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राजू झिझकते हुए मुझे चूमना शुरू किया राजन के कहे अनुसार। जब उसने होंठ चुमें तो मैं भी उसके होंठ से चिपक गयी और अब होंठों के चुम्बन की गरमी से दोनों मस्त होने लगे।
मैंने साइड से देखा कि राजन अब खुले आम अपना लंड सहला रहे थे।
जब हम हाँफते हुए अलग हुए तो राजू अपने पापा को देखा मानो पूछ रहा हो अब क्या?
राजन : अब साड़ी का पल्ला गिरा और ब्लाउस के ऊपर से दूध दबा।
राजू ने वैसे ही किया और मेरे दोनों दूध दबाने लगा। उसके हाथों में एक मर्दाना पकड़ थी क्योंकि वह खिलाड़ी था। मैं तो मज़े से। भर गयी ।
राजन: चल अब ब्लाउस के हुक खोल दे।
राजू ने हुक खोले और राजन ने मुझे उठने का इशारा किया और मैं उठी और राजू ने ब्लाउस उतार दी। अब ब्रा में क़ैद मेरे दूध देखकर वह उनको और ज़ोर से दबाने लगा। उधर राजन ने मेरी ब्रा के हुक खोले और राजू ने मेरी ब्रा निकाल दी। अब मेरी चूचियाँ उनके सामने नंगी थीं। राजू उनको ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा। राजन ने उसे कहा: बेटा, अब निपल को ऐसे अंगूठे और ऊँगली से दबाओ । तुम्हारी मम्मी को बहुत मज़ा आयेगा।
राजू बहुत ज़ोर से मेरे निप्पल दबाने लगा। मेरी तो बुर पानी छोड़ने लगी। अब राजन बोला: यार अपनी मम्मी के दूध नहीं पीना? बचपन मेंतो मुँह ही नहीं हटाता था वहाँ से ।
राजू ने अपना मुँह नीचे किया और उसकी एक चूचि मुँह में लेकर चूसने लगा। तभी राजन भी दूसरी चुचि चूसने लगा।
आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त लग रहा था कि दोनों मर्द जिनको मैं बहुत प्यार करती हूँ मेरे दोनों दूध पी रहे हैं। मैंने उनके सिर अपनी चूचियों पर दबा लिया और मस्ती से उनसे चुचि चूसवाने लगी। फिर राजन बोला: चल अब आगे बढ़ और इस साड़ी को पेट के पास से उतार दे।
राजू ने साड़ी खोल दी और मैंने अपनी कमर उठा कर अपनी साड़ी निकालने में उसकी मदद की। अब मैं सिर्फ़ पेटिकोटऔर पैंटी में थी। राजू अब मेरे पेट और नाभि को चूमने लगा। उसके हाथ अभी भी मेरी चूचि पर थे। उधर राजन मेरे दूसरी चूचि को दबा रहा था । फिर राजन के कहने पर राजू ने मेरी पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसको नीचे को खिसकाने लगा। अब मेरी पैंटी उन दोनों के सामने थीं। राजू मेरी जाँघों पर हाथ फेरे जा रहा था। राजन ने कहा : अपने भी तो कपड़े उतार , इसे तो नंगी किए जा रहा है।
राजू ने मुस्कुरा कर अपने कपड़े खोले और उसका चौड़ा सीना और मस्कूलर बदन मुझे गरम कर गया। जल्दी ही उसने चड्डी भी उतार दी। अब उसका बड़ा सा लंड मैंने दूसरी बार देखा। इस बार काफ़ी क़रीब से देख रही थी । मेरी बुर बिलकुल गीली हो रही थी। अब मेरा हाथ अपने आप ही उसके लौड़े पर चला गया और उसे सहला कर मैं मस्ती से भर उठी। राजू की आँखें अपने लौड़े पर ही थी और वह उसे मेरे हाथ मेंदेखकर मस्त हो गया था ।
तभी राजन ने उसको कहा कि पैंटी उतार दो। अब राजू ने कम्पते हाथों से मेरी पैंटी उतार दी। मैंने कमर उठाकर उसको उतारने में मदद की। राजू की आँखें जैसे मेरी बुर पर चिपक सी गयी थी।
