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Guest
(दोस्त में आप को यहाँ पर बता दूं कि, सरोज के पिता जो अब नही है…एक बहुत बड़े वैद्य थे…उनके पास आयुर्वेध का बहुत सा ग्यान था….उनका नाम देश के बड़े-2 वैद्यो में होता था..और उन्होने ने अपनी मेहनत और लगन से बेस्कीमती जड़ीबूट्यों से एक ऐसी दवा और तेल तैयार किया था… जिसके कुछ हफ़्तो के पर्योग से ही किसी का लंड मोटा और लंबा हो सकता था…
पर उस टेल में एक ख़ास किसम के बिछु के जहर का इस्तेमाल किया गया था. और जो दवाई बनाई गई थी….वो उस जहर के असर को कम करने के लिए बनाई गई थी…अपने पिता से ही सरोज ने वो सब राज हासिल किए थे)
कमला: अच्छा मा ये तो बताओ कि मामा का लंड उस तैल और दवाई के इस्तेमाल से कितना बड़ा हो गया था….
सरोज: (शरमाते हुए)धात कैसी बातें करती है…वो भी मेरे भाई और अपने मामा के बारे में छी छी…
कमला: (हंसते हुए) अर्रे मा साइज़ बताने में क्या हो जाएगा…
सरोज: तो मेने कॉन सा देखा था उसका हथियार…
कमला: मा बताओ ना…
सरोज: शरमाते हुए) उसका हठयार पूरे 8 इंच लंबा हो गया था…और 4 इंच मोटा भी…
कमला: सी हाए मा इतना बड़ा मुन्सल हो गया था मामा का…पर तुम्हे कैसे पता चला….
सरोज: तेरे मामी ने मुझे बताया था जब नयी-2 बिहा कर आई थी..तब एक दिन वो मुझसे मज़ाक में बोली कि, क्या खिला कर आप इनको बड़ा किए हो…जब मेने पूछा तो उसने मुझे बताया….
कमला एक पल के लिए कही खो सी गई….सरोज ने उसे कंधे से पकड़ कर हिलाया….”क्या हुआ क्या सोच रही है”
कमला: हां कुछ नही….
सरोज: पर एक बार फिर से सोच ले..वो तो नन्ही सी जान कही कुछ गड़ बाड़ ना हो जाय….
कमला: मा तुम चिंता मत कर बाकी सब मुझे पर छोड़ दो…
उसके बाद सरोज चाइ बनाने के लिए किचन में चली गई….कमला ने पहले अपने रूम में जाकर मोहित को उठया. और फिर ऊपेर रूम में जाकर साहिल और नेहा को उठाया….सब लोग फ्रेश होकर नीचे हाल में आ गए. चाइ पीने लगे….चाइ पीने के बाद नेहा और कमला बाहर सोफे पर बैठे बातें करने लगी….मोहित और साहिल ऊपेर छत पर जाकर पतंगबाज़ी देखने लगे….
नेहा: यार यहाँ तक तो आ गई…पर आगे कैसे होगा…
कमला: क्यों क्या हुआ…?
नेहा: यार मेरे कहने का मतलब है कि, अब साहिल मेरे साथ है, और मोहित तेरे साथ…अगर दोनो को कुछ पता चला कि, हम दोनो अपने बेटो को शेर कर रहे है तो…
कमला: तू घबरा मत…मा सब संभाल लेगी….
नेहा: यार में तो कब से तरस रही हूँ…समझ में नही आ रहा क्या करू…
कमला: यार तू फिकर ना कर आज ही तो आए है…अभी पूरा एक महीना बाकी है…तेरी फुद्दि में अभी खुजली शुरू हो गई है क्या…
नेहा: तू ऐसा ही समझ ले…
इतने में सरोज किचन में से अपने माथे से पसीना पोंछते हुए बाहर आती है..और उनके पास बैठते हुए बोलती है….”तुम दोनो के मज़े का पूरा इंतज़ाम कर रखा है मेने…जब मेरे पास आ ही गई हो. सिर्फ़ मज़े करो. फिकर ना करो…”
सरोज: कल में कल तुम्हे (कमला को) साहिल को खेतो में ले चलूंगी…किसी बहाने से…वहाँ पर भी अपनी एक कोठरी है ना….और फिर नेहा और मोहित को घर में खूब टाइम मिल जाएगा…और उधर दूसरी और तुम दोनो को भी….
