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जीवन एक संघर्ष है complete

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पूनम ने जैसे ही चूत के फांको को मसला उसका जिस्म सिहर उठा, साँसे ऊपर नीचे चलने लगी, बूब्स के निप्पल तन कर खड़े हो जाते हैं। पूनम एक हाँथ से चूत को सहलाती है तो दूसरे हाँथ से बूब्स मसलती है। जिस्म में कामुक उत्तेजना का उफान बढ़ने लगता है तो पूनम मेक्सी और पेंटी उतार देती है,पूनम की कुँवारी चूत पर हल्के हलके बाल उसकी चूत की शोभा बढ़ा रहे थे, पूनम झान्टो पर उंगलिया फिराने लगती है,फिर चूत की फांको में एक ऊँगली डालकर चूत के मुख पर लाल दाने को सहलाते ही उसका जिस्म झटके मारने लगता है, पूनम ऊँगली से चूत को छेड़ने लगती है,और जब उत्तेजना बढ़ जाती है तो चूत में ऊँगली डालकर घर्षणकरने लगती है। चूत से लगातार कामरस बह कर उसकी उंगलियां भीगने लगती है, बहता कामरस उसकी चूत में चिकनाई का काम कर रहा था । पूनम चूत में आज पूरी ऊँगली घुसेड़ने का प्रयास करती है परंतु चूत की गहराई और ऊँगली का छोटापन के कारण उसे आनंद नहीं आ रहा था, पूनम के मन में एक आइडिया आता है वो मेक्सी पहन कर किचेन में जाती है और आनन् फानन में दो केले उठाकर अपने कमरे में आकर तत्काल मेक्सी से उतार कर अपने जिस्म को आज़ाद कर देती है और दोनों टाँगे फेला कर बैठ जाती है, पूनम चूत की गर्मी और जिस्म की हवस के आगे गुलाम बन जाती है, पूनम एक केले का छिल्का उतार कर अपनी चूत में प्रवेश करती है, केला अंदर जाते ही चूत की दीवारो से रगड़ता है तो पूनम के मुख से सिसकारी फूटने लगती है, केले को जोरो से अंदर बाहर करने के कारण केला टूट जाता है, पूनम उल्टी होकर चूत से केला निकाल कर दूसरा केला चूत में डालती है, पांच मिनट तक केला चूत में अंदर बाहर करती है और झड़ जाती है, पूनम को आज से पहले इतना मजा कभी नहीं आया, पूनम की चूत से पानी की नदिया बहने लगती है, पूनम एक टेवल पर रखी एक प्लेट उठाकर चूत के आगे लगा देती है ताकि बेड और चादर गन्दी न हो, थोडा सा चूतरस प्लेट में आ जाता है बाकी एक कपडे से साफ़कर देती है, दोनों केला उसी प्लेट में रख देती और मेक्सी पहन कर लेट जाती है, पूनम काफी थक चूकी थी इसलिए लेटते ही नींद आ गई ।

सुबह 7 बजे सूरज की आँख खुलती है और जल्दी से फ्रेस होता है कंपनी जाने के लिए, तैयार होकर सूरज देखता है की सिर्फ माँ ही जगी हुई थी,वो किचेन में नास्ता तैयार कर रही थी।सूरज किचेन में जाता है और माँ को गुड़ मॉर्निंग बोल कर हग करता है ।

रेखा-" बेटा बड़ी जल्दी जग गया तू"

सूरज-" माँ पूनम और तनु दीदी अभी तक नहीं जगी"

रेखा-" अभी कहाँ बेटा दोनों 8 बजे से पहले नहीं जगती हैं"

सूरज-" अभी दोनों कुम्भकरण को जगा कर आता हूँ" सूरज सबसे पहले पूनम के कमरे में जाता है। पूनम बेसुध होकर तकिया को अपनी जांघो में फसां कर सोई हुई थी, मेक्सी ऊपर होने के कारण उसकी एक जांघ नंगी दिखाई देती है। सूरज पास आकर पूनम को जगाता है ।

सूरज-" दीदी उठो, और कितना सोओगी" पूनम कसमसा कर दूसरी ओर करवट लेकर सो जाती है इस बार पूनम की भारी भरकम नितम्ब सूरज के सामने आ जाते हैं, सूरज देख कर अनदेखा करते हुए पुनः जगाने लगता है।

सूरज-" दीदी उठो, सुबह हो गई" इस बार सूरज पूनम को पकड़ कर जगाता है, पूनम अंगड़ाई लेकर उठती है।

पूनम-" सोने दे न सूरज, क्यूँ जगा दिया तूने"

सूरज-" दीदी सुबह हो गई और कितना सोओगी, माँ अकेली किचेन में नास्ता बना रही हैं"

पूनम-" तू नास्ता कर ले न जाकर"

सूरज-" दीदी मुझे कंपनी जाना है"

पूनम-" आज कहीं नहीं जाएगा तू, आज तू मुझे घुमाने ले जाएगा,कल तूने प्रोमिस किया था"

सूरज-" ओह्ह ठीक है दीदी आप जल्दी तैयार हो जाओ,पहले कंपनी चलेंगे,फिर वहां से घूमने चलेंगे"

पूनम-"तू मुझे कंपनी दिखाएगा आज, रुक में अभी तैयार होती हूँ" पुनम यह कह कर कमरे में बने बाथरूम में घुस जाती है,सूरज उठने वाला ही होता है तभी उसे टेवल पर प्लेट रखी दिखाई देती है जिसमे केले रखे हुए थे, यह वही केले थे जो रात में पूनम ने अपनी चूत में डालकर अपनी हवस शांत की थी, और फेंकना भूल गई थी ।

सूरज को केला बहुत पसंद थे, अक्सर सुबह उठकर दूध के साथ खाता है, सूरज प्लेट उठाकर एक केला खाने लगता है, सूरज जैसे ही केला मुह में लेकर थोडा सा खाता है तो उसके होंठो पर और जीव्ह पर पूनम की चूत का कामरस आ जाता है, सूरज को थोडा अटपटा सा स्वाद लगता है, लेकिन फिर उसके मन में आता है की ज्यादा देर रखे होने के कारण केला पिघल गया है उसी की बजह से चिपचिपा रहा है और स्वाद भी बदल गया है। सूरज को ये केले और ज्यादा स्वादिष्ट लग रहे थे, सूरज प्लेट के सभी केले के टुकड़े खा लेता है,फिर देखता है प्लेट पर केला का जूस लगा हुआ है, ये केले का जुस नहीं बल्कि पूनम की चूत का जूस था जिसे सूरज चाटने लगता है । कामरस और केले का वास्तवीक रस घुला हुआ था। सूरज को यह जूस बहुत स्वादिष्ट लगता है, सूरज बड़े चाव से चाटने लगता है । तभी बाथरूम का दरवाजा खुलता है और पूनम जैसे ही सूरज को देखती है तो हैरान रह जाती है उसके पैरो के नीचे से जमीन खिसक जाती है, सूरज उसकी चूत से निकला पानी प्लेट से मुह लगा कर जीव्ह से चाट रहा था, पूनम को ऐसा लगा जैसे सूरज प्लेट से चूतरस नहीं बल्कि उसकी चूत चाट रहा हो।

पूनम-" सूरज ये क्या कर रहा है"

सूरज-" दीदी केले का जूस पी रहा हूँ,

पूनम-" इसमें रखे केले कहाँ गए"

सूरज-" वो तो में खा गया दीदी, केले देखकर मुह में पानी आ गया, इसलिए सारे केले खा गया" पूनम हैरान रह जाती है और सोचती है इसे स्वाद भी अलग नहीं लगा,

पूनम-" ओह्ह्ह वो तो ख़राब केले थे, में फेंकने ही वाली थी"

सूरज-" ख़राब केले थे, ख़राब कैसे हो गए,मुझे तो बहुत स्वादिष्ट लगे"

पूनम-(झूठ बोलते हुए)-" वो काफी देर के रखे हुए थे इसलिए ख़राब हो गए होंगे"

सूरज-" दीदी आप उनको ख़राब बोल रही हो जबकि इतने स्वादिष्ट केले मैंने आज तक नहीं खाए, और वो केला का जूस भी बहुत स्वादिष्ट था" सूरज हँसते हुए बोला,पूनम यह सुनकर उसकी चूत गीली होने लगती है।

पूनम-" ओह्ह सूरज, अब केले खा लिए न, तो अब जल्दी से चल कंपनी" पूनम बात को टालते हुए बोलती है।

सूरज-" दीदी बस अभी चल रहे हैं, पहले आप वादा करो की मुझे ऐसे केले आज फिर खिलाओगी" पूनम हैरान रह जाती है, और सोचने लगती है की मेरे छोटे भाई ने ये कौनसी दुबिधा में डाल दिया मुझे अब इसे कैसे बताऊ की यह मेरी चूत के पानी की बजह से स्वादिष्ट लग रहे हैं। अपने सगे भाई को भला कौनसी बहन अपनी चूत से निकले हुए केले खिलाएगी ।

सूरज-" क्या हुआ दीदी बोलो न,केले खिलाओगी न" पूनम वर्तमान में आती है ।

पूनम-" आते समय केले ले आउंगी पूरी रातभर खाते रहना"

सूरज-" दीदी मुझे स्वादिष्ट बाले केले खाने है"

पूनम-"ओह्ह्हो मेरे भाई खा लेना, अब जल्दी से मुझे कपडे पहनने दे, और तू भी जल्दी से नास्ता कर ले, चलना नहीं है क्या"

सूरज-" ओह्ह ठीक है दीदी आप कपडे पहनो, में नास्ता करके आता हूँ ।

10 मिनट बाद पूनम तैयार होकर बाहर आ जाती है और जल्दी से नास्ता करके सूरज के साथ कंपनी निकल जाती है ।

सूरज और पूनम दोनों बहन भाई कंपनी के लिए साथ साथ निकल जाते है, सूरज गाडी चलाता है और पूनम बगल बाली सीट पर बैठी गुमसुम अपनी सोच में डूबी हुई थी, पूनम केले बाली घटना को लेकर चिंतित थी, और हैरान थी की सूरज उसकी चूत से निकले केले और पानी को कैसे चाट गया, पूनम की चूत में चीटियाँ सी रेंग जाती थी जब वो यह घटना के बारे में सोचती थी।

सूरज-" दीदी क्या हुआ, कुछ तो बोलो" पूनम अपनी सोच से बाहर निकलती है। और विषय बदलती है ।

पूनम-" सूरज पापा कब आएँगे, माँ को पापा बाली बात क्यूँ नहीं बताई अभी तक"

सूरज-" दीदी बस एक दो दिन रुक जाओ, पापा आने बाले हैं एक दो दिन में, तब तक में कुछ और प्लानिंग के बारे में सोचा है"

पूनम-" प्लानिंग कैसी प्लानिंग सूरज"

सूरज-" दीदी माँ और पापा 22 साल बाद मिलेंगे तो एक बढ़िया सी पार्टी तो होनी ही चाहिए, पार्टी 15 जुलाई को रखी है उसी दिन माँ और पापा की शादी की साल गिरह भी है, माँ और पापा का मिलन उसी दिन हो तो अच्छा लगेगा"

पूनम-"वह्ह्ह् यह तो बहुत अच्छा सोचा है, लेकिन पार्टी कहाँ अरेंज करेंगे, और माँ को क्या बोलेंगे पार्टी के बारे में"

सूरज-" पार्टी हमारे फ़ार्म हॉउस में ही होगी, बस आप माँ को तैयार कर लेना कोई बहाना बना कर"

पूनम-" मतलब माँ और पापा की शादी जैसा कार्यक्रम करना है" चोंकते हुए ।

सूरज-" हाँ दीदी, इतने वर्ष बाद मिलेंगे तो कुछ अच्छा कार्यक्रम तो होना ही चाहिए"

पूनम-" ठीक है सूरज, लेकिन माँ के कपडे और बहुत सारा सामन खरीदना पड़ेगा"

सूरज-" आप माँ को लेकर जाओगी कपडे खरीदने और हाँ दीदी माँ को पार्लर भी लेकर जाना"

पूनम-"ओह्ह्ह सूरज तू माँ को दुल्हन बनाना चाहता है"

सूरज-" माँ बाप अपने बच्चों की ख़ुशी के लिए अपना पूरा जीवन लगा देते हैं तो क्या हम अपने माँ बाप की ख़ुशी के लिए इतना भी नहीं कर सकते, 22 साल से माँ पापा से अलग रही है, कितना खुश होंगी जब वो पापा को देखेंगी और पापा माँ को, पापा और माँ के जीवन में फिर से खुशियाँ लौट कर आएंगी,माँ एक फिर से दुल्हन बनेगी"

पुनम-" ओह्ह्ह तेरी बात ठीक है लेकिन माँ को इस उम्र में दुल्हन बनाना क्या ठीक रहेगा"

सूरज-" माँ की उम्र 44 वर्ष की जरूर है परन्तु माँ अभी 34 वर्ष की ही लगती है, आप देखना दीदी माँ बहुत खुश होगी, बस आपका साथ चाहिए मुझे"

पूनम-" में तो हमेसा तेरे साथ हूँ,तू जो भी करेगा अच्छा ही करेगा"

सूरज-" बैसे दीदी एक बात तो आपकी और तनु दीदी की शादी की उम्र है और हम माँ और पापा की शादी करबा रहें हैं"

पूनम-" तुझे बहुत फ़िक्र है मेरी और तनु की शादी की, तूने मुझे घर से निकालने का मन बना लिया है लेकिन में अभी शादी नहीं करुँगी सूरज"

सूरज-" दीदी आपका बिलकुल मन नहीं है शादी करने का"

पूनम-" मन तो है लेकिन अभी नहीं"

सूरज-" चलो कोई बात नही दीदी, जब मन करे तो बता देना आपकी शादी करबा दूंगा"

सूरज हँसते हुए बोलता है, बात करते करते कंपनी आ जाते हैं, तान्या पूनम को देख कर बहुत खुश होती है, पूनम इतनी बड़ी फेक्ट्री और कंपनी देख कर हैरान रह जाती है, तान्या और सूरज दोनों लोग पूनम को कंपनी दिखाते हैं, सूरज कंपनी में अपना काम निपटा कर पूनम को लेकर एक रेस्टोरेंट चले जाते हैं, दोनों लोग नास्ता करके फन सिटी घूमने जाते हैं, फन सिटी में पूनम और सूरज बहुत मस्ती करते हैं, उसके बाद सूरज पूनम को लेकर मॉल में जाता है दोनों लोग मूवी देखते हैं, पूनम आज बहुत खुश थी, इतना मजा उसे आज तक नहीं आया,मूवी देखने के बाद सूरज मॉल से कपडे खरीदने लगता है, तनु और रेखा के लिए मेक्सी और साडी खरीदता है, पूनम भी अपने लिए कपडे खरीदती है, दो तीन जीन्स और सलवार सूट लेने के बाद सूरज पेमेंट करता है तभी पूनम के मोबाइल पर रेखा का फोन आता है, रेखा विस्पर(पेड़) लाने के लिए बोलती है, पूनम और सूरज मॉल से निकल कर बाहर आते हैं, पूनम को एक मेडिकल दिखाई देता है, पुनम पेड लाने की सोचती है लेकिन सूरज की बजह से शरमा रही थी।

पूनम-" सूरज मुझे कुछ पैसे देना" पूनम पेड़ के लिए पैसे मांगती है, सूरज एक हज़ार रुपए निकाल कर पूनम को देता है।

पूनम-" सूरज पांच मिनट तू यही रुक में अभी आई"

सूरज-" दीदी कहाँ जा रही हो, मे भी साथ चल रहा हूँ"

पूनम-" बस पांच मिनट रुक में मेडिकल स्टोर से कुछ दवाई लेकर आती हूँ" पूनम झूठ बोलती है।

सूरज-" दवाई किसको लेकर जा रही हो, क्या हुआ आपको"

पूनम-" अरे तू टेंसन मत ले, दवाई माँ के लिए लेकर जा रही हूँ, बस पांच मिनट रुक जा" पूनम मेडिकल स्टोर पर चली जाती है, सूरज देख रहा था, पूनम ने पांच विस्पर पेड ले लिए ताकि आगे भी काम आते रहें। दुकानवाला विस्पर को एक पॉलीथिन में रख कर दे देता है। सूरज समझ नहीं पा रहा था की क्या है पॉलीथिन में, पूनम सूरज के पास आती है।

सूरज-" दीदी पॉलीथिन में इतनी दवाई का क्या होगा, इसमें तो बहुत सारी दबाई मालुम होती है" पूनम के पास कोई जवाब नहीं था, पूनम जैसे ही गाडी में बैठने बाली होती है तभी उसका पैर फिसल जाता है और विस्पर की पॉलीथिन फट जाती है, विस्पर जमीन पर गिर जाते हैं। सूरज एक दम से पूनम को पकड़ लेता है, पूनम गिरने से तो बच जाती है लेकिन विस्पर की पॉलीथिन गिरने के कारण फट जाती है, सूरज विस्पर को जमीन से उठाकर गाडी की सीट पर रख देता है।

सूरज-" दीदी आपके चोट तो नहीं लगी कहीं"

पूनम-"नहीं में ठीक हूँ" सूरज गाडी घर की ओर दौडा देता है ।

सूरज-" दीदी इन पैकेट में क्या है" सूरज पैकेट पर नाम पड़ता है विस्पर।

पूनम-" कुछ नहीं है रख दे । ये तेरे मतलब के नहीं है" पूनम शरमा रही थी ।

सूरज-" दीदी ये कौनसी दवाई है, और इतनी दवाई माँ के लिए, क्या हुआ है उन्हें, क्या कोई वीमारी है उन्हें, डॉक्टर को दिखा देंगे माँ के लिए" सूरज घबराता हुआ बोला, पूनम समझ जाती है की सूरज को वास्तव में नहीं पता है ये क्या है । हालाँकि सूरज मेसेज माहवारी के बारे में तो जानता था लेकिन विस्पर इस्तेमाल करते हैं यह नहीं पता था। पूनम सूरज की घबराहट और इतने सवाल सुन कर बोल ही देती है ।

पूनम-" ओह्ह्हो सूरज तू घबरा क्यूँ रहा है माँ को कुछ नहीं हुआ है, उनका महीना चल रहा है" पूनम साफ साफ़ बोल देती है लेकिन सूरज फिर भी समझ नहीं पाता है।

सूरज-"क्या महीना चल रहा है, कैसा महीना,साफ़ साफ़ बोलो दीदी" अब बेचारी पूनम क्या बोले।

पूनम-" जब तेरी शादी हो जाएगी न तब तू अपनी बीबी से पूछ लेना, महीना क्या होता है"

सूरज-" ऐसा क्या है ये महीना जो सिर्फ बीवी ही बताएगी, आप तो मेरी बड़ी बहन हो आप तो बता सकती हो"

पूनम-" तू नहीं मान रहा है तो सुन, माँ को मेंसेज हो रहे हैं मतलब माहवारी जो हर लड़की को प्रत्येक महीने होती है, अब समझा या और बताऊँ" अब शर्माने की बारी सूरज की थी,

सूरज-" ओह्ह्ह MC "

पूनम-" हाँ MC, इसका मतलब तुझे पता है ये क्या होती है" पूनम आवेश में पूछ लेती है ।

सूरज-" हाँ दीदी पता है, इतना भी छोटा नहीं हूँ में जितना आप समझती हो"

पूनम-" ओह्ह्हो में तो तुझे बच्चा समझती थी, इसका मतलब तू अब बड़ा हो गया है" इतने में ही घर आ जाता है । सूरज पूनम दोनों अंदर जाते हैं ।

पूनम तनु को ड्रेस देती है,तनु पूनम को गले लगा कर किस्स करती है । पूनम रेखा को भी उनके कपडे देती है । शाम के पांच बज 5 रहे थे । सूरज फोन निकाल कर देखता है तो संध्या की कई कॉल आई हुई थी, सूरज तुरंत गाडी लेकर घर पहुँचता है। संध्या सूरज को देख कर गले लगा लेती है, सूरज संध्या को कमरे में ले जाकर कपडे निकाल देता है और चोदने लगता है ।संध्या भी प्यासी थी,इसलिए सूरज से मन भर कर चुदवाती है। चुदाई के बाद सूरज जल्दी से कपडे पहनता है क्योंकि तान्या आने वाली थी, संध्या किचेन में जाकर खाना बनाती है तभी तान्या भी आ जाती है । तान्या फ्रेस होकर नीचे आती है । तीनो लोग मिलकर खाना खाते हैं ।

रात के दस बजे सूरज तान्या के रूम में जाता है, तान्या मेक्सी पहने लेटी हुई थी,

तान्या-" आ गया मेरा बाबू"

सूरज-" दीदी आपकी चूत कैसी है अब, मुझे देखने दो" सूरज मेक्सी उतार कर पेंटी निकाल देता है और चूत को देखने लगता है, सूरज ऊँगली डालकर देखता है तान्या गर्म हो जाती है । सूरज तान्या की चूत में जिव्हा डालकर चाटने लगता है, चूत से निकल रहे पानी को चाट चाट कर साफ़ करता है, तान्या बहुत गर्म हो जाती है, सूरज अपने कपडे उतार कर लंड तान्या की चूत में डाल देता है।

तान्या-"ओह्हफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़् सूर्या आराम से दर्द होता है"""

सूरज-"दीदी अब चूत में जगह बन गई है, अब दर्द नहीं हुआ करेगा,, सूरज पूरा लंड चूत में घुसेड़ देता है और धक्के मारने लगता है। तान्या भी आराम से चुदवा रही थी ।

तान्या-" ओह्ह्ह सूर्या और तेज आह्ह्हफ़्फ़्फ़्फ़्, बहुत अच्छा लग रहा है । fuck m"

सूरज-" दीदी मस्त है तुम्हारी चूत ओह्ह्ह्हह्ह्ह्"

तान्या-"चोद मेरे भाई," सूरज घोड़ी बना कर चोदता है , तान्या दो बार झड़ चुकी थी ।

तान्या-"ओह्ह सूर्या मेरा होनेवाला है"

सूरज-"झड़ जाओ दीदी, उफ्फ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह" सूरज तान्या को नीचे लेटा कर चोदने लगता है,

तभी सूरज का मोबाइल बजता है, सूरज देखता है पूनम का फोन था ।

सूरज नीचे तान्या को धक्के मार रहा था ऐसे हालात में फोन को उठा लेता है ।

पूनम-" सूरज कहाँ है तू घर नहीं आएगा आज"

सूरज फारिग होने वाला होता है ऐसे में उसकी आवाज़ लडखडाती है ।

सूरज-"ह्हहाहाँ द द दीदी म म में घर र र र र ह ह हूँ,उफ्फ्फ ओह्ह्ह्ह्हह् अह्ह्ह्ह" बहुत तेजी से साँसे चल रही थी और तान्या की सिसकारी । पूनम ऐसी आवाज़ बखूबी जानती है की कब मुख से निकलती हैं। पूनम समझ जाती है सूरज किसी के साथ सेक्स कर रहा है, लेकिन किसके साथ ये उसके लिए एक पहेली थी । पूनम फोन काट देती है। जब सूरज देखता है की दीदी ने फोन काट दिया तो घबरा जाता है ।

 
सूरज-(मन में )" ओह्हो ये मैंने क्या किया, सेक्स करते हुए ही पूनम दीदी का फोन उठा लिया, दीदी समझ गई होंगी की में किसी के साथ सेक्स कर रहा हूँ, अब दीदी क्या सोचेगी मेरे बारे में"

सूरज का मुड़ बहुत अपसेट हो जाता है, सूरज और तान्या कपडे पहन कर सो जाते हैं । सुबह 8 बजे सूरज की नींद खुलती है ।

सुबह 8 बजे सूरज और तान्या दोनों तैयार होकर कंपनी निकल जाते हैं। सूरज का मन आज किसी कार्य में नहीं लग रहा था उसका कारण था, रात में तान्या की चुदाई करते समय पूनम का फोन आना और सम्भोग क्रिया कलापो की मदहोश भरी सिसकियाँ की कामुक आवाज़ पूनम के पास तक पंहुच जाना और पूनम का फोन काटना, सूरज के लिए एक बहुत बढ़ी चिंतग्रहस्त में डाल रही थी, सूरज को डर बैठ जाता है की कहीं पूनम दीदी समझ तो नहीं गई की उनका छोटा भाई सहवास के आनंद में ठीक से बात भी नहीं कर पाया ।

इधर पूनम भी आज सुबह जल्दी उठ जाती है और रात सूरज की कंपकपाहट भरी आवाज़ की समीक्षा करने लगती है ।

पूनम-(मन में)-" सूरज की आवाज़ रात में कपकपा क्यूँ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे रात में वो किसी के साथ सेक्स कर रहा हो, लेकिन सेक्स किसके साथ कर सकता है वो, घर में संध्या माँ है और तान्या है, संध्या एक माँ है और माँ अपने बेटे से कभी सेक्स करेगी नहीं,तान्या भी सूरज को अपना भाई मानती है, बहन भाई आपस में सेक्स करते नहीं है, कहीं ऐसा तो नहीं है सूरज रात में हस्तमैथुन मार रहा हो, जब मैंने फोन किया था उस समय वो स्खलित के चरम पर हो,आखिर वो भी जवान है, सेक्स के प्रति आकर्शण तो स्वाभिक होता है, तभी पूनम को सूरज का बेग याद आता है जिसमे ब्रा पेंटी और डिडलो निकला था, पूनम सोचती है आखिर सूरज वो रबड़ का विशाल लंड सूरज किसके लिए लाया था, मुझे पता लगाना होगा, पूनम बिस्तर पर लेटी लेटी अपने बदन पर हाँथ फिरा रही थी तभी पूनम का हाँथ मेक्सी के अंदर पेंटी पर चला जाता है, पूनम की पेंटी गीली हो चुकी थी, पूनम यह देख कर हैरान रह जाती है की सूरज के बारे में सोच कर चूत गीली कैसे हो गई, पूनम पेंटी के अंदर हाँथ डालकर चूत सहलाने लगती है, पूनम की साँसे तेजी से चलने लगती है और मुह से सिसकियाँ फूटने लगती है, तभी पूनम को याद आता है की कैसे सूरज ने उसकी चूत से निकले केले को खाया था और चूत से निकले पानी को चाटा भी था। इतना सोचते ही पूनम का हाँथ तेजी से चूत पर चलने लगता है और एक तेज पिचकारी के साथ झड़ जाती है, झड़ने के उपरान्त पूनम को बड़ी ग्लानि होती है की सूरज के बारे में सोचकर में झड़ गई।

पूनम उठकर फ्रेस होती है । दोपहर में

पूनम का घर में मन नहीं लग रहा था, पूनम सूरज से बात करने का मन बनाती है, और मोबाइल पर सूरज का नंबर डायल कर देती है, इधर सूरज अपने केबिन में गुमसुम बैठा पूनम के बारे में ही सोच रहा था, जैसे ही मोबाइल पर पूनम की कॉल देखता है, उसे डर लगता है की कहीं दीदी रात वाली घटना के बारे में पूछने के लिए तो फोन नहीं किया, सूरज डर डराते हुए फोन उठा लेता है ।

पूनम-' हेलो सूरज कहाँ हो"

सूरज-"कंपनी में" सूरज डरते हुए बोला।

पूनम-"क्या हुआ, कोई परेसानी है क्या तुझे, तेरी आवाज़ को क्या हुआ है"

सूरज-"कुछ नहीं दीदी, कंपनी में हूँ इसलिए"

पूनम-" रात भी तेरी आवाज़ बहुत कपकपा रही थी जब मैंने फोन किया था, क्या रात भी तू कंपनी में था" सूरज यह सुनकर सहम जाता है की अब क्या बोले ।

सूरज-" वव् वो दीदी रात तो में घर पर ही था, नेटवर्क के कारण ऐसा लगा होगा आपको,

पूनम-" आज कल तेरे नेटवर्क सही काम नहीं कर रहें हैं, पूनम यह कह कर हँसाने लगती है, इससे सूरज का डर कम हो जाता है ।

सूरज-" मेरे नेटवर्क नहीं दीदी मेरे मोबाइल के नेटवर्क सही काम नहीं कर रहें हैं"