अब राजन ने मेरी जाँघें फैला कर राजू से कहा: देखो बेटा, ये हैं तुम्हारी जन्म स्थली। तुमने यहाँ से ही जन्म लिया था और आज तुमको अपना लौड़ा इसके अंदर डालना है जहाँ से तुम स्वयं निकले हो।
अब राजू का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था। उसके लौड़े से कामरस निकल कर मेरी उँगलियों को गीला किए जा रहा था।
फिर राजन ने मेरी बुर की फाँकों को अलग किया और बोला: देखो ये अंदर की गुलाबी जगह देखो , कितनी प्यारी लग रही है।
इसे चूसने और चाटने में भी मज़ा आता है।
अब राजन ने उसको मेरी टांगों के बीच आने को बोला। राजू मेरी टांगों के बीच आ गया और मेरी बुर को चूमने लगा।
मेरी आऽऽऽऽऽऽहहहह निकल गयी। और राजन ने मेरी चूचियाँ दबाना चालू रखा । फिर राजन के निर्देश पर राजू अपनी जीभ से मेरी गुलाबी बुर को चाटने लगा। मैं हाय्य्य्य्य्यू कहकर मस्ती से भर उठी।
अब राजन बोला: चलो अब अपनी मम्मी को चोदो।
तभी मुझे आपकी बात याद आयी और मैं राजन को बोली: तुम अपने हाथ से उसके लंड को मेरी बुर में डालो। मेरा पहला पति ही मुझे दूसरे पति से ख़ुद चुदवाएगा ।यही ठीक होगा।
राजन का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था। वह अब अपने कपड़े उतार दिया और अपना खड़ा लौड़ा सहलाने लगा। फिर वह राजू का लौड़ा पकड़कर उसने मेरी बुर में लगाया। अब राजू ने धक्का मारा और उसका पूरा लौड़ा एक ही धक्के में मेरे जड़ तक समा गया। मेरी हाऽऽय निकल गयी और थोड़ा सा दर्द भी हुआ । राजू का लंड अपने पापा के लंड से थोड़ा ज़्यादा ही मोटा ही था।
अब राजू ने चार पाँच ही धक्के मारे और ह्म्म्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा। मैं समझ गयी कि पहली बार चोद रहा है इसलिए अपनी उत्तेजना पर क़ाबू नहीं रख सका।
वह अब मेरे ऊपर से हट गया और बग़ल में लेट गया। अब राजन ने एक तौलिए से मेरी बुर साफ़ की और मुझ पर चढ़ गया और पागलों की तरह मेरी ज़बर्दस्त चुदायी करने लगा।
राजू मेरी चुदायी को बहुत ध्यान से देख रहा था उसका लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था। मैंने राजन से चुदवाते हुए ही राजू का लंड सहलाना शुरू किया राजू भी मेरी चूचि फिर से चूसने लगा।
राजन की चुदायी ने मुझे मस्त कर दिया और मैं हाय्य्य्य्य्य्य मरीइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। तभी राजन भी ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा।
मैं लस्त होकर पड़ गयी राजन भी शांत होकर लेट गया।
क़रीब पाँच मिनट के बाद मैंने देखा कि राजू फिर से मेरे ऊपर आ गया था और अपना लंड मेरी बुर में लगा रहा था। अब उसने फिर से मुझे चोदना शुरू किया। मेरी आऽऽहहह और हाय्य्य्य्य्य निकलने लगी। कमरा फ़च फ़च की आवाज़ से भर गया था। अब राजन भी उठकर हमारी चुदायी देखने लगा और मस्ती से भर कर मेरी चूचि दबाने लगा। राजू भी अब मेरे होंठ चूसने लगा । अब मैं फिर से गरम हो चुकी थी और चुदायी का मज़ा लेते हुए अपनी क़मर उछाल कर उसका साथ देने लगी। राजन बहुत ख़ुश दिख रहा था, अपनी पत्नी को अपने बेटे से चुदवा कर।
अब जल्दी ही हम दोनों आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगे।
