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चूतो का समुंदर

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मैं ये सब सुन कर थोड़ा शॉक्ड था...पर खुद को संभाले रहा...जबकि अकरम और रफ़्तार ये सब सुन कर मुझे अजीब सी नज़रों से देख रहे थे.....

मैं- ह्म...तो रेणु मेरी बेहन है....ओह गॉड....ये सब कैसे हुआ...और क्यो हुआ....

रिचा- जो होना था वो हो चुका....उसकी फ़िक्र ना कर के वो सोचो जो आगे हो सकता है....रेणु अब भी सच्चाई नही जानती...और अब तो वो अपने बाप के साथ है....मतलब जिसे वो अपना बाप समझती है...मदन.....

मैं(शॉक्ड)- क्या बकवास कर रही हो....मदन जिंदा है...वो तो मर चुका था ना......

रिचा- नही....वो जिंदा है...और अब वो रेणु के साथ है....

मैं- पर मैने तो सुना था कि उसका कार आक्सिडेंट हो गया था...और कार के साथ वो भी जल कर मर गया था....तो फिर वो जिंदा कैसे.....

रिचा- तुमने सुना तो ठीक था...पर जल कर मरने वाला मदन का ड्राइवर था.....मदन नही....उसने अपने आप को दुनिया के सामने मरा हुआ साबित किया था....

मैं- पर मदन ऐसा क्यो करेगा....मतलब...कोई वजह तो ज़रूर होगी ऐसा करने की....

रिचा- अब इसका जवाब तो मदन ही दे सकता है....मैं तो बस इतना ही जानती हूँ कि वो जिंदा है और रेणु के साथ है......

मैं(लंबी सास ले कर)- हमम्म....चलो...उससे मैं खुद ही निपट लुगा....फिलहाल तुम मेरे अगले सवाल का जवाब दो.....

मेरी बात सुन कर रिचा मेरा मुँह ताकने लगी....जैसे बेसब्री से मेरे सवाल का इंतज़ार कर रही हो....

मैं- तो...अब मुझे वो बताओ...जो उस दिन आरती बुआ के घर मे हुआ था....समझ गई ना...मैं किस दिन की बात कर रहा हू.....

रिचा(आँखे बड़ी कर के)- तुम्हारा मतलब उस दिन से तो नही जब आकाश गाओं मे वापिस आया था...और तुम्हारी बुआ ने सु....

मैं(बीच मे)- हाँ....मैं बिल्कुल यही बात पूछ रहा हूँ...जिस दिन ना सिर्फ़ मैने अपनी आरती बुआ को खो दिया था...बल्कि उनके साथ-साथ सुभाष, धर्मेश और सरिता भी मारे गये थे...और उन सबके खून का इल्ज़ाम मेरे डॅड पर लगाया गया था...जो आज तक बरकरार है.....

रिचा(चौंक कर)- तुम....कैसे...क्या तुम ये सब जानते हो....

मैं(घूर कर)- मैं क्या जानता हूँ ये छोड़ो....बस मुझे ये बताओ कि असल मे वहाँ हुआ क्या था.....

रिचा- वहाँ...वो मैं कैसे....मुझे नही पता.....

मैं(ज़ोर से)- झूठ...तुझे सब पता है...मैं जानता हूँ कि उस दिन तू वही थी....वही थी तू....अब जल्दी से बता वरना एक गोली तेरे पैर मे जाएगी...और फिर तू तड़पति रहेगी....चल बोल....

मैने तुरंत पिस्टल हाथ मे ली और रिचा पर तान दी....

मैं- तो बता...किसने किया था वो सब....जल्दी बता...वरना....

रिचा- मैने कहा ना...मैं वहाँ थी ही नही....

मैं- ओह्ह...तो फिर तू किस काम की...चलो...तुझसे तडपा-तडपा कर ख़त्म कर देते है....तू तो वहाँ थी ही नही ना...

और मैने रिचा के पैरो के पास एक फिरे कर दिया और रिचा चीख पड़ी.....

रिचा(चिल्ला कर)- न्ह्ही....मुझे कुछ मत करना...मैं सब बताती हूँ.....मैं वही थी...वही थी...

मैं(पिस्टल घुमा कर) - ह्म्म....तीर निशाने पर लग गया....मुझे तो बस शक़ था....पर अब क्लियर हो गया कि तू वही थी...गुड...तो अब...चल बोलना शुरू कर...क्या हुआ था वहाँ.....

रिचा थोड़ी देर तक खामोश रही और फिर से कहानी सुनाना शुरू कर दिया......

उस दिन जब आकाश गाओं मे धर्मेश और आरती से मिलने आ रहा था...तब सरिता आकृति के घर मे बैठी थी.....

फिर जब सरिता को पता चला कि आकाश गाओं वापिस आ गया है और वो भी बहुत गुस्से मे....तभी सरिता का शैतानी दिमाग़ एक चाल सोचने लगा....और चाल सोच कर उसने सरफ़राज़ को कॉल कर दिया....

और फिर अपनी बेटी को आकृति के पास छोड़ कर सरफ़राज़ के साथ आरती के घर निकल गई.....

सरफ़राज़ ने ये बात मुझे भी बता दी थी और आने को भी कहा....पर मैं उसके साथ नही आई...बल्कि समर के साथ आरती के घर के पीछे से आई...सबसे छिप कर.....

जब मैं वहाँ पहुँची तो मैने देखा की एक तरफ आकाश गन ले कर खड़ा हुआ था और दूसरी तरफ बाकी सारे लोग....सिर्फ़ आरती ही बीच मे खड़ी हुई थी....

फिर मैने गौर किया तो पाया कि सरिता ने आरती की बेटी पर गन तान रखी है और सरफ़राज़ ने धर्मेश पर....और उस टाइम सरफ़राज़ ने अपना चेहरा भी छुपाया हुआ था....ताकि कोई उसे पहचान ना पाए....

सरिता और सरफ़राज़ आरती को धमका रहे थे कि बाहर जा कर सबसे बोल दे कि आकाश उन्हे मारने आया है...वरना वो आरती की बेटी और पति को मार देगे....

