• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

ज़िन्दगी एक सफ़र है बेगाना complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
उसकी नसीली आँखों में एक अजीब सी चाहत तैर रही थी, मानो कह रही हो कि आ जाओ और समा जाओ मुझमें अब और सब्र नही होता.

उसकी झील सी आँखों के पलकों पर चुंबन लेकर में बोला- तुम्हारा अंग-2 कितना हसीन है रेहाना, क्या इसे अपनी खुशी से मुझे सौंपना चाहोगी..?

आहह… मेरे दिलवर… ये तो कब्से आप में सामने को बेकरार है, अब और ना तरसाओ, समेट लो इसे अपनी बाहों में..!

फिर मैने देर नही की और उसके हसीन बदन को उपर से नीचे तक चूमता चला गया,

जब मैने उसकी चूत को उसकी सलवार के उपर से चूमा तो वो बैठ कर दोहरी हो गयी और मुझे खींच कर मेरे होठों पर टूट पड़ी.

होठ चूसने के साथ-2 मैने उसकी सलवार भी उतार दी, बिना पेंटी की उसकी छोटे-2 बालों वाली गुलाबी चूत देख कर मेरा लंड ठुमके लगाने लगा.

मैने अपने कपड़े भी उतार दिए और मात्र अंडरवेर में उसके दोनो टॅंगो के बीच आकर जम गया.

वो मेरी चौड़ी छाती देख कर एक बार फिर उठकर बैठ गयी और कस कर मेरे सीने से लिपट गयी. उसका उतावला पन देख कर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी.

उसकी रसीली चूत को हाथ से सहला कर उसकी जांघों के नीचे हाथ ले जाकर उसकी कमर को उपर उठाया और अपनी जीभ को जैसे ही उसकी चूत के उपर फिराया, उसकी सिसकी फुट पड़ी, ना चाहते हुए उसके मुँह से एक आहह.. निकल गयी…!

आअहह…आशफ़ाक़…. ससिईइ…उफफफफ्फ़…प्लस्सस्स…उऊहह…हाईए…चतूऊ..ईससीई…

उसकी पवरोटी जैसी चूत को अपनी मुट्ठी में लेकर भींच दिया… उसकी कमर हवा में लहरा उठी और उसने पानी छोड़ दिया..

हाँफती हुई वो मेरे सीने से एक बार फिर लिपट गयी और मेरे लंड को मुट्ठी में लेकर ज़ोर से मसल दिया…!

आअहह… क्या करती हो… नाराज़ हो जाएगा ईए…!

होने दो मना लूँगी उस्सीए…!

मे - कैसे…, तो उसने फ़ौरन मेरा अंडरवेर उतार फेंका और मेरे लंड को मुँह में भरके चूसने लगी, और मेरी आँखों में देख कर इशारा किया मानो कह रही हो ऐसे…!

कुछ देर लंड चूसने से वो इतना कड़क हो गया मानो कोई स्टील की रोड हो, अब वो किसी कठोर से कठोर चीज़ में भी पार हो सकता था.

मैने रेहाना को लिटा दिया और उसकी चूत पर थूक लगा कर अपने मूसल को एक बार हाथ से सहलाया और उसकी चूत के छेद पर रख कर हल्का सा पुश किया.

रस से लबरेज़ चूत मेरे लंड के सुपाडे को गडप्प से निगल गयी. रेहाना की आँखें मज़े से बंद हो गयी, मैने कस कर एक धक्का लगाया.

उसके मुँह से एक कराह निकल पड़ी, मेरा तीन चौथाई लंड उसकी डेढ़ साल से भूखी चूत में समा गया. उसको दर्द होने लगा और कराह कर बोली-

प्लीज़ अशफ़ाक़ ! धीरीए… आअहह… दर्द हो रहा है.. थोड़ा आराम सीई….

मैने उसके होठ चूमते हुए एक और धक्का दे दिया और मेरा पूरा 8” लंबा लंड उसकी सन्करि चूत में फिट हो गया,

मज़े और दर्द के मिले जुले भाव उसके चेहरे पर साफ-साफ दिखाई दे रहे थे.

मैने उसकी चुचियों को मसलना शुरू कर दिया, उसकी मादक सिसकियाँ कमरे में गूंजने लगी लेकिन धीमे से, ताकि बाजू वाले रूम में सोई हुई उसकी अम्मी और छोटी बेहन ना सुन पाए…

जैसे-2 मेरे धक्के स्पीड पकड़ते जा रहे थे, उसकी सिसकियों की मात्रा भी बढ़ती जा रही थी,

अब वो भी नीचे से अपनी कमर उचका-2 कर पूरे मज़े लेकर चुद रही थी.

थोड़ी देर में ही उसकी रसभरी गागर छलक गयी, दो मिनट उसकी चूत में लंड डाले रहने के बाद मैने उसको अपने उपर बिठा लिया,

उसके गोल-मटोल चुचियाँ मेरी नज़रों के सामने थी उनको अपने दोनो हाथों में जो एक दम माप की थी लेकर मीजने लगा.

उसकी कमर उपर-नीचे हो रही थी, वो पूरी लंबाई के शॉट ले रही थी, पूरे लंड को सुपाडे तक बाहर लाती, फिर पूरा ले जाती…

कुछ देर तक ये चला, लेकिन उसकी ये कोशिश मेरे लौडूराम को रास नही आई, उसे तो कुछ बिस्फोटक चाहिए था,

सो उसको घोड़ी बना कर मैने लगाम अपने हाथ में ले ली और जो एक बार सरपट दौड़ाया,

वो घोड़ी की तरह हिन-हिनाने लगी, और अपनी गान्ड को मेरे मूसल पर पटक-2 कर चुदने लगी.

मेरी जांघे थप्प-2 उसके गोल सुडौल गान्ड पर थपकी देते हुए मधुर ताल दे रही थी.

आधे घंटे की धुआँधार चुदाई के बाद हम दोनो ही भरभरा कर जो बरसे, मानो बाढ़ ही आ गई थी,

उसकी जांघों से बहता हुआ रस बूँद-बूँद करके बिस्तर को गीला करने लगा, पूरे दो मिनट तक झड़ने के बाद वो पेट के बल बिस्तर पर पसर गयी, और में उसके उपर ही पड़ गया.

10 मिनट के बाद मैने अपना मूसल उसकी चूत से बाहर खींचा, एक पुच की आवाज़ आई और मे उसकी बगल में लेट गया,

उसकी गोल-2 सुंदर सी गान्ड को सहलाते हुए मैने उसे पुछा- रहना ! मज़ा आया…?

वो - बहुत..! इतना मज़ा तो मेरे शौहर के साथ भी कभी नही आया था, सच में. आप पता नही क्या हो..?

फिर उसने मुझे पुछा – आपको कैसा लगा मेरे साथ…?

