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जादू की लकड़ी

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अध्याय 17

रात भर मैंने अपना दिमाग घुमाया की आखिर अब मैं करू तो क्या करू…

दिमाग जैसे फट ही गया हो ,फिर मुझे याद आया की मेरे पास तो हर ताले की चाबी है ,मेरा ताबीज क्यो ना फिर से इसे चाटा जाय,मैंने फिर से इसे चाट लिया …

काजल मेडम ने कहा था की इससे मेरी इमेजिनेशन की पॉवर बढ़ जाएगी ,मैं आंखे बंद किये सब कुछ सोचने लगा,कैसे मैं मेडम से मिला था क्या क्या हुआ था ...हर चीज बिल्कुल ऐसे जैसे मैं उसे अभी देख रहा हु मेरे आंखों के सामने चल रही थी ..

फिर वो आखिरी बात जो मेडम ने चन्दू से कहि थी .

मैंने तुरंत आंखे खोली और अपना लेपटॉप चालू करके इस मेडिसिन के बारे में सर्च करने लगा,मुझे कुछ भी नही मिला,आखिर मुझे याद आया की मेरा एक सीनियर था जो फार्मेसी से ग्रेजुएशन कर रहा था ,अभी सुबह के 4 बज चुके थे ,लेकिन जिज्ञासा इतनी थी की मैंने उसे काल कर दिया …

वो साला अपने होस्टल में बैठा हुआ गांजा फूक रहा था ,वो भी अपने समय का टॉपर था और मैं हमेशा से ही क्लास का टॉपर रहा था तो हमारी थोड़ी बातचीत थी…

मैंने उसे अपना इंट्रोडक्शन दिया उसने मुझे तुरंत ही पहचान लिया …

“ओह तू निशा का भाई है ना,..”

मादरचोद...लेकिन मैंने उसे कुछ नही कहा ,मैंने बस उसे उस ड्रग का नाम बताया जो की मेडम ने मुझे बताया था …

“अबे क्यो नशा फाड़ रहा है मैंने आजतक ऐसा कुछ नही सुना “

उसने एक ही बार में कहा

“लेकिन कुछ तो होगा जो इससे मिलता जुलता हॉगआ “

“तुझे क्या हो गया जो ये सब पूछ रहा है “

अब मैं उससे क्या कहु??

“वो मैंने एक ड्रग के बारे में सुना था जिससे आदमी बहुत ही ताकतवर और दिमागवाला हो जाता है…..”

“ओह तू NZT की बात कर रहा है ,अबे साले वो फिल्मो में दिखाते है की ऐसा होता है वैसा होता है होता कुछ घण्टा नही है ,बस चूतिया बनाते है साले,वो एन्टी डिप्रेशन की दवाई है आदमी को लगता है की वो कुछ बड़ा हो गया है लेकिन वो झांट का झांट ही रहता है…”

मैं NZT के बारे में जानता था लेकिन ये वो नही था ,

“अरे भाई कुछ तो बताओ कहि से तो पता करो “

वो थोड़े देर सोचा ..

“रुक पता करता हु अगर दुनिया में इसपर कोई भी रिसर्च हुई हो या इससे मिलता जुलता रिसर्च हुआ हो तो पता चल जाएगा ..”

वो कुछ देर बाद तक लाइन में ही बना रहा ,अपने रूम मेट्स से बकचोदी करता हुआ और अपने लेपटॉप में कुछ ढूंढता हुआ…

“अबे तूने इसके बारे में कहा से सुना “

“वो किसी ने बताया ..”

“तो सुन तुझे किसी ने अच्छे से चूतिया बना दिया है ,ना ऐसी कोई दवाई है ना ही जो नाम तू बता रहा है वैसा कुछ काम्बिनेशन भी है..

न्यूरोगिला ट्राय बेसाईल फास्फेट हा हा हा..”

वो जोरो से हँसा ..

“लौण्डे तुझे किसी ने बहुत जोरो से चूतिया बना दिया है ,न्यूरोगिला,बेसाईल बायोलॉजी से उठा लिया ,और ट्राय फास्फेट केमेस्ट्री से और एक बायो केमेस्ट्री जैसे लगने वाला नाम तुझे चिपका दिया ….”

वो जोरो से हंस रहा था पता नही साला गंजे के नशे में था की मेरा चुतियापा ही इतना बड़ा था ……

मैं इतना तो समझ गया था की मेरा चूतिया काटा जा रहा है लेकिन साला इसे चाटने के बाद कुछ तो होता है इससे तो मैं भी इनकार नही कर सकता था ……

बातो ही बातो में 5 बज चुके थे ,मैं रात भर से सोया नही था लेकिन फिर भी मैं फ्रेश होकर स्टेडियम की ओर निकल पड़ा …

मुझे यकीन था की मेडम को जब पता चला होगा की मैं चन्दू से बात कर रहा था तो उन्हें ये भी पता चल गया होगा की मैंने उनकी आवाज सुन ली है ,इसलिए छिपाने से कोई मतलब नही था…

नेहा के फोन में वॉइस रिकॉर्डर मौजूद था तो मैंने उसे उस काल की रिकार्डिंग मांग ली ,पूरी बात छोड़ कर उसने भी मुझे लास्ट की ही रिकॉर्डिंग दी क्योकि उसे भी अभी तक मुझपर पूरा भरोसा नही हुआ था …

सामने दो ही संभावना थी या तो मेडम आज मेरे सामने ही नही आएगी और अगर आई और नार्मल विहेब करने लगी तो जरूर उनके दिमाग में कोई बहाना होगा,मेडम भी कुछ वैसा ही सोच रही होगी…

वो भी सोच रही होगी की उनकी आवाज सुनने के बाद या तो मैं आऊंगा ही नही या तो आकर उनपर टूट पडूंगा,कुछ अजीब करूँगा लेकिन मुझे वो नही करना था जो वो सोच रही थी ,मुझे वो करना था जो मुझे करना था……

मैं वंहा पहुचा तो मेडम को हमेशा की तरह ही मझे देखकर मुस्कुराता हुआ पाया जैसे कुछ हुआ ही नही है ,मेरी एक संभावना में ये भी था ,तो मैंने अपनी एक्टिंग चालू कर दी और इशारे से उन्हें दूसरी ओर बुला लिया ……

“क्या हुआ राज तुम परेशान दिख रहे हो …??”

वही प्यारी आवाज वही प्यारी मुस्कान ,वही मासूम सा चहेरा ..

वाह साली या तो तू बहुत बड़ी एक्टर है या मैं ही कोई महा चोदू हु…

दोनो संभावना हो सकती थी ….

मैंने अपनी सूरत रोनी बना ली ,अब तो साला मैं भी एक्टिंग करूँगा …

“अरे क्या हुआ ??”

“मुझे आपसे ऐसी उम्मीद नही थी मेडम की आप मुझे धोखा दोगे”

उनके चहरे में आश्चर्य के भाव आ गए …

“क्या हुआ बताओ तो तुम ऐसा क्यो बोल रहे हो “

मैंने अपनी मोबाइल निकाल कर वो रिकार्डिंग उन्हें सुना दिया ..

“तुमने चन्दू से बात की कैसे ..”

उनके चहरे में आश्चर्य के ऐसी भाव आये की मुझे लगा जैसे वो सच में कुछ नही जानती ,वाह मेडम वाह …

“उससे आप को क्या बात वो नही की मैंने चन्दू से बात की, बात ये है की जिस औरत ने चन्दू को फोन रखने को कहा उसकी आवाज सुनो ...वो आप ही थी ..”

मेडम ने एक बार फिर से रिकार्डिंग प्ले की जैसे पहली बार में उसे मिस कर दिया हो …

“ओह तो ये भी यंहा है ..”

उन्होने कुछ सोचते हुए कहा …

“कौन ???”

मैं फिर से एक नई कहानी सुनने को तैयार हो गया था ..

“मेरी मारलो ..”

“क्या अभी ???”

मैं उनकी बात से जोरो से चौका ,वो जोरो से हंस पड़ी ..

“अरे पागल उसका नाम है मिस मेरी मारलो,पहले तो डॉ चूतिया की सेकेट्री हुआ करती थी लेकिन फिर कुछ झगड़ा होने के बाद वो डागा के साथ मिल गई ..”

मेरा दिमाग ने मुझे जोरो की गालियां दी ,अब अगर तू ऐसी चूतिया बातो में यकीन करने लगेगा तो तुझसे बड़ा चूतिया सच में दुनिया में कोई नही होगा,मेरे दिमाग ने ही मुझसे कहा …

“ओह...लेकिन उसकी आवाज ???”

“वही तो उसकी आवाज बिल्कुल ही मेरी तरह ही है “

काजल मेडम ने इतने आत्मविस्वास से कहा की मन किया उनके गालो में एक जोरदार झापड़ मार दु,मादरचोद क्या मैं चहरे से ही चोदू दिखता हु जो ये मुझे कोई भी अनाब शनाब कहानी सुना रही थी …

मेरे चहरे का भाव जैसे उन्होने पढ़ लिया था ,तुम्हे यकीन नही आता ना तो देखो …

उन्होंने अपना मोबाइल और एक वीडियो मेरे सामने खोल दिया …

वीडियो दो साल पहले एक वेबसाइट में उपलोड की गई थी ,एक 30-35 साल की भरी हुई यूरोप जैसे नैन नक्शो वाली महिला मेरे सामने थी ,वो अपने बड़े बड़े मंम्मो को सहला रही थी …

“आइये देखिए मेरे जवानी का जलवा ,कभी देखा है ऐसा ..”

वो ये सब कहते हुए अपने मंम्मो को मसल रही थी ,मेरी सच में फ़टी की फ़टी रह गई जब मैंने उसकी आवाज सुनी वो बिल्कुल ही काजल मेडम की तरह की ही आवाज थी ,एक आवाज की एक पिच होती है ,एक भारीपन या तेज या हल्का एक स्पेशल फ्रीक्वेंसी होती है ,इन्ही सभी चीजो को मिलकर लोग एक्टर्स की मिमिक्री किया करते है हमे लगता है की ये आवाज तो उस एक्टर की है लेकिन वो ऐसा कर पाते है इन्ही छोटी छोटी चीजो को समझकर …

क्योकि मुझे भी कभी मिमिक्री का शौक था (सच में है लेकिन आवाज ही नही निकाल पाता ) मैंने ये बारीकियां सीखी थी …

मुझे समझ आया की असल में उन दोनो की आवाज एक नही है बल्कि बोलने का स्टाइल और उसके साथ पिच ,और गहराई एक सी है इसलिए दोनो की आवाजे एक ही लगती है ,जैसे हमे सभी चाइनीज लोग और उनकी आवाज एक ही लगती है ,,,

वैसा ही कुछ ……

ये देखने के बाद मैं थोड़ा सोच में पड़ गया ,क्योकि वंहा उसके एक नही कई वीडियोस थे,मैंने उस वेबसाइट का नाम अपने दिमाग में ही नोट कर लिया ...तभी मेडम बोली ..

“इसकी इन्ही हरकतों के कारण डॉ से इसका झगड़ा होता रहता था ,इसे पता नही अपने जिस्म को दिखाने का क्या शौक था की ये ऐसे वेबसाइट्स में अपने जिस्म की नुमाइश करती रहती थी ,और इसके चाहने वाले भी बहुत है ,देखो ना कितने viwes है इसके ...इसी के कारण डॉ ने इसे वंहा से निकाल दिया ,और गुस्से में आकर इसने डागा के गैंग को जॉइन कर लिया और हमारे लिए एक मुसीबत बन गई …….”

साला अब मैं क्या करू ,पहले सोचा था की काजल मेडम ही गलत होगी लेकिन इनके पास तो फूल प्रूफ सबूत है इसे नकार भी नही सकता था ….

“तुम्हे अब भी मुझपर भरोसा नही है ..??”

उन्होंने मुझे घूरा ..

“आपने ही तो मुझे इतना काबिल बनाया है अब आप पर भरोसा नही करूँगा तो किसपर करूँगा ,ऐसे ये मेरी मारलो है बहुत सेक्सी .मिलेगी तो जरूर मरूँगा इसकी ..”

काजल मेडम ने मुझे झूठे गुस्से से देखा और मेरे गालो में एक चपत लगा दी ..

“कल रात मन नही भरा तेरा “

“अरे मेडम ये दवाई है की क्या है साला मैं तो पागल ही हो गया था…”अब ये सच में क्या है मुझे भी नही पता लेकिन कम से कम इसे दवाई बोलकर मेडम के शक के दायरे से तो बाहर रहूंगा ..

वो फिर से हंसी ,मैंने कहा था ना की ये तुम्हारे अंदर बहुत ही ज्यादा शक्ति ला देगा जिसे सम्हालना तुम्हारे लिए मुश्किल हो जाएगा ,खैर तुमने नीबू चाटा..”

उन्होने शरारत से कहा …

“जरूरत ही नही पड़ी ,असल में मेरा निकला लेकिन ...लेकिन मूलबन्ध लग जाने के कारण फिर से अंदर चला गया …”

वो थोड़ी देर तक मुझे नॉटी निगाहों से देखती रही साली ये मुझे कब देगी...पहली बार उनके लिए कुछ ऐसा ख्याल मेरे दिमाग में आया उनकी आंखों में ही वो बात थी की ऐसा लगा जैसे भी पकड़कर किस कर दु …..

“वो तुमने इसकी इतनी प्रेक्टिस जो की है ,इसलिए लग गया कोई बात नही ये इंटरलन ओर्गास्म है ,तुम्हारी शक्ति भी बच गई और साथ ही वो फील भी मिल गया ,अब प्रेक्टिस करे “

मैं फिर से उनके साथ हो लिया ….

अब काजल मेडम गलत थी की सही थी ,वो चन्दू के साथ काजल थी की मेरी मारलो ये पता लगाना अभी मेरे दिमाग से बाहर था,मुझे बस इतना पता था की मेडम के साथ मुझे वैसे ही रहना है जैसे मैं पहले रहता था लेकिन अब अपनी आंखे खोलकर ,किसी भी चीज पर इतनी जल्दी भरोसा नही कर सकता था …..

और ये बात उन्हें भी पता होगी की मैं उनके ऊपर नजर रखे हुए हु तो वो भी चीजो को थोड़े हिसाब से ही करेगी ,अगर वो गलत हुई तो वो सावधानी रखने के चक्कर में जरूर ऐसा कुछ करेगी जिससे वो पकड़ में आ जाएगी ,तो भइया जैसे लोहा लोहे को काटता है वैसे ही सावधानी सावधानी को कटेगा,........

खैर अब मेरा हाल ये था की मुझे पता नही था की …

1.काजल मेडम मेरे साथ है की नही …

2. नेहा सच में मेरा साथ देगी या फिर मेरे और उसके बीच हुए समझौते को चन्दू को बता देगी ..

3.वकील साहब को किसने मारा

4.ये डॉ चुटिया बाबा जी ही है या सिर्फ मुझे चूतिया बनाने के लिए बोला गया एक नाम

5.बाबा जी की ये लड़की कोई जादुई लकड़ी है या फिर एक केमिकल फार्मूला ,

6. ये आखिर काम कैसे करता है क्योकी हर बार इसका इफेक्ट ही दूसरा होता है

7.निशा सच में मुझसे प्यार करती है की वो भी इस गेम में कोई पात्र है जो मुझे फंसा रही है (ऐसे मुझे तो लगता है की वो मासूम है)

8,पिता जी का इन सबमे क्या रोल है

9.ये चन्दू मादरचोद आखिर छिपा कहा है

10. अगर काजल मेडम ने ही चन्दू को छिपाया है तो फिर असल में उन्हें चाहिए क्या,अगर उन्हें हमे मारना ही है तो मार ही क्यो नही देते …

11. अगर मेडम सच में चन्दू के साथ है तो फिर मुझे क्यो ट्रेन किया जा रहा है (इतनी मेहरबानी आखिर किस लिए जज साहब …)

12. क्या मुझे फिर से कान्ता और शबीना की लेनी चाहिए(क्योकि सच में खड़ा हो बहुत होने लगा था और मजा भी साला बहुत आ रहा था ….) और क्या उनकी ले कर फोटो चन्दू को भेजना चाहिए क्योकि नेहा और मेरा एक समझौता भी तो हुआ था ...

13. और आखिर में क्या ये सब सोचकर मैं खुद ही पागल हो जाऊंगा ,कही यही तो सालो का प्लान नही है की मुझे पागल करके मेरी जायजाद हड़प ले ... ..

सब सवाल दिमाग में घूमने लगे …..

और

“मैं माँ चुदाये सब “

मैं झल्ला गया था …

“छि इतनी गंदी गालिया देना कहा से सिख लिए “

इस बार मेरे पीछे रश्मि खड़ी थी ,वो भी मेरे साथ क्लास आया करती थी ,उसे देखकर मुझे मेडम की बात याद आयी की उसे प्रपोज कर दु ,और एक चीज और मेरे दिमाग में आई ….

इसकी तो मैंने ली ही नही …..ये मादरचोद मेरा लौड़ा,इतनी टेंशन में फिर के फुंकार मारने लगा ……

 
अध्याय 18

रश्मि ……….

पूरा नाम रश्मि सिंह राजपूत,भैरव सिंह राजपूत की इकलौती बेटी ,भैरव सिंह शहर का ट्रांसपोर्ट किंग कहलाता था इसके अलावा भी उसके कई करोगबार थे जिसमे रियल स्टेट का काम मुख्य था ,जिसे उसका भाई भीष्म सिंह देखता था,पैसे और नाम में उनका परिवार हमारे परिवार के ठक्कर का था ,वही हमारी माँ एक दूसरे की सहेली भी थी लेकिन भैरव सिंह सिर्फ पैसे से अमीर नही था बल्कि वो एक बाहुबली भी था ,सामान्य रूप से देखने पर इसका पता नही चलता लेकिन उसका बहुत नाम था ,रियल स्टेट और ट्रांसपोर्ट का काम ही ऐसा था की उन्हें गुंडे पाल कर रखने पड़ते थे,और मैंने सुना था की उसके नाम से ही लोगो की फटती है,शायद कोई कारण उसके पास्ट में छिपा था ,खैर…

उसकी इकलौती बेटी यानी रश्मि मेरी बेस्ट फ्रेंड भी थी और गर्ल फ्रेंड भी ,जो आज मेरे सामने खड़ी थी और मैं उसे अजीब निगगहो से देख रहा था ……..

