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चूत देखी वहीं मार ली compleet

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किरण उठ कर किचन के तरफ जाने लगी….”ये क्या मामी आपने तो कहा कि, जो भी कहूँगा वो आप करोगे….मुझे अभी देखनी है….” किरण ने मूड कर पीछे की तरफ देखा…और होंठो पर कामुक मुस्कान लाते हुए विनय को चिढ़ाने लगी…किरण किचन मे पहुँची…और उसने खाना डालना शुरू किया….विनय फिर से टीवी देखने मे मगन हो गया….”विनय ज़रा इधर तो आना….” किरना ने किचन से विनय को आवाज़ लगाते हुए कहा….विनय उठ कर किचन मे गया…”जी मामी…” किरण की पीठ विनय की तरफ थी…और वो प्लेट्स मे खाना डाल रही थी…किरण एक दम से उसकी तरफ पलटी….तो विनय की आँखे खुली की खुली रह गई….किरण ने अपने एक मम्मे को अपने नाइटी के गले के ऊपेर से बाहर निकाला हुआ था….उसका मॅक्सी के बाहर लटकते हुए मम्मे को देख कर विनय के आँखे एक दम फेल गई…..

किरण: ये ले अब देख लिया…मेने कहा था ना तुझे जो देखना है….वो सब दिखाउन्गी…..चल ये प्लेट्स लेकर बाहर चल….मैं पानी लेकर आती हूँ…विनय अपनी मामी की चुचि को घुरता हुआ प्लेट्स लेकर बाहर आ गया…..किरण ने पानी की बॉटल और ग्लास लिए और बाहर आ गई….इस बार जब विनय ने किरण को देखा तो, उसके दोनो मम्मे उसकी नाइटी से बाहर लटक रहे थे….विनय का लंड अपनी मामी की बड़ी-2 चुचियों को देख कर शॉर्ट्स मे झटके खाने लगा…किरण विनय के सामने चेर पर बैठ गई…और खाना खाने लगी….”और कोई फरमाइश हो तो वो भी बता दो….” विनय ने अपनी मामी की चुचियों की तरफ देखा….और फिर खाने का नीवाला निगलते हुए काँपती हुई आवाज़ मे बोला……

विनय: मामी वो मुझे वो आपको वो करते हुए देखना है…..

किरण: (मुस्कराते हुए ) क्या देखना है सॉफ-2 बोल….

विनय: आपको पेशाब करते हुए देखना है….

किरण अपने भान्जे के बात सुन कर शरम से लाल हो गई…..फिर अपने होंठो पर कामुक मुस्कान लाते हुए बोली…”तू अपनी मामी को मूतते हुए देखेगा….” विनय ने किरण की बात सुन कर सर झुका लिया…और काँपती हुई आवाज़ मे बोला….”हां मामी..” ये दिमाग़ ख़याल मे आते ही कि वो अपने भान्जे के सामने अपनी चूत खोल कर पेशाब कर रही है…..किरण के बदन मे झुरजुरी सी दौड़ गई….उसने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर अपनी मेक्सी के ऊपेर से अपनी चूत को दबाते हुए विनय की तरफ देखा…”देख लेना..आज तू जो भी कहेगा….मे तेरी हर बात मानूँगी….”

किरण और विनय ने जल्दी-2 खाना ख़तम किया….उसके बाद किरण ने बर्तन सॉफ करके सारा काम निपटा लिया….किचन का काम निपटने के बाद किरण ने विनय को अपने रूम मे जाकर इंतजार करने को कहा….और किरण खुद बाथरूम मे घुस गई…किरण ने अपने सारे कपड़े उतारे और अपने झान्टो से भरी चूत को देखा….तो कुछ सोच कर उसकी चूत की फांके कुलबुला उठी….उसने बाथरूम मे पड़ी हुई अजय की शेविंग किट उठाई….और शेविंग क्रीम लगा कर अपने झान्टो पर झाग बनाने लगी….फिर उसने रेजर से अपनी झान्टो के बाल सॉफ करने शुरू किए….

अपनी चूत से बालो को सॉफ करते हुए किरण की चूत ये सोच -2 कर कुलबुला रही थी कि, जब वो अपने भान्जे के सामने अपनी चूत खोल कर बैठी मूत रही होगी, तब कैसा मंज़र होगा…..

अपनी झान्टो को सॉफ करने के बाद पायल से अपनी चूत को अच्छे से धो लिया…और फिर बाथरूम का डोर खोल कर उसने विनय को आवाज़ लगाई…..विनय मामी की आवाज़ सुन कर रूम से बाहर निकाला और बाथरूम के डोर पर खड़ा हो गया…किरण ने उसे अंदर आने का इशारा किया….तो विनय बाथरूम के अंदर आया तो, अपनी मामी को पूरा नंगा देखते ही, उसका लंड उसके शॉर्ट्स को फाड़ कर बाहर आने को उतावला हो उठा…किरण ने विनय के शॉर्ट्स मे झटके खाते हुए लंड को देखा, तो उसके होंठो पर कामुक मुस्कान फेल गई….”निकाल ले ना इसे बाहर क्यों क़ैद करके रखा है….” किरण ने विनय के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा….तो विनय ने अपना शॉर्ट्स दोनो तरफ से पकड़ कर नीचे सरकाते हुए अपने बदन से अलग कर दिया…..

विनय के झटके खाते हुए लंड को देख कर किरण ने अपने होंठो को दाँतों मे भींचा और फिर नीचे फर्श पर अपनी मोटी गान्ड टिकाते हुए बैठ कर अपनी दोनो टाँगो को इस तरह खोल कर फेला लिया कि, उसकी चूत की फांके भी खुल गई….जिससे उसकी चूत का पानी से लबलबा रहा छेद विनय को सॉफ दिखाई देने लगा…किरण ने विनय की तरफ देखा….जो आँखे फाडे उसकी चूत की तरफ देख रहा था…”चल वहाँ बैठ जा दीवार से पीठ टिका कर…..” किरण ने सामने दीवार की तरफ इशारा करते हुए कहा तो, विनय दीवार से पीठ सटा कर नीचे फर्श पर बैठ गया….”तू अपनी मामी की चूत से पेशाब निकलता हुआ देखना चाहता था ना…” किरण ने अपनी चूत के फांको को अपनी उंगलियों से फेलाते हुए अपनी चूत का गुलाबी रसीला छेद विनय को दिखाते हुए कहा….

विनय: हां….(विनय ने अपने गले का थूक गटाकते हुए कहा…)

किरण: चल फिर देख ले….पर जब तक मेरी चूत से मूत की धार निकलेगी…तब तू मेरे सामने अपने लंड की मूठ मारेगा…बोल मारेगा ना मूठ अपनी मामी की चूत से पेशाब निकलता हुआ देख कर…..

विनय: हां मामी मारूँगा…….(विनय ने अपने लंड को मुट्ठी मे भरते हुए हिलाना शुरू कर दिया….)

किरण ने अपने दोनो हाथो को पीछे की और फर्श पर टिकाया और अपनी गान्ड को थोड़ा सा ऊपेर उठा दिया…कुछ ही पलों बाद किरण की चूत से मूट की तेज धार सीटी जैसी आवाज़ करते हुए निकल कर बाहर फर्श पर गिरने लगी….जिसे देख विनय के लंड के नसों मे खून का दौड़ा तेज हो गया…..और उसने तेज़ी से अपने लंड को हिलाना शुरू कर दिया….”सीईईईई देख विनय देख तेरी मामी की चूत से निकलता हुए मूत देख ले बेटा….