मैने उसकी चुचि सहला कर कहा – तुम वाकाई में एक शानदार और खूबसूरत औरत हो, तुम्हारे साथ चुदाई में मुझे बहुत मज़ा आया…

कुछ देर ऐसी ही बातें करते रहे और एक दूसरे को गरम करते रहे,

धीरे-धीरे एक बार फिर वासना की खुमारी चढ़ने लगी, रहना इस लम्हे को खुलके जी लेना चाहती थी,

सो अपने बीते दिनों के गमों को बिस्तर के नीचे दबाकर मेरे साथ एक बार फिर खुलकर चुदाई का आनंद लूटने लगी….

उसको दो बार पूरी तरह संतुष्ट करने के बाद में अपने बिस्तेर पर आकर सो गया…!

अगली दिन मैने अमीना बी से कहा – बीबी मे चाहता हूँ, आपकी दोनो बेटियों को इस काबिल बनाया जाए कि वो अपनी हिफ़ाज़त खुद कर सकें.

अमीना- ये क्या बात हुई भला..? ये कैसे मुमकिन है कि कोई लड़की इतनी ताक़तवर हो जाए कि वो मर्दों से मुकाबला कर सके..?

मे - रज़िया सुल्तान का नाम सुना है आपने..?

अमीना - हां सुना तो है, पर वो तो एक सल्तनत की मल्लिका थी.

मे - तो क्या हुआ..? थी तो लड़की ही ना..! फिर कैसे उसने मर्दों पर हुकूमत की ? और भी बहुत से नाम हैं हिंदुओं के इतिहास में जहाँ औरतों ने वो काम किए, जिन्हें कोई मर्द कभी करने की सोच भी नही पाया.

 
एक बार पक्का इरादा हो तो सब कुछ मुमकिन है, वो सब आप मुझ पर छोड़ दो, कि कैसे क्या करना है, आप सिर्फ़ हां बोलो, फिर देखो ये आपकी दोनो बेटियाँ 10-10 पर भारी ना पड़ें तो कहना..!

शाकीना - सच अशफ़ाक़ साब ये मुमकिन है..?

मे - हां मेरी छुइ-मुई गुड़िया बिल्कुल मुमकिन है..! क्यों बीबी क्या कहती हो..?

अमीना - मे क्या बोलूं बेटा, इनसे ही पुछो क्या ये तैयार हैं इसके लिए..?

मे - क्यों रहना, शाकीना क्या कहती हो..?

रहना - क्या करना होगा हमें..?

मे - ज़्यादा कुछ नही जैसे मे तालीम दूँगा, वैसे ही करना है तुम्हें, और हां आज से दूध और घी की मात्रा खाने में बढ़ानी होगी.

अमीना – खुदा के फ़ज़ल से इस चीज़ की तो अपने यहाँ कोई कमी नही है, लेकिन ये मर्जानी खाती नही हैं..!

मे - आज से खायेंगी..! क्यों खाओगी ना तुम दोनो..

दोनो ने हां में मुन्डी हिला दी..

तो फिर अब देखो मे तुम्हें क्या से क्या बनाता हूँ..?

अब फटाफट घर के काम में बीबी का हाथ बँटाओ, उन्हें ख़तम करके अपने जानवरों को चराने किसी ऐसी जगह ले चलेंगे जहाँ आम तौर पर कोई आता जाता ना हो.

हम क्या कर रहे हैं, किसी को कानो-कान खबर नही होनी चाहिए ठीक है.

वो दोनो ये सब करने के लिए एक्शिटेड लग रहीं थी, सो जल्दी-2 घर के काम निपटा कर खाना वाना ख़ाके जानवरों को लेकर हम चल दिए एक पहाड़ी मैदान की ओर, जिधर कोई कभी-कभार ही निकलता था.

वहाँ पहुँच कर जानवरों को छोड़ दिया घास खाने, मे कुछ देर इधर-उधर वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को देखता रहा.

ये एक झरने के पास एक छोटा सा हरा-भरा सा मैदान था, ज़्यादा समतल तो नही पर ठीक था, जानवर अपने घास खाने में लगे थे.

कुछ देर में धूप भी थोड़ी कम हो गयी, और खाना खाए हुए भी काफ़ी टाइम हो गया तो मे उन दोनो को लेकर एक्सर्साइज़ करने में लग गया.

दो घंटे मैने उनका पूरा शरीर थका दिया, साथ में अपना भी.

पहला-2 दिन शौक-2 में वो मेरे साथ-2 जैसे मे करता गया, करती गयी. शाम को घर लौटते-2 उनके शरीर थक कर चूर हो गये थे.

घर आकर जम के खाना खाया, फिर सोने से पहले के एक-एक लीटर गरमा-गरम दूध घी और अंडा (एग) डालकर हम तीनों ने पिया और सो गये.

दूसरे दिन उन दोनो का उठने का मन ही नही हो रहा था, पूरा बदन दर्द से टूट रहा था,

मैने ज़बरदस्ती उनको गुदगुदाके उठाया, शाकीना कुछ ज़यादा नखरे कर रही थी.

पेट के बाल उल्टी लेटी थी वो, उसकी 32 की गोल-मटोल गान्ड उपर को उठी हुई बड़ी मनमोहक लग रही थी.

पहले मैने उसकी गान्ड की चोटी पर हाथ का दबाब देकर हिलाया, वो कुन्मुना कर रह गयी.

फिर मैने उसके बगल में ठीक उसकी चुचियों के पास अपनी उंगलियों से गुदगूदाया.

तो उसने अपने बाजुओं को भींच कर मेरे हाथ को दबा दिया, जब और थोड़ा आगे बढ़ते हुए जब उसकी चुचियों को साइड से सहलाया तो वो झट से सीधी हो गयी और मुस्करा कर उठ बैठी.

फ्रेश होकर वो दोनो घर के कामों में लग गयी.

दोपहर ढलते – ढलते फिर जानवरों को लेकर हम वहीं पहुँचे, और लग गये एक्सर्साइज़ करने, शुरू-2 में तो वो आनाकानी कर रही थी, लेकिन मैने अपने तरीक़े से उनको शुरू करा दिया.

कुछ ही देर में उनका शरीर खुल गया और वो मन लगा कर एक्सर्साइज़ करने लगी.

इसी तरह मैने उनको 10 दिन लगातार जम कर एक्सर्साइज़ करवाई, जब उनका शरीर एक्सर्साइज़ के मुतविक ढल गया तब मैने उनको योगा और ध्यान के टिप्स दिए. जिससे अपने को किसी भी पोज़िशन में कोन्स्टरेट करने में आसानी हो सके.

साथ-2 फाइटिंग भी करवाना भी शुरू कर दिया. 15 दिनों में ही उन दोनो को इसमें इंटेरेस्ट आने लगा, और वो अपने से ही ये सब करने लगी,

अब तो घर में भी दोनो आपस में फाइट प्रॅक्टीस और दूसरी एक्सर्साइज़ करने लगी जब भी मौका लगे कि शुरू हो जाती.

कोई एक महीने की मेहनत और मशक्कत के बाद ही वो शेरनी बन गयी.

