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जीवन एक संघर्ष है complete

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जीवन के इस नए मोड़ में सभी लोग उत्साहित तथा प्रशन्न थे । एक ही दिन में इतना बड़ा परिवर्तन गाँव से भागना और शहर की इस आलिशान जिंदगी को लेकर सभी लोग इस समय का भरपूर आनंद उठा रहे थे ।

नया घर और घर के अंदर सभी प्रकार की सुबिधायें के बारे में अपने अपने तरीके से उसका मूल्यांकन और विशेषता का अध्ययन कर रहे थे । गाँव में दो तीन लोगों के पास ही मोटर गाडी और टेलीविजन हैं, और जिनके पास हैं वह व्यक्ति अपने आपको सबसे अमीर समझता है ।

आज सूरज के इस नए घर में वो सारी सुबिधायें देख कर सभी लोग बड़े ही खुश थे । सूरज अपनी बहनो को खुश देख आज बहुत खुश था। मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था की मेरी दोनों दीदी और माँ ऐसे ही अब खुश रहें ।

जीवन भर लोगों की दलीले और गालियां सुनी है ।आज के बाद सभी परेसानी उनसे दूर रहें और जीवन की सभी खुशियाँ उन्हें मिले ।

सूरज पूनम और रेखा के कमरे में जाता है ।

दिनों बहने नए घर की भव्यता का वर्णन कर रही थी ।सूरज को देखते ही दोनों बहने बेड पर बैठ गई ।

पूनम-" सूरज आजा यहां बैठ, तुझसे कुछ पूंछना है?

सूरज" बोलो दीदी,

पूनम-" सूरज हम यहां कितने दिन तक रह सकते हैं??

सूरज-" जब तक में घर की व्यवस्था नहीं कर लेता तब तक हम यही रहेंगे।

तनु-"इस घर का किराया कितना होगा?

सूरज-" दीदी हमारे लिए फ्री है, आप परेसान मत हो आराम से रहिए। और सभी चीजो को इस्तेमाल कर सकती हो ।

पूनम-" सूरज तू काम क्या करेगा ये तो बता? क्या हम सबको भी काम करना है यहां पर?

सूरज-" नहीं दीदी सिर्फ मुझे ही काम करना है, आप लोग यहां सुकून से रहिए, में आपके पास आता जाता रहूँगा,

तनु-" सूरज तू रोज रही आया करेगा यहां पर। हम लोग अकेले तीनो लोग कैसे रहेंगे?

सूरज -" दीदी यहां चोकीदार और नोकरानी भी रहेगी, आप लोग अकेले कहाँ हो ।

पूनम-" बाकी सब तो ठीक हो गया बस पहनने के लिए हमारे पास कपडे नहीं है, फटे-पुराने कपडे ही हैं। तू अगले महीने की तनखा में से तीनो के लिए कपडे वनवा देना? बड़ी मासूमियत से दीदी ने बोला तो मुझे भी एक दम से याद आया की मेरे पास तो एक लाख से ज्यादा पैसे हैं जो सूर्या की अलमारी से निकाले है इन्ही पैसे से सबके लिए दो जोड़ी कपडे और जरुरत का सामन दिलबा देता हूँ ।

सूरज-" दीदी आप मेरे साथ अभी मार्केट चलो आपके लिए कपडे खरीद कर लाते हैं ।

मेरे पास कुछ पैसे हैं ।

हम तीनो लोग गाडी से चलते हैं ।

पूनम-" ओह्ह मेरे भाई तू सच में बहुत अच्छा है। कितना ख्याल रखता है हम सबका, हमारे लिए कितनी परेसानी सेहता है। इतनी सुबिधायें के लिए तुझे अकेले को ही मेहनत करनी है । अपने मालिक से कह कर मेरी भी नोकरी लगवा दे, थोडा बोझ हल्का हो जाएगा तेरा""

सूरज-" दीदी ये तुम्हारा भाई जब तक है तब तक आपको कोई परेसानी नहीं आने देगा।

इस घर की खुशियों के लिए में अपने जीवन का बलिदान देने को तैयार हूँ ।

पूनम-" नहीं भाई ऐसा मत बोल तेरे लिए कभी मेरी जान की जरुरत पड़ी तो हस्ते हस्ते दे दूंगी लेकिन तुझे इस घर के लिए अकेले बलिदान की भेंट नहीं चढ़ने दूंगी" पूनम की आँखे नम हो गई थी, तनु भी सूरज के गले लग कर रोने लगी थी, दोनों बहनो को अपने प्रति प्यार देख कर आंसू छलकने लगे, कई वर्षो के बाद उसने अपनी बहनो के पास बैठ कर बात की थी, गाँव में तो पुरे दिन लकड़ी काट कर थका हारा सो जाता था कभी बहनो से बात करने का समय ही न मिला ।

तीनो बहन भाई आपस में गले लग जाते हैं ।सूरज को बहुत सुकून मिलता है आज अपनी बहनो से बात करके, तीनो भाई बहन सुबक रहे थे तभी गेट पर माँ की रोने की आहाट सुनाई दी, रेखा भी बहुत देर से गेट पर खडी तीनो बच्चों को एक साथ रोते हुए खुद के आंसू रोक नहीं पाई।

सूरज रेखा के पास जाता है और माँ की आँखों से आंसू पोछता है, रेखा सूरज को गले लगा लेती है और चूमने लगती है। रेखा ने कई सालो बाद आज सूरज को गले लगाया था, दो वक़्त की रोटी के लिए जीवन भर काम की व्यस्तता के कारण वो कभी अपने बच्चों को प्यार ही नहीं कर पाई ।

सूरज भी आज पहली बार माँ की ममता को महसूस कर रहा था । दोनों दीदी भी आकर माँ और भाई के गले लग कर रोने लगती है।

रेखा और तीनो भाई बहन के लिए सबसे ज्यादा ख़ुशी का पल था।

सूरज-" बस माँ अब आज के बाद दुखो के दिन कट चुके हैं, अब हम लोग ख़ुशी से रहेंगे, एक साथ""'

रेखा-" हाँ बेटा हम सब लोग ख़ुशी से रहेंगे, पुरानी असहनीय बातों को भुला कर,गाँव की सभी बातों को भुलाना होगा,

पूनम-" हाँ माँ अब कोई पुरानी बातो को याद नही करेगा, अतीत में जो कष्ट झेले हैं उनको भुला कर वर्तमान में खुशी से जिएंगे।

सूरज अपनी माँ और बहनो से वादा करता है की आज के बाद कोई दुखी नहीं होगा पुरानी बातो को याद कर, नई ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिए दिन रात मेहनत करेगा।

सूरज-" दीदी अब मार्केट चलो कपडे लेकर आते हैं सब के लिए,

पूनम-" तनु को साथ ले जा, इसी के नाप के मेरे कपडे भी ले आना और माँ के लिए भी साडी बगेरहा ले आना, में जब तक घर की सभी चीजो का मुयायना कर लू, और रसोई में खाने की व्यवस्था कर लेती हूँ ।

तनु-" तो फिर माँ तुम चलो हमारे साथ आप भी अपने लिए कुछ कपडे ले आना"

रेखा-" बेटा में नहीं जाउंगी, तुम ही भाई के साथ चली जाओ"

सूरज-" तनु दीदी आप ही चलो जल्दी, मुझे आज शाम को मालिक के यहाँ नोकारी पर भी जाना है"

तनु-" चलो फिर हम दोनों ही चलते हैं"

पूनम-" तनु एक मिनट मेरी बात सुन" पूनम तनु को अकेले में कुछ बोलती है, शायद कपडे के लिए ही कुछ बोल रही थी

तनु मेरे पास आते ही चलने के लिए बोलती है ।

में और तनु ड्राइवर को लेकर मार्केट की ओर निकल जाते हैं। ड्राइवर एक अच्छी सी मार्केट पर गाडी रोकता है और हम दोनों को दूकान में जाने के लिए बोलता है ।

में और तनु एक बहुत अच्छे शोरूम में घुसते है, पहली बार किसी अच्छी दूकान देख कर हम दोनों बहन भाई वहां की सुंदरता देखकर ही दंग रह गए, ऐसी खुबसूरत मार्केट सिर्फ फिल्मो में ही देखि थी अब तक ।

शोरूम के अंदर सभी काउंटर पर लड़कियां बैठी थी ।तनु फ़टे पुराने कपडे में खड़ी थी उसे तो बहुत शर्म भी महसूस हो रही थी । सूरज तनु की मनोदशा समझ चुका था ।

सूरज तनु का हाथ पकड़ कर एक लेडीज काउंटर पर जाता है ।

लेडीज-" सर बताइए क्या दिखाऊं, लेडीज सेलर तनु को बार बार देख रही थी. उसके फटे कपडो से शायद सेलर समझ चुकी थी की ये लड़की गरीब है ।लेकिन सूरज बहुत स्मार्ट और हेंडसम लग रहां था ।

सूरज-' मेडम कपडे दिखाइए इनके साइज़ के" सूरज ने तनु की और इशारा करते हुए कहा

लेडीज सेलर तुरंत फेशनेवल कपडे लेकर आती है । जिसे देख कर तनु बड़ी खुश होती है ।

आज तक इतने कीमती और सुन्दर कपडे उसने पहने नहीं थे ।

सूरज चार जोड़ी कपडे सलेक्ट कर लेता है।

लेडीज-" सर मेडम के लिए जीन्स और टॉप दिखाऊं क्या??? जीन्स का नाम सुनते ही तनु के कान खड़े हो जाते है। उसका हमेसा से मन था की जीवन में एक बार जीन्स और टॉप पहने ।

सूरज-" जी हाँ दिखाइए" सेलर बहुत सी प्रकार की जीन्स और टॉप दिखाती है ।

सूरज एक जीन्स तनु को दिखाते हुए बोलता है।

सूरज-" दीदी आप ये वाली जीन्स पहन कर देखो बहुत अच्छी लगेगी।

तनु-" तनु शर्म से कुछ बोल नहीं पा रही थी फिर भी बस इतना ही बोल पाई" तुझे जो पसंद है वही ले ले"'

सूरज चार जीन्स पूनम और तनु के लिए ले लेता है । उनके साथ टॉप भी खरीद लेता है ।

लेडीज सेलर-" सर! मेडम चाहें तो ट्राई रूम में पहन कर देख सकती हैं ।सूरज तनु को वह जीन्स और टॉप देकर ट्राई रूम में पहनने के लिए बोलता है ।तनु बहुत शर्मा रही थी फिर भी वह कपडे लेकर ट्राई रूम में पहुँच जाती है ।

तनु अपने फटे पुराने सलवार सूट निकाल कर नंगी हो जाती है । ट्राई रूम में लगे शीसे में अपना जिस्म देख कर शर्मा जाती है । तनु बिना ब्रा और पेंटी के ही सलवार सूट पहनी थी । तनु ब्रा और पेंटी भी खरीदना चाहती थी लेकिन शर्म की बजह से सेलर से कह नहीं पा रही थी इधर उसका भाई सूरज भी इसके साथ था ।

पूनम ने भी मार्केट जाते समय ब्रा और पेंटी के लिए बोला था ।

तनु बिना ब्रा और पेंटी के ही जीन्स और टॉप पहन लेती है ।

और खुद को शीशे में देख कर हैरान रह जाती है। ऐसा लग रहा था की शहर की सबसे खूबसूरत लड़की हो । खुद को देख कर उसे बहुत अच्छा लग रहा था ।तनु शर्माती हुई ट्राई रूम से बहार निकलती है।

सूरज तो देखते ही अचम्भा रह जाता है । इतनी खूबसूरत बहन को देख कर तुरंत

तनु से बोलता है ।

सूरज-" woww दीदी इस ड्रेस में आप तो बिलकुल हीरोइन लग रही हो""

तनु-" तनु शर्मा जाती है, में कपडे बदल कर आती हूँ"

सूरज-" नहीं दीदी यही कपडे पहने रहो, वो कपडे वहीं कूड़ेदान में डाल दो, फटे पुराने हैं ।

तनु सूरज के पास आकर लेडीज सेलर के पास आती है ।

तनु-" सूरज माँ के लिए एक साडी और ब्लाउज ले लो" लेडीज सेलर तुरंत सूरज को दूसरे काउंटर पर लेकर जाती है ।

सूरज चार साडी और पेटीकोट और ब्लॉउज ले लेता है ।

सारी शॉपिंग हो चुकी थी बस तनु को ब्रा पेंटी ही खरीदनी बची थी ।

 


भारतीय संस्कृती की और रिश्ते की बुनियादी जड़ हिंदुस्तान ही एक मात्र देश है

जहां रिस्तो की कद्र है । प्रत्येक व्यक्ति रिस्तो की मर्यादा को ध्यान में रख कर ही

अपनी मानसिक सोच को ढालता है ।जिसकी कुछ सीमाएं और मर्यादाएं जैसी शर्ते होती है। । इसी सोच को संस्कार कहा गया है । और इसका जीता जागता उदहारण तनु थी ।

कपडे के बड़े शोरुम में अपने लिए और

पूनम दीदी के लिए पेंटी और ब्रा लेने में झिझक रही थी। और ये जिझक जायज भी थी क्योंकि उसका भाई सूरज उसके साथ था ।

कपड़ो की खरीदारी हो चुकी थी । माँ और पूनम के लिए भी 3-4 जोड़ी कपडे ले लिए थे । सूरज ने तन ढकने वाले कपडे तो खरीद लिए थे लेकिन तन के भीतरी अंग ढकने वाले कपड़ो के बारे में उसका कोई ध्यान नहीं था ।पहली बार इतने आलिशान दूकान पर कपडे खरीदना का पहला अनुभव पा कर दोनों भाई बहन बहुत ही गोरवान्वित महसूस कर रहे थे । तनु अपने भाई के इस शहरी रूप को देख कर बहुत गर्व कर रही थी ।

शॉपिंग पूरी होते ही सूरज कपड़ो के भुगतान के लिए मुख्य काउंटर की तरफ जाता है ।

सूरज-" दीदी सबके लिए कपडे तो खरीद लिए कोई और ड्रेस आपको पसंद हो तो खरीद लीजिए ।

तनु असमंजस में पड गई थी की भाई से

कैसे कहे की उसे पेंटी और ब्रा भी खरीदनी है । तनु अकेली होती तो लेडीज सेलर से पेंटी ब्रा मांग लेती लेकिन सूरज तनु के साथ ही रहा । तनु अपनी सोच से बहार निकलते हुए ।

तनु-" नहीं सूरज ड्रेस तो बहुत सारी ले ली

और क्या खरीदूं ? कुछ याद आएगा तो बाद में खरीद लुंगी ।

सूरज-" ठीक है दीदी । में कपड़ो का भुगतान करके आता हूँ आप दो मिनट रुको""

सूरज तनु को वहीँ खड़ा करके भुगतान के लिए मुख्य काउंटर पर जाता है ।

सूरज जैसे ही मुख्य काउंटर पर जाता है तभी उसे भुगतान काउंटर के पास ब्रा और पेंटी की शॉप दिखाई दी जिस पर लड़कियो के फेसनेवल ब्रा और पेंटी के एड फ्लेक्स लगे हुए थे । सूरज तो फ्लेक्स में छपी लड़की जो ब्रा में थी उसकी फेन्सी ब्रा में कैद बूब्स और ब्रा को बड़े गोर से देख रहा था ।

सूरज भुगतान करने के लिए पेमेंट काउंटर पर जाता है और पेमेंट करने के लिए बोलता है । पेमेंट काउंटर वाली लड़की बहुत सुन्दर और फेसनेवल टॉप पहनी थी जिसमे उसकी ब्रा में कैद बूब्स दिखाई दे जाते हैं ।

सूरज उस लड़की से कपड़ो के बिल के लिए बोलता है ।

लड़की कंप्यूटर पर झुक कर पूरा हिसाब किताब लगाने लगती है । झुकने के कारन उसकी ब्रा में कैद बूब्स दिखने लगते है ।

सूरज की नज़र बार बार बूब्स पर जाती है । उस लड़की की ब्रा देख कर सूरज का दिमाग ठनकता है । ऊपर बाले का खेल बड़ा ही निराला होता है । जिस बात को तनु अपने भाई से कह नहीं पर रही थी । ऊपर बाले ने उसे वाही चीज दिखा दी ।

सूरज अपने मन में सोचता है की तनु दीदी ने ब्रा और पेंटी तो खरीदी नहीं है ।

सूरज सोचता है" शायद दीदी शर्म की बजह से मुझसे कह नहीं पाई होंगी, अब में दीदी से कैसे कहूँ ब्रा और

पेंटी खरीदने के लिए आखिर वह मेरी बहन है, मुझे कुछ तो करना होगा ।

तभी पेमेंट वाली लड़की सूरज से बोलती है ।

लड़की-" सर जी 22000 हजार रुपए का बिल हुआ है आपका" बिल देते हुए लड़की बोली

सूरज जेब से एक लाख की नोटों की गड्डी में से पूरा भुगतान करता है । सूरज सोचता है की क्यूँ न में ही ब्रा पेंटी खरीद लू, लेकिन वह शर्मा भी रहां था और सोच रहा था की तनु दीदी को कैसे दूंगा । क्या सोचेगी मेरे बारे में ?

बहुत ही सोचा विचारी करने पर सूरज के मन में एक आइडिया आया और वह सेल गर्ल के पास जाता है । सूरज सेल गर्ल के पास जाता है और उसे बोलने में बड़ी शर्म महसूस कर रहा था ।

सेल गर्ल-' जी कहिए सर आपको क्या दिखाऊं ?

सूरज-" मेडम एक मदद कर दीजिए वो अंदर काउंटर पर एक लड़की खड़ी है उसे ब्रा और पेंटी खरीदने के लिए तैयार कर लीजिए ।

लड़की-" सर आप ही बोल दीजिए उनसे?

सूरज-" मेडम में उनसे बोल नहीं सकता हूँ प्लीज़ आप मेरी मदद कीजिए ।

लड़की मान जाती है । और तनु के पास जाती है ।सूरज सोचता है तनु दीदी मेरे सामने ब्रा नहीं खरीद पाएँगी इसलिए मुझे थोड़ी देर यहां से हट जाना चाहिए ।

सूरज तनु के पास जाता और बोलता है

सूरज+" दीदी में अभी 20 मिनट में आता हूँ जब तक आप कुछ और ड्रेस खरीद लो ।

तनु-' ठीक है सूरज, जल्दी आना" तनु की तो मन की मुराद ही पूरी हो गई थी । सूरज जैसे ही दूकान से बहार निकलता है तनु ब्रा और पेंटी खरीदने के लिए ब्रा काउंटर देखने लगती है तभी वाही लड़की तनु के पास आती है जिससे सूरज ने तनु के पाद भेजा था ब्रा खरीदने के लिए ।

लड़की-' मेडम में आपके लिए सुन्दर और फेसनेवल ब्रा और पेंटी ऑफर करना चाहती हूँ । क्या आप देखना चाहेगी ?

तनु-" हैरान होते हुए" हाँ बिलकुल में भी ब्रा और पेंटी की दूकान ढूंढ रही थी ।

लड़की-" हाँ मुझे पता है मेडम" अचानक लड़की के मुह से निकल जाता है ।

तनु हैरानी से उस लड़की को देखने लगती है

लड़की-' बात को संभालते हुए-" वो क्या है न मेडम आप इधर उधर देख रही थी तो मुझे लगा शायद आपको ब्रा पेंटी चाहिए"

तनु-" हाँ जी मुझे चाहिए तो थी लेकिन मेरे भैया मेरे साथ थे इसलिए में खरीद नहीं पाई

लड़की-" ओह्हो तो वह आपके भैया थे क्या? फिर से जुबान फिसली सेल गर्ल की।

तनु-"क्या आप जानती है मेरे भैया को?