अहह देख तेरे लिए तेरी मामी कितनी बेशरम हो गई है…..हिला अपने लंड को अपनी मामी की चूत के लिए…..” किरण ने अपने भान्जे के लंड के चमकते हुए सुपाडे को देखते हुए कहा….और दूसरी तरफ विनय अपनी मामी की चूत से निकलती मूत की धार को देख कर एक दम मस्त हो गया….किरण का मूतना ख़तम हुआ तो, विनय एक दम से उठ कर अपनी मामी की जाँघो के पास आकर बैठ गया…और झुक कर अपनी मामी की चूत को देखने लगा….

 


विनय को इतने करीब से अपनी चूत को देखते देख कर किरण एक दम से शरमा गई…वो जल्दी से उठी और बाथरूम के डोर की तरफ जाने लगी….इस बात से अंज़ान कि विनय का लंड अब उसकी चूत मे घुसने के लिए कितना बेकरार हो चुका है…जैसे ही किरण बाथरूम के डोर पर पहुँची…विनय ने किरण को पीछे से कंधो से पकड़ते हुए, उसे बाथरूम के डोर के साथ सटा दिया…इससे पहले कि किरण को कुछ समझ आता….विनय ने अपने घुटनो को थोड़ा सा मोडते हुए, अपने लंड को पकड़ का किरण की चूत के छेद पर टिकाते हुए एक ज़ोर दार धक्का मारा….विनय के लंड का सुपाडा किरण की चूत के छेद को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा….किरण अपने भान्जे की हिम्मत और उतावले पन को देख कर खुशी से उछल पड़ी…उसकी मस्ती का कोई ठिकाना नही रहा…..

किरण: श्िीीईईईईईई अहह उंह सबाश मेरीए बाबर शेर अह्ह्ह्ह कर लाइए अपनी को कोढ़ी……आहह पूरा अंदर कर दे पुतर…

किरण ने भी अपनी गान्ड को पीछे की और निकाल लिया…ताकि विनय बिना किसी परेशानी के उसकी चूत मे अपना पूरा लंड घुसा सके…..विनय का लंड मामी के कामरस से भीगी हुई चूत की दीवारो को फेलाता हुआ अंदर जा घुसा….किरण के होंठो पर कामुकता से भरी तीखी मुस्कान फेल गई….विनय ने बिना एक पल गवाए बिना….अपने लंड को मामी की चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….किरण अपनी टाँगे फेलाए हुए पीछे से अपने भान्जे के झटको का मज़ा अपनी चूत मे लेने लगी….

अपनी मामी की बातें सुन कर विनय और जोश मे आता जा रहा था….और वो अपने लंड को सुपाडे तक बाहर निकाल-2 कर किरण की चूत मे पेलना लगा…”श्िीिइ सबाश मेरे शेररर ओह विनय बाहर चल यहाँ बहुत गरमी है…” किरण ने सिसकते हुए कहा…तो विनय ने अपना लंड किरण की चूत से बाहर निकाल लिया….किरण बाथरूम का डोर खोल कर बाहर आई, और उसके पीछे विनय भी बाहर आ गया….जैसे ही दोनो हॉल मे पहुँचे तो, किरण ने विनय को धक्का देकर सोफे पर बैठा दिया…और खुद उसके जाँघो के दोनो तरफ अपने घुटनो को टिकाते हुए, उसके ऊपेर आ गई…किरण ने विनय के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर सेट करते हुए विनय की आँखो मे देखा….और फिर धीरे-2 अपनी चूत को विनय के लंड के सुपाडे पर दबाते हुए अपने चूत मे लेना शुरू कर दिया…..

किरना: ओह्ह्ह्ह विनय तेरा लंड जब अंदर जाता है….तो ऐसा लगता है….जैसे मेरी चूत तेरे लंड के टोपे को चूम रही हो…..सच मे बहुत मज़ा आ रहा है…..विनय सीईईईई उंह तुझे कैसा लग रहा है…..?

किराना ने धीरे-2 अपनी गान्ड को ऊपेर नीचे करते हुए कहा….”अह्ह मामी आपकी चूत सच मे बहुत गरम है….” विनय ने अपनी मामी की बड़ी-2 चुचियों को अपनी मुत्ठियों मे भर कर मसलना शुरू कर दिया…किरण के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गई…उसने विनय की पीठ पर अपनी बाहों को कसते हुए, तेज़ी से अपने गान्ड को ऊपेर नीचे करना शुरू कर दिया….किरण की चूत के पानी से सना हुआ विनय का लंड आसानी से उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था…

.”सीईईईई ओह उंह विनय….” किरण पागलो की तरह मस्ती मे सिसकते हुए विनय के गालो और होंठो पर अपने होंठो को रगड़ रही थी….विनय तो जैसे स्वर्ग की सैर कर रहा था….”ओह्ह्ह मामी उतरो नीचे बेड पर चल कर करते है….”

विनय ने सिसकते हुए किरण के चुतड़ों को मसलते हुए कहा….तो किरण उसके ऊपेर से खड़ी हो गई….और बेड पर लेट कर विनय की तरफ देखते हुए बोली….”चल आजा जल्दी अब….” विनय तो किरण से भी कही ज़्यादा बेकरार हुआ जा रहा था…वो बेड पर चढ़ा और किरण की जाँघो के बीच घुटनो के बल बैठ गया….जैसे ही विनय किरण की जाँघो के बीच मे घुटनो के बल बैठा…

उसने विनय को अपनी बाहों मे भर कर अपने ऊपेर खेंच लिया. अब विनय किरण के ऊपेर आ चुका था….किरण ने अपनी टांगो को फेला कर विनय जाँघो पर चढ़ा लाया था….दोनो के नज़रे आपस मे जा टकराई…और अगले ही पल दोनो के होंठ आपस मे कुश्ती लड़ रहे थे….

दोनो के मुँह से मुंम्मह-2 की आवाज़े आ रही थी….दोनो एक दूसरे के होंठो को बदस्तूर चूस रहे थे….किरण की बड़ी -2 चुचियाँ विनय की छाती मे धँस रही थी…किरण ने अब अपने होंठो को विनय के हवाले कर दिया था…और विनय उसके दोनो होंठो को बारी-2 अपने होंठो मे दबा -2 कर चूस रहा था…विनय का तना हुआ लंड किरण की चूत पर दस्तक दे रहा था…..

 


किरण ने अपने दोनो हाथो से विनय के हाथो को पकड़ कर अपनी चुचियों पर रख दिया….विनय ने बिना कोई पल गवाए, किरण के होंठो को छोड़ा, और किरण की चुचियों पर टूट पड़ा….

