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तभी उसका फ़ोन बजा , गुप्ता था।
नमिता: हाय गुप्ता सर कैसे हैं?
गुप्ता: अरे बढ़िया हूँ। राज के साथ बात आगे बढ़ी?
नमिता: जी सब कुछ आपके प्लान के हिसाब से हो रहा है।
गुप्ता: बढ़िया, तो फिर तो तुमको वह बहुत गरमकर देता होगा, तो ठंडी कैसे होती हो?
नमिता अभी ही तो ठंडी हुई थी। वह बोली: जी बस ऐसे ही अपने आप पर नियंत्रण रखती हूँ।
गुप्ता: अरे हम मर गयें हैं क्या, हमारे पास आ जाना हम ठंडा कर देंगे।
नमिता: जी आ जाऊँगी। एक बात तो बताइए, कि कहीं आपने सुधाकर जी को मेरे और राज के बारे में तो नहीं बता दिया है?
गुप्ता: कैसी बात कर रही हो, बिलकुल नहीं बताया है और ना हीं बताऊँगा।
नमिता : बहुत बहुत धन्यवाद। मैं नहीं चाहती कि ये बात किसी को पता चले।
गुप्ता : कभी नहीं पता चलेगी। पर तुम कब आओगी, मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है।
नमिता हँसते हुए बोली: जल्दी ही आऊँगी। और उसने फ़ोन रख दिया।
अब नमिता शांत मन से अपना काम करने लगी। लंच ब्रेक के बाद राज का फ़ोन आया। वह बोला: माँ क्या कर रही हो?
नमिता: बेटा काम कर रही हूँ। तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है?
राज: एक बार पूरा कोर्स हो गया है। अब उसको दोहराऊँगा।
नमिता: शाबाश मेरा बहादुर बच्चा।
राज: माँ आपकी याद आ रही है। आपके दूध और चूतर दबाने का मन कर रहा है।
नमिता: धत बदमाश कहीं का। चल जब घर आऊँगी तब जो दबाना ही दबा लेना अभी पढ़ने बैठ।
राज: माँ मेरा लौड़ा अभी खड़ा है आप गंदी बातें करो ना तो मैं मूठ्ठ मार लूँगा।
नमिता : पागल हो गया है क्या ? चल फ़ोन रख।
राज: माँ मूठ्ठ मार लूँगा तो शांत होकर पढ़ सकूँगा। नहीं तो फिर ध्यान भटकेगा।
नमिता: अच्छा रुक मैं एक कोने में जाती हूँ नहीं तो कोई सुन लिया तो ग़ज़ब हो जाएगा।
नमिता एक कोने मेंजाकर बोली: हाँ बोल क्या सुनना चाहता है?
राज: माँ इसको फ़ोन सेक्स कहते हैं।
नमिता: ओह तो बोल क्या बोलूँ?
राज: मान लो मैं और आप पति पत्नी हैं और हनीमून पर गए हैं और वहाँ एक जंगल में हम दोनों अकेले हैं और मैं आपको वहीं खुले में चोदना चाहता हूँ, तो ऐसी स्तिथि में हम जो बातें और काम करेंगे , हम उसकी ही बात करेंगे।
नमिता: ओह चल ठीक है। तू शुरू कर।
राज: देखो निम्मु कितना घना जंगल है, कितना रोमांटिक लग रहा है।
नमिता: मुझे तो डर लग रहा है कि कहीं जानवर ना आ जाए।
राज: मैं आपको अपने से चिपका लेता हूँ और बोलता हूँ , निम्मु मैं हूँ ना फिर क्यों डरती हो? फिर मैं आपके होंठ चूसने लगता हूँ। माँ आप कुछ बोलो ना?
