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जीवन एक संघर्ष है complete

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आप को और आपके परिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी व स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए...
 
सूरज और रेखा जंगल के उसी स्थान पर जाते हैं जहाँ उन दोनों ने लकड़ी काटी थी, सूरज अपनी गाडी खड़ी करके जंगल में घूमने लगते हैं, घूमते घूमते दोनों लोग काफी काफी आगे तक निकल जाते हैं, मौसम भी सुहावना था,बारिश जैसा मौसम बना हुआ था, रेखा बहुत खुश थी इस खुली आज़ादी में घूम कर,सूरज भी खुश था रेखा को देख कर, दोनों माँ बेटे पिछली यादों में इतने खो जाते हैं की रात हो जाती है ।

रेखा-" सूरज ऐसा लगता है जैसे दुनिया की सारी ख़ुशी मुझे मिल गई हो, ये सारी खुशियाँ सिर्फ तेरे कारण हैं" रेखा सूरज को गले लगा लेती है,सूरज भी रेखा को कस कर गले लगता है, आज सूरज को एक अलग ही अहसास होता है,रेखा के बदन की खुशबु सूरज को बड़ी अच्छी लग रही थी, सूरज भी कस कर गले लगाकर रेखा के गालो पर किस्स करने बाला होता है,रेखा भी सूरज के गाल पर किस्स करने के लिए अपना सर घूमाती है,दोनों लोग एक साथ किस्स करने के कारण दोनों के लिप्स एक दूसरे के लिप्स से टकरा जाते हैं, दोनों के जिस्म में करेंट सा दौड़ जाता है, दोनों के होंठ एक दूसरे के होंठ से रगड़ जाते हैं, सूरज और रेखा दोनों को ही अच्छा लगता है,लेकिन शर्म के कारण दोनों लोग एक दूसरे से अलग हो जाते हैं।

सूरज-"सॉरी माँ, गलती से हो गया"

रेखा-" क्या"

सूरज-'आपके होंठो पर किस्स"

रेखा-"कोई बात नहीं तू मेरा बेटा, तू तो मुझे किस्स कर सकता है,मुझे अच्छा महसूस हुआ"

सूरज-" माँ पहले कभी किया है लिप्स किस्स"रेखा शर्मा जाती है यह सुन कर।

रेखा-" नहीं कभी नहीं" सूरज यह सुनकर हैरान रह जाता है।

सूरज-"मतलब पापा रोमांटिक नहीं थे" सूरज हसते हुए बोला, रेखा इस बात से शर्मा जाती है,

रेखा-"हमारे समय में यह सब नहीं चलता था,आज कल फिल्में देख कर लोग यह सब सीख गए हैं"

सूरज-" हाँ माँ,लेकिन अब तो सुरुआत लिप्स किस्स से ही होती है"अचानक सूरज के मुह से निकल जाता है,रेखा यह सुन कर हैरान रह जाती है,सूरज का मतलब था सेक्स करने से पहले सुरुआत लिप्स किस्स से ही होती है । सूरज भी अपनी कही बात पर शर्मा जाता है ।

रेखा-"कैसी सुरुआत सूरज,समझी नहीं"रेखा जानबूझ कर अनभिज्ञ बनने का नाटक करती हुई बोली,लेकिन सूरज शर्मिंदगी महसूस करता है,क्या बताए अपनी माँ को ।

सूरज-"प्यार की सुरुआत माँ,फिल्मो में ऐसा दिखाया जाता है"सूरज बात घुमा देता है। तभी तेज बारिश होने लगती है

रेखा-" ओह्ह्ह प्यार,अच्छा अब जल्दी चल बहुत देर हो गई है, अँधेरा हो गया,और अब ये बारिश भी होने लगी है" सूरज और रेखा गाडी की तरफ चल देते हैं, वियावान जंगल में अँधेरा हो चूका था, धीरे धीरे बारिश भी बहुत तेज हो गई थी,रेखा की साडी भीग चुकी थी,और बदन पर चुपक गई थी, रेखा सूरज का हाँथ पकड़ कर चल रही थी, तभी तेज बिजली कड़की रेखा डर जाती है, रेखा सूरज का हाँथ कस कर दबा देती है,

सूरज-'माँ देखो न बारिश में कितना मजा आ रहा है"

रेखा-" हाँ बारिश में मजा तो बहुत आ रहा है लेकिन मुझे बिजली के कड़कने से डर लगता है"

सूरज-"अरे माँ डर क्यूँ रही हो,में हूँ न तुम्हारे साथ" रेखा-"तुझे बारिश में मजा आ रहा है,सारे कपडे भीग गए,अब शहर कैसे जाएंगे,और तू तो कपडे भी नहीं लाया है"

सूरज-'माँ आप तो नायटी पहन कर चली जाओगी,लेकिन मुझे परेसानी है,कोई बात नहीं कोई जुगाड़ कर लूंगा" सूरज मोबाइल की टोर्च जला कर चल रहा था, गाडी के नजदीक आ जाते हैं,रेखा को बहुत तेज पिसाब लगी थी,रोक पाना मुश्किल हो गया था।

रेखा-" सूरज मुझे बहुत तेज पिसाब लगी है" यह सुनकर सूरज के बदन में उत्तेजना महसूस होती है।

सूरज-"में चला जाता हूँ,आप यहीं कर लो"

रेखा-"नहीं सूरज मुझे डर सा लग रहा है,तू यहीं रह" यह सुन कर सूरज को झटका लगता है।

सूरज-"ठीक है माँ कर लो"

रेखा-"अरे मोबाइल की टोर्च तो बंद कर,और पीछे घूम जा" सूरज मोबाइल की टोर्च बंद करके पीछे घूम जाता है,रेखा तुरंत बैठ जाती है और एक तेज सिटी की आवाज़ के साथ मूतने लगती है, सिटी की आवाज़ तेज थी,ऐसा लग रहा था इस वियावान जंगल में किसी ने बांसुरी बजा कर रागिनी छेड़ दी हो,बड़ी ही सुरीली आवाज़ थी,सूरज का लंड भी झटके मारने लगा था ।रेखा को भी शर्म आ रही थी,रेखा को तेज पिसाब आने के कारण रुक रुक कर पिसाब निकलती है और बार सिटी बजती है।

सूरज के मन में आता है,माँ से मजाक किया जाए।

सूरज-"माँ जल्दी चलो,ऐसा लग रहा है जंगल में कोई है" रेखा यह सुन कर घबरा जाती है।

रेखा-"तुझे कैसे पता सूरज,कोई है"

सूरज-"माँ आपने आवाज़ नहीं सुनी,कोई सिटी बजा रहा है"रेखा यह सुनकर शर्मा जाती है ।

रेखा-"ओह्ह सूरज कोई नहीं है,यह तो मेरे पिसाब की आवाज़ है पागल" रेखा हसते हुए बोली,और बोलने के बाद शर्मा जाती है, पहले से रेखा सूरज के साथ खुल चुकी थी ।

सूरज-"ओह्ह माँ इतनी तेज सिटी की आवाज़,ऐसा लगा जैसे किसी ने बांसुरी बजाई हो,में तो चोंक गया था,भला इतनी रात में कौन है जो सुरीली आवाज़ में सिटी मार रहा है", सूरज की बात पर रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-"तू बहुत बिगड़ गया है,तेरी बातें सुन कर मुझे बहुत शर्म आती है सूरज"

सूरज-"अरे माँ सच बोल रहा हूँ" बारिश तेज होने लगती है ।

रेखा-"अब देर हो रही है चलो" सूरज और रेखा दोनों आगे बाली सीट पर बैठ जाते हैं,सूरज गाडी स्टार्ट करता है और लाइट जला देता है, रेखा अभी भी सूरज की कही गई बातों को सोच कर मन ही मन हस रही थी। लाइट जलते ही रेखा सूरज की ओर देखती है तो हँसने लगती है,सूरज को समझ नहीं आ रहा था माँ क्यूँ हस रही है।

सूरज-" माँ क्यूँ हँस रही हो, क्या हुआ"

रेखा-" तेरे होंठो पर मेरी लिपस्टिक लग गई है" रेखा हसते हुए बोली, सूरज फ्रंट शीशे से देखता है,उसके होंठ पर लाल लिपस्टिक लगी हुई थी।

सूरज-" ओह्ह माँ यह किस्स करते समय लग गई"

रेखा-"साफ़ कर ले,किसी ने तुझे देखा तो पता नहीं क्या सोचेंगे",

सूरज-"क्या सोचेंगें माँ?" रेखा शरमाती हुई बोली।

रेखा-" लोग सोचेंगे,किसी के साथ इसका चक्कर चल रहा है"

सूरज-" किसी के साथ क्यूँ लोग तो आपके साथ सोचेंगे"

रेखा-"लेकिन में तो तेरी माँ हूँ"

सूरज-"लोगों को क्या पता की आप मेरी माँ हो,सब तो यही सोचेंगे की आपके साथ ही मेरा चक्कर चल रहा है"

रेखा-"पागल ही होगा जो ऐसा सोचेगा,में अधेड़ उम्र की हूँ और तू जवान है"

सूरज-"माँ आप अधेड़ लगती कहाँ हो,ऐसा लगता है जैसे आप फिर से जवान हो गई हो" रेखा शर्मा जाती है खुद की तारीफ़ सुन कर।

रेखा-" ओह्हो मतलब में अभी जवान लगती हूँ तुझे,चल अब ज्यादा तारीफ़ मत कर और ये लिपस्टिक का दाग साफ़ कर ले" रेखा के इतना बोलते ही सूरज फ्रंट शीशे में देख कर अपनी जीव्ह से होंठो पर लगी लिपस्टिक चाट कर साफ़ कर देता है, यह देख कर रेखा के जिस्म में गुदगुदी होने लगती है । आज पहली बार रेखा को अपनी चूत से रिश्ता हुआ पानी महसूस होता है।

रेखा-'यह क्या किया तूने सूरज"

सूरज-"माँ बहुत टेस्टी है आपके होंठो की लिपस्टिक"

रेखा-"तू पागल है सूरज,अब जल्दी चल न,मेरे कपडे भीग चुके हैं,घर चल कर उतारना भी है"

सूरज गाडी दौडा देता है,कुछ ही समय में सूरज और रेखा घर आ जाते हैं,लेकिन बारिश अभी रुकी नहीं थी, बहुत तेजी से पानी बरस रहा था।

रेखा-"ओह्हो ये बारिश भी आज होनी थी"रेखा दरबाजा खोल कर घर में प्रवेश करती है।

सूरज-" माँ कितना तो अच्छा मौसम हो गया है,आज गर्मी भी तो बहुत थी, मेरा तो मन कर रहा है नहा लू बारिस में"सूरज अंदर आकर दरबाजा बंद कर देता है,मोबाइल और पर्स बरामडा में बिछी चारपाई पर रख कर बारिश में भीगने लगता है। मन तो रेखा का भी कर रहा था नहा ले।

रेखा-" बारिश में भीगना तो मुझे भी अच्छा लगता है लेकिन साडी में नहीं,ये बनारसी साडी का बजन बहुत होता है,भीग कर और ज्यादा हो जाता है" रेखा बरामडा में खड़ी थी ।

सूरज-" साडी उतार कर नहा लो माँ,आज बैसे भी हमने नहाया नहीं है"

रेखा-" मुझे शर्म आती है सूरज,तू ही नहा ले"

सूरज-"अरे माँ ब्लाउज और पेटीकोट में कैसी शर्म,और अँधेरा भी है,मुझसे कैसी शर्म माँ" रेखा गहने साडी उतार कर चारपाई पर रख देती है। साडी उतारते ही रेखा का बदन हल्का हो गया था,अब तक ऐसा लग रहा था जैसे किसी कैद में हो, भीगने के कारण

रेखा का पेटीकोट गांड से चुपक गया था, रेखा आँगन में खड़ी होकर बारिश के तेज पानी में नहाने लगती है,बारिश की बुँदे रेखा के ब्लाउज के अंदर पड़ती तो ऐसा लगता जैसे किसी ने उसके बूब्स को टच किया हो, रेखा के जिस्म में गुदगुदी दी हो रही थी, सूरज रेखा को अँधेरे में महसूस कर पा रहा था,

रेखा-"सूरज तू कपडे क्यूँ पहना है उतार दे न"

सूरज-'माँ में सिर्फ शर्ट उतार देता हूँ, पेंट नहीं",सूरज शर्ट उतार देता है,पेंट नहीं उतारता है क्यूंकि अंदर कच्छा नहीं पहना था।

रेखा-"पेंट भी उतार दे,तू तो कच्छा पहन कर नहा सकता है"

सूरज-'माँ में आज कच्छा पहनना भूल गया था" रेखा यह सुनकर चोंक जाती है,

रेखा-"ओह्हो तू तो भुलक्कड़ है,चल कोई बात नहीं,वैसे अगर तू चाहे तो पेंट उतार कर नहा सकता है,अँधेरे में वैसे भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा है"

रेखा खुद अँधेरे का फायदा उठाकर,अपनी जांघे साफ़ कर रही थी पेटीकोट उठाकर,

सूरज-"ठीक है माँ"सूरज अपनी पेंट भी उतार देता है,सूरज का लंड खड़ा था,रेखा को बड़ा अजीव सा लग रहा था,उसका बेटा नग्न हो चूका था, रेखा अँधेरे में सूरज को देखने का प्रयास कर रही थी लेकिन देख नहीं पा रही थी,आज सूरज को उसने मूतते हुए उसका लंड देखा था,तब से उसे एक अलग ही नशा सा था, रेखा आज सूरज की ओर आकर्षित होती जा रही थी,आज उसकी चूत में अजीब सी खुजली मच रही थी, रेखा अपना पेटीकोट उठाकर चूत पर ऊँगली फिराती है,रेखा की चूत गीली थी, रेखा बारिश के पानी से अपनी चूत साफ़ करने लगती है,रेखा समझ नहीं पा रही थी,बेटे की बजह से चूत गीली क्यूँ हो रही है।

सूरज और रेखा मूसलाधार बारिश का मजा ले रहे थे,तभी बिजली कड़कती है और रौशनी हो जाती है।

रेखा अपना पेटीकोट ऊपर किए हुए थी,सूरज की नज़र रेखा की भारी भरकम गांड पर पड़ती है, बाहर निकली हुई गदराई गांड को देख कर सूरज के जिस्म में उत्तेजना बढ़ जाती है,पहली बार सूरज का मन अपनी माँ पर फ़िदा हो जाता है,इधर बिजली कड़कने से रेखा मुड़ जाती है,रेखा की नज़र सीधे सूरज के खड़े लंड पर पड़ती है। रेखा अपना पेटीकोट छोड़ कर सूरज के खूंखार खड़े लंड को तब तक देखती है जब तक बिजली कड़कती है, सूरज तुरंत अपने लंड पर हाँथ रख कर छुपा लेता है, बिजली कड़कना बंद हो जाती है और पुनः आँगन में अँधेरा हो जाता है ।

 
रेखा और सूरज शर्मसार महसूस कर रहे थे, दोनों लोग खामोशी से अपनी सोच में डूबे हुए थे, रेखा आज अपने पति को बहुत मिस्स कर रही थी,यदि आज होते तो वह वीना चुदाई के रह न पाती, सूरज भी सोचता है यदि वह आज घर होता तो पूनम या तनु दीदी को चोद देता।

