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चूत देखी वहीं मार ली compleet

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विनय: (अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए) क्या हुआ…?

रिंकी: (मुस्कुराते हुए) कुछ नही…..

विनय: फिर मेरी तरफ देखो ना…

रिंकी: नही मुझे शरम आती है…..

विनय ने अपने दोनो हाथों से रिंकी के चेहरे को अपनी तरफ घुमाया. पर रिंकी ने पहले ही अपनी आँखे बंद कर ली, उसके चेहरे पर शर्मीली मुस्कान फेली हुई थी….विनय ने रिंकी के होंटो को अपने होंटो मे लेकर चुसते हुए, अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी…और फिर कुछ ही पलों मे उसके लंड मे तेज सुरसुरी हुई….उसका लंड रिंकी की चूत मे झटके खाने लगा…..और फिर वो रिंकी के ऊपेर निढाल हो कर गिर पड़ा…..

रिंकी ने उसकी पीठ को सहलाते हुए, अपने होंटो को उसके होंटो से सटाये रखा. दोनो काफ़ी देर एक दूसरे के होंटो को चूस्ते रहे….विनय का लंड भी सिकुड कर रिंकी की चूत से बाहर आ गया….जब रिंकी की नज़र घड़ी पर पड़ी तो, उसने विनय को अपने ऊपेर से हटने के लिए कहा….विनय उसके ऊपेर से उठ कर बैठ गया….फिर रिंकी ने विनय से कहा कि, वो ये कपड़ा जिससे उसने अपनी चूत से निकला खून सॉफ किया था…पीछे प्लॉट मे फेंक दे….

उसके बाद रिंकी ने अपनी कमीज़ और सलवार पहनी….विनय ने भी कपड़े पहने और दोनो बाहर आ गये….

रिंकी और विनय अभी दोनो बाहर आए ही थे कि, डोर बेल बजी….विनय ने बाहर कर गेट खोला तो देखा कि, बाहर किरण के मम्मी पापा खड़े थे…विनय ने उनके पैर छुए और फिर वो अंदर आ गये….जब किरण की मम्मी ने किरण के बारे में पूछा तो, विनय ने बता दिया कि, वो मार्केट गये हुए है…विनय शीतल के घर जाकर शीतल को बुला लाया ताकि वो किरण के मम्मी पापा के लिए लंच बनवा सके….शीतल भी बच्चों को लेकर किरण के घर आ गयी….उसने किरण के मम्मी पापा के लिए पहले चाइ नाश्ते का इंतज़ाम किया और फिर दोपहर के खाने का…. ९६१०७८९२०२

किरण के भाई की शादी के दिन जैसे-2 नज़दीक आ रहे थे…..वैसे -2 घर मे मेहमानो का आना बढ़ता जा रहा था….वशाली ममता और उसका हज़्बेंड भी वापिस आ चुके थे…..उस दिन के बाद किरण को मोका नही मिल रहा था…और ना ही रिंकी को, विनय का तो बुरा हाल था…वो वासना से भरी तरसती नज़रों से दिन भर किरण को देखता रहता था…किरण का भी यही हाल था….पर घर मैं इतने लोगो की मौजूदगी मे वो कर भी क्या सकती थी….किरण के भाई की शादी मैं सिर्फ़ 4 दिन बचे थे….

शादी से 3 दिन पहले की बात है…किरण का घर और उसके पापा ने जो घर लिया था… दोनो घर मेहमानों से पूरी तरह भर चुके थे….रात को खाने के बाद सब लोग सोने की तैयारी कर रहे थे….विनय और वशाली दोनो ही किरण के साथ उसके रूम मे सोते थी…विनय खाना खा कर सबसे पहले रूम मे चला गया था…उसे जल्द ही नींद आ गयी….धीरे-2 घर मे सन्नाटा पसरता जा रहा था….वशाली को एक नयी हम उम्र सहेली मिल गयी थी….उसका नाम अनु था….वो किरण के सबसे छोटे चाचा की बेटी थी….उस रात को वशाली औरअनु दोनो शादी में पहने जानी वाली ड्रेस के बारे मे डिसकस कर रही थी…..

किरण भी फ्री होकर जब अपने रूम मे पहुँची तो, उसने देखा कि विनय सो रहा है….पर वशाली वहाँ नही थी….वो वशाली को ढूँढते हुए ऊपेर बने रूम मे गयी तो, पाया कि वशाली अनु के साथ गप्पे हांक रही थी…”चल वशाली सोना नही है क्या बहुत देर हो गयी है….अब इनको भी आराम करने दे…” इससे पहले कि वशाली कुछ बोलती….अनु बीच में बोल पड़ी….”बुआ वशाली आज मेरे साथ ही सो जाएगी….” अब भला किरण को और क्या चाहिए था….मन में तो ख़ुसी के लड्डू फूट रहे थे….वो बिना कुछ बोले वापिस नीचे आ गयी….रूम में पहुँच कर किरण ने डोर बंद किया…और बेड के पास आकर खड़ी हो गयी….रूम मे 0 वॉट का बल्ब ऑन था…

जिसकी हल्की रोशनी रूम मे फेली हुई थी….किरण ने बेड पर लेटे हुए , विनय की तरफ देखा, तो उसकी आँखे खुली हुई थी….”सोए नही अभी तक….?” किरण ने मुस्कराते हुए कहा….”अभी सोया था…डोर की आवाज़ सुन कर उठ गया….” विनय ने मुस्कराते हुए कहा…और बेड पर वशाली को ना पाकर उसने लेटे-2 ही किरण से पूछा… “मामी वशाली कहाँ है….?” तो किरण ने मुस्कुराते हुए कहा….”वो आज अनु के साथ ऊपेर ही सोएगी….” किरण की चूत से तो उसी वक़्त से पानी रिसना शुरू हो गया था….जब वो ऊपेर से नीचे आई थी…..

किरण ने जल्दी से अपनी साड़ी खोली और बेड पर लेट गयी….किरण ने विनय की तरफ करवट बदली उसकी कमर को अपनी बाहों मे कसते हुए, उसे अपने से चिपका लिया…और अगले ही पल विनय ने किरण के होंटो को चूमते हुए, उसे बेड पर पीठ के बल लेटा दिया, और खुद उसके ऊपेर लेट गया……किरण की साँसे मस्ती मे तेज हो गयी थी…….और वो अपने होंटो को ढीला चोर कर विनय से अपने होंटो को चुस्वा कर मस्त हुई जा रही थी……और विनय उसके होंटो को चूस्ते हुए, उसके ब्लाउस के बटन को धीरे -2 खोल रहा था…….जैसे ही किरण के सारे ब्लाउस के बटन खुले, उसके बड़ी-2 गुदाज चुहियाँ ब्लाउज की क़ैद से बाहर उछल पड़ी…..

 


विनय ने अपने होंटो को किरण के होंटो से अलग किया…..और किरण की आँखों में देखा…..उसकी आँखें बहुत मुस्किल से खुल पा रही थी…..जिसमे वासना का नशा छाया हुआ था….किरण की चुचियाँ ऊपेर नीचे हो रही थी…..जिसे देख विनय की आँखों की चमक भी बढ़ गयी…..वो किसी भूखे कुत्ते की तरहा किरण की चुचियों पर टूट पड़ा…..