नमिता: तूने तो मेरे होंठ दबा लिए है चूमते हुए , मैं कैसे बोलूँ? हा ह हा हा । वह हँसने लगी।
राज: माँ आप हँसोगी तो कैसे मज़ा आएगा? आप आऽऽह बोल दो ना कम से कम।
नमिता: आहाह्ह्ह्ह्ह।
राज: फिर मैं आपकी चूचियाँ दबाने लगता हूँ और आपके निपल्ज़ को भी उमेठ कर आपको मस्त कर देता हूँ।
नमिता:ओह्ह्ह्ह्ह ये क्या कर रहे हो आह।
राज: निम्मु , मेरी जान क्या चूचियाँ हैं तुम्हारी, बहुत मज़ा आ रहा है । चलो अपना ब्लाउस और ब्रा खोलो , मुझे चूसना है तुम्हारे मम्मे ।
नमिता: आह रुको खोलती हूँ। लो खुल गया।
राज: निम्मु आऽऽहहह क्या मज़ा आ रहा है चूसने में तुम्हारे दुद्दु आऽऽहहह मस्त बड़े बड़े है ।
नमिता: आऽऽऽऽहहह और चूसो मेरे राजआऽऽऽऽ।
राज: आऽऽऽह अब मेरी जान निम्मु अपनी साड़ी उठाओ और उस पेड़ के सहारे खड़ी हो जाओ।
नमिता: आह लो अब डालो मेरे राजा।
राज: क्या डालूँ मेरी निम्मु ?
नमिता: आऽऽह अपना लंड और क्या? प्लीज़ डाल दो ना।
राज: लो डाल दिया आऽऽहहह क्या टाइट बुर है तुम्हारी आऽऽहहहह।
नमिता: ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह चोदो राजाआऽऽऽऽऽऽ ज़ोर से चोदोओओओओओओ
अब राज बोला: माँ मेरा झड़ रहा है आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरा झड़ाआऽऽऽऽ ।
नमिता भी अपनी बुर पर हाथ फेरकर खुजायी और बोली: चल झड़ गया ना। अब पढ़ने बैठ जा।
राज: माँ आइ लव यू। आह बहुत मज़ा आया।मॉ, आप जैसे ही मुझे चोदो बोली, मेरा पानी छूटने लगा। माँ इसको RP कहते है।
नमिता: मतलब?
राज: माँ रोल प्ले मतलब कल्पना करके एक दूसरे की फ़ण्टसी को संतुष्ट करते हैं।
नमिता: ओह चल तू संतुष्ट हुआ ना । अब पढ़ाई कर।
राज: ज़रूर माँ अभी साफ़ करके पढ़ने बैठता हूँ।
नमिता ने बाई कहकर फ़ोन काट दिया।
वह अब राज की हरकतों से फिर से गरम हो गयी थी।
उसने कुर्सी पर बैठकर अपनी जाँघों को भींचा और काम में लग गयी।
शाम को जब वह घर पहुँची तो सीधे राज के कमरे की ओर गयी और वहाँ उसको बड़े ही लगन से पढ़ते देखकर बहुत ख़ुश हो गयी और बोली: मेरा प्यारा बेटा पढ़ता हुआ कितना प्यारा दिखता है!
राज ने माँ को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया और उसके होंठ चूम लिया।
नमिता ने कहा: फिर नियम तोड़े तुम?
अब राज ने उसकी गर्दन और गाल चूमे और बोला: होंठ चूमे है चूसे तो नहीं ना।
अब वह उसकी छातियाँ दबाने लगा।फिर पेट पर भी हाथ फेरने लगा। नमिता थोड़ी देर बाद बोली: चल छोड़ मुझे अब चाय बनाती हूँ।
नमिता के खड़े होते ही राज उसके चूतरों को पकड़कर दबाने लगता है। और उसकी नंगी पीठ और कमर को चूमने लगता है। नमिता उसको थोड़ी देर मज़ा लेने देती है, फिर पलटकर उसके गाल चूमकर बोलती है: चल अब छोड़, बहुत दबा लिया।
अब वह उसके नंगे पेट को चूमते जाता है और उसकी नाभि में अपनी जीभ डाल देता है।
नमिता अब गरम होने लगती है, उसका खड़ा लौड़ा पकड़कर दबाके बोली: देख तेरा फिर खड़ा हो गया। चल अब चाय पी ले और फिर इसको ठंडे पानी से धोके पढ़ने बैठ जाना।इसको अभी थोड़ी देर पहले तो फ़ोन से मैंने ठंडा किया था और तू फिर से इसको खड़ा कर बैठा।
दोनों हँसते हुए किचन की ओर चल पड़े।
राज जाकर किचन के प्लेट फ़ॉर्म में चढ़कर बैठ गया और माँ को चाय बनाते देखने लगा। फिर वह बोला: माँ आप घर पर सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में रहा करो ना, ये साड़ी क्यों पहनती हो?
