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चूत की खिलाड़िन

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Guest


रसीली की रसभरी रातें


के आगे पढ़िए !

घर में 3-4 दिन हंसी मजाक में निकल गए। चार दिन बाद चूत खुजलाने लगी, छठे दिन तो रात को ऐसा लगने लगा कि अभी कोई लौड़ा घुसा दे ! उंगली कर कर के थक गई लेकिन काम पिपासा शांत ही नहीं हो रही थी।

मैं रसोई में गई, एक पतला चिकना सा बैंगन निकाल कर लाई और उसे चूत में घुसाया तब थोड़ी सी शांति मिली। लेकिन लंड जैसा मज़ा नहीं आया।

अगले दिन कुसुम मौसी मेरे घर 3-4 दिन रहने आईं। मौसी मेरी अच्छी सहेली थीं, उनकी उम्र 40 साल के करीब थी। रात में मेरे साथ सोई, हम दोनों बातें करने लगे, मेरे उनके बीच कोई पर्दा नहीं था। मैंने उन्हें बता दिया कि कैसे मेरी चूत और गांड इन्होंने अपने मोटे लंड से पेल दी और यह भी बता दिया कि मेरी चूत आजकल पूरी गर्म भट्टी हो रही है। रात को 69 में होकर हम दोनों ने एक दूसरे की चूत चूसी, इसके बाद उन्होंने एक मोटी मूली मेरी चूत में अंदर तक पेली तब रात में मुझे थोड़ी शांति मिली।

मैंने मौसी को अपने पास ही रोक लिया। दो दिन बाद मेरी चचेरी बुआ का लड़का अतुल मुझसे मिलने आया।

मौसी बोली- आज रात मैं अतुल और तू साथ साथ सोएँगे, बड़ा मज़ा आएगा।

उन्होंने मेरे कान में भी कुछ फुसफुसाया रात को चूत का खेल खेलना था।

अतुल 22 साल का लड़का था, हम लोग आपस में खूब हंसी मजाक करते थे, आजकल वो दिल्ली में नौकरी कर रहा था। उसने मेरा हाथ दबाया और पूछा- सपना दीदी शादी करके कैसा लग रहा है?

मैंने हाथ दबाते हुए कहा- बड़ा मज़ा आ रहा है।

रात को खाने के बाद मौसी अतुल को मेरे कमरे में ले आईं। गयारह बज रहे थे, ऊपर छत पर सिर्फ एक कमरा था। अतुल जाने को हुआ तो मौसी बोलीं- यहीं सो जाओ, अब नीचे क्या जाओगे? कपड़े उतार लो, इससे क्या शर्माना, इसकी तो अब शादी हो गई है।

डबलबेड पर मौसी ने अतुल को बीच में सुला दिया। कमरे में अँधेरा था, अतुल पेंट पहने था, मैं अतुल से बात कर रही थी, मैंने उसका हाथ पकड़ रखा था। चूत भट्टी हो रही थी।

मैंने अतुल से कहा- गर्मी बहुत हो रही है, मैं साड़ी उतार देती हूँ !

मैंने अपनी साड़ी उतार दी अब मैं पेटीकोट और ब्लाउज में थी। मैंने अतुल से कहा- बाहर तक आ जाओ, मुझे बाथरूम जाना है !

बाहर चांदनी रात थी, बाहर आकर मैंने नाली पर अपना पेटीकोट पूरा ऊपर तक उठाकर पेशाब किआ तो मेरी नंगी गांड पीछे से पूरी दिख रही थी, अतुल चोर नज़रों से मेरी गांड देख रहा था।

कमरे में आकर मैंने अपने ब्लाउज के 2 बटन खोल लिए और अतुल से धीरे से बोली- तुम भी अपनी पेंट-शर्ट उतार दो, आराम से लेटो !

अतुल ने अपनी पेंट शर्ट उतार दी, अब वो चड्डी बनियान में था।

एक दूसरे की तरफ मुँह करके हम दोनों लड़कियों की बातें कर रहे थे, मेरी चूत की चुलबुलाहट मुझे परेशान कर रही थी, साथ ही साथ मुझे यह भी लग रहा था कि अतुल का लंड भी झटके खा रहा है।

मैंने जब अतुल से पूछा कि उसने किसी की चूचियाँ दबाई हैं तो गर्मी से भरे अतुल ने अपना हाथ मेरे नंगे पेट पर रख दिया। मेरी चूत गीली हो रही थी, मैंने उसका हाथ उठाकर अपने ब्लाउज में घुसवा लिया, उसने मेरी चूचियाँ कस कर दबा ली और मुझसे चिपक गया। मैंने अपना ब्लाउज उतार दिया और चुचूक उसके मुँह में लगा दिए, अतुल के लंड पर मेरा एक हाथ चला गया, उसका लंड मेरे पति से छोटा और पतला था लेकिन इस समय मैं लंड की भूखी औरत थी। यह सब मौसी की सहमति से हो रहा था, मुझे कमरे में किसी का डर नहीं था।

मैंने अपना पेटीकोट भी उतार दिया, अब मैं पूरी नंगी थी, अतुल के कान में कहा- कपड़े उतार लो और और सेक्स के मज़े लो ! मौसी से मत डरो मौसी गोली खाकर सोती हैं, अब सुबह ही उठेंगी।

अतुल ने कपड़े उतार लिए, छः इंची अतुल का लंड मैंने हाथ से पकड़ अपनी चूत के मुँह पर लगा दिया, अतुल ने एक धक्का धीरे से मेरी चूत पर मारा, मैंने नीचे होते हुए पूरा लंड चूत में घुसवा लिया और अतुल के कान में फुसफुसाई- अब चोदो ना !

अतुल ने चोदना शुरू किया लेकिन दो-तीन झटकों में ही वो झड़ गया, मैं समझ गई कि यह इसका पहला अनुभव है। अतुल को मैंने अपने नंगे बदन से 10 मिनट तक चिपकाए रखा। जवान लड़का था, लंड 10 मिनट बाद दुबारा तैयार था। इस बार चूत में अच्छी तरह से अंदर गया और मेरी चुदाई का खेल शुरू हो गया। चूत लंड से चुद कर ख़ुशी महसूस कर रही थी, अतुल धीरे धीरे चोद रहा था, उसे पता नहीं था कि मौसी के सहयोग से आज मेरी चूत में उसका लौड़ा घुस रहा था। अतुल का लौड़ा पतला 6 इंची लम्बा था लेकिन लंड से चुदने का मज़ा तो अलग ही होता है गाज़र मूली डालने में वो मज़ा कहाँ आता है।

अतुल भी मुझे पेल कर ख़ुशी का अनुभव कर रहा था। अतुल ने रात में दो बार मुझे चोदा इसके बाद हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर सो गए।

अगले दिन सुबह बड़ा अच्छा लग रहा था, चूत की कुलबुलाहट शांत हो गई थी। अतुल घर में दो दिन रुका, रात को मौसी के सहयोग से हम दोनों ने चुदाई के मस्त मज़े लिए। उसके जाने के बाद मौसी ने मेरी चुटकी काटी और बोलीं- मज़ा आ गया ना?

मैं बोली- मौसी, बड़ा मज़ा आया।

मौसी बोलीं- चूत की खिलाड़िन बन ! सारे सुख मिल जाएँगे।

इसके बाद माँ आ गईं, बोलीं- मुन्नी बीस की हो गई है, अच्छे लड़के को दहेज़ में 10-15 लाख देने पड़ेंगे, इतना पैसा कहाँ से आएगा, हमारे पास तो एक लाख भी देने के लिए नहीं हैं। तू कुछ अपने देवर से इसकी शादी का चक्कर चला !