और अपने दोनो हाथों मे जितना भर सकता था..भर कर दोनो चुचियों को मसलते हुए, उसके निपल्स पर अपनी जीभ को फिराने लगा……किरण मस्ती में एक दम से सिसक उठी, और उसने विनय को बाहों में भरते हुए अपने बदन से चिपका लिया…..विनय का लंड उसके पाजामे को फाड़ कर बाहर आने को बेकरार हुआ जा रहा था…..

किरण: (मस्ती में सीसियाते हुए) आह विनय सीईईईईईईई तूने मुझे क्या कर दिया है……..ओह्ह्ह्ह क्यों तेरा लंड अपनी फुद्दि मे लिए बिना मुझे नींद नही आती……..मैं मर जाउन्गी, तेरे बिना……

विनय: (किरण की चुचियों पर अपने होंटो को रगड़ते हुए) आह मामी……मेरा भी तो आप जैसा हाल है……. ये लंड जब तक आपकी चूत का रस चख नही लेता….मुझे भी नींद नही आती……

किरण: ओह्ह विनय फिर तडपा क्यों रहा है…..डाल दे अपना मुनसल लंड मेरी चूत मे…और खूब रगड़ कर चोद अपनी मामी को……..

ये कहते हुए, किरण बेड पर पीठ के बल लेट गयी…..उसने अपने पेटिकोट को अपनी कमर तक ऊपेर उठा दिया……0 वॉट के बल्ब की रोशनी मे किरण की चिकनी चूत कामरस लबालब कर चमक उठी……जिसे देखते ही, विनय के दम पागल सो गया, और किरण की जांघों के बीच मे आकर उस पर सवार हो गया….

ऊपेर आते ही, विनय ने किरण के चुचि को जितना हो सकता था मूह मैं भर कर चूसना चालू कर दया…..किरण के पूरे बदन मैं मानो बिजली कोंध गयी……उसने विनय के सर को अपनी बाहों मे जाकड़ कर अपनी चुचियों पर दबाना चालू कर दिया…….”अह्ह्ह्ह चुस्स्स मेरी जान चुस्स्स ले मेरा दूध सब तेरे लिए है…..ओह और ज़ोर से चुस्स्स्स्स अह्ह्ह्ह हाआंन्णजणन् काट ले ओह ढेरीईई”

विनय किरण के निपल को अपने होंटो के बीच में लेकर, अपनी जीभ से कुलबुलाने लगा…..किरण का पूरा बदन मस्ती के कारण कांप रहा था…..उसकी हल्की सिसकियाँ उसके रूम के दीवारों से टकरा कर उसी कमरे मे खो कर रह जा रही थी……चूत मे खुजली और बढ़ गयी थी…..विनय ने अपना एक हाथ नीचे लेजाकर अपने पयज़ामे का नाडा खोल कर उसे नीचे सरकाना शुरू कर दया……

किरण ने अपनी टाँगों को मोड़ कर विनय की जांघों पर पावं रख कर उसके प्यज़ामे म अपने पैर फँसा दिए, और फिर उसके प्यज़ामे को अपने पैरो से नीचे सरकाते हुए, उसके पैरो से निकाल दिया….विनय का फन्फनाता हुआ लंड, जैसे ही प्यज़ामे की क़ैद से बाहर आया……..वो सीधा किरण की चूत के फांको के बीच जा पहुँचा……

जैसे ही विनय के लंड के गरम सुपाडे ने किरण की चूत की फांकों को छुआ, किरण की चूत मैं सरसराहट और बढ़ गयी…..किरण ने मस्त होकर अपनी टाँगों को और फेला कर ऊपेर उठा कर विनय की कमर पर कस लिया……विनय के लंड का सुपाडा किरण की चूत की फांको को फेला कर उसकी चूत के छेद पर जा लगा…..किरण ने अपनी मदहोशी से भरी आँखों को खोल कर विनय की तरफ देखा…..

किरण: (मदहोशी और मस्ती भरी आवाज़ में विनय की आँखों मे झाँकते हुए) अह्ह्ह्ह ओह्ह्ह बहुत गरम ही रे तेरा ये लौडा….

विनय: हां मामी आप की चूत भी भट्टी की तरहा तप रही है…..

किरण: वो तो कब से फुदक रही है..तेरे लंड को अंदर लेने के लिए……

ये कहते हुए, किरण ने विनय के पीठ पर अपनी बाहों को कस लाया, और ऊपेर की तरफ अपनी गान्ड को उठाने लगी…..लंड पर चूत का दबाव पड़ते ही, किरण की चूत की फाँकें फेलने लगी…..और विनय के लंड का मोटा सुपाडा किरण की टाइट चूत के छेद को फेलाते हुए, अंदर घुसने लगा….किरण अपनी सांसो को थामे हुए, तब तक अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उठती रही. जब तक विनय का लंड धीरे-2 किरण की चूत में जड तक नही समा गया…….

जैसे ही विनय के लंड का सुपाडा किरण की बच्चेदानी से जाकर टकराया, किरण के होंटो पर सन्तुस्ति भरी मुस्कान फेल गयी…..मस्ती अपने चरम पर पहुँच गये……किरण एक दम कामविहल हो गयी. मानो जैसे वो जन्नत मे पहुँच गयी हो….उसने अपनी अधखुली और वासना से लिप्त आँखों से विनय की तरफ देखा, तो उसे ऐसा लगा.मानो जैसे विनय ही उसकी जिंदगी हो……

उसने अपने दोनो हाथों में विनय के चेहरे को पकड़ कर कुछ देर के लिए उसकी तरफ़ देखा, और फिर अपने थरथरा रहे होंटो को, विनय के होंटो पर लगा दिया……और उसके होंटो को चूस्ते हुए, अपना सारा प्यार विनय को लौटाने लगी….विनय भी मस्ती मे आकर किरण के होंटो को चूस्ते हुए, धीरे-2 अपने लंड को किरण की चूत के अंदर बाहर करने लगा…..

 


दोनो एक दूसरे के होंटो को चूस्ते हुए, अपने प्यार का इज़हार एक दूसरे से कर रहे थे, और जब विनय अपना लंड किरण की चूत से बाहर निकाल कर दोबारा अंदर पेलता, तो किरण अपनी जांघों को फेला कर अपनी गान्ड को ऊपेर उठा कर फिर से विनय के लंड को अपनी चूत मे लेने के लिए आतुर हो उठती….और जब विनय का लंड फिर से किरण की चूत की गहराइयों मे जाता, तो किरण अपने दोनो हाथों से विनय के चुतड़ों को दबा कर उसके लंड पर अपनी चूत को और दबा देती…..