रेखा-" नहा लिया या और नहाएगा?" अचानक रेखा ख़ामोशी तोड़ते हुए सामान्य व्यवहार करते हुए बोली,जैसे कुछ हुआ ही न हो।

सूरज-"हाँ माँ,अब चलो" रेखा बरामडा में आकर खड़ी हो जाती है।

रेखा-" सूरज मेरी नायटी तो गाडी में रखी है,अब बारिश में कैसे लाऊँ,यहाँ लेकर आई तो भीग जाएगी"

सूरज-"माँ भीगे कपडे यहीं उतार दो,गाडी में जाकर नायटी पहन कर बैठना में थोड़ी देर में आ जाऊँगा"

रेखा-"में नंगी जाऊं क्या"अचानक रेखा बोलती है।

सूरज-"ब्रा और पेंटी तो पहनी होगी आपने"आज पहली बार सूरज अपनी माँ के वस्त्रो के नाम लेता है,जिसे सुन कर रेखा की चूत गीली हो जाती है।

रेखा-"नहीं सिर्फ ब्रा पहनी हूँ"

सूरज-"ओह्ह्ह मतलब आप भी अपनी कच्छी पहना भूल गई,आप भी भुलक्कड़ हो माँ" रेखा के तनबदन में उत्तेजना बढ़ने लगती है।

रेखा-" मुझे बार बार पिसाब आती है,इसलिए नहीं पहनी"रेखा झूठ बोलती हूँ,रात में ऊँगली करते समय उतारी थी,यह बात सूरज जानता है।

सूरज-"बार बार पिसाब क्यूँ आती है माँ,कोई परेसानी तो नहीं है,डॉक्टर ने जो टेबलेट दी है कहीं उसकी बजह से तो नहीं आती है बार बार पिसाब",सूरज अँधेरे में अपना लंड सहलाने लगता है ।

रेखा-"पता नहीं सूरज"

सूरज-" अच्छा ठीक है माँ,आप कपडे उतार कर जाओ,भीगे कपडे पहन कर गाडी में जाओगी तो सीट भी भीग जाएगी" रेखा अपना पेटीकोट और ब्लाउज ब्रा उतार देती है,सभी गीले कपडे चारपाई पर रख कर जाने लगती है।

रेखा-"सूरज में जा रही हूँ गाडी में"

सूरज-"कपडे तो उतार दो"

रेखा-"कपडे तो मैंने उतार दिए" यह सुन कर सूरज का लंड झटका मारता है,इस समय दोनों माँ बेटे बिल्कुल नग्न थे ।

सूरज-"ठीक है माँ आप जाओ,में भी कोई पुराना कपडा ढूंढ कर पहन लूंगा" रेखा जाने लगती है,अभी भी तेज बारिश हो रही थी, रेखा बीच आँगन में ही पहुँच पाई थी,तभी बिजली तेजी से कड़की पुरे आँगन में रौशनी ही रौशनी हो जाती है,सूरज की नज़र रेखा की गांड और पुरे बदन पर पड़ी,रेखा लम्बी थी,उसका कमर पतली और गांड मोटी थी।

बिजली कड़कने से रेखा डर जाती है और वापिस भागती है,सूरज रेखा को वापिस आते हुए देखता है,रेखा की चूचियाँ हिलती है,गोरे बदन पर उसकी हलकी काली चूत दिखाई दे जाती है, रेखा जैसे ही आँगन की तरफ आती है बिजली कड़कना बंद हो जाती है,एक दम अँधेरा हो जाता है,रेखा बिजली के कड़कने से बहुत डर गई थी,रेखा बारामदे में आकर सूरज से लिपट जाती है, तेजी से दोनों के जिस्म टकराने से रेखा की चूचियाँ सूरज की छाती से मसल जाती है,सूरज का खड़ा लंड रेखा की चूत में घुस जाता है, रेखा की चुत को फाड़ते हुए लंड रेखा की बच्चेदानी तक चला जाता है,लंड चूत में ऐसे घुसा जैसे किसी ने चाक़ू पेट में घोंपा हो,रेखा की चीख निकल जाती है।

रेखा-"आःह्ह्ह्हूफ्फ्फोह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् स स सुरआज्ज्ज्" रेखा की 22 साल से अनचुदी चूत खुल चुकी थी,सूरज का लंड चूत से रगड़ते हुए अंदर घुसा जिससे रेखा को मजा और दर्द साथ साथ हुआ । रेखा सूरज के नंगे शारीर पर ऐसे चुपकी थी उसमे हवा भी पास न हो, सूरज रेखा की गांड पर हाँथ रख कर मसल देता है।

रेखा-"सूरज निकाल इसे,मुझे दर्द हो रहा है"सूरज चरम स्खलन पर तो बहुत पहले से ही था,जैसे ही लंड चूत से खिसका कर निकालता है,लंड से एक तेज धार के साथ सूरज चूत में झड़ जाता है,झड़ते समय सूरज रेखा को कस कर पुन गले लगा लेता है,जैसे ही सूरज जा पानी रेखा अपनी चूत में महसूस करती है,रेखा सूरज को हटा देती है।

सूरज-"सॉरी माँ" रेखा जानती थी इसमें सूरज की गलती नहीं है,वो खुद बिजली कड़कने के डर से सूरज से आ लिपटी और उसका खड़ा लंड चूत में घुस गया। ये सब अँधेरे का दोष है।

रेखा-"सूरज ये जो भी हुआ इसमें किसी की गलती नहीं है,लेकिन अब में क्या करू?"

सूरज-"समझा नहीं माँ"

रेखा-"तेरा पानी अंदर चला गया,अगर में तेरे बच्चे की माँ बन गई तो क्या होगा???????

रेखा-"ये बहुत गलत हुआ सूरज,ऐसा नहीं होना था,मुझे डर है में कहीं प्रेग्नेंट न हो जाऊं,अगर ऐसा हो गया तो में कहीं मुह दिखाने के लायक नहीं रह पाउंगी" रेखा की आँख में आंसू थे।

सूरज-"माँ आप परेसान न हो,में मेडिकल से कुछ दवाइयाँ ले आऊंगा"

रेखा-" अब जल्दी चल,मुझे दर्द हो रहा है"रेखा गाडी में जाकर नायटी पहनती है । सूरज भी अपने भीगे कपडे पहन कर गाडी दौड़ा देता है,रेखा गुमसुम सी पिछली सीट पर लेट जाती है।

रेखा को आज बहुत ग्लानी महसूस हो रही थी,जाने अनजाने में ही अपने बेटा का लंड अपनी योनी में घुसबा चुकी थी, हालांकि रेखा और सूरज दोनों लोग एक दूसरे से खुल जरूर चुके थे लेकिन सम्भोग के बारे में किसी ने नहीं सोचा, रेखा की योनी से सूरज का वीर्य रिस कर बाहर निकल रहा था,और योनी में जलन हो रही थी,रेखा को डर था कहीं गर्भाती न हो जाए, रेखा गंदे कपडे से अपनी योनी साफ़ करती है,रेखा को दर्द होने के कारण नींद नहीं आ रही थी।

इस प्रकार सुबह दोनों लोग शहर पहुँच जाते हैं।

सूरज-"माँ सीधे फ़ार्म हॉउस चले"

रेखा-"नहीं पहले हॉस्पिटल चल,मुझे दर्द हो रहा है", सूरज सीधे हॉस्पिटल जाता है,हॉस्पिटल पहुँचते ही रेखा डॉक्टर की केबिन में जाती है,सूरज बाहर गाडी में ही बैठा था,

रेखा-"डॉक्टर मेरी योनी में बहुत दर्द और जलन हो रही है"

डॉक्टर-"क्या हुआ"

रेखा-"सेक्स करने के कारण"डॉक्टर बेड पर रेखा को लेटने के लिए बोलती है,रेखा लेट जाती है,डॉक्टर रेखा की योनी को देखती है तो हैरान रह जाती है,योनी के आसपास खून लगा हुआ था,और योनी के अंदर लण्ड के रागडने के कारण पूरी योनी छील चुकी थी,पूरी योनी लाल थी।

रेखा-" ओह्ह्ह आपकी योनी तो बुरी तरह से घायल हो चुकी है,ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने मोटा डंडा डाला हो,क्या बाकई में आपकी योनी में लंड घुसा है?"रेखा को बहुत शर्म आती है,डॉक्टर कॉटन से योनी की सफाई करती हुए बोली।

रेखा-"हाँ डॉक्टर,22 साल बाद इसमें घुसा है"

डॉक्टर-" वैसे आप बहुत भाग्यशाली भी हो,आपके पति का बहुत बड़ा लंड है,पहली बार घुसा है,इसलिए दर्द हुआ आपको,दो चार बार सेक्स करने के बाद आपकी योनी भी खुल जाएगी,अपने पति से कहना आराम आराम डाला करें, में क्रीम देती हूँ,अंदर लगाने के लिए" डॉक्टर क्रीम लगती है योनी में,और कुछ दवाइयाँ और क्रीम भी देती है ।

रेखा के मन में एक शंका थी प्रग्नेंट न हो जाए,रेखा डॉक्टर से पूछती है।

रेखा-" डॉक्टर में प्रेगनेंट तो नहीं हो जाउंगी,बिना कंडोम के सेक्स किया है' डॉक्टर योनी में एक ऊँगली डालकर बच्चेदानी का मुह चेक करती है।

डॉक्टर-"घबराओ नहीं बच्चेदानी का मुह बंद है,आप प्रग्नेंट नहीं होगी"रेखा बहुत खुश होती है,उसकी चिंता समाप्त हो चुकी थी। रेखा बाहर आकर गाडी में बैठ जाती है।

सूरज-"क्या कहा डॉक्टर ने माँ" सूरज बहुत चिंतित था।

रेखा-' सब ठीक है,घर चल"रेखा के व्यवहार में थोडा परिवर्तन आ चूका था,सूरज फ़ार्म हॉउस पहुँचता है, रेखा अपने कमरे में चली जाती है, पूनम अपने बाथरूम से निकल कर आती है। तनु कॉलेज गई हुई थी, आज सूरज का दिमाग खराब था रात बाली घटना के कारण, सूरज गाडी लेकर संध्या माँ के पास जाता है, संध्या सूरज को गले लगा लेती है।

संध्या-'आ गया मेरा बच्चा,तुझे अपनी माँ की याद नहीं आती है,कंपनी के काम से इधर उधर घूमता रहता है"

सूरज-"माँ अब आ गया हूँ न,अब कुछ दिन तक कहीं नहीं जाऊँगा, तान्या दीदी कहाँ है?"

संध्या-'तान्या कंपनी चली गई,हम दोनों अकेले हैं,आज बुझा दे मेरी प्यास बेटा, कई दिनों से प्यासी है मेरी चूत"संध्या मेक्सी उठाकर चूत दिखाते हुए बोली,संध्या एक हाँथ से सूरज का लंड मसल देती है,सूरज का लंड खड़ा हो जाता है,सूरज संध्या की मेक्सी उतार देता है और कमरे में बेड पर पटक देता है,सूरज खुद अपने सारे कपडे उतार कर,संध्या की जांघे चौड़ी करके चूत चाटने लगता है, तभी सूरज को संध्या में रेखा दिखाई देती है, सूरज अपना लंड संध्या की चूत में डालकर चोदने लगता है, सूरज कप ऐसा लग रहा था जैसर वो रेखा को चोद रहा है, सूरज तेज तेज धक्के मारता है ।

संध्या-"आःह्ह्ह्हूफ्फगफगोह्ह्ह् सूरज आज तुझे क्या हो गया है, मेरी चूत का भुर्ता बना दिया,मजा आ रहा है बेटा चोद मुझे" सूरज संध्या को घोड़ी बनाता है और अपना लंड गांड के छेद में डालकर धक्का मारता है,संध्या तड़प उठती है।

संध्या-"ओह्ह्ह्हफ़्फ़्फ़् ये क्या किया तूने सूर्या,मेरी गांड फाड़ेगा क्या,लंड निकाल मेरी गांड से", लेकिन सूरज रुकता नहीं है, गांड में आधा लंड डालकर चोदने लगता है, सूरज को ऐसा लग रहा था जैसे वो रेखा की गांड मार रहा है,कुछ ही देर में झड़ जाता है, संध्या की हालात ख़राब हो गई थी, संध्या बाथरूम में जाती है और सफाई करने के बाद कमरे में आती है।

संध्या-" आज तुझे क्या हुआ सूर्या,बिना बताए ही मेरी गांड मार ली,बहुत दर्द हो रहा है,अब आज के बाद ऐसा मत करना"

सूरज-" माँ आज आपकी गांड मारने का बहुत मन था इसलिए आधा ही लंड डाल कर किया,पूरा लंड डालता तो आपकी गांड फट जाती है" हँसते हुए बोला सूरज।

तभी सूरज के फोन बजता है,रेखा फोन उठाती है तो चोंक जाती है,फोन बीपी सिंह का था।

सूरज को फोन देती है, सूरज समझ जाता है। सूरज बीपी सिंह से बाहर जाकर बात करता है, बात करने के बाद सूरज संध्या के पास आता है, संध्या नाराज़ थी।

संध्या-'तू जानता है ये कौन है?"

सूरज-'हाँ माँ जानता हूँ,ये मेरे पिता हैं और तान्या दीदी भी जानती हैं"

संध्या-"वो पिता कहलाने के लायक नहीं हैं सूरज'

सूरज-"ऐसा क्या किया उन्होंने माँ,आपने इतनी बडी सजा क्यूँ दी उन्हें,22 साल से वो घुट घुट कर मर रहें हैं,आपको जरा सा भी तरस नहीं आया उनपर"

संध्या-" वो पहले से शादीशुदा थे,उन्होंने अपनी पहली पत्नी को छोड़ दिया,यह बात उन्होंने मुझे नहीं बताई,उनकी पहली पत्नी से भी तीन बच्चे थे उनको धोका दिया है उन्होंने"

सूरज-"माँ धोका तो किस्मत ने उन्हें दिया,बो आपसे शादी नहीं करना चाहते थे,आपके पिता ने मजबूर किया था उन्हें,मरते वक़्त वादा वचन लिया था आपके पिताजी ने उनसे" संध्या यह बात सुनकर चोंक जाती है।

संध्या-" तू कैसे जानता है ये सब, उनकी पहली पत्नी और बच्चों ने आत्महत्या कर ली थी"

सूरज-"झूठ बोला था आपसे किसी ने,उनकी पहली पत्नी और बच्चे आज भी जिन्दा हैं"संध्या चोंक जाती है,हैरानी से सूरज की ओर देखती है।

संध्या-',क्या जिन्दा हैं,तुझे कैसे पता,रेखा नाम था उनकी पत्नी का"

सूरज-" हाँ माँ सब जिन्दा हैं, में सूर्या नहीं हूँ माँ सूरज हूँ"

संध्या-"ये तू क्या बोल रहा है सूर्या,तू पागल हो गया है क्या" सूरज संध्या को पूरी बात समझाता है,संध्या रोने लगती है।

सूरज-"माँ में पहली बार शहर आया था,मंदिर में जब शंकर के गुंडे आपको मार रहे थे तब मैंने आपको बचाया,आप मुझे ही सूर्या समझ बैठी,तान्या दीदी के साथ जब में अमेरिका गया तब पता चला वो मेरे भी पिता हैं" संध्या सूरज को गले लगा लेती है,रोने लगती है, सूरज संध्या को शांत कराता है ।

संध्या-"रेखा कहाँ है बेटा, में उनसे मिलना चाहती हूँ"

सूरज-"वो फ़ार्म हॉउस पर हैं",

संध्या-"तूने अब तक बताया क्यूँ नहीं की तू सूर्या नहीं सूरज है"

सूरज-" माँ में आपको हमेसा खुश देखना चाहता था इसलिए"संध्या सूरज को किस्स करती है।

संध्या-"मेरे लिए तो तू ही सब कुछ है,मेरा सूर्या सूरज सब तू है,अब मुझे रेखा के पास ले चल" सूरज संध्या को लेकर फ़ार्म हॉउस ले जाता है।

सूरज संध्या को लेकर जैसे ही फ़ार्म हॉउस पहुंचा, पूनम और रेखा डायनिंग टेवल पर बैठ कर खाना खा रही थी, पूनम और रेखा सूरज और साथ में संध्या को देख कर हैरत में पड़ जाती हैं।

सूरज-'दीदी देखो कौन आया है?"

