• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

जहन्नुम की अप्सरा

१८

‘‘ओ गधे....आर्टामोनॉफ़!’’ मोरीना चीख़ी! ‘‘रस्सी को काटता क्यों नहीं।’’

‘‘ओ....हाँ....ठीक!’’ आर्टामोनॉफ़ इस तरह उछल पड़ा जैसे अभी तक सोता रहा हो। दूसरे पल में वह एक कुर्सी पर खड़ा हो कर रस्सी काट रहा था।

इरशाद के हाथ से निकला हुआ रिवॉल्वर अब भी ज़मीन पर पड़ा हुआ था। वह खिसकता हुआ उस तक पहुँच गया।

अभी रस्सी नहीं कटी थी कि एक फ़ायर हुआ....और आर्टामोनॉफ़ कुर्सी से उछल कर नीचे ज़मीन पर आ गिरा....झटका जो लगा तो आधी कटी हुई रस्सी टूट गई और इस चीज़ ने मोरीना की जान बचा ली, वरना दूसरी गोली उसके सीने में घुस जाती....वह भी आर्टामोनॉफ़ ही के क़रीब गिरी....लेकिन आर्टामोनॉफ़ फिर नहीं उठ सका। वह दम तोड़ रहा था, क्योंकि गोली उसके माथे में लगी थी।

इरशाद का ठहाका बड़ा ख़ौफ़नाक था। लेकिन उसने तीसरा फ़ायर नहीं किया।

उसके हाथ में रिवॉल्वर देख कर किसी की हिम्मत न पड़ी कि वह आगे बढ़ता। इरशाद दरवाज़े के क़रीब दीवार से टेक लगाये बैठा था उसकी आँखें लाल थीं और देखने का अन्दाज़ ऐसा था जैसे उसे कुछ दिखाई न दे रहा हो।

कटी हुई रस्सी का फन्दा अब भी मोरीना की गर्दन में था....और शायद अब उसे इसका एहसास ही नहीं रह गया था उसकी आँखों में इस वक़्त बड़ी ख़ौफ़नाक क़िस्म की चमक दिख रही थी....

‘‘कुतिया सुनो!’’ अचानक इरशाद गुर्राया। ‘‘यहाँ इस मुल्क में तुम्हारे घटिया इरादे कभी पूरे नहीं हो सकेंगे। यहाँ की फ़िज़ा में ऐसे लोग ज़िन्दा ही नहीं रह सकते जो ख़ुदा के वजूद से ख़ाली हों और अब तुम भी जाओ....’’

इरशाद ने जवाब दिया, लेकिन मोरीना इससे पहले ही ज़मीन पर गिर चुकी थी। उसकी चीख़ ने इरशाद को धोखे में डाल दिया। वह नहीं देख सका कि वह ज़मीन पर गिर कर मुर्दा आर्टामोनॉफ़ की जेबें टटोल रही है।

‘‘और तुम सब!’’ इरशाद ने मोरीना के दूसरे साथियों से कहा। ‘‘अपने हाथ ऊपर उठाये रखो। यह न समझना कि इस रिवॉल्वर में अब सिर्फ़ दो ही गोलियाँ रह गयीं हैं। मेरी जेब में अभी एक और रिवॉल्वर है....यह देखो,’’ उसने दूसरा रिवॉल्वर जेब से निकाल कर उन्हें दिखाया।

मोरीना ने मुर्दा आर्टामोनॉफ़ की जेब से एक अजीब-सी चीज़ निकाली थी उसने लेटे-ही-लेटे उसका रुख़ इरशाद की तरफ़ कर दिया।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

१९

इमरान सारे दरवाज़ों की मज़बूती के बारे में इत्मीनान करने के बाद मेन गेट की तरफ़ चल पड़ा। वह बहुत बेसब्री से कैप्टन फ़ैयाज़ का इन्तज़ार कर रहा था।

वह अभी मेन गेट तक पहुँचा भी न था कि उसने फ़ायरों की आवाज़ें सुनीं जो अन्दर के किसी हिस्से से आती मालूम होती थीं।

