिलाते हुए पारूल को दिखाए...पर उसका गुस्सा अभी भी पूरे सवाब पर था....
पारूल- झूट...झूट पर झूट....
मैं- नही यार...मैं सच बोल रहा हूँ...
पारूल- अच्छा...तो वो लड़की....उसका हाल ऐसे कैसे हो गया...वो आपके ही साथ थी ना....अंकल की कार मे...है ना...अब बोलो...हाँ...
मैं- ओह्ह...रुक...तुझे पूरी बात बताता हूँ...
फिर मैने पारूल को आक्सिडेंट की सच्चाई बता दी...जिसे सुन कर पारूल का गुस्सा भी गुल हो गया और वो माफी मागने लगी....
मैं- नही...तू सॉरी मत बोला कर...तेरा हक़ है मुझ पर...जब दिल करे गुस्सा कर..ओके....
पारूल(मेरे गले लग कर)- आइ लव यू भैया....
मैं- लव यू 2 बेटा...अब तू रेस्ट कर....मैं जूही को उसके घर छोड़ कर आता हूँ...ह्म...
रिचा अपने घर पर किसी के साथ बैठी हुई पेग लगा रही थी और खिलखिला कर जश्न मना रही थी...जैसे उसकी जीत हो गई हो.....
रिचा(हँसते हुए)- हहहे....कुछ देर के लिए तो मैं सच मे सोचने लगी थी कि अंकित को सच बता दूं...और अपने पापो को धो डालु....पर अच्छा हुआ कि तुम आ गये और मुझे बहकने से रोक लिया....
बॉस2- अरे आ तो मैं पहले ही गया था...पर तभी वो कम्बख़्त अंकित आ गया तो मुझे छिपना पड़ा....और हाँ...1 पल के लिए तो मैं डर ही गया था कि कहीं तू बेटी के प्यार मे मूह ना खोल दे....मेरा तो बरसो का प्लान चोपट हो जाता....
रिचा- ह्म्म...जो हुआ अच्छा हुआ....पर कुछ देर के लिए साले ने गान्ड ही फाड़ दी थी....
बॉस2- पर तूने सोचा भी कैसे की अंकित , रिया को मार सकता है...हाँ...
रिचा- क्या करूँ...माँ हूँ ना...बेटी के प्यार मे अंधी हो गई थी...जो उसके कपड़े देख कर ही बहक गई...और नकली बॉडी को असली समझ लिया...
बॉस2- खैर...जो हुआ सो हुआ...अब आगे से याद रखना....थोड़ा संभाल कर ..हुह..
रिचा- बिल्कुल....अब देखो मैं क्या करती हूँ...साले ने मुझे नकली लाश दिखाई ना...अब इसे मैं असली लाश दिखाउन्गी. ..बस वो रफ़्तार आ जाए...फिर देखना.....
बॉस2- ह्म्म....जो करना है कर...बस संभाल कर...और जब तक रफ़्तार आता है....तब तक तू यहाँ आ ...तेरी गान्ड मारनी है....
रिचा- तो रोका किसने है...अब तो मैं खुश हूँ.....दम से मज़ा लूगी...और पूरा मज़ा दूगी...आ जा...
और फिर रिचा की गान्ड चुदाई का खेल सुरू हो गया.......
अकरम के घर....लास्ट नाइट......
अकरम और सादिया को साथ मे देख कर ज़िया का बुरा हाल हो रहा था....वो सोच नही पा रही थी कि क्या करे....
एक तरफ उसे अपने भाई के लौडे की याद गरम करती तो दूसरी तरफ वो इस अहसास को ग़लत करार देती कि आख़िर वो भाई है...उसके बारे मे ऐसा कैसे सोचु...नही...
वहीं सादिया एक खेली हुई औरत थी...वो ज़िया की आँखे देख कर समझ गई थी कि ज़िया गुस्सा नही है...बल्कि अकरम का लंड देख कर हैरान है....
सादिया तो पहले से ही अकरम के साथ आगे बढ़ चुकी थी...और उसने अपने साथ ज़िया को भी मिलने का फ़ैसला कर लिया....
यही सोच कर सादिया ने ज़िया से बात करने का सोचा और उसके रूम मे आ गई...जहा ज़िया अभी भी सोच मे डूबी हुई थी....
सादिया(अंदर आ कर)- ज़िया....
ज़िया(चौंक कर)- आ..आंटी...आप...आइए ना...
सादिया(गेट लॉक कर के)- क्या सोच रही हो...
