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ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना complete

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कितनी ही देर तक में उसे अपने से चिपकाए पड़ा रहा, वो भी मेरे सीने से चिपकी पड़ी रही, शायद नींद में ही चली गयी थी, मैने भी उसे ऐसे पड़े रहने दिया,

बेचारी थक गयी थी, इतनी देर कमर चलाते-2.

कुछ देर बाद वो खुद ही कुन्मुनाई और मेरे उपर से उठ गयी.

जैसे ही वो उठी, एक पुच.. की आवाज़ के साथ मेरा लंड उसकी परी से बाहर आया, जो शायद उसकी गर्मी पाकर फिर से अकड़ने लगा था.

उसकी नव-विक्षित योनि से खून के साथ-2 हम्दोनो का मिश्रित वीर्य भी बाहर निकला और बेड शीट को गीला करने लगा.

वो मेरे सीने पर हाथ रख कर मेरी बगल में पड़ी थी, मैने उसको पुछा - ट्रिशा अब दर्द तो नही है..?

वो - नही ज़्यादा नही, थोड़ा सा फील हो रहा है, वैसे मज़ा बहुत आया, सच में मुझे नही पता था कि इसमें इतना मज़ा है, वरना मे अभी तक आपको नही छोड़ती.

मे - अच्छा अब इतनी डेरिंग आ गयी मेरी थानेदारनी में..?

वो थोडा चिढ़कर बोली - आप मुझे क्यों छेड़ते रहते हैं, ये थानेदारनी -2 बोल-2 कर, मे सिर्फ़ आपकी पत्नी हूँ बस.

मैने उसके होठों को चूमते हुए कहा - अरे मे तो बस ऐसे ही मज़ाक में बोल देता हूँ, अगर तुम्हें अच्छा नही लगता है तो अब आगे से नही कहूँगा..

सॉरी..!!

वो बोली - अरे..! प्लीज़ सॉरी नही, बस बार -2 सुनना अच्छा नही लगा सो बोल दिया, प्लीज़ आप माइंड मत करना..!

मुझे भी लगा की ज़्यादा मज़ाक हर किसी को असह्नीय हो सकता है, तो आज के बाद बंद…!

ऐसी ही बातें करते-2 हम एक दूसरे की बाहों में समाए हुए सो गये.

यूपी पूर्वांचल का एक छोटा सा शहर प्रीतम नगर, जहाँ के एक बाहुबली ठाकुर साब का एक तरह से इस शहर में एक छत्र राज था,

नाम था भानु प्रताप सिंग उर्फ भैया जी.

यहाँ की जनता आज़ादी के 45 साल के बाद भी इनको अपना राजा ही मानती थी, और जो नही मानता था, उससे इनके गुंडे मार-2 कर मनवा लेते थे.

आज़ाद हिन्दुस्तान की यहाँ पर कोई छाप अभी तक दिखाई नही पड़ती थी, वजह थी, हमेशा ही भैया जी विधायक का चुनाव जीत जाते थे,

अब्बल तो कोई इनके सामने खड़ा ही नही होता था, और अगर ग़लती से हो भी जाए तो किसी की हिम्मत नही कि इनके खिलाफ वोट दे सके.

इतने चालू भैया जी कि चुनाव तो निर्दलीय का ही लड़ते थे, लेकिन सरकार किसी भी पार्टी की हो, उसमें इनकी भागीदारी ज़रूर रहती थी.

8-10 एमएलए हमेशा इनकी जेब में रहते थे, तो जाहिर सी बात है कि, सरकार में इनका दबदबा भी रहता होगा.

यहाँ की शहर कोतवाली में नयी-2 भरती हुई लेडी एसपी ट्रिशा शुक्ला जो अब शादी के बाद ट्रिशा शर्मा हो चुकी थी.

अभी एसपी साहिबा को यहाँ आए हुए 2-3 महीने ही हुए थे, आइपीएस की ट्रैनिंग के बाद यहाँ इनकी पहली पोस्टिंग थी एसपी के तौर पर.

अभी उनका इंट्रोडक्षन भी ठीक से नही हो पाया था पूरे स्टाफ के साथ,

कोतवाली से शहर और उसके आस-पास के कई थाने लगते थे.

इस समय वो ऐसे ही एक थाने का विज़िट करने पहुँची थी,

एसपी साहिबा के आने से कुछ ही समय पहले ही उस थाने के एक सब इंस्पेक्टरर निर्मल कुमार जो 6 महीने पूर्व ही भरती हुआ था, और उसके साथ दो कॉन्स्टेबल एक गुंडे को पकड़ कर थाने लाए थे.

ये महोदय अपने दो मुस्टांडों के साथ बाज़ार में हफ़्ता बसूली कर रहे.

सब इंस्पेक्टरर के मना करने पर ऐंठ दिखाने लगे सो उठा लाए थाने.

जैसे ही इनके सरपरस्तो को खबर मिली, तो चले आए थाने दनदनाते हुए.

उससे ठीक दो मिनट पहले ही एसपी साहिबा विज़िट में पहुँची थी उसी थाने में, जो इस समय स्टाफ के साथ इंट्रोडक्षन कर रही थी.

ओये..! किस मादरचोद पोलीस वाले ने मेरे आदमी को पकड़ने की जुर्रत की है ? बुलाओ उसको मेरे सामने..!

जानता नही सूरज प्रताप सिंग के आदमी को हाथ लगाने का अंजाम क्या होता है..?

सब इंस्पेक्टरर निर्मल कुमार सामने आकर बोला- मैने पकड़ा है इसको, ये मार्केट में लोगों को धमका कर उनसे पैसे ले रहा था, एक-दो के साथ इसने मार-पीट भी की है.

आव ना देखा ताव की तडाक..! एक झन्नाटेदार चान्टा रसीद कर दिया उस सब इंस्पेक्टरर के गाल पर उसने, और बोला-

मैने कहा था उसको हफ़्ता बसूलने के लिए, तू कॉन होता है उसे रोकने वा..लाअ..?

सत्तकक.. ! अभी सूरज अपना वाक्य पूरा भी नही कर पाया था कि एक पोलीस की रोड उसके कूल्हे पर रसीद हो गयी,

मार इतनी पवारफ़ुल्ल थी कि सूरज महाराज खड़े नही रह पाए और बिल-बिला कर अपनी चोट वाली जगह पर हाथ रखते हुए बैठते चले गये.

तभी उसको लेडी एसपी की गुर्राहट सुनाई दी - यहाँ सरकार का राज चलता है, तेरे बाप का नही,

सरकार हमें क़ानून व्यवस्था ठीक रखने के पैसे देती है, तुम्हारे जैसे गुण्डों से मार खाने के लिए.

अपने दर्द पर काबू करके गुराते हुए बोला सूरज - ओ एसपी साहिबा, नयी -2 आई हो, पता नही तुम किससे पंगा ले बैठी हो, सूरज प्रताप नाम है मेरा, भैया जी का भतीजा हूँ मे.

एसपी - तो.. ! वैसे है कॉन ये भैया जी जो इतने गिरी हुए काम करता है.

कान खोल कर सुन्ले, तू भले ही कोई भी हो, पोलीस के काम में हस्तक्षेप कतयि बर्दास्त नही होगा समझे, अपनी खैर चाहता है तो निकल ले यहाँ से वरना ये डंडा देख रहा है.

इतने लगाउन्गी पिछवाड़े पर कि ठीक से बैठ भी नही सकेगा.

सूरज वहाँ से एसपी साहिबा को धमकाकर निकल गया, फिर एसपी ने सब इंस्पेक्टरर को शाबासी दी और उस गुंडे को किसी भी हालत में ना छोड़ने की हिदायत की.