अब राजू पूरी तरह तृप्त लग रहा था। मैं भी दो बार झड़ चुकी थी। तभी राजन मेरी चूचियाँ फिर से दबाने लगा और मैंने देखा कि उसका लौड़ा फिर से खड़ा हो चुका था। मैं हैरान रह गयी कि कहाँ हफ़्ते में मुश्किल से दो तीन बार मेरी चुदायी करने वाला यह मेरा पति आज दो बार करने का सोच रहा है। तभी वह मुझ पर चढ़ गया और फिर से चोदने लगा। मैं एक लाश की तरह पड़ी रही और वह करीब २० मिनट मेरी चुदायी करके झड़ गया। बीच में मैं भी गरम हुई और उसके साथ ही झड़ गयी।
अब हम पूरी तरह से थक गए थे और नंगे ही सो गए।
सुबह मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि वह दोनों सोए हुए हैं और उनके लंड आधे खड़े हैं। मैं बाथरूम से फ़्रेश हो कर आइ और चाय बनाकर लाई। मैंने एक मैक्सी डाल ली थी।
दोनों को उठायी तो वो अपने आप को नंगे देखकर बिलकुल ही सामान्य सा बर्ताव किए और चाय पीने लगे। फिर राजन बाथरूम गए और राजू भी अपने कमरे में जाकर फ़्रेश हो गया।
मैं किचन में नाश्ता बनाने लगी तभी वो दोनों आए और राजू मुझसे पीछे से चिपक गया और अपना लंड मेरी गाँड़ पर रगड़ने लगा ।राजन भी मेरी चूचि दबाने लगा। मैंने कहा कि ये सुबह सुबह क्या करने लगे दोनों?
राजन और राजू मुझे लेकर फिर से बेडरूम में ले गए और मेरी मैक्सी उतार दी। फिर वो दोनों भी नंगे हो गए। मैं बिस्तर पर पैर नीचे करके बैठी थी और वो दोनों अपने लौड़े मेरे सामने झुलाने लगे। मैं समझ गयी कि वो क्या चाहते हैं। मैंने अपना मुँह खोला और राजू का लंड चूसने लगी और राजन का लंड सहलाने लगी। फिर मैंने राजन का लंड चूसा और राजू का लंड सहलाने लगी। अब हम तीनो गरम हो गए थे ।
अब राजन ने मुझे चौपाया बनाया और राजू को पीछे से चोदने को बोला। राजन ख़ुद मेरे सामने आकर खड़ा हुआ और मैंने उसका लंड चूसना शुरू किया उधर राजू ने पीछे से मेरी ठुकाई शुरू कर दी। अब मैं ह्म्म्म्म्म्म ही कर पा रही थी क्योंकि मुँह में भी एक लंड घुसा हुआ था। मेरी चूचियाँ भी दोनों मसल रहे थे। अब मेरी गूँउउउउउउउउ निकलने लगी। अब मैं झड़ने लगी राजू की ज़बरदस्त चुदायी से । वह भी झड़ने लगा और जोर ज़ोर से कमर हिलाने लगा ।थोड़ी देर बाद राजन भी मेरे मुँह से अपना लंड निकाला और मेरे पीछे से आके उसने मेरी गीली बुर में अपना लंड पेल दिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। मैं हाय्य्य्य्य्य कहकर चिल्लाने लगी । वह ज़बरदस्त चुदायी कर रहा था और मेरी उइइइइइइइइ और हाय्य्य्य्य्य निकली जा रही थी ।
फिर वह भी झड़ गया और मेरी बुर में अपना रस छोड़ दिया।
अब हम सब शांत हो चुके थे । फिर राजन ऑफ़िस गया और आज से राजू भी स्कूल जाने लगा।
तो ये है मेरी कहानी अपनी दूसरी शादी की वह भी अपने बेटे से।
नमिता उसकी चूचि चूसकर बोली: ले तूने तो अपने बेटे से चुदवा भी लिया और मैं अभी भी उससे ऊँगली ही करवा रही हूँ अपनी बुर में।
दोनों हँसने लगीं ।
नमिता: चल मैं अब अपने घर जाती हूँ। तू मजे ले।
सुषमा: तू भी तो बस तीन चार दिन बाद चुदवा ही लेगी अपने बेटे से ।
नमिता हँसती हुई तय्यार होकर चली गयी अपने घर को।
मैंने साइड से देखा कि राजन अब खुले आम अपना लंड सहला रहे थे।
जब हम हाँफते हुए अलग हुए तो राजू अपने पापा को देखा मानो पूछ रहा हो अब क्या?