उसने किरण की लेफ्ट चुचि को मुँह मे भर कर चूसना शुरू कर दिया. और राइट चुचि को अपने एक हाथ से मसलना शुरू कर दिया….”आह सीईइ हाइी विनय….चुस्स ले मेरे मम्मो को अह्ह्ह्ह सीईईई आह आह और ज़ोर से चुस्स पुत्तर अहह मेरीए मम्मे आह पी ले सारा दूध पे ले” किरण ने सिसकते हुए , विनय के सर को अपनी चुचियों पर दबाते हुए कहा…. किरण के निपल एक दम कड़क हो चुके थे….और काले अंगूर के दाने जैसे फूल गए थे….विनय कभी किरण के लेफ्ट निपल को अपने मुँह मे लेकर चूस्ता तो कभी, राइट निपल को……विनय का लंड जो किरण की चूत की फांको के बीच रगड़ खा रहा था….अब उसकी नसें फूलने लगी थी….

विनय ने किरण के मम्मो को छोड़ा और सीधा होकर घुटनो के बल बैठते हुए मामी की टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठाते हुए दोनो तरफ फेला दिया…जिससे किरण की चूत की फांके फेल गई …..विनय ने देखा किरण की चूत की फांके उसकी चूत से निकल रहे पानी से एक दम गीली होकर चमक रही थी…. उसकी चूत का छेद बार-2 खुल कर बंद हो रहा था….”हाइए विनय ऐसे मत देख पुत्तर…” किरण ने विनय को कंधो से पकड़ कर अपने ऊपेर खेंचते हुए कहा…पर इस बार विनय किरण पर नही झुका और अपनी मामी की चूत का लबलबाता हुआ छेद देखता रहा….किरण ये देख कर शरम से मरी जा रही थी की, उसका भांजा कैसे उसकी टांगे उठाए उसकी फुद्दि को देख रहा है….और उसका लंड कैसे उसकी चूत को देख कर झटके खा रहा है….

विनय ने किरण की चूत के छेद पर अपने लंड के सुपाडे को टिकाते हुए उसकी आँखो मे देखा….तो किरण अपने भान्जे के लंड के गरम सुपाडे को अपनी चूत पर भिड़ा हुआ महसूस करके सिसक उठी…..

किरण: (विनय के लंड के सुपाडे को अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही मदहोश हो गई….) आह सीईईईई विनय फाड़ दीए मेरी उंघह फुद्दि अह्ह्ह्ह…

विनय ने अपने लंड के सुपाडे को पूरे ज़ोर से किरण की चूत के छेद पर दबाया, तो उसके लंड का सुपाडा किरण की चूत की दीवारों को फेलाता हुआ अंदर घुसने लगा….विनय के लंड के सुपाडे की रगड़ अपनी चूत की दीवारो पर महसूस करके किरण के पूरे बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गई. उसने विनय की पीठ पर अपनी बाहें कस ली.....और अपनी टाँगो को उठा कर विनय की कमर पर चढ़ा लिया….

किरण: हाइए विनय तेरा लंड तो बहुत मोटा है….मार मेरी फुद्दि आहह अह्ह्ह्ह होर ज़ोर नाल आह फाड़ दे पुत्तर अपनी मामी दी फुद्दि अहह सी सीईइ हाइईए….

विनय भी अब पूरे जोश मे आकर अपने लंड को किरण की चूत के अंदर बाहर करने लगा…किरण भी अपनी टाँगो को पूरा ऊपेर उठा कर अपनी चूत मे विनय का लंड ले रही थी….विनय का लंड अंदर बाहर होते हुए बुरी तरह से किरण की चूत की दीवारो पर रगड़ खाने लगा था…और किरण मस्ती के सागर मे गोते खा रही थी....विनय किरण की चूत मे लंड पेलते हुए, लगातार उसके दोनो बड़ी-2 चुचियों के निपल्स को अपने हाथों से मसल रहा था…..

किरण: अह्ह्ह्ह सीईईईईई उंघ हाआँ मरोड़ दे अहह औरर्र जोर्र्र से मसल बेटा मेरे मम्मो को आह मार फुद्दि मे अपना लंड और अह्ह्ह्ह हाइी और जोर्र से मार अपना लंड मेरी फुद्दि अह्ह्ह्ह मेरी अह्ह्ह्ह फुदी मे अह्ह्ह्ह सीईइ उंघह उन्घ्ह …..

चुदाई पूरे उफान पर थी…..चुदाई की आवाज़े महॉल और गरम बना रही थी….किरण की चूत के पानी से लंड चिकना हो चुका था…और जब विनय का लंड किरण की चूत की गहराइयों मे समाता तो पक-2 की आवाज़ रूम मे गूँज उठती…और इस आवाज़ को सुन कर किरण एक दम से शर्मा जाती… विनय का लंड अब किसी पिस्टन की तरह किरण की चूत के अंदर बाहर हो रहा था…

किरण: उंघह उंघ अह्ह्ह्ह सीईईई उंह उंह चोद विनय आह देख मेरीई फुदीी को तूने पानी अह्ह्ह्ह आह पानी-2 कर आह दिया.

किरण अब झड़ने के करीब पहुँच चुकी थी…उसने भी अपनी गान्ड को ऊपेर की और उछालना शुरू कर दिया…”आह ले पुत्तररर अहह ले मेरी फुदी अह्ह्ह्ह आ लीईए मेरीई फुद्दि का काअमम हो गायाअ आह सीईईईई उंह पुउतर्र चूमा दे नाअ….

ये कहते हुए उसने विनय के सर को पकड़ कर अपने होंठो पर उसके होंठो को लगा दिया…और पूरी रफतार से अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उछालते हुए, तेज़ी से झड़ने लगी….विनय भी पूरे जोश के साथ अपना लंड किरण की चूत मे पेलते हुए झाड़ गया….दोनो के जिस्म ढीले पड़ गए….किरण ने उसे अपनी बाहों मे भींच लिया…

दोनो पसीने से तरबतर थे….और लंबी-2 साँसे ले रहे थे….विनय का लंड अभी भी किरण की चूत मे था…और वो अभी भी ढीला नही पड़ा था…जिसे किरण अपनी चूत के अंदर सॉफ महसूस कर पा रही थी.….किरण ने अपनी मदहोश आँखो को खोल कर विनय की ओर देखा…जो अपने चेहरे को उसकी चुचियों पर टिकाए हुए लेटा हुआ था….

किरण: विनय तुम्हारा लंड तो अभी भी खड़ा है….

विनय: हां मामी मेरा अभी हुआ नही है…

विनय ने किरण की बात सुन कर धीरे-2 से अपने लंड को सुपाडे तक किरण की चूत से बाहर निकाला….और फिर एक झटके मे पूरा अंदर पेल दिया…. किरण के बदन मे मस्ती भरी सिहरन दौड़ गई….”सीईईई ऑश विनय थोड़ी देर रुक जा ना….”

विनय: क्या हुआ मामी….

किरण; अभी तो तूने मेरी फुद्दि का पानी निकाला है रुक जेया थोड़ी देर….

विनय ने जैसे ही अपना लंड किरण की चूत से बाहर निकालना चाहा…किरण ने उसकी कमर पर टाँगो को लपेट कर उसे नीचे की ओर दबा दिया….”विनय अपना लौडा मेरी फुद्दि मे ही रहने दे ना… आज सारी रात तेरा लौडा मैं अपनी फुद्दि मे लेकर रहूंगी…मुझे सारी रात चोद आज”

विनय: (खुश होते हुए) सच मामी….

