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जादू की लकड़ी

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बढ़िया प्रस्तुति भाई ……….. अगले अपडेट का इंतज़ार रहेगा
 
अध्याय 26

निशा आज मेरे ही कमरे में आकर पढ़ रही थी ,वो बेहद ही बेचैन हो रही थी जैसे वो हर एग्जाम के पहले होती थी…

“आपकी तैयारी हो गई ???”

मुझे लेपटॉप पकड़े देखकर उसने कहा …

“हा पहले ही सब कम्पलीट कर लिया है..”

जब साला 12 हजार करोड़ की प्रोपर्टी मिलने वाली हो तो पढाई कौन करेगा …….लेकिन ये भी सही था की मैं पढाई में बहुत ही अच्छा था ,और सभी सब्जेक्ट को मैंने पहले ही तैयार कर लिया था,मुझे जाकर बस एग्जाम में बैठना भर था ,और अपने पास तो जादुई लकड़ी भी थी जिसे चाट कर तो मैं एक ही दिन में सीए का एग्जाम भी निकाल देता ……

“आपका ही बढ़िया है इसी लिए हर साल टॉप करते हो ..कुछ ट्रिक तो बताओ “

उसे देखकर मुझे हंसी आ गई ,एक वो एक शार्ट और एक टीशर्ट में थी ,बाल को बांध रखा था और आंखों में चश्मा लगा रखा था,उसके गुलाबी होठ और भी ज्यादा गुलाबी दिख रहे थे ,चहरे का रंग चिंता के कारण लाल हो गया था ,और फुले हुए उसके गालो को देखकर कोई सेब भी शर्मा जाए ……

“एक ट्रिक है मेरे पास ..”

“क्या क्या ??”

वो मेरे पास आकर बैठ गई ..

“चल प्यार करते है और सो जाते है ,दिन में मस्त होकर उठेंगे “

उसने अपने होठो को दांतो से दबाया और मेरे कंधे में एक मुक्का मार दिया ……..

“आप भी ना ,जब टाइम रहता है तो कुछ नही करते और आज आपको मस्ती सूझी है ..भाग जाओ यंहा से “

वो फिर से मेरे स्टडी टेबल में बैठकर पढ़ने लगी ,और मैंने रोहित के पास से लाई हार्डडिस्क को लेपटॉप से कनेक्ट किया ……….

उसमे बहुत सारे फोटोज और वीडियोस थे जिसे उसने अलग लग फोल्डर बना कर रखा था सभी फ़ोल्डर्स का नाम उसने मकान के नाम से दिया था ,जैसे बगला नंबर 123 आदि आदि ,और बिल्डिंग्स के अलग फ़ोल्डर्स थे जिसमे पहले बिल्डिंग का नाम था ,फिर उसके अंदर फ्लेट का नाम ...साला सच में बहुत ही हरामी आदमी था ,मैंने चेक करना शुरू किया,मैं आधे घण्टे के बाद मुझे हमारे बंगले का फोल्डर मिल गया जिसे मैंने अपने लेपि में कॉपी कर लिया …

मुझे देखकर समझ आया की निकिता दीदी की हालत क्या है ,वो कभी सिर्फ टीशर्ट पहने ही खिड़की में खड़ी हुई सिगरेट पीती दिख जाती तो कभी शराब हाथ में लिए मुझे निकिता दीदी का कोई ऐसा फ़ोटो या वीडियो नही मिला जिसे आपत्तिजनक कहा जा सके ….

लेकिन उसमे सिर्फ दीदी के फोटज नही थे,बंगले में रहने वाले कई लोगो के फोटोज थे जैसे हमारे नॉकर जो की गार्डन में किसी के साथ कुछ कर रहे हो ,या मेरा बाप अपने रंडियों के साथ कहि खुले में कुछ कर रहा हो ,सब कुछ कैद था उसमे कुछ फ़ोटोस चन्दू और नेहा दीदी के भी थे जिसमे वो एक दूसरे को किस कर रहे थे…

फिर मुझे वो मिला जिसे देखकर मेरी सांसे ही रुक गई ..

वो मेरे माँ की फोटोज थी,नहाने के बाद जब वो अपने बालकनी में आया करती थी,या खुले हुए खिड़की से अंदर झांकती वो फोटोज जिसमे उनके जिस्म में कोई भी कपड़े नही होते थे,या पिता जी के साथ जब वो पूरे नंगे जिस्म एक दूसरे से मिले होते थे….

उसे देखकर मेर अंदर एक अजीब सी संवेदना उठी और मैंने तुरंत ही उन फोटज को क्लोज कर दिया ,मेरे आंखों के सामने उनकी देह की तस्वीर घूम सी गई ……..

मैंने अपने सर को झटका और अपना नया लाया हुआ आईपैड उठा लिया ,मैंने पासवर्ड के द्वारा रोहित के आईपैड का एक्सेस प्राप्त किया और उस टेलीस्कोप को अपने घर की ओर घुमाया …

उसमे मेरा घर साफ साफ दिख रहा था,माँ पिता जी का कमरा नीचे था, इसलिए उतना क्लियर अंदर तक घुस पाना मुश्किल हि था,लेकिन फिर भी अगर वो खिड़की के पास होते तो उन्हें आराम से देखा जा सकता था,वंहा से उनकी फोटो भी ली जा सकती थी और जरूरत पड़े तो वीडियो भी बनाई जा सकती थी ……..

मैं अपने घर में कैमरे को घुमाने लगा तभी मुझे कुछ याद आया और मैंने उसे बंद कर वंहा से उठकर नेहा दीदी के पास चला गया ….

“अरे राज कल से तो तेरे एग्जाम शुरू होने वाले है ना तू यंहा क्या कर रहा है ….”

मैंने अपने मोबाइल से कान्ता,शबीना और अब्दुल वाली फोटो निकाल कर उन्हें दिखाई …...

“तुमने सही कहा था वो रंडी की ही औलाद है ,इसे मैं आपको भेज रहा हु आप इसे चन्दू को ईमेल कर देना “

मेरे होठो में एक कमीनी सी मुस्कान आ गई थी ….

*************

दूसरे दिन हमारा एग्जाम था मुझे पूरी सिक्युरिटी के साथ ले जाया गया था,मैं और निशा साथ ही गए,मेरे गार्ड ,रश्मि के गार्ड साला ऐसा लग रहा था जैसे की हम कोई VVIP है……

अभी प्रोपर्टी के काम में पूरा महीना लगना था और मैं चन्दू के एक्शन का इंतजार कर रहा था……

मेरा अधिकतर समय आगे की प्लानिंग करने में निकलता था ….

एक दिन डॉ चूतिया का फोन आया …..

“हैलो राज ….”

“जी सर “

“हमने काजल के परिवार के बारे में पता किया उसके पति और बच्चे को हमने अपने निगरानी में रख लिया है ,लेकिन अभी भी काजल से कोई कांटेक्ट नही हो पा रहा है,उसके पति ने बताया की वो कुछ दिन से बहुत ही अपसेट थी ,इन लोगो को किडनेप तो नही किया गया था लेकिन ये नजरबंद जरूर थे..

दिक्कत ये है की अब जल्द से जल्द काजल को ढूंढना होगा क्योकि जब उन्हें पता चलेगा की हमने उनके लोगो को ठिकाने लगा दिया है और उसके पति और बच्चे को अपनी निगरानी में ले लिया है तो वो काजल को नुकसान पहुचा सकते है “

“ओह तो क्या काजल मेडम ने उनसे कांटेक्ट करने की कोशिस नही की ….??????.”

“नही ये लोग भी उससे कांटेक्ट नही कर पा रहे है ,समझ नही आ रहा है उसे कैसे ढूढे ………..”

मैं भी सोच में पड़ गया था काजल का मिलना मेरे लिए एक बड़ी मुसीबत से छुटकारा था ……

मैं फिर से सोच में पड़ गया ,जैसा की बाबा जी ने मुझे बताया था की मेरे पास सबसे बड़ी शक्ति मेरे मन की शक्ति है ,लेकिन मुझे उसका उपयोग करना नही आता,मैं फिर से ध्यान में बैठा गया,मैंने अपने मन में बार बार ये दोहराया की मुझे काजल को ढूंढना है ….

मेरे आँखों के सामने काजल मेडम की तस्वीर उभर कर आ रही थी ,थोड़ी देर में ही मुझे ऐसे लगा जैसे मैं इस शरीर में ही नहीं हु ना ही इस कमरे में ही हु ,मैं कही और था एक बहुत ही अँधेरे वाली जगह में था,मुझे कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था ,वो एक गुफा जैसी जगह थी ,जंहा अँधेरा ही अँधेरा था ,लेकिन दूर कही से प्रकाश की किरणे आ रही थी ,मैं उसी और बढ़ने लगा ,लेकिन ये क्या मैं चल नहीं रहा था बल्कि जैसे उड़ रहा था ,मुझे समझ नहीं आ रहा था की ये मेरे साथ क्या हो रहा है ,मैं प्रकाश की और जाने लगा तो देख कर बुरी तरह से चौक गया ,वो एक बड़ी सी जगह थी लेकिन जैसे कोई गर्भगृह हो ,कोई लाइट वह नहीं थी बस कुछ जलते हुए मसाल थे ,वंहा पर एक विशाल मूर्ति बनी हुई थी ,ना जाने वो किसकी मूर्ति थी लेकिन वो बिल्कुल ही काले पत्थर से बनाई गई थी और देखने में बेहद ही डरावनी थी ,वही एक तांत्रिक जैसा शख्स उसके सामने ध्यान की मुद्रा में बैठा हुआ था ,उसके सामने आग जल रही थी ,पास ही चंदू हाथ में बड़ी सी तलवार लिए खड़ा था ,वो पूरी तरह से नंगा था और उसके माथे पर एक बड़ा सा टिका लगाया था ,वो लाल रंग का टिका था लेकिन कोई गुलाल नहीं बल्कि खून लग रहा था ,हां चंदू के हाथो से खून ही बह रहा था ,शायद उसने अपनी उंगली काँटी थी ,मुझे समझ में नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है ,मैंने आस पास देखा तो मेरे आश्चर्य की कोई सीमा नहीं रही क्योकि चंदू जिस और खड़ा था वही निचे एक पत्थर में एक इंसान को लिटा कर बंधा गया था ,उस शख्स का चेहरा देखते ही मैं दंग रह गया क्योकि वोई रामु काका थे ,चंदू के पिता ,चंदू जैसे उसकी बलि देने वाला था ,हां वो उसकी बलि ही देने वाला था ,तभी मुझे एक आवाज सुनाई दी ...

"नहीं ऐसा मत करो चंदू तुम अपने को दुष्ट शक्तियों के हाथो में सौप रहे हो ,ये भयानक तबाही ला देगी "

वो आवाज सुनकर मैं और भी आश्चर्य से भर गया क्योकि वो आवाज काजल मेडम की थी ,उन्होंने काजल मेडम को एक खम्भे से बांध रखा था उनके शरीर में कोई भी कपडे नहीं थे लेकिन पूरा शरीर लाल रंग के गुलाल से ढंका हुआ था ...

चंदू जोरो से हंसा

"ये मेरा बाप कभी था ही नहीं ,इसने जो की किया उसकी इसे सजा जरूर मिलेगी ,इसकी बलि देकर मैं शैतान को अपने अंदर बुलाऊंगा और फिर तेरे साथ सम्भोग करके शैतानी शक्तियों का मालिक बन जाऊँगा ..."

मुझे सारी बातें समझ में आ गई थी लेकिन तभी वो शख्स जो की उस मूर्ति के सामने बैठा था वो उठा ,वो बलशाली शरीर का मालिक था और साथ ही बेहद ही डरावना भी ,बड़े बड़े बाल थे और बड़ी बड़ी दाढ़ी थी,वो पलटा और मुझे देखते हुए जोरो से चीखा .........

"ये यंहा कैसे आ गया "

उसकी आवाज ही इतनी डरावनी थी की मैं बुरी तरह से डर गया ,लेकिन मुझे समझ नहीं आया की मैं क्या करू ..

"कौन ..??"

चंदू इधर उधर देखने लगा .....जैसे उसे मैं दिख ही नहीं रहा हु

"ये ..आज तेरी रूह यंहा आ तो गई है लेकिन वापस नहीं जायेगी मैं इसे कैद करके रखूँगा "

उसने अपने पास पड़ा एक त्रिशूल उठा लिया था और उसकी नोक मेरे ओर कर दी मैं अपनी पूरी ताकत लगा कर वंहा से भागने को हुआ लेकिन जैसे मैं वही जम गया था ...

