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Guest
वसीम और रिचा दोनो ही सामने देखे जा रहे थे...और इस तरह परेशान थे जैसे कि उन्होने भूत देख लिया हो....
अब तक उनके सामने जिस चेयर पर मैं बँधा हुआ बैठा था....वो गोली चलते ही खाली हो गई थी....
ये नज़ारा देख कर वसीम और रिचा के दिमाग़ सुन्न पड़ गये ...वो समझ ही नही पा रहे थे कि आख़िर अंकित अचानक से गायब कैसे हो गया.....
तभी रूम मे पसरे सन्नाटे को चीरती हुई हसी के ठहाके की आवाज़ गूज़ उठी.......
मैं- हाहहहाहा...आहजाहहाहा.....
वसीम मेरे ठहाके सुन कर चारो तरफ घूम-घूम कर देखने लगा....और साथ मे रिचा भी....दोनो ही उस रूम मे मुझे तलाश रहे थे...पर उनके हाथ कुछ भी ना लगा.....
वसीम(सहमा हुआ)- सीसी..कहाँ हो तुम...कहाँ हो...सामने आओ....
मैं- वसीम ख़ान...आँखे फाड़ कर इधर-उधर क्या देख रहे हो....मैं वही हूँ जहाँ मुझे होना चाहिए....सामने देख....मैं वही हूँ....जहाँ तूने मुझ पर गोली चलाई...देख....
मेरी आवाज़ सुनकर वसीम और रिचा ने वापिस चेयर की तरफ देखा तो पाया कि मैं अभी भी उसी चेयर पर बँधा बैठा हूँ....
रिचा- याइ...ये तो यही है....पर ये तो...जिंदा है....
मैं- हाँ मेरी जान....मैं जिंदा भी हूँ और बिल्कुल ठीक भी....
रिचा- ये कैसे हो सकता है...तुम्हे तो गोली....और तुम गायब कैसे हो गये थे....
मैं- हाहाहा....अपने दिमाग़ को इतनी टेन्षन मत दे....दिमाग़ की नसें फट जाएगी....
वसीम(गुस्से से)- अबे चुप....सॉफ-सॉफ बोल ये सब...आख़िर चक्कर क्या है...
मैं(दाँत पीसते हुए)- मैने कहा था ना....तू मुझे मार नही सकता....कहा था ना....
वसीम(गुस्से मे भरा हुआ आगे बढ़ा)- और मैने भी कहा था कि आज तू मरेगा....
और वसीम ने मेरे पास आकर जैसे ही मेरे सिर पर गन रखनी चाही तो वह दंग रह गया....
वसीम(चीख कर)- आआआअ.....कमीने.....हाआटतत्त.....
वसीम चीखते हुए फिर से रूम मे चारो तरफ देखने लगा....और ये सब देख कर रिचा की आँखे और ज़्यादा बड़ी हो गई....
रिचा- तो ये...ये अंकित नही था....बल्कि...
वसीम(बीच मे)- हाँ...वो उसकी इमेज थी....पर वो है तो यही कही....हन....यही हमारे पास....ढूढ़ उसे....
रिचा(डरी हुई)- म्म..मैं...मैं कहाँ ढूढ़ुँ...
रिचा की बात सुन कर वसीम गुस्से से रिचा की तरफ लपका और एक हाथ से उसका गला पकड़ा और दूसरे हाथ से उसके माथे पर गन लगा दी.....
वसीम- तू ही बताएगी कि वो साला कहाँ है.....बता....
वसीम को रिचा के पास देख कर रिया की चीख निकल गई और रिचा तो बेचारी गन देख कर पीली ही पड़ने लगी.....
रिचा(डरते हुए)- वसीम...मैं ..मैं नही जानती....सच मे...
वसीम(चिल्ला कर)- हटत्त...मुझे तेरी बकवास नही सुननी....जल्दी से बोल वरना तुझे तो....बोल साली...
रिचा(ज़ोर से)- मैं नही जानती....
वसीम(हँसता हुआ)- तू नही जानती...हां...तो अब उससे पूछता हूँ जो सब जानता है...
और वसीम ने एक झटके मे रिचा को धक्का देकर नीचे गिरा दिया और लपक कर रिया को अपनी गिरफ़्त मे ले लिया..और उस पर गन तान दी...
रिया- आआअहह..मोममम..
रिचा- वसीम...मेरी बेटी को छोड़...
वसीम(चीखते हुए)- चुउउउप्प्प्प....अब ना कोई बेटी...ना कोई माँ...सब मरेगे....बोल साली....तुझे तो पता होगा ना....कहाँ है वो....बोल...हां...