पूनम-'ये संध्या माँ है हमारी?"संध्या चोंक जाती है, रेखा खड़ी हो जाती है और संध्या को हैरत से देखती है।

संध्या-"हाँ बेटा में तुम्हारी माँ ही हूँ"रेखा पूनम को गले लगा लेती है। रेखा हाँथ जोड़ कर संध्या को नमस्ते करती है, संध्या रेखा को गले लगा लेती है ।

तभी तनु कॉलेज से आ जाती है। तनु भी समझ जाती है ये संध्या माँ है ।

संध्या सबको गले लगा लेती है ।

संध्या-" थेंक्स सूरज तुमने रेखा दीदी से मिलवा कर आज मेरा बोझ हलका कर दिया, में हमेसा इनके बारे में सोचती थी, आज में बहुत खुश हूँ"

संध्या सूरज को गले लगा लेती है ।

सूरज-"माँ आज के बाद हम सब साथ साथ रहेंगे"

संध्या-"हाँ बेटा हम सब साथ रहेंगे, सब लोग चलो घर" रेखा भी बहुत खुश थी।

सूरज-"माँ अब आप पापा को भी माफ़ कर दो"

संध्या-"ठीक है बेटा, तेरे पापा का फोन आया था क्या कह रहे हैं वो"

सूरज-"पापा 3 दिन बाद आ रहें हैं" सभी लोग यह सुन कर बहुत खुश थे ।

रेखा अभी भी सूरज से बात नहीं कर रही थी,रेखा के जहन में रात बाली बात चल रही थी।

इस प्रकार सभी लोग संध्या के साथ एक ही घर में रहने लगते हैं । तान्या पूनम और तनु में गहरी दोस्ती हो गई थी, इधर संध्या और रेखा भी आपस में बहुत घुलमिल गई ।

 
4 चार हो चुके थे आज बी पी सिंह इंडिया मतलब घर आ रहे थे, सभी लोग बहुत खुश थे।

रेखा और संध्या रसोई में मनपसंद खाना बना रही थी, रेखा सबसे ज्यादा खुश थी क्यूंकि उसकी चूत में चुदवाने की हवस बढ़ चुकी थी,रेखा की चूत भी अब ठीक हो चुकी थी, आज रेखा जी भर के चुदवाना चाहती थी,लेकिन संध्या भी साथ में है,वो भी उनकी पत्नी है,बराबर की हकदार है,दोनों की चुदाई एक साथ कैसे हो सकती है यही सोच रही थी । इधर संध्या सूरज से चुदने के लिए बेकरार थी उसे बीपी सिंह में कोई इंट्रेस्ट नहीं था, आज चार दिन से संध्या ने सूरज का लंड नहीं लिया था, और यह हाल लगभग पूनम तान्या तनु तीनो का यही हाल था ।सब सूरज से चुदना चाहती थी बस पतिवृथा नारी रेखा को छोड़ कर।

वो वक़्त भी आ जाता है जब सूरज बीपी सिंह को एअरपोर्ट से रिसीव करके घर ले आता है ।

रेखा और संध्या दोनों बीपी सिंह के गले लग जाती है,

रेखा-"आप कैसे हो"

बीपी सिंह-"में ठीक हूँ रेखा,मुझे तो लगा था में अकेले ही तड़प तड़प कर मर जाऊँगा,सूरज की बजह से मुझे दोबारा एक नई जिंदगी मिल गई"

बीपी सिंह संध्या के आगे हाँथ जोड़ता है।

बीपी सिंह-"संध्या तुमने मुझे माफ़ कर दिया अब में बहुत खुश हूँ,मुझे मेरा परिवार मिल गया" संध्या गले लग जाती है।

बीपी सिंह की आँखों में आंसू आ जाते हैं, पूनम और तनु भी अपने पापा के गले लग जाती हैं, इस प्रकार फेमिली ड्रामा सुबह से लेकर शाम तक चला, सभी लोग बैठ कर खाना खाते हैं,और बहुत सारी बाते करते हैं ।

अब रात में सोने की तयारी होती है, बीपी सिंह अपने कमरे में जाता हैं जहाँ संध्या और रेखा सोती थी । संध्या रेखा के पास आकर कहती है ।

संध्या-",दीदी आप उनके साथ सो जाओ,में सूरज के रूम में सो जाती हूँ"

रेखा-"दीदी आप सो जाओ,में कहीं और सो जाउंगी"

संध्या-"नहीं दीदी आप ही जाओ, और हाँ ज्यादा तेज आवाज़े मत निकालना, बरना मेरी हालात ख़राब हो जाएगी"

रेखा-"मतलब समझी नहीं"

संध्या-" दीदी वो सेक्स आराम से करना"रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-"तो आप ही चली जाओ"

संध्या-"नहीं दीदी आप ही जाओ"यह कह कर संध्या रेखा को भेज देती है और खुद सूरज के कमरे में आकर अपनी मेक्सी उतार कर नंगी हो जाती है और सूरज से लिपट कर लेट जाती है ।

सूरज-"क्या हुआ माँ,आज आप पापा के पास नहीं गई",

संध्या-"मुझे तो सिर्फ तू चाहिए,मेरी चूत में सिर्फ तेरा ही लंड घुसेगा और किसी का नहीं",संध्या सूरज का लोअर उतार कर मुह में लेकर चूसने लगती है, सूरज भी चार दिन से चूत का प्यासा था, सूरज और संध्या 69 की पोजीसन में आकर एक दूसरे का अंग चाटने चूसने लगते हैं, संध्या सूरज के ऊपर लेट कर मुह में लंड डालकर चुस्ती है और सूरज के मुह पर संध्या की चूत थी,सूरज अपनी जीव्ह घुसेड़ कर चूत चाटता है, काफी देर तक चाटने के बाद सूरज उठ कर संध्या की चूत में लंड घुसेड़ कर चोदने लगता है ।

इधर रेखा बीपी सिंह के कमरे आकर अपने पति से लिपट कर लेट जाती है, बीपी सिंह रेखा को बहुत प्यार करता है लेकिन चोदता नहीं है, रेखा इंतज़ार करती है की उसका पति उसे चोदे लेकिन बीपी सिंह सो जाता है, रेखा को लगता है शायद सफ़र करने की बजह से थक गए होंगे इसलिए सो गए, थोड़ी देर बाद रेखा अपनी चूत को ऊँगली से शांत करके सो जाती है, इधर सूरज दो बार संध्या को चोद कर सो जाता है, सुबह सबकी आँख खुलती है सब लोग फ्रेस होकर डायनिंग टेवल पर आते हैं, संध्या और रेखा किचेन में थे ।

संध्या-"रात क्या हुआ दीदी,आपने बताया नहीं" संध्या मजे लेते हुए बोली।

रेखा-"कुछ नहीं हुआ,वो बहुत थके हुए थे जल्दी सो गए" रेखा शरमाती हुई बोली।

संध्या-"ओह्ह्ह दीदी,कोई बात नहीं आज कोसिस करना"

आज पुरे दिन सभी लोग बीपी सिंह के साथ मार्केट शॉपिंग करने जाते हैं।

रात 11 बजे फिर से रेखा कमरे में जाती है लेकिन बीपी सिंह बेचारा अपनी हार्ट और शुगर की दवाई खा कर गहरी नींद में सो चूका था। रेखा बेचारी फिर से ऊँगली से अपने आपको शांत करती है ।

इधर संध्या सूरज से चुदवाती है।

दूसरे दिन सुबह बीपी सिंह अचानक अमेरिका से फोन आने के कारण चला जाता है ।

सुबह सभी लोग अपने अपने काम पर चले जाते हैं।

पूनम तान्या के साथ कंपनी जाने लगी थी,तनु अपने कॉलेज जाती है ।

रेखा के जिस्म की प्यास दिन व् दिन बढ़ती जा रही थी। दो तीन दिन ऐसे ही बीत जाते हैं। एक दिन रेखा चुदवाने के लिए अमेरिका जाने का मन बना लेती है । बीपी सिंह अमेरिका की दो टिकेट भेज देता है । रात के दस बजे फ्लाइट थी। रेखा सूरज से जाकर बोलती है, आज कई दिन रेखा सूरज बात करती है ।

रेखा-'सूरज आज अमेरिका जाना है" सूरज चोंक जाता है।

सूरज-'कितने बजे जाना है माँ"

रेखा-"आज रात दस बजे फ्लाइट है,तैयार हो जाना"इतना कह कह कर रेखा चली जाती है।

रेखा तैयारी में जुट जाती है, रात ठीक 9 बजे सूरज और रेखा एअरपोर्ट जाकर अपनी फ्लाइट में बैठ जाते हैं। फ्लाइट में भी रेखा ज्यादा बात नहीं करती है सूरज से। दुसरे दिन शाम पांच बजे दोनों अमेरिका पहुंचते हैं, एअरपोर्ट पर हेलिना उन्हें रिसीव करने आती है । (हेलिना को सूरज एक बार चोद चूका था,हेलिना बीपी सिंह की कंपनी में चीफ सेक्रेटरी की नोकरी करती है) हेलिना शार्ट ड्रेस पहनी थी,जिसमे उसकी आधे से ज्यादा बूब्स बाहर दिखाई दे रहे थे,और निचे शार्ट स्कर्ट,हेलिना सूरज को देख कर गले लगा लेती है, और एक किस्स करती है । रेखा ये सब देख कर चोंक जाती है । हेलिना दोनों को गाडी में बैठा कर घर ले जाती है। बीपी सिंह उनका इंतज़ार ही कर रहा था, रेखा इतनी बड़ी हवेली देख कर दंग रह जाती है । बहुत ही सुन्दर घर था । बहुत से नोकर चाकर घर की साफ़ सफाई में जुटे हुए थे । सभी लोग फ्रेस हो जाते हैं।

रात के समय में सूरज अपने कमरे में जाता है और रेखा अपने कमरे में। रेखा आज बीपी सिंह के कमरे में जाते ही एक नायटी पहन लेती है और अंदर ब्रा पेंटी उतार देती है ।

आज रेखा अपने पति को उकसाने का पूरा इंतज़ाम कर चुकी थी ।

सूरज संध्या को लेकर जैसे ही फ़ार्म हॉउस पहुंचा, पूनम और रेखा डायनिंग टेवल पर बैठ कर खाना खा रही थी, पूनम और रेखा सूरज और साथ में संध्या को देख कर हैरत में पड़ जाती हैं।

सूरज-'दीदी देखो कौन आया है?"

पूनम-'ये संध्या माँ है हमारी?"संध्या चोंक जाती है, रेखा खड़ी हो जाती है और संध्या को हैरत से देखती है।

संध्या-"हाँ बेटा में तुम्हारी माँ ही हूँ"रेखा पूनम को गले लगा लेती है। रेखा हाँथ जोड़ कर संध्या को नमस्ते करती है, संध्या रेखा को गले लगा लेती है ।

तभी तनु कॉलेज से आ जाती है। तनु भी समझ जाती है ये संध्या माँ है ।

संध्या सबको गले लगा लेती है ।

संध्या-" थेंक्स सूरज तुमने रेखा दीदी से मिलवा कर आज मेरा बोझ हलका कर दिया, में हमेसा इनके बारे में सोचती थी, आज में बहुत खुश हूँ"

संध्या सूरज को गले लगा लेती है ।

सूरज-"माँ आज के बाद हम सब साथ साथ रहेंगे"

संध्या-"हाँ बेटा हम सब साथ रहेंगे, सब लोग चलो घर" रेखा भी बहुत खुश थी।

सूरज-"माँ अब आप पापा को भी माफ़ कर दो"

संध्या-"ठीक है बेटा, तेरे पापा का फोन आया था क्या कह रहे हैं वो"

सूरज-"पापा 3 दिन बाद आ रहें हैं" सभी लोग यह सुन कर बहुत खुश थे ।

रेखा अभी भी सूरज से बात नहीं कर रही थी,रेखा के जहन में रात बाली बात चल रही थी।

इस प्रकार सभी लोग संध्या के साथ एक ही घर में रहने लगते हैं । तान्या पूनम और तनु में गहरी दोस्ती हो गई थी, इधर संध्या और रेखा भी आपस में बहुत घुलमिल गई ।

4 चार हो चुके थे आज बी पी सिंह इंडिया मतलब घर आ रहे थे, सभी लोग बहुत खुश थे।

रेखा और संध्या रसोई में मनपसंद खाना बना रही थी, रेखा सबसे ज्यादा खुश थी क्यूंकि उसकी चूत में चुदवाने की हवस बढ़ चुकी थी,रेखा की चूत भी अब ठीक हो चुकी थी, आज रेखा जी भर के चुदवाना चाहती थी,लेकिन संध्या भी साथ में है,वो भी उनकी पत्नी है,बराबर की हकदार है,दोनों की चुदाई एक साथ कैसे हो सकती है यही सोच रही थी । इधर संध्या सूरज से चुदने के लिए बेकरार थी उसे बीपी सिंह में कोई इंट्रेस्ट नहीं था, आज चार दिन से संध्या ने सूरज का लंड नहीं लिया था, और यह हाल लगभग पूनम तान्या तनु तीनो का यही हाल था ।सब सूरज से चुदना चाहती थी बस पतिवृथा नारी रेखा को छोड़ कर।

वो वक़्त भी आ जाता है जब सूरज बीपी सिंह को एअरपोर्ट से रिसीव करके घर ले आता है ।

 
रेखा और संध्या दोनों बीपी सिंह के गले लग जाती है,

रेखा-"आप कैसे हो"

बीपी सिंह-"में ठीक हूँ रेखा,मुझे तो लगा था में अकेले ही तड़प तड़प कर मर जाऊँगा,सूरज की बजह से मुझे दोबारा एक नई जिंदगी मिल गई"

बीपी सिंह संध्या के आगे हाँथ जोड़ता है।

बीपी सिंह-"संध्या तुमने मुझे माफ़ कर दिया अब में बहुत खुश हूँ,मुझे मेरा परिवार मिल गया" संध्या गले लग जाती है।

बीपी सिंह की आँखों में आंसू आ जाते हैं, पूनम और तनु भी अपने पापा के गले लग जाती हैं, इस प्रकार फेमिली ड्रामा सुबह से लेकर शाम तक चला, सभी लोग बैठ कर खाना खाते हैं,और बहुत सारी बाते करते हैं ।

अब रात में सोने की तयारी होती है, बीपी सिंह अपने कमरे में जाता हैं जहाँ संध्या और रेखा सोती थी । संध्या रेखा के पास आकर कहती है ।