मैं बुरी तरह से डर गया था तभी काजल मेडम चिल्लाई

"राज डरो नहीं खुद पर यकीन करो तुम बेहद ही ताकतवर हो बस तुम्हे अपने ताकत का अंदाजा नहीं है ,खुद पर यकीन करो भागो यंहा से "

वो भी मुझे नहीं देख पा रही थी लेकिन पता नहीं क्यों उन्हें मेरा अहसास हो गया था .....

"बाबा जी मदद "मैंने अपने मन में कहा और अचानक से ही मेरी आंखे खुल गई ........

मेरी सांसे बहुत ही तेज चल रही थी ,मेरे दिमाग में अब वो दृश्य घूम रहा था ..

मैंने तुरंत ही फोन उठाया और डॉ चूतिया का नंबर घुमा दिया ..........

 
अध्याय 27

मैंने तुरंत ही डॉ को फोन लगाया और उन्हें सभी बातें बताई जो मेरे साथ अभी कुछ देर पहले घटी..

"ओह माई गॉड ....राज तुम्हारे साथ अभी जो हुआ उसे आउट ऑफ़ बॉडी एक्सपीरियंस कहते है ...मतलब की तुम अपने शरीर को छोड़कर वंहा चले गए थे जिस जगह का तुमने सोचा था ,यानि की काजल के पास "

"मतलब ??"

मुझे डॉ की बातें समझ नहीं आ रही थी

"मतलब की हमारा सिर्फ एक शरीर नहीं है बल्कि कई शरीर है ,कही कही पर 7 शरीरो का वर्णन मिलता है ,तो कही चार ,लेकिन समझने के लिए हम २ शरीर को मोटे मोटे तौर से समझ सकते है,

एक हमारा स्थूल शरीर और दूसरा हमारा सूक्ष्म शरीर ,स्थूल शरीर वो है जो की जो अभी हम देख रहे है ,और सूक्षम शरीर उसके अंदर एक और शरीर है जो तरंगो से बना हुआ है और जिसका हमे कोई भी पता नहीं ,मरने के बाद सूक्षम शरीर ही बाहर चला जाता यही और स्थूल शरीर ही मरता है ,सूक्षम शरीर हमारे मन का धारक होता है यानि हमारा दिमाग स्थूल शरीर का हिस्सा है लेकिन हमारा मन सूक्षम शरीर का ....

लेकिन इसके बारे में हमें पता नहीं होता इसलिए हम मरने से डरते है ,योगी बहुत ही मेहनत से इस शरीर से जीते हुए भी निकलना सिख जाते है ,इसे ही मार्डन भाषा में आउट ऑफ़ बॉडी एपीरिएंस कहा जाता है ,तुम्हे इंटरनेट में इसके बारे में और भी कई बातें मिल जाएगी ,आजकल इसे सिखाया भी जाता है और सामान्य लोग भी इसमें कामियाब हो रहे है ,एक सामान्य आदमी भी कभी कभी इन चीजों का अनुभव करता यही ,लेकिन साधक इसे प्रॉपर तरीके से सीखते है और इसमें एक्सपर्ट हो जाते है ,तुम्हारे साथ भी आज यही हुआ लेकिन अनजाने में ,अब तुम्हे इसे जानकर सीखना होगा ,तुम्हारे पास एक गजब की कन्सन्टेरशन है तुम इसे आराम से कर सकते हो ..."

डॉ की आवाज में एक खुसी दिख रही थी

"मगर डॉ अगर जो मैंने देखा वो सच है तो काजल मेडम बहुत ही बुरी मुसीबत में फंसी हुई है "

"हां और साथ ही चंदू जरूर शैतानी ताकत हासिल करने में लगा हुआ है,वो अपने बाप की ही बलि दे रहा है ,खैर वो उसका बाप था ही कब,काजल को वंहा से निकलना होगा ,क्योकि अगर चंदू के पास वो ताकत आ गई तो बहुत अनर्थ हो जाएगा ,शैतानी ताकत से वो तुम्हे बहुत ही ज्यादा नुकसान पंहुचा सकता है और अब जब उसे ये पता है की तुम्हरे पास भी जादुई पावर है तो वो काजल को मरने में वक्त नहीं लगाएगा तुम्हे जल्दी से उसके ठिकाने का पता लगाना होगा राज "

मैं बड़ी असमंजस की स्तिथि में फंस गया था

"लेकिन डॉ मैं उसका पता कैसे लागू आपने ही तो कहा था की वो मुझसे अनजाने में हुआ है "

"तुम्हे अपने पर यकीन करना होगा ,मैं एक एक्सपर्ट को जानता हु जो की आउट ऑफ़ बॉडी एक्सपीरियंस कर चूका है और उसकी प्रॉपर विधि भी जानता है ,तुम उसके साथ मिलकर इसे तुरंत ही करने की कोसिस करो ,देखो मुझे भी पता है की ये एक दिन का काम नहीं है लोगो को महीनो लग जाते है पहला एक्पीरियंस करने में और सालो लग जाते है इसमें एक्सपर्ट बनाने में लेकिन तुम सामान्य इंसान नहीं हो तुम्हारे पास कुछ शक्तिया है तुम्हे उसका उपयोग करना भी सीखना होगा ...मैं उससे बात करके तुम्हे काल करने के लिए कहता हु तुम उसका प्रयोग करो और जल्दी से इसे सिख कर काजल को ढूंढ लो बाकि की चीजे हम देख लेंगे "

"ओके "

**********************

थोड़े देर ही बीते थे और मेरे पास एक अननोन नंबर से फोन आया ,वो वही इंस्ट्रक्टर था जिसके बारे में डॉ ने मुझे बताया था ..

उसने मुझे अपने सूक्ष्म शरीर को इस शरीर से बहार निकलने की विधि समझाई..

"तुम्हे बस सोना है अपने शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ देना है ,इतना ढीला की अगर तुम हाथो को उठाना भी चाहो तो न उठा सको इसे साइकोलॉजिकल पैरालिसिस कहते है ,फिर तुम्हे इमेजिनेशन करना होगा की तुम्हारा शरीर तुम्हरे शरीर से बाहर है ,या फिर तुम अपने पुरे शरीर की एनर्जी को जो की ध्यान के रूप में पुरे शरीर में फैली हुई है अफने सर तक लाओ और फिर इमेजिनेशन करो की तुम्हारे सर में एक रस्सी बंधी हुई है उसे खींचते हुए तुम्हारा शरीर बहार निकल रहा यही इसे रोप टेक्निक कहते है ,ये दो पॉपुलर विधिया है इसके अलावा और भी विधि है एक बार तुम्हे समझ आ जाये की शरीर से बहार कैसे निकलते है तो फिर तुम तुम्हे किसी विधि की जरूरत नहीं पड़ेगी ,तुम बस चाहोगे और काम हो जाएगा ..."

मुझे उसकी बातें तो समझ आ गई थी लेकिन एक सवाल अभी भी दिमाग में था ..

"सर ऐसे इसे सीखने में कितना समय लग जाता होगा "

"मैंने देखा है की जो व्यक्ति पुरे दिल से इसे सीखता है वो 6 महीने में शरीर से बहार निकलने में कामियाब हो जाता है ,लेकिन शरीर से निकल कर बहार कहि और जाने में सालो की प्रेक्टिस लग जाती है "

**************

जो काम करने में लोगो को सालो का समय लग जाता है वो मुझे अभी करना था ,जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी करना था ...

बाबा ,डॉ ,और काजल मेडम सभी ने मुझसे एक ही चीज कही थी की मुझे अपनी शक्तियों का अहसास नहीं है मुझे खुद पर भरोसा करना होगा ...

मैंने एक गहरी साँस भरी और अपने आप से कहा

"आई केन डु इट"

मैं अपनी लकड़ी को चाट कर बिस्तर में सो गया और अपने शरीर को ढीला कर दिया ,मुझे इसकी टेक्निक पहले ही बाबा ने सीखा दी थी ,उन्होंने मैडिटेशन के रूप में इसे सिखाया था तो मेरे लिए ये कठिन नहीं था ,थोड़े देर बाद मैंने अपने पुरे शरीर में फैले हुए एनर्जी को इकठ्ठा करना शुरू किया ,आज मुझे समझ में आया की बाबा ने ये सभी चीजे मुझे पहले ही सीखा दी थी जिसका मैं इतने दिनों से प्रेक्टिस करता था लेकिन मुझे नहीं पता था की इसका उपयोग किस प्रकार करना चाहिए ,कई दिनों से मैं इसकी प्रेक्टिस कर ही रहा था तो पूरी एनर्जी एक जगह एकत्रित करके मैं सर की और बढ़ा और वंहा एक रस्सी को बंधा हुआ महसूस करने लगा मैं उस रस्सी को पकड़ कर ऊपर की तरफ जाने की कोसिस करने लगा और धीरे धीरे अपने एक अलग ही शरीर को इस शरीर से बहार जाते हुए पाया ,मुझे बहुत ही तेज डर लगा ,मरने का डर जो लेकिन बाबा जी ने मुझे ध्यान सिखाते हुए एक बार कहा था की जब तुम्हे मरने का डर लगे तो समझ जाना की तुम अपनी मंजिल के बहुत ही करीब हो ,मैंने खुद को ऊपर खींचना जारी रखा और ये क्या मैंने खुद को बेहद ही हल्का पाया,मैं ऊपर उड़ रहा था वही मेरा शरीर नीचे सोया हुआ था ,मेरे माथे से एक चमकीली सी रेखा जो किसी रस्सी की तरह ही मेरे इस शरीर से जुडी हुई थी ,मैंने कुछ कुछ आउट ऑफ़ बॉडी एक्पीरियंस के बारे में पढ़ा था तो मुझे समझ आया की ये ही सेतु है जिससे मैं फिर से अपने शरीर में जा सकूंगा ...

इस अहसास के बाद मानो मेरे लिए पूरी दुनिया ही बदल सी गई ,मैं बेहद ही हल्का था और अब मुझे वो सोचना था जंहा मैं जाना चाहता था ,मैंने काजल का विचार किया और मेरा सूक्षम शरीर बहुत ही तेजी से उस ओर जाने लगा ......

 
अध्याय 28

मैं थोड़ी देर बाद काजल के पास था ,ये वही जगह थी जंहा मैं पिछली बार आया था लेकिन इस बार बात कुछ अलग थी ,पिछली बार मैं अनजाने में यंहा आया था लेकिन इस बार मैं जानबूझकर आया था,

उस तलघर या कहे गर्भगृह के अंदर अभी भी मसाले जल रही थी ,थोड़ी रोशनी अभी भी वंहा फैली हुई थी ,मैंने वंहा ना तो उस अघोरी जैसे इंसान को वंहा पाया ना ही चंदू मुझे वंहा दिखा ,लेकिन अभी भी रामु काका वैसे ही बंधे हुए थे और जिन्दा थे लेकिन बेहोश थे ,वही एक स्थान पर काजल मेडम भी वही बंधी हुई थी ...

मैंने सोचा की क्यों ना काजल मेडम से बात की जाए लेकिन फिर मेरे दिमाग में आया की कैसे उस अघोरी ने मुझे पहचान लिया था हो सकता है की ये कोई जाल हो .........

मुझे डॉ की बात याद आयी की वंहा का रास्ता पता करो ,मैं इतने तेजी से वंहा आया था की मुझे पता ही नहीं था की आखिर मैं कहा पर हु ...

मैंने खुद को ऊपर उठाना शुरू किया ,सच पूछो तो ये उड़ने वाला एक्पीरियंस मुझे बहुत ही मजेदार लग रहा था ....

मैं ऊपर उठते उठते उस गर्भगृह की दीवारों को चीरता हुआ बहार आया ये एक गुफा थी जो की जंगल के बीच थी मुझे समझ नहीं आ रहा था की आखिर मैं इस जगह के बारे में डॉ को कैसे बताऊंगा ...

मेरे थोड़े और ऊपर होने से मुझे शहर दिखाई देने लगा ,अब मुझे गूगल के सेटेलाइट व्यू की तरह नजारा दिख रहा था और यही आईडिया मेरे दिमाग को जला दिया ,यस मुझे गूगल मेप से इसका लोकेशन डॉ को भेजना चाहिए .........

