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छोटी सी जान चूतो का तूफान compleet

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छोटी सी जान चूतो का तूफान--19

दूसरी तरफ नेहा और कमला दोनो एक दूसरी की चूत को उंगलयों से ठंडा कर चुकी थी…..नेहा जैसे ही अपने घर जाने के लिए निकलने लगी. तो उसे मेन डोर पर मोहित मिल गया…वो अभी ग्राउंड से खेल कर वापिस आया था. नेहा ने उसकी तरफ देख कर एक कातिल मुस्कान फेंकी, और फिर उसके पास से गुज्जर्ते हुए बोली….

नेहा: अब तुम साहिल को मिलने घर नही आते क्या बात है….?

मोहित; वो आंटी जी. वो मेरा साहिल से स्कूल में झगड़ा हो गया था.. इस लिए हम एक दूसरे से बात नही करते….

नेहा: अच्छा साहिल से झगड़ा हो गया था…

मोहित: जी आंटी….

नेहा: तो फिर मुझे मिलने के लिए तो आ सकते थे ना. तुम मुझे बताते तो में तुम्हे में सुलहा करवा देती…अपनी आंटी के बात मनोगे ना…

मोहित: जी आंटी…

नेहा: अच्छा सुन मेरे घर पर भी बहुत सारे कपड़े धुलने वाले हो गए है…क्या में तुम्हारे ट्यूबिवेल पर जाकर उन्हे धो सकती हूँ…

मोहित: जी आंटी क्यों नही….

नेहा: तू चलेगा कल हमारे साथ….

मोहित: पर आंटी कल तो स्कूल जाना है ना….

नेहा: हूँ में तो भूल ही गई…चल कोई बात नही…उसके बाद नेहा घर आ गई….और घर के कामो में लग गई….चुदाई के बाद गीता तो ऐसे घोड़े बेच कर सोई थी कि, वो शाम को 6 बजे नेहा के जगाने से उठी..रात को सब खाना खा पी कर सो गए…अगले दिन साहिल और गीता को स्कूल जाना था….उनके स्कूल जाने के बाद कुलवंत भी 10 बजे काम पर चला गया.

अब साहिल और गीता को स्कूल से 3 बजे वापिस आना था….इस लिए नेहा घर के काम निपटा कर कमला के घर जाने के सोच ही रही थी, कि उसके डोर पर नॉक हुआ……

जब नेहा ने जाकर गेट खोला तो, सामने कमला ही खड़ी थी…दोनो एक दूसरे के तरफ देख कर मुस्कुराया….फिर कमला के अंदर आने के बाद नेहा ने गेट बंद किया….

नेहा: में अभी तुम्हारे घर ही आने वाली थी….(रूम की तरफ जाते हुए)

कमला: यार अच्छा हुआ नही आई….मेरा ख़सम अभी घर पर ही है… और मोहित भी….

नेहा: क्यों मोहित स्कूल नही गया आज क्या हुआ ?

कमला: पता नही सुबह कह रहा था कि, तबीयत ठीक नही है….पर तब से देख रही हूँ…वो तो अच्छा भला है….

कमला की बात सुन कर नेहा के होंठो पर मुस्कान फेल गई…नेहा को यूँ मुस्कुराते हुए देख कमला से रहा नही गया….”क्या हुआ इतना क्यों खुस हो रही है” मोहित इसीलिए स्कूल नही गया था, क्योंकि कल नेहा ने उससे कहा था कि, वो उसके खेतो में कपड़े धोने जाएगे….फिर नेहा ने सारी बात कमला को बताई…और फिर दोनो हँसने लगी….

कमला: रंडी क्या कर दिया तूने मेरे बेटे को…देख मज़े लेने की बात तक तो ठीक है….पर हम दोनो अपने बेटो की पढ़ाई या उनकी जिंदगी किसी तरह से खराब नही होने देंगे…आगे से ध्यान रखना..

नेहा: चल यार ग़लती हो गई….वैसे भी एक दिन स्कूल नही जाएगा तो कुछ नही होगा….याद रख तुझे साहिल के साथ भी मस्ती करनी है..

कमला: अच्छा अब फिर क्या करना है…

नेहा: क्या करना है मतलब….

कमला: मतलब ये कि, अब तुम भी अकेली हो….कहे तो भेजू उसको…

नेहा: पर यार अगर घर पर कोई आ गया तो,

कमला: यार अब इतने डरेगे तो कैसे चलेगा….कुछ तो हिम्मत करनी पड़ेगी तुझे….वैसे भी मोहित की अभी इतनी उम्र नही है कि, वो बिना डरे अपने दिल के बात तुझे जता सके….

नेहा: अच्छा जितना वो भोला लगता है, उतना वो है नही…

कमला: चल अच्छा है…फिर तेरा काम कुछ आसान हो जाएगा….

नेहा: अच्छा चल बता अब क्या करूँ….मुझे डर है कि कोई घर पर ना आ जाए….वरना खम्खा सवाल करेंगे कि, में घर में अकेली मोहित के साथ क्या कर रही थी….

कमला: (थोड़ी देर सोचते हुए) अच्छा तू थोड़ी देर इंतजार कर. मोहित के पापा जाने ही वाले है….जैसे ही वो जाते है…में तुम्हे आकर बताउन्गि. तू अपने घर के पीछे बने भैंसो वाले कमरे में इंतजार करना. में उसे किसी तरफ बहाने से भेजती हूँ….अगर कोई आया भी तो, वो पीछे वाली दीवार फाँद कर हमारे घर वापिस आ सकता है….

नेहा: यार ये सब तो ठीक है..पर मुझे सच में डर लग रहा है…

कमला: कुछ नही होता मेरे जान…तू घबरा मत…

अभी दोनो बाते कर ही रही थी कि, मोहित नेहा के घर का डोर नॉक करता है….जब नेहा बाहर जाकर गेट खोलती है. तो सामने मोहित को खड़ा देखती है….”आंटी जी मा इधर है क्या”

नेहा: हां बेटा वो अंदर है…

मोहित: आंटी जी मा को घर भेज दो….पापा को कोई काम से जाना है खेतो मे… उनका खाना पॅक करना है…

नेहा: अच्छा अभी भेजती हूँ….

ये कह कर जैसे ही नेहा वापिस मुड़ने लगी, तो वो कुछ सोच कर रुक गई….उसने फिर से मोहित को आवाज़ डी….”मोहित बेटा सुनो तो ज़रा…”

मोहित: जी आंटी जी….

नेहा: वो मुझे पीछे स्टोर रूम में कुछ समान ठीक करवाना है… बहुत भारी समान है….तुम मेरे मदद कर दोगे थोड़ी देर आकर…

मोहित: जी आंटी….में थोड़ी देर में आता हूँ….
 
मोहित के जाने के बाद, नेहा रूम में आई. और सारी बात कमला को बता डी. कमला ने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा…फिर उसकी चूत को सलवार के ऊपेर से मसलते हुए बोली….”अभी तो इतने नखरे कर रही थी..कि डर लग रहा है…और अभी खुद ही सारा प्रोग्राम सेट कर लिया तूने”

नेहा: आहह हट गस्ति…..चल जा अब तेरा ख़सम तेरा इंतजार कर रहा है…

कमला: लगता है…आज तो तू मोहित का लंड अपनी फुद्दि में लेकर ही रेहगी….हा हहा….

नेहा: अच्छा अब तू जाएगी भी…टाइम देख…

कमला: (घड़ी की ओर देखते हुए) अभी 10:30 हुए है…अभी 4 घंटे है तेरे पास…दिल खोल कर आज अपनी फुद्दि मरवा लेना….

फिर कमला हँसते हुए, अपने घर चली गई…..कमला ने अपने पति को खाना दिया….थोड़ी देर बाद कमला का पति, खेतो के लिए चला गया. कमला उठ कर अपने घर के पीछे आ गई….जहाँ पर उन्हो ने भी भैंसो को बांधने के लिए छप्पर बनाए हुए थे….दोनो घर के बीच में कोई 6 फुट उँची दीवार थी…वहाँ जा कर उसने हालत का जायज़ा लिया. और फिर से आगे की तरफ आ गई…

उसने देखा मोहित अपने कमरे में बैठा हुआ, कुछ सोच रहा था… वो थोड़ा सा परेशान भी लग रहा था….कमला मोहित के पास गई. और उसकी ओर मुस्कुराते हुए देख कर बोली…..” क्या क्या सोच रहे हो ?” मोहित कमला की आवाज़ सुन कर अपने ख्यालो से बाहर आया….

मोहित: कुछ भी नही मा…..बस ऐसे ही….

कमला: अच्छा वो नेहा बोल रही थी…उसे कुछ भारी समान ठीक से रखना है…अगर अब तेरी तबीयत ठीक है, तो जा अपनी आंटी की मदद कर दे जाकर….

मोहित: अच्छा जाता हूँ….

ये कह कर मोहित उठ कर बाहर चला गया….फिर उसने नेहा के घर के सामने जाकर गेट को खटखटाया…थोड़ी देर बाद नेहा ने गेट खोला. और सामने मोहित को खड़ा देख कर अपने होंठो पर कातिल मुस्कान लाते हुए बोली…” अंदर आ जाओ” जैसे ही मोहित अंदर आया….नेहा ने बाहर गली में चारो तरफ देखा…गरमी की वजह से बाहर कोई नही था….नेहा हर बात का ऐसे ध्यान रख रही थी…जैसे कोई चोरी करने जा रही हो…

वो भी अंदर से घबराई हुई थी….फिर उसने गेट बंद किया. और पलट कर अंदर जाने लगी…तो मोहित अभी भी वही खड़ा था…उसने फिर से मोहित को देख कर मुस्कराया…और फिर अंदर की तरफ जाने लगी…मोहित भी उसके पीछे चलते हुए बरामदे में आ गया….

नेहा: कुछ लोगे तुम चाइ ठंडा…

मोहित: जी. जी नही में अभी नाश्ता करके आया हूँ….

नेहा: (अपने रूम में गई, और पिछले स्टोर रूम की चाभी लेकर आ गई. और मोहित को देते हुए बोली) ये लो तुम जाकर पीछे का स्टोर रूम खोलो. में कपड़े बदल कर पुराने कपड़े पहन कर आती हूँ….वहाँ तो बहुत धूल जमी होगी…..मोहित ने नेहा से चाभी ली, और पीछे चला गया…उसने वहाँ जाकर स्टोर रूम का डोर खोला, स्टोर रूम समान से एक दम भरा हुआ था.

एक तरफ अनाज रखने के लिए बड़े-2 ड्रम रखे हुए थे…एक तरफ कुछ पुरानी अलमारियाँ, और एक तरफ वही चारपाई और बिस्तर पड़े हुए थे. जिस पर कुछ एक महीने पहले पायल की चुदाई हुई थी…चारपाई पर एक के ऊपेर एक बिस्तर बिछे हुए थे…जिससे एक बहुत ही नरम बिस्तर तैयार था.