किरण: हां विनय….

किरण को विनय का लंड अभी भी अपनी चूत मे झटके ख़ाता हुआ महसूस हो रहा था….जिसे महसूस करके किरण की चूत अभी-2 कतरा-2 करके अपने प्यार का रस विनय के लंड पर उडेल रही थी….विनय मस्ती मे धुन मामी के मोटे-2 काले निपल्स को चूसने मे मगन था…जिससे किरण की चूत की आग फिर से धीरे-2 भड़कने लगी थी….

 


किरण ने मुस्कुराते हुए विनय की तरफ देखा, और फिर को लंड बाहर निकालने के लिए कहा…..विनय ने बेमन से अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाला और किरण की बगल मे लेट गया..…किरण ने बेडशीट को खेंचते हुए, विनय के लंड को अच्छी तरह सॉफ किया…और फिर झुक कर उसके लंड के सुपाडे को अपने होंठो के बीच मे दबा लिया……..विनय का पूरा बदन कांप गया, उसने किरण के सर को दोनो हाथों से कस्के पकड़ लिया. “ये क्या कर रही है मामी आप, ओह “ किरण ने विनय की बात पर ध्यान दिए बिना…उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया……..विनय मस्ती मे आहह ओह्ह्ह कर रहा था……..

एक बार फिर से विनय के लंड मे तनाव आना चालू हो गया था…….जिसे देख किरण की चूत की फांके एक बार फिर से कुलबुलाने लगी…….और वो और तेज़ी से विनय के लंड को चूस्ते हुए, अपने मुँह के अंदर बाहर करने लगी……उसके हाथ लगतार विनय की बॉल्स को सहला रहे थे……और विनय के हाथ लगतार किरण के खुले हुए बालों मे घूम रहे थे……

किरण बार-2 अपनी मस्ती से भरी अधखुली आँखों से विनय के चेहरे को देख रही थी…जो आँखें बंद किए हुए अपने लंड को चुस्वा रहा था……किरण ने विनय के लंड को मुँह से निकाला, और विनय के बॉल्स को मुँह मे भर चूसना चालू कर दिया….”ओह्ह्ह्ह बस मामी ओह्ह्ह” विनय को ऐसा लगा मानो उसकी साँस अभी बंद हो जाएगी….उसका दिल बहुत जोरो से धड़क रहा था……जब विनय से बर्दास्त नही हुआ तो, उसने किरण को उसके बालों से पकड़ कर खेंच कर अपने ऊपेर लेटा लिया……किरण की चुचियाँ विनय की छाती मे आ धँसी………

दोनो हान्फ्ते हुए एक दूसरे के आँखों मे देख रहे थे…..विनय ने अभी भी किरण के बलों को कस्के पकड़ा हुआ था….पर किरण के होंठो पर फिर भी मुस्कान फेली हुई थी…..नीचे विनय का लंड किरण की चूत के ऊपेर रगड़ खा रहा था……किरण विनय की आँखों मे देखते हुए अपना एक हाथ नीचे ले गई, और विनय के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर टिका दिया…….और विनय की आँखों मे देखते हुए धीरे-2 अपनी चूत को विनय के लंड पर दबाने लगी……किरण के थूक से सना हुआ विनय का लंड उसकी चूत के छेद को फेलाते हुए अंदर घुसने लगा……

विनय को ऐसे लग रहा था, जैसे उसके लंड का सुपाडा किसी चूत मे नही, बल्कि किसी तपती हुई भट्टी के अंदर जा रहा हो…….विनय की आँखें एक बार फिर से बंद हो गई, किरण ने विनय के दोनो हाथों को पकड़ कर अपनी चुचियों पर रख कर अपने हाथों से दबा दिया….और अपनी चूत को तब तक विनय के लंड पर दबाती रही, जब तक कि विनय का पूरा 7 इंच लंबा लंड उसकी चूत की गहराईयो मे समा कर उसकी बच्चेदानी के छेद से ना जा टकराया……

किरण: (काँपती हुई आवाज़ मे) ओह्ह्ह्ह विनय तेरा लंड कितना बड़ा है,,,,,उंह ओह देख ना कैसे मेरी चूत को खोल रखा है,………ओह विनय…….

किरण की चूत तो जैसे पहले से एक और जबरदस्त चुदाई के लिए तैयार थी…..और अपने अंदर कामरस की नदी बहा रखी थी……विनय का लंड अब जड तक किरण की चूत मे घुसा हुआ था, और किरण की चूत से कामरस बह कर विनय के बॉल्स तक आ रहा था……विनय आँखें बंद किए हुए, किरण की चुचियों को अपने हाथों से मसल रहा था…बीच मे वो उसके निपल्स को अपनी उंगलियों के बीच मे दबा कर खेंच देता…जिससे किरण एक दम से सिसक उठती, और उसकी कमर अपने आप ही आगे की ओर झटका खा जाती.

लंड चूत के दीवारों से रगड़ ख़ाता, और किरण के बदन मे मस्ती की लहर दौड़ जाती. “ हां विनय उफ्फ और ज़ोर से मसल, मेरे चुचक को ओह्ह्ह्ह उंह अहह अह्ह्ह्ह विनय…….चोद डाल मुझे. देख ना मेरी फुद्दि कैसे पानी छोड़ रही है, तेरे लंड के लिए ……..ओह विनय उंह हां ऐसे और ज़ोर से मसल ओह ओह अहह” किरण अपनी कमर को हिलाते सिसकारी भर रही थी……और अपने दोनो हाथों को विनय के हाथों पर दबा रही थी……..

विनय भी जोश मे आकर नीचे लेटे हुए ऊपेर की और धक्के लगाने की कॉसिश कर रहा था. पर दुबले पतले विनय का बस नही चल रहा था, ऊपेर जवानी से भरपूर किरण जैसी गदराई हुई औरत जो उसके लंड पर उछल रही थी……विनय तो बस अब आँखें बंद किए हुए किरण की टाइट चूत के मज़े लूट रहा था…..किरण अब एक दम गरम हो चुकी थी, उसने विनय के हाथों से अपने हाथ हटाए और विनय के ऊपेर झुक कर उसके होंठो को अपने होंठो मे भर लिया…….जैसे ही विनय के हाथ आज़ाद हुए, विनय अपने हाथों को उसकी गान्ड पर ले गया………..

और उसके चुतड़ों को ज़ोर ज़ोर से मसल कर दोनो तरफ फेलाने लगा…….किरण ने अपने होंठो को विनय के होंठो से हटाया, और विनय के सर के दोनो तरफ अपनी हथेलियों को टिका कर अपनी गान्ड को पूरी रफ़्तार से ऊपर नीचे करके , अपनी चूत को विनय के लंड पर पटकने लगी…..विनय का लंड हर बार करीब आधा बाहर आता और फिर पूरी रफ़्तार के साथ किरण की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अंदर घुस जाता….. किरण तो मानो आज ऐसे निहाल हो गई थी, जैसे उसे सवर्ग मिल गया हो……

 


किरण: हां विनय उंह और ज़ोर से मसल मेरीईई गान्ड को ओह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह विनय देख मेरी फुद्दि फिर्र पानी छोड़ने वाली है अहह रजाआअ ओह ओह अहह अहह अहह

किरण का बदन एक बार फिर से अकड़ने लगा…….और उसकी चूत से पानी की नदी बह निकली……….विनय भी नीचे लेटे हुए कमर हिलाते हुए झाड़ गया……किरण झाड़ कर निढाल होकर विनय के ऊपेर लूड़क गई….विनय ने भी नीचे से कमर हिलाते हुए अपने लंड से वीर्य की बोछार किरण की चूत की गहराइयों मे करनी शुरू कर दी…

उस रात तो जैसे किरण पर विनय के लंड का भूत सवार हो गया था….किरण दिल खोल कर विनय को अपनी चूत का रस चखाती रही…..दोनो सुबह 3 बजे सोए….और जब आँख खुली तो दिन के 10 बज रहे थे….किरण ने जल्दी से विनय को उठाया और फ्रेश होने को कहा…किरण पहले ही नहा कर खाने की तैयारी कर रही थी…..