मैं बहुत देर तक इधर उधर उड़ाते हुए उस जगह की स्पेशल चीजों को नोट करता रहा ताकि मैं गूगल मेप में उन जगहों को अच्छे से मार्क कर सकू ..

मेरा काम हो चूका था और मैं अब फिर से अपने शरीर में था लेकिन इस बार शरीर में आने से मुझे एक अजीब सा अहसास हुआ ,वंहा क्या अहसास था ..........

थोड़े ही देर बाद मैं जल्दी से उस लोकेशन को गूगल मेप में ढूंढने लगा और उसे मार्क करके डॉ को सेंड कर दिया ...

और तुरंत ही उन्हें फोन लगाया

"डॉ काजल मेडम और रामु काका दोनों हो जिन्दा है ,मैंने लोकेशन आपको सेंड कर दी है "

"ओके मैं अभी पुलिस कमिशनर से बात करता हु और पूरी फाॅर्स लगा कर उन्हें बचाता हु ,उन्होंने तुम्हे देखकर रामु की बलि को रोका है इसका मतलब है की वो भी सतर्क होंगे ,इसलिए तुम घर में ही रुको .."

डॉ की बात सुनकर मैं जैसे मचल गया ...

"नहीं डॉ साहब जब ये सब हो रहा होगा तो मैं घर में कैसे रह सकता हु ,मैं भी फाॅर्स के साथ जाऊंगा शायद मैं कोई हेल्प कर सकू "

"नहीं राज तुम बात की गहराई को नहीं समझ रहे हो ,हो सकता है की उन्होंने काजल और रामु को इसीलिए जिन्दा छोड़ दिया है ताकि वो तुम्हे अपने कब्जे में ले सके "

"लेकिन मुझे क्यों ???"

"यार तुम समझते क्यों नहीं ,अभी तक मामला पैसो का लग रहा तह लेकिन अगर इसमें अघोरी शामिल है तो जरूर बात कुछ और भी होगी ,और एक ही बात हो सकती है तुम्हारी लकड़ी को हथियाना "

"लेकिन डॉ साहब ..."

"लेकिन वेकिन कुछ भी नहीं ,तुम घर में ही रुकोगे बात ख़त्म ..."

डॉ में फोन रख दिया ,लेकिन मैं बेचैन हो चूका था ,मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की मैं क्या करू ,मुझसे रहा नहीं जा रहा था ...और मैं घर से निकल पड़ा ...

मैंने एक बाइक उठाई और गूगल मेप को देखता हुआ जंगलो के तरफ चल पड़ा,मैं छिपकर सब कुछ देखना चाहता था ताकि अगर जरूरत पड़े तो मैं बीच में आ कर कुछ मदद कर सकू ...

मैं थोड़ी ही दूर पंहुचा था की मुझे हेलीकाप्टर की आवाजे सुनाई देने लगी वो भी उसी दिशा में जा रही थी ,मैं समझ चूका था की डॉ ने पुलिस को फोन कर दिया है और वो काजल के रेस्क्यू के लिए निकल चुके है ...

मैंने गाड़ी तेज की लेकिन एक समय के बाद रोड ख़त्म हो चूका था ,मेरे पास एक ही रास्ता था वो ये था की मैं गाड़ी वही छोकर दौड़ लगा कर वंहा पहुंच जाओ ,जंगल घना था लेकिन मुझे जंगल में दौड़ने की आदत और अभ्यास हो चूका था ,मैंने दौड़ना शुरू किया ...

मुझे आधा घंटा लगा होगा वंहा पहुंचने में ,रेस्क्यू तीन गुफा के दरवाजे में पड़ा हुआ बड़ा सा पत्थर हटाने में व्यस्त थी ......

मैं झाड़ियों में छिपकर ये सब देख रहा था ,मुझे समझ नहीं आया की मैं क्या करू ,मैंने तुरत ही अपने लकड़ी को चूमा और फिर से अपने शरीर को छोड़कर गुफा की और चला गया,मैं अब गुफा के अंदर ही था ...

काजल मेडम तो वैसी ही नंगी बंधी हुई थी लेकिन मैं आश्चर्य से भर गया था की चंदू वंहा हाथ में तलवार लिए,नंगा खड़ा था .......

उसने मेरे देखते ही देखते रामु काका के गर्दन को धड़ से अलग कर दिया,गले की नशो से खून की धार फुट पड़ी ,काजल मेडम अब भी बेहोश थी ,चंदू ने एक कपाल में वो खून एकत्र किया ....

और पता नहीं कौन सा मंत्र पढ़ा ...देखते ही देखते उसका चेहरा लाल होने लगा था उसने खून के कुछ छींटे उस काले पत्थर से बनी मूर्ति के पैरो में छिड़के और वंहा काजल मेडम को वैसे ही छोड़कर जाने लगा ...

वो एक दूसरे रस्ते से गुफा के बहार चला गया था ...

वही बहार खड़े गार्ड पत्थर हटाने में कामियाब हो गए थे ,मुझे समझ नहीं आया की चंदू ने आखिर ये कर्मकांड पूरा क्यों नहीं किया ,नियमतह उसे काजल के साथ सेक्स करना था लेकिन वो बहार निकल गया था ......

मैंने चंदू का पीछा किया वो मेरे ही शरीर की तरफ बढ़ रहा था ,मैं अब भी शरीर से बहार था ,मैं तुरंत ही अपने शरीर में वापस आ गया लेकिन ये क्या ......

मेरे आंख खोलते ही अघोरी ने मेरे छाती पे अपना त्रिशूल घुसा दिया ,मैं कुछ समझ पाता इससे पहले ही उसने मेरे गर्दन में बंधी हुई जादुई लकड़ी को खींचकर मुझसे अलग कर दिया .....

मेरे मुँह से अभी शब्द भी नहीं फूटे थे और त्रिशूल फिर से मेरे सीने में धंस गया था

अघोरी मुझे देखते हुए जोरो से हसने लगा ..

"मुझे पता था की तू वापस यंहा जरूर आएगा उस लड़की को बचाने के लिए,इसलिए मैंने चंदू से उसके बाप की बलि ही दिलवाई क्योकि अब इस लकड़ी के मदद से मुझे और भी ज्यादा शक्तिया मिल जायेगी .."

वो हँसाने लगा ,डॉ सही थे ये मेरे लिए बिछाया गया एक जाल था जिसमे मैं फंस चूका था ...

थोड़े देर में ही चंदू वंहा आ पंहुचा था उसके हाथो में वो खून से भरा कपाल था ,

वो मुझे देखकर हँसाने लगा ..

"मादरचोद अब देख मैं तेरे परिवार वालो का क्या हाल करता हु इन शक्तियों से ,और एक बात और भी सुन ले मैं तेरा कोई भाई नहीं हु ,तेरा बाप मेरा पिता नहीं है ,मेरा बाप तेरे बाप की तरह चूतिया नहीं हो सकता जो आज तक मुझे अपना बेटा मान कर पाल रहा था ..."

तभी अघोरी ने उसे टोक दिया

"चंदू ये खून तुझे ताजा ताजा ही पीना है बकवास बाते करके देर मत कर "

और उसने मेरे जादुई लकड़ी को खप्पर में डाल दिया जिसमे पहले से कोयले के अंगारे मौजूद थे ,देखते ही देखते वो लकड़ी जल कर राख हो गई और अघोरी ने बड़ी सावधानी से वो राख एकत्रित करे उस खून में मिला दिया ..

"इसे पी शैतान तेरे अंदर आ जायेगा और उसके बाद तू स्त्री सम्भोग से उसे खुश कर ताकि तुझे वो अपनी शक्तिया दे दे ..."

चंदू ने अपने हाथ में रखे कपाल को अपने मुँह में लगाया ,लेकिन उससे पहले उसने मुस्कुराते हुए मुझे देखा ,मेरा खून बुरी तरह से बह रहा था मेरी आंखे धुंधली होते जा रही थी ,

"तू सोच रहा होगा की अब तक तो काजल उन पुलिस वालो के हाथ लग चुकी होगी फिर मैं किस्से सम्भोग करके शैतान को खुश करूँगा ...तो सुन मैं आज तेरी माँ और उस रंडी नेहा से शैतान का सम्भोग कराकर उसे खुश करूँगा "

वो एक शैतानी हंसी में हंसा लेकिन उसके वाक्य से मैं बुरी तरह से डर गया था ,मैंने उसे पकड़ने के लिए अपने हाथ हो आगे बढ़ाया लेकिन अघोरी ने मेरे हाथो में अपना त्रिशूल घुसा दिया ,मेरा शरीर आखरी बार फड़फड़ाया मैं बेहोश होने वाला था उससे पहले मैंने आंखे बंद की और खुद को अपने शरीर से बहार निकालने का प्रयत्न किया ,मेरे पास वो लकड़ी नहीं थी लेकिन मेरे पास मेरा अनुभव था वो अनुभव जो मैंने इतने दिनों में सीखा था ,मैं अपने शरीर से बहार हो चूका था,अघोरी मेरे सूक्षम शरीर को देख कर मुस्कुराया ..

"अच्छा है की तू मरने से पहले अपने शरीर से बहार आ गया अब तू उन्हें लुटाते हुए देखना ,लेकिन तब तक तेरा शरीर मर चूका होगा ,चंदू अब जल्दी कर इसका सूक्षम शरीर भी अपनी बर्बादी देखने को यंहा मौजूद है "

चंदू ने इधर उधर देखा लेकिन उसे कुछ भी नजर नहीं आया ,वो इस बात को सुनकर की मैं ये सब देखने को मौजूद हु बहुत ही ज्यादा खुश हो गया और तुरंत ही आधा खून पी गया ,अघोरी ने उसे तुरंत ही रोका

"पूरा नहीं आधा मेरे लिए भी रखना है ,तेरे सम्भोग के बाद शैतान का वीर्य इसमें इकठ्ठा करना है मुझे इस खून में वो मिल जाएगा तो फिर ये वो बन जायेगा जिसकी मुझे सालो से तलाश थी ..."

चंदू ने आधा खून अघोरी को दे दिया था ...

अघोरी ने उसे अपने पास रख लिया और चंदू का हाथ पकड़ कर उसे एक और ले जाने लगा ,मैंने देखा की हेलीकाफ्टर अब वापस उड़ रहे है ,वो लोग जा चुके थे ,लेकिन कुछ पुलिस वाले अब भी वंहा रुके थे जो शायद कातिल को ढूंढने में लगे हुए थे ,लेकिन इसका कोई अर्थ नहीं होने वाला था अघोरी और चंदू दूर जा चुके थे,चंदू के हाव भाव बदल रहे थे उसके ऊपर शैतान समां रहा था ,अघोरी उसे दूसरी गुफा में ले गया ...

"हे शैतान यंहा दो औरते बंधी है जिससे सम्भोग करके आप अपना वीर्य मुझे दीजिये "

चंदू के अंदर का शैतान मानो ख़ुशी से झूम गया हो वही मैं निसहाय बस ये सब होता हुआ देख रहा था ,चंदू और अघोरी दोनों ही अंदर गए साथ में मैं भी वंहा दो औरतो को एक दूसरे के बाजु में एक बिस्तर नुमा बड़े से पत्थर पर बंधा गया था ,उसे देखते ही चंदू की लार टपकने लगी थी ,वो दोनों ही औरते पूरी नंगी थी ..

लेकिन उसे देखकर मैं बेहद ही आश्चर्य में पड़ गया ...चंदू उस ओर ही बढ़ने लगा लेकिन वो चंदू नहीं बल्कि उसके अंदर का शैतान था ,अगर चंदू उसकी जगह होता तो वो कभी उनके ओर नहीं बढ़ता क्योकि वो शबीना और कान्ता मौसी थे ...

मैंने अघोरी को देखा उसने मुझे देखा ...

"मैं ताकत चंदू के लिए नहीं अपने लिए चाहता हु ,तेरी बहनो और माँ को लाना बहुत ही मुश्किल काम था लेकिन इन दोनों रंडियो को बस इतना कहना पड़ा की चंदू ने इन्हे बुलाया है ये दौड़ी चली आयी ,अब चंदू अपनी ही माँ को चोदेगा..."

वो हंसने लगा था ,

"मुझे माफ़ कर दे चंदू लेकिन मैं इस ताकत को पाने की कोशिस सालो से कर रहा हु ,और अब ये ताकत मेरी होगी ,"

अघोरी ने मेरी ओर देखा

"फिक्र मत कर थोड़ी देर में चंदू भी तुझे देख पाएगा क्योकि शैतान के सम्भोग के बाद शैतान उस शरीर को भी मार देता है जिसका आलंबन उसने लिया हो ,मतलब की सम्भोग के बाद शैतान चंदू को भी मार देगा "

वो फिर जोरो से हंस पड़ा था .......