वह उलटे पैरों वापस हुआ....कुछ दूर यूँ ही चलता रहा फिर दौड़ने लगा। अब उसे अपनी ग़लती का एहसास हुआ था उसे पहले ही उन दोनों देसियों का इन्तज़ाम कर लेना चाहिए था। इस बार के दोनों फ़ायरों का यही मतलब हो सकता है कि वे दोनों ख़त्म कर दिये गये। फिर जैसे ही वह उस कमरे के दरवाज़े तक पहुँचा उसने तीसरे फ़ायर की आवाज़ सुनी और साथ ही मोरीना की चीख़ भी सुनाई दी।

दूसरे ही पल में उसकी आँख दरवाज़े की झुर्री से जा लगी।

सामने सात-आठ आदमी अपने हाथ ऊपर उठाये खड़े थे....आर्टामोनॉफ़ की लाश भी दिखाई दी जिसके सिर के पास बहुत-सा ख़ून ज़मीन पर फैला हुआ था....और उसने मोरीना को उसकी जेब से कोई चीज़ निकालते देखा। इरशाद उसे नहीं दिखाई दिया, क्योंकि वह उसी दरवाज़े के क़रीब दीवार से मिला हुआ बैठा था। बेहोश देसी अब भी कुर्सी में जकड़ा हुआ था। इमरान ने अन्दाज़ा कर लिया कि दूसरा देसी यक़ीनन ज़िन्दा है और उसी ने सामने वाले आदमियों के हाथ उठवा रखे हैं।

लेकिन मोरीना की हरकत उसकी समझ में न आ सकी। यह बात तो पहले ही उस पर साफ़ हो गई थी कि फ़ायर मोरीना पर किया गया था, क्योंकि चीख़ उसी की थी और उसके अलावा और कोई दूसरी औरत कमरे में नहीं थी....

वह समझा था कि शायद मोरीना मुर्दा आर्टामोनॉफ़ की जेब से रिवॉल्वर निकाल रही थी और बेख़बरी में उस आदमी पर फ़ायर कर देगी जिसने उसके साथियों के हाथ उठवा रखे हैं।

लेकिन उसकी उम्मीद के ख़िलाफ़, मोरीना ने उसकी जेब से काले रंग का एक चपटा-सा डिब्बा निकाला। जिसकी लम्बाई छै इंच से ज़्यादा न रही होगी और चौड़ाई ज़्यादा-से-ज़्यादा तीन चार इंच। फिर उसने उसका एक सिरा दरवाज़े की तरफ़ घुमाते देखा।

अचानक एक ख़याल बिजली की-सी तेज़ी के साथ उसके ज़ेहन में आया और वे अचानक चीख़ने लगा। ‘‘रूशी....रूशी डार्लिंग....तुम कहाँ हो....ये आर्टामोनॉफ़ कुत्ता तुम्हें कहाँ ले गया।’’

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
२०

मोरीना ने इमरान की आवाज़ सुनी और डिब्बा उसके हाथ से गिर गया। इरशाद भी उसकी आवाज़ पर चौंक पड़ा था। अब उसे इसका एहसास भी हुआ कि मोरीना ज़िन्दा है और उसने उस काली-सी चीज़ की भी एक झलक देखी जो मोरीना के हाथ से गिरी। वह भी उसे रिवॉल्वर समझा।

‘‘खड़ी हो जाओ मोरीना, वरना गोली मार दूँगा।’’ इरशाद चीख़ा।

मोरीना बौखला कर खड़ी हो गयी। डिब्बा आर्टामोनॉफ़ की लाश पर पड़ा हुआ था। ‘‘अपने साथियों के हाथ उनके रूमालों और टाइयों से बाँध दो।’’ इरशाद बोला और फिर उसने रिवॉल्वर का रुख़ दरवाज़े की तरफ़ करते हुए कहा। ‘‘तुम जो कोई भी हो, बाहर ही ठहरो। अगर अन्दर आये तो मौत मिलेगी।’’

‘‘मैं अपनी बीवी की तलाश में हूँ।’’ इमरान ने रो देने जैसे अन्दाज़ में अंग्रेज़ी में कहा। ‘‘ये लोग उसे बहका कर यहाँ लाये हैं।’’

फिर उर्दू में बोला। ‘‘शाबाश, घबराना नहीं। मैं सी.आई.डी. का आदमी हूँ....हो सके तो वह डिब्बा....मगर नहीं, उस पर सिर्फ़ नज़र रखो। कोई उठाने न पाये....और अपना रिवॉल्वर हटा लो।’’