संध्या-",दीदी आप उनके साथ सो जाओ,में सूरज के रूम में सो जाती हूँ"

रेखा-"दीदी आप सो जाओ,में कहीं और सो जाउंगी"

संध्या-"नहीं दीदी आप ही जाओ, और हाँ ज्यादा तेज आवाज़े मत निकालना, बरना मेरी हालात ख़राब हो जाएगी"

रेखा-"मतलब समझी नहीं"

संध्या-" दीदी वो सेक्स आराम से करना"रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-"तो आप ही चली जाओ"

संध्या-"नहीं दीदी आप ही जाओ"यह कह कर संध्या रेखा को भेज देती है और खुद सूरज के कमरे में आकर अपनी मेक्सी उतार कर नंगी हो जाती है और सूरज से लिपट कर लेट जाती है ।

सूरज-"क्या हुआ माँ,आज आप पापा के पास नहीं गई",

संध्या-"मुझे तो सिर्फ तू चाहिए,मेरी चूत में सिर्फ तेरा ही लंड घुसेगा और किसी का नहीं",संध्या सूरज का लोअर उतार कर मुह में लेकर चूसने लगती है, सूरज भी चार दिन से चूत का प्यासा था, सूरज और संध्या 69 की पोजीसन में आकर एक दूसरे का अंग चाटने चूसने लगते हैं, संध्या सूरज के ऊपर लेट कर मुह में लंड डालकर चुस्ती है और सूरज के मुह पर संध्या की चूत थी,सूरज अपनी जीव्ह घुसेड़ कर चूत चाटता है, काफी देर तक चाटने के बाद सूरज उठ कर संध्या की चूत में लंड घुसेड़ कर चोदने लगता है ।

इधर रेखा बीपी सिंह के कमरे आकर अपने पति से लिपट कर लेट जाती है, बीपी सिंह रेखा को बहुत प्यार करता है लेकिन चोदता नहीं है, रेखा इंतज़ार करती है की उसका पति उसे चोदे लेकिन बीपी सिंह सो जाता है, रेखा को लगता है शायद सफ़र करने की बजह से थक गए होंगे इसलिए सो गए, थोड़ी देर बाद रेखा अपनी चूत को ऊँगली से शांत करके सो जाती है, इधर सूरज दो बार संध्या को चोद कर सो जाता है, सुबह सबकी आँख खुलती है सब लोग फ्रेस होकर डायनिंग टेवल पर आते हैं, संध्या और रेखा किचेन में थे ।

संध्या-"रात क्या हुआ दीदी,आपने बताया नहीं" संध्या मजे लेते हुए बोली।

रेखा-"कुछ नहीं हुआ,वो बहुत थके हुए थे जल्दी सो गए" रेखा शरमाती हुई बोली।

संध्या-"ओह्ह्ह दीदी,कोई बात नहीं आज कोसिस करना"

आज पुरे दिन सभी लोग बीपी सिंह के साथ मार्केट शॉपिंग करने जाते हैं।

रात 11 बजे फिर से रेखा कमरे में जाती है लेकिन बीपी सिंह बेचारा अपनी हार्ट और शुगर की दवाई खा कर गहरी नींद में सो चूका था। रेखा बेचारी फिर से ऊँगली से अपने आपको शांत करती है ।

इधर संध्या सूरज से चुदवाती है।

दूसरे दिन सुबह बीपी सिंह अचानक अमेरिका से फोन आने के कारण चला जाता है ।

सुबह सभी लोग अपने अपने काम पर चले जाते हैं।

पूनम तान्या के साथ कंपनी जाने लगी थी,तनु अपने कॉलेज जाती है ।

रेखा के जिस्म की प्यास दिन व् दिन बढ़ती जा रही थी। दो तीन दिन ऐसे ही बीत जाते हैं। एक दिन रेखा चुदवाने के लिए अमेरिका जाने का मन बना लेती है । बीपी सिंह अमेरिका की दो टिकेट भेज देता है । रात के दस बजे फ्लाइट थी। रेखा सूरज से जाकर बोलती है, आज कई दिन रेखा सूरज बात करती है ।

रेखा-'सूरज आज अमेरिका जाना है" सूरज चोंक जाता है।

सूरज-'कितने बजे जाना है माँ"

रेखा-"आज रात दस बजे फ्लाइट है,तैयार हो जाना"इतना कह कह कर रेखा चली जाती है।

रेखा तैयारी में जुट जाती है, रात ठीक 9 बजे सूरज और रेखा एअरपोर्ट जाकर अपनी फ्लाइट में बैठ जाते हैं। फ्लाइट में भी रेखा ज्यादा बात नहीं करती है सूरज से। दुसरे दिन शाम पांच बजे दोनों अमेरिका पहुंचते हैं, एअरपोर्ट पर हेलिना उन्हें रिसीव करने आती है । (हेलिना को सूरज एक बार चोद चूका था,हेलिना बीपी सिंह की कंपनी में चीफ सेक्रेटरी की नोकरी करती है) हेलिना शार्ट ड्रेस पहनी थी,जिसमे उसकी आधे से ज्यादा बूब्स बाहर दिखाई दे रहे थे,और निचे शार्ट स्कर्ट,हेलिना सूरज को देख कर गले लगा लेती है, और एक किस्स करती है । रेखा ये सब देख कर चोंक जाती है । हेलिना दोनों को गाडी में बैठा कर घर ले जाती है। बीपी सिंह उनका इंतज़ार ही कर रहा था, रेखा इतनी बड़ी हवेली देख कर दंग रह जाती है । बहुत ही सुन्दर घर था । बहुत से नोकर चाकर घर की साफ़ सफाई में जुटे हुए थे । सभी लोग फ्रेस हो जाते हैं।

रात के समय में सूरज अपने कमरे में जाता है और रेखा अपने कमरे में। रेखा आज बीपी सिंह के कमरे में जाते ही एक नायटी पहन लेती है और अंदर ब्रा पेंटी उतार देती है ।

आज रेखा अपने पति को उकसाने का पूरा इंतज़ाम कर चुकी थी ।

रेखा मेक्सी पहन कर अपने कमरे में जाती है, बीपी सिंह कमरे में बैठा लेपटोप पर अपने बिजनेस से सम्बंधित कार्य करने में व्यस्त था। बीपी सिंह बिना रेखा को देख कर बोलता है ।

बीपी सिंह-'रेखा तुम सो जाओ,में जरुरी काम कर रहा हूँ, समय लगेगा" रेखा फिर से आज मायूस हो जाती है, रेखा ने सोचा अमेरिका जाकर अपनी 22 साल की प्यास बुझाएगी, लेकिन आज फिर से बेचारी मन मार कर रह जाती है ।

रेखा-"मुझे भी नींद नहीं आ रही है, आप अपना काम कर लो,जब तक में ऊपर घूम कर आती हूँ"

बीपी सिंह-"ठीक है रेखा घूम आओ"बीपी सिंह बिना देखे ही बोलता है, रेखा की उम्मीदें टूट चूकी थी, रेखा कमरे से निकल कर ऊपर छत पर जाती है, रेखा जैसे ही ऊपर आती है उसे सूरज खड़ा दिखाई देता है, सूरज को देखते ही रेखा चोंक जाती है। इधर सूरज भी रेखा को देख कर चोंक जाता है।

सूरज रेखा के पास आकर खड़ा हो जाता है।

सूरज-'क्या हुआ माँ,आप अभी तक सोई नहीं"

रेखा-"नींद"रेखा बस इतना ही बोलती है ।

सूरज-"कैसा लगा अमेरिका आकर"

रेखा-"ठीक है"

सूरज-"माँ आप मुझसे बात क्यूँ नहीं कर रही हो,किस बात पर नाराज़ हो"

रेखा-" नहीं! में तुझसे नाराज़ नहीं हूँ"

सूरज-'फिर आप मुझसे बात क्यूँ नहीं कर रही हो,उस रात गाँव में जो हुआ में उसकी माफ़ी मांग चूका हूँ, अँधेरे के कारण गलती से हो गया"

रेखा-"मुझे उस काली रात की याद मत दिला सूरज, उस रात जो हुआ वो नहीं होना था"

सूरज-" माँ उस दिन जो हुआ,गलती से हुआ फिर आप मुझसे बात क्यूँ नहीं कर रही हो"

रेखा-"में उस रात की घटना भूल नहीं पा रही हूँ सूरज,इसलिए में बात नहीं करती हूँ,जब भी में तुझे देखती हूँ मुझे बही पल याद आ जाता है,में क्या करू सूरज?" रेखा की आँख में आंसू थे,सूरज रेखा को गले लगा लेता है।

सूरज-"माँ चुप हो जाओ,में आपको रोता हुआ नहीं देख सकता हूँ" रेखा को आज बड़ा सुकून सा मिलता है सूरज को के गले लगने से।

रेखा-" में तुझसे नाराज़ नहीं हूँ सूरज,कुछ ही समय के इस परिवर्तन को समझ नहीं पा रही हूँ,उलझ सी गई हूँ"

सूरज-"क्या बात है माँ,कोई परेसानी हो तो मुझे बताओ"

रेखा-"कुछ नहीं सूरज"

सूरज-"माँ बताओ" रेखा कुछ देर सोचने के बाद बोलती है ।

रेखा-"सूरज मुझे एक बात सच बताएगा"

सूरज-"हाँ माँ बोलो"

रेखा-"उस रात तू उत्तेजित हो गया था मुझे देख कर"रेखा गाँव उस रात की बात छेड़ती है जब सूरज का लंड अचानक गले लगने के कारण रेखा की चूत में घुस जाता है और सूरज उत्तेजना में रेखा की गांड मसलते हुए पल भर में ही झड़ जाता है । सूरज सोचने लगता है की माँ को अब क्या जवाब दे ।

सूरज-"हाँ माँ,लेकिन इसमें मेरी कोई गलती नहीं है,हालात ऐसे बन गए थे की में भी मजबूर हो गया"

रेखा आँखे फाड़े सूरज को देखती है ।

रेखा-"कोई बेटा अपनी माँ को देख कर कैसे उत्तेजित हो सकता है"

सूरज-" माँ आप हो ही इतनी सुन्दर,कोई आपको उस समय देखता तो उत्तेजित हो जाता"

रेखा-'क्या में बाकई में सुन्दर हूँ,मुझे देख कर कोई भी उत्तेजित हो सकता है"

सूरज-"हाँ माँ बिलकुल हो सकता है" रेखा सोचती है की उसका बेटा उत्तेजित हो सकता है तो उसके पिता उत्तेजित क्यूँ नहीं हो रहें हैं ।

रेखा-" तेरे पापा मेरी तरफ देखते भी नहीं है,और तू कह रहा है में बहुत सुन्दर हूँ",

सूरज-"क्या पापा आपको देख भी नहीं रहे हैं, मतलब अभी कुछ हुआ नहीं है" रेखा हैरानी से सूरज को देखती है ।

रेखा-" कुछ हुआ नहीं है मतलब,क्या कहना चाहता है"

सूरज-"कुछ नहीं माँ,बस ऐसे ही मुह से निकल गया" सूरज शर्मा गया।

रेखा-" में जानती हूँ,तू क्या कहना चाहता था,ऐसा कुछ नहीं हुआ है, तेरे पापा को अपने बिजनेस के काम से फुरसत ही नहीं है" रेखा मायूस होती हुई बोली।

सूरज-"माँ इसमें पापा का कोई दोष ही नहीं है,आप थोडा मोर्डन कपडे पहनो,पापा खुद अपने आपको रोक नहीं पाएंगे" रेखा सूरज की इस बात पर शर्मा जाती है ।

रेखा-"मतलब मेरे कपडे ठीक नहीं है" सूरज ऊपर से लेकर निचे तक रेखा को देखता है ।

सूरज-"माँ साडी छोड़ कर मोर्डन ड्रेस पहनो,और ये बाबा आज़म ज़माने की मेक्सी को छोड़ कर हॉट और शार्ट नायटी पहनो,फिर देखना पापा कैसे आपके आगे पीछे भागेंगे" रेखा सूरज को देख कर मुस्कराई फिर शर्मा गई ।

रेखा-" मुझे शर्म आती है सूरज ऐसे कपडे पहनने में"

सूरज-"अरे माँ यहाँ अमेरिका में कैसी शर्म,आपने हेलिना आंटी को नहीं देखा,कैसे हॉट ड्रेस पहनी हुई थी,वो तो आपकी उम्र की हैं, अमेरिका में कैसी शर्म" रेखा का मूड ठीक हो गया था सूरज से बात करके।

रेखा-" तेरे सामने कपडे पहनने में शर्म आएगी मुझे"

सूरज-" मुझसे कैसी शर्म माँ,में तो आपको देख चूका हूँ"अचानक सूरज के मुह से निकल जाता है,रेखा फिर से शरमाती है ।

रेखा-"वो तो अचानक तूने गाँव में देख लिया था,बिजली चमकने की बजह से" रेखा शरमाती हुई बोली।

सूरज-"उससे पहले भी देख चूका हूँ माँ"रेखा चोंक जाती है ।

रेखा-"कब?"

सूरज-"जिस दिन आप बाथरूम में बेहोश हुई थी,और उस दिन जब हम गाडी से गाँव जा रहे थे"

रेखा-"लेकिन उस दिन तो मैंने नायटी पहन रखी थी,फिर कैसे देखा"रेखा हैरान थी ।

सूरज-" आप गहरी नींद में सो चुकी थी,आपकी नायटी कमर पर थी" रेखा समझ जाती है उस दिन रेखा ने अपनी चूत में उंगली की थी,झड़ने के बाद ही सो गई थी।

रेखा-" ओह्ह्ह तूने लाइट जलाई थी गाडी में"

सूरज-" सॉरी माँ,आप की चीख सुनकर मैंने लाइट जलाकर देखा था"सूरज बात बदल देता है ।

रेखा-"तूने सच में देखा था"

सूरज-"हाँ माँ,लेकिन कुछ देख नहीं पाया था"

रेखा-"ओह्ह फिर तो अच्छा किया"

रेखा-"चल अब सो जा,बहुत रात हो गई है" रेखा औए सूरज दोनों नीचे आ जाते हैं,रेखा और सूरज का कमरा बराबर में ही था। रेखा अपने कमरे में जाने बाली थी,तभी सूरज रेखा को रोकता है।

सूरज-" माँ इस मेक्सी को उतार देना शायद पापा उत्तेजित हो जाएं"सूरज मुस्करा कर बोलता है। रेखा शर्मा जाती है ।

रेखा-'हट बदमाश,अपनी माँ से ऐसी बात करता है"रेखा मुस्करा कर अपने कमरे में चली जाती है,

कमरे में जाते ही उसे फिर झटका लगता है उसके पति खर्राटे मार कर सो रहे थे, रेखा बेचारी बेड पर लेट कर अपनी मेक्सी को उठा देती है, रेखा को बिना ऊँगली किए नींद नहीं आती है,यह उसका रोज का काम बन चूका है ।

रेखा जैसे ही अपनी चूत पर ऊँगली रखती है तो चोंक जाती है,उसकी चूत पहले से बहुत गीली थी,

रेखा-"(मन में) ये क्या सूरज से बात करते करते ये कब गीली हो गई"

रेखा उंगली करने लगती है तभी उसके जहन में सूरज आ जाता है और उसका मोटा लंड, रेखा जब ऊँगली अंदर बाहर करती है तो ऐसा लग रहा था जैसे सूरज का मोटा लंड चूत में अंदर बाहर हो रहा है, रेखा तेजी से ऊँगली चलाने लगती है और एक सिसकी के साथ झड़ जाती है,झड़ते समय रेखा के मुह से "ओह्ह्ह्ह ससुराज" निकलता है। रेखा सफाई करके सो जाती है ।

सुबह 7 बजे आँख खुलती है ।

रेखा की नींद सुबह 7 बजे खुलती है, बीपी सिंह फ्रेस होकर नास्ता करने नीचे जा चुका था, रेखा को रात की बात याद आती है जब वो ऊँगली करते समय सूरज को याद कर रही थी,और उसके नाम से ही झड़ गई। रेखा हैरान थी की उसने सूरज के बारे में कैसे सोच लिया, रेखा को बहुत ग्लानी महसूस होती है । रेखा के मन में सूरज का लंड पुनः आते ही झकझोरती हुई उठी और बाथरूम में जाकर शॉवर के नीचे नाहने लगी । इधर सुबह सूरज उठकर टहलने चला गया था, घर आते ही नहा कर फ्रेस हो गया। अमेरिका आकर उसे कोई काम धंधे की टेंसन नहीं थी,इसलिए अपने कमरे में आकर लेपटोप चला कर टाइम पास करने लगता है ।

इधर रेखा फ्रेस होकर नीचे डायनिंग टेवल पर आती है,घर में खाना बनाने बाली सभी नोकरानी अंग्रेजिन ही थी, उनकी ड्रेस भी शार्ट थी । रेखा आँखे फाड़े उन लड़कियों को ही देखती है।

रेखा आते ही बीपी सिंह को गुड़ मॉर्निंग बोलती है ।

बीपी सिंह-"रेखा जग गई तुम"

रेखा-"हाँ जग गई, आप कहीं जा रहे हो क्या?"