मैं उस ओर देखने लगा ,

"बेटा चंदू ये क्या हो रहा है .."

चंदू को देखकर कान्ता बोल उठी ,लेकिन चंदू ने बिना कुछ बोले ही कान्ता के शरीर में अपनी जीभ फेर दी ,उसकी जीभ सामान्य से ज्यादा लम्बी थी ,और लार उसमे से चुह रहा था ,

"बेटा ये क्या कर रहा है नहीं बेटा "

कान्ता रोने लगी थी लेकिन चंदू किसी भूखे की कुत्ते की तरह उसे चांटे जा रहा था ,उसका लिंग अकड़ कर विशाल हो चूका था वो किसी बेलन की तरह मोटा था और उसकी नशे जैसे अभी फटने वाली हो,खून के प्रवाह से उसके लिंग की एक एक फूल चुकी थी ,वो गुर्राया ,उसका पूरा शरीर तन चूका था ,उसका शरीर ऐसे लग रहा था जैसे एक एक नश में खून उबलने को तैयार है ,उसकी भुलाये और पुरे शरीर की मांसपेशिया फड़कने लगी थी ,वो बहुत ही डरावना नजारा था ...

उसने दूसरे हाथ से पास ही बंधी शबीना के वक्षो को जोरो से दबाया वो उन्हें इतने जोरो से दबा रहा था की शबीना की चीख ही निकल गई ,

"चंदू ये क्या कर रहा है "

शबीना छटपटाने लगी लेकिन उसके हाथ उसके सर के पीछे बंधे थे वही उसके पैर खुले हुए थे ,वो उन्हें इधर उधर पटकने लगी ,लेकिन चंदू को कोई भी फर्क नहीं पड़ रहा था ,वो बुरी तरह से उसे मसले जा रहा था और अपने मुँह से कान्ता के वक्षो को मुँह में लेकर चूस रहा था कभी कभी वो उसे बेदर्दी से काट देता

"बेटा नहीं ...बेटा मैं हाथ जोड़ती हु रुक जा मैं तेरी माँ हु ,मैंने तुझे जन्म दिया है रुक जा बेटा "

कान्ता चिल्लाई लेकिन चंदू ने उसके वक्षो पर अपने दांतो को इतने जोरो से गड़ाया की कान्ता के होठो से एक चीख निकल गई ,उसे देखकर मेरा दिल भी द्रवित हो चूका था लेकिन अघोरी ये सब देखकर और भी खुश हो रहा था ..

चंदू ने बिना देर किये अपने लिंग को अपनी माँ की योनि में रख दिया

"नहीं बेटा चंदू नहीं ...तू मेरा बेटा है मैं तेरी माँ हु नहीं "

वो बोलती रही लेकिन उसकी बात सुनने वाला चंदू यंहा मौजूद नहीं था ..

चंदू ने एक जोर का धक्का लगाया और उसका विशाल लिंग उसकी माँ की योनि की दीवारों को चीरता हुआ सीधे अंदर घुस गया ..

"नहीं ....."

कान्ता की चीख से तो पत्थर भी दहल जाते

"माँ .."

चंदू ने कहा वो थोड़ा अलग हुआ,शायद कान्ता की आवाज ने चदु को वापस अपने शरीर पर काबू करने का मौका दे दिया था ..

"माँ ये .."

उसने कहा ही था की चंदू ने फिर से अपने कमर को जोर से धक्का दिया ..

"आह नहीं बेटा .."

कान्ता फिर से चिल्लाई

"माँ ये मैं नहीं हु ..मेरा शरीर "

"नहीं ..."

इस बार शबीना थी चंदू ने उसके वक्षो पर अपने नाख़ून गड़ा दिए थे ,चंदू शायद अपने शरीर में काबू पाने की कोशिस कर रहा था लेकिन शैतान के सामने उसकी क्या मजाल थी ..

"बेटा नहीं .."

चंदू के बुरी तरह से दिए गए धक्के के कारण कान्ता चीला उठी चंदू ने उसके कंधे में अपने दांतो को गड़ा दिया था ,कान्ता की हृदयविदारक चीख से मेरा दिल दहल गया था ,मैं अब अपने शरीर में वापस नहीं जा सकता था लेकिन मैं चंदू की मदद तो कर सकता हु ...

मेरे दिमाग में अचनक से ये बात आ गई ,शायद मैं चंदू के शरीर में घुस सकता हु

मैंने बिना देर किये उसमे घुसने का प्रयत्न किया और मैं उसमे समा भी गया था ,उस शरीर पर मैं काबू नहीं पा सकता था ,शैतान बेहद ही ताकतवर था वो बार बार मुझे और चंदू को हटा कर वापस काबू ले लेता ..

"मेरी मदद कर राज मेरी मदद कर "

चंदू को शायद ये पता चल चूका था की मैं उसकी मदद कर रहा हु ,हम दोनों ने मिलकर एक साथ कोशिस की और इस बार हमने फिर से काबू पा लिया

"माँ ...तू फिक्र मत कर ,"

"मौसी आप फिक्र मत करो "

"आह आह बेटा "

कान्ता को चंदू बुरी तरह से पेल रहा था और उसके मुँह से गिरता हुआ लार कान्ता के शरीर को भिगो रहा था ,हम दोनों कभी कभी शरीर में काबू पा लेते थे लेकिन हम बोलने के अलावा कुछ भी नहीं कर पा रहे थे ,वो भी थोड़ा थोड़ा ..

एक समय ऐसा आया की कान्ता के शरीर पर हर जगह काटने के निशान थे वो बेसुध हो चुकी थी ,चंदू ने उसे जोरो से चांटा मारा लेकिन वो हिल ही नहीं पाई ,

चंदू उसे वही छोड़कर शबीना के ऊपर आ गया ,

"बेटे मुझे बचा लो मैं समझ गयी हु इसे कोई बहुत प्रेत पकड़ लिया है ,और राज तू और चंदू इस शरीर में हो मुझे बचा लो मैं जिंदगी भर तुम्हारी गुलाम ...आह बचाओ "

शबीना बोल ही रही थी की चंदू ने अपना लिंग उसके अंदर घुसेड़ दिया था ,मुझे ऐसा लगने लगा जैसे मैं बुरी तरह से थक चूका हु ,मेरे पास अब सैतान के ऊपर काबू पाने की शक्ति नहीं रह गई ही वही हाल चंदू का भी था ,पुरे शरीर पर शैतान का ही राज हो गया था कभी कभी ताकत लगा कर चंदू वापस काबू पाता लेकिन उसकी कमर चलते रहती थी ,वो शबीना के शरीर को जोरो से कांट भी रहा था लेकिन उसके आँखों में आंसू आ रहे थे ...

मैंने शरीर छोड़ना ही बेहतर समझा मुझे समझ आ चूका था की हम मिलकर भी उससे नहीं जीत शायद अगर चंदू भी मेरी तरह किसी प्रयास से उस शरीर में आया होता तो बात अलग थी लेकिन यंहा बात अलग थी शरीर उसका था जिसमे दो रूहो ने प्रवेश कर लिया था ...

जब शबीना भी चूर हो गई थी चंदू ने उसे जोरो से मरना शुरू कर दिया जैसे जो भड़क गया हो ,वो गुर्राने लगा ,उसका शरीर फड़फड़ा रहा था ,मैं बहार निकल चूका था

"हे शैतान अपना वीर्य इस स्त्री के अंदर छोडो ,माँ की योनि में बेटे का वीर्य होगा तो शैतानियत और भी बढ़ जायेगी "

शैतान शबीना को छोड़ कान्ता की ओर बढ़ा ...

"नहीं ऐसा मत करो "

चंदू चिल्लाया शायद उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी क्योकि उसका शरीर थोड़े देर के लिए रुक गया था लेकिन बस थोड़े देर के लिए ,

कान्ता के आँखों से आंसू टपक रहा था वही चंदू की आँखों से भी आंसू टपक रहा था ,अब कान्ता कोई भी हरकत नहीं कर रही थी वो एक लाश की तरह पड़ी हुई थी ,और चंदू उसे बुरी तरह से नोचे जा रहा था ,और एक बार वो जोर से गुर्राया उसका पूरा शरीर जैसे तन कर फटने वाला हो,उसने अपनी माँ के होनी में गाढ़े गाढ़े वीर्य की पूरी बरसात कर दी थी ,और फिर इसी बरसात में उसका शरीर फटने लगा चमड़ी तन कर फटने लगी और नश भी टूटने लगे उसका पूरा शरीर ही खून से लथपथ हो चूका था के एक कर उसकी हड्डियों के टूटने की आवाज आने लगी ,चंदू दर्द से चीख रहा था ,और शैतान उसका शरीर छोड़ रहा था लेकिन उसके शरीर छोड़ने पर चंदू का शरीर बुरी तरह से टूट रहा था उसके चीथड़े चीथड़े उड़ने लगे ,एक समय आया जब मैंने देखा की पूरा शरीर मांस के लोथड़े के अलावा कुछ भी नहीं रह गया था ,और चंदू की रूह बहार आ गई शैतान अभी भी उसके शरीर से बहार आ रहा था ,चंदू की रूह उड़ाते हुए दूर चली गई जैसे उसे होश ही नहीं हो ,वही उसका शरीर किसी विस्फोट की तरह फुट गया और चारो तरफ बाब मांस के लोथड़े फ़ैल गए ...

कान्ता के योनि से भी खून और वीर्य एक साथ बह रहा था ...

अघोरी जल्दी से वंहा पहुंचा और अपने हाथो में पकड़ी खोपड़ी में उस वीर्य और खून को इकठ्ठा करने लगा ,उसने एक लकड़ी से उसे मिलाया और एक ही साँस में उसे पी गया ..

वो पागलो की तरह हंस रहा था ,मनो उसे कोई बहुत ही बड़ा खजाना मिल गया हो ..

वो नाचता हुआ मुझे देखने लगा

"मुझे वो मिल गया जिसकी मुझे तलाश थी और अब तेरी किस्मत में तो बस भटकना ही लिखा है जब तक तेरी वक्तविक जिंदगी की उम्र पूरी नहीं हो जाती या कोई तुझे मुक्ति नहीं दे देता ,तू बस भूतो की तरह भटकता रह "

इतना बोलकर वो वंहा से निकल गया,मैं अपने शरीर के पास वापस चला गया खून पूरी तरह से बह चूका था ,लेकिन मेरा शरीर अब भी जिन्दा था लेकिन अगर थोड़े देर में मुझे उपचार नहीं मिलता तो शायद मेरा शरीर वही पड़े पड़े मर जाता ,पुलिस वाले पास ही थे लेकिन अपने काम में व्यस्त थे उन्हें कोई खबर नहीं थी की यंहा के लाश भी पड़ी है या कोई लाश बनने वाला है ,मेरा शरीर इस काबिल नहीं रह गया था की शरीर में जाने के बाद भी मैं चिल्ला पाता शायद शरीर में जाने के बढ़ मैं बेहोश ही रहता ,और शायद मैं बहार निकलना भी भूल जाता हो सकता था क्योकि चंदू की जब मौत हुई तो उसके रूह को इसकी खबर तक नहीं थी ...

तभी मेरे दिमाग में एक नाम आया जो शायद मुझे देख और सुन सकता था ..............

 
अध्याय 29

मेरा शरीर निचे पड़ा गया था और मैं बिलकुल मजबूर सा खुद को महसूस कर रहा था ,मेरे दिमाग में एक नाम आया और मैं तुरंत ही उसके पास पहुंच गया .......

मैं अभी अपने घर में था अपने कमरे में और टॉमी मुझे देखते ही भूका ,तो मेरा शक सही था ,टॉमी मुझे देख सकता था ,मैंने टॉमी से बात करने की कोशिस की असल में अब मैं और भी स्पस्ट बात कर पा रहा था ,टॉमी मेरी बातो को समझ भी रहा था ,मैंने उसे अपने साथ आने को कहा और उसे अपने शरीर के पास तक ले आया लेकिन .

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी पुलिस वाले जा चुके थे ,मेरे पास समय बहुत ही कम था तभी मेरे मन में एक बात आ गई ......