एक दिन मैने अमीना बी से कहा-

बीबी देखना चाहोगी आपकी बेटियाँ क्या गुल खिलाने लगी हैं..?

वो शंकित स्वर में बोली- हाए बेटा ये क्या कह रहे हो तुम..?

मे - यकीन नही है तो खुद देख लो…!

और मे उन दोनो को घर के सामने मैदान में ले आया और उन दोनो को चॅलेंज दिया कि अगर तुम दोनो ने मिलकर मुझे हरा दिया, तो तुम दोनो को एक-एक सोने की चैन इनाम में मिलेगी.

वो दोनो ही शेरनिया एक साथ बोली- क्या ? सोने की चैन.. ! फिर क्या है आ जाओ मैदान में देखें किस्में कितना दम है.

अमीना बी मुँह फाडे उन दोनो की ओर देखने लगी.

हम तीनों की फाइट शुरू हो गयी, ऐसी फाइट उनकी अम्मी ने कभी देखी ही नही थी, वो दोनो तो चैन के लालच में अपने शरीर पर लगी मेरी करारी चोटों की भी परवाह नही कर रही थीं.

लड़ते-2 एक घंटा हो गया, वो दोनो हाँफने लगी, पसीने से हम तीनों के कपड़े सराबोर हो गये, मे बीच-2 में उन्हें चिढ़ाता जाता जिससे वो और दुगने जोश से फाइट करने लगती.

अंत मे मैने उन्हें जिता देना उचित समझा और मे जान बुझ कर हार गया.

वो दोनो ही बड़ी खुश हो गयी और याहू…2 .. करके उछल्ने लगी.

 
मे अंदर गया और अपने बॅग से निकाल कर उन दोनो को एक-एक चैन अपने हाथों से पहनादि.

अमीना बी की आँखों में खुशी के आँसू आ गये.

मैने कहा - क्यों बीबी, देखा अपनी बेटियों को..! अब ये आम लड़कियाँ नही रहीं, शेरनिया हो गयी हैं,

अब इन दोनो को 10 से भी ज़्यादा लोग आ जायें तो भी ये हार मानने वाली नही हैं.

अमीना बी ने मुझे अपनी बेटियों की परवाह ना करते हुए अपने मोटे-2 चुचों से चिप्टा लिया और मेरा माथा चूम कर बोली-

तुम सच में कोई फरिस्ता ही हो बेटा, जो हम जैसे कुरबत में जी रहे इंसानो में जान फूँकने आ गये.

अरे बीबी, मे अगर फरिस्ता होता तो ये दोनो बिल्लियाँ मुझे हरा पाती क्या..? इस बात पर हम सब हँसने लगे.

रेहाना ने आँखों-2 में ही मुझे थॅंक्स कहा, मैने भी अपनी पलकें झपका कर उसे समझा दिया.

जब उनकी अम्मी अंदर जाके काम में लग गयी तब मैने उन दोनो को कहा- देखो ये प्रॅक्टीस बंद नही होनी चाहिए,

अब मे इसके साथ-2 तुम दोनो को कुछ शहरी लड़कियों की तहज़ीब और नाज़ नखरे सिखाउन्गा, जिससे ज़रूरत पड़ने पर तुम शहरियों के बहकाबे में ना आ सको.

उन दोनो ने सहमति में गर्दन हिला दी, फिर जब शाकीना भी अंदर चली गयी तो मेरे गाल को चूम कर रेहाना बोली- आप जानबूझकर हारे थे है ना..?

मे - हां ! ताकि तुम लोग और हिम्मत से आगे बढ़ो.

रहना – नही वो बात नही है ! आपको हमें ये चैन जो देनी थी ! मे अब कुछ-2 आपको समझने लगी हूँ.

मे - अच्छा ! ये तो और भी अच्छी बात है. तो बताओ अब मे आगे क्या करने वाला हूँ..?

रहना – मे क्या जानू..?

मे - क्यों अभी तो तुम कह रही थी, तुम मुझे समझने लगी हो, तो बताओ अब में क्या करने वाला हूँ..?

वो कुछ देर सोचती रही, फिर ना में गर्दन हिला दी, मैने उसका चेहरा आपने हाथों में लिया और उसके होठ चूम लिए और बोला-

इतनी सी बात नही समझ पाई और दावा कर रही थी कि मुझे समझने लगी हो.

वो खिल-खिलाकर हंस पड़ी और बोली- मे तो सच में कुछ और ही सोचने लगी थी..!

मे - क्या..?

वो- बिस्तर वाली फाइट…! ये कह कर वो हसने लगी.

मे - तुम्हारी इच्छा है..? उसने सर झुका कर हामी भरी, तो मैने उसे बाहों में भर के फिर से उसे चूम लिया और कहा- ओके फिर ठीक है आज रात को हो ही जाए…! वो हां बोलकर अंदर चली गयी.

शाकीना ये नज़ारा अंदर से आड़ लेकर देख रही थी, ये हम दोनो को ही पता नही था.

उस रात अमीना बी के सोते ही, रेहाना मुझे अपने कमरे में ले गयी, मैने रेहाना को 2-3 बार जमकर चोदा,

हमने सपने में भी नही सोचा था, कि हमारी इस काम क्रीड़ा का लुफ्त हमारे अलावा भी कोई उठा रहा है…

शाकीना ने शुरू से लेकर लास्ट हमारे सोने तक का चुदाई प्रोग्राम देखा, और अपने हाथ से अपनी चूत सहला-सहला कर उसे शांत करने की कोशिश करती रही…….!

दूसरे दिन एक ज़रूरी काम का बोलकर मे निकल गया,

अपने ठिकाने से बाइक ली और चल दिया स्यालकोट की तरफ, आख़िर रेहाना से किया हुआ वादा जो निभाना था.

पाकिस्तान के रोड.. ! खुदा बचाए ऐसे रास्तों से, जैसे तैसे करके पहुँच ही गया जैल तक.

मेन गेट पर दो संतरी पहरे पर थे, उनको कुछ ले-दे कर पटाया और पता किया कि कोई रहमत अली नाम का क़ैदी इस जैल में है क्या..?

तो उन्होने बताया कि उसको तो 6 महीने पहले ही मुज़फ़्फ़राबाद की लोकल जैल में शिफ्ट कर दिया है, उसका कोई संगीन जुर्म साबित नही हुआ था तो यहाँ की सेंट्रल जैल से निकाल कर लोकल जैल में शिफ्ट कर दिया है.

मे - ये लोकल जैल में क्या होता है..?

संतरी - अरे भाई ! लोकल जैल का मतलब वो क़ैदी जिन पर कोर्ट में कोई अपराध सिद्ध ना हो, और हुकूमत उन्हें जैल में ही सडाना चाहती हो तो उन्हें ऐसी जेलों में रखा जाता है, जहाँ उनसे फ्री में लेबर का काम करवाया जा सके.