मौसी मेरे कान में बोलीं- भाभी है, कुछ चूत का खेल खेल ! दोनों बहनें एक ही घर में रहेंगी तो अच्छा रहेगा, पूरी दौलत की मालकिन हो जाएगी।

मुझे मौसी का इशारा समझ में आ गया। कुछ दिन घर में रहने के बाद मैं ससुराल चली गई।

मेरा देवर विनोद 22 साल का शरीफ लड़का था, बैंक और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था। वह एक शर्मीला युवक था। मेरे पति और ससुर की तरह वो रंगीला और औरतबाज आदमी नहीं था। वापस आने के बाद मैंने सोच लिया था कि देवर को अपना दोस्त बनाना है।

 
मौसी मेरे कान में बोलीं- भाभी है, कुछ चूत का खेल खेल ! दोनों बहनें एक ही घर में रहेंगी तो अच्छा रहेगा, पूरी दौलत की मालकिन हो जाएगी।

मुझे मौसी का इशारा समझ में आ गया। कुछ दिन घर में रहने के बाद मैं ससुराल चली गई।

मेरा देवर विनोद 22 साल का शरीफ लड़का था, बैंक और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था। वह एक शर्मीला युवक था।

मेरे पति और ससुर की तरह वो रंगीला और औरतबाज आदमी नहीं था। वापस आने के बाद मैंने सोच लिया था कि देवर को अपना दोस्त बनाना है।

मेरी सास हर सोमवार को मेरे पति के साथ सुबह 2 घंटे के लिए मंदिर जाती थीं। 2-3 महीने बाद मैंने ध्यान दिया सोमवार में जब भी मैं नहाने जाती थी तो दो आँखें बाथरूम में लगे छेद से मेरी नंगी जवानी का लुत्फ़ लेती थीं। मैं बाथरूम में पूरी नंगी होकर नहाती थी। घर में मेरे देवर और ससुर ही मर्द थे तो मुझे लगा कि मेरा देवर ही मुझे नंगी नहाते देखता होगा। अगले सोमवार को मैंने तय किया आज देवर को अपना बदन पूरा नहाते हुए दिखाऊँगी।

इस सोमवार को भी दो आँखें बाथरूम के छेद में से झांक रही थीं। मैं पूरी नंगी पानी से भीग रही थी अपना मुँह मैंने दरवाज़े की तरफ घुमा लिया और सोचा देवर को थोड़ा मस्त करती हूँ। अपनी जांघें चौड़ी करके चूत दिखाती हुई चूचियाँ मलने लगी। मैंने 15 मिनट के स्नान में अपनी चूचियाँ हिलाईं और मल-मल कर उन पर साबुन लगाया, चूत को भी रगड़ा और मसला, अपनी तरफ से मैं इस तरह नहा रही थी कि देखने वाले को पूरा मज़ा मिले।

दो महीने तक हर सोमवार को मैंने अपने स्नान का मस्त मज़ा देखने वाले को दिया। मेरा मन कर रहा था कभी देवर घर में अकेला हो तो उससे मज़े किये जाएँ।

एक इतवार को वो दिन आ गया, मेरे ससुर दो दिन के लिए पटना किसी काम से गए थे, सास सुबह पति के साथ पास के गाँव शादी में चली गईं थीं दोनों शाम को ही लौट कर आते। अब घर में देवर और मैं अकेले थे।

सुबह के 7 बज़ रहे थे देवर बाहर से घूम कर आया, रोज़ की तरह मैंने उसके लिए चाय बनाई। जब चाय देने गई तो मैंने आँख मारते हुए अपना पल्लू नीचे गिरा दिया।

मेरे ब्लाउज के 4 बटन टूट रहे थे, अर्ध नग्न उभार दिखाते हुए मैंने उसके गालों पर चुटकी काटी और बोली- मेरे ब्लाउज के बटन ला दो ना ! देखो सारे बटन टूट गए हैं, एक और टूट गया तो संतरे बाहर गिर जाएँगे।

देवर झेंप गया और बटन लेने बाज़ार चला गया। बटन लेकर देवर पाँच मिनट में ही आ गया, मैं बोली- अभी बटन टांक लेती हूँ, पता नहीं बाद में समय मिले या नहीं !

मैंने पीठ उसकी तरफ करते हुए ब्लाउज उतार लिया ब्रा मैंने पहले ही नहीं पहन रखी थी। अब मेरी चूचियाँ झूल रही थीं। उस पर मैंने हल्के नीले रंग की साड़ी डाल रखी थी। साड़ी में से पूरे स्तन चमक रहे थे। देवर की तरफ मुड़ कर आँख मारी और बोली- घर में कोई नहीं है, यहीं बैठो ना ! बातें करते हैं।

अपनी चूचियाँ हिलाती हुई मैं बटन लगाने लगी, देवर एक टक मेरी चूचियाँ देख रहा था। देवर के लंड में हलचल हो रही थी लेकिन सीधा देवर कुछ कह नहीं पा रहा था।

देवर से मैंने पूछा- विनोद, तुमने कभी किसी लड़की को छेड़ा है या दोस्ती करी है?

विनोद बोला- मुझे लड़कियों से शर्म आती है।

“अरे शर्म क्यों आती है? लड़कियाँ तो खुद लड़कों से मस्ती करना चाहती हैं !” इस तरह मैं उतेजक बातें कर रही थी, विनोद झेंप रहा था।

आँख मारते हुए मैंने कहा- विनोद, तुम्हारा मन तो करता है लेकिन तुम शर्माते हो।

देवर का लौड़ा तना हुआ पैंट में मुझे दिख रहा था। आँख मारते हुए मैंने एक स्तन पूरा साड़ी में से बाहर निकाल लिया और पूछा- भाभी का संतरा सुंदर लगता है या नहीं?

जवाब सुने बिना आगे बढ़कर मैंने विनोद का मुँह अपनी खुली हुई चूची के निप्पल पर लगा लिया। देवर मस्त होकर दूधिया स्तन चूसने लगा।

पर तभी दरवाज़े पर खटखट हुई, काम वाली बाई चमेली आई थी। विनोद पूरा गर्म हो रहा था। मैंने उसे हटाकर उसके लंड को पैंट के ऊपर से दबाया और होंटों पर एक पप्पी लेते हुए बोली- मुझ जैसी मस्त भाभी कहीं नहीं मिलेगी ! आज दोपहर को साथ बैठते हैं और मस्ती करते हैं।

मैंने सोच लिया था आज देवर को औरतबाज़ी सिखा कर रहूँगी।

दो बजे तक मेरा काम निपट गया था, मैं देवर को अपने कमरे में ले गई और बोली- सुबह मज़ा आया?

देवर शर्माते हुए बोला- अच्छा लगा !

मैंने अपनी साड़ी उतार दी और आँख मारते हुए पूछा- दुधू पीना है?

देवर थोड़ा सा खुल गया था, झेंपते हुए बोला- हाँ पीना है।

मैंने देवर को अपनी गोद में लेटा लिया और उसके मुँह को बातें करते करते अपनी चूचियों से चिपकाया और बोली- थोड़ा भाभी के माल का मज़ा ले लिया करो ! तुम ही तो एक मेरे दोस्त हो यहाँ पर।

देवर से मस्ती का खेल आज से शुरू हो गया था। मैंने ब्लाउज ऊपर उठाकर अपनी एक चूची निकाल कर उसके मुँह में लगा दी और बोली- लो दूध पी लो, मज़ा आ जाएगा।

देवर चूची चूसते हुए अपने एक हाथ से मेरी दूसरी चूची ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगा। मैंने उसकी शर्ट के बटन खोलते हुए उसकी निप्पल नोचते हुए कहा- नंगी चूची दबाने का अलग ही मज़ा आता है। ब्लाउज खोल लो और आराम से मजे लो।

देवर ने ब्लाउज खोल दिया और एक अनाड़ी की तरह चूचियाँ मसलने लगा। मुझे एक नए खिलाड़ी की जवानी का आनन्द आ रहा था। मैंने एक कदम आगे बढ़ते हुए उसका लंड पजामे का नाड़ा खोलकर बाहर निकाल लिया।

आह ! क्या सुन्दर चिकना सात इंची लंड था।

अब मैं और देवर लेटे हुए थे, उसके लंड को सहलाने लगी, देवर का हाथ मैंने साड़ी के अंदर घुसा लिया और जैसे ही देवर ने मेरी चूत के मुँह को छुआ उसके लंड ने वीर्य की तेज पिचकारी छोड़ दी। यह इस बात का सबूत था कि यह देवर का पहला अनुभव है। वीर्य हम दोनों के ऊपर आकर गिरा। देवर शर्मिन्दा हो रहा था। मैंने उसे चिपकाते हुए कहा- शुरू में सबके साथ ऐसा होता है। आओ अब हम दोनों साथ साथ नहाते हैं।

देवर और मैं बाथरूम में आ गए। मैं पेटीकोट में थी देवर पजामा पहने हुए था मैंने दो तीन मग पानी अपने ऊपर डाले और दो तीन देवर के ऊपर और हंसी मज़ाक करते हुए विनोद का पजामा उतरवा दिया और लंड पर साबुन मलने लगी। लंड पूरा तन गया था, देवर मुझसे चिपक कर मेरी चूचियाँ मसलने लगा मैंने उसका हाथ अपने पेटीकोट के नाड़े पर रख दिया, दो सेकंड में ही मेरा पेटीकोट जमीन पर था।

मैंने देवर की उंगली पकड़ कर अपनी चूत में घुसा ली। अब मेरी चूत में देवर की उंगली घुसी हुई थी, एक दूसरे को पानी से नहलाते हुए हम चूत, लंड और चूचियों पर साबुन मल रहे थे, मज़े ले रहे थे !