मैं टॉमी को लेकर वंहा पंहुचा जंहा अघोरी ने कांता और शबीना को मारा था वो दोनों अब भी जिन्दा थे लेकिन बहुत ही बुरी हालत में ..

मुझे तो खोपड़ी दिखाई दी जिसे पीकर अघोरी वंहा से चला गया था .......

"टॉमी उस खोपड़ी में कुछ है ,उसे हिफाजत से ले जाकर मेरे मुँह में डाल देना ,"

उस खोपड़ी में कुछ कुछ द्रव्य अब भी था जो की रामु(दी गई बलि ) के खून से,जादुई लकड़ी के राख से, शैतान के वीर्य से और कुछ खास शैतानी कर्मकांडो के द्वारा बनाया गया था ...

चाहे वो कितना भी घिनौना क्यों ना हो लेकिन अभी वो मेरे लिए अमृत हो सकता था मुझे नहीं पता था की उससे मेरे शरीर पर क्या असर होने वाला है लेकिन फिर भी मैंने ये दावा खेल दिया ...

टॉमी मेरी बात को समझता हुआ तुरंत एक्शन में आ गया और खोपड़ी को अपने दांतो से उठा कर मेरे शरीर के पास ले आया और उस द्रव्य को मेरे मुँह में डालने ही वाला था की मैंने अपने शरीर में प्रवेश कर लिया ..

द्रव्य जैसे ही मेरे मुँह में गया मेरे अंदर कुछ बदलने लगा ,मेरे शरीर के हर एक तिनके में जैसे कोई ऊर्जा उठने लगी ,पेट और साइन में गहरे घाव अभी भी थे लेकिन दर्द बहुत ही कम हो गया था ,मुझे तुरंत ही मेडिकल चिकित्सा की जरूरत थी ,मेरे शरीर में इतनी ताकत आ गई थी की मैंने तुरंत ही डॉ को कॉल लगाया और अपना लोकेशन बताया ,मैं अब भी चलने फिरने के हालत में नहीं था लेकिन मेरे अंदर कुछ तो हो रहा था ,कुछ ही देर में मदद भी पहुंच गई ,और मैंने उनके साथ टॉमी को भेजकर कांता और शबीना के लिए भी मदद जुटा दी ......

*******

कुछ दिनों बाद

मैं बिस्तर में पड़ा हुआ था सभी मुझसे मिलने आते जाते रहते थे ,डॉ ने मेरे कहने पर चंदू के DNA का टेस्ट करवाया ,क्योकि उसने मुझसे कहा था की वो मेरे पिता का खून नहीं है ,मैं देखना चाहता था की आखिर वो किसका खून है और ना ही वो मेरे पिता का खून था ना ही रामु का ,ना ही अब्दुल का ...

अब वो किसका बेटा था ये तो कांता मौसी ही जानती थी ,जो की कोमा की हालत में थी ,शबीना की हालत में थोड़ी सुधार आ रहा था लेकिन उसे भी नहीं पता था की आखिर चंदू किसका बेटा है ,असल में उसे तो यही लगता था की चंदू मेरे पिता का ही खून है ........

खैर मतलब साफ थी की जायजाद का अब कोई लफड़ा ही नहीं होने वाला है ,

लेकिन एक सवाल अब भी मेरे दिमाग में घूम रही थी की आखिर चंदू घर से क्यों गायब हो गया,और उसे क्यों कोई मेरे खिलाफ बहका रहा था,क्या अघोरी उसे इस्तमाल कर रहा था या फिर इसके पीछे कोई और था ,अब अघोरी अगर उसे इस्तमाल कर रहा था तो एक सवाल ये था की उसके पास इतने पैसे कहा से आये की वो इतने लोगो को मेरे पीछे लगा कर रखता ,नहीं ये सिर्फ अघोरी का काम नहीं था ,इन सबको जानने के लिए मुझे एक बार काजल से बात करनी थी लेकिन डॉ ने मुझे इस बात से मना कर दिया ,वो चाहते थे की मैं अपने दिमाग में ज्यादा जोर ना डालू जब मैं ठीक हो जाऊगा तो वो मुझे काजल से मिलवा देंगे ...

सब कुछ ठीक ही चल रहा था बस एक चीज के ,मेरे अंदर आ रहे परिवर्तन ,मेरे अंदर एक अजीब सी ऊर्जा मुझे महसूस होती जो की जादुई लकड़ी के कारण मुझमे आती थी लेकिन उसके साथ एक अजीब सी मानसिकता मुझे घेरे रहती थी ,मुझे ऐसा कभी नहीं लगा जैसे अब लगता था ,दुनिया को देखने का नजरिया परिवर्तित हो रहा था ,मेरे दिमाग में अजीबो गरीब ख्याल आते जिन्हे मैं कभी सपने में भी सोच नहीं सकता था .....

वो सभी मुझे शैतानी सी लगते थे ,शायद शैतानी ताकतों का भी असर मेरे ऊपर हुआ था ,ऐसे भी मैं शैतानी ताकत के कारण ही तो जिन्दा था ......

ना जाने आगे ये दो विपरीत उर्जाये क्या क्या खेल दिखने वाली थी ,मैं बहुत ही खतरनाक ताकत को ले कर चल रहा था और जैसे जैसे मेरा शरीर ठीक होता वैसे वैसे मैं खुद को और भी ताकतवर महसूस करता था ,सबसे ज्यादा सर मुझे तब लगा जब मैंने अपनी माँ के बदन को देखकर हवस से भर गया ,ऐसा मेरे साथ कभी नहीं हुआ था ,लेकिन अब ना जाने ये शैतानी ताकते मुझसे क्या क्या करवाने वाली थी .......???

 
अध्याय 30

मुझे वार्ड में सिफ्ट कर दिया गया था और मैं अभी डॉ चूतिया के साथ बैठा हुआ था ,साथ ही काजल मेडम भी थी,

आज वो कमाल की लग रही थी ,गोरे गोरे हाथो में लाल लाल चुडिया थी ,एक सिंपल सलवार कमीज में मेरे सामने बैठी थी ,जो की उनके शरीर से पूरी तरह से कसा हुआ था,एक एक उभार साफ साफ दिख रहा था,और दोनों वक्षो के बिच की जगह कुछ ज्यादा ही आकर्षक लग रहे थे ,माथे पर लाल गढ़ा सिंदूर और होठो में हलकी लाली ,वाह क्या कहने थे ,

एक तो जबसे मैंने उस अघोरी के खोपड़ी में रखा हुआ द्रव्य पिया था तब से मेरे अंदर जैसे शैतान नाचने लगा था,औरतो को देखकर साला लिंग अकड़ सा जाता ,मुझे बस इन्तजार था छुट्टी होने का मैं निशा के ऊपर पूरी हवस निकालना चाहता था लेकिन सालो ने अभी भी वार्ड में ही रखा था ,शायद यंहा 3-4 दिन और लगने थे ..

"ऐसे क्या देख रहे हो मुझे"

"क्या बताऊ मेडम जी क्या बीत रही है मेरे अंदर ,ऐसे लगता है की ......."

मैं रुक गया सामने डॉ भी बैठे थे

"अच्छा क्या बीत रही है "

काजल मेडम ने अपनी ही अदा में कहा ,मैं थोड़े देर के लिए सोच में पड़ गया था ...

"आप जो गयी तो ऐसा लगा जैसे किसी ने सीधे पीठ में खंजर मार दिया हो "

इस बार काजल का चेहरा थोड उतर गया ..

"मैं क्या करती राज मैं मजबूर थी .."

"वही तो मैं जानना चाहता था की आखिर वो कौन था जिसने आपको मजबूर किया था "

काजल ने डॉ को देखा

"काजल मुझे सब बता चुकी है राज फिर भी काजल एक बार राज को फिर से बता दो "

इस बार डॉ ने कहा था ..

काजल ने एक गहरी साँस भरी

"मुझे नहीं पता की वो कौन था ,मेरा काम जासूसी का है ,साथ ही मैं पैसे के लिए कुछ मिशन भी करती हु जो की लीगल न हो ,ये काम सरकारी और गैर सरकारी भी हो सकता है ,ये बात उसे पता थी और उसने मुझसे एक काम के लिए संपर्क किया ,काम सिंपल था मुझे लगा की कुछ दिन में हो जाएगा और मैंने भी हां कह दिया ,उसने मुझे यंहा बुलाया और टीचर का जॉब करने के लिए कहा ,साथ ही मेरा काम तुमपर नजर रखना और तुम्हे अपने जाल में फ़साना था ,मैं अपने काम में लग गई और सब कुछ सही जा रहा था लेकिन फिर उसने मुझे वकील के पास भेजा बात करने के लिए ,दूसरे दिन ही वकील का खून हो गया ,मैं शॉक थी क्योकि ये सब उसने ही करवाया था ,उसने मुझसे तुम्हारे और करीब जाने और तुम्हे मार डालने की बात कही,लेकिन ये मेरे वसूलो के खिलाफ था तो मैंने मना कर दिया तब तक मेरा परिवार उसके कब्ज़े में था ,मैं डर गई थी और मजबूर थी लेकिन फिर मुझे तुम्हारे ताकत का पता चला मुझे लगा की मुझे आईडिया मिल गया है ,मैंने तुम्हे डॉ और डागा के बारे में बता दिया ताकि तुम उन्हें ढूंढने की कोशिस करो ,मुझे यकीन था की जब तुम डॉ से मिलोगे तो वो तुम्हारी मदद करेंगे और ये भी समझ जायेंगे की मैं ये सब किसी मज़बूरी में कर रही हु .."

काजल की बातो से और भी कई सवाल खड़े हो चुके थे ..

"तो फिर वो अघोरी ??"

मेरे मुँह से निकल गया

"मुझे नहीं पता की वो चंदू के संपर्क में कैसे आया ,वो इंसान कोई दूसरा ही है जो ये सब करवा रहा था,असल में चंदू को भी उसके बारे में नहीं पता की वो कौन था ,अघोरी से चंदू को पावर चाहिए थी वो उस अंजान आदमी के पैतरो से तंग आ गया था ..."

"मलतब "

"मलतब की पहले तो उसने चंदू को बहार आने से रोक दिया ,और ऐसे रखा जैसे चंदू उसके कैद में हो ,फिर उसने वसीयत के ऊपर कोई भी दवा पेश ना करने का फैसला किया क्योकि उसे पता था की डीएनए टेस्ट में चंदू फ़ैल हो जाएगा "

"लेकिन आखिर चंदू का पिता है कौन ??"

काजल ने सर ना में घुमाया

"मुझे नहीं पता ,यंहा तक की चंदू को भी नहीं पता था ,ये तो सिर्फ एक ही औरत बता सकती है ,उसकी माँ कांता"

"हुम्म्म तो अब क्या "

मैंने डॉ की ओर देखा

"कुछ नहीं जिसने भी ये सब करवाया था ना हमे उसके बारे में पता है ना ही उसके कारण के बारे में ,तो सब कुछ भूलकर तुम अपनी जिंदगी जिओ ,अगर उसे कुछ करना होगा तो वो करेगा ,तब ही उसे पकड़ा या उसके बारे में जाना जा सकता है ,और कोई चारा नहीं है "

"ठीक है तुम आराम करो हम चलते है .."

डॉ बहार जाने लगा लेकिन काजल वही रुक गई थी ..

"डॉ मैं राज से कुछ अकेले में बात करना चाहती हु "

''ओके" डॉ बहार चला गया

काजल के होठो में एक मुस्कान आ गई थी

"तो .." उसने मुस्कुरा कर कहा

हाय ऐसा लग रहा था की अभी इसे बिस्तर में पटक कर

"आप गजब की लग रही हो "

वो खिलखिलाई

"और कुछ नहीं पूछना "

"क्या पुछु "

"तुमने मेरी जान बचाई है राज "

"तो बदले में मुझे कुछ मिलने वाला है क्या : :

वो मुस्कुराई

"अच्छा क्या चाहिए ??"

मुझे चाहिए था

"कैसे बताऊ की क्या चाहिए ,बस मन कर रहा है की आपको पकड़ कर यही बिस्तर में ."