नमिता: तेरा बस चले तो मुझे नंगी ही घुमाए । मुझे अजीब लगेगा तेरे सामने बिना साड़ी के। फिर कभी कोई मेहमान आ गया तो मैं क्या करूँगी?
राज: मैं दरवाज़ा खोलूँगा मेहमान को बैठाऊँगा तब तक आप साड़ी पहन कर आ जाना।
नमिता: तेरे पास मेरी हर बात का जवाब रहता है।
राज ज़िद करते हुए बोला: माँ प्लीज़ उतार दो ना।
नमिता: मैं देख रही हूँ तू ज़िद्दी होते जा रहा है।
राज: प्लीज़ माँ उतार दो ना।
नमिता: अच्छा बाबा उतार देती हूँ पर इसके आगे अब और कोई ज़िद नहीं करना।
राज ख़ुश होकर बोला: ठीक है माँ आगे से ज़िद बंद ।
नमिता चाय लेकर टेबल पर पहुँची और फिर अपनी साड़ी खोलने लगी। साड़ी उतार कर वह ब्लाउस और पेटिकोट में क्या जँच रही थी। उसके आगे और पीछे दोनों के उभार उसको बहुत कामुक बना रहे थे।
अब वह वैसे ही टेबल पर बैठकर चाय पीने लगी। राज भी चाय पिते हुए उसके ब्लाउस के बाहर से झाँकते हुए मोटे मोटे मम्मों को देखकर मस्त हो रहा था। वह बोला: माँ अपके मम्मे कितने बड़े हैं और जब मैं इनको पियूँगा तो वो और बड़े हो जाएँगे ना?
नमिता: धत बदमाश कुछ भी बकता रहता है?
नमिता सोच रही थी कि आज ही सुधाकर भी उसकी छातियों को बड़ा बड़ा बोलकर उत्तेजित हुए जा रहा था। उसने अपना सिर नीचे करके अपनी छातियों को देखा तो सोचने लगी कि सही में मोटी औरतों के दूध बड़े होते हैं। पर वह तो कहीं से भी मोटी नहीं है और फिर भी उसके दूध बहुत भारी हैं। शायद उसको पतली कमर पर ये छातियाँ ज़्यादा कामुक लगती है।
राज: माँ आपको ऑफ़िस में कोई स्टाफ़ तंग नहीं करता?
नमिता: नहीं तो।
अब वह क्या बोलती कि आज ही वह सुधाकर से चुदवा कर आ रही है।
राज: आज मैंने बहुत पढ़ाई की है अब मैं एक ब्रेक चाहता हूँ।अब मैं सीधे डिनर के बाद ही पढ़ूँगा।
नमिता: चलो ठीक है। तब जा बाहर जा कर खेल के आ जा।
राज: नहीं माँ मुझे आपके पास ही बैठना है।
नमिता हँसते हुए उठी और बर्तन किचन में रख कर आयी और सोफ़े पर बैठ गयी। राज आकर उसकी गोद में लेट गया।
अब वह उसके पेट को सहला कर नमिता से बोला: माँ एक बात पूँछुँ आप नाराज़ नहीं होना।
नमिता: नहीं होऊँगी, पूछ।
राज: माँ, आप शादी से पहले चुदायी का मज़ा ले चुकी थी क्या?
