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Guest
कुछ ही पॅलो मे हमारे सामने इंस्पेक्टर .आलोक और उनके 2 खास साथी हमारी नज़रों के सामने आ गये....
रूम मे इस वक़्त पोलीस की वर्दी देख कर सबकी सिट्टी-पिटी हम हो गई...एक तो पहले ही सब वसीम की मौत से परेशान थे उपर से पोलीस....ये तो आग मे घी का काम कर गये....
आलोक जैसे ही नीचे आए..वैसे ही आगे बढ़ते हुए सीधे वसीम की लाश के पास पहुँचे और निरीक्षण करने लगे.....
आलोक(कुछ देर लाश देखने के बाद)- ह्म्म...काफ़ी गुस्से मे मारा इसको....पूरा जिस्म छल्नि कर दिया....वैसे किया किसने...
आलोक के पूछते ही रिचा ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाती हुई आगे आ गई...
रिचा- सर...इसने...हाँ..इस अकरम ने मारा इसे...और ये अंकित भी साथ है इसके....इन दोनो को पकड़ लो सर...दोनो को...
रिचा का अचानक यू बोलना मेरे लिए हैरानी की बात थी...शायद रिचा पोलीस को देख कर अपने आप को बचाने के चक्कर मे थी.....
आलोक- आप कौन...और यहाँ कैसे....
रिचा- मैं..मैं रिचा हूँ..और ये मेरा घर है सर...
आलोक- ओह्ह...तो ये आपका घर है...तो बताइए...आख़िर आपके घर मे ये सब चल क्या रहा है....
रिचा- सर...वो ..ये अंकित ने मुझे और मेरी बेटी को डरा-धमका कर ये सब नाटक किया...और फिर इसके दोस्त ने आ कर वसीम को मार डाला...आप इन दोनो को गिरफ्तार कर लीजिए...
आलोक(मुझे घूरते हुए)- तो अंकित ने ये सब नाटक रचा...हाँ...वैसे रिचा जी...क्या आप बता सकती है कि यहाँ क्या हुआ था...
रिचा- जी सर..मैं शुरू से बताती हूँ....
और फिर रिचा ने मेरे वहाँ आने से ले कर अब तक की सारी बातें आलोक को बता दी...
आलोक- ओह...तो आपका कहना है कि वसीम ने अंकित पर गोलिया चलाई...और अंकित बच गया...कैसे...
रिचा- हाँ सर...वो अंकित वहाँ से गायब हो गया था...और..और फिर आ गया...और...
रिचा जल्दी-जल्दी मे बोल गई और उसकी बात सुनकर आलोक ठहाका मार के हँस दिया और उसके साथी भी उसका साथ देने लगे....और मेरी भी मुस्की निकल गई...
आलोक(हसी रोकते हुए)- रिचा जी...आप कहना क्या चाहती है...क्या अंकित सूपरमन है जो गोली खाने के बाद भी जिंदा खड़ा है...और तो और उसके जिस्म पर एक भी गोली का निशान नही...
रिचा- मैं..मैं सच कह रही हूँ सर...ऐसा ही हुआ है...
आलोक- पर मैं आपकी बात...
मैं(आलोक को टोकते हुए)- सर..इसे छोड़ो...और आगे क्या करना है वो बताइए....
आलोक- ह्म्म...अकरम...वो गन कहाँ है...लाओ मुझे दो...
आलोक अकरम की तरफ बढ़ते हुए बोला...और उस तक पहुँचने के पहले ही मैने वो गन आलोक के हाथ मे पकड़ा दी...
मैं- ये रही...
आलोक- गुड...अब ..अकरम...तुम आराम से घर जाओ....
अकरम(चौंक कर)- घर जाउ...पर सर मैने...
मैं(बीच मे)- सुना ना...घर जाओ...बाकी बातें बाद ने करेंगे...चल जा...
फिर अकरम कुछ देर मुझे और आलोक को देखता रहा और फिर मेरे इशारा करने के बाद वो वहाँ से निकल गया ...
अकरम के जाने से रिचा सबसे ज़्यादा हैरान थी...इसलिए वो फिर से बोल पड़ी...
रिचा- सर...आपने उसे जाने क्यो दिया...उसी ने ये सब किया...उसे पकड़ लीजिए...
आलोक- वैसे रिचा जी...पकड़ने की बात है तो मैं आपकी सबसे पहले पकडू..क्योकि ये सब आपके घर मे हुआ..आपकी जानकारी मे...और आपकी आँखो के सामने...तो इस हिसाब से तो आप भी लफडे मे फस गई ना...
रिचा- पर. .पर मैने बताया तो..कि...
मैं(बीच मे)- रिचा...चुप हो जाओ...(रिचा को घूर कर)- तुम्हे तो मैं बाद मे देखुगा...