रिचा ने उठकर वसीम के पैर पकड़ लिए और अपनी बेटी को छोड़ने की मिन्नतें करने लगी...जबकि वसीम रिया के बालो को खीचते हुए अपना मुँह उसके कान के पास घुमा रहा था और गन को रिया के सीने पर फिरा रहा था....
वसीम(रिया को सूघ कर)- आहह...कच्ची कली....उउंम...क्यो मरना चाहती है...ये तेरे मरने की उमर नही....उउंम...बता दे...हाँ...बता दे...कहाँ है वो...उउंम...बोल ना...
रिचा(रोते हुए)- वसीम...मेरी बच्ची...मेरी बच्ची को छोड़ दे...वसीम ...छोड़ से उसे प्ल्ज़्ज़....
वसीम-चुप कर...और तू...आअहह...बोल भी दे...वरना जवानी का मज़ा लेने से पहले ही तू...हाहाहा..बोल ना(चिल्ला कर)
मैं- वसीम....छोड़ दो उसे....
वसीम मेरी आवाज़ सुन कर फिर से चारो तरफ देखने लगा.....
वसीम- छोड़ दूं..हाँ...अगर तू चाहता है कि मैं इसे छोड़ू तो पहले तू सामने आ...वरना...
मैं- देख...तेरी दुश्मनी मुझसे है...रिया को बीच मे मत ला...मुझसे बात कर...
वसीम(रिया के बाल खीच कर)- तो फिर आ और बचा ले इसे...दिखा अपनी मर्दानगी....साला...नमर्दो की तरह छिप बैठा है...आ ना...
मैं- हाहाहा....नमर्द वो होते है वसीम ख़ान जो औरत पर ज़ोर चलाते है....समझे...
वसीम- अबे चुप....सीधे से सामने आता है या फिर मैं इसे उपेर भेजू...हाँ...
वसीम ने रिया के बाल खीचे और गन को उसके माथे पर अड़ा दिया...
वसीम- बोल अंकित....आता है या टपका दूं इसे....हाँ...
मैं- वसीम...उसे कुछ किया तो...
वादिम(बीच मे)- भाड़ मे गया तू...अब ये गई...
मैं- सोनम...अभी...
और इससे पहले की वसीम कुछ समझ पाता ...रूम मे फिर से गोली चली और सीधा वसीम के हाथ पर टकराई....
हाथ पर गोली लगते ही वसीम के हाथ से गन छूट गई और दूर जा गिरी....
अब तक उनके सामने जिस चेयर पर मैं बँधा हुआ बैठा था....वो गोली चलते ही खाली हो गई थी....
ये नज़ारा देख कर वसीम और रिचा के दिमाग़ सुन्न पड़ गये ...वो समझ ही नही पा रहे थे कि आख़िर अंकित अचानक से गायब कैसे हो गया.....
तभी रूम मे पसरे सन्नाटे को चीरती हुई हसी के ठहाके की आवाज़ गूज़ उठी.......
मैं- हाहहहाहा...आहजाहहाहा.....
वसीम मेरे ठहाके सुन कर चारो तरफ घूम-घूम कर देखने लगा....और साथ मे रिचा भी....दोनो ही उस रूम मे मुझे तलाश रहे थे...पर उनके हाथ कुछ भी ना लगा.....
वसीम(सहमा हुआ)- सीसी..कहाँ हो तुम...कहाँ हो...सामने आओ....
मैं- वसीम ख़ान...आँखे फाड़ कर इधर-उधर क्या देख रहे हो....मैं वही हूँ जहाँ मुझे होना चाहिए....सामने देख....मैं वही हूँ....जहाँ तूने मुझ पर गोली चलाई...देख....
मेरी आवाज़ सुनकर वसीम और रिचा ने वापिस चेयर की तरफ देखा तो पाया कि मैं अभी भी उसी चेयर पर बँधा बैठा हूँ....
रिचा- याइ...ये तो यही है....पर ये तो...जिंदा है....
मैं- हाँ मेरी जान....मैं जिंदा भी हूँ और बिल्कुल ठीक भी....
रिचा- ये कैसे हो सकता है...तुम्हे तो गोली....और तुम गायब कैसे हो गये थे....
मैं- हाहाहा....अपने दिमाग़ को इतनी टेन्षन मत दे....दिमाग़ की नसें फट जाएगी....
वसीम(गुस्से से)- अबे चुप....सॉफ-सॉफ बोल ये सब...आख़िर चक्कर क्या है...
मैं(दाँत पीसते हुए)- मैने कहा था ना....तू मुझे मार नही सकता....कहा था ना....
वसीम(गुस्से मे भरा हुआ आगे बढ़ा)- और मैने भी कहा था कि आज तू मरेगा....