बेचारी आरती गिडगिडा रही थी...पर कुछ नही कर सकती थी.....

अचानक से रूम मे एक गोली चली और धर्मेश लाश बनकर फर्श पर जा गिरा....

धर्मेश की मौत से सब शॉक्ड हो गये...पर तुरंत ही सरिता ने फिर से आरती की बेटी को दबोचा और धमकाया.....

""जा सबसे बोल कि आकाश ने तेरे पति को मारा....वरना तेरी बेटी भी मरेगी...समझी...""

बेचारी आरती...अपने पति की लाश देख कर पागल सी हो गई और तुरंत एक कॉवर्ड खोल कर गन निकाल ली और सरिता की तरफ बढ़ी....पर सरिता ने उसकी बेटी को सामने कर दिया...और फिर से धमकाया.....

बेचारी आरती....क्या करती...एक तरफ भाई था और दूसरी तरफ बेटी....इसलिए वो बाहर भाग गई और कहती गई कि वो खुद को ही मार लेगी....

जैसे ही आकाश ने आरती की बात सुनी तो वो भी अपनी प्यारी बेहन के पीछे भागा. ...

और फिर मुझे बाहर एक गोली चलने की आवाज़ आई ....जो बाद मे पता चला कि आरती ने खुद को मार ली थी.....
 
यहाँ रूम मे गोली की आवाज़ सुन कर सुभाष बाहर की तरफ भागा...पर सरिता ने साइलेनसर वाली पिस्टल से उसे मार गिराया और फिर सरफ़राज़ से भागने को बोला.....

यहा समर ने मुझे भी भागने का बोला....

वहाँ सरफ़राज़ गया और सरिता ने उस बच्ची को नीचे ही रखा था कि एक गोली चली और सरिता भी मार कर गिर गई....और ये मैने भागते हुए देखा था....बस...इसके बाद क्या हुआ...मुझे नही पता.....

रिचा की बात ख़त्म हुई...और साथ मे मेरे दिल मे पड़ी गाँठ भी खुल गई....

आज जा कर पता चला कि उस रूम मे उस दिन असल मे हुआ क्या था....

मुझे भरोशा तो पहले ही से था कि मेरे डॅड किसी को मार नही सकते...और आज ये बात कन्फर्म भी हो गई...सच मे...मेरे दिल को एक सुकून मिल गया...पर साथ मे मेरी आँखे गुस्से से लाल हो गई.....

रिचा(मुझे देख कर)- एमेम..मैने कुछ नही किया था...कसम से...मैं तो बस सब देख कर भाग गई थी...सच मे....

मैं(गुस्से से)- आज तक मेरे डॅड इन सब इल्ज़ामो का भोझ ले कर जी रहे है....अब मैं किसी को नही छोड़ूँगा...किसी को भी नही....

उन लोगो की वजह से मेरे डॅड ने सब कुछ खो दिया....अपना परिवार...जान से प्यारी बेहन...अपना दोस्त...और अपनी माँ भी....जिनकी मौत का बोझ भी उनही के सिर पर चड़ा....जबकि उनकी कोई ग़लती नही थी....कोई नही....

रिचा(सहमे हुए)- सही कह रहे हो...तुम्हारी दादी की मौत तुम्हारे डॅड की वजह से नही हुई थी...बल्कि...

इतना बोल कर रिचा चुप हो गई...जिससे मेरे माथे पर शिकन आ गई....

मैं- बल्कि...बल्कि क्या....कहना क्या चाहती है तू...मेरी दादी की मौत...कैसे मरी मेरी दादी....उसी वीडियो को देख कर ना...जो सरिता ने बनाया था...मेरे डॅड के साथ...हाँ...

रिचा- हाँ...वो एक वजह थी...पर उस वजह से वो सिर्फ़ टूट गई थी...मरी नही थी....

मैं(गुस्से से)- तो...तो फिर कैसे मरी थी वो....क्या और कुछ भी हुआ था वहाँ....

रिचा(डरते हुए)- आ..असल मिस्टर उनकी मौत खुद्खुसि नही थी....वो...वो एक हत्या थी....

मैं(गुस्से से खड़ा हो गया)- क्या...उनकी हत्या हुई थी...कौन...कौन था वो....मैने पूछा कौन था वो....बता...

मारे गुस्से के मेरा सरीर काँप सा रहा था...और मेरी हालत देख कर दर के मारे रिचा के चहरे का रंग उड़ गया था....

मैं- बोल ना साली...कौन था वो कमीना .....बोल...

और तभी डोरबेल बज उठी और हम सब चौंक कर गेट की तरफ देखने लगे........

मैं(गुस्से से)- अब कौन मरा साला.....????????????

गेट पर हुई दस्तक से हम सभी चौंक गये और सबके चेहरों के रंग बदल गये.....

रिचा(सहम कर)- कौन आया....

मैं(धीरे से, गुस्से मे)- मुझे क्या पता साली...मेरी आँखे गेट के आर-पार नही देखती...समझी...

रिचा(धीरे से)- तो अब...देखो ना ...

मैं(रफ़्तार को देख कर)- देख तो कौन है....कोई पंगे वाला हो तो दबोच लेना...

रफ़्तार(आगे बढ़ते हुए)- तुम इसे शांत रखो....मैं संभाल लुगा....

इतना बोल कर रफ़्तार ने गेट को थोड़ा खोला और फिर किसी को शांत रहने का इशारा किया....

मैं(आँखो से)- कौन ...

रफ़्तार(पलट कर)- कोई प्राब्लम नही....मैं बाहर जाता हूँ....यू कॅरी ऑन...

और रफ़्तार बाहर निकल गया और एक बार फिर मैने पूरा फोकस रिचा पर किया.....

मैं(पिस्टल दिखा कर)- अब मुझे जवाब चाहिए बस...और मैं दुबारा नही पूछुगा ....याद रखना....ओके...तो....मेरी दादी के साथ क्या हुआ था.....