आलोक- अंकित...तुम इन दोनो(सोनू और सोनम) को भी भेज दो....और इन्हे बता भी देना...
मैं- ह्म्म..वैसे वो ब्लड रिपोर्ट का क्या हुआ...
आलोक- वो मॅच हो गई...तुम सही थे...
मैं(वसीम की लाश देख कर)- तो मुजरिम हमारे सामने है...पर अफ़सोस इस बात का है कि ये जिंदा नही रहा...जिंदा होता तो शायद कुछ पता चल जाता कि उस फार्महाउस मे हुआ क्या था...
आलोक(सिर पकड़ कर)- वही तो...तुमने अकरम को रोका क्यो नही...
मैं- हुहम...रोकता तो तब..जब मौका मिलता....उसने तो मौंका ही नही दिया...आते ही गोलियाँ चला दी...
आलोक- खैर...जो हुआ सो हुआ...अब ये गन ले जाओ और इसे गायब कर दो...बाकी मैं देख लूगा...
मैं- ओके...थॅंक यू...
फिर आलोक ने मुझसे हाथ मिलाया और अपने साथियों से लाश उठाने और वहाँ की सॉफ-सफाई करने को बोल दिया....
ये सब देख कर रिचा की आँखे फटी रह गई....पर वो कर भी क्या सकती थी...चुपचाप रही...
फिर मैने सोनू और सोनम को घर भेजा और खुद रिचा और रिया के साथ बेसमेंट से बाहर निकल आया...जहाँ रॉनी मेरा वेट ही कर रहा था....
मैं- रॉनी...अब तू भी अपना सेटप निकाल और निकल...
रॉनी - ओके बॉस..
और फिर रॉनी अपना सेटप निकाल कर वहाँ से निकल गया....और रॉनी के जाने के बाद मैं रिचा को देख कर हँसने लगा...
मैं- क्या बोल रही थी...अब बोल..
रिचा(सहमी हुई)- क्क..कुछ नही..मैं तो बस...
मैं(गुस्से से)- जी तो करता है कि तुझे भी वसीम के पास पहुँचा दूं...पर ...अब मेरी बात सुन....तूने जो भी देखा, वो अपने तक रखना...वरना मैं हमेशा के लिए तुझे खामोश कर दूँगा...समझी...
रिचा(डरते हुए हाँ मे गर्दन हिलाने लगी..)
थोड़ी देर बाद आलोक वसीम की लाश को ले कर वहाँ से निकल गये और मैं भी रिचा को वॉर्निंग देकर निकल आया.....
रूम मे इस वक़्त पोलीस की वर्दी देख कर सबकी सिट्टी-पिटी हम हो गई...एक तो पहले ही सब वसीम की मौत से परेशान थे उपर से पोलीस....ये तो आग मे घी का काम कर गये....
आलोक जैसे ही नीचे आए..वैसे ही आगे बढ़ते हुए सीधे वसीम की लाश के पास पहुँचे और निरीक्षण करने लगे.....
आलोक(कुछ देर लाश देखने के बाद)- ह्म्म...काफ़ी गुस्से मे मारा इसको....पूरा जिस्म छल्नि कर दिया....वैसे किया किसने...
आलोक के पूछते ही रिचा ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाती हुई आगे आ गई...
रिचा- सर...इसने...हाँ..इस अकरम ने मारा इसे...और ये अंकित भी साथ है इसके....इन दोनो को पकड़ लो सर...दोनो को...
रिचा का अचानक यू बोलना मेरे लिए हैरानी की बात थी...शायद रिचा पोलीस को देख कर अपने आप को बचाने के चक्कर मे थी.....
आलोक- आप कौन...और यहाँ कैसे....
रिचा- मैं..मैं रिचा हूँ..और ये मेरा घर है सर...
आलोक- ओह्ह...तो ये आपका घर है...तो बताइए...आख़िर आपके घर मे ये सब चल क्या रहा है....
रिचा- सर...वो ..ये अंकित ने मुझे और मेरी बेटी को डरा-धमका कर ये सब नाटक किया...और फिर इसके दोस्त ने आ कर वसीम को मार डाला...आप इन दोनो को गिरफ्तार कर लीजिए...
आलोक(मुझे घूरते हुए)- तो अंकित ने ये सब नाटक रचा...हाँ...वैसे रिचा जी...क्या आप बता सकती है कि यहाँ क्या हुआ था...
रिचा- जी सर..मैं शुरू से बताती हूँ....
और फिर रिचा ने मेरे वहाँ आने से ले कर अब तक की सारी बातें आलोक को बता दी...
आलोक- ओह...तो आपका कहना है कि वसीम ने अंकित पर गोलिया चलाई...और अंकित बच गया...कैसे...
रिचा- हाँ सर...वो अंकित वहाँ से गायब हो गया था...और..और फिर आ गया...और...