पूनम-" हाँ हाँ तेरे मोबाइल के नेटवर्क गड़बड़ हैं, अपने मोबाइल को सही दिशा में रख,वर्ना गलत नेटवर्क पकड़ लेंगे" यह कह कर पूनम पुनः हँसने लगती है, सूरज समझ जाता है दीदी कौनसे नेटवर्क की बात कर रहीं हैं।

पूनम-" अच्छा यह बता घर कब आएगा तू"

सूरज-" दीदी कोई काम था क्या"

पूनम-" काम होगा तभी आएगा तू, मेरा मन नहीं लग रहा है आज"

सूरज-"ठीक है दीदी आज शाम को आ जाऊँगा"

पूनम-" अभी आजा न, अपनी दीदी के लिए तेरे पास समय नहीं है"

सूरज-"ठीक है दीदी अभी आ रहा हूँ" सूरज तान्या को बोल कर फ़ार्म हॉउस चला जाता है, तनु कॉलेज गई हुई थी, रेखा अपने कमरे में आराम कर रही थी। पूनम सूरज को देख कर खुश हो जाती है। सूरज और तान्या में काफी दोस्ताना व्यवहार हो चूका था ।

पूनम-"आ गया मेरा भाई, रुक में तेरे लिए कुछ नास्ता लेकर आती हूँ"

सूरज-"दीदी नास्ता रहने दो, मुझे तो आप वो केले खिला दो, जो कल खाए थे मैंने" पूनम यह सुनकर हैरान रह जाती है की अब सूरज को कैसे कहे की भाई वो केले चूत के रस में भीगे हुए थे इसलिए स्वादिष्ट थे ।

पूनम-" रुक अभी केले लेकर आती हूँ" पूनम किचेन से जाकर केले छील कर प्लेट में रख कर सूरज को देती है, सूरज एक केला उठाकर खाता है लेकिन उसे कल बाला स्वाद नहीं लगा।

सूरज-"दीदी इन केलो में कल बाला स्वाद नहीं है, कल बाले केले तो खाने से ज्यादा चाटने में मजा आ रहा था, कल की तरह इन्हे स्वादिष्ट बनाओ दीदी" पूनम की चूत फिर से रिसने लगती है, अब सूरज को कैसे कल बाले स्वादिष्ट केले खिलाए ।

पूनम-" सूरज कल वाले केले अब कहाँ से लाऊँ में, तू यही खा ले न यार"

सूरज-"दीदी प्लीज़ खिला दो न" सूरज बहुत रुक़्वेस्ट करता है, अब पूनम मजबूर हो चुकी थी,

पूनम-" ठीक है शाम को खिलाऊँगी"सूरज यह सुनकर खुश हो जाता है ।

सूरज-" ठीक है दीदी, शाम को जरूर खिलाना"

दोपहर के 2 बजे सूरज अपने कमरे में लेटा हुआ था, तनु स्कूल से आते ही सूरज के रूम में गई, सूरज लेटा हुआ था, तनु सूरज को देख कर खुश हो जाती है और गले लगा लेती है।

तनु-"सूरज कब आया तू"

सूरज-" अभी 2 घंटे पहले ही आया था, आपकी पढाई कैसी चल रहा है दीदी"

तनु-" ठीक चल रही है भाई, थोड़ी देर रुक में कपडे बदल कर आ रही हूँ"

सूरज-"दीदी यहीं बदल लो कपडे" सूरज तनु के गले में हाँथ डालकर बूब्स मसलते हुए बोला।

तनु-"सूरज मान जा पूनम दीदी घर पर ही हैं,कभी भी आ सकती हैं"

सूरज-" दीदी आप स्कूल ड्रेस में बड़ी हॉट लग रही हो,आज आपकी लेने का मन कर रहा है, फ़ार्म हॉउस के गार्डेन में चलो दीदी"

तनु-" तेरा तो हमेसा ही लेने का मन करता है, और ये तेरा लंड भी हमेसा खड़ा ही रहता है, लेकिन भाई अभी में तुझसे चुदवा नहीं सकती हूँ" तनु सूरज का लंड लोअर में मसलते हुए बोली।

सूरज-" क्या हुआ दीदी, आज मेरा तो बहुत मन कर रहा है आपकी लेने का"

तनु-"मेरी डेट आ गई है आज,तू अपने हाँथ से हिला कर शांत कर ले मेरे भाई" तभी पूनम तनु को आवाज़ देती है, तनु चली जाती है, सूरज का लंड बेचारा झटके मारने लगता है, सूरज अपने लंड को लोअर के ऊपर से ही मुठियाने लगता है, तभी पूनम सूरज को बुलाने आती है ।

पूनम-" सूरज खाना खा ले" सूरज तम्बू को छुपाने के लिए घूम जाता है ।

सूरज-" दीदी अभी थोड़ी देर में आता हूँ आप चलो" सूरज का लंड तम्बू बना हुआ था, इसलिए अपने तम्बू को छिपाने की कोसिस करता हुआ बोला,लेकिन पूनम कुछ शक सा होता है की सूरज कुछ छुपा रहा है ।

पूनम-" ठीक है सूरज जल्दी आना" पूनम ने इतना बोला और बाहर की ओर जाने लगी, सूरज भी पुनः घूम जाता है और पूनम को जाते हुए देखता है। लेकिन अचानक पूनम सूरज की ओर घूम जाती है ।

पूनम-" सूरज तेरे लिए खाना कमरे में ही ले आऊँ" इतना बोलते ही पूनम की नज़र सूरज के लोअर पर पड़ी, सूरज का लंड विशाल रूप धारण किए लोअर में तम्बू बना हुआ था, सूरज को सँभालने का मौका ही नहीं मिला ।

सूरज-" म म में थोड़ी देर में आ जाऊँगा दीदी" हिम्मत करके बोलता है, लेकिन जैसे ही पूनम दीदी की नज़रो को ताड़ते हुए देखता है तो शर्मशार हो जाता है, पूनम बड़ी हैरानी से सूरज के तम्बू को ही देख रही थी, पूनम मन में आंकलन नहीं कर पा रही थी की लोअर में सूरज का इतना बड़ा विशाल लंड है या कुछ छुपा रहा है ।

पूनम-" क्या हुआ सूरज तुझे, तू कुछ छुपा रहा है मुझसे" पूनम पास आकर बोली, सूरज शर्म के कारण अपने तम्बू के आगे दोनों हाँथ रख लेता है।

सूरज-"दीदी कुछ नहीं है आप जाओ" सूरज की हालात ख़राब हो रही रही थी।

पूनम-" तू इतना घबरा क्यूँ रहा है, क्या छुपा रहा है इसमें" पूनम सूरज के लंड की ओर इशारा करते हुए बोली,

सूरज-" दीदी इसमें कुछ नहीं है,आप चलो में अभी आ रहा हूँ" सूरज घबरा कर बोला तो पूनम को और भी शक सा हुआ,

पूनम-" तू जरूर मुझसे कुछ छुपा रहा है, बता न क्या है इसमें" पूनम जोर देते हुए बोली। अब सूरज बेचारा अपनी बहन को क्या बोले की इसमें लंड है ।

सूरज-" कुछ नहीं है दीदी आप जाओ, में टॉयलेट जा रहा हूँ" सूरज जैसे ही टॉयलेट जाने की बोलता है तो पूनम समझ जाती है की इसमें सूरज का लंड है, सूरज का इतना विशाल लंड होगा यह पूनम ने कभी सोचा भी नहीं था ।

पूनम-" ओह्ह्ह सॉरी मुझे लगा तूने कुछ छुपाया है इसमें, जल्दी से बाथरूम जा" पूनम हँसने लगती है लेकिन पूनम की इस बात से सूरज शर्मा जाता है । पूनम समझ जाती है की सूरज का लंड खड़ा है और ये मुठ मारने टॉयलेट में जा रहा है । पूनम की चूत में खलबली सी मच जाती है।

पूनम बाहर चली जाती है । और सूरज बाथरूम में जाकर नहाने लगता है, मुठ मारने का मन त्याग देता है । थोड़ी देर बाद सूरज बाहर डायनिंग टेवल पर आकर बैठ जाता है । तनु नास्ता कर चुकी थी।

तनु-" सूरज तू खाना खा ले में कोचिंग जा रही हूँ, शाम को आउंगी" इतना कह कर तनु चली जाती है, पूनम किचेन से बाहर आकर सूरज के पास आकर बैठ जाती है ।

पूनम-" आ गया तू टॉयलेट से,बड़ा समय लगाता है तू"

सूरज-" दीदी नहा कर आया हूँ इसलिए समय लग गया"

पूनम-"ओह्ह्हो अच्छा नहाने में इतना समय" कुटिल मुस्कान के साथ हँसते हुए।

सूरज-" हाँ दीदी"शरमाते हुए।

पूनम-"अच्छा चल अब खाना खा ले जल्दी से" सूरज और पूनम खाना खा कर फ्री होते हैं ।

सूरज-" दीदी में अमरीका से आपके लिए कपडे लाया वो पहने नहीं आपने"

पूनम-" वो कपडे बहुत शार्ट हैं,इसलिए अभी नहीं पहने"

सूरज-" आप एक बार पहन कर तो देखो अच्छे लगेंगे आप पर"

पूनम-" अभी पहन कर देखूं"

सूरज-"हाँ दीदी, में भी देख लूंगा"

पूनम-"ठीक है,आजा मेरे रूम में"सूरज पूनम के साथ रूम में जाता है ।पूनम कपडे निकल कर बाथरूम में जाती है,सूरज बेड पर बैठ जाता है, पूनम बाथरूम में जाकर अपनी मेक्सी उतारती है, पूनम ने आज मेक्सी के अंदर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी,पूनम की चूचियाँ 36 साइज़ की थी और कमर 32 की, पूनम के जिस्म में सबसे आकर्षण उसके नितम्ब थे,जिन्हें देख कर मसलने का मन कर जाए, सफ़ेद गोरा रंग और 5 फुट 8 इंच की लंबाई थी पूनम की, बिलकुल अपनी माँ रेखा की तरह खूबसूरत ।

पूनम सूरज के लाए गए कपडे पहनने लगती है,क्योंकि बाहर सूरज उसका इंतज़ार कर रहा था, पूनम जल्दी से लाल स्कर्ट पहनती है जो उसकी जांघो तक थी और उसके साथ एक खुले गले का टॉप जिसे पूनम बड़ी मुश्किल से पहन पाती है क्योंकि उसके बदन के आकर से उसका टॉप बहुत टाइट था, पूनम की चूचियाँ आधी से ज्यादा बाहर निकल आती हैं, और टॉप में उसके निप्पल का शेप दिखाई देता है । पूनम को बाहर निकलने में बहुत शर्म आ रही थी,लेकिन फिर भी वो बाहर निकल कर आ जाती है । जैसे ही सूरज पूनम को देखता है तो बेड से खड़ा होकर आँखें फाड़े पूनम को देखने लगता है, सर से पाँव तक पूनम को निहारने लगता है। जैसे ही सूरज की नज़र पूनम के बूब्स पर जाती है तो हैरान रह जाता है,इतना कामुक दृश्य आज तक उसने न देखा था, सूरज का लंड लोअर में खड़ा हो जाता है जिसका उसे अंदाज़ा भी नहीं था,लेकिन पूनम की नज़र सूरज के तम्बू पर जाकर ठहर जाती है ।

पूनम शरमाती हुई सूरज के सामने खड़ी थी, सूरज पूनम के हर हिस्से को बारीकी से देख रहा था, पूनम इतनी कामुक है ये कभी सपने मे नहीं सोचा था सूरज ने, मोटी मोटी चिकनी दूधिया रंग की जांघे और टॉप में झलकती अधनंगी चुचिया को देख कर सूरज का तम्बू पुनः अपना आकर ले चूका था जिसका उसे भान भी न था, सूरज तो बस अपनी बड़ी बहन के योवन को देख कर अपनी हसरत पूरी कर रहा था, इधर पूनम का भी बुरा हाल था,इतने छोटे कपडे पहन कर अपने भाई के सामने खड़ा होने में उसे शर्म आ रही थी,लेकिन जैसे ही वो सूरज को देखती है तो हैरान रह जाती है,उसका अपना छोटा भाई उसे आँखें फाड़े उसके बदन को घूर रहा था,और सबसे बड़ा अचम्भा तो तब होता है जब पूनम सूरज के तम्बू को देखती है, पूनम को यकींन नहीं हो रहा था की इस तम्बू के पीछे कितना बड़ा विशाल लिंग है सूरज का, उसने चंद समय में ही सूरज के तम्बू को देख कर विशाल लंड की कल्पना कर ली, पूनम अपने स्थान से थोडा आगे चलकर सूरज के पास खड़ी हो जाती है,इससे सूरज अपने ख्यालो की दुनियां से बाहर निकल कर आता है ।

सूरज-"वाह्ह्ह् दीदी, इन कपड़ो में आप क़यामत लग रही हो, मेरे पास शब्द नहीं है कैसे तारीफ़ करू"

पूनम-" वो तो मुझे भी लग रहा है में इन कपड़ो ने क़यामत लग रही हूँ, तेरी आँखे बता रही थी,कैसे आँखे फाड़े देख रहा था मुझे"

सूरज-"दीदी में हैरान था आपको इस रूप में देख कर,और उसी हैरानी के कारण में कुछ बोल भी नहीं पाया, बाकई में दीदी आप बहुत हॉट लग रही हो इस ड्रेस में"

पूनम-" क्या हॉट और में, तुझे में हॉट कहाँ से दिखती हूँ" पूनम बेड पर बैठती हुई बोली जिसके कारण सूरज को पूनम की चुचियो के बीच की खाई आसानी से दिखाई देने लगती है और पूनम को सूरज का तम्बू क्योंकि सूरज खड़ा हुआ था ।

सूरज-" दीदी आप तो ऊपर से निचे तक हॉट लग रही हो इन कपड़ो में, मुझे पता होता आप ऐसे कपड़ो में इतनी सुन्दर लगती हो तो दस बारह जोड़ी कपडे ले आता"

पूनम-" ओह्ह्ह मेरे भाई तू तो मुझे अमेरिकन लड़की बना कर ही छोड़ेगा, तूझे कपडे खरीदने नहीं आते हैं, आधे अधूरे कपडे खरीद कर ले आया"

सूरज आधे अधूरे कपडे सुनकर चिंतित हो जाता है।

सूरज-" दीदी समझा नहीं,आधे अधूरे का मतलब"

पूनम-" ओह्ह्हहो सूरज तू एक दम भोला है, मतलब तू सिर्फ आधे ही कपडे लाया है इनके साथ दो कपडे और लाने चाहिए थे वो कम है" पूनम का आशय ब्रा और पेंटी से था ।

सूरज-" दो कपडे कौनसे कम है दीदी, में समझा नहीं" अब शर्माने की बारी पूनम की थी,भला अब वो कैसे बताए की ब्रा और पेंटी कम है ।

पूनम-" अरे यार तू अभी भी नहीं समझा, वही दो कपडे जो कपड़ो के अंदर पहनते हैं" इस बार सूरज समझ जाता है ।

सूरज-"ब्रा और पेंटी" सूरज खुले शब्दों में बोल देता है । पूनम चोंक जाती है और सोचती है ये तो बड़ा फास्ट है एक दम खुल्लम खुल्ला बोल दिया इसने।

पूनम-" हाँ ब्रा और पेंटी तो लाया ही नहीं,बिना ब्रा के इस टॉप को पहन कर तो में बाहर भी नहीं जा सकती हूँ" इस बार पूनम सूरज से थोडा खुल कर बोलती है जिसका असर सूरज के लंड पर होता है और लोअर के अंदर सलामी देने लगता है,पूनम की निगाहें सूरज के तम्बू पर ही टिकी थी,पूनम जव देखती है सूरज का लंड ब्रा और पेंटी के नाम से झटके मार रहा है, इसका सीधा असर पूनम की चूत पर होता है, पूनम समझ गई थी की मेरी चूत भी गीली हो रही है ।

सूरज-" मतलब दीदी आपने ब्रा नहीं पहनी है"

सूरज पूनम की तनी हुई चूचियों को देखते हुए बोला।

पूनम-"तू लाया ही नहीं है तो कैसे पहन लेती,और लाल रंग की ब्रा मेरे पास नहीं है" पूनम अपना लाल टॉप की ओर इशारा करते हुए बोली ।

सूरज-" सॉरी दीदी मुझे आपकी ब्रा का साइज़ पता नहीं था,और न ही पेंटी का, आप साइज़ बताओ अगली बार अमेरिका गया तो ले आऊंगा" पूनम शर्माने लगती है लेकिन आज पता नहीं क्यूँ उसे अपने भाई से बात करने में बड़ा मजा आ रहा था ।

पूनम-"36D" पूनम शरमाते हुए बोली ।

सूरज-" और पेंटी का साइज़ बता दो"

पूनम-" 38 long"

सूरज-" वाह्ह्ह् दीदी मस्त फिगर है आपका"

पूनम-"मस्त फिगर कहाँ है सूरज,और लड़कियों से ज्यादा मोटी हूँ में" पूनम खड़ी होती हुई बोली, और अपने आपको देखने लगती है ।

सूरज-" किसने कहा दीदी आप मोटी हो, आपका पेट तो एक दम सही है, आपके आगे तो सनी लिओन का फिगर भी फ़ैल है" सूरज पूनम की गांड देख कर बोला,

पूनम-"तू ऐसे बोल रहा है जैसे तूने सनी लिओन का फिगर देखा है"

सूरज-"हाँ दीदी मैंने देखा है उसका फिगर,आप उससे ज्यादा हॉट हो"

पूनम-"तूने सनी लिओन का फिगर देखा है, मतलब तूने उसकी पोर्न फ़िल्में देखी हैं" पूनम अचानक बोल देती है ।

सूरज-" हाँ दीदी देखी है, क्या आपने भी देखी हैं" सूरज उल्टा सवाल पूनम से करता है । इस सवाल से सूरज का लंड झटके मारने लगता है ।पूनम सोच में डूबी सोच रही थी की क्या जवाब दू, पूनम को इंटरनेट पर पॉर्न देख कर ऊँगली करने का बहुत बड़ा शौक था, उसने सनी लिओन की एक भी पोर्न फ़िल्म नहीं छोड़ी है सबके सब देखि हैं ।

पूनम-" हाँ देखी हैं,उसके जिस्म में और मेरे जिस्म में बस एक ही अंतर है" सूरज का लंड फटने लगता है बड़ी हिम्मत से कंट्रोल किए हुए था।

सूरज-"हाँ दीदी मुझे पता है वो अंतर"

पूनम-"अच्छा तो बता कौनसा अंतर है"

सूरज-"दीदी आपके नितम्ब बहुत बड़े हैं उससे लेकिन आप सनी लिओन से ज्यादा सेक्सी हो" यह सुनकर पूनम की चूत रिसने लगती है।

पूनम-" अब में यह कपडे उतार कर आती हूँ सूरज, तनु किसी भी समय आती होगी, और माँ के उठने का समय भी हो गया है" पूनम यह कह कर बाथरूम में चली जाती है और दरबाजा बंद कर लेती है, पूनम अंदर जाते ही जोर जोर से सांस लेती है। इधर सूरज का हाँथ लोअर में खड़े तम्बू पर जाता है तो हैरान रह जाता है की ये तो तम्बू बना हुआ था, दीदी पता नहीं क्या सोच रही होंगी इसको देख कर, सूरज अपने लंड को निकाल कर मुठियाने लगता है ।तभी बाथरूम का दरबाजा खुलने की आवाज़ आती है, सूरज अपने लंड को तुरंत लोअर के अंदर कर लेता है । पूनम मेक्सी पहनकर आई थी,पूनम की नज़र सूरज के तम्बू पर जाती है,

पूनम-"बाथरूम जाना है" पूनम सूरज के तम्बू को देखती हुई बोली। सूरज यह देख कर शर्मा गया।

सूरज-"में अपने बाथरूम में जा रहा हूँ"

पूनम-" ऐसी हालात में जाएगा, माँ ने देख लिया तो क्या सोचेगी,मेरे बाथरूम में ही कर ले तू" सूरज समझ जाता है दीदी मुठ मारने की कह रही हैं।

 
सूरज चुप चाप बाथरूम में चला जाता है, बाथरूम में जाते ही सूरज लंड को आज़द करके मुठ मारने लगता है तभी उसे पूनम की पेंटी दिखाई दी, सूरज पूनम की पेंटी को देखता है तो हैरान रह जाता है,पूनम की पेंटी पर कामरस लगा हुआ था, सूरज पेंटी को सूंघता है, खुसबू जानी पहचानी लगती है तो उसे चाटने लगता है, सूरज को एक तगड़ा झटका लगता है क्योंकि कल सुबह केले में उसे यही स्वाद लगा था, सूरज समझ जाता है दीदी ने रात में उन केलो से अपनी चूत की प्यास बुझाई होगी और सुबह मैंने उन्ही केलो को खा गया, सूरज पूनम दीदी की कामुक चूत की कल्पना करने लगता है और पेंटी को मुह में लेकर चूसते हुए मुठ मारने लगता है। 10 मिनट बाद सूरज झड़ जाता है, वीर्यरस की बौछार हो जाती है । सूरज पूनम की पेंटी को देखता है तो हैरान रह जाता है पूरी पेंटी को चूस चुसकर धो चूका था। सूरज पेंटी को टंगा देता है और बाथरूम से निकल कर आता है । पूनम सूरज का ही इंतज़ार कर रही थी ।

पूनम-" तुझे तो बहुत टाइम लगता है सूरज, कबसे तेरे निकलने का इतंजार कर रही थी में"

सूरज-" आपको भी करना है क्या"

पूनम-"हाँ मुझे भी करना है, लेकिन मुझे सिर्फ पिसाब करनी है" पूनम यह कह कर हँसते हुए बाथरूम चली जाती है। पूनम अंदर जाकर कमोड पर बैठती है तभी उसे सूरज के लंड से निकल वीर्य दिखाई देता है, पूनम एक ऊँगली से लेकर सूंघने लगती है । पूनम की चूत फड़कने लगती है, लेकिन ऊँगली न करके मूतने लगती है । मूतने के बाद पूनम अपनी पेंटी को देखती है जो गीली थी।

पूनम-(मन में) यह मैंने कब धो कर डाली, यह तो गन्दी पेंटी थी, पूनम पेंटी उठाकर देखती है तो हैरान रह जाती है चुकी उसकी पेंटी एक दम साफ़ थी,पूनम समझ जाती है सूरज ने जरूर इस पेंटी पर लगा कामरस चाटा है । पूनम मुस्कराने लगती है और बाथरूम से बाहर आ जाती है । सूरज अपने कमरे में जा चूका था ।

सूरज कमरे में जाते ही सो गया, शाम 8 बजे रेखा के जगाने पर सूरज उठता है ।

रात के 8 बजे मेरी माँ रेखा ने मुझे जगाया।

रेखा-" सूरज बेटा उठ जा, कितना सोएगा"

सूरज-" माँ सोने दो न"

रेखा-"दिन में ही तूने अपनी नींद पूरी कर ली,फिर रात में क्या करेगा,चल जल्दी से उठ खाना खा ले" माँ यह कह कर चली गई, में भी फ्रेस होकर नीचे गया,माँ और तनु दीदी डायनिंग टेवल पर बैठी थी और पूनम दीदी किचेन में थी, दीदी जैसे ही खाना लेकर आई मेरी नज़र दीदी से टकराई आज उनके चेहरे पर हल्की हल्की मुस्कान थी। हम सब लोगों ने खाना खाया और अपने अपने रूम में चले गए।

दिन में सोने के कारण मुझे तो नींद ही नहीं आ रही थी इसलिए में तनु दीदी के रूम में गया, दीदी बिस्तर पर लेटी हुई थी ।

सूरज-"दीदी आज तो बहुत जल्दी सोने लगीं आप"

तनु-" मेंन्सेज की बजह से कमर में दर्द हो रहा है सूरज,इसलिए आज जल्दी सो जाती हूँ"

सूरज-" ठीक है दीदी आप सो जाओ" मैंने दीदी को लिप्स किस्स किया,और सीधे माँ के कमरे में गया, माँ अपने कमरे में कहीं दिखाई नहीं दी,

मैंने माँ को आवाज़ दी ।

सूरज-" माँ आप कहाँ हो"

रेखा-" बेटा में बाथरूम में हूँ,कुछ काम था क्या" कमरे में ही बाथरूम था।

सूरज-" कुछ नहीं माँ बस ऐसे ही आया था,आप फ्रेस हो जाओ, में भी अब सोने जा रहा हूँ,गुड़ नाईट माँ"

रेखा-" ठीक है बेटा सो जा, गुड़ नाईट" में कमरे से बाहर निकल ही रहा था तभी मुझे माँ के बिस्तर पर wishpar का खुला हुआ पैकेट दिखाई पड़ा । तभी मुझे याद आया की माँ को भी मेंन्सेज हो रहें हैं,माँ जरूर बाथरूम में पेड बदलने गई होंगी, मैंने मन में कहा यार ये कैसी समस्या है महिलाओं की,हर महीने इस परेसानी से जूझना पड़ता है, वो भी पांच दिन, और साथ में कमर का दर्द भी झेलना पड़ता है, में सोचते हुए ऊपर आया,मेरा और पूनम दीदी का रूम ऊपर ही था,पूनम दीदी का दरबाजा बंद था, इसलिए में अपने रूम में आ गया, बिस्तर पर लेट कर मैंने मोबाइल उठाया तो देखा पूनम दीदी के कई मेसेज आए हुए थे व्हाट्सअप पर ।

व्हाट्सअप की चेटिंग--------

पूनम-" hi

सूरज कहाँ हो,

सो गया क्या?

मैंने देखा दीदी अभी ऑनलाइन थी मैंने तुरंत रिप्लाई किया ।

सूरज-" hi दीदी, में अभी जग रहा हूँ,दिन में सो लिया इस लिए नींद नहीं आ रही है"

पूनम-"ओह्ह मैंने देखा था दिन में तू घोड़े बेच कर सो रहा था,जैसे पता नहीं कितनी मेहनत की हो"

सूरज-" मेहनत तो की थी आज,इसलिए नींद आ गयी" स्माइल आइकॉन के साथ भेजा मेसेज।

पूनम-" पता है मुझे आजकल तू कौनसी मेहनत कर रहा है" स्माइल के साथ।

सूरज-"(चोंकते हुए) कौनसी दीदी?"

