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Guest
शराब का दौर शुरू हो चुका था, टीवी ऑन करके रखा था, लोकल न्यूज़ चनेल लगा के रखा था, आज देश भर की खास न्यूज़ दशहरा से संबंधित थी, देश के अलग-अलग हिस्सों से दशहरा मनने की खबरें आ रही थी.
चौधरी नशे की पिन्नक में ही बोला- मनालो खुशियाँ सालो कुछ देर और ! फिर तो ये खुशियाँ मातम में बदलने वाली हैं.. हाहहाहा….!
उसके साथ-साथ वाकी भी अट्टहास करने लगते हैं… !
अभी उनकी हँसी थमी नही थी कि टीवी पर एक न्यूज़ फ्लश होने लगी.
न्यूज़:- देखिए किस तरह से हमारे देश के जवाजों ने एक बहुत बड़ी नक्सली घटना होने से बचाई है,
अब आपके सामने सीआरपीएफ की विशेष टुकड़ी के कमॅंडर बीएस बत्रा आपको बताएँगे कि किस तरह से उन्होने एक बड़ी वारदात होने से बचाई जिसमें सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी और ना जाने कितने करोड़ का नुकसान हो सकता था.
फिर टीवी स्क्रीन पर कमॅंडर बत्रा दिखाई दिए और उन्होने बोलना शुरू किया..
हमें इंटेलिजेन्स रिपोर्ट से ग्यात हुआ कि कोई नक्सली ग्रूप एक बहुत बड़ी वारदात को अंजाम देने वाला है,
उनका प्लान दशहरे के मेले को टारगेट करना था. करीब 125-150 नक्सली आधुनिक हथियारों से लेश अटॅक करने के लिए तैयार थे.
हो सकता था, बॉम्ब वग़ैरह से विस्फोट भी कर सकते थे वो लोग.
हमने उनकी लोकेशन को ट्रेस किया और अपने जवानों के दस्ते को गुप्त रूप से लेजा कर उन्हें घेर लिया और वक़्त रहते हुए उनके मंसूबों को ध्वस्त करके उन्हें उनके अंजाम तक पहुँचा दिया.
फिर स्क्रीन पर वो सब मंज़र दिखाया गया, जहाँ नक्सलियों की छत-विच्छित लाशें ही लाशें पड़ी थी.
कमॅंडर ने आगे बोलते हुए कहा- हमें ये भी पता चला है कि इस साजिश के पीछे कुछ सफेद पॉश देश द्रोहियों का हाथ है,
जिनके नाम अभी तक हमें पता नही है, लेकिन जल्द ही उनका भी यही अंजाम होनेवाला है….!
क्योंकि आज का ये पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए ही मनाया जाता है, तो अच्छाई अभी तक ख़तम नही हुई है,
आज भी इस देश में सच्चे सपूत मौजूद हैं जो हर संभव उन रावनो का वध करते रहेंगे जो हमारे देश को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं.
अब हम आशा करेंगे कि हमारे देश के लोग इस पर्व को धूम-धाम से मनाएँ ताकि उन देश द्रोहियों के मंसूबे मिट्टी में मिल जाएँ. “ज़य हिंद” “वन्दे मातरम”.
इतना सुनते ही इन चारों के चेहरों पर बारह बज गये, उत्तेजना और आक्रोश की अधिकता में चौधरी ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ ग्लास ही टीवी स्क्रीन पर दे मारा,
छ्हन्नक की आवाज़ से टीवी का स्क्रीन टूट गया और उसमें भक्क से आग लग गयी.
ये नही हो सकता…? चौधरी पूरी ताक़त से चिल्लाया, हम ऐसे मात नही खा सकते..?
ये मिसन लीक कैसे हुआ..? बोला एंपी.
प्रताप- इतना गोपनीया मिसन आख़िर लीक कैसे हुआ..? ज़रूर कोई ख़ुफ़िया एजेन्सी हमारे आस-पास सक्रिय है, अगर ऐसा है तो अब उन्हें हम तक पहुँचने में ज़्यादा वक़्त नही लगेगा.