रिचा जल्दी-जल्दी मे बोल गई और उसकी बात सुनकर आलोक ठहाका मार के हँस दिया और उसके साथी भी उसका साथ देने लगे....और मेरी भी मुस्की निकल गई...
आलोक(हसी रोकते हुए)- रिचा जी...आप कहना क्या चाहती है...क्या अंकित सूपरमन है जो गोली खाने के बाद भी जिंदा खड़ा है...और तो और उसके जिस्म पर एक भी गोली का निशान नही...
रिचा- मैं..मैं सच कह रही हूँ सर...ऐसा ही हुआ है...
आलोक- पर मैं आपकी बात...
मैं(आलोक को टोकते हुए)- सर..इसे छोड़ो...और आगे क्या करना है वो बताइए....
आलोक- ह्म्म...अकरम...वो गन कहाँ है...लाओ मुझे दो...
आलोक अकरम की तरफ बढ़ते हुए बोला...और उस तक पहुँचने के पहले ही मैने वो गन आलोक के हाथ मे पकड़ा दी...
मैं- ये रही...
आलोक- गुड...अब ..अकरम...तुम आराम से घर जाओ....
अकरम(चौंक कर)- घर जाउ...पर सर मैने...
मैं(बीच मे)- सुना ना...घर जाओ...बाकी बातें बाद ने करेंगे...चल जा...
फिर अकरम कुछ देर मुझे और आलोक को देखता रहा और फिर मेरे इशारा करने के बाद वो वहाँ से निकल गया ...
अकरम के जाने से रिचा सबसे ज़्यादा हैरान थी...इसलिए वो फिर से बोल पड़ी...
रिचा- सर...आपने उसे जाने क्यो दिया...उसी ने ये सब किया...उसे पकड़ लीजिए...
आलोक- वैसे रिचा जी...पकड़ने की बात है तो मैं आपकी सबसे पहले पकडू..क्योकि ये सब आपके घर मे हुआ..आपकी जानकारी मे...और आपकी आँखो के सामने...तो इस हिसाब से तो आप भी लफडे मे फस गई ना...
रिचा- पर. .पर मैने बताया तो..कि...
मैं(बीच मे)- रिचा...चुप हो जाओ...(रिचा को घूर कर)- तुम्हे तो मैं बाद मे देखुगा...
आलोक- अंकित...तुम इन दोनो(सोनू और सोनम) को भी भेज दो....और इन्हे बता भी देना...
मैं- ह्म्म..वैसे वो ब्लड रिपोर्ट का क्या हुआ...
आलोक- वो मॅच हो गई...तुम सही थे...
मैं(वसीम की लाश देख कर)- तो मुजरिम हमारे सामने है...पर अफ़सोस इस बात का है कि ये जिंदा नही रहा...जिंदा होता तो शायद कुछ पता चल जाता कि उस फार्महाउस मे हुआ क्या था...
आलोक(सिर पकड़ कर)- वही तो...तुमने अकरम को रोका क्यो नही...
मैं- हुहम...रोकता तो तब..जब मौका मिलता....उसने तो मौंका ही नही दिया...आते ही गोलियाँ चला दी...
आलोक- खैर...जो हुआ सो हुआ...अब ये गन ले जाओ और इसे गायब कर दो...बाकी मैं देख लूगा...
मैं- ओके...थॅंक यू...
फिर आलोक ने मुझसे हाथ मिलाया और अपने साथियों से लाश उठाने और वहाँ की सॉफ-सफाई करने को बोल दिया....
ये सब देख कर रिचा की आँखे फटी रह गई....पर वो कर भी क्या सकती थी...चुपचाप रही...
फिर मैने सोनू और सोनम को घर भेजा और खुद रिचा और रिया के साथ बेसमेंट से बाहर निकल आया...जहाँ रॉनी मेरा वेट ही कर रहा था....
मैं- रॉनी...अब तू भी अपना सेटप निकाल और निकल...
रॉनी - ओके बॉस..
और फिर रॉनी अपना सेटप निकाल कर वहाँ से निकल गया....और रॉनी के जाने के बाद मैं रिचा को देख कर हँसने लगा...
मैं- क्या बोल रही थी...अब बोल..
रिचा(सहमी हुई)- क्क..कुछ नही..मैं तो बस...
मैं(गुस्से से)- जी तो करता है कि तुझे भी वसीम के पास पहुँचा दूं...पर ...अब मेरी बात सुन....तूने जो भी देखा, वो अपने तक रखना...वरना मैं हमेशा के लिए तुझे खामोश कर दूँगा...समझी...
रिचा(डरते हुए हाँ मे गर्दन हिलाने लगी..)
थोड़ी देर बाद आलोक वसीम की लाश को ले कर वहाँ से निकल गये और मैं भी रिचा को वॉर्निंग देकर निकल आया.....