लड़की-" हाँ जी वो अभी तो आपके साथ थे तब देखा था-" फिर से बात संभालते हुए बोली

लड़की तनु के लिए अपनी शॉप पर लेकर जाती है । तनु माँ और दीदी की ब्रा का साइज़ बता कर पेंटी खरीदती है ।

जीवन में पहली बार तनु में स्वयं के लिए ब्रा और पेंटी खरीदी थी इससे पहले गाँव में तो बाज़ार या मेला में रेखा ही स्वयं और दोनों बेटिओं के लिए खरीद कर ले आती थी ।

लड़की सेलर-" मेडम आपका साइज़ क्या है ब्रा का? सेल्स गर्ल के द्वारा खुद की ब्रा का साइज़ पुछने पर तनु शर्मा गई, आज से पहले उसने अपना साइज़ सिर्फ माँ या दीदी को ही बताया था ।

तनु-" मीडियम दे दो"

लड़की-"हस्ते हुए! अरे मेडम में लड़की हूँ मुझसे क्यों शर्मा रही हो आप? नम्बर बताइए अपना और जिनके लिए आप ब्रा लेने आई हो"'

तनु-" 32D दे दीजिए" दो ब्रा" इस बार बिना झिझक के साइज़ बोल दिया

सेल्स बाली लड़की ने दो ब्रा निकल दी और उसी के साइज़ की पेंटी भी ।

सेल्स लड़की-' दूसरा साइज़ बताइए मेडम"

तनु-"34D की दो ब्रा और पेंटी भी' सेल्स लड़की ने फेसनेवल पेंटी और ब्रा निकाल दी ।ये ब्रा पेंटी पूनम के लिए थी ।अब माँ के लिए बाकी थी, सेल्स बाली लड़की के बोलने से पहले ही तनु ने तीसरे ब्रा का साइज़ बोल दिया ।

तनु-" 36D की 2 ब्रा निकाल दीजिए साथ में पेंटी भी"

सेल्स गर्ल ने सभी की ब्रा और पेंटी को पैक कर दिया तनु ने सभी ब्रा बिना देखे ही पैक करवा ली चूँकि उसे शर्म आ रही थी और दूसरा डर सूरज का भी था की कहीं आ न जाए इसलिए जल्दबाजी में सभी ब्रा पेंटी को पैक करवा ली ।

तनु काउंटर से हटने बाली ही थी तभी सेल्स बाली लड़की बोली

लड़की-" मेडम आपने इतनी खरीदारी की है इसलिए आपको एक विशेष ऑफर हमारी तरफ से फ्री दिया जाता है ।

इस ऑफर में आपको दो ब्रा और पेंटी आपकी साइज़ की मुफ़्त दी जाती हैं ।

लड़की ब्रा और पेंटी का एक बहुत ही फेसनेवल गिफ्ट देते हुए बोली।

तनु ने गिफ्ट लेकर उस लड़की को धन्यवाद बोला ।

सेल्स लड़की-" वैसे मेडम एक बात कहूँ ?

तनु-" हाँ जी बोलिए

लड़की-" आप बहुत लकी हो आपका भाई बहुत

समझदार है । जो अपनी बहन का इतना ख्याल रखता है ।

तनु-" जी हाँ वो तो है, मेरा भाई लाखो में एक है।

लड़की-" हा सही कहा आपने, आपके पर्सनल कपडे खरीदने

के कारण वो बेचारे बहार खड़े हैं बहुत देर से ।ताकि आप आराम से ब्रा और पेंटी खरीद सको'' तनु यह सुनकर

चोंक जाती है और सोचने लगती है की जानबूझ कर मुझे अकेला

छोड़ कर गए ताकि में आराम से ब्रा खरीद सकु और शर्म के कारण ।

भाई कितना समझदार हो गया है मेरा, कितना ध्यान रखता है ।

तनु अपने मन में यही सोच रही थी और शर्म भी महसूस कर

रही थी । इसी सोच में तनु डुबी हुई थी ।

लड़की-' क्या हुआ मेडम किस सोच में पड गई आप।

तनु-" जी कुछ नहीं"'

तनु तो सिर्फ सूरज के बारे में सोच रही थी,

एक भाई अपनी बहन से सीधे नहीं बोल सकता इसलिए उस सेल्स वाली लड़की से कहा यही सोच रही थी

तभी सूरज अपने निर्धारित समय पर आ जाता है और उस लड़की को गोर से देखता है ।

तभी वह लड़की सूरज को देख कर मुस्करा देती है सूरज समझ जाता है की काम हो गया ।

सूरज काउंटर पर ब्रा पेंटी का भुगतान करता है और तनु को लेकर शॉप के बहार आ जाता है ।

तनु शर्माती हुई सूरज के साथ शॉप से बहार निकलती है ।

सूरज सारा सामन गाड़ी में रखता है ।

समय काफी हो चुका था इसलिए सूरज तनु को गाडी में वैठा कर घर की और निकल जाता है ।

दोनों भाई बहन गाडी में बैठ गए। घर की ओर रवाना हो गए, तनु जीन्स और टॉप में बेहद सुन्दर लग रही थी कोई नहीं कह

सकता था की वह गाँव की लड़की है ।

शहर की पढ़ी लिखी लड़की लग रही थी ।

हालांकि रेखा ने अपने तीनो बच्चों के लिए 12वीं तक पढ़ाया था । तीनो बच्चे स्कूल में

अच्छी पोजीसन में थे, स्कूल में हमेसा प्रथम ही आते थे लेकिन पैसे के अभाव में तीनो बच्चों की शिक्षा बीच में ही रोकनी पड़ी ।

रेखा स्वयं हाई स्कूल तक पढ़ी थी इसलिए उसने तीनो बच्चों के लिए पढ़ाया ।

तनु के इस नए रूप को सूरज निहार रहा था। सूरज को यकीन नहीं हो रहा था की

उसकी बहन इतनी सुंदर है की शहर की शहरी लड़की भी उसके सामने फ़ैल है ।

सूरज सोच रहा था की यदि तनु पुन: अपनी पढ़ाई पूरी कर ले तो शायद अच्छा परिवार मिल जाएगा और उसने जो सपने देखें हैं वह भी पुरे हो जाएंगे । गाँव में पैसो के कारण पढ़ न सकी लेकिन अब में तनु और पूनम दीदी को पढ़ा सकता हूँ अच्छे इंस्टिट्यूट में।

शहर में पढ़ाई करने से दो फायदे भी होंगे ।

एक तो शहर के माहोल को समझ लेंगी

और नोकारी भी कर सकती हैं ।

सूरज सोचता है एक बार बात करनी चाहिए

दोनों बहनो से ।

तनु सूरज से बोलती है ।

तनु-" सूरज क्या हुआ, क्या सोच रहे हो?

सूरज-" कुछ नहीं दीदी, में सोच रहा था की तुम और दीदी अपनी पढ़ाई फिर से सुरु कर दो ।में आप दोनों की पढ़ाई का बोझ उठा सकता हूँ ।आप पढ़ाई करोगी तो आपके सपने पुरे होंगे दीदी" तनु भी आगे पढ़ना चाहती थी,

तनु-" ठीक है सूरज में पढ़ाई के लिए तैयार हूँ ।

सूरज-" में किसी अच्छे स्कूल में आप दोनों का एड्मिसन करवा दूंगा" बात करते करते घर आ गया ।

सूरज और तनु गाडी से निकलते हैं ।

सूरज कपड़ो का बेग गाडी से निकालता है ।

कपड़ो का बेग पूरी तरह से भरा हुआ था,

सूरज ने जब कपडे उठाए तो शॉप वाली लड़की के द्वारा तनु को दिया गया गिफ्ट गाडी के सीट के निचे ही गिर गया ।

सूरज ने कपड़ो का बेग निकाल कर घर के अंदर लेकर गया ।

पूनम और रेखा दोनों बैठ कर सूरज की इस

तरक्की के गुणगान ही कर रही थी ।

जैसे ही पूनम ने तनु और सूरज को देखा तुरंत तनु के पास पहुंची।

पूनम ने तनु को जीन्स और टॉप में देखा तो

वह पहचान ही नहीं पाई की ये तनु है ।

तनु के इस शहरी रूप को देख कर उसे

बहुत अच्छा लगता है ।

पूनम-" अरे वाह्ह तनु तू तो इन कपड़ो में बहुत सुन्दर लग रही है,

बिलकुल शहरी लग रही है ।

तनु-" शर्मा कर! दीदी तुम्हारे लिए भी

सूरज ने जीन्स और टॉप ख़रीदे हैं ।

पूनम खुश हो जाती है ।

पास में खड़ी रेखा दोनों बेटियों को खुश

देख कर बहुत खुश होती है ।

पूनम-" मेरे कपडे दिखाओ? तनु पूनम के लिए लाए गए

सभी कपडे पूनम को देती है और माँ की

साडी निकाल कर देती है ।

रेखा इतनी सुन्दर साडी देख कर बहुत खुश

होती है और अपने बेटे को बहुत दुआएं देती है । सूरज लोन में पड़े सोफे पर बैठा देख रहा था, सबको खुश देख कर वह भी बहुत खुश था ।

तनु बेग से पेंटी और ब्रा लेकर रूम में लेकर जाती है ।पूनम भी उसके साथ जाती है ।

तनु-" दीदी इसमें पेंटी और ब्रा हैं अपनी और

मेरी निकाल लो । माँ की ब्रा और पेंटी भी इसी में है ।

पूनम-" तूने खरीदी कैसे, सूरज तो तेरे साथ में था ?

तनु-"क्या बताऊँ दीदी अपना सूरज तो

बहुत समझदार है"

पूनम-" क्या सूरज ने खरीदी हैं ये" पूनम चोंकते हुए बोली

तनु-" नहीं दीदी सूरज तो बहार चला गया था " तनु शॉपिंग की सारी बातें पूनम को बता देती है । पूनम को बड़ा गर्व होता है

भाई की इस समझदारी पर ।

पूनम-" बाकई ये तो सूरज ने बड़ी समझदारी दिखाई है ।

कितना समझदार है अपना भाई ।

तनु-" हाँ दीदी

पूनम-" ब्रा और पेंटी दिखा" तनु बेग खोल कर पूनम की 34 साइज़ की ब्रा और पेंटी देती है । जैसे ही पूनम ब्रा और पेंटी खोल कर देखती है उसकी आँखे फट जाती है ।

बहुत ही फेसनेवल ब्रा और पेंटी थी ।

पूनम-" तनु ये तो बहुत महंगी आई होंगी ।

इस तरह की तो मैंने आज तक नहीं देखि है । तनु भी अपनी ब्रा पेंटी देखती है,

उसकी ब्रा पेंटी भी पूनम की तरह फेसनेवल

थी । रेखा की ब्रा पेंटी भी वैसी ही थी ।

तनु-" दीदी पहन कर चेक कर लो कैसी है।

और अपनी जीन्स और टॉप पहन कर देख लो ।

पूनम-" ठीक है अभी बाथरूम में पहन कर देखती हूँ" पूनम तुरंत वाथरूम में एक ब्रा और पेंटी

लेकर कर जाती है ।अपनी सलवार सूट निकाल कर बाथरूम में लगे शीशे से अपने बदन को देखती है ।

पूनम सलवार सूट के अंदर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी ।

अपने आपको शीशे में निहार कर उसे बड़ी शर्म सी आ रही थी।

आज तक उसने शीशे में कभी अपना संगमरमर जैसा बदन नहीं देखा था ।

अपने दूधिया उभारो को देख कर उसे शर्म सी आ रही थी ।

पूनम तुरंत नई ब्रा लेकर पहन कर शीशे में देखती है और अपने बूब्स को ब्रा के

ऊपर से ही हाथ स्पर्श करके देखती है ।

ऐसा लग रहा था जैसे अपने बूब्स का मापन कर रही हो उनकी गोलाईयां का ।

पूनम के जिस्म में सिरहन सी दौड़ गई आज से पहले शीशे में देख कर

अपने बूब्स को दवा कर कभी नहीं देखा था।

पूनम की आँखे किसी झील की तरह बहुत सेक्सी थी ।

उसका गोरा बदन नितम्ब बहार की ओर निकले हुए उसके जिस्म को

बहुत बहुत सेक्सी बना रहे थे ।दोनों बेटियां

रेखा पर गए थे ।

रेखा का जिस्म और सुंदरता के दीवाने उसके गाँव में लगभग सभी थे ।

पूनम पेंटी उठाकर पहनने लगती है, पेंटी का अग्र भाग जालीदार होता है और नितंम्ब की तरफ एक मात्र लेश थी जो नितंम्ब की

दरार में छुप जाती है ।

पूनम पेंटी पहन कर शीशे में खुद के जिस्म का मुयायना करती है ।

सर से लेकर पाँव तक अपने आपको निहारने के पस्चात उसकी नज़र पेंटी के अग्र भाग योनी पर ठहर गई।

पेंटी जालीदार होने के कारण उसकी योनी के बाल जाली से झाँक रहे थे ।

पूनम ने अपनी योनी पर हाथ फेराया,

उसके बालो के कारण पेंटी की शोभा बिगाड़ रहे थे ।

पूनम ने लगभग 6 महीने से योनी के बाल साफ़ नहीं किए

जिसके कारण बाल दो इंच के हो गए थे ।

 


पूनम शीशे के सामने अपने जिस्म को मात्र दो कपड़ो में देख कर शर्माती है,

आज से पहले उसने अपने जिश्म को पहले कभी इस तरह घूरा नहीं था ।

पूनम 24 वर्ष की हो चुकी थी, उसकी इच्छाएं उसके जिस्म से निकलने लगी थी।

पति और परिवार की चाह हर लड़की को होती है

लेकिन पूनम की बदनसीबी उसकी गरीबी थी,

जिसके कारण उसका विवाह अभी तक नहीं हो पाया था। दिन तो जैसे तैसे काट लेती लेकिन रात की तन्हाई उसे बहुत तड़पाती थी।

शारीरिक इच्छाएं भड़काने के बावजूद भी पूनम ने कभी घर की मर्यादा को भंग नहीं हॉने दिया।

घर की इज्जत का हमेसा ध्यान रखा।

जब कभी ज्यादा ही जिश्म से आग भड़कने लगती तो खुद ही ऊँगली से अपने आपको शांत कर लेती थी ।

पूनम जालीदार पेंटी के ऊपर निकली झांटे को उंगलिओ से स्पर्श करती है। जिस्म में सिरहन दौड़ने लगती है तभी तनु की आवाज़ आती है ।

तनु-" दीदी जीन्स पहन ली क्या, बहुत देर लगा रही हो"' पूनम एक दम चोंकती हुई

अपने कपडे पहनती है ।जीन्स और टॉप पहनने के बाद पूनम एक दम सेक्सी बोम्ब जैसी लग रही थी ।

जिस्म ऐसा था की शायद उसको सनी लीओन भी देख ले तो शर्मा जाए ।

पूनम बॉथरूम से बहार निकलती है ।

तनु पूनम को देख कर खुश हो जाती है ।

पूनम जीन्स में बाकई बहुत मस्त लग रही थी ।

तनु-" wowwe दीदी आप तो बहुत सुन्दर लग रही हो"

पूनम बहुत शर्मा जाती है और कुछ बोल नहीं पाती है ।तनु पूनम का हाथ पकड़ कर

माँ के रूम में जाती है ।

रेखा भी पूनम का सुन्दर रूप देख कर खुश थी ।

इधर सूरज गाडी लेकर नए घर यानी की सूर्या के घर की तरफ निकल आया था।

संध्या और तान्या सूर्या की यादास्त चली

जाने से बहुत दुखी और परेसान थी।

और बहुत देर से उसके आने का इंतज़ार कर रही थी

तभी बहार सूरज की गाडी की आवाज़ सुनकर उसे सुकून मिलता है ।

सूरज के अंदर आते ही संध्या पूछती है।

संध्या-" बेटा मंदिर से लौटने बड़ी देर लगा दी, भूका प्यासा ही चला गया तू ।

सूरज-" मंदिर से आने के बाद घूमने चला गया था माँ"

संध्या-" चल बेटा खाना खा ले, सब तेरी पसंद का बनाया है" सूरज को भी बहुत तेज भूंक लगी थी इसलिए माँ और बेटा दोनों बैठ कर खाना खाने लगते हैं ।

सूरज-" माँ दीदी कहाँ है ? तान्या उसे दिखाई नहीं दी इसलिए माँ से पूछता है

संध्या-" कंपनी की जरुरी मीटिंग थी आज

इसलिए थोडा देर से आएगी।

तू जल्दी से ठीक हो जा फिर सारी जिम्मेदारी तुझे ही संभालनी है बेटा,

सूरज-" हाँ माँ अब में दीदी के साथ जाया करूँगा, जल्दी सीख जाऊँगा"

संध्या-" तूने मेरे मन की बात कह दी बेटा"

कितना बदल गया है तू, एक समय ऐसा था तू अपनी दीदी की सकल भी नहीं देखना पसंद करता था,

आज उसके साथ बिजनेस की जिम्मेदारी संभालने की बात कर रहा है ।

में बहुत खुश हूँ तेरे इस भोलेपन रवैये से।

सूरज-" माँ में पहले कैसा था?? मन में उमड़े सवालो के उत्तर के लिए सूरज चिंतित था और सूर्या की जीवन शैली उसका व्यवहार

अब जानना चाहता था सूरज ।

संध्या-' बेटा अपने अतीत के बारे में मत पूछ, आज तेरे इस भोलेपन के रूप से में बहुत प्रशन्न हूँ जो कमसे कम मेरे साथ बैठकर खाना तो खा रहा है, आज से पहले तो तूने कभी ढंग से बात भी नहीं की"

संध्या रुआंसी हो जाती है ।

सूरज माँ के पास जाता है और गले लगा लेता है संध्या सूरज को सीने से चुपका लेती है।

और बहुत सारी पुच्ची उसके गालो पर करने लगती है।

संध्या बहुत खुश थी आज कई सालो बाद उसने अपने बेटा को सीने से गले लगाया था

संध्या नहीं चाहती थी की सूरज की फिर से

यादास्त वापिस लौटे और वह फिर आवारा गर्दी और अय्यासी के दल दल में चला जाए ।

रात्रि के समय सूरज अपने रूम लेटने चला जाता है। आज पहला दिन था उसके लिए की किसी आलीसान कोठी के सुन्दर

सुबिधाओं से परिपूर्ण कमरे के नरम गद्दे पर लेटा था।एक ही दिन में उसकी कैसे जिंदगी

बदल गई इसी के बारे में सब सोच रहा था।

इस घर में सूर्या का रूप तो धारण कर लिया था सूरज ने

लेकिन अब सूर्या बनकर सारी समस्याओं को कैसे सुलझाया जाए

यही बाते सूरज के मन मस्तिक में दौड़ रही थी ।

सूरज अभी तक अनभिज्ञ था सूर्या के

परिवार के बारे में कोई जानकारी

हांसिल नहीं थी उसे।

सूरज सोचता है की कैसे सूर्या के बिजनेस को सम्भालू ?