 


सुबह जब विनय की आँख खुली तो 10 बज रहे थे….वो उठ कर बाथरूम मैं चला गया….किरण किचन मैं नाश्ता तैयार कर रही थी…वो जानती थी कि अजय शॉप से किसी ना किसी को नाश्ता और लंच लाने के लिए भेज देंगे…किरण ने जल्दी से नाश्ता तैयार किया. और अजय के लिए लंच टिफेन में पॅक करके रख दिया….फिर उसने विनय और अपने लिए नाश्ता प्लेट्स मे डाला और डाइनिंग टेबल पर रखते हुए विनय को नाश्ते के लिए आवाज़ लगाई, तभी बाहर डोर बेल बजी…किरण ने जाकर गेट खोला तो देखा अजय की शॉप पर काम करने वाला एक लड़का बाहर खड़ा था…वो अजय के लिए नाश्ता और लंच लेने आया था…किरण किचन मे वापिस आई, अजय के लिए पॅक किए हुए लंच को लाकर उस लड़के को दे दिया….वो लड़का लंच लेकर वापिस चला गया….

किरण ने गेट बंद किया और जब डाइनिंग हॉल मे पहुँची तो, देखा कि विनय नहा कर डाइनिंग टेबल पर बैठा नाश्ता कर रहा था….आज किरण के चेहरे पर खुशी देखते ही बन रही थी….उसने प्यार से अपने हाथो से विनय को नाश्ता करवाया..और फिर खुद नाश्ता करके घर के सॉफ सफाई मे लग गयी….दोपहर के 12 बजे करीब किरण घर का काम निपटा कर नहा धो कर फ्रेश हुई, तो डोर बेल बजी…किरण ने जाकर गेट खोला तो देखा सामने रिंकी के मम्मी खड़ी थी….”अर्रे दीदी आप आएँ अंदर…”

किरण ने मुस्कराते हुए कहा…” नही किरण अभी अंदर नही आ सकती, तू ऐसा कर जल्दी से तैयार हो जा…मुझे मार्केट जाना है, अपने लिए कुछ साड़ियाँ ख़रीदनी है…तेरे चाय्स तो बहुत अच्छी है…तू चल ना मेरे साथ….”

किरण रिंकी की मम्मी को मना नही कर पाई…क्योंकि दोनो परिवारों के बीच बहुत नज़दीकी थी….इसलिए किरण को तैयार होकर रिंकी के मम्मी के साथ जाना पड़ा…जाते-2 रिंकी की मम्मी रिंकी को विनय के पास किरण के घर पर ही छोड़ गयी….किरण ने जाने से पहले रिंकी को कहा था कि, अगर तुम दोनो को भूख लगे तो, कुछ बना कर खा लेना…रिंकी की मोम और किरण 1 बजे घर से निकले….

विनय को रिंकी के साथ घर मे होना अजीब सा लग रहा था….पर रिंकी हाथ आए हुए इस मौके को हाथ से नही जाने देना चाहती थी….रिंकी ने पिंक कलर की सलवार कमीज़ पहनी हुई थी….वो विनय के साथ आकर सोफे पर बैठ गयी…”तुम अभी तक नाराज़ हो मुझसे…” रिंकी ने विनय के हाथ पकड़ते हुए कहा, तो विनय ने चोन्कते हुए उसकी तरफ देखा….”न नही तो…..”

रिंकी: फिर मुझसे बात क्यों नही करते….

विनय का क्या बात करूँ…..

रिंकी: (मुस्कराते हुए….) प्यार की बातें….

विनय: प्यार…..? (विनय ने चोन्कते हुए रिंकी तरफ देखा….

रिंकी: हां विनय मैं तुम्हे बहुत लाइक करती हूँ….ल लव यू विनय…..

रिंकी ने धीरे-2 विनय का हाथ पकड़ कर अपनी चुचियों की तरफ लेजाते हुए कहा… ये देख विनय का दिल जोरो से धड़कने लगा…”विनय प्लीज़ मुझे प्यार करो ना…” रिंकी ने विनय का हाथ अपनी लेफ्ट चुचि पर रखते हुए कहा….तो विनय को जैसे ही अपनी हथेली मे रिंकी की नरम चुचि का अहसास हुआ, तो विनय के लंड मे तेज सरसराहट होने लगी….

रिंकी की ये बात सुनते ही, उसने कमीज़ के ऊपेर से ही, रिंकी की चुचि को मसल दिया…रिंकी तो जैसे पागल हो गयी….उसने पागलों की तरह विनय के होंटो को चूसना शुरू कर दिया…विनय भी उसके होंटो पर टूट पड़ा…अब तक मामी और अंजू के साथ चुदाई का खेल सीख-2 कर विनय अब उसमे माहिर होता जा रहा था….दोनो के होंटो में मानो जैसे कोई जंग छिड़ गयी हो…

दोनो पागलो की तरह एक दूसरे के होंटो को चूस रहे थे…रिंकी के मूह से उंह उंह की आवाज़ें आ रही थी…जब दोनो का साँस लेना मुस्किल हो गया, तो रिंकी ने अपने होंटो को विनय के होंटो से अलग किया…और फिर अपनी अधखुली नशीली आँखों से विनय की आँखो मे झाँकते हुए बोली..

रिंकी: ये सब कैसे सीखा ?

विनय: (तेज़ी से साँसे लेते हुए) ऐसे ही कहीं से नही सीखा था….

रिंकी अब कोई बात करके समय नही गवाना चाहती थी….उसने विनय का हाथ पकड़ा और उसे उसके रूम मे ले गयी…और वहाँ जकार बेड पर लेटते हुए विनय को अपने ऊपेर खेंच लिया….और फिर से उसके होंटो को चूसने लगी. इस बार उसने कुछ देर विनय के होंटो को चूसने के बाद, अपने होंटो को अलग कर दिया….और विनय के सर को अपने गर्दन पर झुकाते हुए बोली.

रिंकी: विनय मुझे प्यार करो ना…मुझे किस करो. मेरे बदन के हर हिस्से को चुमो, छातो….खा जाओ मुझे….