“ऐसे क्या देख रहे हो ,आजकल तो मुझसे ढंग से बात भी नही करते क्या हो गया है तुम्हे ,मुझसे ज्यादा तो तुम उस काजल मेडम से चिपके रहते हो “

उसका गुस्सा जायज था लेकिन उस बेचारी को क्या बताऊ की मेरे जीवन में क्या चल रहा है ,ऐसे वो ही एक थी जिसपर मैं आंखे बंद करके विस्वास कर सकता था ,उसने जीवन में कभी मुझे अकेला होने नही दिया ,जब मैं चूतिया था तब भी मुझे जी जान से प्यार किया और अब जब मैं फिर से चूतिया बनाया जा रहा हु मुझे उसके प्यार और सहारे की जरूरत महसूस हुई…..

वो मुझे बचपन से जानती थी और मेरे रग रग से वाकिफ भी थी मेरे चहरे को देखकर ही उसे समझ आ गया था की मैं किसी बहुत ही बड़ी मुश्किल से गुजर रहा हु,वो शांत होकर मेरे बाजू में आ बैठी …

“क्या हुआ राज,तू इतने परेशान क्यो हो “

उसने अपना हाथ मेरे हाथो में रख दिया …

“तुम्हे क्या बताऊ रश्मि सोचा था की ताकत मिल जाएगा,आत्मविस्वास आ जाएगा,तो सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन लगता है की आपके पास जितनी ताकत होती है भगवान भी उसी हिसाब से मुशीबत भी भेजता है,कल को मुझे कोई मतलब नही था की मुझे कोई क्या कहता है ,मुझे तुम प्यार के दो लब्ज जो बोल देती थी दिल खुस हो जाता था ,जंगल से आने के बाद मैं दुनिया दारी में इन्वाल्व होने लगा और देखो इसी दुनियादारी ने मुझे कहा लाकर पटक दिया,पहले मेरे परिवार वाले मुझे कुछ नही समझते थे मुझे ऐसा लगता है ,मैं सोचता था की काश परिवार के लोग बाहर के लोग मुझे इज्जत दे ,जब वो मिलने लगा तो जिम्मेदारी भी आ गई …….”

उसने मेरे बालो को बड़े ही प्यार से सहलाया …

“बताओ तो की क्या हुआ “

मैंने आसपास देखा हम स्टेडियम के बाहर बैठे थे ..

“यंहा नही चलो कही चलते है जन्हा हमे कोई डिस्टर्ब ना करे ..”

वो थोड़े देर सोचने लगी ..

“चलो फिर घर चलते है “

“नही वंहा निशा होगी वो हमे अकेले नही रहने देगी ,क्या तुम्हारे घर जा सकते है ??”

मेरी बात सुनकर वो बेहद ही खुश हो गई

“हा बिल्कुल ,जीवन में पहली बार तुम मेरे घर जाओगे …”

उसने उछल कर कहा ……

“हा अब ससुराल कभी ना कभी तो जाना ही पड़ेगा ना..”

“क्या कहा ..”

“कुछ नही चलो “

वो मेरी बात सुन चुकी थी वो हल्के हल्के मुस्कुरा रही थी ,अभी तक मैंने उसे प्रपोज नही किया था लेकिन साला इसकी जरूरत भी तो नही थी,हम दोनो को पता था …

रश्मि का घर घर नही, बंगला भी नही ,बल्कि कोई किले जैसे था ,एक बड़ा सा महल था और इतने पहरेदार की मुझे लगा मैं किसी राजा महाराजा के महल में आ गया…..

“यार तुम्हारे पापा कोई राजा है क्या ऐसे ल लग रहा है जैसे किसी राजा के महल में आ गया हु “

उसने मुझे अजीब निगहो से देखा ..

“क्या तुम्हे सच में नही पता …”

उसकी बात से मैं चौक गया ..

“क्या ???क्या नही पता ..”

वो मुस्कुराई ..

“चलो दिखाती हु “

वो सच में महल ही था,कमरों में बड़े बड़े राजाओ के पोस्टर लगे थे वही बड़ी बड़ी तलवारे और ढाल लटकी थी ..

“ये हमारे पूर्वज है “

मैंने नीचे नाम पढा …

“इसकी माँ की इनका नाम तो मैंने हिस्ट्री में पड़ा था,तुम राजा प्रताप सिंह महाराज की पोती हो ??”

वो जोरो से हंसी

“नही परपोती “

वो दूसरे तस्वीर की तरफ इशारा करने लगी

“ये मेरे दादा है महाराज कुँवर सिंह ……”

मैं पूरी तरह से चौक गया था क्योकि मुझे पता था की रश्मि अमीर परिवार से है लेकिन इतने बड़े खानदान से होगी इसका अंदाज भी मुझे नही था,इनके पूर्वजो की तो मैं कहानिया सुना करता था …

वही रश्मि में मुझे कभी राजाओ वाला एटीट्यूड भी नही दिखा,एक सिंपल सी स्कूटी में वो स्कूल जाया करती थी ,मेरे जैसा चोदू उसके बचपन का दोस्त था ,या उसके तेवर कुछ शाही जरूर थे लेकिन उम्मीद नही थी की वो रॉयल खानदान से होगी ……

“मुझे कभी लगा नही की तुम रॉयल परिवार से होगी “

वो बस मुस्कुराई ..

“पूरी जयजाद तो सरकार ने ले ली ,पेंशन मिलता था वो भी खत्म ,जो बचा था वो बटवारे के भेट चढ़ गया,और फिर शाही लोगो की शाही बाते,इतने नॉकर चाकर सब की आदत सी हो गई है इन्हें ,इतने बड़े महल को भी तो मेंटेन करना होता है ,देखा जाए तो सब कुछ सम्हलना बहुत ही मुश्किल हो जाता है,मेरे परिवार के अधिकतर लोगो के लिए ये सब दिखावा ही है जिसे हम ढो रहे है ,वो अपने हिस्से का सब बेच कर विदेश में जा बसे,मेरे दादा जी का परिवार ही यंहा बच गया ,और मेरे पापा में वही शाही खून है जिसकी मर्यादा बचाने के लिए वो आज भी संघर्षरत रहते है ,ये सब पहरेदार उसी का नतीजा है ,चलो तुम्हे पिता जी से मिलाती हु ,राजा भैरव सिंह …”

वो थोड़ा मुस्कुराई जिसमे थोड़ी उदासी भी शामिल थी ,रॉयल परिवार के होते है उन बेचारो को ही पता है की वो शान जिनसे उनके पूर्वज रहते है वो कभी वापस नही आ पायेगा ,लेकिन जो बच गया है उसे भी सम्हालना बेहद ही मुश्किल काम है,क्योकि आय का कोई स्रोत नही बचा,बहुत कम शाही परिवार ही है जो आज भी उसी ठाठ से रह रहे है और वो अलग अलग बिजनेस के भरोसे ऐसा कर पा रहे है ,उनमे ही एक इनके पिता भी थे,

बड़ी सी गैलरी से चलते हुए हम पीछे की तरफ पहुचे वंहा एक बड़ा बगीचा था,मैं ये सब ऐसे देख रहा था जैसे राजा महाराजाओ की कहानियों में पहुच गया हु ….

बगीचे में कई मुस्टंडे वर्जिश कर रहे थे,बिल्कुल देशी अखाड़ा स्टाइल में ,वही एक बड़े सिहासननुमा कुर्सी में एक रोबदार इंसान अपने मुछो में ताव देता हुआ बैठा था,रश्मि ने उनकी ओर ही इशारा किया ..

“पिता जी ..”उसने हल्के से कहा ..

,मैं समझ गया था की यही उसके पिता जी है ,सच में किसी राजा से कम नही थे,वो अभी लंगोट में बैठे थे ,एक पहलवान उनके शरीर की मालिस कर रहा था सामने अखाड़े में कुश्ती चल रही थी ,और वो मूंछो में ताव देते हुए बैठे थे …

“पिता जी ये मेरा दोस्त है राज “

“नमस्ते अंकल “

उन्होंने हमे घूर कर देखा ,सच में क्या आंखे थी ,अगर जंगल से आने से पहले मैं इनसे मिलता तो शायद इनकी आंखे देखकर ही मूत देता…

“भइया ये ही वो लड़का है …”

पास ही खड़ा एक आदमी बोल उठा शायद यही रश्मि के चाचा थे,एक पहलवान की तरह बदन वाले और बड़ी बड़ी मूंछो वाले ..

“ओह तो तुम हो हमारी राजकुमारी के खास दोस्त,चंदानी के बेटे …”

मैं कुछ कहता इससे पहले ही रश्मि बोल पड़ी ..

“पिता जी आप भी ना ..”

वो हल्के से हंसा …

“अरे भई अब खास दोस्त ही तो कहूंगा इसे ,जिसके कारण हमारी राजकुमारी स्कूटी से स्कूल जाया करती है ताकि इसे पीछे बिठा कर घुमा सके ,क्यो..और जिसके कारण हमारी फूल सी बेटी अब कराटे सीखने जाया करती है ..”

उनकी बात से मेरी संट हो गई क्योकि इस आदमी को तो सब पता था ,मैं बस मुस्कुराया ..

“अरे बेटे हमे सब पता है ,इसकी स्कूटी के पीछे दो मर्सडीज कार चलती है शायद तुमने कभी देखा नही होगा,ऐसे चंदानी है चूतिया साले ने सभी बेटियों के लिए कार खरीद कर दिया लेकिन उसका इकलौता बेटा पैदल स्कूल जाता है ..”

यानी इन्हें सब कुछ पता था ,लेकिन उससे भी ज्यादा बड़ी बात ये थी की रश्मि मुझे सच में बहुत चाहती थी ,और ना जाने कब से ...मुझे वो दिन याद आये जब मैं उदास होता था और वो मुझे लिफ्ट देती थी तो उसके पीछे बैठने भर से मेरी सारी तकलीफे दूर हो जाती थी ,सच में मैं बहुत ही लक्की आदमी था जो मुझे ऐसी दोस्त मिली थी ……

“राजा साहब ये कराटे वराटे कुछ नही होता सब साला विदेशियों के चोचले है ,असली मजा तो कुश्ती में है, इमने कोई दम नही होता “

वंहा खड़ा एक आदमी बोला,सच में वो कोई दानव सा दिख रहा था ….

“अच्छा ऐसा है तो फिर जाओ दिखाओ की तुमने आजतक क्या सीखा ,हम भी देखे की हमारी बेटी के खास दोस्त में कितना दम है “

उसने रश्मि की ओर देखा और मुस्कुरा दिया,अखाड़े में सभी मुझे ही घूर रहे थे,मैं समझ गया था की ये सीधे सीधे मुझे उस दानव के आगे परोस रहे है ……

मैंने रश्मि की ओर देखा …

“नाक मत कटाना “

वो मस्कुराते हुए बोली ,वो मंद मंद मुस्कुरा रही थी ,वो भी मेरे मजे ले रही थी ,मुझे देखकर सभी के चहरे में मुसकान आ गई थी ऐसे लग रहा था जैसे ये मुझे बलि का बकरा समझ रहे थे और इन्हें उम्मीद थी की आज मैं इनका पूरा इंटरटेनमेंट करूँगा ….

“क्यो बरखुरदार क्या हुआ “

उसके पिता ने फिर से कहा ,मैंने तावीज निकाली हल्के से उसे चाटा और अपनी टीशर्ट उतार कर अखाड़े में चला गया,वंहा की मिट्टी को अपने माथे में लगा लिया और जांघो में एक ताल मार दी ,असल में ये सब मैंने फिल्मो में देखा था ……

“भइया ट्रेलर तो अच्छा लग रहा है ,अब फ़िल्म शुरू करे “

रश्मि के चाचा ने कहा ,और राजा साहब की आज्ञा मिल गई ….

लकड़ी को चाटने के बाद से मेरे नशो में खून का प्रवाह बढ़ गया था ,दिमाग एकदम शून्य हो गया था जैसे सब कुछ एकदम ही धीरे हो गया हो,जब जब मैं अपने को एकाग्र करने की कोशिस करता मैं बहुत ही एकाग्र हो जाता था,मेरे सामने एक हट्टा कट्टा मुस्टंडा खड़ा था वो भी लंगोट में ,उसने अपनी पोजिशन ले ली ,अब साला मुझे कौन सा कुश्ती आती थी ,वो मुझपर झपटा लेकिन मैंने उसके शरीर को ध्यान से देखा मुझे वो सब स्पॉट नजर आ गए जिस पर मैं अपने मार्शल आर्ट के टेक्निक से वार कर सकता था ,बाकी सब मेरी प्रेक्टिस से हो गया,पहला किक उसके पैरो के पास उसका घुटना थोड़ा मुड़ा वो थोडा लड़खड़ाया ,दूसरा वार उंगलियों से सीधे पसलियों पर,एक चीख निकली और तीसरा पंच मुक्के से माथे के साइड में खून दिमाग में जाने से थोड़े देर के लिए रुक गया ,छोटी सी इंजुरी और वो वही धड़ाम…….

ये सब सिर्फ कुछ 5 सेकंड में ही हो गया और मैं फिर से नार्मल स्टेज में आ चुका था …..

“इसकी माँ का ..”

सभी लोग भौचक्के से उस गिरे हुए पहलवान को ही देख रहे थे ,ऐसे ये कोई मार्शल आर्ट का कमाल नही था,क्योकि पहलवान को गिराना कोई बच्चे का काम नही था लेकिन ये कमाल था मेरी उस लकड़ी का और उससे उत्पन्न एकाग्रता का और मेरी थोड़ी सी प्रेक्टिस का …….

मैं रश्मि की ओर देखा वो भी मुह फाड़े ये सब देख रही थी …

“वाओ “उसके मुह से बस यही निकला

भैरव सिंह कभी मुझे देखते तो कभी उस पहलवान को …

उन्होंने फिर से एक दूसरे पहलवान की ओर इशारा किया ,शायद वो और भी बड़ा पहलवान हो ..

वो अखाड़े में आ चुका था ,पहले वाले से दूसरी पोजिशन ले ली ..

वो फिर मुझपर झपटा …

और मेरा दिमाग फिर से शून्य …..

वो मुझे ऊपर से पकड़ना चाहता था इसलिए मैं घटने के बल बैठ कर उसकी ओर घिसटा ..अपने शरीर को झुकाया और उसके पैरो के बीच से निकल गया ,लेकिन इस दौरान एक पंच उसके जांघो के एक स्पेशल नश पर मार दी जिससे उसका पैर थोड़ी देर के लिए लकवाग्रस्त हो गया,वो लड़खड़ाता हुआ जमीन पर गिरा ,लेकिन उसके गिरने से पहले ही मैं खड़ा होकर पीछे से उसके मेरुदंड (स्पाइनल कार्ड) में अपनी उंगलियों से एक वार कर दिया जो की एक नर्व पर किया वार था जिससे उसके कमर से नीचे का शरीर थोड़ी देर के लिए पैरालाइज हो गया था ,

वो वही गिर गया …

ये सब भी कुछ 5 सेकंड से कम के वक्त में हो गया …

सभी फिर से मुह फाडे ये देख रहे थे ……

“वाह बेटा तुम तो कमाल के फाइटर हो यार ,हमारे बड़े बड़े पहलवानो को एक ही वॉर में चीत कर दिया “इस बार रश्मि का चाचा भीष्म बोल उठा……

वही भैरव सिंह उठा और मेरे पास आया,उसने मेरे पीठ पर शाबासी दी ,वो इतना भारी था की मेरा पूरा शरीर ही हिल गया …

“शाबास बेटे...हमे खुशी है की तुम हमारी बेटी के दोस्त हो “

उनकी बात सुनकर रश्मि भी खुस हो गई ,और आंखों ही आंखों में इशारा किया जैसे कह रही हो ‘क्या बात है ‘

उसके घर वालो ने मेरी बहुत खातिरदारी की ,जितना मैंने भैरव सिंह के बारे में सुना था वो असल में उतना भी खतरनाक आदमी नही था खासकर अपने परिवार के साथ,वो रश्मि को बेहद प्यार करता था,रश्मि पूरे घर की चहेती थी ,अपने पिता की एक ही औलाद भी थी ,वही भीष्म का एक बेटा था जो की छोटा था,हमने साथ ही नाश्ता किया,उसकी चाची और माँ ने जबरदस्ती मुझे नाश्ता खिलाया,और साथ ही मेरे परिवार को लेकर भी बाते हुई ,रश्मि की माँ और चाची मेरी माँ के अच्छे दोस्त थे ..

ये सब हो रहा था और डाइनिंग टेबल में मेरे सामने बैठी रश्मि मुझे मस्कुराते हुए देख रही थी …

मुझे ऐसा लगा जैसे जमाई पहली बार ससुराल आया हो……

इन सबके बाद रश्मि मुझे अपने कमरे में ले गई …

आखिर वो राजकुमारी थी तो कमरा भी वैसा ही था,बेहद ही आलीशान …….

“तो मेरे घर वाले कैसे लगे “

उसने आते ही कहा ,हम उसके कमरे में रखे एक सोफे पर बैठ गए थे ….

“यार पहली बार पता चला की लोग बार बार ससुराल क्यो जाते है ,जब इतनी खातिरदारी हो तो क्यो ना जाए “

वो मुझे मुस्करा कर देखने लगी ..