नमिता इस प्रश्न से भौंचक्की रह गयी और बोली: ये कैसा बेहूदा प्रश्न है?
राज: माँ आप बोली थी कि आप नाराज़ नहीं होंगी।
नमिता: मैं इस प्रश्न का जवाब नहीं दूँगी।
राज: इसका मतलब हुआ हाँ।माँ इसमें ग़लत क्या है? मैं भी तो चुदाई का मज़ा ले चुका हूँ। ये सब सामान्य बातें हैं आजकल।
बताओ ना माँ कौन था जिसने आपकी सील तोड़ी?
नमिता हैरानी से अपने बेटे को देखे जा रही थी और सोच रही थी कि हालात कहाँ से कहाँ आ पहुँचे हैं। आज से एक हफ़्ते पहले भी ऐसे किसी सवाल की अपेक्षा अपने बेटे से कर ही नहीं सकती थी।
नमिता: मैं अब भी यही सोचती हूँ कि मुझे इसका जवाब नहीं देना चाहिए।
राज अपनी माँ के दूध को ब्लाउस के ऊपर से ही दबाकर बोला: माँ बताओ ना किसने सबसे पहले ऐसे आपके दूध ऐसे दबाए थे और आपको पहली बार चोदा था ? ये कहते हुए उसने उसकी चूचियों को ज़ोर से दबा दिया उत्तेजना में भर के।
नमिता लाचार सी होकर बोली: आह्ह्ह्ह्ह इतनी ज़ोर से क्यों दबा रहा है दुखता है ना?
तभी राज ने अपना हाथ अपने लौड़े पर रखा और बोला: माँ देखो आपको छूने से कैसा पागल हो जाता है।
नमिता भी मस्ती में आकर उसका लौड़ा पकड़ ली और लोअर के ऊपर से ही सहलाने लगी।
राज: आऽऽऽह माँ आपका हाथ बहुत मज़ा देता है वहाँ पर।
वह नमिता के पेट को चूमते हुए बोला: माँ बताओ ना किसने चोदा था पहली बार?
नमिता अब लौड़े को मुट्ठी मैं भरके मस्ती से भरकर बोली: बेटा मेरी पहली चुदायी मेरे सगे चाचा ने की थी। तब मैं सिर्फ़ xx साल की थी और दसवीं में पढ़ती थी।
राज: सगे चाचा ने? ओह कैसे आपको पटाया था या ज़बरदस्ती की थी?
नमिता: उन्होंने मुझे फुसलाया था ।
राज: आह माँ ज़रा ज़ोर से हिलाओ ना प्लीज़ आह्ह्ह्ह्ह्ह।
नमिता ज़ोर से लोअर के ऊपर से उसका लौड़ा हिलाने लगी।
राज: कैसे फुसलाया बताओ ना? और माँ मैं लोअर उतार देता हूँ प्लीज़ नंगा होकर लौड़ा सहलाने में आपको भी मज़ा आयेगा।
यह कह के वह उठकर अपना लोअर और चड्डी उतार कर फिर से माँ की गोद में लेट गया। अब फिर से नमिता ने उसके मस्त लंड को पकड़ा और सहलाने लगी। अब नमिता की बुर भी पनिया रही थी।
वह बोली: मैं और मेरा भाई घर में रहते थे क्योंकि पापा और मम्मी दोनों टीचर थे। स्कूल के बाद हम घर में अकेले रहते थे। पापा और मम्मी का स्कूल का टाइमिंग अलग अलग था। हमारे चाचा पापा से ५ साल छोटे थे और चाचा और चाची की एक मात्र संतान उनकी लड़की थी जो मुझसे २ साल छोटी थी।
चाचा और उसका परिवार हमारे घर हमेशा आता जाता रहता था । दोनों परिवारों मेंबहुत स्नेह था।
नमिता ने महसूस किया कि राज का लंड बहुत गरम और लोहे सा सख़्त हो गया है।
नमिता: हाय गुप्ता सर कैसे हैं?