कमला: मा तू सच में कमाल है…
सरोज: अच्छा अब छोड़ो मुझे खाना बनाना है…चलो तुम दोनो भी मेरी मदद कर दो….
नेहा: हां मंजी क्यों नही..
उसके बाद तीनो ने मिल कर रात के लिए खाना बनाया…धीरे -2 रात गहरी होने लगी…सब ने एक साथ मिल कर खाना खाया…और फिर नेहा कमला और सरोज ने मिल कर बर्तन सॉफ किए….
सरोज: आज तो खाना कुछ ज़्यादा ही खा लया….
कमला: हां मा मेरे पेट भी भरा हुआ है..
सरोज: चलो सब मिल कर थोड़ा घूम आते है…खाना हजम भी हो जाएगा…चलो चलते है…
इतने में तीनो बाहर आए. और कमला ने साहिल और मोहित से कहा..चलो बाहर थोडा टहल कर आते है….
मोहित: नही में नही जाउन्गा…आप हो आओ…मेरा मूड नही है…
कमला ने सरोज की तरफ देखा फिर नेहा की तरफ….”हां तुम हो आओ में भी बहुत थकि हुई हूँ” नेहा ने कमला की ओर मुस्कुराते हुए देख कर कहा. पर अब सिर्फ़ साहिल बचा था…नेहा मन ही मन ये दुआ कर रही थी, कि साहिल किसी तरह चला जाए…कमला भी नेहा के दिल की बात समझ गई. वो साहिल के पास गई…और अपनी एक बाजू साहिल के कंधे पर डाल कर घूमते हुए अपनी तरफ खेंचा….
जिससे साहिल का फेस कमला की कमीज़ के ऊपेर से उसके चुचियों पर रगड़ खा गया….”तू तो चले गा ना हमारे साथ…..” कमला ने उसके गाल को अपनी लेफ्ट चुचि पर दबाते हुए कहा….
साहिल: हां आंटी में भी चलूँगा…
कमला: (अपनी मा सरोज की ओर मुस्कुराते हुए देखते हुए) चलिए मा.
सरोज: हां हां चलो…
उसके बाद तीनो घर से निकल कर बाहर आ गई…जाते हुए सरोज ने मोहित को आवाज़ लगाई और बोली….”बेटा गेट के अंदर से कुण्डी लगा ले”
मोहित: जी नानी….
और मोहित ने जाकर गेट की कुण्डी लगा डी…..
पर उस टेल में एक ख़ास किसम के बिछु के जहर का इस्तेमाल किया गया था. और जो दवाई बनाई गई थी….वो उस जहर के असर को कम करने के लिए बनाई गई थी…अपने पिता से ही सरोज ने वो सब राज हासिल किए थे)
कमला: अच्छा मा ये तो बताओ कि मामा का लंड उस तैल और दवाई के इस्तेमाल से कितना बड़ा हो गया था….
सरोज: (शरमाते हुए)धात कैसी बातें करती है…वो भी मेरे भाई और अपने मामा के बारे में छी छी…
कमला: (हंसते हुए) अर्रे मा साइज़ बताने में क्या हो जाएगा…
सरोज: तो मेने कॉन सा देखा था उसका हथियार…
कमला: मा बताओ ना…
सरोज: शरमाते हुए) उसका हठयार पूरे 8 इंच लंबा हो गया था…और 4 इंच मोटा भी…
कमला: सी हाए मा इतना बड़ा मुन्सल हो गया था मामा का…पर तुम्हे कैसे पता चला….
सरोज: तेरे मामी ने मुझे बताया था जब नयी-2 बिहा कर आई थी..तब एक दिन वो मुझसे मज़ाक में बोली कि, क्या खिला कर आप इनको बड़ा किए हो…जब मेने पूछा तो उसने मुझे बताया….
कमला एक पल के लिए कही खो सी गई….सरोज ने उसे कंधे से पकड़ कर हिलाया….”क्या हुआ क्या सोच रही है”
कमला: हां कुछ नही….
सरोज: पर एक बार फिर से सोच ले..वो तो नन्ही सी जान कही कुछ गड़ बाड़ ना हो जाय….