रिचा- बताती हूँ....बताती हूँ....

और फिर से रिचा मुझे अतीत मे ले गई....उस वक़्त...जब मेरी बड़ी बुआ की शादी हो रही थी......

उस दिन आज़ाद के पावर मे खुशिया ही खुशिया थी....

आकृति की शादी बड़े धूम-धाम से पूरी हो रही थी....पर उसी बीच सरिता अपने टाइटानी दिमाग़ से आज़ाद को बर्बाद करने के मंसूबे बना रही थी.....

मुझे पहले ये पता भी था कि सरिता का प्लान क्या है....ये तो मुझे अचानक से पता चला.....

जब मैने सरिता को किसी से फ़ोन पर बात करते सुना....कि कैसे उसने आकाश को पटा कर एक रेप की तरह चुदाई करवाई...और उसका वीडियो बना लिया.....और अब वो उसी वीडियो की मदद से आज़ाद की इज़्ज़त सरे आम उछालने वाली है.....

जब मैने ये सुना तो मैं शॉक्ड हो गई...पर अंदर ही अंदर खुश भी हुई...कि चलो...आज़ाद का कुछ तो बुरा हो रहा है....

पर जब सरिता ने सबके सामने उस वीडियो को दिखाया....तो वहाँ पर मौजूद हर सख्स चौंक गया...पर कोई भी आज़ाद के खिलाफ नही बोला.....हाँ...आज़ाद का सिर ज़रूर शर्म से झुक गया और उसका झुका हुआ सिर देख कर मुझ जैसे उसके बाकी के दुश्मनो के चेहरे खिल उठे....

पर इन सब के बीच एक चेहरा ऐसा भी था....जिसके चेहरे पर मैं कभी शर्मिंदगी और दुख देख नही सकती थी...वो थी आज़ाद की पत्नी...रुक्मणी....

भले ही आज़ाद ने मेरे साथ कुछ भी किया हो...पर रुक्मणी ने मुझे हमेशा प्यार दिया था....एक माँ की तरह मुझे खाना खिलाया...मेरी हर तरह से मदद की...क्योकि मैं आरती की सहेली थी...और उसी वजह से वो मुझे आरती की ही तरह प्यार करती थी....
 
जब मैं रुक्मणी के चेहरे पर अपार दुख के बादल देखे तो मैं टूटने लगी. ...और जैसे ही रुक्मणी ने अपने आप को कमरे मे क़ैद किया तो मैं घबरा गई....और मैने उन्हे सच बताने का फ़ैसला किया...क्योकि मैं उन्हे तकलीफ़ पहुँचाना बिल्कुल नही चाहती थी....

इसीलिए मैं दौड़ कर उस रूम तक पहुँची...और रूम के पीछे तरफ बने आले (गाओं के घरो मे एक छोटा सा हवादान) से अंदर झाकने लगी....

मैं देखना चाहती थी कि रुक्मणी कितनी तकलीफ़ मे है....पर अंदर का सीन देख कर तो मेरे होश उड़ गये...

रुक्मणी ने एक स्टूल को बेड पर रखा और पंखे से रस्सी का फँदा लटका दिया....

मैं समझ गई कि वो मरने जा रही है....और मैं उन्हे बचाने के लिए सोचने लगी....

कि तभी सरिता का कॉल आ गया...जो मुझसे रुक्मणी के बारे मे पूछ रही थी....

मैने उसे सब बता दिया और बोल भी दिया कि मैं रुक्मणी को मरने नही दूगी...भले ही मुझे सब सच बोलना पड़े....

इस पर सरिता भड़क गई...पर गुस्सा होने की जगह उसने बड़े प्यार से मुझे मेरी बाते याद दिलाई...कि कैसे आज़ाद ने मेरा सब कुछ लूट लिया....आकाश को भी और बाकी सारे सपनो को भी....कैसे उसने मुझे रंडी का दर्जा दे दिया...एट्सेटरा...और सरिता ने ही मुझे समझाया कि अगर रुक्मणी मारती है तो इससे हमे कितना फ़ायदा होगा.....

ये सब सुन कर मेरा खोया हुआ गुस्सा वापिस आ गया और मैने अपने मक़सद के लिए रुक्मणी को मरता हुआ देखने का फ़ैसला कर लिया....

इसी बीच रूमानी स्टूल पर चढ़ कर अपने गले मे फंदा कस चुकी थी....पर अचानक से वो खुद से बातें करने लगी ....

रुक्मणी- ये..ये मैं क्या कर रही हूँ...बस चार लोगो की बातें सुन कर अपने बेटे को गुनहगार मान रही हूँ....नही...मैं अपने बेटे को जानती हूँ...वो किसी के साथ रेप जैसी गंदी हरक़त कभी नही कर सकता....ह्म...मुझे उससे बात करनी होगी...इससे पहले की कुछ अनर्थ हो जाए....

ये सब सुन कर मुझे हमारा प्लान चौपट होते दिखा....पर मैं हार नही मानने वाली थी...इसलिए मैने एक लंबा डंडा ढूँढा और आले मे से ही डंडा डाल कर उस स्टूल को गिरा दिया .....जिस पर रुक्मणी खड़ी थी...

बेचारी रुक्मणी....अपने आप से बात करने मे इतनी खो गई थी कि उसे याद ही नही रहा कि फंडा उसके गले को कसे हुए है....इसलिए स्टूल हट ते ही उसकी गर्दन टूट गई और वो उपर पहुँच गई....

और फिर मैं उस डंडे को बाहर फेक कर बाकी सबके साथ शामिल हो ली....

इस तरह मेरे हाथो एक बेगुनाह की मौत हुई....जिसका पछतावा मुझे आज तक है.....

मैं(नम आँखो से)- तो तूने.....पर क्यो....तेरा क्या बिगाड़ा था उन्होने...हाँ....

रिचा(डरते हुए)- मुझसे ग़लती हो गई.....पर मैं...मैं मजबूर थी....

मैं(बीच मे)- चुप कर साली....हर बार मजबूर थी...मजबूर थी....मजबूर थी.....हाँ....साला मजबूरी मे लोगो की जान लेते जाओ...ऐसा क्या...हाँ....