गुप्ता: अरे बढ़िया हूँ। राज के साथ बात आगे बढ़ी?
नमिता: जी सब कुछ आपके प्लान के हिसाब से हो रहा है।
गुप्ता: बढ़िया, तो फिर तो तुमको वह बहुत गरमकर देता होगा, तो ठंडी कैसे होती हो?
नमिता अभी ही तो ठंडी हुई थी। वह बोली: जी बस ऐसे ही अपने आप पर नियंत्रण रखती हूँ।
गुप्ता: अरे हम मर गयें हैं क्या, हमारे पास आ जाना हम ठंडा कर देंगे।
नमिता: जी आ जाऊँगी। एक बात तो बताइए, कि कहीं आपने सुधाकर जी को मेरे और राज के बारे में तो नहीं बता दिया है?
गुप्ता: कैसी बात कर रही हो, बिलकुल नहीं बताया है और ना हीं बताऊँगा।
नमिता : बहुत बहुत धन्यवाद। मैं नहीं चाहती कि ये बात किसी को पता चले।
गुप्ता : कभी नहीं पता चलेगी। पर तुम कब आओगी, मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है।
नमिता हँसते हुए बोली: जल्दी ही आऊँगी। और उसने फ़ोन रख दिया।
अब नमिता शांत मन से अपना काम करने लगी। लंच ब्रेक के बाद राज का फ़ोन आया। वह बोला: माँ क्या कर रही हो?
नमिता: बेटा काम कर रही हूँ। तेरी पढ़ाई कैसी चल रही है?
राज: एक बार पूरा कोर्स हो गया है। अब उसको दोहराऊँगा।
नमिता: शाबाश मेरा बहादुर बच्चा।
राज: माँ आपकी याद आ रही है। आपके दूध और चूतर दबाने का मन कर रहा है।
नमिता: धत बदमाश कहीं का। चल जब घर आऊँगी तब जो दबाना ही दबा लेना अभी पढ़ने बैठ।
राज: माँ मेरा लौड़ा अभी खड़ा है आप गंदी बातें करो ना तो मैं मूठ्ठ मार लूँगा।
नमिता : पागल हो गया है क्या ? चल फ़ोन रख।
राज: माँ मूठ्ठ मार लूँगा तो शांत होकर पढ़ सकूँगा। नहीं तो फिर ध्यान भटकेगा।
नमिता: अच्छा रुक मैं एक कोने में जाती हूँ नहीं तो कोई सुन लिया तो ग़ज़ब हो जाएगा।
नमिता एक कोने मेंजाकर बोली: हाँ बोल क्या सुनना चाहता है?
राज: माँ इसको फ़ोन सेक्स कहते हैं।
नमिता: ओह तो बोल क्या बोलूँ?
राज: मान लो मैं और आप पति पत्नी हैं और हनीमून पर गए हैं और वहाँ एक जंगल में हम दोनों अकेले हैं और मैं आपको वहीं खुले में चोदना चाहता हूँ, तो ऐसी स्तिथि में हम जो बातें और काम करेंगे , हम उसकी ही बात करेंगे।
नमिता: ओह चल ठीक है। तू शुरू कर।
राज: देखो निम्मु कितना घना जंगल है, कितना रोमांटिक लग रहा है।
नमिता: मुझे तो डर लग रहा है कि कहीं जानवर ना आ जाए।
राज: मैं आपको अपने से चिपका लेता हूँ और बोलता हूँ , निम्मु मैं हूँ ना फिर क्यों डरती हो? फिर मैं आपके होंठ चूसने लगता हूँ। माँ आप कुछ बोलो ना?