“अच्छा ऐसी बात है,गधे कहि के “

उसने एक पिलो मेरी ओर फेका और हल्के हल्के मुस्कुराने लगी …

“ऐसे तुमने अपने घर वालो को मेरे बारे में बताया क्या है ..??”

“कुछ भी नही ,मैं जन्हा भी जाती हु हमारे गार्ड मेरे साथ होते है ,ये बात मुझे भी पता होती है लेकिन मैंने तुम्हे कभी नही बताया था ,तो तुम्हारे बारे में चाचा और पापा को पहले से पता था, मैं सबकी लाडली हु तो वो मुझे कभी दुखी नही करते,मैंने उन्हें साफ कहा था की तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो ,...”

“सिर्फ दोस्त हु …….”

मैंने रश्मि की आंखों में देखा ,वो भी मुझे ही देख रही थी शमा थोड़ा सुहाना हो चुका था ……

“तो और क्या हो ..??”

रश्मि ने हल्के से कहा,मैं उसके पास सरक गया …

“तुम नही जानती ..??”

अब हमारी सांसे भी एक दूजे से टकरा रही थी …

“तुमने कभी कहा ही नही “

उसने फिर से धीरे से कहा ,उसके होठ फड़फड़ा रहे थे वही उसके दिल की धड़कने इतनी तेज थी की उसकी आवाज मेरे कानो तक भी पहुच रही थी ,मैं अपने होठो को हल्के से उसके होठो के करीब लाने लगा लेकिन उसने अपना चहरा मोड़ लिया ,और मुझे धक्का दे दिया …….

“जुबान से कहने की हिम्मत नही है क्या ...मैं सुनने को बेताब हो गई हु और तुम कुछ कहते ही नही हो ..”

उसने गुस्से से मुझे कहा हालांकि उसका गुस्सा बेहद ही कमजोर था ..

मैंने उसके हाथो को अपने हाथो में थाम लिया..

“अब भी कहने की कोई जरूरत है ??”

“हा है..”

“क्या कहु ..???”

उसनें मुझे गुस्से से देखा

“भाड़ में जाओ “

वो उठ खड़ी हुई और मुझसे दूर जाने लगी ,मैंने तुरंत ही वंहा रखे एक पिलो को उठा लिया और अपने घुटनो के बल प्रपोज करने वाले स्टाइल में बैठ गया …

“रश्मि मेरी जान ...मेरे दिल की धड़कन...जब जब दुनिया ने मुझे ठुकराया तुमने मुझे सहारा दिया,जब जब दिल में उदासी छाई तुमने मुझे खुशी दी ,मैं तुम्हारा धन्यवाद कैसे करू क्योकि उसके लिए मेरे पास कोई शब्द ही नही है,तुमने मुझे जो प्यार दिया है उसके बयान के लिए कोई शब्द पर्याप्त भी नही है …….आई लव यु मेरी जान….लेकिन याद रखना ये सिर्फ 3 ही शब्द है और मेरा प्यारे को बताने के लिए बिल्कुल ही नाकाफी भी …मैं इससे कही ज्यादा तुमसे प्यार करता हु ,इतना की मैं कह भी नही सकता जता भी नही सकता ,दिखा भी नही सकता …….फिर भी मैं कहता हु आई लव यू रश्मि …”

रश्मि मेरे सामने ही खड़ी थी ,उसकी आंखों में आंसू थे ,उसने वो पिलो पकड़ा और मुझे जोरो से मारने लगी ,और सीधे मेरे गले से लग गई ……

“कान तरस गए थे मेरे ये सुनने के लिए लेकिन तुम्हे तो मेरी कोई फिक्र ही नही है आई लव यू ,आई लव यू माय लव ..“

वो मेरे गालो को बेतहासा चूमने लगी और फिर से मुझे जकड़ लिया

,मैं उसके बालो को सहला रहा था ,

“दीदी आप रो क्यो रही हो इसने आपको कुछ कहा क्या ..”

एक भोली सी आवाज सुनकर हम अलग हुए ये भीष्म का बेटा और रश्मि का चहेरा भाई था ..

उसे देखकर हमारे चहरे में मुस्कान आ गई ,और रश्मि ने उसे अपने गोद में उठा लिया …

“नही बाबु ,ये हमारे बड़े अच्छे दोस्त है हल्लो करो ..”

“हैल्लो हम राजकुमार कुँवर सिंह है और आप ..”

उस बच्चे इन मेरी ओर हाथ बढ़ाया …

“बेटा हम आपकी दीदी के दोस्त है राज ..”

“आप राजकुमार नही हो …??”

“नही बेटे हम राजा है राजा राज चंदानी …”

“ये कैसा नाम हुआ ?”बच्चे ने भोली सी आवाज में कहा

मेरी बात को सुनकर रश्मि हँसने लगी ..

“रहने दो तुम्हारे नाम में ये राजा वाजा फिट नही होता ,बाबू चलो जाओ हमे अपने दोस्त के साथ पढाई करनी है “

“ओके दीदी एक पु दो ना “

मैं अचरज से देख रहा था की ये क्या पु है ,लेकिन रश्मि ने उसके गालो में एक जोर की पप्पी दी ,उसने भी रश्मि को एक पप्पी दी तब समझ आया की ये पु क्या है…..

वो वंहा से भागता हुआ बाहर चला गया …

“पापा इसे बहुत प्यार करते है ,इन्हें अपने पिता का नाम दिया है “

मैं रश्मि को ही घूर रहा था …

“क्या हुआ ..”उसने आंखे बड़ी करके कहा

“मुझे भी एक पु दो ना “

वो खिलखिलाई और मेरे कंधे में जोर का मुक्का मार दिया …
 
अध्याय 19

मैंने आगे बढ़ कर रश्मि के कमर में अपना कस लिया ..

उसे उसे अपनी ओर खिंचा…..

वो सीधे मेरे सीने से आ लगी थी ,उसने शर्म से अपना सर झुकाकर मेरे सीने में टिका दिया ….

“तुम तो बोल रहे थे की तुम्हे कुछ बात करनी है ..”

“यार इतने रोमांटिक मूड में प्लीज् वो सब याद मत दिलाओ “

मेरे सामने फिर से वही मंजर आ गया ..

“कठनाइयों से भागने से उनका निराकरण नही होता,उसके लिए उससे जूझना पड़ता है ,उसका सामना करना पड़ता है …”

मेरे दिमाग में एक ही बात चल रही थी क्या मैं रश्मि को सभी चीजो को बता दु या नही ……

मैंने उसे बिस्तर में बिठा दिया ……

“आखरी बोल भी दो की क्या परेशानी है ..??”

मैंने उसे बताने का निर्णय किया ,मैंने शुरू किया केदारनाथ की यात्रा से और बाबा के बारे में बताया,फिर मेरा वापस आना काजल मेडम से मिलना,चन्दू का घर से जाना,वकील का मरना,और फिर जयजाद के प्रॉब्लम्स और फिर चन्दू से बात करते हुए मेडम की आवाज का सुनना…..इन सबमे मैंने कान्ता ,शबीना और निशा की चुदाई को छोड़ दिया था ,मैंने नेहा और चन्दू के बारे में सब बता दिया ……

“ओह तो इस लकड़ी का ही कमाल है जो तुम ये सब कर पा रहे हो ..”

“हा लेकिन फिर भी मुझे पता नही की ये जादुई है की कोई केमिकल फार्मूला ,क्योकि इसका असर मेरे समझ के बाहर है ..”

“ह्म्म्म यार अगर इन सबका सॉल्यूशन चाहते हो तो शुरू से शुरू करो ,बाबा जी से क्यो ना तुम बाबा जी से ही पूछ लो …..”

उसकी बात में दम था लेकिन मुझे फिर से वंहा जाना होगा..

“इतने दूर फिर से जाना,और इसका पता सभी को चल जाएगा “

“नही चलेगा ,तुम तैयार होकर मेरे साथ घर से निकलना,ऐसे भी एग्जाम का समय है और कोई स्कूल नही जा रहा , मैं यंहा पापा से बोलकर कुछ इंतजाम करवाती हु,और निशा को बोल देना की तुम मेरे साथ घूमने जा रहे हो शाम तक आओगे “

उसकी बात से मैं आश्चर्य में पड़ गया

“लेकिन बेबी हमे इतनी दूर जाना है हम इतने जल्दी कैसे वापस आएंगे..”

रश्मि के होठो में मुस्कान आ गई ..

“वो तुम मुझपर छोड़ दो…”

“ओके और पु का क्या “

वो मुस्कुराई

“पहले काम फिर इनाम “

वो इठलाते हुए उठकर खड़ी हो गई और मुझे घर भेज दिया ..

मैं वंहा से वापस आकर तैयार हुआ ,ऐसे भी एग्जाम शुरू होने वाले थे तो लोग स्कूल नही जाते थे ,निशा भी नही जा रही थी मैंने उसे जब उसे रश्मि के साथ घूमने जाने की बात बताई तो वो हँसने लगी ..

“आपके घूमने से कोई फायदा नही होने वाला पहले प्रपोज तो कर लो ऐसा ना हो जाए की कोई दूसरा उसे उठाकर ले जाए ..”

मैंने उसे बताया की मैंने उसे प्रपोज कर दिया है ,वो बहुत ही खुश हुई….रश्मि मुझे लेने आई और हम तैयार होकर निकल गए ,मैंने आज टॉमी को भी अपने साथ ले लिया ,वो फिर से मुझे अपने घर ले आई …..

उसके महल के पिछवाड़े वाले बड़े से गार्डन के बीचो बीचो एक हेलीपैड बना हुआ था जिसमे एक हेलीकॉप्टर खड़ा हुआ था,

“वाओ यार …हम इससे जाने वाले है “

रश्मि मुस्कुराने लगी

“जी हा अब चलिए “

रश्मि ने पायलेट को कुछ इंस्ट्रक्शन दिए ,रश्मि के पिता जी ने वंहा के फारेस्ट अधिकारियों से बात की थी जिन्होंने मुझे रेस्क्यू किया था ,उन्होंने बाबा जी वाली पहाड़ी का लोकेशन पता करवाया और फिर मेप में सेट करके पायलेट के साथ प्लान बना लिया था ,

हम कुछ 2 घण्टे में ही वंहा पहुच गए थे ,मैं पहली बार हेलीकॉप्टर का सफर कर रहा था ,मैं और रश्मि दोनो ही बहुत ही खुश थे …यंहा तक की टॉमी भी बहुत खुस लग रहा था,अब उसकी रश्मि के साथ भी अच्छी बन रही थी ….

“यार अंकल जो तो टू गुड है “

वो हँसने लगी

“हा मेरे लिए वो कुछ भी कर देते है ऐसे भी मैं उनसे कुछ मांगती नही ,कभी कभी तो कुछ मांगती हु “

पायलेट में खुली जगह देखकर हेलीकॉप्टर लेंड किया वो पहले से ही उस जगह को मेप में चिन्हित कर रखा था…

 
पहाड़ी वंहा से कुछ ही दूर थी ,जब मैं वंहा से उतरा तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैं अपने घर वापस आ गया हु ,हर चीज मुझे पहचानी सी लग रही थी,वही टॉमी भी खुशी से इधर उधर उछलने कूदने लगा …….

हम पहाड़ी तक पहुच गए ,रश्मि मेरे साथ ही आयी…

इस समय बाबा जी ध्यान में बैठे हुए थे,कुछ देर के इंतजार के बाद वो उठे ,मैं सीधे जाकर उनके कदमो में गिर गया …..

वो भी मुझे देखकर खुश थे ...हम तीनो बैठा कर इधर उधर की बाते करने लगे..कुछ देर बात बाबा जी ने पूछ ही लिया

“अब बताओगे की तुम यंहा क्यो आये हो “

मैं उन्हें सब कुछ बताना चाहता था मेरे सेक्स एनकाउंटर भी लेकिन वो सब मैं रश्मि के सामने नही बता सकता था ,मेरी दुविधा बाबा जी समझ चुके थे …

“बेटी तुम और टॉमी पहली बार यंहा आये तो जाओ नीचे का बगीचा घूम कर आ जाओ वंहा बहुत अच्छे फूल लगे है……

रश्मि ने एक बार मुझे देखा मैने भी आंखों से हामी भरी और रश्मि टॉमी के साथ निकल पड़ी …..

“अब बताओ की आखिर क्या समस्या आ पड़ी है “

मैंने उन्हें शरू से लेकर आखरी तक सब कुछ बता दिया ,अपनी पूरी दुविधा भी मैंने उनके सामने रख दी ,वो मेरी बात बड़े ही ध्यान से सुन रहे थे कभी कभी वो थोड़ा मुस्कुरा देते,

“बाबा जी क्या आप ही डॉ है ….??.”

सब बताने के बाद मैंने पूछा ...

वो बस मुस्कुराये और कहने लगे.

“बचपन में मेरी माँ मुझे एक कहानी सुनाया करती थी,कहानी कुछ ऐसी थी की एक बार भगवान को एक गरीब भिखारी पर बहुत दया आती है,वो आदमी उन्हें बार बार अपनी गरीबी के लिए कोसता था,तो भगवान ने सोचा की क्यो ना इसकी मदद की जाए,उन्होंने सोने और जेवरातों से भरी एक पोटली उस गरीब के रास्ते में रख दिया ,लेकिन उसने आदमी ने जब वो पोटली देखी तो सोचा की कचरा होगा उसने उसे मानो अनदेखा ही कर दिया और आगे निकल गया,भगवान ने सोचा की चलो कोई बात नही उन्होंने फिर से उस भिखारी के रास्ते में वो पोटली रख दी लेकिन और इस बार उस भिखारी का पैर उस पोटली में लगा भगवान ने सोचा की अब वो भिखारी पोटली को देखेगा और फिर अमीर हो जाएगा लेकिन उस भिखारी ने ऊपर देखा और चिल्लाया..

‘हे भगवान क्या तूने मुझे कम दुख दिए है जो अब तू मुझे रास्ते में भी चलने नही देना चाहता…’वो भिखारी भगवान को कोसता हुआ आगे बढ़ गया….

इस कहानी का मतलब ये है की जिसे मौके की पहचान नही होती और जिसके पास दिमाग ना हो तो भगवान भी उसकी मदद नही कर सकता ,तुम्हारा भी हाल कुछ ऐसा ही है …मैंने तुम्हे मौका दिया ये ताबीज दी लेकिन तुमने क्या किया ,तुमने औरतो के साथ अपनी हवस निकालने के लिए इसका उपयोग किया,तुम मूर्खो जैसे किसी के भी बात में आ गए,तुम दुसरो पर काबू पाने की कोशिस करने लगे …...और हा मैं कोई डॉ नही हु ,ना ही ये कोई केमिकल से बनी हुई कोई चीज है ,ये सिर्फ एक चंदन की लकड़ी का टुकड़ा है जिसे मैंने अपनी साधना से मंत्रो द्वारा सिध्द किया है ,और ये तुम्हे कोई शाररिक पावर नही देता ये बस तुम्हारी मानसिक शक्ति को बड़ा देता है ,इसे चूमना सिर्फ एक कर्मकांड है असल में इसका तुम्हारे पास होना ही काफी है ,तुम ज्यादा एकाग्र होते हो ,तुम्हारे अंदर ज्यादा सवेदना होती है,और तुम ज्यादा रचनात्मक होते हो ,जिससे तुम कोई भी काम आसानी से कर सकते हो जैसे तुमने बताया की तुमने लड़ाइयां जीत ली ,क्योकि तुम एकाग्र थे...और ये तुम्हारे हवस को नही बढ़ती वो सब उस लड़की की दी हुई दवाइयों का ही नतीजा होगा ,पता नही उसने तुम्हे क्या क्या नही खिला दिया ,मैं तो तुम्हे एक अच्छा इंसान बनाना चाहता था लेकिन तुम एक जानवर बन गए ..”

बाबा जी की बात सुनकर मेरी नजर नीची हो गई थी,मैं उनके चरणों में गिर गया …..

“बाबा जी मुझे माफ कर दीजिये लेकिन मैं ऐसी परिस्थितियों में फंस गया था की मैं समझ ही नही पाया की क्या करू..”

उन्होंने बड़े ही प्यार से मेरे सर में हाथ फेरा…

“उस लड़की ने तुम्हे बहुत ही अच्छी कहानी सुनाई लेकिन वो कुछ गलती कर गई …”

मैं चौका …..

“क्या ??”

“उसने जिस डॉ की बात कही उसे मैं जानता हु ,और उसने भी शायद इसीलिए ये बात कहीं ताकि तुम अगर उसके बारे में पता करो तो तुम्हे शक ना हो …..”

“मतलब …”

“मलतब ये की डॉ चूतिया नाम का शख्स मौजूद है ,वो एक डॉ है साथ ही एक मनोचिकित्सक भी है ,और मिस मेरी नाम की उसकी एक सेकेट्री भी है …”

“क्या ???”

मैं बुरी तरह से चौका ..

“हा ये सभी है,और मेरे ख्याल से तुम्हे उससे मिलना चाहिए क्योकि शायद वो तुम्हारी कुछ मदद कर सकता है…”

उन्होने मुझे दूसरे शहर के एक अड्रेस दिया …

“बाबा जी मैं अपनी जिस्म की हवस का क्या करू…? मैं इससे ग्रसित होने लगा हु ,मैंने आजतक कभी ऐसा फील नही किया था लेकिन अब मैं सच में किसी जानवर की तरह होते जा रहा हु ..”

मैं अब इस बारे में सच में चिंतित था …

“फिक्र मत करो अगर उस लड़की ने तुम्हे ऐसी दवाइयां दी है तो किसी खास मकसद से ही दी होंगी...शायद इसी से कुछ रास्ता मिल जाए ..”

“लेकिन बाबा मैंने अपनी सगी बहन के साथ ..”