तभी थाने का इंचार्ज यादव आगे आया और उसने उसे भैया जी के बारे में बताया, जिसे सुन कर वो कुछ देर सोच में पड़ गयी, लेकिन फिर कुछ निश्चय करके बोली-

देखो अगर भैया जी सरकार के नुमाइंदे हैं तो उनको भी समझना पड़ेगा कि पोलीस का काम क़ानून व्यवस्था सुधारना होता है,

अब अगर गुंडे उनके नाम की आड़ में ये सब करेंगे तो पोलीस का तो कोई काम ही नही रहेगा इलाक़े में.

तुम लोग चिंता मत करो और अपना काम क़ानून के मुताबिक करते रहो.

इंस्पेक्टरर यादव एसपी की बात से कुछ नाखुश दिख रहा था, लेकिन इस समय वो अपने सीनियर ऑफीसर से ज़्यादा कुछ आर्ग्युमेंट नही कर सकता था सो चुप हो गया.

उधर सूरज प्रताप भनभनाता हुआ थाने से निकला और अपने चाचा भानु को फोन कर दिया..! एक-दो बार तो बेल बजती रही लेकिन फोन नही उठाया गया,

 
इस समय भानु अपने सरपरस्त ** मिनिस्टर के पास बैठा एक 7स्टार होटेल में शराब की चुस्कियाँ ले रहा था.

फिर वो टाय्लेट का इशारा करके वहाँ से उठा और बाहर लॉबी में आकर उसने सूरज को कॉल बॅक किया.

जब सूरज ने नमक मिर्च मसाला लगा कर उसे सारी घटना बताई तो उसका घमंड फट पड़ा और उसने हुकुम दनदना दिया कि उठा ले साली को लेकिन मेरे आने तक कुछ करना मत उसके साथ.

उधर एसपी आवास पर इस समय ट्रिशा के मम्मी-पापा और उसकी छोटी बहन निशा भी आए हुए थे,

निशा इस समय लखनऊ से एमसीए का कोर्स कर रही थी, और अपने पेरेंट्स के साथ बड़ी बहन से मिलने के लिए आई हुई थी.

उनका छोटा बेटा सोनू, इस समय अपने बड़े भाई ऋषभ शुक्ला के पास रहकर इंजीनियरिंग कर रहा था, उसका ये फाइनल एअर था.

एसपी ट्रिशा अपनी ड्यूटी ऑफ करके घर पहुँचती है, आज की घटना और फिर भानु के रतवे का डर उसकी नयी-2 नौकरी पर हावी हो गया था, तो उसका असर उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था.

अनुभवी पिता आरके शुक्ला ने बेटी के चेहरे के तनाव को भाँप लिया.

सब लोगों ने मिल बैठ कर खाना खाया और थोड़ी बहुत देर इधर-उधर की बातें की और सब अपने-2 रूम में सोने चले गये.

कुछ देर के बाद आरके शुक्ला जी अपनी पत्नी को बोलकर बेटी के रूम में गये, जो इस समय हाथों में कोई फाइल लिए पलंग के बॅक से टेक लिए बैठी थी.

वो उसके पास जाकर बैठ गये और उसके सर पर हाथ फेर कर बोले- ट्रिशा बेटी लगता है आज तुम कुछ टेन्षन मे हो..!

ट्रिशा बोली - नही पापा ऐसी कोई बात नही है, आप सो जाओ मे ठीक हूँ.

पापा - देख बेटी में तेरा पिता हूँ.. भली भाँति समझ सकता हूँ अपने बच्चों की परेशानी को, बता बेटा क्या बात है, हो सकता है बात चीत से उसका कोई हल निकल आए.

फिर ट्रिशा ने आज के पूरे घटना क्रम को उन्हें बता दिया,

पहले तो वो सुन कर थोड़ा चिंतित हुए, फिर कुछ सोच कर बोले- बेटी तुम कल ही भैया जी से मीटिंग फिक्स करके उनको समझाओ कि पोलीस के साथ ऐसा व्यवहार उनकी छवि को ही धूमिल कर रहा है, हो सकता है कि वो समझ जाए.

इसी तरह की मंत्रणा बाप-बेटी के बीच कुछ देर होती रही,

अभी वो वहाँ से अपने रूम में जाने के लिए उठे ही थे कि, मेन गेट को तोड़ कर 15-20 गुंडे जैसे लोग धडधडा कर घर के अंदर घुस आए.

आते ही उन गुण्डों ने सबके साथ मार पीट शुरू करदी, माँ-बाप को घर में ही बंद करके, वो लोग उनकी दोनो बेटियों को उठा ले गये….!

............................

मे सुबह 4 बजे अपने नित्य कार्यों से निवृत होकर ध्यान क्रिया के लिए बैठा था,

मेरे पैर का प्लास्टर कट चुका था, बस थोड़ी मालिश करनी होती थी, वो भी अब ज़रूरत नही लग रही थी.

बार-2 कोशिश करने के बाद भी मेरा मन विचलित सा हो रहा था, ध्यान लगाने की काफ़ी कोशिश के बाद भी नही लग पा रहा था, मन मैं आजीव सी वैचैनि होने लगती.

आप लोगों ने अनुभव किया होगा, जब आपके दिल के कोई ज़यादा करीब होता है, और उसके साथ कोई प्रिय-अप्रिय घटना घटित हो, तो उसका प्रभाव जाने-अंजाने आपके मन मस्तिस्क पर अवश्य होता है.

साधारणतया, हम उस पर ज़्यादा मनन नही करते, लेकिन जब उसके बारे में ग्यात होता है, तब ज़रूर सोचते हैं, कि इसलिए उस समय हमें ऐसा भान हुआ था….

लेकिन अषधारण मनुश्य, उसकी गहराई को भाँप लेते हैं...

कुछ देर की कोशिश के बाद में ध्यान मुद्रा में चला गया, ध्यान की गहराई में पहुँचते ही, मेरी अन्तरआत्मा में हलचल शुरू हो गयी,

जिसे एक साधक अपने साक्षी भाव से देख-सुन सकता है.

मैने अपने साक्षी भाव को एकाग्र किया तो देखा, कि मेरी अंतरआत्मा भौतिक शरीर को छोड़कर वायुमंडल में विलुप्त होती जा रही है,

मेरा साक्षी भाव भी उसके साथ ही साथ है,

मेरे अंतरात्मा को क्षण मात्र में ही पता चल गया, कि ट्रिशा किसी मुसीबत में है, और वो उसकी खोज में उसके आवास पर पहुँच जाती है, लेकिन वो उसे वहाँ कहीं नज़र नही आती.

वो फिर से उसकी सूंघ लेते हुए, उसकी तलाश में भटकती हुई उस जगह पहुँचती है, जहाँ एक बड़े से हवेली नुमा मकान में एक अंधेरे कमरे में वो अपनी छोटी बेहन के साथ बँधी पड़ी थी.

मेरी अंतरात्मा विचलित हो उठती है, बिना भौतिक शरीर के वो कुछ भी नही कर सकती थी, सो अविलंब वो अपने भौतिक शरीर की तरफ लौटी.

जैसे ही वो अपने शरीर में वापस प्रवेश करती है, मेरा शरीर मारे उत्तेजना के काँपने लगता है और एक अनचाहे भय से मेरी आँखें खुल जाती हैं.

मेरा शरीर मारे उत्तेजना के इस समय थर-2 काँप रहा था, आवेश और उत्तेजना मेरे उपर बुरी तरह हाबी थी.

