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ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना complete

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उसकी बात सुन कर, कुछ देर तो मे सन्नाटे की स्थिति में चली गयी, लेकिन जब उसने फिर कहा – देखो दीदी, आप प्रॉमिस कर चुकी हो, प्लीज़ बस एक रात के लिए, फिर कभी नही कहूँगी…

मे चाहती हूँ, मेरी फर्स्ट नाइट जीजू जैसे शेरदिल मर्द के साथ में हो…

मे – तो फिर तुमने क्या कहा …?

ट्रिशा – मे क्या कहती, मैने उससे कह दिया कि उनकी वो जानें, मे इस बारे में कुछ नही कह सकती…

बस तभी से वो मायूस हो गयी, और गुम-सूम सी रहने लगी.. मैने उसे काफ़ी समझाने की कोशिश भी की, कि देख ये बात तेरे जीजू कतई नही मानेंगे, लेकिन उसने फिर कोई जबाब नही दिया..

बातों बातों में मैने उसके गाउन को उसकी टाँगों से भी हटा दिया था, गुलाबी रंग की पेंटी के उपर से उसकी मुनिया को सहलाते हुए मे बोला - तो तुमने फाइनली उसको क्या जबाब दिया..?

ट्रिशा भी मेरे अंडरवेर के उपर से मेरे लंड को सहलाते हुए बोली - आपके बारे में मे उसको कैसे हां कर देती..? आप इसके लिए तैयार नही हुए तो..?

मे - तो क्या तुम अपने पति को, अपनी बेहन के प्यार के लिए बाँट सकती हो..?

ट्रिशा - मे कॉन होती हूँ आपके बारे में कुछ भी डिसाइड करने वाली..?

अब मेरे प्रयासों से उसकी पेंटी कमरस से गीली होने लगी थी, तो मैने उसे एक साइड में किया और उसकी गीली पुसी में एक उंगली डाल कर कहा –

अगर मे ये कहूँ कि तुम्हारी खुशी के लिए मे अपना प्यार उसे देने को तैयार हूँ तो..?

ट्रिशा सिसकी भरते हुए बोली – सस्सिईईईई….आअहह…सस्साच ! सच में आप उसको अपना प्यार दे सकते हैं..?

मे - तुम्हें कोई एतराज नही होगा इसमें..?

ट्रिशा अपनी कमर हिलाते हुए बोली - मुझे भला क्यों एतराज होगा..? ससिईई….

अगर आप अपनी खुशी से उसको प्यार दे रहे हैं तो, मेरी खुशी तो आप दोनो की खुशी में ही है.

वो फिर अपनी गान्ड उचकते हुए बोली - वैसे अगर वो खुश रहेगी तो मुझे अच्छा लगेगाआ….आआईयईई….सस्सिईइ…

मेरी भी एक्सिटमेंट बढ़ती जा रही थी, सो मैने अपनी दो उंगली उसकी रस से लबरेज़ पुसी में जड़ तक पेल दी.. और अंदर बाहर करके उसे हाथ से ही चोदने लगा…

कुछ ही देर में ट्रिशा की कमर हवा में लहरा उठी, और उसने अपना कामरस छोड़ दिया…

जब वो नॉर्मल हुई, तो उसने मेरे लबों को चूम लिया..

मे उसकी ओर देखता ही रह गया.. कितना त्याग भरा है इस लड़की में, अपनी बेहन की खुशी के लिए..,

जहाँ एक तरफ समाज में ना जाने ऐसे कितने केसस हैं, कि पति-पत्नी के संबंधों में मात्र शक़ के आधार पर ही खटास आ जाती है, यहाँ तक कि नौबत तलाक़ तक पहुँच जाती है.

वहीं ये लड़की, अपनी बेहन की खुशी के लिए, अपने पति को बाँटने तक को खुशी खुशी तैयार हो गयी…

जब मे कुछ देर उसकी ओर ताज्जुब से देखता रहा तो वो बोली- ऐसे क्या देख रहे हैं जी..?

मे - देख रहा हूँ कि इतना त्याग भी कोई कर सकता है..! लेकिन जान ! उसकी तो कुछ महीनो बाद शादी है, फिर वो अपने पति को कैसे…??

मैने अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया था.

ट्रिशा - वो उसकी प्राब्लम है, मुझे लगता है वो इस रिस्ते से ज़्यादा खुश नही है, बस भाई की खुशी और बात रखने के लिए राज़ी हुई है.

मे - ठीक है, अगर तुम खुश हो तो मे तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ.

ट्रिशा - ओह जानू ! आप कितने अच्छे हैं.. ? आइ लव यू ! तो मे उसे भेज दूं आपके पास..?

मे - अभी..?

ट्रिशा - हां..! फिर उसको और ज़्यादा क्यों सताया जाए..?

मैने उसके होठ चूमते हुए कहा – लेकिन इस समय तुम तो अपने हिस्से का प्यार ले लो पहले…

वो मेरे गाल को किस करके बोली – वो तो मे कभी भी ले लूँगी, पहले आप उसको देदो…

मैने उसको अपने सीने से सटा कर कहा - जैसी तुम्हारी मर्ज़ी..!

ये सुनते ही वो लपक कर पालग से उतरी और खुशी में डूबी हुई निशा के रूम की ओर चली गयी, मेरे चेहरे पर एक रहश्यमयि मुस्कान तैर गयी.

कुछ देर बाद ही दोनो बहनें मेरे पास आई, और पलग पर बैठ गयी,

निशा की आँखें शर्म से नीचे झुकी हुई थी. उसे बिठा कर ट्रिशा वहाँ से जाने लगी, तो मैने उसका हाथ पकड़ कर रोकते हुए कहा-

अरे तुम कहाँ चली जानेमन..?

वो बोली - मे जीजा-साली के बीच कबाब में हड्डी क्यों बनू..? लो सम्भालो अपनी प्यारी साली को और खिल खिला कर हस्ती हुई रूम से बाहर भाग गयी.

निशा अभी भी अपनी नज़रें नीची किए बेड के एक सिरे पर बैठी थी, इस समय वो एक वन पीस झीनी सी गाउन पहने हुए थी जिसके आर-पार उसके अधोवस्त्र भी सॉफ-2 दिखाई दे रहे थे.

उसके मादक अंगों को गाउन के अंदर से ही तौल कर मेरा पप्पू अंगड़ाई लेने लगा.

मे - निशा ! अब भी नाराज़ हो मुझसे..?

निशा - नही तो ! भला मे आपसे कैसे नाराज़ हो सकती हूँ..?

मे - तो फिर अभी तक इतनी दूर क्यों बैठी हो..? या फिर सिर्फ़ ऐसे ही बैठने के लिए आई हो मेरे पास..?

निशा - ओह जीजू, आपने मुझे जिस तरह से समझाया था ना, तो उस वजह से मुझे अब आपसे शर्म आ रही है.