पूनम-"वही जो आज तूने मेरे बाथरूम में की'"

सूरज-" ओह्ह्ह टॉयलेट! दीदी टॉयलेट ही तो की थी"

पूनम-"अच्छा बेटा सिर्फ टॉयलेट की, तेरी टॉयलेट में सफ़ेद पानी कब से निकलने लगा" सूरज चोंक जाता है क्योंकि सूरज मुठ मारने के बाद फर्स साफ़ करना भूल गया था।

सूरज-" ओह दीदी वो तो कभी कभी सफ़ेद पानी निकलने लगता है,शायद मुझे कोई बीमारी है" झूठ बोल देता है ।

पूनम-"अच्छा अपने आप निकलने लगता है,मुझसे झूठ, तेरी शादी जल्दी करबानी पड़ेगी अब"

सूरज-" शादी क्यूँ"

पूनम-"ऐसे ही मेहनत करता रहा तू तो एक दिन कमजोर हो जाएगा बेटा, ज्यादा सनी लिओन की फिल्में मत देखा कर" स्माइल के साथ।

सूरज-" दीदी आप भी तो देखती हो सनी लिओन की फिल्में"

पूनम-" हाँ देखती हूँ लेकिन कभी कभी"

सूरज-"फिर तो आप भी मेहनत करती होगी" पूनम की हालात ख़राब हो जाती है की अब क्या जवाब दूँ,इधर पूनम नंगी बिस्तर पर लेटी एक ऊँगली से चूत सहला रही थी। पूनम किचेन से प्लेट और दो केले लाइ थी, एक केला उठाकर चूत में घुसाने लेती है, केला चूत में घुसते ही पूनम सिसक पड़ती है। साँसे तेजी से चलने लगती है ।

पूनम-" हाँ कभी कभी, तेरी तरह रोज नहीं,और आज तो तूने दो बार मेहनत की" सूरज का लंड झटके मारने लगता है,सूरज लोअर उतार कर लंड सहलाने लगता है,और दीदी की प्यासी चूत की कल्पना करने लगता है ।

सूरज-"(चोंकते हुए) दो बार नहीं दीदी,एक ही बार किया"

पूनम-"झूठ सुबह जब में तुझे तेरे कमरे में बुलाने आई तब भी तू बाथरूम जा रहा था"

सूरज-"तब नहीं किया दीदी,बस फ्रेस होकर आया था"

पूनम-"मतलब वो फिर ऐसे ही खड़ा रहता है" पूनम लंड नहीं बोलती है सिर्फ इशारो में ही बोलती है।

सूरज-" उसकी तो आदत ख़राब है दीदी,सुबह उठते ही सलामी देने लगता है"

पूनम-"हाहाहाहाहा आदत ख़राब है,काबू में रखा कर,आज कल बहुत बिगड़ता जा रहा है, आज तो तेरे उसने हद ही कर दी,अपनी ही बहन को देखकर खड़ा हो गया"

सूरज-"दीदी आप इसकी पिटाई लगा दो"

पूनम-"इसकी पिटाई तो तेरी बीबी लगाएगी"

सूरज-"बीबी तो पता नहीं कब आएगी तब तक दीदी आप उसकी ढंग से पिटाई कर दो"

पूनम-"मेरी पिटाई से तो ये बेचारा टूट जाएगा,मेरी मार ये झेल नहीं पाएगा" पूनम चूत में केला तेजी से घुसेड़ती है तो बेचारा केला भी टूट जाता है, पूनम चूत से केला का हलवा निकाल कर प्लेट में रखती है और दूसरा केला डालती है ।

सूरज-" दीदी ये अम्बुजा सीमेंट से भी ज्यादा मजबूत है,ये आपकी मार झेल लेगा"

पूनम-" मारते समय ऐसा न हो की वो हार मान जाए और युद्ध का मैदान छोड़ कर भागने लगे"

सूरज-"दीदी आप जैसी दो चार योद्धाएँ आ जाए फिर भी ये मैदान छोड़ कर नहीं भागेगा"

पूनम-"ओह्ह्हो इतना गुमान है तुझे उस पर,अगर ये रिश्ते की बुनियाद बीच में न होती तो आज ही छक्के छुड़ा देती, शुक्र मना बेटा तू बच गया,

सूरज-" ओह्ह्हो, फिर भी दीदी जब भी जंग के मैदान में आना चाहो तो शोक से आजाना, मेरे योद्धा संघर्षशील है,देखना एक दिन मेरे योद्धा की संघर्षगाथा RSS पर लिखी जाएगी"

पूनम-" तेरी संघर्षगाथा या तेरे उसकी गाथा,हाहाहाहा" पूनम हँसाने लगती है ।

सूरज-" दीदी हँसो नहीं,मुझपर"

पूनम-"तुझे नींद नहीं आ रही है सूरज,"

सूरज-" नहीं दीदी,अभी तो सिर्फ 9 ही बजे हैं"

पूनम-" hmmm कितने बजे सोता है"

सूरज-"12 बजे से पहले नींद नहीं आती है"

पूनम-" ओह्ह्हो 12 बजे तक क्या करता रहता है,पोर्न देखता होगा रात भर"

सूरज-" नहीं दीदी वो तो कभी कभी देखता हूँ"

पूनम-" ओह्ह्हो बड़ा शरीफ है तू,आज भी देखेगा तू"

सूरज-"नहीं दीदी आज पोर्न देखने का मन नहीं कर रहा है,आज आपसे बातें करने का मन है बस"

पूनम-"ओह्हो अपनी दीदी को फ्लर्ट कर रहा है"

सूरज-" सच में दीदी बोर हो रहा हूँ, रुको में आपके कमरे में आ रहा हूँ" सूरज अपने रूम से निकल कर बाहर आता है और पूनम के गेट पर खड़ा हो जाता है

पूनम-"नहीं अभी रुक दो मीनट"

सूरज-"क्यूँ क्या हुआ दीदी,में आपके रूम के बाहर खड़ा हूँ" सूरज बाहर इंतज़ार करता है ।

पूनम-" में मेक्सी पहन लू"

सूरज-"मेक्सी! मतलब समझा नहीं, आप अभी कुछ पहनी नहीं हो"

पूनम-" आज गर्मी ज्यादा है इसलिए उतार कर लेटी हूँ" सूरज का लंड झटके मारने लगता है,और कल्पना करने लगता है की दीदी बिलकुल नंगी हैं।

सूरज-"ब्रा पेंटी भी नहीं"हैरान होते हुए पूछता है ।

पूनम-"बो तो में घर में कभी नहीं पहनती हूँ" लंड फटने लगता है ।

सूरज-"वाह्ह्ह् दीदी"

पूनम-" चल अब ज्यादा सोच मत आजा कमरे में" सूरज पूनम का दरबाजा खोलता है और कमरे में चला जाता है ।

सूरज जैसे ही पूनम के कमरे में प्रवेश करता है,कमरे में बहुतअँधेरा होता है। सूरज को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था ।

पूनम-"आजा सूरज"

सूरज-"दीदी कमरे में बहुत अँधेरा है,लाइट जला लो" सूरज पूनम के बेड की तरफ जाता है,और लाइट जला देता है । जैसे ही कमरे में रौशनी होती है तो सूरज पूनम की तरफ देखता है तो उसकी धड़कने तेज हो जाती हैं,पूनम एक छोटी सी नायटी पहनी हुई थी जिसका गला बहुत बढ़ा था आधी चूचियों के दर्शन हो रहे थे,और नीचे जांघो तक थी, दीदी की मोटी और सफ़ेद दूधिया जांघे देख कर मेरी हालत ख़राब हो गई,काली नायटी पहनने के कारण दीदी का कामुक जिश्म बार बार देखने का मन कर रहा था।

पूनम-" सूरज लाइट बंद कर दे, और मेरे पास आकर बैठ" मैंने लाइट बंद कर दी और दीदी के सामने बेड पर आकर बैठ गया, दीदी के सामने बैठ कर बात करने में मुझे घबराहट सी महसूस हो रही थी, फोन के माध्यम से बात करते समय मेरी जिझक ख़त्म हो चुकी थी लेकिन दीदी के सामने बैठ कर बात करने में कठिनाई महसूस हो रही थी।

पूनम-" हाँ तो सूरज अब बता,क्या बात करनी है तुझे" दीदी खामोशी तोड़ते हुए बोली । कमरे में अँधेरा होने के कारण दीदी की हलकी हलकी झलक दिखाई दे रही थी,ऊपर से दीदी की काली नायटी,

सूरज-"क क कुछ नहीं दीदी, बोर हो रहा था इसलिए आया" मेरी हकलाहट के कारण दीदी हँसने लगी ।

पूनम-"तू इतना घबरा क्यूँ रहा है,तू तो बहुत बहादुर बन रहा था"

सूरज-"न नहीं दीदी घबरा नहीं रहा हूँ"

पूनम-" तू तो ऐसे घबरा रहा है जैसे सुहागरात के समय लड़की घबराती है,डर मत में तेरी बीबी नहीं दीदी हूँ" दीदी हँसते हुए बोली, मेरा लंड पुनः झटके मारने लगता था।

सूरज-" वो दीदी आपकी नायटी बहुत हॉट है,आज से पहले कभी आपको इतने हॉट कपडे पहने नहीं देखा इसलिए"

पूनम-" ओह्ह्ह मतलब तुझे में बहुत हॉट लग रही हूँ,इसलिए तेरी हार्ट बीप बढ़ गई है"

सूरज-"हाँ दीदी"

पूनम-"जब तू कमरे में घुसा था तब तू मुझे बहुत घूर घूर कर देख रहा था,इसलिए तो मैंने लाइट बंद करबा दी ताकि तू मुझे घूरे नहीं"

सूरज-'दीदी में आपको घूर नहीं रहा था,बस देख रहा था की मेरी दीदी कितनी खूबसूरत है"

पूनम-"ओह्हो आज से पहले तो तूने कभी मेरी तारीफ़ नहीं की,आज ऐसा क्या देख लिया"

सूरज-" आज से पहले आपको कभी इतने पास से देखा ही कहाँ मैंने,और इतनी हॉट नायटी में, आप बाकई में बहुत सुन्दर हो दीदी"

पूनम-" चल चल अब ज्यादा फेंक मत,इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ में, तू इतने प्यार से मेरे लिए ड्रेस लाया था इसलिए पहन ली थी मैंने आज दोपहर में"

सूरज-"दीदी सच में आप सुन्दर हो,आपका फिगर मस्त है"

पूनम-" मेरे फिगर में तुझे सबसे अच्छा क्या लगता है सूरज" पूनम सूरज के थोडा सा पास आई। पूनम की चूत अभी झड़ी नहीं थी,उसे अपनी चूत में थोडा सा गीलापन का अहसास हुआ,पूनम अँधेरे का फायदा उठा कर अपनी चूत सहला लेती है, इधर सूरज का हाँथ भी अपने तम्बू पर था,लंड झटके मारता तो हाँथ से कस कर रगड़ देता था ।

सूरज-" दीदी मुझे आपके नितम्ब सबसे अच्छे लगते हैं" सूरज पूनम की मोटी चौड़ी गांड की कल्पना करके लंड को मसलते हुए बोला ।

पूनम-" ओह्हो सूरज तुझे मेरे फिगर में सिर्फ नितम्ब ही दिखाई देते हैं, तूने कभी मेरे नितम्ब देखें हैं बिना कपड़ो के" सूरज सोचता है ।

सूरज-"हाँ दीदी देखें हैं कई बार" पूनम यह सुनकर चोंक जाती है।

पूनम-"क्या तूने मेरे नितम्ब देखें हैं कब,कहाँ और कैसे?" पूनम हैरान होते हुए कई सवाल करती है।

सूरज-"दीदी जब हम गाँव में रहते थे तब आप आँगन में पिसाब करती थी,तब कई बार धोके से नज़र चली जाती थी,जानबूझ कर कभी नहीं देखे"

पूनम-" ओह्ह्ह अच्छा! गाँव के घर में बाथरूम तो था नहीं इसलिए खुले में ही जाना पड़ता था,अच्छा तो यह बता जब तू मेरे नितम्ब को देखता था तब तेरे मन में क्या विचार आते थे" पूनम फिर से अपनी चूत को मसलते हुए बोली।

सूरज-" उस समय मन में कोई विचार नहीं आता था,बस शर्म आती थी मुझे"

पूनम-"अच्छा मतलब तू बहुत शरीफ था तब,सिर्फ नितम्ब ही देखे थे या कुछ और भी देखा था तूने" पूनम का आशाय चूत देखने से था। पूनम गर्म हो चुकी थी ।

सूरज-"नितम्ब बहुत बड़े दिखाई देते थे और बालो का झुण्ड दिखाई देता था जहाँ से आप सु सु करती थी" सूरज का लंड झटके मारने लगता है ।

पूनम-"ओह्ह सूरज,इसका मतलब तूने सुसु नहीं देख पाई बालो की बजह से,Thanks God बालो की बजह से तू देख नहीं पाया" पूनम एक ऊँगली डालती हुई बोली ।

सूरज-"दीदी क्या अब भी बाल रखती हो सुसु पर" सूरज का एक एक सवाल तीर की तरह पूनम की चूत पर चल रहा था, पूनम की चूत बहने लगी थी,अँधेरे का भरपूर फायदा पूनम उठा रही थी।

पूनम-"हाँ रखती हूँ,लेकिन 15 दिन में साफ़ कर लेती हूँ, गाँव में रहती थी तब तो छः छः महीने हो जाते थे बिना साफ़ किए हुए" सूरज अपना लंड मसलने लगता है ।

सूरज-"दीदी किससे साफ़ करती हो अपने बाल"

पूनम-"वीट से, ओह्ह सूरज तू कैसे सवाल पूछता है अपनी दीदी से"

सूरज-" आप मेरी सबसे प्यारी दीदी हो"

पूनम-"मक्खन लगा रहा है"

सूरज-'सच में दीदी आप बहुत मस्त हो,मन करता है आपको देखता रहूँ"

पूनम-"क्या देखने का मन कर रहा है,मेरे नितम्ब?

सूरज-"हाँ दीदी आपके नितम्ब"

पूनम-"मेरे नितम्ब ज्यादा अच्छे हैं क्या"

सूरज-"हाँ दीदी,बहुत चौड़े हैं,हाँथ से स्पर्श करने का मन करता है"

पूनम-"ओह्ह्हो तू कितना बोल्ड हो गया है, अपनी ही दीदी का जिस्म देखना चाहता है, देख कर क्या करेगा, मेहनत करेगा" पूनम हसते हुए बोली।

सूरज-" दीदी आप भी तो मेहनत करती हो,अच्छा दीदी आप दिन में कितने बार ऊँगली करती हो"

पूनम-"एक बार वो भी रात में सोने से पहले"

सूरज-"मतलब इस समय अगर में आता तो आप ऊँगली कर रही होती"

पूनम-"हाँ"

सूरज-"दीदी लाइट जला लू"

पूनम-"लाइट जला कर क्या करेगा"

सूरज-"आपको देखने का मन कर रहा है"

पूनम-"ओह्ह्ह तू भी न पागल है, मोबाइल की लाइट जला कर देख ले"पूनम चूत से उंगली निकाल कर मेक्सी ठीक करती है । सूरज मोबाइल की टोर्च जलाता है , पूनम सूरज को देख कर मुस्कराती है,सूरज पूनम के बदन पर लाइट मारता है । तभी मोबाइल के टोर्च की रौशनी टेवल पर जाती है,टेवल पर केले की प्लेट रखी थी । सूरज समझ जाता है दीदी ने ये केले अपनी चूत में डाले होंगे,सूरज के मुह में पानी आ जाता है ।

सूरज-"वाह्ह्ह् दीदी मेरे प्रिय केले रखें हैं,मुझे तो भूंक भी लगी है" सूरज केले की प्लेट उठाकर केले को खाने लगता है, यह देख कर पूनम की चूत बहने लगती है ।

पूनम-"सूरज यह केले मत खा,गंदे हैं, प्लेट रख दे वापिस' लेकिन तब तक सूरज एक केला खा चूका था ।

सूरज-"दीदी इतने स्वादिष्ट केले को आप गंदे बता रही हो, इन केलो पर जो चिपचिपा जैल लगा हुआ है वो बहुत स्वादिष्ट हैं, ये जैल कहाँ से लाती हो दीदी,मुझे बता दो सारा जैल चाट जाऊँगा" सूरज यह बात जानबूझ कर बोलता है,पूनम जैसे ही यह सुनती है चूत में सुरसुराहट होने लगती है,पूनम का मन कर रहा था की नायटी को उतार कर चूत में कस कस कर ऊँगली करे । सूरज केले खा कर पूरी प्लेट चाट जाता है ।पूनम बेचारी कसमसाती हुई देखती रहती है ।

सूरज-"क्या हुआ दीदी,आपने बताया नहीं ये स्वादिष्ट जेल कहाँ से लाती हो"

पूनम-"ओह्ह्ह क्या करेगा तू यह जानकार,अब ये लाइट बंद कर दे सूरज" सूरज मोबाइल की लाइट बंद कर देता है ।

सूरज-"बताओ न दीदी ये जेल कहाँ से लाती हो"

लाइट बंद होते ही पूनम नायटी को ऊपर करके एक ऊँगली चूत में डाल देती है ।

पूनम-"ओह्ह्ह्ह्हाहूफ् वक़्त आने पर बता दूंगी सूरज" पूनम सिसकते हुए बोली, सूरज समझ जाता है दीदी अपनी चूत सहला रही हैं।

सूरज-"क्या हुआ दीदी,आप सिसक क्यूँ रही हो"

पूनम-"कुछ नहीं बस कमर में दर्द सा हुआ" पूनम झूठ बोल देती है।

सूरज-" दीदी में आपकी मदद करू क्या"

पूनम-"क्या मदद करेगा" पूनम अपने पैर फैला कर बैठती है तो उसका पैर सूरज के खड़े लंड पर लगता है । पूनम समझ जाती है ये सूरज का लंड है जो खड़ा है । इधर सूरज को बड़ा मजा आता है ।

सूरज-" आपकी कमर दबा दू"

पूनम-"नहीं सूरज में ठीक हूँ, एक मिनट पिसाब करके आती हूँ" पूनम को वास्तव में पिसाब लगती है पूनम अँधेरे में उठती है ।

सूरज-"दीदी रुको में मोबाइल की टोर्च जलाता हूँ" सूरज लाइट जलाता है, बाथरूम ठीक सामने ही था, पूनम बाथरूम में जाती है दरबाजा खुला ही रखती है ।

पूनम-"सूरज अब लाइट बंद कर में पिसाब कर लू" सूरज का लंड अकड़ चूका था, सूरज लाइट बंद करता है,पूनम फर्स पर बैठ कर नायटी ऊपर करके बैठ जाती है, तभी एक तेज सिटी की आवाज़ के साथ पूनम मूतने लगती है । जैसे ही सिटी बजती है सूरज का लंड फड़फड़ाने लगता है सूरज न चाहते हुए भी मोबाइल की टोर्च जला कर पूनम को देखने लगता है, चार कदम की दुरी पर ही मूत रही थी पूनम,सूरज जैसे ही पूनम की की मोटी गांड देखता है तो लंड मुठियाने लगता है ।

 
पूनम-"सूरज यह क्या कर रहा है लाइट बंद कर" पूनम मूतते हुए बोली,

सूरज-"दीदी किसी ने सिटी बजाई बही देख रहा था"पुनम पिसाब करके खड़ी होती है,सूरज बड़े गोर से पूनम की गांड देखता है,पूनम हाँथ धो कर आती है ।

पूनम-"ओह्ह्ह सूरज वो सिटी की आवाज़ नहीं बल्कि मेरी सुसु की आवाज़ थी" मोबाइल की रौशनी में पूनम सूरज के तम्बू को देखती है ।सूरज लाइट बंद कर देता है ।

सूरज-"ओह्ह दीदी सुसु की आवाज़ इतनी मधुर ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने सुरीली रागनी छोड़ दी हो,मन कर रहा था और सुनु"

पूनम-"ओह्ह तू भी एक दम पागल है सूरज,सिटी की आवाज़ इतनी अच्छी लगी तुझे,अबकी बार मोबाइल में आवाज़ रिकॉर्ड कर लुंगी,रिंग टोन बना कर सुनते रहना"

सूरज-"हाहाहा दीदी वीडियो रिकॉर्ड कर लेना,में भी तो देखूं सिटी की आवाज़ कहाँ से निकलती हैं" पूनम की चूत में खलबली मचने लगती है,इधर सूरज भी लंड सहला रहा था,जिसका अंदाज़ा पूनम को हो रहा था ।

पूनम-"पागल अपनी दीदी की सुसु देखेगा"

सूरज पर अब कंट्रोल नहीं हो रहा था।

सूरज-'दीदी बाकई में आपके नितम्ब बहुत अच्छे हैं,मन कर रहा था पास आकर देख लू,कितने चौड़े और सेक्सी हैं" पूनम सेक्स की आग में जलने लगती है ।

पूनम-"तूने देख ही लिए मेरे नितम्ब,बहुत बत्तमीज हो गया है तू"

सूरज-"दीदी आपके नितम्ब बहुत गोरे हैं,काश में पास से देख पाता"

पूनम-"नितम्ब को और कुछ भी बोलते हैं क्या सूरज"

सूरज-"हाँ दीदी गांड बोलते हैं,और सुसु को चूत बोलते हैं"

पूनम-"ओह्ह्ह गांड और सुसु को चूत, तू अपने पेनिस को क्या बोलता है"

सूरज-"इसको लंड बोलते हैं दीदी"

पूनम-"तूने अपने लंड को बाहर निकाल लिया है क्या"

सूरज-"हाँ दीदी लोअर से तो मैंने कब का आज़ाद कर लिया है,अँधेरे का फायदा उठा रहा हूँ"लंड को मसलते हुए बोला। पूनम की चूत में आग लग जाती है ।

पूनम-"हाँ अँधेरे का फायदा तो में भी उठा रही हूँ"

सूरज-"ओह्ह मतलब दीदी आप भी अपनी चूत मसल रही हो"

पूनम-"हाँ और क्या" पूनम की इस बात को सुन कर सूरज का मन मुठ मारने का हुआ ।

सूरज-"दीदी में बाथरूम में जा रहा हूँ,लाइट जला लू अंदर बहुत अँधेरा है"

पूनम-"फिर से मेहनत करने जा रहा है, आज दिन में तो तूने किया ही था"

सूरज-"दीदी बहुत मन कर रहा है,हिला लू जाकर"

पूनम-"लाइट मत जला,सामने बाथरूम है जा ऐसे ही जाकर हिला ले"

सूरज-"दीदी बहुत अँधेरा है कैसे जाऊं"

पूनम-"तो फिर बाथरूम मत जा यहीं हिला ले,बैसे भी अँधेरा है" सूरज की तो मौज आ जाती है,इधर पूनम के मन में सूरज का लंड देखने की तीब्र इच्छा थी ।

सूरज-"दीदी आपके सामने"

पूनम-"में कौनसा तुझे दिखाई दे रही हूँ,अँधेरा है कर ले"

सूरज-"दीदी मुझे कपडे उतार कर हिलाने में मजा आता है"

पूनम-"ओह्ह तो उतार ले" सूरज तुरंत अपने कपडे उतार कर नंगा हो जाता है,पूनम की चूत रिसने लगती है ।

सूरज-"हिलाते हुए"- दीदी आप भी कर लो"

पूनम-"क्या"

सूरज-"ऊँगली कर लो दीदी आप भी"

पूनम-"तू आ गया था इसलिए कर नहीं पाई"

सूरज-"ओह्ह सॉरी दीदी, आप भी कर लो,अब आराम से"

पूनम-"पहले तू अपना कर ले में बाद में करुँगी"

सूरज-"दीदी आप भी कर लो न,में कौनसा देख रहा हूँ"

पूनम-"मुझे भी कपडे उतार कर करने में मजा आता है,"

सूरज-"नायटी उतार लो न दीदी"

पूनम-" मुझे भी बेशरम बना कर ही छोड़ेगा तू"

सूरज-"दीदी आप ऊँगली करोगी तो मेरा पानी जल्दी निकल आएगा"

पूनम-"ठीक है करती हूँ ऊँगली" पूनम जल्दी से नायटी उतार कर बेड पर लेट जाती है,एक तरफ सूरज और दूसरी तरफ पूनम ।

पूनम जैसे ही अपनी चूत में ऊँगली करती है तेज तेज सिसकारी भरने लगती है, इधर सूरज भी तेज तेज हिलाता है, पूनम की कामुक सिसकी सूरज के लिए vigera का काम कर रही थी, अपनी ही कामुक बहन को ऊँगली करने के महसूस से ही सूरज की उत्तेजना बढ़ गई थी और यही हाल पूनम का था ।

पूनम-"ओह्ह्ह्हूफ्फ्फाह्ह्ह्ह्ह्हाउच् आह्ह्ह"पूनम की सिसकियाँ तेज हो जाती है,

सूरज-"दीदी ऊँगली अंदर डालकर कर रही हो या सिर्फ सहला रही हो"

पूनम-"उफ्फ्फ्फाह्ह्ह्ह् ऊँगली अंदर डाल कर कर रही हूँ,ऊँगली से मुझे मजा नहीं आता है सूरज"

सूरज-"फिर क्या डालती हो आप सुसु में"

पूनम-"क केला डालती हूँ इसमें आह्ह्ह्हउफ़्फ़्फ़गईईईई"

सूरज-"ओह्ह्ह मतलब जो केले मैंने खाए तो वो आपकी चूत से निकले हुए थे" सूरज पहली बार चूत बोलता है,पूनम चूत शब्द सुन कर ऊँगली तेज करने लगती है"

पूनम-"हाँ वो मेरी ही चु सुसु से निकले थे" सूरज अपना सर पूनम के सर के पास ले जाता है,अब दोनों बहन भाई बराबर में लेट कर अपने अपने काम में लगे हुए थे ।

सूरज-"दीदी आपकी चूत का पानी तो बड़ा स्वादिष्ट है,क्या मुझे वो पानी फिर से चटा दोगी" पूनम पर रहा नहीं जाता है,पूनम अपनी चूत से ऊँगली निकाल कर सूरज के चेहरे पर ले जाती है,और मुह को ढ़ुढ़ते हुए कामरस से भीगी ऊँगली मुह में घुसेड देती है।

पूनम-"ले चाट ले अपनी दीदी की चूत का पानी" सूरज ऊँगली को चाटने लगता है ।

सूरज-"दीदी चूत चाटूंगा आपकी' दोनों बहन भाई के ऊपर सेक्स का नशा चढ़ा हुआ था ।

पूनम-" तू अपनी बहन की चूत चाटेगा?"