जैसे ही मेरे साक्षी भाव ने मेरी भौतिक चेतना को परिस्थिति से अवगत कराया, क्रोध के मारे मेरे मुँह से हुंकार सी निकल पड़ी और मे अविलंब अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ,

झट पट मैने अपना ज़रूरत का सामान पॅक किया और लखनऊ जाने वाली पहली ही फ्लाइट पकड़ ली जो एक चेंज ओवर थी विया देल्ही.

……………………………………………………………….

भौ प्रताप पूरी रात *** मिनिस्टर के साथ अयाशी करने के बाद सुबह-2 अपनी गाड़ी से अपने घर को निकल पड़ा,

3-4 घंटे लगातार चलने के बाद वो जब घर पहुँचा तो सूरज ने उसे सारी बातें बता दी.

दो कमसिन जवानियों को अपने महल में होने के एहसास से ही उसके अंदर फिर से वासना के कीड़े कुलबुलाने लगे.

उसने चाइ नाश्ता किया और फिर अपने खास आदमियों को लेकर उस तरफ चल दिया जहाँ वो दोनो बहनें बँधी पड़ी थी,

सूरज को उसने बाहर ही रोक दिया जहाँ और लोग भी थे जो उस हॉल नुमा कमरे के बाहर खड़े पहरा दे रहे थे.

भानु की नज़र जैसे ही ट्रिशा और निशा पर पड़ी, उसकी आँखें चौड़ी हो गयी और उसके मुँह से लार टपकने लगी.

उसने अपने आदमियों को बोलकर उन दोनो को खड़ा करवाया और ट्रिशा को एक खंबे से बँधवा दिया,

निशा को वैसे ही खड़ा कर रखा था, दोनो बहनों के मुँह पर टेप चिपका रखा था.

भानु ट्रिशा के सामने आकर खड़ा हो गया, और उसकी आँखों में झाँकते हुए उसने उसके मुँह से टेप हटा दिया और बोला-

कहिए एसपी साहिबा, आपको कोई बोला नही का.., कि हियाँ हमार राज चलत है, पोलीस का नाही.

ट्रिशा बस उसको खा जाने वाली नज़रों से देखती रही…!

फिर वो निशा के पास गया और उसके गाल पर हाथ फेरते हुए बोला- वाह ! क्या गदर माल है ये छुकरिया, बहुत मज़ा देगी ये तो..!

निशा बस कश मसा कर रह गयी, उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे.

लेकिन ट्रिशा से नही रहा गया और वो गुर्रा कर बोली- भानु प्रताप अपने गंदे हाथों से मेरी बहन को मत छूना, वरना ये तेरे लिए ठीक नही होगा.

भानु - वाह मेरी चिरैया ! इस हालत में भी फडफडा रही है..! अब तू देखती जा, तेरी आँखों के सामने मे तेरी इस मस्त जवान बहन की इज़्ज़त की कैसे धज्जियाँ उड़ाता हूँ ?

ट्रिशा भभक्ते हुए स्वर में बोली - उसको हाथ भी मत लगाना हरामज़ादे, वरना में तेरा खून पी जाउन्गि.

भानु - अच्छा ! तू मेरा खून पी जाएगी, बताना ज़रा कैसे पिएगी, ले मैने हाथ तो लगा दिया इसको, और इतना बोलके उसने निशा का नाइट गाउन उसके सीने के उपर से फाड़ दिया,

अब उसके 34डी साइज़ के गोरे-2 बूब्स उसकी आँखों के सामने नुमाया हो गये जिन्हें देख कर उस शैतान की हवस उसकी आँखों में और बढ़ गयी..

उसके बदन की झलक देख कर ही उसकी लार टपकने लगी, और उसने उसके गालों को सहलाते हुए उसके हाथ नीचे की तरफ बढ़ने लगे…

इससे पहले कि वो उसके नग्न वक्षों तक पहुँचते, वातावरण गोलियों की आवाज़ से गड़गड़ा उठा,

धाय…धाय.. धाय…लगातार 6 गोलियाँ चली और उसके आस-पास खड़े उसके 6 गुंडे ज़मीन पर पड़े तड़प्ते नज़र आने लगे.

भानु भोचक्का सा खड़ा, ज़मीन पर पड़े अपने तड़पते हुए गुण्डों को देख रहा था,

अभी वो इस असमजस की स्थिति से उबर भी नही पाया था, कि उसके आदमियों को किसने उड़ा दिया ?

कि एक हथोडे जैसा घूँसा उसकी कनपटी पर पड़ा और वो चीख मारता हुआ 10-12 फुट दूर जाकर गिरा.

ट्रिशा मन ही मन बुदबुदाई.. आ गया हमारा रखवाला..!

 
वहीं निशा अपने सामने खड़े एक नकाब पोश को देख कर हैरान परेशान थी, जो अब उसके बंधन खोल रहा था.

बंधन खुलते ही निशा अपनी बहन की ओर दौड़ी, और उससे लिपटकर फुट-फूटकर रोने लगी.

जल्दी से मेरी रस्सी खोलो निशा, ये वक़्त रोने का नही है मेरी बेहन.

ट्रिशा ने जब उसको कहा, तब उसको परिस्थिति का भान हुआ और वो उसकी रस्सी खोलने लगी.

तब तक उस नकाब पोश ने भानु के उपर लात घूँसों की बारिस सी कर रखी थी, 5 मिनट की धुलाई में ही वो चीखने चिल्लाने की स्थिति में भी नही था.

अधमरा सा भानु, हिलने डुलने के काबिल भी नही रहा.

ट्रिशा उसके पास पहुँची और उसके मुँह पर थूक कर बोली - हरजादे मैने तुझे चेताया था, क्यों अपनी शामत बुला रहा है,

लेकिन अपने घमंड के नशे में चूर, तू ये भी भूल गया कि, इस देश के रक्षकों पर हाथ नही डालना चाहिए.

फिर वो पलट कर अपने रहनुमा, अपने रक्षक उस नकाब पोश के सीने से लग कर फुट-फुट कर रो पड़ी.

ये देख कर निशा की आँखें चौड़ी हो गयी, वो ये नही समझ पारही थी, कि मरियादा की प्रतिमूर्ति उसकी बड़ी बेहन किसी गैर मर्द के सीने से कैसे लिपट कर रो रही है.

फिर उस नकाब पोश ने ट्रिशा के सर पर हाथ रख कर उसे चुप कराया और कुछ इशारा किया जिसे ट्रिशा ने समझ लिया और अपने-आप को कंट्रोल करके अपनी बेहन के फटे कपड़ों को एक गुंडे का गम्छा लेकर ढकने लगी.

नकाब पोश ने भानु की मुश्क कस दी और उसे अपने कंधे पर लाद कर बाहर निकल आया, दोनो बहनें उसके पीछे -2 लगभग दौड़ती हुई चल रही थी..!

बाहर का नज़ारा और भी ज़्यादा भिभत्स था,

सारे गुंडे मरे पड़े थे, सूरज का तो गला ही रेत दिया था एक तेज धार खंजर से.

निशा ये खौफनाक मंज़र देख ना सकी, और डर के मारे अपनी बड़ी बेहन से लिपट गयी.

वहाँ बाहर खड़ी गाड़ी में भानु के बेहोश शरीर को पटका और ट्रिशा के कान में कुछ कहा जो निशा सुन नही पाई,

वो उसे कोतवाली लेकर चली गयी, और वो नकाबपोश निशा का हाथ पकड़ कर वहाँ खड़ी दूसरी गाड़ी की तरफ लपका...!