सबके चेहरों पर भय की परच्छाइयाँ साफ दिखाई देने लगी, शराब का नशा तो ना जाने कहाँ गायब हो गया था.
अभी वो इस समस्या के बारे में बात कर ही रहे थे, कि उन्हें लगा कि कोई और भी इस हॉल में मौजूद है, जो उनकी गति विधियों पर नज़र रखे हुए है.
वो चारों चोन्कन्ने हो गये और ध्यान देकर इधर उधर नज़रें दौड़ाई, तभी प्रताप को लगा कि पर्दे के पीछे कोई है.
वो चुप-चाप उधर को बढ़ा और नज़दीक जाकर झटके से परदा हटा दिया…
वहाँ नीरा को खड़े देख कर प्रताप का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, उसने उसके बाल पकड़ कर उसे खींचते हुए बाहर लाया.
तो तू है वो भेदी..! जो हमारी सारी खबरें लीक करती है.
बाल पकड़ कर खींचने से नीरा का दर्द से बुरा हाल हो रहा था,
भय से थर-2 काँपते हुए वो बोली- नही मुझे कुछ पता नही है, मैने कुछ नही किया, मुझे छोड़ दो.
प्रताप दाँत पीसते हुए गुर्राया- साली हरम्जादि ! झूठ बोलती है, तूने कुछ नही किया है तो यहाँ छुप कर हमारी बातें क्यों सुन रही थी बोल.
नीरा रोते-2 बोली- आप लोग ज़ोर-ज़ोर से हँस रहे थे इसलिए देखने आई थी, फिर वो न्यूज़ देख कर छुप गयी.
मे सच कह रही हूँ मुझे कुछ पता नही.
तभी चौधरी गुर्राया- प्रताप क्यों समय बर्बाद कर रहा है, इससे पहले कि ये साली कुछ और किसी को कुछ बताए, उड़ा दे साली को.
प्रताप ने फ़ौरन अपनी गन निकाली और नीरा पर तान दी, तभी दूसरी तरफ के पर्दे के पीछे से रॉकी बाहर आया और प्रताप और नीरा के बीच आकर खड़ा हो गया.
रॉकी- हां हम लोग आपकी बातें सुन रहे थे, और ये भी जानते हैं कि आप लोग ही इस सबके पीछे हो, ऐसा क्यों किया पिता जी आपने.. बोलो.
प्रताप अपने बेटे को वहाँ देख कर सकपका गया, लेकिन तुरंत अपने उपर काबू करके हुए बोला-
हट जा रॉकी मेरे सामने से वरना में तुझे भी मार दूँगा.
तभी आवाज़ें सुन कर उसकी पत्नी भी वहाँ आ गई, जब उन्होने अपने पति को अपने ही बेटे के उपर गन ताने हुए देखा तो हड़वाड़ा कर प्रताप की ओर भागी और जाकर उसके गन वाला हाथ पकड़ते हुए बोली-
आप पागल तो नही हो गये, अपने ही बेटे को मारने की बात कर रहे हैं. हो क्या गया है आपको… और वो उसके हाथ से गन छीनने की कोशिश करने लगी.
इसी हाथापाई में ट्रिगर दब गया और …. ढाय…से..एक गोली चली जो सीधी राम दुलारी देवी के सीने को चीरती हुई चली गयी…
हे राम… बस इतना ही निकला उनके मुँह से और उनका मृत शरीर वहीं फर्श पर गिर पड़ा.
प्रताप बौखलाया हुआ कभी अपनी पत्नी की लाश को देखता तो कभी अपनी गन को. उसको कुछ भी समझ नही पड़ा कि आख़िर ये हुआ तो क्या हुआ..?
उधर जैसे ही रॉकी ने अपनी माँ को लाश में तब्दील होते हुए देखा, वो अपना आपा खो बैठा और अपने बाप के उपर झपटा-
हरम्जादे में तेरा खून पी जाउन्गा, तूने मेरी माँ को ही मार डाला…आआ…आअहह…
इससे पहले कि वो अपने बाप तक पहुँचता कि एक और गोली चली जो सीधी रॉकी के भेजे में लगी और वो वहीं ढेर हो गया.