सूरज-"हाँ दीदी आपकी चूत में जीव्ह डालकर सारा पानी चाट जाऊँगा"

पूनम-"ओह्ह्ह तू ये कैसी बात करता है,मेरे तन बदन में आग लगा दी है तूने,में बहक जाउंगी सूरज"

सूरज-"तो बहक जाओ न दीदी"

पूनम-"तू मुझे संभाल तो लेगा न, मेरे अंदर बहुत कामाग्नि है"

सूरज-"दीदी भरोसा रखो,आज आपकी कामाग्नि को शांत कर दूंगा में" पूनम अपना एक हाँथ सूरज के पेट पर सहलाती हुई सूरज का लंड पकड़ लेती है।

पूनम-"ओह्ह्ह सूरज ये तेरा लंड है,ये तो बाकई में बहुत मोटा और लंबा है"

सूरज-" दीदी आप जैसी मस्त तगड़ी घोड़ी के लिए इतना बड़ा लंड काफी है न,जब ये आपकी चूत में घुसेगा तो पता भी नहीं लगेगा कहाँ गया" सूरज अपना एक हाँथ पूनम के बूब्स को सहलाता है,निप्पल को मसलता है फिर चूत को सहला देता है, पूनम की चूत पर बहुत छोटी छोटी झांटे थी। पूनम सूरज को कस कर गले लगा लेती है,और लिप्स किस्स करने लगती है, पूनम जंगली लड़की की तरह सूरज के होंठो को चूसने लगती है ।सूरज अपने दोनों हांथी से पूनम की गांड को मसलता है, गांड के दोनों पाटो को भींचता है, गांड की दरार में ऊँगली डालने लगता है,पूनम सिहर जाती है,पूनम सूरज के होंठो को चूसते हुए एक हाँथ से सूरज के लंड को मसलने लगती है । पूनम के सिसकियाँ लेती है, तभी पूनम सूरज के होंठो को छोड़ कर अपनी भारी भरकम गांड सूरज के मुह पर रख कर बैठ जाती है, सूरज का मुह गांड की दरार में घुस जाता है, सूरज अपनी जीव्ह गांड के आसपास चाटने लगता है ।

पूनम-"ओह्ह्ह सूरज तुझे मेरी गांड पसंद है न,ले चाट अब, अपनी दीदी की गांड को अच्छे से मसल,लाल कर दे आज मेरी गांड" सूरज गांड को चाटते हुए अपनी जीव्ह चूत के पास ले जाता है और जीव्ह को चूत में प्रवेश कर देता है, पूनम सिसकारी भरने लगती है और खुद की चुचिया मसलती है । पूनम की चूत से बहता पानी चाट चाट कर साफ़ कर देता है, पूनम झुक कर सूरज के लंड को मुह में लेकर चूसने लगती है । दोनों बहन भाई एक दूसरे के अंगो को चूसने लगते हैं । पूनम पाए अब रहा नहीं जा रहा था ।

पूनम-"मेरे भाई अब अपनी दीदी की चूत खोल दे अपने लंड से,अब और बर्दास्त नहीं हो रहा है"

पूनम नीचे लेट जाती है सूरज पूनम के ऊपर लेट कर अपना लंड पूनम की चूत पर रखता है ।

सूरज-"दीदी दर्द होगा थोडा सा,में लंड घुसेड़ रहा हूँ"

पूनम-"में हर दर्द सह लुंगी सूरज,लंड डाल दे अपनी दीदी की चूत में सूरज" सूरज आराम आराम अपना लंड चूत में पूरा घुसेड़ देता है ।

पूनम-"आःह्ह्ह्हफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़आह्ह्ह्ह सूरज, निकाल कर दुबारा डाल" सूरज लंड को निकाल कर दुबारा धक्का मारता है, पूनम की चूत में ऐसा लग रहा था जैसे ज्वाला मुखी हो,पूरी चूत भट्टी की तरह गरम थी । सूरज तेज तेज धक्के मार कर चोदने लगता है, पूनम भी तेज तेज बोल कर चुदवाती है ।

पूनम-" आह्ह्ह तेरा लंड बच्चेदानी तक पहुँच गया है सूरज,और तेज चोद आह्ह्ह्हफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्"

सूरज-"दीदी घोड़ी बनो" पूनम घोड़ी बन जाती है, सूरज पूनम की गांड पर तमाचे मार कर चोदता है ।

पूनम की चूत से लंड तेजी से अन्दरबाहर हो रहा था,

पूनम-" सूरज अब तू लेट में तुझे छोडूंगी ऊपर से" सूरज लेट जाता है पूनम आप अपनी चूत लंड पर रख कर बैठ जाती है, पूनम की गांड ऊपर नीचे होने लगती है, पूनम उछाल उछल कर चुदती है, सूरज भी नीचे से धक्के मारता है । पूनम झड़ जाती है ।और नीचे आकर लेट जाती है, सूरज लंड को चूत में डालकर चोदने लगता है । पूनम फिर से गर्म हो जाती है, सूरज पूनम के बूब्स को मुह में लेकर चूसने लगता है, दोनी बूब्स को मसलता है ।

सूरज-'दीदी तुम्हारी चुचिया भी गांड की तरह कठोर है ,

पूनम-" मसल दे सूरज,आह्ह्हफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्"सूरज तेज तेज धक्के मारता है पूनम का शारीर अकड़ने लगता है और एक बार फिर झड़ जाती है ।

सूरज-"दीदी में भी झड़ने बाला हूँ"

पूनम-"चूत में ही झड़ जा मेरे भारी" सूरज तेज तेज धक्के मार कर चूत में झड़ जाता है, सूरज हाँफते हुए पूनम के ऊपर ही लेटा रहता है जब तक लंड से एक एक बून्द तपक नहीं जाती । सूरज से चुदबाने के बाद पूनम भी आज बहुत खुश थी चुकी पहली बार चूदी थी, सूरज पूनम के उपर से उठता है, पुनमचुत साफ़ करती है ।

सूरज-"दीदी कैसा लगा चुद कर"

पूनम-"बहुत मजा आया सूरज, दोनों बहन भाई नंगे एक दूसरे को बाँहो में लेकर लेट जाते हैं। रत के 12 बज चुके थे,

सूरज-"दीदी एक बार और चुदाई करें"

पूनम-"में तो तीन बार झड़ गई,अब और दम नहीहै मुझ में, सो जा अब,मुझे सुबह जग कर सारा काम करना है ।

सूरज-" सुबह घर का काम तानु दीदी कर लेंगी"

पूनम-"तनु और माँ को मेंन्सेज हो रहे है इसलिए सारा काम मुझे ही करना हैभाई"

सूरज-'दीदी अब लाइट जला कर आपकी चूत देख लू, मैंने अभी तक आपका जिस्म नहीं देखा है, अँधेरे के कारण"

पूनम-"नहीं सूरज अब तू अपने रूम में जा,कल देखना मुझे नंगी, फिर से मजा आएगा,जब हम रौशनी में सेक्स करेंगे"पूनम सूरज के कपडे दे कर भेज देती है ।

सूरज थका हारा आकर अपने कमरे मे सो जाता है।

सुबह 8 बजे तनु दीदी के जगाने पर में जागा, में फ्रेस होकर निचे गया,तनु दीदी नास्ता करके कॉलेज चली गई, माँ भी नास्ता करके अपने रूम में चली गई, पूनम दीदी किचेन में थी,रात की चुदाई के कारण दीदी मेरा सामना नहीं कर पा रही थी,उन्हें बहुत शर्म आ रही थी । में किचेन में गया और दीदी का हाँथ पकड़ कर अपने कमरे में ले गया ।

सूरज पूनम को लेकर कमरे में आता है और पूनम को कस कर गले लगा कर उसके होंठ चूसने लगता है,होंठ चूसते चूसते सूरज के हाँथ पूनम की गांड तक पहुँच गए और उनको मसलने लगा। काफी देर तक पूनम के होंठ चूसने के बाद सूरज पूनम की मेक्सी को उठाकर चूत में एक ऊँगली डालकर मसलने लगा ।

पूनम-"सूरज मत कर, माँ कभी भी आ सकती है"

सूरज-" दीदी करने दो न, माँ कमरे में पूजा करेगी,उन्हें पूजा करने में एक घण्टा लग जाता है,तब तक में तुम्हारी चूत की पूजा कर देता हूँ अपने लंड से"सूरज मेक्सी को उठाकर पूनम की चूत चाटने लगता है। पूनम की चूत रस छोड़ने लगती है,सूरज चूत में जीव्ह डालकर चाटने लगता है ।

पूनम-"सूरज मत कर अभी,मुझे सेक्स चढ़ जाएगा तो में बिना चुदे नहीं रह पाउंगी"

सूरज-"दीदी आपको चोदने के लिए ही तो लाया हूँ, आज आपकी चूत इस दिन के उजाले में मारूँगा" सूरज पूनम के बूब्स और चूत मसलने लगता है,पूनम गर्म हो जाती है ।

पूनम-"आह्ह्हफ़्फ़्फ़् सूरज अब सब्र नहीं हो रहा है, तू लोअर उतार कर लेट जा बेड पर" सूरज अपने कपडे उतार कर बेड पर चित्त ले जाता है, पूनम अपनी मेक्सी उतार कर सूरज के लंड पर अपनी चूत सेट करके बैठ जाती है, और अपनी गांड ऊपर नीचे करके धक्के मारने लगती है ।सूरज का लंड पूनम की चूत में पूरा अंदर बहार हो रहा था। सूरज पूनम की चूचियों को पकड़ कर मसलता है इससे पूनम की गति बढ़ जाती है और तेज तेज सूरज के लंड पर कूदने लगती है, सूरज पूनम की कमर में हाँथ डालकर गाण्ड को मसलता है ।

सूरज-"आह्ह्ह दीदी मस्त चुदाई करती हो आप"

पूनम-" तूने मेरी सुलगती चूत को छेड़ा है,आज तेरे लंड की खैर नहीं" पुरे कमरे में थप थप की आवाज़े गूंजने लगती है ।

सूरज-'दीदी आपकी चूत में बहुत आग है,इतनी आग तो मैंने किसी की चूत में नहीं देखि,भट्टी की तरह धधक रही है चूत" पूनम झड़ जाती है। सूरज पूनम को नीचे लेटा कर चोदने लगता है ।

पूनम-"और किस किस की चूत मारी है तूने" सूरज धक्के मारता है , लेकिन पूनम के इस सवाल से फस जाता है ।

सूरज-"दीदी वो तो बस मैंने ऐसे ही बोल दिया था,आपकी चूत में बाकई बहुत आग है"

पूनम-"आउफ़्फ़्फ़्फ़् आह्ह्ह्ह झूठ मत बोल सूरज,सच सच बोल तूने किस किस को चोदा है,तुझे मेरी कसम" पूनम जानबूझ कर कसम खिलाती है ताकि सूरज सब बता दे,इधर सूरज झड़ने के करीब होता है।

सूरज-"दीदी आप सुन कर नाराज़ हो जाओगी,बाद में बताऊंगा" पूनम सूरज का लंड पकड़ लेती है,आधा लंड चूत में था और आधा लंड पूनम की मुट्ठी में था,पूनम अभी झड़ भी नहीं पाया था ।

पूनम-'में तुझसे कभी नाराज नहीं होंगी,सच सच बता सूरज" सूरज मजबूर हो चूका था ।

सूरज-"तान्या दीदी को और संध्या माँ को चोद चूका हूँ"सूरज तनु की चुदाई छुपा लेता है,पूनम चोंक जाती है जब सूरज संध्या के बारे में बोलता है।

पूनम-"ओह्ह्ह सूरज संध्या माँ को भी तू चोद चूका है, उनकी उम्र तो अपनी माँ से भी ज्यादा है,तान्या पर तो मुझे पहले से ही शक था" पूनम मुठ्ठी से सूरज का लंड छोड़ देती है,सूरज धक्के मारने लगता है ।

सूरज-"संध्या माँ 22 साल से चूदी नहीं थी, मेरा लंड देख कर उनकी प्यास और बढ़ गई,अब तीन महीने से रोजाना में उनको चोद रहा हूँ"सूरज अब पूनम को चोदते हुए झड़ जाता है । पूनम भी झड़ जाती है।

पूनम-"ओह्ह्ह सूरज तू तो मझां हुआ खिलाडी निकलना,22 साल से प्यासी संध्या को चोद दिया तूने' पूनम हसते हुए बोली।

सूरज-"दीदी मैंने किसी को जानबूझ कर नहीं चोदा, हालात बनते गए और में चोदता गया"

पूनम-"हाँ भाई तूने सही कहा,ये चूत की गर्मी ऐसे ही होती है,एक बार भड़क जाए तो बिना लंड के आग नहीं बुझती है'पूनम अपनी चूत दिखाते हुए बोली।

सूरज-"दीदी आपकी चूत मस्त है दुबारा चौदने का मन करने लगा" सूरज पूनम की चूत में ऊँगली करते हुए बोला । पुनम बाथरूम में भाग जाती है,

पूनम-"अब नहीं मेरे भाई माँ आती ही होगी,अब मुझे नहाने दे" लेकिन सूरज नहीं मानता है बाथरूम में जाकर पूनम को कस कर गले लगा लेता है और एक ऊँगली गांड के छेद में कुरेदने लगता है। पूनम मचल जाती है । सूरज का लंड पुनः खड़ा हो जाता है और बाथरूम में ही पूनम की एक टांग कमोड पर रख कर अपना लंड चूत में घुसेड़ कर धक्के मारने लगता है ।पूनम की चूत भी पनिया जाती है। सूरज पूनम के दूध पीते हुए तेज तेज धक्के मारता है ।

सूरज-"दीदी आपका बदन बेहद कामुक है,और आपकी गांड गदराई हुई है, आपको देख कर मेरा लंड झटके मारने लगता है"

पूनम-"तेरा भी लंड कुछ कम नहीं है सूरज,चूत के अंदर जब रगड़ता है तो मजा आ जाता है, चोद मेरे भाई, तेरी दीदी बहुत प्यासी है आह्ह्ह्हफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्" पूनम की कामुक आवाज़े निकलने लगती है तभी रेखा माँ की आवाज़ आती है ।

रेखा-"पूनम कहाँ है तू" रेखा पूनम के कमरे में आकर पूनम को ढूढती है लेकिन पूनम दिखाई नहीं देती है,तभी रेखा को बाथरूम से पुनम की सिसकियाँ सुनाई देती है, इधर पूनम सूरज से चुदवाने में मस्त थी,उसे खबर ही नहीं थी की माँ बाहर खड़ी उसकी कामुक सिसकियों को सुन चुकी है ।

रेखा-"पूनम क्या हुआ? रेखा दरबाजा बजा कर पूछती है । जैसे ही पूनम और सूरज माँ की आवाज़ सुनते है तो सन्न रह जातें हैं। पूनम सूरज जो चुप रहने का इशारा करती है ताकि माँ को शक न हो ।

पूनम-"क क कुछ नहीं हुआ माँ,नहा रही हूँ" सूरज चूत मे घुसा लंड आराम से निकालता है तो पूनम सूरज को रोक देती है ।

रेखा-"तेरी सिसकने की आवाज़ सुनी थी मैंने,तेरी तबियत तो ठीक है? पूनम और सूरज माँ के इस सवाल से घबरा जाते हैं ।

पूनम-"कुछ नहीं हुआ माँ, ठंड लगने की बजह से कपकपा गई थी में और सिसकी निकल गई"

रेखा-" ये सूरज कहाँ गया"

पूनम-"वो बाहर गार्डेन में घूमने गया है माँ" पूनम बात को संभाल लेती है । सूरज फिर से चोदने लगता है चुकी वो अभी झाड़ा नहीं था। पूनम झड़ने बाली थी । तभी पूनम की सिसकी निकल जाती है। रेखा को लगता है शायद पूनम ऊँगली डालकर अपने आपको शांत कर रही है, तभी उसकी सिसकी फुट रही हैं,इतनी गर्मी में पानी ठंडा होने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

रेखा-"ठीक है तू जल्दी नहा ले,में अपने कमरे में जा रही हूँ" रेखा अपने कमरे में जाकर पूनम की कामुक सिसकी के बारे में सोचती है ।

रेखा-"(मन में) पूनम की उम्र हो गई है शादी की,इसलिए अपने आपको शांत करने के लिए ऊँगली का सहारा ले रही है, इसमें उसकी कोई गलती नहीं है,जवान लड़कियां अक्सर ऐसा करती हैं,गलती तो मेरी है में ही उसके लिए कोई लड़का नहीं देख पाई अभी तक, आज सूरज से कहूँगी पूनम के लिए कोई लड़का देख ले,बेचारी पूनम तो शर्म की बजह से कह नहीं पाती है,लेकिन मुझे तो समझना चाहिए,में एक माँ हु और सेक्स की तड़प अच्छे से जानती हूँ, हालांकि मैने अपने बच्चों की खातिर सेक्स के प्रति कभी ध्यान नहीं दिया, ऊँगली किए हुए तो कई वर्ष बीत गए" रेखा एक पेड निकालती है और बाथरूम में जाकर मेक्सी को ऊपर करके पेंटी उतार देती है,पुराना पेड निकाल कर ब्लड देखने लगती है,आज पांचवा दिन था इसलिए कम मात्रा में ही ब्लड आया था, रेखा पुराने पेड को फेंक कर नया पेड पेंटी पर चिपकाने के लिए झुकती है, तभी उसकी नज़र अपनी चूत पर पड़ती है, सालो बाद आज अपनी चूत को देखके उसे झटका सा लगता है क्योंकि चूत पर उगे बालो का झुण्ड इस बात की गवाही दे रहे थे,चूत के आसपास बड़े बड़े बाल देख के रेखा खुद चोंक जाती है और चूत पर हाँथ फिरा कर उनकी लम्बाई का मापन करने लगती है,एक दम काले श्याह् घुंघराले बाल से चूत पूरी तरह से ढकी हुई थी। रेखा चूत के आसपास के बाल देखती है जिनपर मेंन्सेज का ब्लड लगा हुआ था, रेखा को बहुत गन्दा लगता है,वो अपनी पेंटी को टांगो से आज़ाद करके मेक्सी भी उतार देती रेखा का बदन एक दम कसा हुआ था और गदराया हुआ चूँकि जीवन के 22 साल तक गाँव में लकड़ी काटकर अपने बच्चों का लालन पालन किया था, पुरे गाँव में सबसे सुन्दर और कामुक बदन बाली महिला थी,क्योंकि उसकी गांड बहुत मोटी और चौड़ी थी, 5 फुट 8 इंच की लंबाई, 38 की चूचियाँ और दिल आकार की मोटी गांड किसी का भी लंड खड़ा कर सकती थी,यही कारण था की पूरा गाँव उसके बदन को देख कर आँहें भरता था, गाँव के अधिकतर बदचलन पुरुष उसको अपनी कलपनाओं में सोचकर मुठ मार कर अपनी हवस को शांत करते थे,और सबसे बड़ा दीवाना तो गाँव का चौधरी ही था जो कई हथगंडे अपना चूका था लेकिन रेखा ने उसे कभी घास भी नहीं डाली,रेखा को पता था की चौधरी उसे गलत नियत से देखता है,इसलिए कभी उसके झांसे में नहीं आई । रेखा नंगी होकर हैंड शॉवर को उठाकर चालु करती है,और एक तेज पानी की बौछार से अपनी चूत साफ़ करने लगती है, झान्टो को रगड़ते समय उसकी चूत के भग्नसुर रगड़ जाते है,रेखा के जिस्म में उत्तेजना का संचार होने लगता है,पानी की तेज धार चूत के छेद से टकराते ही रेखा सिहर जाती, कई सालो बाद उसने अपने जिस्म में उत्तेजना महसूस की थी, रेखा के हाँथ तेजी से चूत पर चलने लगते हैं,तभी एक दम उसके पेट में दर्द होने लगता है,चूत के अंदर ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने खंजर घुसेड़ दिया हो,रेखा दर्द से चीखने लगती है, और एक तेज चीख के साथ बेहोस हो जाती है।

रेखा-"आआआईईई स स सूरजज ज ज ज"

इधर पूनम और सूरज झड़ चुके थे,सूरज और पूनम अपने कपडे पहन ही रहे थे,तभी दोनों को अपनी माँ की चीख सुनाई देती है,

पूनम-"सूरज मुझे माँ के चिखने की आवाज़ सुनाई दी,ऐसा लगा जैसे तुझे बुला रही हो"

सूरज-"हाँ दीदी मैंने भी सुनी,जल्दी चलकर देखो,क्या हुआ माँ को"

सूरज और पूनम घबरा जाते हैं, पूनम और सूरज जल्दी से कपडे पहन कर रेखा के कमरे में जाते हैं, रेखा कमरे में नहीं होती है तभी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ सुन कर दोनों बहन भाई बाथरूम में जाते है,दरबाजा खुला हुआ था,सूरज की नज़र जैसे ही अपनी माँ पर पड़ी तो एक दम चोंक गया,रेखा फर्स पर नंगी बेहोस पड़ी थी, सूरज की आँखों के सामने अपनी ही माँ को देख कर शर्मा जाता है,आज पहली बार माँ की चूत और चूचियाँ देखी थी, सूरज शर्म के कारण बाहर निकल जाता है,पूनम रेखा को आवाज़ लगाती है,

पूनम-"माँ माँ क्या हुआ,उठो माँ"लेकिन रेखा तो बेहोस थी,पूनम रेखा को मेक्सी पहनाती है ।

पूनम-"सूरज देख माँ कुछ बोल नहीं रही है" सूरज बाथरूम में जाता है और रेखा को उठाता है लेकिन रेखा नहीं उठती है ।

सूरज-"दीदी हॉस्पिटल लेकर जाना पड़ेगा,जल्दी चलो" सूरज और पूनम रेखा को उठाकर अपनी गाडी में लेटा देते हैं । सूरज अपनी गाडी सिटी हॉस्पिटल की और दौड़ा देता है । पूनम और सूरज काफी घबरा चुके थे, सूरज तेज गाडी दौड़ता है और कुछ ही देर में हॉस्पिटल आ जाता है । हॉस्पिटल के कर्मचारी तुरंत रेखा को इमरजेंसी में ले जाकर इलाज सुरु कर देते हैं, सूरज भागता हुआ डॉक्टर के पास जाता है ।

सूरज-' डॉक्टर प्लीज़ मेरी माँ को देखिए क्या हुआ है,ये कुछ बोल नहीं रही है" डॉक्टर एक महिला थी जिसका नाम नीलम था । डॉक्टर नीलम रेखा को देखती हैं।

डॉक्टर नीलम-"आप घबराइए मत,ये बेहोस हैं, बेहोस क्यूँ हुई हैं इसका बाद पता चलेगा, दवाई दे दी है शाम तक होश आ जाएगा" सूरज थोड़ी तसल्ली मिलती है । पूनम तनु और तान्या को फोन कर देती है कुछ ही देर में दोनों बहने आ जाती हैं,

तनु-"दीदी क्या हुआ माँ को"

सूरज-"दीदी घबराओ मत,माँ सिर्फ बेहोस हुई है"

पूनम और तनु बहुत घबराई हुई होती है, तान्या सबको हिम्मत देती है। तीनो बहने और सूरज बाहर बैठ कर शाम होंने का इंतज़ार करते हैं।

 
दोनों बच्चों को स्कूल भेजकर खुद भी तैयार होने के लिए अपने कमरे में चली गई आज बहुत दिन बाद उसे ऑफिस जाने का मौका मिला था वरना विनीत के डर से वह कुछ दिनों से ऑफिस नहीं जा पाई थी और घर में ही बैठे बैठे बोर भी हो रही थी और विनीत की वजह से डरी सहमी भी रहती थी। लेकिन जब राहुल ने बताया कि वीनीत का दिमाग ऊसने ठिकाने लगा दिया है तब उसका मन प्रसन्न हुआ विनीत से छुटकारा पाने की बातों से उसे ऐसा लगने लगा कि जैसे कि उसे एक नई जिंदगी मिली हो। उसकी प्रसन्नता का ठिकाना ना था वह मन में गीत गुनगुनाते हुए आईने के सामने खड़ी होकर तैयार होने लगी।

अलका पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी संभोग के असीम सुख की प्राप्त कर करके एक अाह्लादक एहसास की वजह से उसकी खूबसूरती और उसके बदन का उठाव और कटाव दिन ब दिन ऊभरकर ओर भी ज्यादा उभरकर खूबसूरत हो गया था।

अलका अपनी छातियों का उभार और अपने भरे हुए बदन को आईने में देखकर अपनी खूबसूरती पर खुद ही शरमा गई और गर्वित होने लगी। दिन ब दिन बढ़ती उसकी खूबसूरती का राज वो अच्छी तरह से जानती थी। वह जानती थी कि उसके बेटे के साथ जबरदस्त संतुष्टि भारी चुदाई की वजह से ही उसकी खूबसूरती दिन ब दिन निखरती जा रही थी। जेसे ही उसकी नजर उसकी खुद की बड़ी बड़ी चुचियों पर गई तो अपनी चुचियों के उभार को देख कर और उसकी खूबसूरती से वह खुद ही चौंधिया गई और वह अपने दोनों हाथों को अपनी दोनों गोलाइयों पर रखे बिना ना रह सकी। एक बार अपनी दोनो चुचियों को अपनी हथेली में भरकर ब्लाउज के ऊपर से ही दबा कर वह आईने में अपने रूप को देखने लगी और खुद ही शरमा कर मुस्कुरा दी।

उसकी नजर दीवार पर टंगे घड़ी पर गई तो झट से बिस्तर पर से अपना पर्श उठाई और कमरे से बाहर आ गई। वह घर से निकल कर जल्दी-जल्दी सड़क पर जाने लगी। अलका इस उम्र में भी क़यामत से कम नहीं लगती थी आज भी वह अपनी खूबसूरती के जलवे बिखेर रही थी।

उसके बदन की बनावट और कटाव देखकर अच्छे अच्छों का पानी निकल जाता था। अपनी बेटी की उम्र की लड़कियों को भी वह बराबर का टक्कर देती थी। इसका ताजा उदाहरण राहुल ने दोनों औरतों को अपनी मां अलका के लिए ठुकरा कर दे दिया था।

अलका जल्दी-जल्दी मस्ती के साथ सड़क पर अपनी गांड मटकाते हुए चली जा रही थी। उसकी भरावदार गांड की थिरकन किसी को भी मदहोश कर देने में सक्षम थी। सड़क पर आते-जाते ऐसा कोई भी मर्द नहीं होगा जिसकी नजर अलका के मदभरे रस टपकाते बदन पर ना पड़े। आगे से आ रहे राहगीर की नजर सबसे पहले उसकी बड़ी बड़ी चुचियों पर ही जाती थी और पीछे से आ रहे राहगीर की नजर उस की भरावदार बड़ी-बड़ी मटकती गांड. पर।

अलका अपनी मस्ती में कदम बढ़ाते हुए और अपनी गांड मटका के ऑफिस की तरफ चली जा रही थी आज बहुत दिनों बाद खुली सड़क पर इस तरह से चलने पर उसे राहत महसूस हो रही थी। ऑफिस जाते समय रास्ते में ही उसे याद आया कि राहुल का जन्मदिन आने वाला था और उसने उसे पूरी तरह से खुश करने का वादा किया था। अपने किए हुए वादे का मतलब वह अच्छी तरह से जानती थी इसलिए वह उस वादे को याद करके शरमाते हुए मन ही मन में मुस्कुरा दी। थोड़ी ही देर में वह अपने ऑफिस पहुंच गई आज खुशी-खुशी में ऑफिस का काम करके अपने मन को हल्का महसूस कर रही थी।

धीरे-धीरे घड़ी की सुई अपनी धुरी पर घूमती रही और शाम का वक्त हो गया। सपने निश्चित समय पर ऑफिस छूट चुकी थी और अलंकार ऑफिस से निकल कर अपने घर की तरफ जा रही थी। सुबह तक सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन ऑफिस से छूटने के बाद उसके मन में फिर से विनीत नाम का भूत घूमने लगा उसे फिर भी नहीं कर नाम से ही चिंता होने लगी। अलका को विनीत के द्वारा दी गई धमकी बार-बार याद आने लगी। अलका मन ही मन में घबराने लगीं उसके मन में ढेर सारे सवाल ऊठने लगे। विनीत के बारे में सोचते हुए वह सड़क पर चली जा रहे थे उसे अब डर लगने लगा था क्योंकि बाजार नजदीक थी और वहीं पर अक्सर उससे मुलाकात हो जाती थी। उसके मन में यह शंका बनी हुई थी कि अगर कहीं विनीत नहीं माना और फिर से उसे धमकाने लगा और उसके साथ मनमानी करने के लिए ब्लैकमेल करने लगा तो वह क्या करेगी, लेकिन राहुल नहीं तो उसे कहा था कि विनीत का दिमाग उसनें ठिकाने लगा दिया है अब वह उसे कभी भी परेशान नहीं करेगा और उसी के कहने पर तो मैं आज ऑफिस आई थी। यही सब खयाल रह-रहकर अलका के मन में उठ रहे थे और वह परेशान भी हो रही थी यही सब सोचते सोचते बाजार आ गया उसकी दिल की धड़कनें बढ़ रही थी और वह जल्दी जल्दी अपने कदम बढ़ाते हुए बाजार से निकल जाना चाहती थी।

वह मन ही मन भगवान से दुआ कर रही थी कि वीनीत उसे रास्ते में ना मिले और वह बिना किसी मुसीबत के अपने घर चली जाए , धीरे धीरे करके वह बाजार के अंतिम छोर पर पहुंच गई जहां पर बाजार खत्म होता था उसकी चिंता कुछ कम होने लगी मुझे लगने लगा कि वहां पर ही मैं अभी नींद से उसका सामना नहीं होगा लेकिन उसका सोचना ही था कि सामने से उसे वीनीत मोटरसाइकिल पर आता दिखाई दिया उस पर नजर पड़ते ही अलका के दिल की धड़कने डर के मारे तेज हो गई। उसकी चाल कुछ धीमी हो गई ऐसा लग रहा था कि उसके पैर आगे बढ़ने से इंकार कर रहे हो धीरे धीरे विनीत करीब आ रहा था। अलका डर के मारे उसकी तरफ से अपनी नजरें फेर भी ले रही थी लेकिन रह रहकर उसकी नजरें बार बार वीनीत की तरफ चली जा रही थी। तभी कुछ करीब आया तो विनीत की नजर भी अलका के ऊपर पड़ गई उसकी नजर एक पल के लिए अलका के कामुक भरावदा़र बदन पर ही टिकी रह गई। अलका को और उसके बदन की खूबसूरती को देखकर विनीत के मन में लड्डू फूटने लगे और उसके मुंह में पानी आ गया। उसकी टांगों के बीच के हथियार में हरकत होने लगी। लेकिन तभी उसे राहुल के द्वारा दी गई शिकस्त के बारे में याद आ गया । उसे याद आ गया कि राहुल ने उसे कितना बेबस कर दिया था कि वह उसकी आंखों के सामने उसकी भाभी और उसकी होने वाली बीवी के साथ शारीरिक संबंध बना लिया और वह कुछ भी नहीं कर पाया। वह अच्छी तरह से समझ गया था कि राहुल से उलझना ठीक नहीं है।