‘‘मैं कैसे यक़ीन कर लूँ।’’ धीमी आवाज़ में जवाब मिला।

‘‘उसकी गर्दन में मैंने ही फन्दा डाला था।’’

मोरीना किसी डरावनी हिरनी की तरह इरशाद को घूर रही थी।

इरशाद ने दूसरे रिवॉल्वर का हत्था मार कर चटख़नी गिरा दी और इमरान इस तरह अन्दर घुसता चला गया जैसे बेवक़्त दरवाज़ा खुलने की बिना पर अपना बैलेंस बराबर न रख सका हो। और फिर वह आर्टामोनॉफ़ की लाश पर गिर पड़ा....उस पर से उठा तो डिब्बा उसकी जेब में जा चुका था।

‘‘क्या तुम सब केंचुए हो गए हो।’’ अचानक मोरीना ने अपने आदमियों को ललकारा....और फिर ऐसा लगा जैसे उन सब की बेहोशी ख़त्म हो गयी हो।

दो फ़ायर हुए। लेकिन वे आँधी की तरह इरशाद पर गिरे थे। इरशाद के फ़ायर ख़ाली गये थे। इमरान ने मोरीना की गर्दन में लटकी हुई रस्सी को पकड़ कर झटका दिया और वह उस पर आ गिरी। इमरान उसे उसके साथियों की तरफ़ घुमाता हुआ चीख़ा। ‘‘हट जाओ। अलग हट जाओ, वरना मैं इसे मार डालूँगा।’’

उन्होंने उसकी तरफ़ देखा मगर परवाह न की। इरशाद ने फिर फ़ायर किया। एक ज़ख़्मी हो कर गिरा....लेकिन कब तक....उन्होंने उसे जल्द ही बेबस करके दोनों रिवॉल्वर अपने क़ब्ज़े में कर लिये।

दो रिवॉल्वरों की नालें इमरान की तरफ़ उठी हुई थीं और वह मोरीना की गर्दन दबोचे हुए कह रहा था, ‘‘फ़ायर करो। इस तरह पहले ये मरेगी बाद को मेरी बारी आयेगी....रिवॉल्वर ख़ाली करके मेरी तरफ़ फेंक दो, वरना मैं इसका गला घोंटता हूँ।’’

इमरान मोरीना समेत पीछे की तरफ़ खिसकता हुआ दीवार से आ लगा था और अब उसे इत्मीनान हो गया था कि अगर वह उस पर फ़ायर करेंगे तो पहले मोरीना ही शिकार होगी।

‘‘तुम बिलकुल गधे हो।’’ इरशाद उर्दू में बड़बड़ा रहा था। ‘‘सारा खेल बिगाड़ दिया।’’

‘‘अगर मैं खेल न बिगाड़ता तो तुम्हारा खेल कभी का ख़त्म हो चुका होता।’’

अचानक कई दौड़ते हुए क़दमों की आवाज़ें इमारत में गूँजने लगीं। फिर वे लोग सँभलने भी न पाये थे कि पुलिस के सिपाही उस कमरे में घुस गये दो-तीन फ़ायर फिर कमरे में गूँजे, लेकिन आने वाले उन विदेशियों से कहीं ज़्यादा थे। दो कॉन्स्टेबल ज़ख़्मी ज़रूर हो गये, लेकिन मुजरिमों में से एक भी बच कर न निकल सका।

फिर वे इमरान की तरफ़ मुड़े और इमरान ज़ोर से चीख़ा। ‘‘ऐ ख़बरदार, इधर परदा है।’’

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
२१

अभी चार बजे थे कि इमरान की आँख खुल गई। कोई फ़्लैट का दरवाज़ा पीट रहा था। इमरान की ललकार पर जो आवाज़ आयी वह कैप्टन फ़ैयाज़ के अलावा और किसी की नहीं हो सकती थी।

इमरान ने उठ कर दरवाज़ा खोला।

‘‘किस मुसीबत में फँसा दिया तुमने!’’ फ़ैयाज़ ने झल्लायी हुई आवाज़ में कहा।

‘‘क्यों! क्या हुआ....?’’

‘‘वह आदमी जिसका नाम तुमने इरशाद बताया था....वह तो पागल है। पिछले साल पागलख़ाने में भी रह चुका है। कई पुलिस अफ़सरों ने उसकी तस्दीक़ की है वह अब भी पागल है और दिन-रात सड़कों पर मारा-मारा फिरता है!’’