देवर ने मुझसे चिपक कर अपना लंड मेरी गांड और चूत पे कई बार लगाया और अपना वीर्य दो बार मेरे चूतड़ों पर छोड़ दिया।

इसके बाद नहाना खत्म करके हम बाहर आ गए और अपने अपने कमरे में चले गए।

देवर से मस्ती का खेल आज से शुरू हो गया था। मैं देवर से अपनी बहन की शादी करवाना चाहती थी, मेरा चूत का खेल शुरू हो गया था। देवर अब जब भी मौका मिलता था, कभी मेरी चूची दबा देता था कभी मेरे चूतड़ मल देता था।

15 दिन बाद देवर और मैं फिर अकेले थे, अबकी साथ साथ हम नहाए तो मैंने उसके लोड़े पर साबुन लगाया और उसके टोप़े पर अपनी जीभ फिरा कर उसे गर्म कर दिया। उसके बाद नहाते हुए देवर मुझे चोदने को उतावला हो रहा था मुझे घोड़ी बनाकर देवर बार बार लंड चूत में घुसाने का प्रयास कर रहा था, उसका मन मुझे चोदने का कर रहा था पर मैंने उसे हटाते हुए उसका लौड़ा मुँह में भर लिया और बोली- अभी चुसाई का मज़ा लो, चुदाई का कुछ बनने के बाद !

चूचियाँ दबवाते हुए मैंने लौड़ा चूस चूस कर देवर का पूरा वीर्य अपने मुँह में भर लिया और उसे ढीला कर दिया।

मेरा देवर अब धीरे धीरे मेरा गुलाम होता जा रहा था।

 
देवर से मस्ती का खेल आज से शुरू हो गया था। मैं देवर से अपनी बहन की शादी करवाना चाहती थी, मेरा चूत का खेल शुरू हो गया था। देवर अब जब भी मौका मिलता था, कभी मेरी चूची दबा देता था कभी मेरे चूतड़ मल देता था।

15 दिन बाद देवर और मैं फिर अकेले थे, अबकी साथ साथ हम नहाए तो मैंने उसके लौड़े पर साबुन लगाया और उसके टोप़े पर अपनी जीभ फिरा कर उसे गर्म कर दिया। उसके बाद नहाते हुए देवर मुझे चोदने को उतावला हो रहा था मुझे घोड़ी बनाकर देवर बार बार लंड चूत में घुसाने का प्रयास कर रहा था, उसका मन मुझे चोदने का कर रहा था पर मैंने उसे हटाते हुए उसका लौड़ा मुँह में भर लिया और बोली- अभी चुसाई का मज़ा लो, चुदाई का कुछ बनने के बाद !

चूचियाँ दबवाते हुए मैंने लौड़ा चूस चूस कर देवर का पूरा वीर्य अपने मुँह में भर लिया और उसे ढीला कर दिया।

मेरा देवर अब धीरे धीरे मेरा गुलाम होता जा रहा था।

एक दिन देवर का बैंक में सलेक्शन हो गया, इंटरव्यू 15 दिन बाद दिल्ली में होना था। मुझे जब यह पता चला तो मौका देख कर मैंने उसकी पैंट में से लौड़ा निकाल कर जी भर कर चूसा और वीर्य मुँह में गटकते हुए बोली- अगर तुम सलेक्ट हो गए तो तुम्हारे लौड़े को अपनी चूत में डलवाऊँगी।

विनोद मुझसे बोला- भाभी, अगर दिल्ली में कोई रिश्तेदार हो तो 15 दिन इंटरव्यू की तैयारी कर आता !

मैंने कहा- तुम सामान बांधो, इंतजाम मैं करती हूँ।

अतुल की याद आई मुझे, मैंने उसे फोन करके कहा- मेरा देवर तुम्हारे साथ आकर रहेगा, उसका ख्याल रखना, अगली बार जब मिलोगे तो मस्त कर दूँगी।

अतुल बोला- दीदी, आपको तो मैं ना तो नहीं कह सकता।

देवर दिल्ली चला गया, सारा खर्च अतुल ने उठाया। वहाँ से अतुल ने फ़ोन पर मुझसे बात की, हमारे बीच कुछ गुप्त बातें हुईं।

20 दिन बाद विनोद लोट आया, उसने मुझे बताया- इंटरव्यू बहुत अच्छा हुआ।

मैंने अनजान बनते हुए कहा- इंटरव्यू वगैरा तो पैसे कमाने के लिए होते हैं। मेरी पहचान के एक रिश्तेदार हैं वो दो लाख में सलेक्शन करा देते हैं।

विनोद ने मेरी सास को यह बात बताई तो वो मुझसे चुपके से बोलीं- हम 2 लाख दे देंगे, तू बता दे कब देना है !

मैंने उनसे दो दिन बाद पैसे लिए और बोली- विनोद को मत बताना, वर्ना उसे दुःख होगा ! और वो आई ए एस और पी सी एस की तैयारी नहीं करेगा।

15-20 साल पहले रिजल्ट पेपर में दो हफ्ते बाद आता था। अतुल से मैंने दो हफ्ते पहले ही रिजल्ट पता कर लिया था विनोद सलेक्ट हो गया था, सास के पैसे मैंने अपनी माँ के पास रखवा दिए और सास से बोली- विनोद का सलेक्शन हो जाएगा लेकिन आप किसी को बताना नहीं, नहीं तो रिजल्ट केंसिल हो जाएगा।

मैंने एक हफ्ते को अपनी बहन को बुला लिया और विनोद से उसे चिपकाने लगी। दोनों में दोस्ती हो गई थी। थोड़ी बहुत चूचियों की मसलाई और चूमा चाटी भी हो गई थी।

एक हफ्ते बाद वो चली गई। दो दिन बाद विनोद चिल्लाता हुआ आया कि बैंक में उसका सलेक्शन हो गया है।

सब लोग बहुत खुश हुए सास ने छुपकर मुझे धन्यवाद भी दिया।

दो दिन बाद अकेले में मौका देखकर देवर मेरी गोद में आकर लेट गया और बोला- अब वादा पूरा करना है।

मैंने उसके लंड को सहलाते हुए कहा- औरत का असली सुख चूत मारने पर ही मिलता है। रविवार को सभी हाट में जाएँगे। तब तुम अपनी जानू भाभी की चूत मार सकते हो। अब तुम जवान हो गए हो, खाने की तरह तुम्हें चूत चोदने की भी भूख लगेगी, वादा करो कि बाहर की गन्दी औरतों को कभी नहीं चोदोगे, जब तक अकेले हो, जब भी मन करेगा मुझे बताओगे।

मैंने अपने दूध खोल कर देवर को पकड़ा दिए थे और मैं उसका लण्ड निकाल कर सहलाने लगी, देवर के कान में फुसफुसा कर बोली- मेरी बहन से शादी कर लो ! दो दो चूतों के मज़े जिन्दगी भर लोगे और भाभी की सहेलियों की भी चूत चोदने को मिलेगी।

देवर बोला- मैं तो तैयार हूँ लेकिन माँ और बाबूजी तैयार नहीं होंगे।

मैंने कहा- वो मुझ पर छोड़ो, तुम तो तैयार हो ना?

लौड़े की मस्ती और चूचियों की गर्मी ने उसे कमज़ोर बना दिया, उसने हाँ भर दी।

एक विकेट गिर गया था, अभी सास और ससुर के दो विकेट गिराने बाकी थे।

रविवार को सभी लोग ट्रेक्टर में सवार होकर शहर चले गए थे। देवर ने पढ़ाई का बहाना बना दिया। अब देवर और मैं घर पर अकेले थे। देवर ने मुझे आकर कोली में भर लिया और अपने से चिपकाते हुए बोला- भाभी आज तो बात पक्की है न?

मैंने आँख मारते हुए कहा- चूत तो औरत की मारी जाती है, भोंसड़ी के ! भाभी कहते हुए मारेगा, तो क्या मार पाएगा। मैं तो अब तेरी कुतिया हूँ, आज तो घर में भी कोई नहीं है, अब देर न कर ! जल्दी से चोद दे, तेरा चिकना लौड़ा एक महीने से सहला सहला कर तो मैं भी बहुत प्यासी हो रही हूँ। देर क्यों कर रहा है कुत्ते? जल्दी से नंगी कर और अपना लंड पेल। तेरी भाभी की कुतिया चूत तुम्हारे लंड को घुसवाने के लिए तुझसे ज्यादा पगला रही है।

 
जब चोदे तो भाभी-शाभी सब भूल के चोदियो, अब जल्दी लौड़ा निकाल और इस रसीली रांड को चोद।

देवर अपने कपड़े उतारने लगा, भरा हुआ बदन था, आगे बढ़कर उसकी निप्पल नोचते हुए मैं बोली- क्या गोरा बदन है ! जल्दी से मुझे भी कपड़ों से आजाद कर दे ! पूरी चूत पानी पानी हो रही है !

