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Guest
उसकी बात सुन कर, कुछ देर तो मे सन्नाटे की स्थिति में चली गयी, लेकिन जब उसने फिर कहा – देखो दीदी, आप प्रॉमिस कर चुकी हो, प्लीज़ बस एक रात के लिए, फिर कभी नही कहूँगी…
मे चाहती हूँ, मेरी फर्स्ट नाइट जीजू जैसे शेरदिल मर्द के साथ में हो…
मे – तो फिर तुमने क्या कहा …?
ट्रिशा – मे क्या कहती, मैने उससे कह दिया कि उनकी वो जानें, मे इस बारे में कुछ नही कह सकती…
बस तभी से वो मायूस हो गयी, और गुम-सूम सी रहने लगी.. मैने उसे काफ़ी समझाने की कोशिश भी की, कि देख ये बात तेरे जीजू कतई नही मानेंगे, लेकिन उसने फिर कोई जबाब नही दिया..
बातों बातों में मैने उसके गाउन को उसकी टाँगों से भी हटा दिया था, गुलाबी रंग की पेंटी के उपर से उसकी मुनिया को सहलाते हुए मे बोला - तो तुमने फाइनली उसको क्या जबाब दिया..?
ट्रिशा भी मेरे अंडरवेर के उपर से मेरे लंड को सहलाते हुए बोली - आपके बारे में मे उसको कैसे हां कर देती..? आप इसके लिए तैयार नही हुए तो..?
मे - तो क्या तुम अपने पति को, अपनी बेहन के प्यार के लिए बाँट सकती हो..?
ट्रिशा - मे कॉन होती हूँ आपके बारे में कुछ भी डिसाइड करने वाली..?
अब मेरे प्रयासों से उसकी पेंटी कमरस से गीली होने लगी थी, तो मैने उसे एक साइड में किया और उसकी गीली पुसी में एक उंगली डाल कर कहा –
अगर मे ये कहूँ कि तुम्हारी खुशी के लिए मे अपना प्यार उसे देने को तैयार हूँ तो..?
ट्रिशा सिसकी भरते हुए बोली – सस्सिईईईई….आअहह…सस्साच ! सच में आप उसको अपना प्यार दे सकते हैं..?
मे - तुम्हें कोई एतराज नही होगा इसमें..?
ट्रिशा अपनी कमर हिलाते हुए बोली - मुझे भला क्यों एतराज होगा..? ससिईई….
अगर आप अपनी खुशी से उसको प्यार दे रहे हैं तो, मेरी खुशी तो आप दोनो की खुशी में ही है.
वो फिर अपनी गान्ड उचकते हुए बोली - वैसे अगर वो खुश रहेगी तो मुझे अच्छा लगेगाआ….आआईयईई….सस्सिईइ…
मेरी भी एक्सिटमेंट बढ़ती जा रही थी, सो मैने अपनी दो उंगली उसकी रस से लबरेज़ पुसी में जड़ तक पेल दी.. और अंदर बाहर करके उसे हाथ से ही चोदने लगा…
कुछ ही देर में ट्रिशा की कमर हवा में लहरा उठी, और उसने अपना कामरस छोड़ दिया…
जब वो नॉर्मल हुई, तो उसने मेरे लबों को चूम लिया..
मे उसकी ओर देखता ही रह गया.. कितना त्याग भरा है इस लड़की में, अपनी बेहन की खुशी के लिए..,
जहाँ एक तरफ समाज में ना जाने ऐसे कितने केसस हैं, कि पति-पत्नी के संबंधों में मात्र शक़ के आधार पर ही खटास आ जाती है, यहाँ तक कि नौबत तलाक़ तक पहुँच जाती है.
वहीं ये लड़की, अपनी बेहन की खुशी के लिए, अपने पति को बाँटने तक को खुशी खुशी तैयार हो गयी…
जब मे कुछ देर उसकी ओर ताज्जुब से देखता रहा तो वो बोली- ऐसे क्या देख रहे हैं जी..?
मे - देख रहा हूँ कि इतना त्याग भी कोई कर सकता है..! लेकिन जान ! उसकी तो कुछ महीनो बाद शादी है, फिर वो अपने पति को कैसे…??
मैने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया था.
ट्रिशा - वो उसकी प्राब्लम है, मुझे लगता है वो इस रिस्ते से ज़्यादा खुश नही है, बस भाई की खुशी और बात रखने के लिए राज़ी हुई है.
मे - ठीक है, अगर तुम खुश हो तो मे तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ.