मे - ओह ! देखो निशा मे नही चाहता था कि हम दोनो को लेकर हम पति-पत्नी के बीच कोई ग़लत फेहमी पैदा हो इसलिए मैने तुम्हें समझाया था,

अब जब पत्नी ही अपनी बेहन के प्यार में अपने पति को शेयर करने को तैयार है तो मे तो कब्से तुम्हें लपेटने के चक्कर में था.

निशा - सच..! आप सच कह रहे हैं जीजू..!

मे - बिल्कुल सच..! तुम्हारी जैसी हॉट और सेक्सी लड़की को कॉन नही भोगना चाहेगा..?

निशा - ओह जीजू..! थॅंक यू वेरी मच ! आइ लव यू ! और सारे शर्मो हया बंधन तोड़-ताड़ के वो मेरे उपर चढ़, मेरी गोद में आ बैठी.

उसके उभार मेरे सीने में दबे हुए थे, और वो मेरी आँखों में झाँक रही थी,

मैने प्यार से उसके रसीले होठों पर अपना अंगूठा फिराया और बोला - ऐसा क्या पसंद आया तुम्हें मेरे अंदर जो इतनी बाबली हो रही हो..?

निशा - क्या नही है आपके अंदर जिसे देख कर कोई भी लड़की फिदा ना हो..?

सबसे बड़ी आपकी ख़ासियत जो मुझे भा गयी है, वो है आपका मर्दाना अंदाज जो हर लड़की को चाहिए, डेरिंग जो किसी की भी केयर कर सके.

मे - लेकिन ये सब तो तुम्हारे लिए टेम्परेरी ही है ना ! तुम्हारा केरिंग गाइ तो कोई दूसरा ही है ये जानते हुए भी तुम मेरे दो पल के प्यार के लिए मरी जा रही हो. ये पागल पन क्यों निशा..?

निशा - जीजू प्लीज़ ! कैसे-2 करके मैने दीदी को पटाया है, और आप फिर से मुझे बहला रहे हो.. ! मुझे प्यार करो ना! प्लीज़ जीजू.. मेरे प्यारे जीजू.

मैने उसका मुँह बंद करने की गरज से अपने होठ उसके होठों पर रख दिए और उन्हें चूमने-चूसने लगा,

 
वो तो थी ही इसी ताक में बस फिर क्या था ! जुट गये एक लंबी स्मूच में.

होत जब अपने काम में लगे हों, तो हाथ कैसे पीछे रहते, कस लिए उसके अनारों को, और जो मसल दिया, निशा किस तोड़ कर सीसीयाने लगी…..

सस्स्सिईईई… आअहह…गंदीए… जिजुउुउ… धीरे… जोरे से नही प्लेआस्ीई… दर्द्द्द…नहियिइ.. ह…उफ़फ्फ़…माआ…

अरे मेरी जान मेरी कबुतरि, तेरे ये अनार हैं ही इतने मस्त की बस मसल्ने को ही जी करता है…! मे बोला.

तो आराम से करो ना..! दर्द क्यों देते हो…?

मे - अरे मेरी रानी, इस दर्द में भी अपना अलग ही मज़ा है…और कपड़े के उपर से ही उसके निपल्स को मरोड़ दिया..

नहियिइ…. जीजू.. आप बहुत गंदे हैं… बहुत सताते हो…!

फिर मैने उसकी गान्ड को सहलते हुए उसके गाउन को खोल दिया.

अब उसके गोरे- 2 गोल-मटोल इलाहाबादी अमरूद ब्रा में कसे हुए मेरी आँखों के सामने थे.

उनकी शेप और सुंदरता देख कर मेरी आँखों की चुमक बढ़ गयी और मैने उसकी घाटी के दाएँ बाए अपने दाँत गढ़ा दिए..

ओह जीजू काटो मत.., निशान बन जाएँगे. वो बोली तो मैने कहा- बनने दे ना, इनको ही तो लव बाइट्स कहते हैं मेरी जान,

जब भी तुम इन निशानों को देखोगी तो मेरी याद आएगी.

वो बोली - आपको तो मे वैसे भी कभी भूलने वाली नही हूँ.

पेंटी और ब्रा में कसा उसका सुडौल गोरा बदन जो ट्रिशा से ज़्यादा भरा हुआ था. उसके चुचे तो कसम से मेरी जान ही निकाले दे रहे थे,

मैने ब्रा के उपर से ही उन्हें अपने मुँह में भर लिया और बुरी तरह चब चबा डाला.

आआईयईई…. नहियीई…जिजुउू… ज़ोर्से नही… प्लीज़…!

मेरे हाथ उसकी गदराई गान्ड का नाप ले रहे थे, और मे उन्हें ज़ोर-2 मसले जा रहा था.

एक भीनी सी मादकता से भरी उसके बदन की महक मेरे नथुनो में समाती जा रही थी, जो मुझे और ज़यादा उत्तेजित कर रही थी.

मैने मदहोशी के आलम में उसे अपने सीने से चिपका लिया और उसे बेतहाशा चूमने लगा.

निशा के हाथ भी हरकत में आए और उसने मेरे अंडरवेर को निकाल बाहर किया. और फिर वो मेरे घुटनों के बीच बैठ कर मेरे पप्पू को हाथ में लेकर सहलाने लगी, एक बार चूम कर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया.

जो काम ट्रिशा इतने समझाने बुझाने के बाद भी ठीक से नही कर पाई थी वो ये लंड की दीवानी लौंडिया बिना कुछ कहे कर रही थी, इसी से साबित होता था कि वो मेरे लंड के लिए किस कदर ब्याकुल है.

जल्दी ही मेरा लंड स्टील के रोड की तरह शख्त हो गया..., लगता था कि अब वो किसी दीवार में भी छेद कर्दे…!

मैने निशा को पकड़ के बेड पर लिटा दिया, और उसकी ब्रा और पेंटी को भी उसके बदन से अलग कर दिया..! अब वो मेरे सामने अजंता की कोई मूरत पड़ी हो ऐसा लग रहा था.

निशा ने अपनी दोनो टाँगों को विपरीत दिशाओं में फैला लिया और अपनी अन्चुदि परी को मेरे सामने खोल कर रख दिया.

मैने बड़ी प्यारी नज़रों से उसके मदमस्त बदन को बिस्तर पर मचलते हुए देखा और अपने मूसल जैसे लंड पर थूक लगा कर उसके उपर झुक गया.

मैने लंड को उसकी मुनिया की फांकों के बीच रख कर उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा- आर यू रेडी डियर..?

निशा ने जबाब में अपनी टाँगों को मेरी गान्ड के उपर रखा और अपनी ओर खींचने लगी, और फिर बड़े ही शोख अंदाज में बोली- यस माइ डियर जीजू… आइ आम रेडी फॉर युवर हार्डशिप्स.