रिचा(कड़क आवाज़ मे)- मैं सिर्फ़ अपना बदला चाहती थी बस....और उसके सामने मुझे कुछ नही दिखा...कुछ भी नही....जो भी मेरे रास्ते मे आया...मैने उसी को उड़ा दिया....समझे....

मैं(रिचा को एक थप्पड़ मार कर)- साली रंडी....अकड़ तो ऐसे दिखा रही है जैसे कोई महान काम किया....बदला चाहिए था तुझे...बदला....हाँ...पर एक बार खुद से सोच...बदला किस बात का था....ग़लती किसकी थी ...तेरी या उन सब की...जो तेरी वजह से मारे गये....हाँ...

रिचा(घूर कर)- ताली एक हाथ से नही बजती अंकित....अगर मैं ग़लत हूँ तो बाकी सब भी है....चलो माना कि मैं सबसे ज़्यादा ग़लत हूँ...पर वो लोग भी दूध के धुले नही थे....

मैं(गुस्से से)- पर उनका क्या जो बेकसूर थे...जिन्होने कोई ग़लती भी नही की थी....जिन्हे तो ये तक नही पता था कि उनकी जान किस लिए गई....उनका क्या...हाँ...

रिचा- हुह...गेहू का साथ थोड़ा घुन तो पिसता ही है ना....

मैं(एक और थप्पड़ खीच कर)- तू सच मे जिंदा रहने लायक नही...बिल्कुल नही....

और इतना सुनते ही रिचा मुस्कुरा उठी....तो मुझे और ज़्यादा गुस्सा आया और मैने उसे एक जोरदार लात मारी....जिससे रिचा फर्श पर कराहती हुई उल्टी जा गिरी....

रिचा- आआहह.....

मैं- अब मर साली.....

मैं गुस्से मे अपना हाथ अपने सिर पर घूमाते हुए अकरम की तरफ मुड़ा...तो अकरम ने मुझे शांत रहने का इशारा कर दिया....

मैं(अकरम से )- घंटा शांत हो जाो...तूने..तूने सुना ना...क्या-क्या गुल खिलाए इस रंडी ने...हाँ...

अकरम- हाँ...बट तू शांत रह....और आराम से बात कर...शायद ये और कुछ भी जानती हो...ह्म्म..

मैं- जानती तो ये सब कुछ है....वसीम, सम्राट, रेणु, समर....इसने सबको अपने हिसाब से नचाया.....किसी को नही छोड़ा साली ने.....और...अरे हाँ...ये समर के बारे मे तो पूछा ही नही....ये समर भी ज़रूर इसी सहर मे होगा....

अकरम- ह्म्म...तो पूछ इससे...एक बार ये सब उगल दे...फिर साली को ख़त्म कर देगे.....अब ये किसी का बुरा नही कर पायगी....

मैं- सही कहा....(पलट कर)- ये रंडी ...उठ...इतने मे नही मरेगी तू...अभी तो तुझे काफ़ी दर्द सहना है....

रिचा आह भरती हुई पड़ी रही पर पलटी नही....

मैं- अब उठ रही है या तेरी गांद मार लूँ....वैसे भी तूने तो गांद को खुद ही सामने कर दिया..हाँ...

अकरम- ह्म्म...ये गांद मरवा कर ही उठेगी....साली को लंड जी एनर्जी चाहिए होगी....दे दे....

मैं- एनर्जी तो बाद मे दूगा....पहले इसे...हेययययी....ये क्या....

तभी अचानक रूम मे कुछ पत्थर जैसा आया और मेरे पैरों के पास गिरा.....इससे पहले की मैं कुछ साझ पाता....रूम मे एक धमाका हुआ और उससे बचने के लिए मैने एक तरफ जंप मार दी...

इससे पहले कि मैं संभाल पाता...पूरे रूम मे धुआँ छा गया...और नान्न् आँखो से कुछ भी नही दिखाई दे रहा था....

मैं और अकरम एक दूसरे को आवाज़ दे रहे थे...और साथ मे मैने रिचा को भी आवाज़ लगाई...पर उसका कोई रेस्पॉन्स नही मिला....

करीब 3-4 मिनट बाद धुआँ छँटने लगा और धीरे-धीरे हमे सब कुछ दिखाई देना शुरू हो गया....

धुआँ हटने पर रूम मे सिर्फ़ मैं और अकरम ही बचे थे....रिचा गायब थी....

मैं(ज़ोर से)- ये कहाँ मर गई...साली....

और हम दोनो ने दौड़ कर सारे रूम चेक कर लिए...पर रिचा को कोई पता नही चला...हाँ पीछे साइड की खिड़की ज़रूर खुली हुई थी....जहाँ से रिचा भाग सकती थी....

अकरम(खिड़की देख कर)- लगता है यहाँ से भाग गई...

मैं- हो सकता है...पर सवाल ये है कि वो भागी कैसे...उस धुए मे जब हमे कुछ नही दिखा तो वो यहाँ तक कैसे आ गई...और ये सब किया किसने...

अकरम- ये करने वाला हमारा दोस्त तो हो नही सकता...ज़रूर कोई दुश्मन होगा....

मैं- हो सकता है...पर कौन...और उसे कैसे पता कि रिचा के घर इस वक़्त हम लोग भी है...हाँ...

अकरम- शायद रिचा ने बताया हो...

मैं- नही...वो तो हमारे सामने ही थी....यहाँ बात कुछ और है...

अकरम- शायद उसके साथी आस-पास हो...

मैं(सिर पकड़ कर)- हो सकता है...कुछ भी हो सकता है....पर मेरे आदमी इस घर के चारो तरफ फैले है...कोई तो देखता उन्हे....

अकरम- तो अब...

मैं- आ...अब...अब रिचा को ढूँढना होगा....
 
तभी रफ़्तार भागता हुआ आया...और धमाके के बारे मे पूछने लगा...तो अकरम ने उसे सारी बात बताई...तो वह रिचा को ढूँढने निकल गया....