मोहित अंदर आकर चारपाई पर बैठ गया….और नेहा के आने का इंतजार करने लगा…थोड़ी देर बाद नेहा स्टोर रूम में आ गई…..उसने एक पुराना सा वाइट कलर का सलवार कमीज़ पहना हुआ था…जैसे ही नेहा स्टोर रूम में अंदर आई….मोहित की नज़र सबसे पहले, नेहा की कमीज़ में फँसी हुई चुचियों पर पड़ी…जो कमीज़ तंग होने के कारण अलग ही नज़र आ रही था…..

और उस वाइट कलर की कमीज़ में सॉफ पता चल रहा था. कि नेहा ने नीचे ब्रा नही पहनी थी….नेहा अपने साथ कुछ पुराने कपड़े लेकर आई थी..सफाई के लिए…उसने एक कपड़ा मोहित की तरफ बढ़ाते हुए कहा….

नेहा: मोहित ये लो….और इन ड्रम्स को सॉफ कर दो….में तब तक वो अलमारी सॉफ कर देती हूँ…..

मोहित चारपाई से उठा, और नेहा के हाथ से कपड़ा लेकर, आनाज़ के ड्रम्स को सॉफ करने लगा….नेहा ने एक बार उसकी तरफ देखा. और फिर मुस्करा कर पुरानी अलमारी को सॉफ करने लगी….हालाँकि स्टोर रूम का पंखा चल रहा था. पर स्टोर रूम काफ़ी दिनो से बंद था…इसीलिए अंदर हुमस बहुत ज़्यादा थी….पर बाहर अब बादल घिरने लगे थे…और धूप बादलो की वजह से छुप गई थी…दोनो कुछ ही देर में पूरे पसीने से भीग गए….

पसीना पोंछते हुए मोहित की नज़र अचानक से नेहा पर पड़दी….उस समय नेहा आलामरी को सॉफ कर रही थी…उसकी पीठ मोहित की तरफ थी. उसका पतला सा वाइट कमीज़ पसीने से भीग कर उसकी पीठ से चिपका हुआ था….और उसकी पीठ सॉफ नज़र आ रही थी….मोहित के लंड में ये देख कर ही हलचल होने लगी….

 
नेहा को इस बात का अंदेशा हो गया था कि, मोहित अब उसकी तरफ ही देख रहा है…ये सोचते ही, उसके होंठो पर मुस्कान फेल गई…उसकी कमीज़ आगे से भी पसीने से गीली होकर उसके मम्मो पर चिपक गई थी. और उसके मम्मे वाइट कमीज़ में सॉफ झलक रहे थे….यहाँ तक कि उसके गोरी-2 चुचियों के काले रंग के बड़े-2 निपल सॉफ दिख रहे थे….नेहा ने अपने दुपट्टे को अपने गाले के साथ सटा रखा था…

जब उसे अहसास हुआ कि, अब मोहित को भी उसका पिछला हिस्सा सॉफ नज़र आ रहा होगा…ये सोचते ही, उसके बदन में अजीब सी सुरसुरी दौड़ गई…उसने पलट कर मोहित की तरफ देखा…जैसे ही दोनो के नज़रे आपस में टकराई….मोहित एक दम से हड़बड़ा गया…और फिर से आगे को देखते हुए, ड्रम्स को सॉफ करने लगा….

मोहित की ये हड़बड़ाहट देख कर नेहा की हँसी छूटने ही वाली थी. पर उसने अपने आप को किसी तरह संभाला…और अपने मन में सोचते हुए बोलने लगी..”बच्चे अभी तो कुछ देखा ही नही तूने अब आगे-2 देख तेरा क्या हाल होता है” ये सोचते हुए, उसने अपने दुपट्टे को अपनी चुचियों पर ठीक किया, और मोहित के पास जाकर बोली….

नेहा: थक गए क्या…?

मोहित: हां नही तो…वो बस गरमी कुछ ज़्यादा है…..(सर झुकाए हुए)

नेहा: हां वो तो है…कमला ने बताया था कि, तुम्हारी तबीयत ठीक नही है…इसीलिए तुम आज स्कूल नही गए….अगर ज़्यादा थकान हो तो रहने दो..

मोहित: नही आंटी में ठीक हूँ…वो बस सुबह थोड़ा तबीयत ठीक नही थी..अब ठीक है….

नेहा: अर्रे देखो तो तुम्हे कितना पसीना आ रहा है…

ये कहते हुए, नेहा ने अपना अगला वार किया….और उसने अपने दुपट्टे को उतारते हुए अपने हाथो में लेकर मोहित के चेहरे को सॉफ करना शुरू कर दिया….”देखो कितना पसीना आया है…लाओ में सॉफ कर देती हूँ…” जैसे ही नेहा ने अपने दुपट्टे को उतारा….मोहित की साँसे उसके हलक में अटक गई. नेहा की 38 साइज़ की चुचियाँ उसके पसीने से भीगी हुई, कमीज़ में सॉफ दिखाई दे रही थी….उसके काले रंग के मोटे-2 निपल जो कि एक दम तने हुए थे…जैसे मोहित को कह रहे हो…हमे अपने मुँह में भर कर चूसो. निचोड़ दो हमे….

और निपल के चारो तरफ डार्क ब्राउन कलर के सर्कल जो कि 3 इंच के गोलाई में फेले हुए थे…उन्हे देख कर तो, मोहित का लंड लोहे के रोड के तरह अकड़ गया…नेहा मोहित के चेहरे पर पसीने पोंछते हुए, उसकी आँखो की तरफ देख रही थी…और अपने मन ही मन मुस्करा रही थी…

नेहा की चुचियों और निपल्स को देख कर मोहित को लग रहा था कि, वो वही पर झाड़ जाएगा….नेहा ने उसके माथे से पसीना सॉफ किया….और फिर उस दुपट्टे को चारपाई पर फेंक दिया…और फिर से अलमारी की तरफ जाकर सफाई करने लगी….मोहित का तो जैसे बुरा हाल हो गया…जैसे ही नेहा ने उसकी तरफ पीठ की, मोहित ने अपने लंड को पेंट के ऊपेर से पकड़ कर मसला. और फिर से काम में लग गया…

थोड़ी देर और काम करने के बाद….मोहित ने फिर से फेस घुमा कर नेहा की तरफ देखा…..इस बार जो मोहित ने देखा…वो उसकी बर्दस्त से बाहर था. नेहा अपने एक हाथ को अलमारी से टिकाए हुए, झुक कर अलमारी के नीचे वाले हिस्से को सॉफ कर रही थी….उसने अपनी कमीज़ के पल्ले को पीछे से उठा कर अपनी सलवार के जबरन में फँसा रखा था….और उसकी सलवार उसकी गान्ड से पसीने की वजह से एक दम चिपकी हुई थी….

नेहा की बड़ी-2 और मोटे गान्ड सॉफ नज़र आ रही थी….नेहा ने इसके अलावा भी और कुछ कर रखा था…मोहित पर बिजली गिराने को….ऐसे झुक कर अलमारी सॉफ करने के कारण उसकी गान्ड पीछे से बाहर की तरफ निकली हुई थी..मोहित का दिल तो कर रहा था..

वो अभी जाकर नेहा की सलवार उतार कर उसकी गान्ड में अपने लंड घुसेड दे….पर उसकी हिम्मत नही हो रही थी… अलमारी सॉफ करते हुए, अचानक से नेहा ने अपनी दोनो टाँगो को थोड़ा सा फेला दिया. फिर मोहित को वो चीज़ नज़र आई. जो नेहा ने पहले से प्लान कर रखी हुई थी….

जिस तरह से नेहा अपनी टाँगो को फैलाया था…उससे उसकी सलवार उसकी गान्ड से खिंच गई….जो उसकी गान्ड और चूत वाली जगह से फटी हुई थी…. अब उस फटी हुई सलवार के छेद से मोहित को जैसे ही, उसके गान्ड की दरार नज़र आई. तो उससे साँस लेना भी मुस्किल हो गया….

लंड अपनी औकात से कुछ ज़्यादा ही फूलने लगा….और फिर उससे नेहा की झांतो से भरी हुई चूत की फांको के बीच की लकीर नज़र आई. पर मोहित उसे देख कर आँहे भरते हुए, अपने लंड को मसल कर रह गया….नेहा झुक कर कनखियो से पीछे ही देख रही थी….और मंद-2 मुस्करा रही थी…ये सब सहन करना अब मोहित के लिए मुस्किल होता जा रहा था….

फिर अचानक से नेहा सीधी हुई, और मोहित की तरफ देखने लगी.. मोहित का हाथ अभी भी उसके पेंट के ऊपेर से उसके लंड पर था…वो अपने ख्यालो में खोया हुआ अपने लंड को मसल रहा था…फिर नेहा ने ऐसे आवज़ की, जैसे वो खांस रही हो….ख्यालो की दुनिया से बाहर आते हुए, मोहित एक दम से घबरा गया….नेहा ने अपने होंठो को दांतो में दबा कर मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा….

नेहा: ये क्या कर रहे थे…. (अपने निचले होंठो को अपने दांतो से दबाते हुए)

मोहित: (एक दम हड़बड़ाते हुए) का क कुछ नही…..

नेहा: अच्छा कुछ नही…फिर अपने हथियार को क्यों दबा रहे थे…सच सच बताओ क्या सोच रहे थे…..

मोहित: (नेहा की बात सुन कर मोहित एक दम से घबरा जाता है….) नही कुछ नही वो बस वो…..

नेहा: वो वो क्या बता ना ?

मोहित: वो मुझे यहाँ पर खुजली हो रही थी….

नेहा: झूठ…

मोहित: जी…

नेहा: अच्छा सिर्फ़ खुजली हो रही थी….

मोहित: जी आंटी में सच कह रहा हूँ….

नेहा: (मोहित के पास आते हुए) अच्छा तो फिर इसे खड़ा क्यों कर रखा है. सच सच बताओ नही तो में कमला को बता दूँगी…..

ये कहते हुए, नेहा ने उसकी पेंट के ऊपेर से उसके लंड पर थपकी लगा डी. और फिर कपड़े को नीचे फेंक चारपाई की तरफ बढ़ी….और फिर मोहित की तरफ घूमते हुए, चारपाई पर पीठ के बल लेट गई…फिर उसने अपनी चारपाई के नीचे लटकती टाँगो को घुटनो से फोल्ड कर ऊपेर उठा कर अपने पैरो को चारपाई के किनारे पर टिका कर अपनी टाँगो को पूरा खोल लिया….
 
मोहित का लंड जो अभी-2 डर के कारण बैठ गया था….सामने का नज़ारा देख कर फिर खड़ा होने लगा…जिस तरह से नेहा अपनी टाँगो को फोल्ड करके चारपाई पर लेट कर फेलाए हुए थी….उससे उसकी चूत सॉफ दिखाई दे रही थी….और अब तो उसकी चूत की फांके फेली होने के कारण उसकी चूत का गुलाबी रसदार छेद भी सॉफ दिखाई दे रहा था…..