उसके अपनी ओर खींचने और मेरी गान्ड के दबाब से लंड उसकी चिकनी चूमेली के अंदर सरकता चला गया…

एक पल के लिए तो वो साँस लेना ही भूल गयी मानो…उसे लगा जैसे कोई गरम रोड उसकी चूत में डाल दी हो…

उसे दर्द तो ज़्यादा नही हुआ क्योंकि चूत सिल्परी हो रही थी.., लेकिन उसे ऐसा कुछ लगा मानो कोई गरम चीज़ उसकी चूत में डालकर, अंदर रेंगती हुई चींतियो को भून रही हो.

पहले जो सुरसूराहट हो रही थी उसकी परी के अंदर अब वो हल्के से दर्द में बदल चुकी थी.

अब उसे ये समझ नही आ रहा था कि चूत चुदने में जब इतना दर्द होता है, तो हर लड़की इस दर्द के लिए मरी क्यों जाती है.

इसका जबाब उसको जल्दी ही मिल जाने वाला था…

अगले ही दो तगड़े धक्कों में मैने अपना पूरा मूसल जैसा लंड उसकी सन्करि गली में उतार दिया…

उसकी गली हर बार ककड़ी की तरह चीरती जा रही थी और अपने अतिथि के लिए रास्ता देती जा रही थी…

अब उसे दर्द की अधिकता महसूस हुई.. और वो चीख पड़ी…

आअहह…. जीजू…. मरररर…गायईयीई…आयईयीई… दर्द हो रहा हाीइ…उफ़फ्फ़.. जीजू निकालो अपने मूसल को…

मैने धीरे-2 लंड को बाहर खींचा, हम दोनो की नज़र उसी पर थी, जब लंड पूरा बाहर निकला तो उसके टोपे पर खून लगा हुआ था.

मैने उसको मुस्करा कर देखा और बोला- कंग्रॅजुलेशन्स डार्लिंग अब तुम लड़की से औरत बन गयी..!

निशा के मुँह से बस एक दर्द युक्त मुस्कान निकली…

अभी वो ठीक से मुस्करा भी नही पाई थी कि फिर चीख पड़ी…क्योंकि एक बार फिर मेरा शेर उसकी गुफा में घुस गया.

आआआहह…..गंदे जीजू……. उफफफ्फ़… निर्दयी कहीं के… मार डाला.., आई…अब ज़यादा मत हिलाओ… प्लीज़….रूको थोड़ा…!

पर मैने उसकी तरफ ज़्यादा ध्यान नही दिया… बस 10 सेकेंड के बाद फिर अपनी कमर को जुम्बिश दी और बाहर खींचा.. और फिर पेल दिया..

 
2-4 धक्कों के बाद निशा का दर्द कुछ कम हुआ और उसकी जगह उसकी चूत में सुरसूराहट होने लगी…,

अब उसके पैर एक बार फिर मेरी गान्ड के उपर कस गये और अपनी ओर करने लगे.

मैने अपने धक्कों को स्पीड देना शुरू कर दिया…

कुछ देर में ही निशा को मज़ा आने लगा, जो कुछ देर पहले ये सोच रही थी कि दर्द के बबजूद लड़कियाँ क्यों चुदने को मरी जाती हैं, अब जाके उसकी समझ में आया वो राज, और उसके मुँह से मादक सिसकिया फूटने लगी.

कुछ देर बाद मैने निशा को अपने उपर ले लिया, वो अपनी गदराई हुई, गोल गान्ड लेके मेरे लंड पर बैठ गयी, और अपने घुटने मोड़ कर बेड पर रख लिए…उसके बूब मेरे सीने को रगड़ दे रहे थे……..

आह्ह्ह्ह… जीजू…उउम्म्म्म…उऊहह… मज़ा आरहाआ हाइईइ.. बहुत… आहह… चोदो मुझे… और जोरे सी…आयईयी…उउफ़फ्फ़.. हाईए.. अंदर जाकर तो ये और ज़्यादा मज़ा देता है.. चोदो … और जोरे से… चोदो… अपनी … राणििइ.. को…अपनी साली..आधी..घरवाली को..,

अब वो खुलकर चुद रही थी, और पूरा मज़ा लेने की कोशिश कर रही थी…

मैने झुक कर उसके निपल को मुँह में भर लिया और चूसने लगा..

नयी टाइट चूत का एक नुकसान भी होता है, लंड ज़्यादा देर झेल नही पाता और जल्दी पानी छोड़ देता है, यही मेरे साथ भी हुआ…

उसकी चूत की दीवारों ने मेरे लंड को इतना जोरे से जकड रखा था कि उसकी रगड़ से झड़ने के करीब पहुँच गया…

लेकिन एन मौके पर मैने अपने लंड को बाहर खींच लिया.

मैने जैसे ही अपना लंड बाहर निकाला, निशा की नयी फटी चूत जो अभी तक भरी-2 सी लग रही थी, एकदम एकदम खाली खाली सी हो गयी..…

निशा को ये पसंद नही आया और उसने गीले लंड को अपनी मुट्ठी में भरके फिर से अपनी चूत के मुँह पर रखा और अपनी गान्ड को उपर की ओर उचका दिया.

लेकिन मैने कमर उपर करके उसके बार को खाली जाने दिया और उसके होठों को चूसने लगा….

कुछ देर उसके होठ चूसने के बाद, निशा की कमर पकड़ कर अपने उपर बिठा लिया और खुद बिस्तर पर लेट गया.

वो अपने दोनो पैरों को मेरे कमर के साइड में करके अपने चूत को मेरे लंड पर रख कर उसके उपर बैठती चली गयी…!

उम्म्म्म…कितना मज़ा है इसमें… अब तक मे इस मज़े से अंजान क्यों रही…?

अब मुझे रोज चुदना है जीजू आपसे… चोदोगे ना..! आहह… हाईए.. कितना मज़ा है आपके इस लंड में…

प्लीज़ ज़ोर से घुसाओ इसे.. मेरी चुचि को चूसो…जीजू… खा जाओ इन्हें आअहह..ऊहह..जीजू… मे गाइ….हहूओ…उउउहह… और वो भरभरा कर पानी छोड़ने लगी..

इधर मेरा भी लंड मुंहाने पर ही था.. सो वो भी फुट पड़ा.. और अपनी सारी मलाई उसकी कुप्पी में उडेल दी.

निशा का ये लंड से पहला एनकाउंटर था, अब तक वो शायद अपनी चूत को मसल मसल कर ही मज़ा लेती रही हो.

वो तृप्त हो कर मेरे सीने पर पड़ गई और लंबी-2 साँसें भर कर सीने से चिपकी रही.

कुच्छ देर के बाद वो मेरे उपर से उठी, तब जाकर लंड उसकी चूत से बाहर आया, साथ ही ढेर सारा दोनो का रस भी.

निशा ने तौलिया लेकर अपनी चूत और मेरे लंड को सॉफ किया और फिर उसको हाथ में लेकर उसे चूम लिया और बोली- मेरा राजा बेटा…उूउउम्म्मचह….

