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कुछ देर की चुप्पी के बाद प्रियंका ने कहा, "आप वहां होंगी?"
"यु बेट! मैं अपनी प्यारी बहना के चेहरे पर मस्ती और मज़ा देखने ज़रूर रहूंगी"
"जीजू बहुत नाराज़ होंगे - उनको धोखे से मेरे साथ सेक्स करवाना सिरियस काम है"
"सिरियस काम तो है" पल्लवी के दिमाग में वह दृश्य घूम गया जब रूद्र का लिंग माला की योनि में जा रहा था "लेकिन इससे एक हिसाब चुकता हो जायेगा"
"ठीक है ... तो हम लोग क्या करेंगे?" प्रियंका ने आस भरी आवाज़ में कहा।
"बड़ी जल्दी हो रही है मेरी लाडो को" पल्लवी ने मज़े लेते हुए कहा। "चलो, पहले अपनी चड्ढी उतारो, देखूं तो कितनी जगह है वहां। पहले ही बता देती हूँ की रूद्र का लिंग बहुत बड़ा है।"
दोनो सहेलियां ऐसी कामुक बाते और कामुक क्रीड़ा करते पुनः लीन हो गयी।
रूद्र के चेहरे का हाव भाव देखने वाला था - वो जैसे ही घर में प्रविष्ट हुआ, पल्लवी उस पर मानो कूद ही गयी। रूद्र को अपनी बाहों में लपेट कर पल्लवी उसको कामुक आवेश में बेतहाशा चूमने लगी।
"जल्दी से रूम में चलो। माँ के आने से पहले हम लोग एक राउंड ख़तम कर सकते हैं" पल्लवी ने कामुक भारी आवाज़ में कहा।
प्रियंका को रूद्र से रतिसंयोग करवाने की योजना बनाते हुए पल्लवी की कल्पना शक्ति इतनी फ़ैल गयी थी की आज इतनी बार प्रचंड और भावुक रति संयोग करने के पश्चात भी पल्लवी पुनः पहले की ही भांति बहकने लगी थी। लेकिन उसको रूद्र की उत्तेजना प्रियंका के लिए बचा कर रखनी थी। चूमते और एक दुसरे के अंगो को सहलाते हुए दोनों प्रेमी बड़ी मुश्किल से अपने कमरे में आ पाए। कुछ ही देर में दोनों की निर्वस्त्र हो गए - पल्लवी ने तुरंत ही रूद्र का लिंग अपने मुह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
"आज तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है"
"अच्छा? क्या?"
"अगर बता दिया तो कैसा सरप्राइज?"
"बात तो ठीक है"
"हाँ ... चलो, अब अपनी आँखें बंद कर लो, और तब तक नहीं खोलो जब तक मैं न कहूं। ओके?"
"ओके"
"पक्का जानू! प्लीज़ आँख मत खोलना।"
"ठीक है, प्रोमिस।"
जब पल्लवी तो पक्का विश्वास हो गया की रूद्र आँख नहीं खोलेगा, तो उसने हाथ हिला कर प्रियंका को कमरे के अन्दर बुला लिया। प्रियंका कमरे में आकर अपने कपडे उतारने लगी और पल्लवी रूद्र के लिंग को अच्छी तरह से चूस कर स्तंभित करने लगी। प्रियंका अब पूर्णतया नग्न थी। उसकी आँखें रूद्र के खड़े होते लिंग पर जम गयी - वह लगभग पूर्ण स्तंभित हो चुका था और प्रियंका को उसका आकर काफी विशालकाय लगा।
प्रियंका को समझ आ गया की यह तो उसकी योनि के अन्दर आसानी से नहीं जाने वाला।
पल्लवी ने इशारे से प्रियंका को पास बुलाया। योजना के अनुरूप प्रियंका को भी रूद्र का लिंग चूसना था, जिससे उसको कोई संदेह न हो सके। किन्तु प्रियंका ऐन मौके पर असहज हो गयी। लेकिन पल्लवी की अभिवाचक आँखों और उग्र संकेतों से विवश होकर आखिरकार उसने रूद्र के लिंग को अपने मुँह में भर लिया। रूद्र का शिश्नाग्र ने उसके मुँह को ठीक वैसे ही भर लिया जैसे की एक बड़ा सा लड्डू बच्चो के मुँह को भर लेता है और वो ठीक से साँस नहीं ले पाते और बात नहीं कर पाते।