नेहा: बोल ना क्या सोच रहा है. या फिर कमला को बता दूं….

एक तो मोहित का बुरा हाल था….ऊपेर से वो अपनी टाँगो को खोल कर अपनी खुली हुई झांतो भरी चूत को मोहित को दिखाते हुए ये सब पूछ रही थी.

मोहित: वो आंटी वो में….

नेहा: हां-2 बोल ना….

मोहित: आंटी आप गुस्सा करेंगे….

नेहा: अगर नही बताएगा तो फिर तेरी मा गुस्सा करेगी…चल में नही करती.

मोहित: आंटी वो आपकी वो दिखाई दे रही है….इसीलिए मेरा खड़ा….

इससे आगे मोहित सेना बोला पाया…और ना ही उसकी हिम्मत हो रही थी.. नेहा चारपाई पर लेटे हुए ऊपेर छत की ओर देख रही थी…मोहित की बतो को सुन कर नेहा ने किसी तरह अपनी हँसी को रोका….”क्या देख कर खड़ा हो गया तेरा…मेरा क्या दिख रहा है…..” नेहा ने अपने नज़रे मोहित की ओर डालते हुए पूछा….

मोहित: वो वो आपकी सलवार….

मोहित की तो जैसे गान्ड फॅट रही थी….ये सब बोलने में….वो इतना ही बोल कर चुप हो गया….”क्या हुआ मेरी सलवार को अर्रे सलवार देख कर भी खड़ा होता है क्या….सच-2 बता….” अब मोहित की गान्ड ऐसे फॅट रही थी… जैसे वो कोई चोरी करके पोलीस के सामने खड़ा हुआ हो….” नही आंटी आपकी सलवार नही वो देख कर”

नेहा: (अपने फेस को दूसरी तरफ कर मुस्कुराते हुए) क्या देख कर सॉफ -2 बोल में तुझसे गुस्सा नही होउंगी….

मोहित: वो आंटी आप की फुद्दि दिखाई दे….

नेहा: (जान बूझ कर चोन्कने का नाटक करते हुए उठ कर बैठ जाती है) हाए हाए क्या कह रहे हो….तुझे कैसे दिखाई दी मेरी फुद्दि….

मोहित: वो वो आपकी सलवार फटी है….

नेहा: (फिर से चोन्कने का नाटक करते हुए) कहा ओह्ह हाई ओई….में भी ना ज़रा भी ध्यान नही दिया….सारी ग़लती मेरी है… और मेने बेकार में तुझे डांटा….चल इधर आ घबरा मत…

मोहित नेहा की तरफ बढ़ा, जैसे ही मोहित नेहा के करीब पहुँचा….नेहा ने उसका हाथ पकड़ कर अपने बदन से चिपका लिया….अब नेहा चारपाई पर नीचे पैर लटका कर बैठी थी….जैसे कि पहले भी बता चुका हूँ कि, चारपाई पर बहुत से सारे बिस्तर एक के ऊपेर एक बिछे हुए थे…इस लिए नेहा काफ़ी ऊपेर बैठी थी….

जैसे ही नेहा ने मोहित को अपने गले से लगाया, नेहा की 38 साइज़ की चुचियाँ मोहित की छाती में धँस गई…वो उसको अपनी बाहों में लिए हुए, अपनी चुचियों को उसकी छाती में रगड़ने लगी…मोहित तो जैसे सवर्ग में पहुँच गया था…फिर बाहर अचानक बदल गर्जने लगे….और तेज बारिश शुरू हो गई..ठंडी-2 हवा स्टोर रूम में आने लगी…

बादलो के गर्जने की आवाज़ सुन कर नेहा ने मोहित को अपने से अलग करते हुए, बाहर की ओर देखा तो, बाहर बारिश जोरो पर थी…अब इतनी तेज बारिश में उसके घर पर किसी के आने का सवाल भी नही था…नेहा अब थोड़ा रिलॅक्स फील कर रही थी…फिर उसने मोहित के सर पर हाथ फेरते हुए बोला…

नेहा: तू घबरा मत कमला को नही बताउन्गि….पर तू ना अब बहुत शरारती हो गया है….अपनी आंटी की फुददी को ऐसे छुप कर देख रहा था. और अपना लंड भी खड़ा कर लिया….

मोहित नेहा के मुँह से ऐसे लंड और चूत जैसे शबाद सुन कर एक दम चोंक गया…वो आँखे फाडे नेहा को देखने लगा…..नेहा ने फिर से वही कातिल मुस्कान के साथ उसकी तरफ देखा और बोली “अच्छा सच-2 बता तुझे मेरी वो अच्छी लगती है….” नेहा के इस सवाल ने मानो जैसे मोहित पर बॉम्ब फोड़ दिया हो….वो एक दम सुन्न हो गया….और अपना मुँह खोल कर नेहा की ओर देखने लगा…

नेहा: बता ना…तुम्हे अच्छी लगती है वो…

मोहित: (घबराते हुए) हां आंटी…..

नेहा: (अपना मुँह बनाते हुए) अच्छा सिर्फ़ वही अच्छी लगती है तुझे में अच्छी नही लगती….

मोहित नेहा की ये बात सुन कर थोड़ा खामोश हो गया….फिर उसको कुछ ना बोलता देख कर, नेहा फिर से बोली…..”अच्छा तुझे अपनी आंटी की वो देखने में मज़ा आता है ना ?” मोहित तो जैसे सुन्न हो चुका था…उसका तो वो हाल हो रहा था कि, काटो तो खून ना निकले…..पर फिर भी उसने हिम्मत करके, उसने हां में सर हिला दिया…

नेहा: (अपने होंठो को दांतो में दबाते हुए) अच्छा तो फिर इतना क्यों घबरा रहा है…मेने कुछ कहा क्या तुमसे….?

मोहित: नही आंटी जी…

नेहा: तो फिर घबरा मत….अच्छा चल छोड़ ये सब तुझे मेरी वो देखने में अच्छा लगता है ना..बोल फिर से देखे गा…

मोहित: नही हां आंटी…..

नेहा: देखेगा….? (नेहा की साँसे भी अब तेज होने लगी थी…भले ही वो ऊपेर से मोहित पर हावी होने की कॉसिश कर रही थी….पर अंदर से उसका भी मोहित जैसा हाल हो रहा था….

मोहित: हां आंटी….

नेहा फिर एक बार उसकी तरफ वासना भरी मुस्कान से देखा, और फिर से वैसे ही लेट गई…उसने लेटते हुए अपनी टाँगो को मोड़ कर फिर से पैरो को चारपाई के किनारों, पर टीकाकार अपनी जाँघो को फेला लिया….एक बार फिर से नेहा की चूत का रस से भीगा हुआ छेद और उसकी काली झांते मोहित की आँखो के सामने आ गई….

मोहित का लंड ये देख कर पेंट में झटके खाने लगा…मोहित अपनी आँखो खोले काफ़ी हद तक नेहा की चूत की ओर देख रहा था….और नेहा मुस्कुराते हुए, मोहित के चेहरे को देख रही थी….दोनो का अब बुरा हाल था…ये सोच कर ही नेहा की चूत पानी छोड़ने लगी थी, उसके बेटे की उम्र का लड़का उसकी चूत को ऐसे देख रहा है…

और उसे भी खुद पर हैरानी हो रही थी कि, वो अपनी चूत की आग को लेकर इतनी बेबस कैसे हो गई कि, वो अपने बेटे के दोस्त को इस तरह अपनी चूत के दर्शन करवा कर ही गरम हो रही है…

नेहा भी अब एक दम चुदासी हो गई थी….उसकी चूत के फांके फड़फदा रही थी….मोहित नेहा के बिकुल करीब खड़ा ये सब देख रहा था….नेहा की चूत से कामरस निकल कर बहता हुआ उसकी गान्ड के छेद की तरफ जा रहा था….जिसे देख मोहित और जोश में आने लगा….

नेहा को भी मोहित की हालत का अंदाज़ा हो गया..उसने लेटे हुए अपनी आँखें बंद किए हुए, मोहित से कहा….”सिर्फ़ देखने का ही मन है ना….छूने का दिल तो नही कर रहा”

मोहित: (एक दम चोन्कते हुए) नही आंटी हां आंटी….

नेहा: नही या हां ?

मोहित: हां आंटी….

नेहा: तो छू ले ना….मेने कब मना किया है….

नेहा की बात सुन कर मोहित का दिल जोरो से धड़कने लगा….वो धीरे-2 नेहा की टाँगो के बीच में पहुँच गया….और अपने काँपते हुए हाथ को उसकी चूत की तरफ बढ़ा दिया….नेहा ने एक बार अपनी आँखे खोल कर मोहित की ओर देखा, और फिर से अपनी आँखो को बंद करके उस लम्हे का इंतजार करने लगी. जब मोहित उसकी चूत को छुएगा….

क्रमशः................................

 


Dusri taraf neha aur kamala dono ek dusri ke choot ko unglyon se thanda kar chuki thee…..neha jaise hee apne ghar jane ke liye nikalne lagee. To usse men door par mohit mil gaya…wo abhi ground se khel kar wapis aaya tha. neha ne uski tara dekh kar ek katil muskan phenki, aur phir uske pas se gujjarte hue boli….

Neha: ab tum sahil ko milane ghar nahi ate kya baat hai….?

Mohit; wo aunty jee. Wo mera sahil se school men jhagda ho gaya tha.. iss liye hum ek dusre se baat nahi karte….

Neha: achha sahil se jhagda ho gaya tha…

Mohit: jee aunty….

Neha: to phir mujhe milane ke liye to aa sakte thee naa. Tum mujhe batate to men tumhe men sulha karwa deti…apni aunty ke baat manoge naa…

Mohit: jee aunty…

Neha: achha sun mere ghar par bhee bahut sare kapde dhulane wale ho gai hai…kya men tumhare tubewell par jakar unhe dho sakti hun…

Mohit: jee aunty kyon nahi….

Neha: tu chalega kal humare sath….

Mohit: par aunty kal to school jana hai naa….

Neha: hum men to bhool hee gai…chal koi baat nahi…uske baad neha ghar aa gai….aur ghar ke kamo men lag gai….chudai ke baad geeta to aise ghode bech kar soye thee ki, wo sham ko 6 baje neha ke jagane se uthi..raat ko sab khaanaa kha pee kar so gai…agle din sahil aur geeta ko school jana tha….unke school jane ke baad kulwant bhee 10 baje kaam par chala gaya.

Ab sahil aur geeta ko school se 3 baje wapis aana tha….iss laye neha ghar ke kaam nipata kar kamala ke ghar jane ke soch hee rahi thee, ki uske door par knock hua……

Jab neha ne jakar gate khola to, samane kamala hee khadi thee…dono ek dusre ke taraf dekh kar muskuraayaa….phir kamala ke ander ane ke baad neha ne gate band kya….