अलका सड़क के बाएं तरफ से जा रही थी और विनीत सड़क के बाएं तरफ से आ रहा था दोनों बिल्कुल करीब आमने सामने आने ही वाले थे कि दोनों की नजरें आपस में टकराई , अलका विनीत के नजर से नजर मिलते ही सहमं गई उसकी डर के मारे पसीने छूट गए एक डर की लहर उसके पूरे बदन में ऊपर से नीचे तक फैल गई। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। ना चाहते हुए भी घबराहट की वजह से उसके पांव ज्यो के त्यों वही ठिठक गए दोनों बिल्कुल करीब आ गए थे विनीत भी अलका की आंखों में झांकते हुए करते हुए बिल्कुल उसके करीब पहुंच गया था फर्क सिर्फ इतना था कि वह सड़क के ऊस ओर था और अलका इस और।

अलका को लगने लगा कि राहुल की बातों का विनीत के ऊपर कोई असर नहीं हुआ है। उसकी घबराहट बढ़ती जा रही थी उसे यकीन हो गया कि वह करीब आ करके फिर से उसे धमकाएगा और अपने साथ सोने के लिए मजबूर करेगा वह सड़क पर बुत बने खड़ी होकर विनीत की तरफ ही देखे जा रही थी और विनीत भी उसी ही को घूर रहा था। विनीत एकदम आमने-सामने आ गया था लेकिन कभी विनीत अपनी नजर सामने की तरफ फेर लिया औअपनी मोटरसाइकिल एक्सीलेटर को बढ़ाकर तेजी से आगे निकल गया।

अलका तो वहीं खड़ी खड़ी आश्चर्य से फटी आंखों से विनीत को सड़क पर दूर जाते देखती रह गई उसे यह सब एक चमत्कार सा लगने लगा। वह सड़क पर खड़ी होकर विनीत को तब तक देखती रही जब तक की वह आंखों से ओझल नहीं हो गया । पूरा खेल उल्टा पड़ गया था कुछ देर पहले अलका की दिल की धड़कन जो की बहुत ही तेज चल रही थी वह अब सामान्य होने लगी। विनीत को बिना कोई हरकत किए जाते देख कर उसकी जान में जान आ गई थी वह राहत सी महसूस कर रही थी।

अलका को उसके सर से बहुत भारी बोझ हल्का होता नजर आ रहा था। उसे राहुल की कही हुई एक-एक शब्द पर यकीन होने लगा था वह अपने बेटे पर एकदम गर्वित हुए जा रही थी। राहुल पर उसे और ज्यादा प्यार होने लगा था सड़क पर खड़े खड़े ही उसने मन में निर्धारित कर ली की वह अपने बेटे को उसके जन्मदिन पर पूरी तरह से खुश कर देगी वह जो चाहेगा उसे सब कुछ देगी।

कुछ ही देर पहले उसके चेहरे पर परेशानी के भाव नजर आ रहे थे लेकिन इस समय उसके चेहरे पर प्रसन्नता साफ झलक रही थी। वह खुशी-खुशी अपने पैर अपने घर की तरफ बढ़ा दी।

घर पर पहुंचकर वह आराम से कुर्सी पर बैठ कर राहत की सांस ली। उसे आज अपने घर में अच्छा महसूस हो रहा था। सब कुछ नया-नया सा बदला बदला सा लग रहा था। अगर राहुल घर पर मौजूद होता तो वह उसे कसके अपने सीने से लगा लेती उसे ढेर सारा प्यार करती आखिरकार उसने काम ही ऐसा कुछ कर दिया

था। विनीत जैसी मुसीबत से छुटकारा दिला कर राहुल ने अलका को बहुत बड़ी मुसीबत से छुटकारा दिलाया था । अलका को इंतजार था राहुल के घर पर आने का क्योंकि उसे मालूम था वह इधर उधर घूम कर अपना टाइम पास करते रहता है इसलिए उसने झट से हाथ बहुत होकर तरोताजा हुई और रसोई में जाकर राहुल के मनपसंद का भोजन बनाने में जुट गई।

जब तक राहुल आया तब तक खाना बन चुका था। सोनू कब से घर पर आकर अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। अलका कुर्सी पर बैठ कर राहुल का इंतजार कर रही थी कि तभी राहुल घर में प्रवेश किया उसे देखते ही अलका कुर्सी पर से उठी और तुरंत आगे बढ़कर राहुल को अपने सीने से लगा ली , और लगी उसे चुमने चाटने लगी अपनी मां के इस व्यवहार को राहुल कुछ पल तक समझ ही नहीं पाया कि आखिरकार यह हो क्या रहा है। तभी अपने बेटे को बेतहाशा चूमते हुए अलका बोली।

बेटा तूने मुझे आज बहुत खुश कर दिया है तू नहीं जानता कि तूने मेरे सर से कितनी बड़ी मुसीबत को दूर किया है। मांग बेटा मांग तुझे जो मांगना है मुझ से मांग ले में तेरी सारी इच्छाओं को पूरी करूंगी। ईसलिए बेझिझक मांग ले।

( अपनी मां की बात सुनकर राहुल को समझते देर नहीं लगी की ईतना ढेर सारा प्यार वीनीत से छुटकारा दिलाने की खुशी में है। ।।।।

अलका फिर से राहुल के गाल पर चुम्बनो का बौछार करते हुए बोली।

बोल बेटा तुझे क्या चाहिए तु जोे मांगेगा मैं तुझे वो दूंगी। ( राहुल अपनी मां की बात सुनकर बहुत खुश हुआ अपनी मां को खुश देखकर राहुल को बेहद खुशी हो रही थी। इसलिए राहुल खुश होता हुआ बोला।)

मम्मी तुम खुश रहती है तू कितनी अच्छी लगती हो। और रही बात कुछ मांगने की तो कल मेरा जन्मदिन है बस कल के दिन अपना यह वादा याद रखना।

( अपनी बेटी की बातें सुनकर अलका मुस्कुरा दी और एक बार फिर से उसे कस के अपने सीने से लगा ली . अलका की इस हरकत पर राहुल के बदन में उत्तेजना फेलने लगी। इसलिए वह बोला।)

मम्मी मुझे जो चाहिए वह में कल अपने जन्मदिन पर मांग लूंगा लेकिन तुम्हारी इस हरकत से मेरा लंड खड़ा होने लगा है।

( अपने बेटे की बात सुनकर अलका मुस्कुरा दी उसे भी इस का आभास हो चुका था। अपनी टांगों के बीच वह अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस कर चुकी थी इसलिए वह भी चुदवासी हो चुकी थी। अपने बेटे की लंड खड़े होने वाली बात को सुनकर वह बोली।)

तो देर किस बात की है बेटा डाल दे अपना लंड मेरी बुर में मेरी बुर भी तो तेरा लंड लेने के लिए पानी पानी हो गई है।

( अलका की बात को सुनते ही राहुल का लंड ठुनकी लेने लगा। लेकीन वह एक खेद जताते हुए बोला।)

लेकिन मम्मी सोनू .,,,,,

सोनू अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा है।( अलका राहुल की बात को बीच में ही काटते हुए बोली। अलका को भी बहुत ज्यादा ऊतावल मची हुई थी अपने बेटे के लंड को अपनी बुर में लेने के लिए। राहुल भी अपनी मां की जल्दबाजी को देखकर एकदम से जोश में आ गया। अलका के बदन में उत्तेजना और प्रसन्नता के भाव बराबर नजर आ रहे थे और इसी के चलते वह खुद ही वहीं पर ही कुर्सी पकड़कर झुक गई और अपनी गांड को ऊपर की तरफ उठा दी यह राहुल के लिए इशारा था। वह ं अपनी गांड ऊचका कर अपनी नजरें घुमा कर राहुल की तरफ देखने लगी और उसे आंखों से इशारा करके अपनी साड़ी को ऊपर कमर तक उठाने का इशारा की,,,,, राहुल भी उत्तेजना से भर चुका था इसलिए वह भी एक पल की भी देरी किए बिना सीधे अपनी मां की साड़ी को पकड़कर एक झटके में ही कमर तक उठा दिया और पेंटी को नीचे जांघो तक सरका कर अपनी भी पेंट को खोलकर नीचे घुटनो तक सरका दिया।

राहुल और अलका दोनों कामोतेजना के बहाव में बह़ते जा रहे थे। इस समय दोनों को इस बात का भी बिल्कुल भी फिक्र नहीं थी कि वह लोग ड्राइंग रूम में ही अपनी उत्तेजना को शांत करने में लगे हुए थे जहां पर किसी भी समय सोनु आ सकता था। लेकिन अलका आज बहुत खुश थी इसलिए वह राहुल को भी खुश करना चाहती थी इसलिए किसी भी चीज की फिक्र उन दोनों को बिल्कुल भी नहीं थी। राहुल तो कुछ ही देर में अपने लंड को अपनी मां की बुर में डालकर पूरी तरह से छा गया। राहुल अपनी मां की गरम सिसकारियों के साथ जोर जोर से धक्के लगाता हुआ चोदे जा रहा था। कुछ मिनटों की घमासान चुदाई के बाद दोनों एक साथ झड़ गए। दोनों अपनी कामोत्तेजना को बड़े सफाई के साथ मिटा चुके थे।

भोजन करते समय राहुल ने अपनी मां को कल के प्रोग्राम के बारे में बताया। कल के दिन अलका को छुट्टी रखनी थी। राहुल अपनी मां और सोनू के साथ घुमने ओर खरीदी करने का प्रोग्राम बना लिया था। कल वह अपनी मां का ब्रांडेड ब्रा ओर पेंटी के साथ साथ ट्रांशपेरेंट गाऊन भी दीलाना चाहता था., जिसके बारे मे ऊसने अपनी मां को कुछ भी नही बताया था। जो की ऊसकीमां के लिए सरप्राईज था।

 
शाम के 4 बज रहे थे, में और मेरी तीनो दीदी इमरजेंसी वार्ड के बाहर बैठ कर माँ के होश आने जा इंतज़ार कर रहे थे तभी मेरे फोन पर संध्या का फोन आया । दूर जाकर मैंने फोन उठाया,तान्या दीदी समझ गई थी, वो मेरे साथ ही थी ।

संध्या-"हेलो सूर्या बेटा कहाँ है?

सूरज-"क्या हुआ बोलो माँ, में कंपनी में हूँ"

संध्या-"तू कल से घर नहीं आया इसलिए पूछा"

सूरज-"माँ कंपनी के काम से बाहर एक मीटिंग में गया था"

संध्या-"अच्छा बेटा, आज तो आएगा घर पर"

सूरज-"माँ कंपनी का एक सेमीनार दिल्ली में है इसलिए आज रात में मुझे जाना पड़ेगा,चार पांच दिन में आ जाऊँगा" सूरज झूठ बोल देता है ताकि वो अपनी रेखा माँ का ख्याल रख सके ।

संध्या-" ओह्ह बेटा कितनी मेहनत करता है तू,चल कोई बात नहीं,अपना ध्यान रखना" फोन काट देता है सुरज,

तान्या-"सूरज तू चिंता न कर,तू बस माँ का ख्याल रख"

सूरज-"दीदी आप घर चली जाओ अब,माँ इंतज़ार कर रही होगी"

तान्या-"में यही रुक जाती हूँ सूरज,माँ को कोई भी बहाना बना दूंगी"

सूरज-"नहीं दीदी,में अकेला ही काफी हूँ,आप जाओ" सूरज तान्या को भेज देता है । पूनम और तनु के पास आता है । पुनम और तनु सुबह से भूकी थी,इसलिए दोनों को घर भेज देता है । सूरज अकेला बाहर बैठा माँ के होश आने का इंतज़ार कर रहा था । इधर रेखा को होश आता है तो अपने आपको हॉस्पिटल के बेड पर पाती है । डॉक्टर रेखा के पास आती है ।

रेखा-"डॉक्टर मुझे क्या हुआ है"

डॉक्टर-"आप बेहोश क्यूँ हो गई थी?"

रेखा-" मेरे पेट में दर्द हुआ था,और नीचे भी" रेखा संकुचित होकर बोलती है।

डॉक्टर-"आप सही से बताओ ताकि में आपका इलाज कर सकूँ"

रेखा-" में नीचे अपनी योनि को साफ़ कर रही थी, योनि साफ़ करते समय में थोड़ी उत्तेजित हो गई थी,तभी मेरे पेट में और योनि में बहुत तेज दर्द हुआ,उसके बाद मुझे पता नहीं चला,शायद में बेहोस हो गई थी"डॉक्टर बड़े ध्यान से सुनती है ।

डॉक्टर-" मतलब तुम्हारा ओर्गास्म हो नहीं पाया"

रेखा-"ओर्गास्म का मतलब"

डॉक्टर-" आप झड़ नहीं पाई"

रेखा-"हाँ जी"रेखा शरमाती हुई बोली ।

डॉक्टर-"आपने आखरी बार सेक्स कब किया था" रेखा इस सवाल से शर्मा जाती है।

रेखा-"22 साल से" डॉक्टर यह सुनकर हैरान रह जाती है।

डॉक्टर-"ओह्ह्ह 22 साल तक आपने सेक्स ही नहीं किया"

रेखा-"मेरे पति को मरे 22 साल हो चुके हैं"

डॉक्टर-"ओह्ह्ह सॉरी, हस्तमैथुन किया आपने कभी इन 22 सालो में"

रेखा-"हस्तमैथुन क्या,समझी नहीं" रेखा समझ नहीं पाती है ।

डॉक्टर-" मतलब कभी ऊँगली से अपने आपको शांत किया है?" रेखा को शर्म आ रही थी, लेकिन डॉक्टर के सामने मजबूरन बता देती है ।

रेखा-" हाँ किया है,पति के जाने के बाद"

डॉक्टर-"कितने साल से ऊँगली नहीं की"

रेखा-"21 साल हो चुके होंगे" डाक्टर हैरानी से रेखा को देखती है ।

डॉक्टर-" 21 साल तक आपने ऊँगली नहीं की,इसलिए आपको दर्द हुआ, योनि से निकलने बाला पानी आपकी नसों में जम चूका है,इसका निकलना बहुत आबश्यक है" रेखा डॉक्टर की बात बड़े ध्यान से सुनती है ।

रेखा-" क्या में ठीक नहीं हूँ अभी"

डॉक्टर-"नहीं! आपके फिर से दर्द हो सकता है और आप बेहोस भी हो सकती हैं, आपकी नसों में जमा पानी निकलना बहुत जरुरी है,ये पानी या तो सेक्स करने से निकल सकता है या आप ऊँगली करो" डॉक्टर की यह बात सुनकर रेखा हैरान रह जाती है,

रेखा-"में स सेक्स तो कर नहीं सकती,मेरे पति नहीं है, ऊँगली से कोसिस कर सकती हूँ"

डॉक्टर-" ठीक है । लेकिन ऊँगली करने से पहले आपको में एक जैल क्रीम दूंगी,पहले उससे अपनी योनी के आसपास मसाज करना इससे आपकी नसे जल्दी खुल जाएगी,उसके बाद आप ऊँगली करके अपना पानी निकालना,आप मेक्सी को ऊपर कीजिए में आपको मसाज करने की प्रक्रिया समझाती हूँ" रेखा को बहुत शर्म आ रही थी, लेकिन मजबूर थी,मेक्सी को ऊपर उठा देती है, डाक्टर नीलम रेखा की बड़ी बड़ी झांटे देख कर गुस्सा करती है ।

डॉक्टर-"ये क्या है, आपने तो पूरा जंगल बना दिया है, अपनी योनि को साफ़ रखा करो, पहले अपने बाल साफ़ करबायो उसके बाद में मसाज करने की प्रक्रिया समझाती हूँ" डॉक्टर एक नर्स को बुलाकर रेखा के बाल साफ़ करने के लिए बोलती है ।

नर्स-' हमारे पास बाल साफ़ करने का रेजर नहीं है"

डॉक्टर-"इनके साथ कौन आया है उन्ही से रेजर मंगबा लीजिए"

रेखा-" मेरी बेटी बाहर होगी,उससे बोल दीजिए" रेखा को डर था की कहीं नर्स सूरज से रेजर न मंगवा ले इसलिए बेटी से मनवाने का सम्बोधन किया ।

डॉक्टर-" इनके साथ जो हैं उन्हें मेरी कैबिन में भेज दो"

नर्स सूरज के पास आती है।

बाहर सूरज अकेला बैठा हुआ था ।

नर्स-" आपको डॉक्टर बुला रही हैं" सूरज डाक्टर के पास जाता है ।

सूरज-"क्या हुआ डॉक्टर साहब मेरी माँ अब कैसी है,उन्हें होश आ गया क्या"

डॉक्टर-" आपकी माँ बिलकुल ठीक हैं,उन्हें होश आ चुका है"

सूरज-"डॉक्टर मेरी माँ को हुआ क्या है,वो बेहोश क्यूँ हो गई" डॉक्टर सोचती है की इनको कैसे बताऊँ, काफी देर सोचने के बाद डॉक्टर बोलती है।

डॉक्टर-"आपकी माँ को गुप्त परेसानी है,हालाँकि मुझे बताना तो नहीं चाहिए चूँकि आप उनके बेटे हैं लेकिन फिर भी में आपको बता रही हूँ, 21 वर्ष से शारीरिक सम्बन्ध न बनाने के कारण उनकी नसों में पानी जाम हो गया है,पानी निकलना बहुत आवश्यक है, बरना उनकी जान भी जा सकती है" सूरज को यह सुनकर बड़ा अचम्भा होता है और शर्म भी आती है, लेकिन उनकी जान को खतरा है यह सुनकर डर भी जाता है ।

सूरज-"डॉक्टर साहब अब इसका इलाज क्या है? सूरज घबराता हुआ बोला।

डॉक्टर-" वैसे तो शारीरिक सम्बन्ध के द्वारा पानी निकलता तो बेहतर था लेकिन उनके पति तो है नहीं है,इसलिए उन्हें हस्तमैथुन करना होगा,और हस्तमैथुन से पहले तीन चार दिनों तक उन्हें योनी की मसाज करनी होगी,में आपको जैल क्रीम देती हूँ,और कुछ खाने की दवाइयाँ भी" सूरज बड़ी हैरानी से यह सब सुन रहा था,उसने कभी सोचा भी नहीं था की अपनी माँ के बारे में ऐसा सुनेगा, सूरज को बड़ी शर्म आ रही थी,और बार बार माँ का चेहरा उसके सामने आ जाता था ।

सूरज-" डॉक्टर आप यह सारी बातें माँ को समझा दीजिए प्लीज़"

डॉक्टर-"मैंने उन्हें समझा दिया है,आप बाहर से एक रेजर और ब्लेड लाकर दे दीजिए,उनकी योनी पर बाल बहुत बड़े हैं, में नर्स से कह कर मसाज का तरीका समझा दूंगी ताकी वो घर आराम से मसाज कर सके" सूरज एक और झटका लगता है यह सुनकर, तभी उसके जहन में रेखा का नग्न तस्वीर आ जाती है जब उसने सुबह बॉथरूम में देखा था,वास्तव में माँ की योनी पर बहुत बड़े बाल हैं। सूरज तुरंत बाहर जाकर एक रेजर और ब्लेड के आता है । सूरज डॉक्टर की केबिन में जाता है तो डॉक्टर उसे दिखाई नहीं देती है, सूरज उसी इमरजेंसी बार्ड में जाता है जहाँ माँ भर्ती थी, सूरज दरबाजा खोल कर देखता है, रेखा अपने बेड पर लेटी थी, सूरज को बड़ा सुकून मिलता है,चूँकि सूरज नहीं चाहता था की माँ उसे देखे की उसका बेटा उसके योनि साफ़ करने के लिए रेजर लेकर आया है, और खुद शर्मिंदगी महसूस करे । सूरज जैसे ही दरबाजा खोलता है तभी नर्स सूरज को देख कर बोलती है ।

नर्स-" आप कहाँ थे इतनी देर से,डॉक्टर ने रेजर और ब्लेड लाने के लिए आपसे बोला था,आप अभी तक लाए नहीं" नर्स तेज आवाज़ में डांटती हुई बोली,सूरज घबरा जाता है की कहीं माँ सुन न ले,लेकिन रेखा तो सिर्फ आँखें बंद किए हुई कुछ सोच रही थी,जैसे ही नर्स सूरज को डांटती है रेखा आँखे खोल कर सूरज की तरफ देखती है और सूरज रेखा को देखता है,दोनों की आँखे एक दूसरे से टकराती है, सूरज शर्म की बजह से नज़रे घुमा लेता है और मन ही मन नर्स को गालियां देता है,इधर रेखा का शर्म की बजह से बुरा हाल था, रेखा बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी की उसका बेटा योनी के बाल साफ़ करने के लिए रेजर लेकर आया है ।

सूरज-"यह लीजिए रेजर और ब्लेड"सूरज जल्दी से निकलना चाहता था बार्ड से, सूरज रेजर देकर तुरंत बाहर निकल जाता है । और बाहर कुर्सी पर बैठ कर जोर से सांस लेता है । जीवन में पहली बार ग्लानी महसूस कर रहा था, न चाहते हुए भी माँ का चेहरा उसकी आँखों में घूम रहा था ।

इधर नर्स रेखा के पास आती है, रेखा की मेक्सी को उठाकर कमर से ऊपर कर देती है, रेखा की बालो से भरी चूत नर्स के सामने थी। भारी भरकम जांघे और बाहर निकली हुई गुदाज उसके जिस्म को आकर्षक और कामुक बना रही थी ।

नर्स-' आप दोनों टांगो को फैला कर फोल्ड करो" रेखा तुरंत नर्स के कहे अनुसार टाँगे फैला कर फोल्ड करती है । नर्स एक प्लास्टिक की शीट लेकर आती है और रेखा की गांड को उठाकर शीट बिछा देती है ताकि जिस बेड पर लेटी है वो गंदा न हो, रेखा अपनी सोच में डूबी हुई थी, उसने कभी सोचा भी नहीं था की अनजान डॉक्टर और नर्स के सामने उसे अपनी योनी का प्रदर्शन करना पड़ेगा,और ऊँगली करने पर मजबूर होना पड़ेगा, एक तरफ उसे अपनी योनिमैथुन की चिंता थी तो दूसरी तरफ सूरज की,क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में,कैसे नज़रे मिला पाउंगी में,इसी सोच में डूबी थी तभी नर्स एक शेम्पू लेकर आती है और रेखा की चूत पर लगा कर पानी का स्प्रे मारती है,और ब्रूस से पूरी योनी के बालो पर फिराती है,ब्रूस और पानी के स्पर्श से रेखा मचल जाती है,उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं,ब्रूस की नोक जब योनी की क्लिट पर रगड़ते हैं तो एक सुरसरी सी उठती,रेखा अपनी गांड को थोडा उचका देती,उसके जिस्म में गुदगुदी सी होने लगती है,योनी पर झाग का ढेर बन जाता है,नर्स रेजर लेकर योनी की खाल पकड़ कर आराम से बाल साफ़ करने लगती है, नर्स की उंग्लिया योनी के हर कोमल भाग पर जाती है जिससे रेखा को मजा आने लगता है, नर्स योनी के बाल साफ़ करके स्प्रे मारकर कपडे से साफ़ करती है, रेखा की योनी डबल रोटी की तरह फूली हुई उभर कर सामने आती है। रेखा खुद की योनी देख कर शर्मा जाती है ।

नर्स-" अब देखो अपनी योनी, कितनी चमक मार रही है,इसी तरह साफ़ रखा करो" नर्स योनी पर हाँथ स्पर्श करती हुई बोली। रेखा सिहर जाती है । और हाँ में सर हिला देती है ।

नर्स जैल क्रीम लेकर आती है।

नर्स-" इस जैल को योनि के मुख्य भाग को छोड़ कर बाकी सब जगह लगा कर ऊँगली से रगड़ना है,ताकि आपकी नसे ढीली हो जाए,नसे ढीली होने के बाद अपनी योनी के के अंदर इस तेल से चिकना करके ऊँगली करनी है,आप समझ गई न" नर्स जैल क्रीम और एक तेल की सीसी दिखाती हुई बोली।

रेखा-"हाँ समझ गई" नर्स जैल क्रीम रेखा की योनी पर लगा कर उँगलियाँ फिराने लगती है, जैल बहुत ठंडा लग रहा था जिससे रेखा को बड़ा मीठा मीठा आनंद मिल रहा था और नर्स की उंगलिया भी मजा दे रही थी । नर्स को भी उंगलियो से मालिस करने में मजा आने लगता है,

नर्स-" मेडम में आपको एक सलाह दे रही हूँ, आप किसी के साथ सेक्स कर लो, जल्दी ठीक हो जाओगी" रेखा सुन कर चोंक जाती है ।

रेखा-"नहीं में सेक्स नहीं कर सकती हूँ"

नर्स-"मेडम एक बार में ही गर्मी निकल जाएगी,आपका जिस्म बहुत सुन्दर है,कोई भी एक बार नंगा देख ले तो बिना सेक्स किए रह नहीं पाएगा" रेखा अपनी तारीफ़ सुन कर खुश होती है।

रेखा-" मेरी उम्र 46 साल की है,अब इस उम्र में भला कोई सेक्स करता है"

नर्स-"मेडम आप 30-32 साल की लगती हो,और आपका बदन बहुत कामुक है,आज भी कोई लड़का आपको देख ले तो दीवाना हो जाएगा"

रेखा-"नहीं जी! में विधवा हूँ,में सेक्स के बारे में सोच भी नहीं सकती, ऊँगली से ही काम चला लुंगी"रेखा साफ़ साफ़ मना कर देती है । नर्स मसाज करके बोलती है ।

नर्स-"दिन में तीन बार आपको ऐसे ही मालिस करनी है, अब आप घर जा सकती हो। नर्स सारी दवाइयाँ समझाती है। रेखा वार्ड से बाहर निकलती है सूरज बाहर ही बैठा था, सूरज जैसे ही रेखा की देखता है तो कुर्सी से खड़ा हो जाता है,रेखा भी बहुत शर्मा रही थी।

सूरज-"घर चलें माँ" सूरज रेखा को देखते हुए बोलता है ।

रेखा-"हाँ चलो" सूरज और रेखा बाहर आकर अपनी गाडी में बैठ जाते हैं। सूरज गाडी चलाता है और रेखा बगल बाली सीट पर बैठी थी ।दोनों लोग खामोश थे ।

सूरज और रेखा खामोशी से बैठे अपनी अपनी सोच में डूबे हुए थे, सूरज अपनी माँ की इस विचित्र बिमारी को लेकर बड़ा असमन्जस में था और सोच रहा था की इसका उपचार कैसे हो, डॉक्टर के कहे अनुसार शारीरिक सम्बन्ध के द्वारा माँ का उपचार सम्भब है,और जल्दी ठीक हो सकती हैं,ऐसी स्तिथि में यदि पिता होते तो शायद माँ जल्द ठीक हो जाती,

मुझे पिताजी से बात कर लेनी चाहिए, इधर रेखा इस बात से दुखी थी की उसकी परेसानी और उसका उपचार सूरज को पता चल चूका है, और आज नर्स ने सूरज से रेजर और ब्लेड भी मंगवाया, क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में, तभी सूरज खामोशी तोड़ता है ।

सूरज-"माँ अब आपकी तबियत कैसी है?" रेखा अपनी सोच से बाहर निकलती है और सूरज की ओर देखते हुए बोली ।

रेखा-"मुझे क्या हुआ,में तो ठीक हूँ" रेखा हडबाड़ाती हुई बोली,

सूरज-"माँ आप बेहोश हो गई थी, में बहुत डर गया था"

रेखा-" पता नहीं में कैसे बेहोश हो गई,लेकिन अब में ठीक हूँ बेटा" रेखा हँसते हुए बोली ।

सूरज-" डॉक्टर के कहे अनुसार सभी दवाई समय से लेना माँ" सूरज खुल कर नहीं बोल पाता है इसलिए अप्रत्यक्ष रूप से अपनी बात कहता है,जिसे रेखा भलीं भांत समझ रही थी।