ट्रिशा - ओह जानू ! आप कितने अच्छे हैं.. ? आइ लव यू ! तो मे उसे भेज दूं आपके पास..?
मे - अभी..?
ट्रिशा - हां..! फिर उसको और ज़्यादा क्यों सताया जाए..?
मैने उसके होठ चूमते हुए कहा – लेकिन इस समय तुम तो अपने हिस्से का प्यार ले लो पहले…
वो मेरे गाल को किस करके बोली – वो तो मे कभी भी ले लूँगी, पहले आप उसको देदो…
मैने उसको अपने सीने से सटा कर कहा - जैसी तुम्हारी मर्ज़ी..!
ये सुनते ही वो लपक कर पालग से उतरी और खुशी में डूबी हुई निशा के रूम की ओर चली गयी, मेरे चेहरे पर एक रहश्यमयि मुस्कान तैर गयी.
कुछ देर बाद ही दोनो बहनें मेरे पास आई, और पलग पर बैठ गयी,
निशा की आँखें शर्म से नीचे झुकी हुई थी. उसे बिठा कर ट्रिशा वहाँ से जाने लगी, तो मैने उसका हाथ पकड़ कर रोकते हुए कहा-
अरे तुम कहाँ चली जानेमन..?
वो बोली - मे जीजा-साली के बीच कबाब में हड्डी क्यों बनू..? लो सम्भालो अपनी प्यारी साली को और खिल खिला कर हस्ती हुई रूम से बाहर भाग गयी.
निशा अभी भी अपनी नज़रें नीची किए बेड के एक सिरे पर बैठी थी, इस समय वो एक वन पीस झीनी सी गाउन पहने हुए थी जिसके आर-पार उसके अधोवस्त्र भी सॉफ-2 दिखाई दे रहे थे.
उसके मादक अंगों को गाउन के अंदर से ही तौल कर मेरा पप्पू अंगड़ाई लेने लगा.
मे - निशा ! अब भी नाराज़ हो मुझसे..?
निशा - नही तो ! भला मे आपसे कैसे नाराज़ हो सकती हूँ..?
मे - तो फिर अभी तक इतनी दूर क्यों बैठी हो..? या फिर सिर्फ़ ऐसे ही बैठने के लिए आई हो मेरे पास..?
निशा - ओह जीजू, आपने मुझे जिस तरह से समझाया था ना, तो उस वजह से मुझे अब आपसे शर्म आ रही है.
मे - ओह ! देखो निशा मे नही चाहता था कि हम दोनो को लेकर हम पति-पत्नी के बीच कोई ग़लत फेहमी पैदा हो इसलिए मैने तुम्हें समझाया था,
अब जब पत्नी ही अपनी बेहन के प्यार में अपने पति को शेयर करने को तैयार है तो मे तो कब्से तुम्हें लपेटने के चक्कर में था.
निशा - सच..! आप सच कह रहे हैं जीजू..!
मे - बिल्कुल सच..! तुम्हारी जैसी हॉट और सेक्सी लड़की को कॉन नही भोगना चाहेगा..?
निशा - ओह जीजू..! थॅंक यू वेरी मच ! आइ लव यू ! और सारे शर्मो हया बंधन तोड़-ताड़ के वो मेरे उपर चढ़, मेरी गोद में आ बैठी.
उसके उभार मेरे सीने में दबे हुए थे, और वो मेरी आँखों में झाँक रही थी,
मैने प्यार से उसके रसीले होठों पर अपना अंगूठा फिराया और बोला - ऐसा क्या पसंद आया तुम्हें मेरे अंदर जो इतनी बाबली हो रही हो..?
निशा - क्या नही है आपके अंदर जिसे देख कर कोई भी लड़की फिदा ना हो..?
सबसे बड़ी आपकी ख़ासियत जो मुझे भा गयी है, वो है आपका मर्दाना अंदाज जो हर लड़की को चाहिए, डेरिंग जो किसी की भी केयर कर सके.
मे - लेकिन ये सब तो तुम्हारे लिए टेम्परेरी ही है ना ! तुम्हारा केरिंग गाइ तो कोई दूसरा ही है ये जानते हुए भी तुम मेरे दो पल के प्यार के लिए मरी जा रही हो. ये पागल पन क्यों निशा..?
निशा - जीजू प्लीज़ ! कैसे-2 करके मैने दीदी को पटाया है, और आप फिर से मुझे बहला रहे हो.. ! मुझे प्यार करो ना! प्लीज़ जीजू.. मेरे प्यारे जीजू.