 


विनय जैसे ही रिंकी के ऊपेर आया…रिंकी ने अपनी टाँगे खोल ली. जिससे विनय की टाँगें उसकी जांघों के बीच आ गयी…और उसका तना हुआ लंड उसकी निक्कर मे से रिंकी की सलवार के ऊपेर से उसकी चूत पर जा टकराया..”आह विनय उंह “ रिंकी अपनी सलवार के ऊपेर से ही, विनय के लंड को अपनी चूत पर महसूस करते हुए, सिसक उठी….उसने अपनी टाँगो को कैंची की तरह विनय की कमर पर लपेट लिया…विनय ने भी रिंकी की चूत की आग को और बढ़ा दिया…उसने उसके मम्मों को मसलते हुए, अपने होंटो को उसकी सुरहीदार गर्दन पर लगा दिया….और उसकी गर्दन को चाटने लगा…..रिंकी मस्ती मे फिर से सिसक उठी, उसने विनय के सर के गिर्द घेरा बना कर उसे अपने से और चिपका लिया….

रिंकी: ओह्ह्ह विनय हाआँ खा जा मुझे आ पूरा का पूरा आहह…सीईइ विनय आज मेरी आग बुझा दे….

विनय भी अब पूरी तरह मस्त होकर उसकी चुचियों को मसलते हुए, उसकी गर्दन को चूम रहा था….और रिंकी उसके सर को सहला रही थी…और बार अपनी कमर को ऊपेर की तरफ उठा कर, अपनी चूत को कपड़ों के ऊपेर से ही, विनय के लंड पर दबा रही थी….”ओह्ह्ह विनय आहह और ज़ोर से दबा मेरे मम्मे आह अह्ह्ह्ह…”

फिर विनय उसकी गर्दन को चूमता हुआ नीचे की ओर आने लगा….और उसकी कमीज़ से बाहर झाँक रहे मम्मों के ऊपेरी हिस्से को अपने होंटो मे भर कर चूसने की कॉसिश करने लगा…”आह हां चुस्स अह्ह्ह्ह विनय मेरी जान अह्ह्ह” ये कहते हुए, उसने अपने हाथो को विनय के सर से हटाया, और फिर अपने दोनो हाथों को नीचे लेजा कर अपनी कमीज़ को पकड़ कर ऊपेर करने लगी….ये देख विनय जो कि अपना सारा वजन रिंकी के ऊपेर डाले लेटा हुआ था. वो अपने घुटनो के बल रिंकी की जाँघो के बीच मे बैठ गया….

रिंकी ने अपनी कमीज़ को पकड़ कर ऊपेर करते हुए, उतार दिया….और फिर बेड पर बैठते हुए, अपनी ब्रा के हुक्स खोल कर उसे भी जिस्म से अलग कर दिया….ब्रा को अपने बदन से अलग करने के बाद, उसने विनय की ओर देखा, जो उसकी 32 साइज़ की बड़ी-2 चुचियों को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था.

रिंकी: ये तुम्हें बहुत पसन्द है ना ? (रिंकी ने मुस्कुराते हुए विनय की ओर देखते हुए कहा. विनय ने भी हां में सर हिला दिया…)

रिंकी ने जल्दी से अपनी सलवार का नाडा भी खोल दिया और उसने अपनी सलवार उतार कर बेड पर रख दिया….

रिंकी ने फिर से उसे अपने ऊपेर खेंच लाया….और उसके होंटो को चूमते हुए बोली, विनय अब जल्दी कर मैं कब से मरी जा रही हूँ….” विनय एक बार फिर उसकी जाँघो के बीच मे आ गया था….रिंकी ने अपने हाथों को नीचे लेजाते हुए, उसकी निक्कर को पकड़ कर नीचे खेंच दिया….और फिर विनय ने खुद ही, अपनी निक्केर को अपनी टाँगो से निकाल दिया…”

रिंकी: तुझे ये पसंद हैं ना ये ले, जी भर कर खेल इनसे….(रिंकी ने अपनी चुचियों को पकड़ कर नॉकदार बनाते हुए विनय को देखा कर कहा…)

32 साइज़ की मोटी-2 चुचियों को देख, विनय का लंड अब पूरी तरहा तन गया था…जो अब सीधा रिंकी की चूत की फांको के ठीक ऊपेर था…..

रिंकी ने फिर से उसे बाहों मे भरते हुए, उसके सर को अपनी चुचियों पर दबा दिया…”आह विनय चूस इसे अहह” विनय भी पागलो की तरह रिंकी की चुचियों पर टूट पड़ा….और उसकी एक चुचि को मूह मे भर कर उसके अंगूर के दाने के साइज़ की निपल को अपनी ज़ुबान से दबा -2 कर चूसने लगा…. रिंकी ने उसके सर को फिर से सहलाना शुरू कर दिया…..

रिंकी: आह चुस्स्स्स ले आह विनय खा जा मेरे मम्मों को अहह उंह सीईईईई आह हइई माँ ओह हां चुस्स्स्स्स विनय और ज़ोर ज़ोर से से चूस.

रिंकी की आवाज़ मे अब मदहोशी सॉफ झलक रही थी….उसका पूरा बदन उतेजना के कारण कांप रहा था…उसके गाल लाल होकर दिखने लगे…फिर रिंकी को अपनी चूत की फांको पर विनय के लंड का गरम सुपाडा रगड़ ख़ाता हुआ महसूस हुआ. रिंकी एक दम से सिसक उठी….उसने विनय के सर को दोनो हाथों से पकड़ कर ऊपेर उठाया….उसका निपल खींचता हुआ विनय के मूह से पक की आवाज़ से बाहर आ गया….

रिंकी: (मस्ती मे सिसकते हुए) हाईए कितने जालिम हो तुम….

 


रिंकी की आँखें अब वासना के नशे मे डूबती हुई बंद हुई जा रही थी..उसने अपनी नशीली अध खुली आँखों से एक बार विनय की तरफ देखा, फिर उसके होंटो से अपने होन्ट सटा दिए….विनय ने भी रिंकी के नीचे वाले होन्ट को अपने होंटो मे दबा-2 कर चूसना शुरू कर दिया….”उंह अहह उंघह” रिंकी घुटि आवाज़ मे सिसक रही थी….

उसने अपना एक हाथ नीचे लेजा कर विनय के लंड पर रखा, और उसे अपनी मुट्ठी मे भर लिया….विनय के बदन मे तेज सरसराहट दौड़ गयी…रिंकी ने अपने होंटो को विनय के होंटो से अलग किया….और अपनी टाँगो को फेला कर घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठा लिया….विनय तो जैसे इस पल का इंतजार मे था….वो अपने घुटनो के बल रिंकी की जांघों के बीच मे आ गया…जैसे ही उसकी नज़र रिंकी की फूली हुई चूत पर पड़ी. उसका लंड फिर से झटके खाने लगा. जो उस वक़्त रिंकी के हाथ मे था….रिंकी विनय के लंड के फुलति नसों को अपने हाथ मे सॉफ महसूस कर रही थी…..

उसने विनय के लंड को पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर दबाया….तो विनय के लंड का सुपाडा उसकी चूत की फांको को फेलाता हुआ, छेद पर जा लगा… रिंकी की कुँवारी चूत की फाँकें विनय के लंड के सुपाडे के चारो तरफ फेलते हुए कस गयी…..अपनी चूत के छेद पर विनय के लंड के गरम सुपाडे को महसूस करते ही, उसके बदन मे मानो हज़ारो वॉट की बिजली कोंध गयी हो…..उसका पूरा बदन थरथरा गया….