रेखा-" हाँ में दवाई समय से खाती रहूंगी" रेखा सर झुका कर अपनी बात कहती है ।

सूरज-" माँ सब ठीक हो जाएगा,आप परेसान मत होना,में सब ठीक कर दूंगा" सूरज की यह बात सुनकर रेखा असमंजस में पड़ जाती है,और प्रश्नवाचक की तरह सूरज की ओर देखने लगती है।

रेखा-" मतलब समझी नहीं में सूरज"

सूरज-"कुछ नहीं माँ" सूरज बात को टाल ते हुए बोला।

रेखा-" सूरज कोई बात हो तो बोल,डॉक्टर ने क्या कहा तुझसे, मुझे कोई गंभीर बिमारी है क्या"रेखा परेसान मुद्रा में बोली ।

सूरज-"न नही माँ,आपको कोई बीमारी नहीं है,आप ठीक हो"सूरज एक सांस बोलता है,लेकिन सूरज की हकलाहट रेखा को पुनः सोचने पर मजबूर कर रही थी,उसे डर था की कहीं डॉक्टर ने मेरी हस्तमैथुन और शारीरिक सम्भोग को लेकर कोई बात तो नहीं बता दी है सूरज को।

रेखा-" डॉक्टर ने तुझे क्या बताया मेरे बारे में,क्या परेसानी है मुझे" रेखा जानबूझ कर यह सवाल पूछती है,वो जानना चाहती थी की डॉक्टर ने उसे क्या बताया है,अब भला सूरज क्या बोलता अपनी माँ को, सूरज को बहुत शर्म आ रही थी।

सूरज-" डॉक्टर ने कहा की आप जल्दी ठीक हो जाओगी,बस आप अपना ध्यान रखना,दवाई समय से लेते रहना"सूरज की बात सुनकर रेखा को यकीन हो जाता है की शायद डॉक्टर ने मेरी बिमारी के बारे में सूरज को कुछ नहीं बताया है।

रेखा-"सूरज तुझसे एक बात करनी थी मुझे"

सूरज-"हाँ माँ बोलो"

रेखा-"पूनम की शादी के लिए कोई लड़का देख ले,उसकी उम्र हो गई है"

सूरज-"हाँ माँ, में कोई अच्छा सा लडका देखूंगा"

रेखा-" तू जिस कंपनी में काम करता है उसी में देख ले" सूरज सोचता है की माँ को अचानक दीदी की शादी की इतनी फ़िक्र क्यूँ पड़ गई,कहीं माँ ने आज सुबह मेरी और दीदी की चुदाई तो नहीं देख ली।

सूरज-" माँ अचानक शादी की इतनी फ़िक्र क्यूँ हो गई आपको,कोई बात है क्या" रेखा अब कैसे बताती की तेरी बहन ऊँगली से अपनी हवस शांत करती है ।

रेखा-"बात कुछ नहीं है बेटा, हर माँ को फ़िक्र होती है अपनी बेटी की, मुझे भी है"

सूरज-"ठीक है माँ,में लड़का देखूंगा जल्द"

रेखा-"अगर दो लड़के मिल जाए तो मे तनु की भी जल्द शादी कर दूंगी"

सूरज-"ठीक है माँ,में जल्दी ही लड़का देख लूंगा" सूरज बेचारा मायूस हो जाता है।

रेखा-"तेरे पिता होते तो अब तक शादी कर दी होती" माँ मायूस होते हुए बोली।

सूरज-"माँ आपको पापा की याद आती है"

रेखा-" आती भी है तो उससे क्या फर्क पड़ता है सूरज,जो इंसान है ही नहीं उसके बारे में क्या सोचना"रेखा उदास होती हुई बोली।

सूरज-" सॉरी माँ मैंने आपका दिल दुखाया" बात करते करते घर आ जाता है, पूनम और तनु दोनों खुश होकर रेखा को गले लगा लेती है ।

 


रेखा के ठीक हो जाने से पूनम और तनु बहुत खुश थी,रात के समय पूनम सूरज के कमरे में आती है ।

सूरज-"अरे दीदी आप,अभी तक सोई नहीं" पूनम सूरज के पास आकर बैठ जाती है ।

पूनम-"सूरज डॉक्टर ने क्या बताया,माँ बेहोश क्यूँ हो गई थी" पुनम आते ही सूरज से सवालो की झड़ी लगा देती है। सूरज पूनम को सारी बात बता देता है,की माँ की नसों में पानी जम गया है,जिसे शारीरिक सम्भोग या हस्तमैथुन के जरिए निकाला जा सकता है, पूनम यह बात सुनकर चोंक जाती है।

पूनम-"सूरज क्यूँ न पापा को बुला लिया जाए,इस समय माँ को पापा की सख्त आवश्यकता है" पूनम की बात सूरज को सही लगती है।

सूरज-" दीदी में पापा से बात करू फोन से" सूराज जैसे ही यह बोलता है,तनु कमरे में आ जाती है। तनु सूरज की बात सुन लेती है ।

तनु-"सूरज किससे बात करने की कह रहा है तू"

सूरज-"अरे दीदी आप"

तनु-"माँ को क्या हुआ था यही पूछने आई में,पर तू कौनसे पापा की बात कर रहा है"

पूनम-'तनु हमारे पापा जिन्दा है अभी तक" तनु जैसे ही ये बात सुनती है तो सुन्न रह जाती है ।

तनु-"सूरज क्या ये सही बात है,कहाँ है वो,और हमसे मिलने क्यूँ नहीं आए अब तक?" सूरज तनु को पूरी सच्चाई बता देता है,सूर्या से लेकर संध्या माँ और अमेरिका में पापा से मिलना,तनु यह सब सुनकर हैरान रह जाती है और सूरज को गले लगा कर रोने लगती है,पूनम प्यार से चुप करबाती है।

तनु-"सूरज मुझे पापा से बात करनी है" सूरज वीडियो कोल करता है ।

बीपी सिंह-"हेलो बेटा कैसे हो"

सूरज-"पापा में ठीक हूँ,आप कैसे हो"

पापा-"में ठीक हूँ बेटा, रेखा कैसी है,और पूनम और तनु कैसी हैं"

सूरज-"सब ठीक है पापा, पूनम और तनु दीदी आपसे बात करना चाहती हैं" सूरज पूनम और तनु को अपने पास बुला कर मोबाइल के कैमरे के पास आता है, पूनम और तनु रोने लगती है अपने पिता को देख कर,पापा भी रोने लगते हैं,कई वर्षो बाद आज अपने पिता को देखा था।

पूनम-"पापा घर आ जाओ"

पापा-"बस बेटा जल्दी ही आऊंगा,मुझे सब की बहुत याद आ रही है, तुम्हारी माँ कैसी है"

तनु-"पापा माँ ठीक नहीं है,आज माँ बेहोस हो गई थी" बीपी सिंह यह सुनकर डर जाता है।

पापा-"क्या हुआ उसे"

सूरज-"कुछ नहीं हुआ है पापा, माँ ठीक है"

पापा-"बेटा अपनी माँ से मेरी बात करवा दे, रेखा को एक बार देखना चाहता हूँ"

सूरज-"पापा मैंने माँ को अभी तक बताया नहीं है आपके बारें में"

पापा-" तू अपनी माँ से बात कर,फिर मेरी बात करबा देना"

सूरज-"ठीक है पापा, में माँ से बात करूँगा" सूरज फोन काट देता है, पूनम और तनु भी चाहती थी की अब माँ को सब बता देना चाहिए,इसलिए हम तीनो लोग माँ के कमरे में गए, माँ अपने कमरे में बैठी टीवी देख रही थी, हम तीनो लोग कमरे में गए।

रेखा-" अरे बेटा तुम सोए नहीं अभी तक"रेखा तीनो को एक साथ देख कर बोली ।

सूरज-"आपसे बात करनी थी मुझे" रेखा हैरत से सूरज को देखती है ।

रेखा-"हाँ बेटा बोल क्या बात है"

सूरज-"पापा जिन्दा है" रेखा यह बात सुनकर स्तब्ध रह जाती है ।

रेखा-"तू पागल तो नहीं हो गया है" रेखा गुस्से से बोली ।

पूनम-"माँ सूरज सही कह रहा है पापा जिन्दा है"

सूरज-" में पापा से मिल चूका हूँ" सूरज सुरु से लेकर एन्ड तक पूरी कहानी सुनाता है,जिसे सुनकर रेखा रोने लगती है ।

सूरज अपने मोबाइल से पापा को वीडियो कॉल कर देता है, और रेखा को फोन देता है, अपने पति को देख कर रेखा रोने लगती है,बीपी सिंह भी रोने लगता है ।

बीपी सिंह-"रेखा मुझे माफ़ कर देना मुझे,तुझे बिना बताए मैंने संध्या से शादी की,मेरी मजबूरियां थी"

रेखा-" आप घर आ जाइए, में आपसे नाराज़ नहीं हूँ"रेखा रोते हुए इतना ही बोल पाई, काफी देर तक दोनों लोग गिला शिकवा करते हैं। आज पूरा परिवार खुश था, रेखा सारी सच्चाई जानकार सूरज को गले लगा लेती है ।

रेखा-" तू बाकई में हीरो है सूरज,मुझे नाज़ है तुझ पर" रात काफी हो चुकी थी,इसलिए आज सब लोग रेखा के साथ ही बेड पर सो जाते हैं ।

सुबह 6 बजे रेखा की आँख खुलती है,आज रेखा बहुत खुश थी, रेखा सबको जगाती है,पूनम और तनु उठकर फ्रेस होने चले जाते हैं लेकिन सूरज अभी भी सोया हुआ था। रेखा सूरज के पास बैठ कर प्यार से उसके सर पर हाँथ फिराती है। रेखा को आज बड़ा प्यार आ रहा था सूरज पर,चूँकि आज जो खुशियाँ उसे मिली थी बह सब सूरज के कारण ही थी । रेखा झुक कर सूरज के माथे पर किस्स करती है । तभी रेखा का मोबाइल बजता है,रेखा फोन उठाकर देखती है तो खुश हो जाती है चूँकि फोन बीपी सिंह का था,रेखा फोन उठा कर बात करने लगती है। फोन की घंटी बजने के कारण सूरज जग चूका था लेकिन आलस्य के कारण लेटा रहा।

बीपी सिंह-"हेलो रेखा कैसी हो"

रेखा-"में ठीक हूँ,आप कैसे हो"

बीपी सिंह-" में भी ठीक हूँ रेखा,आज तेरी बहुत याद आ रही है,मन कर रहा है अब तेरे पास आ जाऊं"

रेखा-"रोका किसने है आपको,आ जाओ"

बीपी सिंह-" बस कुछ दिन की परेसानी है,में अकेला ही दो कंपनी संभाल रहा हूँ,जल्दी ही सूरज को को सारी जिम्मेदारी दे दूंगा,उसके बाद में हमेसा तुम्हारे साथ रहूँगा"

रेखा-" आपको कितना समय लग जाएगा आने में"

बीपी सिंह-" बस 10-15 दिन लग सकते हैं,रेखा कल तुम बेहोस क्यूँ हो गई थी,डॉक्टर ने कि बताया तुम्हे,अगर कोई परेसानी हो तो अमेरिका आ जाओ,यहाँ अच्छे डॉक्टर को दिखा दूंगा"

रेखा-"मेरी परेसानी डॉक्टर से ठीक नहीं होगी"

बीपी सिंह-"मतलब ? क्या बताया डॉक्टर ने" रेखा सारी बात बता देती है,जिसे सुनकर बीपी सिंह भी हैरान रह जाता है,इधर सूरज भी माँ की बातें सुन लेता है।

बीपी सिंह-" ओह्ह्ह यह तो बहुत बड़ी परेसानी है,तुम वैसा ही करो जैसा डॉक्टर ने बोला है"

रेखा-"हाँ वही करुँगी" इस प्रकार काफी देर बात करने के बाद रेखा फोन काट देती है ।

फोन काटने के बाद सूरज उठकर फ्रेस होने चला जाता है, रेखा कमरे का दरबाजा बंद करके मेक्सी उतार देती है,और जैल क्रीम निकाल कर अपनी योनी की मालिस करती है, मालिस करते समय कई बार रेखा की ऊँगली योनी और क्लिट से टकरा जाती है । रेखा उत्तेजित हो जाती थी,लेकिन योनी से पानी नहीं निकलता था।

इस प्रकार तीन दिन निकल जाते हैं, रेखा पुरे दिन बीपी सिंह से बात करती,और समय निकाल कर अपनी योनी की मालिस करती,रेखा को अब योनी सहलाने में मजा आने लगा था । इधर सूरज संध्या के पास चला जाता है,संध्या और तान्या की दो दिन तक धमाकेदार चुदाई करता है । सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, रेखा भी आजकल बहुत खुश रहने लगी थी, रेखा अब चुदाई के बारे में सोचने लगी थी, कई बार रेखा फोन पर बीपी सिंह को बोल भी चुकी थी,की यदि आप होते तो मेरी बिमारी का ईलाज अच्छे से हो जाता, बीपी सिंह भी रेखा की इच्छा को भली भाँती से समझ जाता था और हस कर बात टाल देता था क्योंकि बीपी सिंह को शुगर और हार्ट की प्रॉब्लम थी जिसके कारण वो सेक्स नहीं कर सकता था,यह बात बीपी सिंह ने रेखा को नहीं बताई थी । बीपी सिंह अपनी इस परेसानी को लेकर चिंतित था उधर रेखा शारीरिक सम्भोग के सपने देखने लगी थी ।

एक दिन सुबह के समय हम सब बैठ कर खाना खा रहे थे । रेखा के चेहरे पर मुस्कराहट थी,तनु और पूनम अपनी माँ को खुश देख कर बहुत ख़ुशी महसूस करती हैं । माँ की मुस्कराहट उन्हें चेहरे पर निखार बन कर चार चाँद लगा रही थी ।

तनु-"माँ क्या बात है आजकल आप बहुत खुश हो"

पूनम-" पापा आने वाले हैं न इसलिए"यह सुनकर रेखा शर्मा जाती है । और साथ में मुझे भी बहुत शर्म आती है ।

रेखा-"चुप रहो तुम दोनों,कुछ भी बोलती रहती हो"

सूरज-"माँ पापा सच में आ रहे हैं"

रेखा-"कह तो रहे हैं,10 दिन बाद आने के लिए,यदी नहीं आए तो मुझे जाना पड़ेगा अमेरिका"यह सुनकर पूनम और तनु खुश हो जाती हैं।

तनु-"ओह्ह्ह माँ आप अमेरिका जाओगी,यह तो बड़ी ख़ुशी की बात है" तनु हँसते हुए बोली।

पूनम-"माँ आप अमेरिका किसके साथ जाओगी"

रेखा-"सूरज के साथ,अगर तेरे पापा नहीं आए तो जाउंगी"

तनु-"माँ फिर तो आप अपने लिए अच्छी अच्छी ड्रेस खरीद लो, अब आप सफ़ेद साड़ियां मत पहना करो"

पूनम-"हाँ माँ तनु ठीक कह रही है"

रेखा-"सोच तो में भी रही हूँ आज कपडे खरीद लू और एक बार डॉक्टर से भी मिल आऊँ,डॉक्टर ने आज आने के लिए भी बोला था"

पूनम-" माँ आप सूरज के साथ चली जाओ"

सूरज-"हाँ माँ आप तैयार हो जाओ" रेखा अपने कमरे में जाकर तैयार होकर आ जाती है ।

सूरज गाडी निकालता है,रेखा बगल बाली सीट पर बैठ जाती है, सूरज गाडी दौड़ा देता है ।

सूरज-"माँ अब आपकी तबियत कैसी है?"

रेखा-"ठीक है,पहले से आराम है"

सूरज-" माँ आपने यह अच्छा फैसला लिया है पापा के पास जाने का"सूरज की इस बात पर रेखा सोचने लगती है, कहीं सूरज को पता तो नहीं चल गया की में क्यूँ जाना चाहती हूँ अमेरिका ।

रेखा-" अच्छा!""हसते हुए बोली।

सूरज-"माँ आप खुश रहती हो तो अच्छा लगता है"

रेखा-"यह ख़ुशी तेरे कारण ही मिली है,गाँव में तो जिंदगी नर्क सी लगती थी,आज ऐसा लगता है जैसे स्वर्ग में हूँ"

सूरज-" माँ वो बुरा वक़्त था,लेकिन अब हमेसा खुशियाँ ही आएगी"

रेखा-"सूरज मेरी एक इच्छा है,पूरी करेगा?" रेखा सिरिअस होकर बोली,सूरज भी उत्सुकता के साथ बोला ।

सूरज-"हाँ माँ बोलो,में आपकी हर इच्छा पूरी करूँगा" रेखा सोचती हुई बोली ।

रेखा-"मुझे एक बार गाँव देखना है,ले चलेगा मुझे गाँव" सूरज यह सुनकर चोंकते हुए अपनी माँ को देखता है ।

सूरज-"कब चलना है गाँव?"

रेखा-"कभी भी जब तेरे पास समय हो"

सूरज-"आज चलें?" रेखा चोंक जाती है।

रेखा-"अभी"

सूरज-"नहीं रात में 10 बजे निकलते हैं,सुबह 6 बजे पहुँच जाएंगे"

रेखा-"ठीक है,आज रात में ही निकलते हैं"

सूरज-" पूनम और तनु दीदी को भी लेकर चलें?"

रेखा-"नहीं सिर्फ हम दोंनो,पूनम और तनु को ले जाना ठीक नहीं है,चौधरी का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ होगा"

सूरज-"ठीक है माँ,हम दोनो ही चलते हैं" सूरज गाडी रोकता है मॉल के सामने, दोनों लोग मॉल में एक कपडे की दुकान पर जाते हैं। रेखा चार पांच साड़ियां और बाजू कट बाले ब्लाउज खरीदती है और साथ में पेटीकोट भी ।

सूरज-"माँ ये क्या आपने तो सिर्फ साड़ियां ही खरीदी हैं,अमेरिका बाले आपको देखकर हसेंगे,अच्छी सी ड्रेस ले लो" रेखा यह सुनकर सोच में पड़ जाती है ।

रेखा-"मैंने तो आज तक सिर्फ साड़ियां ही पहनी है,क्या अमेरिका में साडी नही पहनते हैं? फिर क्या खरीदू सूरज,तू ही बता" सूरज रेखा को ड्रेस बाली शॉप पर लेकर जाता है । और तीन चार तरह की फेसनेवल ड्रेस रेखा को दिलबाता है,और ओवरकोट जैसी,ब्लेजर भी खरीदता है, रेखा तो ड्रेस देख कर दंग रह जाती है की वो उन्हें पहनेगी कैसे,

रेखा-"सूरज यह ड्रेस तो बिलकुल मेक्सी जैसी हैं,इन्हें कैसे पहनूगी"

सूरज-'माँ अमेरिका में तो इससे भी ज्यादा फेसनेवल कपडे पहनती हैं,ये तो फिर भी ठीक हैं" रेखा को बड़ा अजीब सा लग रहा था,ऐसी मोर्डन ड्रेस देख कर,लेकिन सूरज की बात मान लेती है,क्योंकि वो खुद चाहती थी अपने पति के सामने एक मोर्डन पत्नी बन कर रहें,चुकीं अमेरिका के माहोल और संस्कृति में यदि वो साडी पहनेगी तो शायद वहां के लोग मजाक न बनाए।

रेखा ड्रेस खरीद लेती है,सूरज रेखा के दो नायटी भी खरीद कर देता है,जो काफी हॉट थी, रेखा काफी शर्म महसूस कर रही थी । काफी कपडे खरीदनेके बाद रेखा ब्रा और पेंटी भी खरीदना चाहती थी लेकिन सूरज के कारण खरीद नहीं पा रही थी,लेकिन सूरज को पता थी की माँ ब्रा पेंटी जरूर खरीदेंगी इसलिए सूरज थोड़ी देर के लिए बाहर जाने का बहाना मार कर मॉल की दूसरी जगह जा कर खड़ा हो जाता है, जहाँ से सूरज माँ को देख सकता था लेकिन रेखा सूरज को नहीं देख सकती थी, रेखा ब्रा पेंटी की शॉप पर जाकर दो पेंटी और ब्रा लेती है, ब्रा पेंटी को बेग में रख कर शॉप के बाहर खड़ी सूरज का इंतज़ार करने लगती है। सूरज तुरंत रेखा के पास पहुँच जाता है ।

रेखा-"कहाँ था सूरज, अब चलें" कहीं न कहीं रेखा को समझ आ जाती है की सूरज ब्रा पेंटी की बजह से चला गया था,ताकि में निसंकोच खरीद सकूँ। सूरज की समझदारी देख कर रेखा मन ही मन खुश थी ।

सूरज-"हाँ माँ चलो" सूरज और रेखा जैसे ही आगे बढे, एक सेल्स गर्ल भागती हुई रेखा के पास आई,और रेखा को आवाज़ दी।

सेल्स गर्ल-" हेलो मेडम सुनिए" रेखा और सूरज रुक जाते हैं,रेखा घबरा जाती है चुकीं यह बही सेल्स गर्ल थी जिससे उसने अभी ब्रा पेंटी ली। सेल्स गर्ल पास आकर बोली ।

सेल्स गर्ल-" मेडम आपने ब्रा और पेंटी का पेमेंट नहीं किया" सेल्स गर्ल जैसे ही बोलती है,रेखा शर्म से पानी पानी हो जाती है,सूरज भी शर्मा जाता है,

 
रेखा-"सॉरी में भूल गई"रेखा शर्म के कारण अपनी गलती क़बूल करते हुए आराम से बोली। सेल्स गर्ल रेखा और सूरज को साथ ले जाती है पेमेंट काउंटर पर ।सूरज जेब से क्रेडिट कार्ड निकालता है, पेमेंट काउंटर पर सेल्स गर्ल ब्रा और पेंटी का मूल्य बोलती है।

सेल्स गर्ल-"दो ब्रा 36 साइज़ की और दो पेंटी 40D साइज़ की,एक हज़ार रुपये हुए सर"सूरज अपनी माँ का साइज़ सुन कर शर्म से पानी पानी हो जाता है,लेकिन रेखा अपनी ब्रा का साइज़ सुनकर चोंक जाती है चूँकि उसने 38 साइज़ की ब्रा मांगी थी, रेखा विवस होकर बिना शर्म किए मजबूरन सेल्स गर्ल को बीच में रोकती हुई बोली।

रेखा-" सुनिए मैंने 38 साइज़ माँगा था,आप 36 साइज़ बोल रही हैं" रेखा हिम्मत करके सूरज की मौजूदगी में बोलती है,और खुद शर्मिंदगी महसूस करने लगती है,इधर सूरज जब अपनी माँ की ब्रा का साइज़ सुनता है तो खुद मन में माँ के बूब्स याद आ जाते हैं जब उसने अपनी माँ को बाथरूम में बेहोसी की हालात में नग्न देखा था,सूरज को झटका लगता है,और अपनी सोच को धिक्कारता है ।

सेल्स गर्ल-"सॉरी मेंडम शायद मैंने भूल से 36 साइज़ की ब्रा दे दी,में एक बार कन्फर्म कर लेती हूँ,आप ब्रा दिखाइए" सूरज की की मौजूदगी में रेखा भी शर्म महसूस करते हुए ब्रा निकाल कर सेल्स गर्ल को देती है, सेल्स गर्ल ब्रा का पैकेट खोल कर निकालती है, सूरज एक आँख से ब्रा देखने लगता है, एक पिंक ब्रा और एक सफ़ेद ब्रा थी,जो साधारण औरते पहनती है,उन पर फूल पत्तियों की डिजाइन बनी हुई थी । सेल्स गर्ल ब्रा का साइज़ देखती है जिस पर 36 साइज़ ही लिखा था।

सेल्स गर्ल-" आपने सही बोला मेडम,दोनों ब्रा 36 की हैं,सॉरी मेडम में अभी 38 साइज़ की ब्रा लेकर आती हूँ" सेल्स गर्ल दोनों ब्रा ले जाती है,10 मिनट बाद ब्रा के तीन चार डिब्बा उठा कर रखती हुई बोली । ऐसा लग रहा था जैसे ब्रा की पूरी दूकान ही उठा लाई हो, रेखा ये देख कर हैरान थी,38 साइज़ की दो ब्रा लाने के बजाए तीन चार डिब्बा लाने की क्या आवश्यकता थी । सूरज और रेखा को एक के बाद एक झटका लग रहा था ।

सेल्स-" सॉरी मेडम, आपने जिस डिजाइन की ब्रा मांगी थी,उसमे 38 साइज़ की ब्रा ख़त्म हो गई हैं, में आपको 38 साइज़ में लेटेस्ट और न्यू ब्रांड की ब्रा दिखा देती हूँ" सेल्स गर्ल एक डिब्बा खोलती है जिसमे न्यू शार्ट ब्रा थी,जिनके कप बहुत छोटे थे, रेखा ऐसी ब्रा देख कर दंग रह जाती है,इस प्रकार की ब्रा उसने आज तक नहीं पहनी, सेल्स गर्ल दूसरी ब्रा दिखाती है जिसके कप जालीदार कपडे के थे ।

रेखा शर्म के कारण कुछ भी बोल नहीं पा रही थी।

सेल्स गर्ल-"मेडम ये जाली बाली ब्रा ले लीजिए,ये बहुत आरामदायक होती हैं, इनकी लास्टिक बहुत मजबूत होती है" सूरज ब्रा देख कर कल्पना करने लगता है, लेकिन तभी सूरज को याद आता है की ये मेरी माँ है । रेखा बहुत शर्मिंदगी महसूस कर रही थी इसलिए जल्दी से बोलती है ।

रेखा-" आप कोई भी दे दो,जल्दी करो प्लीज़" सेल्स गर्ल दो ब्रा पैक कर देती है, रेखा और सूरज को शान्ति मिलती है लेकिन तभी सेल्स गर्ल एक डिब्बा खोलती हुई बोली, जिसमे लेटेस्ट पेंटी थी,एक पेंटी दिखाती हुई बोली।

सेल्स गर्ल-" मेडम इन दोनों ब्रा के साथ यह पेंटी भी हैं" रेखा पेंटी देखती है,तो हैरान रह जाती है,पेंटी पूरी लास्टिक की थी,सिर्फ चूत बाले स्थान पर हलकी जाली लगी हुई थी,हॉट पेंटी को देख कर सूरज का मन विवस होकर कल्पना करने लगता है,और उसका लंड में सुरसुराहट सी होने लगती है। सूरज के मन और लंड में संघर्ष होने लगता है ।

सूरज दूसरी तरफ मुह कर लेता है,रेखा समझ जाती है सूरज शर्मिंदगी महसूस कर रहा था ।

रेखा-"आप दे दीजिए" सेल्स गर्ल ब्रा और पेंटी पैक करके दे देती है। पेमेंट गर्ल क्रेडिट कार्ड से पैसे काट कर क्रेडिट कॉर्ड सूरज को दे देती है । रेखा और सूरज तुरंत मॉल से निकल आते हैं, ऐसा लग रहा था जैसे कोई चुड़ैल उनके पीछे लग गई हो ।

रेखा सूरज की तरफ देखती है,सूरज के चेहरे पर शर्म के भाव थे, सूरज रेखा की तरफ देखता तो रेखा भी शर्म से नज़रे झुका लेती है। मॉल के बाहर निकलते ही सूरज को एक जनरल स्टोर की शॉप दिखाई देती है।

सूरज-"माँ और कुछ खरीदना है क्या" सूरज खामोशी तोड़ते हुए बोला।

रेखा-"हाँ सूरज,थोडा मेकअप का सामन खरीदना है" सूरज उस जनरल शॉप पर ले जाता है और मेकअप का सारा सामन खरीद लेता है। रेखा ने कई सालो बाद आज मेकअप का सामन ख़रीदा था,चूँकि वो अब तक एक विधवा के रूप में जीती आई थी,आज वो पुनः अपने आपको एक सुहागन मेहसुस कर रही थी । सूरज शॉप से बाहर निकलता है तो सामने एक ज्वेलरी की शॉप दिखाई देती है । सूरज रेखा को उस शॉप में लेकर जाता है,रेखा हैरत से सूरज को देखती है ।

ज्वेलरी की शॉप पर आकर सूरज सोने का एक हार,अंगूठी,और चूड़ियाँ आर्डर करता है, रेखा तो हैरान थी ।