अकरम(मेरे कंधे पर हाथ रख कर)- वो जल्दी मिल जाएगी...टेन्षन मत ले....

मैं- ह्म्म ...उसकी टेन्षन नही है....टेन्षन तो कुछ और ...चल छोड़...अभी यहाँ से निकलते है...बाकी मेरे आदमी तो है ही....पता चल ही जायगा...चल...

अकरम- ह्म...पर एक बात कहुगा...है तो रंडी...पर दिमाग़ रखती है...देखा कैसे बच कर निकल गई.....

मैं(मुस्कुरा कर)- बच कर जाएगी कहाँ रंडी.....अब तो मौत ही उसे मुझसे बचा सकती है....

और फिर मैने अकरम को उसके घर भेजा...रफ़्तार को आगे का काम समझा कर भेज दिया....और खुद भी अपने घर की तरफ निकल आया....

और जैसे ही मैं घर पहुँचा तो सामने डॅड को खड़ा पाया. .जो मेरा ही वेट कर रहे थे....

मैं- अरे आप....आप अभी तक जाग रहे है....सुबह होने वाली है...और आप...चलिए सो जाइए....

आकाश- नही बेटा...मुझे नीद नही आयगी...मेरे मन मे बहुत कुछ चल रहा है....प्ल्ज़...

मैं(आगे बढ़ कर)- तो ठीक है...आइए मेरे रूम मे चलते है.....

मेरे रूम मे आते ही डॅड ने आज सुजाता के साथ हुई सारी बात बता दी और फिर मेरी तरफ गुस्से से देखने लगे.....

मैं- आप ऐसे क्यो देख रहे है...मैने तो पहले ही कहा था कि आपको ये सब....

आकाश(बीच मे)- हाँ...कहा था...पर मैं जानना चाहता हूँ कि तुम आख़िर साबित क्या करना चाहते हो.....

मैं(एक तरफ देख कर)- सुजाता आंटी का असली रूप....बस...

आकाश(गुस्से से)- क्या मतलब ....तुम कहना चाहते हो कि सुजाता...

मैं(बीच मे)- मैं कुछ भी नही कह रहा....आपको खुद सब पता चल जायगा...बस देखते जाइए...और फिर आप ही बताना कि मैं सही था या ग़लत....

आकाश(सिर हिला कर)- मैं सोच भी नही सकता था कि सुजाता ऐसी होगी...

मैं- असल मे...ये तो मैने भी नही सोचा था....कि...खैर...आप ये बताइए कि अब आप मुझसे क्या चाहते है....

आकाश- मैं बस इन सब प्रॉब्लम्स से दूर रहना चाहता हू...मुझे सुजाता का कोई रूप नही देखना...बस बहुत हो गया....

मैं- पर मुझे सुजाता की ज़रूरत है....बहुत ज़्यादा ज़रूरत....समझ रहे है आप....

आकाश(चिल्ला कर)- आख़िर क्यो.....तुम उसके पीछे क्यो पड़े हुए हो.....आख़िर क्या मिलेगा तुम्हे....बताओ....

मैं(चिल्ला कर)- जानना चाहते हो तो सुनो.....

और फिर रूम मे सिर्फ़ मेरी आवाज़ गूँजती रही....और डॅड सिर्फ़ सुनने का काम करते रहे.. ..

मैं- अब आप ही बताइए....मैं सही कर रहा हू या ग़लत ....

आकाश(नम आँखो से)- बेटा...मैं नही जानता था कि...ये सब...मुझे माफ़...

मैं(आगे बढ़ कर)- ये आप क्या बोल रहे है....नही...बेटे से माफी माँग कर आप मुझे नरक मे धकेल रहे है...हाँ...

आकाश(आँख सॉफ कर के)- नही बेटा....मैं तो बस....अब तुम बोलो...मुझे क्या करना है.....मैं वही करूँगा....अब मैं तेरे साथ ही चलुगा.....पक्का...

मैं- इसका तो मुझे पूरा भरोशा है....बस आपका आशीर्वाद साथ रहेगा तो मैं सब ठीक कर दूँगा...

आकाश- तो बोलो...क्या करना है मुझे...

मैं(नुसकुरा कर)- सुजाता आंटी से सॉरी बोल कर उन्हे फिर से भरोशे मे लेना होगा...और आप अच्छी तरह से जानते है कि ये सब आप कैसे करेंगे...है ना...

आकाश(मुस्कुरा कर)- ह्म्म...अब तू आराम कर ले....मैं सब ठीक कर दूँगा ...चलो. .सो जाते है...

और फिर आकाश अपने रूम मे सोने चला गया और अंकित ने भी चैन की साँस ली और सो गया.....

अगली सुबह मेरी नीद स के कॉल से खुली...जिसका कॉल देख कर मैं खुश हो गया....

( कॉल पर )

मैं- ह्म्म...कहिए....क्या हाल है....

स- मेरा हाल तो ठीक है...तुम बताओ....कल रात क्या हुआ....

मैं- काफ़ी कुछ...और बहुत कुछ बाकी भी है....

स- ह्म्म ....पर तुमने मुझे बताया क्यो नही कि तुम रिचा के घर जाने वाले हो...

मैं- अरे..मेसेज किया तो था..भूल गये...

स- हाँ..किया था...पर कब...आधी रात हो रही थी तब....

मैं- अरे आप भी...गुस्सा क्यो हो...

स- गुस्सा नही ...बस सोच रहा हूँ कि तुमने मुझे बताना भी ज़रूरी नही समझा....क्या अब भरोशा नही रहा...

मैं- भरोशा नही होता तो मसेज नही करता...आप पर पूरा भरोसा है...आछा चलिए मिल कर बात करते है...आपके गीले-शिकवे भी मिटा दूँगा...

स- ह्म्म...मिलते है...बोलो कहाँ मिले...

मैं- ह्म्म..वही मिलते है ना...जहाँ उसे छिपाया है....

स- किसे...तुम किसकी बात कर रहे हो....