रिंकी की चूत उसकी चूत से निकल रहे कामरस से एक दम गीली हो चुकी थी…रिंकी ने अपनी आँखो को बड़ी मुस्किल से खोल कर विनय की तरफ देखा. और फिर काँपते आवाज़ मे बोली…

रिंकी: विनय धीरे-2 अंदर करना….मैं ये सब पहली बार कर रही हूँ… इस लिए मुझे दर्द होगा….पर तुम चिंता मत करना चाहे मुझे कितना भी दर्द हो…तुम अपना लंड मेरी फुद्दि मे घुसा दो…अब करो भी….

विनय ने धीरे-2 अपने लंड के सुपाडे को रिंकी की चूत के छेद पर दबाना शुरू किया….जैसे ही उसके लंड का सुपाडा, रिंकी की गीली चूत के छेद मे घुसा, रिंकी एक दम सिसक उठी….विनय के लंड का सुपाडा रिंकी की चूत की सील पर जाकर अटक गया…..विनय भी इस रुकावट को सॉफ महसूस कर पा रहा था….

रिंकी की चूत की झिल्ली, विनय के लंड के सुपाडे से बुरी तरह अंदर को खिच गयी…..जिसके कारण रिंकी के बदन मे दर्द की तेज लहर दौड़ गयी…उसके चेहरे पर से उसके दर्द का सॉफ पता चल रहा था…..

विनय: क्या हुआ रिंकी ? दर्द हो रहा है क्या ?

रिंकी: अहह हां विनय…दर्द हो रहा है…..

विनय: बाहर निकाल लूँ…..

रिंकी: नही विनय बाहर मत निकालना….ये दर्द तो हर लड़की को जिंदगी मे एक ना एक बार तो सहन करना ही पड़ता है….विनय ज़ोर से घस्सा मार….और फाड़ दे मेरी फुद्दि….

विनय: अगर तुम्हे दर्द हुआ तो ?

रिंकी: मैं सह लूँगी……तू घुसा ना…

विनय ने अपनी पूरी ताक़त अपनी गान्ड मे जमा की, और अपने आप को अगले शॉट मारने के लिए तैयार करने लगा…रिंकी ने अपने दोनो हाथों से विनय की बाहों को कस के पकड़ लिया….और अपनी टाँगों को पूरा फैला लिया..

रिंकी: विनय…विनय फाड़ दो अब…..

विनय ने कुछ पलों के लिए रिंकी के चेहरे की तरफ देखा…जो अपनी आँखें बंद किए हुए लेटी हुई थी….उसने अपने होंटो को दाँतों मे दबा रखा था. जैसे वो अपने आप को उस दर्द के लिए तैयार कर रही हो….उसके माथे पर पसीने की बूंदे उभर आई थी…..विनय ने एक गहरी साँस ली, और फिर अपनी पूरी ताक़त के साथ एक ज़ोर धार धक्का मारा….

 
विनय के लंड का सुपाडा रिंकी की चूत की झिल्ली को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया…विनय का आधे से ज़्यादा लंड एक ही बार में अंदर जा चुका था…” हाए मम्मी मर गयी हइई अहह विनय बहुत दर्द हो रहा है….” रिंकी छटपटाते हुए, अपने सर को इधर उधर पटक रही थी…उसे अपनी चूत मे दर्द की तेज लहर दौड़ती हुई महसूस हो रही थी….

रिंकी के इस तरह से दर्द के कारण बिलबिलने से विनय भी घबरा गया. उसने रिंकी की ओर देखा, तो उसकी बंद आँखो से आँसू बह कर उसके गालों पर आ रहे थे…..”रिंकी मैं बहार निकाल लेता हूँ” विनय ने रिंकी की ओर देखते हुए कहा….

रिंकी: (अपनी आँखो को खोलते हुए) नही -2 विनय बाहर मत निकालना…पूरा अंदर कर दो….मेरी फिकर मत करो…..

विनय: पर रिंकी…

रिंकी: मैने कहा ना मेरी परवाह मत करो….तुम अपना लंड पूरा मेरी फुद्दि मे डालो…..

विनय ने अपने लंड की तरफ देखा…जो रिंकी की टाइट चूत के छेद मे घुस कर फँसा हुआ था….और फिर उसने एक बार फिर से पूरी ताक़त के साथ, झटका मारा….इस बार उसके लंड का सुपाडा उसकी चूत की दीवारो को फेलता हुआ पूरा का पूरा अंदर जा घुसा…

रिंकी: अह्ह्ह्ह विनय……..(रिंकी ने अपने हाथों से विनय के बाजुओं को इतनी कस के पकड़ा कि, उसके नाख़ून, विनय की बाहों मे गढ़ने लगे….विनय को अपने लंड के गिर्द रिंकी की टाइट चूत के दीवारे कसी हुई महसूस हो रही थी…उसके लंड मे तेज गुदगुदी सी होने लगी….किरण और अंजू की चूत रिंकी की चूत के मुक़ाबले बहुत ढीली महसूस हो रही थी…)

दोनो थोड़ी देर वैसे ही लेटे रहे….विनय अब धक्के लगाने को उतावला हो रहा था….पर रिंकी ने उसकी कमर में अपनी टाँगो को लपेट रखा था… जिस की वजह से विनय हिल भी नही पा रहा था….कुछ लम्हे दोनो यूँ ही लेटे रहे….फिर धीरे-2 रिंकी का दर्द कुछ कम होने लगा….और उसे अपनी चूत मे अजीब सी सरसराहट होने लगी….अब उसे मज़ा आने लगा था…और उसने अपनी टाँगो को जो कि उसने विनय की कमर पर कस रखी थी…को ढीला कर दिया….जैसे ही विनय की कमर पर रिंकी की टाँगों की पकड़ ढीली हुई…

विनय ने अपना आधे से ज़्यादा लंड एक ही बार मे रिंकी की चूत से बाहर खींचा….और फिर से एक झटके के साथ, रिंकी की चूत मे पेल दिया…धक्का इतना जबरदस्त था कि, रिंकी का पूरा बदन हिल गया…”आह शियीयीयी विनय उंह धीरे मेरी जान अह्ह्ह” रिंकी ने फिर से अपने पैरो को विनय के चुतड़ों के ऊपेर रख कर उसे अपनी तरफ दबा लिया…

जब उसे अपनी चूत की दीवार पर विनय के लंड के सुपाडे की रगड़ महसूस हुई, तो वो एक दम से मस्त हो गयी….फिर थोड़ी देर रुकने के बाद, रिंकी ने विनय को धीरे से कहा….”विनय अब धीरे से बाहर निकालो…मुझे कुछ देखना है…” ये कहते हुए, उसने फिर से अपने पैरो की पकड़ ढीली की, और विनय ने घुटनो के बल बैठते हुए, धीरे-2 अपने लंड को बाहर निकालना शुरू किया….फिर से वही मज़े की लहर रिंकी के रोम-2 मे दौड़ गयी. उसे विनय के लंड का सुपाडा अपनी चूत की दीवारो पर रगड़ ख़ाता हुआ सॉफ महसूस हो रहा था….

रिंकी: ओह्ह विनय मेरी फुद्दि आह आह बहुत मज़ा आ रहा है..ओह्ह उम्ह्ह.