‘‘अच्छा दूसरा ज़ख़्मी आदमी!’’ इमरान ने पूछा।

‘‘वह तो वापसी पर रास्ते में ही दम तोड़ गया। मोरीना कहती है कि इरशाद ने ख़ुद को एशियाई डांसों का माहिर बता कर उसकी पार्टी को इस इमारत में बुलाया था और वादा किया था कि वह उसे ऐशिया के कुछ पुराने डांसों के बारे में बतायेगा। उसका बयान है कि जब वह कमरे में पहुँची तो उसे और उसके साथियों को एक बेहोश ज़ख़्मी आदमी कुर्सी में बँधा हुआ दिखाई दिया। फिर इरशाद ने उन सब से कहा कि अगर उन्होंने उसकी म़र्जी के ख़िलाफ़ किया तो उनका भी उसी आदमी का-सा हश्र होगा। उसने उन्हें धमकाने के लिए दो रिवॉल्वर निकाल लिये थे। फिर मोरीना से दूसरे कमरे में अकेला चलने के लिए कहा। उस पर उसके साथियों को ग़ुस्सा आ गया। हंगामा हुआ और उसके दो साथी इरशाद की गोलियों का निशाना बन गये और पुलिस पर भी उसी ने गोली चलायी थी।’’

‘‘और तुम इतने में ही बोर हो गये।’’ इमरान अँगड़ाई ले कर भर्रायी हुई आवाज़ में बोला।

‘‘क्या तुम्हारे पास उनके ख़िलाफ़ कोई ठोस सबूत है?’’

‘‘हाँ, मोरीना एक ऐसे मुल्क की जासूस है जो सारी दुनिया पर अपनी हुकूमत चाहता है।

‘‘साबित कर सकोगे....?’’

‘‘क्यों नहीं....! ग़ज़ाली दक्षिण अफ्रीका की सीक्रेट सर्विस का आदमी था।’’ इमरान ने कहा और मेज़ की दराज़ से ट्रेसिंग क्लाथ का वह टुकड़ा निकाल कर फ़ैयाज़ के सामने डाल दिया जो ग़ज़ाली के कोट के अन्दर से निकला था। फ़ैयाज़ उसे देखने लगा।

इस अँगूठी का मतलब यही था कि ज़रूरत पड़ने पर कोट उधेड़ा जा सके। देखो इस तहरीर के नीचे उस डिपार्टमेंट की सरकारी मुहर भी मौजूद है जिससे ग़ज़ाली का ताल्लुक़ था और वहाँ की हुकूमत से इसकी तस्दीक़ आसानी से कर सकते हो। ख़ुद ग़ज़ाली को इस बात का डर था कि मोरीना का पीछा करने के सिलसिले में वह अपनी ज़िन्दगी भी खो सकता है। इसलिए उसने ये तहरीर अपने कोट में इस तरह छुपा रखी थी और उसके मरने के बाद वह अँगूठी ही इस तहरीर तक दूसरों को पहुँचा सकती थी। पूरी तहरीर पढ़ो। ख़ुद ही साफ़ हो जायेगा। ग़ज़ाली काफ़ी दिनों से उसके पीछे पड़ा रहा है। वह इस बात पर भी शक करता है कि मोरीना इतालवी है। वह लिखता है कि चाहे मेरी ज़िन्दगी ही क्यों न ख़त्म हो जाये, मैं मोरीना के ख़िलाफ़ ठोस क़िस्म के सबूत इकट्ठा किये बग़ैर चैन से नहीं बैठूँगा। वह एक ऐसे मुल्क की जासूस है जो एक ख़ास क़िस्म के इंक़लाब के ज़रिये सारी दुनिया पर अपनी हुकूमत के ख़्वाब देख रहा है। मोरीना सारी दुनिया में अपने फ़न का मुज़ाहिरा करती फिरती है। हालाँकि उसका असल मक़सद यह है कि वह सारी दुनिया में अपने एजेंट बनाती फिरे। इससे मालूम होता है कि ग़ज़ाली ने भी मोरीना के साथ कई मुल्कों की सैर की है और प्यारे फ़ैयाज़....और क्या-क्या बताऊँ। मैं तो इस केस में सिर्फ़ मक्खियाँ मारता रहा हूँ। यह दरअसल ग़ज़ाली और इरशाद का केस है। उस शहीद का केस है जिसके जिस्म से उसकी ज़िन्दगी ही में काफ़ी ख़ून निकाल लिया गया था।

इमरान ने इरशाद और उसके साथी की बात दोहराते हुए पूछा। ‘‘इरशाद कहाँ है?’’