देवर ने आगे बढ़कर मेरी साड़ी उतार दी और ब्लाउज भी उतार कर मुझे निरावृत-वक्षा यानि टॉपलेस कर दिया और मेरे चूचों को मसलते हुए चूसने लगा।मेरा हाथ उसके कच्छे में घुस गया था, क्या कड़क लंड हो रहा था, हाथ से सहलाने पर और मोटा हो गया था, मैं काम अग्नि से जल रही थी।

देवर बोला- चलो भाभी, लेटते हैं।

मैंने देवर की चड्डी उतारते हुए कहा- भाभी गई भाड़ में ! मैं तो इस समय रंडी हूँ ! जो चाहे वो गाली बक कर चोद लेकिन दोबारा भाभी बोला तो मैं चली और तू अपने लंड की मुठ मार लेना।

देवर का लंड हिलाते हुए बोली- कितना सुंदर कुंवारा लंड है, तेरे लंड को देखकर तो अच्छी अच्छी सावित्रियाँ का मन डोल जाएगा। आह, पहले इसे चूसने दे, फिर जम कर अपनी भोंसड़ी में डलवाती हूँ !

देवर की चड्डी हटाकर मैंने दो मिनट तक उसका लंड चूसा, उसके बाद हम बिस्तर पर आ गए।

मैं बिस्तर पर जांघें फ़ैला कर लेट गई और देवर से बोली- चुचू के मुरब्बे चड्डी उतार ! सोच क्या रहा है?

देवर ने मेरी चड्डी उतार दी और चिकनी चूत पर हाथ फिराते हुए बोला- आह, कितनी मस्त चूत है।

देवर ने मेरी चूत पर लंड लगा दिया और चूचियाँ पकड़ कर मेरे ऊपर लेट गया और मेरी गेंदों को गोल गोल घुमाने लगा, दो तीन बार लंड को धक्का दिया, लंड अंदर घुस ही नहीं रहा था।

मैं बोली- साले, हरामी तेरे बाप और भाई तो गाँव की औरतों की चूत और गांड 19 साल की उम्र से चोदते आ रहे हैं और तूने अभी तक चूत में घुसना भी नहीं सीखा है? मादरचोद छेद पर लगाएगा तभी तो अंदर घुसेगा !

हाथ से उसका लंड पकड़ कर थोड़ा नीचे करके मैंने अपनी चूत के होंटों पर लगा दिया और बोली- अब धक्का मार !

देवर में ताकत तो थी ही, एक ही धक्के में लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया, मैं उन्माद से चिल्ला उठी- आह… आह… आह… उह… मज़ा आ गया… आह… और चोद मेरे प्यारे विनोद कुत्ते… क्या ठोका है… फाड़ दे इस कुतिया की… मज़ा आ गया !

मैंने देवर का मुँह अपनी चूचियों पर लगा लिया, देवर धीरे धीरे मेरी चूत में धक्के मार रहा था। धीरे धक्कों से नए लंड से चुदने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।देवर की यह पहली चुदाई थी, उ… आह… उह… आह… की आवाज़ों से कमरा गूंज रहा था, हम दोनों चुदाई के मज़े ले रहे थे।

5 मिनट की चुदाई के बाद देवर झड़ गया तो मैंने उसे अपने स्तनों में चिपका लिया। देवर का लंड फिर सुलगने लगा था। देवर के बाल सहलाते हुए मैंने उसके कान में कहा- कुत्ते, तूने तो मेरी कुतिया चूत को मस्त कर दिया, चल तेरे लिए दूध लाती हूँ ! उसके बाद दुबारा खेलते हैं।

दूध पिलाने के बाद देवर को अपनी गोद में लिटाते हुए देवर के लंड की मालिश करने लगी, देवर से बोली- गाली सुनते हुए चुदने में मुझे बड़ा मज़ा आया, तुम्हें बुरा तो नहीं लगा?

देवर मेरी चूचियों से चिपकता हुआ बोला- आज तो मुझे जीवन का सबसे बड़ा आनन्द आया है, एक बार और चोदने का मन कर रहा है। देवर का लंड फिर कड़क हो गया था, मैंने उसके होंटों को चूमते हुए कहा- 6 बजे के बाद रात ही सब आते हैं, तब तक एक बार नहीं जितनी बार तुम कहोगे उतनी बार अपनी चूत में तुम्हारा लंड लूँगी।

झूठा नाटक करते हुए मैं बोली- सच तुम्हारा लंड तो बहुत अच्छा है, कितनी देर तक मेरी चूत इसने चोदी है, मुझे तो इतना मज़ा कभी नहीं आया। तुम्हारे भैया तो एक मिनट से ज्यादा चोद ही नहीं पाते हैं। अबकी प्यार से रसीली बोलते हुए चोदना।

देवर को उठाते हुए बोली- अब इस रसीली को अपने लौड़े पर बिठाओ।

देवर दोनों जांघें फ़ैला दीं, लौड़ा पूरा ऊपर की ओर तना हुआ था, बिस्तर पर फिसलती हुई मैं देवर की गोद में इस तरह से बैठ गई कि देवर का लंड मेरी चूत के मुँह पर टन टन कर रहा था, चूचियों की घुन्डियाँ उसके हाथ में खेल रही थीं।

मैं देवर से बोली- मेरी चूत के राजा इस हरामी लंड को टन टन क्यों करा रहे हो, चूत में पेलो ना !

और अपने को थोड़ा उठाते हुए लंड चूत में डलवा लिया। लंड अब आराम से चूत में घुसा हुआ था और दोनों चूचियाँ दब रहीं थीं।

विनोद चूचियों का दबा दबा कर जूस निकाल रहा था, उसने मेरे ऊपर झुककर मेरे होंट चूसना शुरू कर दिए थे।

आह मस्त मज़ा आ रहा था !

इसके बाद बहुत देर तक इस आसन में बैठकर हम मज़े लेते रहे, लौड़ा चूत में डला हुआ था। अब मेरा मन कर रहा था कि मेरी चूत की पिलाई हो !

थोड़ी देर बाद मैं बिस्तर पर आगे झुक गई और बोली- विनोद अब चोद दे ! चूत में तड़प ज्यादा हो रही है !

और मैं पलंग पर घोड़ी बन गई, मेरी पनीली चूत पर हाथ से पकड़ कर देवर ने लंड पीछे से छुला दिया और देर किये बिना चूत में लंड घुसा दिया।

आह ! एक कुशल खिलाड़ी की तरह विनोद मेरी चूत पेलने लगा।

“उह… उह… आह… पेल मेरे राजा, पेल ! आह ! और चोद ! चोद ! क्या चोदता है कुत्ते, मज़ा आ गया ! पेल और पेल ! वाःह वाह, क्या मस्त मज़ा दिया है, पूरी फाड़ डाली है, चोद और चोद ! बड़ा मज़ा आ रहा है !” वाह क्या चुदाई हुई थी।

देवर अब चोदू देवर में बदल गया था। चुदाई के बाद हम हट गए। शाम के 3 बज़ रहे थे उठकर मैंने साड़ी ब्लाउज पहन लिया, अब मैं एक शरीफ और शर्मीली दुल्हन लग रही थी। मैंने पास से एक कागज़ निकाला और बोली- अगर तुम्हें मज़ा आया है तो इस पर ‘आई लव यू’ लिख दो।देवर ने बिना देर किये ‘आई लव यू ! विनोद’ लिख दिया। यह मेरी बहन रजनी की फोटो का पीछे का हिस्सा था। देवर की पप्पी लेते हुए मन ही मन बोली- रजनी को तो मैं तुम्हारी बीवी बनाकर रहूँगी।

दो दिन बाद देवर की पोस्टिंग बैंक ऑफिसर के पद पर गाँव से दो घंटे की दूरी पर हो गई अब वो रोज़ बैंक आने जाने लगा।

कहानी जारी रहेगी !

 
4-5 दिन बाद मैंने अपनी बहन को अपने यहाँ बुला लिया। मेरी बहन मेरी तरह बदमाश नहीं थी, विनोद की उससे अच्छी पटी। मैंने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि विनोद उसे चोद न दे। मेरी चुदाई करने के बाद से विनोद का लंड चोदने के लिए फड़फड़ा रहा था।

एक रविवार शाम को घर में कोई नहीं था, मैं खाना बना रही थी, उसने पीछे से मेरे दूध दबा लिए और गांड पर लंड चिपकाते हुए कहा- भाभी चोदने का बहुत मन कर रहा है।

मैंने मुड़कर उसकी पप्पी लेते हुए कहा- मुझे पता है, एक बार चूत चोदने के बाद बिना चोदे नहीं रहा जाता। अब तुम्हारी शादी रजनी से जल्दी करनी पड़ेगी।

देवर बोला- भाभी, लंड में तो आग लगी हुई है, एक बार चूत मारने दो न।

मैंने उसके गालों पर नोचते हुए कहा- मेरी सासू जी बाहर सब्जी ले रही हैं, कभी अकेले होंगे तब मार लेना।

तभी दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई, देवर बाहर भागा।

सासू अंदर आ गई थीं, बोली- बहू, सब्जी रख मैं नहा कर आती हूँ। विनोद, तू बाहर का दरवाज़ा बंद कर दे, गाय आ जाएगी !

सासू नहाने चली गई, विनोद दरवाज़ा बंद करके आ गया, मुझे देखकर कान पकड़ते हुए बोला- बाल बाल बचे !