बीपी सिंह-"हाँ रेखा,आज जरुरी मीटिंग है,इसलिए जल्दी जाना है" रेखा उदास हो जाती है ।

बीपी सिंह-"उदास मत हो मेरी जान,बस कुछ दिन की परेसानी है,सभी कंपनी को सूरज के हवाले कर दूंगा,फिर हम दोनों हमेसा एक साथ रहेंगे" बीपी सिंह रेखा को गले लगाते हुए बोला।

रेखा-"मुझे आज आपके साथ मार्केट जाना था,कुछ कपडे खरीदने"

बीपी सिंह-" में सूरज से बोल देता हूँ,सूरज ने यहाँ की मार्केट देखी है" रेखा सूरज के साथ शर्म की बजह से नहीं जाना चाहती थी,लेकिन अब मॉर्केट सूरज के साथ जाना उसकी मज़बूरी बन चुकी थी।

रेखा-" रहने दीजिए में फिर कभी कपडे खरीद लूंगी"

बीपी सिंह-"चली जाओ रेखा, और हाँ थोड़े मोर्डन कपडे खरीद लेना,जब तक अमेरिका में हो तब तक साडी मत पहनो"

रेखा-"ठीक है जी"

बीपी सिंह-" में सूरज से बोल देता हूँ, हेलिना को साथ भेजता हूँ" बीपी सिंह फोन करता है हेलिना को और घर आने के लिए बोलता । बीपी सिंह सूरज को बोलता है कमरे में जाकर ।

बीपी सिंह-"सूरज बेटा तुम अपनी माँ के साथ मार्केट चले जाना"

सूरज-"ठीक है पापा" बीपी सिंह कंपनी चला जाता है, रेखा सूरज के कमरे में आती है ।

सूरज-"अरे माँ आप आओ बैठो" सूरज बेड से खड़ा होकर स्वागत करते हुए बोला। रेखा बेड के सामने पड़े सोफे पर बैठ जाती है ।

रेखा-"तेरे पापा कुछ कह कर गए हैं क्या"

सूरज-'हाँ माँ, पापा आपके लिए कपडे खरीदने के लिए बोल कर गए हैं, मार्केट कब चलना है?"

रेखा-"जब तेरा मन हो तब"

सूरज-" माँ अभी चलें कहीं घूमने,आते समय मॉल से कपडे खरीद लेंगे"

रेखा-" मन तो मेरा भी कर रहा है अमेरिका घूमने का, में तैयार होकर आती हूँ" रेखा जाने के लिए खड़ी होती है,तभी सूरज रोकता है ।

 


सूरज-"माँ आज वही शार्ट ड्रेस पहनो जो मैंने दिलबाई थी"

रेखा-" वो तो में घर ही छोड़ आई,लेकिन एक ड्रेस लाई हूँ,कुर्ता और लेगी बाली ड्रेस,उसी को पहन लेती हूँ"

सूरज-"ठीक है माँ,बही पहन लो"रेखा शरमाती हुई कमरे से निकल कर अपने कमरे में आ जाती है, रेखा अपने बेग से ड्रेस निकालती है, रेखा ने आज तक सलवार कुर्ता नहीं पहना,आज पहली बार पहनने से पहले शर्मा रही थी,क्यूंकि कुर्ता थोडा शार्ट था,और नीचे लेगी थी, रेखा अपनी मेक्सी उतार देती है,लाल ब्रा और लाल पेंटी में खड़ी होकर शीशे के सामने अपना गदराया हुआ शरीर देखती है, रेखा फेसनेवल जालीदार पेंटी पहनी थी,जो सिर्फ चूत को ही ढकी हुई थी,पेंटी बहुत टाइट थी,चूत का उभार साफ़ दिखाई दे रहा था, 40 साइज़ की चूचियाँ ब्रा से बाहर आने के लिए आतुर थी, रेखा दोनों हांथो से अपने बूब्स को हाँथ से दबाती है,ऐसा लग रहा था जैसे वो उनका मापन कर रही थी। रेखा की लंबाई 5 फुट 6 इंच थी,भरा हुआ बदन और मोटी चौड़ी गांड, किसी का भी लंड खड़ा कर दे, मोटी मोटी जांघे,सफ़ेद दूधिया जिस्म चमक रहा था, रेखा लेगी उठाकर पहनने लगती है,सफ़ेद रंग की लेगी बहुत कोमल और सॉफ्ट थी लेकिन बहुत टाइट थी, लेगी पहनते ही शीशे में देखती है,लेगी टांगो में चुपक गई थी,और गांड का आकर लेगी में साफ़ उभर कर आ गया, सामने उसकी जांघे और जांघो के बीच चूत का उभार झलक रहा था, रेखा लेगी पहनने के बाद भी ऐसा लग रहा था जैसे नंगी खड़ी है, रेखा को बहुत शर्म आ रही थी। रेखा सोचती है सूरज देख कर क्या सोचेगा,रेखा कुर्ता भी पहन लेती है,और शीशे में देखती है,कुर्ता उसके जिस्म से चुपका हुआ था,उसकी चूचियों की खाई एक गुफा की तरह दिखाई दे रही थी।

रेखा ज्यादा देर न करते हुए जल्दी से मेकअप करती है। और शीशे में अपने आपको देखती है।

आज रेखा बाकई में किसी जवान लड़की की तरह लग रही थी, कुरता शार्ट होने के कारण सिर्फ उसकी जांघो तक ही था,रेखा पीछे अपनी गांड की तरफ नज़र मारती है, गांड बाहर की ओर निकली दिखाई देती है, रेखा शरमाती हुई अपने कमरे से बाहर निकल कर सूरज के कमरे में जाने लगती है, रेखा की धड़कन बहुत तेज थी और हलकी घबराहट भी थी, चूँकि आज पहली बार साडी को त्याग कर कुरता लेगी पहनी थी आज उसने अपना नया रूप देखा था और अब सूरज को अपना नया रूप दिखाने जा रही थी ।

इधर सूरज बाथरूम से फ्रेस होने के बाद कच्छा बनियान में बाहर निकल कर खड़ा ही था तभी रेखा सूरज के कमरे में प्रवेश करती है। सूरज जैसे ही रेखा को देखता है तो हैरान रह जाता है, उसने कभी सोचा भी नहीं था रेखा इतनी कामुक और हॉट लगेगी, सूरज की नज़र रेखा की बाहर निकली हुई गांड पर जाती है जो सफ़ेद लेगी में साफ़ झलक रही थी, गांड को देखने के बाद सूरज की नज़र रेखा की चुचियों की तरफ जाती है जिनका आकर साफ पता चल रहा था और थोडा सा गला खुला हुआ था जिसमे उसकी खाई एक नाली की तरह दिखाई दे रही थी, सूरज का लंड उसके कच्छे में तन जाता है,इधर रेखा सूरज के इस तरह देखने से शर्मा रही थी । रेखा की नज़र सूरज के फ्रेंच कच्छे में जाती है तो हैरान रह जाती है,उसका लंड कच्छा फाड़ कर बाहर आने के लिए बेकाबू हो रहा था। रेखा की धड़कने और बढ़ जाती हैं। खुद के बेटा का लंड खड़ा हो जाना उसके लिए किसी परिक्षण से कम नहीं था, रेखा समझ जाती है की वो बाकई इस ड्रेस में बहुत कामुक लग रही है । रेखा अपनी धड़कने काबू करते हुए सूरज से बोली।

रेखा-"सूरज तू अभी तैयार नहीं हुआ" रेखा के बोलने पर भी सूरज ध्यान नहीं देता है और आँखे फाड़े जिस्म का एक्सरा अपनी आँखों से कर रहा था। रेखा इस बार तेजी से बोलती है ।

रेखा-"सूरज" सूरज एक दम हड़बडाता हुआ कल्पना से निकल कर आता है ।

सूरज-"ह हाँ म माँ, बस अभी तैयार हो रहा हूँ" सूरज जैसे ही नीचे अपने कच्छे को देखता है तो चोंक जाता है,अपनी ही माँ को देख कर लंड खड़ा था, सूरज अपनी जीन्स की पेंट उठा कर बाथरूम में भाग जाता है शर्म के कारण, रेखा के चेहरे पर हलकी मुस्कान आ जाती है यह देख कर ।जीन्स की पेंट में बड़ी मुश्किल से अपने लंड को कैद करता है,लेकिन फिर भी लंड का उभार साफ़ दिखाई दे रहा था, सूरज जल्दी से टीशर्ट पहन लेता है,जिससे लंड का उभार छिप जाए । कपडे पहनने के बाद सूरज कमरे में आता है, रेखा अभी भी सोफे पर बैठी थी ।

सूरज-"माँ चलें अब" शर्माता हुआ बोला।

रेखा-"हाँ चलो" हेलिना आ चुकी थी और बाहर गाडी के पास खड़ी सूरज का इंतज़ार कर रही थी। हेलिना सुरज को गुड़ मॉर्निंग विश करती है और गले लगा कर हग करती है । हेलिना आज भी बहुत हॉट लग रही थी, सूरज हेलिना को वाटर फॉल और बिच पर घूमने के लिए अंग्रेजी में बोलता है, रेखा उन दोनों की बातें समझ नहीं पा रही थी, चूँकि रेखा 10वीं तक पढ़ी थी । सूरज आगे बाली सीट पर बैठ जाता है और रेखा पीछे की सीट पर बैठ जाती है, हेलिना गाडी दौड़ा देती है । रेखा गाडी के शीशे से बाहर अमेरिका की खूबसूरती देखने में व्यस्त थी इधर सूरज फ्रंट शीशे से रेखा के बूब्स देख रहा था। हेलिना समझ जाती है की सूरज रेखा की चूचियाँ देख रहा है,हेलिना के चेहरे पर कुटिल मुस्कान तैर जाती है, हेलिना अपना एक हाँथ ले जाकर सूरज के पेंट पर रख कर लंड मसल देती है, सूरज घबरा जाता है और हेलिना को देखने लगता है, हेलिना एक आँख मारती हुई अपनी जांघे खोल कर दिखती हुई इशारा करती है, हेलिना पेंटी पहनी हुई थी, सूरज हेलिना की जांघे और पेंटी देख कर ललचा जाता है। हेलिना एक हाँथ अपनी पेंटी खिसका कर चूत दिखती हुई मुस्कराती है, सूरज का लंड झटके मारने लगता है। सूरज को डर था की कहीं माँ न देख ले इसलिए हेलिना को माँ की ओर इशारा करते हुए मना करता है । हेलिना चुपचाप गाडी चलाने लगती है । कुछ ही देर में दोनों बीच पर पहुँच जाते हैं । रेखा जैसे ही बीच पर लड़कियां और औरतो को ब्रा और पेंटी में देखती है तो हैरान रह जाती है ।

रेखा और सूरज जैसे ही बीच पर जाते हैं, रेखा हैरत भरी नज़रो से ब्रा पेंटी में नहाती लड़कियों को देख कर शर्म से पानी पानी हो रही थी।

रेखा-"सूरज ये कैसी जगह है, तू मुझे यहाँ क्यूँ लाया है?"

सूरज-"माँ यह समुद्री तट है,यहाँ लोग घूमने और मौज मस्ती करने आते हैं"

रेखा-' मुझे यहाँ बहुत शर्म आ रही है,यहाँ तो सभी लोग नंगे घूम रहें हैं, तू यहाँ से चल सूरज"

सूरज-"माँ आपकी शर्म दूर करने ही तो यहाँ लाया हूँ, यहाँ का नज़ारा देखो आप,कैसे लोग पानी में मस्ती कर रहें हैं" सूरज रेखा को दूर ले जाता हैं,जहाँ पहाड़ थे,और सुनसान जगह थी, पहले तान्या को लेकर भी गया था।

रेखा-" मुझे तो इन कपड़ो में शर्म आ रही है" सूरज एक बार फिर से रेखा को ऊपर से निचे तक देखता है।

सूरज-"माँ आप इन कपड़ो में बहुत हॉट लग रही हो,पापा देखते तो पीछे ही पड़ जाते आपके"सूरज हसते हुए बोला।

रेखा-" तेरे पापा को फुरसत ही कहाँ है मुझे देखने के लिए,हमेसा अपने बिजनेस में ही लगे रहते हैं"

सूरज-'माँ आप फिकर मत करो,आज देखना पापा आपके पीछे पीछे भागेंगे" रेखा हैरत से सूरज को देखती है ।

रेखा-'ऐसा क्या करेगा तू?"