‘‘हवालात में! हालाँकि वह चीख़ रहा था कि वह पागल नहीं है। वह बहुत अहम राज़ों का खुलासा करेगा। मगर एस.पी. ने उसे हवालात में डलवा दिया। मोरीना इस वक़्त भी एस.पी. के दफ़्तर में मौज़ूद है।’’

‘‘इरशाद बहुत कुछ बतायेगा। वह इस क़ाबिल है कि उसकी पूजा की जाये। फ़ैयाज़, वह उनसे बेहतर है जो ख़ुद को मुल्क और क़ौम का मोहब्बती कहने के बावजूद भी उनके लिए कुछ नहीं कर सकते।’’

‘‘और कोई सबूत! इमरान....जल्दी करो प्यारे वक़्त कम है। एस.पी. मुझ पर ठहाका लगा रहा होगा।’’

‘‘और वह टुकड़े!’’ इमरान कुछ सोचता हुआ बोला। ‘‘जो माथे पर चुभे हुए थे, उनके फेंकने का तरीक़ा एक दिलचस्प ईजाद है।’’

इमरान दीवार की तरफ़ बढ़ा जहाँ उसका कोट टँगा हुआ था। फिर जेब से वह काले रंग का चपटा-सा डिब्बा निकाल कर फ़ैयाज़ की तरफ़ बढ़ाता हुआ बोला। ‘‘यह एक छोटी-सी प्रेशर मशीन है। इधर आओ तुम्हें दिखाऊँ।’’

इमरान ने डिब्बे को मेज़ पर रख कर उसे खोल डाला। ‘‘ये देखो इस बटन को दबाने से एक छोटा-सा ट्रिगर बाहर निकल आता है और यह देखो ये छोटी-छोटी बैटरियाँ....ट्रिगर दबाते ही ये बैटरियाँ मशीन से कनेक्ट हो जाती हैं। मशीन चल पड़ती है....और इस सूराख़ से टुकड़ों की बौछार निकलने लगती है। यह देखो, इसमें ये ज़हरीले टुकड़े काफ़ी तादाद में मौजूद है।’’

‘‘बहुत अच्छा।’’ फ़ैयाज़ इमरान की पीठ ठोंकता हुआ बोला। ‘‘अब हमने मैदान मार लिया।’’

‘‘इसे ले जाओ।’’ इमरान ने कहा। ‘‘लेकिन एहतियात से रखना....वरना तुम्हारी बीवी तलाक़ लेने से पहले ही आज़ाद हो जायेगी और मेरी फ़र्म का बेकार ही में नुक़सान होगा।’’

‘‘मगर इमरान! तुम ग़ज़ाली को कैसे जान गये थे?’’ फ़ैयाज़ ने पूछा।

‘‘सिर्फ़ इत्तफ़ाक़! वह ख़ुद ही मुझे मोरीना का आदमी समझ कर मुझसे भिड़ गया था और उसने मोरीना सलानियो का हवाला भी दिया था। फिर उसे अपनी ग़लतफ़हमी का एहसास हुआ, लेकिन भला मैं कब उसे छोड़ने वाला था। मैंने उसका पीछा करके उसके रहने-सहने का पता लगा लिया। इस तरह दूसरी सुबह मैं उसकी लाश पहचानने में कामयाब हुआ।’’

इमरान ने लेडी तनवीर वाले वाक़ये का बयान नहीं किया।

‘‘और आर्टामोनॉफ़!’’ फ़ैयाज़ ने पूछा।

‘‘आर्टामोनॉफ़....हाँ ....वह सिगरेट की एक ख़ाली डिबिया की वजह से पकड़ा गया?