एसपी ट्रिशा अपनी नाइट ड्रेस में ही थी, वो अपने ऑफीस ना जाकर सीधी उस थाने में पहुँची जहाँ से ये वाकीया शुरू हुआ था,

गाड़ी को गेट पर खड़ा छोड़ कर वो धड़ धडाती हुई अंदर दाखिल हुई.

नाइट ड्रेस में अपनी एसपी को देख कर थाने का पूरा स्टाफ चोंक पड़ा, और उसको गुस्से में देख कर तो सभी में हड़कंप मच गया…

लेकिन फिर भी उन्होने उसे सल्यूट किया, जिसका वो जबाब देती हुई लगभग चीखती हुई दाहडी, यादव, निर्मल कहाँ हो तुम लोग ?

वो दोनो दौड़ते हुए उसके सामने आए, और सल्यूट मार कर बोले- यस मेडम.

ट्रिशा – निर्मल ! बाहर गाड़ी में एक मुजरिम पड़ा है उसको अंदर लाकर हवालात में डालो फ़ौरन.

निर्मल दो सिपाहियों को लेकर बाहर की ओर दौड़ा, और जैसे ही उन्होने भानु को घायल अवस्था में गाड़ी में पड़ा पाया,

वो भोंचक्के रह गये, फिर कुछ सम्भल कर अपने ऑफीसर के आदेश पालन किया.

उन्होने घायल और अर्ध बेहोश भानु के शरीर को हवालात में लाकर पटक दिया…

फिर वो यादव से बोली - इस कुख्यात मुजरिम का ध्यान रखना यादव !, कोई भी कितना ही उपर से प्रेशर आए, छोड़ना नही है,

अगर तुमने इसे छोड़ने के बारे में सोचा भी, तो पहले ही सोचलेना, उसका अंजाम तुमहरे लिए क्या हो सकता है.

फिर वो निर्मल को लेकर ऑफीस के अंदर चली गयी और किसी को भी अंदर ना आने देने को ताकीद की,

कुछ देर तक वो उसे कुछ समझाती रही और फिर अपने घर की ओर चल पड़ी.

उधर निशा रास्ते भर उस नकाब पोश को ही घुरती रही, लेकिन उस नकाब पोश ने एक बार भी उसकी ओर आँख उठा कर भी नही देखा.

जब घर आ गया तो उसने गाड़ी वहीं बाहर खड़ी की और निशा को अंदर जाने का इशारा किया.

जब वो कुछ देर तक भी अपनी जगह से नही हिली, तो उसने उसकी आँखों में गुस्से से देखा और गुर्रा कर कहा- सुना नही तुमने ? अंदर जाओ..!

वो किसी कठपुतली की तरह गाड़ी से उतर कर घर के अंदर चली गयी जहाँ उसके माता-पिता अभी भी बाहर से बंद थे.

बाहर से दरवाजा खोलकर वो जैसे ही अंदर पहुँची, उसे देखते ही उन्होने उसे गले से लगा लिया, फिर उन्होने उसके उपर सवालों की झड़ी सी लगा दी, जिनके सारे जबाब उस बेचारी के पास भी नही थे.

उधर उस नकाब पोश ने निशा के उतरते ही गाड़ी को आगे बढ़ा दिया और करीब 1किमी दूर ले जाकर एक सुनसान से रास्ते पर खड़ा करके वापस पैदल ट्रिशा के घर की ओर चल दिया.

अभी वो उसके गेट पर पहुँचा ही था कि ट्रिशा भी आ पहुँची, दोनो बाहर ही मिल गये, और एक दूसरे से लिपट गये,

कुछ देर लिपटे रहने के बाद उन्हें लगा कि यहाँ कोई देख ना ले, तो वो अंदर को बढ़ गये.

अंदर निशा अपने मम्मी पापा के साथ सोफे पर बैठ कर अपनी आप बीती कह रही थी, साथ-2 सूबकती भी जा रही थी कि तभी ट्रिशा उस नकाब पोश के साथ अंदर दाखिल हुई.

उसे देख कर वो तीनो लपक कर उससे लिपट गये, और उससे सवाल जबाब करने लगे.

 
तभी निशा बोल पड़ी, दीदी ये हमारा रक्षक कॉन है ? जो आज अगर ये समय पर नही पहुँचता तो भगवान ना करे क्या अनर्थ हो जाता.

उसके मम्मी पापा भी सवालिया नज़रों से उसकी ओर देखने लगे.

ट्रिशा उस नकाब पोश से मुखातिब हुई - अब ये घूँघट हटा भी दो जानेमन..

पहले तो ट्रिशा के इस तरह बोलने पर वो तीनो अवाक रह गये,

फिर जब उसके चेहरे से नकाब हटा, तो वो उछल ही पड़े,

निशा तो खुशी के मारे अपने जीजू के गले से लिपट ही गयी, और देखते-2 ताबड-तोड़ 3-4 किस भी जड़ दिए अपने प्यारे जीजू के थोबडे पर.

मैने ट्रिशा को कहा - वाकी सब कुछ बाद में, तुम मेरे साथ आओ और हाँ साथ में अपना लॅपटॉप भी लेलो..

ट्रिशा मौके की नज़ाकत को समझ कर फ़ौरन अपना लॅपटॉप लेकर मेरे साथ लपकी, हम दोनो उसके बेडरूम में आकर बैठ गये,

मैने उसे कहा - फटाफट अपने लोगों को बोलकर, हॉल के बाहर जितनी भी लाशें पड़ी हैं उनको वहाँ से ठिकाने लगवा दो फ़ौरन.

ट्रिशा - वो में ऑलरेडी निर्मल को बोल चुकी हूँ. अब तक तो उठ भी गयी होंगी.

मे - गुड ! स्मार्ट बेबी ! यॅ..!

ट्रिशा - आख़िर बीबी किसकी हूँ, लेकिन आप ये तो बताओ कि यहाँ पहुँचे कैसे..??

मे - अभी इन बताओं का समय नही है, पहले हमें एक रिपोर्ट बनाके सेंट्रल होम मिनिस्ट्री को भेजनी है वित सीसी टू स्टेट होम अफेर्स.

मैने अपने मोबाइल को लॅपटॉप में कनेक्ट किया, तो उसने पुछा- इसमें क्या है ?

मैने कहा- उस हॉल का प्रूफ है, कि किस तरह भानु के द्वारा एक एसपी को बंधक बनाया गया, और उसका रेप करने की कोशिश की गयी.

ट्रिशा - क्या..? ये कब किया आपने..?

मैने मुस्कराते हुए कहा - अटॅक से पहले..! और एक चीज़ हमेशा ध्यान में रखो, कभी भी गुस्से में भी दिमाग़ का इस्तेमाल बंद नही होना चाहिए..!

ट्रिशा - ब्रिलियेंट जानू ! यू रियली सच आ वोंडरफुल्ल कॉप..!

मे - थॅंक्स बेबी ! ये कहकर मैने उसके होठों को चूम लिया ! वो खुश हो गयी.

अब हमारा ध्यान रिपोर्ट बनाने में था, 5-6 पेज की फुल प्रूफ रिपोर्ट एक छोटी सी वीडियो क्लिप के साथ सेंटरल होम मिनिस्ट्री को मैल कर दी,

स्टेट होम सेक्रेटरी को सीसी में और एनएसए को बीसीसी में रख दिया .

रिपोर्ट भेजने के बाद अब मेरा काम था एनएसए चौधरी को इम्मीडियेट इनफॉर्म करना,

सो मैने ट्रिशा को चाइ नाश्ते का बंदोबस्त करने के बहाने बाहर टरका दिया और चौधरी साब को कॉल लगा दी.