और वसीम ने मेरे पास आकर जैसे ही मेरे सिर पर गन रखनी चाही तो वह दंग रह गया....
वसीम(चीख कर)- आआआअ.....कमीने.....हाआटतत्त.....
वसीम चीखते हुए फिर से रूम मे चारो तरफ देखने लगा....और ये सब देख कर रिचा की आँखे और ज़्यादा बड़ी हो गई....
रिचा- तो ये...ये अंकित नही था....बल्कि...
वसीम(बीच मे)- हाँ...वो उसकी इमेज थी....पर वो है तो यही कही....हन....यही हमारे पास....ढूढ़ उसे....
रिचा(डरी हुई)- म्म..मैं...मैं कहाँ ढूढ़ुँ...
रिचा की बात सुन कर वसीम गुस्से से रिचा की तरफ लपका और एक हाथ से उसका गला पकड़ा और दूसरे हाथ से उसके माथे पर गन लगा दी.....
वसीम- तू ही बताएगी कि वो साला कहाँ है.....बता....
वसीम को रिचा के पास देख कर रिया की चीख निकल गई और रिचा तो बेचारी गन देख कर पीली ही पड़ने लगी.....
रिचा(डरते हुए)- वसीम...मैं ..मैं नही जानती....सच मे...
वसीम(चिल्ला कर)- हटत्त...मुझे तेरी बकवास नही सुननी....जल्दी से बोल वरना तुझे तो....बोल साली...
रिचा(ज़ोर से)- मैं नही जानती....
वसीम(हँसता हुआ)- तू नही जानती...हां...तो अब उससे पूछता हूँ जो सब जानता है...
और वसीम ने एक झटके मे रिचा को धक्का देकर नीचे गिरा दिया और लपक कर रिया को अपनी गिरफ़्त मे ले लिया..और उस पर गन तान दी...
रिया- आआअहह..मोममम..
रिचा- वसीम...मेरी बेटी को छोड़...
वसीम(चीखते हुए)- चुउउउप्प्प्प....अब ना कोई बेटी...ना कोई माँ...सब मरेगे....बोल साली....तुझे तो पता होगा ना....कहाँ है वो....बोल...हां...
रिचा ने उठकर वसीम के पैर पकड़ लिए और अपनी बेटी को छोड़ने की मिन्नतें करने लगी...जबकि वसीम रिया के बालो को खीचते हुए अपना मुँह उसके कान के पास घुमा रहा था और गन को रिया के सीने पर फिरा रहा था....
वसीम(रिया को सूघ कर)- आहह...कच्ची कली....उउंम...क्यो मरना चाहती है...ये तेरे मरने की उमर नही....उउंम...बता दे...हाँ...बता दे...कहाँ है वो...उउंम...बोल ना...
रिचा(रोते हुए)- वसीम...मेरी बच्ची...मेरी बच्ची को छोड़ दे...वसीम ...छोड़ से उसे प्ल्ज़्ज़....
वसीम-चुप कर...और तू...आअहह...बोल भी दे...वरना जवानी का मज़ा लेने से पहले ही तू...हाहाहा..बोल ना(चिल्ला कर)
मैं- वसीम....छोड़ दो उसे....
वसीम मेरी आवाज़ सुन कर फिर से चारो तरफ देखने लगा.....
वसीम- छोड़ दूं..हाँ...अगर तू चाहता है कि मैं इसे छोड़ू तो पहले तू सामने आ...वरना...
मैं- देख...तेरी दुश्मनी मुझसे है...रिया को बीच मे मत ला...मुझसे बात कर...
वसीम(रिया के बाल खीच कर)- तो फिर आ और बचा ले इसे...दिखा अपनी मर्दानगी....साला...नमर्दो की तरह छिप बैठा है...आ ना...
मैं- हाहाहा....नमर्द वो होते है वसीम ख़ान जो औरत पर ज़ोर चलाते है....समझे...
वसीम- अबे चुप....सीधे से सामने आता है या फिर मैं इसे उपेर भेजू...हाँ...
वसीम ने रिया के बाल खीचे और गन को उसके माथे पर अड़ा दिया...
वसीम- बोल अंकित....आता है या टपका दूं इसे....हाँ...
मैं- वसीम...उसे कुछ किया तो...
वादिम(बीच मे)- भाड़ मे गया तू...अब ये गई...
मैं- सोनम...अभी...
और इससे पहले की वसीम कुछ समझ पाता ...रूम मे फिर से गोली चली और सीधा वसीम के हाथ पर टकराई....
हाथ पर गोली लगते ही वसीम के हाथ से गन छूट गई और दूर जा गिरी....