रेखा-"सूरज ये क्या कर रहा है तू,ये तो बहुत महंगे होंगे" सूरज हसते हुए अपनी माँ को देखता है ।

सूरज-" माँ आप अब पैसो की क्यूँ चिंता करती हो, अब आप अरबो रुपए की मालकिन हो, पापा ने मेरे बैंक खाते में करोडो रुपए डाले है, अब हम गरीब नहीं रहे माँ, अब आप दुनियां के सभी शौक पुरे कर सकती हो" रेखा यह सुनकर खुश होती है।

सूरज रेखा के लिए गहने खरीद लेता है,यदि रेखा यदि उन गहने को पहने तो रानी लगे। सूरज और रेखा सारा सामान गाडी में रखते हैं।

रेखा-"बेटा अब डॉक्टर के यहाँ चले या और भी कुछ बाकी रह गया है"रेखा हसते हुए बोली, लेकिन सूरज कुछ सोच रहा था। सामने उसे ब्यूटी पार्लर दिखाई देता है, सूरज रेखा को लेकर ब्यूटी पार्लर जाता है।

रेखा-"बेटा ये कौनसी दूकान है,यहाँ से क्या खरीदना है?" रेखा को नहीं पता था,ब्यूटी पार्लर में क्या होता है ।

सूरज-"माँ एक बार चलो तो अंदर, वो जैसा कहें वैसा करवाते रहना" सूरज अंदर जाकर ब्यूटीशियन से बोल देता है,की फेसियल,आई ब्रो, और हेयर कटिंग करो।

ब्यूटीशियन रेखा की फेसियल करती है और आई ब्रो बनाती है,रेखा मासूम बच्ची की तरह बैठी यह सब करबाती रहती है, फेसियल और आई ब्रो करने के उपरान्त ब्यूटीशियन रेखा के बाल सेट करती है।

ब्यूटीशियन-"मेडम शीशे में देखिए,अपने आपको"रेखा जैसे ही शीशे में अपने आपको देखती है तो हैरान रह जाती है, रेखा नई लड़कियों को भी मात दे रही थी,ऐसा लग रहा था जैसे किसी कॉलेज की प्रोफ़ेसर हो।

रेखा-" थेंक्स" इतना कह कर रेखा जैसे ही बाहर आती है,सूरज अपनी माँ को देखता रहता है, उसे यकीन नहीं हो रहा था की ये माँ है मेरी, ऐसा लग रहा था जैसे पूनम की बड़ी बहन हो। रेखा खुद सूरज को देख कर शर्मा जाती है ।

सूरज-"woww माँ आप तो बहुत सुन्दर लग रही हो" रेखा शरमा जाती है ।

रेखा-"सूरज ये सब किसलिए किया"

सूरज-"माँ अब आप शादी शुदा हो,अब आप पर वो कपडे और गहने बहुत अच्छे लगेंगे,देखना पापा के तो होश उड़ जाएंगे" सूरज की इस बात पर रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-"बस कर बेटा" रेखा मुस्कराती हुई नज़रे झुका लेती है शर्म से।

सूरज-" माँ आप शरमाते हुए और भी सुन्दर लगती हो" रेखा नज़रे उठाकर सूरज की और देखती है।

रेखा-"आज मुझे जितनी शर्म आई है उतनी तो कभी नहीं आई"रेखा शरमाते हुए बोली। सूरज समझ जाता है माँ का इशारा ब्रा और पेंटी बाली घटना से था ।

सूरज-" कोई बात नहीं माँ,ऐसा हो जाता है कभी कभी,सभी सेल्स गर्ल होती ही ऐसी हैं" सूरज नज़रे झुका कर बोला।

रेखा-"तेरे सामने इस तरह उन कपड़ो को नहीं दिखाना चाहिए था" रेखा ब्रा और पेंटी को कपडा कह कर संबोधित करती है ।

सूरज-"जो होता है अच्छे के लिए ही होता है माँ"

रेखा-"मतलब समझी नहीं में" रेखा सूरज की बात का मतलब नहीं समझ पा रही थी।

सूरज-" व् व् वो माँ अगर सेल्स गर्ल आपको बुलाती नहीं तो 38 की जगह 36 पहनना पड़ता आपको" सूरज हिम्मत करके बोलता है,रेखा सूरज की इस बात को सुनकर शर्म से पानी पानी हो जाती है। और इस टॉपिक को ख़त्म करने के लिए बोलती है।

रेखा-"सूरज अब जल्दी चल डॉक्टर के पास भी जाना है" सूरज और रेखा गाडी में बैठ कर हॉस्पिटल पहुँच जाते हैं। रेखा डॉक्टर की केबिन में जाती है, सूरज बाहर खड़ा रहता है ।

डाक्टर-"आपने मालिस की तीनो समय?"

रेखा-"हाँ"

डॉक्टर-" अपने कपडे ऊपर करके अपनी योनी दिखाओ" रेखा अपना पेटीकोट ऊपर करके पेंटी उतार देती है,डॉक्टर ऊँगली से योनि देखने लगती है।

डाक्टर-" पहले से आपकी योनी ठीक लग रही है,आज और मालिस कर लो,कल से हस्तमैथुन करना तेल लगा कर" डॉक्टर रेखा की योनी में छोटी ऊँगली डालकर देखती है,तो उसे हलकी नमी दिखाई देती है ।

रेखा-"डॉक्टर में सेक्स करना चाहती हूँ,मेरे पति 10 दिन बाद आ रहें हैं"

डॉक्टर-"यह तो बहुत अच्छी बात है,लेकिन 10 दिन बाद आ रहें हैं तब तक आप,ऊँगली से करो,में आपको दवाई देती हूँ,सुबह शाम टेबलेट खाती रहना,और आज रात में मसाज जरूर कर लेना" रेखा कपडे ठीक करके बाहर जाने लगती है।

डॉक्टर-" मेडम पांच मिनट रुकिए,में नर्स से दवाई भेजती हूँ आपकी बाली"

रेखा-"ठीक है डॉक्टर,में बाहर बैठी हूँ" रेखा बाहर आकर सूरज के पास आती है, रेखा को बहुत तेज पिसाब लगी थी,इसलिए रेखा इधर उधर टॉयलेट देख रही थी । तभी उसे दूर टॉयलेट दिखाई देता है।

रेखा-"सूरज तू बैठ में अभी आई" जैसे ही रेखा जाती है,तभी नर्स सूरज के पास आकर टेबलेट देती है।

नर्स-"ये लीजिए रेखा जी की दवाई, मसाज करने से 20 मिनट पहले खिलानी है,इसे खा कर थोडा सा नशा हो जाएगा,मसाज करने के उपरान्त नींद आ जाएगी" सूरज तो भौचक्का रह गया यह सुनकर। नर्स चली जाती है, सूरज सोचता है की अब में माँ को कैसे बताऊंगा यह बात, तभी रेखा आ जाती है।

सूरज-'माँ बो नर्स ये टेबलेट दे गई हैं"

रेखा-"अच्छा ला दे मुझे, लेकिन यह खानी कब है मुझे?" रेखा के इस प्र्शन से सूरज घबरा जाता है, सूरज किसे बताता अपनी माँ को की खाने के बीस मिनट बाद मसाज करनी है ।

सूरज-'माँ आप जाकर डॉक्टर से पूछ लो, मे यहीं बैठा हूँ"

रेखा-"हाँ में पूछ कर आती हूँ,तू रुक" रेखा डॉक्टर की केबिन में जाती है,

रेखा-" डॉक्टर यह टेबलेट कब खानी है" रेखा के इतना बोलते ही नर्स बोल पड़ती है,।

नर्स-"अरे अभी बताया तो था उस लड़के को,योनी की मसाज करने से 20 मिनट पहले खानी है,इसको खाने के बाद थोडा सेक्स का नशा चढ़ेगा आपको,मसाज या ऊँगली के बाद नींद आ जाएगी" जैसे ही रेखा यह सुनती है की तो उसे झटका लगता है की नर्स ने सूरज को बता दिया दवाई कैसे खानी है। रेखा एक बार फिर शर्मसार हो जाती है खुद की नज़रों में, रेखा समझ जाती है की सूरज ने खुद शर्म के कारण मुझे नहीं बताया इसलिए उसने डॉक्टर से पूछने के लिए मुझे भेजा । रेखा बाहर निकल कर आती है, आज दिन भर की घटना चक्र को सोच कर उसे शर्मिंदगी महसूस हो रही थी, सूरज से नज़रे नहीं मिला पा रही थी । सूरज भी समझ जाता है। दोनों लोग घर आ जाते हैं।

पूनम और तनु रेखा की खूबसूरती देख कर हैरान रह जाती है। सूरज अपने कमरे में जाकर आज की सभी घटना केबारे में सोचता है। सोचते सोचते सूरज का लंड खड़ा हो जाता है,मसाज की बात सुन कर, सूरज ध्यान हटाने का प्रयत्न करता है और सो जाता है। शाम को 8 बजे नींद खुलती है । पूनम उसे जगाने आई थी।

पूनम-"सूरज उठ जा, आज तुझे माँ के साथ गाँव जाना है, माँ पूछ रही है, गांव जाएगा?" सूरज को याद आता है की आज रात में गाँव जाने का उसने वादा किया था ।

सूरज-"हाँ दीदी जाना है गाँव, माँ से कह दो,10 बजे" सूरज फ्रेस होकर नीचे जाता है।

 
रात के 10 बजे,

रेखा अपने कमरे में गाँव जाने के लिए तैयार हो रही थी, आज रेखा ने नई बनारसी साडी पहनी थी, और आज लाए हुए गहने भी पहनती है, रेखा आज बहुत सुन्दर लग रही थी।तभी पूनम कमरे में आती है, अपनी माँ की सुंदरता देख कर हैरान रह जाती है।

पूनम-"वाह्ह्ह्ह् माँ आप तो महारानी लग रही हो" रेखा शरमाती हुई बोली ।

रेखा-"अच्छा,पूनम तू एक काम कर दे, एक बेग में मेरी नायटी रख दे,यदि रात में मुझे रुकना पड़ा तो कम से कम पहन कर तो सो जाउंगी,और ब्रा पेंटी भी"

पूनम-"ठीक है माँ,एक बेग में रख देती हूँ" पूनम एक बेग में नायटी और ब्रा पेंटी रख देती है।

रेखा-" बेटा मेरी दवाई भी रख देना" पूनम रेखा की सभी दवाई रख देती है, रेखा तैयार हो चुकी थी।

सूरज भी तैयार होकर नीचे आया,सूरज जैसे ही रेखा को देखता है तो चोंक जाता है,रेखा बहुत सुन्दर लग रही थी,बिलकुल बाहुबली की माहेष्मती जैसी, सूरज को इस तरह घूर कर देखने से रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-"अब चलें सूरज" सूरज अपनी सोच से बाहर निकलता है।

सूरज-"हाँ माँ चलो" रेखा और सूरज गाडी में बैठ जाती है, पूनम और तनु बेग और जरुरत का सामन गाडी में रख देती हैं। रेखा सूरज के बगल बाली सीट पर बैठी थी, सूरज गाडी चलाता है। रात में हाईवे पर सूरज को बड़ा मजा आ रहा था गाडी चलाने में, सूरज शीशा लगा कर ए सी चला देता है। गाडी में लाइट जल रही थी ।

रेखा खामोशी से बैठी थी, सूरज एक दो बार रेखा के चेहरे को देखता, रेखा को पता थी की सूरज उसे देख रहा था,रेखा को आज बड़ा अच्छा भी लग रहा था सूरज भी आज अपनी माँ की सुंदरता में खो सा गया था, उसके मन में कोई गलत विचार नहीं था,अपनी माँ के प्रति,लेकिन आज दिन में मॉल में घटी घटना और पार्लर पर माँ के बूब्स का साइज़ बताना,उसके बाद नर्स के द्वारा अपनी माँ की मसाज बाली बात को सुनना उसे बड़ा अटपटा सा लगा, सूरज का ध्यान माँ के प्रति बढ़ गया था,सूरज हाईवे पर गाडी आराम आराम चला रहा था,तभी रेखा ख़ामोशी तोड़ती हुई बोली।

रेखा-"थेंक्स बेटा" सूरज रेखा की तरफ देखता है।

सूरज-"थेंक्स किस लिए माँ?"

रेखा-" तूने मेरी गाँव जाने की इच्छा पूरी की इसलिए"

सूरज-"माँ यह तो मेरा फर्ज है, अपनी माँ के लिए में कुछ भी कर सकता हूँ"

रेखा-" तूने जितना मेरे लिए किया है उतना तो कोई भी बेटा अपनी माँ के लिए नहीं कर सकता है"

सूरज-"अरे माँ मैंने क्या किया है"

रेखा-" मुझे मेरा सुहाग तूने लौटा दिया,इससे बड़ी ख़ुशी मेरे लिए क्या होगी,अब बस तेरे पापा घर आ जाए"

सूरज-"माँ आप फिकर मत करो,पापा अगर नहीं आएँगे तो में आपको अमेरिका लेकर जाऊँगा"

रेखा-"थेंक्स बेटा, और हाँ आज के लिए भी थेंक्स" सूरज रेखा की तरफ हैरानी से देखता है।

सूरज-"आज के लिए थेंक्स,आज मैंने ऐसा क्या किया"

रेखा-" मेरे साथ मार्केट गया,शॉपिंग करवाई,और ब्यूटी पार्लर लेकर गया,गहने भी दिलवाए,इतना कुछ तूने किया मेरे लिए"

सूरज-" अरे माँ आज जो ड्रेस खरीदी थी,वो आपने पहन कर देख ली क्या"

रेखा-"अभी नहीं"

सूरज-'ओह्ह माँ एक बार पहन कर तो देख लेती,छोटे और टाइट निकले तो बदल तो सकते हैं"

रेखा-"हाँ यह बात तो ठीक है,घर पहुँच कर पहन कर देखूंगी, ये मॉल बाले गड़बड़ी कर देते हैं,साइज़ बदल देते हैं" रेखा को ब्रा बाली बात याद आ जाती है,जो आज मॉल में 38 की जगह 36 दे दी थी,सूरज भी समझ जाता है यह बात।

सूरज-'हाँ माँ सही बात है,वैसे माँ आप वो ड्रेस पहनोगी तो बहुत मोर्डन लगोगी"

रेखा-"कौनसी ड्रेस जो तूने दिलवाई है वो कपडे"

सूरज-"हाँ माँ,आप पहनोगी तो बहुत खूबसूरत लगोगी"रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-" पर मुझे तो बड़ी शर्म आएगी,मैंने ऐसे कपडे आज तक नहीं पहने"

सूरज-"अरे माँ आप जब अमेरिका जाओगी उन कपड़ो को पहन कर तो आपको शर्म नहीं आएगी,क्योंकि वहां सभी औरते ऐसे ही कपडे पहनती है"

रेखा-" हाँ ये बात तो ठीक है,तेरे पापा तो कह रहे थे मुझसे फोन पर की अमेरिका में लोग बहुत शार्ट कपडे पहनते हैं"

सूरज-" माँ आप भी अमेरिका जाकर शार्ट कपडे पहनोगी" रेखा सोचने लगती है ।

रेखा-"अगर तेरे पापा लाएंगे शार्ट कपडे तो पहनने पड़ेंगे" सूरज यह सुनकर उछल जाता है,और कल्पना करने लगता है की माँ हॉट ड्रेस में कैसी लगेगी।

सूरज-" वाह्ह्ह्ह् माँ मेरी तो उत्सुकता बढ़ गई"

रेखा-"मतलब?"

सूरज-" में भी देखूंगा आपको उन कपड़ो में,आप कैसी लगोगी" रेखा यह सुनकर चोंक जाती है,और शरमा जाती है।

रेखा-" तेरे सामने नहीं पहन पाउंगी में ऐसे कपडे,मुझे खुद शर्म आएगी उन्हें पहनने में" रेखा शरमा कर बोली।

सूरज-"अरे माँ इसमें शर्म कैसी,आखिर वो कपडे ही तो हैं"

रेखा-" जिन कपड़ो में आधे से ज्यादा तन दिखाई दे,वो कपडे पहनना,न पहनने के बराबर ही होते हैं"

सूरज-"लेकिन माँ आज उन्ही कपड़ो का चलन है"

रेखा-" हाँ चलन तो है लेकिन में अब लड़की नहीं हूँ, 44 वर्ष की औरत हूँ, क्या मुझ पर ऐसे कपडे अच्छे लगेंगें"

सूरज-"अरे माँ आप औरत लगती ही कहाँ हो,ऐसा लग रहा है जैसे पूनम दीदी की बड़ी बहन हो,औरआज तो आप वैसे भी बहुत सुन्दर लग रही हो" रेखा खुद की तारीफ़ सुन कर शरमा जाती है।

रेखा-"झूठा कही का,मेरा दिल रखने के लिए बोल रहा है तू"

सूरज-"अरे सच में माँ,आज आप बहुत सुन्दर लग रही हो,ऐसा लग रहा है जैसे नए नवेली दुल्हन हो, नई नई शादी हुई हो आपकी" रेखा आँखे फाड़े सूरज को देखती है।

रेखा-"चुप कर,शहर में आकर बहुत बड़ी बड़ी बातें सीख गया है तू"

सूरज-" सच बोल रहा हूँ माँ,में तो सोच रहा था पापा आएँगे तो आपकी दुबारा शादी करवाऊंगा,बहुत बड़ी पार्टी होती घर में"

रेखा-"क्या शादी मेरी,ओह्ह्ह सूरज तू पागल है"

सूरज-"सच में माँ,पापा आते तो शादी करवाता दुबारा,फिर आप अमेरिका जाती तो ज्यादा अच्छा लगता"

रेखा-" अच्छा शादी करके अमेरिका क्यूँ?"

सूरज-" हनी......? सूरज बोलते हुए रुक जाता है,चूँकि अचानक गलती से ही बोल जाता है। रेखा समझ जाती है सूरज हनीमून बोलने बाला था।

रेखा-"क्या हनी... समझी नहीं में,साफ़ साफ़ बोल,रुक क्यूँ गया" रेखा अनजान बनती हुई बोली।

सूरज-"हनीमून" सूरज डरते हुए बोल ही देता है।

रेखा-"ओह्ह्ह सूरज, तू पागल है,कुछ भी बोल देता है" रेखा शर्म से पानी पानी हो रही थी।

सूरज-"सॉरी माँ"

रेखा-"चल कोई बात नहीं" रेखा हसते हुए बोली, रेखा को बहुत तेज पिसाब लगती है, लेकिन शर्म के कारण सूरज से बोल नहीं पाई थी,लेकिन अब ज्यादा तेज लगती है तो सूरज से गाडी रोकने के लिए बोलती है।

रेखा-"सूरज थोड़ी देर के लिए गाडी रोकना"

सूरज-'क्या हुआ माँ,कोई परेसानी है क्या"

रेखा-"मुझे पिसाब लगी है" सूरज गाडी रोकता है, रेखा गाडी के साइड में ही मूतने लगती है, एक तेज सिटी की आवाज़ आती है,सूरज के कान खड़े हो जाते हैं,सूरज खिड़की के साइड शीशे में देखता है तो उसे माँ बैठी हुई दिखाई देती है, सूरज अपनी नज़र घुमा लेता है । थोड़ी देर बाद रेखा आती है।

रेखा-"सूरज मुझे नींद आ रही है अब"

सूरज-'माँ आप पीछे बाली सीट पर जाकर सो जाओ" रेखा पीछे बाली सीट पर जाकर लेट जाती है, लेकिन नींद नहीं आती है,चूँकि बनारसी साडी पहनने के कारण चुभ सी रही थी,ऊपर से बहुत सारे गहने पहने हुए थी, रेखा सीट पर बैठ जाती है, सूरज फ्रंट शीशे से देखता है।

सूरज-" क्या हुआ माँ,आप लेटी नहीं"

रेखा-"इस साडी में नीद नहीं आ रही है"

सूरज-"कोई मेक्सी पहन लो,इस साडी को उतार कर रख दो,गाँव पहुँचने में 7 घंटे लगेंगे,तब तक आप सो जाओ" सूरज की बात रेखा को सही लगती है,लेकिन साडी उतार कर मेक्सी पहने कैसे,यही सोच रही थी, रेखा पीछे सीट से अपना बेग उठाती है,और अपनी मेक्सी निकालने लगती है,लेकिन मेक्सी की जगह उसे नायटी मिल जाती है जो आज सूरज ने दिलाई थी,रेखा बेग में फिर हाँथ डालकर देखती है तो नई बाली शार्ट ब्रा पेंटी निकल आती हैं,जो जालीदार ब्रा पेंटी थी,शायद पूनम ने धोखे से रख दी थी। सूरज फ्रंट शीशे से सब देख रहा था । सूरज की धड़कन बढ़ गई थी यह देख कर। इधर रेखा सोचती है की सूरज के सामने यह नायटी कैसे पहने।

सूरज-"क्या हुआ माँ,मेक्सी पहन लो" सूरज पीछे मुड़ कर देखता है, रेखा ब्रा पेंटी बेग में रख देती है।

रेखा-"पूनम ने धोखे से मेक्सी की जगह ये नायटी रख दी,अब इसको कैसे पहनू"

सूरज-'मेक्सी और नायटी में ज्यादा फर्क नही है माँ, आप पहन लो, में गाडी की लाइट बंद कर देता हूँ" सूरज लाइट बंद कर देता है, रेखा को सुकून मिलता है,रेखा साडी और गहने उतार कर पीछे बाली सीट पर रख देती है, अब रेखा ब्लाउज और पेटीकोट में थी,रेखा का ब्लाउज बहुत टाइट था इसलिए ब्लाउज उतारने लगती है,रेखा की नज़र सूरज की तरफ थी,लेकिन अँधेरे में उसे कुछ दिखाई नही दे रहा था। रेखा ब्लाउज उतार कर नायटी पहन लेती है,और फिर एक हाँथ कमर पर ले जाकर पेटीकोट भी उतार देती है । रेखा ने नायटी पहन तो ली थी लेकिन उसे खुद पता नहीं चल रहा था,की नायटी में वो कैसी लग रही है ।

रेखा ने चलती गाडी के अँधेरे में नायटी पहन तो ली,लेकिन नायटी पहन कर कैसी लगती है,यह इच्छा उसके मन में प्रवल हो रही थी, अँधेरे में ही रेखा अपने बदन पर हाँथ फिरा कर नायटी को महसूस कर रही थी, नायटी का कपडा बहुत कोमल और हल्का था,ऐसा लग रहा था जैसे उसका समूचा जिस्म नग्न हो,इतना आरामदायक कपडा पहने के बाद उसको बड़ा सुकून मिल रहा था, रेखा हाँथ से जिस्म को मुयायना करते करते दोनों जांघो के बीच हाँथ चला जाता है,चूत के ऊपर स्पर्श करते ही उसे याद आता है की आज उसे मालिस करनी थी,और टेबलेट भी खानी थी। लेकिन सूरज के होने के कारण मालिस कैसे करे यह चिंता का विषय उसके मन में प्रश्नवाचक की तरह चल रहा था, डॉक्टर के कहे अनुसार यदी योनी से पानी नहीं निकला तो गंभीर परिणाम का सामना उसे करना पड़ेगा,इसलिए यह इलाज जरूर करना है, तभी रेखा सोचती है की गाडी में इतना अँधेरा है,जब मुझे ही अपना बदन दिखाई नहीं दे रहा है तो भला सूरज कैसे देख सकता है मुझे।

रेखा निश्चय कर लेती है की कुछ भी हो जाए मालिस तो करनी पड़ेगी और उससे पहले दवाई खानी पड़ेगी। रेखा काफी सोच विचार करने के पश्चात फैसला ले पाती है, रेखा की पेंटी बहुत टाइट थी इसलिए रेखा पेंटी को उतार देती है ताकि आसानी से मालिस कर सके। रेखा को दुबारा पिसाब भी लग आई थी,रेखा सोचती है पहले पिसाब कर लू उसके बाद दवाई खाऊँगी और मालिस करुँगी । रेखा अपने मोबाइल में समय देखती है जिसमे 11:30 बज रहे थे । गाडी में मोबाइल के जलते ही रौशनी हो जाती है तो सूरज बोलता है ।

सूरज-" क्या हुआ माँ,नायटी पहन ली क्या,आपने बढ़ी देर लगा दी पहनने में"

रेखा-'नायटी तो बहुत पहले ही पहन चुकी में,बस तू थोड़ी देर के लिए गाडी रोक दे" सूरज समझ जाता है माँ के लिए पिसाब लगी है। सूरज गाडी रोकता है हाइवे की साइड पर ।

सूरज-"क्या हुआ माँ,फिर से पिसाब लगी है?" सूरज के मुह से पिसाब शब्द सुन कर रेखा के तनबदन में हलचल सी होती है, रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-"हाँ" रेखा गाडी से उतर कर बाहर आती जाती गाड़ियों की लाइट में अपनी नायटी देखती है तो हैरान रह जाती है, नायटी उसके जिस्म से चुपकी हुई थी,उसके 38 के बूब्स और चौड़ी गांड का उभार बना हुआ था, रेखा अपने बूब्स की तरफ देखती है जो आधे से ज्यादा बूब्स फुले हुए नंगे दिखाई दे रहे थे,लाल ब्रा भी साफ़ दिखाई दे रही थी, और निचे देखती तो नायटी सिर्फ उसके घुटनो तक ही थी,जिसमे उसकी टाँगे और पिंडलियां साफ़ गोरी गोरी चमक रही थी, रेखा खुद में एक हॉट सेक्सी और कामुक औरत को देख रही थी, इधर सूरज जब साइड के शीशे से अपनी माँ को देखता है तो हैरान रह जाता है, सूरज का लंड आज अपनी ही माँ को देख कर झटके मारने लगता है,सूरज के साथ आज ऐसा पहली बार हुआ था उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हुआ था, सूरज अपनी सोच और हवस को धिक्कारने क प्रयास करता है और अपनी नज़रे साइड के शीशे से हटा लेता है, लेकिन उसका लंड सूरज के मन पर हावी हो जाता है,किसी ने सच ही कहा है लोग हवस में अंधे हो जाते हैं,आज सूरज का भी यही हाल था, सूरज की नज़रे फिर से शीशे से जस टकराई लेकिन इस बार सूरज को तेज झटका लगता है । रेखा अपनी नायटी ऊपर कर रही थी, सूरज को रेखा की भारी भरकम गांड दिखाई देते हैं, ऐसा लग रहा था जैसे दो मटके आपस में जुड़े हो, रेखा मूतने बैठ जाती है,जिससे रेखा की गांड उभर कर बाहर आ जाती है,और एक तेज सिटी आवाज़ खुले शांत वातावरण में गूंजने लगती है। रेखा खुद अपनी ही चूत से निकली सिटी की आवाज़ सुन कर शर्मसार हो जाती है, चूँकि उसे इतना तो यकीं हो जाता है की सिटी की तेज आवाज़ सूरज के कानो तक जरूर गई होगी।

इधर सूरज अपनी नज़रे शीशे से हटा कर गाडी की लाइट जला देता है,तभी फ्रंट शीशे में उसे पीछे की सीट पर अपनी माँ की पेंटी दिखाई दी, सूरज पीछे मुड़ कर पेंटी को देखने लगता है,सूरज को फिर से एक बार झटका लगता है की उसकी माँ नायटी के अंदर नंगी है,सूरज का मन कर रहा था एक बार पेंटी को उठाकर देखे,लेकिन सूरज की मर्यादा उसे ऐसा करने नहीं देती है। रेखा पिसाब करके आती है और पानी की बोतल से अपने हाँथ धोती है,रेखा जैसे ही सीट पर पड़ी अपनी पेंटी देखती है तो फिर से शर्मा जाती है,भुलवस् छोड़ जाने की गलती स्वीकार करते हुए तुरंत उठाकर बेग में रख देती है,रेखा को यकीन था इस पर सूरज की नज़र जरूर गई होगी,चूँकि गाडी में लाइट जल रही थी।

रेखा-"सूरज लाइट क्यूँ जलाई तूने,लाइट बंद कर दे"

सूरज गाडी दौडा देता है हाइवे पर लेकिन लाइट बंद नहीं करता है ।

 


सूरज-' माँ यह तो बही नायटी है जो आज मॉल से खरीदी थी" पीछे मुड़ कर नायटी की ओर इशारा करता है ।

रेखा-"हाँ बही है सूरज"

सूरज-"बहुत अच्छी है'

रेखा-"क्या?"