जब कॉल रिसीव हुई तो मैने मैल का हवाला देते हुए, उन्हें पूरी घटना मुँह जवानी बयान करदी, और रिक्वेस्ट की, कि भानु किसी भी हालत में अब जैल से बाहर नही आना चाहिए कम से कम कुछ दिनो के लिए.

वो भी शायद ऑन लाइन होकर रिपोर्ट देख रहे थे,

मैने आयेज कहा - सर ! स्टेट गवर्नमेंट उसका फुल सपोर्ट में रहेगी, तो उन्होने कहा – यू डॉन’ट वरी अरुण !

ये मामला ही ऐसा है कि अब स्टेट के भी तोते उड़ जाएँगे, और अब अगर उन्होने उसे बचाने की कोशिश की तो उंगली सीधी उनकी क़ानून व्यवस्था पर ही उठेगी.

फिर मैने उन्हें पुराना प्रॉमिस याद दिलाया, और कहा- सर मैने आपसे एक रिक्वेस्ट की थी, शायद आपके ध्यान से निकल गयी होगी..

चौधरी - कोन्सि रिक्वेस्ट.. ?

मे - सर वो ट्रिशा मेरी पत्नी के गुजरात पोस्टिंग वाली..!

चौधरी - ओह ! हां सॉरी, मे बिल्कुल भूल ही गया था, अच्छा हुआ तुमने रिमाइंड करा दिया,

यू डॉन’ट वरी, मे आज ही होम मिनिस्ट्री में जाके पर्षनली ये दोनो काम करवाता हूँ, ..

फिर कुछ रुक कर वो बोले - अरे हां ! याद आया.. ! मैने वो बात चलाई थी, दो दिन पहले ही होम सेकेट्री ने मुझे बताया भी था.

एक एसीपी तुम्हारे ही शहर का चेंज ओवर लेना चाहता है, तो तुम्हारी ट्रिशा को प्रमोशन के साथ भिजवा देते हैं वहाँ..!

मैने पुछा - वैसे कितने दिन लग सकते सर इस काम में.

चौधरी - ज़्यादा समय तो नही लगना चाहिए मेरे हिसाब से, मे जल्दी ही बताता हूँ तुम्हें ओके.

मे - थॅंक यू वेरी मच सर , फॉर युवर काइंड सपोर्ट.

चौधरी - अरे तुम्हें थॅंक यू कहने की ज़रूरत नही है बेटे,

तुम नही जानते तुम्हारे कामों की सफलता की वजह से मेरा कितना सीना चौड़ा रहता है पूरे सचिवालय में.

खुद पीएम तुम्हारे गुण गाते नही थकते.

चलो अब में फोन रखता हूँ, और तुम्हारे काम के लिए निकलता हूँ. ओके बाइ.

मे - बाइ सर, आंड थॅंक्स वन्स अगेन.

मैने अभी कॉल बंद ही किया था कि ट्रिशा चाइ और साथ में कुछ नाश्ता लेकर आ गई, तो मैने कहा –

चलो वहीं बाहर बैठ कर सबके साथ चाइ पे चर्चा करते हैं. लेकिन उससे पहले एक खुश खबरी सुनलो.

वो मेरी ओर सवालिया नज़रों से देखने लगी, मैने कहा अब तुम एसपी नही रही..!

वो बोली – तो फिर..?

मे - अरे भाई अब तुम एसीपी बन जाओगी..!

वो - क्या..? सच में..! आपसे किसने कहा..?

मे - काले छोरे ने..! और हां उसने ये भी कहा है कि तुम्हारा ट्रान्स्फर भी हमारे शहर में ही मिल जाएगा.

वो अविश्वास भरे लहजे में बोली - आप बना रहे हो मुझे..! पोलीस डिपार्टमेंट की बातें आपको कैसे पता ?

मे - तुम्हारे डिपार्टमेंट के पापा ने ही मुझे बताया है..!

वो - डिपार्टमेंट के पापा मतलब ??

मे - होम मिनिस्ट्री से तुम्हारा ट्रान्स्फर कम प्रमोशन लेटर निकलने वाला है,

अब अतिशीघ्र तुम सब लोग अपने बोरिया बिस्तरा गोल करो और मेरे साथ उड़ चलो मेरे देश, मेरे गाँव..! मेरी छमक्छल्लो..!

इतना कहकर मैने उसको कस कर लपेट लिया अपने बाजुओं में, और अपना सारा प्यार उसके होठों पर उडेल दिया.

 
वो भी किसी अमरबेल की तरह मेरे आगोश में समा गयी, और मेरे बालों भरे सीने पर एक प्यारा सा चुंबन जड़ दिया…

अभी हम सब सोफे पर बैठे, चाइ नाश्ते का ज़ायक़ा ले ही रहे थे, कि ट्रिशा के ऑफीस से फोन आ ही गया,

कमिशनर वहाँ उसका इंतजार कर रहे थे,

भानु प्रताप जैसे आदमी को अरेस्ट कर लिया जाए, वो भी उसी की सल्तनत में और बात उपर तक ना पहुँचे, ये तो मुमकिन ही नही था.

यादव जैसे चाटुकार भरे जो पड़े हैं इस देश के सिस्टम में.

मैने कहा - ये तो साला होना ही था, पर इतना जल्दी हो जाएगा, ये पता नही था. खैर कोई बात नही, देखते हैं इस कमिशनर को, क्या बोलता है.

मैने ट्रिशा को कोतवाली जाने के लिए बोल दिया और कहा कि कोई भी हो सिस्टम और क़ानून के हिसाब से तुम पीछे मत हटना, तुम्हें किसी भी तरह के प्रेशर में नही आना है…

कोई बड़ी बात नही कि राज्य के सीएम का भी दबाब आ जाए, और अब तुम्हें इस राज्य के किसी भी दबाब में नही आना है.

तुम बिंदास होकर ऑफीस जाओ, मे अभी आता हूँ, तुम्हारे पीछे-2.

वो आनन फानन में तैयार होकर अपने ऑफीस के लिए निकल गयी…

ट्रिशा को भेज कर मे एक बार फिर लॅपटॉप लेकर ऑनलाइन हो गया. रिपोर्ट वाले मैल पर एक जेंटल रिमाइंडर डाल कर आन्सर का वेट करने लगा.

अभी कोई 30 मिनट ही हुए होंगे कि रिप्लाइ आ गयी, साथ में ये कन्फर्मेशन भी आ गया, कि कुलपरीत के उपर उचित कार्यवाही की जाए.

ये सीधे आदेश सेंटर होम मिनिस्ट्री ने स्टेट को भेज दिए थे.

रिप्लाइ का प्रिंट आउट लेकर मे कोतवाली के लिए निकल पड़ा.

जब में वहाँ पहुँचा तो उस समय कमिशनर और ट्रिशा में तड़का-भड़की चल रही थी,

कमिशनर अपने सीनियर होने की धौंस दिखा कर भानु प्रताप को छोड़ने के लिए उस प्रेशर बना रहा था, जिसे ट्रिशा ने सिरे से खारिज़ कर दिया.

कमिश्नर- लुक मिसेज़ ट्रिशा शर्मा, तुम अभी नयी-2 एसपी जाय्न हुई हो अभी तुम्हारा कॅरियर शुरू भी नही हुआ है ठीक से,

मैने दुनिया देखी है. भानु प्रताप की ताक़त को पहचानो और उसे छोड़ दो, वैसे भी तुमने उनको बहुत नुक्शान पहुँचा दिया है, अब भगवान ही जाने तुम्हारा क्या होगा आने वाले कल में.