मैं इतना बोल कर रुक गया ,उनकी मुस्कुराहट थोड़ी फीकी पड़ गयी

"मैं जानती हु,डॉ ने मुझे बताया की तुम कैसे बच गए ,तुमने वो पि लिया है जो उस अघोरी ने अपने लिए बनाया था ,उसका वो द्रव्य पहले उतना शक्तिशाली नहीं होने वाला था इसलिए उसे चंदू पिने वाला था लेकिन फिर जब उन्हें पता चला की तुम मुझे ढूंढते हुए वंहा आये थे और अघोरी ने तुम्हे देख लिया तो उसने तुम्हारे जादू की ताकत के बारे में पता करवाया और उसे ना जाने कैसे उस लकड़ी के बारे में पता चल गया ,वो पहुंचा हुआ अघोरी था और इसलिए उसने तुम्हारे लकड़ी को भी अपने उस द्रव्य में मिलाने का प्लान बनाया ,मुझे कुछ कुछ खबर है की तुम्हारे अंदर क्या हो रहा है ,तुममे 30% अच्छी शक्ति है उस जादुई लकड़ी के कारण लेकिन 70% शैतानी शक्ति ,और उस लकड़ी के कारण शैतानी शक्ति और भी ज्यादा पावरफुल हो गई है ,तुम एक जीते जागते शैतान हो राज ,बस अब तुम्हे अपनी अच्छाई को बचा कर रखना होगा वरना तुम्हे शैतान बनने में जरा भी देर नहीं लगेगी ..."

कहते कहते काजल की आँखों में आंसू आ गए थे ,और मेरा दिमाग भी घूम गया था ,मैंने जितना सोचा था ये तो उससे भी ज्यादा था ,लेकिन आखिर मैं इस पावर को कैसे कंट्रोल करता ..

"तुम फ़िक्र मत करो तुम्हारे अंदर की अच्छाई आज भी जिन्दा है ,और तुम उस जादुई लकड़ी के साथ रह चुके हो तो मेरे ख्याल से तुम थोड़े से प्रयाश से इस पावर को कंट्रोल कर लोगे , लेकिन मुझे लगता है की अब लड़कियों की खैर नहीं ..."

वो मुस्कुराते हुए वंहा से निकल गई ,मैं बस उनके कहे शब्दों के बारे में सोचता रहा ......

लड़कियों की खैर नहीं ??? आखिर क्यों ???

 
अध्याय 31

मैं हॉस्पिटल से छूटकर वापस घर आ चूका था ,सभी मेरी बहुत ही केयर कर रहे थे जो मुझे बहुत ही अच्छा भी लग रहा था,कांता अभी भी कोमा में थी ,वही शबीना की हालत थोड़ी ठीक थी वो भी हॉस्पिटल से घर आ चुकी थी ..

पुरे घर में अजीब सा माहौल हो गया था ,सभी को पता था की क्या हुआ है ,सभी को ये पता था की कांता और शबीना की ये हालत चंदू ने की है ,वही ये भी सभी जानते थे की चंदू मुझे भी मारना चाहता था ,लेकिन किसी को ये नहीं पता था की मैं कैसे बचा ...

कुछ कहानिया बनाई गयी थी जो दुनिया को सुनाई जा सके जिसमे अघोरी था ,एक लड़की थी (काजल) मैं था और चंदू था ,कुछ छिपाया गया था कुछ एक्स्ट्रा डाल कर बताया गया था ......

आज जब मैं अपने कमरे में आया तो मेरे साथ साथ ही निकिता ,नेहा और निशा भी आये ,

मेरा मन सभी को देख देख कर खुश हो रहा था ,वही माँ और पिता जी निचे बैठे हुए थे ..

"तू आराम कर भाई हम शाम कोई मिलते है "

निकिता दीदी ने कहा और नेहा के साथ बहार जाने लगी ,निशा अब भी वही रुकी हुई थी ,वो सभी की उपस्थिति के कारण ज्यादा बात भी नहीं कर रही थी ..

"अरे तू क्यों रुक गई भाई को आराम करने दे "

निकिता दीदी ने कहा तो निशा का मुँह ही छोटा हो गया

"अरे इसे रहने दो न दीदी इतने दिनों बाद आया हु थोड़ी बात करूँगा "

मैंने कहा

"अरे ये बकबक करेगी तू अभी आराम कर "

निकिता दीदी ने थोड़ा फाॅर्स किया तभी नेहा बोल उठी

"रहने दो न दीदी निशा राज की जरूरत है .."

उन्होंने ऐसा कह कर मुझे आँख मर दी मैं समझ गया था की वो क्या कहना चाहती थी

"वाट?? "

निकिता दीदी को कुछ समझ नहीं आया था

"अरे कुछ नहीं अब चलो "नेहा उनका हाथ पकड़कर कमरे से बहार चली गई थी

कमरे में थोड़ी देर तक सन्नाटा ही रहा

"ऐसे क्या देख रही है ?" निशा मुझे ही देख रही थी ..

"बस यही की आप इतने दिनों से मेरे साथ नहीं थे "

मेरे चेहरे में एक मुस्कान आ गई

"तू नहीं समझ सकती की मैंने तुझे कितना मिस किया है "

वो कुछ कहती उससे पहले ही मैंने इशारा अपने पेण्ट की ओर किया ,जिसमे मेरा लिंग पूरी ताकत से खड़ा हुआ था ,निशा का मुँह ही खुल गया था ,

"आप अभी तो हॉस्पिटल से आये हो और इसलिए मुझे मिस कर रहे थे जाओ मैं आपसे बात नहीं करुँगी "

वो गुस्से में उठ खड़ी हुई और मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी गोद में बिठा लिया

"अरे मेरी जान नाराज क्यों हो रही हो ,सच में तुझे बहुत मिस किया मैंने ,तू मुझसे मिलने तो आती थी लेकिन कुछ बोलती नहीं थी "

"तो क्या बोलती आप घायल थे आपको देख कर रोना आता था मुझे "

उसकी बातो में वही मासूमियत थी जो हमेशा हुआ करती थी

मैंने उसे अपने से और जोरो से कस लिया ..

“मेरी जान इतनी प्यारी क्यो है तू “

वो हल्के से शरमाई साथ ही थोड़ा से मुस्कुराई भी ,वो कुछ भ ना बोली

इधर मेरे पेंट में मेरा लिंग मुझे सामान्य से ज्यादा ही परेशान कर रहा था ,इतने दिन हो गए थे मुझे एक चुद की सख्त जरूरत थी लेकिन निशा का मेरे लिए ये प्यार भी ऐसा था की मैं इसकी अनदेखी नही कर सकता था ,एक तरफ मेरा लिंग चिल्ला चिल्ला कर कह रहा था की साले जल्दी से चोद से अपनी बहन को ,देख इतनी प्यारी है चोदने में मजा आएगा इसे ,इसकी नरम नरम प्यारी कोमल सी चुद ...वाह ,पानी से भरी हुई,...

ये सब सोचकर मेरा लिंग और भी ज्यादा फड़कता था ,वही दूसरी ओर मेरा दिल था ,जो चीख रहा था

क्या सोच रहा है साले,इसे प्यार कर ,इतनी प्यारी है तेरी बहन ,तुझसे कितना प्यार करती है ,और तू इसे चोदने की सोच रहा है ,इसे आराम से सहला इसे प्यार दे,इससे बात कर …

इस तरह से दिल और लिंग में एक द्वंद शुरू हो गया था

लिंग :- सके तू क्या समझा रहा है मांस के लोथड़े ,इस कोमल कली में जब मैं जाऊंगा तो सोच इसकी चुद कैसे फैल जाएगी ,गुलाबी गुलाबी चुद होगी इसकी

दिल :- मैं मांस का लोथड़ा हु तो तू क्या है ,तुझे बस अपनी पड़ी है और इसकी तो सोच ,इतनी कोमल है बेचारी ,इसके गालो को सहला कितना शुकुन मिलेगा तुझे ,इसपर अपना प्यार बरसा ..

लिंग :- मा चुदाने गया प्यार ,चोदने में ही सुख है दोस्त

दिल :- प्रेम से बढ़कर कुछ भी नही

लिंग :- चोद

दिल :- प्यार कर

लिंग :- अबे चोद चूतिये जल्दी मैं फटा जा रहा हु

दिल :- प्यार कर अहसासो से बढ़कर कुछ भी नही

लिंग :- मा चुदाये अहसास चोद इसे

दिल :-नही प्रेम ही सब कुछ है

लिंग :-चोद

“अरे चुप करो यार तुम दोनो “मैं भड़क गया

वही निशा मेरे इस रवैये से घबरा गई

“क्या हुआ भइया “

मुझे होश आया

“कुछ नही मेरी जान ..”

मैंने एक गहरी सांस ली और मन में ही कहा

“मैं इसे चोदूगा लेकिन प्यार से समझे तुम दोनो अब चुप रहो “

निशा मुझे अजीब निगाहों से देख रही थी

“आपको आराम करना चाहिए भइया मैं चलती हु .लगता है आप अभी भी बहुत ही स्ट्रेस में हो “

वो उठाने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़कर खिंचा और उसे सीधा अपने बिस्तर में लिटा दिया ..

उसके कोमल कोमल गाल फड़क रहे थे ,होठ जैसे किसी मादक रस के प्याले हो वो भरे हुए थे और मुझे आमंत्रित कर रहे थे..

मैंने उसके होठो को अपने होठो से मिला दिया

मैं उसके गुलाबी होठो को चूमने लगा ,उसके कोमल स्तनों पर मेरे हाथ पहुच गए थे,मैं उसे आहिस्ते से मसलने लगा था

वो आहे भरने लगी थी ,हमारे होठ मिले और हम एक दूसरे के रस का स्वाद लेने में मस्त हो गए ..

धीरे धीरे हमारे दुनिया हमारे लिए जैसे अनजान हो गई थी ,हम एक दूसरे में खोने लगे थे ……

कुछ देर के लिए मैं निशा का मासूम चहरा देखने लगा ,वो सच में बहुत ही प्यारी लग रही थी ,उसपर उस कसा हुआ जिस्म ..

“क्या हुआ भइया क्या देख रहे हो “

“देख रहा हु मेरी सोना कितनी प्यारी है “

उसने मुझे बहुत ही प्यार से देखा और मेरे होठो को फिर से चूमने लगी ,

अब तक मेरे अंदर का हवस थोड़ा शांत हो चुका था ,उसे भी समझ आ गया था की मैं सिर्फ शैतान नही हु ,मेरे अंदर इंसानियत और अहसासों की अहमियत आज भी जिंदा है ….

मैं पूरे ही मनोयोग से उसके होठो को चूस रहा था,और उसके वक्षो को हल्के हल्के सहला रहा था …

“आह भइया मैं कबसे तड़फ रही थी आपके लिए “

“मैं भी मेरी रानी ..”

मैंने उसके टीशर्ट को निकाल दिया और उसके वक्षो को अपने मुह में डाल कर चूसने लगा ..

वो मेरे बालो पर अपने हाथो को जकड़ रही थी ..

और मुझे अपनी ओर खीच रही थी ,मेरे हाथ नीचे जाकर उसके पेंट को उतारने लगे ,मेरे भी कपड़े कब जिस्म से अलग हो गए थे मुझे इसका कोई एतबार नही था..

मैं नीचे सरका मेरे सामने मेरी प्यारी बहन की प्यारी सी योनि थी ,

वो बिल्कुल ही साफ सुथरी दिखाई दे रही थी ,गुलाबी योनि के पास जाते ही उसकी खुसबू मेरे नथुनों में भरने लगी थी ,मैंने अपने जीभ से एक बार उसे चाट लिया

“आह भइया “

मेरी प्यारी बहन की मादक आवाज मेरे कानो में पड़ी ,वो अंगड़ाई लेते हुए अपने कूल्हों को मेरे मुह से सटाने लगी थी ,मैं भी इत्मीनान से अपने जीभ से उसके योनि को सहला रहा था,मुझे कोई भी जल्दी नही थी

निशा की चिकनी योनि अब गीली भी थी मैंने अपने लिंग को उसके योनि से सहलाया ,वो चुहकी

“आह आओ ना देर क्यो करते हो “

उसके आवाज में एक गजब की मदहोशी थी ..

मैंने बिल्कुल उसके योनि के मुहाने पर अपने लिंग को टिकाया और उसके गीलेपन से गीला मेरा लिंग अपनी बहन की प्यारी सी योनि में सरकता चला गया …..

मैं हल्के हल्के धक्के मार रहा था ,वो भी हल्के हल्के से आहे भर रही थी ….

हम दोनो ही पूरी तरह से मस्त हो चुके थे,हमारे पोजिशन बदलते जाते थे और हमे पता भी नही लगता

मैं कभी उसे पलट कर उसके पीछे हो जाता था ..