जबकि में गाँव गंवार लकड़ी काटने वाला लकड़हारा इतने बड़े बिजनेस को कैसे

सम्भाल सकूँगा? मुझे सब सीखना होगा,

हालांकि 12वीं तक पढ़ा था सूरज, हिंदी अंग्रेजी और गणित में अव्वल था लेकिन

व्यवस्याय शिक्षा के बारे में जीरो था।

सूरज सोचता है क्यूँ न किसी अच्छे शिक्षक से व्यवस्याय और कम्प्यूटर तकनिकी की

शिक्षा ले ली जाए, बिना कम्प्यूटर ज्ञान के

अच्छा बिजनेस मेन नहीं बन सकता हूँ।

सूरज मन में ठान लेता है की कल से ही

शहरी जिंदगी जीने के लिए कम्प्यूटर और

कॉमर्स की ट्युन्सन लगा लूंगा ।

ज़िन्दगी बदलने के लिए खुद को बदलना

बहुत आवश्यक है, परिवर्तन प्रकृति का नियम है । इसलिए धीरे-धीरे सब कुछ सीखना है और खुद की बहन पूनम और तनु के लिए भी आगे शिक्षा के लिए स्कूल में दाखिला करवा दूंगा ।

इधर रात्रि के 10 बजे तान्या घर आती है।

संध्या और तान्या आज की बिजनेस मीटिंग

के बारे में डिस्कसन कर रही थी।

संध्या का कपड़ो की फेक्ट्री थी, सभी कपडे विदेश जाते थे ।

तान्या खुश थी क्योंकि आज उसकी कंपनी को पचास करोङ का टेंडर मिला था ।

दोनों माँ बेटी बहुत खुश थी ।संध्या डायनिंग टेबल पर खाना खा रही थी ।

संध्या को आज दो ख़ुशी एक साथ मिली थी,

एक तो उसका बेटा घर आ गया था दूसरी ख़ुशी कंपनी के टेंडर की थी।

संध्या तान्या की ओर कुर्सी डाल कर बैठ जाती है

और तान्या से बोलती है

संध्या-" तान्या बेटा तुझ से सूर्या के बारे में बात करना चाहती हूँ ।

तान्या संध्या की ओर देखती है लेकिन

कुछ बोलती नहीं है, तान्या अब से पहले

सूर्या से बहुत नफरत किया करती थी,

बात करना तो दूर की बात उसकी

सकल भी देखना पसंद नहीं करती थी।

तान्या-" बोलो मोम क्या बात करनी है? बेटी के इस नरम रवैये से संध्या खुश थी।

संध्या-" बेटा सूर्या को कुछ याद नहीं है,

उसकी यादास्त वास्तव में चली गई है,

उसके चेहरे के भोलेपन को मैंने

महसूस किया है बेटा, आज से पहले मैंने

कभी सपने में भी नहीं सोचा था की

मुझे बेटा का प्यार नसीब होगा,

हमेसा यही सोचती थी की उसके

अंदर सुधार आए, वो अपनी जिम्मेदारी को

संभाले, बिजनेस और परिवार को ध्यान दे।

ऐसा लगता है जैसे मेरी मनोकामना पूरी हो

गई हो, में नहीं चाहती हूँ की उसे उसकी

पिछली ज़िन्दगी के बारे में कुछ पता चले और

वह फिर से उसी दुनिया में लौट जाए"" संध्या गंभीर होती हुई बोली, तान्या भी नहीं

चाहती थी की फिर से इस घर में कलेस हो इसलिए अपनी माँ को भरोसा दिलाती

है की वह उसे उसकी ज़िन्दगी के बारे में कुछ नहीं बताएगी।

तान्या-"माँ तुम बेफिक्र रहो हम उसे कुछ नहीं बताएंगे ।तान्या की बात सुनकर संध्या को सुकून मिलता है।

संध्या-" बेटी अब सो जाओ बहुत रात हो गई है, कल से तुम सूर्या का थोडा ध्यान रखना, उसे बिजनेस और कंपनी के

सभी काम सिखाओ"

तान्या-" ठीक है मोम, में प्रयास करुँगी,

अब आप भी सो जाओ.

तान्या ने संध्या को गुड नाईट किस्स किया और ऊपर सूर्या के

बगल बाले अपने कमरे में चली गई

अब सूर्या के परिवार के बारे में थोडा जान लेते हैं -

संध्या सिंह- अपने पिता की एकलौती संतान थी, इनके पिता की 2 फेक्ट्री थी,

अमीर घर की लड़की होने के कारण

इनका विवाह एक रहीश परिवार में हुआ

लेकिन शादी के दो साल बाद इनके पति की मृत्य हो गई। संध्या उस समय तान्या को

जन्म दे चुकी थी ।

संध्या के विधवा होने का दुःख संध्या के पिता बहुत हुआ ।

इसलिए उन्होंने अपने फेक्ट्री में काम करने वाले एक बफादार नोकर BP Singh से करवा दी। सूर्याप्रताप इन्ही से पैदा है ये बात सिर्फ संध्या और BP Singh ही जानते हैं। (झगडे का खुलाशा कहानी के अंत में ही होगा)

संध्या पढ़ी लिखी लड़की थी, अपने पिता का पूरा बिजनेस खुद ही सम्भाला ।

 


सूर्या के पिता-B.P.Singh

संध्या के पिता की फेक्ट्री में मजदूरी करते थे,

संध्या से शादी कर ली क्योंकि संध्या के पिता बहुत बड़े बिजनेस मैन थे। संध्या के पिता के मारने के पस्चात सभी फेक्ट्री के मालिक बन गए।

अमेरिका में रह कर बिजनेस सँभालते हैं।

15 वर्ष पहले अमेरिका चले गए।

संध्या और इनके बीच किसी बात को लेकर

झगड़ा हो गया, झगड़ा किस बात पर हुआ ये बात सिर्फ संध्या ही जानती है।

तान्या-" 24 वर्षीय खूबसूरत लड़की थी

MBA की पढ़ाई करने के बाद अपनी माँ के साथ खुद की फेक्ट्री और बिजनेस को संभालती है ।

बिजनेस के चक्कर में अपनी असल जिंदगी

को भूल गई। तान्या किसी मोडल से कम नहीं लगती थी।

लेकिन आज तक उसने कभी अपना bf नहीं बनाया।

थोड़ी सख्त मिजाज और चीड़ चिड़ी स्वभाव की हो गई थी ।

सूर्या से हमेसा इसका झगड़ा रहता था ।

सूर्यप्रताप सिंह- 21 वर्षीय था। BBA करने के लिए मुम्बई होस्टल में पढ़ा,

गलत सांगत में पड़ कर शराब सिगरेट और

अय्यासी सीख गया ।लड़ाई झगड़ा करना दोस्तों के साथ देर रात तक घूमना

इसका सबसे बड़ा शोक था ।

जब होस्टल से वापिस घर आया तो घर की

नोकरानी के साथ जबरदस्ती शराब के नशे

में बलात्कार कर दिया तब से तान्या इससे बहुत नफरत करने लगी।सूर्या और तान्या का झगड़ा युद्ध स्तर तक बढ़ गया ।

संध्या सूर्या की हरकतों को लेकर बहुत

परेसान रहती । कई बार शराब के नशे में

तान्या पर हाथ भी छोड़ देता था और गाली गलोच भी करता था ।

पैसा इंसान को बिगाड़ देता है इसका सही

उदाहरण सूर्या था ।

शहर के सबसे बड़े डॉन शंकर की बहन शिवानी को

इसने अपने प्यार के जाल में फसां कर उसके साथ सेक्स किया और फिर उसको छोड़ दिया।

जब ये बात शंकर को पता चली तो उसने सूर्या पर हमला कर दिया सूर्या का आजतक पता नहीं चला लेकिन जब संध्या को

इस बात का पता चला तो संध्या ने शंकर के

खिलाफ पुलिस की मदद से शंकर को जेल भिजबा दिया ।

शंकर के आदमी संध्या के दुश्मन बन गए ।

आज मंदिर पर उन्होंने संध्या पर हमला भी

किया लेकिन सूरज ने उन्हें बचा लिया।

शंकर के आदमी सूरज को सूर्या समझ बैठे

और ये बात शंकर को जेल में जाकर

बता दिया । शंकर सूर्या के जिन्दा होने की

खबर सुनकर आग बबूला हो जाता है ।

और मौके का इंतज़ार करता है ।

इधर शंकर डॉन की बहन शिवानी को भी पता चल जाता है की सूर्या जिन्दा है तो

वह भी अपना बदला लेने के लिए मौके

का इंतज़ार करने लगती हैं।

अब आगे देखते हैं की सूरज की ज़िन्दगी

में क्या होगा ।

सूरज अपनी असली हकीकत को छुपा पाएगा, कब तक अपनी असली पहचान को छुपा रख सकता है ।

1- क्या सूरज अपनी बहन पूनम और तनु को शहर की ज़िन्दगी और खुशियाँ दे पाएगा?

2-अपनी माँ रेखा के दुखो को कैसे दूर कर पाएगा ।

3- बिजनेस और फेक्ट्री को संभाल पाएगा

4- तान्या का दिल जित पाएगा

5-संध्या को एक माँ के रूप में उसे खुश रख पाएगा ।

6-शंकर डॉन से लड़ पाएगा

7- शिवानी को न्याय दिला पाएगा

8-"संध्या और BPsingh की लड़ाई झगडे की बजह क्या थी।

9- गाँव का चौधरी हरिया की मौत का बदला कैसे लेगा सूरज से।

सूरज के सामने सूर्या की ज़िन्दगी एक चुनौती की तरह थी जिसे स्वीकार कर लिया था सूरज ने । ये सूरज के लिए एक संघर्ष था जिसमे उसे कामयाबी हांसिल करनी है ।

सुबह के सूरज की पहली किरण सूरज की नई ज़िन्दगी के लिए अहम् थी।

सूरज गहरी नींद में सोया हुआ था।

संध्या उसे उठाने आती है।

संध्या-" सूर्या सूर्या बेटा उठो, सुबह हो गई

नीचे आकर चाय नास्ता कर लो""

सूरज कसमसा कर उठता है ।संध्या प्यार से उसके सर पर हाथ फिरा कर उठा रही थी ।

सूरज-" माँ बस थोड़ी देर में आता हूँ"

संध्या-" जल्दी फ्रेस होकर आओ बेटा, में नीचे इंतज़ार कर रही हूँ" संध्या चली जाती है ।

सूरज फ्रेस होकर नीचे जाता है । और डायनिंग टेबल पर बैठकर नास्ता करता है।

तभी तान्या तैयार होकर कंपनी के लिए जा रही होती है ।

तान्या-" मोम में जा रही कंपनी,

संध्या-" नास्ता तो करती जा बेटा"

तान्या-" नहीं मॉम लेट हो रही हूँ,नास्ता

अपने ऑफिस में ही कर लूँगी"इतना कह कर तान्या चली गई ।

मैंने नास्ता कर लिया, आज मुझे पूनम, और

तनु का किसी अच्छे स्कूल में एडमिसन करवाना था इसलिए मुझे भी जल्दी फार्महाउस पर जाना था ।

मै-" माँ में सब कुछ भूल चूका हूँ इसलिए मुझे कम्प्यूटर और बिजनेस की पढ़ाई द्वारा

सीखनी है, किसी अच्छे इंस्टिट्यूट में पढ़ाई कर लेता हूँ,

संध्या-" ये तो अच्छी बात है, इस शहर का

सबसे बड़ा इंस्टिट्यूट

" जे.एस.इंस्टिट्यूट" है उसमे चले जाना,

में फोन से बात कर लूँगी, तुम्हे कोई परेसानी नहीं होगी,

सूरज-" ठीक है माँ में गाडी से चला जाता हूँ"

संध्या-" एक मिनट रुक बेटा" संध्या अपने पर्स में दो ATM निकाल कर देती है।

संध्या-" बेटा ये ATM है जितने पैसो की जरुरत हो निकाल लेना" संध्या दोनों के पासवर्ड बता देती है और साथ में एक मोबाइल भी दे देती है ।

संध्या-" बेटा कोई परेसानी हो तो फोन कर लेना"

सूरज-" ठीक है मॉम चलता हूँ अब" अपनी माँ को गले लगता है और बहार ड्राइवर को लेकर चल देता है फार्महाउस की तरफ।

सूरज गाडी की सीट पर जैसे ही बैठता है उसे एक पैकेट दिखाई देता है ।

सूरज पैकेट को खोल कर देखता है तो उसे ब्रा और पेंटी दिखाई देती हैं ।

सूरज चोंक जाता है और मन में सोचने लगता है की शायद कल शॉपिंग वाले बेग से गिर गया होगा ।

सूरज सोचता है की अब तनु को यह कैसे दिया जाए ।

सूरज ब्रा और पेंटी के गिफ्ट पैक को गाडी की जेब में रख देता है । और अपनी माँ संध्या के दिए गए मोबाइल को देखने लगता है ।

सूरज android फोन लेकर बहुत खुश था।

काफी देर मोबाइल को देखते देखते फार्म हाउस आ जाता है।

सूरज घर पहुचते ही देखता है

तनु और पूनम नास्ता करके गप्पे मार रही थी। जैसे ही सूरज को सब लोग देखते हैं खुश हो जाते हैं ।

सूरज-" पूनम और तनु दीदी आप दोनों

मेरे साथ चलो आपका एड्मिसन करवाना है।

पूनम-" अभी चलना है?

सूरज-" हाँ दीदी

तनु-" 5 मिनट रुको हम दोनों तैयार होकर आते हैं ।

पूनम और तनु खुश होकर तैयार होने चले जाते हैं ।

5 मिनट में दोनों बहने तैयार होकर घर से इंस्टिट्यूट चल देते हैं ।

पूनम और तनु बहुत खुस थी ।

institute के प्रिसिपल ऑफिस में पहुचकर

सूरज अपना परिचय देता है ।

प्रिसिपल-" खड़ा होकर! सूर्या सर आइए

ये इंस्टिट्यूट आपका ही है । संध्या मेडम का फोन आ गया था मेरे पास ।

सूरज-" धन्यवाद प्रिंसिपल जी, तीन एड्मिसन आपको करने है ।

सूरज तनु और पूनम का एडमिसन करवा देता है । और स्वयं का भी ।

पूनम का BBA में एड्मिसन और तनु का

12वीं में करवाता है । और खुद कम्प्यूटर क्लासेस में करवाता है ।

प्रिंसिपल-" बेटा आप लोग कल से क्लासेस अटेंड करने आइए ।आपको कोई परेसानी नहीं होगी ।

सूरज-' सर फीस बताइए कितनी देनी है"

प्रिंसिपल हाथ जोड़ कर खड़ा हो जाता है।

प्रिंसिपल-" हमारे इंस्टिट्यूट का सोभाग्य है की आप आए हो ।हमारा इंस्टिट्यूट आपके ही पैसो से चलता है ।

सूरज प्रिंसिपल को नमस्ते बोल कर वापिस चल देता है ।

इंस्टिट्यूट बहुत आलीसान कई एकड़ जमीन में बना हुआ था ।

पूनम और तनु तो आँखे फाड़ कर उसकी भव्यता का मुयायना कर रही थी।

सभी लोग गाडी में बैठ कर फ़ार्म हाउस की तरफ चल देते हैं ।

सूरज-"दीदी आप दोनों डेली क्लास अटेंड जरूर करना, में अभी आ जाया करूँगा।

फ़ार्म हाउस पहुच कर सब अपने रूम की ओर चले गए ।

सूरज तनु और पुनम अपनी पढ़ाई में मगसुल हो जाती है ।

रोजाना इंस्टिट्यूट जाना और घर आ कर पढ़ाई करना ।

इधर तान्या दीदी कंपनी के बढ़ते कारोबार के चक्कर में पुरे दिन व्यस्त रहना ।

संध्या सूरज को कारोबार के बारे में हर एक जानकारी बता दिया करती थी ।

इसी प्रकार सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था । सब बहुत खुश थे ।

 
कहानी को थोडा आगे बढ़ाते हुए

After 5 Month......

5 महीने का समय सूरज पूनम और तनु का

स्कूल क्लासेज में ही बीत जाता है ।

इन पांच महीनो में सूरज पूनम और तनु शहर के माहोल में ढल जाते हैं ।

वर्तमान परिवेश के हिसाब से सूरज पूनम और तनु मोबाइल, गाडी और कम्प्यूटर सब कुछ सीख जाती हैं ।

बड़े इंस्टिट्यूट के माहोल में आकर नई नई सहेलिया भी बना ली थी ।

पूनम तो बहुत सीधी लड़की थी लेकिन तनु की सहेलियों का बहुत बड़ा गैंग बना लेती हैं। पूनम ने भी अपनी हमउम्र की सीमा नाम की सहेली बना ली थी ।

सीमा दिल की बहुत अच्छी लड़की थी लेकिन सेक्स की बहुत प्यासी थी ।

जब भी पूनम के पास बैठती अपने bf की बाते और उसके साथ किए गए सेक्स की बातें करती रहती थी ।

पूनम सीमा को डांटती रहती लेकिन सीमा जब तक अपनी सेक्स की पूरी बात न बता देती तब तक उसे सुकून नहीं मिलता।

इन सब बातों को सुनकर पूनम के अंदर हलचल सुरु हो जाती थी और रात मे उंगलियो से अपने जिस्म की भड़ास को शांत कर लेती थी । ये उम्र का तकाज़ा ही ऐसा होता है। जिस प्रकार भूक मिटाने के लिए ईश्वर ने भोजन की व्यवस्था की है उसी प्रकार जिस्म की भूक शांत करने के लिए नर और नारी के निशेचन क्रिया की व्यवस्था की है ।

पूनम की उम्र के हिसाब से उसे पति की आवस्यकता महसूस होने लगी थी ।

कॉलेज में उसे कई लड़के लाइन भी मारते थे लेकिन डरती थी कहीं कुछ गलत न हो जाए। समाज और परिवार का भय ऊपर से उसका लालन पालन गरीबी में हुआ । पूनम हर अमीर लड़के से बात करने में कतराती थी । पूनम पढ़ने में होशियार थी कुछ ही समय में पूरा कॉलेज उसकी होशियारी की दाद देता था ।

तनु भी पढ़ने में बहुत होशियार थी लेकिन वह अपनी सहेलियों के साथ पुरे दिन गप्पे मारती रहती थी । तनु हँसमुख थी कॉलेज का हर लड़का उसे देख कर आहें भरता था । तनु लड़को को जलाने में बहुत मजा आता था । तनु की एक सहेली शैली नाम की थी बहुत ही चुदक्कड़ टाइप की थी । शैली सूरज पर बहुत फ़िदा थी । एक दिन तनु और शैली कॉलेज के केन्टीन में बैठी हुई थी तभी सूरज वहां आता है । तनु भाई को देख कर तुरंत अपने पास कुर्सी पर बैठाल लेती है ।

सूरज-" तनु दीदी आज आपने क्लास अटेंड नहीं की?