नमिता: तूने तो मेरे होंठ दबा लिए है चूमते हुए , मैं कैसे बोलूँ? हा ह हा हा । वह हँसने लगी।
राज: माँ आप हँसोगी तो कैसे मज़ा आएगा? आप आऽऽह बोल दो ना कम से कम।
नमिता: आहाह्ह्ह्ह्ह।
राज: फिर मैं आपकी चूचियाँ दबाने लगता हूँ और आपके निपल्ज़ को भी उमेठ कर आपको मस्त कर देता हूँ।
नमिता:ओह्ह्ह्ह्ह ये क्या कर रहे हो आह।
राज: निम्मु , मेरी जान क्या चूचियाँ हैं तुम्हारी, बहुत मज़ा आ रहा है । चलो अपना ब्लाउस और ब्रा खोलो , मुझे चूसना है तुम्हारे मम्मे ।
नमिता: आह रुको खोलती हूँ। लो खुल गया।
राज: निम्मु आऽऽहहह क्या मज़ा आ रहा है चूसने में तुम्हारे दुद्दु आऽऽहहह मस्त बड़े बड़े है ।
नमिता: आऽऽऽऽहहह और चूसो मेरे राजआऽऽऽऽ।
राज: आऽऽऽह अब मेरी जान निम्मु अपनी साड़ी उठाओ और उस पेड़ के सहारे खड़ी हो जाओ।
नमिता: आह लो अब डालो मेरे राजा।
राज: क्या डालूँ मेरी निम्मु ?
नमिता: आऽऽह अपना लंड और क्या? प्लीज़ डाल दो ना।
राज: लो डाल दिया आऽऽहहह क्या टाइट बुर है तुम्हारी आऽऽहहहह।
नमिता: ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह चोदो राजाआऽऽऽऽऽऽ ज़ोर से चोदोओओओओओओ
अब राज बोला: माँ मेरा झड़ रहा है आऽऽऽह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरा झड़ाआऽऽऽऽ ।
नमिता भी अपनी बुर पर हाथ फेरकर खुजायी और बोली: चल झड़ गया ना। अब पढ़ने बैठ जा।
राज: माँ आइ लव यू। आह बहुत मज़ा आया।मॉ, आप जैसे ही मुझे चोदो बोली, मेरा पानी छूटने लगा। माँ इसको RP कहते है।
नमिता: मतलब?
राज: माँ रोल प्ले मतलब कल्पना करके एक दूसरे की फ़ण्टसी को संतुष्ट करते हैं।
नमिता: ओह चल तू संतुष्ट हुआ ना । अब पढ़ाई कर।
राज: ज़रूर माँ अभी साफ़ करके पढ़ने बैठता हूँ।
नमिता ने बाई कहकर फ़ोन काट दिया।
वह अब राज की हरकतों से फिर से गरम हो गयी थी।
उसने कुर्सी पर बैठकर अपनी जाँघों को भींचा और काम में लग गयी।
शाम को जब वह घर पहुँची तो सीधे राज के कमरे की ओर गयी और वहाँ उसको बड़े ही लगन से पढ़ते देखकर बहुत ख़ुश हो गयी और बोली: मेरा प्यारा बेटा पढ़ता हुआ कितना प्यारा दिखता है!
राज ने माँ को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया और उसके होंठ चूम लिया।
नमिता ने कहा: फिर नियम तोड़े तुम?
अब राज ने उसकी गर्दन और गाल चूमे और बोला: होंठ चूमे है चूसे तो नहीं ना।
अब वह उसकी छातियाँ दबाने लगा।फिर पेट पर भी हाथ फेरने लगा। नमिता थोड़ी देर बाद बोली: चल छोड़ मुझे अब चाय बनाती हूँ।
नमिता के खड़े होते ही राज उसके चूतरों को पकड़कर दबाने लगता है। और उसकी नंगी पीठ और कमर को चूमने लगता है। नमिता उसको थोड़ी देर मज़ा लेने देती है, फिर पलटकर उसके गाल चूमकर बोलती है: चल अब छोड़, बहुत दबा लिया।
अब वह उसके नंगे पेट को चूमते जाता है और उसकी नाभि में अपनी जीभ डाल देता है।
नमिता अब गरम होने लगती है, उसका खड़ा लौड़ा पकड़कर दबाके बोली: देख तेरा फिर खड़ा हो गया। चल अब चाय पी ले और फिर इसको ठंडे पानी से धोके पढ़ने बैठ जाना।इसको अभी थोड़ी देर पहले तो फ़ोन से मैंने ठंडा किया था और तू फिर से इसको खड़ा कर बैठा।
दोनों हँसते हुए किचन की ओर चल पड़े।
राज जाकर किचन के प्लेट फ़ॉर्म में चढ़कर बैठ गया और माँ को चाय बनाते देखने लगा। फिर वह बोला: माँ आप घर पर सिर्फ़ ब्लाउस और पेटिकोट में रहा करो ना, ये साड़ी क्यों पहनती हो?