मैं- अरे...रिचा को और किसे...

स- रिचा...पर...

मैं(बात काट कर)- वैसे आपने भी मस्त तरीके से उड़ाया साली को.....अब सब सोचते ही रह जायगे कि वो रंडी गई कहाँ...है ना...हाहाहा.....

स(गुस्से से)- बस ...हँसना बंद करो....मेरी बात सुनो ..

मैं- क्या हुआ...

स- रिचा मेरे पास नही है....

मैं(शॉक्ड)- ये क्या बोल रहे है....मैने तो आपसे कहा था कि....

स(बीच मे)- हाँ पर मैं जब वहाँ पहुँचा तो तुम सब जा चुके थे....वहाँ कोई नही था...

मैं- ये..ये क्या बोल रहे है...अगर रिचा आपके पास नही थी ..तो आपने कॉल भी नही किया....बता तो देते मुझे...

स- कैसे बताता...मेरे फ़ोन की बत्ट्री ख़त्म हो गई थी...और तभी मैने ये सोच लिया कि शायद मेरा फ़ोन नही लगा तो तुम उसे ले गये होगे....

मैं(सिर पीट कर)- ओह माइ गॉड...मतलब रिचा आपके पास नही है...

स- नही ...

मैं- और ना मेरे पास...तो उसे कौन उड़ा ले गया.....

स- उसका कोई साथी हो शायद.....उसने बताया तो होगा...बोलो ..

मैं- हाँ...पर ...ओह शिट....उसके उस साथी का तो पूछ ही नही पाया था...सोचा कि बाद मे ...ओह शिट...

स- अब क्या...कहाँ ढूँढे....

मैं- मिल कर बात करते है....30 मिनट मे वही मिलो...बाइ.....

और मैने फ़ोन कट कर के अपना सिर पीट लिया.....

मैं- ये ग़लती कैसे हो गई...साली हाथ से ....पर वो स नही था तो था कौन....?????

तभी फिर से फ़ोन बजने लगा...और फ़ोन उठाते ही मेरे कानो ने जो सुना...उसे सुन कर मेरी बॉडी मे सनसनी सी मच गई....

मैं(चिल्ल्ल कर)- क्या बक रहे हो....ये कैसे हो सकता....मैं अभी आया....

मैं(मन मे, कॉल कट कर के)- ये क्या हो गया साला...ये तो मैने सोचा ही नही था......

फ़ोन कट कर के मैं रेडी हुआ और बाहर निकल गया....जाते हुए मैने देखा कि डॅड और सुजाता परेशान से चुपचाप बैठे थे....और मैं जानता था कि वजह क्या है...पर इस वक़्त मेरा जाना ज़्यादा ज़रूरी था...

आकाश- बेटा.....

मैं- अभी नही डॅड....इट्स अर्जेंट....बाद मे बात करते है....

और थोड़ी देर की फास्ट ड्राइव करके मैं पहुँच गया वर्मा के बंग्लो...

बंग्लो को भीड़ ने घेरा हुआ था...और पोलीस लोगो को बाहर रखने की कोसिस मे लगी हुई थी...

जैसे ही मैने अंदर जाने की कोसिस की तो एक सिपाही ने मुझे रोक दिया...पर रफ़्तार ने मुझे अंदर भेजने का इशारा कर दिया....
 
अंदर जाते ही जो सीन मैने देखा...उसे देख कर तो मेरे रोए काँप उठे....

मेरे सामने 2 लाषे पड़ी थी...एक वर्मा की और दूसरी उसकी बीवी शीला की....जिसे देख कर मुझे सच मे दुख हुआ...क्योकि मैने शीला की मौत कभी नही चाही थी.....

रफ़्तार(धीरे से)- आख़िर तुमने ये किया कैसे....

मैं(चौंक कर)- सीसी..क्या मतलब...तुम्हे लगता है कि मैने इन्हे मारा...

रफ़्तार- नही...मारा तो नही...पर इनकी मौत के ज़िम्मेदार तुम ही हो....ये मैं जानता हूँ....

मैं(झल्ला कर)- तुम चुप रहोगे अभी...और ये बताओ कि यहाँ हुआ क्या था...कौन आया था यहाँ....

रफ़्तार- कोई नही....

मैं(चौंक कर)- मतलब....अर्ररे...वजह कोई भी हो...पर कोई तो होगा...जिसने इन्हे मारा....मैं उसके बारे मे पूछ रहा हूँ....

रफ़्तार- वही तो मैं बोल रहा हूँ...इन्हे मारने कोई नही आया....

मैं(झल्ला कर)- तो क्या दोनो ने ख़ुदकुशी कर ली...

रफ़्तार- खूड़खुशी तो की है...पर सिर्फ़ वर्मा ने....

मैं(बीच मे)- तो उसकी बीवी को कौन मार गया....

रफ़्तार- वर्मा...

मैं(शॉक्ड)- क्या...वर्मा ने....पर क्यो...

रफ़्तार(मुस्कुरा कर)- वजह तुम जानते हो...और याद नही आ रहा हो तो आज की ब्रेकिंग न्यूज़ देख लो...सब याद आ जायगा....

मैं(सिर पीट कर)- ओह माइ गॉड....वो तो मेरा ही प्लान था...पर शीला....उसको क्यो....

रफ़्तार- ये तो सिर्फ़ वर्मा ही बता सकता था....(मुस्कुरा कर)- पर अफ़सोस....अब वो बताने लायक नही रहा....

मैं(रफ़्तार को घूर कर)- हसना बंद करो...और ये बताओ कि पोलीस को क्या मिला....

रफ़्तार- फिलहाल तो आंब्युलेन्स का वेट हो रहा है...फोटोस ले ली लाषो की....पर घर की जाँच बाकी है...

मैं(कुछ याद कर के)- हे...मेरी बात गौर से सुनो....1 मिनट...

और फिर मैने रॉनी को कॉल किया और फिर रफ़्तार को क्या करना है...वो समझा दिया....

रफ़्तार- ह्म...हो जायगा....पर एक बात समझ नही आई....ये दोनो साले नंगे क्यो मरे....