सूरज-"आज में आपको बढ़िया सी नायटी दिलबाउंगा,और हॉट ड्रेस भी,फिर देखना आज पापा कैसे आपके पीछे पीछे भागेंगे"रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-" ओह्ह्ह सूरज,तू कैसी बात करता है,तेरी बात सुनकर मुझे तो शर्म आती है,अपनी ही माँ को सलाह देता है"

सूरज-"अरे माँ,आप भूल गई डॉक्टर ने बोला था.....?" सूरज बोलते बोलते रुक गया, रेखा समझ जाती है सूरज सेक्स के लिए बोलने बाला था।

रेखा-"क्या बोला था तुझसे?" रेखा और सूरज रेतीले जगह पर बैठ जाते हैं, रेखा के बैठते ही कुरता ऊपर हो जाता है, सूरज की नज़र रेखा के झांघो के बीच चली जाती है, जहाँ लेगी चुस्त होने के कारण फूली हुई चूत का उभार दिखाई दे जाता है, सूरज लगातार चूत के उभार और आकृति को देखने लगता है ।

रेखा-"बोल न सूरज क्या बोला था डॉक्टर ने तुझसे" सूरज अपनी नज़रे हटाते हुए बोला।

सूरज-"डॉक्टर ने बोला था की आपकी नसों में पानी जम गया है,पानी निकलना बहुत जरुरी है"रेखा शर्मा जाती है । यह बात सुनकर रेखा की चूत गीली होने लगती है।

रेखा-"हाँ बोला था डॉक्टर ने" रेखा शरमाती हुई बोली।

सूरज-'इसलिए माँ,पापा ही आपकी इस काम में मदद कर सकते हैं" रेखा फिर से शरमाती हुई देखती है, रेखा की चूत गीली होने से उसे सूरज से बात करने में बड़ा मजा आ रहा था,लेकिन शर्म भी बहुत आ रही थी ।

रेखा-"ह्म्म्म्म",

सूरज-'माँ क्या पापा ने अभी तक कुछ किया नहीं है" इस बार रेखा फिर से सूरज की खुली बाते सुनकर हैरान थी ।

रेखा-'ओह्ह्ह सूरज तू अपनी माँ से कैसी बात करता है,मुझे तो बहुत शर्म आ रही है"

सूरज-"माँ में इसलिए पूछ रहा हूँ,ताकि आपकी मदद कर सकूँ, बोलो न माँ कुछ किया है पापा ने"

रेखा-"अभी नहीं"रेखा शरमाती हुई बोली।

सूरज-"ओह्ह्ह माँ,आप इतनी खूबसूरत हो,पापा की जगह कोई और होता तो अब तक रोक पाना उसके लिए मुश्किल होता" रेखा हैरानी से सूरज की बात सुनती है, उसका अपना बेटा उसके बदन की खूबसूरती की तारीफ़ कर रहा था ।

रेखा-"ओह्ह्ह सूरज कैसी बात करता है तू,अपनी माँ के बारे में"

सूरज-"माँ सच कह रहा हूँ,अच्छा माँ एक बात पुछू?" रेखा को अंदर ही अंदर बहुत मजा भी आ रहा था ।

रेखा-"हाँ पूछ"

सूरज-" डॉक्टर ने आपको मालिस करने के लिए बोला था,क्या आप रोज करती हो मालिस"सूरज की बात सुनकर रेखा की चूत से पानी की बून्द टपक कर लेगी को भिगाने लगती है, सूरज भीगती लेगी को चूत बाले स्थान को देख रहा था।

रेखा-"हाँ करती हूँ सूरज"रेखा की बात सुन कर सूरज का लंड पेंट में झटके मारने लगता है।

सूरज-"पानी निकलता है अब" आज बिना ऊँगली किए ही रेखा की चूत बह रही थी,सूरज की बातें सुन कर ।

रेखा-"हाँ निकलता है"रेखा को समझ नहीं आ रहा था वो सूरज के हर सवाल का जवाब क्यूँ दे रही है, दोनों लोग बात ही कर रहे थे तभी हेलिना अपने कपडे उतार कर ब्रा पेंटी में सूरज और रेखा के पास आती है । और सूरज से नहाने के लिए बोलती है।सूरज तो हेलिना के ब्रा से बाहर निकलते बूब्स को देख रहा था कभी उसकी पेंटी को जिसमे सिर्फ चूत ही ढकी थी,मोटी और चौड़ी गांड साफ़ दिखाई दे रही थी, हेलिना और सूरज अंग्रेजी में बात करते है, इधर रेखा हेलिना के इस अधनंगे जिस्म को आँखे फाड़े देख शर्मा रही थी, तभी रेखा बोलती है।

रेखा-"तुम लोग अंग्रेजी में क्या बोल रहे हो मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है",

सूरज-"माँ ये समुद्र में नहाने के लिए बोल रही है, आप अपने कपडे उतार कर नहा लो", सूरज अपनी पेंट और टीशर्ट उतारते हुए बोला।

रेखा-"नहीं तुम नहा लो, में नहीं नहाउंगी"

सूरज-"अरे माँ आप उस पहाड़ के पीछे नहा लेना,कोई नहीं देखेगा"हेलिना भी बहुत कहती है तो रेखा मान जाती है, इधर रेखा सूरज के कच्छे में खड़े लंड को देख रही थी,सूरज भी समझ जाता है माँ क्या देख रही है, तभी हेलिना सूरज को लेकर पानी में कूद जाती है, दोनों लोग पानी में मस्ती करते देख रेखा को हेलिना से जलन होने लगती है, रेखा भी अपनी लेगी और कुरता उतार कर पहाड़ की आढ में नहाने घुस जाती है, पानी रेखा की गर्दन तक था, इधर हेलिना पानी में सूरज के लंड को बाहर निकाल कर हिलाने लगती है और अपनी पेंटी को उतार कर किनारे पर रख देती है। सूरज तो दो दिन का भूकास था,हेलिना और सूरज एक पहाड़ की चट्टान के पीछे जाकर हेलिना की चूत चाटने लगता है और हेलिना सूरज का लंड चूसने लगती है,काफी देर चूसने के बाद हेलिना सूरज को चट्टान पर लेटा कर उसके लंड पर बैठ कर चुदाई करने लगती है,इधर रेखा को सूरज और हेलिना दिखाई नहीं देते हैं तो वह चट्टान से निकल कर दूसरी चट्टान के पीछे देखती है तो हैरान रह जाती है, सूरज का मोटा लंड हेलिना की चूत में अंदर बाहर हो रहा था,रेखा हैरान थी की हेलिना की चूत में सूरज का इतना मोटा लंड कैसे घुस गया,सूरज अब हेलिना को घोड़ी बना कर चोद रहा था, रेखा यह देख कर बहुत गुस्से में थी,इधर उसकी चूत भी गीली हो गई, रेखा अपनी चूत में ऊँगली करने लगती है,सूरज ताबड़ तोड़ चुदाई करते हुए झड़ने बाला होता है तभी हेलिना सूरज के लंड को चूत से निकाल कर मुह में लेकर हिलाने लगती है,रेखा की उंगलिया तेजी से चूत में चलने लगती है,सूरज का मोटा लंबा लंड और उसका लाल सुपाड़ा देख आज पहली बार रेखा आकर्षित हुई थी, इधर जैसे ही सूरज के लंड से पानी निकलता है,तभी उसे रेखा की सिसकी सुनाई देती है, सूरज और रेखा की नज़रे आपस में टकरा जाती हैं, रेखा भी झड़ने लगती है,इधर सूरज के झड़ते ही हेलिना सारा पानी चाट लेती है, रेखा शर्म से भाग कर छुप जाती है और अपने कपडे पहन लेती है। सूरज भी पानी से निकल कर अपने कपडे पहन कर रेखा के पास आता है, रेखा के हाँथ में भीगी हुई ब्रा और पेंटी थी । सूरज और रेखा आपस में नज़रे नहीं मिला पा रहे थे।

सूरज-"माँ अब चलें?" रेखा सिर्फ हाँ में गर्दन हिलाती हुई सूरज के साथ चल देती है और गाडी में बैठ कर एक मॉल में आ जाते हैं। रेखा के दिमाग में अभी भी सूरज और हेलिना की चुदाई घूम रही थी।

दोनों आपस में बात करने में भी शर्मा रहे थे,इस बीच कई बार सूरज रेखा को देखता तो रेखा सूरज को देखती । हेलिना और रेखा दोनों लोग मॉल में आकर शार्ट नायटी की शॉप में जाकर हॉट सी नायटी खरीद लेती है। और बहुत से हॉट कपडे,जिसमे स्कर्ट और जीन्स भी थी । रेखा एक ब्रा पेंटी की लेटेस्ट जोड़ी खरीदती है, जिसे सूरज सिर्फ खड़ा देख रहा था । हेलिना ने जानबूझ कर सभी हॉट ड्रेस दिलबाई । सूरज तो बस मन ही मन कल्पना कर रहा था की माँ इन कपड़ो में कैसी लगेगी। रेखा और हेलिना सूरज के पास आती है।

रेखा-"सूरज मेरी खरीदारी हो गई, तुझे कुछ लेना है"पहली बार रेखा सामान्य व्यबहार करते हुए बोली जिससे सूरज की हिम्मत बढ़ गई ।

सूरज-"नहीं माँ,मुझे कुछ नहीं लेना है, आप लेलो"

रेखा-"मैंने जो कपडे लिए हैं वो ठीक तो है न"

सूरज-'हाँ माँ ठीक है" हेलिना गाडी के पास चली जाती है । तभी सूरज रेखा से माफ़ी मांगने लगता है।

सूरज-' माँ मुझे माफ़ कर दो"

रेखा-"ऐसे माफ़ नहीं करुँगी,पहले घर चल मुझे तुझसे बात करनी है" रेखा की बात सुन कर सूरज डर जाता है । दोनों लोग घर के लिए निकल जाते हैं। रेखा गाडी से उतर कर घर में घुसने लगती है,सूरज जैसे ही उतरता है उसे गाड़ी में रेखा की गीली ब्रा और पेंटी दिखाई देती है, सूरज ब्रा और पेंटी को उठाकर घर में घुसता है । रेखा अपने कमरे में जा चुकी थी । सूरज पेंटी को देखने लगता है जिसमें रेखा का सफ़ेद पानी लगा हुआ था, सूरज समझ जाता है माँ भी आज झड़ गई है और इसी पेंटी से चूत को साफ़ किया है, सूरज का लंड खड़ा हो जाता है, सूरज रेखा के कामरस को सूंघने लगता है,खुशबु सूंघते ही सूरज का लंड झटके मारने लगता है, एक हाँथ से अपना लंड मसलता है और पेंटी को सूंघता है, सूरज का मन पेंटी पर लगे कामरस को चाटने का करता है, इधर रेखा को अपनी गीली ब्रा पेंटी की याद आती है जो गाडी में भूल आई थी उन्हें लेने के लिए जैसे ही कमरे से

निकलती है उसे सूरज दिखाई दे जाता है जो उसकी पेंटी को सूंघ कर अपना लंड मसल रहा था,रेखा ये देख कर चोंक जाती है, उसकी चूत गीली होने लगती है, रेखा छुप कर देख रही थी, तभी उसे झटका लगता है जब सूरज उसकी पेंटी पर लगे कामरस को चाटने लगता है । रेखा के होश उड़ जाते है । रेखा की उत्तेजना बढ़ने लगती है । सूरज पेंटी को चाटने के बाद रेखा के कमरे में जाने लगता है तभी रेखा जल्दी से अपने कमरे में जाकर सोफे पर बैठ जाती है । सूरज के आते ही रेखा खड़ी हो जाती है, सूरज के हाँथ में उसकी ब्रा पेंटी थी।

सूरज-"माँ आपकी ब्रा पेंटी गाडी में रह गई थी"ब्रा पेंटी देते हुए बोला ।

रेखा-"ओह्ह हाँ में तो भूल ही गई" सूरज ब्रा पेंटी देकर जाने लगता है,तभी रेखा बोलती है ।

रेखा-"जा कहाँ रहा है, मुझे तुझसे कुछ बात करनी है", सूरज पलट कर रेखा के पास आता है।

सूरज-"ओह्ह माँ सॉरी आज जो भी आपने देखा उसके लिए"

रेखा-"कबसे चल रहा है ये"

सूरज-"पिछली बार जब तान्या दीदी के साथ आया था तब से"

रेखा-'ओह्ह अच्छा,तू पहले भी उसके साथ कर चूका है"

सूरज-"हाँ माँ"

रेखा-"अब तक कितने बार किया है उसके साथ"

सूरज-'तीन चार बार"रेखा यह सुन कर हैरान रह जाती है।

रेखा-'वो तेरी माँ की उम्र की है,तुझे शर्म नहीं आई"

सूरज-"इसमें उम्र नहीं देखि जाती है"

रेखा-"मतलब तू किसी के साथ भी सेक्स कर सकता है"पहली बार रेखा सेक्स शब्द जोड़ती है।

सूरज-"सबके साथ नहीं माँ"

रेखा-" चल कोई बात नहीं, हवस के आगे लोग अंधे हो जाते हैं"

सूरज-"माँ यह हवस की आग ही ऐसी होती है, इस पर किसी का जोर नहीं होता"

रेखा-"ओह्ह्ह तुझे तो बहुत ज्ञान है इन बातो का, कितनो के साथ तूने सेक्स किया है अब तक"

सूरज-"तीन चार के साथ"रेखा यह सुनकर हैरान थी चुकी उसने तो सिर्फ अपने पति से ही चुदवाया था।

रेखा-"ओह्ह्हो तुझे कैसे बर्दास्त कर लेती है लड़कियां" रेखा अब सामान्य होकर हसते हुए बोली।

सूरज-"समझा नही माँ" इस बार रेखा सूरज से थोडा खुल कर बोली।

रेखा-"तेरा बहुत बड़ा साइज़ है,दर्द नहीं होता"रेखा शरमाते हुए बोली,लेकिन सूरज इस बार रेखा को हैरत से देखता है ।

सूरज-"पहली बार में दर्द होता है फिर नहीं"

रेखा-'मुझे तो इसी बात की टेंसन है,में दर्द बर्दास्त नहीं कर पाउंगी,अगर तेरे पापा ने कुछ किया तो"

सूरज-"माँ आप उसकी फ़िक्र मत करो,मेरे पास एक क्रीम है उसको लगा कर सेक्स करना" रेखा चोंकती हुई बोली।

रेखा-'सच में,फिर तो वो क्रीम मुझे दे देना"

 


सूरज-"ठीक है माँ,आज पापा के आने से पहले आप वो सेक्सी हॉट नायटी पहन लेना,पापा आज आपको देख कर खुश हो जाएंगे'

रेखा-"और अगर नहीं हुए तो,अब तक तो कुछ किया नहीं उन्होंने'रेखा चिंतित होते हुए बोली।

सूरज-"अगर नहीं हुए तो आप उनसे उम्मीद छोड़ देना" रेखा यह सुन कर मायूस हो जाती है।

रेखा-"हम्म तू ठीक बोलता है सूरज"

सूरज-"माँ आप परेसान मत हो,मेंरे पास एक उपाय है" रेखा चोंक जाती है।

रेखा-"क्या उपाय है?"

सूरज-"माँ एक रबड़ का पेनिस आता है वो में आपको ले आऊंगा,उससे आप कर लिया करना"

रेखा-" ये पेनिस क्या होता है?"अब सूरज शर्म की बजह से चुप हो जाता है ।

रेखा-"बोल न क्या होता है ये रबड़ का पेनिस,अब शर्मा क्यूँ रहा है,सब कुछ तो देख लिया और बात भी कर ली"

सूरज का हौशला बढ़ जाता है ।

सूरज-"पेनिस लंड को बोलते हैं,में रबड़ का पेनिस ले आऊंगा",रेखा यह सुन कर शर्म से लाल हो जाती है।

रेखा-'रबड़ का भी लंड...सॉरी पेनिस आता है?"रेखा चोंक जाती है चुकी आज से पहले उसने न तो देखा है और न सुना है। रेखा गर्म होती जा रही थी।

सूरज-'हाँ माँ"

रेखा-"ठीक है पहले मुझे ला कर दिखा,अब तू जा में नहा लू"

सूरज-"माँ नहाओगी या कुछ और करोगी"सूरज रेखा को छेड़ते हुए हस कर बोला। रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-"और कुछ क्या?"