Neha: men abhi tumhare ghar hee ane wali thee….(room ke taraf jate hue)

Kamala: yaar achha hua nahi aye….mera khasam abhi ghar par hee hai… aur mohit bhee….

Neha: kyon mohit school nahi gaya aaj kya hua ?

Kamala: pata nahi subhe keh raha tha ki, tabyat theek nahi hai….par tab se dekh rahi hun…wo to achha bhala hai….

Kamala ke baat sun kar neha ke hontho par muskan phel gai…neha ko jun muskuraate hue dekh kamala se raha nahi gaya….”kya hua itna kyon khus ho rahi hai” mohit isiliye school nahi gaya tha, kyonki kal neha ne usse kaha tha ki, wo uske kheto men kapde dhone jayege….phir neha ne sari baat kamala ko batai…aur phir dono hansane lagee….

Kamala: randi kya kar diya tune mere bête ko…dekh majje lene ke baat tak to theek hai….par hum dono apne beto ke padhi yaan unki jindgi kissi tarah se kharab nahi hone denge…age se dhayan rakhana..

Neha: chal yaar galati ho gai….waise bhee ek din school nahi jayega to kuch nahi hoga….yaad rakh tujhe sahil ke sath bhee masti karni hai..

Kamala: achha ab phir kya karna hai…

Neha: kya karna hai matlab….

Kamala: matlab ye kee, ab tum bhee akeli ho….kauhn to bejun usko…

Neha: par yaar agar ghar par koi aa gaya to,

Kamala: yaar ab itne darege to kaise chalega….kuch to himmat karni padege tujhe….waise bhee mohit ke abhi itni umer nahi hai ki, wo bina dare apne dil ke baat tujhe jata sake….

Neha: achha jitna wo bhola lagata hai, utna wo hai nahi…

Kamala: chal achha hai…phir tera kaam kuch asaan ho jayega….

Neha: achha chal bata ab kya karun….mujhe dar hai ki koi ghar par naa aa jaye….warna khamkha sawal karenge ki, men ghar men akeli mohit ke sath kya kar rahi thee….

Kamala: (thodi der sochate hue) achha tu thodi der intjaar kar. Mohit ke papa jane hee wale hai….jaise hee wo jate hai…men tumhe aakar bataungi. Tu apne ghar ke peeche bane bhainso wale kamare men intjaar karna. Men usse kissi taraf bahane se bejati hun….agar koi aya bhee to, wo peeche wali diwar fand kar humare ghar wapis aa sakta hai….

Neha: yaar ye sab to theek hai..par mujhe sach men dar lag raha hai…

Kamala: kuch nahi hota mere jaan…tu ghabara mat…

Abhi dono bataen kar hee rahi thee ki, mohit neha ke ghar ka door knock karta hai….jab neha bahar jakar gate kholati hai. to samane mohit ko khada dekhati hai….”aunty jee maa idhar hai kya”

Neha: haan beta wo ander hai…

Mohit: aunty jee maa ko ghar bej do….papa koi kaam se jana hai kheto… unka khaanaa pack karna hai…

Neha: achha abhi bejati hun….

Ye keh kar jaise hee neha wapis mudane lagee, to wo kuch soch kar ruk gai….usne phir se mohit ko awaz de….”mohit beta suno to jara…”

Mohit: jee aunty jee….

Neha: wo mujhe peeche store room men kuch saman theek karwana hai… bahut bhari saman hai….tum mere madad kar doge thodi der aakar…

Mohit: jee aunty….men thodi der men aataa hun….

Mohit ke jane ke baad, neha room men aye. Aur sari baat kamala ko bata de. Kamala ne muskuraate hue uski taraf dekha…phir uske choot ko salwar ke ooper se maslate hue boli….”abhi to itne nakhare kar rahi thee..ki dar lag raha hai…aur abhi khud hee sara program set kar liya tune”

Neha: ahh hat gastaye…..chal jaa ab tera kasam tera intjaar kar raha hai…

Kamala: lagata hai…aaj to tu mohit ka lund apni phuddi men lekar hee rehage….ha haha….

Neha: achha ab tu jaeyge bhee…time dekh…

Kamala: (ghadi ke aur dekhate hue) abhi 10:30 hue hai…abhi 4 ghanate hai tere pas…dil khol kar aaj apni phuddi marwa lena….

Phir kamala haste hue, apne ghar chali gai…..kamala ne apne pati ko khaanaa diya….thodi der baad kamala ka pati, kheto ke liye chala gaya. Kamala uth kar apne ghar ke peeche aa gai….jaha par unho ne bhee bhainso ko bandhane ke liye chappar banaye hue thee….dono ghar ke beech men koi 6 foot unchi diwar thee…waha jaa kar usne halat ka jayza liya. Aur phir se age ke taraf aa gai…

Usne dekha mohit apne kamare men baitha hua, kuch soch raha tha… wo thoda sa pareshaan bhee lag raha tha….kamala mohit ke pas gai. Aur uske aur muskuraate hue dekh kar boli…..” kya kya soch rahe ho ?” mohit kamala ke awaz sun kar apne khalyon se bahar aya….

Mohit: kuch bhee nahi maa…..buss aise hee….

Kamala: achha wo neha bol rahi thee…usse kuch bhari saman theek se rakhana hai…agar ab tere tabayat theek hai, to jaa apni aunty ke madad kar de jakar….

Mohit: achha jaata hun….

Ye keh kar mohit uth kar bahar chala gaya….phir usne neha ke ghar ke samane jakar gate ko khatkhataya…thodi der baad neha ne gate khola. Aur samane mohit ko khada dekh kar apne hontho par katil muskan late hue boli…” ander aa jao” jaise hee mohit ander aya….neha ne bahar gaali men charo taraf dekha…garami ke wajhe se bahar koi nahi tha….neha har baat ka aise dhayan rakh rahi thee…jaise koi chodi karne jaa rahi ho…

Wo bhee ander se ghabarye hue thee….phir usne gate band kya. aur palat kar ander jane lagee…to mohit abhi bhee wahi khada tha…usne phir se mohit ko dekh kar muskarya…aur phir ander ke taraf jane lagee…mohit bhee uske peeche chalate hue barmade men aa gaya….

Neha: kuch loge tum chai thanda…

Mohit: jee. Jee nahi men abhi nashta karke ayah un….

Neha: (apne room men gai, aur pichale store room ke chabhi lekar aa gai. Aur mohit ko dete hue boli) ye lo tum jakar peeche ka store room kholo. Men kapde badal kar purane kapde pehan kar aati hun….waha to bhoot dhool jami hogi…..mohit ne neha se chabhi le, aur piche chala gaya…usne waha jakar store room ka door khola, store room saman se ek dum bhara hua tha.

 


Ek tararf anaaj rakhane ke liye bade-2 drum rakhe hue thee…ek taraf kuch purani almarya, aur ek taraf wahi charpai aur bistar padhe hue thee. jiss par kuch ek mahine pehale payal ke chudai kee hui thee…charpai par ek ke ooper ek bistar biche hue thee…jisse ek bahut hee naram bistar taiyaar tha.

Mohit ander akar charpai par baith gaya….aur neha ke ane ka intjaar karne laga…thodi der baad neha store room men aa gai…..usne ek purana sa white colour ka salwar kameez pehana hua tha…jaise hee neha store room men ander aye….mohit ke nazar sabase pehale, neha ke kameez men phansi hui chuchiyon par padhi…jo kameez tang hone ke karan alag hee nazar aa rahi thaa…..

Aur uss white colour ke kameez men saaf pata chal raha tha. ki neha ne neeche bra nahi pehani thee….neha apne sath kuch purane kapde lekar aye thee..saafi ke liye…usne ek kapdha mohit ke taraf badhate hue kaha….

Neha: mohit ye lo….aur inn drums ko saaf kar do….men tab tak wo alamari saaf kar deti hun…..

Mohit charpai se utha, aur neha ke hath se kapdha lekar, anaaz ke drums ko saaf karne laga….neha ne ek baar uski taraf dekha. Aur phir muskara kar purani almari ko saaf karne lagee….halki store room ka pankha chal raha tha. par store room kafi dino se band tha…isiliye ander humaas bahut jyaadaa thee….par bahar ab badal ghirane lagee thee…aur dhoop badalo ke wajhe se chup gai thee…dono kuch hee der men poore pasine se bheeg gai….

Paseena ponchate hue mohit ke nazar achaanak se neha par padhi….uss samaye neha alamri ko saaf kar rahi thee…uski peeth mohit ke taraf thee. uska patla se white kameez pasine se bheeg kar uski peeth se chipaka hua tha….aur uski peeth saaf nazar aa rahi thee….mohit ke lund men ye dekh kar hee halchal hone lagee….

Neha ko iss baat ka andesha ho gaya tha ki, mohit ab uski taraf hee dekh raha hai…ye sochate hee, uske hontho par muskan phel gai…uski kameez age se bhee paseene se geeli hokar uske mammo par chipak gai thee. aur uske mamme white kameez men saaf jhalak rahe thee….yahan tak ki uske gori-2 chuchiyon ke kaale rang ke bade-2 nipple saaf dikh rahe thee….neha ne apne dupaate ko apne gaale ke sath sata rakha tha…

Jab use ahsaas hua ki, ab mohit ko bhee uska pichala hissa saaf nazar aa raha hoga…ye sochate hee, uske badan men ajeeb see sursuri douad gai…usne palat kar mohit ke taraf dekha…jaise hee dono ke nazare apas men takaraai….mohit ek dum se hadbadaaa gaya…aur phir se age ko dekhate hue, drums ko saaf karne laga….

Mohit ke ye hadbadaahat dekh kar neha kee hansi chutane hee wali thee. par usne apne aap ko kissi tarah sambhala…aur apne man men sochate hue bolane lagee..”bache abhi to kuch dekh hee nahi tune ab age-2 dekh tera kya haal hota hai” ye sochate hue, usne apne duppate ko apni chuchiyon par theek kya, aur mohit ke pas jakar boli….

Neha: thak gai kya…?

Mohit: haan nahi to…wo buss garami kuch jyaadaa hai…..(sar jhukiye hue)

Neha: haan wo to hai…kamala ne bataya tha ki, tumhari tabayat theek nahi hai…isiliye tum aaj school nahi gai….agar jyaadaa thakan ho to rehane do..

Mohit: nahi aunty men theek hun…wo buss subhe thoda tabayat theek nahi thee..ab theek hai….

Neha: arre dekho to tumhe kitna paseena aa raha hai…

Ye kehate hue, neha ne apna agla vaar kya….aur usne apne duppate ko utarate hue apne hatho men lekar mohit ke chehare ko saaf karna shuru kar diya….”dekho kitna paseena aya hai…lao men saaf kar deti hun…” jaise hee neha ne apne duppate ko utara….mohit ke saanse uske halak men atak gai. Neha ke 38 size ke chuchiyaan uske paseene se bheege hui, kameez men saaf dikhai de rahi thee….uske kaale rang ke mote-2 nipple jo ki ek dum tane hue thee…jaise mohit ko keh rahe ho…hume apne munh men bhar kar chuso. Nichod do hume….