ट्रिशा अपने गुस्से पर काबू करते हुए बोली – मेरा जो होगा सो होगा, लेकिन उससे पहले में इस गुंडे को उसकी औकात दिखाकर ही रहूंगी…, चाहे आप मेरा सपोर्ट करो या ना करो…

कमिश्नर – मे तुम्हारा सीनियर होने के नाते ये ऑर्डर देता हूँ, कि तुम भानु प्रताप को अभी, इसी वक़्त रिहा करो…

ट्रिशा – और अगर मे आपके ऑर्डर को ना मानूं तो…?

कमिश्नर – मे अभी खड़े – 2 तुम्हें सस्पेन्ड कर सकता हूँ, लेकिन मे ये करना नही चाहता, इसलिए तुम्हें समझाने की कोशिश कर रहा हूँ,

भानु प्रताप जी इस शहर के एमएलए ही नही, प्रदेश की सरकार में इनकी बहुत उपर तक पहुँच भी है…

मे फिर कहता हूँ, इनकी ताक़त के आगे तुम कुछ भी नही हो…

मे चुप चाप खड़ा काफ़ी देर तक उन दोनो की बहस सुनता रहा लेकिन फिर मुझसे रहा नही गया उस भडवे कमिशनर के शब्द सुन कर और बीच में बोल पड़ा.

मे - मिस्टर. कमिशनर ! भानु जैसे गुंडे की ताक़त तो आप जैसे ऑफिसर्स हैं,

पोलीस चाहे तो कोई भानु पैदा ही ना हो पाए, एक न्यू ऑफीसर उसके खिलाफ खड़ी होना चाहती है,

वहीं उसका ऑफीसर उसकी बहादुरी की तारीफ करने की वजाय उसे डाउन करने की कोशिश कर रहा है, शेम ऑन यू कमिशनर.

कुछ देर कमिशनर मेरे चेहरे की ओर देखता रहा, फिर भड़क कर बोला - हू आर यू टू इंट्रप्ट माइ वर्क..? हाउ डेर यू टू टीच मी माइ ड्यूटी ?

मैने शांत लहजे में कहा - एक आम आदमी ! जो ये पुछने का अधिकार रखता है, कि जनता के सेवक हमारी हिफ़ाज़त कर भी रहे हैं या खाली दिखावा कर रहे हैं..? और भानु जैसे गुंडे की हिफ़ाज़त.

यही भानु कल को आपकी बहू-बेटी को उठा ले जाए और आपके सामने उसका रेप करने की कोशिश करे, तब आप क्या करेंगे..?

मेरी बात सुनकर कमिशनर के मुँह पर ताला चिपक गया..!

फिर आगे बोलते हुए मैने कहा - अभी-2 आपने जो भानु आरती गाते हुए उसे छोड़ने की बात कही थी, और एसपी साहिबा को धमकाया उसके बाहुबल को बखान करके, क्या ये सब लिख कर दे सकते हैं आप..? नही ना..!

कमिश्नर- तुम्हारी बात एकदम जायज़ है यंगमॅन, लेकिन हमारे हाथ बँधे हुए हैं, इन नेताओं के दबाब के कारण.

मे - तो इन्हें खोलिए..! कब तक बाँधे रखोगे ?

यकीन मानिए जिस दिन ये हाथ खुल गये, भानु जैसे गुण्डों को छिपने के लिए जगह कम पड़ जाएगी.

कमिश्नर - तुम समझ नही रहे हो, इस राज्य की पूरी सरकार इसके सपोर्ट में है..! अभी देखना कहाँ-2 से किसके-2 फोन आना शुरू हो जाएँगे.

मे - उसका इलाज़ भी हो चुका है, ये देखिए, अब उनके पुरखे भी नही बचा सकते इस गुंडे को,

एक एसपी के साथ रेप अटेंप्टेड करना खेल तमाशा नही है, ये बात इनको सिखा कर ही दम लेंगे हम.

कमिश्नर - वैसे आप हैं कॉन ? होम मिनिस्ट्री की रिपोर्ट देखते ही कमिशनर के स्वर बदल गये, अब तक जो तुम-2 कर रहा था अब वो आप बोलने लगा था.

मे - बताया तो था.. आम आदमी ! और आम आदमी चाहे तो कुछ भी कर सकता है.

ट्रिशा कमिशनर की हालत देख कर मंद-2 मुस्करा रही थी.

मैने फिर से कमिशनर को उकसाया.

आप सिर्फ़ अपने जूनियर्स के साथ खड़े रहिए फिर देखिए, कैसे राज्य की क़ानून व्यवस्था नही सुधरती ? फिर पब्लिक भी आपके साथ होगी.

अभी ये बातें हो ही रही थी कि तभी ऑफीस के फॅक्स पर स्टेट होम सीक्रेटरी के आदेश का फॅक्स आ गया,

 
अभी ये बातें हो ही रही थी कि तभी ऑफीस के फॅक्स पर स्टेट होम सीक्रेटरी के आदेश का फॅक्स आ गया,

जो सेंटर होम मिनिस्ट्री के आदेश को फॉलो करता था, ट्रिशा ने फॅक्स लेकर कमिशनर के हाथ में पकड़ा दिया और बोली- और कुछ सपोर्ट चाहिए सर.

कमिश्नर - बस करो ऑफीसर, इन मिसटर ने ही बहुत कुछ सुना दिया मुझे, अब आप तो कम-से-कम अपने सीनियर की खिचाई मत करो,

यू गो अहेड मे आपके साथ हूँ. और उसने एसपी के सिग्नेचर को वेरिफाइ करके भानु के उपर संबंधित धारा के तहत केस चलाने के आदेश दे दिए.

अब भानु को सज़ा से कोई नही बचा सकता था, वैसे ऐसे जालसाज़ और बाहुबली नेताओं से मिले रहने की सरकार की भी अपनी मजबूरी होती है लोक्तन्त्र में,

लेकिन जब ये फँस जाते हैं, तो वही तन्त्र अपने हाथ खींच भी लेता है.

यही भानु के साथ भी हुआ, जब सेंटर का दबाब पड़ा तो स्टेट ने हाथ खड़े कर दिए और भानु का साम्राज्य ख़तम हो गया.

लोगों ने भी चैन की साँस ली.

इधर जब कोतवाली से फारिग होकर हम घर लौटे तो अंधेरा घिर चुका था,

अभी हम घर के गेट पर ही थे कि चौधरी साब का फोन आ गया और उन्होने कन्फर्म कर दिया कि ट्रान्स्फर ऑर्डर दो दिन में पारित हो जाएगा,

चाहो तो यहाँ आकर कलेक्ट कर सकते हो और महीने के अंत तक कभी भी जाय्न कर सकती है.

मैने ट्रिशा को ये बात बताई तो उसने मेरे होठों का चुंबन करके थॅंक्स कहा.

अंदर आकर हमने दोहरी खुश खबरी जब सबको बताई तो सब खुशी से झूम उठे,

ट्रिशा के मम्मी पापा की आँखों में तो खुशी के मारे आंशु आ गये.

उपर से जब ट्रिशा ने बताया कि ये सब आपके दामाद की वजह से हुआ है, तो उन्होने बारी-2 मुझे गले से लगा लिया और बोले-

हम कितने ग़लत थे बेटी, तुझे कितना रोका था हमने जब तुमने अरुण से शादी के लिए बोला था तब, लेकिन अब हमें तुम्हारे चुनाव पर फक्र हो रहा है.

निशा को तो पता नही नकाब पोश वाले सीन से ना जाने क्या हो गया था, वो तो अपने प्यारे जीजू को बलिहारी वाली नज़रों से निहारे जा रही थी. आख़िर जब नही रहा गया, तो बोल ही पड़ी.