बाबा कुछ देर चुप रहे ……

“देखो बेटा जिस्म की भूख जब लगती है तो इंसान को अंधा ही बना देती है वो रिश्ते नाते भी भूल जाता है ,और गलत सही की बात करे तो ये कहना मुश्किल है की क्या गलत है और क्या सही ..अगर इंसान ने सही गलत बनाए है तो इसके कुछ महत्व तो होंगे ही ...मैं तुम्हे ये नही कहूंगा की तुम क्या करो क्या ना करो ,तुम्हारे पास मेरा दिया ताबीज है जो तुम्हे मानसिक ताकत देगा,अब ताकत सही या गलत नही होता वो बस ताकत होता है ,सही या गलत का फैसला तुम्हे खुद से करना होगा…….”

बाबा जी की बात में और उनके सानिध्य में वो जादू था की मैं अपने को बहुत ही हल्का महसूस करने लगा…

जब हम बिदा हुए तो उन्होंने मझे और रश्मि को बहुत ही प्यार से आशीर्वाद दिया ,अब मेरे दिमाग के कई सवालों के जवाब मेरे पास थे,और बहुत के मुझे खुद ही ढूंढने थे,अब मेरा पहला काम था उस शख्स से मिलना जिसे लोग डॉ चूतिया कहते है ...
 
अध्याय 20

डॉ चुन्नी लाल तिवारी यरवदा वाले,उर्फ डॉ चूतिया..

उनकी छोटी सी क्लिनिक को देखकर किसी को अंदाज भी नही लग सकता था की ये आदमी आखिर है क्या चीज,क्लिनिक भी ऐसा जन्हा कोई पेशेंट नही होते थे,अजीब बात थी की उस शख्स को रश्मि के पिता भैरव सिंह भी जानते थे ,जब उन्होंने उसका नाम सुना तो उनकी आंखे ही चमक गई ……

“आखिर डॉ साहब से तुम क्यो मिलना चाहते हो ..”

“बस एक काम था अंकल “

हमारे पहुचते शाम हो चुका था ,मैं उनके ही बगीचे में बैठा हुआ उनके साथ चाय पी रहा था ,पास में ही रश्मि भी बैठी थी …

“कोई उनसे मिलने की बात कहे तो समझो की वो कोई बड़ी मुशीबत में है ,वरना ऐसे ही कोई उनसे नही मिलता ..आखिर बात क्या है ..??”

उनकी बात सुनकर मैं सोच में पड़ गया था की क्या मुझे उन्हें सब कुछ बताना चाहिए या फिर नही ………

“बस अंकल कुछ ऐसी बात है जिसे मैं आपको नही बताना चाहूंगा “

वो चौक कर रश्मि की ओर देखने लगे,रश्मि ने बस अपना सर हिला कर उन्हें निश्चिंत किया ..

“ठीक है कोई बात नही ,तुम नही बताना चाहते तो मत बताओ लेकिन ….लेकिन अगर तुम्हे मेरी जरूरत पड़े तो मैं सदा तुम्हारे साथ हु ,कभी तुम्हारे पिता मेरे अच्छे दोस्त थे ,और अब तुम मेरी बेटी के दोस्त हो ,तो मैं तुम्हारी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहूंगा ..”

उनकी बात सुनकर मुझे उनकी एक बात खटक गई …

“पहले अच्छे दोस्त थे मतलब ??”

उन्होंने एक गहरी सांस ली ……

“मतलब अगर सब कुछ सही होता तो तुम आज मेरे घर में पैदा होते,”

मेरे साथ साथ रश्मि भी चौक गई थी …..

“ये क्या कह रहे हो पापा ..”

“हा बेटी लेकिन यही सच है ,इसके पिता रतन और मैं अच्छे दोस्त हुआ करते थे ,हमने एक साथ पढाई की ,कालेज में भी हम साथ ही थे .उस समय तुम्हारे दादा के भाई ने अपने हिस्से की जयजाद बेच दी हमारे नाम आया ये महल और कई तरह की परेशानियां ,हम कहने को तो राजा थे लेकिन हमारी आर्थिक स्तिथि उस समय ठीक नही थी ,वही इसके दादा जी का उस समय बिजनेस की दुनिया में एक बड़ा नाम था, रतन ने मेरे बिजनेस को सेटल करने में मेरी मदद की उसके बिजनेस के कांटेक्ट थे वही मेरी राजनीति में पकड़ मजबूत थी ,क्योकि हम लोग यंहा के राजा थे कोई भी नेता हमारे समर्थन के बिना यंहा से आज भी नही जीत पाता,लेकिन हमारी दोस्ती मे दरार उस समय पड़ी जब हम दोनो को ही एक ही लड़की से प्यार हो गया …..”

उनके इतना कहने भर से मैं और रश्मि एक दूसरे को देखने लगे ,मुझे उनकी बात कुछ कुछ समझ आ रही थी की वो किसके बारे में बात कर रहे थे…….

मानो भैरव ने मेरी आंखे पढ़ ली ..

“हा बेटे वो तुम्हारी माँ थी ...और इसी बात में हमारी लड़ाई हो गई ,उसने मेरी बहुत मदद की थी इसलिए उसके लिए मेरे दिल में आज भी इज्जत है ,लेकिन आज भी वो मुझसे बात नही करता,उसके पिता के पास करोड़ो की दौलत थी वो बड़ा नाम थे वही मेरे पिता जी की मौत हो गई और मेरे ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई ,तो अनुराधा(राज की माँ) के पिता ने मेरी जगह रतन को अपना दामाद बनाने का फैसला कर लिया,बस इतनी सी बात है...मैं इस बात से टूट ही गया था लेकिन फिर मेरी जिंदगी में रश्मि की माँ आई और उसने मुझे बेहद ही प्यार दिया और मुझे एक प्यारी सी बेटी भी दे दी ..उसके बाद मैं सब कुछ भूलकर अपनी दुनिया में खुस रहने लगा ”

उन्होंने प्यार से रश्मि की ओर देखा ….

रश्मि भी अपने पिता को बड़े ही प्रेम से देख रही थी ..

“ओह पापा “

वो उनके गले से लग गई …

कुछ देर बाद दोनो शांत हुए ..

“तो बेटा ये थी हमारी कहानी ,तो मेरे ख्याल से तुम्हे मैं कल ही डॉ के पास भेज देता हु ,ठीक है ना ……”

मैंने हा में सर हिलाया …..

********

दूसरे दिन से ही काजल मेडम का अतापता नही थी,पूछने पर पता चला की वो कुछ दिनों की छुट्टी पर गई हुई है ,मुझे समझ आ गया की शायद उन्हें मेरे बाबा से मिलने की बात का पता चल गया होगा लेकिन कैसे ..??

हो सकता है की वो मेरे ऊपर भी नजर रखे हुए हो ..

जो भी हो ,मुझे आज डॉ चूतिया से मिलने जाना था,मैं 10 बजे के करीब ही रश्मि के घर पहुच गया वंहा पहले से रश्मि मेरा इंतजार कर रही थी ,हमारे साथ हमारी सुरक्षा के लिए एक गाड़ी और भी थी ,अंकल ने बताया की उन्होंने डॉ से बात कर ली है..

करीब 2 घण्टे के बाद हम डॉ के क्लिनिक के बाहर थे …

उनका नाम पढ़कर ही रश्मि हंस पड़ी ,

“कैसा अजीब नाम है इनका तुम्हे लगता है की ये हमारी कोई मदद कर पायेगा “

रश्मि की ये बात मुझे बड़ी अच्छी लगी उसने ये नही कहा की क्या डॉ तुम्हारी कोई मदद कर पायेगा ,उसने कहा की क्या डॉ हमारी मदद कर पायेगा,अब हम दोनो मैं और तुम नही बल्कि हम हो चुके थे…

“देखते है ..”

हम अंदर गए एक सामान्य सा क्लिनिक था ,सामने रिशेप्शन था और फिर डॉ का केबिन,रिसेप्शन में कोई भी नही था ,जब हम अंदर गए तो वंहा एक पतला दुबला ,सावला आदमी बैठा कम्प्यूटर में कुछ देख रहा था वही उसके बाजू में एक गोरी चिट्टी ,हट्टी तगड़ी,भरी पूरी महिला खड़े हुए उसी कम्प्यूटर में कुछ देख रही थी,मैं उस महिला को पहचानता था ,यही थी जो वेबसाइट में मेरे मम्मे देख लो कर के अपने बड़े बड़े वक्षो को मसल रही थी ,उसे देखने से ही मेरे लिंग में एक सुरसुराहट सी हो गई ….

“नमस्ते डॉ साहब ..”

मुझसे पहले रश्मि ने कहा ..

उसकी आवाज सुनकर दोनो ही चौके ..

“ओह आओ आओ ,शायद तुमको भैरव सिंह ने भेजा है राइट ..”

“जी “

“बैठो बैठो ..”

हम दोनो डॉ के टेबल के सामने की कुर्सी पर बैठ गए …

अब डॉ और मेरी हमारी तरफ मुड़े…

“कहो कैसे आना हुआ ..??”

मैंने उन्हें शुरू से सब कुछ बताना स्टार्ट किया,कैसे मैं,जंगल गया,फिर बाबा से मिला,फिर काजल मेरे जीवन में आयी,फिर वकील आया फिर वकील की मौत फिर चन्दू का गायब होना फिर काजल का मुझे ट्रेन करना और डॉ वाली स्टोरी सुनाना और फिर फिर काजल के बारे में चन्दू से बात करते हुए पता चलना,फिर बाबा से मिलना और अब काजल का गायब हो जाना…

सब सुनकर वो थोड़े देर तक सोच में पड़ गए लेकिन मैरी बोल उठी ..

“वो कमीनी काजल यंहा भी आ गई ,हर जगह आ जाती है लगता है की उसी के कारण कहानी बनती है हमारी तो कोई वेल्यू ही नही है ..”(रीडर्स इसे इग्नोर करे )

उसकी बात से मैं चौका ..

“मतलब आप उसे पहले से जानती हो ,उसने मुझे आपकी वीडियो दिखाई थी लेकिन वीडियो में तो आपकी आवाज उसके जैसी है लेकिन असल जिंदगी में तो आपकी आवाज बहुत ही अलग है ..”

मेरी बात सुनकर मैरी थोड़ा शर्मा गई

“तो तुमने वो वीडियो देखी,क्या है ना की काजल की आवाज बहुत ही सेक्सी है तो मैंने आवाज उसी से डब करवाया था ..ऐसे कैसे लग रही हु मैं उस वीडियो में तुमने अच्छे से देखा ना..”

उसने अपने वक्षो को थोड़ा मेरे ओर झुका दिया ,उसने सफेद कलर का एक एप्रॉन पहना था जैसा डॉ पहनते है,जो की इतना टाइट था की उसके दोनो मम्मे बाहर की ओर झांक रहे थे ,भरे हुए शरीर की मलिका मिस मैरी मारलो पूरी तरह से एक MILF थी ..

उसे देखकर मैंने अपना थूक गटका ,वही रश्मि ने मेरे जांघो पर अपना हाथ मार दिया,मुझे फिर से होश आया …

“जी जी अच्छा था ,और अब मुझे समझ आया की काजल ने मुझे वो वीडियो क्यों दिखाया था ..”

“तुम्हें अच्छा लगा तो तुम्हारे लिए लाइव शो भी रख दूंगी “

उसने अपनी निचली जीभ को अपने दांतो से दबाया जो की इतना सेक्सी था की मेरा तो मुह ही खुला रह गया ,लेकिन रश्मि गुस्से से भर गई …

“डॉ साहब क्या हम काम की बात करे ..”

डॉ जैसे किसी सोच से बाहर आया था ..

“हा हा क्यो नही क्यो नही ...देखो ..क्या नाम है तुम्हारा “

“जी मेरा नाम राज है राज चंदानी और ये मेरी दोस्त भैरव सिंह की बेटी रश्मि ..”

“ओके तुम रतन चंदानी के बेटे तो नही “

“जी….आप मेरे पिता जी को जानते है ??”

“हा बिल्कुल इतने बड़े बिजनेसमेन है कैसे नही जानूँगा ..और कभी वो भैरव का खास दोस्त भी हुआ करता था “

“जी अंकल ने हमे कल ही बताया ..”

“ह्म्म्म अच्छा है ...देखो बेटा ,काजल कभी मेरे ही साथ काम किया करती थी ,वो मेरी ही शागिर्द है और उसे मेरे कनेक्शन का भी अच्छे से पता है ,हमारी राहे अब अलग हो चुकी है लेकिन वो कभ मेरे रास्ते में नही आयी थी ,लेकिन मेरा नाम वो कई जगह पर ले चुकी है तुम्हारे साथ भी उसने ऐसा ही किया,ऐसे वो बाबा जी कौन है …”

“मुझे नही पता …”

“ह्म्म्म जैसा तुमने बताया वो डागा ही होगा ..”

उसकी बात सुनकर मैं बुरी तरह से चौका ..

“वाट ...लेकिन वो तो क्रिमिनल था ना “

मेरी बात सुनकर डॉ जोरो से हँसा …

“तुम अभी भी काजल की कहि बातो पर भरोसा कर रहे हो ,डागा साहब हमेशा से नेक आदमी थे,हा उनके धंधे कुछ गलत जरूर थे लेकिन धीरे से उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया था ,वो लोगो की मदद करते थे उनकी अध्यात्म में बहुत गहरी रुचि थी इसलिए वो शहर और घर परिवार छोड़कर जंगलो में चले गए,मुझे लगता है की वो डागा ही होंगे,सालो से तपस्या कर रहे है,शायद उन्हें कुछ ऐसी सिद्धि मिली होगी जिसके कारण वो मंत्रो से सिद्ध कर तुम्हारे लिए ताबीज बना सके ,लेकिन मुझे एक बात समझ नही आ रही की आखिर काजल ने डागा और मेरा नाम ही क्यो लिया..?

वो फिर से सोच में पड़ गए …

“हो सकता है की वो आप दोनो को जानती हो इसलिए ..”

मैंने संभावना व्यक्त की …

“नही ऐसा नही हो सकता,वो ऐसे ही हमारा नाम इस्तमाल नही करेगी,शायद उसे पता था की डागा ही बाबा है और मेरा नाम लेने से तुम कभी ना कभी मुझ तक पहुच ही जाओगे ...शायद उसने तुम्हे हिंट दिया हो ??”

उनकी बात से मैं और भी कन्फ्यूज़ हो गया ..

“लेकिन वो मुझे क्यो आपतक पहुचाना चाहेगी .??”

मैं बेहद ही कन्फ्यूज़ था ..

“शायद इसलिए की वो जानती हो की मैं तुम्हारी मदद कर सकता हु ..”

उनकी इस बात से मैं और रश्मि दोनो ही चौक गए …

“वाट लेकिन वो क्यो चाहेगी की …”

हम इतना ही बोल पाए थे की डॉ बोलने लगे ..

“देखो उसने यू ही तो ये सब कुछ नही किया है इसके पीछे कोई ना कोई स्ट्रॉन्ग वजह हो जरूर होगी ...दूसरी बात हमारा नाम लेने की दो ही वजह हो सकती है पहली की या तो वो तुम्हे मेरे द्वारा मदद पहुचाना चाहती हो ,या दूसरी तुम्हारे साथ मुझे भी फसाना चाहती हो ..”

उनकी बात सुनकर हम कुछ देर के लिए चुप ही हो गए थे …

“लेकिन ऐसा नही हो सकता की उसने ऐसे ही आप लोगो का नाम ले लिया हो…”

“हो सकता है लेकिन मुझे बाबा बताकर उसे क्या मिलता वही उसने डागा को इस षडयंत्र का मुखिया बताया क्यो...वो डागा को भी तो बाबा बता सकती थी जो की वो है भी ….”

मेरे समझ में कुछ भी नही आ रहा था ...ना ही रश्मि की समझ में कुछ आ रहा था हम दोनो बस उनका चहरा ही देख रहे थे …

“मतलब साफ था है की डागा को ढूंढना तुम्हारे लिए कठिन था वही मुझे ढूंढना आसान,ऐसे भी उसे पता था की बाबा से मिलने के बाद तुम मुझतक और भी आसानी से पहुच जाओगे ,जबकि अगर वो डागा को ही बाबा बता देती तो काम वही खत्म हो जाता ,तुम मुझे ढूंढने नही निकलते ,दूसरा की वो सही नही बोल सकती थी ,मतलब वो किसी के दवाब में ये काम कर रही हो …???हो सकता है ….”

“लेकिन किसके ??”

मेरे मुह से अनायास ही निकल गया ..

“वही तो पता करना होगा,किसके और क्यो ये दो सवाल ही तो है हमारे पास जिसका हमे उत्तर ढूंढना है ,इसके अलावा एक संभावना ये भी हो सकती है की वो सब कुछ अपनी मर्जी से कर रही है लेकिन उसके ऐसा करने का कोई कारण तो नही दिखता,आख़िर उसे तुमसे चाहिए क्या ??”

“मेरी सम्प्पति …”

मेरी बात को सुनकर वो जोरो से हँसे…

“नही नही ये संपत्ति का गेम नही है ,अगर होता तो अभी तक तुम्हे मार देते और चन्दू को सामने कर संपत्ति हथिया लिया जाता,लेकिन तुम्हे एक तरफ ट्रेन किया जा रहा है किसी योद्धा की तरह ,और वही तुम्हे दवाइया दी जा रही है जिससे तुम बेकाबू सांड हो जाओ,वही दूसरी ओर चन्दू और उसका बाप गायब है ,बाप ही क्यो माँ क्यो नही ??? मेरे ख्याल से चन्दू को भी तुम्हारे तरह ही ट्रेनिग दी जा रही होगी,ताकि तुम दोनो लड़ कर मर जाओ …अब रही काजल की बात तो वो तुम दोनो को ट्रेन कर रही है लगभग एक ही जैसे ,अगर वो गलत होती तो वो तुमसे तुम्हरी ताबीज छिनने की कोशिस करती है ना तुम्हे झूठी कहानिया नही सुनाती ...मतलब मेरे ख्याल से उसे कोई दूसरा ही चला रहा है,हमे काजल के बेटे और पति के बारे में जानकारी इकठ्ठी करनी होगी की वो आखिर है कहा,मेरे ख्याल से उन्हें ही किडनेप कर काजल को ब्लैकमेल किया जा रहा होगा ”

डॉ की बात से हम गहरे सोच में पड़ गए थे …

“लेकिन ऐसा करना कौन चाहेगा ..”