मैने उसका मुँह बंद करने की गरज से अपने होठ उसके होठों पर रख दिए और उन्हें चूमने-चूसने लगा,
मे चाहती हूँ, मेरी फर्स्ट नाइट जीजू जैसे शेरदिल मर्द के साथ में हो…
मे – तो फिर तुमने क्या कहा …?
ट्रिशा – मे क्या कहती, मैने उससे कह दिया कि उनकी वो जानें, मे इस बारे में कुछ नही कह सकती…
बस तभी से वो मायूस हो गयी, और गुम-सूम सी रहने लगी.. मैने उसे काफ़ी समझाने की कोशिश भी की, कि देख ये बात तेरे जीजू कतई नही मानेंगे, लेकिन उसने फिर कोई जबाब नही दिया..
बातों बातों में मैने उसके गाउन को उसकी टाँगों से भी हटा दिया था, गुलाबी रंग की पेंटी के उपर से उसकी मुनिया को सहलाते हुए मे बोला - तो तुमने फाइनली उसको क्या जबाब दिया..?
ट्रिशा भी मेरे अंडरवेर के उपर से मेरे लंड को सहलाते हुए बोली - आपके बारे में मे उसको कैसे हां कर देती..? आप इसके लिए तैयार नही हुए तो..?
मे - तो क्या तुम अपने पति को, अपनी बेहन के प्यार के लिए बाँट सकती हो..?
ट्रिशा - मे कॉन होती हूँ आपके बारे में कुछ भी डिसाइड करने वाली..?
अब मेरे प्रयासों से उसकी पेंटी कमरस से गीली होने लगी थी, तो मैने उसे एक साइड में किया और उसकी गीली पुसी में एक उंगली डाल कर कहा –
अगर मे ये कहूँ कि तुम्हारी खुशी के लिए मे अपना प्यार उसे देने को तैयार हूँ तो..?
ट्रिशा सिसकी भरते हुए बोली – सस्सिईईईई….आअहह…सस्साच ! सच में आप उसको अपना प्यार दे सकते हैं..?
मे - तुम्हें कोई एतराज नही होगा इसमें..?
ट्रिशा अपनी कमर हिलाते हुए बोली - मुझे भला क्यों एतराज होगा..? ससिईई….
अगर आप अपनी खुशी से उसको प्यार दे रहे हैं तो, मेरी खुशी तो आप दोनो की खुशी में ही है.
वो फिर अपनी गान्ड उचकते हुए बोली - वैसे अगर वो खुश रहेगी तो मुझे अच्छा लगेगाआ….आआईयईई….सस्सिईइ…
मेरी भी एक्सिटमेंट बढ़ती जा रही थी, सो मैने अपनी दो उंगली उसकी रस से लबरेज़ पुसी में जड़ तक पेल दी.. और अंदर बाहर करके उसे हाथ से ही चोदने लगा…
कुछ ही देर में ट्रिशा की कमर हवा में लहरा उठी, और उसने अपना कामरस छोड़ दिया…
जब वो नॉर्मल हुई, तो उसने मेरे लबों को चूम लिया..
मे उसकी ओर देखता ही रह गया.. कितना त्याग भरा है इस लड़की में, अपनी बेहन की खुशी के लिए..,
जहाँ एक तरफ समाज में ना जाने ऐसे कितने केसस हैं, कि पति-पत्नी के संबंधों में मात्र शक़ के आधार पर ही खटास आ जाती है, यहाँ तक कि नौबत तलाक़ तक पहुँच जाती है.
वहीं ये लड़की, अपनी बेहन की खुशी के लिए, अपने पति को बाँटने तक को खुशी खुशी तैयार हो गयी…
जब मे कुछ देर उसकी ओर ताज्जुब से देखता रहा तो वो बोली- ऐसे क्या देख रहे हैं जी..?
मे - देख रहा हूँ कि इतना त्याग भी कोई कर सकता है..! लेकिन जान ! उसकी तो कुछ महीनो बाद शादी है, फिर वो अपने पति को कैसे…??
मैने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया था.
ट्रिशा - वो उसकी प्राब्लम है, मुझे लगता है वो इस रिस्ते से ज़्यादा खुश नही है, बस भाई की खुशी और बात रखने के लिए राज़ी हुई है.
मे - ठीक है, अगर तुम खुश हो तो मे तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ.
ट्रिशा - ओह जानू ! आप कितने अच्छे हैं.. ? आइ लव यू ! तो मे उसे भेज दूं आपके पास..?