फिर हम दोनो नंगे एक दूसरे से लिपटे ही सो गये.

उधर उसकी त्यागमयी बेहन अपने पति के होते हुए, अपनी चूत को हाथ से मसल मसल कर अपना पानी निकाल कर सो गयी ..…

मे जिस डर से बचता आ रहा था वही अब सामने था,

निशा को एक बार लंड का चस्का क्या लगा, अब तो वो मौके ही ढूदती रहती थी, लेकिन मैने उसको कंट्रोल मे रहने के लिए प्यार से समझा बुझा दिया था,

जो कुछ-2 उसकी समझ में आ गया, लेकिन फिर भी नयी-2 चुदास, तो समय निकाल कर जब तब करनी पड़ती उसकी भी सर्विस.

ट्रिशा की ड्यूटी शांति पूर्वक चल रही थी, वैसे भी गुजरात में यूपी जैसी अशांति नही थी. तो उसको कोई प्राब्लम नही होनी थी.

कुछ दिन बाद निशा अपने एग्ज़ॅम देने चली गयी, उसके बाद ही उसकी शादी भी हो जानी थी.

इसी दौरान लोक सभा के एलेक्षन हुए, और कोलिशन की सरकार सेंटर में बन गयी, किसी पार्टी को क्लियर मॅनडेट नही मिला था, तो बहुत सारे देश भर के दल मिलकर एक सरकार बना दी गयी.

ये तो जग जाहिर है, कि नेता लोग अपने मन मुतविक अधिकारियों को नियुक्त करते हैं, अब सरकार गयी तो अधिकारियों के काम भी गये.

पर्फॉर्मेन्स नाम की कोई चिड़िया भी होती है, नेताओं को पता ही नही होता है, अजीब सी डेमॉक्रेसी है अपने देश की.

जिनको अपने घर संभालना नही आता वो देश को संभालते हैं. खैर जो होना होता है वही होके रहता है.

चौधरी साब को भी एनएसए पद से हटा कर किसी दूसरी बेकार सी जगह डाल दिया गया.

अब देखना होगा कि नये एनएसए महोदय कैसे मॅनेज करते हैं या डॅमेज करते हैं.

 
अब देखना होगा कि नये एनएसए महोदय कैसे मॅनेज करते हैं या डॅमेज करते हैं.

कुछ दिन बाद ही एक मैल आ गया कि एनएसएसआइ को ख़तम करके रॉ में मर्ज किया जा रहा है, जो अब सीधे होम मिनिस्ट्री को डाइरेक्ट रिपोर्ट करेगी.

रॉ डाइरेक्टर ने सभी एजेंट्स को लेकर एक मीटिंग बुलाई और सभी के ग्रूप बना कर उन्हें मिसन दे दिए गये.

गनीमत थी कि रॉ में कोई चेंज नही किया गया था, तो कम-से-कम एक अनुभवी आदमी के अंडर काम करने का मौका मिला.

हमारे ग्रूप में 15 लोग थे जिनको देश के अंदर पनप रहे नक्सल बाद पर नज़र रख कर उनके मंसूबों को विफल करने का हर संभव प्रयास करना था.

इस नये मिसन की वजह से मे निशा की शादी भी अटेंड नही कर पाया था, जिसका ट्रिशा के घरवालों को जबाब देना भारी पड़ गया.

हमें बोलना पड़ा कि कंपनी के काम से मुझे आउट ऑफ कंट्री जाना पड़ा है.

मेरे पुराने मिसन की सफलता के आधार पर मुझे इस टीम का लीडर बना दिया गया, सौभाग्य से विक्रम और रणवीर जो ज़फ़्फरुल्लाह वाले केस में मेरी स्पेशल डिमॅंड पर मेरा साथ देने आए थे वो भी हमारे ग्रूप में ही थे.

सबसे पहले हमने कंट्री के मॅप में उन हिस्सों को हाइ लाइट किया जहाँ नकशलिस्म पनप चुका था जिनमें एंपी का कुछ हिस्सा (जो आज छत्तीसगढ़ में है), बिहार का हिस्सा (जो आज झारखंड में है), वरषा, वेस्ट बंगाल, आंध्रा प्रदेश और तमिलनाडु प्रमुख राज्य थे.

हमने 3-3 लोगों के 5 सब ग्रूप बनाए और हर ग्रूप को एक निर्धारित एरिया सौंपा गया.

सब ग्रूप (एस) को नंबर से डिफाइन किया जैसे एस1, एस2..लाइक तट..

एस1 को वेस्ट बंगाल का हिस्सा, स2 ओरिसा, स3 बिहार, स4 आंध्र+तमिल नाडु आंड स5 एंपी+ (एंपी+ सम पार्ट ऑफ गुजरात+सम पार्ट ऑफ यूपी).

मेरा ग्रूप स5 था, जिसमें मेरे साथ विक्रम और रणवीर हम तीनों दोस्त थे. ये ग्रूप के डिविषन सर्व सम्मति से ही बनाए गये थे.

हर एक ग्रूप को एक ट्रांसमीटर दिया गया, जो कोडेड था, जिसका मतलब होता कि अगर उस पर कोई कनेक्ट होना था, इसका मतलब कोई अर्जेन्सी है और फ़ौरन कॉंटॅक्ट करना है, साथ ही वो एक दूसरे की दिशा निर्देशन भी करेगा.

वीक वाइज़ हर ग्रूप को प्रोग्रेस रिपोर्ट देनी थी, जो कंबाइन करके रॉ ऑफीस को भेजनी होती.

ये सब डिसाइड करके हम सब एक दूसरे से अलग हुए. और यथोचित रिज़ल्ट की उम्मीद में मिसन पर लग गये…

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बस्तेर से दंतेवाड़ा के बीच का घना जंगली इलाक़ा, अचानक किसी औरत की दर्दनाक चीखों से दहल उठा,

चीखें इतनी दर्दनाक थी, कि पत्थर दिल इंसान का दिल भी तड़प उठे, लेकिन वो चार लोग जो उसके साथ कुकृत्य कर रहे थे, उनमें शायद दिल नाम का कोई ऑर्गन्स ही मौजूद नही था.

वो चारों एक विशेष तरह के डार्क ग्रीन मोटे से कपड़े की एक जैसी उनफ़ॉर्म में थे जो शायद महीनों से सॉफ ही ना की हो,

जिनके सर से बँधा हुआ कपड़ा मुँह को भी ढकने में काम आता था,

लेकिन इस समय उनके मुँह ढके हुए नही थे पक्के रंग की चमड़ी वाले ये दानव सरिके लोग, जिनके चेहरों पर बढ़ी हुई दाढ़ी, जो शायद महीनों से शेव नही की हो.

अक-47 जैसी राइफल से लेश, जो इस समय पास ही एक पेड़ की जड़ में रखी हुई थी एक युवती को चारों ओर से घेरे हुए.