राजन : अब साड़ी का पल्ला गिरा और ब्लाउस के ऊपर से दूध दबा।
राजू ने वैसे ही किया और मेरे दोनों दूध दबाने लगा। उसके हाथों में एक मर्दाना पकड़ थी क्योंकि वह खिलाड़ी था। मैं तो मज़े से। भर गयी ।
राजन: चल अब ब्लाउस के हुक खोल दे।
राजू ने हुक खोले और राजन ने मुझे उठने का इशारा किया और मैं उठी और राजू ने ब्लाउस उतार दी। अब ब्रा में क़ैद मेरे दूध देखकर वह उनको और ज़ोर से दबाने लगा। उधर राजन ने मेरी ब्रा के हुक खोले और राजू ने मेरी ब्रा निकाल दी। अब मेरी चूचियाँ उनके सामने नंगी थीं। राजू उनको ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा। राजन ने उसे कहा: बेटा, अब निपल को ऐसे अंगूठे और ऊँगली से दबाओ । तुम्हारी मम्मी को बहुत मज़ा आयेगा।
राजू बहुत ज़ोर से मेरे निप्पल दबाने लगा। मेरी तो बुर पानी छोड़ने लगी। अब राजन बोला: यार अपनी मम्मी के दूध नहीं पीना? बचपन मेंतो मुँह ही नहीं हटाता था वहाँ से ।
राजू ने अपना मुँह नीचे किया और उसकी एक चूचि मुँह में लेकर चूसने लगा। तभी राजन भी दूसरी चुचि चूसने लगा।
आह्ह्ह्ह्ह्ह क्या मस्त लग रहा था कि दोनों मर्द जिनको मैं बहुत प्यार करती हूँ मेरे दोनों दूध पी रहे हैं। मैंने उनके सिर अपनी चूचियों पर दबा लिया और मस्ती से उनसे चुचि चूसवाने लगी। फिर राजन बोला: चल अब आगे बढ़ और इस साड़ी को पेट के पास से उतार दे।
राजू ने साड़ी खोल दी और मैंने अपनी कमर उठा कर अपनी साड़ी निकालने में उसकी मदद की। अब मैं सिर्फ़ पेटिकोटऔर पैंटी में थी। राजू अब मेरे पेट और नाभि को चूमने लगा। उसके हाथ अभी भी मेरी चूचि पर थे। उधर राजन मेरे दूसरी चूचि को दबा रहा था । फिर राजन के कहने पर राजू ने मेरी पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसको नीचे को खिसकाने लगा। अब मेरी पैंटी उन दोनों के सामने थीं। राजू मेरी जाँघों पर हाथ फेरे जा रहा था। राजन ने कहा : अपने भी तो कपड़े उतार , इसे तो नंगी किए जा रहा है।
राजू ने मुस्कुरा कर अपने कपड़े खोले और उसका चौड़ा सीना और मस्कूलर बदन मुझे गरम कर गया। जल्दी ही उसने चड्डी भी उतार दी। अब उसका बड़ा सा लंड मैंने दूसरी बार देखा। इस बार काफ़ी क़रीब से देख रही थी । मेरी बुर बिलकुल गीली हो रही थी। अब मेरा हाथ अपने आप ही उसके लौड़े पर चला गया और उसे सहला कर मैं मस्ती से भर उठी। राजू की आँखें अपने लौड़े पर ही थी और वह उसे मेरे हाथ मेंदेखकर मस्त हो गया था ।
तभी राजन ने उसको कहा कि पैंटी उतार दो। अब राजू ने कम्पते हाथों से मेरी पैंटी उतार दी। मैंने कमर उठाकर उसको उतारने में मदद की। राजू की आँखें जैसे मेरी बुर पर चिपक सी गयी थी।
अब राजन ने मेरी जाँघें फैला कर राजू से कहा: देखो बेटा, ये हैं तुम्हारी जन्म स्थली। तुमने यहाँ से ही जन्म लिया था और आज तुमको अपना लौड़ा इसके अंदर डालना है जहाँ से तुम स्वयं निकले हो।