नमिता: तेरा बस चले तो मुझे नंगी ही घुमाए । मुझे अजीब लगेगा तेरे सामने बिना साड़ी के। फिर कभी कोई मेहमान आ गया तो मैं क्या करूँगी?
राज: मैं दरवाज़ा खोलूँगा मेहमान को बैठाऊँगा तब तक आप साड़ी पहन कर आ जाना।
नमिता: तेरे पास मेरी हर बात का जवाब रहता है।
राज ज़िद करते हुए बोला: माँ प्लीज़ उतार दो ना।
नमिता: मैं देख रही हूँ तू ज़िद्दी होते जा रहा है।
राज: प्लीज़ माँ उतार दो ना।
नमिता: अच्छा बाबा उतार देती हूँ पर इसके आगे अब और कोई ज़िद नहीं करना।
राज ख़ुश होकर बोला: ठीक है माँ आगे से ज़िद बंद ।
नमिता चाय लेकर टेबल पर पहुँची और फिर अपनी साड़ी खोलने लगी। साड़ी उतार कर वह ब्लाउस और पेटिकोट में क्या जँच रही थी। उसके आगे और पीछे दोनों के उभार उसको बहुत कामुक बना रहे थे।
अब वह वैसे ही टेबल पर बैठकर चाय पीने लगी। राज भी चाय पिते हुए उसके ब्लाउस के बाहर से झाँकते हुए मोटे मोटे मम्मों को देखकर मस्त हो रहा था। वह बोला: माँ अपके मम्मे कितने बड़े हैं और जब मैं इनको पियूँगा तो वो और बड़े हो जाएँगे ना?
नमिता: धत बदमाश कुछ भी बकता रहता है?
नमिता सोच रही थी कि आज ही सुधाकर भी उसकी छातियों को बड़ा बड़ा बोलकर उत्तेजित हुए जा रहा था। उसने अपना सिर नीचे करके अपनी छातियों को देखा तो सोचने लगी कि सही में मोटी औरतों के दूध बड़े होते हैं। पर वह तो कहीं से भी मोटी नहीं है और फिर भी उसके दूध बहुत भारी हैं। शायद उसको पतली कमर पर ये छातियाँ ज़्यादा कामुक लगती है।
राज: माँ आपको ऑफ़िस में कोई स्टाफ़ तंग नहीं करता?
नमिता: नहीं तो।
अब वह क्या बोलती कि आज ही वह सुधाकर से चुदवा कर आ रही है।
राज: आज मैंने बहुत पढ़ाई की है अब मैं एक ब्रेक चाहता हूँ।अब मैं सीधे डिनर के बाद ही पढ़ूँगा।
नमिता: चलो ठीक है। तब जा बाहर जा कर खेल के आ जा।
राज: नहीं माँ मुझे आपके पास ही बैठना है।
नमिता हँसते हुए उठी और बर्तन किचन में रख कर आयी और सोफ़े पर बैठ गयी। राज आकर उसकी गोद में लेट गया।
अब वह उसके पेट को सहला कर नमिता से बोला: माँ एक बात पूँछुँ आप नाराज़ नहीं होना।
नमिता: नहीं होऊँगी, पूछ।
राज: माँ, आप शादी से पहले चुदायी का मज़ा ले चुकी थी क्या?