तनु-" नहीं सूरज बड़ा बोरिंग चेप्टर पढ़ा रहें हैं टीचर इसलिए केन्टीन आ गई ।

शैली-" सूरज तुम तो पुरे दिन पढ़ाई में ही चुपके रहते हो कभी हमारे पास भी बैठ जाया करो"" सूरज को बड़े सेक्सी अंदाज में बोलती है । तनु शैली को आँखे दिखाती हुई चुप रहने को बोलती है ।

सूरज-" शैली दीदी ! कॉलेज पढ़ाई करने के लिए होता है, कभी घर आओ वहीँ बैठ कर बातें करेंगे"" सूरज शैली को दीदी बोलता है । शैली मन ही मन चिढ जाती है ।

सूरज वहां से उठ कर क्लास अटेंड करने क्लास रूम में चला जाता है ।

शैली-" तेरा भाई कितना अकड़ू है कभी ढंग से बात ही नहीं करता है ।

तनु-" वो मेरा भाई है तू अपना हवसी दिमाग उसपर मत चला"हस्ती हुई बोलती है।

शैली-" कितना हेंडसम है तेरा भाई, एक बार सेट करवा दे, उसे भी रोमांटिक बना दूंगी"

तनु-' अपनी बकबास बंद कर शैली तुझसे उम्र में छोटा है" डाँटती हुई बोली

शैली-" उम्र में छोटा हुआ तो क्या बात है उसका पप्पू बड़ा होना चाहिए" तनु अपने भाई के बारे में ऐसी बात सुनकर शर्मा जाती है और शैली को मारने लगती है ।

तनु-" साली तू कभी नहीं सुधरेगी, तेरे दिमाग में सेक्स का कीड़ा घुसा है"

शैली-"वही कीड़ा तू एक बार घुसवा ले तुझे भी चस्का चढ़ जाएगा"शैली छेड़ती हुई बोली

तनु का चेहरा लाल पढ़ जाता है ।

सेक्स की बातों में तनु को बहुत मजा आता था ।

शैली ने तनु को सेक्स की सभी प्रकार की मूवी दिखा चुकी थी । कई बार तो शैली अपने घर तनु को बुला कर घर ले जाती थी जब घर पर उसके मम्मी पापा कहीं बहार होते थे । शैली लेपटोप में ब्लू फ़िल्म लगा कर तनु के सामने ही अपनी चूत में ऊँगली करने लगती थी । तनु चुपचाप देखती रहती कभी उसने शैली के सामने ऊँगली नहीं की हालांकि उसकी भी पेंटी गीली हो जाती थी ।तनु घर आकर बाथरूम में ऊँगली या टूथब्रूस का उल्टा हिस्सा अपनी चूत में डाल कर अपनी काम अग्नि को शांत करती थी।

सूरज को भी सेक्स में बहुत रुचि थी लेकिन किसी के साथ अपनी सेक्स फिलिंग्स को शेयर नहीं करता था ।

ज़िन्दगी ऐसे ही गुज़र रही थी ।

बदलते वक़्त और परिवेश में अपने आपको ढालते गए ।

लेकिन आने वाला समय एक तूफ़ान की ओर अग्रसर था जिससे तीनो बहन भाई अनजान थे ।

ये तूफ़ान हवस का था। देखते हैं इस तूफ़ान से किस किस की ज़िन्दगी बदलती है।

समय का पहिया अपनी रफ़्तार से बढ़ रहा था । ये रफ़्तार इतनी तेज थी की

सूरज और पूनम तनु की ज़िन्दगी भी बदल सी गई थी ।शहर की इस ज़िन्दगी ने पुरानी

गाँव की यादों को बहुत पीछे छोड़ दिया था। गाँव के उस काले अतीत को सभी ने अपने दिलो दिमाग से निकाल दिया था।

सभी अपने इस आधुनिक जीवन से खुश थे।

संध्या अपने बेटे के भोलेपन और मधुर व्यवहार से खुश थी ।

तान्या अपने काम से काम रखती थी

कंपनी को संभालने में ही उसका पूरा दिन लग जाता है

इधर पूनम और तनु कॉलेज से घर और सहेलियों में दिन कब कट जाता है ।

थोडा बहुत समय मिलता है तो whatsap और fecebook में चेंटिंग करती रहती है ।

सूरज ने दोनों बहनो को android फोन दिलवा दिया था ।

सूरज ने तनु के लिए एक्टिवा गाडी दिलबा दी थी स्कूल जाने के लिए, पूनम और तनु एक साथ स्कूल जाती और आती थी ।

सूरज खुद bike या कभी कार से स्कूल आता जाता था ।

स्कूल में तनु शैली पूनम और सीमा की मस्ती चलती रहती थी ।

एक दिन सूरज केंटीन में बैठ कर कोल्डरिंग पी रहा था । तभी तनु और शैली सूरज के पास आती हैं ।

तनु-" सूरज भाई अकेले ही बैठकर कोल्डरिंग पी रहे हो"

सूरज-"ओह्हो तनु दीदी आप, बैठो आपके लिए कोल्डरिंग मंगवाता हूँ ।

शैली-" सिर्फ अपनी दीदी के लिए और में क्या पियूँगी? शैली नटखट अंदाज़ में बोलती है ।

सूरज-" आपके लिए भी मंगवाता हूँ शैली दीदी बैठो ।कुर्सी पर बैठने के लिए बोलता है ।

बेटर सबके लिए कोल्डरिंग और नास्ता लगाता है ।

तनु-" सूरज आज शैली का बर्थ डे है"

सूरज-" ओह्हो अच्छा Happy birth Day शैली दी ।

शैली-" इस तरह wish कबुल नहीं करुँगी"शैली मुँह बनाते हुए बोली

सूरज-" फिर कैसे दीदी"

शैली-" आज मेरे घर पर आकर celebrete करना होगा तुम्हे और तनु को"'

सूरज-" में नहीं आ पाउँगा तनु दीदी चली जाएगी"

तनु-" सूरज में अकेली नहीं जाउंगी, वो भी रात में"

शैली-"में कुछ नहीं सुनना चाहती हूँ तुम दोनों को ही आना पड़ेगा मेरे घर"

सूरज-" ठीक है आ जाउंगा" शैली और तनु खुश हो जाती हैं ।

शैली-" 9 बजे से आ जाना पक्का, बरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा"शैली अपना हुकुम सुनाती हुई बोलती है ।

तीनो हँसने लगते हैं । इंस्टिट्यूट की छुट्टी के बाद सभी अपने घर चले जाते हैं ।

सूरज घर आकर कंपनी के बारे में स्टडी करने लगता है । अपनी कंपनी के बारे में बहुत कुछ सीख गया था ।लेकिन अभी जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार नहीं था।

संध्या सूरज की इस लगन को देख कर बहुत खुश थी ।

सूरज का अधिक समय पढ़ाई में निकलता था ।

ज्यादा थक जाने पर सो जाता था ।

सूरज अपने कमरे में सो रहा था तभी उसका मोबाइल बजा

सूरज मोबाइल देखता है तनु की कई मिस्ड कोल थी ।सूरज को याद आता है उसे आज शैली के जन्मदिन पर घर उसके घर जाना था।

सूरज फोन उठाता है ।

तनु-"सूरज कहाँ हो कबसे फोन कर रही हूँ"

सूरज-"दीदी कंपनी में हूँ पता नहीं चल पाया"(सूरज ने पूनम तनु और रेखा को यही बताया था की वो कंपनी में ही रहता है)

तनु-" 9 बज रहें है शैली के घर भी जाना है"

सूरज घडी में समय देखता है तो चोंक जाता है ।

सूरज- दीदी बस 15 मिनट में आ रहा हूँ आप तैयार मिलो"

तनु-"में तैयार हूँ तुम जल्दी आओ"

सूरज-" बस अभी आया"फोन काट देता है।

सूरज आनन् फानन में तैयार होकर नीचे आता है ।

संध्या कंपनी की फ़ाइल पढ़ रही थी।

सूरज-"माँ में एक दोस्त के जन्मदिन में जा रहा हूँ । थोडा लेट हो जाऊँगा"

संध्या-" बेटा रात ज्यादा हो जाए तो बहीं रुक जाना और मुझे फोन कर देना, संभल कर जाना।

सूरज-" ठीक है माँ"

संध्या-" गाडी से जाना bike से नहीं

सूरज-"okkk मेरी माँ, जा रहा हूँ लेट हो गया हूँ ।

सूरज गाडी निकाल कर चल देता है ।

गाडी को खुद ही ड्राइव कर बड़ी तेजी से रोड पर दौड़ता हुआ 15 मिनट में फ़ार्म हाउस पहुँचता है ।

तनु बहार ही सूरज का इंतज़ार कर रही थी । सूरज गाडी को तनु के पास रौकता है और आगे वाली फ्रोन्ट सीट बैठा कर पुनः गाडी को हाईवे पर दौड़ाने लगता है ।

तनु-" कितनी देर लगा दी सूरज, शैली पचास बार कॉल कर चुकी है मेरे पास"

सूरज-" सॉरी दीदी" तनु की ओर देखते हुए बोलता है । तनु पंजाबी कुर्ती और ब्लैक लेगी पहनी हुई थी ।बहुत सुन्दर लग रही थी।

सूरज-" वाह्ह दीदी इस ड्रेस में पंजाबन कुड़ी लग रही हो एक दम गज़ब"'

तनु-" ग़ज़ब तो में हूँ ही, इसमें कोई शक नहीं है" तनु atitude में बोलती, मजाक के लहजे में और हसने लगती है ।

सूरज-" वो तो है दीदी, मेरी दीदी गज़ब तो होगी ही"' हस्ते हुए

बात करते हुए शैली का घर आ जाता है ।

सूरज गाड़ी को साइड में लगा कर लोक करता है ।

तनु गेट बजाती है ।

दरवाजा शैली खोलती है और तनु को भला बुरा कहने लगती है ।

शैली-" आ गई महारानी, बड़ी जल्दी आ गई तुम"

तनु-" में तो जल्दी तैयार हो गई, सूरज ही लेट आया तो में क्या करू"'

जब तक सूरज भी आ जाता है ।

सूरज-" दीदी बहार ही खड़ा रखोगी क्या, अंदर तो आने दो"

तनु-"ओह्हो में तो भूल ही गई ।

तीनो लोग अंदर आते हैं ।

तनु बहुत सेक्सी हॉट ड्रेस पहनी हुई थी ।

जिसमे उसके आधे बूब्स और झाँघे नंगी थी। सूरज की नज़र कभी उसके बूब्स पर जाती तो कभी उसकी जांघो पर ।

शैली का घर बहुत आलीसान बना हुआ था । सूरज लॉन में पड़े सोफे पर बैठ जाता है

तनु शैली के साथ किचेन में थी ।

शैली बात तनु से कर रही थी लेकिन उसकी नज़र सूरज पर थी ।

शैली सूरज के लिए कोल्ड ड्रिंक लेकर आती है । जैसे ही झुकती है उसके बूब्स सूरज के सामने आ जाते हैं ।टॉप के अंदर ब्रा न होने के कारण उसके निप्पल सूरज को दिखाई दे जाते हैं ।

सूरज हड़बड़ा सा जाता है आज से पहले उसने किसी लड़की के खुले बूब्स और निप्पल तक नहीं देखे । सूरज के जिस्म में खुनी बड़ी तेजी से दौड़ने लगता है ।

सूरज कभी शैली के बारे में गलत नहीं सोचता था हमेसा उसे दीदी की तरह ही मानता था ।

शैली भी सूरज की नज़र अपने बूब्स पर पाकर मंद ही मंद मुस्करा देती है ।

उसके चेहरे की कुटिल मुस्कान से ऐसा लग रहा था की उसने ये सब जानबूझ कर किया हो ।

शैली-" क्या हुआ सूरज पियो न" सूरज हड़बडाता हुआ कोल्डरिंग का ग्लास लेकर पिने लगता है । शैली भी कम नहीं थी

अपनी हर बात को ऐसे बोलती थी जिसका दो अर्थ निकलता हो ।

सूरज-" धन्यवाद दीदी" कोल्ड ड्रिंक का ग्लास खाली करते हुए बोलता है ।

शैली-" सूरज कोल्ड ड्रिंक और पीओ न" फिर से झुक कर सूरज के ग्लास में कोल्ड ड्रिंक डालने लगती है लेकिन सूरज मना कर देता है । सूरज की नज़र फिर से शैली के बूब्स पर पहुच जाती है इस बार पहले से ज्यादा उसके बूब्स और निप्पल दिखने लगते हैं । सूरज के जिस्म में उत्तेजना का संचार होने लगता है और उसके लिंग में तनाव महसूस करता है । तनु इन सब से बेखबर थी । किचेन में ही खड़ी होकर कोल्ड ड्रिंक पी रही थी ।

 


शैली-" कोल्ड ड्रिंक पसंद नहीं है तो दूध पिओगे" शैली के इस धमाके से सूरज हिल जाता है और शैली के बूब्स की ओर देखने लगता है । शैली को सूरज को तड़पाने में बड़ा आनंद आ रहा था । सूरज ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की शैली उससे इतना खुल कर बात करेगी ।

शैली-" बोलो न सूरज दूध पिओगे? एक गिलास ले आऊं दूध किचेन से ।शैली बात को संभालते हुए बोली ।

सूरज बड़ा सुकून मिलता है की शैली अपने दूध की नहीं किचेन में रखे दूध पिने के लिए बोल रही है ।

सूरज-" नहीं दीदी बस, अब कुछ नहीं" सूरज के मुख से शब्द भी नहीं निकल रहे थे । शैली सूरज की हालात को देख कर मुस्कराती हुई किचेन में चली गई ।

सूरज अभी भी सोफे पर बैठा शैली के बारे में सोच रहा था, शैली का जिस्म और सुन्दर रूप सूरज के दिलो दिमाग पर प्रहार कर चुकी थी । बार बार उसकी नज़रे शैली के गोलाकार नितम्ब पर टिक जाती थी ।

सूरज के जीवन में यह पहली घटना थी कीसी लड़की के वक्ष स्थल को स्पष्ट तरीके से मुयायना करना,शैली के स्तन का आकार 34D से कम नहीं था और नितम्ब भी बहार की ओर निकले हुए थे ।

सूरज अपने मन पर काबू करता है और अपना ध्यान शैली से हटाने का प्रयास करता है । शैली तनु दीदी की सहेली है और हमेसा शैली को एक बहन की नज़रो से ही देखा है । पुरे विस्व में भारत ही एक ऐसा देश हैं जहां लड़का एक बार किसी से रिश्ता जोड़ ले फिर कभी उसके बारे में गलत नहीं सोचता।लेकिन यहां लगती सूरज की नहीं थी वल्कि शैली की थी जिश्म की आग को शांत करने के लिए किसी भी हद तक जाने वाली लड़की थी । बड़े बड़े धुरंदर शैली के bf हुए जो शैली के जिस्म की आग शांत करने का दावा करते रहे लेकिन कोई भी उसकी आग शांत नहीं कर पाया ।

शैली सूरज के कठोर जिस्म,लंबा तगड़ा शरीर को देख कर सम्मोहित थी ।उसके लम्बे शरीर को देख कर उसके लिंग का मापन अपनी कल्पनाओं में करती थी ।

कई बार मूली,खीरा को अपनी प्यासी चूत में डालकर सूरज के कठोर और सख्त लंड की कल्पना कर चुकी थी ।

सूरज अपनी सोच में डूबा देख शैली और तनु उसके पास आकर सोफे पर बैठ जाती है ।

सूरज सोचता है की आज शैली का जन्मदिन है और घर पर कोई चौथा इंसान इस घर में दिखाई नहीं दे रहा है ।

सूरज-" शैली से! दीदी आज आपका जन्मदिन है और घर में कोई दिखाई नहीं दे रहा है?

शैली-" मम्मी पापा बिजनेस ट्रिप पर गए हैं ।में घर पर अकेली थी, तो सोचा तनु और तुम्हे बुलाकर ही अपना जन्मदिन मना लू ।

सूरज-" लेकिन दीदी सिर्फ हमदोनो को ही क्यूँ बुलाया आपने और भी तो आपके रिलेटिव होंगे,

शैली-" जो लोग दिल के सबसे करीब होते हैं उन्हें ही बुलाया जाता है, और किसी को मेरी फ़िक्र ही नहीं है, मेरे मम्मी पापा को तो मेरा जन्म दिन याद ही नहीं है।उनके लिए उनका बिजनेस से बढ़कर कुछ नहीं है" शैली भावुक होकर बोली

तनु-" कोई नहीं शैली हम न, यादगार जन्मदिन मनाएगें तेरा"

सूरज-" हाँ दीदी आप परेसान मत हो,

हम तीनो लोग ही काफी है धमाकेदार जन्मदिन मनाने के लिए" शैली यह सुनकर खुश हो जाती है ।

तनु-" शैली यह बता तूने क्या क्या तैयारी की है, खाने में क्या बनाया है"

शैली-" मैंने रोस्टेड चिकेन, चिकेन कोरमा, बिरयानी बनाई है"

सूरज-" वाह्ह दीदी, जल्दी से केक काटो फिर खाना खाते हैं"

तनु-" चलो में जल्दी से केक काटने के तैयारी करवाती हूँ, शैली किस रूम में केक काटना है?? उसी रूम को तैयार कर देती हूँ"

शैली-" केक यहीं लॉन में सोफे पर बैठ कर काटूंगी और यहीं बैठ कर खाना खा लेंगे"

शैली का घर बहुत बड़ा था नीचे बहुत बड़ी लॉन थी जिसमे चार सोफे पड़े थे दीवार पर बहुत बड़ी LCD TV लगी हुई थी । नीचे दो रूम और एक गेस्ट रूम था बराबर में किचेन और डायनिंग टेवल थी । ऊपर शैली का रूम था और बराबर में स्टडी रूम था जिसमे कम्प्यूटर और म्यूजिक सिस्टम लगा हुआ था ।

तनु और शैली किचेन में रखे फ्रिज से केक निकाल कर सोफे के बीच में रखे टेबल पर रख देती हैं ।

तभी तनु बोलती है थोडा म्यूजिक होता तो मजा ही आ जाता ।

शैली-" म्यूजिक ऊपर स्टडी बाले रूम में लगा है उसको अभी यहीं नीचे सेट करवा देती हूँ, सूरज तुम मेरे साथ चलो म्यूजिक ऊपर अलमारी में लगा है उतरवाने में मेरी मदद करो"

सूरज-" ठीक है दीदी चलो" सूरज थोडा घबरा भी रहा था

शैली-" तनु तुम जब तक किचेन में सलाद काटकर रखो"

तनु-" okkk

शैली सूरज को ऊपर रूम में लेकर जाती है।

म्यूजिक सिस्टम का बॉक्स ऊपर की अलमारी में रखा था। अलमारी बहुत ऊँचाई पर थी ।

शैली-" सूरज म्यूजिक ऊपर अलमारी से कैसे उतारा जाए ?

सूरज-" दीदी आप स्टूल पर चढ़कर उतार लो" शैली के दिमाग में तभी एक प्लान आता

शैली-' रुको में बहार से स्टूल लेकर आती हूँ । शैली बहार जाकर अपनी पेंटी उतार देती है शैली मिनी स्कर्ट पहनी होती है जो उसकी जाघों तक ही थी। शैली की शैतानी खोपड़ी कई गुना तेज चलती है ।आज उसने सूरज को अपनी चूत दिखाने का पूरा मन बना लिया था । शैली जल्दी से स्टूल लेकर रूम में जाती है और अलमारी के नीचे सेट कर उसपर खड़ी होने लगती है ।

शैली-" सूरज तुम स्टूल को पकड़ो" सूरज स्टूल को पकड़ कर खड़ा हो जाता है,

शैली की कमर की तरफ सूरज का मुँह होता है ।सूरज को चूत के दर्शन कराने के बारे में सोच कर शैली की चूत से कामरस की कुछ बूदें निकलने लगती है ।

शैली म्यूजिक सिस्टम को निकालने की कोसिस करने लगती है उसका हाथ वहां तक पहुँच नहीं पा रहा था ।

शैली पंजो के बल पर खड़ी होने का प्रयास करती है लेकिन खड़ी नहीं हो पाती है ।

शैली-" सूरज स्टूल को छोड़ कर मेरी कमर को पकड़ो, मेरा हाथ अंदर नहीं पहुच पा रहा है"

सूरज कपकपाते हुए हाथो से शैली की कोमल कमर को जैसे ही पकड़ता है शैली और सूरज के जिश्म में सैलाव सा आ जाता है । शैली की सिसक भरी सिसकी निकल जाती है और उसकी चूत से कामरस की दो चार बुँदे निकलने लगती हैं ।

सूरज जैसे ही शैली की कमर को पकड़ता है उसकी नाक शैली की चूत के सामने आ जाती है । शैली बड़ी चालाकी से अपनी स्कर्ट को ऊपर की ओर खींच लेती है जिससे उसकी चूत सूरज की आँखों से सामने आ जाती है । सूरज ने जैसे ही शैली की चूत को देखा उसके लंड ने पेंट के अंदर खुली आज़ादी के जंग के लिए बगावत कर दी ।वो आज़ाद होना चाहता था शैली की रणभूमि चूत से जंग लड़ना चाहता था । लंड की खूंखार अकड़ और बार बार तोप सामान सलामी से उसके जिश्म और दिमाग में एक क्रान्ति पैदा हो गई थी सूरज ने कभी किसी के साथ सम्भोग नहीं किया लेकिन काम क्रिया के सभी ज्ञान से परिचित था।शहर में आने के बाद और इंस्टिट्यूट में दोस्तों के द्वारा अक्सर सेक्स ज्ञान सुनता रहता था ।

शैली जैसे ही पंजो के बल ऊपर की ओर उचक्ती है उसकी चूत सुरज की नाक की नोक से रगड़ जाती है और चूत से निकले कामरस उसकी नाक पर बहने लगता है ।