उसकी चूत की दीवारे विनय लंड को अंदर ही अंदर कस कर छोड़ रही थी….मानो जैसे उसके लंड को मथ रही हो……किरण की चूत की गरमी को अपने लंड पर महसूस करके, विनय भी मदहोश हुआ जा रहा था…..हर धक्के के साथ विनय की स्पीड बढ़ रही थी, और किरण भी मस्ती मे अपने होंटो को चुस्वाते हुए, उसकी लय में अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उछाल कर विनय का लंड अपनी चूत की गहराइयों में लेने की कॉसिश कर रही थी……

अब विनय पूरे जोश मे आ चुका था…..उसने अपने होंटो को किरण के होंटो से अलग किया, और उसकी जांघों के बीच बैठते हुए, ताबडतोड़ धक्के लगाने लगा…..विनय के लंड के तबडतोड़ धक्को ने किरण की चूत की दीवारों को बुरी तरहा रगड़ कर रख दिया…..उसके पूरे बदन मे मस्ती की लहर दौड़ गयी……..

किरण : (अपनी चुचियों के निपल्स को अपने हाथों से मसलते हुए) आहह आह विनय धीरे कर ओह्ह्ह मर गइईए रीई धीरे बेटा ओह अहह उंह और बहुत मज़ा आ रहा है विनय ओह्ह्ह्ह धीरे बेटा अहह अह्ह्ह्ह चोद मुझे अहह

विनय: आह चोद तो रहा हुन्न्न्न्न्न अहह अह्ह्ह्ह

किरण ने अपनी सिसकियों को दबाने के लिए अपने होंटो को दाँतों के बाच मे दबा लिया….और तेज़ी से अपनी गान्ड को ऊपेर की और उछलते हुए झड़ने लगी……विनय के लंड ने भी उसकी चूत की दीवारों को भीगो कर रख दिया….झड़ने के बाद विनय किरण के ऊपेर निढाल होकर गिर पड़ा…..

सुबह के 5 बज चुके थे….किरण आज काफ़ी दिनो के बाद झड़ने के कारण काफ़ी हल्का महसूस कर रही थी….विनय और किरण दोनो गहरी नींद मे सो रहे थे कि, तभी बाहर हॉल की लाइट ऑन हुई और बाहर की हलचल की आवाज़ सुन कर किरण की नींद टूटी. वो बेड पर उठ कर बैठ गयी….उसने अपनी कमर पर चढ़े हुए पेटिकोट को ठीक किया. और बेड से नीचे उतर कर अपने ब्लाउस के हुक्स बंद करते हुए, लाइट ऑन की. लाइट ऑन करने के बाद किरण ड्रेसिंग टेबल के सामने जाकर खड़ी हो गयी….और अपने आप को मिरर में देखने लगी कि, कही उसके चेहरे पर कोई निशान तो नही है…

अभी किरण आईने मैं ही देख रही थी कि, विनय ने एक दम से उठ कर पीछे से बाहों में भर लिया….और उसके गालो पर अपने होंटो को रगड़ने लगा…”सीईईई ओह्ह्ह विनय कब उठे तुम….?” किरण ने मस्ती में सिसकते हुए कहा….”अभी उठा हूँ…” विनय ने अपने दोनो हाथो को आगे लाकर किरण के ब्लाउस के ऊपेर से उसकी चुचियों को मसलते हुए कहा…तो किरण के पूरे बदन में झुरजुरी से दौड़ गयी….” विनय सुबह हो गयी है…सब लोग उठने वाले होंगे….मुझे सब के लिए चाइ नाश्ता भी तैयार करना है….” किरण ने विनय की तरफ घूमते हुए कहा….

विनय: मामी इतनी जल्दी कोई नही उठेगा…..कल रात भी एक बार ही किया था….प्लीज़ एक बार और करने दो ना….

विनय लगातार किरण की चुचियों को मसल रहा था….जिसके कारण किरण भी मदहोश होती जा रही थी….उसने अपना एक हाथ नीचे लेजाते हुए अपने पेटिकोट का नाडा पकड़ कर खोल दिया…जैसे ही पेटिकोट का नाडा खुला पेटिकोट उसके कमर से सरकता हुआ नीचे फर्श पर जा गिरा…अगले ही पल किरण विनय के सामने नीचे पैरो के बल बैठ गयी…और उसके शॉर्ट्स को दोनो तरफ से पकड़ कर खेंचते हुए उसके बदन से अलग करके फेंक दिया….

किरण किसी भूखी कुतिया की तरह विनय के लंड पर टूट पड़ी….उसने विनय के लंड को हाथ में लिया….और अगले ही पल उसने विनय के लंड के गुलाबी सुपाडे को अपने होंटो मे भर कर चूसना शुरू कर दिया…उसने अपने होंटो को विनय के लंड पर दबा कर अपने सर को आगे पीछे करना शुरू कर दिया…विनय की आँखे मस्ती मे बंद हो गयी… खड़े-2 उसके पैर काँपने लगी….किरण अब पूरे जोश के साथ विनय के लंड के चुप्पे लगा रही थी….और विनय मस्ती मे आहह आहह कर रहा था. फिर किरण ने विनय के लंड को मूह से बाहर निकाला…और उसके लंड के सुपाडे को अपने दाँतों से कुरेदा…तो विनय एक दम से मचल उठा…

उसने किरण के सर को दोनो हाथो से कस के पकड़ लिया….किरण ने अपनी आँखो को ऊपेर उठाते हुए उसकी ओर देखा..और फिर विनय की आँखो मे देखते हुए, अपनी लाल रसीली जीभ को बाहर निकाल कर लंड के सुपाडे के चारो तरफ फेरा. विनय की आँखे एक बार फिर कुछ पलों के लिए बंद हो गयी…ये सब करते हुए, किरण विनय के चेहरे को देख रही थी….विनय ने फिर से आँखे खोल कर किरण की ओर देखा…तो उसने इस बार विनय की आँखो मे देखते हुए, विनय के लंड को थोड़ा सा ऊपेर उठाया…और फिर अपनी जीभ को नोकदार बना कर विनय के लंड के पेशाब वाले छेद पर रगड़ने लगी….

 


मामी की इस हरक़त से विनय एक दम से मचल उठा….उसने किरण के कंधो को पकड़ कर ऊपेर उठाया और पीछे बेड की तरफ धकेल दिया…और अपने लंड को मुट्ठी मे भर कर मूठ मारने वाले अंदाज़ मे हिलाते हुए, किरण की ओर देखने लगा… किरण ने भी अपनी वासना भरी आँखो से देखते हुए, अपने ब्लाउस के हुक्स को फिर से खोलना शुरू कर दिया…

ये सब किरण बड़ी ही अदा के साथ कर रही थी….वो जान बुझ कर अपने ब्लाउस को खोल रही थी….और विनय की बेकरारी को देख कर मुस्करा रही थी….पर जैसे ही उसकी नज़र विनय के लंड पर पड़ी. तो उसकी चूत ने पानी बहाना शुरू कर दिया….विनय भी बेड पर चढ़ गया. उसने अपनी बेताबी दिखाते हुए, किरण की दोनो टाँगो को घुटनो से पकड़ कर ऊपेर उठा दिया….