मैंने इशारे से पास बुलाया और जाकर बाथरूम का दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया।

विनोद आश्चर्य से बोला- बाथरूम में तो मम्मी हैं।

मैंने पीछे से साड़ी उठाते हुए देवर को आँख मारी और बोली- अपना लंड अब जल्दी से मेरी चूत में पेल दे ! रसोई की स्लैब के पत्थर पर मैं झुक गई, देवर ने पीछे से मेरी साड़ी और ऊपर तक उठा दी और पैंट से अपना लंबा सा लंड निकाल कर पीछे से मेरी चूत में पेल दिया और मुझे चोदने लगा। उह आह की आवाजें करते हुए मैं चुदाई का मज़ा लेने लगी।

पाँच मिनट देवर ने जम कर अपने लंड को मेरी चूत में रगड़ा और अपना वीर्य मेरी मटकी में भर दिया।

मैंने देवर की एक पप्पी ली और बोली- अब जाकर बाथरूम का दरवाज़ा खोल दो।

मेरी सास हर सोमवार को मेरे पति के साथ सुबह दो घंटे के लिए मंदिर जाती थीं। सास के जाने के बाद मैं नहाने चली गई। मैं पूरी नंगी होकर नहाती थी, जब मैं नहा रही थी तब मुझे लगा देवर चोर आँखों से झांक कर मेरे नग्न संगमरमरी बदन का नज़ारा ले रहा है। मैंने अपनी चूत में उंगली डाली, इसके बाद अपनी चूचियाँ साबुन से मलते हुए दबाने लगी। दस मिनट तक मैं नहाने का मज़ा लेती रही और देखने वाले को देती रही। नहा कर जब बाहर आई तो एक बीड़ी बाहर पड़ी हुई थी।

अचानक मुझे याद आया देवर तो आज बैंक गए हैं और घर में नहीं हैं, बीड़ी तो घर में सिर्फ ससुर ही पीते है। अब मेरी समझ में आ गया मेरा कुत्ता ससुर ही मेरी नंगी जवानी के मज़े ले रहा था। चंपा पहले ही मुझे बता चुकी थी कि ये मेरे असली ससुर नहीं हैं, ये मेरे पति के चाचा थे और मेरे असली ससुर के मरने के बाद गलत संबंधों के चलते इनकी शादी मेरी सास से हो गई थी। चंपा ने एक बार मुझे बताया था जब भी सास मामा के या कहीं दो-तीन दिन को बाहर जाती हैं तब ये घर में काम करने वाली 33-34 साल की चमेली से अपने बदन की मालिश करवाते हैं और एक बार दो साल पहले पटना के एक होटल में लड़की चोदते हुए पकड़े भी गए थे। मेरे मन में एक कुटिल योजना जन्म लेने लगी।

एक महीने बाद सास को किसी काम से माएके जाना पड़ा। देवर बैंक चले गए थे और पति खेत में चले गए। घर में ससुर अकेले थे। मैं जान कर नौकरानी चमेली के आने से पहले नहाने गई और ससुर जी से बोली- पापा जी, मैं नहाने जा रही हूँ, नहा कर आपकी चाय बना दूँगी।

आदत से मजबूर ससुर ने बाथरूम में झांकना शुरू कर दिया मैं भी बेशर्म होकर नंगी नहाने लगी और उन्हें नग्न जवानी देखने का पूरा मज़ा दिया। मैं चाह रही थी कि ससुर जी का लंड आज पूरा गर्म हो और वो नौकरानी चमेली को चोदें।

चमेली के आने के बाद मैं नहा कर बाहर आई। चमेली ऊपर काम कर रही थी मैंने चाय बनाई और टॉपलेस बदन के ऊपर साड़ी का पल्लू गीला करके डाल लिया, पूरी चूचियाँ साड़ी के बाहर से नंगी चमक रही थीं। चाय लेकर मैं ससुर जी के पास गई और मुस्कराते हुए चाय मेज पर रख दी।इसके बाद जानबूझ कर साड़ी का पल्ला नीचे गिरा दिया दोनों नंगे कबूतर बाहर आ गए ससुर जी का मुर्गा कबूतर देखकर कुकडूं कुं करने लगा। मैंने अपने दोनों दूध ढके और घबराने का नाटक करते हुए बोली- ओह, आपकी चाय बनाने के चक्कर मैं ब्लाउज पहनना तो मैं भूल ही गई।

 
मैं बाहर आ गई बाहर आकर मैंने अच्छी तरह से कपड़े पहने और अंदर जाकर पूरा घूंघट डालकर बोली- पापाजी, आज की बात सासू माँ को मत बताना। मुझे बड़ी शर्म आ रही है। मैं चंपा भाभी के पास जा रही हूँ, एक घंटे बाद आऊँगी। ऊपर चमेली काम कर रही है, कुछ काम हो तो उसे बता दीजियेगा।

ससुर का जवाब सुने बिना मैं दरवाज़े तक आई और दरवाज़ा खोलकर वापस घर में अंदर घुस गई और छुप कर एक कमरे में बैठ गई। मुझे आज चमेली की चुदाई देखनी थी।

जैसा मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ, ससुर 5 मिनट बाद बाहर निकला और उसने बाहर का दरवाज़ा बंद करके चमेली को इशारे से नीचे बुला लिया। छत पर चढ़कर मैंने रोशनदान से देखा तो चमेली ससुर की टांगों पर बैठी थी और ससुर की देसी अंगिया का नाड़ा खोल रही थी। सुसर ने उसकी ब्लाउज को खोलकर उसकी चूचियाँ लपक ली थीं और उन्हें मल रहा था।

थोड़ी देर में ससुर का लंड चमेली के हाथ में था। वाह क्या मोटा लंड था, बिल्कुल मेरे पति की तरह।

ससुर का लौड़ा सहलाते हुए चमेली बोली- आज तो शेर के बहुत दिन बाद दर्शन हो रहे हैं।

ससुर खी खी करते हुए बोला- जल्दी से चुस्सी कर ले, जब से बहू आई है, मौका ही नहीं मिलता है।

चमेली ने खड़े होकर अपना पेटीकोट अलग किया और बोली- कुछ माल तो दे दो !

ससुर ने एक 500 का नोट थमा दिया।

चमेली लौड़े को सहलाते हुए बोली- बहू तो तुम्हारी बड़ी माल है। बाथरूम में झांक झांक कर खूब मज़े लेते हो?

ससुर ने उसकी गांड दबाते हुए कहा- थोड़ा धीरे बोल, दीवारों के भी कान होते हैं। अब जल्दी से लंड चूस, आज तो बहु का नंगा बदन देखकर आग लगी हुई है, क्या माल रसीला बदन है, काश चोदने को मिल जाए।

चंपा झुककर सुसरे का लौड़ा चूसने लगी।

चमेली को हटाते हुए ससुर ने उसे बिस्तर पर लेटा दिया, अपनी टांगें चौड़ी करते हुए चमेली बोली- तुम बाप बेटे ने तो मेरी चूत का भोंसड़ा कर दिया है, अगली बार से हज़ार रुपए लूँगी ! कल साले राजू ने खेतों में पकड़ लिया था, उसने और चंपा के आदमी ने मेरी 1 घंटे तक बजाई। अभी तक दुःख रही है।

ससुर ने चंपा की चूत में उंगली घुसा दी और बोला- नाराज़ क्यों होती है अगली बार से हज़ार पक्के ! कुतिया तेरी जवानी इतनी मदमस्त है, कोई चोदे बिना रह ही नहीं सकता।

ससुरे का लौड़ा चमेली की चूत में घुस चुका था, उसकी चूचियाँ जोरों से हिल रही थीं, ससुर धक्के पर धक्के मारे जा रहा था। शहर में 50 का आदमी ठीक से चल नहीं पाता, यहाँ यह कुत्ता बांका जवान बना हुआ था।

इसके बाद ससुर ने चमेली को अपनी गोद में बिठा लिया और पीछे से लौड़ा उसकी चूत में पेल दिया अंदर घुसा हुआ लंड और चमेली की मसलती हुई चूचियों ने मेरी चूत में आग लगा दी थी। चमेली चूचियाँ दबवाती हुई उह आह करते हुए चुदवा रही थी।

चुदाई चरम सीमा पर थी।

कुछ देर बाद ससुर ने अपना वीर्य त्याग दिया और उठते हुए बोला- थोड़ी तेल मालिश कर दे। आज तो मज़ा आ गया। जब से बहू को नंगी नहाते हुए देखा है, लौड़ा तब से टनक भी बहुत रहा था। साली रसीली की क्या मस्त गदराई हुई मांसल चूचियाँ हैं।

 
चमेली को हटाते हुए ससुर ने उसे बिस्तर पर लेटा दिया, अपनी टांगें चौड़ी करते हुए चमेली बोली- तुम बाप बेटे ने तो मेरी चूत का भोंसड़ा कर दिया है, अगली बार से हज़ार रुपए लूँगी ! कल साले राजू ने खेतों में पकड़ लिया था, उसने और चंपा के आदमी ने मेरी 1 घंटे तक बजाई। अभी तक दुःख रही है।