मैं अनायास ही पूछ बैठा ..

“मेरे दिमाग में एक नाम तो आ रहा है “

“कौन..?”

मैं और रश्मि एक साथ बोल पड़े …

“तुम्हारा बाप ..रतन चंदानी …”

डॉ की बात सुनकार्र पूरे कमरे में बस सन्नाटा सा छा गया था …..

 
अध्याय 21

डॉ की बात सुनकर मेरा दिमाग घूम गया था …

“लेकिन डॉ वो ऐसा क्यो करेंगे ??”

डॉ मुस्कुराये ..

“पावर दोस्त पावर ,तुमने ही तो कहा था की उनके पिता और ससुर ने उनके जगह तुम्हारे और तुम्हारी बहनो के नाम सारी प्रॉपर्टी कर दी है ,और अगर ऐसा हो जाए तो उनकी कौन सुनेगा,तुम ही सोचो की जो आदमी जिंदगी भर दुसरो को आपने नीचे दबाने का आदि हो वो ये सब कैसे बर्दास्त कर सकता है की जिंदगी भर वो पैसे पैसे के लिये किसी दूसरे का मोहताज रहे ,भले ही वो उसका बेटा ही क्यो ना हो ...और ये भी सोचो की एक बाप भले ही कितना भी कमीना हो उसके लिए अपने बेटे को ,और इस केस में बेटो को मरना कितना मुश्किल है ,तो वो तुम्हे मारने की बजाय तुम्हे बहकाने की कोशिस कर रहा है,ऐसे काजल ने तुम्हारे साथ और क्या किया …”

मैं डॉ को उन ड्रग्स और उससे उत्पपन होने वाले इफ़ेक्ट्स के बारे में बताने की सोची लेकिन मैं रश्मि की मौजूदगी में ये कैसे बोल सकता था …

शायद मेरी चुप्पी को डॉ समझ गए ……

“रश्मि ,मैरी प्लीज तुम दोनो थोड़े देर के लिए बाहर जाओगी ,मुझे राज से अकेले में कुछ बात करनी है ..”

दोनो बाहर चले गए और मैंने उन ड्रग्स और फिर मेरी सेक्स की उत्तेजना के बारे में बता दिया साथ ही साथ ये भी जो मैंने कान्ता ,शबीना और निशा के साथ किया ……..

“ओह तो वो तुम्हे अपनी ही नजर में गिरना चाहता है,ताकि उसे लगे की तुम भी उसी की तरह हो ….लेकिन फिर भी इससे उसे कुछ खास हो हासिल नही हो सकता और अभी तो चन्दू भी गायब ही है ...कुछ तो गड़बड़ है मेरे दोस्त ..अगर इसकी तह तक पहुचाना है तो चन्दू और काजल को ढूंढना होगा,तुम इसी काम में लग जाओ और मैं काजल के पति और बच्चे को ढूंढता हु ,और हा जो तुम कर रहे हो वो करते रहो…”

“मतलब ??”

“मतलब की जो तुम कान्ता और शबीना के साथ कर रहे हो वो करते रहो,अगर वो तुमसे यही करवाना चाहते थे तो फिर जरूर उन्हें इन बातो की खबर पता चल रही होगी ,उन्हें भी लगने दो की तुम उनके ही जाल में फंस रहे हो ,और इतनी पावर को करोगे भी क्या इसे सम्हालना तुम्हारे लिए मुश्किल ही होगा,इससे तुम हल्के भी बने रहोगे “

डॉ के चहरे में एक मुस्कान थी वही मेरा चहरा शर्म से झुक गया ..कुछ देर चूप रह कर मैं बोल पड़ा ..

“लेकिन डॉ मैं चन्दू और काजल को कैसे ढूंढूंगा,और मुझे तो लगता है की वो मेरे ऊपर भी नजर रखे हुए होंगे…”

“बिल्कुल वो तुम्हारे ऊपर नजर जरूर रखे होंगे,और इसी का तुम्हे फायदा उठाना है ,आखरी बाबा जी का आशीर्वाद तुम्हारे पास है,वो ताबीज जिससे तुम अपने दिमाग ताकत को कई गुना बड़ा सकते हो तो तुम्हे डर किस बात का है ,तुम पूरे आत्मविस्वास से मैदान में उतर जाओ ,अपना दिमाग चलाओ फिर चाहे कितना बड़ा जाल क्यो ना हो एक बार अगर वो थोड़ा सा भी टूटा तो समझो पूरा जाल बेकार हो जाता है ...तो उनके जाल में ऐसा गेप कर दो की तुम तो वंहा से निकल जाओ और वो लोग ही फंस जाए तो तुम्हे फसाना चाहते थे..अब से समझ लो की गेम शुरू होई चुका है ,और तुम्हे उसे जितना ही है ,भले ही सामने कितना भी शातिर खिलाड़ी क्यो ना हो उसे हराया जा सकता है,ये शतरंज का खेल है यंहा प्यादा भी खतरनाक होता है ...समझ गए ..”

मैने हा में सर हिलाया

“तो अब तुम अपने सभी मोहरों का इस्तमाल करो ,और यकीन रखो की तुम उनसे ज्यादा शातिर खिलाड़ी हो ,कभी कभी उनके मोहरों की गलती भी तुम्हे गेम जीता सकती है ,तो खेल शुरू होता है दोस्त,बेस्ट ऑफ लक ..”

मैं डॉ की बात सुनकर जोश से भर गया था ,मैं उठा और फिर गर्मजोशी से उनसे हाथ मिलाया ……

सच में ये एक खेल था लेकिन मेरे पास सबसे बड़ी ताकत मौजूद थी जिसका मैंने अभी तक सही उपयोग नही किया था ,वो थी मेरी जादुई लकड़ी …….

***********

मैं अपने कमरे में ध्यान में बैठा हुआ सभी संभावनाओं के बारे में विचार कर रहा था ,सभी मोहरे मेरे सामने थे ,लेकिन इस खेल को आखिर खेल कौन रहा है ……?????

मैं उठा और सीधे छत की ओर चला गया ,मैंरे पास एक दूरबीन थी मैं उसे भी अपने साथ ले गया,और ध्यान से छिपकर आसपास को देखने लगा,घर के बाहर खड़ी गाड़ियों को और दूसरे घरों को आते जाते लोगो को ,अभी रात का समय था लेकिन स्ट्रीट लाइट की वजह से माहौल समझ में आ रहा था ……

घर से दूर मोड़ पर एक गाड़ी खड़ी देखी,उसके बाहर दो लोग बैठे हुए थे ,मैंने जूम किया तो समझ आया की उनके पास गन भी थी ,दोनो का चहरा मेरे दिमाग में बस गया ,मैं वही आंखे बंदकर अपने ताबीज को हल्का सा चाट कर उन चहरो के ऊपर फोकस किया ,यस वो लोग हमारा पीछा कर रहे थे ,मैंने इसी गाड़ी को आज हमारी गाड़ी के पीछे देखा था,मैंने इन लोग को सुबह मैदान में देखा था कभी कभी स्टेडियम के बाहर ..यानी ये मेरा पीछा बहुत दिनों से कर रहे है…

उन्हें देखकर मेरे चहरे में एक स्माइल सी आ गई ,

मैं नीचे उतारा तो मेरे कमरे में निशा भी मौजूद थी …

“कहा थे आप “

“कही नही बस छत में हवा खाने गया था …”

निशा मुझसे लिपट गई ..

“जब से रश्मि को प्रपोज कीया है आप तो मुझे देखते ही नही “

“तुझे क्या देखु,तू तो वैसी है जैसे पहले थी “

वो मेरी बात से गुस्सा होकर सीधे मेरे बिस्तर में जाकर लेट गई

“जाओ मैं आपसे बात नही करती “

मुझे भी उसे मनाने का कोई मूड नही था…

मैं भी उसके बाजू में जाकर सो गया

“आप ऐसे विहेब क्यो कर रहे हो ..”

“निशा यार प्लीज ...मुड़ थोड़ा ठीक नही है ,एग्जाम आने वाले है तू पढ़ाई चालू की या नही ..”

मेरी बात से निशा का मुह फूल गया

“जाओ सो जाओ मैं तो पढ़ ही रही हु ,तुम ही नही दिखते आजकल ..”

निशा सच में गुस्से में थी वो आप से तुम में उतर आई थी …

मैं भी चुप चाप सो गया ,पता नही कितने देर हो चुके थे मुझे नींद की आगोश में गए हुए …

अचानक सी मेरी आंखे खुली …….

मैं एक कमरे में एक कुर्सी में बंधा हुआ था ..मैंने कुछ बोलना चाहा लेकिन …...लेकिन मेरे मुह में पट्टी बंधी थी ,मैं छटपटाया ..

तभी मेरे कानो में एक आवाज गूंजी ..

“लूजर ..तुम पहले भी लूजर थे और आज भी लूजर ही हो ..हा हा हा ..”

ये निशा की आवाज थी ,मैं बुरी तरह से खुद को छुड़ाने की कोशिस कर रहा था ,निशा मेरे सामने खड़ी थी …

“तुमने क्या सोचा था की तुम बहुत ही बड़े तुर्रम खा बन गए हो,मेरे पापा को जलील करोगे,उन्हें अपनी प्रोपर्टी का रौब दिखाओगे …”

निशा की आंखों में गुस्सा था …

“रहने दो बेटी इस साले को तो यही बंधे रहने दो,तुम्हारी माँ कहा है “

उसने सामने कुर्सी पर बंधे एक औरत के चहरे पर से पर्दा उठाया ..

वो मेरी माँ थी ,मेरे पापा ने अपने हाथो में रखा चाकू माँ के गले में टिका दिया ..

निशा ने मेरे सामने प्रोपर्टी का एक पेपर्स रख दिया ..

“साइन करो इसे ताकि सारी प्रोपर्टी हमारी हो जाए ..”

मैं कुछ बोलना चाहता था लेकिन मेरे मुझे में पट्टी बंधी थी ..

निशा ने पट्टी खोल दी ..

“निशा ये तुम क्या कर रही हो ,तुम तो मुझसे प्यार करती थी “

निशा जोरो से हंसी

“मैं अपने पिता की लाडली हु,तुमने कैसे सोच लिया की मैं उनको छोड़कर तुम्हारा साथ दूंगी ..साइन करो वरना “

मैंने जोर दिया और मेरे हाथो में बंधी हुई रस्सी को तोड़ दिया ,मेरा हाथ सीधे निशा के गले में था ..

“मैं तुम्हे मार डालूंगा तुमने मुझे धोखा दिया है …”

“क्या बोल रहे हो किसने धोखा दिया “

“तुमने मुझे धोखा दिया है निशा तुमने “

मैं उसके गले को और भी जोरो से दबाया ..

“भाई ये क्या कर रहे हो भाई “

एक जोरदार थप्पड़ मेरे गालो में लगा जैसे मुझे होश आया हो ..

मैं निशा के गले को दबाए हुए था,उसका चहरा पूरा लाल हो हुक था ,वही मैं अभी आपने बिस्तर में ही था ..मैंने तुरत ही उसे छोड़ दिया …

“पागल हो गए हो क्या ???क्या हो गया है आपको ...आज तो मुझे मार ही दिया था ,और ये क्या कह रहे थे की मैंने आपको धोखा दिया है ??”

मुझे होश आया की मैं एक सपना देख रहा था शायद दिन भर की मानसिक उथलपुथल का ही नतीजा था ……

“ओह सॉरी मैं ..मैं एक बुरा सपना देख रहा था ..”

“अरे सपना ही देखना है तो रोमांटिक वाला देखो ,ये क्या मारा मारी के सपने देखते हो,और मैं आपको कैसे धोखा दे रही थी ,कही किसी दूसरे लड़के के साथ तो नही देख लिया मुझे…”

उसके होठो में वही चिरपरिचित सी मुस्कान थी ..

“कुछ भी बोलती है कुछ नही सपना था ,चल सो जा “

“ऐसे नही मुझे बिना प्यार किये सोते हो इसलिए आप ऐसे सपने देखते हो ,मुझसे अच्छे से कसकर लीपट के सो जाओ तो आपको भी अच्छे सपने आएंगे “

उसकी बात सुनकर मेरे होठो में भी एक मुस्कान सी आ गई ,

मैं उससे लिपट कर सो गया ……

लेकिन मेरे आंखों में अब भी नींद नही थी …

 
अध्याय 22

सुबह ही मैंने एक प्लान बना लिया था ,

आज मैं सुबह उठकर दौड़ाने के लिए स्टेडियम की ओर निकला ,स्टेडियम में दौड़ते हुए दोनो पास ही दौड़ रहे थे ,मैं दौड़ाते हुए स्टेडियम के दूसरे गेट से निकल गया थोड़ी देर तक सड़क में दौड़ाता रहा फिर सड़क से जंगल जैसे पेड़ो के झुरमुट की तरफ बढ़ गया ,वो लोग मुझसे दूरी बनाये हुए थे ताकि मुझे शक ना हो ,मैं उस पगडंडी में दौड़ता रहा जो की सड़क से होकर एक बांध तक जाती थी,और चारो तरफ सरकार द्वारा पेड़ लगाए गए थे जो की एक मिनी जंगल जैसा बन गया था ,

“अरे ये साला कहा गया ,अभी तो सामने ही था “

उसमे एक ने कहा और अपने कमर में रखी पिस्तौल निकालने लगा ..

“अबे इसे अंदर रख ,होगा सामने ही मोड़ के कारण दिखा नही ,बांध की तरफ ही गया होगा चल “

मैं एक मोड़ में गायब हो गया था और पास ही पेड़ की ओट में छिपा हुआ उन्हें देख रहा था …

वो थोड़ा और आगे बढ़ते उससे पहले ही मैंने एक लकड़ी का डंडा एक के सर में दे मारा,

दूसरा भी मुड़ा ही था लेकिन मेरा किक सीधे उसके चहरे में पड़ा उनके हाथ अपने पिस्तौलों पर जाते उससे पहले ही मैं दोनो के स्पाइनल कार्ड में वार कर उन्हें असहाय कर दिया ,वो छटपटाने लगे और मैंने तुरंत ही अपने साथ लाई हुई रस्सी से उनके हाथ पैर बांध कर उनके पास रखी पिस्तोल अपने गिरफत में ले ली ..

मैंने उन दोनो को घसीटते हुए पगडंडी से नीचे ले गया और एक शांत सी जगह में आकर रुका …..

“तुम दोनो मेरा पीछा क्यो कर रहे थे …”

मेरे सवाल का उन्होंने कोई भी जवाब नही दिया बल्कि के दूसरे को देखने लगे,मुझे समझ आ गया था की ये साले ऐसे नही मानेंगे …

मेरा घुसा सीधे उनके चहरे पर पड़ा वो तिलमिल गए,मैंने एक को टारगेट किया और उसे बुरी तरह से धोया जिसे देख कर दूसरे की हालत खराब हो गई ,मैंने पास पड़ा एक लकड़ी का टुकड़ा उठाया और सीधे एक के आंखों पर टिका दिया …….

“बोलेगा की आंखे फोड़ दु …..”

“नही नही बताता हु बताता हु “

दूसरा बोल उठा …

“तो बोल मैं गरजा …”

“हमे कांट्रेक्ट मिला था ,हम मामूली गुंडे है हमे कीसी ने कांट्रेक्ट दिया था तुम्हारे ऊपर नजर रखने के लिए,रात से सुबह तक हम दोनो रहते है और फिर हमारी जगह हमारे दूसरे दो साथी आ जाते है ……”

“किसने दिया है कांट्रेक्ट ???”

“हमे नही पता सारा काम फोन से ही होता है “

“तो पैसे ???”

“पैसे हमे एक डस्टबीन से मिलते है ,वंहा लाकर कोई पैसे से भरा बैग डाल जाता है “

मैं सोच में पड़ गया …

“ओके तो उसे फोन लगाओ जिसे तुम रिपोर्ट करते हो और कहो की मैं इस बांध में अकेला बैठा हुआ हु …..”

उन्होंने तुरंत ही फोन लगाया ,सामने से एक आवाज आई

“बोलो……”

“जी वो लड़का ***बांध में आया है और अकेला बैठा हुआ है “

“ओके ,किसी से मिले तो मुझे बताना “

“जी …”

फोन कट गया ,ये आवाज रोबोटिक थी यानी कंप्यूटर द्वारा जनरेट की गई थी ,मतलब साफ था की सामने वाला अपनी इडेन्टिटी इनसे भी छिपा रहा था …….

“उसने कभी मुझे मारने के लिए कहा ,मैं जब अकेले होता हु तो “

मेरी बात सुनकर वो थोड़ी देर चूप हो गए ..

फिर एक बोला …

“असल में एक बार कहा था लेकिन तुमने उन लडको को स्टेडियम में जिस तरह से मारा था उसे देखकर मना कर दिया ,कहा की तुम्हे ऐसे ही नही मारेगा तड़फा कर मारेगा …”

उनकी बात सुनकर मैं चुप हो गया ….

“और वो लड़की जो मुझे कराटे सिखाती थी उसे जानते हो …”

उन्होंने ना में सर हिलाया …..

मैं गहरे विचार में पड़ गया था की अब उस इंसान तक कैसे पहुचा जाए क्योकि ये लोग किसी काम के नही है ,अगर मैं फोन की लोकेशन भी ट्रेक करवाता तो भी मुझे कुछ नही मिलने वाला था ,क्योकि जो आदमी अपनी आवाज भी छिपा रहा था वो अपनी लोकेशन ट्रेस होने नही दे सकता था …….