सूरज-"नायटी बहुत अच्छी है,आप पर जम रही है"

रेखा-" अच्छा,लेकिन मुझे अच्छी नहीं लग रही है"

सूरज-'क्यूँ माँ?'

रेखा-"ये नायटी कमरे में पहनने के लिए होती है और में यहाँ तेरे सामने पहनी हूँ,मुझे तो बहुत शर्म आ रही है"

सूरज-"माँ आप गाडी के अंदर हो,और मुझसे कैसी शर्म"

रेखा-" अगर किसी ने तुझे और मुझे इस नायटी में देख लिया तो लोग क्या समझेंगे,एक माँ अपने बेटे के साथ कैसे कपडे पहने हुए बैठी है"

सूरज-'अरे माँ लोगो की चिंता क्यूँ करती हो,लोगो का तो काम ही है गलत सोचना,और वैसे भी गाडी के शीशे काले हैं,बाहर को कोई व्यक्ति आपको कैसे देख सकता है,और देख भी लेगा तो उसे क्या पता आप मेरी माँ हो" रेखा को झटका लगता है यह सुन कर।

रेखा-" मतलब में लगती नहीं हूँ तेरी माँ"

सूरज-" माँ इस नायटी को पहनने के बाद आपकी उम्र 30-35 की ही लग रही है,आप इस उम्र में भी लड़की लग रही हो" रेखा सुन कर शर्मा जाती है,इस दुनिया में एक तारीफ़ ही ऐसी चीज है जो सबको अच्छी लगती है। रेखा आज मन ही मन खुश थी अपनी तारीफ़ सुन कर।

रेखा-" आजकल तू बहुत बड़ी बड़ी बातें करने लग गया है"

सूरज-"माँ अब में बड़ा हो गया हूँ"

रेखा-" अच्छा तो अब तेरी भी जल्दी ही शादी करबानी पड़ेगी मुझे" सूरज शरमा जाता है ।

सूरज-"मेरी शादी नहीं माँ,अभी तो आपकी शादी करबानी है मुझे पापा से" रेखा शर्मा जाती है ।

रेखा-"धत् पागल,मेरी तो पहले से ही शादी हो रखी है तेरे पापा से"

सूरज-"माँ 22 साल से आप पापा से अलग रही हो,अब दुबारा मिलन होगा आपका" रेखा मिलन की बात सुनकर शरमा जाती है,सूरज ऐसे प्रशन करेगा उसे ऐसी उम्मीद नहीं थी ।

रेखा-"दुबारा मिलन? समझी नहीं?"

सूरज-"ओह्ह्ह माँ दोबारा मिलन का मतलब आप पापा से दोबारा मिलोगी, तो आपको कैसा लगेगा" रेखा गलत समझ बैठी थी,उसे लगा मिलन का आशय सम्भोग से है।

रेखा-" में बता नहीं सकती सूरज की मुझे कैसा लगेगा,में खुद उस पल का इंतज़ार कर रही हूँ,जब तेरे पापा मेरे सामने होंगे"

सूरज-" वाह्ह्ह्ह् माँ आप तो बहुत उत्सुक हो पापा से मिलने के लिए,आप चिंता न करे में आपका मिलन करबाउंगा"

रेखा-" हाँ मुझे पता है,तूने तो मेरी शादी और हनीमून तक की सोच रखी है"

सूरज-" माँ सही तो सोचा है"

रेखा-"अब ज्यादा बातें न बना,मुझे दवाई खानी है" रेखा टेबलेट निकाल कर पानी से खा लेती है।

सूरज-"माँ तुमने अभी तक टेबलेट खाई नहीं" सूरज को याद आता है की नर्स ने कहा था टेबलेट खाने के बाद उत्तेजना महसूस होगी,और मसाज भी करनी है। सूरज जैसे ही यह सोचता है उसका लंड पुनः झटके मारने लगता है । इधर रेखा भी गलती से टेबलेट की बोल देती है,उसे शर्म महसूस होती है क्योंकि सूरज को पता है,टेबलेट खाने के बाद मुझे मसाज भी करनी है । लेकिन अब कर भी क्या सकती है,टेबलेट तो वो खा चुकी थी, अब मजबूरन मसाज तो करनी ही पड़ेगी।

रेखा-" हाँ भूल गई थी, अब तू लाइट बंद कर दे,मुझे सोना है" सूरज लाइट बंद कर देता है गाडी में अँधेरा हो जाता है । रेखा पूरी सीट पर लेट जाती है, और टांगो को फोल्ड कर लेती है,क्योंकि रेखा की लंबाई अधिक थी,सीट की कम थी ।

सूरज अपने मन में सोचता है की माँ मसाज करेगी या न करेगी, हो सकता है मेरी बजह से माँ की हिम्मत न पड़े, सूरज बहुत उत्सुक था, इधर रेखा को टेबलेट खाकर नशा सा चढ़ने लगता है,रेखा अपने पैर आपस में रगड़ती है और जांघ सिकोड़ने लगती है, गाडी में अँधेरे का फायदा उठा कर रेखा उंगलियो पर जैल क्रीम निकाल कर नायटी के अंदर हाँथ डालकर चूत के आसपास लगा कर सहलाने लगती है, चूत के आसपास सहलाने से आज रेखा को अलग ही मजा आ रहा था,रेखा की चूत पर हलके हलके बाल उग आए थे,रेखा को बड़ा मजा आ रहा था,रेखा की उत्तेजना बढ़ती जस रही थी,तभी गाडी एक गड्ढे से गुज़रती है,एक हलकी धचकी के कारण रेखा की ऊँगली चूत की क्लिट से रगड़ जाती है,चूत और ऊँगली की रगड़ से रेखा को मजा आ जाता है, आज पहली बार उसे चूत पर ऊँगली रखने से करेंट सा लगा और उत्तेजना हवस बढ़ने लगती है, रेखा चूत में एक ऊँगली डालकर सहलाने लगती है, रेखा चूत में ऊँगली घुसाने का प्रयत्न करती है,ऊँगली थोड़ी ही घुस पाई थी तभी एक तेज धचकी लगती है और एक तेज सिसकी के साथ ऊँगली चूत में प्रवेश हो जाती है,सिसकी इतनी कामुक थी की सूरज के कानो तक आह्ह्ह्ह की आवाज़ पहुंची, सूरज के कान के साथ साथ लंड भी सतर हो जाता है, उसे समझने में देर नहीं लगती है की माँ हस्तमैथुन कर रही हैं। सूरज फ्रंट के शीशे से देखने का प्रयास करने लगता है, लेकिन गाडी में अँधेरा होने के कारण कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। इधर रेखा हवस में भूल जाती है सूरज गाडी चला रहा है,वो अपनी चूत को घिसे जा रही थी, एक ऊँगली चूत में आराम आराम अंदर बाहर हो रही थी।

सूरज कभी सामने देखता तो कभी फ्रंट शीशे में देखने का प्रयास करता और कभी कभी एक हाँथ से लंड को मसल देता, तभी एक गड्डा आता है और तेज धचकी के साथ रेखा की सिसकी की आवाज़ आती है, अब सूरज समझ चूका था माँ दवाई के कारण नशे में है, और उंगलिया चूत में हैं,जब धचकी लगती है तो सिसकी निकल जाती है, अब सूरज जानबूझ कर एक तेज धचकी लगता है इससे रेखा की चूत में उंगली तेजी से रगड़ती है,और सिसकियाँ निकलने लगती हैं, रेखा की उत्तेजना तेजी से बढ़ चुकी थी,अब रेखा स्वयं ही चूत में तेज तेज ऊँगली करने लगती है, उसकी साँसे उखाड़ने लगती हैं,सिसकियाँ तेज हो जाती हैं, रेखा गांड को उठा ऊँगली से रगड़ती है,तभी रेखा का जिस्म ऐंठने लगता है और एक तेज सिसकी के साथ उसकी चूत की बंद नशे खुल जाती हैं,एक तेज पिचकारी के साथ पानी की टंकी खुल जाती है, ऐसा लग रहा था जैसे पानी की बाढ़ सी आ गई हो, रेखा नशे में थी,उसे कोई होश ही नहीं था,वो सुकून से सो जाती है। इधर रेखा की कामुक सिसकियाँ सुन कर सूरज के लंड से भी पानी निकल जाता है ।

सूरज के लंड से बहुत सारा पानी निकला था जिसके कारण उसका कच्छा भीग चूका था, सूरज गीले कच्छे की बजह से बैठने में दिक्कत महसूस करता है, सूरज एक सुनसान जगह पर गाडी रोक कर अँधेरे में अपनी पेंट निकालता है, और उसके बाद कच्छा उतार कर अपने रुमाल से अपने लंड को साफ़ करता है, रेखा चैन की नींद सो रही थी, वर्षो बाद आज ऊँगली करने के बाद सम्भोग जैसा सुख प्राप्त हुआ था रेखा को, गाडी में अँधेरा होने का भरपूर फायदा उठाया था रेखा ने,इधर सूरज भी अँधेरे का फायदा उठा कर अपना गिला कच्छा उतार कर पेंट पहन लेता है और गाडी चलाने लगता है, सूरज का मन कर रहा था एक बार अपनी माँ को देखे,लेकिन एक भय उसके मन में था की कहीं माँ उसे देख न ले, और कही न कहीँ माँ प्रति अच्छी सोच भी रखता था, सूरज का गाडी जरूर चला रहा था लेकिन बार बार उसका ध्यान माँ अपनी माँ पर था,न चाहते हुए भी उसे बार बार याद आता है की माँ कैसे सिसकियाँ लेकर ऊँगली कर रही थी और अंतिम स्खलन के बाद कैसे सिसकारी मारते हुए झडी थी, सूरज ने अपनी आँखों से भले ही न देखा हो लेकिन उसने उन सिसकियों को अच्छे से सुना, तभी सुरज को याद आता है माँ यदि झड़ी है तो उसका पानी जरूर निकला होगा, डाक्टर के कहे अनुसार माँ का स्खलन और पानी निकलना बहुत जरुरी है, लेकिन बेचारा सूरज अपनी माँ की योनि कैसे देखे।

सूरज काफी देर सोचने के बाद निस्चय करता है की वो जरूर देखेगा, सूरज अपनी माँ को आवाज़ लगाता है,

सूरज-"माँ माँ...... माँ"लेकिन रेखा कोई आवाज़ नहीं देती है तो सूरज को यकीन हो जाता है की माँ गहरी नींद में सो रही है। सूरज लाइट जलाने की सोचता है उसे डर भी था की कहीं माँ जग न जाए,सूरज के हाँथ कॉंपने लगते हैं,सूरज कपकपाते हांथो से लाइट जला कर जैसे ही पीछे सीट पर अपनी माँ पर नज़र डालता है तो चोंक जाता है,रेखा की नायटी उसकी कमर पर थी और दोनों जांघें उसे नंगी दिखाई देती हैं, झांघे फोल्ड होने के कारण सूरज अपनी माँ की चूत नहीं देख पाता है, सूरज की धड़कन तेजी से धड़कने लगती है, सूरज डर के कारण लाइट बंद कर देता है, सूरज का ध्यान गाडी चलाने में नहीं था उसे बार बार अपनी माँ की भारी भरकम झांघे याद आने लगती हैं। सूरज अपने मन को काबू में करता है और गाडी तेजी से दौड़ाने लगता है, गाडी चलाते चालते सुबह के 5:30 बज चुके थे, तभी एक धचकी लगने के कारण रेखा की नींद खुलती है, रेखा जैसे ही अपने अधनंगे जिस्म को देखती है तो झटका सा लगता है, रेखा को याद आता है उसने टेबलेट खाने के बाद अपनी योनि में उंगली की थी,और पानी सा निकला था,हालांकि रेखा नशे में थी लेकिन थोडा बहुत उसे ध्यान था । रेखा अपनी नायटी को ठीक करते हुए बैठती है,रेखा की चूत से निकला कामरस सूख चूका था,लेकिन थोडा बहुत गाडी की सीट पर लगा हुआ था, रेखा बेग से अपनी पेंटी निकाल कर सीट साफ़ करती है।

रेखा का जिस्म हल्क़ा सा लगता है, रेखा इस बात से खुश थी की उसकी नशे खुल चुकी है,नसों में जमा पानी निकल गया,अब सेक्स करने में या हस्तमैथुन करने में कोई परेसानी नहीं आएगी, रेखा एक अंगड़ाई लेती है तभी सूरज को पता चल जाता है माँ जग गई है, इधर हलकी हलकी रौशनी भी होने लगी थी ।

सूरज-" माँ आप जग गई"

रेखा-"हाँ सूरज मेरी तो नींद पूरी हो गई"

सूरज-"माँ आज नींद कैसी आई"यह सुन कर रेखा चोंक जाती है। रेखा सोचने लगती है की कहीं सूरज को पता तो नहीं चल गया रात मैने ऊँगली की, या सूरज ने लाइट जला कर मुझे नग्न तो नहीं देख लिया।

रेखा-" बहुत अच्छी नींद आई, सूरज अब मुझे यह साड़ी पहननी है, 10 मिनट के लिए गाडी कहीं रोक दे" सूरज गादी रोक देता है, रेखा साडी उठाती है,लेकिन गाडी में खड़े होने की जगह नहीं थी,

रेखा पहले नायटी उतार कर पेटीकोट और ब्लाउज पहन लेती है ।

रेखा" में गाडी में साडी नहीं पहन पा रही हूँ"

सूरज-" गाडी से बाहर जाकर पहन लो माँ, अभी तो अँधेरा ही है,और रोड भी सुनसान है" रेखा तुरंत बाहर निकल कर साडी पहन लेती है।

चूँकि सुनसान रास्ता था, इस रोड पर लोग कम ही निकलते हैं, रेखा को फ्रेस भी होना था,इसलिए पानी की बोतल लेकर फ्रेस होने एक झांडिओ में चली जाती है, इधर सूरज को बहुत तेज पिसाब लगी थी, सूरज गाडी से निकल कर उसी जगह के सामने पिसाब करने लगता है जहाँ उसकी माँ बैठी थी, सूरज को नहीं पता था यहाँ माँ बैठी है,लेकिन रेखा सूरज को आते देख लेती है और घबरा जाती है,तभी सूरज अपनी पेंट की ज़िप खोल कर अपना मूसल बाहर निकालता है,पिसाब तेज आने की बजह से उसका लंड तना हुआ था, रेखा सूरज का लंड देख कर हैरान रह जाती है,इतना बड़ा लंड आज से पहले उसने नहीं देखा था, गोरा चिट्टा लाल सुपाडा लंड देख कर रेखा की धड़कन तेज हो गई,चूँकि 22 साल बाद आज उसने लंड देखा था वो भी अपने बेटे का, सूरज पिसाब करने लगता है,और रेखा सूरज को मूतते हुए देख रही थी, सूरज जब पिसाब कर लेता है तो उसका लंड झटके मार कर रही बची बुँदे त्यागता है, रेखा को बड़ी शर्म आती है और अपनी नज़रे घुमा लेती है, सूरज पिसाब करने के बाद,पास में लगे नल से हाँथ धोकर गाडी में बैठकर रेखा का इंतज़ार करने लगता है, इधर रेखा भी फ्रेस होकर नल पर मुह हाँथ धोकर आती है और गाडी में बैठ जाती है।

रेखा-"सूरज अभी कितना समय लगेगा गाँव पहुँचने में" रेखा अपने बेग से टोबेल निकाल कर मुह साफ़ करते हुए बोली।

सूरज-"बस एक घंटे में हम गाँव पहुँच जाएंगे"

रेखा अपने बेग से क्रीम लिपस्टिक निकाल कर लगाती है, और तैयार होकर बैठ जाती है।

गाँव के मोड़ पर आते ही सूरज बोलता है।

सूरज-"माँ घर की चाबी लाइ हो न"

रेखा-"हाँ सूरज चाबी लाइ हूँ, सीधे घर चलते हैं पहले" सूरज का घर रोड पर ही था, सूरज अपनी गाडी घर के बाहर खड़ी कर देता है, रेखा घर का दरबाजा खोलती है, और दोनों लोग अपने घर में प्रवेश करता है, सूरज और रेखा दोनों की यादें ताज़ी हो जाती हैं, अपने घर में आकर एक सुकून सा मिलता है, रेखा आँगन में देखती है,तभी उसे कुल्हाड़ी दिखाई देती है जिससे सूरज और रेखा लकड़ी काटने जाते थे,और उसी कुल्हाड़ी से चौधरी के आदमी हरिया के दो टुकड़े किए थे सूरज ने, उस कुल्हाड़ी पर अभी तक लाल खून लगा हुआ था जो सूख चूका था। सूरज और रेखा उस कुल्हाडी को देखते हैं।

सूरज-"क्या हुआ माँ,लकड़ी काटने चले क्या" सूरज मजाक के लहजे में बोला।

रेखा-" हाँ चलेंगे,लेकिन लकड़ी काटने नहीं,घूमने चलेंगे"

सूरज-"ठीक है माँ" रेखा कमरे का ताला खोल कर साफ़ सफाई करती है, सूरज चारपाई बिछा कर लेट जाता है,रात भर जागने के कारण सो जाता है, इधर रेखा साफ़ सफाई में जुटी हुई थी ।

इधर गाँव में जब सूरज और रेखा गाडी से उतरते हैं,तो गाँव का एक आदमी देख लेता है, वो आदमी सीधे चौधरी के घर जाकर बोलता है।

आदमी-" चौधरी साहब चौधरी साहब मैंने अभी सूरज को देखा है,उसके साथ कोई महारानी भी है साथ में" चौधरी यह सुन कर आग बबूला होते हुए उठता है।

चौधरी-"धनुआ,रमुआ,पपुआ सब आओ रे,जल्दी चलो,हरिया का कातिल सूरज आ गया है, बहुत दिनों से उसी की तलाश थी हमें,आज आया है ससुरा,काट के रख देंगे" चौधरी अपने पालतू आदमियो को आवाज़ मारता है और अपनी रायफल उठाकर अपने आदमियों के साथ चल देता है गाँव की तरफ। चौधरी को आग बबूला देख कर सभी गाँव बाले पुछते हैं क्या बात है?

चौधरी-"सुना है वो हरिया का कातिल सूरज गाँव में वापीस आ गया है,आज उससे बदला लेना है" पुरे गाँव में आग की तरह यह खबर पहुँच जाती है की सूरज वापिस गाँव में आ गया है। गाँव के सभी लोग एकत्रित होकर चौधरी के साथ सूरज के घर पहुंचते हैं, जैसे ही बाहर शोर की आवाज़ रेखा के कानो में पहुँचती है तो रेखा घबरा कर सूरज को जगाती है।

बाहर दरबाजे पर चौधरी लात मारता है तो दरबाजा बहुत तेज से आवाज़ करता है, सूरज घबरा कर उठता है और सीधे कुल्हाड़ी पकड़ता है।

सूरज कुल्हाड़ी लेकर दरबाजे की और भागता है।

जैसे ही दरबाजा खोल कर बाहर खड़े लोगों की भीड़ देखता है और साथ में चौधरी को तो समझ जाता है ये चौधरी की करतूत है, सूरज दहाड़ते हुए बोलता है ।

सूरज-"किसने दरबाजा पर इतनी तेज दस्तक दी? सूरज दहाड़ता हुआ बोला,गाँव के लोग सूरज को इतने अच्छे कपड़ो में देख कर चोंक जाते हैं, तभी चौधरी बोलता है ।

चौधरी-"देखो कैसे सीना ताने खड़ा है ये गाँव बालो,हरिया का कातिल है ये,अब इसकी लाश जाएगी यहाँ से" चौधरी के आदमी जैसे हो सूरज को पकड़ने आते हैं,सूरज कुल्हाड़ी लेकर तान देता है।

सूरज-'जिसको अपनी मौत से प्यार नहीं है वो मुझे मारने आ सकता है,भूल गए हरिया के दो टुकड़े,अबकी बार चार टुकड़े करूँगा,आओ आगे" हरिया के आदमी डर जाते हैं, तभी रेखा भागती हुई सूरज के पास आती है, रेखा को अच्छी साडी और गहनो में देख कर गाँव की सभी औरते और पुरुष चोंक जाते हैं,

रेखा-"सूरज रुक जा,किसी का खून मत बहा,चौधरी को क्या समस्या है,में बात करती हूँ इससे" रेखा गुस्से से चौधरी की और देखती है,तभी गाँव के सरपंच लोग आगे आते हैं।

सरपंच-"रेखा तुम्हारे पति ने चौधरी से 80हजार का कर्जा लिया था,तुमने मूल चूका दिया लेकिन उसकी ब्याज नहीं दी,और सूरज ने हरिया को जान से मार दिया,तुम दोनों चौधरी के दोषी हो" सरपंच की आवाज़ के साथ सब बोलने लगते हैं ।

रेखा-"मेरे पति ने चौधरी से मात्र 10हजार का कर्जा लिया था,और उन्होंने वो कर्जा चूका दिया,ये चौधरी अब तक झूठ बोल कर हमसे पैसे ऐंठता रहा"

चौधरी सच्चाई सुन कर हैरान रह जाता है ।

चौधरी-"क्या सबूत है इसके पास", सरपंच भी सबूत मांगते हैं ।

रेखा-"सबूत है मेरे पास,मेरे पति जिन्दा हैं,उन्हें कई बार मारने की कोसिस की चौधरी ने,और मेरा घर भी इसी ने बिगाड़ा है" सूरज अपने पिता को वीडियो कोल करता है, बीपी सिंह को देख कर चौधरी और गाँव बाले देख कर हैरान रह जाते हैं।

बीपी सिंह सारी सच्चाई बता देता है,चौधरी की पोल खुल चुकी थी,

सरपंच-'सूरज तुमने हरिया को क्यूँ मारा" रेखा बीच में बोल पड़ती है।

रेखा-" सरपंच जी हरिया को इस लिए मारा क्यूंकि उसने मेरे साथ और मेरी बेटियो के साथ बत्तमीजी की,पूरा गाँव जानता है हरिया कैसा आदमी था, गाँव की हर औरत को बुरी नज़र से देखता था,ऐसे आदमी को मार कर मेरे बेटे ने पुरे गाँव पर अहसान किया है' गाँव के सभी लोग इस बात से सहमत हो जाते हैं,चौधरी भागने लगता है खुद की पोल खुलने के कारण लेकिन सूरज उसे पकड़ लेता है ।

सूरज-"सरपंच जी अब गलती इस चौधरी की निकली है तो अब इसे आप कौनसी सजा दोगे, या आप भी चौधरी के टुकड़ो पर भोकने आए हो", सरपंच शर्मिंदा होते हुए सूरज से माफ़ी मांगता है,और पूरा गाँव भी सूरज के पक्ष में खड़ा हो जाता है ।

सरपंच-'इस चौधरी ने पुरे गाँव को ब्याज पर कर्जा देकर दुगने पैसे बसूले हैं,इसने पुरे गाँव का जीना हराम कर दिया है,इसे भी सजा सूरज ही देगा,सूरज तुम इसे कोई भी सजा दो,पूरा गाँव आपके साथ है"

सूरज चौधरी के गाल पर तमाचा मारता है,और कुल्हाड़ी उठा कर सूरज पर तान देता है तभी चौधरी की बेटी और पत्नी भागती हुई सूरज के पैरो में गिर जाते हैं। चौधरी की बेटी जैसे ही सूरज को देखती है तो हैरान रह जाती है, सूरज भी हैरान रह जाता है,

चौधरी की बेटी-" सूर्या जी आप?

सूरज को अपनी आँखों पर विस्वास नहीं हो रहा था,सूरज के हाँथ से कुल्हाड़ी गिर जाती है।

सूरज-"गीता तुम?" चौधरी की बेटी गीता जो शहर में MBA की पढाई करने के बाद सूर्या की कंपनी में नोकरी कर रही थी,गीता चौधरी की बेटी है यह बात वो नही जानता था,और गीता भी बचपन से होस्टल में रह कर शहर में पढ़ी लिखी है ।चौधरी और गाँव के सभी लोग हैरान रह जाते हैं की सूरज और गीता एक दूसरे को जानते हैं।

गीता-"ये चौधरी मेरे पिता हैं, इन्हें माफ़ कर दो" गीता हाँथ जोड़ कर बोली,सूरज का दिल पसीज जाता हैं,चूकीं गीता ने उसकी बहुत मदद की जब तान्या का एक्सिडेंट हुआ और कंपनी को आगे बढ़ाने में गीता ने सूरज के साथ दिन रात मेहनत की।

चौधरी-"तुम सूरज को कैसे जानती हो गीता"

गीता-"ये सूर्या इंडस्ट्रीज के मालिक हैं,में इनकी ही कंपनी में नोकरी करती हूँ" चौधरी और पूरा गाँव यह सुन कर हैरान रह जाते हैं।

चौधरी-"बेटा मुझे माफ़ कर दे,आज के बाद में कोई गलत काम नहीं करूँगा"

रेखा-"बेटा माफ़ कर दे इसे" सूरज चौधरी को छोड़ देता है, चौधरी का घमंड टूट चूका था।

सरपंच-"बेटा गाँव में अशिक्षा के कारण लोग मुर्ख बनते आए हैं, लेकिन तुमने चौधरी जैसे व्यक्ति का चेहरा उजाकर कर दिया,हम सब तुम्हारे बहुत आभारी हैं"

सूरज-"आज के बाद इस गाँव में कोई अशिक्षित नहीं रहेगा,में इस गांव में एक स्कूल बनबाऊंगा"

गाँव के लोग बहुत खुश होते हैं।

गाँव का एक व्यक्ति-" बेटा हम लोगों के पास पैसे नहीं हैं तो अपने बच्चे को पढ़ाएंगे कैसे"

सूरज-" में इस गाँव में कंपनी की शाखा खोलूंगा,सबको रोजगार दूंगा" गाँव के सभी लोग खुश हो जाते हैं,गाँव के सभी लोग सूरज और रेखा की आवभगत करते हैं, गाँव केलोग सूरज और रेखा को अपने घर खाना भी खिलाते हैं। सुबह से शाम तक सूरज और रेखा गाँव के सभी लोगो से मिलते हैं, सूरज और रेखा थक चुके थे,इसलिए दोनों लोग घर पर आ जाते हैं, सूरज और रेखा के साथ गीता भी थी, गीता सूरज को अकेले में बुला कर पूछती है।

गीता-"सूर्या जी मुझे अभी तक यह समझ नहीं आ रहा है की आप तो सूर्या हैं,फिर आपको सूरज कह कर क्यूँ बुला रहें हैं,और आपकी माँ तो संध्या हैं" सूरज गीता को पूरी कहानी सुनाता है की उसके पिता ने दो शादी की हैं,दोनों उसकी माँ है ।

काफी समय बाद गीता अपने घर चली जाती है,अब सूरज और रेखा घर में बैठे हुए थे।

रेखा-" सूरज आज में बहुत खुश हूँ,जिस गाँव के लोग मेरी गरीबी का मजाक उड़ाया करते थे,आज बही लोग मेरी सेवा कर रहे थे"

सूरज-" हाँ माँ,इस देश में गरीब होना अभिशाप जैसा है,जब हम गरीब थे तब ऐसा लगता है हमारा हमदर्द कोई नहीं है इस गाँव में,आज पूरा गाँव हमें अपना सा लगता है"

रेखा-"बेटा तूने बहुत अच्छा सोचा है इस गाँव में स्कूल खुल जाएगा तो इस गाँव की तरक्की हो जाएगी,और कंपनी खुलने के बाद इस गाँव के गरीबो को रोजगार मिल जाएगा" काफी देर बात चीत के बाद रेखा गाँव के उसी जंगल में घुमने के लिए सूरज को बोलती है, सूरज और रेखा अपनी गाड़ी से घूमने निकल जाते हैं जहाँ वो दोनों कभी अपनी आजीविका चलाने के लिए लकड़ी काटने जाया करते थे ।

 
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