शैली की मुह से सिसकारी फूटने लगती है लेकिन बड़ी हिम्मत के साथ अपनी आवाज को निकलने नहीं देती है । सूरज पूरी तरह से सेक्स की आग में झूलसने लगता है ।अपने आपको बड़ी हिम्मत के साथ कंट्रोल करता है । सूरज की जगह अगर कोई और लड़का होता तो अबतक पटक कर उसकी चूत की धज्जियाँ उडा देता लेकिन वह मजबूर था वह अपनी मर्यादा को पार नहीं करना चाहता था ।

सूरज के दोनों हाथ शैली की कमर पर थे और उसकी चूत अभी भी उसकी नाक की नोक से रगड़ रही थी, सूरज की नज़र शैली की हलके बालो से हरी भरी रसीली चूत पर टिकी हुई थी शैली जैसे ही पंजो के बल ऊपर की और उचकाती उसकी चूत में सूरज की नाक की नोक घुस जाती शैली को ऐसा करने में ही बड़ा मजा आता है और सोचती है सूरज की नाक के रगड़ने से इतना मजा आ रहा है अगर लण्ड को चूत में घुसवाया तो कितना मजा आएगा इसी बात को सोचते हुए उसकी चूत से पानी बहने लगता है और सूरज की नाक से बहते हुए उसके होंठो तक पहुचने लगता है । सूरज की नाक जैसे ही शैली की चूत में घुसती उसकी चूत की मादक सुघंध सूंघ कर उसका लण्ड फनफनाने लगता और नसे फूलने लगती ।

शैली की चूत का रस नाक से होते हुए उसके होठों तक बहने लगता है सूरज पर रहा नहीं जाता और शैली के कामरस को होठों पर

जीव्ह के माध्यम से चाटने लगता है ।

शैली के कामरस का स्वाद

नमकीन और कसेला था सूरज सारा पानी चाट गया। सूरज का मन कर रहा था की शैली की चूत में जीव्ह डाल कर उसकी चूत का सारा पानी पी जाए लेकिन डरता था ।

शैली और सूरज दोनो जिश्म जिस्म की भड़ास और हवस को शांत करने के में जुटे हुए थे । हालांकि दोनों अनजान बनकर ही एक दूसरे के नज़दीक आ रहे थे ।

शैली की चूत बार बार रगड़ खाने से चर्मसीमा के नजदीक पहुँच जाती है ।

म्यूजिक का डिब्बा पकड़ने के लिए बार बार उचकने से उसकी चूत से कामरस का सैलाव और चरम स्खलन की तीब्रता बढ़ जाती है । सूरज भी इस हवस के चरम स्खलन अपने लण्ड महसूस करता है और शैली की कमर को तेजी से पकड़ कर अपनी नाक चूत में बलपूर्वक घुसाने का प्रयत्न करने लगता है ।

सूरज के इस साहसी बल और कामोत्तेजना को महसूस करती है और चूत को के छेड़ में सूरज की नाक की नोक को अंदर महसूस करते हुए उसका जिस्म में एक अकड़न पैदा होती है। शैली की चूत से कामरस की बौछार सूरज की नाक और मुँह पर होने लगती है । इधर सूरज भी पेंट के अंदर की थोडा सा झड़ जाता है लेकिन पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो पाटा है ।

सूरज जेब से रुमाल निकालता है और मुँह पर लगे कामरस, चूत रस को साफ करता है और पानी को चाट जाता है ।

शैली के झड़ते ही उसे कमजोरी का अहसास होता है।शैली इस बात से अनजान थी की चूत का पानी सूरज ने चाट कर देखा है । सूरज पूरी तरह से हवस में डूब चूका था, दुबारा मौका मिला तो वह चुकेगा नहीं ।

पहली चुदाई का उदघाटन शैली की चूत से ही करेगा । यदि आज नीचे तनु न होती तो शायद अभी इसी वक़्त पटक के चोद भी देता ।

शैली ने जैसा सोचा उससे ज्यादा उसको मजा आया । स्त्री के पास दुनिया का सबसे बड़ा हथियार उसका जिस्म और सूराख ही है। बड़े बड़े महात्मा भी स्त्री के सामने पानी मांग गए तो सूरज जैसे एक तुच्छ इंसान की औकाद ही क्या ।

शैली अपनी काम्यावी पर खुश थी लेकिन यह तो सिर्फ सुरुआत थी जब तक सूरज का लण्ड अपनी चूत में न घुसवा ले तब तक उसे चैन कहाँ था ।

तभी नीचे से तनु की आवाज़ आती है ।

तनु-' अरे जल्दी आजा शैली, क्या हुआ इतनी देर क्यूँ लगा दी" नीचे से ही आवाज़ लगाती है ।

शैली-" अभी आई तनु बस पांच मिनट रुक"

शैली सूरज का कन्धा पकड़ कर नीचे उतरती है ।

शैली-" सूरज संभाल कर पकड़ लेना, म्यूजिक साउंड बहुत अंदर की ओर है इसलिए रहने दो टीवी पर ही सांग चला लेंगे"

सूरज-" ok कोई नहीं दीदी, आप आओ, गिरने नहीं दूंगा" सूरज शैली की कमर को पकड़ कर गॉद में उठाकर नीचे उतार देता है ।

शैली के बूब्स सूरज के मुँह पर दब जाते हैं ।

सूरज-" दीदी आप तो बहुत हलकी हो"

शैली-" हाँ सूरज, खाना पीना शारीर के सिर्फ दो ही जगह लगता है इसलिए ऊपर और नीचे का आकर बढ़ गया है वाकी जगह नहीं" शैली अपने बूब्स और नितम्ब की ओर देखते हुए बोलती है ।सूरज शैली का इशारा समझ जाता है और शर्मा जाता है । अभी की चूत रगड़ाई की घटना को अनजान तरीके से पर्दा डाल दिया था जैसे कुछ हुआ ही न हो और सामान्य तरीके से बात कर रहे थे ।

सूरज-" (बूब्स और नितम्ब देखते हुए) हाँ दीदी यह तो सच है शारीर का विकास सिर्फ दो ही जगह हुआ है" और हँसने लगता है ।तभी शैली की नज़र सूरज की पेंट पर पड़ती है जहां सूरज के वीर्य से भीगी हुई थी ।

शैली-" अरे सूरज तेरी पेंट कैसे गीली है" शैली सूरज के लण्ड की ओर इशारा करती है । सूरज के होश उड़ जाते हैं, उसका लण्ड अभी भी पेंट के अंदर तम्बू की तरह खड़ा था । शैली जानबूझ कर उसे उकसा रही थी । शैली चाहती थी की सूरज उसके साथ थोडा खुल जाए फिर तो उसका लण्ड लेने में आसानी होगी।

शैली-" अरे सूरज ये तुम्हारी पेंट गीली कैसे हो गई? सूरज हड़बड़ा जाता है यह सुनकर, सूरज स्वयं झुककर पेंट की तरफ देखता है चैन के पास वीर्य के निकलने से थोडा सा हिस्सा गिला था ।

सूरज-" दीदी पसीना से भीग गई है" सूरज के मुख से बड़ी मुश्किल से झूठ निकला लेकिन शैली अच्छी तरह से जानती थी की ये वीर्य के निसान है ।शैली कामयावी की कुटिल मुस्कान के साथ बोलती है ।

शैली-" लोगों के माथे से पसीना टपकता है तेरे निचे से पसीना निकलता है, ऐसा लग रहा है तूने पिशाव कर ली हो" हस्ते हुए बोलती है ।

सूरज अपनी शर्ट को पेंट के अंदर से निकाल लेता है ताकी उसका गीलापन छुप जाए ।

तनु देखेगी तो पता नहीं क्या सोचेगी ।

शैली हँसते हुए निचे चलने के लिए बोलती हैं क्यूंकि तनु बहुत देर से बुला रही थी यदि ज्यादा देर रुके तो ऊपर भी आ सकती थी । दोनों लोग जैसे ही नीचे पहुँचते है शैली खुश हो जाती है तनु ने केक काटने की सारी तैयारियां कर ली थी ।

तनु-" क्या हुआ म्यूजिक सिस्टम लेकर नहीं आई?

शैली-" म्यूजिक सिस्टम बहुत ऊँचाई पर रखा है इसलिए निकाल नहीं सकी, टीवी और मोबाइल पर ही गाने बजाकर मन बहला लेंगे" शैली ने सफाई दी ।

तनु-" ठीक है शैली, बहुत देर हो गई है जल्दी से केक काट तू" शैली को चाक़ू देकर बोली तनु,

शैली केक काटती है । सूरज और तनु Happy birth Day Shaili" बोलकर wish करते हैं ।

तनु और सूरज केक शैली को खिलाते हैं ।

शैली केक का टुकड़ा लेकर सूरज और तनु को खिलाते हैं ।

तनु केक के ऊपर की क्रीम लेकर शैली के मुँह पर लगा देती है, शैली भी कम नहीं पड़ती है वो भी केक तनु के मुँह पर लेप देती है । सूरज उनदोनो को देख कर हंस रहा था ।

शैली बहुत सारा केक लेकर सूरज के मुह पर जबरदस्ती पोतने लगती है ।

सूरज अपना पीछा छुड़ाने के लिए बराबर में गेस्ट रूम में घुसता है लेकिन आज शैली कोई मौका कहाँ छोड़ने वाली थी, सूरज के पीछे भागती हुई गेस्ट रूम में आकर सूरज को कस कर दबौच् लेती है ।सूरज को कस कर पकड़ने के कारण शैली के बूब्स उसके टॉप से आधे से ज्यादा बहार निकल आते हैं । सूरज की नज़र शैली के उछलते हुए बूब्स पर पड़ती है,उसका पप्पू पेंट में सलामी मारने लग जाता है ।

 
शैली सूरज के मुँह पर केक लगाने के लिए झपटती है लेकिन सूरज जानबूझ कर गेस्ट रूम में पड़े बेड के ऊपर चढ़ जाता है और शैली के हिलते चूतड़ और बूब्स को देखने लगता है । शैली सूरज की नज़र को भांप जाती है, उसकी चूत में फिर से चीटियाँ सी रिंगने लगती हैं ।शैली जानबूझ कर अपने बूब्स और स्कर्ट को ऊपर की और खिसका कर बेड पर चढ़ने लगती है जिसके कारण उसकी रसीली चूत के दर्शन सूरज को हो जाते हैं । सूरज का ध्यान शैली की चूत और बूब्स पर था शैली ने इसी का फायदा उठा कर सूरज को बेड पर गिरा दिया और उसकी छाती पर दोनों टांग फैला कर बैठ गई और सारा केक सूरज के मुह पर पोत दिया । सूरज की नज़र कहीं शैली पर जाती तो कभी उसकी चूत पर ।

वो टांग फैला कर छाती पर बैठने के कारण उसकी चूत की फांके खुल चुके थे और अंदर का लाल दाना चमक रहा था । सूरज का लण्ड पेंट में झटके मारने लगता है ।

शैली-" केक लगाते हुए!" मुझसे बच कर कहाँ जाओगे बच्चू,आज अच्छी तरह से तुम्हारे मुँह पर केक पोतुंगी" हँसते हुए बोलती है । तभी तनु कमरे में आती है शैली जल्दी से सूरज के ऊपर से उठती है ताकि तनु उसकी स्कर्ट में खुली चूत न देख ले ।

तनु जब कमरे में आती है तो उसे शैली पर थोडा शक़ सा होता है की वह जरूर सूरज के साथ कुछ तो ऐसा कर रही थी की मुझे देख कर तुरंत सूरज की छाती से उठकर खड़ी हो गई ।

शैली कई बार सूरज को पटाने के लिए तनु से बोल चुकी थी लेकिन वह हमेसा एक मज़ाक समझकर शैली को डांट दिया करती थी ।

तनु जानती थी की शैली बहुत हवस की भूकी लड़की है । अपनी प्यास बुझाने के लिए कुछ भी कर सकती है ।

तनु को शैली पर गुस्सा और जलन दोनों होती हैं । शैली की गतिबिधिओं पर नज़र रखने का निश्चय करती है ।

तनु जानती थी की उसका भाई सूरज बहुत ही भोला और मासूम है उसे लड़कियो में ज्यादा रुचि नहीं है ।

तनु-" शैली ये क्या किया सूरज का पूरा चेहरा तूने केक से सना दिया और उसके कपड़ों पर भी केक लगा दिया,

शैली-" ओह्हो सूरज के तो सारे कपडे गंदे हो गए, तू फ़िक्र मत कर में अभी कपडे धोकर सुखा देती हूँ" सूरज के कपडे देखती हुई बोली

सूरज-" कोई बात नहीं दीदी, में इन्ही कपड़ो में घर चला जाऊँगा, वैसे भी रात में कौन देखेगा"

शैली-" ओये सूरज के बच्चू रात में कहीं नहीं जाना है सुबह ही घर जाने दूंगी" शैली अपना आदेश सुनाती हुई बोली

तनु-" नहीं शैली पूनम और माँ इंतज़ार कर रही होंगी" तनु ने चिंता जाहिर करते हुए बोला

शैली-" में अभी पूनम दीदी को फोन कर देती हूँ," शैली फोन लगा कर पूनम को सुबह आने को बोल देती है ।

शैली-" अब खुश बोल दिया, चलो भूंक लगी है जल्दी से खाना खाते हैं" तीनो लोग लॉन में आकर बैठ जाते हैं ।

तनु-" शैली तू एक काम कर सूरज के लिए कोई लोअर दे दे,इसके कपडे केक से सने हैं । शैली एक लोअर लेकर आती है । सूरज बाथरूम में जाकर पेंट और कच्छा भी उतार देता है चुकी उसका कच्छा भी वीर्य निकलने के कारण चिपचिपा रहा था ।

सूरज अपने गंदे कपडे वाशिंग मशीन में डाल देता है और लोअर पहन कर सोफे पर आ जाता है ।तभी तनु सोचती है क्यूँ न सूरज की पेंट अभी धोकर डाल दू सुबह तक सूख जाएगी ।

तनु-" शैली तू खाना लगा में पांच मिनट में सूरज की पेंट और शर्ट धो कर आती हूँ ।

शैली-" ठीक है जल्दी काम निपटा कर आजा, में खाना लगाती हूँ" तनु बाथरूम में चली जाती है। शैली जमीन पर बिछी कालीन पर खाना खाने के लिए सूरज से बोलती है ।

सूरज सोफे से उठ कर निचे बैठ जाता है ।

शैली किचेन से चिकेन और पूरा खाना उठाकर सूरज के पास रख देती है । शैली जानबूझ कर निचे झुकाती है जिसके कारण शैली के बूब्स फिर से सूरज के सामने बिलकुल नंगे दिखाई देने लगते हैं ।शैली मौके का पूरा फायदा उठाना चाहती थी ।

शैली जमीन पर उकडू बैठ जाती है जिससे शौली की खुली चूत सूरज के सामने आ जाती है । सूरज का लंड़ लोअर में खड़ा हो जाता है । कच्छा न पहनने के कारण लोअर में बहुत बड़ा तम्बू सा बन जाता है ।शैली जैसे ही लोअर में तम्बू देखती है सूरज के लण्ड का आकार का अनुमान लगाने लगती है । सोचती है कितना बड़ा लंड है सूरज का, शैली की चूत से कामरस बहने लगता है जिसे सूरज बिना पालक झपकाए देख रहा था ।शैली की चूत से सफ़ेद द्रव्य निकल कर उसकी फांको को गीला करते हुए उसकी गुदा तक पहुँच जाता है इसका अहसास शैली को भी होता है । सूरज का मन मचल जाता है और शैली की रस छोड़ती चूत को चाटने के लिए आतुर हो जाता है ।

इधर तनु जब बाथरूम में गई तो सूरज के कपड़ो को निकाल कर फर्स पर डालती है तभी सूरज का कच्छा भी अलग निकल कर गिर जाता है ।तनु कच्छे को उठाती है और उस पर लगे सफ़ेद द्रव्य को देखती है । तनु मन में सोचती है की सूरज ने अपना कच्छा क्यूँ उतारा?

क्या शैली ने सूरज के कच्छे पर भी केक लगा दिया है । तनु शैली को मन ही मन बहुत सारी गालियां देने लगती है । और कच्छे पर लगे सफेद वीर्य को केक समझकर छूने लगती है । तनु समझ नहीं पा रही थी की ये कैसा केक है जो चिपचिपा सा रहा है और गाढ़े पानी की भाँती है ।

तनु कच्छे पर लगे वीर्य को नाक के नथुनो के पास ले जाकर सूंघ कर देखती है, मादक सी खुशबु का अहसास होता है लेकिन फिर भी वह समझ नहीं पाती है की ये क्या है ?

तनु उस चिपचिपे वीर्य को चाटकर परिछण करने का निशचय लेती है और उस कच्छे पर लगे वीर्य को ऊँगली से लेकर चाटने लगती है । तनु ने कभी किसी लड़के का वीर्य चाटकर तो नहीं देखा था लेकिन पोर्न फिल्मो में लड़के के लण्ड से निकलने वाला सफ़ेद द्रव्य बहुत देखा था जिसे लड़कियां बड़े आराम से पीती हैं और चाटती हैं ।

तनु का माथा ठनकता है उसे याद आता है की लड़को के लंड से सफ़ेद रस निकलता है । ये सफ़ेद द्रव्य भी सूरज के लंड से निकला हुआ पानी है जिसे तनु ने सूंघ कर ही नहीं वल्कि चाटकर भी देखा था ।

तनु आपने आपको कोसती है की ये मैंने क्या किया अपने ही भाई के लंड से निकला पानी चाट लिया, कितनी अभागी बहन हूँ में उसकी । अपने आपको भला बुरा कह कर जमींन पर बैठ जाती है और कपडे धोने लगती है ।

तनु सोचती है की मेरा शक सही है इस चुड़ैल शैली ने ही कुछ ऐसा जादू किया होगा मेरे भाई पर की उसका वीर्य कच्छे में ही छूट गया ।

तनु सोचती है की लड़के हस्तमेथुन मार कर पानी निकालते हैं, कहीं ऐसा तो नहीं है की शैली ने सूरज के लंड को रगड़ा हो और पानी निकल गया हो, गेस्ट रूम में जब शैली सूरज के मुँह पर केक लगा रही थी तब शैली सूरज के लंड वाले हिस्से पर बैठ कर जानबूझकर हिली डुली हो तभी उसका पानी छूटा हो ।

तनु-"(मन में गुस्सा होते हुए) साली कुतिया अपनी चूत की आग बुझाने के लिए कुछ भी कर सकती है, आज रात मुझे जग कर नज़र रखनी पड़ेगी, सूरज तो नादान है बहक सकता है"

इन सब बातों को सोच कर तनु भी सेक्स के प्रति आकर्षित महसूस करती है और अपनी चूत पर कुछ गीलापन महसूस होता है ।

तनु हाँथ डालकर अपनी चूत को छू कर देखती है तो हैरान रह जाती है उसकी चूत से चूतरस बह रहा था ।

तनु अपने भाई के कच्छे पर लगे वीर्य को रगड़ रगड़ कर साफ़ करती है ।

उसके मन में सूरज को लेकर कभी कोई गलत ख्याल नहीं आया लेकिन आज

सूरज के वीर्य को चाटकर उसके तन बदन में हवस की आग फ़ैल जाती है ।

तनु अपने आपको कंट्रोल करती और कपडे धोकर बाशिंग मशीन में सुखा कर डाल देती है ।

तनु जल्दी से बहार लॉन की तरफ जाती है जहां शैली सूरज के लण्ड पर भूकी नज़रो से घूर रही थी । तनु जैसे ही उन दोनों के पास आती है सूरज अपने खड़े लंड को छुपा लेता है दोनों हाथ रखकर और शैली भी अपनी चूत को छिपाने के लिए सही से बैठ जाती है । तनु स्तिथि को भांप लेती है सूरज की लोअर की ओर भी देख लेती है जहां खड़े लंड के कारण लोअर में तम्बू बना हुआ था ।

शैली-" कपडे धोने में बड़ा समय लगा दिया तूने" तनु से बोलती है

तनु-" हाँथ से धोने के कारण समय लग गया" सूरज जैसे ही ये बात सुनता है तो चोंक जाता है उसे लगा की तनु बाशिंग मशीन में कपडे धोएगी इसलिए माशीन में कपडे डाल कर आया था । ताकि उसके कच्छे पर लगे वीर्य के निसान न देख पाए।

सूरज के माथे पर पसीना आ जाता है और सोचता है की तनु ने हाथ से कच्छा धोया होगा तो वीर्य के निसान भी देख लिए होंगे ।

सूरज घबराने लगता है इसी घबराहट के कारण उसका लंड भी ढीला पड़ जाता है ।

तनु क्या सोच रही होगी अपने भाई के बारे में यही सोचकर उसका बुरा हाल था ।

वह नज़रे नहीं मिला पा रहा था तनु से ।

तनु भी सूरज की मनोदसा को भांप जाती है और सामान्य व्यवहार करती हुई बोलती है ।

तनु-" जल्दी से खाना लगाओ भूंक लगी है"

शैली-" बस एक मिनट रुक" शैली सबको खाना लगाती है । तनु और शैली खाने पर टूट पड़ते है लेकिन सूरज घबराहट और सोच में डूबा हुआ था जिसे तनु समझ जाती है ।

तनु-" क्या हुआ सूरज जल्दी खाओ न खाना"

सूरज-" ओह्ह हाँ दीदी खा रहा हूँ"

शैली-"क्या हुआ अच्छा नहीं बना है क्या?"