मध्यम कद की वो युवती पेड़ों के सूखे पत्तों पर पड़ी बिलख-2 कर उनसे छोड़ देने की विनती कर रही थी जिसका उन शैतानों पर कोई असर नही पड़ रहा था.

वो ज़मीन पर पड़ी नग्न अवस्था मैं निरीह घायल हिरनी की तरह उनसे दया की भीख माँग रही थी.

उनमें से एक शैतान उसके साथ अपनी काम पिपासा शांत करने में जुटा हुआ था और वाकी के तीनों अपने-2 लंड पेंट से बाहर निकाले मसल्ते हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहे और साथ-2 युवती के नाज़ुक अंगों को नोचते जा रहे थे.

वो बेचारी अबला नारी सिवाय चीखने और बिल्खने के अलावा और कुछ भी करने की स्थिति में नही थी.

जैसे ही पहला वाला शख्स अपनी काम पिपासा शांत करके हटा ही था कि दूसरा लग गया और पूरी ताक़त के साथ उसने अपना मूसल जैसा लंड उसकी छत-विच्छत पहले वाले के वीर्य से सनी योनि में पेल दिया.

आयययययीीईईईईईईईईईईई….. एक दिल दहला देने वाली चीख उस नवयौवना के मुँह से फिर एक बार उबल पड़ी और वो बुरी तरह छटपटाने लगी.

इस तरह से वो तीन लोग उसके साथ पाशविक तरीक़े से अपनी वासना की आग शांत कर चुके थे.

अब चौथा व्यक्ति उसके उपर आया जिसका लंड शायद उन तीनों से भी लंबा और तगड़ा लग रहा था, वो युवती उसके लंड को देख कर ही अपनी चेतना खो बैठी,

अभी वो अपने मूसल को उस बेहोश हो चुकी युवती की घायल यौनी में डालने ही वाला था कि एक गोली की आवाज़ हुई और वो चौथा व्यक्ति पीछे की ओर गिरता चला गया.

अपने साथी को इस तरह गिरता देख वो तीनों हक्के-बक्के से अभी खड़े ही हुए थे कि धाय-धाय-ढायं…, और वो तीनों की भी प्राण लीला समाप्त हो गयी.

तभी वहाँ 3 नकाब पोश प्रकट हुए और उस लड़की के पास पहुँचे.

वो पूरी तरह नग्न अवस्था में थी जिसके सभी नाज़ुक अंगों पर नोच खरोंच के निशान बने हुए थे, जिनमें से खून भी रिसने लगा था.

उन नकाब पोषों ने उस बेहोश युवती को उसके फतेहाल कपड़ों से जैसे-तैसे करके उसको ढका,

एक ने उसे अपने कंधे पर लादा, और दूर खड़ी अपनी जीप में डालकर बस्तेर की ओर निकल गये…..

ये एक छोटा सा दो कमरों का घर हमने बस्तर शहर के बाहरी इलाक़े में किराए पर ले रखा था,

जिससे हम आस-पास के जंगलों और इलाक़े की खाक-छान कर जब लौटें तो एक आराम करने के लिए सुरक्षित स्थान हो.

इसी में हमने उस लड़की के बेहोश शरीर को लाकर रखा, और उसका गुप्त रूप से उपचार करने लगे.

हमें यहाँ रहते हुए 3 महीने बीत चुके थे, और वहाँ के नक्सलियों से संबंध रखती हुई आस-पास की बहुत सी जानकारिया भी हम निकाल चुके थे,

इसी छान-बीन के चलते ये लड़की वाला हादसा हमारी आँखों के सामने हुआ जिसे हमने उन दरिंदों से बचा तो लिया…

लेकिन उसके साथ हुए हादसे को नही टाल पाए, क्योंकि जब हम सफ़ारी करते हुए सर्च कर रहे थे, तब हमें उसकी चीखें सुनाई पड़ी..

जिन्हें सुनकर हम वहाँ तक पहुँचे थे, लेकिन हमारे पहुँचने तक वो तीन लोग इसके साथ बलात्कार कर चुके थे…

पूरे 24 घंटे बेहोश रहने के बाद उस युवती को होश आया तो उसने अपने आप को एक आरामदायक बिस्तेर पर पाया, अभी भी उसकी आँखें बंद ही थी,

जिन्हें वो उसके मन मस्तिष्क पर छाये भय के कारण खोलने से भी डर रही थी.

उसकी चेतना अब वापस लौट आई थी लेकिन आँखें अभी भी बंद किए हुए थी, वो अपनी वास्तुस्थिति से परिचित होना चाहती थी.

उसे अपने पूरे शरीर में दर्द की लहरें सी उठती महसूस हो रही थी, ख़ासकर उसकी जांघों के जोड़े पर अत्यंत पीड़ा हो रही थी, जिस कारण से उसके चेहरे पर पीड़ा के भाव सॉफ दिखाई दे रहे थे.

 
आख़िरकार उसने अपनी आखें खोलकर देखा कि वो इस समय कहाँ और किन लोगों के बीच, किन हालातों में है…

जैसे ही उसने अपनी आँखें खोली, तीन शख्स उसके बिस्तर के पास खड़े दिखाई दिए, वो अपनी पूर्व-बात स्थिति समझ कर फिर से चीखने वाली थी कि उनमें से एक शख्स (मे) ने उसका मुँह बंद कर दिया और उसे समझाने लगा.

देखो ! डरो नही, हम वो नही हैं जो तुम्हारे साथ रेप कर रहे थे, हम तुम्हें बचाकर यहाँ लाए हैं. अब तुम्हें घबराने की ज़रूरत नही है.

व.व.वू.. फिर से लेजाएँगे मुझे, रोते हुए बोली वो..

मे - नही अब वो तुम्हें नही ले जा सकते, वो सब मर चुके हैं..

वो - क्या..? कैसे..? वो तो बड़े ख़तरनाक लोग थे..! उन्हें किसने मारा..?

मे - हमने उन चारों को मार दिया है, और तुम्हें वहाँ से ले आए हैं, अब तुम्हें कोई हानि नही पहुँचाएगा.

वो - लेकिन आप लोग कॉन हैं..?

मे - हमें तुम अपना दोस्त ही समझो, और सारी बात बताओ कि क्या हुआ था तुम्हारे साथ..!

उसने उठने की कोशिश की लेकिन शरीर के दर्द ने उसे उठाने नही दिया, तो मैने उसे सहारा देकर बिठाया और उसकी पीठ के पीछे तकिये का सहारा लगा कर बेड से टेक लगा कर बिठा दिया.

उसने अपने शरीर पर नज़र डाली, जो जगह-2 से नोच-खरोंच से भरा हुआ था, जहाँ अब मलम लगी हुई थी.

अपनी आँखों में पानी लाकर उस युवती ने बोलना शुरू किया-

मेरा नाम नीरा है, अपने माँ-बापू के साथ गाँव में रहती हूँ.