अब राजू का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था। उसके लौड़े से कामरस निकल कर मेरी उँगलियों को गीला किए जा रहा था।
फिर राजन ने मेरी बुर की फाँकों को अलग किया और बोला: देखो ये अंदर की गुलाबी जगह देखो , कितनी प्यारी लग रही है।
इसे चूसने और चाटने में भी मज़ा आता है।
अब राजन ने उसको मेरी टांगों के बीच आने को बोला। राजू मेरी टांगों के बीच आ गया और मेरी बुर को चूमने लगा।
मेरी आऽऽऽऽऽऽहहहह निकल गयी। और राजन ने मेरी चूचियाँ दबाना चालू रखा । फिर राजन के निर्देश पर राजू अपनी जीभ से मेरी गुलाबी बुर को चाटने लगा। मैं हाय्य्य्य्य्यू कहकर मस्ती से भर उठी।
अब राजन बोला: चलो अब अपनी मम्मी को चोदो।
तभी मुझे आपकी बात याद आयी और मैं राजन को बोली: तुम अपने हाथ से उसके लंड को मेरी बुर में डालो। मेरा पहला पति ही मुझे दूसरे पति से ख़ुद चुदवाएगा ।यही ठीक होगा।
राजन का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था। वह अब अपने कपड़े उतार दिया और अपना खड़ा लौड़ा सहलाने लगा। फिर वह राजू का लौड़ा पकड़कर उसने मेरी बुर में लगाया। अब राजू ने धक्का मारा और उसका पूरा लौड़ा एक ही धक्के में मेरे जड़ तक समा गया। मेरी हाऽऽय निकल गयी और थोड़ा सा दर्द भी हुआ । राजू का लंड अपने पापा के लंड से थोड़ा ज़्यादा ही मोटा ही था।
अब राजू ने चार पाँच ही धक्के मारे और ह्म्म्म्म्म्म्म करके झड़ने लगा। मैं समझ गयी कि पहली बार चोद रहा है इसलिए अपनी उत्तेजना पर क़ाबू नहीं रख सका।
वह अब मेरे ऊपर से हट गया और बग़ल में लेट गया। अब राजन ने एक तौलिए से मेरी बुर साफ़ की और मुझ पर चढ़ गया और पागलों की तरह मेरी ज़बर्दस्त चुदायी करने लगा।
राजू मेरी चुदायी को बहुत ध्यान से देख रहा था उसका लौड़ा फिर से खड़ा हो गया था। मैंने राजन से चुदवाते हुए ही राजू का लंड सहलाना शुरू किया राजू भी मेरी चूचि फिर से चूसने लगा।
राजन की चुदायी ने मुझे मस्त कर दिया और मैं हाय्य्य्य्य्य्य मरीइइइइइइइइइ कहकर झड़ने लगी। तभी राजन भी ह्म्म्म्म्म्म्म कहकर झड़ने लगा।
मैं लस्त होकर पड़ गयी राजन भी शांत होकर लेट गया।
क़रीब पाँच मिनट के बाद मैंने देखा कि राजू फिर से मेरे ऊपर आ गया था और अपना लंड मेरी बुर में लगा रहा था। अब उसने फिर से मुझे चोदना शुरू किया। मेरी आऽऽहहह और हाय्य्य्य्य्य निकलने लगी। कमरा फ़च फ़च की आवाज़ से भर गया था। अब राजन भी उठकर हमारी चुदायी देखने लगा और मस्ती से भर कर मेरी चूचि दबाने लगा। राजू भी अब मेरे होंठ चूसने लगा । अब मैं फिर से गरम हो चुकी थी और चुदायी का मज़ा लेते हुए अपनी क़मर उछाल कर उसका साथ देने लगी। राजन बहुत ख़ुश दिख रहा था, अपनी पत्नी को अपने बेटे से चुदवा कर।
अब जल्दी ही हम दोनों आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह करके झड़ने लगे।