किरण की चूत का कुलबुलाता हुआ रसीला छेद विनय की आँखो के सामने आ गया…विनय ने अपने लंड को हाथ से पकड़ कर लंड के सुपडे को किरण की चूत की फांको की लाइन के बीच मे रगड़ा तो, किरण एक दम से सिसक उठी. उसने सिसकारी भरते हुए, अपने सर के नीचे रखे तकिये को कस के पकड़ लाया….और अपनी गहरी नशीली आँखो से विनय की ओर देखते हुए, अपने थरथरा रहे होंटो से कहा….

किरण: हइई विनय तेरे लंड तों अहह फदड दी मेरी फुद्दि ….

विनय ने किरण की बात सुन कर जोश में आते हुए, अपने लंड के सुपाडे को चूत के छेद पर जैसे ही दबाया….किरण को महसूस हुआ कि, उसकी चूत का छेद किसी इलास्टिक की तरहा खिंच कर खुल गया हो….आज तक उसे अपनी चूत का छेद इस तरहा खुला हुआ महसूस नही हुआ था..विनय के लंड का सुपाडा बुरी तरहा से उसके छेद में फँस गया था…

और किरण को अपनी चूत के छेद विनय के लंड पर कसा हुआ सॉफ महसूस हो रहा था….विनय ने दो तीन बार अपने लंड को किरण की चूत मे आगे पीछे किया..जिससे विनय के लंड का सुपाडा किरण की चूत से निकल रहे कामरस से एक दम भीग गया….विनय के लंड का सुपाडा अब धीरे-2 किरण की गहराइयों मे घुसने लगा…किरण को अपनी चूत की दीवारे बुरी तरह फेली हुई महसूस हो रही थी….

जैसे ही विनय का पूरा लंड किरण की चूत मे समाया तो, किरण को अपनी चूत आख़िरी हिस्से तक भरी हुई महसूस हुई…किरण विनय के लंड को अपने अंदर महसूस करके एक दम मस्त हो गयी थी…उसके पूरा बदन थरथरा कांप रहा था….और रह-2 कर झटके खा रहा था…” हाई विनय तेरा लंड इतना आह बड़ा कैसे हो गया…आह मार ना फुद्दि मेरे पुत्तर आह तेरे को लंड देखते ही मेरी फुद्दि ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया है..

विनय ने भी किरण की नाइटी को पकड़ कर उसके बदन से अलग कर दिया…अब दो नंगे जिस्म एक दूसरे से चिपके हुए थे….और विनय अपना मुनसल सा लंड किरण की चूत की गहराइयों मे ठोक रहा था…”हाई मर गयी आह उंह विनय तेरा लौडा अहह आहह आह आह हाई मेरी फुद्दि फाड़ दी…अह्ह्ह्ह उंह सीईईई सीईइ स स विनय मेरी फुद्दि फॅट गयी….”

जैसे ही विनय पूरी ताक़त से अपना लंड किरण की चूत की गहराइयों मे उतरता. किरण बुरा सा मूह बना कर हाए-2 करने लगती… उसके चेहरे पर से सॉफ झलक रहा था कि, किरण को सच मे विनय के लंड को लेने मे तकलीफ़ हो रही है….पर इस दर्द के साथ किरण आज मज़े की उन वादियों मे घूम रही थी…जिसकी उसने आज तक कल्पना भी नही की थी…कि उसे कोई इस तरह सुबह के 5 बजे भी उठ कर चोदने के लिए उतावला हो सकता है…

 


चुदाई का ये दौर करीब 15 मिनिट तक चला….जब दोनो झड कर शांत हुए तो, दोनो ने जल्दी-2 अपने कपड़े पहने और बेड पर लेट गये…किरण करीब 6 बजे तक बेड पर लेटी रही….और फिर 6 बजे उठ कर बाहर आई….किरण फ्रेश होकर सुबह के नाश्ते की तैयारी करने मे जुट गयी….दो दिन बाद शादी थी….इसलिए घर मे मेहमानो का ताँता लगा हुआ था…इसी दौरान शादी के काम काज और भाग दौड़ मे किरण प्रेग्नेन्सी रोकने वाली टॅब्लेट्स खाना भी भूल गयी….और घर मे मेहमानो और शादी का समान इधर उधर बिखरे होने के कारण वो टॅबलेट भी पता नही कहाँ खो गयी थी….पर मसरूफयत की वजह से किरण ने उस और ध्यान ही नही दिया….

उस रात भी किरण ने विनय से दो बार और चुदवाया….शादी का दिन आ गया….शादी बहुत धूम धाम से हुई….शादी के अगले दिन उनके घर मे पार्टी थी….इसी तरह मोज मस्ती मे 4 दिन गुजर गये….किरण के दिमाग़ से ये बात निकल ही चुकी थी कि, उसने गरभ निरोधक टॅब्लेट्स नही ली है….इस बीच किरण का भाई शादी के बाद एक बार फिर से किरण के घर आया….जशन सा महॉल था…इन 15 दिनो मे….किरण और विनय की वासना बढ़ती जा रही थी….उन्हे जब भी मोका मिलता दोनो चुदाई का खेल खेल लेते. दिन पर दिन गुजरते जा रहे थे….किरण को इस महीने पीरियड्स नही आए थे…पर किरण का ध्यान इस तरफ गया ही नही था….

इसी तरह एक मंथ और गुज़रा तो, एक दिन वशाली को पीरियड्स आए….उसके पास एक ही पॅड घर पर बचा था…वो अपनी मोम के रूम मे गये….”क्या हुआ बच्चे….इतनी परेशान क्यों है….?’ किरण ने वशाली के माथे पर हाथ रखते हुए कहा…”माँ वो मुझे पीरियड्स आए हुए है…और घर पर पॅड ख़तम है…आप बाज़ार से जाकर ला दो ना…” वशाली ने किरण के पास लेटते हुए कहा….

किरण: ठीक है ला देती हूँ….

ये कह कर किरण रूम से बाहर आई और फिर घर से बाहर निकल कर शॉप की तरफ जाने लगी तो, एक दम से उसके दिमाग़ मे ये बात कोंध गयी कि, उसे लास्ट पीरियड्स दो महीने पहले आए थे….वो भी उसके भाई की शादी से पहले….किरण के तो पाँव के नीचे से ज़मीन ही खिसक गयी..उसके चेहरे का रंग एक दम से उड़ गया….वो घबराई हुई सी शॉप पर पहुँची और जल्दी से पॅड खरीद कर घर की तरफ चल पड़ी…

 


किरण बहुत बुरी तरह घबराई हुई थी….वो दो महीने से पेट से है….ये सोच कर ही उसकी रूह कांप जाती….वो जल्दी से घर पहुँची, और वशाली को पॅड देकर बेड पर बैठ गयी….वशाली बातरूम मे चली गयी….उसे समझ मे नही आ रहा था कि, वो क्या करे….वो किसी डॉक्टर के पास जाने से भी घबरा रही थी…उसे समझ मे नही आ रहा था कि, वो क्या करे….शाम को तैयार होकर वो एक नर्सिंग होम मे पहुचि. और वहाँ जाकर एक लेडी डॉक्टर से मिली….

डॉक्टर: बताए आप को क्या तकलीफ़ है….