गाँव शहर से ज़्यादा दूर होने के कारण पढ़ लिख भी नही पाते हैं बच्चे, सो में भी नही पढ़ पाई, बस 5वी तक की शिक्षा ही ले पाई.

मेरा एक छोटा भाई भी था, मे अपने गाँव की सबसे सुंदर लड़की थी.

ये लोग जंगलों में रहकर वहाँ से लकड़ी और जंगली जानवरों को मार कर उनका व्यापार करते हैं, कभी-2 घूम फिर कर हमारे गाँव भी आ जाते थे.

हमारे घर वाले, जब ये लोग आते थे तो अपने-2 बच्चों को छिपा देते थे जिससे इन लोगों की नज़र ना पड़े और ये कुछ नुकसान ना पहुँचा सकें.

कल ये लोग आकस्मात हमारे गाँव में आ गये, इससे पहले कि मे और मेरा भाई कहीं छिप्ते, इन्होने हमें देख लिया और पकड़ लिया.

हम दोनो को ज़बरदस्ती जंगल की ओर ले जाने लगे जब मेरे माँ-बापू ने हमें छुड़ाने की कोशिश की तो उन लोगों ने उन दोनो को गोली मार दी, और फिर मेरे भाई को भी मार दिया, और मुझे उठा ले गये..

इतना कहते-2 वो फुट-2 कर रोने लगी.

मे - देखो नीरा ! तुम रोओ नही, हमें पता है तुम एक बहादुर लड़की हो. वैसे तुम्हारी उम्र क्या है अभी.

वो- 19 साल…!

मे- तुम्हें उनके दूसरे साथियों का पता है कि वो कहाँ रहते हैं..?

वो- ऐसे लोगों का कोई एक ठिकाना तो होता नही है बाबूजी, यहाँ तो जंगल का समंदर सा फैला हुआ है, कही भी आते- जाते हैं ये लोग.

मे - वैसे तुमने ज़्यादा से ज़्यादा कितने लोगों को देखा है ऐसे..!

वो - कभी-2 तो ये 20-25 तक भी आते थे.

मे - अब तुम कहाँ जाना चाहोगी..? आगे क्या करना है..?

वो - अब मेरा कॉन बचा है जिसके पास जाउन्गी, वैसे भी ये मेरी जिंदगी तो अब नरक बन चुकी है, जीने में रखा ही क्या है ? अब तो मेरे मर जाने में ही भलाई है.

मैने उसे समझाते हुए कहा - देखो नीरा ! मरने से आज तक किसी का भला नही हुआ है, भगवान ने ये जीवन दिया है जीने के लिए, इसे ऐसे ही ख़तम नही करना चाहिए.

तुम एक बहादुर लड़की हो, हम चाहते हैं, कि तुम इस जीवन का मुक़ाबला पूरी बहादुरी से लड़ते हुए करो.

वो सुबक्ते हुए बोली - अब मे अकेली क्या मुक़ाबला करूँगी जिंदगी का ? कहाँ जाउन्गि..? मेरे पास बचा ही क्या है जीने के लिए..?

मे - क्या तुम ये नही चाहोगी कि तुम्हारी तरह कोई और नीरा अनाथ ना हो..?

वो - मेरे चाहने ना चाहने से क्या होता है बाबू साब..!

मे - अगर होता हो तो….! देखो ! अगर तुम चाहो तो बहुत कुछ हो सकता है, हम तुम्हें इस काबिल बनाएँगे कि तुम जमाने की मुश्किलों का सामना डटकर कर सको.

और अपने परिवार की मौत का बदला भी ले सको, ताकि फिर कोई मज़लूम इस तरह से असहाय और बेबस ना हो.

वो – लेकिन ये होगा कैसे..?

मे - वो सब तुम हम पर छोड़ दो, तुम बस ये बताओ, कि तुम इनके खिलाफ लड़ना चाहती हो या नही, इसमें हम तुम्हारा पूरा साथ देंगे.

वैसे भी तो तुम मरना ही चाहती हो, अगर वो मौत किसी के काम आ सके, किसी का भला करते हुए आए तो जीवन सफल हो जाता है, है ना !

वो - हमम्म… ! ठीक है, आज से आप लोग जैसा कहेंगे मे वैसा ही करूँगी…, वैसे भी ये जिंदगी तो आप ही की लौटाई हुई है.

मे - शाबास ! ये हुई ना कुछ बात…!

फिर मैने उसे उसकी सारी दबाईयाँ देते हुए समझाया - लो ये सब तुम्हारी दबाइयाँ हैं, इनको समय से खाना है, और ये ट्यूब अपने ज़ख़्मों पर लगाना है दिन में दो बार, उस जगह पर भी. समझ गयी.

मेरी बात का मतलब समझते हुए, थोड़ा शरमाते हुए उसने सर हिलाकर हामी भरी..!

मैने आगे कहा - घर में खाने पीने की सभी चीज़ मौजूद हैं, तो खुद पकाना और समय से खाना, हम लोग कुछ दिनो के लिए बाहर जा रहे हैं तब तक तुम अच्छी तरह से अपनी देखभाल करना,

जब हम लोग लौट के आयें तो हमें हमारी शेरनी पूरी तरह स्वस्थ मिलनी चाहिए..! ठीक है..!

और हां ! बिना काम के ज़्यादा देर घर से बाहर मत जाना, किसी से मेल-जोल बनाने की भी ज़रूरत नही है, और ना ही फालतू इधर-उधर जाना है, समझ गयी.

उसने मुस्करा कर हामी भरी, अब उसके चेहरे पर कुछ ध्रड निश्चय के भाव नज़र आरहे थे…

फिर हम तीनों दोस्त उसे अकेला छोड़कर बाहर निकल गये..!

 
हम नीरा को वहाँ छोड़ कर और उसका सारा कुछ रहने खाने का उसके लिए 4-6 जोड़ी कपड़ों का भी इंतज़ाम करके हम तीनों अपने-2 घरों को निकल लिए.

ओवर नाइट की जर्नी करके मे कोई सुबह के 4 बजे अपने घर पहुँचा…

काफ़ी देर के बाद तो साले बंगले पर तैनात संतरी ने मेन गाते खोला….

अब इसमें बेचारे संतरी की भी क्या ग़लती थी… रात भर की ड्यूटी के बाद, ये समय ऐसा होता ही है, कि झपकी लग ही जाती है, और वो भी ऐसी लगती है, कि कान पर नगाड़े बजते रहें आदमी की नीद नही खुलती…

खैर वो अलसाया हुआ आया, मेरी गाड़ी में झाँक कर चेक किया और फिर सल्यूट देकर गेट खोलते हुए बोला…

सॉरी सर, तोड़ा आँख लग गयी, प्लीज़ आप मेडम को मत बोलना, वरना मेरी क्लास ले लेंगी…

मैने कहा – कोई बात नही मे समझ सकता हूँ, इस समय की नीद कैसी होती है, वो भी रात भर जागने के बाद…

खैर एक किला फ़तह कर लिया था, लेकिन असली अभी वाकी था, तो बंगले के पोर्च में गाड़ी खड़ी करने के बाद मे गाड़ी से नीचे आया और डोर बेल बजाई..