ज़िया- आपने गेट क्यो लॉक किया आंटी...
सादिया- क्योकि जो बातें मैं तुमसे कहने वाली हूँ...वो कोई और ना सुन ले...
ज़िया- ऐसी क्या बात है....
सादिया(ज़िया के बाजू मे बैठ कर)- देखो ज़िया...तुम अब बच्ची तो हो नही जो तुम्हे सब समझाना पड़े...हाँ....
ज़िया- मैं कुछ समझी नही....आप कहना क्या चाहती हो....
सादिया- ठीक है...मैं डाइरेक्ट बात करती हूँ....तुझे अकरम का हथियार भा गया है ना....
ज़िया(शॉक्ड)- एयेए...आंटी...ये आप....मतलब...आपने ऐसा सोचा भी...
सादिया(बीच मे)- हाँ या ना....और ये भोलेपन का नाटक छोड़...मैं तेरे बारे मे सब जानती हूँ...समझी...
ज़िया- अकरम मेरा भाई है आंटी....
सादिया- और वसीम तेरा बाप था....
ज़िया- क्क्क...क्या मतलब...
सादिया- देख..मैं जानती हूँ कि तू वसीम से कई बार चुदवा चुकी है...और उसके दोस्त शरद से भी...और हाँ...अंकित का लौडा भी गुप कर गई....है ना....
ज़िया(हड़बड़ा कर)- आ..आंटी...आप ये...
सादिया- देख ज़िया....मैं सब जानती हूँ...मैने अपनी आँखो से देखा है...और ये भी जानती हूँ कि अब तुझे अकरम का लंड भा गया है...ये तेरी आँखो मे सॉफ दिख रहा था...
ज़िया कुछ नही बोली...उसकी चोरी पकड़ी गई...इसलिए वो सिर झुका कर बैठ गई...
सादिया- देख ज़िया....मैं तुझे फोर्स नही करूगी...पर तू चाहे तो मैं अकरम के साथ तेरी बात आगे बढ़ा सकती हूँ...अगर तू चाहे तो....बोल...
ज़िया(धीरे से) - वो मेरा भाई है आंटी...
सादिया- जानती हूँ....इसलिए बोला कि अगर तू चाहे तो....और जब तू बाप का ले सकती है तो भाई का क्यो नही.....
ज़िया- डॅड तो खुद आए थे....पर अकरम....वो ऐसा नही है....
सादिया- ह्म्म...पर वो मुझ पर छोड़ दे ...तू बस हाँ बोल...फिर बाकी मैं देख लुगी....
इस बार ज़िया ने कुछ नही कहा बस सादिया की आँखो मे देख कर मुस्कुरा दी.....
सादिया- ह्म्म्मय...अब मेरे कॉल का वेट कर....
और सादिया वहाँ से निकल गई...और जिया मन.ही मन खुश होने लगी...और दुआ मागने लगी कि अकरम हाँ कर दे....तो मज़ा आ जाए.....
थोड़ी देर बाद अकरम और सादिया सोफे पर बैठे हुए बाते कर रहे थे....वो इस टाइम सादिया के रूम मे थे....
अकरम- आंटी...ये ठीक नही हुआ....
सादिया- अच्छा....पर अब ये सोचने से क्या फ़ायदा....मैं पीछे हटने वाली नही...समझा...
अकरम- ऑफ हो...मैं ज़िया की बात कर रहा हूँ....उसने हमे ऐसे देख लिया....पता नही क्या सोच रही होगी...
सादिया- और क्या सोचेगी....तेरे हथियार के बारे मे ही सोच रही है....
अकरम(शॉक्ड)- क्क़...क्या....
सादिया- चौंक मत....वो तो तुझ पर फिदा हो गई....उसका बस चले तो अभी खा ले वो तेरे हथियार को...
अकरम- ये आप....नही...ऐसा नही हो सकता...
सादिया- अब तू भी सरीफ़ बनना छोड़ दे....तू भी तो उसकी गान्ड देखता रहता है ना....
अकरम(मन मे)- ये सही है कि मैं ज़िया की गान्ड देख कर बहकता था...पर उसके साथ ये सब....कभी नही....
सादिया ने धीरे-धीरे कर के पूरा लंड ज़िया के मूह मे भर दिया और खुद झुक कर ज़िया का टॉप अलग कर के उसके ब्रा मे क़ैद बूब्स चाटने लगी...जिससे जिया की गर्मी बढ़ गई और वो तेज़ी से लंड चूसने लगी....