इमरान ने दूसरा वाक़या भी दोहराया....और कुछ देर खामोश रहने के बाद बोला। ‘‘अगर वह इस बीमारी का शिकार न होता तो इमरान ज़िन्दगी भर सिर पटकता रह जाता, क्योंकि वह मोरीना सलानियो का नाम भी भूल गया था। यह एक बहुत ख़राब आदत है। बेकार में अपने दस्तख़त बनाना। मैंने अक्सर तुम्हें भी इस तरह हरकत करते हुए देखा है। तुम अक्सर अपने नाख़ूनों और हथेली पर अपने दस्तख़त बनाया करते हो।’’

इमरान कुछ देर ख़ामोश रह कर फिर बोला। ‘‘उधर ग़ज़ाली ने अपने नोट में मोरीना की नैशनैलिटी के बारे में शक ज़ाहिर किया है। वह लिखता है कि उसका नाम इतालवियों जैसा है, लेकिन वह हक़ीक़त में इतालवी नहीं मालूम होती। इसलिए मैंने इसका तजरुबा किया और मुझ पर हक़ीक़त खुल गयी। वह इतालवी नहीं जर्मन है।’’

इमरान ने चमगादड़ फेंकने वाली हरकत बयान की और कैप्टन फ़ैयाज़ बेतहाशा हँसने लगा। वह इस वक़्त ज़रूरत से ज़्यादा ख़ुश दिख रहा था।

‘‘लेकिन इमरान!’’ उसने थोड़ी देर बाद कहा। ‘‘रिपोर्ट फिर भी अधूरी रहेगी। आख़िर मैं इसके बारे में क्या लिखूँगा कि मुझे ग़ज़ाली के कमरे का पता कैसे मालूम हुआ था?’’

‘‘ओ हाँ!’’ इमरान कुछ सोचने लगा, फिर बोला। ‘‘इरशाद ही की वजह से ये प्रॉब्लम हल हो जायेगी। तुम शुरू ही में उसे अपनी रिपोर्ट में जगह दो। इस तरह कि उसने तुम्हारे पास आ कर मोरीना की असल शख़्सियत पर रोशनी डाली और इसका भी इक़रार किया कि वह ख़ुद भी उसी पार्टी का एक मेम्बर है। लेकिन तुम्हें उसके बयान पर यक़ीन नहीं आया....इस पर उसने ग़ज़ाली का हवाला दे कर उसका पता बताया और यह भी कहा कि वह दक्षिण अफ्रीका की सीक्रेट सर्विस का आदमी है और मोरीना का पीछा कर रहा है....जिस रात को यह बातचीत हुई, उसी की सुबह को ग़ज़ाली की लाश पायी गयी....और उसके कोट से बरामद होने वाली अँगूठी ने तुम्हें उसके कोट को उधेड़ डालने पर मजबूर कर दिया। इस तरह तुम्हें ग़ज़ाली का लिखा नोट मिला। फिर तुम इरशाद के बताये हुए पते पर ग़ज़ाली के घर की तलाश में रवाना हो गये वहाँ तुम्हें सफ़ाई दिखी। लेकिन वह सिगरेटों का ख़ाली पैकेट जिस पर आर्टामोनॉफ़ के दस्तख़त थे। हाँ, शायद समझ गये होगे....फिर तुम उस सिगरेट के पैकेट से मोरीना सलानियो तक पहुँच गये....! इरशाद फिर कल शाम को तुम्हारे पास आया और इत्तला दी कि आज रात को सुरैया लॉज पर छापा मारा जाये तो मुजरिम ऐन मौक़े पर गिरफ़्तार किये जा सकते हैं, क्योंकि वह स्थानीय पार्टी के एक शख़्स को उसकी एक ग़लती की बिना पर सज़ा देंगे....इसलिए तुमने छापा मारा और कामयाब हो गये....! बस अब तुम जा कर इरशाद को पक्का कर लो और हाँ, इरशाद से यह भी कहलवा देना कि उसे ग़ज़ाली की शख़्सियत की जानकारी मोरीना ही से हुई थी। मोरीना ने उससे कहा था कि वह ग़ज़ाली से होशियार रहे।’’

‘‘जियो! इमरान जियो!’’ फ़ैयाज़ एक बार फिर उसकी पीठ ठोंकने लगा। ‘‘बोलो....क्या माँगते हो....जो कुछ कहोगे मिल जायेगा....बोलो क्या माँगते हो!’’