निशा - दीदी आज मुझे आपसे बड़ी जलन हो रही है..!

ट्रिशा ने उसे सवालिया नज़रों से घूरते हुए कहा - क्यों ?? मैने तेरा क्या छीन लिया जो तुझे मुझसे जलन हो रही है.

निशा - इतने प्यारे जीजू को जो हथिया लिया है आपने..!

उसकी बात सुन कर सभी ठहाका लगा कर हसने लगे और निशा झेंप कर रह गयी…!

ऐसे ही हसी-खुशी के वातावरण में हम सब लोगों ने अपना डिन्नर ख़तम किया, कुछ देर गप-सप की, और फिर सब अपने-2 रूम में सोने चले गये..!

आज हम दोनो पति-पत्नी अपने मन की जी भरकर भडास निकालने वाले थे,

सो बेड पर आते ही शुरू हो गये और ना जाने रात के कोन्से पहर थकान से चूर-चूर होकर हमें नींद ने अपने आगोश में समेट लिया !

तीसरे दिन हम सबने अपना ज़रूरी समान समेटा और देल्ही जाने वाली फ्लाइट पकड़ ली,

वाकी भारी समान को मवर्स & पॅकर्स को. के हवाले कर दिया जो बाद में पहुँचने वाला था..

देल्ही आकर उन तीनों को एर पोर्ट के रेस्ट रूम में रोका, मे और ट्रिशा सचिवालय की ओर चल पड़े.

अमित चौधरी के ऑफीस पहुँच कर मैने उनसे ट्रिशा को इंट्रोड्यूस कराया और कहा,

ट्रिशा ये तुम्हारे ससुर जी हैं इनके पैर छुकर इयांका आशीर्वाद लो, इनकी वजह से हम दोनो एक हुए हैं.

ट्रिशा ने पूरी श्रद्धा से उनके पैर छुये तो उन्होने भी स्नेह पूर्वक उसको सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दिया और कहा- बेटी इस हीरे का हमेशा ख्याल रखना,

वैसे तो ये इतना मजबूत है कि कोई चट्टान भी इससे टकराए तो वो भी चकनाचूर हो जाएगी, लेकिन जिंदगी का कोई भरोसा नही होता है कब क्या मोड़ ले ले.

ऐसे ही किसी मोड़ पर अगर ये टूटने लगे तो तुम हमेशा इसके साथ खड़ी रहना, इसे सहारा दे देना बस, ये फिर उठ खड़ा होगा.

ट्रिशा भावुक होते हुए बोली - आप चिंता ना करें सर, आपकी अमानत का में जी जान से ख्याल रखूँगी, जब तक मेरी जान में जान है, इन्हें टूटने नही दूँगी.

मेरी वजह से ये कभी कमजोर नही पड़ेंगे ये मेरा वचन है आपको.

चौधरी - जीती रहो मेरी बच्ची, मुझे तुमसे यही उम्मीद थी, और इसी उम्मीद के चलते मैने इस नलायक को तुमसे शादी करने के लिए हां कहा था.

फिर उन्होने अपनी सीक्रेटरी को हमारे साथ होम सीक्रेटरी के पास भेजा वहाँ से ऑर्डर कलेक्ट किए और हम वापस एर पोर्ट पहुँच गये.

शाम होते-2 हम अपने 3 बीएचके वाले फ्लॅट में आ गये, खाना होटेल से बुक कर दिया था.

ट्रिशा के ऑफीस जाय्न करने तक इसी फ्लॅट में गुज़ारा करना था, उसके बाद तो उसको एसीपी की रंक के हिसाब से आवास मिलना था, जो शायद किसी बंगले से तो कम नही होना चाहिए.

4-5 दिन हमारे साथ रह कर ट्रिशा के मम्मी पापा गाँव वापस लौटने लगे, जब हमने उन्हें और रुकने को कहा तो वो बोले-

बेटा अब थोड़ा बहुत अपनी ज़मीन जायदाद की देखभाल भी तो करनी पड़ेगी. फिर कोई मौका पड़ेगा तो ज़रूर कुछ दिन रुकेंगे.

ट्रिशा की मम्मी ने उसके चिन पर हाथ रख कर कहा- अब तो बस नवासे का इंतजार है, तभी आएँगे तुम्हारे पास,

अब ये तुम लोगों पर निर्भर करता है कि कितनी जल्दी बुलाते हो हमें..? क्यों जी..! उन्होने अपने पति को संबोधित करके कहा.

पापा- बिल्कुल ! अब तो जितना जल्दी हो सके अपने नवासे का मुँह देखना है.

 
ट्रिशा उनकी बात सुन कर शर्मा गयी, तभी निशा चुटकी लेते हुए बोली- इसमें कॉन सी बड़ी बात है मम्मी, जीजू चाहें तो साल के अंदर-2 मे अपने भेनौत को अपनी गोद में लेकर खिला सकती हूँ..! क्यों जीजू..? सही कह रही हूँ ना !

मे - भाई ये सब अपनी बेहन से पुछो, मुझसे क्यों पुछति हो..? फिर थोड़ा सीरीयस होते हुए मैने कहा –

इसमें अभी वक़्त लगेगा मम्मी जी, ट्रिशा की नयी पोस्टिंग है, कम-से-कम 2-3 साल हम लोग इस बारे में सोच भी नही सकते.

क्यों ट्रिशा..! सही कह रहा हूँ ना मे..?

ट्रिशा ने भी मेरी बात पर मुन्हर लगाड़ी, तो वो लोग कुछ मायूस से हो होगये..!

मैने कहा- अरे आप लोग मायूस क्यों होते हो, पहले पोते का तो जुगाड़ करो..!

पापा बोले - ये बात भी सही है तुम्हारी..! पहले तो पोता आना चाहिए, वैसे भी ऋषभ की शादी को तो एक साल से ज़्यादा हो गया है.

ऐसी ही बातें चलती रही, फिर उन्होने निशा को कहा- बेटा तुम भी अपना सामान पॅक कर्लो, तुम्हारा एमसीए का फाइनल है, तुम्हें भी तो उसकी तैयारी करनी है तो वो बोली-

मे तो अभी दीदी-जीजू के पास ही रहूंगी, यही रह कर तैयारी कर लूँगी, वैसे भी अब मुझे खाली एग्ज़ॅम ही तो देने हैं, क्यों दीदी आपको तो कोई परेशानी नही है ना..?

ट्रिशा - कैसी बात करती है पगली..! मुझे तेरे यहाँ रहने से क्या परेशानी होगी भला..! जब तक तेरा मन करे यहाँ रह, वैसे भी तेरे एग्ज़ॅम के बाद ही तो शादी हो जानी है.

मम्मी-पापा – जैसी तुम लोगों की इक्षा..! अब हमें तो इज़ाज़त दो भाई.

और उसी दिन वो दोनो निकल गये अपने गाँव, सीधा साधन ट्रेन ही था, रिज़र्वेशन मिल गया तो शाम की ट्रेन में उनको बिठा दिया.

ट्रिशा ने अपना ऑफीस जाय्न कर लिया, उसको डिपार्टमेंट की तरफ से एक अच्छा सा बांग्ला रहने के लिए मिल गया था. मैने सोचा चलो मेरी आब्सेन्स में इन लोगों को भी सेफ्टी रहेगी.

अब ट्रिशा सुबह-2 अपने ऑफीस निकल जाती थी, मेरा कोई इंपॉर्टेन्स नही था, कभी-2 शकल दिखाने चला जाता था कंपनी के ऑफीस.