मैने मन ही मन कहा- कि साला ये कैसा मुल्क है, जहाँ आदमी की कोई कीमत ही नही है. फिर प्रत्यक्ष में उसको शुक्रिया बोल कर वहाँ से चल पड़ा.

लौटते-2 शाम हो चुकी थी, बाइक अपनी जगह रखी और साइकल लेके घर पहुँचा तब तक अंधेरा छाने लगा था.

मैने रेहाना को अपने पास बिठा कर उसको सारी बात बताई, तो वो तो झटका ही खा गयी.

फिर मैने उसको समझाया, कि देखो ये तो शायद हमारे लिए अच्छा ही हुआ है, लोकल जैल में इतनी सुरक्षा भी नही होगी, मे जल्दी ही तहकीकात करता हूँ, तुम चिंता मत करो अब शायद तुम जल्दी ही अपने शौहर से मिल पाओगि.

मेरी बातें सुन कर उसकी आँखें छलक आई और बोली - हमारा आपका कोई रिस्ता नही है, फिर भी आप हमारे लिए कितना कुछ कर रहे है..!

मे - क्या कहा कोई रिस्ता नही है..? कुछ दिनो पहले तक मे एक आवारा कुत्ते की तरह तन्हा यूँही जंगल-2 भटकता रहता था,

आज मेरे पास एक परिवार है जो मेरी अपनों से भी ज़्यादा परवाह करता है. आइन्दा ऐसा मत बोलना..!

फिर आगे मुद्दे पर आते हुए बोला - मानलो अगर जैल से हम लोग उसको निकाल भी लाए तो तुम दोनो रहोगे कहाँ..?

क्योंकि हुकूमत उसकी तलाश हर जगह करेगी, खास तौर से उसके और तुम्हारे घर पर तो ज़रूर ही.

वो सोच में पड़ गयी, जब काफ़ी देर तक उसको कुछ नही सूझा तो मैने उसको बोला- तुम फिकर मत करो, इंशा अल्लाह कोई ना कोई रास्ता ज़रूर निकल आएगा.

अभी हम ये बातें कर ही रहे थे उसकी अम्मी भी वहाँ आ गई.

अमीना - क्या बातें हो रही हैं उस्ताद और शागिर्द के बीच..?

मे - बीबी ! हम रेहाना के शौहर के बारे में बात कर रहे थे.

अमीना - उसको तो उन मर्दुदो ने स्यालकोट की जैल में डाल रखा है सड़ने को, किसी से मिलने भी नही देते.

मे - बीबी ! वो अब वहाँ नही है, मे आज ही पता लगाके आया हूँ, उसको मुज़फ़्फ़राबाद की लोकल जैल में रखा है आजकल..!

अमीना - क्या..? लेकिन क्यों..?

मे - वो बाद में बताउन्गा, पहले दिक्कत ये है, कि अगर हम उसको किसी तरह निकल लाते हैं तो ये दोनो रहेंगे कहाँ ?

अमीना - वो सब बाद की बात है, पहले ये बताओ कि बाहर निकालोगे कैसे..?

मे - वो मे वहाँ जाके पता लगाकर ही बता सकता हूँ, कि वो किस हालत में है..?

अमीना - जगह तो है, असलम से बात करनी पड़ेगी, शहर में कहीं भी छिप कर रह सकते हैं.

इस्लामाबाद बड़ा शहर है, खाने कमाने का भी साधन हो सकता है, और कहीं भी गुमनामी की जिंदगी बसर कर सकते हैं.

इस्लामाबाद का नाम सुनते ही मेरे दिमाग़ में एक बड़ा प्लान पनपने लगा और मैने रेहाना को कहा, अब तुम सारी चिंता-फिकर मेरे उपर छोड़ दो.

वो – आप पर भी यकीन नही करूँगी तो और है ही कॉन हमारा अब..!

कुछ देर बाद, रहना साइकल लेके ज़रूरत के कुछ समान लेने कबीले के पास वाले छोटे से बाज़ार को चली गयी,

उसकी अम्मी घर के कामों में लगी थी, मे बाहर पेड़ के नीचे चारपाई डाल कर लेटा हुआ था.

चारपाई पर लेटा हुआ अपनी आँखों पर बाजू रखे मे अपनी सोचों में डूबा हुआ था,

मेरे दिमाग़ में आगे की प्लॅनिंग चल रही थी, कि तभी मुझे लगा कि कोई और भी है मेरे आस-पास.

मैने आखें खोली तो देखा शाकीना मेरे बगल में खड़ी थी.

 
मैने चारपाई पर साइड को खिसक कर जगह बनाई और बोला- अरे छोटी शेरनी कब आई ? आओ बैठो.

वो मेरे पास नीचे को पैर लटका कर बैठ गयी, मैने कहा- और सूनाओ आज मेरे पास कैसे आई.. कोई काम था..?

वो - काम तो आप आपा के ही करते हो, मेरी तो यहाँ कोई परवाह ही नही करता, छोटी हूँ ना इसलिए..!

मे उठ कर सिरहाने की ओर बैठ गया और बोला - अरे ! ये क्या कह रही हो तुम..?

आज इस घर में, मे हूँ ही तुम्हारी वजह से, और तुम कह रही हो कि मे तुम्हारी कोई परवाह नही करता…!

बोलो क्या करूँ मे तुम्हारे लिए..?

वो नज़र झुकाए ही बोली - आप आपा से कितना प्यार करते हैं, और मेरी ओर नज़र उठा के भी नही देखते, क्या मे इतनी बुरी दिखती हूँ..?

मे चोंक गया और बोला – आपा से प्यार करते हैं मतलब..? फिर उसकी ठोडी के नीचे हाथ लगा कर अपनी ओर उसका चेहरा करके बोला –

तुमसे ये किसने कहा कि तुम बदसूरत हो, सच कहूँ तो तुमसे ज़्यादा कमसिन और हसीन लड़की मैने आज तक नही देखी.

वो अभी भी नज़रें नही मिला रही थी, फिर भी झेन्प्ते हुए बोली – मैने आपा और आप दोनो को प्यार करते हुए देखा है, कल शाम को और रात को भी.

मे – क्या..? क्या देखा है तुमने..?

वो - सब कुछ..! और वो सब देखते हुए, ना जाने क्यों मुझे अपनी बड़ी बेहन से जलन सी हो रही थी.

मैने उसके चेहरे को अपने दोनो हाथों में ले लिया और उसकी आँखों में झाँकते हुए पुछा- तो अब तुम क्या चाहती हो..? जो तुम कहोगी मे वही करूँगा.

वो ज़मीन पर नज़रें गढ़ाए, झेंपती हुई बोली - मुझे भी मेरे हिस्से का प्यार चाहिए,

मैने उसके चेहरे को उपर करते हुए कहा – हिस्सा ऐसे माँगा जाता है..? नज़रें झुका कर…

मुझ पर तुम्हारा पहला हक़ है, और हक़ आँखों में आँखे डालकर लिया जाता है, ना कि झुका कर…

और रही बात तुम्हारे हिस्से की, तो बिल्कुल मिलेगा क्यों नही मिलेगा मेरी गुड़िया को उसके हिस्से का प्यार,

मे तो इसलिए पहल नही कर रहा था कि कहीं तुम ग़लत ना समझो मेरे प्यार को, वरना तुम तो मुझे पहले दिन से ही भा गयी थी.