किरण: जी वो मुझे अबर्षॅन करवाना है…..

डॉक्टर: आप अबर्षॅन क्यों करवाना चाहती है……

किरण: जी मेरे पहले से दो बच्चे है….इसीलिए हम तीसरा बच्चा नही करना चाहते….

डॉक्टर: ठीक है, आप अपने हज़्बेंड को यहाँ ले आएँ….अबर्षॅन के लिए उनका सहमत होना भी ज़रूरी है….जब तक आपके पति खुद यहाँ आकर पेपर्स साइन नही करते…हम अबर्षॅन नही कर सकते….(किरण जो घर से सोच कर आई थी…वो वही रटे रटाये जवाब दे रही थी….पर बिना हज़्बेंड की सहमति के अबोर्शन होना ना मुनकीन था.)

डॉक्टर: आप बाहर जाकर अपना नाम और अड्रेस लिखवा दीजिए….और कल अपने पति को साथ ले आएगा…..

किरण: जी…

किरण घबराई हुई सी बाहर आई…और बिना अपना अड्रेस लिखवाए ही चली गयी….किरण चारो तरफ से बुरी तरह फँस चुकी थी…कि अब वो सब क्या जवाब देगी…..किरण जब घर पहुँची तो, शाम के 7 बज चुके थे….उसका कुछ भी करने का मूड नही था….उसने विनय को पैसे दिए…और सब के लिए ढाबे से खाना मँगवा लिया….वो रात ऐसे ही गुजर गयी….सोचते-2 अगले दिन की दोपहर भी हो गयी…इसी दौरान किरण के दिमाग़ मे आया कि, जब उसके भाई की शादी हुई थी…उसके दो या तीन दिन बाद उसके पति ने उसके सेक्स किया था….किरण के मन मे उम्मीद की चिंगारी फूटी और उसने इस बारे मे अपने पति से बात करने के लिए कहा….

जब किरण के दिमाग़ मे ये सब आया तो, किरण ये सोच कर खुश होने लगी की, उसके इस झूट से उसको दो फ़ायदे हो जाएँगे….एक तो वो बदनामी से बच जाएगी….और दूसरा कि उसे भी माँ बनने का सुख मिल जाएगा….किरण अपने रूम से बाहर आई, और उसने विनय को जो कि हॉल में टीवी देख रहा था…उसे शीतल को बुला कर लाने को कहा….विनय अपनी मासी शीतल के घर चला गया…थोड़ी देर बाद जब विनय शीतल के साथ घर वापिस आया तो, वो शीतल को अपने रूम मे ले गये….

शीतल: हां बोल किरण क्या काम है…..

किरण: दीदी मुझे आपसे एक बात करनी है…..

शीतल: हां बोल…..

किरण: दीदी समझ में नही आ रहा कैसे कहूँ….

शीतल: तूँ बोल तो सही….

किरण: दीदी मुझे दो महीने से पीरियड्स नही आए है….

शीतल: (एक दम चोन्कते हुए) क्या फिर तो तुम्हे किसी डॉक्टर से चेक करवाना चाहिए था…..

किरण: नही दीदी मैने घर पर चेक किया है….मैं दो महीनो से पेट से हूँ…

किरण की बात सुन कर शीतल और ज़्यादा चोंक गयी….”पर ये सब कैसे हुआ….वो भी इतने सालो बाद….क्या भैया कोई मेडिसिन वहगरा ले रहे थे….” शीतल ने बात की गहराई को समझने की कॉसिश करते हुए कहा….

किरण: नही दीदी….वो भैया की शादी के दो दिन बाद हम दोनो एक साथ हुए थे…पिछले महीने तो शादी की भागदौड़ मे मैने ध्यान ही नही दिया और इस मंथ भी मेरे दिमाग़ मे ये बात नही आई थी….

शीतल: तो फिर तू इस तरह उदास क्यों लग रही है…ये तो बहुत ख़ुसी की बात है….

शीतल को खुश देख कर किरण को थोड़ा हॉंसला हुआ…अगर शीतल उसकी बात मान गयी थी…तो हो सकता है कि, अजय भी उसकी बात मान जाए…..जैसे तैसे वक़्त कटा और शाम हुई, अजय अभी घर नही आया था…रात के 8 बजे विनय खाना खा रहा था कि, अभी वहाँ आ गया…”भैया मेरे साथ घर चलो ना…पापा नये वीडियो गेम लेकर आए है…” अभी ने विनय के पास बैठते हुए कहा…”अच्छा रूको पहले मुझे खाना खाने दो….” विनय ने जल्दी खाना खाना शुरू कर दिया…..

अभी: भैया कल सनडे है तो, आज रात हम देर तक वीडियो गेम खेलेंगे….

विनय: ठीक है…तू रुक मैं मामी से पूछ कर आता हूँ….

विनय ने अपने खाली प्लेट्स उठाई और किचन में चला गया….किरण ने किचन मे काम करते हुए, ही विनय और अभी की बातें सुन ली थी….”मामी वो मैं मासी के घर जाउ…..मौसा जी नये गेम लेकर आए है….”

किरण: ठीक है जाओ….पर जल्दी सो जाना….देर रात तक नही जागना….

विनय; जी मामी….

विनय खुशी से भागता हुआ किचन से बाहर आया और अभी को साथ लेकर उसके घर चला गया…किरण ने जल्दी घर का काम निपटाया और अपने पति के आने का इंतजार करने लगी…वशाली खाना खा कर सो चुकी थी…रात के करीब 10 जब अजय घर पहुँचा तो, किरण ने उसके लिए डाइनिंग टेबल पर खाना लगाना शुरू कर दिया…अजय रूम मे गया….और अपने कपड़े उतार कर कमर पर टवल लप्पेटा और बाथरूम मे घुस गया….शवर लेने के बाद वो कुर्ता पाजामा पहन कर डाइनिंग टेबल पर आया तो, उसने किरण के बदले हुए मूड को देखते हुए पूछा…

अजय: क्या बात है….आज बड़ी खुश लग रही हो….

किरण: (मुस्कुराते हुए….) क्यों मैं खुश नही हो सकती….

अजय: नही दरअसल तुम हमेशा मुझे शराब के नशे मे देख कर तो, बुददुदाने लगती हो…आज कुछ ख़ास है क्या….अच्छा विनय सो गया क्या….

किरण: नही वो आज शीतल दीदी के घर पर है वही सोएगा….

अजय: अच्छा अब बताओ इतनी खुश क्यों हो…..

किरण: जी एक ख़ूसखबरी है….(किरण ने अजय के साथ वाली चेर पर बैठते हुए कहा..)

 


अजय: तो चलो पहले खूसखबरी ही सुन लेते है….

किरण: जी मैं वो…..(किरण ने शरमाते हुए कहा….)

अजय: हां भाई बोलो….मुझसे इंतजार नही हो रहा….

किरण: जी वो मैं पेट से हूँ….