ससुर ने चंपा की चूत में उंगली घुसा दी और बोला- नाराज़ क्यों होती है अगली बार से हज़ार पक्के ! कुतिया तेरी जवानी इतनी मदमस्त है, कोई चोदे बिना रह ही नहीं सकता।

ससुरे का लौड़ा चमेली की चूत में घुस चुका था, उसकी चूचियाँ जोरों से हिल रही थीं, ससुर धक्के पर धक्के मारे जा रहा था। शहर में 50 का आदमी ठीक से चल नहीं पाता, यहाँ यह कुत्ता बांका जवान बना हुआ था।

इसके बाद ससुर ने चमेली को अपनी गोद में बिठा लिया और पीछे से लौड़ा उसकी चूत में पेल दिया अंदर घुसा हुआ लंड और चमेली की मसलती हुई चूचियों ने मेरी चूत में आग लगा दी थी। चमेली चूचियाँ दबवाती हुई उह आह करते हुए चुदवा रही थी।

चुदाई चरम सीमा पर थी।

कुछ देर बाद ससुर ने अपना वीर्य त्याग दिया और उठते हुए बोला- थोड़ी तेल मालिश कर दे। आज तो मज़ा आ गया। जब से बहू को नंगी नहाते हुए देखा है, लौड़ा तब से टनक भी बहुत रहा था। साली रसीली की क्या मस्त गदराई हुई मांसल चूचियाँ हैं।

चमेली ससुर के लौड़े और जाँघों की तेल मालिश कर रही थी। चमेली ससुर के लौड़े को मुट्ठी में भर कर मस्ती से उसकी मालिश में लगी हुई थी। दोनों नंगे बैठे हुए थे ससुरजी उसकी चूचियाँ मसल रहे थे। मैं एकदम से अंदर घुस गई, दोनों हड़बड़ा कर हट गए। ससुर का लौड़ा पूरा तना हुआ था, मैं कुटिल मुस्कराहट देती हुई बाहर आ गई थी।

कुछ देर बाद चमेली बाहर आ गई और बोली- दीदी, किसी को बताना नहीं, बाबूजी का मन था तो मालिश कर रही थी।

मैंने उसकी चूतड़ों पर हाथ फेरते हुए कहा- मैंने सब देख लिया था। लेकिन तुम घबराओ नहीं और यह ले 1000 रुपए, तुझे एक छोटा सा काम बाद में बताऊँगी, कर देना, अब जब तेरा मन हो, तब ससुर जी से चुदवा लेना, मैं तो तेरी सहेली हूँ मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी। अब तू जा मौज कर।

इसके बाद मैं ससुर के कमरे में आ गई, ससुर झेंपते हुए से कुरता पहन रहे थे, नज़रें नीची करके बोले- रसीली किसी को बताना नहीं, मैं तुम्हारे हाथ जोड़ता हूँ।

कामुक सी अंगड़ाई लेते हुए मैंने कहा- पापा जी, आप बेकार ही परेशान हो रहे हैं।

मैंने नादान बनते हुए 50 साल के ससुर से झूठ बोला- पापा जी मुझे पता है, आप तो अभी सिर्फ 40 के आस पास ही हैं और मम्मीजी आप से 10 साल बड़ी हैं। इस उम्र में तो मन करेगा ही। जब भी घर में हम लोग अकेले हों आप चमेली के साथ जो करना चाहें वो कर लिया करिए, मैं किसी से नहीं कहूँगी।

सुबह चमेली के आने के बाद मेरी सास बाहर भैंसों का काम करने जाती थीं तो 1 घंटे बाद ही वापस आती थीं। अगले दिन मेरी सहमति से चमेली ससुर की मालिश रोज़ इस एक घंटे के बीच करने लगी और सोमवार को जब सासुजी दो घंटे को मंदिर जाती थीं। ससुर साहब लौड़े से चमेली की चूत की मालिश कर देते थे।

ससुर को अब रोज़ मालिश की आदत पड़ गई थी। यह सब मेरे सहयोग से हो रहा था !

एक सोमवार मैं ससुर के पास लो-कट ब्लाउज और पेटीकोट में गई और बोली- पापाजी अगर मेरी बहन की शादी विनोद से हो जाए तो हमारा घर और सुंदर हो जाएगा।

ससुर बोले- तेरी सास नहीं मानेगी। मैंने अपनी नाभि पर उंगली घुमाते हुए कहा- पापाजी, कभी बात चले सासू माँ से तो आप मेरी बहन की तारीफ़ कर देना। आपको तो शादी में कोई दिक्कत नहीं है न?

ससुर जी का चमेली को चोदने का समय हो रहा था, ससुर बोल पड़े- नहीं नहीं मुझे कोई दिक्कत नहीं है, मैं तेरी हर तरह से मदद कर दूंगा। तू जरा चमेली को भेज दे, कुछ काम है उससे !

मैंने कहा- अभी भेजती हूँ।

मैं मुस्करा कर वहाँ से चली आई।

मेरी सास कभी कभी मेरे देवर विनोद का कमरा खुद ही साफ़ कर देती थीं। एक दिन वो कमरा साफ़ करने जा रही थीं, तब मैंने अपनी बहन रजनी की वो फोटो जिसके पीछे विनोद ने आई लव यू विनोद लिखा था, पलंग के नीचे रख दी और दरवाज़े की ओट से देखने लगी।

जैसे ही सास ने पलंग का गद्दा उठाया नीचे मेरी बहन की फोटो रखी थी, फोटो उठाकर वो थोड़ी देर देखती रहीं। मैं पीछे से उनके पास पहुँच गई और अनजान बनते हुए बोली- अरे, यह रजनी की फोटो कहाँ से आई?

 
मैंने मम्मीजी के हाथों से फोटो ले ली, उसका पीछे का हिस्सा मेरी तरफ था उस पर लिखा हुआ था आई लव यू विनोद।

मम्मीजी की तरफ मुड़ते हुए मैंने पीछे का हिस्सा दिखाया और बोली- मम्मीजी, विनोद तो मेरी बहन से प्यार करने लगा है, दोनों की शादी हो जाए तो कैसा रहे?

तभी मेरा ससुरा भी उधर से निकला, मैंने लंबा सा घूँघट डाल लिया और बोली- पापाजी, विनोद मेरी बहन से प्यार करते हैं, देखिये !

और मैंने फोटो उनकी तरफ बढ़ा दी।

ससुर बोले- अरे यह तो अच्छी बात है, दोनों बहनें एक घर में आ जाएँगी तो अच्छा रहेगा।

सास बोली- अभी तू जाकर काम कर ! बाद में बात करना इस बारे में !

फोटो उठाकर मैंने अपने पास रख ली।

अगले दिन रविवार था, मैं सास के पास बैठी थी, देवर उधर से निकला, मैंने पास बुलाकर पूछा- भैयाजी आपको रजनी पसंद है ना, आप उससे शादी करना चाहते हैं ना?

देवर सास का बिगड़ा मुँह देखकर बोलने से डर रहा था। मैंने वो फोटो निकालकर उसे दिखाई और बोली- यह आपने ही तो लिखा है। देवर झेंपते हुए बोला- हाँ मैंने ही लिखा है।

सासू मुँह बनाते हुए बोली- देख रसीली, तेरी शादी में तो लड़की वालों का खर्च भी हमने उठाया था, अब विनोद से बहन की शादी करनी है तो अपने बाप से कहना दस लाख रु दहेज़ के देने होंगे।

मैं बोली- इतना तो मेरे पापा नहीं दे पाएंगे।

सासु बोली- तो मैं अपने विनोद की शादी तेरी बहन से नहीं करती।

शाम को थोड़ी देर के लिए देवर अकेला था, वो मेरे सामने थोड़ा झेंप रहा था, मैंने खुद आगे बढ़कर उसको कस कर चिपकाया और उसके होंटों में होंट डालकर एक लम्बा चुम्बन लिया और बोली- सेक्स का मन कर रहा है?

देवर बोला- मन तो बहुत कर रहा है लेकिन कैसे करेंगे?

मैंने कहा- तुम्हें मेरी दो बातें माननी पड़ेगी।

देवर बोला- क्या?

मैंने कहा- पहली, तुम्हें 30 दिन तक दाढ़ी नहीं बनानी है, और दूसरा, काम 20 दिन बाद मैं तुम्हें बताऊँगी।

देवर बोला- मंजूर है।

मैंने कहा- आज तेरे भैया तो ट्रैक्टर का सामान लेने पटना गए हैं, कल आएँगे, रात को एक बजे छुपकर कमरे में आ जाना, अच्छी तरह से चुदाई का खेल खेले बहुत दिन हो गए हैं।

देवर रात को छुपते हुए मेरे कमरे में आ गया, मैंने उसे अपनी बाहों में भरते हुए कहा- तुमने अपनी माँ के सामने यह बात मान ली कि तुम रजनी से प्यार करते हो। मैं बहुत खुश हूँ, आज मैं पूरी रात तुम्हे मज़ा दूंगी।

“भाभी, माँ ने तो शादी के लिए मना कर दिया है?”