ये कहकर मैने उसे खींच कर अपने सीने से लगा लिया, उसके कठोर 32 के उभार मेरे सीने में गढ़ने लगे.

उसने अपना चेहरा मेरे चौड़े कंधे में छुपा कर कहा- सच..!

मैने उसके अन्छुए पतले-2 सुर्ख रसीले लवो को चूम लिया और कहा- मुच.

शाकीना ! मेरी जान, तुम तो मेरे दिल का वो नगीना हो, जिससे हर किसी को नही दिखाया जाता, छुपा कर रखना होता है.

मेरी बात सुन कर वो मेरे सीने से लिपट गयी, अपनी मरमरी बाहों का घेरा मेरी पीठ पर कस लिया.

कुछ देर मैने उसे ऐसे ही लिपटे रहने दिया, फिर उसके कंधे पकड़ कर अलग किया और उसकी आँखों में देखते हुए कहा-

लेकिन पहली बार प्यार में कुछ कुर्बनिया देनी होती है, उसके लिए तैयार हो.

वो - हां ! मुझे पता है, पहली बार तो सबको ही देनी पड़ती हैं, तो मे क्यों नही, फिर आप जैसा समझदार इंसान जब प्यार करे तो मुझे डरने की क्या ज़रूरत..!

उसकी सहमति जान मैने उसे खींच कर अपनी गोद में बिठा लिया और उसके गाल पर अपनी खुरदूरी दाढ़ी रगड़ते हुए उसके कश्मीरी सेबों को सहला कर कहा-

तो फिर आज चलो जानवरों को लेकर वहीं झरने के पास, हम वहीं प्यार करेंगे.

मेरी बात से वो इतनी खुश हो गयी, कि मेरे चेहरे पर उसने अनगिनत चुंबन जड़ डाले…,

फिर मेरी गोद से उठ कर किसी चंचल हिरनी की तरह कुलाँचे भरती हुई घर के अंदर चली गयी अपनी आमी को बोलने की वो जानवरों को चराने जा रही है…

वो जल्दी से जल्दी उस स्वर्गीय आनंद को पाने की खुशी में , जिसकी झलक उसने अपनी बेहन को लेते हुए देखी थी,

और जिसकी झलक मात्र से ही अपनी मुनिया भिगो ली थी, उसने जानवरों को बाडे से निकाला और हांक दिया झरने वाले मैदान की तरफ…!

ये एक हरा-भरा घस्स का मैदान था, जिसके एक तरफ उँचे-2 घने पेड़ थे, फिर थोड़ा ढलान लिए हुए वो मैदान जिसके दूसरी ओर एक दम साफ नीले पानी की झील जैसी थी, जिसका पानी एक झरने से निकल कर जमा हो रहा था.

जहाँ पानी जमा हो रहा था उसकी गहराई कुछ ज़्यादा नही थी सीधे खड़े होने पर मेरे सीने तक आता,

अतिरिक्त पानी, एक पतली सी पत्थरीली नहर से अंदर जंगल में से होता हुआ नीचे के इलाक़ों में जा रहा था.

हमने जानवरों को उस मैदान में छोड़ दिया घास खाने, और एक पेड़ के नीचे एक बिछवन डालकर उसके उपर बैठ गये.

मेरा उस झील और झरने के अंदर पानी में घुसकर मज़ा लेने का मन था, सो मैने शाकीना से कहा –

मेरा नहाने का मन है, क्या तुम मेरे साथ नहाना चाहोगी ?

वो – मे तो अपने कपड़े भी नही लाई, तो कैसे नहा सकती हूँ ?

मे – अरे यार ! कपड़े पहन कर कॉन नहाता है..? ब्रा-पेंटी तो पहनी ही होगी ना..! वही पहन कर नहा लो, अंदर पानी में कॉन देखता है..!

वो – नही मुझे हया आएगी..!

मे – मेरे अलावा यहाँ और कॉन है जिससे हया आएगी..?

वो फिर भी नही मानी, मैने अपने कपड़े निकाले और मात्र अंडरवेर में मैने पानी में छलान्ग लगा दी, और तैरने लगा.

शाकीना मुझे नहाते हुए देख रही थी, झील के ठंडे-2 पानी में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, मैने उसको इशारा किया पानी में आने के लिए.

जब वो नही आई तो मैने झरने का रुख़ किया और तैरते-2 झरने के पास पहुँच गया, जहाँ पत्थरों से पानी टकरा कर सफेद रूई के माफिक लग रहा था.

जब मैने पीछे मूड कर शाकीना क़ी ओर देखा तो वो मुझे उस बिछवन के पास नही दिखी.

कुछ देर वहीं एक पत्थर पर बैठ मे उसका इंतजार करता रहा, वो फिर भी नही दिखी, तो मेरे मन में शंका के बादल उठने लगे.

मैने वहीं बैठे-2 उसको आवाज़ दी, लेकिन कोई जबाब ना पाकर मे लौटने लगा.

अभी मे बीच में ही पहुँचा था कि मेरे पास ही पानी के अंदर वो दिखाई दी, किसी सुनहरी जलपरी सी, एक छोटी सी ब्रा और पेंटी में.

पानी साफ होने के कारण वो मुझे साफ-2 दिख रही थी.

 
मेरे मन में शरारत सूझी, और मैने भी पानी के अंदर डुबकी लगा दी और उसे अंदर ही पकड़ लिया, वो मेरी बाहों में छटपटाई और छूट कर पानी के उपर आ गई.

मे- तुमने तो मुझे डरा ही दिया, इतनी देर पानी में कैसे रह ली..?

वो- अरे ! ये तो हमारे लिए रोज़ की बात है..

फिर मैने उसे पानी के अंदर अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूम कर कहा- जब मैने कहा तब मना क्यों किया..?

वो- आपके सामने कपड़े निकालने में शर्म आ रही थी.

मे- अब भी तो पानी में सब दिख रहा है मुझे…! तो उसने शर्म से मेरे सीने में अपना मुँह छिपा लिया.

मैने उसके चुतड़ों पर अपनी हथेलिया कस दी और उसे अपनी गोद में उठा लिया, वो भी मेरी कमर में अपनी टाँगें लपेट कर मुझसे चिपक गयी.

मे उसे अपने से चिपकाए हुए झरने की ओर बढ़ गया, कुछ कदमों में ही हम दोनो झरने के सफेद पानी की धार का मज़ा ले रहे थे.

मे एक ऐसे पत्थर पर बैठ गया जहाँ झरने का पानी डाइरेक्ट तो नही गिर रहा था, लेकिन उसका पानी उच्छल-2 कर वहाँ तक पहुँच रहा था,

उसको अपनी गोद में बिठाए मैने उसकी गर्दन पर किस किया.