एक बार, दो बार… लगातार 10 मिनट बेल बजाने के बाद तब कहीं जाकर अंदर से एसीपी साहिबा की अलसाई हुई आवाज़ सुनाई दी… कॉन है…?

मैने आवाज़ बदल कर कहा – में साब दूधवाला…

ट्रिशा स्लीपर चटकाते हुए बड़बड़ाती हुई गेट की तरफ बढ़ी… दूधवाला..? आज क्या हुआ जो इतने सबेरे – सबेरे दूध लेकर आ गया… लगता है, रात को भांग ज़्यादा चढ़ा ली इसने, जो समय का पता ही नही चला…

आती हूँ रामू.. ये कहती हुई वो डोर तक आई, और जैसे ही गेट खोला ….

सामने मुझे खड़ा देख कर उसकी सारी नींद की खुमारी भाग खड़ी हुई..

मेरे सीने पर घूँसे बरसाते हुए बोली – आप बहुत सताते हो मुझे… सीधे – 2 बोल नही सकते थे…, इतना कहकर मेरे सीने से लिपट गयी…

आप इतने सुबह-2 कैसे आए, फिर पोर्च में गाड़ी पर नज़र पड़ते ही बोली – हे भगवान, सारी रात ड्राइविंग करके आए हो…

मैने चुटकी लेते हुए कहा – नही तो ! तुम्हें पता नही ये गाड़ी हवा में उड़ भी सकती है… अब चलो अंदर या यहीं से धक्के देकर भगाने का इरादा है…

वो – ओह सॉरी ! और मेरी कमर में बाहें लपेट कर हम अंदर आ गये..

मैने कहा – गेट खोलने में इतना समय क्यों लगा तुम्हें, तुम तो सुबह जल्दी उठने की आदि हो…

वो बोली – अरे कल गाँधीनगर जाना पड़ा, आते आते रात का 1 बज गया.. 2 बजे जाकर सोना हुआ इसलिए…

मे – ओह ! सॉरी डार्लिंग, मैने तुम्हें डिस्टर्ब कर दिया…

वो – ओह ! जानू इसमें सॉरी की क्या बात है, इट्स ओके, आज मुझे कहीं नही जाना, आज बस अपने साजन की बाहों में ही सारा दिन गुज़ारना है…

फिर ट्रिशा ने हम दोनो के लिए चाय बनाई, और फिर फ्रेश होकर हम एक दूसरे की बाहों में लिपटे पलंग पर लेट कर बातें करते रहे…

ना जाने कब हमें नींद ने आ दबोचा… मेरी नींद 12 बजे जाकर खुली…

तबतक उसने नहा धोकर नाश्ते का इंतेज़ां करा लिया, मैड आकर सारा काम निपटा कर जा चुकी थी…

मैने उठकर सीधा नाश्ते पर धाबा बोल दिया… और एक बार फिर हम अपने बेडरूम में आ गये…

बेडरूम में आते ही ट्रिशा मेरे बदन से लिपट गयी… मैने उसके होठों को चूमकर पुछा – क्या बात है मेरी जान बड़ी उतावली हो रही हो…

वो मेरी बालों से भरी छाती को अपनी हथेली से सहलाते हुए – मुझे अब एक नन्हा अरुण चाहिए जिसके साथ में खेल सकूँ…

आप तो इतने-2 दिनों के लिए चले जाते हो, मुझे भी तो कोई चाहिए अपने साथ जो अपना हो…

बात उसकी जायज़ थी, सो मैने उसके अनारों को सहलाते हुए पुछा – ये समय सही है..?

वो मेरे लंड को सहलाते हुए बोली – एकदम परफेक्ट, कल ही पीरियड बंद हुए हैं..

इतना सुनते ही, मैने उसके गाउन की डोरी खींच दी, और उसे अपनी गोद में उठाकर बेड की तरफ ले जाते हुए बोला – नेकी और पुछ-पुछ, हम अभी एक बेबी का इंतज़ाम करे देते हैं अपनी बेगम साहिबा के लिए…

 
ट्रिशा को बेड पर लिटाकर मैने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और बेड पर छलान्ग लगा दी…

ट्रिशा अभी भी वाइट कलर की ब्रा और पेंटी में थी, मैने उसे अपने उपर लेलिया…

वैसे भी शुरू से ही उसे मेरी सवारी करने में ज़्यादा मज़ा आता था, ट्रिशा के एक्सप्रेशन बता रहे थे, कि वो सेक्स के लिए कितनी उतावली हो रही थी…

इधर मे भी तो कई महीनों से रुका पड़ा था…

मैने उसे खुली छूट दे दी, जो उसके जी में आए वैसे करे…

तो कुछ देर तक वो अपनी मुनिया को पेंटी के उपर से ही मेरे लंड पर रगड़ती रही,

मैने पीछे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा को खोल दिया, और उसके कसे हुए अनारों को अपनी मुट्ठी में कसकर मसल दिया…

आअहह………ससिईईईईईईईईईईईई….जानुउऊउउ….और ज़ॉर्सीईए…मसालूओ…इन्हीन्णन्न्..बहुत तंग करते हैं… आपकी याद में…

उसने झुक कर मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया… मैं उसकी पेंटी में हाथ डालकर उसके मस्त कसे हुए नितंबों को मसल्ने लगा…

ट्रिशा की पेंटी अब गीली होने लगी थी, सो उसने उसे निकाल फेंका, और अपनी कसी हुई मुनिया के होठों को फैलाकर मेरे लंड पर बैठती चली गयी…

ट्रिशा ने अपने होठों को कसकर बंद कर लिया, वो मीठे-2 दर्द को पीते हुए धीरे-2 करके मेरे पूरे साडे 8 इंच के सोट को निगल गयी…

कुछ देर वो उसे अपनी बच्चे दानी के मुँह तक फील करके बैठी रही, फिर मैने उसके कुल्हों पर थपकी दी, तो मानो वो नींद से जागी हो,

और मुस्करा कर अपनी कमर को जुम्बिश देते हुए बोली – आअहह… जानू, बहुत बड़ा है आपका, मेरे अंदर तक पहुँच रहा है…

सस्सिईईई….. मेरे बलम मुझे जल्दी से माँ बना दो…और सिसकते हुए वो अपनी गान्ड को उपर नीचे करने लगी…

मेरा लंड उसकी चूत में एकदम फूल चुका था, जो ट्रिशा की कसी हुई मुनिया को जबदस्ती चौड़ा किए हुए था…

मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी, अब मेरे लंड का काम ट्रिशा के हल्के-फुल्के धक्कों से चलने वाला नही था,