मे - अभी..?
ट्रिशा - हां..! फिर उसको और ज़्यादा क्यों सताया जाए..?
मैने उसके होठ चूमते हुए कहा – लेकिन इस समय तुम तो अपने हिस्से का प्यार ले लो पहले…
वो मेरे गाल को किस करके बोली – वो तो मे कभी भी ले लूँगी, पहले आप उसको देदो…
मैने उसको अपने सीने से सटा कर कहा - जैसी तुम्हारी मर्ज़ी..!
ये सुनते ही वो लपक कर पालग से उतरी और खुशी में डूबी हुई निशा के रूम की ओर चली गयी, मेरे चेहरे पर एक रहश्यमयि मुस्कान तैर गयी.
कुछ देर बाद ही दोनो बहनें मेरे पास आई, और पलग पर बैठ गयी,
निशा की आँखें शर्म से नीचे झुकी हुई थी. उसे बिठा कर ट्रिशा वहाँ से जाने लगी, तो मैने उसका हाथ पकड़ कर रोकते हुए कहा-
अरे तुम कहाँ चली जानेमन..?
वो बोली - मे जीजा-साली के बीच कबाब में हड्डी क्यों बनू..? लो सम्भालो अपनी प्यारी साली को और खिल खिला कर हस्ती हुई रूम से बाहर भाग गयी.
निशा अभी भी अपनी नज़रें नीची किए बेड के एक सिरे पर बैठी थी, इस समय वो एक वन पीस झीनी सी गाउन पहने हुए थी जिसके आर-पार उसके अधोवस्त्र भी सॉफ-2 दिखाई दे रहे थे.
उसके मादक अंगों को गाउन के अंदर से ही तौल कर मेरा पप्पू अंगड़ाई लेने लगा.
मे - निशा ! अब भी नाराज़ हो मुझसे..?
निशा - नही तो ! भला मे आपसे कैसे नाराज़ हो सकती हूँ..?
मे - तो फिर अभी तक इतनी दूर क्यों बैठी हो..? या फिर सिर्फ़ ऐसे ही बैठने के लिए आई हो मेरे पास..?
निशा - ओह जीजू, आपने मुझे जिस तरह से समझाया था ना, तो उस वजह से मुझे अब आपसे शर्म आ रही है.
मे - ओह ! देखो निशा मे नही चाहता था कि हम दोनो को लेकर हम पति-पत्नी के बीच कोई ग़लत फेहमी पैदा हो इसलिए मैने तुम्हें समझाया था,
अब जब पत्नी ही अपनी बेहन के प्यार में अपने पति को शेयर करने को तैयार है तो मे तो कब्से तुम्हें लपेटने के चक्कर में था.
निशा - सच..! आप सच कह रहे हैं जीजू..!
मे - बिल्कुल सच..! तुम्हारी जैसी हॉट और सेक्सी लड़की को कॉन नही भोगना चाहेगा..?
निशा - ओह जीजू..! थॅंक यू वेरी मच ! आइ लव यू ! और सारे शर्मो हया बंधन तोड़-ताड़ के वो मेरे उपर चढ़, मेरी गोद में आ बैठी.
उसके उभार मेरे सीने में दबे हुए थे, और वो मेरी आँखों में झाँक रही थी,
मैने प्यार से उसके रसीले होठों पर अपना अंगूठा फिराया और बोला - ऐसा क्या पसंद आया तुम्हें मेरे अंदर जो इतनी बाबली हो रही हो..?
निशा - क्या नही है आपके अंदर जिसे देख कर कोई भी लड़की फिदा ना हो..?
सबसे बड़ी आपकी ख़ासियत जो मुझे भा गयी है, वो है आपका मर्दाना अंदाज जो हर लड़की को चाहिए, डेरिंग जो किसी की भी केयर कर सके.
मे - लेकिन ये सब तो तुम्हारे लिए टेम्परेरी ही है ना ! तुम्हारा केरिंग गाइ तो कोई दूसरा ही है ये जानते हुए भी तुम मेरे दो पल के प्यार के लिए मरी जा रही हो. ये पागल पन क्यों निशा..?
निशा - जीजू प्लीज़ ! कैसे-2 करके मैने दीदी को पटाया है, और आप फिर से मुझे बहला रहे हो.. ! मुझे प्यार करो ना! प्लीज़ जीजू.. मेरे प्यारे जीजू.
मैने उसका मुँह बंद करने की गरज से अपने होठ उसके होठों पर रख दिए और उन्हें चूमने-चूसने लगा,