नमिता इस प्रश्न से भौंचक्की रह गयी और बोली: ये कैसा बेहूदा प्रश्न है?
राज: माँ आप बोली थी कि आप नाराज़ नहीं होंगी।
नमिता: मैं इस प्रश्न का जवाब नहीं दूँगी।
राज: इसका मतलब हुआ हाँ।माँ इसमें ग़लत क्या है? मैं भी तो चुदाई का मज़ा ले चुका हूँ। ये सब सामान्य बातें हैं आजकल।
बताओ ना माँ कौन था जिसने आपकी सील तोड़ी?
नमिता हैरानी से अपने बेटे को देखे जा रही थी और सोच रही थी कि हालात कहाँ से कहाँ आ पहुँचे हैं। आज से एक हफ़्ते पहले भी ऐसे किसी सवाल की अपेक्षा अपने बेटे से कर ही नहीं सकती थी।
नमिता: मैं अब भी यही सोचती हूँ कि मुझे इसका जवाब नहीं देना चाहिए।
राज अपनी माँ के दूध को ब्लाउस के ऊपर से ही दबाकर बोला: माँ बताओ ना किसने सबसे पहले ऐसे आपके दूध ऐसे दबाए थे और आपको पहली बार चोदा था ? ये कहते हुए उसने उसकी चूचियों को ज़ोर से दबा दिया उत्तेजना में भर के।
नमिता लाचार सी होकर बोली: आह्ह्ह्ह्ह इतनी ज़ोर से क्यों दबा रहा है दुखता है ना?
तभी राज ने अपना हाथ अपने लौड़े पर रखा और बोला: माँ देखो आपको छूने से कैसा पागल हो जाता है।
नमिता भी मस्ती में आकर उसका लौड़ा पकड़ ली और लोअर के ऊपर से ही सहलाने लगी।
राज: आऽऽऽह माँ आपका हाथ बहुत मज़ा देता है वहाँ पर।
वह नमिता के पेट को चूमते हुए बोला: माँ बताओ ना किसने चोदा था पहली बार?
नमिता अब लौड़े को मुट्ठी मैं भरके मस्ती से भरकर बोली: बेटा मेरी पहली चुदायी मेरे सगे चाचा ने की थी। तब मैं सिर्फ़ xx साल की थी और दसवीं में पढ़ती थी।
राज: सगे चाचा ने? ओह कैसे आपको पटाया था या ज़बरदस्ती की थी?
नमिता: उन्होंने मुझे फुसलाया था ।
राज: आह माँ ज़रा ज़ोर से हिलाओ ना प्लीज़ आह्ह्ह्ह्ह्ह।
नमिता ज़ोर से लोअर के ऊपर से उसका लौड़ा हिलाने लगी।
राज: कैसे फुसलाया बताओ ना? और माँ मैं लोअर उतार देता हूँ प्लीज़ नंगा होकर लौड़ा सहलाने में आपको भी मज़ा आयेगा।
यह कह के वह उठकर अपना लोअर और चड्डी उतार कर फिर से माँ की गोद में लेट गया। अब फिर से नमिता ने उसके मस्त लंड को पकड़ा और सहलाने लगी। अब नमिता की बुर भी पनिया रही थी।
वह बोली: मैं और मेरा भाई घर में रहते थे क्योंकि पापा और मम्मी दोनों टीचर थे। स्कूल के बाद हम घर में अकेले रहते थे। पापा और मम्मी का स्कूल का टाइमिंग अलग अलग था। हमारे चाचा पापा से ५ साल छोटे थे और चाचा और चाची की एक मात्र संतान उनकी लड़की थी जो मुझसे २ साल छोटी थी।
चाचा और उसका परिवार हमारे घर हमेशा आता जाता रहता था । दोनों परिवारों मेंबहुत स्नेह था।
नमिता ने महसूस किया कि राज का लंड बहुत गरम और लोहे सा सख़्त हो गया है।