‘‘दस ऐसी मालदार औरतें जो अपने शौहरों से तलाक़ चाहती हों।’’ इमरान ने संजीदगी से कहा और फ़ैयाज़ हँसने लगा।

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
 
२२

अब बाक़ी बचे थे सर तनवीर और लेडी तनवीर! इमरान को उनकी फ़िक्र थी और अब वह सोच रहा था कि किस तरह उनसे राज़ उगलवाया जाये।

ठीक एक बजे दिन को शाम के अख़बार बाज़ार में आ गये। उनमें ग़ज़ाली और मोरीना सलानियो की दास्तानें छपी हुई थीं। इमरान ने सोचा कि बस, यही वक़्त मुनासिब है, इसलिए वह सर तनवीर के दफ़्तर में जा धमका....! सर तनवीर अख़बार ही देख रहा था इमरान का सामना होते ही उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं।

‘‘और सुनाइए जनाब, क्या ख़बरें हैं?’’ इमरान बड़ी बेतकल्लुफ़ी से मेज़ पर हाथ मारते हुए बोला।

‘‘तुम....बग़ैर....इजाज़त....यहाँ...!’’

‘‘उसकी परवाह न कीजिए। अख़बार मैंने भी पढ़ा है और इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि यहाँ ग़ज़ाली की शख़्सियत में दिलचस्पी लेने वाले सिर्फ़ मोरीना की पार्टी ही के आदमी हो सकते हैं।’’

‘‘नहीं....यह ज़रूरी नहीं!’’ सर तनवीर की साँस तेज़ी से चलने लगी थी।

‘‘लेकिन मेरी शराफ़त भी देखिए कि मैंने अब तक पुलिस को आपके बारे में खबर नहीं दी और आप कह रहे थे कि मैं ब्लैकमेलर हूँ।’’

‘‘तुम क्या चाहते हो?’’ सर तनवीर ने फँसी-फँसी आवाज़ में कहा।

‘‘हक़ीक़त बता दीजिए। बस, इतना ही काफ़ी है।’’

‘‘इससे तुम्हें क्या फ़ायदा पहुँचेगा?’’

‘‘बताने से आपको क्या नुक़सान पहुँचेगा।’’ इमरान ने सवाल किया।

सर तनवीर कुछ सोचने लगे। इमरान ने महसूस किया कि उसका चेहरा फिर ठीक होता जा रहा है और आँखों की चमक भी वापस आ गयी है।

तभी सर तनवीर उठता हुआ बोला। ‘‘अच्छा, तुम बैठो....मैं लेडी तनवीर की मौजूदगी में कुछ बता सकूँगा....क्योंकि उसका ताल्लुक़ उन लोगों से ज़्यादा है।’’

‘’तो आप चले कहाँ!’’ इमरान उठता हुआ बोला। लेकिन इतनी देर में सर तनवीर दरवाज़े से निकल कर उसे बाहर से बन्द कर चुका था....इमरान के होंटों पर शरारती मुस्कुराहट थी।

दूसरी तरफ़ दूसरे कमरे में सर तनवीर फ़ोन पर झुका हुआ था और कह रहा था। ‘‘सायरा, सायरा....मैंने उस बोगस डॉक्टर को अपने दफ़्तर में बन्द कर लिया है। तुम इमरान को साथ ले कर फ़ौरन आ जाओ....आओ....जल्दी करो....बहुत जल्दी!’’

वह उस कमरे से निकल कर दफ़्तर के सामने आ गया। चपरासी को उसने पहले ही भगा दिया था।

इमरान बड़े सुकून से अन्दर बैठा रहा। और उसके इस सुकून पर सर तनवीर को भी हैरत हो रही थी। आधा घण्टा बीतने के बाद लेडी तनवीर बौखलायी हुई वहाँ आयी....

‘‘वह तो....वह तो....नहीं मिल सका डार्लिंग।’’ उसने हाँफते हुए कहा। ‘‘वह डॉक्टर कहाँ है?’’

सर तनवीर ने दरवाज़े की तरफ़ इशारा किया। लेडी तनवीर पंजों के बल ऊपर उठ कर शीशों से अन्दर झाँकने लगी....फिर उसने एक लम्बी साँस ली और पलट कर पूछा, ‘‘क्या यही है?’’

सर तनवीर ने ‘हाँ’ में सर हिलाया और लेडी तनवीर बोली। ‘‘दरवाज़ा खोल दो।’’

‘‘क्यों? क्यों?’’