सूरज-"मालिस"रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-"नहीं सिर्फ नहाउंगी"सूरज कमरे से निकल कर बाहर मेडिकल शॉप से एक छोटा सा डिडलो लाकर अपने कमरे में रख लेता है। इधर रेखा भी आज की घटना सोचते सोचते सो जाती है और

सूरज भी बेड पर लेट कर रेखा केबारे में सोचने लगता है । सोचते सोचते सो जाता है ।

रात के 9 बजे आँख खुलती है सूरज की ।

रात के 9 बजे सूरज की आँख रेखा के जगाने पर खुलती है।

रेखा-'सूरज बेटा उठ जा तेरे पापा आने वाले हैं" सूरज उठ जाता है ।

सूरज-"पापा अभी तक आए नहीं माँ'

रेखा-"अभी नहीं बस आने वाले हैं"रेखा के चेहरे पर कामवासना की उत्तेजना और शर्म दोनों थी।

सूरज-" पापा के आने से पहले आप शार्ट बाली नायटी पहन लो"

रेखा-'पहन तो लूंगी, लेकिन घबराहट सी हो रही है, आज से पहले शार्ट कपडे कभी नहीं पहने"

सूरज-"ओह्ह्ह माँ,पापा को आप आकर्षित करना चाहती हो या नहीं?"

रेखा-"हाँ करना चाहती हूँ"

सूरज-"तो आप जल्दी से नायटी पहन लो" रेखा कमरे से जाने लगती है।

सूरज-"सुनो माँ"

रेखा-"हाँ बोल"

सूरज-"अंदर ब्रा और पेंटी मत पहनना" रेखा शर्मा जाती है ।

रेखा-"धत् कैसा बेटा है तू" रेखा शरमाती हुई अपने कमरे में जाकर मेक्सी उतार कर नंगी हो जाती है,अंदर ब्रा पेंटी नहीं पहनी थी रेखा। जैसे शीशे के सामने जाती है तो अपनी कोमल और हलके बालो से सजी चूत को सहलाने लगती है,सहलाते ही अपनी चूत पर दो चपत लगाती है ।

रेखा-"(मन में) रेखा अपनी चूत पर चपत लगाती हुई बोली, फ़िक्र मत कर आज तुझे तेरा हमसफ़र मिलेगा,आज तू शुहागिन बनेगी,और पूरी रात ठुकेगी,बहुत रोती है न तू लंड के लिए,आज मेरे पतिदेव तेरी 22 साल की कसक निकाल देंगे"रेखा कामुक मुस्कान के साथ अपनी हॉट ब्रा पहनती है जिसमे जिसमे सिर्फ निप्पल ही ढके हुए थे,उसके बाद पेंटी जिसमे आगे जाली थी,चूत पूरी तरह से दिखाई दे रही थी। रेखा ब्रा पेंटी ही पहन पाई थी तभी उसे बीपी सिंह की आवाज़ सुनाई देती है।

बीपी सिंह-'वाह्ह्ह्ह् रेखा आज तो क़यामत लग रही हो"रेखा पलट कर दरबाजे पर देख कर शर्मा जाती है सामने बीपी सिंह खड़ा था। रेखा जल्दी से नायटी पहन लेती है जो उसकी गांड को ही ढक पा रही थी,और ऊपर आधे से ज्यादा बूब्स दिखाई दे रहे थे और ब्रा भी ।

रेखा-"अरे आप कब आए जी" रेखा शरमाती हुई बोली।

बीपी सिंह-"बस आकर खड़ा हुआ हूँ,कपडे बहुत अच्छे लाइ हो,इन कपड़ो में तुम बहुत सुन्दर लग रही हो,अगर में जवान होता तो अभी शुहागरात मना लेता" रेखा अपने पति की इस बात को सुनकर शंशय में पड़ जाती है की यदि वो जवान होता तो अभी शुहागरात मना लेता।

रेखा-'किसने कहा आप अभी जवान नहीं हो"रेखा जानबूझ कर अपने पति को उकसाती है जवानी का बास्ता देकर ।

बीपी सिंह-" अब क्या बताऊ तुम्हे रेखा,देखने से तो में जवान लगता हूँ लेकिन मेरी पुरुष शक्ति बीमारी के कारण नष्ट हो गई' रेखा सुन कर चोंक जाती है,उसके अरमानो पर पानी फिरता दिखाई दे रहा था उसे ।

रेखा-"मतलब नहीं समझी"

बीपी सिंह-"मेरी बन्दुक किसी काम की नही है"बीपी सिंह अपने लंड की तरफ इशारा करते हुए बोला तो रेखा के होश ही उड़ जाते हैं।

रेखा-"आपने इलाज नहीं करवाया?"

बीपी सिंह-"क्या करता इलाज करवा कर,मुझे सेक्स में कोई रूचि भी नहीं रही" बेचारी रेखा को ऐसा लगा जैसे उसका घर ही उजड़ गया हो।

रेखा-'कोई बात नहीं"बेचारी रूखे मन से अपनी प्रवल इच्छाओ की बली चढ़ती देख उसे बहुत गहरा धक्का सा लगा था।

बीपी सिंह-"अरे हाँ रेखा,मुझे अभी आस्ट्रेलिया जाना है, मेरी फ्लाइट एक घंटे बाद है,में खाना खा कर निकलता हूँ,तुम अपना ध्यान रखना" बेचारी रेखा तो शोक में खड़ी थी,सिर्फ "हाँ ठीक है"इतना ही बोल पाई, आज शुहागन होते हुए भी ऐसा लग रहा था जैसे विधवा हो गई हो। बीपी सिंह और रेखा डायनिंग टेवल पर जाकर खाना खाते हैं।

एक घंटे बाद बीपी सिंह जाने लगता है।

बीपी सिंह-"रेखा ध्यान रखना अपना,में तीन चार दिन में आ जाऊँगा"

रेखा-"जी ठीक है",बीपी सिंह रेखा को गले लगा कर निकल जाता है। रात के 11 बज चुके थे। रेखा का अब इस घर में मन नहीं लग रहा था। वो सूरज के कमरे में जाती है लेकिन सूरज उसे दिखाई नहीं देता है। रेखा समझ जाती है वो छत पर होगा,रेखा ऊपर जाती है । सूरज अकेला बैठा सड़क पर आते जाते लोगो को देख रहा था। रेखा सूरज के पास आकर खड़ी हो जाती है ।जैसे ही सूरज रेखा को देखता है तो उछल जाता है।

सूरज-"अरे माँ आप,क्या बात है थकी थकी सी लग रही हो,लगता है पापा ने आज बहुत मेहनत की है" सूरज रेखा के मायूस चेहरे को देख कर बोला,उसे क्या पता थी उसकी दुनिया और सारे सपने उजड़ गए हैं उसी के शोक और वियोग में खड़ी है। सूरज की नज़र रेखा की नायटी पर जाती है जिसमे उसके आधे से ज्यादा बूब्स और थोड़ी सी गांड दिखाई दे जाती है । सूरज लोअर पहना हुआ था जिसमे उसका लंड खड़ा हो जाता है।

सूरज-"माँ आप इस नायटी में बहुत हॉट और सेक्सी लग रही हो,पापा के होश उड़ गए होंगे,बोलो न माँ कितनी बार किया पापा ने" इस बार रेखा अपने वियोग से निकल कर बोलती है।

रेखा-"तेरे पापा नपुसंक है"यह सुनकर सूरज हैरान रह जाता है।

सूरज-"क्या पापा नपुसंक है,आपने देखा उनका पेनिस"

रेखा-"क्या करती देख कर,जब उन्होंने बोल ही दिया उनकी बन्दुक अब किसी का एनकाउंटर नहीं कर सकती है" सूरज को बहुत दुःख होता है। रेखा की आँख से आंसू निकलने लगते हैं।सूरज रेखा को गले लगा लेता है, रेखा सूरज से लिपट जाती है और रोने लगती है, सूरज रेखा को चुप करवाता है,इधर गले लगने से सूरज का लंड फिर से रेखा की चूत पर टकराता है, रेखा सिहर जाती है। काफी देर तक सूरज रेखा को शांत करवाता है ।

सूरज-"माँ आप परेसान मत हो, में आपके लिए डिडलो ले आया हूँ,उससे आप अपना काम चला सकती हो"

रेखा-"अब ये डिडलो क्या है?"

सूरज-'रबड़ का लंड" रेखा शर्मा जाती है।

रेखा-"कैसा होता है एक बार दिखा"

सूरज-"मेरे कमरे में रखा है चलो" सूरज रेखा को लेकर कमरे में जाता है,कमरे की लाइट जलाते ही सूरज रेखा की सेक्सी नायटी को देखने लगता है। रेखा के उरोज का आकार देख कर सूरज का मन उन्हें चूमने का करता है। फिर सूरज की नज़रे रेखा की जांघो पर जाती है जो दूधिया सफ़ेद मोटी मोटी चमक रही थी, रेखा की नायटी में उसकी चौड़ी गांड उसके बदन को और ज्यादा आकर्षण बना रही थी, सूरज के इस तरह देखने से रेखा मन ही मन शर्मा जाती है तभी उसे सूरज के लोअर में खड़ा लंड दिखाई देता है,रेखा की चूत गीली होने लगती है।

रेखा-"क्या देख रहा है सूरज"सूरज एक दम होश में आता है ।

सूरज-"माँ आप कितनी खुबसुरत हो,और हॉट"

रेखा-"हाँ मुझे पता है में हॉट हूँ"रेखा मुस्करा कर बोली।

सूरज-"कैसे पता चला माँ"

रेखा-"तेरे उसको जो हमेसा खड़ा ही रहता है"रेखा सूरज के लोअर में बने तम्बू की ओर इशारा करते हुए बोली, सूरज का लंड झटका मारता है,जैसे माँ को सलामी दे रहा हो।

सूरज-'मैंने कहा था न माँ,आप हो ही इतनी हॉट किसी का भी खड़ा हो जाएगा आपको देख कर"

रेखा-"जिनका खड़ा होना चाहिए उनका तो हुआ नहीं,दुसरो के खड़ा होने से मुझे क्या फायदा"

सूरज-"हाँ माँ ये बात तो ठीक है, आप खड़ी क्यूँ हो बैठ जाओ न" रेखा जैसे ही सोफे पर बैठी सूरज को रेखा की लाल जालीदार पेंटी दिखाई दे जाती है जिसमे रेखा की काली झांटे उभर रही थी,और पेंटी भी भीगी हुई थी, सूरज का लंड बाहर आने के लिए मचल जाता है,सूरज का मन कर रहा था माँ की चूत को चाट ले । रेखा समझ जाती है सूरज उसकी पेंटी देख रहा है रेखा नायटी से पेंटी को ढक लेती है। सूरज अपना लंड हाँथ से मसल देता है ।रेखा की चूत भी अब तक फड़कने लगी थी।

रेखा-'सूरज अब दे दे मुझे वो"

सूरज-"क्या?"

रेखा-'रबड़ का...' रेखा लंड बोल नहीं पा रही थी शर्म से।

सूरज-"रबड़ का क्या माँ",सूरज जानबूझ कर रेखा को छेड़ते हुए बोला।

रेखा-"तू जानता है,परेसान मत कर दे दे मुझे"रेखा अपने कमरे में जाकर अपनी भड़कती चूत की प्यास बुझाना चाहती थी ।

सूरज-'एक बार बोलो तो माँ, आपके मुह से सुनना चाहता हु"

रेखा-" तू मुझे बेशरम बना कर छोड़ेगा सूरज, रबड़ का लंड दे दे"

सूरज-" रबड़ का लंड, किसमें दू माँ" रेखा शर्मा जाती है,सूरज रेखा की चूत की ओर देखते हुए बोला।

रेखा-"मेरे हाँथ में दे,और तू किसमें देंना चाहता है" रेखा भी सूरज को छेड़ते हुए बोली।

सूरज-'जहां घुसाया जाता है वहां"यह सुनकर रेखा की चूत फड़कने लगती है और कामरस की बुँद भी टपक जाती है, रेखा नायटी के ऊपर से ही अपनी चूत मसल देती है ।

रेखा-" कहाँ" रेखा सिसकी लेते बोली,रेखा की चूत में खलबली मची थी,उसे भी मजा आने लगा था।

सूरज-" चूत में" यह सुनकर रेखा के रोंगटे खड़े हो गए,सूरज ने पहली बार अपनी माँ की चूत की ओर इशारा करते हुए चूत शब्द का शम्बोधन किया था।

रेखा-"ओह्ह्ह कितना बत्तमीज हो गया है तू,इतने गंदे शब्द भी बोलता है तू,कोई बेटा अपनी माँ के सामने ऐसा बोलता है क्या"

सूरज-"माँ इसे चूत न बोलू तो क्या बोलू,जब उसका नाम ही यही है तो बोलना तो पड़ेगा ही" रेखा की चूत में सरसराहट होने लगती है काम उत्तेजना बढ़ने लगती है,चूत को पुन मसलती है।

रेखा-"अब जल्दी से मुझे बो लंड दे दे"रेखा भी खुल कर बोली इस बार ।लेकिन सूरज की नज़र तो रेखा की जांघो पर थी।

सूरज-"माँ आप अपनी चूत क्यूँ मसल रही हो,कोई परेसानी है क्या?"रेखा को झटके पर झटके लग रहे थे।

रेखा-"कोई परेसानी नहीं है सूरज,तू बस आप बो रबड़ का लंड दे दे,मुझे वो करना है"रेखा चूत की आग में जल रही थी ।

सूरज रबड़ का लंड अलमारी से निकाल कर रेखा के पास सोफे पर बैठ जाता है, रेखा डिडलो को देख कर चोंक जाती है बिलकुल हु-ब-,हु लंड की तरह था जो 5 इंच और ढाई इंच मोटा था। रेखा हाँथ में लेकर लंड को सहलाती है उसे महसूस करती है।

रेखा-"यह तो बहुत बड़ा है सूरज,इससे तो मेरी जान निकल जाएगी'

सूरज-"अरे माँ ये लंड तो मेरे लंड से बहुत छोटा है,ये तो आराम से घुस जाएगा"

रेखा-"मुझे तो ये तेरे बराबर ही लग रहा है और तू इसे छोटा बोल रहा है,पिछली बार गाँव में जब तेरा लंड गलती से मेरी चूत में घुसा था तब मेरे अंदर छाले पड़ गए थे,इसे में नहीं घुसा पाउंगी सूरज"

सूरज-"अरे माँ मेरे पास तेल भी है उससे ये आराम से चला जाएगा,ये वास्तव में मेरे लंड से बहुत छोटा है"

रेखा-'में नहीं मानती हूँ ये छोटा है",रेखा अब जानबूझ कर उकसा रही थी सूरज को ताकि सूरज अपना लंड दिखा दे। सूरज भी इसी पल के इंतज़ार में था सूरज अपना लोअर उतार कर लंड को आज़ाद कर देता है, रेखा सूरज के लंड को आँखे फाड़े देख रही थी, लंड का लाल सुपाड़ा देख कर रेखा के मुह में पानी आने लगता है। सूरज का लंड विकराल रूप से खड़ा था ।

सूरज-'देखो माँ मेरा लंड और ये डिडलो" सूरज दोनों की लंबाई नापते हुए बोला।

रेखा-"डिडलो थोडा ही छोटा है"

सूरज-"माँ अपने हाँथ से नाप के देखो" रेखा अपने कपकपाते हांथो से डिडलो और सूरज के लंड को नापती है ।जैसे ही रेखा का हाँथ सूरज के लंड से स्पर्श होता है सूरज का लंड झटका मारने लगता है।रेखा की चूत बहने लगती है ।