Aur nipple ke charo taraf dark brown colour ke circle jo ki 3 inch ke golaye men phele hue thee…unhe dekh kar to, mohit ka lund lohe ke rod ke tarah akad gaya…neha mohit ke chehare par paseene ponchate hue, uski ankho ke taraf dekh rahi thee…aur apne man hee man muskara rahi thee…

Neha ke chuchiyon aur nipples ko dekh kar mohit ko lag raha tha ki, wo wahi par jhad jayega….neha ne uske mathe se paseena saaf kya….aur phir uss duppate ko charpai par phenk diya…aur phir se almari ke taraf jakar saafai karne lagee….mohit ka to jaise bura haal ho gaya…jaise hee neha ne uski taraf peeth kee, mohit ne apne lund ko pent ke ooper se pakad kar masla. Aur phir se kaam men lag gaya…

Thodi der aur kaam karne ke baad….mohit ne phir se face ghuma kar neha ke taraf dekha…..iss baar jo mohit ne dekha…wo uski bardast se bahar tha. neha apne ek hath ko almari se tikiye hue, jhuk kar almari ke neeche wale hisse ko saaf kar rahi thee….usne apni kameez ke palle ko peeche se uth kar apni salwar ke jabaran men phansa rakha tha….aur uski salwar uske gaanD se pasine ke wajhe se ek dum chipaki hui thee….

Neha ke bade-2 aur mote gaanD saaf nazar aa rahi thee….neha ne iske ilwa bhee aur kuch kar rakha tha…mohit par bijli girane ko….aise jhuk kar alamri saaf karne ke karan uski gaanD peeche se bahar ke taraf nikali hui thee..mohit ka dil to kar raha tha..

wo abhi jakar neha ke salwar utar kar uski gaanD men apne lund ghused de….par uski himmat nahi ho rahi thee… almari saaf karte hue, achaanak se neha apne dono tango ko thoda sa phela diya. Phir mohit ko wo cheez nazar aye. Jo Neha ne pehale se plan kar rakhi hui thee….

jiss tarah se neha apni tango ko pheliya tha…usse uski salawar uske gaanD se khinch gai….jo uski gaanD aur choot wali jagah se phati hui thee…. ab uss phati hui salwar ke ched see mohit ko jaise hee, uske gaanD ke darar nazar aye. To usse saans lena bhee muskil ho gaya….

Lund apni aukat se kuch jyaadaa hee phulane laga….aur phir usse neha ke jhanto se bhari hui choot ke phanko ke beech ke lakeer nazar aye. Par mohit usse dekh kar ahaye bharte hue, apne lund ko masal kar reh gaya….neha jhuk kar khankyon se peeche hee dekh rahi thee….aur mand-2 muskara rahi thee…ye sab sehan karna ab mohit ke liye muskil hota jaa raha tha….

Phir achaanak se neha seedhi hui, aur mohit ke taraf dekhane lagee.. mohit ka hath abhi bhee uske pent ke ooper se uske lund par tha…wo apne khalyon men khoya hua apne lund ko masal raha tha…phir neha ne aise aawz kee, jaise wo khans rahi ho….khalyon ke duniyaa se bahar ate hue, mohit ek dum se ghabara gaya….neha ne apne hontho ko danto men daba kar muskuraate hue uski taraf dekha….

Neha: ye kya kar rahe thee…. (apne nichale hontho ko apne danto dabate hue)

Mohit: (ek dum hadbadaaate hue) ka ka kuch nahi…..

Neha: achha kuch nahi…phir apne hathayar ko kyon daba rahe thee…sach sach batao kya soch rahe thee…..

Mohit: (neha ke baat sun kar mohit ek dum se ghabra jata hai….) nahi kuch nahi wo buss wo…..

Neha: wo wo kya bata naa ?

Mohit: wo mujhe yahan par khujali ho rahi thee….

Neha: jhoot…

Mohit: jee…

Neha: achha sirf khujali ho rahi thee….

Mohit: jee aunty men sach keh raha hun….

Neha: (mohit ke pas ate hue) achha to phir isse khada kyon kar rakha hai. sach sach batao nahi to men kamala ko bata dungi…..

Ye kehate hue, neha ne uski pent ke ooper se uske lund par thapaki laga de. Aur phir kapde ko neeche phenk charpai ke taraf badhi….aur phir mohit ke taraf ghumate hue, charpai par peeth ke bal let gai…phir usne apne charpai ke neeche latakete tango ko ghutno se fold kar ooper utha kar apne pairo ko charpai ke kinare par tika kar apni tango ko poora khol liya….

Mohit ka lund jo abhi-2 dar ke karan baith gaya tha….samane ka nazara dekh kar phir khada hone laga…jiss tarah se neha apni tango ko fold karke charpai par let kar phelaye hue thee….usse uski choot saaf dikhai de rahi thee….aur ab to uski choot ke phankhen pheli hone ke karan uske choot ka gulabi rasdaar ched bhee saaf dikhai de raha tha…..

Neha: bola naa kya soch raha hai. yaan phir kamala ko bata dun….

Ek to mohit ka bura haal tha….ooper se wo apni tango ko khol kar apni khuli hui jhanto bhari choot ko mohit ko dikhate hue ye sab pooch rahi thee.

Mohit: wo aunty wo men….

Neha: haan-2 bola naa….

Mohit: aunty aap gussa karenge….

Neha: agar nahi batayega to phir tere maa gussa karge…chal men nahi karti.

Mohit: aunty wo apko wo dikhai de rahi hai….isiliye mera khada….

Isse age mohit naa bola paya…aur naa hee uski himmat ho rahi thee.. neha charpai par lete hue ooper chat ke aur dekh rahi thee…mohit ke bataon ko sun kar neha kissi tarah apni hansi ko roka….”kya dekh kar khada ho gaya tera…mera kya dikh raha hai…..” neha ne apne nazre mohit ke aur dalate hue poocha….

Mohit: wo wo apki salwar….

Mohit ke to jaise gaanD phat rahi thee….ye sab bolane men….wo itna hee bol kar chup ho gaya….”kya hua mere salwar ko arre salwar dekh kar bhee khada hota hai kya….sach-2 bata….” Ab mohit ke gaanD aise phat rahi thee… jaise wo koi chodi karke police ke samane khada hua ho….” Nahi aunty apki salwar nahi wo dekh kar”

Neha: (apne face ko dusri taraf kar muskuraate hue) kya dekh kar saaf -2 bol men tujhse gussa nahi hongi….

Mohit: wo aunty aap ke phuddi dikhai de….

Neha: (jaan booj kar chonkane ka natak karte hue uth kar baith jati hai) haye haye kya keh rahe ho….tujhe kaise dikhai de mere phuddi….

Mohit: wo wo apki salwar phati hai….

Neha: (phir se chonkane ka natak karte hue) kaha ohh hayee oyee….men bhee naa jara bhee dhayan nahi diya….sari galati mere hai… aur mene bekar men tujhe danata….chal idhar ghabara mat…

Mohit neha ke taraf badha, jaise hee mohit neha ke kareeb pahuncha….neha ne uska hath pakad kar apne badan se chipka liya….ab neha charpai par neeche pair latka kar baithi thee….jaise ke pehale bhee bata chuka hun ki, charpai par bahut se sare bistar ek ke ooper ek biche hue thee…iss liye neha kafi ooper baithi thee….

Jaise hee neha ne mohit ko apne gaale se lagaayaa, neha ke 38 size ke chuchiyaan mohit ke chaatee men dhans gai…wo usko apne bahon men laye hue, apne chuchiyon ko uske chaatee men ragadne lagee…mohit to jaise sawarg men pahunch gaya tha…phir bahar achaanak badal garjane lagee….aur tej barish shuru ho gai..thandi-2 hawa store room men ane lagee…

Badalo ke garjane ke awaz sun kar neha ne mohit ko apne se alag karte hue, bahar ke aur dekha to, bahar barish joro par thee…ab itne tej barish men uske ghar par kissi ke ane ka sawal bhee nahi tha…neha ab thoda relax feel kar rahi thee…phir usne mohit ke sar par hath pherte hue bola…

Neha: tu gharbara mat kamala ko nahi batugi….par tu naa ab bahut sharati ho gaya….apni aunty ke phuddi ko aise chup kar dekh raha tha. aur apna lund bhee khada liya….

Mohit neha ke munh se aise lund aur choot jaise shabad sun kar ek dum chonk gaya…wo ankhe phade neha ko dekhane laga…..neha ne phir se wahi katil muskan ke sath uski taraf dekha aur boli “achha sach-2 bata tujhe mere wo acchi lagati hai….” neha ke iss sawal ne mano jaise mohit par bomb phod diya ho….wo ek dum sun ho gaya….aur apne munh khol kar neha ke aur dekhane laga…

Neha: bata naa…tumhe acchi lagati hai wo…

Mohit: (ghbarate hue) haan aunty…..

Neha: (apna munh banate hue) achha sirf wahi acchi lagatai hai tujhe men achi nahi lagati….

Mohit neha ke ye baat sun kar thoda khamosh ho gaya….phir usko kuch na bolata dekh kar, neha phir se boli…..”achha tujhe apni aunty ke wo dekhane men maja aata hai naa ?” mohit to jaise sun ho chuka tha…uska to wo haal ho raha tha ki, kaato to khoon naa nikale…..par phir bhee usne himmat karke, usne haan men sar hila diya…

Neha: (apne hontho ko danto men dabate hue) achha to phir itna kyon ghbara raha hai…mene kuch kaha kya tumse….?

Mohit: nahi aunty jee…

Neha: to phir ghabara mat….achha chal chod ye sab tujhe mere wo dekhane men achha lagta hai naa..bol phir se dekhe ga…

Mohit: nahi haan aunty…..

Neha: dekhega….? (neha ke saanse bhee ab tej hone lagee thee…bhale hee wo ooper se mohit par haavi hone ke kosish kar rahi thee….par ander se uska bhee mohit jaise haal ho raha tha….

Mohit: haan aunty….

Neha phir ek baar uski taraf wasna bhari muskan se dekha, aur phir se waise hee let gai…usne latete hue apne tango ko mod kar phir se pairo ko charpai ke kinaro, par tikakar apni jhangon ko phela liya….ek baar phir se neha ke choot ka ras se bheega hua ched aur uski kaali jhanten mohit ke ankho ke samane aa gai….