खैर, जैसे तैसे प्रियंका सहज हो गयी और ठीक से चूसने लगी। पल्लवी बस यही मन रही थी की रूद्र को कोई संदेह न हो। उधर रूद्र आनंद के सागर में गोते लगा रहा था और उसको अपने लिंग पर जो भी भिन्न भिन्न अनुभव हो रहे थे, उनको वह पल्लवी के 'सरप्राइज' का ही हिस्सा मान कर मज़े ले रहा था।
अन्ततः प्रियंका उठी, और रूद्र के जघन क्षेत्र पर जाकर, घुटने के बल बैठ गयी। उसकी योनि इस पूरे क्रिया कलाप से रस-सिंचित हो गयी थी और वस्तुतः चू रही थी। पल्लवी ने रूद्र के लिंग को पकड़ कर उसकी योनि पर स्थापित कर दिया। प्रियंका अब बहुत घबरा रही थी - लेकिन पल्लवी ने उसके स्तनों को थोडा दबा कर एक मुस्कुराते हुए उसका साहस बढाया, और सर हिला कर उसको रूद्र के लिंग को अन्दर जाने देने के लिए बोला।
एक गहरी सांस लेकर प्रियंका धीरे धीरे रूद्र के लिंग पर बैठने लगी। घबराहट और तनाव के कारण प्रियंका का संकरा योनि-मार्ग थोडा और संकुचित हो गया। अतः, लिंग उसकी योनि के अन्दर ठीक से नहीं जा पा रहा था। वैसे पल्लवी और प्रियंका की योनि का आकार और परिधि एक जैसी ही थी, लेकिन तनाव के कारण उसकी योनि की अवरोधिनी पेशी अत्यधिक संकुचित हो गयी थी। वस्तुतः, रूद्र का शिश्नाग्र बस वहीँ पर फँस कर रह गया। प्रियंका के जघन क्षेत्र में पीड़ा होने लगी। इस अधीरता में उसका संतुलन बिगड़ गया और वह रूद्र के लिंग पर उर्ध्वाकार ही गिर गई। इससे तीन बाते हुईं - पहला यह की लिंग बहुत ही बेदर्दी से उसकी योनि को चीरता अन्दर चला गया; जिसके कारण प्रियंका को प्राण-संतार्जक पीड़ा का अनुभव हुआ, और तीसरा यह की ऐसे अटपटे ढंग से बैठने के कारण रूद्र को भी लिंग-क्षेत्र में पीड़ा हुई। लिहाजा, रूद्र और प्रियंका दोनों के ही कंठ से चीख निकल गयी। रूद्र की आँखे खुल ही गयी! सामने पल्लवी नहीं थी - 'ये कौन? अरे! यह तो प्रियंका है!!'
"व्हाट द हेल!" रूद्र चिल्लाया, और उसने प्रियंका को अपने लिंग से उठा कर लगभग पटक ही दिया। प्रियंका के चेहरे पर भय और पीड़ा का मिला जुला भाव व्याप्त हो गया।
"प्रियंका?" रूद्र अविश्वास के स्वर में बोला।
"जी..जू!" प्रियंका बस इतना की उत्तर दे सकी।
रूद्र गुस्से से पल्लवी की तरफ मुड़ा, "ये तुम्हारा ही पागलपन भरा आईडिया था?" उधर प्रियंका ने रोना शुरू कर दिया।
रूद्र किसी को भी रोते हुए नहीं देख सकता था। और प्रियंका तो व्यवहारिक तौर पर उसकी एकलौती साली थी। "ओह नो!" कह कर उसने प्रियंका को अपने आलिंगन में सिमटा लिया और उसके सर और पीठ को सहला कर दिलासा देने लगा। यह दृश्य देख कर पल्लवी भी रोये बिना न रह सकी। बेचारे रूद्र की आफत ही आ गई!
"कम हियर!" रूद्र ने मृदुलता से कहा और उसने पल्लवी को भी अपने से सिमटा लिया। उसने कुछ देर तक दोनों लड़कियों को ऐसे ही दुलारता रहा।
"फील बेटर?"
"यस! आई थिंक आई ऍम नाउ" प्रियंका ने सुबकते हुए कहा।
"तुम अभी भी हम पर गुस्सा हो?" पल्लवी ने पूछा।
"नहीं नहीं ... लेकिन ऐसा क्यों किया तुम लोगो ने?"