देवर का पजामा नीचे सरकाते हुए बोली- उसकी चिंता न करो, तुम्हारी शादी रजनी से ही होगी। देखो तुम नर्वस हो रहे हो, तुम्हारा लंड पूरा मूंगफली हो रहा है। लाओ इसे पहले चूस कर कड़क करती हूँ !

मैंने अपना ब्लाउज उतारा और इसके बाद देवर के लंड का टोपा बाहर निकाल कर 3-4 बार उस पर अपनी जीभ फिराई। लंड ने हिचकोले मारने शुरू कर दिया था, अब उसे मैंने अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर में ही कड़क लम्बा लंड मेरे सामने था। देवर ने इस बीच मेरे हॉर्न बजा बजा कर चूचियाँ गरम कर दीं थीं। देवर ने मुझे गोद में उठाकर बिस्तर पर लेटा दिया और मेरा पेटीकोट खींच कर नीचे उतार दिया।

देवर अपने हाथ से मेरी चूत सहलाते हुए बोला- रसीली भाभी, चूत तो आपकी बहुत चिकनी हो रही है?

मैंने देवर को भींचते हुए कहा- तुम्हारे लिए की है, एक बार चूस कर देखो ना बड़ा मज़ा आता है !

हम दोनों 69 में लेट गए, देवर ने चूत के दाने पर सीधा मुँह रखा और उसे चूसने लगा।

“आह, कितना मज़ा आ रहा है !” मैंने भी उसका लंड मुँह में डाल लिया। गज़ब का मज़ा आ रहा था, देवर की जीभ मेरी चूत की फलकों में घुस गई थी।

कुछ देर तक हम दोनों ने एक दूसरे के गुप्त अंगों को चूसा इसके बाद मैंने देवर को हटा कर अपने चूतड़ों के नीचे मोटा तकिया रखा और उसकी पप्पी लेते हुए बोली- अब अपनी प्यारी कुतिया भाभी को चोद दो !

देवर ने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा और उसे धीरे से अंदर घुसा दिया और मेरे ऊपर गिरते हुए पूरा अंदर तक पेल दिया।

आह, बड़ा मज़ा आ रहा था। सुबह पति ने चोदा था और अब देवर पेल रहा था, सच मेरी चूत को लौड़े खाने में बड़ा मज़ा आता है। हर लंड से चुदने का एक अलग ही मज़ा होता है। देवर पूरा मज़ा दे रहा था, उसने दनादन मेरी चूत पेलनी शुरू कर दी।

आह… आ… ओह… उह… उह… की आवाज़ों से कमरा गूंजने लगा।

मैं देवर के गालों की पप्पी लेते हुए बोली- थोड़ा लंड को चूत में आराम करने दो, इतना पेलोगे तो थक जाओगे !

देवर ने पेलना रोक दिया, अंदर चूत में मोटा लंड घुसाकर मेरी चुचूकों को चूसने लगा। मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था।

कुछ देर बाद उसने मेरी चूत में 3-4 धक्के और मारे और अपने वीर्य कि मेरी चूत की कन्दरा में भर दिया।

अब हम दोनों चिपक कर बातें करने लगे, देवर ने बातें करते करते मेरी गांड में उंगली घुसा दी और भोले बनते हुए पूछा- भाभी, गांड में भी लंड डाला जाता है ना?

मैंने उसके गाल नोचते हुए कहा- जहाँ छेद हो, लंड तो वहाँ घुस ही सकता है, लेकिन जो मज़ा चूत चोदने का है, वो किसी और जगह का नहीं है। तेरे भैया गांड चोदते हैं, इसी कारण जल्दी झड़ जाते हैं। गांड कभी मत चोदना, लंड कमजोर हो जाता है। दुनिया में जानवर तक गांड नहीं चोदते।

मैं नहीं चाहती थी कि शादी के बाद देवर मेरी बहन की गांड मारे।देवर मेरी बातों से संतुष्ट दिख रहा था। इसके बाद मैंने उसके होंटों पर एक पप्पी ली और बोली- लेकिन पीछे से चूत मारने का मज़ा अलग ही है…

 
कुछ देर बाद उसने मेरी चूत में 3-4 धक्के और मारे और अपने वीर्य कि मेरी चूत की कन्दरा में भर दिया।

अब हम दोनों चिपक कर बातें करने लगे, देवर ने बातें करते करते मेरी गांड में उंगली घुसा दी और भोले बनते हुए पूछा- भाभी, गांड में भी लंड डाला जाता है ना?

मैंने उसके गाल नोचते हुए कहा- जहाँ छेद हो, लंड तो वहाँ घुस ही सकता है, लेकिन जो मज़ा चूत चोदने का है, वो किसी और जगह का नहीं है। तेरे भैया गांड चोदते हैं, इसी कारण जल्दी झड़ जाते हैं। गांड कभी मत चोदना, लंड कमजोर हो जाता है। दुनिया में जानवर तक गांड नहीं चोदते।

मैं नहीं चाहती थी कि शादी के बाद देवर मेरी बहन की गांड मारे।देवर मेरी बातों से संतुष्ट दिख रहा था। इसके बाद मैंने उसके होंटों पर एक पप्पी ली और बोली- लेकिन पीछे से चूत मारने का मज़ा अलग ही है… अब जरा पीछे से एक बार मेरी चूत चोद दो।

मैं बिस्तर पर चूतड़ उचका कर लेट गई।

देवर अब एक अच्छा चोदु हो गया था, उसने बिना देर किये अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया और पीछे से मुझे चोद दिया। एक बार दुबारा मैं वीर्य से नहा गई थी।

अगले दिन से देवर ने मेरे कहे अनुसार दाढ़ी बढ़ानी शुरू कर दी, उसने मुझसे वादा जो किया था। जब 10 दिन बाद दाढ़ी अच्छी बढ़ गई तो सासू ने बहुत कहा लेकिन उसने दाढ़ी नहीं बनाई।

अगले दिन चमेली मेरे सामने कुछ कागज सासू जी को दिखाती हुई बोली- माताजी, ये कागज मुझे विनोद भैया के कमरे से मिले हैं। उन कागजों पर मैंने जान कर खून से ‘आई लव यू रजनी !’ 5-6 बार अपने हाथों से लिख कर चमेली को दे दिया था।

चमेली बोली- माताजी, भैया की हालत ठीक नहीं है। रोज़ शाम को 3-4 दिन से वो शाम को जंगल वाले हनुमान जी के मंदिर के पास जो रेलवे लाइन है उस पर खड़े रहते हैं। कल मैं आपको ले चलूँगी।

मैंने शाम को देवर से कहा- दूसरी बात कल मैं तुम्हें शाम को 4 बजे जंगल वाले हनुमान जी जो रेलवे लाइन के पास है, वहाँ आकर बताऊँगी, अगर मैं 5 बजे तक नहीं आती हूँ तब तुम वापस आ जाना।

अगले दिन चमेली मेरे कहे अनुसार मेरी सास को तीन बजे ही रेलवे लाइन पर ले गई। देवर चार बजे वहाँ पहुँचा और मेरा इंतज़ार करने लगा।

यह सब देखकर सास बहुत डर गई कि कहीं विनोद कट के मर न जाए, दौड़ती हुई विनोद के पास गई और हाँफते हुए बोली- तू घर चल ! मैं तेरी शादी रजनी से करा दूँगी, मुझे कुछ नहीं चाहिए।

देवर कुछ समझ नहीं पाया, वो सासू के साथ वापस आ गया। घर आते ही सास घबराते हुए बोली- रसीली, मैं शादी के लिए तैयार हूँ, मुझे कुछ नहीं चाहिए।

मैंने उन्हें पानी दिया और बोली- मम्मीजी, आप पानी पियें, कल हम इस बारे में बात करेंगे।

मेरा प्लान सफल हो गया था। मैंने शाम को ही देवर की दाढ़ी बनवा दी।

अगले दिन सास से मेरी बात हुई, वो शाम की घटना से डरी हुई थीं, बोली- मुझे पैसे वैसे कुछ नहीं चाहिए। जैसा तुम लोग चाहो, वैसे शादी हो जाएगी।

मैंने उनसे कहा- मेरा भाई कमाने लगा है, पापा मम्मी शादी तो अच्छी करेंगे लेकिन नकद पैसा नहीं दे पाएँगे।

सब बात हो गई। मैंने दो लाख रुपए अपनी माँ के पास पहले ही रखवा रखे थे। इसलिए धूमधाम से शादी में कोई दिक्कत नहीं थी। अगले दिन मैं अपने मायके जाने के लिए तैयार होने लगी। घर पहुँच कर मैंने सारी बात अपनी माँ को बताई, माँ बहुत खुश हुई। जब मैंने माँ से कहा कि मैं दो लाख की शादी बोल आई हूँ और मैंने उनके पास जो दो लाख रखवाए थे उनसे शादी हो जाएगी।

माँ बोली- लेकिन वो तो खर्च हो गए।

यह सुनकर मेरे पैरों के नीचे से जमीन सरक गई, मैंने चिल्लाते हुए कहा- इतने पैसे कहाँ गए?