“तुम लोगो को इस काम के कितने पैसे मिलते है “

“हर 15 दिन के 4 लाख “

“ओके मैं तुम्हे 8 दूंगा ,वही करते रहो जो कर रहे हो ,लेकिन मुझे भी खबर करते रहना ,और जब जो बोलू वो करना होगा...इस काम के 8 दूंगा ,और उसके बाद जीवन भर की नॉकरी भी दूंगा ताकि एक अच्छी जिंदगी जी सको “

दोनो एक दूसरे को देखने लगे …

“देखो मैं चाहूँ तो तुम्हे अभी मार सकता हु जान भी बक्स रहा हु,पुलिस से भी बचा लूंगा ...बोलो करोगे मेरे लिए काम “

उन्होंने तुरंत ही हा में सर हिलाय ……..

*************

उन दोनो ने मुझे बाकी के दो और लोगो से मिलवाया,सभी मेरी बात से सहमत थे ……

मुझे पता था की हो सकता है वो डबल गेम खेल जाए इसलिए मैने डॉ को फोन लगाया और उन्हें सारी बात बताई,उन्होंने मुझे एक नंबर दिया जो एक सीक्रेट सर्विस वाले का था,उससे मैंने कुछ लोगो की मांग की और इधर घर में लगा पहरा भी हटवा लिया …

ताकि कान्ता और शबीना बाहर जा सके ,उनके ऊपर नजर रखने के लिए आदमी लगवा दिए थे,ताकि वो बाहर जाए और अगर चन्दू या उसका कोई आदमी उनसे मिलने की कोशिस करे तो हमे पता चल जाए..

मैंने एक एक आदमी का पहरा नेहा, निशा ,निकिता पर पापा पर भी लगवा दिया था……

सब तो सेट था लेकिन अब इन सबको पेमेंट करने की दिक्कत थी क्योकि मेरे पास पैसे नही थे …..

मैं पिता जी के सामने बैठा था …..

“पापा मुझे कुछ पैसे चाहिए …”

उन्होंने मुझे गौर से देखा क्योकि आजतक मैंने उन्हें कभी पैसे नही मांगे थे …

“कितने ….”

“आपने मेरे नाम से एक अकाउंट ओपन करवाया था ,उसका पासबुक मुझे चाहिए “

तो थोड़ी देर तक मुझे देखने लगे फिर अपने कमरे से पासबुक ले आये और मुझे थमा दिया …..साथ ही एक एटीएम भी दिया …

मैंने देखा की उसमे 2.5 करोड़ का FD पहले से करवाया गया था और साथ ही अभी 1 करोड़ के करीब का कैश भी था …

मेरा काम इतने में चल जाता …..

“थैंक्स पापा ..”

“कोई बात नही तुम्हारा ही पैसा है ,तुमने कभी लिया नही तो मैंने भी दिया नही अब तुम ही सम्हालो इसे “

पापा के सहज भाव से कहा …….

************

आज नेहा दीदी मेरे कमरे में मौजूद थी …

“आप यंहा ??”

“ह्म्म्म क्या सोचा तुमने राज ..??”

“दीदी कुछ समझ नही आ रहा है क्या करू,असल में चन्दू किसी गलत संगति में फंस गया है और वो लोग उसे बहका रहे है …”

मेरी बात सुनकार नेहा दीदी के चहरे में एक स्माइल आ गई

“जो उन्हें उसका हक दिलाना चाहते है तुम उसे गलत संगति बता रहे हो ..”

“हा बिल्कुल और उसके पीछे एक रीजन भी है ,आपको क्या लगता है की अगर चन्दू सामने आ जाए तो क्या होगा ...दादा की प्रोपर्टी का दो हिस्सा होगा और नाना की प्रोपर्टी के चार ..ओके ..लेकिन उसे बाहर नही आने दिया जा रहा है क्यो..? क्या वो चाहते है की पहले वो मुझे खत्म करे फिर उसे बाहर लाया जाए ताकि दो की जगह एक ही हिस्सा हो ,उसे अपना हक ही चाहिए तो मैं देने को तैयार हु लेकिन क्या उसके पीछे उसका साथ देने वाले तैयार होंगे...नही दीदी वो तैयार नही होंगे जानती ही क्यो ..??क्योकि उन्हें चन्दू के हक से कोई मतलब नही है उन्हें बस अपन काम साधना है ,मुझे मारना उनके लिए कठिन है और ये बात वो जानते है लेकिन चन्दू को मारना आसान होगा राइट ,तो चन्दू की आड़ लेकर वो चन्दू और मुझे दोनो को ही मार देंगे……”

“लेकिन इससे उनका क्या फायदा होगा …..”

“वही तो समझ नही आ रहा है लेकिन अगर हक दिलाने की ही बात होती तो हक तो सामने आकर ही मिलेगा ना ,छिपकर नही “

मेरी बात सुनकर नेहा दीदी थोड़े देर सोच में पड़ गई …….

“मैं चन्दू से इस बारे में बात करती हु ..”

“आपके बात करने से कुछ नही होगा ,आप चाहे तो ट्राय कर सकती हो लेकिन वो लोग उन्हें जाने नही देंगे ….जानती हो उस दिन मैंने आपसे जो रिकार्डिंग ली थी वो क्यो ली थी ,उसमे एक लड़की की आवाज थी जिसने चन्दू को फोन रखने को कहा था ,जानती हो वो लड़की कौन है ….”

उन्होंने नही में सर हिलाया ….

“वही वो लड़की है जिसने मुझे वो दवाइया दी जिसके कारण मैंने कान्ता काकी के साथ वो सब किया था जिसके लिए चन्दू मुझपर गुस्सा था ,यांनी एक तरफ तो मुझे उकसाया भी जा रहा है दूसरी तरफ चन्दू को …..है ना कमाल की बात ,वही थी जो मुझे ट्रेनिंग दे रही थी वही दूसरी ओर वो चन्दू को भी ट्रेनिंग दे रही है …”

नेहा दीदी आवक रह गई …….

“इसका मतलब है की चन्दू खतरे में है ….”

उन्होंने जल्दी से कहा

“चन्दू ही नही हम सभी खतरे में है,दिक्कत ये है की हमे पता ही नही है की आखिर हमे खतरा किससे है …”

वो सोच में पड़ गई थी ……

“कहि तू मेरे साथ कोई गेम तो नही खेल रहा है..”

वो अचानक से बोली

“अरे दीदी आप तो मुझे बचपन से जानती हो क्या मैंने कभी भी अपने परिवार का बुरा चाहा है ,आप लोगो ने कभी मेरे साथ अच्छा बर्ताव नही किया लेकिन क्या मैंने कभी आपके साथ बुरा बर्ताव किया …….”

वो थोड़ी देर चुप ही थी …….

“मुझे माफ कर दे भाई ,हा ये सच है की हमने तुझे कभी बहन का प्यार नही दिया,हमारे बीच के भाई बहन का रिश्ता भी ना जाने कब खत्म हो गया …..लेकिन अभी इन सब बातो का समय भी नही है ,,अगर हम चाहे तो भी अपनी गलती को सुधार नही सकते ,और जन्हा तक मेरी बात है मैं चन्दू से बेपनाह प्यार करती हु ,मेरे लिए तुम दोनो में चुनना भी मुश्किल हो गया है लेकिन तेरे साथ तो पूरा परिवार है लेकिन चन्दू के साथ तो मैं ही हु …”

उनकी स्पष्टता मुझे पसंद आयी..

“मुझे इस बात का कोई दुख नही है दीदी की आप चन्दू के साथ है ,लेकिन दुख सिर्फ इतना है की आप मुझपर भरोसा नही कर पा रही है ,जबकि मैंने आप पर पूरा भरोसा किया है ,मैंने आप पर भरोसा किया की आप मुझे मारने नही दे सकती ,लेकिन आप मुझपर भरोसा नही कर रही हो की मैं चन्दू को उसका हक दिलवाना चाहता हु ……..”

वो थोड़े देर सोचने लगी फिर बोली ……

“मुझे तुझपर भरोसा है बोल क्या करना है ……”

उनकी बात सुनकर सच में मुझे बहुत खुशी हुई …

“थैंक्स दीदी ,अब आप चन्दू को फोन करो और उससे कहो की आप उससे मिलने को बेताब हो रही हो ,वो आपसे मिलने आएगा मेरे लोग आपके पीछे रहेंगे,हम चन्दू को कुछ नही करेंगे ,चन्दू के जरिये हम काजल मेडम तक पहुचेंगे और उनके जरिये उस आदमी तक जो ये सब चन्दू और काजल से करवा रहा है,मेरा विस्वास करो की किसी को पता नही चलेगा की कोई चन्दू और आपके पीछे है ,आप जाइये चन्दू से मिलिए और वापस आ जाइये उसे भी हमारे बारे में कुछ बताने की जरूरत नही है ,”

उन्होंने हा में सर हिलाया ……

“ऐसे उससे मिलकर क्या कहूंगी “

“अरे कहना क्या है करना...जो BF और GF करते है “

मेरी बात सुनकर वो बुरी तरह से झेंपी ..

“छि अपनी बहन से कैसी बात करता है……”

मैं जोरो से हंस पड़ा …

“वाह दीदी आप अपने भाई को ही अपना bf बना कर रखा है तो कुछ नही और हमे छि कह रही हो “

वो और भी शर्मा गई

“वो बस हो गया ,मैं क्या कर सकती थी ,दिल पर कोई कंट्रोल नही रहता ना,जैसे निशा ने किया ,और चन्दू तो हमारा सौतेला भाई है लेकिन निशा वो तो तुम्हारी सगी बहन है ..”

“वो सब मैंने नही निशा ने शुरू किया ..”

“तो क्या हुआ तुमने भी तो साथ दिया ना “

“तो आपके नजर में ये सब गलत है ..???”

वो सोच में पड़ गई ……

“पहले था लेकिन अब लगता है की कुछ भी गलत नही है ,जब मैं ही कर रही हु तो मैं इसे गलत कैसे कह सकती हु ..”

उनकी बात सुनकर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई

“लेकिन मैं और निशा शादी नही करने वाले ,मैं किसी और लड़की से प्यार करता हु…….”

उन्होंने मुझे घूरा…

“जानती हु रश्मि ...अच्छी लड़की है लेकिन निशा को कौन समझाए उसके सर पर तो तुम्हारा ही भूत चढ़ा हुआ है,असल में तुम तो हमसे भी ज्यादा गलत हो तुम दोनो का तो सिर्फ और सिर्फ जिस्म का रिश्ता है……”

उन्होंने एक अजीब निगाहो से मुझे देखा

“ये पूरी तरह से सच नही है ,निशा के साथ सोते हुए भी वो मेरे लिए मेरी बहन ही रहती है ,और आज भी निशा मेरे लिए मेरी बहन ही है...“

उन्होंने अपना मुह बिगाड़ा

“ऐसा थोड़े ही होता है की तुम साथ में वो भी करो और भाई बहन भी रहो …..”

मेरे चहरे में मुसकान सी आ गई

“होता है दीदी ऐसा भी होता है कभी आप भी ट्राय ...करके देखिए आप को भी पता चल जाएगा “

मेरी बात सुनकर उनका मुह खुला का खुला ही रह गया वही मैं जोरो से हंस पड़ा…

“छि कितना गंदा हो गया है तू ,और ये सब निशा और तुझे ही मुबारक मेरे लिए मेरा चन्दू ही काफी है “

उन्होंने मुझे गुस्से से कहा और बाहर चली गई …….

उनके जाने के बाद मैं सोचने लगा की मैंने ये आखिर क्या कह दिया था ,साला आजकल में सोच कहा से रहा हु,दिमाग से या लौड़े से …???

मैंने खुद से सवाल किया और जवाब मेरे लिंग ने एक झटका मार कर दिया ……...

 
अध्याय 23

“भइया ये नेहा दीदी को आज क्या हो गया है ,अपने कमरे में बैठे हुए रो रही है.. ..”

निशा ने मेरे रूम में आते हुए मुझसे कहा ..

“नेहा दीदी रो रही है …??”

“हा ..”

“चलो मैं देखता हु तुम कमरे में ही रुकना मैं अभी आता हु ..”

मैं नही चाहता था की निशा को कुछ भी पता चले .

मैं नेहा दीदी के कमरे में गया ..

“क्या हुआ आप रो क्यो रही हो ..चन्दू को कुछ ..”

मैंने एक शंका जाहिर की ….

उन्होंने बिना कुछ कहे मुझे अपना मोबाइल थमा दिया ,लास्ट काल किसी अननोन नंबर से आया था ,उसकी काल रिकार्डिंग मौजूद थी ..

“प्लीज् हेडफोन लगा कर सुनना ..”

उन्होंने सिसकते हुए कहा ..

मैंने हेडफोन लगा लिया और सुनने लगा ..

“हल्लो चन्दू ..”

“हम्म क्या रे कुतिया बहुत मचल रही है मुझसे बात करने के लिए,इतने ईमेल भेजे है मुझे की मैं तुझे काल करू ….”

मैं सुनकर बिल्कुल सी शॉक हो गया की ये चन्दू नेहा दीदी से किस तरह से बात कर रहा है ……

नेहा दीद :ये कैसे बात कर रहे हो तुम

चन्दू :.मादरचोद तू भी अपने बाप की ही औलाद निकली ना ,मुझे फसाना चाहती है …

नेहा दीद :ये क्या बोल रहे हो चन्दू ..

चन्दू :वो मादरचोद राज मुझसे मिलना चाहता है ताकि मुझे पकड़ सके …

नेहा दीद :ये तुम्हे किसने कहा

इस बार नेहा दीदी की आवाज थोड़ी लड़खड़ा रही थी ..

चन्दू :मैं सब जानता हु की साले ने कई गार्ड लगा के रखे है,मैं चूतिया नही हु ,सब पर नजर रख रहा है वो मादरचोद,और कुतिया तू मुझसे मिलना चाहती है …..

(चन्दू के इन बातो से नेहा दीदी भड़क गई थी )

नेहा दीद :चन्दू तमीज से बात कर ,मैं तुझसे प्यार करती हु तुझे धोखा नही दे सकती तू जानता है ना,फिर भी ..

चन्दू :.प्यार……(चन्दू जोरो से हंसा ) मादरचोद उसे चूत की खुजली कहते है ,तेरे जैसी प्यार करने वाली कई लड़कियों को चोद चुका हु मैं hahaha(चन्दू जोरो से हंसा लेकिन नेहा दीदी की हिम्मत जैसे टूट गई थी उनकी सिसकी की आवाज सुनाई दी )

नेहा दीद :चन्दू तुझे ये क्या हो गया है ,वो लोग तुझे बहका रहे है,तू तो मुझसे कितना प्यार करता था …(नेहा दीदी सिसक रही थी )

चन्दू :प्यार ….अरे मादरचोद मैं तो तुझे चोदना चाहता था,तेरी बहन और माँ को चोदना चाहता था जैसे तेरे बाप ने मेरी माँ के साथ किया ...तेरी प्रोपर्टी हड़पना चाहता था , लेकिन उस मादरचोद राज के कारण नही चोद पाया ,साले ने जंगल से आकर पूरा काम ही बिगाड़ दिया …लेकिन अब नही मुझे तेरी कोई भी जरूरत नही है ,अब मेरे पास इतना सब कुछ है की वो मादरचोद अब मुझसे बच नही सकता ...

(आखिरकार चन्दू ने सच उगल दिया था ,वो दारू के नशे में लग रहा था )

और साली मैं अब भी तुझे और तेरी बहनो और माँ को अपनी रंडी बना कर रखूंगा बस वक्त आने दे ,तेरा चोदू भाई मुझे कभी नही ढूंढ पायेगा,और मैं उसे मारकर पूरी प्रोपर्टी पर कब्जा करूँगा,फिर तुझे और तेरे घर की सभी औरतो को अपनी रांड बना कर रखूंगा जैसे तेरे बाप ने मेरी माँ के साथ किया ,पूरा बदला लूंगा मादरचोदों…

और सुन मैंने तुझसे कभी भी प्यार नही किया था ,बस तेरा इस्तमाल कर रहा था लेकिन अब मुझे तेरी कोई जरूरत नही है क्योकि अब मेरे वो सबकुछ है जिससे मैं अपने मकसद में कामियाब हो सकता हु …..

(चन्दू शैतानी हंसी में हंसा )

नेहा दीद :तूने अच्छा किया की मेरी आंखे खोल दी

(दीदी अब भी सिसक रही थी लेकिन उनकी आवाज में एक दृढ़ता थी ) मैंने तुझपर भरोसा किया मेरी माँ ने तुझपर भरोसा किया,ताकि मैं खुश रह सकू,तेरे कारण अपने भाई तक को वो प्यार नही दे पाई जो उसे मिलना चाहिए था,हे भगवान ये मुझसे क्या हुआ,लेकिन चन्दू तूने सही कहा की तेरी माँ मेरे बाप की रंडी है,और अब मेरे भाई की ,और तू...तू है ही रंडी की औलाद ...तूने अपनी औकात आखिर दिखा ही दी …

(दीदी की बात सुनकर चन्दू गुस्से में जोरो से गरजा )

चन्दू :.ये साली जुबान सम्हाल कर बात कर ..

(लेकिन इधर से दीदी की एक बेहद ही खतरनाक सी हंसी गूंजी ,जिसमे दर्द था लेकिन एक अजीब सी दृढ़ता और संकल्प भी था )

नेहा दीद :मादरचोद अब तू देखना की मेरा भाई तेरा क्या हाल करता है,वो बेचारा तो तुझे तेरा हक देने को भी तैयार था .उसे तेरे और मेरे प्यार से भी कोई एतराज नही था ,लेकिन तू सच में एक रंडी की औलाद है साले,तू पाप की पैदाइश है ,यही तेरी औकात है और वो अब तुझे तेरी औकात दिखायेगा तुझे कुत्ते की मौत मारेगा,और अगर गांड में दम है ना तो पूरी ताकत लगा ले अपनी हमारी प्रोपर्टी का झांट भर टुकड़ा भी तू नही ले सकता ये मेरा वचन है ……..और हा मादरचोद अपना ईमेल रोज देखा करना ,अब से तेरी माँ को मैं असली रांड बना कर रहूंगी ,मेरा भाई ही नही इस घर का हर मर्द उसे चोदेगा,और अगर उससे भी उस रांड की खुजली नही मिटी ना तो मैं उसे टॉमी(मेरा डॉगी) से चुदवाऊंगी ,तू बस रोज बैठ कर उसे देखकर हिलाया करना ..