सूरज,"नहीं दीदी बहुत बढ़िया बना है"

तीनो लोग खाना खाने लगते हैं ।

शैली को याद आता है की उसके फ्रिज में बियर की चार बोतल रखी हैं ।

शैली जब भी मटन या चिकन बनाती है तो एक बीयर जरूर पीती है ।

शैली फ्रिज से बियर लेकर आती है ।

सूरज और तनु तो पीते नहीं थे ।

शैली-" बियर के साथ चिकन खाने का मजा ही कुछ और है, अपने अपने गिलास दो"

सूरज-" दीदी में तो पीता ही नहीं हूँ"

तनु-" में भी नहीं पीती हूँ" तनु ने एक दो बार शैली के साथ पी कर देखि है लेकिन सूरज की मौजूदगी के कारण मना कर देती है ।

शैली-" आज मेरा जन्म दिन है इसलिए थोड़ी सी तो पी नी पड़ेगी" शैली जबरदस्ती तीनो के ग्लास में बियर डाल देती है ।

तनु का भी मन चल रहा था लेकिन सूरज क्या सोचेगा यही सोच रही रही ।

यही हाल सूरज का भी था की में पी तो लूंगा लेकिन तनु दीदी क्या सोचेंगी।

तनु-" प्लीज़ शैली में नहीं पी पाउंगी" अपना ग्लास शैली को देती हुई बोली ।

शैली समझ जाती है की भाई बहन दोनों एक दूसरे से शर्मा रहें हैं ।

शैली-" आज तुम दोनो भूल जाओ की भाई बहन हो, ऐसा फील करो की हम तीनो दोस्त हैं । मेरे लिए एक ग्लास तो पी नी पड़ेगी तनु" शैली मानती नहीं है अपनी जिद पर अड़ जाती है ।

सूरज को जबरदस्ती एक ग्लास बियर का देती हुई बोलती है ।

सूरज तनु की ओर देखता है और तनु सूरज की ओर मायूसी से देखती है ।दोनों एकदूसरे को देखकर शर्मा रहे थे ।

शैली-" क्या देख रहे हो जल्दी से पियो" शैली अपना ग्लास खाली करती हुई बोलती है । एक सांस में ही पूरा गिलास पी जाती है ।

सूरज-" तनु से! पी लो दीदी, एक ग्लास में कुछ नहीं होगा" सूरज की इजाजत मिलते ही तनु भी एक सांस में पूरा ग्लास खाली कर देती है । सूरज तो देखकर चोंक जाता है और खुद चाय की तरह एक एक घूंट पिने लगता है ।

शैली-" ऐसे नहीं सूरज एक ही सांस में पी जाओ"

सूरज हिम्मत करके एक ही साँस में पूरा ग्लास खाली कर देता है ।

पहली बार पिने के कारण उसे बहुत कड़वी लगती है । कड़वेपन की बजह से सूरज को बहुत अटपटा लगता है लेकिन थोडी देर में मूड ठीक हो जाता है ।

 


सूरज सोचता है की तनु दीदी ने पहली बार में कैसे पी ली ? उसे शक़ होता है की तनु दीदी पहले भी पी चुकी हैं ।

सूरज-" तनु दीदी क्या आपने पहले भी पी है" तनु चोंक जाती है और सोचती है की सूरज को कैसे पता चला ।

शैली-" सूरज हां ये सच है की तनु पहले भी एक दो बार मेरे साथ पी चुकी है,लेकिन तुम यह बात किसी से नहीं कहोगे, आज हम तीनो एक दोस्त की तरह हैं । इसलिए तुम्हे सच बता दिया, नाराज मत होना"

सूरज-" दीदी में नाराज़ नहीं हूँ, सबकी अपनी जिंदगी है जिसको जो मर्जी है करे,

जिंदगी एक बार मिलती है इसलिए हर वो काम करके देखना चाहिए जिसमे अलग ही मजा है" सूरज को हलकी सी चढ़ चुकी थी

तनु को भी नशा चढ़ने लगा था लेकिन शैली नार्मल थी क्योंकि उसे आदत थी बियर की

शैली-" सही कहा सूरज, ज़िन्दगी खुल कर जीना चाहिए, एक दिन तो सबको ही मरना है इसलिए हर काम को करके देखना चाहिए, सही कहा न तनु मैंने"

तनु-" हाँ सही बात है शैली, ज़िन्दगी संघर्षो से भरा है ऐसे में हमें हर दिन,हर पल को जीना चाहिए पता नहीं कब मौत आ जाए"

शैली-" शराब बहुत बढ़िया चीज बनाई है जिसे पी कर अच्छी बातें ही निकलती है मुँह से और मन की बात भी" शैली एक बार फिर से बियर का ग्लास भर देती है । इस बार तीनो लोग एक दूसरे से चेस करते हुए एक ही सांस में गटक जाते हैं ।

तनु और सूरज की झिझक ख़त्म हो चुकी थी ।

बियर के हलके नशे में तीनो लोग मस्ती में खाना खाते हैं ।

खाना खाने के पश्चात तनु और शैली नशे में झूमती हुई सभी बर्तन किचेन में रखते हैं ।

शैली टीवी में गाना लगा देती है ।

सभी लोग झूमते हैं ।

शैली सूरज और तनु दोनों को एकसाथ डांस करवाती है ।

तनु और सूरज शरमाते हुए दोनों एकसाथ डान्स करते हैं ।

शैली भी सूरज के साथ डांस करते हैं ।इस तरह रात के 12 बज जाते हैं । तनु को नींद आने लगती है ।

तनु-" अब मुझे नींद आ रही है, कहाँ सोना है शैली"

शैली-" हम तीनो लोग गेस्ट रूम में ही सो जाते हैं"

सूरज-" में इसी सोफे पर ही लेट जाता हूँ"

शैली नहीं मानती है और तीनो लोग गेस्ट रूम में सोने चले जाते हैं ।

सूरज और तनु के बीच में शैली लेट जाती है।

सूरज तनु की बजह से थोडा डर रहा था की कहीं शैली फिर से कोई हरकत न कर दे ।

इधर शैली के मन में सूरज के लंड को लेकर कामुकता की सिरहन उसके जिस्म और दिलो दिमाग में फैली हुई थी ।तनु के सोने का इंतज़ार कर रही थी ।

इधर तनु शैली की हरकत देखने के लिए सोने का नाटक करती है ।

शैली को जब ये आभास हो जाता है की तनु सो गई है वह धीरे से उठकर तनु को चेक करती है । शैली तुरंत सूरज की ओर खिसक कर अपना एक हाथ सूरज के पेट पर रख देती है । सूरज भी आँखे बंद किए हुए था । सूरज घबरा सा जाता है ।उसका लंड लोअर में झटके मारने लगता है ।

शैली धीरे धीरे अपना हाँथ पेट पर सहलाती हुई एक ऊँगली से लंड को कुरेदने लगती है और दूसरे हाँथ से स्कर्ट को ऊपर कर अपनी चूत की फांको को सहलाने लगती है।

हवस के इस नशे में इतना चूर हो गई की ये भी भूल गई की दोनों बहन भाई एक ही बिस्तर पर लेटे हैं । अगर देख लिया तो कितनी शर्मिंदगी होगी ।

सूरज का लंड बुरी तरह से अकड़ चूका था वह शैली को मना करना चाहता था लेकिन तनु न जग जाए इसलिए शांत लेटा रहा ।तभी शैली सूरज का हाँथ लेकर अपनी चूत पर रख देती है और अपने हांथो की मदद से चूत को रगड़बाने लगती है । सूरज का तो बुरा हाल हो गया। शैली तुरंत सूरज के लोअर में हाँथ डालकर लंड को सहलाने लगती है । सूरज को जोश चढ़ने लगता है पहली बार किसी लड़की ने उसका लंड पकड़ा था और उसने पहली बार किसी की चूत को छुआ था । सूरज अपनी एक ऊँगली से शैली की चूत को रगड़ने लगता है । शैली की चूत से कामरस हल्का हल्का बह रहा था । तभी शैली उठती है और सूरज के लंड को मुह में लेकर चूसने लगती है ।सूरज इस सुख को पाकर बहुत खुस हो जाता है ।

कमरे में हलकी रौशनी थी

जैसे ही तनु देखती है की शैली सूरज के लंड को मुँह में लेकर चूस रही है तनु को बहुत गुस्सा आता है लेकिन बोलती कुछ नहीं है चुपचाप लेटे हुए देखती रहती है ।

इधर सूरज बार बार तनु की तरफ देखता है की कहीं जग न जाए ।

सूरज-" शैली रुक जाओ तनु दीदी जग सकती हैं" हलकी आवाज़ में बोलता है ।

शैली-" बहार सोफे पर चलो सूरज"

शैली सूरज को बहार सोफे पर लेकर जाती है, और अपने कपडे उतार देती है, सूरज शैली के बूब्स और चूत को देख कर पागल सा हो गया था ।

सूरज अपना लोअर उतार कर शैली को सोफे पर लेटा देता है और 69 की पोजीसन में आकर शैली की चूत में जीव्ह डाल कर चाटने लगता है ।सूरज ने जैसे ही चूत में जिव डाली शैली तड़प उठती है सूरज का लंड मुह में लेकर चूसने लगती है ।

इधर कमरे में तनु जैसे ही देखती है की शैली सूरज को पकड़ कर बहार ले जा रही है । वो भी तुरंत कमरे के दरवाजे से देखने लगती है । दरवाजा थोडा खुला हुआ था,कमरे में अँधेरा भी था जिसके कारण शैली और सूरज तनु को देख नहीं सकते थे ।

तनु जैसे ही सोफे पर देखती है उसकी आँखे फटी रह जाती है । शैली और सूरज 69 पोजीसन में थे शैली सूरज का लंड चूस रही थी। सूरज का लंड 8 इंची लंबा और 3 इंची से ज्यादा मोटा था जो शैली में मुह में पूरा नहीं जा रहा था ।तनु सूरज के लाल सुपाड़े को देखती है और सोचती है की कितना बड़ा और मोटा लंड है सूरज का ।

इधर सूरज शैली की चूत को चाट चाट कर साफ़ कर चूका था जिसे तनु देख कर बड़ी हैरान थी उसने कभी सोचा नहीं था की सूरज ऐसा कर सकता है ।

तभी शैली उठ कर सूरज को नीचे लेटा देती है और दोनों पैर फेला कर सूरज के तने हुए लंड को अपनी चूत के छेद पर सेट करती है और धीरे धीरे ऊपर निचे करने लगती है ।

सूरज का लंड बहुत मोटा और चौड़ा था शैली की चूत में घुस नहीं पा रहा था ।

शैली पूरा जोर लगाती है, नीचे से सूरज एक तगड़ा झटका मारता है लंड एक बार में ही चूत को फाड़ता हूँ अंदर घुस जाता है ।

शैली के मुँह से चीख निकल जाती है ।

शैली-"ओह्ह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह् सूरज दर्द हो रहा है आराम से डालो आअह्ह्ह्ह्ह मर गई" शैली दर्द से छटपटाने लगती है सूरज पुनः लंड निकाल कर दुबारा आराम से डालता है और नीचे से ही धक्के मारने लगता है

शैली-"ओह्ह्ह्ह्हो सूरज मेरे भाई आराम से तेरा लंड बहुत मोटा है""

तनु हैरान थी की इतना बड़ा और मोटा लंड शैली की चूत में कैसे घुस गया, शैली ने जब सूरज को भाई बोला तो तनु हैरान थी और मन ही मन शैली को गाली दे रही थी की भाई बोल कर किस तरह चुदवा रही है, रत्ती भर शर्म नहीं है इसको।

शैली और सूरज की इस तावड तोड़ चुदाई देख कर तनु की चूत से भी पानी बहने लगता है वो भी अपना एक हाँथ अपनी सलवार में डालकर अपनी चूत पर फिराती है और हैरान रह जाती है की चुदाई देखकर उसकी चूत पानी छोड़ रही है ।

तनु को चूत सहलाने में आनंद आने लगता है और अपनी चूत में ऊँगली डालकर रगड़ने लगती है ।

इधर शैली का दर्द कम होता है और चुदाई में मजा आने लगता है । सूरज के लंड़ पर तेज तेज उछालने लगती है ।

शैली-" ओह्ह्हो सूरज तेरा लंड बहुत मोटा और प्यारा है"'

सूरज-" ओह्हो दीदी आपकी चूत भी बहुत मस्त है ऐसा लगता है जन्नत में हूँ"

सूरज के मुह दे दीदी शब्द सुनकर तनु के फिर से होश उड़ जाते हैं ऐसा लग रहा था जैसे में सूरज के लंड पर बैठ कर चुदवा रही हूँ" तनु सोचती है और अपनी चूत में तेजी से ऊँगली चलने लगती है ।

शैली-"मेरे भाई ऐसे ही चोदो, बहुत दिनों से प्यासी हूँ मेरी चूत की आग भुजा दो सूरज" सूरज शैली को हटाकर डॉगी स्टायल में बैठकर उसकी चूत में लंड घुसा देता है और तेज तेज धक्के मारता है ।

शैली की चूत में लंड पूरा लंड घुस हुआ था आज से पहले जितनो ने भी शैली को चोदा कोई उसकी हवस को मिटा नहीं पाया । सूरज का विकराल लंड शैली की चूत को अच्छे से रगड़ रहा था जिसके कारण शैली दो बार झड़ चुकी थी लेकिन सूरज अभी नहीं झडा था ।

शैली-" आह्ह्ह्ह सूरज चोदो, बड़ा मजा आ रहा है" सूरज तेजी से धक्के मारता है ।

शैली की जिश्म अकड़ने लगता है और तेज तेज झड़ने लगती है ।

सूरज-" आअह्ह्ह्ह्ह दीदी मेरा भी निकलने वाला है पानी

शैली-"मेरी चूत में ही भर दो अपना पानी सूरज"

इधर तनु की हालात खराब थी वो भी एक बार झड़ चुकी थी ।

सूरज अब तेज तेज चौदने लगता है और तेज धक्को के साथ उसका लावा चूत में छूट जाता है ।

इधर तनु भी सूरज को देख कर झड़ जाती है।

शैली की चूत सूरज के वीर्य से भर जाती है ।

सूरज तनु की चूत से लंड निकालता है और लोअर पहनने लगता है तभी उसकी नज़र तनु पर पड़ती है और तनु की सूरज पर ।

दोनों लोग एक दूसरे को देखकर डर जाते हैं ।

तनु जल्दी से कमरे में जाकर लेट जाती है ।

शैली अपनी चूत में सूरज के बीर्य को देखती है पूरी चूत वीर्य से भर चुकी थी । शैली कपडे से चूत साफ़ करती है और अपने कपडे पहनकर रूम में सोने चली जाती है ।

सूरज भयभीत था की अब क्या होगा ।

तनु दीदी क्या सोचेगी मेरे बारे में ।

कैसे नज़रे मिला पाउँगा तनु दीदी से ।

यही हाल तनु का था ।

 
दोनों एक दुसरे को कैसे सकल दिखाएंगे यही सोच रहे थे ।

सूरज शर्म की बजह से बहीं सोफे पर लेट जाता है ।

शैली भी बहुत थक चुकी थी एक बार तनु की ओर देखती है की तनु गहरी नींद में सो रही थी उसे बहुत सुकून मिलता है और वह भी सो जाती है ।

सूरज रात भर सोचता रहता है उसे नींद नहीं आ रही थी यही हाल तनु का भी था ।

सुबह के पांच बजे सोचते सोचते दोनों लोग सो जाते हैं ।

सुबह 7 बजे शैली कोफ़ी बना कर तनु को जगाती है फिर सूरज को ।

सूरज और तनु की आँखे लाल थी रात में जागने के कारण नींद पूरी नहीं हो पाई थी ।

तनु और सूरज फ्रेस होकर डायनिंग टेबल पर कॉफी और नास्ता के लिए पहुचते है।

तनु और सूरज घबरा रहे थे । बहुत शर्म भी आ रही थी की दोनों एक दूसरे का सामना कैसे करेंगे ।

शैली," अरे तनु रूम में ही घुसी रहेगी जल्दी आ नास्ता कर ले, सूरज तुम भी बाथरूम से जल्दी आओ कितनी देर लगा रहे हो" सूरज बाथरूम में कपडे पहन कर शीशे में अपने आपको देख रहा था ।

अब शैली को क्या पता की तनु उन दोनों की चुदाई की रासलीला देख चुकी है । सूरज ने शैली से यह बात छिपा ली थी की तनु ने हम दोनों को देख लिया है ।

शैली के बार बार बुलाने पर में डायनिंग टेवल पर गया और चाय नास्ता करने लगा।

तनु से कैसे नज़रे मिला पाउँगा बस यही बात दिल दिमाग में बार बार गूंज रही थी ।

पहली बार शैली के हुस्न को भोगने की ख़ुशी से ज्यादा मुझे तनु के देख लेने का डर था ।जिस बहन को में सबसे ज्यादा प्यार करता हूँ उस बहन से कैसे नज़रे मिलाऊंगा।

तनु कितना प्यार करती है । हमेसा मेरा ख्याल रखती है, आज उसी बहन की नज़रो में गिर सा गया था ।

इधर तनु भी रूम में बैठी अपने आपको कोष रही थी "क्या जरुरत थी शैली और सूरज को सम्भोग करते हुए देखने की, कसूर सूरज का नहीं शैली का है जिसने सूरज को उकसाया होगा, सूरज गलत नहीं है, उसकी भी उम्र है,इस उम्र में अक्सर लड़के बहकने लगते हैं,मुझे सूरज को समझाना होगा" इसी को सोचते हुए तनु भी डायनिंग टेवल पर पहुँचीं।

तनु-"Good morning शैली and सूरज" तनु हिम्मत करके सूरज को देखते हुए बोली

सूरज तनु के सामान्य तरीके से बात करते हुए ख़ुशी होती है ।

सूरज-"good morning तनु दीदी" सूरज भी हिम्मत जुटा कर बोलता है,हालांकि तनु सूरज को बड़े गौर से देखती है ।सूरज का चेहरा मासूमियत भरा देख कर हलकी सी मुस्करा जाती है ।

सूरज को बड़ा सुकून मिलता है ।

दोनों बहन भाई चाय नास्ता करके शैली से विदा लेते है। और गाडी में बैठ कर घर की और निकल जाते हैं।

सूरज गाडी चला रहा था तनु भी आगे सीट पर बैठी रात की घटना सोच कर गुमसुम थी। सूरज भी कभी आगे देखता कभी गुमसुम बैठी तनु को देखता ।

समझ नहीं आ रहां था की तनु से कैसे माफी मांगे।

तनु भी सूरज की खामोसी को महसूस करती है, लेकिन शर्म की बजह से कुछ बोल नहीं पा रही थी ।

हालांकि सुबह शैली के सामने सामान्य होने का नाटक तनु ने बखूबी किया ताकि शैली को रात वाली बात पता न चले ।

सोचते सोचते फ़ार्म हाउस आ जाता । सूरज गाडी रोकता है तनु बिना बोले गाडी से उतर जाती है । सूरज भी फ़ार्म हाउस न जाकर सीधे नऐ घर(संध्या माँ) की और गाडी दौड़ देता है ।

तनु बहुत दुखी होती है की सूरज शायद गुस्से में चला गया ।उसे अपनी खामोसी पर गुस्सा आता है ।

इधर सूरज बहुत दुखी था तनु ने एक बार भी घर चलने के लिए नहीं बोला और बिना बोले चुपचाप चली गई ।रात वाली बात पर गुस्सा है ।

सूरज घर आकर माँ से मिलता है ।

रात भर जागने के कारण उसे नींद आ रही थी वो रूम में जाकर सो जाता है ।

इधर तनु भी पूनम और माँ से बात करके अपने रूम में सो जाकर सो जाती है ।

रात के 8 बजे सूरज की नींद खुलती है ।

सूरज नीचे जाकर खाना खाता है ।

खाना खाने के बाद सूरज रूम में चला जाता है ।

तभी उसे फिर से तनु की याद आती है ।

इधर तनु भी गुमसुम सी थी सूरज से बात करना चाहती थी लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी ।तनु अपना फोन उठाकर व्हाट्सअप पर सूरज को देखती है ।

सूरज ऑनलाइन था ।

इधर सूरज भी तनु को ऑनलाइन देखता है । तनु हिम्मत करके सूरज को hi लिख कर मेसेज भेजती है । सूरज तनु का मेसेज देखकर खुश हो जाता है ।

तनु-"hi

सूरज-" hi दीदी"

तनु-"सूरज......." हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी सिर्फ नाम ही लिख पाई

सूरज-" ??????" सूरज भी सोचता है कैसे रात वाली बात पर sorry बोलू समझ नहीं आ रहा था।

तनु-" घर क्यूँ नहीं आए सुबह" खामोशी तोड़ते हुए लिखती है

सूरज-' sorry दीदी" हिम्मत करके बोलता है ।

तनु-"?? किस बात के लिए सॉरी?