ऐसे ही एक दिन ट्रिशा ओफिस गयी थी, मे और निशा घर पर अकेले थे, मे एक स्पोर्ट्स टीशर्ट और शॉर्ट पहन कर सोफे पर बैठ कर न्यूज़ सुन रहा था, सुबह की योगा और दूसरी एक्सर्साइज़ करने के बाद चेंज नही किया था.

कुछ देर बाद निशा भी हाथ में बुक लिए मेरे बाजू में आकर बैठ गयी.

मेरा ध्यान टीवी में था, लेकिन वो लगातार मेरी ओर ही देख रही थी, टीशर्ट थोड़ी फिट थी, सो मेरे कशरति बदन के कट साफ दिख रहे थे.

जब काफ़ी देर तक मैने उसकी ओर ध्यान नही दिया, तो उससे रहा नही गया और बोली-

जीजू ! ज़रा टीवी से ध्यान हटा कर मेरी ओर देख कर बताएँगे, क्या मे अट्रॅक्टिव नही लग रही..?

उसके अचानक इस तरह के सवाल पर मैने चोंक कर उसकी ओर देखा, वो एक लाल सुर्ख रंग की लोंग स्कर्ट और ब्राउन शर्ट पहने थी, जिसमें से उसके 34डी बूब्स निकलने को उतावले हो रहे थे,

वो अपनी टाँगों को एक के उपर एक रख कर बैठी थी. मेरा उसको अटेन्षन ना देने का कारण ही उसकी मदमस्त जवानी थी जो ट्रिशा की तुलना में ज़्यादा भारी-भारी थी, जिसे देख कर कोई भी अपना मानसिक संतुलन खो दे.

मैने थोड़ी देर उसके हुश्न का दीदार किया और फिर बोला- अचानक इस तरह का सवाल क्यों किया तुमने..?

निशा - पहले आप मेरे सवाल का जबाब दीजिए.. प्लीज़.

मे थोड़ा मुस्करा उठा उसके सवाल की मंशा जान कर, और बोला - सच कहूँ या झूठ.

निशा - जीजू..! प्लीज़ सच बताओ ना ! क्या मे अटेक्टिव नही लगती ?

मे - सच तो ये है साली साहिबा ! कि कभी-2 मुझे भी डर लगता है, कहीं मे अपना आपा खो कर तुम्हारे उपर झपट ना पडू..!

इसलिए तुम्हारी तरफ ध्यान देने से बचता रहता हूँ, और शायद इसीलिए तुमने भी ये सवाल जान बूझकर किया है, है ना!

वो अवाक सी मेरे मुँह को ताकती रह गयी..! और फिर बोली - आप कोई तन्त्र मंतरा तो नही जानते..?

मे - क्यों ? ऐसा क्यों लगा तुम्हें..?

निशा - वो आप मेरे मन की बात जान गये इसलिए..!

मे ठहाका लगा कर हंस पड़ा…हाहहाहा…! नही मेरी ब्यूटिफुल साली जी मे कोई तांत्रिक वन्त्रिक नही हूँ,

जब मैने तुम्हारी ओर ध्यान नही दिया तो नारी स्वाभाव बस तुमसे रहा नही गया और तुमने ये सवाल कर दिया..! क्यों सही है ना..!

निशा - बिल्कुल सही..! लेकिन अब तो सही से जबाब देदो मेरे हॉट..हॉट.. जीजू..!

मे और हॉट..?? हाहहाहा… क्यों मज़ाक करती हो यार !!? वैसे सच कहूँ तो देशी भाषा में तुम एक दम पटाखा लगती हो, जो किसी भी महा पुरुष का भी ईमान डॅग-मगा दे, इसलिए मे तुमसे बचता रहता हूँ.

उसने मेरे कंधे पर अपना सर रख लिया और अपने बाजू मेरे इर्द-गिर्द लपेट कर बोली - मुझसे क्यों बच रहे हो..? क्या मे कटखनी हूँ..?

मे - कटखनी तुम नही मे हूँ, कहीं मन मचल गया और तुम्हें काट लिया तो तुम्हारी दीदी क्या कहेगी..?

वो मुझे अपनी बाहों में कस्ति हुई बोली - ओह जीजू..! काटो ना मुझे..! दीदी की क्यों परवाह करते हो, वो मुझसे बहुत प्यार करती है, मेरे लिए वो कुछ नही कहेगी..

उसके बदन की मादक खुश्बू ने मेरे अंदर हलचल पैदा करदी…

प्लीज़ जीजू मुझे भी एक बार अपनी बाहों में भरके प्यार दो ना.. प्लीज़्ज़ज..!

मे - निशा ! अपने आप को कंट्रोल करो प्लीज़.. तुम दूसरे की अमानत हो, उसको क्या जबाब दोगि, और फिर मे तुम्हारी दीदी के साथ विश्वासघात नही कर सकता..! समझो बात को.

निशा – तो फिर ठीक है, अब दीदी ही आपको मेरे पास लेके आएँगी.. और ये कह कर वो मेरे से अलग होकर अपने रूम में चली गयी.

मे कितनी ही देर बैठा सोचता रहा उसके द्वारा कहे गये शब्दों के बारे में.

ऐसे ही 2 दिन और निकल गये, अब निशा मेरे साथ ज़्यादा फ्लर्ट नही करती थी, लेकिन कुछ उदास सी रहने लगी.

एक रात ट्रिशा जब मेरी बाहों में थी, मैने उसकी गोलाईयों को सहलाते हुए पुछा-

जान ! तुमने एक बात नोटीस की है, निशा आज कल कुछ अन्मनि सी रहती है, तुमने पता नही किया क्यों रहती है..?

ट्रिशा मेरे सीने को सहलाते हुए बोली - वो पागल लड़की कुछ ऐसा चाहती है, जो मे उसके लिए हां नही कह सकती..!

मे - क्या..? ऐसा क्या चाहती है वो तुमसे, जो तुम दे नही सकती उसे..?

हालाँकि मुझे पता था कि वो क्या चाहती है, और शायद उसने अपनी बेहन को बोल ही दिया है..! फिर भी मैने ये सवाल किया.

ट्रिशा मेरी चिन को चूमते हुए बोली - वो अपने प्यारे जीजू के प्यार से थोड़ा सा हिस्सा चाहती है..! जिसके लिए मे अपनी तरफ से कैसे हां कह दूं..?

मैने चोन्क्ने की आक्टिंग करते हुए कहा.. क्या..? क्या ऐसा उसने तुमसे कहा..?

ट्रिशा - हां ! क्योंकि हम दोनो बहनें एक दूसरे से बहुत प्यार करती हैं, और कोई भी बात नही छिपाति.

मैने उसके गाउन की डोरी खोल दी, और उसके दोनो पल्लों को अलग करके उसके अनारों पर गोल-2 उंगली घुमाते हुए पुछा – वैसे उसने तुमसे क्या कहा था..?

ट्रिशा अपनी चुचि को मेरे बाजू पर दबाते हुए बोली – पहले तो उसने मुझसे प्रॉमिस लिया, कि क्या वो जो माँगे वो उसे मिलेगा,

मैने सोचा की वैसे ही किसी चीज़ की डिमॅंड करेगी, सो मैने उसे प्रॉमिस कर दिया…लेकिन जो उसने कहा, उसे सुनकर मे सन्न रह गयी..

मे – ऐसा क्या कहा उसने ?

ट्रिशा – वो कुछ देर तो चुप रही, फिर सकुचाते हुए बोली, दीदी मे अपनी वर्जिनिटी जीजू को देना चाहती, प्लीज़ क्या आप बस एक रात के लिए उनका प्यार मेरे साथ शेयर कर सकती हैं…?

 
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