(दीदी की बातो से ऐसा लग रहा था जैसे कोई जख्मी शेरनी दहाड़ रही हो ,उसकी बात सुनकर तो मुझे भी पसीना आ गया था ना जाने चन्दू का क्या हाल रहा होगा)

चन्दू :मादरचोद अगर मेरी माँ को …

(वो इतना ही बोला था की दीदी फिर से बोल उठी )

नेहा दीद :साले चूहे की तरह बिल में छिपा हुआ है तू क्या उखाड़ लेगा मेरा दम है तो सामने आकर बात करना ...रंडी की औलाद ..

(और फोन दीदी के द्वारा काट दिया गया …)

मैं ये सब सुनकर बिल्कुल ही हस्तप्रद था,दीदी अब भी रो रही थी,उसका रोना भी लाजमी था,जिसको इतना प्यार किया,जिसे लेकर सपने सजाए ,जिसके लिए अपने परिवार से भी लड़ गई,मुझे धोखा दिया,हर हालत और हालात में जिसका साथ दिया उसने आज इसने बेकार तरीके से उन्हें धुत्कार दिया...दिल और सपनो का टूटना क्या होता है ये वो ही जानते है जो इसे जी चुके है …….

मैं दीदी के बाजू में जाकर बैठ गया था ,मैंने उनके कंधे पर अपना हाथ रखा और वो मुझसे लिपट कर रोने लगी ……...

“चुप हो जाओ दीदी ,वो इतना काबिल नही की आप उसके लिए रोओ …”

मैं दीदी को दिलासा देने लगा ..

“मैं उसके लिए नही रो रही हु भाई,मुझे तो बस इस बात का दुख है की उसके लिए मैंने क्या नही किया ,लेकिन भाई तुझे मेरी कसम है ..”

उन्होंने मेरा हाथ अपने सर में रख दिया …..

“तू उससे बदला लेगा,तू उसे कुत्ते की मौत मारेगा …”

दीदी की बात सुनकर मैं खुद भी सहम गया था ,मैं कोई कातिल नही हु ,लेकिन मैंने दीदी का हौसला रखने के लिए हा में सर हिला दिया …..और उनके आंसू पोछे ..

“अपने कोई भी गलती नही की है आप इस बात को सोचकर उदास मत हो...अपने जो किया वो अपने प्यार के लिए किया और प्यार एक नशा है,और नशे में आदमी को बिल्कुल भी समझ नही आता की वो क्या सही कर रहा है और क्या गलत…..”

मेरी बात सुनकर उन्होंने हल्के से मेरे गालो को सहलाया…

“बहुत बड़ी बड़ी बाते करने लगा है तू …”

उनके चहरे में पहली बार मैंने एक मुस्कान देखी ….

“लेकिन अब तो चन्दू और भी सतर्क हो जाएगा ...अब तुम उसतक कैसे पहुच पाओगे …”

नेहा दीदी ने हल्के से कहा,वही चीज मेरे भी दिमाग को घेरे हुए था,चन्दू को पता चल गया था की मेरे आदमी नेहा दीदी के साथ साथ हमारे घर के सभी सदस्यों के ऊपर नजर रखे है ,मतलब साफ था की उसने सभी के ऊपर पहले से नजर बिठा कर रखी थी ,उसके पीछे जो भी था वो सच में बहुत ही तेज दिमाग का इंसान था …..

मैं सोच में ही पड़ा था की मेरे दिमाग में चन्दू को निकालने का एक आईडिया आ गया …..

अब जरूरत थी मेरे ध्यान में बैठने की ताकि मैं उस प्लान के हर पहलू को अच्छे से समझ सकू …….

मैं उठ कर जाने लगा …...लेकिन फिर रुका और दीदी को देखने लगा ….

“दीदी चन्दू से बदला तो हम लेंगे ही लेकिन प्लीज मेरे टॉमी को बक्स दो ,”

दीदी कुछ सेकंड के लिए सोच में पड़ गई ,लेकिन फिर उन्हें याद आया की उन्होंने चन्दू से क्या कहा था ...वो जोरो से हंस पड़ी और प्यार से मेरे गाल में एक चपत लगा दी …

“जरूरत पड़े तो टॉमी को भी काम में लगना पड़ेगा ...उस कमीने को तो मैं ….”

उनके चहरे पर गुस्सा वापस आने वाला था उससे पहले ही मैंने उनके गालो में एक किस कर लिया ,वो हैरान होकर मुझे देखने लगी …..

“आप गुस्से में बहुत प्यारी लगती हो लेकिन गुस्सा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है इसलिए जो भी करना है सोच समझ कर और मस्कुराते हुए ..समझी…….”

मेरी बात सुनकर वो फिर से मुस्कुरा उठी और उन्होंने हा में सर हिला दिया …...

 
अध्याय 24

मैं अपने कमरे में आकर ध्यान में बैठा हुआ था ,वही निशा अपने मोबाइल में गेम खेल रही थी ,उसे मैंने कह रखा था की जब तक मैं ध्यान में बैठा रहू मुझे डिस्टर्ब ना करे …..

मैं उठा तो मेरे पास एक प्लान था जिसपर मुझे काम करना था ,मैं इसी सोच में था की अभी तक मुझे ये आईडिया क्यो नही आया …..

मैं खुश था ……

“क्या हुआ खुश दिख रहे हो ,नेहा दीदी से क्या बात हुई वो क्यो रो रही थी कुछ बताया उन्होंने ..”

निशा ने अपने उसी मासूमियत से कहा जो उसके चहरे में हर वक्त रहती थी ……

“हा ..उनका चन्दू से ब्रेकअप हो गया “

वो चौकी ..

“वाट…. क्यो….???”

“क्योकि वो मादरचोद था …..या ये कहु की है ….”

निशा सोच में पड़ गई थी ,मैं निशा को इन सब पचड़ों से दूर रखना चाहता था ,हा ये हो सकता था की वो भी इस गेम में हो लेकिन उसे देखकर मुझे लगता तो नही था की उसे इन सब चीजो का कोई भी इल्म है ,वही अगर वो सच में किसी के साथ है तो इसका मतलब है की वो मेरे खिलाफ है तो भी मैं उसे ये सब नही बताना चाहता था …...अगर मैं इस बात को सोचता की वो कही मेरे खिलाफ तो नही तो मेरा सर दर्द देने लगता क्योकि मुझे अभी तक कोई भी ऐसी ठोस वजह नही मिली थी जिससे मैं उसपर शक कर सकू ,इसके विपरीत वो मुझे हमेशा से ही बहुत प्यारी और मासूम लगती थी ,इसलिए मैंने उसके बारे में सोचना बंद कर दिया था...लेकिन उससे इन सबके बारे में कोई भी बात नही करता था ……

“क्या हुआ ऐसे क्या सोच रही है ..??”

उसे गहरे सोच में देखकर मैंने पूछा….

“मुझे तो लगता था की चन्दू , निशा दीदी से बहुत प्यार करता है फिर आखिर क्या हो गया …”

उसकी बात सुनकर मैंने एक गहरी सांस ली ..

“जो भी हुआ अच्छा ही हुआ ,कम से कम दीदी को उसकी असलियत का पता तो चल गया ,तू टेंशन मत ले अब वो ठीक है ,तू इधर आ ..”

मैंने उसे अपने पास खीच लिया,और उसके होठो में एक किस ले लिया ….

जब से मैंने उसके बारे में सोचना छोड़ने का फैसला किया मुझे उसपर बहुत ही प्यार आने लगा,कारण था की अगर वो लड़की सही है तो सच में वो मुझसे बेइंतहा प्यार करती है...और उसकी मासूम बाते कोई भी उसके प्यार में पड़ जाए ..

मेरे किस करने से वो थोड़ी कसमसाई फिर मुझे जोरो से जकड़ लिया और खुद भी मेरा साथ टूटकर देने लगी …

जब हम अलग हुए तो उसकी सांसे तेज थी …..

“आज फिर से मूड कर रहा है क्या ..??”

उसने भेदती हुई निगहो से मुझे देखा,मुझे अपनी गलती का अहसास हो चुका था,जब से हमारे बीच सेक्स हुआ था मैं अपनी ही जिंदगी में इतना बिजी और टेंशन में था की मैंने उससे प्यार से बात भी नही की थी,और आज जब सीधे उसे किस किया तो उसने ये ही सोचा की मुझे फिर से सेक्स चाहिए इसलिए मैं उससे प्यार दिखा रहा हु …..

“नही बेटू मुझे कुछ नही चाहिए बस तेरे ऊपर बहुत प्यार आ रहा है “

मैंने उसके गालो को अपनी उंगली से सहलाया …

“सच में “उसने अपनी पलके थोड़ी जोरो से झपकाई जो मुझे बहुत ही प्यारी लगी ,मैंने उसके आंखों को चुम लिया ..

“हा सच में “

उसने अंगड़ाई लेते हुए अपनी बांहो को फैला दिया …

“तो आओ ना ..”

मैं भी उससे लिपट चुका था …..

कितनी कोमल थी निशा बिल्कुल रेशम सी,

वो मेरे गोद में ही सर रखे कब सो गई हमे पता ही नही चला ,थोड़ी देर में मेरी नींद खुल गई ,मैंने समय देखा तो रात के 2 बज रहे थे,अचानक ना जाने मुझे क्या हुआ मैं निशा को एक ओर कर कमरे से बाहर निकला और घर में घूमने लगा,थोड़ी देर तक मैं यू ही घूमता रहा और कान्ता काकी के कमरे के पास चला गया ….

चारो तरफ अंधेरे का ही साम्राज्य फैला हुआ था……

सन्नाटा और अंधेरा ……

कान्ता के कमरे में कोई भी नही था ,मैंने शबीना के कमरे में झांका ,वंहा मुझे पंखा चलने की आवाज सुनाई दी….मैंने खिड़की को हल्के से धकेला तो सारा नजारा मेरे सामने था जिसे देखकर मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई ,मैंने अपना मोबाइल निकाला और दो तीन फोटो फूल फ़्लेश के साथ खीच लिए ताकि फ़ोटो क्लियर आये …

मेरे सामने बिस्तर पर कान्ता ,शबीना और अब्दुल नंगे सोये थे,यानी नेहा दीदी ने चन्दू से सही ही कहा था की वो एक रंडी की औलाद है …….

मैं मस्कुराते हुए माँ पिता जी के कमरे की तरफ से गुजर रहा था,सारे घर में सन्नाटा था लेकिन एक कमरे की रोशनी अभी भी जल रही थी ,मुझे कुछ आवाजे भी आई ……

वो सना का कमरा था …

सना अब्दुल और शबीना की बेटी थी ,मैंने ध्यान से सुना तो पता चला की वो पढ़ाई कर रही है,मैंने उसके दरवाजे को हल्के से खटखटाया ,

“कौन है ..??”

उसके आवाज के आश्चर्य को मैं समझ सकता था ….

“मैं हु सना “

थोड़ी देर में दरवाजा खुला ..

“भइया आप यंहा ..”

वो दरवाजे में ही खड़ी थी ,पहले भी हम बाते किया करते थे लेकिन बहुत ही कम ,अक्सर उसे जब कोई पढ़ाई में मदद नही करता तो वो मेरे पास आती थी ,अभी तक उसका मेरे प्रति व्यवहार अच्छा ही रहा ,ना ज्यादा ना कम एक सामान्य सा व्यवहार रहा था सना का …….

वो पढ़ाकू टाइप की लड़की थी और बहुत ही सीधी साधी भी ,पता नही अब्दुल और शबीना जैसे कमीनो के घर ये कैसे पैदा हो गई थी ….

“हा नींद नही आ रही थी तो घूम रहा था ,क्या पढ़ रही हो ??”

“वो केमेस्ट्री ..”

“हम्म्म्म बाहर से ही बात करोगी क्या “

मेरे कहने पर वो थोड़ी हड़बड़ाई क्योकि आज से पहले मैं कभी उसके कमरे में नही गया था ,और वो बाहर दरवाजे पर ही खड़ी थी ,तो तुरंत हटकर मुझे अंदर आने के लिए रास्ता देती है …..

मैं अंदर जाकर एक कुर्सी में बैठ गया …..

उसके टेबल में किताबे बिखरी पड़ी थी …..

“ओहो लगता है मेडम डॉ बन कर ही दम लेगी “

मेरी बात से वो थोड़ा शर्मा गई ..

“नही भइया वो एग्जाम है ना तो ..”

“ह्म्म्म अब तो तुझे ये भी नही बोल सकता की कोई डाउट हो तो पूछ लेना ,अब तो तू साइंस वाली हो गई है और हम कामर्स वाले “

वो मुझसे एक क्लास ही पीछे थी,जब सब्जेक्ट कॉमन था तो मैं उसे थोड़ा पढा दिया करता था लेकिन अब मुझे केमेस्ट्री क्या घण्टा आता था ……

मेरी बात सुनकर वो थोड़ा मुस्कुराई ..

“आप पानी पियोगे “

उसकी बात सुनकर मैं मुस्कुरा उठा ….

“तू तो ऐसे विहेब कर रही है जैसे मैं कहि बाहर से आया हु मैं भी इसी घर में रहता हु “

वो फिर से शरमाई ..

“सॉरी ..”

“कोई बात नही लगता है की मैंने तुझे पढाई में डिस्टर्ब कर दिया ,चल तू पढ़ मैं चलता हु ,लेकिन रात को ज्यादा देर तक जगाने से अच्छा है की तू सुबह उठकर पढ़ लिया कर “

वो थोड़ी देर चुप रही फिर बोल पड़ी ..

“भइया वो सुबह नींद नही खुलता ..”

“मैं उठा दूंगा ,मैं 3-4 बजे तक उठ जाता हु “

उसका मुह खुल गया ..

“इतने सुबह उठकर आप करते क्या हो ..”

उसकी बात सुनकर मैं हंस पड़ा ..

“पूरा घर एक तरफ और तू एक तरफ सभी को पता है की जब से मैं जंगल से आया हु तब से मैं सुबह उठाकर स्टेडियम जाता हु ,मैंने पूरी मार्शल आर्ट सिख ली आउट तुझे पता भी नही है ..”

“ओह सॉरी भइया अक्चुली में मैं थोड़ा देर से उठती हु फिर तुरंत ही स्कूल का समय हो जाता है “

“कोई बात नही ऐसे भी डॉ बनना है तो दुनिया दारी से दूर ही रहना चाहिए ,,,,,,”

“हा भइया ऐसे कंपीटिशन भी बहुत टफ हो गया है और आप तो जानते हो की मुझे बस एक ही चीज चाहिए वो है MBBS की सीट …”

“हा जानता हु तू बचपन से ही तो इसी सपने के साथ जी रही है ……”

मैं थोड़ी देर चुप रहा फिर अचानक ही बोल पड़ा…….

“अगर तेरा सलेक्शन ना हुआ तो “

वो अचानक से बहुत ही डर सी गई ,जैसे उसने इसके बारे में कभी सोचा ही नही..

“मुझे नही पता क्योकि मैंने तो इसके बारे में कभी सोचा ही नही ….”

वो घबरा सी गई थी ……

“ह्म्म्म तू अपनी मेहनत कर और तुझे डॉ बनाने की जिम्मेदारी मेरी “

वो थोड़ा चौकी …

“कैसे ??”

“सिंपल है अगर तू इंट्रेंस नही निकाल पाई तो मैनेजमेंट कोटे से तेरा एडमिशन करवा देंगे “

उसके तो जैसे चहरे का रंग ही उड़ गया ……

“ये आप क्या कह रहे हो हमारे पास इतने पैसे कहा है ,उसमे तो बहुत ही पैसे लगते है …”

उसकी आवाज भी धीमी हो गई थी ….

“तो क्या हुआ,मैं तो हु ,”

“नही भइया आप लोगो ने ऐसे भी हमारे ऊपर बहुत अहसान किये है मैं किसी भी हालत में इंट्रेंस निकालूंगी …”

“अहसान .?? वाह बहुत ही बड़ी बड़ी बाते करना सिख गई है तू तो ….चल अभी तो पढाई कर जब की तब देखेंगे ,मुझे यकीन है की तू निकाल लेगी ,लेकिन अगर नही निकाल पाई तो भी मेरा वादा है की तू डॉ जरूर बनेगी …”

मैं मुस्कुराता हुआ वंहा से चला गया वही वो बस मुझे देखती ही रह गई,मैंने कभी उससे ऐसी बाते नही की थी यंहा तक की कभी उससे इतने कॉन्फिडेंट से बात भी नही की थी …….

***********

मेरे घर एक पहले माले के कोने में निकिता दीदी का भी कमरा था ,आज सना से बात करने के बाद मुझे ना जाने क्यो लगा की क्यो ना निकिता दीदी से भी बात की जाए ,समय कोई 3 के करीब हुआ था ,मुझे पता था की वो भी गहरी नींद में सो रही होगी ,मैं उनके कमरे के पास पहुचा तो वो बंद था लाइट भी बंद थी लेकिन उसमे एक चीज अलग थी की वंहा से मुझे सिगरेट की बदबू आ रही थी ,मेरा शैतानी दिमाग दौड़ाने लगा और मैंने अपने जेब से एक छोटी सी तार निकाली और चाबी की जगह घुसेड़ कर दरवाजा खोल दिया ,ये कला मैंने यूट्यूब से सीखी थी मुझे नही पता था की ये कितना काम करेगा लेकिन इसने किया ,दरवाजा खोलते ही बस धुंआ ही धुंआ था,मुझे खांसी ही आ जाती लेकिन मैंने जल्दी से अपने मुह को रुमाल से दबा दिया ..