सूरज-" रात आपने मुझे उस हालात में देख लिया उसके लिए" सूरज हिम्मत करके बोलता है

तनु-" गलती मेरी थी,मुझे छुप कर नहीं देखना था"

सूरज-'" दीदी में भी बहक गया था प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो, में अपनी ही नज़रो में गिर गया हूँ" सूरज की आँख से पानी आ गया

तनु-" कोई बात नहीं है सूरज, परेसान मत हो, ये उम्र ही ऐसी होती है,अक्सर लड़के बहक जाते हैं"

सूरज-" थैंक्स दीदी,

तनु-"गलती मेरी भी थी तुम्हे शैली के घर लेकर नहीं जाना चाहिए था, वो बहुत कमीनी लड़की है"

सूरज-" दीदी रात में मुझे वियर नहीं पीनी थी, ये सब वियर के नशे में हुआ"

तनु-"हाँ उस कामिनी ने जानबूझ कर ऐसा किया होगा" तनु को शैली पर बहुत गुस्सा आ रहा था

सूरज-" दीदी गुस्सा तो नहीं हो आप मुझसे"

तनु-" नहीं भाई बस थोड़ी सी शिकायत है तुमसे"

सूरज-" बोलो दीदी,में आपकी हर सज़ा को कबूल करूँगा"

तनु-" एक बात पुछु?"

सूरज-" हाँ बोलो दीदी"

तनु-" सुरुआत तुमने की या शैली ने?

सूरज-"मतलब?"

तनु-" पहले तुमने उसके साथ कुछ किया या उसने??"

सूरज को शर्म भी आ रही थी बोलने में

सूरज-" शैली दीदी ने"

तनु-" बहुत बड़ी कमीनी है वो, में जानती थी मेरा भाई अपनी तरफ से कुछ भी ऐसा वैसा नहीं करेगा" ��

सूरज-" दीदी प्लीज़ घर पर किसी को मत बताना" ��

तनु-" पागल है ये बात भी भला बोलने की होती है, में किसी को कुछ नहीं बताउंगी"

सूरज को बड़ा सुकून मिलता है ।

सूरज-" थॅंक्स दीदी, आप बहुत अच्छी हो"

तनु-" वो तो में हूँ"हंसने ��वाली फिलिंग्स के साथ,

सूरज अब टेंसन फ्री हो गया था ।

सूरज-" दीदी आप शैली के साथ मत रहा करो वो अच्छी नहीं है"

तनु-" रात तो तुम उसे बहुत प्यार कर रहे थे,अब बुरी लड़की लग रही है"

सूरज-" दीदी रात पता नहीं ऐसा क्या हो गया था मुझे खुद पता नहीं, प्लीज़ दीदी मेरा विस्वास करो"

तनु-"तुम खुद पर कंट्रोल तो कर सकते थे, या उसकी शिकायत मुझसे कर देते, में उसे डाँट मार देती"

सूरज-'दीदी में आपसे कैसे बोलता की वो...?"अधूरी बात बोलता है ।शैली जानबूझकर अपनी चूत दिखा रही थी, गन्दी गन्दी हरकते कर रही थी ये बात तनु से कैसे बोलता

तनु-" hmmmm उसने जरूर तेरे साथ कुछ गलत किया होगा तभी तुझपर कंट्रोल नहीं हुआ, लेकिन अब अगर शैली कुछ कहे तो तुम मुझसे खुल कर बोल देना"

सूरज-" दीदी आपसे कैसे बोलूंगा"

तनु-" मुझे अपना दोस्त समझकर बोल देना"तनु जानबूझ कर बोलती है ताकि सुरज शैली की हर बात तनु को बता दे, तनु को शैली से जलन भी हो रही थी ।

सूरज-"ठीक है मेरी प्यारी दीदी,you are best sister and best friend"

तनु-" थैंक्स मेरा प्यार भाई"

सूरज-" दीदी सुबह घर आऊंगा, कल मार्केट घूमने चलेंगे ok"

तनु-" okk आ जाना"

सूरज-" okk bye दीदी

तनु-"bye bro"

व्हाट्सअप पर बात करके तनु और सूरज को बड़ा सुकून मिलता है ।

आगे कल सुबह देखते हैं नई दोस्ती में क्या क्या होता है ।

सूरज और तनु की अगली मुलाक़ात...

सूरज सुबह 8 बजे । संध्या माँ ने सूरज को जगाया ।

संध्या-' सूर्या बेटा उठो आज स्कूल नहीं जाना है क्या"

सूरज-" बस माँ थोड़ी देर और सोने दो" सूरज दूसरी ओर करवट बदल कर लेट गया

संध्या-" नहीं बाबू उठ जा मेरा प्यारा बेटा"संध्या प्यार से उसे उठाती है ।

सूरज-" माँ जब तक दीदी को उठा दो"

संध्या-" अरे बेटा तान्या तो सुबह ही आज कंपनी की जरुरी मीटिंग के लिए दिल्ली चली गई, बेचारी बहुत मेहनत करती है"

सूरज-" माँ कुछ दिन की बात और है मेरा कोर्स पूरा होते ही में तान्या दीदी की सारी जिम्मेदारी अपने हाँथ में ले लूंगा"

संध्या-"मेरा प्यारा बेटा कितना समझदार हो गया है-"संध्या सूरज के माथे को चूमते हुए बोली । सूरज संध्या माँ से बहुत प्यार करने लगा था।

सूरज बेड उठ कर फ्रेस होने के लिए बाथरूम चला जाता है । संध्या माँ किचेन में नास्ता तैयार करती है ।

फ्रेस होकर सूरज नास्ता करता है तभी उसे याद आता है की आज तनु दीदी के साथ घूमने जाना है । सूरज जल्दी से नास्ता करता है और व्हाट्सअप ओन करता है ।

व्हाट्सअप ओन करते ही बहुत सारे मेसेज शैली के आते हैं ।सूरज शैली के द्वारा भेजे गए मेसेज को खोलता है तो चोंक जाता है शैली ने अपनी बहुत सारी फोटो भेजी थी ।

शैली के मेसेज-" hi suraj

Tum to bhul hi gaye

Ek bhi msg nahi bheja tumne

Aaj ghar par aa jaayo

Koi nahi hai ghar par"

Tumhaare land ki bahut yad aa rahi hai suraj

Meri chut ki aag bujha jayo

सूरज जैसे ही मेसेज पढता है उसका लंड झटके मारने लगता है ।

शैली ने फोटो भी भेजी थी जिसमे शैली अपनी चूत में ऊँगली डाले हुए थी।

इस प्रकार की बहुत सी कामुक फोटो भेजी थी । सूरज का लंड खड़ा हो जाता है ।

सूरज शैली को कोई रिप्लाई नहीं करता है ।

और जल्दी से गाडी लेकर तनु को लेने फ़ार्म हाउस चला जाता है ।

सूरज फ़ार्म हाउस पहुचता है ।

रेखा सूरज को देख कर खुश हो जाती है ।

रेखा-" बेटा कहाँ रहता है तू,तेरी सकल देखने के लिए तरस जाती हूँ में"

सूरज-" माँ कंपनी में काम बहुत है समय नहीं मिल पाता है" तभी पूनम रूम से निकल आती है ।

पूनम-" अरे सूरज तू आ गया"

सूरज-" हाँ दीदी कैसी हो आप, आपकी पढ़ाई कैसी चल रही है"

पूनम-" अभी तो बिलकुल सही चल रही है,

सूरज-" ठीक है दीदी,मेहनत से पढ़ती रहो"

पूनम-" हाँ मेरे भाई"

सूरज-" माँ और दीदी यहां कोई परेसानी तो नहीं है आपको?"

रेखा-" नहीं बेटा ये जगह तो स्वर्ग है यहां कोई परेसानी हो ही नहीं सकती है"

सूरज-" हाँ माँ ये बात तो ठीक है"

माँ तनु दीदी कहाँ है?

तभी तनु फ्रेस होकर रूम से आती है ।

तनु-" सूरज बस 10 मिनट में तैयार हो रही हूँ" तू जब तक खाना खा ले" तनु मेक्सी पहनी थी उसके गीले बालो से पानी टपक रहा था । अभी सीधे बॉथरूम से नहा कर निकली थी ।

पूनम रेखा और सूरज बाते करते हैं जब तक तनु जीन्स और टॉप पहन कर आती है ।

पूनम-" सूरज आज कहाँ जा रहे हो"

सूरज-" तनु दीदी को आज घुमाने ले जा रहा हूँ जल्दी ही आ जाऊँगा"

पूनम-" मुझे भी कल लेकर जाना सूरज"

सूरज-' ठीक है दीदी"

तभी तनु और सूरज दोनों घर से निकल कर गाडी में बैठकर मॉर्केट की ओर निकल जाते हैं ।

तनु का नजरिया सूरज के प्रति थोडा बदल सा गया था । शैली के साथ सम्भोग करते हुए और सूरज का लंड देख कर तनु खुद हवस की आग में जली थी और खुद अपनी चूत की आग को शांत करने के लिए उसने उंगलिओ से हस्तमैथुन किया था ।

तनु उस पल को भी नहीं भुला पा रही थी जब बाथरूम में उसने सूरज के कच्चे पर लगे सूरज के लंड से निकला कामरस को उंगलिओ से लेकर चाटा था हालाँकि उसे ये पता नहीं था की वो सूरज का वीर्य है लेकिन कहीं न कहीं सूरज के प्रति उसका रवैया और नजरिया बदला था ।

 
तनु रिश्ते की मर्यादा को लांघना नहीं चाहती थी इसलिए स्वयं ही अपने मन को स्थिर करती है ।

इधर सूरज भी तनु के प्रति उसका लगाव बढ़ गया था ।दोनों शांत बैठे थे तभी तनु बोलती है ।

तनु-" कहाँ चलना है सूरज"

सूरज-" पहले मार्केट चलते हैं फिर कहीं घूमने चलते हैं"

तनु का मार्केट जाने का मन नहीं था वो आज सूरज के साथ बात करना चाहती थी शैली के बारे में इसलिए तनु घूमने का प्लान बनाती है ।

तनु-" मार्केट रहने दो कहीं घूमने चलते हैं"

सूरज-" ठीक है दीदी बताओ कहाँ चले"

तनु-' कहीं भी चलो जहां शांती हो"

सूरज अपना दिमाग दौड़ता है तभी उसे याद आता है की शहर से दूर एक झरना है जहाँ बड़े बड़े पहाड़ भी हैं ।

सूरज-" दीदी चलो झरना देखने चलते हैं"

तनु-" हाँ चलो"

सूरज गाडी तेज दौड़ता है झरना लगभग 50 किलो मीटर दूर था शहर से ।

तभी सूरज के मोबाइल पर शैली की कोल आती है । सूरज तनु की बजह से शैली की कॉल को काट देता है ।लेकिन शैली के बार बार कॉल करने पर तनु पूछती है ।

तनु-" किसकी कॉल आ रही है बात कर लो"

सूरज-" दीदी शैली का फोन आ रहा है" ये सुन कर तनु को शैली पर गुस्सा आता है ।

तनु-" कामिनि कहीं की,हेण्डस्फ्री करके बात करो, में भी सुनूंगी क्या बोल रही है वो, फोन उठाओ, बताना मत की में भी साथ हूँ"

सूरज-" दीदी वो अच्छी लड़की नहीं है आप उसकी बात मत सुनो" सूरज को पता था की शैली खुले और गंदे शब्दों का प्रयोग करती है ।

तनु-" में सुनना चाहती हूँ की वो कामिनी क्या कहती है तुम फोन उठाओ" सूरज बेचारा क्या करता बो फोन उठता है और हेण्डस्फ्री करके रख देता है ।

गाडी के शीशे बंद होने के कारण शैली की आवाज़ गाडी में गूंजती है ।

शैली-" हेलो सूरज कहाँ हो"

सूरज-"झूठ बोलते हुए) कंपनी में हूँ"

शैली-" मैंने व्हाट्सअप पर मेसेज भेजे थे तुमने रिप्लाई नहीं किया तो सोचा बात ही कर लू तुमसे" तनु सूरज की ओर देखती है,

सूरज-" वो में बीजी था" सूरज नर्वस था

शैली-" ओह्ह्ह आह्ह्ह्ह सूरज घर आ जाओ न प्लीज़ आज घर पर कोई नहीं है" शैली सिसकारी भरते हुए बोली, तनु समझ जाती है की शैली चूत में ऊँगली कर रही होगी तभी उसकी कपकपाती आवाज़ निकल रही है ।

तनु को अब बहुत शर्म भी आ रही थी की सूरज के सामने शैली की गन्दी गन्दी आवाजे सुननी पड़ रही है ।

इधर सूरज का भी बुरा हाल था ।

शैली-" क्क्क्या हुआ सूरज बोलते क्यूँ नही हो" सूरज को समझ नहीं आ रहा था की तनु के सामने क्या बोले

सूरज-" हां सुन रहा हूँ, क्या हुआ आपको कोई परेसानी है क्या"

शैली-" हाँ सूरज बहुत परेसानी है, जबसे तुम्हारा लंड चूत में घुसवाया है तबसे मेरी चूत की प्यास और बढ़ गई है, आकर इस निगोड़ी चूत की भड़ास मिटा दो सूरज" शैली शायद स्खलन के चरम पर पहुँच गई थी इसलिए उसकी आवाज़ और सिसकारी तेज हो गई । तनु शैली की सिसकारी सुनकर खुद के फैसले पर गलत साबित हुई। तनु के कहने पर ही सूरज ने फोन को हैंड्सफ्री किया था ।फोन हेण्डस्फ्री करने का सुझाव तनु का ही था उसे नहीं पता था की शैली इस तरह सूरज से बात करेगी ।

शैली की कामुक सिसकियाँ सुनकर तनु की चूत से भी कामरस बहने लगता है ।

सूरज का लंड भी पेंट में तम्बू बन गया था ।

सूरज और तनु दोनों एक दूसरे को देखते हैं तनु फोन काटने का इशारा करती है ।

सूरज-" दीदी बाद में बात करेंगे अभी व्यस्त हूँ"

शैली-" रररुक्को सुरज्जज्जज्ज में झड्डड्ड रहीं हूँ,ओह्ह्ह्ह्हो आह्ह्ह्ह्ह् सूरज i love youuuuuu, शैली झड़ जाती है, इतनी कामुक आवाज़ सुनकर सूरज की पेंट में लंड झटके मारता है और उसका वीर्य निकल जाता है । सूरज की पेंट गीली हो जाती है ।

यही हाल तनु का भी था उसकी चूत के रस से पेंटी गीली हो जाती है ।

शैली-" सूरज व्हाट्सअप पर मेरी कामुक चूत की सेल्फ़ी देखो, और हाँ अपने लंड की फोटो भेज देना प्लीज़"

शैली इतना ही बोल पाती है सूरज फोन कट कर देता है । और जोर से सांस लेता है ।

तनु भी गहरी सांस लेती है और सूरज की और देखने लगती है ।

सूरज तनु की ओर देखता है तो कभी मोबाइल की ओर ध्यान जाता है जो बार बार व्हाट्सअप पर शैली के मेसेज आने पर बज रहा था ।

तनु व्हाट्सअप पर शैली के फोटो और मैसेज देखना चाहती थी लेकिन सूरज शर्म की बजह से बोल नहीं पाती है ।

तनु और सूरज शैली की कामुक आवाज़ सुनकर असहज महसूस कर रहे थे ।

सूरज तो कुछ बोल नहीं पा रहा था तनु खामोसी को तोड़ते हुए बोलती है ।

तनु-" कितनी बत्तमीज लड़की है शर्म नाम की कोई चीज तो है ही नहीं शैली में, बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी"

सूरज से बोलती है ।

सूरज-" दीदी में तो आपसे पहले ही बोल रहा था की शैली बहुत गन्दी लड़की है"

तनु-" उसकी बातें सुनकर अच्छा ही हुआ,कमसे कम मुझे उसका असली रूप तो पता चल गया"

सूरज-" हाँ दीदी" सूरज पेंट में खड़े लंड को साइड में करता है चुपचाप ताकि तनु उसका तम्बू न देख ले, लेकिन तनु देख लेती है ।

तनु-" सूरज मेरे भाई तू शैली से बिलकुल बात मत करना वो तुझे बिगाड़ कर रख देगी" तनु सूरज को समझाती हुई बोलती है

सूरज-" दीदी आप भी तो उनके साथ रहती हो, आप भी उनके साथ मत रहा करो'

तनु-" में आज के बाद उससे अपनी दोस्ती छोड़ दूंगी"

सूरज-" हाँ दीदी वो दोस्ती के लायक नही है"

तनु-" तेरी और भी कोई गर्ल फ्रेंड हैं ? " सूरज चोंक जाता है तनु के इस प्रशन को सुनकर ।

सूरज-"नहीं दीदी, कोई नहीं है"

तनु-"शैली की जगह किसी और को गर्ल फ्रेंड बना लेना लेकिन शैली से बिलकुल बात मत करना और न ही उसके साथ कुछ करना" सूरज तनु की इस बात को सुनकर फिर से चोंक जाता है ।

सूरज-" ठीक है दीदी, में उनसे कोई मतलब नहीं रखूँगा आज के बाद" तनु खुश हो जाती है ।

तनु-" में जानती हूँ सूरज ये उम्र ही ऐसी होती है, इस उम्र में ये सब करने का बहुत मन करता होगा, लेकिन फिर भी अपने आप पर कंट्रोल रखो" तनु समझाते हुए बोलती है।

सूरज-" क्या सब दीदी समझा नहीं" सूरज गाडी चला रहा था इसलिए समझ नहीं पाया तनु की बात को।