ये गोली चौधरी ने चलाई थी, अपने बेटे और पत्नी का हस्र देख कर प्रताप बौखला गया….
चौधरी नशे की पिन्नक में ही बोला- मनालो खुशियाँ सालो कुछ देर और ! फिर तो ये खुशियाँ मातम में बदलने वाली हैं.. हाहहाहा….!
उसके साथ-साथ वाकी भी अट्टहास करने लगते हैं… !
अभी उनकी हँसी थमी नही थी कि टीवी पर एक न्यूज़ फ्लश होने लगी.
न्यूज़:- देखिए किस तरह से हमारे देश के जवाजों ने एक बहुत बड़ी नक्सली घटना होने से बचाई है,
अब आपके सामने सीआरपीएफ की विशेष टुकड़ी के कमॅंडर बीएस बत्रा आपको बताएँगे कि किस तरह से उन्होने एक बड़ी वारदात होने से बचाई जिसमें सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी और ना जाने कितने करोड़ का नुकसान हो सकता था.
फिर टीवी स्क्रीन पर कमॅंडर बत्रा दिखाई दिए और उन्होने बोलना शुरू किया..
हमें इंटेलिजेन्स रिपोर्ट से ग्यात हुआ कि कोई नक्सली ग्रूप एक बहुत बड़ी वारदात को अंजाम देने वाला है,
उनका प्लान दशहरे के मेले को टारगेट करना था. करीब 125-150 नक्सली आधुनिक हथियारों से लेश अटॅक करने के लिए तैयार थे.
हो सकता था, बॉम्ब वग़ैरह से विस्फोट भी कर सकते थे वो लोग.
हमने उनकी लोकेशन को ट्रेस किया और अपने जवानों के दस्ते को गुप्त रूप से लेजा कर उन्हें घेर लिया और वक़्त रहते हुए उनके मंसूबों को ध्वस्त करके उन्हें उनके अंजाम तक पहुँचा दिया.
फिर स्क्रीन पर वो सब मंज़र दिखाया गया, जहाँ नक्सलियों की छत-विच्छित लाशें ही लाशें पड़ी थी.
कमॅंडर ने आगे बोलते हुए कहा- हमें ये भी पता चला है कि इस साजिश के पीछे कुछ सफेद पॉश देश द्रोहियों का हाथ है,
जिनके नाम अभी तक हमें पता नही है, लेकिन जल्द ही उनका भी यही अंजाम होनेवाला है….!
क्योंकि आज का ये पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए ही मनाया जाता है, तो अच्छाई अभी तक ख़तम नही हुई है,
आज भी इस देश में सच्चे सपूत मौजूद हैं जो हर संभव उन रावनो का वध करते रहेंगे जो हमारे देश को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं.
अब हम आशा करेंगे कि हमारे देश के लोग इस पर्व को धूम-धाम से मनाएँ ताकि उन देश द्रोहियों के मंसूबे मिट्टी में मिल जाएँ. “ज़य हिंद” “वन्दे मातरम”.
इतना सुनते ही इन चारों के चेहरों पर बारह बज गये, उत्तेजना और आक्रोश की अधिकता में चौधरी ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ ग्लास ही टीवी स्क्रीन पर दे मारा,
छ्हन्नक की आवाज़ से टीवी का स्क्रीन टूट गया और उसमें भक्क से आग लग गयी.
ये नही हो सकता…? चौधरी पूरी ताक़त से चिल्लाया, हम ऐसे मात नही खा सकते..?
ये मिसन लीक कैसे हुआ..? बोला एंपी.
प्रताप- इतना गोपनीया मिसन आख़िर लीक कैसे हुआ..? ज़रूर कोई ख़ुफ़िया एजेन्सी हमारे आस-पास सक्रिय है, अगर ऐसा है तो अब उन्हें हम तक पहुँचने में ज़्यादा वक़्त नही लगेगा.
सबके चेहरों पर भय की परच्छाइयाँ साफ दिखाई देने लगी, शराब का नशा तो ना जाने कहाँ गायब हो गया था.