किरण की बात सुनते ही अजय एक दम सुन्न पड़ गया….उसे यकीन नही हो रहा था कि किरण जो कह रही है क्या वो सच है….”तुम्हे कैसे पता चला…..” अजय ने पानी का घूँट भरते हुए कहा….”जी दो महीने से डेट नही आई थी…..और कल चेक क्या तो पता चला…..” किरण की बात सुन कर अजय चेर से खड़ा हो गया….

किरण: क्या हुआ जी…..पहले तो मुझे भी यकीन नही हो रहा था….आप को याद है ना भैया के शादी के दो दिन बाद हम ने वो किया था…..

अजय: कुछ नही हुआ….मैं भी एक खूसखबरी तुम्हे देना चाहता हूँ….

किरण: क्या….?

अजय: रूको एक मिनिट….

ये कहते हुए वो रूम मे चला गया…..किरण अभी भी थोड़ा घबरा रही थी…थोड़ी देर बाद अजय वापिस हॉल मे आया और एक पेपर किरण की तरफ बढ़ा दिया… किरण ने सवालिया नज़रों से अजय की तरफ देखते हुए, वो पेपर पकड़ लिया….किरण पेपर देखते ही समझ गयी थी कि ये कोई मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट है…पर किस चीज़ की है वो उसे पता नही चला…

किरण: जी ये क्या है…

अजय: मेरे रिपोर्ट्स है….पता है इसमे क्या लिखा है….

किरण: नही….

अजय ने किरण को कंधो से पकड़ कर खड़ा किया और फिर अपने दोनो हाथो को उसके कंधो से हटा लिया…और अगले ही पल एक जोरदार थप्पड़ किरण के गाल पर पड़ा… किरण के कान मे सीटी बजने लगी…..गाल सुन्न हो गया….”साली हरामजादी इसमे लिखा है कि, मैं कभी बाप नही बन सकता….मेरे अंदर स्पर्म्ज़ ही नही बनते तो, ये बच्चा कहाँ से आ गया….”

अजय की बात सुनते ही किरण के पैरो तले से ज़मीन खिसक गयी….”जी मैं सच कह रही हूँ….मैने तो कभी आपके सिवाए…किसी और के साथ….” अभी किरण अपनी बात पूरी भी नही कर पे थी कि, अजय ने किरण को बालो से पकड़ा और घसीटते हुए ऊपेर ले गया…किरण दर्द से तड़प उठी…”सुनिए जी आह मेरी बात तो सुनिए… “ पर अजय तो जैसे पागल हो चुका था…उसने किरण को ऊपेर एक रूम मे लेजाकर बेड पर पटक दिया..और फिर खुद बेड पर चढ़ते हुए मुक्के और घूँसों और लातो की बारिश कर दी…..”ये ले साली मेरा बच्चा है….बोल साली किसका बीज तूने अपनी कोख मे डाल रखा है…साली बाहर के लोगो से चुदवाना कब शुरू कर दिया…”

अजय पूरी बहरामी से किरण की ठुकाई कर रहा था…ऐसे-2 जोरदार घूँसो की बारिश की कि, किरण का सबर जवाब दे गया….”बताती हूँ—2 …” किरण के चेहरे पर कई घाव हो चुके थे…उसके होंटो और नाक मे से खून बह रहा था…आँखे सूज चुकी थी…उसका ब्लाउस कई जगह से फट चुका था…

.”बोल साली अब अगर एक मिनिट भी देर की सच बोलने मे तो मैं तेरी खाल खेंच कर उतार दूँगा…..” ये कहते हुए अजय बेड से नीचे उतर गया….”बोल अब ये बच्चा किसका है….”

किरण: जी वो विनय का……

जैसे ही अजय ने विनय का नाम सुना तो, वो सर पकड़ कर नीचे बैठ गया….” हे भगवान ये सब मेरे साथ तुमने क्यों क्या…” वो पागलो की तरह दहाड़ें मार कर रोने लगा….किरण बेसूध सी वहाँ बेड पर मरी हुई हालत मे बैठी अजय को देख रही थी….तभी अजय एक दम से उठा..उसका चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था….”नही छोड़ूँगा – 2 उस हराम के पिल्ले को मैं….उस कंज़र को मैने अपने घर मे रखा, हर तरह के सुख दिए….पढ़ाया लिखाया इस दिन के लिए….”

ये कहते हुए अजय तेज़ी से नीचे गया….किरण जो बेजान सी बेड पर बैठी थी…जब उसको पता चला कि, अजय शीतल के घर गया है…तो उसका दिल एक दम से कांप उठा….कि कही अजय विनय को कुछ कर ना दे….

अजय नीचे आया और अपने रूम से हॉकी स्टिक उठा कर घर से बाहर निकल कर शीतल के घर की तरफ भागा….उसके सर पर खून सवार हो चुका था…वो गुस्से से काँपते हुए शीतल के घर की तरफ दौड़े जा रहा था…..किरण को भी इस बात का अहसास हो चुका था…..कि कितनी बड़ी मुसबीत आने वाली है….वो किसी तरह अपने आप को संभालते हुए, घर से निकल कर शीतल के घर की तरफ गयी….दूसरी तरफ अजय ने शीतल के घर के सामने पहुँच कर बुरी तरह से उसके घर के गेट को पीटना शुरू कर दिया था…..

 


शीतल और उसका पति जो अभी खाना खा कर बेड पर लेटे ही थे कि, वो बाहर से आ रही गेट ठोकने की आवाज़ सुन कर एक दम से चोंक गये…..”ये साला कॉन पागल आ गया है इस समय….” शीतल के पति ने झुंझलाते हुए कहा….और बेड से नीचे उतर कर रूम का डोर खोल कर बाहर चला गया….बाहर अजय अभी भी गेट को ज़ोर- 2 से नॉक कर रहा था…शीतल भी बेड से उठ कर बाहर आ गयी…जैसे ही शीतल के पति ने गेट खोला तो, अजय दानदनाते हुए अंदर आ घुसा…..

अजय को इस हालत मे देख कर दोनो घबरा गये…..”क्या हुआ भैया आप इस समय और ये हाथ में हॉकी किस लिए…”

अजय ने गुस्से से थरथराते शीतल की तरफ देखा और उसे धक्का देकर पीछे हटाते हुए बोला….”कहाँ है वो हराम का पिल्ला….आज उसे मैं जिंदा नही छोड़ूँगा…” जैसे ही अजय आगे बढ़ने लगा तो, शीतल ने आगे आकर उसका रास्ता रोक लिया….”भैया हुआ क्या…बताओ तो सही….आप किसकी बात कर रहे हो…?” शीतल ने घबराते हुए कहा….

अजय: उसी हराम के पिल्ले की. जिसे मैं अपने घर में पिछले एक साल से रख रहा हूँ. उसे पढ़ा रहा लिखा रहा हूँ….विनय कहाँ है…

शीतल: क्या किया है विनय ने…..बच्चा है वो अगर उससे कोई ग़लती हो गयी है तो, उसे जान से मार देने की सोची भी कैसे आप ने….आपकी बेहन की आख़िरी निशानी है वो….

अजय: नही वो हरामज़ादा मेरी बेहन की औलाद हो ही नही सकता…

शीतल: पर उसने क्या किया है….?