Mohit ka lund ye dekh kar pent men jhatke khane laga…mohit apni ankho kop hade neha ke choot ke aur dekh raha tha….aur neha muskuraate hue, mohit ke chehare ko dekh rahi thee….dono ka ab bura haal tha…ye soch kar hee neha ke choot pani chodane lagee ki, uske bête ke umer ka ladka uske choot ko aise dekh raha hai…

Aur usse bhee khud par hariani ho rahi thee ki, wo apni choot ke aag ko lekar itni bebas kaise ho gai ki, wo apne bête ke dost ko iss tarah apni choot ke darshan karwa kar hee garam ho rahi hai…

Neha bhee ab ek dum chudai ho gai thee….uski choot ke phanke phadphada rahi thee….mohit neha ke bikul kareeb khada ye sab dekh raha tha….neha ke choot se kaamras nikal kar behata hua uski gaanD ke ched ke taraf jaa raha tha….jisse dekh mohit aur josh men ane laga….

Neha ko bhee mohit ke halat ka andaza ho gaya..usne lete hue apni ankhen band kiye hue, mohit se kaha….”sirf dekhane ka hee man hai naa….chuane ka dil to nahi kar raha”

Mohit: (ek dum chonakte hue) nahi aunty haan aunty….

Neha: nahi yaan haan ?

Mohit: haan aunty….

Neha: toh chu le naa….mene kab mana kya hai….

Neha ke baat sun kar mohit ka dil joro se dhadkne laga….wo dhire-2 neha ke tango ke beech men pahunch gaya….aur apne kanpate hue hath ko uske choot ke taraf badha diya….neha ne ek baar apni ankhe khol kar mohit ke aur dekha, aur phir se apni ankho ko band karke uss lamhae ka injaar karne lagee. Jab mohit uski choot ko chuega….

 
छोटी सी जान चूतो का तूफान--20

जब मोहित नेहा की टाँगों के दरमियान बेहद करीब आ गया….नेहा के दिल की धड़कने तेज हो गई….उसने अपनी आँखो को थोड़ा सा खोल कर देखा, तो मोहित उसकी चूत की तरफ ही देखा रहा था….और अपने हाथ को धीरे-2 नेहा की चूत की ओर बढ़ा रहा था….

नेहा ने फिर से अपनी आँखें बंद कर ली, मोहित धीरे-2 अपने हाथ को नेहा की चूत के पास ले गया, और अपनी तीन उंगलियो को नेहा की झांतो से भरी चूत की फांको पर लगा दिया……”सीईइ ओह्ह्ह मोहित अहह” नेहा मोहित की उंगलियो को अपनी चूत पर महसूस करते ही सिसक उठी….मोहित कुछ पॅलो के लिए रुका औरकी ओर देखा….नेहा अपनी आँखे बंद किए हुए, अपने होंठो को दांतो से चबा रही थी…

ये सेक्सी नज़ारा देख मोहित का लंड और झटके खाने लगा…उसने अपनी उंगलियो को धीरे-2 नेहा की चूत की फांको पर रगड़ना शुरू कर दिया. अपनी चूत पर नेहा मोहित की उंगलियो की रगड़ महसूस करके एक दम मस्त हो गई…और वो अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर झटके देने लगी…ये देख मोहित का हॉंसला भी बढ़ने लगा…..और वो भी पूरे जोश में आकर अपनी उंगलियो को नेहा की चूत पर रगड़ने लगा….नेहा मस्ती में सिसकारियाँ भरने लगी…”आहह सीईइ मोहित आह सीईईईई उंह क्या क्या कर रहे अह्ह्ह ओह्ह्ह्ह मोहित……

नेहा सिसकते हुए मदहोश होती जा रही थी….वो मोहित का बिल्कुल भी विद्रोह नही कर रही थी….और अब उसने अपनी टाँगो को घुटनो से मोड़ कर ऊपेर उठा लिया था…मोहित की उंगलियाँ भी, नेहा की चूत से निकल रहे पानी से सन गई….अब मोहित के बेचैनी बढ़ती जा रही थी…और अब उसे बर्दास्त करना मुस्किल होता जा रहा था….

जोश में आकर उसने अपनी दो उंगलियाँ नेहा की चूत के छेद में घुसा डी. नेहा एक दम से सिसक उठी….”उंह सीईईईईई मोहितत्त हाई….” नेहा का बदन झटके खाने लगा…तभी अचानक बाहर से, कमला की आवाज़ आई, जो अपने घर से दीवार के पास एक टेबल पर चढ़ कर लगा रही थी…

कमला की आवाज़ सुन कर नेहा और मोहित दोनो हड़बड़ा गए….मोहित एक दम से पीछे हट गया…नेहा भी जल्दी से उठ कर बाहर आई, तो वो दीवार के दूसरी तरफ से नेहा को बुला रही थी….सारा मूड खराब कर दिया गस्ति ने. नेहा ने मन ही मन कमला को कोसा, और फिर दीवार के पास बोली. “ क्या बात है क्यों चिल्ला रही है…”

बाहर अभी भी हल्की बारिश हो रही थी….”अर्रे वो में कहने आई थी कि, तुम्हारी ये जलावन की लकड़ियाँ बाहर भीग रही है…इन्हे तो उठा ले…” फिर कमला ने नेहा को आँख मारी, और टेबल से नीचे उतर गई… उसके जाते ही नेहा रूम में आई…मोहित वही चारपाई पर खड़ा था…”मोहित बेटा वो ज़रा बाहर से लकड़ियाँ उठा कर सामने भैंसो वाले कमरे में रख दो..”

मोहित: मा क्या कह रही थी…

नेहा: कुछ नही तू जा लकड़िया रख दे…वैसे भी आज तूने मेरे साथ बहुत कुछ कर लिया….आज के लिए इतना ही काफ़ी है….

मोहित उदास से चेहरा लेकर बाहर चला गया….और बाहर से लकड़ियाँ उठा कर भैंसो वाले कमरे में रखने लगा…उधर नेहा स्टोर रूम में मोहित की हालत पर मंद ही मंद मुस्करा रही थी…पर अब उसकी चूत में खुजली और बढ़ चुकी थी…और उसकी चूत लंड लेने के फुदक रही थी…वो अपनी सलवार के छेद में से अपनी उंगलियाँ डाल कर अपनी चूत पर फेरने लगी…जैसे ही उसने अपनी चूत पर अपनी उंगलियाँ फेरी…

उसकी उंगलिया उसके कामरस से भीग गई…तभी उसे बाहर से मोहित के कदमो की आहट अंदर की ओर आते हुए, महसूस हुई. उसने जलदी से अपनी सलवार से अपनी उंगलियाँ निकाली. और मोहित अंदर आ गया…अंदर आने के बाद वो सर झुका कर खड़ा हो गया..

नेहा एक बार फिर से मोहित के हालत देख कर मंद-2 मुस्कुराने लगी…और फिर उसकी तरफ पीठ करके चारपाई की ओर पलटी….और चारपाई पर बिस्तरो के ऊपेर रखे तकये को मोहित को देते हुए खुद ऊपेर पड़े बिस्तरो को झाड़ने लगी….मोहित अपने एक हाथ वो तकिया पकड़े खड़ा था…और वो मन ही मन अपनी मा को भी कोस रहा था…..

नेहा की चूत में आग अब इस कदर बढ़ चुकी थी कि, वो लंड लेने के लिए मचल रही थी…..वो एक बार तो मोहित को खुलेआम अपनी चूत दिखा कर, मोका बना चुकी थी….पर दोबारा से पहल करने से शरमा रही थी.. उसके दिल में बार-2 यही आ रहा था कि, कही मोहित उसे घटिया और गिरी हुई औरत ना समझ ले….

पर फिर भी चूत की आग इतनी भाड़क चुकी थी….कि उसका दिल कर रहा था कि, मोहित खुद उसे पकड़ कर चोद दे….ये सोचते हुए, वो बिस्तरॉ पर झुक कर साफाई करने लगी…एक बार फिर से पीछे से उसकी गान्ड ऊपेर होकर बाहर आ गई….नेहा ये सब ऐसे कर रही थी…जैसे वो अंज़ान हो…वो सफाई करते हुए कुछ ज़्यादा ही झुक रही थी….

एक बार फिर से उसकी फटी हुई सलवार से उसकी गान्ड और चूत की फांके नज़र आने लगी….मोहित का बुरा हाल हो गया…और वो अपने दूसरे हाथ से अपने लंड को मसलने लगा….नेहा ने अपनी तिरछी नज़रो से मोहित की ओर देखा. और फिर मुस्कुराते हुए, बिना उसकी ओर देखे बोली..”लाओ मोहित वो तकिया दे दो….” मोहित तकिया लेकर नेहा के ठीक पीछे आ गया….

औट तकिया को नेहा की तरफ बढ़ा दिया….नेहा ने बिना पीछे पलटे अपना हाथ पीछे लेजाकार तकिये को लेकर चारपाई पर रख दिया…और अपनी गान्ड को पीछे से और बाहर निकाल लिया….नेहा की बड़ी गान्ड देख कर मोहित अब अपना आपा खो बैठा….नेहा मुस्कुराते हुए, जान बुझ कर चद्दर झाड़ने में कुछ ज़्यादा ही टाइम लगा रही थी….

ये सब करते हुए, नेहा का दिल ज़ोर से धक-2 कर रहा था….”ह सीईइ आह मोहित आह यी ईए क्याअ हइई ओई राबा ह अहह” हुआ ये कि, मोहित ने अपना लंड निकाला. जो पहले से ही लोहे की रोड के तरह तना हुआ था….मोहित ने आव देखा ना ताव, और अपने लंड को नेहा की चूत के छेद पर टिकाते हुए, ज़ोर दार झटका मारा…लंड का सुपडा नेहा की चूत के छेद को फेलाता हुआ पूरा अंदर जा घुसा….

जब तक नेहा संभाल पाती, मोहित ने दो तीन बार अपने लंड को नेहा की चूत के अंदर बाहर कर दिया था….नेहा के पूरे बदन करेंट सा दौड़ गया….और वो चारपाई पर लुढ़कते हुए पेट के बल लेट गई…मोहित भी उसके ऊपेर आ गिरा….मोहित का लंड अभी भी उसकी चूत में ही था…
 
नेहा: हाई ओई मार सुटेया…कमीने ने….आह…..

मोहित: सा सा सॉरी आंटी जी….वो मुझसे कंट्रोल नही हुआ….

नेहा: हाई मार दित्ता…तू बड़ा गंदा है मोहित….अब उठ मेरे ऊपेर से..जल्दी कर…..

मोहित नेहा की गान्ड के थोड़ा सा नीचे होकर घुटनो के बल बैठ गया. और अपने लंड को धीरे-2 खेंचते हुए, बाहर निकालने लगा…जैसे-2 मोहित के लंड का सुपाड़ा नेहा की चूत केए दीवारो से रगड़ खा कर बाहर आ रहा था. नेहा के पूरे बदन में मस्ती के लेहरे दौड़ने लगी….”सीईइ मोहित आह” मोहित ने अपने लंड को बाहर निकाला…..और फिर चारपाई पर एक साइड में बैठ गया…

नेहा तो मोहित के लंड के तीन धक्को से ही मदहोश हो गई थी…उसने पलट कर पीठ के बल लेटते हुए, मोहित की तरफ अपनी मदहोशी से भरी आँखो से देखा और कहा…”मोहित तुम बहुत गंदे हो…अपनी आंटी के साथ ऐसे करते है….”