लेडी तनवीर ने कोई जवाब न दिया। वह बहुत ज़ोर से हँस रही थी। फिर उसने ख़ुद ही दरवाज़ा खोल दिया। सर तनवीर उसके इस तरह हँसने पर बुरी तरह झल्ला गया। इमरान लेडी तनवीर को देख कर खड़ा हो गया था।

लेडी तनवीर पर हँसी का दौरा पड़ गया था। इमरान भी उनके साथ ठहाका लगाने लगा। लेकिन वह पागलों की तरह हँस रहा था....

‘‘ओह, यह क्या बदतमीज़ी है?’’ अचानक सर तनवीर ज़ोर से गरजा।

लेडी तनवीर ख़ामोश हो गयी। लेकिन इमरान बराबर हँसता रहा और वह इस तरह पेट दबा-दबा कर हँस रहा था जैसे साँस न समा रही हो।

लेडी तनवीर जैसी संजीदा औरत भी दोबारा हँस पड़ने पर मजबूर हो गयी।

आख़िर उसने बड़ी मुश्किल से कहा। ‘‘इमरान....यही.... है।’’

‘‘क्या....इमरान!’’ सर तनवीर ने हैरत से कहा....और फिर वह भी हँसने लगा।

इमरान अचानक संजीदा हो गया। बिलकुल ऐसा ही मालूम हुआ जैसे अचानक कोई मशीन चलते-चलते बन्द हो गयी हो....इस पर उन दोनों को और ज़्यादा हँसी आयी।

थोड़ी देर बाद माहौल शान्त हुआ और इमरान ने फिर मतलब की बात छेड़ दी।

और अब लेडी तनवीर को बताना ही पड़ा। लेकिन उसने इमरान से वादा ले लिया कि वह उसका राज़ ख़ुद अपने तक ही रखेगा।

‘‘नहीं रखेगा तो हम उसे पकड़ कर पीटेंगे।’’ सर तनवीर ने कहा। ‘‘क्या रहमान साहब के लड़के पर मेरा इतना भी हक़ न होगा।’’

फिर सर तनवीर ने बताया कि दोनों की शादी अफ्रीका में हुई थी....और लेडी तनवीर निचले तबक़े की और आवारा औरत थी....लेकिन सर तनवीर को उससे मोहब्बत हो गयी। लेडी तनवीर भी उसे चाहने लगी और उसने वादा किया कि वह अपनी ज़िन्दगी एक़दम बदल देगी। इसलिए दोनों शादी के बन्धन में बँध गये यहाँ किसी को भी लेडी तनवीर की असलियत के बारे में कुछ नहीं मालूम था और वह सोसाइटी में इज़्ज़त की नज़रों से देखी जाती थी। ग़ज़ाली के बारे में दोनों सिर्फ़ इतना ही जानते थे कि वह नस्ल से तुर्की है और दक्षिण अफ्रीका का रहने वाला भी और लेडी तनवीर की असलियत से भी अच्छी तरह वाकिफ था, इसलिए उसे एक दिन अपने मुल्क में देख कर सर तनवीर को बड़ी हैरत हुई और उसने सोचा कि कहीं ग़ज़ाली यहाँ के ऊँचे तबक़े तक यह बात न पहुँचा दे। इसलिए वे दोनों उससे मुलाक़ात करने की कोशिश करने लगे। जब कामयाबी न हुई तो लेडी तनवीर ने इमरान की मदद हासिल करने के बारे में सोचा, क्योंकि उसकी फ़र्म का इश्तहार काफ़ी इत्मीनानबख़्श था। यानी वह समझ गयी कि वह कोई प्राइवेट जासूस है और क़ानूनी तौर पर यहाँ किसी प्राइवेट जासूस की गुंजाइश नहीं है, इसलिए उसने तलाक़ और शादी की फ़र्म का ढोंग रचाया है। पश्चिमी मुल्कों में भी अक्सर इसी क़िस्म की फ़र्में पायी जाती हैं। लेकिन हक़ीक़त में उनके मेम्बर प्राइवेट जासूस होते हैं और क़ानूनी पाबन्दी की वजह से इस क़िस्म की फर्मों की आड़ ले कर काम करते हैं।

इस तरह यह दास्तान दोनों की झेंपी-झेंपी-सी हँसी पर ख़त्म हो गयी।

समाप्त
 
Back
Top