मैं- तुम ये काम तो करो...फिर सारे सवालो के जवाब मिल जायगे...वो भी फुल प्रूफ के साथ...ओके...

और फिर मैं वहाँ से निकल आया और एक सुनसान जगह पर अपनी कार रोक दी.....और सुनसान मैदान मे जा कर बैठ गया.......

मैं(मन मे)- ये क्या हो गया यार....एक और मासूम जान गई....वो भी सिर्फ़ मेरी वजह से....आख़िर क्यो गॉड...मुझसे ही ऐसा क्यो करवा रहा है....क्या बनाना चाहता है मुझे...एक कातिल....एक दरिन्दा....जिसने अपने मक़सद के लिए मासूमो से उनकी जिंदगी छीन ली...हाँ....ओह गॉड...

इस वक़्त मुझे सच मे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था...क्योकि मैने शीला की मौत कभी नही चाही थी.....इसलिए मैने रॉनी कोभी समझा दिया था...कि जो भी करना...उसमे शीला के उपेर कोई आँच ना आए....पर फिर भी शीला मारी गई....

शीला के साथ-साथ ही मुझे बाकी सबकी मौत भी याद आ गई जो अब तक मेरे इस झमेले की वजह से मारे गये......

इस तरह अपने आप को कोसते हुए मेरी आँखे नम हो गई और मैं रोते गुए वही बैठा रहा....पता नही...और कितनी जाने जायगी.....

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संजू के दोस्त, अमर के घर...........

आज भी संजू अमर के घर चुदाई करने मे लगा हुआ था....इस समय वो अमर की माँ सूमी को धड़ाधड़ चोद रहा था......

सूमी- आआहह......और तेज साले.....और दम लगा....आअहह....

संजू- ये ले कुतिया....ये ले....ईएहह......

सूमी- आअहह...बस...इट्टन्न्ना..हहीी...ऊहह....और तेज.....और...आआअहह....

संजू- तेरी माँ की....ये ले...ये ले....अब फाड़ ही दूँगा...यीहह.....

सूमी- तो फाड़ ना कुत्ते....आआअहह....ये हुई ना...आअहह...और तेज.....बस...थोड़ा और....आआअहह....मैं..आाऐययईई.....

संजू- एस....एस...ययइईईहह......ले साली....भर दी तेरी.....ईईहह.....

और दोनो ही झड कर बाद पर लस्ट पड़ गये....और थोड़ी देर बाद नॉर्मल हो कर बातें शुरू कर दी....

संजू- आंटी....अब तो बताओ....ये सब क्यो किया....

सूमी- अरे तू भी....थोड़ा रुक....फ्रेश हो कर बात करते है.....

फिर दोनो फ्रेश हुए और रेडी हो कर बातें करने लगे....

संजू(गुस्से से)- अब आप बोलती है या फिर....

सूमी(बीच मे)- फिर क्या...क्या करोगे तुम....

संजू(घूर कर)- मैं अंकित को सब सच-सच बता दूँगा....समझी....

सूमी(हंस कर)- अच्छा....जा बता दे...पर याद रखना....उसे बाकी सब भी बताना होगा...जो तू बता नही सकता...है ना ...

संजू(झल्ला कर)- आख़िर ये तो बताओ कि आपने ये सब क्यो किया...कम से कम मुझे इस झमेले मे डालने की वजह तो बताओ....हुह...

सूमी- देख बेटा....बड़ी सीधी सी बात है...हर एक इंसान अपनी फ़िक्र करता है...और अपनी सुरक्षा का इंतज़ाम करता है...मैने भी तो वही किया...बस....

संजू(गुस्से से)- चुदाई करवाने से कौन सी सुरक्षा होती है...ज़रा मुझे भी तो समझाओ....

सूमी(मुस्कुरा कर)- श...छुदाई....अरे वो तो बोनस है...असल मक़सद तो खुद की हिफ़ाज़त ही थी....बाकी चुदाई तो....वो तो बस अपनी तड़प मिटाने के लिए करती हूँ....आदत से मजबूर हूँ ना....

संजू- अच्छा...और अपनी बेटी को भी चुदवा डाला...ये कैसी मजबूरी थी....

सूमी(मुस्कुरा कर)- अरे...वो तो तेरा बोनस था...माँ के साथ बेटी फ्री...हहहे....

संजू(गुस्से मे)- बस...बस बहुत हो गया....आज मैं पता करके ही रहुगा कि आप हो कौन और आपकी अंकित से क्या दुश्मनी है....और ये आपको बताना ही होगा....समझी...

सूमी(घूर कर)- और ना बताऊ तो...

संजू- तो आप सोच भी नही सकती कि आपका क्या हाल होगा...देख लेना....

सूमी(हंस कर)- ह्म...जानता है ना कि तू क्या बोल रहा है...एक बार फिर से सोच ले....

संजू(खड़ा हो कर)- मुझे कोई बकवास सुनने का मन नही...बाइ...

संजू गुस्से से गेट की तरफ निकला कि तभी सूमी फिर से बोल पड़ी...और इस बार उसकी आवाज़ बिल्कुल कड़क थी....

सूमी- ये लड़के...तू अपना मुँह बंद रख कर तमाशा देख बस....यही तेरे और तेरी फॅमिली के लिए ठीक होगा...वरना तू अंजाम तो जानता ही है..ह्म...याद रखना....

संजू को गुसा तो आया पर वो बिना कुछ बोले वहाँ से निकल गया.......और पीछे सूमी मुस्कुरा उठी.....

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अकरम के घर...........

अकरम अपने रूम मे चक्कर लगा रहा था...इस वक़्त उसका माइंड कुछ सोच रहा था...सयद रिचा की बातों के बारे मे या फिर उसके गायब होने के....कुछ भी हो...पर वो इस वक़्त अपने माइंड को शांत नही रख पा रहा था....

थोड़ी देर बाद वो बेड पर बैठ गया और अपने दिल मे पैदा हो रहे सवालो के जवाब अपने आप से पूछने लगा.....