मोहित: आंटी वो वो में वो….

नेहा: (बॅनवाटी गुस्सा दिखाते हुए) अच्छा पता है मुझे….बड़ा आया कंट्रोल नही हुआ आंटी….अब में किसी को मुँह दिखाने लायक नही रही…..

मोहित: सा सा सॉरी आंटी….मुझसे ग़लती हो गई….

नेहा: अब दूध के दाँत टूटे नही…और जनाब चले है फुद्दि मारने … वो भी अपनी आंटी की…..शरम नही आती तुझे….

मोहित: वो आंटी में वो….

नेहा: एक तो तू ना घबराता बहुत है…मेने कुछ कहा क्या ? अच्छा सुन ये बात किसी को नही बताओगे….में तुम्हे वो दूँगी….

मोहित: का क्या आंटी….

नेहा: बहन्चोद जो अभी मेरी मार रहा था….

नेहा की ये बात सुनते ही, मोहित की ज़ुबान किसी प्यासे कुत्ते की तरह बाहर आकर लटकने लगी….उसे अपने कानो पर यकीन नही हो रहा था….नेहा ने फिर से उसकी तरफ देखते हुए कहा….”बोल क्या इरादा है….”

मोहित: आंटी आप जैसे कहोगे में करूँगा…

नेहा ने फिर से आपने होंठो पर मुस्कान लाते हुए कहा…”अच्छा जी तो फिर ये ले…” ये कहते हुए, नेहा एक दम से उठ कर बैठ गई…और अपनी कमीज़ को दोनो तरफ से पकड़ कर ऊपेर उठाते हुए, अपने गाले से निकाल दिया….उसके 38 साइज़ की बड़ी-2 चुचियाँ उछल कर मोहित के चेहरे के सामने आ गई…मोहित आँखें फाडे कभी नेहा की चुचियों को तो कभी नेहा के चेहरे की ओर देखता…..

नेहा ने मुस्कुराते हुए देखा और बोली….”क्या हुआ तुझे ये अच्छी नही लगती.. या सिर्फ़ फुद्दि ही देखने का शॉंक है” मोहित तो जैसे सपनो के दुनिया में खोया हुआ था….उसे अपनी किस्मत पर यकीन नही हो रहा था…कि, उसकी मा की उम्र की ही एक मस्त और गदराई हुई औरत उसके सामने ऐसे नंगी बैठी हुई थी….नेहा ने मोहित को कपड़े से पकड़ कर हिलाते हुए कहा. “क्या हुआ कहाँ खो गए”

मोहित: कुछ नही…..

नेहा को मोहित के भोले पन पर प्यार आने लगा था…तभी उसकी नज़र अचानक उसके लंड पर पड़ी…जो उसकी चूत के कामरस से भीगा हुआ, चमक रहा था….नेहा का दिल जोरो से धड़कने लगा….उसने मोहित को कंधो से पकड़ कर अपनी ओर खेंचा, और फिर चारपाई पर सीधे लेटते हुए, उसे अपने ऊपेर लेटा लिया….

मोहित का चेहरा नेहा की बड़ी-2 गुदाज़ चुचियों पर दब गया….नेहा अब बिल्कुल भी इंतजार नही करना चाहती थी….उसने अपने हाथों को नीचे लेजाकार मोहित की पेंट को खोल कर नीचे सरका दिया…जैसे ही मोहित की पेंट उसके घुटनो तक आई, फिर उसने अपनी टाँगो को खोल कर मोहित की टाँगो पर चढ़ाते हुए, टाँगो की मदद से उसकी पेंट को टाँगो से निकाल दिया…और फिर मोहित के सर को पकड़ कर उसके होंठो को अपनी चुचि पर रगड़ते हुए बोली.

नेहा: (मदहोशी से काँपति आवाज़ में) ओह्ह मोहित पुत्तर चूस ले अपनी आंटी के मॅम ओह्ह्ह चुस्स ना….

मोहित तो जैसे इस पल का इंतजार कर रहा था….उसने अपने मुँह को खोला, और नेहा की लेफ्ट चुचि के मोटे काले रंग के निपल को मुँह में भर कर चूसना शुरू कर दिया…”उंह सीईईई अहह हाईए ओई आह हां चूस मोहित आह चुस्स्स्स्स ना और ज़ोर से चुस्स्स अहह” मोहित भी अब पूरे जोश में बिना किसी डर के , नेहा के मम्मे को जितना हो सकता था. मुँह में भर कर चूसने लगा….

नेहा के बदन में मस्ती की लहरे दौड़ने लगी….उसने अपनी जाँघो को पूरा फेला लिया, और अपना एक हाथ नीचे लेजाकार, मोहित के लंड को पकड़ कर, अपनी चूत के छेद पर लगा दिया…..”आह हाईए माअर दे” जैसे ही मोहित के लंड का सुपाडा नेहा की चूत के छेद पर लगा….मोहित से रहा नही गया….और उसने ज़ोर से अपनी कमर को आगे की तरफ धकेला…मोहित का पूरा लंड एक ही बार, में नेहा की चूत की गहराईयो में उतर गया..

 
नेहा अपनी चूत की दीवारो को मोहित के लंड पर कस्ति हुई महसूस करके सिहर उठी….उसकी कमर ने एक तेज झटका खाया, और उसकी चूत ने कुछ और बूंदे पानी की छोड़ डी….मोहित भी अपने लंड को नेहा के गरम पानी से बहती हुई चूत के अंदर महसूस करके, एक दम मस्त हो गया…

नेहा ने अपनी टाँगो को घुटनो से मोड़ कर पूरा ऊपेर उठा लिया, और मोहित की कमर के ऊपेर लपेट लिया….नेहा एक दम मदहोश हो चुकी थी…उसने मोहित के सर को पकड़ कर ऊपेर उठाया….और फिर अपने होंठो को मोहित के होंठो पर लगा कर पागलो की तरह किस करने लगी….मोहित भी उसका पूरा साथ दे रहा था…वो भी पूरे जोश के साथ नेहा के होंठो को चूस रहा था…और अपने दोनो हाथों से नेहा की बड़ी-2 चुचियों को मसल रहा था…

बीच-2 में दोनो साँस लेने के लिए एक दूसरे के होंठो से होंठ अलग करते, और फिर एक दूसरे के होंठो पर टूट पड़ते….नेहा अब पूरी तरह गरम हो चुकी थी. और वो अपनी गान्ड को धीरे-2 ऊपेर मोहित के लंड पर दबाने लगी थी….ये देख मोहित से भी नही रहा गया….उसने अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उठाते हुए, अपने आधे से ज़्यादा लंड को बाहर निकाला….और फिर तेज़ी से अंदर पेल दिया…लंड की रगड़ ने चूत की दीवारो में तेज सरसराहट पैदा की….और नेहा ने मचलते हुए, अपनी बाहों को पीठ पर कस लिया…

और तेज़ी से उसकी पीठ सहलाते हुए, अपनी गान्ड को ऊपेर की ओर उछलते हुए, मोहित के लंड पर पटाकने लगी…मोहित भी अब अपना लंड बाहर निकाल-2 कर नेहा की चूत में पेल रहा था….नेहा मस्ती में सिसकारिया भरते हुए, आहह ओह्ह्ह हाईए मर गेयैयी हान्न मार मेरी फुद्दि ओह्ह्ह निकाल दे अपना पानी आहह चोद मुझे मार ले अपनी आंटी की फुद्दि आह मार ले बेटा…चिल्ला रही थी….

नेहा की बातें सुन कर मोहित और जोश में आकर अपने लंड को पूरी रफ़्तार से नेहा की चूत के अंदर बाहर करने लगा….पूरे रूम में ठप-2 अह्ह्ह ओह्ह हाए हाआँ और ज़ोर नाल हाई मेरी फुददी अह्ह्ह…ऐसी आवाज़े गूँज रही थी. नेहा तो अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी….और अपनी आँखें बंद किए हुए, अपनी गान्ड को उछाल कर मोहित का लंड अपनी चूत की गहराईयो में लेने की कॉसिश कर रही थी…

मोहित कभी नेहा के होंठो को चूस्ता, तो कभी दोनो चुचियों को मुँह में भर कर चूसने लगता…कभी अपने हाथों से नेहा के दोनो निपल्स को निचोड़ देता…नेहा भी मोहित के इस खेल कर मज़ा लेते हुए, अपनी टाँगो को पूरा खोल कर मज़ा ले रही थी….

जब वो नेहा के होंठो को चूस्ता तो, नेहा अपने होंठो को खोल देती, और मोहित जी भर कर नेहा के होंठो को चूस्ता और फिर नेहा के मम्मो को मुँह में भर कर चूसने लगता……नेहा अपनी मस्त और गरम कर देने वाली सिसकारियाँ मोहित का हॉंसला बढ़ा रही थी…..

नेहा: हां सबास मेरे शेर चोद मुझे आह चोद मुझे मार ले अपनी आंटी की फुद्दि आहह चोद और ज़ोर से फाड़ दे आह हां ऐसी ही और ज़ोर से घस्ससे मार. आअह चीर दे मेरी फुद्दि अपने लंड नाल….

नेहा अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी….मोहित के जबरदस्त धक्के उसे चरम की ओर लेजा रहे थे…और वो भी अपनी गान्ड को ऊपेर की और उछालते हुए झड़ने की ओर बढ़ रही थी…मोहित और जोश के साथ शाट लगाने लगा….उसकी जांघे, नेहा के चुतड़ों से टकरा कर थप-2 की आवाज़ करने लगी…और मोहित का लंड नेहा की गीली चूत में फॅच-2 की आवाज़ से अंदर बाहर होने लगा…..

नेहा: हाई ओह्ह्ह्ह मोहित हाआँ और ज़ोर दे मार फुद्दि अपनी आंटी दी…. कर दे पानी-2 अपनी आंटी की फुद्दि को अह्ह्ह्ह ले में गई आह मेरी फुद्दि आह में झड़ने वाली हूँ…..

मोहित: आंटी मेरा भी होने वाला है आह

नेहा: कर जल्दी आह चोद अपनी आंटी को अह्ह्ह्ह सीईईई मेरी अह्ह्ह्ह उहघ उंघह अहह में गेयैयी……….