सूरज-"माँ अब मेरा लंड पकड़ कर इसकी मोटाई देखो और डिडलो की", रेखा इसी बात का इंतज़ार कर रही थी तुरंत सूरज का लंड पकड़ कर मुट्ठी में लेती है सूरज का लंड फड़फड़ाने लगता है ।

रेखा-"ये तो झटके मार रहा है" रेखा लंड को सहलाती हुई बोली।

सूरज-"इसको शांत करना पड़ेगा"

रेखा-"कैसे शांत करता है इसे"

सूरज-"चूत में डालकर"

रेखा-"आज ही तो तूने हेलिना के साथ सेक्स किया था,अब फिर से इसे चाहिए'

सूरज-"इसने आपकी पेंटी में चूत की झलक देख ली है माँ,अब ये मुझे पूरी रात परेसान करेगा" सूरज रेखा की पेंटी देख रहा था जिसमें उसकी चूत झलक रही थी।

रेखा-'बड़ा बत्तमीज है तेरा लंड अपनी माँ की चूत देख कर भड़क गया,इसकी पिटाई लगा दूंगी"

सूरज-" माँ एक बार मुझे अपनी पेंटी और ब्रा में जिस्म दिखा दो"

रेखा-"क्या करेगा देख कर'

सूरज-'आपके जिस्म को देख कर मुठ मारूँगा"

रेखा-"नहीं यह गलत है,में चली अपने कमरे में,मुझे भी डिडलो करना है,तू अपना हाँथ से हिला ले"रेखा हँसती हुई, डिडलो लेकर कमरे में भाग जाती है। सूरज बेचारा देखता रह गया।

रेखा अपने कमरे में आते ही नायटी उतार देती है। बेड पर लेट कर अपनी पेंटी को टांगो से आज़ाद करके डिडलो पर तेल लगा कर चूत में प्रवेश करती है। बहुत देर से उसकी चूत फड़क रही थी, डिडलो थोडा सा ही अंदर जाता है,रेखा सिसक पड़ती है,अपनी दोनों टांगो को फैला कर डिडलो को पूरा घुसेड़ना का प्रयत्न करती है। रेखा की साँसे और धड़कन तेजी से चलने लगती है उत्तेजना के मारे रेखा पूरा डिडलो चूत में जाते ही जोर से चीखती है।

रेखा को हल्का सा दर्द होता है लेकिन तेल की चिकनाई के कारण अब आराम से अंदर बाहर होने लगता है। जीवन के 22 साल बाद उसे सम्भोग का सुख रबड़ के लंड से मिल तो रहा था लेकिन पूर्ण संतुष्टि नहीं ।

रेखा डिडलो को तेजी से चूत में चलाने लगती है और कुछ देर बाद ही झड़ जाती है।

रेखा झड़ने के पश्चात सूरज की ही कल्पना करती है। ऐसा लग था था जैसे सूरज उसकी चूत मार रहा है । रेखा झड़ने के बाद फिर से डिडलो को चूत में चलाने लगती है और कुछ देर बाद फिर से झड़ जाती है । अब रेखा के शारीर में जान नहीं थी इसलिए सो गई ।

इधर सूरज भी मुठ मार कर सो गया ।

सुबज 9 बजे सूरज की आँख खुली फ्रेस होकर निचे गया । रेखा उसे दिखाई नहीं दी। सूरज रेखा के कमरे में गया लेकिन रेखा उसे वहां भी दिखाई नहीं दी तभी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आई।

सूरज बेड पर बैठ गया तभी उसे तकिया के पास डिडलो दिखाई दिया। सूरज उसे उठाकर देखने लगा । रेखा की चूत का पानी उस पर लगा हुआ था जैसे अभी उसने चूत में डाला हो। सूरज ऊँगली से कामरस लेकर चाटने लगता है तभी रेखा सेक्सी नायटी पहन कर बाथरूम से निकलती है और सूरज को कामरस चाटते हुए देखती है ।

रेखा-',सूरज ये क्या कर रहा है? सूरज पलट कर रेखा को देखता है,रेखा नायटी में ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए उसके बूब्स आधे से ज्यादा दिखाई दे रहे थे और बालो से पानी टपक रहा था । रेखा बहुत सेक्सी लग रही थी ।

सूरज-"माँ इस पर सफ़ेद दूध जैसी मलाई लगी हुई है उसे चाट रहा हूँ",

रेखा-"छोड़ उसे वो मलाई नहीं है" रेखा डिडलो छीन लेती है ।

सूरज-"फिर क्या है माँ,बहुत स्वादिष्ट है" रेखा की चूत में चीटिया रेंगने लगती है ।

रेखा-"मेरा सफ़ेद पानी है"

सूरज-"आपका सफ़ेद पानी ये आपकी चूत से निकला हुआ पानी है क्या" रेखा की चूत गीली होने लगती है।

रेखा-"हाँ " रेखा शर्मा जाती है। और सोफे पर बैठ जाती है । रेखा भूल जाती है उसने पेंटी नहीं पहनी है,सूरज रेखा की चूत देख लेता है। जिस पर हलके काले बाल थे,रेखा की चूत की क्लिट दिखाई देती हैं जो दरबाजे की तरह खुल चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे गुलाब की दो पंखुडी हो। रेखा की चूत से रस निकल रहा था,जिससे उसकी चूत चमक रही थी।

सूरज-" माँ कितने बार आपने डिडलो से सेक्स किया"

रेखा-"तीन बार"सूरज का लंड झटके मारने लगता है ।

सूरज-"ओह्ह्ह माँ पूरा घुस गया ये आपकी चूत में",सूरज अपना लंड मसलते हुए रेखा की चूत की ओर इशारा करते हुए बोला।

रेखा-"हाँ पूरा घुस गया" रेखा भी उत्तेजित हो जाती है।

सूरज-"माँ आपकी चूत पे बाल उग आए हैं,साफ़ नहीं की आपने"

रेखा-'तूने कब देख ली मेरी चूत"

सूरज-"में तो अभी देख रहा हूँ आपकी चूत"रेखा तुरंत झुक कर अपनी चूत देखती है जो सूरज को साफ़ दिखाई दे रही थी।

रेखा-"ओह्ह्ह में पेंटी पहनना भूल गई,तू बहुत बत्तमीज है बड़े आराम से अपनी माँ की चूत देख रहा है" रेखा सोफे से उठ कर खड़ी हो जाती है।

सूरज-"माँ देखने दो न,आपकी चूत बाकई में बहुत अच्छी है मेरा मन कर रहा है आपकी चूत में जीव्ह डालकर सारा पानी चाट जाऊं" रेखा यह सुनकर हैरान रह जाती है ।

रेखा-'धत् ये भी कोई चाटने की चीज है कितना गन्दा है तू,रुक में पेंटी पहन लू"रेखा बॉथरूम जाने बाली थी।

सूरज रेखा का हाँथ पकड़ कर बेड पर बैठा देता है।

सूरज-"रहने दो न माँ,ऐसे ही अच्छी लगती हो"

रेखा-" तुझे तो हेलिना बहुत पसंद है,उसी की चूत देख"

सूरज-"अरे माँ कहाँ हेलिना और कहाँ आप,आप उसे लाख गुना अच्छी हो"

रेखा-"झूठी तारीफ़ न कर मेरी"

सूरज-'सच में माँ,मन करता है आपको बहुत प्यार करू"सूरज रेखा के गालो को चूमता है रेखा सिहर जाती है चूत में खलबली मच जाती है ।सूरज रेखा को दोनों हांथो से अपनी ओर खिसका लेता है ।

सूरज-'माँ डिडलो को चूत में डाल दू"सूरज डिडलो को पकड़ कर रेखा की झांघो पर फिराता है और चूत के पास ले जाता है,मेक्सी को ऊपर उठाने बाला होता है तभी रेखा सूरज का हाँथ पकड़ लेती है ।

रेखा-"मत कर सूरज,में अपने आपको रोक नहीं पाउंगी,सेक्स की आग में जल रही हूँ" सूरज रेखा को झुका कर बेड पर लेटा कर उसके ऊपर लेट जाता है ।

सूरज-"में हूँ न माँ,आपकी आग शांत कर दूंगा",सूरज रेखा के होंठो पर अपने होंठ रख देता है। सूरज जंगली की तरह रेखा के चेहरे को चूमता हुआ होंठो को चूसने लगता है, रेखा भी अब सूरज का साथ देने लगती है सूरज और रेखा एक दूसरे के मुह में जीव्ह डालकर चाटते है ।सूरज रेखा के होंठ चूसने के बाद गर्दन पर चूमने लगता है रेखा सिसक जाती है । बिना विरोध के सूरज का साथ देती है। सूरज रेखा को उठा कर नायटी से आज़ाद कर देता है रेखा के 40 साइज़ के बड़े पपीते जैसे बूब्स को सूरज चूसने लगता है निप्पल को होंठो से काटने लगता है ।

दोनों बूब्स को मसल कर निप्पल काटने लगता है रेखा की चूत बहने लगती है ।

रेखा-'आःह्ह्हूफ्फ्फ्फाह्ह्ह्ह् आह्ह्ह दर्द होता है आराम से बेटा" सूरज दोनों बूब्स बारी बारी चूसता है और फिर रेखा के पेट को चूमते हुए अपनी जीव्ह नाभि में डाल देता है रेखा सिसक जाती है और गांड उठा कर तड़पने लगती है ।

सूरज नाभि से जीव्ह निकाल कर रेखा की चूत को गोर से देखता है रेखा की चूत सिकुड़ती है तो कभी खुलती है । रेखा शर्मा रही थी । सूरज रेखा की टाँगे फेला कर चूत को सूंघता है फिर अपनी जीव्ह से चूत चाटने लगता है । रेखा तड़प जाती है आज से पहले उसकी चूत किसी ने नहीं चाटी थी ।

रेखा-'सूरज यह क्या कर रहा है,वो जगह गन्दी होती है अपनी जीव्ह हटा बहा से आह्ह्ह्हूफ्फ्ग्ग्ग्गह्ह्ह्ह्" रेखा तड़पते हुए बोली।

सूरज-"माँ सबसे स्वादिष्ट तो आपकी चूत ही है आज चाट लेने दो माँ" सुरज चूत में जीव्ह घुसेड़ देता है । रेखा को ऐसा लगा जैसे लंड घुसा हो ।

रेखा-'आह्ह्हूफ्फ्ग्ग्ग सूरज में झड़ जाउंगी" सूरज चूत का सारा पानी चाट कर जीव्ह निकाल देता है ।

सूरज-'माँ आपकी गांड बहुत अच्छी लगती है,इतनी मोटी गांड मैंने आज तक नहीं देखी, पीछे घुमो मुझे किस्स करनी है आपकी गांड की" रेखा पीछे घूम जाती है सूरज रेखा की गांड पर तमाचे मारता है और फिर मसलने लगता है ।

सूरज रेखा की गांड पर किस्सों की बरसात कर देता है।

रेखा-"सूरज अब ओर बर्दास्त नहीं होता बेटा, मेरी चूत में आग लगी हुई है" सूरज रेखा को चित लेटा कर डिडलो उठाता है, रेखा सूरज का हाँथ पकड़ लेती है ।

रेखा-'इससे नहीं सूरज,अपने लंड से कर"सूरज की तो मनोकामना ही पूरी हो गई थी सूरज अपनी टीशर्ट और लोअर उतार कर नंगा हो जाता है ।

रेखा की चूत पर एक किस्स करके अपना लंड चूत में घुसाता है, टोपा ही घुस पाया था रेखा दर्द से सिसकारी भर्ती है। सूरज आराम आराम घुसाता है।

रेखा-"तेल लगा कर घुसा सूरज"सूरज मेज पर राखी तेल की सीसी से तेल निकाल कर अपने लंड पर मलता है। सुरज का लंड तेल लगाने से चमकने लगता है । सूरज रेखा की टांगो को फेला कर अपना लंड चूत में प्रवेश करता है । आधा लंड घुसते ही रेखा तड़प उठती है । सूरज एक दूसरा झटका मारता है इस बार पूरा लंड रेखा की चूत में घुस जाता है ।

रेखा-"आःह्हूफ्ग्ग्ग सूरज कितना मोटा लंड है तेरा,और लंबा भी,मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ा दी" सूरज लंड निकल कर दुबारा घुसाता है रेखा गर्म हो जाती है अब सूरज रेखा की चूत में तेज तेज धक्के पेलने लगता है ।

सूरज-"माँ 22 साल से आपकी चूत बंद रही है,आज ऐसा लग रहा है जैसे कुंवारी लड़की की सील टूटी हो,बहुत टाइट है तुम्हारी चूत माँ" सूरज तेज तेज धक्के मारता है । रेखा झड़ जाती है ।

सूरज-"माँ घोड़ी बनो"रेखा घोड़ी बन जाती है सूरज रेखा की चूत देखता है ,लंड डालने से गुफा दिखाई देने लगती है । सूरज लंड डाल कर फिर से चौदने लगता है । काफी देर तक चोदने के बाद रेखा थक जाती है और फिर से लेट जाती है ।

सूरज रेखा की दोनों टाँगे कंधे पर रख कर चोदने लगता है ।

रेखा फिर से झड़ने लगती है लेकिन सूरज झड़ने का नाम नहीं ले रहा था ।

रेखा-"सूरज में दो बार झड़ गई तेरा पानी अभी तक नहीं निकला"

सूरज-में भी झड़ने बाला हूँ माँ"सूरज तेज तेज धक्को के साथ झड़ जाता है, और लंबी लंबी सांसे लेता हुआ रेखा को सीने से लगा कर ऊपर ही लेट जाता है । रेखा भी सूरज को अपनी बाँहो में जकड़ लेती है । आधा घंटा लेटने के बाद सूरज का लंड सिकुड़ कर चूत से बाहर निकल आता है। रेखा सूरज को उठा कर बाथरूम में चली जाती है। सूरज भी बॉथरूम में जाकर नहाने लगता है ।

रेखा अपनी चूत को साफ़ कर लेती है ।

रेखा-",मुझे बहुत तेज पिसाब लगी है सूरज अब तू बाहर जा"

सूरज-"नहीं मेरे सामने मूतो,

रेखा-"मुझे शरम आएगी"

सूरज-"अब कैसी शर्म माँ,"सूरज की चूत में जिव डाल देता है तभी रेखा मूतने लगती है । सूरज रेखा की पिसाब से अपना मुह धोने लगता है।

रेखा-"बेशरम है तू" दोनों लोग फ्रेस होकर निकल आते हैं ।

सूरज और रेखा रात में भी दो बार चुदाई करते हैं।

बीपी सिंह के चार दिन तक रोज़ाना सूरज दिन और में चुदाई करता था ।

एक महिने बाद इंडिया आने के बाद बीपी सिंह ने पूनम और तान्या की शादी बिजनेस मेन से कर दी। दोनों दीदी अच्छे घर में पहुँच गई जहाँ उनका हुकुम चलता है । कभी मुझे मोका मिलता तो दीदी मुझसे जरूर चुदवाती और अब वो दोनों अब प्रेग्नेंट हैं।

तनु दीदी तान्या दीदी की कंपनी संभालने लगी।

इस प्रकार चुदाई का सिलसिला चलता गया,कभी संध्या तो कभी रेखा ।

कहानी को पढ़ने और साथ देने के लिए सभी का आभार दोस्तों।

समाप्त

The end

 
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