"मुझे लगा की यह सेक्सी और एक्साइटिंग रहेगा। मुझे मालूम है की तुमको प्रियंका पसंद है, और यह भी की उसको तुम पसंद हो। तो मैंने सोचा की तुम दोनों को ही सैटिस्फाई कर दिया जाए!"
"तुम लोग एकदम बदमाश हो। ये तुम लोगो ने मुझे किस समस्या में फंसा दिया?"
प्रियंका ने आखिरकार हिम्मत कर के पूछ ही लिया, "आप मेरे साथ करेंगे? ......... प्लीज़?"
"लेकिन मैं ही क्यों?"
"जीजू, मैंने कभी भी किसी लड़के से सेक्स नहीं किया। और मुझे मालूम है की दीदी आपके साथ कितना खुश हैं। मुझे लगा की अगर मुझे अगर सेक्स करना ही है तो मैं उसके साथ करूंगी जो मुझे पसंद है, और जो मेरा केयर और रेस्पेक्ट करता है।"
पल्लवी ने जोड़ा, "रूद्र, अगर तुम प्रियंका के साथ सेक्स करोगे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा। तुम दोनों अगर कुछ खुशी पा सको तो मुझे बहुत अच्चा लगेगा।"
"लेकिन ... आई कैन हर्ट हर! इट कैन हर्ट आवर मैरिज!"
"तुमने प्रियंका को अभी अभी जितना हर्ट किया है, उससे ज्यादा हर्ट नहीं कर सकोगे। और जहाँ तक हमारे रिश्ते की बात है, तो मैं और तुम एक दुसरे को बहुत बहुत प्यार करते हैं। और, इस बात को समझो की की मैंने खुद ने तुम लोगो के लिए यह अरेंज किया है। अगर तुम अगर प्रिया के साथ सेक्स करोगे तो मैं तुमको और भी प्यार करूंगी।"
"लेकिन ये अभी छोटी है! इसको क्या ज़रुरत है?"
"तुमको चाहती है ये! और तुम इसकी सबसे ज्यादा केयर करते हो - यह बात हम सब जानते हैं।"
"यु बेट! मैं अपनी प्यारी बहना के चेहरे पर मस्ती और मज़ा देखने ज़रूर रहूंगी"
"जीजू बहुत नाराज़ होंगे - उनको धोखे से मेरे साथ सेक्स करवाना सिरियस काम है"
"सिरियस काम तो है" पल्लवी के दिमाग में वह दृश्य घूम गया जब रूद्र का लिंग माला की योनि में जा रहा था "लेकिन इससे एक हिसाब चुकता हो जायेगा"
"ठीक है ... तो हम लोग क्या करेंगे?" प्रियंका ने आस भरी आवाज़ में कहा।
"बड़ी जल्दी हो रही है मेरी लाडो को" पल्लवी ने मज़े लेते हुए कहा। "चलो, पहले अपनी चड्ढी उतारो, देखूं तो कितनी जगह है वहां। पहले ही बता देती हूँ की रूद्र का लिंग बहुत बड़ा है।"
दोनो सहेलियां ऐसी कामुक बाते और कामुक क्रीड़ा करते पुनः लीन हो गयी।
रूद्र के चेहरे का हाव भाव देखने वाला था - वो जैसे ही घर में प्रविष्ट हुआ, पल्लवी उस पर मानो कूद ही गयी। रूद्र को अपनी बाहों में लपेट कर पल्लवी उसको कामुक आवेश में बेतहाशा चूमने लगी।
"जल्दी से रूम में चलो। माँ के आने से पहले हम लोग एक राउंड ख़तम कर सकते हैं" पल्लवी ने कामुक भारी आवाज़ में कहा।
प्रियंका को रूद्र से रतिसंयोग करवाने की योजना बनाते हुए पल्लवी की कल्पना शक्ति इतनी फ़ैल गयी थी की आज इतनी बार प्रचंड और भावुक रति संयोग करने के पश्चात भी पल्लवी पुनः पहले की ही भांति बहकने लगी थी। लेकिन उसको रूद्र की उत्तेजना प्रियंका के लिए बचा कर रखनी थी। चूमते और एक दुसरे के अंगो को सहलाते हुए दोनों प्रेमी बड़ी मुश्किल से अपने कमरे में आ पाए। कुछ ही देर में दोनों की निर्वस्त्र हो गए - पल्लवी ने तुरंत ही रूद्र का लिंग अपने मुह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
"आज तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है"
"अच्छा? क्या?"
