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Guest
फ़िर मेरी तरफ देखकर हल्के से मुश्कुराई, और कहा-“कीप इट अप…”
मैंने मुश्कुराकर एक बार फ़िर उसकी होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके खूबसूरत लबों को एक बार फ़िर चूसने लगा। मुझे उसपर दिल से प्यार आ रहा था। मैं एक मिनट की किसिंग के बाद में अपने लण्ड को एक और झटका दिया और यह एक जोरदार झटका था, जिससे मेरे लण्ड अब सिर्फ़ 1…” ही बाहर रह गया था बाकी 8…” रजनी की कुँवारी चूत की गहराइयों में दाखिल हो चुका था।
रजनी ने एक हल्की सी चीख मारी और अपने लब मेरी लबों से छुड़ा लिए। अब वो अपना सिर दोनों तरफ जोर-जोर से मारते हुये गहरी-गहरी साँस ले रही थी। रजनी अपने दर्द को बहुत ही बर्दास्त कर रही थी। उसकी आँखों में आँसू आ गये थे। मैं और उसके दोनों हाथ मेरे कंधों पर अपने नाखूनों का दबाओ डाल रहे थे, जिससे मुझे भी तकलीफ का अहसास हो रहा था। मगर शायद रजनी को इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि उसके नाखून मेरे कंधों मे गढ़ चुके हैं।
मैं अपने को कोई अहमियत ना देते हुए रजनी के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरते हुए बहुत ही प्यार से चूमने लगा। मैं कभी उसकी आँखों को चूम रहा था, तो कभी उसका गालों को।
धीरे-धीरे रजनी नॉर्मल होती गई। रजनी ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा-“बहुत जालिम हो बेदर्दी… यही दर्द देने के लिए तड़प रहे थे ना तुम? इसी दर्द के लिए तुमने मेरे सारे आदमी मार दिए?”
जिसे तुम दर्द का नाम दे रही हो उसे मैं अपनी मुहब्बत की इंतिहा समझता हूँ। इस दर्द के बाद जो तुम्हें जिंदगी का सुख और मजा मिलने वाला है, उसके आगे तुम्हें मेरा सब कुछ किया कम ही लगेगा…” यह कहकर मैंने अपने लण्ड को थोड़ा सा बाहर निकाला और फ़िर आराम से एक बार फ़िर अंदर कर दिया।
जिसके कारण रजनी के चहेरे पर दर्द को बर्दास्त का करने का भाव उभर आया। मैं आराम-आराम से अब हिलने लगा। चन्द मिनटों की रगड़ और हिलने के बाद रजनी के मुँह से दर्द के कारण निकलने वाली कराहें अब मजे की कारण निकलने वाली सिसकियों में बदलने लगी, जिसका साथ-साथ मेरी स्पीड भी बढ़ने लगी। अब रजनी इस दर्द को एंजाय करने लगी। मैं रजनी के ऊपर से उठ गया और उसकी टाँगों को दोनों हाथों में पकड़कर उसकी रानी को अपने राज से समलाने लगा। अब मेरे लंड अपनी जड़ तक रजनी की रानी में जा रहा था।
अब रजनी ने भी धीरे-धीरे नीचे से उछल-उछलकर मेरे लंड को लेने लगी, और मैंने अपनी स्पीड को और बढ़ाना शुरू कर दिया। 10 मिनट की चुदाई में ही रजनी एक बार फ़िर झटके लेने लगी, और उसका जिश्म एक बार फ़िर अकड़ने लगा, उसका खुद पर से कंट्रोल खतम हो गया, और उसके मुँह से अजीब आवाजें निकलने लगी। कुछ लम्हों की मस्ती के बाद उसका जिश्म ढीला पड़ चुका था। मगर मैंने उसको खातिर में ना लेटे हुये अपनी स्पीड में कोई कमी नहीं की।
चन्द मिनट की मेहनत के बाद रजनी एक बार फ़िर मेरा साथ देने लगी। अब वो भी नीचे से जोर-जोर से अपनी रानी को मेरे लण्ड पर मार रही थी, उसके मुँह से बेतरतीब अल्फाज निकल रहे थे।– “फाड़ दो… इसे फाड़ दो…जिसने तुम्हें तड़पाया है राज, उसे फाड़ दो। अह्ह मर गई अह्ह्ह… इस दर्द में इतना मजा है। अगर मुझे पहले पता होता तो हाहाहाहा…” वो जोर-जोर से हँसने लगी-“तो तुम्हें मेरे आदमी मारने की जरूरत नहीं पड़ती। मैं तुम्हारे आदमी मारकर तुमसे यह मजे लेती…”
मैं उसकी बेतरतीब बातें सुनकर मुश्कुरा रहा था।
यह अल्फाज मेरे लिए नये नहीं थे, जो-जो औरत मेरे नीचे आई थी वो ऐिे ही अल्फाज अदा करती थी।