तनु-"(शर्माती हुई) वही काम जो तू उस रात शैली के साथ कर रहा था, वो काम अब मत करना उसके साथ"

सुरज-"ठीक है दीदी नहीं करूँगा अब" तभी झरने वाली जगह आ जाती है सूरज गाडी को पहाड़ के बीच बने रास्ते पर ले जाता है और बड़े बड़े पहाड़ो के बीच गाडी रोक देता है ।तनु और सूरज जैसे ही गाडी से बहार निकलते हैं वहां का सुन्दर वातावरण देख कर खुश हो जाते हैं ।

दो बड़े पहाड़ो के बीच विशाल नदी जिसका पानी ऊँचे पहाड़ की चट्टान से गिर रहा था

जगह इतनी सुन्दर और शांत थी की घंटो बैठकर उस जगह का आनंद लिया जा सकता है । तनु तो उस झरने को देख कर खुश हो जाती है और तुरंत छोटे छोटे पहाड़ो पर चढ़कर उस झरने के पास जाकर देखती है ।

झरने का पानी जैसे ही नीचे गिरता उसकी बौछार तनु के ऊपर आती ।सूरज और तनु उस सुन्दर वातावरण को देखने लगते हैं ।

दो चार प्रेमी प्रेमिका भी आए हुए थे जो उस झरने का आनंद ले रहे थे और नदी के बहते पानी में नहा रहे थे । एक प्रकार का पर्यटन स्थल था ये झरना जहां पर सिर्फ प्रेमी प्रेमिका आकर मौज मस्ती किया करते थे ।

झरने के नीचे नहाते लोगों को देख कर तनु का बहुत मन कर रहां था नहाने का लेकिन सूरज और अन्य प्रेमी प्रेमिका के होने की बजह से शर्मा रही थी कहने में ।

सूरज-" दीदी चलो नहाते हैं"

तनु-" नहीं में कपडे लेकर नहीं आई हूँ"

सूरज-" दीदी आप चाहो तो किसी चट्टान की आढ़ में बैठ कर नहा लो, मेरा तो बहुत मन कर रहा है नहाने का, में तो नहाऊंगा"

तनु-' नहाने का मन तो मेरा भी कर रहा है लेकिन मेरे पास कपडे नहीं है" दुखी होकर बोलती है ।

तनु और सूरज घूमते घूमते झरने से दूर निकल आते हैं जहां शांत वातावरण होता है । तनु और सूरज नदी के पास एक चट्टान पर बैठ जाते हैं ।

सूरज-" दीदी यहाँ पर नहालो कोई नहीं है में दूर जाकर नहा लेता हूँ" तनु शर्म के कारण मना कर देती है ।

सूरज-" तो फिर दीदी आप बैठो में नहाने जा रहा हूँ" सूरज अपनी पेंट और शर्ट उतारता है । जैसे ही सूरज को कच्छे में देखती है तो तनु शर्मा जाती है ।सूरज फ्रेंची कच्छा पहना था जिसमे उसके लंड का उभार साफ़ दिखाई दे रहा था । तनु की नज़र सूरज के कच्छे पर लगे वीर्य के निसान पर जाती है जो अभी भी गीला सा था और सफ़ेद रंग का द्रव्य लगा हुआ दिखाई देता है । तनु समझ जाती है की ये शैली की कामुक बातें सुनकर निकाला हुआ कामरस है ।

सूरज की नज़र तनु पर जाती है जो उसके कच्छे की ओर देख रही थी सूरज शर्मा जाता है और घूम कर पानी में छलांग मार देता है । तनु अपना ध्यान हटाकर सूरज को नहाते हुए देख रही थी ।उसका बहुत मन करता है वो भी पानी में कूद जाए और तन बदन को ठंडा कर दे । सूरज पानी में तैरते हुए तनु को आवाज़ लगाता है ।

सूरज-" दीदी आ जाओ बहुत मजा आ रहा है"

तनु-" तुम ही नहाओ" तभी तनु को पिसाव लगती है वह चट्टान से उतर कर थोड़ी दूर जाती है और एक चट्टान के पास अपनी जीन्स और पेंटी खोलती है । तनु अपनी पेंटी को देखती है जो बुरी तरह से चूत के रस से गीली थी । तनु की चूत पर काले घने बाल चूतरस से भीग चुके थे पूरी चूत पानी से चिपचिपा रही थी । तनु देख कर हैरान थी की इतना पानी तो ऊँगली करने के बाद भी नहीं निकलता है । तनु बैठ जाती है एक तेज सिटी की आवाज़ के साथ मूतने लगती है । मूतने के बाद तनु जैसे ही पेंटी पहनने लगती है तभी दूसरी ओर से एक लड़की की सिसकारने की आवाज़ आती है

लड़की-" ओह्ह्ह्ह फ़क मी फास्ट, और तेज तेज करो,,, तनु समझ जाती है की जरूर यहां चुदाई हो रही है । तनु जल्दी से पेंट पहनकर चट्टान की दूसरी ओर जाती है जहां एक लड़की घोड़ी बनी हुई थी और एक लड़का अपना लंड पेल लड़की की चूत में पेल रहा था। तनु के तो होश ही उड़ गए उसकी चूत से फिर पानी बहने लगा ।तभी लड़की तेज तेज चीखने लगती है

लड़की-"चोद मेरे भाई और तेज पूरा लंड मेरी चूत में घुसेड़ दे, मेरी चूत फाड़ दे मेरे भाई, अपने बच्चे की माँ बना दे मुझे, ओह्ह्ह चोदो"

लड़का-" ओह्ह्ह्ह दीदी तेरी चूत बड़ी मस्त है, मजा आ गया आज तुझे चौद कर, तू मेरे बच्चे को जन्म देना दीदी ओह्ह्ह्ह"

लड़की-" हाँ मेरे भाई तेरा बच्चा मेरी ही चूत से जन्मेगा, तेरा जीजा तो नपुसंक है, एक बच्चा पैदा नहीं कर पाया वो, आअह्ह्ह्ह्ह चोद्द्फ्फ् आह्ह्ह गई में हह्ह्ह्हो,

में झड़ गई मेरे भाई"

लड़का-" आह्ह्ह्ह्ह् दीदी मेरा पानी भी निकल गया" तनु समझ गई की लड़की शादी शुदा है इसका पती बच्चा पैदा नहीं कर पा रहा है इसलिए अपने भाई से सेक्स करवा रही है । तनु की चूत पानी छोड़ने लगती है उसका मन कर रहा था की चूत में ऊँगली डाल कर अपनी प्यास बुझा ले लेकिन तभी उसे सूरज का ख्याल आता है और उसी चट्टान पर चढ़ने लगती है ।

सूरज अभी भी नहा रहा था ।

तनु जैसे ही उसी चट्टान पर ऊपर चढ़ती है उसका पैर फिसल जाता है और नदी के बहते पानी में गिर जाती है ।

सूरज जैसे ही कुछ गिरने की आवाज़ सुनता है तो देखता है तनु पानी में गिर गई है । नदी ज्यादा गहरी नहीं थी तनु के बूब्स तक पानी था । सूरज तैरता हुआ आता है और तनु को उठाता है ।

तनु के पैर फिसलने से सीधे बहते हुए पानी में गिरती है ।

नदी ज्यादा गहरी नहीं थी । गिरने के कारण तनु पानी के अंदर गिर पड़ती है कुछ पानी उसके मुँह के द्वारा अंदर चला जाता है ।

सुरज जल्दी जल्दी तैर कर आता है और तनु को पकड़ कर उठाता है ।

तनु की कमर को पकड़ कर उल्टा झुकाता है ।जैसे ही तनु के पेट को दबाता है

तनु को एक तेज ठसा सा लगता है सारा पानी उसके मुँह से निकल जाता है ।तनु थोड़ी देर में सामान्य हो जाती है ।सुरज अभी भी उसको बाहों में थामे हुए था, तनु सूरज के नंग्न जिस्म और मजबूत बाँहों में अभी तक चिपटी हुई थी ।पहली बार किसी पुरुस के जिस्म को महसूस कर रही थी वो भी उसका छोटा भाई । तभी उसके जहन में पहाड़ो के पीछे भाई बहन की चुदाई बाला पल याद आ जाता है । तनु की सांसे तेजी से धड़कने लगती हैं उसकी चूत से पानी रिसने लगता है तनु को इसका आभास होता है वह सूरज से अलग हटती है । सूरज तो सुबह से ही शैली की बातें सुनकर गर्म हो गया था उसका लंड अभी भी अकड़ा हुआ था । तनु के जिस्म को छूकर उसका लंड कब खड़ा हो जाता है उसे पता भी नहीं चलता ।जब तनु सूरज से अलग हुई तब सूरज ने अपने लंड की अकड़न को महसूस किया । सूरज हैरान था की एक बहन को छु लेने से उसका लंड क्यूँ खड़ा हो गया । सूरज मन को नियंत्रण करता है और तनु से पूछता है ।

सूरज-" दीदी चोट तो नहीं आई?

तनु-" चोट तो नहीं आई है सूरज लेकिन मेरे सारे कपडे भीग गए, अब में भीगे कपडे पहन कर घर कैसे जाउंगी" तनु चिंतित होती हुई बोली

सूरज-" दीदी पहले आप नहा लो फिर यहीं कपडे सुखा कर घर चलेंगे"

तनु-" कपड़े सूखने में 2 घंटे लगेंगे जब तक में क्या पहन कर बैठूंगी"

सूरज-" तब तक आप पानी में नहाओ, 2 घंटे तक पानी के अंदर ही रहो'

तनु-" ओह्हो सूरज इतने ठन्डे पानी में 2 घंटे तक रहूंगी तो मेरा राम नाम सत्य जरूर हो जाएगा"

सूरज-" दीदी चलो पहले नहा लो अब भीग तो गई ही हो, कपड़ो के बारे में बाद में सोचेंगे" सूरज तनु का हाथ पकड़ कर झरने की तरफ ले जाता है । झरने के पास आते ही पानी की बौछार उसके जिस्म पर गिरने लगती है । तनु मदहोश होकर उस हसीन प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने लगती है । जल जंगल पहाड़ और झरना सबका एक संगम जिसको देख कर तनु बहुत खुश थी ।

जैसे ही पानी की हलकी बौछार उसके ऊपर पड़ती तनु का शारीर उछालने लगता । तनु पानी में तैरती हुई नदी के दूसरे छोर तक चक्कर लगाती है । सूरज भी पानी में तैरते हुए तनु के पास आता है और हाथ से पानी को तनु के ऊपर उछालने लगता है । तनु भी सूरज के ऊपर पानी डालती है । दोनों काफी देर मस्ती करते हैं ।

तनु-" सूरज कितना अच्छा लग रहा है पानी में और इस जगह को देखकर ऐसा लगता है जैसे धरती का स्वर्ग ये ही है"

सूरज-" हाँ दीदी ये जगह इतनी खूबसूरत निकलेगी मुझे भी पता नहीं था, किसी दिन सबको घुमाने लाऊँगा यहां पर"

तनु-" नहीं सूरज परिवार के लायक यहां का माहोल ठीक नहीं है। ये जगह देखने के लिए तो अच्छी है लेकिन यहाँ पर सिर्फ प्रेमी और प्रेमिका के लिए ही है" तनु जानती थी यहाँ पर सिर्फ कपल्स मस्ती करने के लिए आते है और पहाड़ियों के पीछे सेक्स भी करते है।

सूरज-" क्यूँ दीदी ऐसा क्या है यहाँ पर की घर परिवार के लोग नहीं आ सकते हैं?"

तनु-" अरे यार यहां सिर्फ कपल्स आते हैं और कपल्स को जहाँ जगह मिले वहीँ रोमांस करने लगते है ऐसे में परिवार के साथ ठीक नहीं है" पहली बार तनु के मुह से यार शब्द सुनकर सूरज हैरानी हुई थी लेकिन अच्छा भी लगा ।

सूरज-" हाँ दीदी ये बात तो ठीक है ये जगह कपल्स के लिए ज्यादा ठीक है, मस्ती और मनोरंजन के हिसाब से, मुझे तो यहाँ बहुत अच्छा लग रहा है, अब तो में यहाँ आया करूँगा घूमने"

तनु-" रोमांस करने आया करोगे?

सूरज-" रोमांस के लिए मेरे पास अब गर्ल फ्रेंड कहाँ है दीदी" सूरज हँसते हुए बोलता है

तनु-" गर्ल फ्रेंड चाहिए ? शैली है तो उसी के साथ रोमांस कर" तनु चिढ़ते हुए बोलती है ।

सूरज-" अरे हाँ शैली को तो भूल ही गया में" मजाक करते हुए बोलता है ।तनु चिढ जाती है ।

तनु-" बिलकुल नहीं उस चुड़ैल के साथ आया तो उसकी टाँगे तोड़ दूंगी"

सूरज-" ओह्ह दीदी मजाक कर रहा हूँ, उसके साथ नहीं आऊंगा लेकिन जब भी मेरा मन करेगा यहां घूमने का तब आप मेरे साथ जरूर आना"

तनु-" ठीक है, मुझे भी यह जगह बहुत पसंद है इसलिए में भी आ जाया करुँगी" सूरज यह सुनकर खुश हो जाता है ।सूरज तनु से मजाक करते हुए बोलता है ।

सूरज-" वैसे दीदी शैली इतनी बुरी भी नहीं है गर्ल फ्रेंड सब शैली जैसे ही होनी चाहिए जो बॉय फ्रेंड का पूरा ख्याल रखे"

तनु-" तुझे क्या पता शैली के बारे में तेरे जैसे कितने आए उसकी ज़िन्दगी में और चले गए"

सूरज-" दीदी हो सकता है मेरे जैसा कोई न आया हो अब तक" सूरज अपने मोटे और लंबे लंड पर घमंड करते हुए बोलता है ये बात तनु अच्छी तरह समझ रही थी उसे शर्म और मजा दोनों की अनुभूति हो रही थी

तनु-" हाँ ये हो सकता है लेकिन शैली बहुत गन्दी लड़की है तूने उस रात उसकी मुह से गन्दी बाते नहीं सुनी क्या?

सूरज-" कौनसी बातें दीदी" तनु को बताते हुए बड़ी शर्म भी आ रही थी की कैसे उन बातों को भाई के सामने दोहराया जाए ।

तनु-" जब तू उसके साथ वो कर रहा था तब वो तुझे भाई बोल रही थी" स्पष्ट नहीं बोल रही थी, सूरज भी सब समझ रहा था लेकिन वो जानबूझ कर तनु से मजा ले रहा था, सूरज तनु के बूब्स को देखता है टीशर्ट में जिसमे उसके निप्पल खड़े थे इसका असर सूरज के लंड पर पड रहा था ।

सूरज-" वो क्या दीदी, समझा नहीं में" तनु शर्म से मरी जा रही थी तभी तनु की नज़र सूराज के कच्छे पर पड़ती है उसका लंड खड़ा हुआ था । नदी का पानी साफ सुथरा था इसलिए उसे साफ़ साफ़ उभार दिख जाता है ।तनु भी सूरज से बात करते हुए उसकी चूत में चींटिया रेंगती हुई महसूस करती है ।

तनु-" जब तू उसके साथ सम्भोग कर रहा था तब शैली तुझे भैया बोल रही थी इसी कारण शैली मुझे पसंद नहीं है"

सूरज-" सम्भोग मतलब सेक्स कर रहा था तब मुझे तो ध्यान ही नहीं वो क्या क्या बोल रही थी" सूरज अनजान बनते हुए बोला

तनु-" तुझे कैसे पता होगा तू तो खुद उसके साथ गन्दी गन्दी बाते कर रहा था"

सूरज-" मैंने क्या बोला दीदी"

तनु-" तू भी उसके साथ सेक्स करते हुए उसे दीदी बोल रहा था, मैंने सब सुना था, कितनी गन्दी हरकत कर रहा था तू उसके साथ"

सूरज-" सॉरी दीदी मुझे पता नहीं चला, लेकिन दीदी गंदी हरकत मैंने क्या की?' सूरज का लंड झटके पर झटके मार रहा था । यही हाल तनु का भी था ।

तनु-" तू उसकी गन्दी जगह को जीव्ह से चाट रहा था" तनु बोलते हुए शर्मा रही थी ।

सूरज-" कौनसी गन्दी जगह दीदी, शैली तो बहुत साफ़ सुथरी लड़की है मैंने तो कुछ भी गन्दा देखा नहीं"

तनु-" अरे नहीं पागल तू उसकी उस जगह को चाट रहा था जहां से लड़कियां पिसाव करती हैं कितनी गन्दी जगह होती है वो"

सूरज-" आह्ह अच्छा दीदी आप इसे चाटने की बात कर रही है"सूरज तनु की चूत की और इशारा करते हुए बोला जिससे तनु शर्मा जाती है ।

तनु-" hmm बड़ा बत्तमीज हो गया है तू, शैली ने तुझे एक रात में ही बिगाड़ दिया"

सूरज-" दीदी सेक्स करते समय पता नहीं क्या हो गया था मुझे, उसकी इस जगह को चाटने में मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था" सूरज फिर से तनु की चूत की और इशारा करता है तनु की चूत से कामरस बहने लगता है।इधर सूरज भी तनु के साथ खुलता जा रहा था उसे बात करने में बहुत मजा आ रहा था अब।

तनु-" बहुत बिगड़ गया है तू सूरज शहर आकर,तेरी शादी जल्दी करवानी पड़ेगी अब" हँसते हुए बोलती है ।

सूरज-" दीदी क्या आपने उस रात पूरी रासलीला देखि थी मेरी और शैली की"

तनु सोचती हुई बोलती है

तनु-" हाँ उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी, में जानती थी की शैली तेरे साथ गलत हरकत जरूर करेगी इसलिए नज़र रख रही थी"

सूरज-" ओह्ह्हो दीदी आपने तो मुझे भी नंगा देख लिया और सेक्स करते हुए भी देख लिया में तो मुह दिखाने के लायक ही नहीं रहा" नाटक करते हुए बोलता है, तनु हंस जाती है ।

तनु-" खुले में ये काम करोगे तो कौन नहीं देखेगा" हँसते हुए बोलती है ।

सूरज-" दीदी एक बात पूछु?

तनु-" हाँ पूछो"

सूरज-" दीदी आपका मन नहीं करता है ये सब करने का" तनु के होश उड़ जाते हैं सूरज के इस सवाल से ।तनु सोचती हुई बोलती है ।

तनु-" हाँ मन तो करता है "' तनु शर्मा कर बोलती है ।

सूरज-" जब मन चलता है तो अपने आपको कैसे शांत करती हो" इस सवाल को सुनकर तनु हैरान रह जाती है समझ नहीं आ रहा था की क्या जवाब दे, चूत में ऊँगली या मूली डाल कर शांत करती हूँ ये कैसे बोले सूरज से।

तनु-" मुझे नहीं पता, तू मेरा भाई है तेरे सामने बोल नहीं सकती हूँ"

सूरज-' दीदी प्लीज़ बताओ न, आप मेरी प्यारी दोस्त भी तो हो आपके सामने में अपनी हर परेसानी को शेयर कर सकता हूँ तो आप क्यूँ नहीं दीदी"

तनु-" ठीक है तुझे बता देती हूँ,लेकिन ये बातें तेरे और मेरे बिच में ही रहेगी"

सूरज-" ठीक है दीदी बोलो"

तनु-" ऊँगली से अपने आपको शांत कर लेती हूँ" तनु की चूत से कामरस बहने लगता है । सूरज का भी पानी छोड़ने लगता है और सोचता है दीदी कैसे अपनी चूत में ऊँगली करती होंगी

सूरज-" दीदी उंगली तो बहुत पतली होती है उससे कैसे मजा आता होगा,

तनु-" धत् पागल कुछ भी बोलता रहता है चल अब देर हो रही है मुझे अपने कपडे भी सुखाने हैं ।

सूरज और तनु पानी से निकल कर चट्टान पर आ जाते है ।

 
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