तो कभी वो मेरे ऊपर ….

आखरी में वो तूफान शांत हुआ जब निशा जोरो से झड़ गई और साथ ही मैंने भी अपना वीर्य उसके योनि में छोड़ दिया ….

हम दोनो ही निढाल होकर पड़े हुए थे ,

लेकिन इस प्रेम में हमने दरवाजा ही खुला छोड़ दिया था और दो आंखे हमे ये सब करते हुए देख रही थी ……..

 
अध्याय 32

हम अपने प्यार में मस्त थे वही दो आंखे हमें घूरे जा रही थी ,जब हवस का तूफ़ान शांत हुआ तो मैंने कमरे की और देखा ,वो आंखे लाल थी और गुस्से में लग रही थी ,वो मुझे देखते ही तेजी से बाहर की और चले गयी ……..

मैं तुरत ही उठा और उसके पीछे चले गया

"दीदी सुनो तो "

वो निकिता दीदी थी

"मुझे कुछ भी नहीं सुनना मैं तो सोच भी नहीं सकती थी की ये सब छी ………”

वो आगे जाने लगी ,और ऐसे कॉम्प्लिकेटेड सिचुएशन में भी मेरा ध्यान उनके टाइट सलवार में कसे हुए चूतड़ों पर चला गया ,वो किसी मटके की भांति लग रहे थे और बड़े ही मस्ती में झूल से रहे थे ,दीदी अपने कमरे में गई और दरवाजा जोर से बंद होने की आवाज आई…

वही मेरा लिंग जो की अभी अभी एक यौवन को भोग चुका था वो फिर से तन कर सलामी देने लगा था ,

जब मैंने उसे अपने हाथो से मसाला तो मुझे ध्यान आया की मैं तो नंगा ही घूम रहा हु.

मुझे खुद पर विस्वाश नही हुआ लेकिन फिर मेरे दिमाग में एक बात आयी..

गो विथ वाइंड ...मतलब की हवा के साथ चलो ,जीवन अगर इधर ही ले जा रहा है तो उसके साथ ही बहो और मुझे भी अब अपने दिमाग में चल रहे द्वंद को भूलकर अपनी शैतानी शक्तियों के साथ ही चलना चाहिए ...मेरे अंदर दो दो शक्तियां थी ..

और दोनो ही बड़ी ही ताकतवर थी तो मैं उनसे क्यो लडू जैसा वो मुझे चलाना चाहते है मुझे वैसे ही बहना चाहिए …

मेरा दिमाग क्लियर हो चुका था ऐसा लगा जैसे कोई बड़ा बोझ सर से उतर गया हो …

मैं तुरंत दीदी के कमरे के सामने खड़ा हो गया और दरवाजे को पीटा…

“चले जाओ यंहा से ..”

अंदर से रोने की आवाज आयी

“दीदी एक बात प्लीज् मैं समझा सकता हु “

थोड़ी देर तक दरवाजा नही खुला

“अगर आप दरवाजा नही खोलोगी तो मैं यही खड़ा रहूंगा रात भर “

थोड़े देर बाद दरवाजा खुल गया और मैं जल्दी से अंदर आया ,उन्होंने दरवाजा लगा लिया ,

“छि तुझे इतनी भी शर्म नही है की तू नंगा ही यंहा चला आया “

उन्होंने एक बार मुझे घूर कर देखा और तुरत ही अपनी आंखे मुझसे हटा ली..”

“दीदी “

मैं उनके नजदीक आकर उनके कमर को पकड़ चुका था

“मुझे माफ कर दो “

उन्होंने मुझे अपने से दूर करने के लिए धक्का लगाया

“दूर हट मुझसे “

और आगे जाने लगी लेकिन मैंने उन्हें पीछे से जकड़ लिया,वही हुआ जो होना था,मेरे लोहे जैसा लिंग जो की तन कर किसी खड़ा था जाकर सीधे दीदी के नर्म नर्म चूतड़ों से रगड़ खा गए ऐसा लगा जैसे मुझे जन्नत मिल गई वही दीदी की सांसे भी जैसे रुक सी गई ,वो शांत हो गई थी ..

“भाई हट यंहा से “

उनकी आवाज कमजोर थी जो की ये बता रही थी की वो बेहद ही नर्भस है लेकिन एक सदमे भी है ,मैंने अपने कमर को एक बार और चलाया और मेरा लिंग एक बार फिर से उनके चूतड़ों पर रगड़ खा गया ,दीदी जोरो से छूटने के लिए मचली लेकिन मेरी पकड़ बेहद ही मजबूत थी वो बस कसमसा कर रह गई ..

“छोड़ मुझे तू शैतान हो गया है ,अब तू वो भोला भाला लड़का नही रह गया “

दीदी रूवासु हो गई थी जिसे देखकर मुझे दुख हुआ और मैंने उन्हें पलटकर अपने सीने से लगा लिया ,उनके बड़े बड़े वक्ष मेरे छातियों में धंस गए थे वही मेरा लिंग अब उनके जांघो के बीच तो कभी पेट पर रगड़ खा रहा था नर्भसनेस के कारण वो पसीने से भीगने लगी थी …

“दीदी मुझे भोला भाला बनकर कुछ भी हासिल नही हुआ ,अब तो मैं एक शैतान ही हु ,लेकिन यकीन मानो मैं अपनी बहनो से बहुत प्यार करता हु “

दीदी ने मुझे देखा

“प्यार करने का ये तरीका नही होता राज ये हवस है “

“हा दीदी ये हवस है ,लेकिन इसमे भी प्यार छिपा हुआ है,एक भाई का प्यार अपनी बहन के लिए “

ये कहकर मैंने दीदी के मलाईदार चूतड़ों को सहला दिया और चटाक

एक जोरदार थप्पड़ मेरे गालो में आ पड़ा

“इसे तू प्यार कहता है ,तू सच में शैतान ही है हट जा मुझसे दूर “

वो रोने लगी थी ,मुझे समझ नही आया की मैं क्या करू ,

मुझे वो बात याद आई जो कभी बाबा जी और काजल ने कहा था की मुझे अपनी शक्तियों का ही अंदाज नही है ,और ये भी की मैं किसी भी को खुद की ओर आकर्षित कर सकता हु ,

मैंने खुद कोई शान्त किया और दीदी के गले में पूरे शिद्दत से एक चुम्मन कर दिया ,मेरे होठ उनके गले में जा लगे उनमे मेरे पूरे जस्बात थे ..

उनका रोना बंद हो चुका था वो मुझे ही देख रही थी

“तू मुझसे क्या चाहता है भाई …??”

उनकी आंखों में कुछ बदल सा गया था ,वो शांत हो चुकी थी

“प्यार ...मैं आपको प्यार देना चाहता हु ऐसा जैसा आपको कोई दूसरा नही दे सकता ..”

मैंने उनके बालो में अपनी उंगलिया फ़साई और उन्हें अपनी ओर खीच लिया वो बिल्कुल ही आश्चर्यचकित थी शायद वो एक सम्मोहन में फंस चुकी थी ,उस दिन मुझे समझ आया की किसी को कैसे सम्मोहित किया जाता है,मैंने अपनी पूरी एनर्जी फिर से अपने होठो तक लाई और उनके होठो से मिला दिया ..

“उह “

वो उस अजीब से अहसास से मचल सी गई ,वो टूटने लगी और मेरे होठो को चूसने लगी,उन्होंने मुह खोलकर मेरे जीभ को अपने मुह के अंदर आने दिया ..

मैं उस रस से भरे होठो को बेहद ही इत्मीनान और प्यार से भरकर चूस रहा था ,वो भी मेरी बांहो में मचल रही थी और मेरे सर को अपने हाथो से पकड़े कर उसे अपनी ओर खीच रही थी .मुझे लग रहा था जैसे वो किसी जादू के नशे में चूर हो गई है जैसे वो खुद को भूल ही गई हो……

मैं उनके मुह के अंदर तक अपने जीभ को ले जा रहा था मैं जितना हो सके उतना उनके अंदर तक पहुचना चाहता था ,मेरा लिंग उनके जांघो के बीच घिस रहा था अब मुझे लगा की ये ही समय है दीदी पूरी तरह से मेरे वश में थी ..

मैंने हाथ आगे बढ़कर उनके सलवार का नाडा खोल दिया वो टाइट था इसलिए जल्दी से नीचे नही गिरा ,मैंने उन्हें अपने हाथो से उठाकर बिस्तर में लिटा दिया था ,मैं अपने हाथो को आगे बढ़कर उनके सलवार को निकाल रहा था वो भी अपनी कमर उठाकर मेरा साथ दे रही थी ,मैंने बिना देर किये ही उनकी पेंटी भी निकाल कर फेक दी ...और फिर से उनके ऊपर लेट गया,हमारे होठ अभी भी मिले हुए थे वही मेरे हाथ अब दीदी की योनि पर थे जो हल्के हल्के बालो से भरी हुई थी और काम के रस से गीली भी हो चुकी थी ,उनपर हाथ चलाना भी किसी जन्नत से कम नही था,मेरी एक उंगली उस रस से भीगकर उनके योनि में फिसल गई

“आह..भाई “

वो मचली लेकिन मुझे उनके योनि के कसावट का अंदाजा लग गया ,मुझे समझ आ चुका था की मेरा लिंग ही उनकी योनि में जाने वाला पहला लिंग होने वाला था ….

ये मेरा नशीब ही था की मेरी इतनी सुंदर बहनो की अनछुई योनियों को मैं ही पहला हकदार था ,

 
मैं हल्के हल्के से अपनी उंगलि से उनके योनि को सहला रहा था ,वो कसमसा रही थी ,मैंने उनकी कमीज भी ऊपर से हटा दी ,मेरे सामने उनके दो बड़े बड़े आम झूल रहे थे जिन्हें मैं इत्मीनान से चूसना चाहता था ,मैंने बड़े ही आराम से उन्हें अपने मुह में भरा ..

“भाई ..आराम से काटना मत “

वो मगन हो चुकी थी और मैंने अपने दांत से उनके वक्ष को हल्के से काट लिया

“आउच ..”

उनका हाथ मेरे बालो को जोरो से जकड़ लिया वो मुझे खुद की ओर खीच रही थी ,वो पूरी तरह से नग्न थी और मैं भी ,मेरा लिंग अब उनकी अनछुई योनि में जाने को तैयार था ..

मैं जानता था की मेरी प्यारी बहन को इसमे दर्द होने वाला है इसलिए मैंने उनके ड्रेसिंग से एक तेल निकालकर पहले उनके योनि और अपने लिंग को अच्छे से तेल से भिगो दिया …

वो आंखे फाडे हुए मेरे लिंग को देख रही थी ,उनकी आंखों में आश्चर्य था,होता भी क्यो नही क्योकि ये लिंग एक आम लिंग था भी नही जो की पोर्न वगेरह में दिखाया जाता है ,ये किसी मूसल से कम नही था ,जो की तेल लगने से और भी ज्यादा चमकदार हो गया था ..

मैंने पहले दीदी के होठो को अपने होठो में भर लिया फिर आराम से अपने लिंग को उनकी योनि में सरकाया ,वो धीरे धीरे उनकी योनि में समाता गया…

“आह मेरे भाई ,मेरे प्यारे भाई आई लव यू “

दीदी के दिल में मेरे लिए अचानक से प्यार उमड़ आया था अब ये हवस था या प्यार मैं इसमे नही पड़ना चाहता था ,अभी तो मजे से मेरा भी हाल बुरा हो रहा था ,अब तो हर चीज ही सही लग रही थी …

“लव यू दीदी ,आज आपको इतना प्यार दूंगा की आप दुनिया को भूल जाओगी ,मेरी प्यारी दीदी को मैं अब जन्नत की सैर करवाऊंगा “

उन्होंने मुझे जोरो से पकड़ लिया ,मैंने एक धक्का जोर से दिया वो चीखी लेकिन उनकी आवाज मेरे होठो में ही दफन हो गई ..

मेरे एक ही धक्के में वो बेसुध सी हो गई थी .लेकिन थोड़ी देर बाद उन्हें थोड़ा होश आया ,उन्होंने मेरी आंखों में देखा उसमे आंसू की एक बून्द थी ……

“मुझे प्यार कर भाई ,मुझे अपना बना ले ,”वो रोते हुए बोली और अपने होठो को मेरे होठो में धंसा दिया..