उसके मुँह से एक मादक सिसकी निकल गयी और अपनी गर्दन दूसरी ओर मोड़ कर मेरे गर्दन के पीछे से निकाल कर मेरे बालों को अपनी मुट्ठी में कस लिया.

मेरे दोनो हाथ उसके छोटे -2 सेबों पर थे और उनको ब्रा के उपर से ही धीरे-2 सहला रहा था.

मज़े के आलम में उसकी आँखें बंद थी, और मुँह से हल्की हल्की सिसकी निकल रही थी.

जब मैने उसके ब्रा के हुक खोलने चाहे तो उसने मेरे हाथ पकड़ लिए और ना में गर्दन हिला दी.

मैने उसके हाथों को चूम लिया और जीभ से उसकी पीठ चाटने लगा. उसने अपने हाथ मेरे हाथों से हटा लिए, तो मैने उसकी ब्रा के हुक खोल दिए और उसको अपने गले में लपेट लिया.

अब उसकी गोरी-चिटी छोटी-2 गोल-2 चुचियाँ जो कसरत करने की वजह से और ज़्यादा शेप में आ गयी थी, मेरे सामने नंगी थी,

कितनी ही देर उस मनमोहक चुचियों को मे देखता ही रहा, फिर धीरे से जीभ लगा कर उसके कंचे जैसे निपल को चाट लिया.

आनंद के मारे उसकी आअहह… निकल गयी और सिसकने लगी…

आआहह….सस्सिईईई….उफफफ्फ़… आमम्मिईीई……मत करो… कुछ होता है….

मे- क्या होता है मेरी जानणन्न्…! बोलो ना..!

वो - आअहह… पता नही… पर बहुत अच्छा लग रहा है…!

अब मैने उसके एक निपल को अपने अंगूठे और उंगली के बीच पकड़ कर हल्के से मसल दिया..

उसकी सिसकी और बढ़ गयी और मज़े में आकर वो अपनी गोल-2 गान्ड मेरे लंड पर पटकने लगी, जो अब एक दम कड़क हो गया था, और अंडरवेर को फाड़ डालने की कोशिश कर रहा था.

मेरे लंड का एहसास अपनी गान्ड पर फील करके वो उसे रगड़ने लगी.

मैने अब उसको अपने बाएँ बाजू पर लिटा लिया, उसके होठों को चूसने लगा और एक हाथ से उसको चुचियों को सहलाता, कभी -2 उत्तेजनावस मसल भी रहा था.

उसका पूरा बदन कामोत्तेजना में थिरक रहा था, होठ चुसते-2 अब मेरा हाथ उसके गोरे से पेट से होता हुआ जैसे ही उसकी चूत के उपर पहुँचा, उसने अपनी टांगे भींच ली, और मेरे हाथ को वहीं लॉक कर दिया.

मैने दबे हाथ से अपनी उंगली को हरकत दी और पेंटी के पतले से कपड़े के उपर से ही उंगली उसकी चूत के उपर घुमाई, उसकी टांगे खुल गयी और मैने उसकी छोटी सी चूत को अपने पंजे में भर लिया.

उसने किस तोड़ दिया और लंबी-2 साँसें लेने लगी, उसकी आँखें लाल हो चुकी थी, आँखों में वासना के लाल डोरे साफ साफ दिखाई देने लगे.

अब मैने उसको उस पत्थर पर बिठा दिया और खुद उसके नीचे उसके सामने बैठ गया.

उसके कमर के दोनो साइड से उंगली फँसा कर उसकी पेंटी को निकालना चाहा तो उसने मेरी हेल्प करते हुए अपनी गान्ड को हवा में लहरा दिया.

मैने पेंटी उतार कर एक ओर रख दी, उसकी छोटे-2 बालों वाली चूत अब मेरे सामने थी.

पतले-2 होठों को भींचे हुए उसकी पतली सी एक दरार जैसी चूत को देख कर मेरा लंड बाबला हुआ जा रहा था, मैने उसे अपने हाथ से सहला कर थोड़ी देर शांत बैठने को कहा और उसकी टाँगों को सहला कर उसकी थोड़ी-2 मांसल होती जा रही जांघों को चौड़ा किया.

मैने झुक कर अपना मुँह उसकी चूत पर रखा और एक उद्घाटन चुंबन लिया.

वो अपनी हथेलियों को पीछे की ओर टिका कर पीछे की तरफ झुकी हुई थी, सर उसका हवा में था, और आँखें आने वाले मज़े के इंतजार में बंद थी.

एक बार मैने अपनी जीभ पूरी चौड़ाई में उसकी छोटी सी चूत पर गान्ड के छेद के पास से शुरू करके उपर तक फिराई..

सस्सिईईई…..आअहह……आअम्म्म्मिईीई…. ऐसी ही कुछ आवाज़ उसके मुँह से निकली और गान्ड पत्थर से उपर उचका दी.

फिर उसकी पुट्टियों को खोल कर जो एक दम एक दूसरे से जुड़ी हुई थी, अपनी जीभ की नोक से अंदर की साइड कुरेदा,

उसकी गान्ड फिर से हवा में लहराई. जब अपना अंगूठा मुँह मे लेकर उसकी चूत के होठों पर रगड़ा, तो उसकी आहह.. सस्सिईईईईईईईईईईईईईईई……फुट पड़ी.

उसकी चूत के उपरी भाग पर उसका क्लोरिट मुँह से चूमने लगा, जिसे मैने जीभ से कुरेद कर और बाहर को किया और फिर अपने होठों में दबा कर चूसने लगा, साथ ही साथ उसके छोटे से छेद को अपने अंगूठे से सहला दिया.

मज़े के मारे शाकीना का बुरा हाल हो रहा था, कभी वो अपनी गान्ड को हिलाती तो कभी अपनी टाँगों को मेरे कंधे पर पटकती.

5-7 मिनट में ही उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और ये शायद उसकी चूत का पहला ओरगैस्म था जो किसी मर्द के द्वारा हुआ हो.

बहुत ज़ोर से झड़ी वो, और झड़ते समय दोहरी होकर मेरे सर से लिपट गयी.

जब वो शांत हुई तो मैने उसके होठों पर एक चुम्मन लिया और उसको पुछा- कैसा लगा शाकीना..?

वो शर्म से पानी पानी हो गयी और मेरे कंधे में सर रख कर मुस्कराने लगी…..!

मैने उसे अपनी गोद में उठा लिया और पानी के अंदर चल दिया, वो अपने हाथ पैर फड़फड़ाकर चिल्लाई- अरे मेरी पेंटी रह गयी ….!

मैने शरारत से कहा - छोड़ो उसको क्या करोगी उसका ..?