"अगर बता दिया तो कैसा सरप्राइज?"
"बात तो ठीक है"
"हाँ ... चलो, अब अपनी आँखें बंद कर लो, और तब तक नहीं खोलो जब तक मैं न कहूं। ओके?"
"ओके"
"पक्का जानू! प्लीज़ आँख मत खोलना।"
"ठीक है, प्रोमिस।"
जब पल्लवी तो पक्का विश्वास हो गया की रूद्र आँख नहीं खोलेगा, तो उसने हाथ हिला कर प्रियंका को कमरे के अन्दर बुला लिया। प्रियंका कमरे में आकर अपने कपडे उतारने लगी और पल्लवी रूद्र के लिंग को अच्छी तरह से चूस कर स्तंभित करने लगी। प्रियंका अब पूर्णतया नग्न थी। उसकी आँखें रूद्र के खड़े होते लिंग पर जम गयी - वह लगभग पूर्ण स्तंभित हो चुका था और प्रियंका को उसका आकर काफी विशालकाय लगा।
प्रियंका को समझ आ गया की यह तो उसकी योनि के अन्दर आसानी से नहीं जाने वाला।
पल्लवी ने इशारे से प्रियंका को पास बुलाया। योजना के अनुरूप प्रियंका को भी रूद्र का लिंग चूसना था, जिससे उसको कोई संदेह न हो सके। किन्तु प्रियंका ऐन मौके पर असहज हो गयी। लेकिन पल्लवी की अभिवाचक आँखों और उग्र संकेतों से विवश होकर आखिरकार उसने रूद्र के लिंग को अपने मुँह में भर लिया। रूद्र का शिश्नाग्र ने उसके मुँह को ठीक वैसे ही भर लिया जैसे की एक बड़ा सा लड्डू बच्चो के मुँह को भर लेता है और वो ठीक से साँस नहीं ले पाते और बात नहीं कर पाते।
खैर, जैसे तैसे प्रियंका सहज हो गयी और ठीक से चूसने लगी। पल्लवी बस यही मन रही थी की रूद्र को कोई संदेह न हो। उधर रूद्र आनंद के सागर में गोते लगा रहा था और उसको अपने लिंग पर जो भी भिन्न भिन्न अनुभव हो रहे थे, उनको वह पल्लवी के 'सरप्राइज' का ही हिस्सा मान कर मज़े ले रहा था।
अन्ततः प्रियंका उठी, और रूद्र के जघन क्षेत्र पर जाकर, घुटने के बल बैठ गयी। उसकी योनि इस पूरे क्रिया कलाप से रस-सिंचित हो गयी थी और वस्तुतः चू रही थी। पल्लवी ने रूद्र के लिंग को पकड़ कर उसकी योनि पर स्थापित कर दिया। प्रियंका अब बहुत घबरा रही थी - लेकिन पल्लवी ने उसके स्तनों को थोडा दबा कर एक मुस्कुराते हुए उसका साहस बढाया, और सर हिला कर उसको रूद्र के लिंग को अन्दर जाने देने के लिए बोला।
एक गहरी सांस लेकर प्रियंका धीरे धीरे रूद्र के लिंग पर बैठने लगी। घबराहट और तनाव के कारण प्रियंका का संकरा योनि-मार्ग थोडा और संकुचित हो गया। अतः, लिंग उसकी योनि के अन्दर ठीक से नहीं जा पा रहा था। वैसे पल्लवी और प्रियंका की योनि का आकार और परिधि एक जैसी ही थी, लेकिन तनाव के कारण उसकी योनि की अवरोधिनी पेशी अत्यधिक संकुचित हो गयी थी। वस्तुतः, रूद्र का शिश्नाग्र बस वहीँ पर फँस कर रह गया। प्रियंका के जघन क्षेत्र में पीड़ा होने लगी। इस अधीरता में उसका संतुलन बिगड़ गया और वह रूद्र के लिंग पर उर्ध्वाकार ही गिर गई। इससे तीन बाते हुईं - पहला यह की लिंग बहुत ही बेदर्दी से उसकी योनि को चीरता अन्दर चला गया; जिसके कारण प्रियंका को प्राण-संतार्जक पीड़ा का अनुभव हुआ, और तीसरा यह की ऐसे अटपटे ढंग से बैठने के कारण रूद्र को भी लिंग-क्षेत्र में पीड़ा हुई। लिहाजा, रूद्र और प्रियंका दोनों के ही कंठ से चीख निकल गयी। रूद्र की आँखे खुल ही गयी! सामने पल्लवी नहीं थी - 'ये कौन? अरे! यह तो प्रियंका है!!'