इतने मे पीछे से किरण भी उनके घर में दाखिल हुई….किरण का पूरा चेहरा खून से सना हुआ था…जिसे देख शीतल और उसका पति दोनो घबरा गये….जैसे ही किरण उनके घर मे दाखिल हुई, वो लड़खड़ा कर नीचे गिर गयी….शीतल और उसका पति दोनो उसको उठाने के लिए उसकी तरफ दौड़े तो, अजय मोका देखते हुए अंदर की ओर भाग निकाला…”मेरी फिकर ना करो दीदी….उन्हे रोको….नही तो विनय को आहह….मैं ठीक हूँ….”

शीतल और उसके पति को जैसे ही इस बात का अहसास हुआ कि, विनय की जान ख़तरे मैं है…दोनो अजय के पीछे दौड़े…उधर विनय बाहर शोर सुन कर रूम के डोर तक आ चुका था….तभी उसकी नज़र हाथ मे हॉकी स्टिक पकड़े अपने मामा पर पड़ी, जिसे देख कर वो एक दम से घबरा गया….अजय ने आव देखा ना ताव और विनय को हॉकी से मारने के लिए जैसे स्टिक उठाई…शीतल के पति ने उसे पीछे से आकर धक्का देकर गिरा दिया….अजय बुरी तरह फर्श पर गिरा….

अजय: तुम पीछे हट जाओ….बीच मे आने की कॉसिश की तो, मैं किसी रिश्ते की परवाह नही करूँगा….

विनोद: सुन ओये साले ये मेरा घर है….अगर तुम्हे किसी रिश्ते की परवाह नही तो, मैं भी तुम्हारी परवाह नही करूँगा….विनय को हाथ लगा कर तो दिखा….

अजय ये सुन कर गुस्से से बोखला उठा…और उसने हॉकी उठाई और फिर से विनय की तरफ लपका….विनोद बीच मे क़ूद पड़ा और विनय को बचाने की कॉसिश करने लगा…गुस्से मे बोखलाए अजय ने विनोद के पेट पर लात दे मारी….वो दर्द से कराहता हुआ, फर्श पर जा गिरा….अजय विनय की तरफ पलटा और अपनी हाथ मे पकड़ी हॉकी को पूरे ज़ोर से घुमा दिया….पर शीतल बीच मे आ गये….हॉकी शीतल के सर पर लगी..और उसका सर फॅट गया…ये देख अजय एक दम सुन्न पड़ गया…

उधर विनोद गुस्से से पागल हो गया…उसने उठते ही अजय पर मुक्को और घूँसो की बारिश कर दी….जैसे ही अजय के हाथ से हॉकी स्टिक गिरी…विनोद ने हॉकी स्टिक उठाते हुए एक के बाद एक कई बार उसकी टाँगो पर वार किया….अजय लड़खड़ा कर नीचे गिर गया….उसकी पिंदलियाँ बुरी तरह से घायल हो गयी….विनोद ने तुरंत पोलीस को फोन किया और थोड़ी देर बाद पोलीस आई और अजय और शीतल को हॉस्पिटल में लेकर चली गयी……

 


उस दिन दोनो की हालत बहुत खराब थी….इसलिए पोलीस ने हॉस्पिटल मे उन दोनो को अपनी निगरानी मे रखा था….विनोद ने पोलीस को स्टेट्मेंट दे दिया था…अगले दिन जब अजय को होश आया तो, उसने पोलीस को अपना स्टेट्मेंट दिया और अपने वहशी होने के बारे मे बताया तो, पोलीस ने विनोद को समझाया कि, ये आपके घर का मामला है…अगर घर मे ही सुलझा लिया जाए तो, अच्छा होगा, वरना पोलीस के चक्कर मे पड़ कर बदनामी हो जाएगी…आप लोग गली मोहल्ले मे मूह दिखाने लायक नही रहोगे…

विनोद को इस बात का अंदाज़ा भी नही था कि, किरण और विनय के बीच ये सब भी हो सकता है…वो एक दम से परेशान हो गया….उसे समझ मे नही आ रहा था कि, वो ये समस्या कैसे सुलझाए…वो परेशान होकर अपनी पत्नी शीतल के पास चला गया…जब उसने शीतल को सारी बात बताई तो, शीतल भी बहुत परेशान हो गयी…

शीतल: आप मुझे अजय के पास ले चलो…मैं उससे बात करूँगी…..

विनोद: नही शीतल अभी तुम ठीक नही हो….

शीतल: देखिए मैं बिल्कुल ठीक हूँ……अगर आज मैने अजय से बात नही की तो, फिर कुछ भी नही बचेगा….वो आज नही तो, कल फिर से विनय को मारने की कॉसिश करेगा…..

विनोद: ठीक है जैसी तुम्हारी मरजी…..

विनोद ने डॉक्टर और पोलीस वालो से पर्मिशन ली और शीतल को वीलचेर पर बैठा कर अजय के पास ले गया….अजय भी बुरी तरह चोटिल था…शीतल ने विनोद को बाहर जाने के लिए कहा…..और विनोद बाहर चला गया…..

शीतल: मैं जानती हूँ भैया कि, आप की मनोस्थिती क्या है….पर भैया इस तरह विनय को सज़ा देना ठीक नही है….

अजय: तो क्या करूँ मैं….सब जानते हुए भी सब कुछ भूल जाउ….मेरी अपनी पत्नी मुझे धोका देती रही….वो भी मेरे अपने भान्जे के साथ रंग रंगरलियाँ मना कर….

शीतल: देखो अजय विनय तो नादान है….एक बार ठंडे दिमाग़ से सोचो…क्या विनय खुद ऐसा कुछ कर सकता है…तो फिर सज़ा सिर्फ़ विनय को ही क्यों……

अजय: दीदी मैं तो किरण को भी जान से मार दूँगा……आख़िर मैने ऐसा कॉन सा पाप किया था….जो मुझे ये दिन देखना पड़ा….अर्रे सुबह से रात तक बाहर मरता हूँ,. कमाता हूँ और उन सब का पेट भरता हूँ…और ये सब मेरी पीठ मे चाकू घोंप रहे है…..पता नही भगवान मुझसे कॉन से जनम के पापों का बदला ले रहा है….

शीतल: किसी और जनम के पाप नही है…जो अब तुम्हारे सामने आ रहे है…ये सब तुम्हारे इसी जनम के पापों का फल है…..

अजय: क्या दीदी आप ये कह रही है….मैने कॉन सा पाप कर दिया इस जनम मे….

 


शीतल: क्यों तुमने अपनी बड़ी बेहन के पति को शराब पिला कर उसके सिग्नेचर नही लिए थे…उसकी प्रॉपर्टी के डॉक्युमेंट पर….जो तुमने उस मिनिस्टर के नाम करवाई थी….

अजय: नही दीदी मैने ऐसा कुछ नही किया….ये सब आप को किसने कहा…कॉन है जो मेरे खिलाफ आपके कान भर रहा है….