वो – नही प्लीज़ लेने दो ना, मेरे पास वैसे भी कोई एक्सट्रा नही है…

मैने उसकी गान्ड के छेद को उंगली से सहला कर कहा – आज के बाद पेंटी पहनना बंद कर दो…

वो मेरी गोद में किसी बच्चे की तरह उपर नीचे झूलती हुई बोली – लेने दो ना प्लीज़,

 
मैने हंसते हुए हाथ लंबा करके उसे उठा कर उसे पकड़ा दिया, गोद में उठाए ही उसको बीच पानी में ले आया.

मेरा लंड उसकी मुलायम गोल-गोल गान्ड के नीचे हाहाकार मचाए हुए था, वो अब इतना कड़क हो गया था कि अगर में शाकीना को छोड़ भी देता तो वो उसके उपर आराम से रेस्ट कर सकती थी.

बीच पानी में आकर एक दूसरे से चिपके हुए ही हमने एक-दो गोते लगाए और फिर किनारे पर आकर बाहर निकले.

बिच्छावन के पास आकर मैने उसे उस पर लिटा दिया और उसकी एक टाँग को अपनी टाँगों के बीच लेकर उसे पुछा- आगे बढ़ना चाहोगी शाकीना..?

हमम्म.. उसने बस इतना ही जबाब दिया जो मेरे लिए किसी वकालत नामे से कम नही था.

मैने अपना अंडरवेर निकाल दिया और उससे कहा, मेरा लंड चुसोगी..?

उसने ना में सर हिलाया, तो मैने कहा- तुम तो कह रही थी कि तुमने रात मुझे और रेहाना को ये सब करते हुए देखा था, तो वो नही देखा कि कैसे तुम्हारी आपा इसकी सेवा कर रही थी.

हमम्म.. देखा तो था.. पर मुझे शर्म आती है ये सब करने में- उसने कहा, तो मे बोला- अब कैसी शर्म,

देखो मैने तुम्हारी मुनिया को मुँह से प्यार किया ना, अब चलो तुम भी मेरे पप्पू को प्यार करो.. तभी तो वो तुम्हारी मुनिया की अच्छे से सेवा करेगा.

ये कहकर मैने अपना लंड उसके मुँह के सामने लहरा दिया.

उसने डरते-2 उसे हाथ में पकड़ा मानो किसी नाग को पकड़ रही हो की कहीं डॅस ना ले.

कुछ देर वो उसे हाथ में लेकर उलट-पलट कर देखती रही, फिर उसको मुट्ठी में भर कर सहलाने लगी.

जब उसने उसका सुपाडा खोला तो उस पर एक प्री-कम की बूँद चमक रही थी, वो उस बूँद को गौर से देख रही थी.

टेस्ट करो इसे शाकीना, लड़कियों के लिए ये अमृत है, चाट के देखो, अच्छा लगेगा तुम्हें..

धीरे-धीरे करके वो अपना मुँह मेरे लंड की तरफ लाई, और डरते हुए उसने अपनी जीभ की नोक से उसे उठा लिया.

मेरी आँखें बंद हो गयी और लंड ने उसके हाथ में ही एक ठुमका सा लगाया.

कैसा लगा.. जब मैने उससे पुछा तो वो बोली- ठीक ही है, और फिर धीरे से उसने मेरे लाल-लाल सुपाडे को अपने पतले-2 होठों में क़ैद कर लिया.

होठों में लिए-2 ही जब उसने अपनी जीभ मेरे लंड के छेद पर रख कर घुमाई तो मेरी सिसकी निकल पड़ी…

सस्सिईईई…आअहह….शाकीना मेरी जानणन्न्…. चूसूऊ.. ईससीए…आईसीए…हिी…शाबाश….आहह…और अंदर लूऊ..

शाकीना मेरा आधा लंड मुँह में ले चुकी और लोलीपोप की तरह चूसने लगी, मेरा लंड उत्तेजना में फटने जैसी स्थिति में आ चुका था,

स्टील की रोड की तरह कड़क हो गया था वो, जो अब किसी भी छोटी से छोटी चूत को भी फाड़ने के लिए तैयार था.

मैने शाकीना को रोक दिया और उसे बिछावन पर लिटा कर उसकी जांघों के बीच आगया, उसकी पुसी को एक बार सहला कर उसे चूमा और दो-तीन बार जीभ से चाट कर गीला किया.

अपने हाथ पर ढेर सारा थूक लेकर अपने मूसल पर चिपडा और उसे उसके छोटे से छेद पर रख कर हल्के से दबा दिया.

गीली हो चुकी चूत और थूक से सना लंड गॅप से उसकी सन्करि गली में फिट हो गया, लेकिन शाकीना की एक कराह ज़रूर निकल गयी.

मैने उसके चुचों को सहलाया और उसके होठों को एक बार चूम कर उसकी आँखों में देख कर उसको इशारा किया और एक झटका मार दिया अपनी कमर में.

फुच्च की आवाज़ के साथ उसकी झिल्ली फट गयी, और शाकीना की एक दर्दनाक चीख पूरे जंगल में गूँज गयी.

वो हान्फती हुई सी बोली- प्लीज़ अशफ़ाक निकालो इसे.. हाईए…आमम्मि…मारीी…आहह,… लगता है मेरी जान ही निकल जाएगी.

मैने उसकी चुचियाँ सहला कर उसे शांत किया और बोला- अरे मेरी बहादुर शेरनी आधे से ही घबरा गयी.

बस अब सब ठीक है, जो होना था सो हो गया, अब दर्द नही होगा.. , कहकर उसके होठों को चूसने लगा और अपने हाथों से उसकी चुचियों को सहलाने लगा, मसल्ने लगा.

दो मिनट में उसका दर्द कम पड़ गया, वो अपनी कमर को हिलाने लगी, मैने आधे लंड को ही धीरे से अंदर बाहर किया, कुछ पलों में उसका दर्द एक दम छुमन्तर हो गया और वो मादक सिसकारी लेते हुए नीचे से कमर मटकाने लगी.

सही मौका देख कर मैने एक धक्का और कस कर लगा दिया और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.

एक बार फिर वो चीख पड़ी, लेकिन ये ज़्यादा लंबी नही थी.

मेरा 8” लंबा लंड जड़ तक उसकी चूत में कस गया था, उसकी बच्चेदानी का मुँह मेरे लंड के सुपाडे पर फील हो रहा था.

मेरे लंड को उसकी चूत ने इस कदर पकड़ रखा था मानो वो उसे कहीं जाने ही नही देना चाहती हो.

थोड़ी देर रुक कर मैने अपने मूसल को बाहर खींचा, उसकी चूत की अन्द्रुनि दीवार भी मानो खिचकर बाहर आना चाहती हो उसके साथ.

पूरा सुपाडे तक बाहर लेकर मैने फिर से धीरे-2 उसको अंदर किया तो वो धीरे से कराही..

आअहह…ससुउउ…उफफफ्फ़…धीरीए…

5-6 बार मैने बड़े इतमीनान से लंड को अंदर बाहर किया, तो उसकी चूत ने थोड़ी सी दया दिखा कर मेरे लंड को चलने लायक रास्ता बना कर दिया.