"व्हाट द हेल!" रूद्र चिल्लाया, और उसने प्रियंका को अपने लिंग से उठा कर लगभग पटक ही दिया। प्रियंका के चेहरे पर भय और पीड़ा का मिला जुला भाव व्याप्त हो गया।
"प्रियंका?" रूद्र अविश्वास के स्वर में बोला।
"जी..जू!" प्रियंका बस इतना की उत्तर दे सकी।
रूद्र गुस्से से पल्लवी की तरफ मुड़ा, "ये तुम्हारा ही पागलपन भरा आईडिया था?" उधर प्रियंका ने रोना शुरू कर दिया।
रूद्र किसी को भी रोते हुए नहीं देख सकता था। और प्रियंका तो व्यवहारिक तौर पर उसकी एकलौती साली थी। "ओह नो!" कह कर उसने प्रियंका को अपने आलिंगन में सिमटा लिया और उसके सर और पीठ को सहला कर दिलासा देने लगा। यह दृश्य देख कर पल्लवी भी रोये बिना न रह सकी। बेचारे रूद्र की आफत ही आ गई!
"कम हियर!" रूद्र ने मृदुलता से कहा और उसने पल्लवी को भी अपने से सिमटा लिया। उसने कुछ देर तक दोनों लड़कियों को ऐसे ही दुलारता रहा।
"फील बेटर?"
"यस! आई थिंक आई ऍम नाउ" प्रियंका ने सुबकते हुए कहा।
"तुम अभी भी हम पर गुस्सा हो?" पल्लवी ने पूछा।
"नहीं नहीं ... लेकिन ऐसा क्यों किया तुम लोगो ने?"
"मुझे लगा की यह सेक्सी और एक्साइटिंग रहेगा। मुझे मालूम है की तुमको प्रियंका पसंद है, और यह भी की उसको तुम पसंद हो। तो मैंने सोचा की तुम दोनों को ही सैटिस्फाई कर दिया जाए!"
"तुम लोग एकदम बदमाश हो। ये तुम लोगो ने मुझे किस समस्या में फंसा दिया?"
प्रियंका ने आखिरकार हिम्मत कर के पूछ ही लिया, "आप मेरे साथ करेंगे? ......... प्लीज़?"
"लेकिन मैं ही क्यों?"
"जीजू, मैंने कभी भी किसी लड़के से सेक्स नहीं किया। और मुझे मालूम है की दीदी आपके साथ कितना खुश हैं। मुझे लगा की अगर मुझे अगर सेक्स करना ही है तो मैं उसके साथ करूंगी जो मुझे पसंद है, और जो मेरा केयर और रेस्पेक्ट करता है।"
पल्लवी ने जोड़ा, "रूद्र, अगर तुम प्रियंका के साथ सेक्स करोगे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा। तुम दोनों अगर कुछ खुशी पा सको तो मुझे बहुत अच्चा लगेगा।"
"लेकिन ... आई कैन हर्ट हर! इट कैन हर्ट आवर मैरिज!"
"तुमने प्रियंका को अभी अभी जितना हर्ट किया है, उससे ज्यादा हर्ट नहीं कर सकोगे। और जहाँ तक हमारे रिश्ते की बात है, तो मैं और तुम एक दुसरे को बहुत बहुत प्यार करते हैं। और, इस बात को समझो की की मैंने खुद ने तुम लोगो के लिए यह अरेंज किया है। अगर तुम अगर प्रिया के साथ सेक्स करोगे तो मैं तुमको और भी प्यार करूंगी।"
"लेकिन ये अभी छोटी है! इसको क्या ज़रुरत है?"
"तुमको चाहती है ये! और तुम इसकी सबसे ज्यादा केयर करते हो - यह बात हम सब जानते हैं।"