माँ बोली- बेटी 50 हज़ार तो तेरे भाई को दिल्ली में कंप्यूटर कोर्स कराने में लग गए, उसके बाद ही उसकी नौकरी लग पाई थी। पचास… एक बार…

माँ कुछ हिचकिचा रही थीं, मैंने कहा- बोलो जल्दी बोलो !

 
माँ बोली- एक बार तेरा भाई एक रंडी के साथ होटल में पकड़ा गया था, 50 हज़ार उसे छुड़ाने में लग गए और कुछ तेरे पापा ने घर में खर्च कर दिए, थोड़े से बैंक में हो सकते हैं।

मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था, बैंक की पासबुक लेकर मैं भागकर बैंक गई। बैंक में 20 हज़ार थे। एक लाख के अलावा हर हफ्ते कभी 10 कभी 5 हज़ार निकाले गए थे। पासबुक मेरे और पापा के नाम थी। मन ही मन मैं बुदबुदा रही थी- साली बड़ी बेटी तो गरीबी के चक्कर में बुड्ढे से ब्याही गई, छोटी का भी यही हाल न हो। पैसे की इज्जत करना ही नहीं जानते तभी तो गरीबी सर चढ़कर बोल रही है।

20 हज़ार रुपए मैंने निकाल लिए और वापस घर आ गई।

शाम को ऊपर का कमरा साफ़ कर रही थी तो मैंने देखा वहाँ 3-4 विदेशी शराब की बोतलें पड़ी थीं, सबका MRP 5-6 हज़ार के बीच था। मुझे समझ में आ गया कि बाप ने पैसे विदेशी शराब में उड़ा दिए। अपने पर भी गुस्सा आ रहा था कि पैसे घर में क्यों रखवा दिए थे। भाई को फ़ोन किया- कुछ पैसे दे दे बहन की शादी के लिए !

उसका जवाब ही उल्टा था- दीदी मैं कहाँ से दे दूँ? मुझे तो दस हज़ार भी नहीं पड़ते नौकरी में !

मुझे गुस्सा आ रहा था, साले रंडी बजाने के लिए कम नहीं पड़ते, घर में देने के लिए कम पड़ रहे हैं।

मैं बड़ी दुविधा में पड़ गई थी कि दो लाख कहाँ से आएँगे। घर का हाल मैंने देख लिया था। मुझे पता था कि अगर मेरे देवर से बहन की शादी नहीं हो पाई तो उसकी आगे की जिंदगी ख़राब है।

अपनी बहन की शादी कराने के लिए मैं तो कोठे पर बैठने को भी तैयार थी लेकिन 5-7 बार चुदने के कौन दो लाख दे देता, ऊपर से मेरा घर टूटने का खतरा और था। किसी तरह से मैंने इन 20 हज़ार रुपयों में बहन की सगाई की और ससुराल वापस आ गई।

ससुराल में अगले दिन जब चमेली ससुर की मालिश कर रही थी तब मेरे दिमाग में एक प्लान आया। कुछ दिन बाद मेरी सास को अपने भाई के घर 2-3 दिन को जाना था। मैंने चमेली को चार सौ रुपए दिए और उससे कहा- तू 7 दिन की छुट्टी मार दे।

अगले दिन से चमेली छुट्टी पर थी, ससुर 3-4 दिन बाद सोमवार को बिना मालिश के परेशान दिख रहे थे, सास घर में नहीं थीं। मैं उन्हें अर्धनग्न ब्लाउज और पेटीकोट में चाय देने गई, मैंने पूछा- पापा जी आपकी तबीयत तो ठीक है? शरीर में कुछ दर्द हो रहा है क्या?

ससुर खी खी करते हुए बोले- हाँ दर्द तो हो रहा है, मालिश की जो आदत पड़ गई है। मैं अपनी नाभि पर उंगली घुमाते हुए बोली- कल मम्मीजी 3 दिन के लिए मामा के यहाँ जा रही हैं अगर आप बुरा न मानें तो कल से मैं आपकी मालिश कर दूंगी लेकिन आप किसी से भूलकर भी यह मत बताना।

इतना सुनते ही ससुर के लंड में हलचल हुई और वो बोल उठे- तेरी मर्ज़ी ! मैं किसी को नहीं बताऊँगा।

अगले दिन सास सुबह निकल गई, मैं और ससुर घर में अकेले थे।

सुबह को ससुर बैचेनी से इधर उधर टहल रहे थे। मैं सीधी सी बनी हुई अपना काम कर रही थी। थोड़ी देर बाद उनसे रहा नहीं गया और बोल पड़े- रसीली तू कल कुछ कह रही थी !

मैंने अनजान बनते हुए कहा- क्या कह रही थी?

ससुर नज़रें नीची करके बोले- वो तू मालिश के लिए कह रही थी !

मैं सर पर झटका देती हुई बोली- ओह पापाजी, मैं तो भूल ही गई थी, आप कमरे में पहुँचें, मैं आ रही हूँ !

थोड़ी देर बाद मैं ससुर के कमरे में आ गई। ससुर जी कुछ शरमा भी रहे थे, मैंने कहा- पापाजी, हम और आप अकेले हैं, आप कपड़े उतार दीजिये।ससुर ने अपनी धोती कुरता उतार दिया देसी चड्डी में उनका तना हुआ लंड साफ दिख रहा था। वो पेट के बल लेट गए, मैंने पीछे से पीठ पर उनके धीरे धीरे मालिश शुरू कर दी। मालिश करते करते मैं बोली- पापाजी मैं साड़ी उतार देती हूँ, वर्ना गन्दी हो जाएगी।

10 मिनट बाद मैंने उठकर ससुर के सामने अपनी साड़ी उतार दी और पेटीकोट जानबूझ कर काफी नीचे बाँध लिया मेरा चिकना पेट और गर्भ प्रदेश पापाजी का लंड गरम किये हुए था।

इसके बाद अंगड़ाई लेकर मैं बोली- अब मैं आपके पेट और सीने पर मालिश कर देती हूँ।

मैं पलंग पर बैठ गई और बोली- आप शर्म छोड़कर सीधे लेट जाओ।

ससुर जी लेट गए, उनके सीने पे दोनों हाथों से मैंने निप्पल नोचते हुए मालिश शुरू की और पूरे बदन पर 5 मिनट तक हाथ फिराया। लंड उनकी अंडी में पूरा टनक रहा था, वो मेरी चूचियों के उभार पर अनजान बन कर हाथ लगा देते थे, मेरा हाथ भी एक दो बार उनके तने हुए लंड से टकरा चुका था।

मालिश करने में मेरे ब्लाउज के बटन खुल गए थे सिर्फ दो बटन लगे हुए थे नीचे कुछ पहने नहीं थी बार बार नंगे दूध हिल रहे थे और बुड्ढे के बदन में आग लगा रहे थे, ससुर से रहा नहीं गया, उन्होंने कस कर मेरी चूचियाँ दोनों हाथों से दबा दीं।

मैंने नकली गुस्सा दिखाते हुए कहा- पापाजी, गंदी बात !

ससुर झेंप गए।

कुछ देर बाद मैंने ससुर का कच्छा ऊपर उठाते हुए जाँघों की मालिश शरू कर दी। हाथ जब भी उनकी जंघा पर पहुँचता उनके टट्टों और लंड कास्पर्श होता था। मेरी बुर का बुरा हाल हो रहा था, मन कर रहा था कि सब कुछ भूल कर लंड चूत में घुसवा लूँ। लेकिन इस चूत के खेल में जल्दबाजी करना मुझे सही नहीं लगा।

ससुरे की तारीफ़ थी, 50 का हो रहा था लेकिन इतनी गरम मालिश के बाद भी लंड पूरा हथोड़े की तरह तना हुआ था। मालिश करने में अब मेरे ब्लाउज के सारे बटन खुल गए थे और मेरी दोनों चूचियाँ बाहर निकल आइ थीं।

इसके बाद मैं उठकर बोली- पापाजी आपने कच्छा नाभि के बहुत ऊपर बाँध रखा है अगर आप बुरा नहीं मानें तो तो जो थोड़ा पेट बचा है उस पर भी मालिश कर दूँ।

ससुर बोले- जल्दी से कर दे ! बड़ा मज़ा आ रहा है।

मैंने उनके कच्छे का नाड़ा खोल दिया और अपना हाथ थोड़ा सा अंदर घुसा दिया और नाभि के चारों तरफ मालिश शुरू कर दी। बार बार मेरे हाथ उनके टनटन करते लंड के टोपे से टकरा रहा था।

 
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