अब वो थोड़ा आसानी से अंदर बाहर हो रहा था.

शाकीना को भी अब दर्द की वजाय मज़ा आना शुरू हो रहा था, और वो भी नीचे से अपनी कमर को उचकाने लगी थी.

धीरे-2 मैने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, और उसकी जांघों को अपनी जांघों पर चढ़ा लिया जिससे उसकी गान्ड अधर हो गयी और मेरा लंड और अंदर तक खुदाई करने लगा.

लंड को अपनी बच्चेदानी पर फील करके शाकीना भाव बिभोर हो गयी और आनंद के मारे उसकी आँखें छलक पड़ी.

आअहह… हयईए… अल्ल्लाअहह…ये कैसा मज़ा है…अब तक कहाँ थे मेरी जानणन्न्… हयईए…मईए..कहीन्न..मर ही ना जाउ खुशी में..

वो चुदति जा रही थी और ना जाने क्या-2 बड़बड़ाती जा रही थी.. सच में शाकीना बहुत गर्म लड़की थी..

चोदते-2 हम दोनो के शरीर पसीने से भीग गये.. कोई किसी से हार मानने को तैयार नही था, इस बीच वो ना जाने कितनी बार बही, लेकिन अंत तो हर काम का होता है..

आख़िरकार हम दोनो की ही मंज़िल आ ही गयी और एक जोरदार हुंकार के साथ मे उसकी चूत में झड़ने लगा..

 
उधर शाकीना ने भी अपने पैरों को लपेट कर मेरी कमर में ताला सा लगा दिया और अपनी कमर हवा में लहरा कर झड़ने लगी.

जब हम दोनो का जोश शांत हुआ तो 5 मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे. मे उसके उपर ही पसर गया, जिसका उसे भान ही नही हुआ.

फिर मे उसके उपर से उठा तो उसने अपनी आँखें खोली और मेरे गाल को चूम कर बोली - शुक्रिया अशफ़ाक़ साब !!

मैने भी उसके गोरे मुलायम गाल को चूमा और बोला – ये शुक्रिया किस वास्ते..? इसमें तो हम दोनो की खुशी बराबर की थी ना..!

फिर मैने उसे गोद में उठाया और झील के किनारे ले जाकर दोनो फ्रेश हुए और आकर फिर से बिछावन पर बैठ गये एक दूसरे के आलिंगन में.

अभी तक हम दोनो मदरजात नंगे ही थे, मैने फिर से उसे खींच कर अपनी गोद में लिया और उसके चुचक सहला कर पुछा- तुम खुश तो हो ना मेरी जान ?

वो - बेहद ! क्या इतना भी मज़ा इसी जिंदगी में था, मुझे आज पता लगा.

फिर हम दोनो के हाथ फिर से शरारत पर उतर आए, और जल्दी ही फिर एक बार वासना का तूफान उठाने लगा, जब दोनो बेहद गरम हो गये तो मैने शाकीना को अपने उपर बिठा लिया.

वो धीरे-2 मेरे लंड के उपर अपनी चूत रख कर बैठने लगी,

शुरू-शुरू में थोड़ी तकलीफ़ हुई उसको, लेकिन जल्दी ही उसने पूरा लंड निगल ही लिया और कुछ ही देर में मज़े लेकर उच्छल-2 कर मेरे उपर कूदने लगी.

10 मिनट बाद मैने उसको निहुरा दिया और उसके पीछे से घोड़ी बनाकर उसकी सवारी करने लगा.

शाकीना को आज जन्नत की सैर करते-2 शाम हो गयी, तब तक वो ना जाने कितनी बार पानी निकलवा चुकी थी.

आज वो अपने जिंदगी के परम सुख को प्राप्त करके बड़ी खुश लग रही थी, लेकिन उसकी चाल में थोड़ी लंगड़ाहट थी, जो स्वाभाविक था.

अंधेरा होने से पहले हम घर पहुँच गये.

रहना उसकी चाल देख कर कुछ-2 समझ गयी थी, पर वो भी अपनी छोटी बेहन को लेकर खुश थी.

जब उसने मुझसे पुछा तो मैने हामी भरी, और उसको बोला- तुम्हें तो कोई ऐतराज नही है ना !

वो बोली- नही वल्कि मे तो खुश हूँ कि मेरी प्यारी बेहन भी अब इस सुखद एहसास से रूबरू हो गयी है,

और आज उसे एक ऐसा हमसफ़र मिल गया है, जो औरत की कद्र करना जानता है…!

मेरी आपसे एक इलतज़ा है अशफ़ाक़, मेरी मासूम बेहन का साथ कभी मत छोड़ना, वरना वो बेचारी टूट जाएगी.

इस छोटी सी उमर में इतने मुश्किलात का सामना कर चुकी है वो कि अब शायद और ना झेल सके…

रहना की बातें मेरे जेहन में किसी हथौड़े के वार की तरह पड़ रही थी, मे सोचने लगा, कि अगर इन लोगों को मेरी वास्तविकता पता चली तब क्या होगा…

मुझे अपनी सोचों के भंवर में फँसे हुआ देख कर रहना ने मेरी चुटकी काटी और हस्कर बोली… अब किस सोच में डूबे हैं जनाब चलिए खाना तैयार है, खा लेते हैं…

दूसरे दिन मे रहना को साथ लेकर उसके शौहर की खोज खबर के लिए निकल पड़ा,

अब अपने कुछ राज उन लोगों को बताने में कोई परेशानी नही थी, सो अपने गुप्त अड्डे से बाइक ली और चल पड़े मुज़फ़्फ़राबाद की ओर.

रास्ते में उसने पुछा- अशरफ ! आपने अपना समान यहाँ क्यों छुपा के रखा है..?

तो मैने उसको समझा दिया, कि ये तो तुम लोगों के मिलने से पहले का ही एक महफूज़ जगह देख कर रख दिया था. उसको भी मेरी बात सही लगी.

ये शहर ज्यदा दूर नही था, सो 2 घंटे में हम वहाँ पहुँच गये.

मैने रहना को समझा दिया कि अगर ज़रूरत के हिसाब से अपने हुश्न के जलवे दिखाने पड़े तो हिचकना मत, वैसे कोई ज़रूरी नही कि वो सब करना ही पड़े.

हम जैल का पता लगा कर वहाँ तक पहुँच गये, यहाँ दूसरी जेलो जैसा कड़ा प्रबंध नही था,

ड्यूटी पर तैनात दो संतरी गप्पें लगा रहे थे, बौंडरी वॉल भी ज़्यादा उँची नही थी.

यही कोई 6 फीट उँची दीवार के उपर तारों की बढ़ से घिरा ये जैल ज़्यादा बड़ा भी नही था.

मैने चारो ओर का निरीक्षण किया, पीछे की साइड में बहुत सारे पेड़ खड़े थे, और थोड़ा सुनसान भी था.

 
Back
Top