कमला: मा तुम चिंता मत कर बाकी सब मुझे पर छोड़ दो…
उसके बाद सरोज चाइ बनाने के लिए किचन में चली गई….कमला ने पहले अपने रूम में जाकर मोहित को उठया. और फिर ऊपेर रूम में जाकर साहिल और नेहा को उठाया….सब लोग फ्रेश होकर नीचे हाल में आ गए. चाइ पीने लगे….चाइ पीने के बाद नेहा और कमला बाहर सोफे पर बैठे बातें करने लगी….मोहित और साहिल ऊपेर छत पर जाकर पतंगबाज़ी देखने लगे….
नेहा: यार यहाँ तक तो आ गई…पर आगे कैसे होगा…
कमला: क्यों क्या हुआ…?
नेहा: यार मेरे कहने का मतलब है कि, अब साहिल मेरे साथ है, और मोहित तेरे साथ…अगर दोनो को कुछ पता चला कि, हम दोनो अपने बेटो को शेर कर रहे है तो…
कमला: तू घबरा मत…मा सब संभाल लेगी….
नेहा: यार में तो कब से तरस रही हूँ…समझ में नही आ रहा क्या करू…
कमला: यार तू फिकर ना कर आज ही तो आए है…अभी पूरा एक महीना बाकी है…तेरी फुद्दि में अभी खुजली शुरू हो गई है क्या…
नेहा: तू ऐसा ही समझ ले…
इतने में सरोज किचन में से अपने माथे से पसीना पोंछते हुए बाहर आती है..और उनके पास बैठते हुए बोलती है….”तुम दोनो के मज़े का पूरा इंतज़ाम कर रखा है मेने…जब मेरे पास आ ही गई हो. सिर्फ़ मज़े करो. फिकर ना करो…”
सरोज: कल में कल तुम्हे (कमला को) साहिल को खेतो में ले चलूंगी…किसी बहाने से…वहाँ पर भी अपनी एक कोठरी है ना….और फिर नेहा और मोहित को घर में खूब टाइम मिल जाएगा…और उधर दूसरी और तुम दोनो को भी….
कमला: मा तू सच में कमाल है…
सरोज: अच्छा अब छोड़ो मुझे खाना बनाना है…चलो तुम दोनो भी मेरी मदद कर दो….
नेहा: हां मंजी क्यों नही..
उसके बाद तीनो ने मिल कर रात के लिए खाना बनाया…धीरे -2 रात गहरी होने लगी…सब ने एक साथ मिल कर खाना खाया…और फिर नेहा कमला और सरोज ने मिल कर बर्तन सॉफ किए….
सरोज: आज तो खाना कुछ ज़्यादा ही खा लया….
कमला: हां मा मेरे पेट भी भरा हुआ है..
सरोज: चलो सब मिल कर थोड़ा घूम आते है…खाना हजम भी हो जाएगा…चलो चलते है…
इतने में तीनो बाहर आए. और कमला ने साहिल और मोहित से कहा..चलो बाहर थोडा टहल कर आते है….
मोहित: नही में नही जाउन्गा…आप हो आओ…मेरा मूड नही है…
कमला ने सरोज की तरफ देखा फिर नेहा की तरफ….”हां तुम हो आओ में भी बहुत थकि हुई हूँ” नेहा ने कमला की ओर मुस्कुराते हुए देख कर कहा. पर अब सिर्फ़ साहिल बचा था…नेहा मन ही मन ये दुआ कर रही थी, कि साहिल किसी तरह चला जाए…कमला भी नेहा के दिल की बात समझ गई. वो साहिल के पास गई…और अपनी एक बाजू साहिल के कंधे पर डाल कर घूमते हुए अपनी तरफ खेंचा….
जिससे साहिल का फेस कमला की कमीज़ के ऊपेर से उसके चुचियों पर रगड़ खा गया….”तू तो चले गा ना हमारे साथ…..” कमला ने उसके गाल को अपनी लेफ्ट चुचि पर दबाते हुए कहा….
साहिल: हां आंटी में भी चलूँगा…
कमला: (अपनी मा सरोज की ओर मुस्कुराते हुए देखते हुए) चलिए मा.
सरोज: हां हां चलो…
उसके बाद तीनो घर से निकल कर बाहर आ गई…जाते हुए सरोज ने मोहित को आवाज़ लगाई और बोली….”बेटा गेट के अंदर से कुण्डी लगा ले”
मोहित: जी नानी….
और मोहित ने जाकर गेट की कुण्डी लगा डी…..