अब राजू पूरी तरह तृप्त लग रहा था। मैं भी दो बार झड़ चुकी थी। तभी राजन मेरी चूचियाँ फिर से दबाने लगा और मैंने देखा कि उसका लौड़ा फिर से खड़ा हो चुका था। मैं हैरान रह गयी कि कहाँ हफ़्ते में मुश्किल से दो तीन बार मेरी चुदायी करने वाला यह मेरा पति आज दो बार करने का सोच रहा है। तभी वह मुझ पर चढ़ गया और फिर से चोदने लगा। मैं एक लाश की तरह पड़ी रही और वह करीब २० मिनट मेरी चुदायी करके झड़ गया। बीच में मैं भी गरम हुई और उसके साथ ही झड़ गयी।
अब हम पूरी तरह से थक गए थे और नंगे ही सो गए।
सुबह मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि वह दोनों सोए हुए हैं और उनके लंड आधे खड़े हैं। मैं बाथरूम से फ़्रेश हो कर आइ और चाय बनाकर लाई। मैंने एक मैक्सी डाल ली थी।
दोनों को उठायी तो वो अपने आप को नंगे देखकर बिलकुल ही सामान्य सा बर्ताव किए और चाय पीने लगे। फिर राजन बाथरूम गए और राजू भी अपने कमरे में जाकर फ़्रेश हो गया।
मैं किचन में नाश्ता बनाने लगी तभी वो दोनों आए और राजू मुझसे पीछे से चिपक गया और अपना लंड मेरी गाँड़ पर रगड़ने लगा ।राजन भी मेरी चूचि दबाने लगा। मैंने कहा कि ये सुबह सुबह क्या करने लगे दोनों?
राजन और राजू मुझे लेकर फिर से बेडरूम में ले गए और मेरी मैक्सी उतार दी। फिर वो दोनों भी नंगे हो गए। मैं बिस्तर पर पैर नीचे करके बैठी थी और वो दोनों अपने लौड़े मेरे सामने झुलाने लगे। मैं समझ गयी कि वो क्या चाहते हैं। मैंने अपना मुँह खोला और राजू का लंड चूसने लगी और राजन का लंड सहलाने लगी। फिर मैंने राजन का लंड चूसा और राजू का लंड सहलाने लगी। अब हम तीनो गरम हो गए थे ।
अब राजन ने मुझे चौपाया बनाया और राजू को पीछे से चोदने को बोला। राजन ख़ुद मेरे सामने आकर खड़ा हुआ और मैंने उसका लंड चूसना शुरू किया उधर राजू ने पीछे से मेरी ठुकाई शुरू कर दी। अब मैं ह्म्म्म्म्म्म ही कर पा रही थी क्योंकि मुँह में भी एक लंड घुसा हुआ था। मेरी चूचियाँ भी दोनों मसल रहे थे। अब मेरी गूँउउउउउउउउ निकलने लगी। अब मैं झड़ने लगी राजू की ज़बरदस्त चुदायी से । वह भी झड़ने लगा और जोर ज़ोर से कमर हिलाने लगा ।थोड़ी देर बाद राजन भी मेरे मुँह से अपना लंड निकाला और मेरे पीछे से आके उसने मेरी गीली बुर में अपना लंड पेल दिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। मैं हाय्य्य्य्य्य कहकर चिल्लाने लगी । वह ज़बरदस्त चुदायी कर रहा था और मेरी उइइइइइइइइ और हाय्य्य्य्य्य निकली जा रही थी ।
फिर वह भी झड़ गया और मेरी बुर में अपना रस छोड़ दिया।
अब हम सब शांत हो चुके थे । फिर राजन ऑफ़िस गया और आज से राजू भी स्कूल जाने लगा।
तो ये है मेरी कहानी अपनी दूसरी शादी की वह भी अपने बेटे से।
नमिता उसकी चूचि चूसकर बोली: ले तूने तो अपने बेटे से चुदवा भी लिया और मैं अभी भी उससे ऊँगली ही करवा रही हूँ अपनी बुर में।
दोनों हँसने लगीं ।
नमिता: चल मैं अब अपने घर जाती हूँ। तू मजे ले।
सुषमा: तू भी तो बस तीन चार दिन बाद चुदवा ही लेगी अपने बेटे से ।
नमिता हँसती हुई तय्यार होकर चली गयी अपने घर को।