फिर वो लम्हे आए…जिसका इंतजार नेहा कई महीनो से कर रही थी….नेहा की चूत में तो जैसे पानी का सैलाब आ गया….और उसका पूरा बदन काँपने लगा…झड़ते हुए उसके होंठो पर एक तीखी कामुक मुस्कान फेल गई..उसने अपनी टाँगो को नीचे हाथ डालते हुए घुटनो से पकड़ कर और ऊपेर उठा लिया…उसकी कमर झटके खाने लगी….और फिर मोहित भी झड़ने लगा…पर यहाँ में आप को बात दूँ कि, अभी साहिल और मोहित दोनो इस एज में नही थे कि, उनके लंड से वीर्य निकले….

मोहित पस्त होकर नेहा के ऊपेर लेट गया…..दोनो गहरी साँसे लेते हुए थोड़ी देर लेटे रहे….फिर मोहित नेहा के ऊपेर से उठ कर साइड में हुआ, अपने पेंट पहनने लगा…नेहा ने भी अपने कपड़े पहने, और फिर दोनो बाहर आ गए…”मोहित देखो आज जो कुछ भी हुआ..उसके बारे में किसी को पता नही चलना चाहिए…वरना में आगे से तुम्हे कुछ भी करने नही दूँगी’

मोहित: नही आंटी में कसम ख़ाता हूँ कि में किसी को कुछ नही बताउन्गा.

उसके बाद मोहित अपने घर चला गया…अभी 1 ही बजा था..मोहित के जाने के कुछ देर बाद कमला नेहा के घर पर आ गई…और फिर जो हुआ नेहा ने सब कुछ कमला को बता दिया….कमला बेचारी अपनी चूत मसल कर रह गई…और फिर दोनो हँसी मज़ाक करने लगी…

कमला: नेहा अब तो तेरा काम बन गया…अब मेरे बारे में कुछ सोच..

नेहा: हां -2 सोचते है….लगता है तेरी फुद्दि भी पानी छोड़ रही है साहिल के बारे में सोच-2 कर हहा हा..

कमला: चुप कर गस्ति…खुद तो मेरे बेटे का लंड ले लिया अपनी फुद्दि में और अब मेरा मज़ाक उड़ा रही है…

नेहा: अर्रे यार नाराज़ क्यों हो रही है..करते है ना कुछ….

 
दोपहर को साहिल और गीता घर आ गए…..कपड़े बदलने और फ्रेश होने के बाद, दोनो ने खाना खाया, और टीवी देखने लगे…..नेहा का दिल बार-2 अपनी और मोहित की चुदाई के बारे में कमला को बताने के लिए मचल रहा था…हालाकी वो पहले ही जो कुछ हुआ, बता चुकी थी….पर फिर भी उसका मन थोड़ी देर पहली हुई चुदाई को बताने के बारे में मचल रहा था.

अभी वो कमला के घर जाने ही वाली थी…..कि, कुलवंत घर पर आ गया. कुलवंत को रात को फिर से मंडी जाना था..इसीलिए नेहा ने उसे खाना दिया. और कुलवंत खाना खा कर सो गया….एक बार फिर से गीता की प्लॅनिंग धरी की धरी रह गई…साहिल भी कुलवंत के घर होने पर उदास था. जब कुलवंत सो गया तो, वो गीता और साहिल के पास गई…

जो उस समय पायल वाले रूम में बैठे टीवी देख रहे थे….नेहा ने साहिल और गीता से कहा कि, वो कमला के घर जा रही है….जब साहिल के पापा उठ जाए, तो वो उन्हे वहाँ से बुला ले…ये कह कर जैसे ही नेहा बाहर जाने को हुई, तो बाहर से कमला की बेटी सिमरन आ गई….

सिमरन: आंटी जी गीता है…

नेहा: हां अंदर है जाओ मिल लो…

और फिर नेहा कमला के घर चली गई….जब कमला के घर गई, तो उसे पता चला कि, मोहित खेलने के लिए ग्राउंड में गया हुआ है…दोनो आपस में बातें करने लगी….नेहा और मोहित की चुदाई का किस्सा तो वो सुबह ही सुन चुकी थी..पर नेहा फिर से उसे और मसाले के साथ सुनाने लगी.

नेहा और मोहित की चुदाई का किस्सा सुनते हुए, कमला की चूत की फांके फुदकने लगी….और उसकी चूत पानी छोड़ कर उसकी पेंटी को भिगोने लगी.. कमला ने उस समय ब्लाउस और पेटिकॉट पहना हुआ था…वो अपने पेटिकॉट को अपनी चूत के ऊपेर दबाते हुए, अपनी चूत में आई नमी को सॉफ करते हुए बोली…

कमला: हाए नी गस्ति….तूने तो लंड ले लिया अपनी चूत में….अब मुझे क्यों सुना कर तडपा रही है….कुछ कर ना…..नही तो में लंड को तरसते हुए मर जाउन्गि….

नेहा: हंसते हुए….यार अब तू ही बता क्या करू…वो गीता घर पर है साहिल के साथ….तेरे घर पर भी तो सब है…पता नही कब कोई आ जाए. बनाते हैं कोई प्रोग्राम…

उसके बाद नेहा अपने घर वापिस आ गई….साहिल छत पर आकर पतंग उड़ाने लगा….कमला अपने घर पर अकेली थी..सिमरन गीता के साथ बातों में मसगूल थी….मोहित ग्राउंड में खेलने गया था…और उसका पति, खेतो में था…इसीलिए वो चुदासी सी बैठी थी…..शाम के 5 बज चुके थे.. इसीलिए वो भैंसो को चारा डालने और दूध दुहने के लिए, पीछे बने भैंसो के बाडे में चली गई…

जब वो पीछे की तरफ गई, तो उसकी नज़र छत पर पतंग उड़ा रहे साहिल पर पड़ी…जो उनके घर की साइड वाली दीवार के पास खड़ा था…उसे देखते ही….कमला की चूत पनिया गई…अचानक पता नही उसके दिमाग़ में क्या आया…..वो खांसने लगी….जिससे साहिल का ध्यान नीचे कमला की तरफ गया….

कमला चोर नज़रो से उसकी तरफ ऊपेर देख रही थी…उसने उस समय सिर्फ़ पेटिकॉट और ब्लाउस पहना हुआ था…उसने जान बुझ कर अपनी जाँघो को खुजाना शुरू कर दिया…..जैसे उसे बहुत तेज खारिश हो रही हो….और वो साहिल को सुनाने के लिए आहह -2 करने लगी….

साहिल नीचे कमला को देख रहा था…”हाई मर गई…पता नही क्या लड़ गया है….हाई कितनी खुजली हो रही है…..” ये कहते हुए, उसने एक ही झटके में अपने पेटिकॉट को ऊपेर उठा लिया…कमला की पीठ साहिल की तरफ थी….उसने अपने पेटिकॉट को कमर पर चढ़ा कर अपनी दोनो टाँगो को फेला लिया…..और अपना एक हाथ नीचे लेजाते हुए, तेज़ी से अपनी चूत को मसलते हुए सिसियाने लगी….

कमला: हाई क्या लड़ गया हाई फुद्दि में बहुत जलन हो रही है…

ये सब करते हुए, कमला झुक कर अपनी गान्ड को पीछे से बाहर निकाल कर अपनी ऊट को देखने की कॉसिश कर रही थी…ऊपेर खड़े साहिल का बुरा हाल हो गया….कमला की बड़ी गान्ड देख साहिल पतंग उड़ाना भूल गया. उसे अब कमला की गान्ड के साथ-2 उसकी चूत के झांते भी दिखाई दे रही थी….

जिस तरह से कमला झुकी हुई थी…वो अपने पीछे छत पर खड़े साहिल को सॉफ देख पा रही थी….और जिस हसरत भरी नज़रो से साहिल कमला की चौड़ी गान्ड को देख रहा था..वो देख कर कमला के होंठो पर तीखी मुस्कान फेल गई….कमला ने भी अपना पहला तीर चला दिया था. और उसके हिसाब से उसका तीर सही निशाने पर लगा था…..

कमला थोड़ी देर झुक कर अपनी चूत को मसलते हुए, कीड़े के काटे जाने का नाटक करते हुए सिसियाति रही….फिर वो सीधी हुई, और अपना पेटिकॉट नीचे किया..फिर भैंसो को चारा डालने लगी….साहिल अभी भी कमला की ही तरफ देख रहा था….फिर अचानक से कमला ने ऊपेर छत की ओर देखा… जैसे ही दोनो के नज़रे मिली, साहिल एक दम से घबरा गया..

उसके चेहरे का रंग उड़ गया…..पर अगले ही पल उसकी घबराहट ऐसी गायब हुई, जैसे गधे के सर से सींग गायब होते है….क्योंकि कि कमला उसकी तरफ देख कर नाराज़ नही हुई, बल्कि अपने होंठो पर वही कातिल मुस्कान लाते हुए देखा था…और फिर जान बुझ कर मुस्कुराते हुए शरमाने का नाटक किया….साहिल ने अपनी पतंग जल्दी-2 में नीचे उतारी….और फिर उसी दीवार के पास जाकर खड़ा हो गया…जहाँ से कमला के घर के पीछे का हिस्सा सॉफ दिखता था….वो जान बुझ कर उड़ रही पतंगो को देखने लगा…और बीच-2 में वो कमला की ओर देखता….जैसे ही दोनो की नज़रे मिलती. कमला मुस्करा कर उसकी तरफ देखती…कमला दूध दुहने के लिए बैठ गई…

और भैंस के थनो को अपने हाथों से मसलते हुए, साहिल की ओर देखने लगती….जैसे ही साहिल उसकी ओर देखता, तो कमला जान बुझ कर भैंस के थनो को खिचते हुए, अपनी ब्लाउस के ऊपेर से अपनी चुचि को भी दबा देती. अब साहिल तो सेक्स के खेल कई बार खेल चुका था….वो मोहित की तरह अनाड़ी नही था….वो भी कमला को बेझीजक देखने लगा….कमला दूध दुहते हुए उसकी ओर देख कर मुस्कुराती रही….

ये सिलसिला तब टूटा जब नेहा ने नीचे से साहिल को आवाज़ डी. मजबूरन साहिल को नीचे जाना पड़ा….दिन इस तरह ढल गया….एक तरफ दो तरसते लंड और दूसरी तरफ तीन प्यासी चूते….पर किसी के हाथ कुछ नही लग रहा था. दिन इसी तरह गुज़रते गए….कुछ नही हुआ….हां बीच-2 में कमला साहिल को और नेहा मोहित को अपने हुश्न के दीदार करवा देती….

या फिर कभी गीता को मोका मिलता तो, वो साहिल को बाहों में जाकड़ कर चूमा चाटी कर लेती….4 दिन भी बीत गई….गीता की मा नीलम भाभी पूनम और पायल सब वापिस आ गई थी…उधर नेहा और कमला की चूतो के अंदर ऐसी आग लगी थी कि, दोनो दिन भर मोके ढूढ़ने में लगी रहती. नेहा एक दिन सुबह 11 बजे कमला के घर गई. दोनो ने एक दूसरे की चूत की आग को ठंडा करने के नाकाम कॉसिश की.
 
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