मैं उनके होठो को चूसे जा रहा था वही अब मेरी कमर हल्के हल्के चलनी शुरू हो गई थी ,

वो आनद से आहे भर रही थी ,वो बार बार मुझे चुम रही थी ,उनका चहरा देखकर लगता था की उन्हें बेहद ही मजा रहा है..

मैं भी एक स्वर्ग में पहुच चुका था,ऐसा मजा तो मुझे निशा के साथ भी नही आया था ,जो अपनी बड़ी बहन को चोद कर मिल रहा था ..

मैंने उन्हें पलट दिया और उनकी कमर को पकड़ कर जोर जोर से धक्के देने लगा ,मेरा लिंग अब तक पूरी तरह से भीग चुका था और बेहद ही आसानी से उनके योनि में जा आ रहा था ..

वो बेसुध ही हो गई थी उनका शरीर अकड़ कर झरने लगा था लेकिन मैंने धक्के जारी रखे और फिर वो दूसरी बार भी झर गई,इस बार मैंने उनकी पेंटी से उनकी योनि को पोछा और फिर मैं फिर से शुरू हो गया ..

“आह बस कर ना भाई मार ही डालेगा क्या ,आज के लिए काफी है “

“दीदी तुम्हे चोदने में बहुत मजा आ रहा है ,पता नही मेरा कब निकलेगा “

मैं जोरो से धकके मार रहा था उन्होंने मेरे सर को पकड़ लिया

“आह आह नही भाई ऐसा नही बोलते ,हम तो प्यार कर रहे है इसे चोदना नही बोलते आई आह धीरे भाई “

“इसे चोदना ही बोलते है दीदी,मैं अपनी प्यारी बड़ी बहन को चोद रहा हु और तुम अपने भाई से चुदवा रही हो “

“नही नही आह नही भाई नही प्लीज् हम प्यार कर रहे है चुदाई नही ये गंदा होता है ,हम प्यार कर रहे है ना भाई ..आह मैं मर जाऊंगी आआआआ हहहह “

वो फिर से जोरो से झड़ गई ,मैं भी बुरी तरह से हांफ रहा था लेकिन साला लिंग तो ठंडा होने का नाम ही नही ले रहा था

वो थोड़े देर बाद सामान्य हुई

“भाई अब बस मैं बुरी तरह से थक चुकी हु अब जाकर निशा को प्यार कर “

वो अब भी चोदना जैसे शब्द का उपयोग नही कर पा रही थी

“दीदी प्यार नही चोदना “

उन्होंने मेरे गालो में एक हल्की सी चपत लगा दी

“तेरे लिए होगा वो सब मेरे लिए तो ये प्यार ही है ,जो मेरा भाई मुझे दे रहा है “

उनकी इस बात से सच में मुझे उनपर बेहद ही प्यार आया और मैंने उन्हें होठो को चुम लिया

“आई लव यू भाई “

“आई लव यू दीदी लेकिन आज तो मैं आपको रात भर प्यार करूँगा ,जब तक मेरा नही गिरता “

उनका मुह खुला का खुला रह गया

“तू सच में शैतान बन गया है ,पूरा जानवर “

उन्होंने मेरे चहरे को बहुत ही प्यार से सहलाया

कितनी अजीब बात थी की मेरे इस बर्ताव के बाद भी वो मुझपर अपना प्रेम ही दिखा रही थी ,मुझे सच में लगा की मैं बहुत भाग्यशाली हु ,मेरी बहने किसी रंडियों जैसी नही है बल्कि वो सेक्स के बाद भी मुझे बेहद प्यार करती है ,और शायद सेक्स के बाद ही बेहद प्यार करती है ,मेरे होठो में मुस्कान आ गई ..

“चलो थोड़ा दारू पीते है फिर स्टार्ट करेंगे “

मैं उनके ऊपर से उठ गया ,और आलमारी से एक महंगी शराब की बोतल निकाली और दो पैक बना दिया

वो मुझे आश्चर्य से देख रही थी

“तुझे कैसे पता की मैं शराब पीती हु और इस अलमारी में बोतल रखी है “

“अरे दीदी आप मेरी दीदी हो ,आपके बारे में मुझे सब कुछ पता है “

वो आश्चर्य से देखने लगी

“सब??”

“हा सब”

“रोहित के बारे में भी ??”

रोहित?? लेकिन फिर मेरे दिमाग में वो नाम क्लिक कर गया और होठो में एक मुस्कान आ गई

“हा रोहित के बारे में भी ..”

वो घबरा सी गई लेकिन मैंने उनके गालो को प्यार से सहलाया और जाकर कमरे में लगे बड़े बड़े कांच की खिड़कियों से पर्दा हटा लिया

“भाई ये क्या कर रहा है कोई देख लेगा “

“कोन रोहित??? देखने दो उस मादरचोद को “

दीदी ने मुझे फिर से आश्चर्य से देखा और मैंने अपने मुह में थोड़ी शराब भरकर उनके होठो में मिला दिया,मेरे मुह से शराब उनके मुह में चली गई ,वो मुस्कुराने लगी …

“अब मैं उस कमीने को सबक सिखाऊंगी ,”

वो रोहित के बारे में बोल रही थी

“वो सब बाद में पहले मेरे इसके तो ख्याल करो “

मैंने अपने लिंग की तरफ इशारा किया और उन्होंने प्यार से मेरे लिंग को अपने हाथो में ले लिया ,वो हल्के हाथो से इसे सहलाने लगी ,फिर उसमे थोड़ी शराब डालकर उन्होंने उसे अपने मुह में समा लिया ..

मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे जन्नत मिल गई हो ,मैं अपनी बहन के मुख का चोदन कर रहा था ..

वो फिर से गीली हो चुकी थी

वो बिस्तर में लेट गई और अपने पैरो को फैला दिया ..

“भाई आ जाओ न “

हम फिर से शुरू हो चुके थे फिर तो ना जाने कब तक और कितनी बार वो झड़ी हो …..

 
अध्याय 33

सुबह के 4 बजे होंगे,दीदी पूरी तरह से थककर सो चुकी थी लेकिन मेरे आंखों से नींद ही गायब थी ,मैं वंहा से अपने कमरे में आकर कपड़े पहने और कही निकल गया……

मैं सीधे रोहित के पास पहुच गया था ..

दरवाजा खटखटाने पर भी कोई जवाब नही आया ,मैंने अपने जेब से मास्टर की निकाली और दरवाजा खोल कर अंदर गया ,वंहा का हाल देखकर एक पल के लिए मैं सोच में पड़ गया..

रोहित अपने बेडरूम में था,चारो ओर समान पड़े हुए थे वो किसी लाश की तरह बिस्तर में पड़ा हुआ था ,सामने दारू की खाली बोतल थी जिससे अनुमान लगाया जा सकता था की इसने रात भर शराब पी है ,उसका टेलिस्कोप टूटा हुआ पड़ा था,साथ में उसके लेपटॉप भी एक ओर पड़ा हुआ था,आईपैड बुरी तरह से चकनाचूर था ,मुझे माजरा कुछ कुछ तो समझ में आ चुका था ,मैंने लेपटॉप उठाया जो की जमीन में ही पड़ा हुआ था.उसका सीसा चकनाचूर था ,जब मैंने उसे खोला तो पता तो मेरे सामने निकिता दीदी की एक तस्वीर थी ..

ये उनके कालेज के दिनों में ली गई तस्वीर लग रही थी ,वो कुछ दिनों पहले ही कालेज से पासआउट हो चुकी थी ..

लेपटॉप की स्क्रीन पर किसी चीज से बुरी तरह से वार किया गया था लेकिन फिर भी स्क्रीन गार्ड की वजह से वो बच गया था ,मैंने स्क्रीन गार्ड निकाला और उसके लेपटॉप को देखने लगा,ये वो चीजे थी जो मुझे पहले नही मिली थी ,क्योकि इसे उसने गूगल ड्राइव में सेव कर रखा था,उसमे कुछ फोटोज थी जिससे साफ पता चल रहा था की रोहित निकिता दीदी का क्लोज फ्रेंड था या फिर बॉयफ्रेंड..

दोनो की बहुत सी फोटोज थी ,वही कुछ फोटज निकिता दीदी की क्लोसअप फोटज थी...शायद इसे रोहित ने ही ली थी ..

अब माजरा तो समझ आ चुका था लेकिन कई सवाल भी साथ ही साथ खड़े हो गए थे ..

मुझे इंतजार था रोहित के वापस होश में आने का ,

मुझे भी बहुत तेज नीद आ रही थी मैं भी रात भर से मेहनत कर रहा था और एक पल की नींद भी मैंने नही ली थी तो मैं आराम से सो उसके सोफे में जाकर सो गया..

लगभग 2 घण्टे बाद मेरी नींद खुली रोहित अब भी नही उठा था लेकिन अब मैं वेट नही कर सकता था,मैंने एक तगड़ी काफी बनाई और एक बाल्टी पानी लेजाकर रोहित के ऊपर डाल दिया ..

“कौन है कौन है “

वो हड़बड़ाते हुए उठा और मुझे देखकर बुरी तरह से चौक गया..

“तुम ..यंहा ??”

मैंने बिना कुछ कहे उसकी ओर काफी बढा दिया ..

वो थोड़ा शांत हुआ और काफी पीने लगा ,ना ही वो मुझसे कुछ बात कर रहा था ना ही मैं उससे ……

“तुम यंहा क्या लेने आये हो ??”

उसने रूखे हुए स्वर में कहा

“तुम्हारा और निकिता का क्या संबंध है “

मैंने सीधे सीधे पूछना ही बेहतर समझा ,उसने मुझे घूर के देखा

“क्यो कल रात तो तुम उसके साथ थे ना ,उसने तुम्हे कुछ नही बताया ..तो तुम हो उसके नए बॉयफ्रेंड साली छिनाल ..”

उसने इतना ही कहा था की मैं उठा और उसके गाल में जाकर एक जोरदार चांटा जड़ दिया ..वो झनझना उठा

“देखो तुम्हे उसके साथ जो करना है करो ,मेरा और उसका कोई संबंध नही है ,और आज के बाद मुझे संपर्क मत करना मैं ये अपार्टमेंट छोड़ कर जा रहा हु “

वो गुस्से में आ गया था ..लेकिन मैं शांत था ..

“मैं उसका बॉयफ्रेंड नही हु ,शायद तुम हो ??”

“मैं ..?” वो हंसा लेकिन उसकी हंसी में एक अजीब सा दर्द था

“वो अब मेरे साथ नही है ..”

उसने सपाट सा उत्तर दिया ..

“क्यो नही है ??”

“तुम्हे इससे क्या मतलब ?? जाकर उसी से पूछो ”

मैंने अपने पीछे छिया रखी गन उसके सामने रख दी ,लेकिन इस बार वो डरा नही बल्कि मुस्कुराया ..

“तुम मुझे डरा नही सकते ,और इस मामले में तो बिल्कुल भी नही ..जाओ और जाकर उससे पूछो की उसने मुझे क्यो छोड़ दिया ..और तुम्हे इन सबमे क्यो इंटरेस्ट है ,तुम्हे जो चाहिए वो तो तुम्हे मिल ही रहा है ना “

उसकी बात से ये साफ था की मामला दिल का है और दूसरा उसने रात को हम दोनो को देखा था ..मैंने अपनी गन वापस रख ली क्योकि दिल के मामले में गन का कोई रोल नही होता ..

“ओके जैसी तुम्हारी मर्जी लेकिन …...क्या तुम्हारे कारण ही वो ऐसी हो गई ,मलतब की शराब ,सिगरेट और नशे में डूबा रहना “

वो चुप था ….

लेकिन फिर वो बोल पड़ा

“मैंने नही कहा था उसे ये सब करने के लिए ,मैं बीमार था आज भी हु लेकिन उसे मुझसे दूर जाना था ,मैंने उससे कहा था की मैं ये सब छोड़ दूंगा ,मैं अपना इलाज करवाऊंगा लेकिन कभी उसे मेरी बीमारी बीमारी लगी ही नही ,बल्कि उसे तो लगता था की मैं ये सब जानबूझ कर करता हु मुझे मजा आता है ,उसे क्या पता की मेरे लिए ये कितना कठिन होता है ..”

उसकी बात सुनकर मेरे माथे में लकीर पड़ गई ..

“मतलब ...क्या बीमारी है तुम्हे “

वो थोड़े देर तक चुप रहा फिर बोला

“voyeurism की बीमारी …”

मैं चौक गया था

“क्या ..??”

 
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