शीतल: अजय मैं सब जानती हूँ….नीलम दीदी ने आत्म हत्या करने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था….जिसमे उसने आपके बारे मे सब लिखा था…आप ने जीजा को शराब पिलाई और नशे की हालत में उनसे प्रॉपर्टी डॉक्युमेंट पर साइन करवा कर, उनकी सारी खेती की ज़मीन उस मिनिस्टर के नाम कर दी….ताकि वो अपना मॉल वहाँ बना सके…

अजय: ये सब झूठ है दीदी भला मैं ऐसा क्यों करूँगा….

शीतल: ताकि तुम्हारी अवैध ज़मीन पर दुकान और फॅक्टरी को गिराया ना जाए….और वो दुकान और फॅक्टरी तुम्हारे नाम पर हो सके….मुझे मालूम है कि, उस मिनिस्टर ने तुम्हे फॅक्टरी चालू करने के लिए 50 लाख नकद भी दिए थे……

तुम इतना कैसे गिर सकते हो…..मुझे तो तुम्हे अपना भाई कहते हुए भी शरम आती है….मैं सब कुछ जान कर भी अंज़ान बनी रही….ये मैने ही फैंसला किया था कि, विनय तुम्हारे घर पर रहेगा….ताकि आगे चल कर मैं किसी भी तरह उसको उसका हक़ दिलवा सकूँ….तुमने एक नही दो-2 हत्याए की है…दीदी भी तुम्हारी वजह से मरी है….तुम्हारे साथ मेरे मोह ने मुझे चुप रहने के लिए मजबूर कर दिया था. भाई हो ना….इसीलिए तुम्हारा बुरा ना सोच सकी….

अपनी ग़लतियों को तो तुमने छुपा लिया….पर आज अगर उस नादान से ग़लती हो भी गयी तो, क्या तुम उसे भी मार दोगे…..देखो अजय मैं ऐसा हरगिज़ नही होने दूँगी…वो मेरी बेहन की आख़िरी निशानी है…अगर तुमने ऐसी वैसी कोई हरक़त की तो, मैं सारे रिश्तेदारों को बुला कर तुम्हारी सच्चाई सब के सामने रख दूँगी….दीदी का वो सुसाइड नोट आज भी मेरे पास है…

ये कह कर शीतल ने विनोद को आवाज़ दी…और विनोद उसे लेकर उसके वॉर्ड मे चला गया….विनोद ने किसी तरह से पोलीस वालो से सेटल्मेंट करके मामले को वही दबा दिया…थोड़े दिन लगे शीतल को ठीक होने मे….उस दिन जब शीतल और विनोद घर पहुँचे तो, किरण उनके घर पर आई…..

किरण: दीदी अब आप कैसी है…..?

शीतल: मैं ठीक हूँ…तुम कैसी हो….?

किरण: मैं ठीक हूँ….

शीतल: अजय घर पहुँचा कि नही….?

किरण ने शीतल की आँखो मे देखा और एक पेपर उसकी तरफ बढ़ा दिया…शीतल ने पेपर को पढ़ना शुरू किया….उसमे लिखा हुआ था कि, अजय घर और सारा कारोबार किरण के नाम करके उनकी ज़िंदगियों से दूर जा रहा है….और वो अब लौट कर कभी नही आएगा…..

अजय सब सारी प्रॉपर्टी और पैसा किरण के नाम करके उनसे बहुत दूर चला गया था. लेकिन अब किरण की ज़िम्मेदारियाँ बहुत ज़्यादा बढ़ गयी थी….जिस दुकान से उनका घर चलता था….अब उसको भी किरण को ही संभालना था…दुकान के ऊपेर वाली मंज़िल पर अजय ने एक साल पहले रेडीमेड गारमेंट की मॅन्यूफॅक्चरिंग शुरू की थी. जिसे संभालना अभी किरण के बॅस की बात नही थी….किरण सुबह वशाली और विनय को स्कूल भेजने के बाद दुकान पर जाने लगी थी…किरण को अगले 15 दिन काफ़ी मुस्किलो का सामना करना पड़ा….

किरण रोज की दौड़ धूप से परेशान हो चुकी थी….आख़िर कार उसने फैंसला किया कि, वो गारमेंट के मॅन्यूफॅक्चरिंग का काम बंद कर देगी…और उससे दुकान के ऊपेर जो जगह खाली होगी….उसे वो अपने रहने के लिए घर की तरफ इस्तेमाल करेगी…काम बंद करने के बाद उसने ऊपेर वाली मंज़िल को दो रूम्स किचन बाथरूम मे तब्दील कर दिया. और वो वशाली और विनय के साथ वही रहने के लिए आ गयी….वो सुबह 10 बजे दुकान खोलती और रात को 7 बजे बंद करती….

दोपहर को स्कूल से आने के बाद कभी वशाली तो कभी विनय दुकान पर बैठ जाया करते और किरण को आराम करने और घर का काम करने का मौका मिल जाता…दिन इसी तरह गुजर रहे थे…वशाली और विनय दोनो बच्चे नही थे…हालाकी शीतल के हज़्बेंड ने उस बात को बाहर किसी तक पहुँचने नही दिया था…पर फिर भी वशाली और विनय इस बात से अंज़ान नही थे कि, उनके घर कुछ दिन पहले क्या हुआ था….वशाली जब भी किरण का उदास चेहरा देखती तो, उसका दिल उदास हो जाता….वो एक बार फिर से अपनी माँ को खुश देखना चाहती थी….

इसलिए दोपहर को ज़्यादा से ज़्यादा टाइम नीचे दुकान पर बैठने लगी थी…वैसे तो दुकान पर काम करने वाले दो आदमी और थे…इसलिए वशाली को सिर्फ़ बेचे हुए कपड़ों का हिसाब ही रखना होता था…धीरे-2 सब नॉर्मल होने लगा…किरण को पेट से हुए 3 महीने हो चले थे…उसको पति के जाने को जो थोड़ा बहुत गम था…वो भी वो काफ़ी हद तक भूल चुकी थी…दुकान ठीक ठाक चल रही थी….पैसो की कोई तंगी नही थी….उस दिन दोपहर का टाइम था….वशाली नीचे दुकान पर आई…और किरण से बोली. “मम्मी आप ऊपेर जाकर आराम कर लीजिए….मैं यहाँ बैठती हूँ….”

किरण: अच्छा ठीक से…ध्यान रखना…..

ये कह कर किरण ऊपेर आ गयी….जब किरण ऊपेर पहुँची, तो वो विनय को देखने के लिए उसके रूम मे गयी….लेकिन जैसे ही वो विनय के रूम के डोर पर पहुँची तो, उसके कदम वही जम गये…विनय बेड पर बैठा हुआ था….उसकी पेंट उसके घुटनो से नीचे तक उतरी हुई थी…और वो अपने लंड को तेज़ी से हिला रहा था….ये देख किरण का कलेजा मूह को आ गया…ऐसा नही था कि, उसने इस हाल मे विनय को पहली बार देखा था….पर लेकिन मूठ मारते हुए उसने विनय को कभी पहले नही देखा था….वो बिना कुछ बोले वहाँ से अपने रूम मे आ गयी….

 
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