तो क्या निकिता दीदी इतना ज्यादा सिगरेट पीती है ,है भगवान ,मैंने थोड़ा और गौर से निरक्षण किया तो पाया की ना सिर्फ सिगरेट था बल्कि शराब के जाम भी लिए गए थे,मेरा कमरा उनसे थोड़ी ही दूर पर था लेकिन आजतक मुझे इसका पता नही चला की वो कमरे के अंदर ये सब करती है ,असल में बड़े घर की यही प्रॉब्लम है की ये लोगो को जुदा ही कर देता है ,और निकिता दीदी के कमरे में कोई जाता भी नही था ना ही उन्हें पसंद था की कोई उन्हें डिस्टर्ब करे ….

दीदी मुह फाड़े औंधे मुह बिस्तर में पड़ी हुई सो रही थी ,कोई चिवास का बोतल था जो की 2-3 पैक के करीब अब भी बचा हुआ था ,मैंने भी सोचा क्यो ना मैं भी ट्राय करके देख लू ,मैंने सीधे बोतल उठाई और मुह से लगा कर एक ही सांस में उसे गटक लिया ……….

सर थोड़ा घुमा लेकिन वो सुरूर मुझे बहुत ही सुकून देने लगा था ,मैंने पास ही पड़े सिगरेट के डिब्बे से एक सिगरेट निकाल कर सुलगाई ,एक गहरा कस लिया और जोरो से खासा फिर दूसरे कस के साथ धुंआ बिल्कुल ही आराम से अंदर जाने लगा था ,दो तीन गहरे कस लगा कर मैने धुंआ ऊपर की ओर छोड़ दिया…..

मेरे सामने एक आदमकद दर्पण था मैं उसमे अपनी ही छिबी देखकर हंस रहा था ,मुझे बड़ा ही अजीब सा फील हो रहा था अभी तक ये सब मैंने फिल्मो में ही देखा था ,,मैं दीदी के कमरे को घूम रहा था ,हर चीज अस्त व्यस्त फैली हुई थी ,लग ही नही रहा था जैसे किसी लड़की का कमरा हो ऐसे लग रहा था जैसे किसी बैचलर लड़के का रूम हो ……

मैं सिगरेट पीते हुए दीदी के बिस्तर पर ही लेट गया,वो एक तरफ पड़ी हुई थी ,हा वो पड़ी हुई थी उसे सोना नही कहते शायद नशा जायद होने के बाद वो मोबाइल पकड़कर बिस्तर में गिरी होगी और उसे खुद याद नही रहा होगा की कब उसकी नींद लग गई……

दीदी का कमरा बड़ा ही शानदार था शायद सभी बच्चों में सबसे बड़ा कमरा भी इन्ही को दिया गया था ,एक तरफ की दीवार के जगह मोटा कांच लगाया गया था ताकि वंहा से बाहर का नजारा साफ साफ दिखे ,ऐसे बाहर देखने के लिए कुछ था नही हमारे गर्दन के अलावा ,तो अक्सर वो अपना पर्दा लगा कर रखती है आज भी उन्होंने पर्दा लगाया हुआ था ,मैंने उसे हल्के से खोल दिया ,बिस्तर में लेट कर मैं अपने गार्डन और बाहर के रोड को देख सकता था …

देखते देखते अचानक मैं कांच के और भी पास गया ,कमरे में अंधेरा था तो शायद बाहर से अंदर नही देखा जा सकता होगा,लेकिन मुझे साफ साफ बाहर की चीजे दिख रही थी ,मैने ध्यान से देखा ,सामने की बिल्डिंग में मुझे कुछ दिखाई दिया,मेरे आंखों ने जैसे किसी जादू की तरह उन्हें पहचान लिया था,बिल्डिंग असल में बहुत ही दूर था ,और बहुत ही ऊंचा भी ,रात के अंधेरे में में कुछ कमरों की लाइट जल रही थी उनमे एक कमरा वो भी था जंहा मेरा ध्यान गया था ,मैंने ध्यान से देखा तो समझ आया की कोई आदमी बार बार खिड़की के पास आता है,थोड़ा झुकता है फिर चला जाता है …….वो झुककर क्या कर रहा था वो मुझे समझ नही आया ,मैं और कंसंट्रेट हो सकता था लेकिन जब मेरे पास खुद का दूरबीन था तो मैं क्यो मेहनत करता ,मैं चुप चाप कमरे से बाहर जाकर अपने कमरे में गया थोडा नशा था लेकिन वो सुमार रहा नशा नही …..

अपने कमरे से मैंने अपनी दूरबीन निकाली और साथ ही एक दो लेंस भी ताकि थोड़ी दूरी एडजेस्ट की जा सके ,और छत जाने की बजाय मैं दीदी के कमरे में ही चला गया,वही से देखने लगा ,देखा तो समझ आया की कोई साला महंगा टेलिस्कोप लगा कर रखा है,थोड़े देर में आकर चेक करता है और फिर चला जाता है ,या वही बैठकर बियर पी रहा होता है ,तो क्या ये मेरे घर की निगरानी के लिए किया गया है ..?? हो सकता है …..??या नही भी ??

 
अध्याय 25

मुझे घर से ऐसे निकलना था जैसे किसी को पता भी ना चले ,लेकिन ना जाने कितने जगहों से मेरी पहरेदारी की जा रही थी ,मैंने तुरंत ही अपने सीक्रेट सर्विस वाले को फोन किया और उसे उस आदमी के बारे में बताया जो की टेलिस्कोप लगा कर बैठा था,उसने कहा की वो उसे सम्हाल लेगा लेकिन मैं खुद वंहा जाना चाहता था ,उसका एक कारण ये था की वो आदमी ज्यादा उम्र का नही था ,ऐसा लग रहा था जैसे कोई कालेज गोइंग लड़का होगा,तो मेरे दिमाग में कई तरह के शक पैदा हो गए थे,मैं खुद ही उसे चेक करना चाहता था इसलिए मैंने अपने सर्विस वाले से कहा की मुझे बिना किसी के नजर में आये घर से निकलना है ,उसके लोगो ने कई ऐसे लोगो को स्पॉट किया था जो की मेरे और मेरे घर वालो पर नजर रखते रहे थे,तो उसने ही प्लान बनाया और मुझे कवर करते हुए समय दिया की मैं घर के पीछे की गेट से निकल जाऊ वंहा घर के मोड़ में मुझे एक कार मुहैया करवा दी जाएगी जिससे मैं जन्हा चाहू जा सकता हु …

सुबह के कुछ 6 बजे होंगे ,मैं पीछे की गेट से निकला थोड़ी दूर जाने पर मुझे के एक काले रंग की कार दिखाई दी मैं उसके पीछे की सीट में जाकर बैठ गया ……..

मैं उस बिल्डिंग में पहुचा जन्हा वो टेलिस्कोप वाला था,मैंने उसके कमरे के माले को पहले ही गिन लिया था तो मुझे उसे ढूंढने में कोई खास दिक्कत नही हुई ,मैं वंहा अकेले ही गया था ….

थोड़ी देर दरवाजा बजाने के बाद एक लड़के ने दरवाजा खोला ,ये वही लड़का था जिसे मैंने दूरबीन से देखा था ,वंहा से साफ तो नही देख पाया था लेकिन यंहा उसे देखकर मैं मुस्कुरा उठा था ,वो एक मोटा सा लड़का था ,गाल भी फुले हुए थे,आंखों में चश्मा था,उम्र कोई 24-25 की रही होगी,बिल्कुल ही थुलथुला,आंखों से ही लग रहा था की रात भर से सोया नही होगा ……

उसने पूरा दरवाजा नही खोला बल्कि आधा ही खोला था ,

“यस ……”

मुझे देखकर उसने कहा,उसका चहरा ही बता रहा था की मेरा आना उसे पसंद नही आया …

मैंने सीधे अपने जेब में रखा पिस्तौल निकाला और उसके पेट में टिका दिया ...पिस्तौल नकली थी लेकिन उसके लिए तो असली ही थी ,उसके चहरे का रंग ही उड़ गया था …..

“कुछ मत बोलना बस दरवाजा खोल मुझे अंदर आने दे ,नही तो यही पर तेरे पेट में कई छेद कर दूंगा “

उसने डर के कांपते हुए दरवाजा खोल दिया ….

मैं अंदर आ चुका था और अंदर से दरवाजा लगा चुका था …

“कौन हो तुम क्या चाहिए …”

उसने डरते हुए कहा ..

“इतनी जल्दी क्या है मोटे….”

मैं इधर उधर देखने लगा मैंने अनुमान लगाया की टेलिस्कोप किस कमरे में होगा ,मैं वंहा पहुचा तो वो उसका बेडरूम था ,जन्हा बड़े से ग्लास के सामने एक बड़ा सा टेलिस्कोप फिट किया गया था ,,उसका फ्लेट 20 वे माले पर था तो शहर यंहा से बड़ी ही अच्छी तरह से दिखता था ,सामने कई बड़े बड़े बिल्डिंग्स थे वही दूर मेरा बंगला भी साफ साफ दिख रहा था….

मैंने देखा की उसने टेलिस्कोप को एक आईपैड से कनेक्ट किया है,मैंने ध्यान से देखा तो पता चला की टेलिस्कोप में जो कुछ भी दिख रहा था वो उस आईपैड में दिख रहा था ….

“क्या चाहिए तुम्हे कौन हो तुम “

वो अब भी बहुत ही डरा हुआ था …

“ये सब तू क्या कर रहा है …”

मैंने टेलिस्कोप की तरफ देखते हुए कहा ..

“वो ….वो मेरे काम का हिस्सा है ..”

“काम..? कौन सा काम करता है बे तू मोटे ..”

“मैं एक फोटोग्राफर हु …”

उसने डरते हुए कहा …..

“अच्छा ..तो यंहा से किसकी फ़ोटो लेता है ..”

वो चुप ही था और मैं उसके बेडरूम को ध्यान से देखने लगा ,वो किसी टिपिकल बैचलर लौण्डे का बेडरूम था पास ही बियर की बोतले पड़ी थी ,सिगरेट का धुंआ पूरे कमरे में फैला हुआ था,एक तरफ बड़ा सा बिस्तर था जिसमे अभी एक लेपटॉप खुला हुआ था,पास ही चिप्स के खाली पैकेट पड़े थे ,और कुछ टिसू पेपर भी ,जिन्हें ध्यान से देखने पर समझ आ रहा था की साले में मुठ्ठ मारकर टिशु पेपर में पोछा है …

मैंने जाकर लेपटॉप को चेक किया ,उसमें अभी चुदाई का वीडियो ही चल रहा था,साफ पता चल रहा था की वो वीडियो होममेड है और कपल को पता ही नही की उनकी वीडियो बनाई जा रही है,इसे दूर से लिया गया था,मैं समझ गया की कैसे ,शायद किसी बिल्डिंग में ये लोग अपने कमरे की लाइट जला कर सेक्स कर रहे थे और इस महानुभाव ने अपने टेलिस्कोप से ये वीडियो बनाया था …

“तो ये काम करता है तू ..”

मेरी बात से वो सकपकाया …

मैंने उसका लेपटॉप ढूंढना शुरू किया तो पता चला की ये कोई जासूस नही बल्कि महा ठरकी है ,ना जाने कहा कहा से, किस किस बिल्डिंग की कौन कौन सी लड़कियों और औरतो की वीडियोस और फोटोज उसके पास थी ……

“क्यो बे मादरचोद इसे बेचता है क्या तू ..”

मैंने गुस्से में कहा ..

“नही भाई नही बस ये तो मेरे मजे के लिए ही …”

“अच्छा बता वो सामने वाले बंगले से किसकी फोटो निकाला है अभी तक ..”

मैंने हमारे घर नही बल्कि बाजू वाले घर की ओर इशारा किया ..

“वंहा से ???,वंहा उसके सर्वेंट क्वाटर में दो लोग की वीडियो है मेरे पास ,आप बोलो तो मैं डिलीट कर दूंगा सभी कुछ ….”

“अच्छा और उसके बाजू वाले बंगले से..”

मैंने अब अपने बंगले की ओर इशारा किया ..

“वंहा की भी कुछ है “

“ह्म्म्म ..”

मैंने देखा की पास ही एक 5TB का एक्सटर्नल हार्ड डिस्क पड़ा हुआ था मैंने उसे लेपटॉप से कनेक्ट किया और उसका पूरा लेपटॉप ही खाली कर दिया ,

“ये मैं अपने साथ ले जा रहा हु ,और अगर तुझे जिंदा रहना है तो मेरे बारे में किसी से कुछ भी नही कहना,और जैसा मैं कहु मेरा काम तुझे करना है…..”

तो थोड़ा और भी डर गया ….

“क्या काम …???”

मैंने उसका आईपैड उठा लिया ..

“ये काम कैसे करता है,”

उसने मुझे बताया की टेलिस्कोप की सेटिंग से लेकर सबकुछ उस आईपैड से ही कंट्रोल हो जाता है…….

“ओह ये तो चीज बढ़िया है,बहुत महंगा होगा ना “

“जी …"

"और क्या इसे कहि दूसरे जगह से भी कंट्रोल कर सकते है “

उसने मुझे घूरा …

“हा कर सकते है “

“ओके तो मुझे तेरे टेलिस्कोप का पूरा एक्ससेस चाहिए ,और फिक्र मत कर मैं तुझसे कोई गैरकानूनी काम नही करवाऊंगा ,तू वही कर जो करता है अपनी ठरक मिटा ,फ़ोटो और वीडियो बना लेकिन मुझे तेरे टेलिस्कोप की पूरी एक्सेस दे मैं तुझे इसके लिए पैसे भी दूंगा ,और दूसरी चीज की मेरे लिए भी ये सेटअप खरीदना है तुझे ...अब बोल करेगा की मरेगा ..”

उसके लिए चॉइस ही क्या थी उसने बस अपना सर हिलाया ..

“गुड ऐसे नाम क्या है तेरा “

“रोहित ..”

“ओके रोहित नाइस तू मिट यू ..”

मैं वंहा से एक्सेस लेकर निकल गया साथ ही मैंने रोहित का नंबर भी ले लिया था ……

मैंने रोहित को ये भी बोल दिया था की मैं उसके पीछे एक आदमी लगा कर रखूंगा अगर उसने मेरी बात नही मानी या किसी को मेरे बारे में बताने की कोशिस की तो तुरंत ही उसे उड़ा दिया जाएगा ….

*********

मेरे लिए रोहीत काम का आदमी था वो एक कम्प्यूटर इंजीनियर था जो की घर से ही प्रोगरामिंग करता था और साथ ही अपने शौक के तौर पर छिपकर फोटोज लिया करता था ,उसके पास गजब का कलेक्शन था,शायद ही कोई घर ऐसा हो जन्हा उसकी पहुच ना हो और उसने वंहा नही झांका हो ,वो अपने काम में एक्सपर्ट था ,

मेरे पास उसकी सभी फोटोज और वीडियोस देखने का समय नही था ,मुझे और भी काम करने थे ……

**********

मैं वंहा से निकल कर फिर से उसी तरीके से अपने घर पहुचा जैसे मैं घर से निकला था ,और फिर तैयार होकर फिर से मेन गेट से निकला लेकिन इस बार मेरी मंजिल कही अलग थी …..

मैं निकला और सीधे रश्मि के घर पहुच गया ,मैं भैरव सिंह के सामने बैठा हुआ था ……

“अंकल मेरे दादा और नाना ने हमारे नाम से एक वसीयत की थी ,मुझे तो वसीयत क्लेम करना है ,लेकिन दिक्कत ये है की उसकी ओरोजनल काफी मेरे पास नही है बल्कि एक फोटो कॉपी जरूर है …”

ओरिजनल कॉपी मैंने काजल मेडम को दे दी थी जिसे उन्होंने सुरक्षित रखने के बहाने से लिया था ,अब जबकि चन्दू से मेरा कोई राब्ता नही था और उसके इरादे भी क्लियर हो चुके थे तो मुझे उसे बाहर निकालने का यही रास्ता सुझा …

“ह्म्म्म हो जाएगा मैं अपने वकील से बात करके देखता हु ,रुको “

उन्होंने अपने वकील को फोन लगाया और थोड़ी देर बाद वकील वंहा हाजिर हो गया …….

“ह्म्म्म हो जाएगा ,लेकिन प्रोसेस में थोड़ा समय लगेगा और जब वसीयत क्लेम करोगे तो कुछ 15 दिन का समय और चाहिए होता है (मुझे नही पता कितने दिन का समय चाहिए होता है विज्ञापन देने के बाद उस पर स्टे लेने के लिए मैं 15 दिन मान कर चल रहा हु )

तो ऐसे लगभग 1 महीने तो लग जाएंगे प्रोपर्टी तुम्हारे नाम होने में “

मैंने हा में सर हिला दिया था,मुझे पता था की मेरे पीछे चन्दू के लोग पड़े हुए है और वो वकील को भी आते हुए जरूर देखेंगे तो उसे ये पता तो चल ही जाएगा की मैं वसीयत क्लेम कर रहा हु ,मुझे उम्मीद थी की इससे चन्दू बाहर आ जाएगा या वो नही भी आ पाए तो कम से कम मेरे ऊपर होने वाले हमले बढ़ जायेगे और कोई तो सुराग मिल ही जाएगा …….

दूसरे दिन से हमारे एग्जाम शुरू थे ,तो मुझे अब घर में रहकर पढ़ना था ,और थोड़ा सिक्योरटी को और भी टाइट करना था ,क्योकि हमले शायद एग्जाम दिलाने जाते समय ही होने वाले थे ……….

 
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