विनय ने जैसे ही अपना लंड रिंकी की चूत से बाहर निकाला. तो उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी…उसका लंड खून और रिंकी की चूत से निकल रहे कामरस से सना हुआ था…जैसे ही, विनय ने अपना लंड बाहर निकाला. रिंकी ने अपने पास रखे पुराने कपड़े को अपनी चूत पर दबा दिया…ताकि उसमे से खून निकल कर, बेड शीट पर ना गिरे…..

फिर उसने अपनी चूत को उस कपड़े से रगड़ कर सॉफ किया…और फिर विनय की तरफ देखा….जो हैरत से उसकी तरफ देख रहा था….

रिंकी: क्या हुआ ऐसे क्या देख रहे हो ?

विनय: रिंकी इसमे से खून निकल रहा है…

रिंकी: हां जानती हूँ….पहली बार करने से निकलता है..अब मैं ठीक हूँ…तू घबरा मत….

फिर रिंकी उठ कर बैठी, और विनय के लंड को हाथ मे लेकर उसे कपड़े से अच्छे से सॉफ किया…फिर उस कपड़े को साइड मे रखते हुए, बेड पर लेट गयी…रिंकी ने अपनी बाहों को खोल कर विनय को आने का इशारा किया…विनय उसके ऊपेर झुक गया….रिंकी ने उसे अपनी बाहों मे कस लिया…और उसकी आँखो मे झाँकते हुए बोली….”आइ लव यू विनय” और फिर दोनो के होन्ट फिर से आपस मे घूतम घुथ्था हो गये…..फिर से वही उम्ह्ह आहह उन्घ्ह की आवाज़े उनके मूह से आने लगी…

विनय का लंड अब उसकी चूत की फांको पर रगड़ खा रहा था…विनय भी मस्ती मे उसके होंटो को चूस्ता हुआ, उसके निपल्स को अपनी उंगलियों से भींचते हुए उसकी चुचियों को दबा रहा था….रिंकी की चूत मे कुलबुली सी होने लगी…..वो नीचे से अपनी गान्ड को हिलाते हुए, विनय के लंड को अपनी चूत के छेद पर सेट करने की कॉसिश कर रही थी….

 


थोड़ी देर के बाद अचानक से विनय के लंड का सुपाडा रिंकी की चूत के छेद पर अपने आप जा लगा….रिंकी का पूरा बदन एक दम से थरथरा गया. उसने अपने होंटो को विनय के होंटो से अलग किया, और फिर विनय की आँखो मे देखते हुए मुस्कुराने लगी….फिर उसने अपनी आँखे शरमा कर बंद कर ली, उसके होंटो पर मुस्कान फेली हुई थी….

विनय ने भी बिना देर किए, धीरे-2 अपने लंड के सुपाडे को रिंकी की चूत के छेद पर दबाना शुरू कर दिया….”उंह विनय सीईईईई अहह बहुत माजा आ रहा है…..तुम्हे नही आ रहा….”

विनय: हां रिंकी मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है…..

विनय के लंड का सुपाडा रिंकी की चूत के छेड़ और दीवारो को फैलाता रगड़ ख़ाता हुआ, अंदर बढ़ने लगा….रिंकी के बदन मे मस्ती की लहरे उमड़ रही थी….उसका पूरा बदन उतेजना के कारण कांप रहा था…उसकी चूत की दीवारे विनय के लंड को अपने अंदर कस कर निचोड़ रही थी…ऐसी सरसराहट विनय ने अपने लंड मे पायल की चूत मारते हुए भी महसूस नही की थी…

धीरे-2 विनय का पूरा लंड रिंकी की चूत मे समा गया….रिंकी ने सिसकते हुए, विनय को अपनी बाहों मे कस लिया….और उसकी टीशर्ट ऊपेर उठा कर उसकी पीठ को अपने हाथो से सहलाने लगी….”आह विनय करो ना उम्ह्ह आहह सीईईई आह विनय मुझे बहुत मज़ा आ रहा है….”

विनय ने रिंकी के फेस को अपनी तरफ घुमाया, और फिर अपने होंटो को उसके होंटो पर रख दिया…रिंकी ने अपने होंटो को खोल दिया….और विनय ने थोड़ी देर रिंकी के होंटो को चूसा, और फिर अपने होंटो को हटाते हुए, उसकी जाँघो के बीच मे घुटनो के बल बैठते हुए, अपनी पोज़िशन सेट की, और अपने लंड को धीरे-2 आगे पीछे करने लगा….

विनय के लंड के सुपाडे रिंकी अपनी चूत की दीवारो पर महसूस करके एक दम मस्त हो गयी….और अपनी आँखें बंद किए हुए अपनी पहली चुदाई का मज़ा लेने लगी…”अह्ह्ह्ह विनय हइई मेरी फुद्दि आह मार और ज़ोर से मार आह फाड़ दे अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह”

धीरे-2 विनय अपने धक्कों की रफतार को बढ़ाने लगा….पूरे रूम मे रिंकी की सिसकारियों और बेड के हिलने से चर-2 की आवाज़ गूंजने लगी.. रिंकी पूरी तरह मस्त हो चुकी थी….रिंकी की चूत उसके काम रस से भीग चुकी थी….जिससे विनय का लंड चिकना होकर रिंकी की चूत के अंदर बाहर होने लगा था….रिंकी भी अपनी गान्ड को धीरे-2 ऊपेर की ओर उछाल कर चुदवा रही थी….

रिंकी: हाईए ओईई अहह मार मेरी फुद्दि अह्ह्ह्ह विनय बहुत मज़ा आ रहा है.आह चोद मुझे अह्ह्ह्ह और तेज कर …देख मैं झड़ने वाली हूँ आह उहह उहह उंघह अह्ह्ह्ह विनय मैं गइईए अहह….

विनय के जबरदस्त धक्कों ने कुछ ही मिनिट मे रिंकी की चूत को पानी -2 कर दिया था….झड़ते हुए, उसका पूरा बदन रह-2 कर झटके खा रहा था…विनय अभी भी लगतार अपने लंड को बाहर निकाल-2 कर रिंकी की चूत मे पेल रहा था….रिंकी झड़ने के बाद एक दम मस्त हो गयी थी…उसकी चूत से इतना पानी निकला था कि, विनय का लंड पूरा गीला हो गया…

अब रिंकी अपनी आँखें बंद किए हुए लेटी थी…और लंबी -2 साँसे ले रही थी…रिंकी ने अपनी आँखें खोल कर विनय की तरफ देखा…जो पसीने से तरबतर हो चुका था..और अभी भी तेज़ी से धक्के लगा रहा था…..अब रूम मे सिर्फ़ बेड के चरमराने से चूं-2 की आवाज़ आ रही थी….जैसे -2 विनय झटके मारता, बेड हिलता हुआ चूं-2 की आवाज़ करता..

धक्के मारते हुए, जब विनय ने रिंकी की आँखो मे देखा….बेड की आवाज़ अब तेज होने लगी…पता नही क्यों पर रिंकी बेड के हिलने की आवाज़ सुन कर शरमा गयी, और अपने फेस को साइड मे घुमा कर मुस्कुराने लगी…

 
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