सो उसकी कमर में अपने हाथों का सहारा देकर नीचे लिया, और उसकी टाँगों को पेट से सटा कर जबरदस्त धक्कों से उसकी चुदाई करने लगा…

ट्रिशा जल्दी ही पानी छोड़ गयी, लेकिन मेरा अभी आधा सफ़र ही तय हुआ था…

कुछ देर उसे मेरे धक्कों से परेशानी हुई, लेकिन जल्दी ही वो फिर से लय में आ गई…

और अंत में मैने एक हेलिकॉप्टर शॉट लगाकर अपनी पिचकारी उसकी बच्चेदानी में छोड़ दी, जिसकी गर्मी पाकर वो फिर से एक बार भल्भलाकर झड़ने लगी…

कितनी ही देर तक में उसके अंदर फाइरिंग करता रहा फिर उसके बगल में आकर उसे सीधे करवट लिटा दिया…

एक घंटे तक वो यौंही पड़ी रही, थकान से चूर…

कुछ देर बाद फ्रेश होकर एक बार फिर एक दूसरे में खो गये…!

शाम ढले तक हम दोनो ही अपने मनमाने ढंग से अपनी प्यास बुझाते रहे, ट्रिशा इस खेल में जल्दी पस्त हो जाती थी…

दिन ढले हम फ्रेश होकर बाहर हॉल में आ गये, वो किचेन में चाय बनाने चली गयी, मैने टीवी ऑन कर लिया…

हम दोनो अभी टीवी देखते हुए चाय की चुस्कियाँ ले ही रहे थे, कि तभी डोर बेल बजने लगी..

ट्रिशा ने उठकर गेट खोला, और जैसे ही उसकी नज़र आनेवाले पर पड़ी… तुउुउउ………चीखते हुए वो उसके गले से लिपट गयी….

सामने दरवाजे पर निशा अपने पति के साथ खड़ी थी, राहुल उसका पति, जो ऋषभ के साथ ही जॉब करता था, और उसी ने ये रिश्ता करवाया था…

राहुल एक मध्यम कद काठी का व्यक्ति था, चाल ढाल से ही थोड़ा दब्बु किस्म का लगता था…

ट्रिशा दोनो को लेकर अंदर आई, राहुल के साथ मे पहली बार मिल रहा था, उसने हाथ जोड़कर मुझसे नमस्ते किया, जबाब मे मैने उसे अपने गले से लगा लिया…

निशा मुझसे लिपटने के लिए लपकी, लेकिन मैने इशारे से उसे रोक दिया…

एक दूसरे के हाल चाल जाने, फिर उन दोनों को एक अलग कमरे में पहुँचा कर ट्रिश मेरे पास आकर बैठ गयी…

मैने ट्रिशा को ऐसे ही बोल दिया – मुझे लगता है, राहुल कुछ दब्बु टाइप का लड़का है… निशा इसे अपनी उंगलियों पर नचाती होगी..

वो मेरी तरफ गौर से देखते हुए बोली – आपको कैसे लगा कि वो उसे नचाती होगी…

मे – बस उसकी बॉडी लॅंग्वेज से लगा मुझे, विश्वास ना हो तो निशा को पुच्छ के देख लेना… वैसे तुम किस तरह की पोलीस ऑफीसर हो, आदमी को देख कर उसका नेचर नही जान सकती..

ट्रिशा – सच कहूँ तो मुझे भी ऐसा लगा, लेकिन मैने इस बात पर ज़्यादा विचार नही किया…

अभी हम ये सब बातें कर ही रहे थे, कि वो दोनो चेंज करके हॉल में आ गये,

मे राहुल से उसके काम धंधे के बारे में पुच्छने लगा, उधर वो दोनो बहनें आपस में बातें करती रही,

रात का खाना हमने बाहर किसी अच्छे से होटेल में खाया….!

उस रात हम दोनो पति पत्नी, एक राउंड गरमा गरम चुदाई करके एक दूसरे की बाहों में लिपटे पड़े थे,

अभी कोई 12 बजे का वक़्त हुआ होगा, कि हमारे रूम के गेट पर हल्की सी दस्तक हुई…

हम दोनो की नज़रें आपस में टकराई, फिर मैने अपना अंडरवेर पहना, और गाउन डालकर उसकी डोरी बाँधते हुए डोर की तरफ बढ़ गया…

ट्रिशा ने अपने नंगे बदन पर बेडशीट डाल ली…

मैने जैसे ही अपने बेडरूम का गेट खोला… सामने का नज़ारा देख कर हम दोनो का ही मुँह भाड़ सा खुला रहा गया…!

निशा इस समय एक बहुत ही झीना सा शॉर्ट गाउन डाले हुए दरवाजे पर खड़ी थी, जिसमे से उसके बदन की छटा साफ-साफ दिखाई दे रही थी,

उसके दशहरी आम, उनके सिरे पर लगे किस्मिष के दाने जैसे उसके निपल, एक दम साफ दृष्टिगोचर हो रहे थे,

नीचे वो एक बहुत सेक्सी सी लिंगरी पहने हुए थी,

सामने निशा को इस रूप में देखकर ट्रिशा भी बेडशीट को अपने उपर खींचते हुए बैठने पर मजबूर हो गयी…!

निशा के इस जान मारु रूप को देख कर मेरे लंड ने एक जबरदस्त ठोकर अंडरवेर के अंदर मारी…!

निशा मेरी आँखों में झाँकते हुए मंद-मंद मुस्करा रही थी…

मेरे सीने पर एक हाथ रख कर उसने मुझे अंदर को धकेला और दूसरा हाथ पीछे ले जाकर रूम का गेट भेड़ दिया…

ट्रिशा से रहा नही गया, और थोड़ा नागवारी भरे लहजे में उसने निशा को लताड़ते हुए कहा –

ये क्या हिमाकत है निशा, तू इस तरह से हमारे कमरे में चली आई, बड़ी बेहन और जीजू का कोई शर्म लिहाज नही है तुझे…

और अगर तेरे पति को पता चला तो वो क्या सोचेगा… थोड़ा सा तो परदा रख.

ट्रिशा की बात का उसके उपर जैसे कोई असर ही नही हुआ… और वो मुझे अपनी बाहों में लपेटे, लगभग घसीटते हुए पलंग तक ले आई…

फिर अपने घुटनों पर बेड के उपर बैठती हुई बोली – ओह कम ऑन दिद… मानती हूँ, आप जीजू की पूरी घरवाली हो, तो आपको पूरा हक़ है उनके साथ कैसे भी रहने का…

लेकिन साली भी तो आधी घरवाली होती है, तो थोड़ा सा हक़ तो मेरा भी बनता है ना…

और रही बात राहुल को पता लगने की, तो उसे तो मैने दूध के साथ इतना बड़ा डोज दे दिया है, कि अब वो सुबह 8 बजे से पहले उठने वाला नही है…!

 
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