थोड़ी ही देर मे अकरम को अहसास हुआ कि कोई उसके बाजू मे बैठा हुआ है....

अकरम(चौंक कर)- त्त..तुम...ज़िया, तुम कब आई....

ज़िया- क्या बात है भाई...इतने खोए हुए हो कि मेरे आने का भी पता नही चला....सब ठीक तो है....

अकरम- हाँ..सब ठीक है...

ज़िया- पर आपका चेहरा तो सॉफ बोल रहा है कि आप परेशान हो...ह्म...

अकरम- नही..ऐसा कुछ नही...सब ठीक है...वाई द वे...तुम कैसे आई...आइ मीन कोई काम है क्या...

ज़िया(अकरम के लंड पर हाथ फिरा कर)- प्यासा कुवे के पास चलकर क्यो आता है भाई...क्या तुम्हे इतना भी पता नही...

अकरम(ज़िया का हाथ पकड़ कर)- नही ज़िया...अभी नही...अभी मेरा मूड नही...

ज़िया(लंड मसल्ते हुए)- मूड बनने मे कितना टाइम लगता है भला..ह्म...मैं बनाती हूँ ना....

अकरम(बेबस हो कर)- ज़िया...समझो ना...प्ल्ज़्ज़...

ज़िया- भाई...आप तो जानते ही है कि मैं ये प्यास सहन नही कर सकती ...है ना....

अकरम- हाँ...पर...अभी...उउंम्म.....

और ज़िया ने आगे बढ़कर अकरम के होंठो पर अपने होंठ टिका दिए....और किस करते हुए अकरम का लंड मसल्ने लगी.....

अकरम- उउउंम्म....आ..ज़िया...नही ना...उउंम्म...

ज़िया- सस्स्रररुउउउप्प्प...प्ल्ज़ भाई...उूउउम्म्म्म.....लेट्स डू इट....उउउंम्म...उउंम्म...

ज़िया ने कुछ देर मे ही अपनी हरक़तो से अकरम की ना को हाँ मे तब्दील कर दिया और अकरम भी पूरे जोश से ज़िया का साथ देने लगा......

थोड़ी देर की किस्सिंग और मस्का-मस्कि के बाद ज़िया ने अकरम का लंड आज़ाद किया और मुँह मे भरकर चुसाइ शुरू कर दी...और अकरम भी मज़े से लंड चुसवाने लगा.....

ज़िया- सस्स्रररुउउउप्प्प्प....उउउंम्म..उउंम...उूउउम्म्म्मम...उूुुुुउउम्म्म्ममम.....

अकरम- श...ईीस्स...ज़िया....उउफ्फ...क्या चूस्ति हो...आअहह...करती रहो.....

ज़िया- सस्स्र्र्ररुउउउप्प्प्प....सस्स्ररुउउउप्प्प्प....सस्स्रररुउउउप्प्प्प्प....सस्स्रररुउउप्प्प्प.....उूउउम्म्म्मम....आहह...उउउम्म्म्मम...उउउंम्म...

अकरम- ईसस्स....कम ऑन ज़िया...फास्ट....फास्ट....ओह्ह्ह.....

ज़िया- उउउंम्म...उूउउम्म्म्म....उउउम्म्म्म...उूउउम्म्म्म....उउउम्म्म्म...उउउम्म्म्म...

थोड़ी देर की चुसाइ मे अकरम का लंड छेद मे जाने के लिए मचलने लगा.....

अकरम- ओह ज़िया...अब नही..आहह...अब आ भी जा...उउंम...

ज़िया-आहह...हाँ भाई....मुझसे भी नही सहा जाता...अब डाल दो....

और फिर अकरम ने ज़िया की चूत चुदाई शुरू कर दी.....और करीब 20 मिनट की चुदाई मे ज़िया को 2 बार झडा दिया....

अकरम- आअहह....ज़िया...तेरी गांद बड़ी प्यारी है...गाड़ मार लूँ......

ज़िया- मार लो भाई...सब आपके लिए है...चूत भी और गांद भी...सोचो मत....पेल दो....

और फिर अकरम ने ज़िया को कुतिया बनाया और गांद मारना चालू कर दी....

ज़िया- आअहह.....भाई...कैसे लगी बेहन की गांद...उउंम...

अकरम- आहह...बहुत मस्त....गरमा-गरम...अब रोज मारूगा...ईएहह......

ज़िया- ओह..भाई...मार लेना....ऐसे ही...ओह्ह...आहह...आहह...आअहह...

अकरम- एस ...एस्स...एस....आहह...

ज़िया- आअहह....फाड़ दो भाई.... ..एस....एस्स..उउंम..आअहह..आहह..आहह...

अकरम- आहह....ज़िया.....मज़ा आ रहा है....

ज़िया- हाँ भाई...आअहह....बहुत...उउंम..ओह एस्स...आअहह....

थोड़ी देर बाद ज़िया फिर से झड गई...पर अकरम का अभी बाकी था...तो अकरम ने ज़िया का मुँह चोदना शुरू कर दिया....

अकरम- ज़िया..अब मुँह से झडा मुझे...ईएहह.....

ज़िया- उउंम...उउउंम्म...उउउंम्म...उउउंम्म...उउउंम्म...

अकरम- ओह ज़िया...क्या बात है...तेरा तो हर छेद मस्त है.....ये ले ...यीहह....

ज़िया- उउउंम्म...उूउउंम्म...उउउम्म्म्म...उूउउंम्म...उूउउम्म्म्म...

अकरम- एस...बस...थोडा और....मैं...मैं आया...आआहह..

ज़िया- उूुुउउम्म्म्ममम...उूुउउम्म्म्म...उूुउउम्म्म्मम...

अकरम झड्ने लगा और उसका लंड रस ज़िया के पेट मे सरकता गया....

यहा दोनो अपनी भूख मिटाने मे बिज़ी थे...और गेट पर कोई इनकी हवस का नंगा नाच देख कर सुलग रहा था...जिससे ये दोनो अंजान थे......

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