अभी वो इस समस्या के बारे में बात कर ही रहे थे, कि उन्हें लगा कि कोई और भी इस हॉल में मौजूद है, जो उनकी गति विधियों पर नज़र रखे हुए है.
वो चारों चोन्कन्ने हो गये और ध्यान देकर इधर उधर नज़रें दौड़ाई, तभी प्रताप को लगा कि पर्दे के पीछे कोई है.
वो चुप-चाप उधर को बढ़ा और नज़दीक जाकर झटके से परदा हटा दिया…
वहाँ नीरा को खड़े देख कर प्रताप का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, उसने उसके बाल पकड़ कर उसे खींचते हुए बाहर लाया.
तो तू है वो भेदी..! जो हमारी सारी खबरें लीक करती है.
बाल पकड़ कर खींचने से नीरा का दर्द से बुरा हाल हो रहा था,
भय से थर-2 काँपते हुए वो बोली- नही मुझे कुछ पता नही है, मैने कुछ नही किया, मुझे छोड़ दो.
प्रताप दाँत पीसते हुए गुर्राया- साली हरम्जादि ! झूठ बोलती है, तूने कुछ नही किया है तो यहाँ छुप कर हमारी बातें क्यों सुन रही थी बोल.
नीरा रोते-2 बोली- आप लोग ज़ोर-ज़ोर से हँस रहे थे इसलिए देखने आई थी, फिर वो न्यूज़ देख कर छुप गयी.
मे सच कह रही हूँ मुझे कुछ पता नही.
तभी चौधरी गुर्राया- प्रताप क्यों समय बर्बाद कर रहा है, इससे पहले कि ये साली कुछ और किसी को कुछ बताए, उड़ा दे साली को.
प्रताप ने फ़ौरन अपनी गन निकाली और नीरा पर तान दी, तभी दूसरी तरफ के पर्दे के पीछे से रॉकी बाहर आया और प्रताप और नीरा के बीच आकर खड़ा हो गया.
रॉकी- हां हम लोग आपकी बातें सुन रहे थे, और ये भी जानते हैं कि आप लोग ही इस सबके पीछे हो, ऐसा क्यों किया पिता जी आपने.. बोलो.
प्रताप अपने बेटे को वहाँ देख कर सकपका गया, लेकिन तुरंत अपने उपर काबू करके हुए बोला-
हट जा रॉकी मेरे सामने से वरना में तुझे भी मार दूँगा.
तभी आवाज़ें सुन कर उसकी पत्नी भी वहाँ आ गई, जब उन्होने अपने पति को अपने ही बेटे के उपर गन ताने हुए देखा तो हड़वाड़ा कर प्रताप की ओर भागी और जाकर उसके गन वाला हाथ पकड़ते हुए बोली-
आप पागल तो नही हो गये, अपने ही बेटे को मारने की बात कर रहे हैं. हो क्या गया है आपको… और वो उसके हाथ से गन छीनने की कोशिश करने लगी.
इसी हाथापाई में ट्रिगर दब गया और …. ढाय…से..एक गोली चली जो सीधी राम दुलारी देवी के सीने को चीरती हुई चली गयी…
हे राम… बस इतना ही निकला उनके मुँह से और उनका मृत शरीर वहीं फर्श पर गिर पड़ा.
प्रताप बौखलाया हुआ कभी अपनी पत्नी की लाश को देखता तो कभी अपनी गन को. उसको कुछ भी समझ नही पड़ा कि आख़िर ये हुआ तो क्या हुआ..?
उधर जैसे ही रॉकी ने अपनी माँ को लाश में तब्दील होते हुए देखा, वो अपना आपा खो बैठा और अपने बाप के उपर झपटा-
हरम्जादे में तेरा खून पी जाउन्गा, तूने मेरी माँ को ही मार डाला…आआ…आअहह…
इससे पहले कि वो अपने बाप तक पहुँचता कि एक और गोली चली जो सीधी रॉकी के भेजे में लगी और वो वहीं ढेर हो गया.
ये गोली चौधरी ने चलाई थी, अपने बेटे और पत्नी का हस्र देख कर प्रताप बौखला गया….